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Update:-72
"हम्मम ! बस मुझे इतना जानना था कि जब हर किसी की पहचान हो गई थी, तब उन कातिलों को आपने भरी अदालत में क्यों नहीं घेरा? उन्हें क्यों सजा नहीं दिलवा पाए, जबकि आपके पास चश्मदीद गवाह थे? आपके पास तो पैसा, पॉवर और रूतवा तीनों ही थे जिससे आप गलत को भी सच साबित कर सकते है, फिर इतने बड़े झाख्मों का हिसाब लेने में आप पीछे क्यों हट गए?
नंदनी सवाल पूछकर खामोश हो गई और सिन्हा जी के जवाब का इंतजार करने लगी। सिन्हा जी पास ही लगे बेंच पर नंदनी के साथ बैठे और कुछ पल की खामोशी के बाद कहने लगे…
"लोगों को भ्रम रहता है कि कोर्ट फैसले केवल बड़े आदमी के हक में में होता है और वहां कोई न्याय नहीं मिलता। जबकि सच्चाई ये है कि न्याय की अपनी एक प्रक्रिया होती है, वो इमोशन से नहीं बल्कि एविडेंस पर चलती है। हमारी कहानी सुनने में मार्मिक जरूर है लेकिन एक वकील होने के नाते केवल इतना ही कह सकता हूं कि इस घटना पर यदि मैंने कैसे भी करके उन्हें अदालत में खिंचा होता तो भी उसका कोई नतीजा नहीं निकलता।"..
"पहली बात तो ये की सरकार के रिकॉर्ड में गुरु निशी का आश्रम देहरादून के पास की एक जगह में है नैनीताल में नहीं। दूसरी बात उस आश्रम में किसी का रिकॉर्ड नहीं को कितने बच्चे वहां आश्रम में थे। अब ऐसी स्तिथि में पहले तो यह साबित करना होगा कि घटना गुरु निशी के आश्रम में हुई थी और वो देहरादून में ना होकर नैनीताल में है।"
"यदि इतनी बातें साबित भी कर दिया, तो वहां जो आग लगी थी और कुछ बच्चे मरे थे उसकी जिम्मेदारी 5 लोग लेंगे और उनको सजा मिल जाएगी। होगा ये की जिन्हे सजा मिलनी चाहिए वो बाहर घूमेंगे और हम उनके नजरों के सामने आ चुके हैं। इसलिए वो तैयारी करेंगे नए ज़ख्म देने की। रात के अंधेरे की वारदात जिसमे कई लोग सम्मिलित थे, उनमें कितनो की भी गिरफ्तारी क्यों ना हो जाए, उनका मुखिया बाहर ही रहेगा। कभी-कभी न्याय के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन न्याय जरूर मिलता है। विचारहीन कदम केवल और केवल खुद को नुक्सान देता है।"
नंदनी:- हम्मम ! शायद आपके पास उन मामलों का ज्यादा अनुभव है इसलिए आप बेहतर समझ सकते हैं। माफ़ कीजियेगा, पुराने ज़ख्म कुरेद दिए आपके।
सिन्हा जी:- कोई बात नहीं, आप का सवाल जायज था जिसे मै भी आज तक खुद से पूछते आ रहा हूं।
नंदनी:- फिलहाल जो जवाब मिल रहे है उसी से दिल बहलाने में ही समझदारी है। वक़्त हर किसी के सवाल का सही जवाब दे ही देगा, मुझे अपने पूरे परिवार पर पूरा भरोसा है।
सिन्हा जी:- मुझे भी…
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अपस्यु और ऐमी के लिए पहले से जिंदल की गाड़ी इंतजार कर रही थी। दोनों जैसे ही बाहर आए उनके आगे कार अाकर रुक गई। ऐमी कार में बैठते ही अपस्यु को खींचकर अपने करीब लाई और उसके होंठ से होंठ लगा कर चुमने लगी… अपस्यु भी उसे बाहों में भरकर किस्स करने लगा। दोनों की किस्स काफी लंबी चलती रही, किस्स के दौरान एक दूसरे के ऊपर लगातार हाथ फेरते रहे और एक दूसरे को किस्स करते रहे।
दोनों ने जब एक दूसरे को छोड़ा तब दोनो ही सीट पर सीधे होकर हांफ रहे थे। कुछ देर श्वांस सामान्य करने के बाद, इसबार अपस्यु ने ऐमी को खिंचा और उसके होंठ से होंठ लगाकर किस्स करने लगा। ये किस्स पहले वाले किस्स से भी ज्यादा लंबी चली। और जब एक दूसरे से अलग हुए तब वापस से हांफते हुए एक दूसरे को देखकर जोड़-जोड़ से हसने लगे…
ऐमी:- बहुत दिनों बाद इतने जोश में तुमने किस्स किया है अपस्यु, बात क्या है, किसे याद करते हुए किस्स किया जा रहा था हां।
अपस्यु अपने चेहरे पर शातिराना मुस्कान लाते हुए ऐमी को आंख मारा और कहने लगा…. "क्या करोगी जानकर, अब छोड़ो भी।"
ऐमी:- सिर्फ उसे याद करके इतने जोश में किस्स कर रहे थे, यदि उसी के साथ किस्स कर रहे होते जिसे याद कर रहे हो, तो क्या होता?
अपस्यु:- ये अमेरिका है बेबी, बताना पड़ेगा कि इतने हाई पैशन के बाद क्या होता है?
ऐमी:- कहो तो मै कोई चक्कर चला दूं क्या?
अपस्यु:- ना कोई चक्कर नहीं चल सकता। वो शादी-शुदा है और मुझसे कई साल बड़ी।
ऐमी:- हीहीहीहीही… फिर तो पक्का हो गया कि कोई नए रिश्तेदारों में से है। अब मिश्रा फैमिली में तो कोई भी ऐसा नहीं है मतलब मै समझ गई।
अपस्यु:- बस भी करो अब तो तुम हर बात ओपन ही करते चली जा रही। लगता है हम पहुंच गए…
कार एक बड़े से दरवाजे के अंदर घुसते हुए एक बड़ी ही आलीशान घर के सामने रुकी। ध्रुव खुद ही बाहर उनके स्वागत में खड़ा था और एक अच्छे मेजबान का फ़र्ज़ अदा करते हुए उसने कार का दरवाजा खोला और दोनों को देखकर "वेलकम" करने लगा।
जब से दोनों कार से नीचे उतरे, ध्रुव उनके तारीफों के फूल बांधते नहीं थक रहा था। दोनों को वो अपने साथ लेकर पूरा घर घुमाने लगा, अभी दोनों नीचे के हॉल में लगे सज्जो सामान को ही देख रहे थे कि इतने में मेघा भी वहां पहुंच गई।
मेघा अभी हॉल से गुजर ही रही थी कि ध्रुव ने उसे आवाज लगा दिया… "हे सीस, देखो तो कौन यहां आया है।"
मेघा उनके पास पहुंचकर अपना हाथ अपस्यु के ओर बढाती हुई… "हेल्लो अपस्यु"..
अपस्यु भी एक नजर उसके बदन पर डालते, उसके ओर हाथ बढ़ा दिया… "हेल्लो मेघा"…
मेघा:- ध्रुव क्या मै इस हैंडसम को अपने साथ के जा सकती हूं, पहली मुलाकात हमारे बीच कुछ अच्छा नहीं रहा था, शायद कुछ वक़्त साथ रहे तो उस दिन की गलतफहमी दूर हो जाए…
ध्रुव:- मेघा वो तो अपस्यु ही समझे, मुझे कोई प्रॉबलम नहीं।
अपस्यु:- मुझे भी कोई प्रॉबलम नहीं।
मेघा, ऐमी के ओर देखकर कहने लगी…. "हे स्वीटहार्ट, तुम्हारा बॉयफ्रेंड को कुछ देर के लिए साथ लिए जा रही हूं, कोई प्रॉबलम तो नही।
मेघा की बात सुनकर तीनों हसने लगे। इस तरह से सबको हंसते देख मेघा चिढ़ती हुई पूछने लगी…. "क्या हुआ जो ऐसे तुम लोग हंस रहे हो।"..
ऐमी:- दरअसल, हम दोनों गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड नहीं है।
मेघा:- व्हाटएवर, हे यूं हैंडसम कम विथ मी…
मेघा अपने ऐटिट्यूड में आगे चल रही थी और अपस्यु पीछे। तभी अपस्यु उसे पीछे से देखते हुए धीमे से सिटी बजाते हुए कहने लगा… "सुपर्ब बैक।" अपस्यु उतने ही तेज आवाज में बोला जितने में मेघा के कानो में हल्की आहट हो।
मेघा पीछे पलट कर अपने घमंड से भरे चेहरे पर अपने बेरुखे शब्दों को होटों से निकलती… "क्या कहा तुमने?"
अपस्यु:- वो तो यहां का इंटीरियर देख कर मुंह से सिटी निकल गया। क्या कर्व और शेप है इस जगह का, आई रिएली लाइक इट।
मेघा:- यह इंटरियर काफी हाई प्रोफ़ाइल है, हर कोई इस छूना तो दूर देख भी नहीं सकता।
अपस्यु:- क्लास कितनी भी हाई हो, बिना मजदूर के मेहनत के ऐसा इंटेरियर बनना संभव नहीं।
मेघा, अपनी घमंड भरे चेहरे पर घमंड भरी मुस्कान लाती हुई कहने लगी… "काफी तेज हो, कल मेरे डैड की इंप्रेस कर लिया और आज मुझे।".. दोनों एक बड़े से शीसे के कमरे में पहुंच गए थे जहां मेघा बैठती हुई अपनी बात पूरी की।
अपस्यु भी ठीक उसके पास बैठते…. "ये इंप्रेस करना मुझे नहीं आता। मुझे तो बस तोड़ना फोड़ना आता है।"..
मेघा:- हां कल देखी थी मै, तुम्हारी फाइटिंग स्टाइल गजब की है। तुम्हारे लिए एक जॉब है करोगे?
अपस्यु:- जॉब डिटेल प्लीज…
मेघा:- एक अंडरग्राऊंड फाइट करनी है, प्रोफेशन बॉक्सर के विरूद्ध।
अपस्यु:- नो रूल एरिया में लड़वाना है, वो भी मेरे घर से इतनी दूर यूएस में। कहीं मुझे मारने का प्लान तो नहीं है।
मेघा:- तुम्हे मरवाना कौन सी बड़ी बात है, वो तो कल शाम में ही हो जाता। तुम जानते हो मिस्टर अपस्यु मेरे डैड कभी किसी से माफी नहीं मांगते, तुममें कुछ तो बात उन्हें दिखी थी, फिर मैंने तुम पर नजर रखी, काफी इंप्रेसिव थे तुम। हां थोड़ी जुबान लंबी है पर हो तुम मास्टर पीस।
अपस्यु:- यहां मेरी तारीफ करने लाई थी या काम की भी बातें कर लें।
मेघा:- ये मेघा बहुत कम लोगों की तारीफ करती है मिस्टर अपस्यु तुम खुशनसीब हो, जिसे मैंने सराहा है।
अपस्यु:- तारीफ मेरे लिए कोई नई बात नहीं है, हर कोई करता है, मैं पहले से खुशनसीब हूं।
मेघा:- आई लाइक दिस ऐटिट्यूड।
अपस्यु:- जी बहुत-बहुत धन्यवाद..
मेघा:- तो क्या तुम्हारी मै हां समझूं..
अपस्यु:- पहले डील तो सेट हो जाए… कितने की बेटिंग है?..
मेघा:- 1 मिलियन यूएस डॉलर। अगर जीते तो तुम्हे तुम्हारे 2 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।
अपस्यु:- डील 5 मिलियन की करो, 4 मिलियन मेरे होंगे।
मेघा, चौंकती हुई…. "तुम्हे पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो? 50 लाख रुपए नहीं 50 लाख डॉलर लगे हैं दाव पर।
अपस्यु:- जी नहीं, मेरे 40 लाख यूएसडी लगे है और तुम्हारे 10 लाख।
मेघा, 2 ग्लास में सैंपेन डालती हुई ले आयी और एक ग्लास अपस्यु को सर्व करती हुई कहने लगी…. "तुम्हारे पैसे का सोर्स क्या है।"..
अपस्यु:- मार्केट.. 40 उठाऊंगा और 2 घंटे में उन्हें 45 लौटाऊंगा… बाकी मेरे भरोसे पर बहुत से लोग तैयार रहते हैं पैसे फेकने के लिए…
मेघा:- जितना सोची थी उससे कहीं उपर के चीज निकले… 2.5 मिलियन तुम्हारे 2.5 मिलियन मेरे। पूरे पैसे मैं लगाऊंगी, जीत गए तो मै 12.5% काटकर तुम्हे तुम्हरे पैसे दे दूंगी और यदि हार गए तो तुम मुझे 2 घंटे में 2.5 मिलियन यूएसडी लौताओगे वो भी 12% इंट्रेस्ट के साथ।
अपस्यु:- जीत तो मै जाऊंगा ही, उसकी चिंता तुम मत करो.. तुम तो बस सेलीब्रेट कैसे करना है वो सोचो।
मेघा:- जीत गए तो सेलीब्रेट भी करेंगे.. लेकिन कल पहले तुम्हे जरा अच्छे से चेक तो कर लूं।
अपस्यु:- यदि तुम्हे चेक करना है तो मै बता दूं कि मेरा फेल होना पक्का है, क्योंकि अपने से बड़ी उम्र के चेकर के साथ मै नर्वस हो जाता हूं।
मेघा:- डोंट वरी डार्लिंग, मुझे छोटे लड़कों के हैंडल करने का पूरा अनुभव है।
अपस्यु:- तो फिर ये भी तय रहा.. वैसे फाइट कब है..
मेघा:- 2 जुलाई की शाम.. तैयार रहना…
अपस्यु:- मै तो तैयार ही हूं, रिस्क तुम्हारा है, तुम तैयार रहना।
मेघा:- बिना रिस्क कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। मै भी तैयार ही हूं।
अपस्यु:- बिल्कुल सहमत। सारी बातें हो गई हो तो चलें अब..
मेघा:- हां अब चलना चाहिए। कल तैयार रहना, मुझे इंतजार करना अच्छा नहीं लगता।..
दोनों बात ख़त्म करके वापस हॉल में लौट आए। मेघा अपस्यु को छोड़कर वहां से निकाल गई, इधर ये तीनों आपस में बातें करने लगे। डिनर खत्म करने के बाद ध्रुव खुद कार ले आया दोनों को ड्रॉप करने के लिए।
ध्रुव के साथ दोनों होटल ना जाकर समुद्र किनारे आ गए और वहां के मौसम का लुफ्त उठाते दोनों वहीं बैठ गए और ध्रुव उन्हें छोड़कर वापस लौट आया। दोनों खामोश बस सामने के लहरों को देख रहे थे।
दोनों के बीच की खामोशी में जैसे कोई गहराई थी। खामोश दोनों एक दूसरे के होने को मेहसूस कर रहे थे…. "मै एक नॉर्मल लाइफ जीना चाहता हूं, जैसे आरव और लावणी जी रहे, जैसे अन्य प्रेमी युगल जी रहे।".. ऐमी का हाथ थामते हुए अपस्यु कहने लगा…
ऐमी गहरी श्वांस लेती उसे मुड़कर देखने लगी और अपस्यु के चेहरे को पढ़ते हुए पूछने लगी…. "ऐसा क्या हो गया, जो मेरा टफ हीरो टूट गया।"..
अपस्यु:- बस अंदर से कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। ऐसा लग रहा है चल रहे माहौल में तुम कहीं अकेली दूर खड़ी हो और मै हक से तुम्हारे पास भी नहीं रह सकता।
ऐमी:- जानते हो आज कुंजल क्या बोली…
अपस्यु:- क्या बोली..
ऐमी:- उसको मुझमें भाभी दिख रही है। सुनकर मुझे अच्छा लगा था।…
अपस्यु:- मुझे लगता है कुछ भी अब छिपाने की जरूरत नहीं है…
ऐमी:- भूल गए अपनी बात, हर किसी को पूरी सच्चाई नहीं बताई जा सकती। जो जितनी बातें जानेगा उतनी ही बातें सोचेगा और उतने ही बातें डिस्कस भी करेगा। ये हम सबकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। अभी जैसा चल रहा है चलने दो। रही बात अभी की तो तुम साची को लेकर परेशान हो ना..
अपस्यु:- हां.. एक मासूम लड़की की सच्ची फीलिंग हर्ट कर दिया।
ऐमी:- यहां हर किसी की हर पल फीलिंग हर्ट होती है। मुझे विश्वास है कि तुम यदि उसे समझना चाहोगे तो वो समझ जाएगी।
अपस्यु:- हिम्मत नहीं बची ऐमी, लगता है हम न्याय नहीं किसी बदले के पथ पर है, जहां जो मिला इस्तमाल करते हुए अपना काम निकाल रहे है। मेरी आत्मा टूट रही है।
ऐमी, अपस्यु का हाथ थामती उसे खड़ा की और साथ चलते हुए कहने लगी… "याद है अपस्यु हमने कभी एक दूसरे को आई लव यू नहीं कहा।..
अपस्यु मुस्कुराते हुए….. हां जानता हूं…
ऐमी:- तुमने मेरे खामोशी को मियामी से लौटते वक़्त सुना था, जब हम फ्लाइट में थे और कैजुअल रिलेशन की बात कर रहे थे।
अपस्यु:- हां याद है मुझे। ये भी याद है कि तुम मुझसे बात करने के बाद वहां के वाशरूम साइड की लॉबी के पास खड़ी होकर रोई थी।
ऐमी:- और तुमने दूर बैठकर मेरी भावनाओ को सुना था, समझा था।
अपस्यु:- अकेले सिर्फ मैंने ही पढ़ा था क्या.. तुम तो मेरी भावनाओ को ना जाने कबसे परख रही थी। बिना इजहार के ही प्यार था ना जाने कबसे, बस उसे मानने मै बहुत देर कर दिए दोनों।
दोनों बीच पर चांद से आ रही रौशनी के बीच एक दूसरे को देख रहे थे.. देखते देखते दोनों प्यार से एक दूसरे में खोते हुए एक दूसरे को चूमने लगे… ऐमी किस्स को तोड़ती अपने सर को अपस्यु के सर से लगाते हुए उसकी आखों में देखती हुई कहने कहीं….
"जैसा तुम्हे फील हो रहा है साची के लिए, ठीक वैसे ही मेरी भी फीलिंग है। मैंने एक पल के लिए सोचा की तुमने मुझ से रिश्ता तोड़ लिया.. बस उस एक पल को मैंने पूरे सिद्दत से मेहसूस की, और वो दर्द मै शायद बयां ना कर सकूं। उसका टूटा दिल मुझे भी चैन से सोने नहीं दे रही। हमने मिलकर उसे दर्द दिया है, हम मिलकर उसे खुशी भी देंगे।"….
"हम्मम ! बस मुझे इतना जानना था कि जब हर किसी की पहचान हो गई थी, तब उन कातिलों को आपने भरी अदालत में क्यों नहीं घेरा? उन्हें क्यों सजा नहीं दिलवा पाए, जबकि आपके पास चश्मदीद गवाह थे? आपके पास तो पैसा, पॉवर और रूतवा तीनों ही थे जिससे आप गलत को भी सच साबित कर सकते है, फिर इतने बड़े झाख्मों का हिसाब लेने में आप पीछे क्यों हट गए?
नंदनी सवाल पूछकर खामोश हो गई और सिन्हा जी के जवाब का इंतजार करने लगी। सिन्हा जी पास ही लगे बेंच पर नंदनी के साथ बैठे और कुछ पल की खामोशी के बाद कहने लगे…
"लोगों को भ्रम रहता है कि कोर्ट फैसले केवल बड़े आदमी के हक में में होता है और वहां कोई न्याय नहीं मिलता। जबकि सच्चाई ये है कि न्याय की अपनी एक प्रक्रिया होती है, वो इमोशन से नहीं बल्कि एविडेंस पर चलती है। हमारी कहानी सुनने में मार्मिक जरूर है लेकिन एक वकील होने के नाते केवल इतना ही कह सकता हूं कि इस घटना पर यदि मैंने कैसे भी करके उन्हें अदालत में खिंचा होता तो भी उसका कोई नतीजा नहीं निकलता।"..
"पहली बात तो ये की सरकार के रिकॉर्ड में गुरु निशी का आश्रम देहरादून के पास की एक जगह में है नैनीताल में नहीं। दूसरी बात उस आश्रम में किसी का रिकॉर्ड नहीं को कितने बच्चे वहां आश्रम में थे। अब ऐसी स्तिथि में पहले तो यह साबित करना होगा कि घटना गुरु निशी के आश्रम में हुई थी और वो देहरादून में ना होकर नैनीताल में है।"
"यदि इतनी बातें साबित भी कर दिया, तो वहां जो आग लगी थी और कुछ बच्चे मरे थे उसकी जिम्मेदारी 5 लोग लेंगे और उनको सजा मिल जाएगी। होगा ये की जिन्हे सजा मिलनी चाहिए वो बाहर घूमेंगे और हम उनके नजरों के सामने आ चुके हैं। इसलिए वो तैयारी करेंगे नए ज़ख्म देने की। रात के अंधेरे की वारदात जिसमे कई लोग सम्मिलित थे, उनमें कितनो की भी गिरफ्तारी क्यों ना हो जाए, उनका मुखिया बाहर ही रहेगा। कभी-कभी न्याय के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन न्याय जरूर मिलता है। विचारहीन कदम केवल और केवल खुद को नुक्सान देता है।"
नंदनी:- हम्मम ! शायद आपके पास उन मामलों का ज्यादा अनुभव है इसलिए आप बेहतर समझ सकते हैं। माफ़ कीजियेगा, पुराने ज़ख्म कुरेद दिए आपके।
सिन्हा जी:- कोई बात नहीं, आप का सवाल जायज था जिसे मै भी आज तक खुद से पूछते आ रहा हूं।
नंदनी:- फिलहाल जो जवाब मिल रहे है उसी से दिल बहलाने में ही समझदारी है। वक़्त हर किसी के सवाल का सही जवाब दे ही देगा, मुझे अपने पूरे परिवार पर पूरा भरोसा है।
सिन्हा जी:- मुझे भी…
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अपस्यु और ऐमी के लिए पहले से जिंदल की गाड़ी इंतजार कर रही थी। दोनों जैसे ही बाहर आए उनके आगे कार अाकर रुक गई। ऐमी कार में बैठते ही अपस्यु को खींचकर अपने करीब लाई और उसके होंठ से होंठ लगा कर चुमने लगी… अपस्यु भी उसे बाहों में भरकर किस्स करने लगा। दोनों की किस्स काफी लंबी चलती रही, किस्स के दौरान एक दूसरे के ऊपर लगातार हाथ फेरते रहे और एक दूसरे को किस्स करते रहे।
दोनों ने जब एक दूसरे को छोड़ा तब दोनो ही सीट पर सीधे होकर हांफ रहे थे। कुछ देर श्वांस सामान्य करने के बाद, इसबार अपस्यु ने ऐमी को खिंचा और उसके होंठ से होंठ लगाकर किस्स करने लगा। ये किस्स पहले वाले किस्स से भी ज्यादा लंबी चली। और जब एक दूसरे से अलग हुए तब वापस से हांफते हुए एक दूसरे को देखकर जोड़-जोड़ से हसने लगे…
ऐमी:- बहुत दिनों बाद इतने जोश में तुमने किस्स किया है अपस्यु, बात क्या है, किसे याद करते हुए किस्स किया जा रहा था हां।
अपस्यु अपने चेहरे पर शातिराना मुस्कान लाते हुए ऐमी को आंख मारा और कहने लगा…. "क्या करोगी जानकर, अब छोड़ो भी।"
ऐमी:- सिर्फ उसे याद करके इतने जोश में किस्स कर रहे थे, यदि उसी के साथ किस्स कर रहे होते जिसे याद कर रहे हो, तो क्या होता?
अपस्यु:- ये अमेरिका है बेबी, बताना पड़ेगा कि इतने हाई पैशन के बाद क्या होता है?
ऐमी:- कहो तो मै कोई चक्कर चला दूं क्या?
अपस्यु:- ना कोई चक्कर नहीं चल सकता। वो शादी-शुदा है और मुझसे कई साल बड़ी।
ऐमी:- हीहीहीहीही… फिर तो पक्का हो गया कि कोई नए रिश्तेदारों में से है। अब मिश्रा फैमिली में तो कोई भी ऐसा नहीं है मतलब मै समझ गई।
अपस्यु:- बस भी करो अब तो तुम हर बात ओपन ही करते चली जा रही। लगता है हम पहुंच गए…
कार एक बड़े से दरवाजे के अंदर घुसते हुए एक बड़ी ही आलीशान घर के सामने रुकी। ध्रुव खुद ही बाहर उनके स्वागत में खड़ा था और एक अच्छे मेजबान का फ़र्ज़ अदा करते हुए उसने कार का दरवाजा खोला और दोनों को देखकर "वेलकम" करने लगा।
जब से दोनों कार से नीचे उतरे, ध्रुव उनके तारीफों के फूल बांधते नहीं थक रहा था। दोनों को वो अपने साथ लेकर पूरा घर घुमाने लगा, अभी दोनों नीचे के हॉल में लगे सज्जो सामान को ही देख रहे थे कि इतने में मेघा भी वहां पहुंच गई।
मेघा अभी हॉल से गुजर ही रही थी कि ध्रुव ने उसे आवाज लगा दिया… "हे सीस, देखो तो कौन यहां आया है।"
मेघा उनके पास पहुंचकर अपना हाथ अपस्यु के ओर बढाती हुई… "हेल्लो अपस्यु"..
अपस्यु भी एक नजर उसके बदन पर डालते, उसके ओर हाथ बढ़ा दिया… "हेल्लो मेघा"…
मेघा:- ध्रुव क्या मै इस हैंडसम को अपने साथ के जा सकती हूं, पहली मुलाकात हमारे बीच कुछ अच्छा नहीं रहा था, शायद कुछ वक़्त साथ रहे तो उस दिन की गलतफहमी दूर हो जाए…
ध्रुव:- मेघा वो तो अपस्यु ही समझे, मुझे कोई प्रॉबलम नहीं।
अपस्यु:- मुझे भी कोई प्रॉबलम नहीं।
मेघा, ऐमी के ओर देखकर कहने लगी…. "हे स्वीटहार्ट, तुम्हारा बॉयफ्रेंड को कुछ देर के लिए साथ लिए जा रही हूं, कोई प्रॉबलम तो नही।
मेघा की बात सुनकर तीनों हसने लगे। इस तरह से सबको हंसते देख मेघा चिढ़ती हुई पूछने लगी…. "क्या हुआ जो ऐसे तुम लोग हंस रहे हो।"..
ऐमी:- दरअसल, हम दोनों गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड नहीं है।
मेघा:- व्हाटएवर, हे यूं हैंडसम कम विथ मी…
मेघा अपने ऐटिट्यूड में आगे चल रही थी और अपस्यु पीछे। तभी अपस्यु उसे पीछे से देखते हुए धीमे से सिटी बजाते हुए कहने लगा… "सुपर्ब बैक।" अपस्यु उतने ही तेज आवाज में बोला जितने में मेघा के कानो में हल्की आहट हो।
मेघा पीछे पलट कर अपने घमंड से भरे चेहरे पर अपने बेरुखे शब्दों को होटों से निकलती… "क्या कहा तुमने?"
अपस्यु:- वो तो यहां का इंटीरियर देख कर मुंह से सिटी निकल गया। क्या कर्व और शेप है इस जगह का, आई रिएली लाइक इट।
मेघा:- यह इंटरियर काफी हाई प्रोफ़ाइल है, हर कोई इस छूना तो दूर देख भी नहीं सकता।
अपस्यु:- क्लास कितनी भी हाई हो, बिना मजदूर के मेहनत के ऐसा इंटेरियर बनना संभव नहीं।
मेघा, अपनी घमंड भरे चेहरे पर घमंड भरी मुस्कान लाती हुई कहने लगी… "काफी तेज हो, कल मेरे डैड की इंप्रेस कर लिया और आज मुझे।".. दोनों एक बड़े से शीसे के कमरे में पहुंच गए थे जहां मेघा बैठती हुई अपनी बात पूरी की।
अपस्यु भी ठीक उसके पास बैठते…. "ये इंप्रेस करना मुझे नहीं आता। मुझे तो बस तोड़ना फोड़ना आता है।"..
मेघा:- हां कल देखी थी मै, तुम्हारी फाइटिंग स्टाइल गजब की है। तुम्हारे लिए एक जॉब है करोगे?
अपस्यु:- जॉब डिटेल प्लीज…
मेघा:- एक अंडरग्राऊंड फाइट करनी है, प्रोफेशन बॉक्सर के विरूद्ध।
अपस्यु:- नो रूल एरिया में लड़वाना है, वो भी मेरे घर से इतनी दूर यूएस में। कहीं मुझे मारने का प्लान तो नहीं है।
मेघा:- तुम्हे मरवाना कौन सी बड़ी बात है, वो तो कल शाम में ही हो जाता। तुम जानते हो मिस्टर अपस्यु मेरे डैड कभी किसी से माफी नहीं मांगते, तुममें कुछ तो बात उन्हें दिखी थी, फिर मैंने तुम पर नजर रखी, काफी इंप्रेसिव थे तुम। हां थोड़ी जुबान लंबी है पर हो तुम मास्टर पीस।
अपस्यु:- यहां मेरी तारीफ करने लाई थी या काम की भी बातें कर लें।
मेघा:- ये मेघा बहुत कम लोगों की तारीफ करती है मिस्टर अपस्यु तुम खुशनसीब हो, जिसे मैंने सराहा है।
अपस्यु:- तारीफ मेरे लिए कोई नई बात नहीं है, हर कोई करता है, मैं पहले से खुशनसीब हूं।
मेघा:- आई लाइक दिस ऐटिट्यूड।
अपस्यु:- जी बहुत-बहुत धन्यवाद..
मेघा:- तो क्या तुम्हारी मै हां समझूं..
अपस्यु:- पहले डील तो सेट हो जाए… कितने की बेटिंग है?..
मेघा:- 1 मिलियन यूएस डॉलर। अगर जीते तो तुम्हे तुम्हारे 2 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।
अपस्यु:- डील 5 मिलियन की करो, 4 मिलियन मेरे होंगे।
मेघा, चौंकती हुई…. "तुम्हे पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो? 50 लाख रुपए नहीं 50 लाख डॉलर लगे हैं दाव पर।
अपस्यु:- जी नहीं, मेरे 40 लाख यूएसडी लगे है और तुम्हारे 10 लाख।
मेघा, 2 ग्लास में सैंपेन डालती हुई ले आयी और एक ग्लास अपस्यु को सर्व करती हुई कहने लगी…. "तुम्हारे पैसे का सोर्स क्या है।"..
अपस्यु:- मार्केट.. 40 उठाऊंगा और 2 घंटे में उन्हें 45 लौटाऊंगा… बाकी मेरे भरोसे पर बहुत से लोग तैयार रहते हैं पैसे फेकने के लिए…
मेघा:- जितना सोची थी उससे कहीं उपर के चीज निकले… 2.5 मिलियन तुम्हारे 2.5 मिलियन मेरे। पूरे पैसे मैं लगाऊंगी, जीत गए तो मै 12.5% काटकर तुम्हे तुम्हरे पैसे दे दूंगी और यदि हार गए तो तुम मुझे 2 घंटे में 2.5 मिलियन यूएसडी लौताओगे वो भी 12% इंट्रेस्ट के साथ।
अपस्यु:- जीत तो मै जाऊंगा ही, उसकी चिंता तुम मत करो.. तुम तो बस सेलीब्रेट कैसे करना है वो सोचो।
मेघा:- जीत गए तो सेलीब्रेट भी करेंगे.. लेकिन कल पहले तुम्हे जरा अच्छे से चेक तो कर लूं।
अपस्यु:- यदि तुम्हे चेक करना है तो मै बता दूं कि मेरा फेल होना पक्का है, क्योंकि अपने से बड़ी उम्र के चेकर के साथ मै नर्वस हो जाता हूं।
मेघा:- डोंट वरी डार्लिंग, मुझे छोटे लड़कों के हैंडल करने का पूरा अनुभव है।
अपस्यु:- तो फिर ये भी तय रहा.. वैसे फाइट कब है..
मेघा:- 2 जुलाई की शाम.. तैयार रहना…
अपस्यु:- मै तो तैयार ही हूं, रिस्क तुम्हारा है, तुम तैयार रहना।
मेघा:- बिना रिस्क कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। मै भी तैयार ही हूं।
अपस्यु:- बिल्कुल सहमत। सारी बातें हो गई हो तो चलें अब..
मेघा:- हां अब चलना चाहिए। कल तैयार रहना, मुझे इंतजार करना अच्छा नहीं लगता।..
दोनों बात ख़त्म करके वापस हॉल में लौट आए। मेघा अपस्यु को छोड़कर वहां से निकाल गई, इधर ये तीनों आपस में बातें करने लगे। डिनर खत्म करने के बाद ध्रुव खुद कार ले आया दोनों को ड्रॉप करने के लिए।
ध्रुव के साथ दोनों होटल ना जाकर समुद्र किनारे आ गए और वहां के मौसम का लुफ्त उठाते दोनों वहीं बैठ गए और ध्रुव उन्हें छोड़कर वापस लौट आया। दोनों खामोश बस सामने के लहरों को देख रहे थे।
दोनों के बीच की खामोशी में जैसे कोई गहराई थी। खामोश दोनों एक दूसरे के होने को मेहसूस कर रहे थे…. "मै एक नॉर्मल लाइफ जीना चाहता हूं, जैसे आरव और लावणी जी रहे, जैसे अन्य प्रेमी युगल जी रहे।".. ऐमी का हाथ थामते हुए अपस्यु कहने लगा…
ऐमी गहरी श्वांस लेती उसे मुड़कर देखने लगी और अपस्यु के चेहरे को पढ़ते हुए पूछने लगी…. "ऐसा क्या हो गया, जो मेरा टफ हीरो टूट गया।"..
अपस्यु:- बस अंदर से कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। ऐसा लग रहा है चल रहे माहौल में तुम कहीं अकेली दूर खड़ी हो और मै हक से तुम्हारे पास भी नहीं रह सकता।
ऐमी:- जानते हो आज कुंजल क्या बोली…
अपस्यु:- क्या बोली..
ऐमी:- उसको मुझमें भाभी दिख रही है। सुनकर मुझे अच्छा लगा था।…
अपस्यु:- मुझे लगता है कुछ भी अब छिपाने की जरूरत नहीं है…
ऐमी:- भूल गए अपनी बात, हर किसी को पूरी सच्चाई नहीं बताई जा सकती। जो जितनी बातें जानेगा उतनी ही बातें सोचेगा और उतने ही बातें डिस्कस भी करेगा। ये हम सबकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। अभी जैसा चल रहा है चलने दो। रही बात अभी की तो तुम साची को लेकर परेशान हो ना..
अपस्यु:- हां.. एक मासूम लड़की की सच्ची फीलिंग हर्ट कर दिया।
ऐमी:- यहां हर किसी की हर पल फीलिंग हर्ट होती है। मुझे विश्वास है कि तुम यदि उसे समझना चाहोगे तो वो समझ जाएगी।
अपस्यु:- हिम्मत नहीं बची ऐमी, लगता है हम न्याय नहीं किसी बदले के पथ पर है, जहां जो मिला इस्तमाल करते हुए अपना काम निकाल रहे है। मेरी आत्मा टूट रही है।
ऐमी, अपस्यु का हाथ थामती उसे खड़ा की और साथ चलते हुए कहने लगी… "याद है अपस्यु हमने कभी एक दूसरे को आई लव यू नहीं कहा।..
अपस्यु मुस्कुराते हुए….. हां जानता हूं…
ऐमी:- तुमने मेरे खामोशी को मियामी से लौटते वक़्त सुना था, जब हम फ्लाइट में थे और कैजुअल रिलेशन की बात कर रहे थे।
अपस्यु:- हां याद है मुझे। ये भी याद है कि तुम मुझसे बात करने के बाद वहां के वाशरूम साइड की लॉबी के पास खड़ी होकर रोई थी।
ऐमी:- और तुमने दूर बैठकर मेरी भावनाओ को सुना था, समझा था।
अपस्यु:- अकेले सिर्फ मैंने ही पढ़ा था क्या.. तुम तो मेरी भावनाओ को ना जाने कबसे परख रही थी। बिना इजहार के ही प्यार था ना जाने कबसे, बस उसे मानने मै बहुत देर कर दिए दोनों।
दोनों बीच पर चांद से आ रही रौशनी के बीच एक दूसरे को देख रहे थे.. देखते देखते दोनों प्यार से एक दूसरे में खोते हुए एक दूसरे को चूमने लगे… ऐमी किस्स को तोड़ती अपने सर को अपस्यु के सर से लगाते हुए उसकी आखों में देखती हुई कहने कहीं….
"जैसा तुम्हे फील हो रहा है साची के लिए, ठीक वैसे ही मेरी भी फीलिंग है। मैंने एक पल के लिए सोचा की तुमने मुझ से रिश्ता तोड़ लिया.. बस उस एक पल को मैंने पूरे सिद्दत से मेहसूस की, और वो दर्द मै शायद बयां ना कर सकूं। उसका टूटा दिल मुझे भी चैन से सोने नहीं दे रही। हमने मिलकर उसे दर्द दिया है, हम मिलकर उसे खुशी भी देंगे।"….