Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 13 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

फ्रेंड्स एक्साम्स से पहले 3-4 उपदटेस देने का सोचा tha...Lekin अभी लग रहा है ये पॉसिबल नहीं hai...Revision hi बाकी है एक्साम्स के liye...Lekin वो भी जितना सोचा था उससे ज्यादा है.

एग्जाम ठीक दो हफ्ते बाद hai...Aur उसी हफ्ते का फ्राइडे ख़त्म हो jaayega...Fir एक्साम्स की प्रेशर से बिलकुल फ्री हो jaaunga...Baaki स्टडी प्रेशर तो रहेगा hi :डी

एक्साम्स के बाद 3-4 दिन से ज्यादा गैप ना लेने की पूरी कोशिश karunga...Agar ले भी लिया तो तिमली अपडेट के लिए प्रेशर देने की आपकी जिम्मेदारी. :अप्प्रोवे:
 
अपडेट 68 [Recap]

क्या सोच रहे हो?

सुमित को लंच टाइम में अकेले देख मेघा ने पूछा.

सुमित:- Soch...Abb सिर्फ सोच hi तो बाकी है.

मुस्कुरा कर सुमित ने जवाब दिया.

मेघा:- आज लंच का कोई प्लान नहीं है?

सुमित:- Nahi...Tum jaao...Warna फिर लेट हो जाएगा.

मेघा:- आज कोई व्रत है?

सुमित:- Vrat...Haan कह सकती ho...Kabhi कभी...

सुमित इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले.

विकाश:- मई ी ज्वाइन?

सुमित बस विकाश की तरफ देखता है लेकिन कुछ कहता नहीं है.

विकाश:- डिस्टर्ब तो नहीं कर दिया? कोई सीरियस बात चल रहा था क्या?

मेघा:- अरे नहीं.

विकाश:- या फिर कोई प्राइवेट बातें?

सुमित:- प्राइवेट बातें चार दीवारी के बिच होता hai...Naa की सबके सामने ऐसे खुले आसमान में.

विकाश:- ये भी सही है.

सुमित:- चल bata...Kya काम है? फ़ालतू के काम के लिए तो तेरे पास कोई फुर्सत मिलेगा तो नहीं.

विकाश:- हाँ काम तो है.

सुमित:- और वो काम पढ़ाई के अलावा होना चाहिए.

विकाश:- Afsosh...Padhai रिलेटेड hi काम है.

सुमित:- अब्ब तो बक्श दे yaar...Bahut मुश्किल से इसा 3 घंटे की घुटन से राहत मिला hai...Aur तू फिर उसी दलदल में धकेल रहा है.

विकाश:- अभी की बात नहीं कर रहा hun...Soch रहा था बाद में लिहरारी में साथ में पढ़ेंगे.

सुमित:- किस गृह का नाम लिया तूने अभी?

विकाश:- गृह

सुमित:- कुछ तो कह रहा tha...Kahi बैठ कर पढ़ना है?

विकाश:- Library...Lekin ये गृह कैसे?

सुमित:- जहा पर एलियन रहते है उस जगह को क्या कहना चाहिए?

दो बार hi लाइब्रेरी गया हूँ बुक्स lene...Waha का जो हालत देखा बता नहीं sakta...Jald hi रीलीज़ हो गया ये स्कीम मेरे लिए नहीं है. :ओहनो:

विकाश:- कुछ ज्यादा hi बुराई कर रहा है लाइब्रेरी ka...Har एक बुक मिल जाता hai...Padhne के लिए भी बहुत अच्छा एनवायरनमेंट hai...Har फैसिलिटी अवेलेबल है.

सुमित:- हाँ कमी है तो सिर्फ बीएड की? :हम्म:

विकाश:- क्या मतलब?

सुमित:- पढ़ाई के बाद जो गहरी नींद आता hai...Uss आनंद का बयान शब्दों में नहीं कर सकता hun...Aur बीएड ना होने की वजह से सारा मजा खिड़किडा हो जाता है.

इस बार विकाश कुछ नहीं बोलै.

सुमित:- इन शार्ट, ी ऍम नॉट लाइब्रेरी मटेरियल.

विकाश:- आउट मेघा, तुम?

उम्मीद भरी आवाज में विकाश ने पूछा.

मेघा:- सुमित से थोड़ा jyada...Alliens से बहुत काम. :lol1:

सुमित:- ऐसे दुसरो को भी पढ़ने के लिए मोटीवेट करेगा तो तेरा hi टोपर की कुर्शी खतरे में आ जाएगा.

विकाश:- टॉप करने से ज्यादा नॉलेज जरुरी है.

सुमित:- पहली बार समझदारी की बात किया है तूने.

विकाश:- आज तक पढ़ाई में कुछ कमी महसूस किया है तो ग्रुप डिस्कशन ki...Isse क्या मिस कर रहा हूँ और क्या गलत पढ़ रहा हूँ ये भी पता चलेगा और दोस्तों के साथ पढ़ने से पढ़ने में और भी मन लगा रहेगा.

सुमित:- तब तो गलत सर्किल ज्वाइन कर रहा है.

विकाश:- तुम दोनों पढ़ने में बहुत अच्छे ho...Fir कैसे गलत फ्रेंड सर्किल है ये?

सुमित:- आज पहली बार टोपर को बैक बेंचेर का तारीफ़ करते सुना है.

विकाश:- मार्क्स doesn't ऑलवेज रिफ्लेक्ट नॉलेज एंड टैलेंट...

विकाश अब्ब आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

सुमित:- वाह अब्ब इंग्लिश में भी तारीफ़ :तूहैप्पी: मेघा सच में तुम लकी हो मेरे liye...Aaj कॉलेज में सबसे पहले तुम्हे hi देखा था.

विकाश को समझ में नहीं आ रहा था सुमित उसकी बात को सीरियसली ले भी रहा है या नहीं.

विकाश:- क्या सोचा फिर?

सुमित:- चल ये भी तरय करके देखते hai...Topper का पढ़ने की तरीका और टाइम table...Try करने में क्या प्रॉब्लम है.

फिर सुमित मेघा की तरफ देखते हुए.

सुमित:- आज व्रत मेरा है तुम्हारा नहीं...10 मिनट बाकी hai...Jaldi चलो.

फिर तीनो कैंटीन की तरफ जाते है.

मेघा:- तुम भी?

सुमित:- हाँ कुछ काम याद आ गया.

मेघा और विकाश एक टेबल में बैठते hai...Sumit 5 टेबल आगे जा कर एक लड़के के सर में पीछे से मारता है और.

सुमित:- क्या हाल चाल है लोवेबिरदस? अपने में hi लगे रहते हो.

कीर्ति:- कुछ भी.

सुमित:- जो दिख रहा है वो बोल रहा hun...Evidence बेस्ड.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं बोलती.

राज:- भैया आप यहाँ?

सुमित:- अब्ब ये मत बोलना की यहाँ भी डिस्टर्ब कर रहा हूँ.

राज:- अरे nahi...Kaisi बात कर रहे है आप?

सुमित:- सब पता है mujhe...Pehle प्राइवेसी के लिए रूम से निकलवा दिया और अब्ब यहाँ से भी भगा रहा है. :डी

राज:- Nahi...Aap गलत सोच...

सुमित:- कुछ ज्यादा hi सीरियस hai...Nahi सुधरेगा तू.

सुमित ने हँसते हुए कहा तो राज भी चुप हो गया.

राज:- एक बात पूछना था आपसे.

सुमित:- 100 बात puch...Lekin टाइम 5 मिनट hi बाकी है अब्ब.

राज:- जब आप मेरा लव मटर इतनी आसानी से सोल्वे कर सकते है तो अपना प्यार को मनाने के लिए इतना वक्त क्यों लग रहा है?

कीर्ति:- हाँ ये सवाल मेरा भी hai...Le चलो तुम्हारे कीर्ति के paas...Acche से समझा दूंगी.

सुमित:- कोई फायदा नहीं.

कीर्ति:- ऐसे कैसे कोई फायदा nahi...Kabhi कभी जरुरत होता है तो रेअलिज़तिओन ki...Jaise तुमने मुझे रीलीज़ करवाया की मई गलत hun...Aise hi कीर्ति को रीलीज़ होगा तो वो जरूर समझेगी.

सुमित:- अगर मई ये कहु की वो समझना hi नहीं चाहती तो?

कीर्ति:- साफ़ बोलो.

सुमित:- जब तुम दोनों को पहली बार देखा तो समझ गया की राज के पास ज्यादा ऑप्शन नहीं है तुम्हे समझाने की.

तुम्हे देखा तो पता चला बहुत नाराज हो तुम राज se...Ek उम्मीद तुम्हे भी था की राज सुधर jaaye...Aisa नहीं था की तुम राइ से बिलकुल भी प्यार नहीं करती और उससे कोई मौका नहीं देना चाहती.

लेकिन मेरा केस थोड़ा अलग hai...Jo नफरत ग़लतफहमी से सुरु हुआ था वो ग़लतफहमी अब्ब नहीं hai...Kirti भी जानती है की मैंने उससे धोखा नहीं दिया.

लेकिन अब्ब उससे मुझसे कोई प्यार भी नहीं hai...Jitna हो सके उतना अवॉयड कर रही hai...Realization भी किस बात की? उससे अच्छे से रीलीज़ है की वो मुझसे प्यार बिलकुल भी नहीं करती.

इस बात पर राज और कीर्ति भी कुछ नहीं बोले.

कुछ देर बाद.

कीर्ति:- तो तुम क्यों लगे हो उसके पीछे? उससे भूल जाओ और आगे badho...Tum उससे अच्छा hi डेसेर्वे करते हो.

सुमित:- कल मैंने 3 सिगरेट पीया था?

कीर्ति:- क्या मतलब?

सुमित:- और दारु 3 दिन पहले.

कीर्ति और राज दोनों की hi सर के ऊपर से जा रहा था सुमित की बात.

सुमित:- कुछ हफ्ते पहले तक दिन में 20 से 30 सिगरेट्स आराम से फंक लेता था.

दोनों hi अभी तक समझने की कोशिश कर रहे थे सुमित की baat...Muskura कर सुमित ने कहना सुरु किया.

सुमित:- ये दारु और सिगरेट यूँही बदनाम hai...Asli नशा तो इश्क़ hai...Jo भुलाये नहीं bhulti...Vakt के साथ और भी गहरा हो जाता है.

सिगरेट और दारु तो आसानी से छूट रहा है लेकिन ये Ishq...Marte दम तक साथ नहीं छोड़ेगा.

राज:- लेकिन?

सुमित:- टाइम उप...5 मिनट ख़त्म आउट क्लास का वक्त शुरू.

इतना कह कर सुमित वह से क्लास के लिए निकल गया.

दूसरी तरफ सुमित के पापा स्कूल ख़त्म होते hi सीधे अपने भाई की घर की तरफ निकल जाते hai...Chehra का भाव साफ़ बता रहा था की कुछ ज्यादा hi जरुरी बातें करने जा रहे है.
 
1 मंथ टाइम हो गया hai...Issi लिए पोस्ट किया था रिकैप के liye...Update आधा लिख चूका हूँ और काफी टाइम हो चूका है इस लिए अभी लिखने में थोड़ा मुश्किल हो रहा hai...Abhi अनवांटेड पार्ट्स से बचना चाहता हूँ और थोड़ा इंटरेस्टिंग तरीके से लिखना चाहता हूँ ताकि सब फिर से स्टोरी से कनेक्ट हो पाए.

नेक्स्ट अपडेट कल तक आ जाएगा और अब्ब ज्यादा दिन के गैप नहीं होंगे. :तुम्बुप:
 
अपडेट 69

इतने जल्दी अपने भैया के आने की तो एक्सपेक्ट नहीं कर रहे थे आरव के पापा.

ा. डैड:- भैया आप?

सुमित के पापा कुछ जवाब नहीं dete...Haaw भाव साफ़ दिखा रहा था की वो कुछ सोच रहे hai...Jo उनके भाई को थोड़ा हैरानी में दाल रहा था.

ा. डैड:- कुछ काम था?

स. डैड:- काम? बेहतर शब्द शायद फ़र्ज़ होगा?

ा. डैड:- मई नहीं समझा.

स. डैड:- बात यही hai...Tu या तो बात समझता hi नहीं है या फिर बहुत लेट से समझता है.

ा. डैड:- खुल कर बताइये?

दोनों के बिच हो रही गंभीर बातों ने पास में hi बैठे आरव और उसकी माँ का भी ध्यान आकर्षण किया.

स. डैड:- बात सुमित से रिलेटेड है.

ये सुनते hi आरव की पापा थोड़ा हंसने लगते है और साथ में आरव भी.

ा. डैड:- समझ सकता हु bhaiya...Aap की pareshaani...Jab बीटा नालायक हो तो बाप को परेशानी तो होता hi hai...Normal बात है ये.

स. डैड:- फिर भी गलत बात hi समझेगा. :डोह:

ा. डैड:- क्या मतलब? आप इंकार नहीं कर सकते है की सुमित नालायक है.

स. डैड:- अच्छा naalayak...Chal नालायक का मतलब बता.

ा. डैड:- सुमित को hi देख lijiye...Khud पता चल jaayega...Nikamma, लूज़र, बेवड़ा और एक गैर जिम्मेदार स्टूडेंट जो अगर डॉक्टर बन भी गया तो न जाने कितने मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ करेगा.

और अफसोश की बात ये है भैया की आप सच्चाई देखते हुए भी नजर अंदाज कर देते hai...Bhuliye मत आँख बंद कर लेने से सूरज गायब नहीं हो जाता.

स. डैड:- अरे अरे इतना तारीफ़ भी मत कर.

ा. डैड:- पता नहीं आप किसी बात को सीरियसली लेंगे भी या नहीं? आज भी वही घमंड, वही jidd...Aur यही बात सुमित में भी देख रहा hun...Aisa लगता है इतिहास खुद को दोहरा रहा hai...Kal आप थे और आज सुमित? कल आपका घमंड टूटा था और अब्ब सुमित का टूट रहा hai...Galti से कल आपने कुछ नहीं सीखा था और ना सुमित सिख रहा है?

स. डैड:- (हँसते हुए) अब्ब मुझ में पहुँच gaya...Aur क्या कह रहा tha...Mera घमंड टूटा tha...Kis बात का? बुढ़ापे में शायद यादास्त कमजोर होने लगा hai...Jara याद दिला.

ा. डैड:- आपका सपना? जो कभी डॉक्टर बनने का हुआ करता tha...Bahut म्हणत करने के बाद पता चला की ये आपके औकात के बाहर hai...Aur वही सपना आज आप सुमित के जरिये पूरा करना चाहते hai...Galat नहीं होगा ये कहना की आप सुमित पर ये थोप रहे है.

स. डैड:- क्या कहा तूने? औकात? अगर मैंने तुझे तेरा hi औकात दिखा दिया तो? चल chhod...Ye काम फिर kabhi...Abhi कुछ और काम के लिए आया हूँ.

आरव:- बड़े Papa...Thoda तमीज से.

एक नजर सुमित के पापा आरव की और देखते है.

स. डैड:- बीटा मुझे याद नहीं आ रहा है मैंने तुझे आखिरी बार कब दांत लगाया था या फिर कब गुस्सा हुआ tha...Sumit और तुझ में ज्यादा फर्क नहीं समझता hun...Dono hi अभी बच्चे hi ho...Raasta से भटक गए तो प्यार से सही राष्ट पर लाऊंगा अगर फिर भी नहीं माने तो मजबूरन शख्त होना padega...Jiska दर्शन ना हो तो hi बेहतर है.

ज्यादा जाना है तो अपने पापा से puchna...Aur बड़ो का एक प्रबचन भी देता hu....Bado की बीच में छोटे को इस तरह बोलना सोभा नहीं देता.

ा. डैड:- आप कुछ बात करने आये थे? सुमित के बारे में?

स. डैड:- अरे haan...Baato के बिच में भूल hi गया.

अभी सुमित का हाल पहले जैसा नहीं hai...Thoda परेशां hai...Thoda टूटा hai...Koshish कर रहा हूँ एक ऐसे माहौल बनाने की जिसमें वो खुल कर पहले की तरह jiye...Bina किसी दवाब और परेशानी के अपने जिंदगी को जिस तरह जीना चाहते है खुल कर जिए.

रास्ता में हर मुशीबत और रुकावट के सामने दत्त कर खड़ा रहे ना सिर्फ आगे खड़ा रहे बल्कि आत्मविश्वाश के साथ आगे badhe...Aur साफ़ साफ़ कहा है मैंने उससे की अगर कोई काटा बन जाये तो उस काटे को कुचल कर आगे बढ़ने की.

ा. डैड:- आपका मतलब है की...

स. डैड:- सही सोच रहा है.

ा. डैड:- मतलब आप मेरे सामने गिड़गिड़ा रहे है की मई सुमित के सामने न aau...Warna वो परेशान हो jaayega...Itna लाचार तो कभी नहीं देखा था भैया आप को.

स. डैड:- गिड़गिड़ा नहीं रहा hu...Satark करने आया हूँ की बाद में मेरे सामने आ कर मत गिड़गिड़ाना की सुमित मेरा इज़्ज़त नहीं करता hai...Sabke सामने मुझे बेइज़्ज़त कर दिया वगैरह वगैरह.

गिव रेस्पेक्ट एंड टेक रेस्पेक्ट एंड लाइव योर लाइफ तो fullest...Yahi समझा कर आया हूँ सुमित को.

बाकी तेरा marji...Jab भी सुमित के पास जाना है तो जा और बुलाना है तो bulaa...Aakhir चाचा है उसका.

ा. डैड:- भैया अभी भी कहता हूँ आप सुमित को गलत राश्ते की और ले जा रहे है.

स. डैड:- वो तो मई देख lunga...Tu भी अपना dekh...Kahi दुसरो का परवरिश देखने के चक्कर में अपना hi मत भूल जाना.

इतना कह कर सुमित के पापा वह से निकल जाते hai...Raaste मई भी कुछ सोच उनके साथ hi चल रहा था की आगे क्या करना hai...Thoda संतुष्टि भी था की अभी तक सब कुछ ठीक hi चल रहा है और विश्वाश था की आगे सब ठीक हो जाएगा.

आफ्टर फ्यू डे

इतना डरे हुए क्यों हो?

सुमित के चेहरे का दर को अच्छे से भांप लिया था मेघा ने.

मेघा:- और यहाँ इस कोने में?

सुमित:- रिपोर्ट का वेट कर रहा हूँ.

थोड़ा दर था सुमित की आवाज में.

मेघा:- रिपोर्ट? किस चीज की?

सुमित:- कैंसर.

मेघा:- कैंसर? क्या मतलब?

इस बार मेघा की आवाज में भी दर था.

सुमित:- इतना सिगरेट फंक चूका हूँ की अब्ब दर सा लगने लगा hai...Aur cigarette...Lungs के अलावा भी बहुत से ऑर्गन में कैंसर का रिस्क बढ़ता hai...Bas यही दर है की रिपोर्ट पॉजिटिव न आ जाए.

मेघा:- (लाफिंग) इतना भी बड़ा नशेड़ी नहीं हो की 2-3 साल में hi कैंसर हो जाए.

सुमित:- मेरा जान निकला जा रहा hai...Aur तुम हो की मजाक कर रही हो.

मेघा:- ये तो पहले सोचना चाहिए था na...Jo कर्म किया है उसका फल तो मिलेगा hi. :lol1:

सुमित:- लेकिन इतना भी गलत कर्म नहीं किया है की कैंसर hi हो जाए.

मेघा:- ये तुम और nahi...Uparwala फैसला करेगा इस बात ka...Aur तुमने इतना गलत नहीं किया तो दर किस बात की?

सुमित कुछ नहीं बोलै इस baar...Bas रिपोर्ट जल्द आ जाए इस बात का इंतजार कर रहा था wo...Aur वो वक्त आ hi गया.

मेघा:- Jaao...Report ले कर आओ.

सुमित:- हिम्मत नहीं हो रहा है.

मेघा:- जाओ.

सुमित भी डरते हुए जाता है और वापस आते वक्त काफी खुश था.

मेघा:- अल्कोहल की वजह से सिर्फ फैटी लिवर डिजीज है ना?

सुमित:- (हैरानी से) तुम्हे कैसे पता?

मेघा:- दारु छोड़ दिया hai...Acchi बात hai...Abb थोड़ा एक्ससरसीसे वगैरह करो और वेट भी काम karo...Sab ठीक हो जाएगा.

सुमित:- अरे डॉक्टर Sahiba...Tumhe ये कैसे पता चला?

मेघा:- है कुछ Source...Accha तुम ये बताओ कब पार्टी दे रहे हो दारु और सिगरेट पूरी तरह छोड़ने की?

सुमित:- अभी अभी तो छूटा hai...Itni भी क्या जल्दी?

मेघा:- शुभ काम में देरी किस बात की?

सुमित:- चलो कैंटीन.

फिर दोनों कैंटीन की और जाते है.

सुमित:- इतना भी कौन मजाक करता है की जान hi निकल जाए?

मेघा:- तुम्हारे सांगत की hi असर hai...Yaad करो वो पुराने वाला सुमित जिसके हर जवाब में मजाक hi मजाक हो.

सुमित:- अच्छा ये bataao...Tumhe मेरे बारे में इतना कैसे पता चला? स्मोकिंग और दारु छोड़ने की बात और रिपोर्ट?

मेघा:- बस ऐसे hi.
 
फ्रेंड्स आज लिखने वाला था लेकिन अचानक से नोटिस आया की कल एग्जाम का रिजल्ट hai...Exam तो अच्छा hi गया था और नार्मल कंडीशन में कम्फर्टेबली पास हो जाना chahiye...Lekin एग्जाम है एक अलग hi दर hai...Upar से ऐसा एग्जाम का रिजल्ट जिसमें गलती से फ़ैल हो भी गया तो ईयर लोस्स...2 साल का syllabus...Usko कम्पलीट करने की म्हणत की frustration...Exam टाइम का करेलेस्स्नेस्स और कॉमन mistakes....Kuch यही बातें दिमाग में घूम रहा है.

वैसे तो एग्जाम की वजह से इतना सीरियस कभी नहीं tha...Lekin ये वाला ऐसा hi tha...Jo पिछले 2 हफ्ते से कुछ ज्यादा hi फ़्रस्ट्राटे कर रहा hai...Abb वो फ़्रस्ट्रेशन कल ख़त्म hoga...Yaa तो आर या paar...Agar रिजल्ट अच्छा आया तो कल से उपदटेस रेगुलर आएंगे और अगर बुरा आया तो पहले कुछ उपदटेस थोड़ा इर्रेगुलर होने के बाद धीरे धीरे रेगुलर हो जाएगा.

ये अपडेट डिले से मई भी फ़्रस्ट्राटे हो रहा hun...Hope कल का दिन अच्छे से निकल जाए. :प्रे:
 
फ्रेंड्स रिजल्ट एक्सपेक्टेशन से भी अच्छा aaya...Next अपडेट आज रात mein...Abb से रेगुलर आएगा अपडेट 2-3 डेज के गैप में.

अब्ब इस टाइप का एग्जाम फाइनल ईयर में hi है इसी लिए उतना स्ट्रेस नहीं hai...Baaki के टर्मिनल और एनुअल एग्जाम में सिर्फ कुछ दिन का गैप लूंगा मय्बे वीक और तवो.

सॉरी फॉर आल थी डिले एंड patience...Abb स्टोरी में म्हणत की जिम्मेदारी मेरा.
 
अपडेट 70


आफ्टर फ्यू डेज


तुम लोगो ने नया अनाउंसमेंट सुना?

मेघा की इस बात पर विकाश और सुमित दोनों hi सोचने लगे.

सुमित:- होगा कोई बोरिंग सा प्रेजेंटेशन की अनाउंसमेंट. :यौन:

मेघा:- स्पोर्ट्स वीक की अनाउंसमेंट है.

सुमित:- तो फिर ये पार्टिसिपेंट्स की सर दर्द है.

मेघा:- और तुम्हारे लिए?

सुमित:- किसी काम का नहीं...3, 4 साल पहले hi हमारा रिश्ता टूट चूका है.

मेघा:- वो तो दिख रहा hai...Pichle एक साल में तो और भी jyada...Aur ऐसा hi रहा तो मोटापा में गुब्बारा के साथ रिश्ता जुड़ जाएगा.

सुमित:- अच्छा मजाक tha...Lekin हंसी नहीं आया.

मेघा:- अपने ऊपर हुआ मजाक पर किसी को हंसी नहीं आता.

अच्छा ये बताओ कौन से गेम में पार्टिसिपेट कर रहे हो?

सुमित:- किसी भी गेम में नहीं...3,4 साल पहले hi हर खेल से रिटायरमेंट ले चूका हूँ.

मेघा:- रिक्वेस्ट नहीं आर्डर है ye...Tum पर बाद में आती hun...Vikash तुम?

विकाश:- Mai...Sports मेरे बस की बात नहीं hai...Kabhi टाइम मिला hi नहीं कुछ खेलने के लिए.

मेघा:- सुमित? डीडे कर लिया तुमने?

सुमित:- प्रॉब्लम शामे है मेरा और विकाश ka...Ye पढ़ाई में mast...Mai सोने mein...Sports से तो दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है.

मेघा:- क्रिकेट अच्छा खेलते ho...Dekha है मैंने भी.

सुमित:- वो 3 साल पुरानी बात hai...Bacchon के साथ वो भी टेनिस बॉल से.

सबको अपना हड्डी प्यारा होता hai...Cricket बॉल से खेल कर तुड़वाने का कोई शौख नहीं है मुझे.

मेघा:- तुम और इतना डरपोक?

सुमित:- मई और dar...Iss में भी कोई रिश्ता नहीं है वो भी दूर दूर tak...Lekin बेवकूफ भी नहीं हूँ की कुलहरि पर जा कर पेअर मार दू. :अप्प्रोवे:

मेघा:- मतलब पार्टिसिपेट नहीं करोगे.

सुमित:- बिलकुल भी नहीं.

मेघा:- अच्छा ठीक hai...Formality था पूरा कर diya...Baad में मुझे कुछ मत कहना.

सुमित:- मुझे खुद स्पोर्ट्स से कोई मतलब nahi...Fit मई तुम्हे क्यों कुछ कहूंगा.

मेघा:- ये भी मत कहना की कीर्ति से मिलने का मौका नहीं दिया.

ये बात सुनते hi सुमित सोच में पड़ gaya...Lekin कॉलेज का स्पोर्ट्स वीक और Kirti...Kya लिंक है? सुमित बिलकुल भी समझ नहीं पाया.

सुमित का कन्फूसिओं देख मेघा खुद बोली.

मेघा:- इस स्पोर्ट्स वीक के बाद इंटरकॉलेज क्रिकेट कम्पटीशन hai...Uss कम्पटीशन का होस्ट कीर्ति का hi कॉलेज hai...Agar सेलेक्ट होना है तो यहाँ अपने hi कॉलेज में अपना टैलेंट प्रोवे करना पड़ेगा इसके लिए स्पोर्ट्स वीक में पार्टिसिपेट करना पड़ेगा.

अब्ब तुम्हे इंटरेस्ट नहीं है तो कोई बात नहीं.

सुमित:- किसने कहा मुझे क्रिकेट में इंटरेस्ट नहीं है?

कीर्ति से पहले एक hi तो सच्चा प्यार था क्रिकेट.

मेघा:- तो क्या सोचा है?

सुमित:- सोचना क्या है? कॉलेज ख़त्म होने के बाद सीधा जा कर अपना नाम लिखवाऊंगा.

मेघा:- और क्या कह रहे थे? हड्डी से बहुत प्यार है?

सुमित:- प्रोटेक्शन नाम का भी कोई चीज होता है.

मेघा अब्ब वह से जाने hi वाली थी की.

सुमित:- अगर कभी इंटरकॉलेज टेबल टेनिस कम्पटीशन हो तो बता देना ख़ास तौर पर उस कम्पेशन का होस्ट कीर्ति की कॉलेज होना चाहिए.

मेघा:- (लाफिंग) 1 स्पोर्ट्स काफी होगा सोचा tha...Lekin यहाँ तो एक में एक फ्री मिल रहा है.

सुमित:- अच्छा एक बात bataao...Tumhe इतना कैसे पता चला की कीर्ति की कॉलेज ये कम्पटीशन होस्ट कर रहा है?

मेघा:- पता लगाना पड़ता है...दोस्ती नाम की भी कोई चीज होती hai...Shayad तुम नहीं समझोगे.

इतना कह कर मेघा वह से चली गयी.

अभी भी सुमित का कीर्ति की नाम सुनते hi इतना एक्ससिटेड होना मेघा को हैरान कर रहा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) ये प्यार भी अजीब है.


ात नाईट


स. डैड:- बहुत बदलाव नजर आ रहा है तुझ में नशा छोड़ने के बाद.

सुमित को गौर से देखते हुए उन्होंने कहा.

सुमित:- हाँ बहुत फ्रेश महसूस कर रहा हूँ.

जिंदगी को पहले की तरह जीने की कोशिश कर रहा हूँ.

स. डैड:- जो की तू जी नहीं पा रहा है.

सुमित अपने पापा की तरफ हैरानी से देखता है.

स. डैड:- सब पता है mujhe...Kya नाम था उस लड़की ka...Haan कीर्ति.

भुला नहीं पाया है न उससे?

उनकी इस बात पर सुमित के साथ साथ उसकी माँ और रश्मि का ध्यान भी आकर्षित होता है.

सुमित कुछ जवाब दे पाटा उससे पहले.

स. डैड:- और भूल भी नहीं पायेगा.
 
अपडेट 71

सुमित:- नहीं भुला पाया hun...Bas कोशिश कर रहा हूँ ये सब भूलने की.

स. डैड:- Shabash...Aur फिर हमे भूल जाना और आखिर में खुद को भी.

सुमित को बात बिलकुल भी समझ में नहीं आया.

स. डैड:- पता नहीं तू भूल जाने का दावा कर के खुद को झूठा दिलासा दे रहा है और अपने ना कामयाबी से भागना चाहता है.

सुमित:- शायद ना कामयाबी से hi पीछा छुड़ा रहा हूँ.

उसके पापा कुछ देर उससे यूँही देखते है.

सुमित:- क्या हुआ?

स. डैड:- देख रहा hun...Tu वही सुमित है ना जो कुछ साल पहले तक कहता था की तू कभी हार नहीं sakta...Agar हार भी जाए तो हार नहीं मान सकता और वही जिद्द तेरा उस हार को भी जीत में बदल देगा.

उस वक्त तो कुछ नहीं kaha...Tujh में खुद को देख कर बहुत खुश tha...Lekin aaj...Aaj तुझे सच में हारता हुआ देख रहा हूँ.

सुमित:- और ये haar...Shayad बहुत पहले hi मान लिया था.

स. डैड:- बहुत hi अस्थिर (फ्लुक्टुअटिन्ग) हो रहा है tu...Kabhi अपने जिद्द में सिगरेट, दारु छोड़ सकता है तो कभी ऐसी बातें करता है जैसे तुझ से कमजोर दिल किसी का नहीं.

सुमित:- अब्ब थक गया हूँ Papa...Sach में हार गया hun...Bahut कोशिश कर liya...Lekin हर बार नाकामी hi हाथ आता hai...Sabr टूट रहा है abb...Kab तक खुद से hi झूठ बोलता firu...Itna झूठ बोल चूका हूँ की अब्ब तो मुझे भी खुद पर विश्वाश नहीं हो रहा है.

स. डैड:- बहुत कोशिश किया है? अच्छा चल bata...Kitni बार?

सुमित:- गिना नहीं है.

स. डैड:- अंदाजा.

सुमित:- 20-25.

स. डैड:- और वो साइंटिस्ट? तूने hi तो एक्साम्प्ले दिया tha...Thomas Addison...Kitne एटेम्पट में उसने इलेक्ट्रिक बल्ब बनाया?

सुमित:- उतना तो सोच भी नहीं sakta...Mere बस की बात नहीं है.

स. डैड:- बस यही फर्क होता hai...Baat कहने में और कर के दिखाने mein...Bahut कहता था तू कभी झुकेगा nahi...Lekin इतनी जल्दी?

सुमित इस बार कोई जवाब नहीं दे पाया.

स. डैड:- कहते बहुत लोग है ये कर लूंगा वो कर के dikhaunga...Lekin करते वही है जिसका हौसला बुलंद ho...Jidd हो मर मिटने ki...Aur ये तभी पता चलता है जब हालात और साथ छोड़ de...Sab कुछ गलत होने लगे.

कामयाबी की कीमत इतना सस्ता तो नहीं है.

सुमित कुछ नहीं बोल पाया.

स. डैड:- तुझे कमजोर नहीं दिखा रहा hun...Duniya बहुत देखा है tujhse...Bahut से मुशीबत का सामना किया hai...Bas इस दर से आगे उठ कर dekh...Kaise लड़ना है क्या करना है सब समझ जाएगा.

सुमित:- लेकिन आगे कुछ दिखाई तो de...Andhera hi नजर आ रहा hai...Bas राष्ट मिल jaaye...Puri जोर लगा dunga...Aise अँधेरा में कब तक ठोकर खाता राहु.

स. डैड:- शायद तू अभी नहीं samjhega...Abhi कीर्ति के बारे में बता.

सुमित:- वो मांनना नहीं chaahti...Abb मई hi पीछे हटने का सोच रहा हूँ.

स. डैड:- और वो क्यों?

सुमित:- जब कुछ हासिल हो नहीं रहा है तो क्या faaidaa...Aapne भी तो बहुत बार समझाया है प्यार के चक्कर में नहीं पड़ने के लिए.

स. डैड:- जबर्ज़स्ती के प्यार के चक्कर में ना पड़ने के लिए कहा hai...Bas नाम की बॉयफ्रेंड girlfriend...Tera प्यार मई भी महसूस कर सकता hun...Saccha वाला प्यार hai...Bhulaaye भूल नहीं सकता.

सुमित:- तो क्या करू? भुला ही नहीं पा रहा हूँ और समझा भी नहीं पा रहा हूँ.

स. डैड:- टूट कर प्यार kar...Itna प्यार कर की कीर्ति भी सोच में पड़ जाए इतने नफरत के बावजूद.

सुमित:- सीरियसली?

स. डैड:- मजाक के मूड में मई बिलकुल भी नहीं हूँ.

स. माँ:- ये आप क्या सीखा रहे है उससे? भूलने की कोशिश कर रहा है wo...Aur आप है की और प्यार में पड़ने की सलाह दे रहे है.

स. डैड:- तुम्हे क्या लगता है ये भूल पायेगा कीर्ति को?

स. माँ:- कोशिश तो कर रहा है ना.

स. डैड:- कोशिश तो मैंने भी किया था ये सोचने की लोग कैसे अमर हो सकते है.

कोशिश भी इसी चीज का होना chahiye...Jo संभव ho...Sach को टालने से वो झूठ नहीं हो jaata...Agar सुमित उससे भूलने का सोचेगा तो ऐसा लगेगा जैसे वो आँख बंद कर के सोचेगा की सूरज गायब हो गया है.

2-4 दिन झूठी तसल्ली देने के बाद सच्चाई फिर सामने aayega...Frustration के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा.

अभी का सुमित dekho...Kitna बदलाव आ गया hai...Daaru, सिगरेट की लत और इतना काम confidence...Kuch और देर से पता चलता हमें तो ये खुद को hi खो बैठता.

प्यार चीज है hi aisa...Mil जाए तो धरती hi स्वर्ग बन जाता है और ना मिले तो इंसान खुद को hi बर्बाद कर लेता है.

इस बार सुमित की माँ कुछ नहीं kehti...Lekin पूरी तरह से कन्विंस्ड वो भी नजर नहीं आ रही थी.

सुमित:- बहुत मुश्किल से अपने इमोशंस पर कण्ट्रोल कर रहा hun...Fir से उसी प्यार की तरफ चला जाओ तो पैट अनहै आगे क्या होगा.

स. डैड:- इंसान है tu...Koi मशीन नहीं hai...Har तरह के जिम्मेदारी होता है इंसान ka...Pyaar भी kar...Apna पढ़ाई bhi...Bete का, भाई का और दोस्त के साथ हर एक रिश्ता अच्छे से निभा.

जो भी करेगा दिल लगा कर kar...Dekhna बहुत बदलाव आएगा.

तू प्यार करता था चुप kar...Ye सोच कर की पापा क्या सोचेंगे, माँ को कैसा lagega...Aur इसी में छुप कर अधूरा काम करता आया hai...Issi से हर जिम्मेदारी से पीछे छूट रहा hai...Ye फ़्रस्ट्रेशन, लौ कॉन्फिडेंस सब इसी के नतीजा है.

सुमित:- अब्ब कोशिश करूँगा तो कीर्ति मान जायेगी?

स. डैड:- तुझ पर देपेंद करता hai...Saccha प्यार के साथ इतना बुरा तो नहीं होना chahiye...Aur हाँ ऐसे लौ कॉन्फिडेंस में उसके सामने जाना भी mat...Aur फ़ालतू की सेंस ऑफ़ हुमूर तो तरय भी मत कर.

तूने hi तो कहा था कीर्ति तुझे से पहले प्यार करती thi...Kitna कॉंफिडेंट था उस वक्त tu...Peraonality भी alag...Aur जब से वो तुझसे ना पसंद करने लगी है तो कितना लौ कॉंफिडेंट का हो गया hai...Aur वो क्यों पसंद करेगी तुझे?

कुछ कर के dikha...Kuch काबिल ban...Aatmavishwash से bhara....Usse भी तो लगे तेरे बिना उअका कोई वजूद nahi...Har हाल में तू उसका साथ dega...Tabhi तो वो भी तुझे प्यार karegi...Warna ऐसा लगेगा की तू बस अपने प्यार का भीख मांग रहा है.

इतना प्यार कर उससे की वो लौट कर वापस आ hi jaaye...Aur अगर ना आये तो भी उसके दिमाग में ये चाप बैठ जाए की कोई था जो उससे बहुत प्यार करता था.

प्यार जरुरी hai...Saath में बाकी और चीज भी.

सुमित:- कोशिश करता हूँ.

स. डैड:- कोशिश nahi...Karke दिखा.

सुमित:- जरूर.

इस बार सुमित की आवाज आत्मावावश से भरा था.

स. डैड:- और भूल mat...Tu जो भी करेगा उसमें मई और तेरी माँ दोनों साथ hai...Iss विश्वाश के साथ की तू कभी गलत और अनैतिक काम नहीं करेगा.

जो करना है kar...Hum साथ है.

सुमित बिना कुछ बोले अपने पापा के गले लग जाता hai...Aur फिर.

सुमित:- थैंक यू Papa...Socha नहीं था इतना सपोर्ट करेंगे आप.

स. डैड:- अब्ब तो तेरे ख़ुशी में hi तो हमारा ख़ुशी hai...Tujhe खुश देखना है अब्ब to...Kirti में hi तेरा ख़ुशी hai...To वो hi सही.

3 डेज लेटर.

क्रिकेट का ground...Sabhi खिलाड़ी अपनी अपनी तयारी के साथ अपनी अपनी जगह पर लग गए thhe...Darshak भी ठीक ठाक थे.

सुमित आज थोड़ा अलग महसूस कर रहा tha...Na जाने कितने साल हो गए थे उससे क्रिकेट के जर्सी पहने hue...Bat को जमीन में पटकते hi उसका नहर सामने मेघा पर gaya...Jo बाउंड्री के बाहर से उसको चीयर कर रही थी.

मैच का पहला बॉल.

बहुत दिन के बाद भी सुमित के कॉन्फिडेंस में कोई कमी नहीं था.

एक फ़ास्ट बॉल फुल लेंथ ों Stump...Sumit शायद hi इससे अच्छा बॉल का उम्मीद कर सकता tha...Jawab में एक स्ट्रैट ड्राइव और एक शानदार चौका (4).

इस शॉट के साथ hi सुमित का ध्यान फिर से मेघा पर gaya...Megha की मुस्कान में इस बार कुछ बात तो था की सुमित का ध्यान मेघा से हट hi नहीं रहा था.

वो भी बस मेघा को hi देखे जा रहा tha...Bas ऐसा लग रहा था जैसे ये मुस्कान कभी ख़त्म हो hi ना.
 
अपडेट 72

बॉलर बाउल ले कर तैयार tha...Fir भी सुमित का ध्यान मेघा पर hi था.

सुमित्तत.

एक गुस्से से भरी आवाज कप्तान का जो non-striker एन्ड से बैटिंग कर रहा था.

ये सुनने के बाद hi सुमित का ध्यान मैच की तरफ वापस आया.

बॉलर के रन उप के साथ सुमित का ध्यान कभी बॉलर पर पड़ता तो कभी मेघा par...Megha से सुमित का ध्यान हैट hi नहीं रहा था.

दूसरा बाउल पर सुमित ने शॉट के लिए बात चलने hi वाला था की एक तेज बाउंसर उसके सर पर आ कर laga...Wo तो हेलमेट था जिसने उसके सर को बचाया वर्ण हड्डी का कहा और कितना फ्रैक्चर होता इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल होता.

हेलमेट पर लगते hi वो बैलेंस बिगड़ने से निचे गिरा.

सुमित को ऐसे देख ग्राउंड के प्लेयर्स के साथ दर्शक भी घबरा gaye...Megha भी डरते हुए ग्राउंड में आ gayi...Dhire धीरे करके सुमित खुद hi उठा और मेघा को अपनी तरफ आते देख इशारा से खुद को ठीक होने का बता कर वापस जाने को कहा.

मन में दर के साथ मेघा वापस चली गयी.

फर्स्ट अिध टीम को भी उसने मन कर दिया.

पूरी तरह से उठने के बाद थोड़ा सा चक्कर आने laga...Aur उस चक्कर में भी जब उसका नजर मेघा पर पड़ा तो हर तरफ मेघा hi दिखने lagi...Ek अलग सा मुस्कान उसके होंठो पर आ गया जो शायद वो hi समझ सकता था.

सुमित...

नॉन स्ट्राइकर एन्ड से कप्तान का आवाज.

अगर फिट नहीं है तो रिटायर्ड हर्ट ले कर आराम कर.

पानी.

बस इतना hi जवाब दिया सुमित ने.

थोड़ा पानी पीने के बाद और थोड़ा मुंह पोंछने के बाद फिर से हेलमेट लगा कर सुमित रेडी हो गया.

दर्द थोड़ा सा tha...Concentrate भी पूरा नहीं कर पा रहा था.

कंसन्ट्रेट Sumit...Concentrate.

खुद को मोटीवेट कर के सुमित ने अपना बैटिंग पोजीशन लिया.

और नेक्स्ट बॉल उससे भी तेज bouncer...Lekin इस बार सुमित रेडी tha...Perfect टाइमिंग के साथ एक पॉवरफुल pull...Aur ball...Wo सभी की नजर से दूर स्टेडियम से भी बाहर.

इस शॉट के साथ सभी दर्शक में फिर से शोर शराबा सुरु हो gaye...Kuch दोस्त thhe...Jo सुमित का नाम ले कर चीयर कर रहे thhe...Lekin उनकी आवाज भी फींका पद गया मेघा के aawaj...Wo ख़ुशी के मारे सुमित के नाम ले कर चिल्लाने लगी.

सुमित भी ये देख काफी खुश tha...Wohi muskaan...Abhi भी सुमित के होंठो में tha...Andar से hi उससे बहुत अच्छा लग रहा था और अब्ब जा कर खेल में उसका मन लगने लगा.

फिर क्या tha...Har शॉट के बाद मेघा को खुश देख कर वो और भी शॉट मारने लग gaya...Captain दूसरी तरफ से बार बार मना कर रहा था लेकिन सुमित उससे hi मन कर के अपने मन मर्जी से खेलने लगा.

चौका और चक्का की तो बारिश hi होने लगा ग्राउंड mein...Aur ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक सुमित आउट न हुआ.

8 चक्का और 5 चौका के साथ सुमित आखिरकार 32 बॉल में 78 रन्स बना कर एक और चक्का की प्रयास में आउट हो hi गया.

ग्राउंड से वापस आते hi मेघा ने सुमित को गले लगा liya...Sumit को न जाने क्यों ये भी अच्छा लग रहा tha...Bahut सुकून महसूस कर रहा था वो.

मेघा:- ये kya...Century बना कर आते.

सुमित:- इतना मारने के बाद भी सेंचुरी?

मेघा:- इतना अच्छा हो तुम की एक्सपेक्टेशन वैसे भी ज्यादा रहता है.

सुमित जवाब में सिर्फ मुस्कुराया.

मेघा:- स्टेडियम के बहार सिक्स कौन मारता है? इतना ताकत आया कहा से.

सुमित:- बस एक पागलपन tha...Ek जूनून.

मेघा:- किस चीज की? कीर्ति से मिलने के लिए?

सुमित:- Nahi...Match के दौरान एक बार भी कीर्ति का याद नहीं आया.

मेघा:- हो hi नहीं सकता ये.

सुमित:- क्रिकेट मेरा पहला प्यार hai...Kirti से भी बहुत पहले ki...Abb तक का सभी फ़्रस्ट्रेशन निकालने का मौका जो मिला tha...Aur शायद कुछ और भी था...

सुमित इससे आगे कुछ नहीं बोल paaya...Aakhiri वक्त में खुद को रोक लिया.

मेघा:- कुछ और ? क्या ?

सुमित:- कुछ ख़ास नहीं.

मेघा:- मई तो भूल hi gayi...Chot ज्यादा तो नहीं लगा.

मेघा फिर सुमित के सर सहलाने लगी.

सुमित:- Nahi...Bas वाइब्रेशन था थोड़ा हेलमेट ki...Balance बिगड़ने से गिर गया था.

सुमित का कॉन्फिडेंस देख मेघा को कन्फूसिओं में भी मानना पड़ा.

मेघा:- बहुत अच्छा लगा तुम्हे ऐसा खेलते देख.

मुस्कुराते हुए सुमित वह से निकल gaya...Megha से दूर जाते जाते उसके मुस्कान में बहुत से बदलाव भी आने लगा.

ात नाईट.


रात के 9 बजे डिनर के बाद सुमित के रूम में नॉक हुआ.

गेट खोलने पर सामने रश्मि थी.

सुमित:- तू ? इस वक्त ?

रश्मि:- कुछ बात करनी है.

सुमित:- हाँ बोल.

रूम के अंदर आने के बाद.

रश्मि:- आपको कीर्ति में ऐसा क्या दिखा?

थोड़ा गुस्सा और थोड़ा शिकायत था रश्मि की आवाज में.

सुमित:- बहुत साड़ी खूबसूरती और दौलत.

रश्मि:- मजाक मत कीजिये.

सुमित:- अरे are...Rashmi तो गुस्सा हो gayi...Abb कौन सा चॉकलेट ला कर दूँ.

रश्मि:- भैया प्लीज.

रश्मि को सीरियस देख सुमित भी मजाक के मूड से बाहर आया.

सुमित:- Pyaar...Ye होने के लिए क्या chahiye...Bas दिल से एक aawaj...I लव हेर एंड ी विल ऑलवेज बे हैप्पी विथ her...Wohi मेरे लिए सही है.

रश्मि:- पता nahi...Aisa आपको कैसे लग गया.

सुमित:- क्यों? वो तो तेरी बेस्ट फ्रेंड थी.

रश्मि:- कभी nahi...Sirf फ्रेंड thi..Itna ऐटिटूड और घमंड है उसमे की कई बार उससे इग्नोर करती thi...Wo hi आ कर जब बात करती तो मई भी बात कर लेती थी.

सुमित:- वैसे कीर्ति में ऐटिटूड सूट करता है. :डी

रश्मि:- आप और आपकी चॉइस. :युक:

सुमित:- मान या ना maan...Bhabhi तो तेरी वो hi है. :lol1:

रश्मि:- किस्मत hi ख़राब hai...Bhaiya के रूप में आप मिले और भाभी के रूप में वो चुड़ैल. :डोह:

सुमित:- चुड़ैल तू है जो उस मासूम को चुड़ैल कह रही है. :माध:

रश्मि:- ये मेघा कौन है?

सुमित:- मेरी दोस्त.

रश्मि:- सिर्फ दोस्त? :हिंतहिंट:

सुमित:- हाँ. :डेड:

रश्मि:- लेकिन आप दोनों के फब चाट तो कुछ और कहते है.

अब्ब सुमित एकदम से सीरियस हो गया.

सुमित:- Chat...Kab पढ़ा तूने.

रश्मि:- गलती से एक बार आपके मैसेज नोटिफिकेशन में क्लिक हो gaya...Kuch मेस्सगेस tha...Padha नहीं hai...Bas स्क्रॉल किया tha...Uski बहुत सी मेस्सगेस थे और आपका 2 लाइन का आंसर और कभी कभी तो बिलकुल भी नहीं.

सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- भैया बताइये न? कौन है वो?

ऐसा लग रहा है बहुत अच्छी है wo...Aapko बहुत चाहती है.

सुमित कुछ देर तो रश्मि को देखता रहा.

सुमित:- Nahi...Ye सच नहीं है.

इतना कह कर सुमित ने सर घुमा लिया.

रश्मि:- खुल कर बताइये.

सुमित:- क्या करेगी जान kar...Papa को भी नहीं बताया है उसके बारे में.

रश्मि:- लेकिन क्यों? पापा तो खुल कर आपका सपोर्ट कर रहे hai...Fir भी आप छुपा रहे है उनसे?

सुमित:- कब तक अपना गलती hi बताता rahu...Abb बस अपना बदलाव और सुधार की बात hi करना चाहता हूँ unse...Agar मेघा के बारे में उनसे बात किया तो फिर भी वो कुछ नहीं kahenge...Lekin अपनी गलती की hi बात कब तक करता राहु.

रश्मि:- कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Khul कर bataiye...Please.

मेघा का नाम सुनते hi अलग अलग तरह के ख्याल आ रहे थे सुमित के दिमाग में.

आखिर कार सुमित को जवाब देना hi पड़ा.

सुमित:- मेरी "एक भूल"
 
फ्रेंड्स अपडेट 72 पोस्ट कर दिया hai...Padh कर अपना फ़ीडबैक्स जरूर dijiye...Aur देरी के लिए सॉरी.

अभी इमरजेंसी में पोस्टिंग hai...Din भर बिजी रहता हूँ और रात में थकान के बाद की नींद की वजह से लिख नहीं पा रहा tha...Ye अपडेट भी पिछले 2 दिन के प्रयास के बाद सफल raha...Ummeed है नेक्स्ट वीक से थोड़ा रिलीफ मिलेगा.
 
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