Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 14 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 73

रश्मि:- भैया गलती तो सच में आप का hi है.

पूरी कहानी सुनने के बाद रश्मि ने कहा.

सुमित:- बहुत बड़ी गलती hai...Itna की भले hi वो मुझे माफ़ कर de...Mai खुद को माफ़ नहीं कर सकता.

रश्मि:- आपने सच्चे दिल से माफ़ी मांग लिया है na...Wo माफ़ कर देगी.

सुमित:- माफ़ कर चुकी है wo...Lekin ऐसे माफ़ किया है जो मेरे लिए पचा पाना भी मुश्किल है.

रश्मि:- कुछ समझ में नहीं आया.

सुमित:- समझ तो मुझे भी नहीं आ रहा hai...Kya से क्या हो रहा है.

रश्मि अभी भी सवालिया नजरो से सुमित को देख रही थी.

सुमित:- तूने पूछा था न की क्या वो मुझसे प्यार करती है? जवाब है हाँ.

4 बार रिलेशनशिप में रहा hun...Bhale hi बस नाम का hi प्यार ho...Kaafi एक्सपीरियंस है.

ना खुश आवाज में सुमित ने कहा.

सुमित:- ऐसे में मेघा के फीलिंग से कैसे अनजान रह सकता hun...Har पल मेरे पास है wo...Uski हर बातों में मुझे उसका प्यार महसूस होता hai...Har पल मुझे आगे बढ़ने की हालातों से लड़ने की हौसला देती hai...Har पल मुझे खुश रखने की कोशिश में रहती hai...Bhale hi उससे मेरा इग्नोर करना कितना भी बुरा लगता ho...Fir भी मेरे लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहती है.

इतना pyaar...Kaise महसूस नहीं होगा?

आँख बंद करते हुए सुमित ने कहा.

रश्मि:- फिर आप उसके साथ hi क्यों आगे नहीं बढ़ जाते? क्यों उस कीर्ति के hi पीछे पड़े है?

सुमित:- क्यों की मई उस लायक नहीं समझता खुद को.

मेघा मुझसे इतना प्यार करती hai...Fir भी मई उसके सामने बहुत उनकंफर्टबले फील करता hun...Wo इतनी अच्छी है की उसके सामने जाते hi मुझे एहसास होता है मई कितना गलत हूँ.

रश्मि:- माफ़ तो कर चुकी है न wo...Abb जो भी गलती हो चूका है उससे भुला कर आगे badhiye...Uss गलती को अच्छाई से बदल दीजिये.

सुमित:- विश्वाश तोडा है uska...Abb भले hi उससे जोड़ भी du...Jab भी देखूंगा यही दिखेगा की कहा कहा से तोडा hai...Aur कहा कहा से जोड़ रहा हूँ.

गलती से भी दर्दनाक उस का पश्चाताप hai...Shayad डेसेर्वे भी करता हूँ.

ये पश्चाताप की आग किसी तरह सेह रहा hun...Agar मेघा से प्यार करने का भूल कर बैठा तो शायद ये आग कही मुझे जला न दे.

रश्मि:- क्या मतलब?

सुमित:- मई इस प्यार के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं hun...Aur मेघा का प्यार भी ऐसा है जो कर किसी का सपना होता hai...Koi तो हो जो हमे टूट कर प्यार kare...Aur यही सब सोच कर मेघा का प्यार अपना भी लू तो मेघा के साथ ना इंसाफ़ी होगा.

मई उससे कभी वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai तो ऐसा कन्फ्यूज्ड इंसान बन जाऊँगा और यही सोचता रहूँगा की मैंने कीर्ति के साथ गलत किया या मेघा के साथ?

आज कीर्ति से मेघा अच्छी लग रही hai...Kal मेघा के साथ किसी बात पर बहस हो गया और कोई और अच्छी लगने लगी तो मेघा को भी कही छोड़ ना du...Galat एक्साम्प्ले है ye...Bahut गलत.

कीर्ति से बड़े बड़े वाडे किया hai...Uska क्या मोल रह जाएगा?

समस्या से दूर भागना समस्या का हल नहीं hai...Ye तो ऐसा है जैसे आँख बंद कर लेने से ये सोच लेना की सूरज गायब हो गया hai...Uska कोई अस्तित्वा अब्ब है hi नहीं.

पिछले 2-3 सालिन में यही महसूस किया है की प्यार किया नहीं जाता है हो जाता hai...Jabardasti मेघा से प्यार करने का कोशिश भी तो नहीं कर सकता हूँ.

रश्मि:- फिर मेघा का क्या होगा?

सुमित:- वो तो मेरे समझ के भी परे hai...Abb तक तो उसको मुझसे इर्रिटेट हो जाना चाहिए tha...Uske दिल में अपने लिए नफरत भरने की एक नाकाम कोशिश भी कर चूका hun...Abb वो भी कोशिश नहीं कर सकता.

खैर आज नहीं तो कल उसका मेरे लिए प्यार ख़त्म हो jaayega...Yahi उम्मीद कर सकता हूँ अब्ब.

उसके लिए भी यही सही hai...Kab तक झूठी उम्मीद ले कर baithegi.Jab उम्मीद टूटता है बहुत दर्द होता hai...Mujhse ज्यादा कौन महसूस कर सकता है इस बात को.

रश्मि:- आपकी बात गलत नहीं hai...Fir भी ऐसा लग रहा है जैसे कुछ तो गलत होने जा रहा है.

सुमित:- अब्ब जो भी ho...Jyada फर्क नहीं padta...Papa की ये बात सही लग रहा hai...Kuch सवाल के जवाब वक्त के पास होता है.

बस अब्ब ये वक्त जहा ले chale...Kirti का इंतजार तो rahega...Lekin अब्ब उससे परेशान भी नहीं करना chaahta...Jo होगा उससे hi किस्मत मान lunga...Waise भी अब्ब ये प्यार का पागलपन वक्त के साथ काम होता जा रहा hai...Shayad बर्दास्त करना सिख लिया है.

बेफिक्र आवाज में सुमित ने कहा.

रश्मि:- भैया एक बात पुछु? मेघा अउ Kirti...Aapke बिचार में कौन सही है.

ऐसे hi रश्मि को ये ख्याल आया.

सुमित:- आज तक जज तो नहीं kiya...Kismein क्या अच्छाई है और क्या buraai...Aur कौन अच्छी है.

कीर्ति मेरी प्यार hai...Acchi तो वैसे भी वो लगेगी hi.

लेकिन Megha...Bahut अच्छी dost...Wo दोस्त जो शायद hi मई डेसेर्वे करती hun...Bahut काम लोगो में से है वो जिसके लिए दिल से रेस्पेक्ट आता है.

कीर्ति का प्यार मई डेसेर्वे करता हूँ लेकिन मेघा का दोस्ती? ये हमेशा से सवाल हो रहा hai...Mere लिए भी.

आँखें बंद कर के सुमित ने जो भी महसूस kiya...Wo बातों के जरिये कह diya...Ye जवाब रश्मि के साथ साथ खुद के लिए भी था.

आफ्टर 3 इयर्स

हैप्पी मकर संक्रांति
 
भाई अभी कंडीशन ऐसा है की उस दिन को कोष रहा हूँ जिस दिन ये स्टोरी स्टार्ट किया tha...Aaj ना hi स्टोरी में फोकस कर पा रहा हूँ, ना hi स्टडी में और बाकी की चीज में.

पहले आपके कमैंट्स भी रेगुलर thhe...Aur एग्जाम के बाद जब फिर से लिखना सुरु किया है वो भी बंद हो gaye...Regular रीडर की हर बात को हमेशा सुना है चाहे वो पॉजिटिव फीडबैक हो या फिर negative...Aisa लगता है की वो स्टोरी पढ़ रहे है और कुछ एक्सपेक्टेशंस honge...Aapke केस मेंऐसा लग रहा था जैसे आपने पढ़ना छोड़ दिया है और अचानक से कमेंट आता है स्टोरी का थे एन्ड.

स्टोरी को अगर कभी एन्ड करना होगा तो सीधा लॉक कर के प्राइवेट मैसेज ऑफ कर दूंगा ताकि किसी को क्लैरिफिकेशन देना न पड़े.

अभी ऐसा सोचा नहीं है.

आगे भी अपडेट का टाइमिंग पर सूरे नहीं हूँ जैसे हालात चल रहे hai...Update डिले होना मुझे भी उतना hi फ़्रस्ट्राटे कर रहा है.
 
अपडेट 74

डॉ. साहब उठ गए आप?

सुमित की पापा सुमित की तरफ ने मुस्कुराते हुए पूछा.

सुमित:- जब से इंटर्नशिप में आया हूँ नींद हराम हो चूका hai...Raat रात भर duty...Thak गया हूँ. :सिघ2:

स. डैड:- अब्ब और कितना बाकी है?

सुमित:- 1 मंथ और झेलना है यह सब kuch...Wo तो अच्छा है की सर्जरी में पोस्टिंग है abhi...Warna रात रात भर ड्यूटी में लगे रहो.

स. डैड:- क्यों तुझे सर्जरी करने नहीं आता?

सुमित:- थ्योरी तो सब आता hai...Bas प्रैक्टिकल nahi...Aur किसी सर्जन में इतना हिम्मत भी तो नहीं है.

स. डैड:- किस चीज की हिम्मत?

सुमित:- रिस्पांसिबिलिटी ka...Agar पेशेंट को कुछ हो गया to...Bewkoof hi होंगे वो जो कॉम्प्लिकेटेड सर्जरी मब्ब्स लेवल के डॉक्टर को देंगे.

बस उनको सर्जरी करते देख सिख रहा hun...Ye भी बहुत है इस लेवल में.

रश्मि:- अपना ना कामयाबी छुपाना कोई इनसे sikhe...Sidhe कह दीजिये कुछ नहीं आता आपको.

सुमित:- अभी भी थोड़ा बहुत नींद के नशा में hun...Kuch कह दूंगा तो पापा पापा कर के रोना मत.

रश्मि:- आप और आप का एक्सक्यूसेस.

सुमित:- अच्छा मेरा सर्जरी का स्किल तब पता chalega...Jab तुझ पर तरय karunga...Fir बताना.

अगर इन् में से कोई भी बीमारी हो जाए तो बताना... अप्पेंदिसिटिस, पैंक्रिअटिटिस, चोलएसिटिटिस...

रश्मि:- बस bas....Papa देखिये naa...Na जाने क्या क्या बीमारी लग जाने की दुआ कर रहे hai...Apna सर्जरी का स्किल प्रोवे करने के लिए.

स. डैड:- उकसाने का काम भी तो तू hi कर रही है.

रही:- क्या पापा? आप हमेशा भैया का hi सपोर्ट करते है.

सुमित:- इस लिए कहता hun...Soch समझ कर पन्गा ले.

फिर ऐसे hi हंसी मजाक में दिन बीत जाता है.

फ्यू डेज लेटर

Congrats...Aaj तुम्हारा हाफ सेंचुरी कम्पलीट हुआ.

मेघा की ये बात सुमित को समझ में नहीं आया.

सुमित:- किस बात की हाफ सेंचुरी?

मेघा:- कीर्ति को भूलने ki...Pichle 50 दिन से एक बार भी तुम्हारे मुंह से कीर्ति के बारे में नहीं सुना.

सुमित:- (इन हिज मंद) वो तो मेरे कण कण (पार्टिकल) में मौजूद hai...Bhulna और भुला पाना असंभव है.

लेकिन सामने से सुमित ने मेघा को कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- मजाक कर रही thi...Lekin तुम इतना खामोश क्यों हो आज kal...Aur कोई कोशिश भी नहीं कर रहे हो?

इस बार गंभीर आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- अब्ब उसको और परेशान करने का दिल नहीं karta...Jitna कोशिश करना था कर चूका हूँ.

मेघा:- फिर कीर्ति को कैसे मनाओगे?

सुमित:- अब्ब nahi...Agar उससे मेरे प्यार का एहसास होगा तो वो खुद aayegi...Warna किस्मत की मर्जी.

इतना कह कर सुमित वह से थोड़ा दूर हैट गया और सामने हो रही सर्जरी की और देखने लगा.

मेघा से इस बारे में वो और बात करना नहीं चाहता था.

नेहा:- ये तो अच्छी बात है ना वो कीर्ति से दूर हो रहा hai...Tere लिए तो अच्छी बात hai...Fir बार बार क्यों तू उससे कीर्ति की याद दिला रही है?

थोड़ा गुस्से में नेहा ने मेघा से पूछा.

मेघा:- ऐसे अगर सुमित मुझे मिल भी जाए तो भी मंजूर nahi...Aur ये कैसा प्यार है की उससे पाने के लिए उसको ऐसा दुखी होता देख इस में अपना ख़ुशी धुंडु.

और यकीं के साथ कह सकती हूँ अगर सुमित कीर्ति से सच में हमेशा के लिए दूर हो गया तो उसका प्यार से विश्वाश उठ jaayega...Naa hi उससे कभी मुझसे प्यार होगा और ना hi किसी और se...Achha ये hi है की उससे उसका प्यार मिल जाए.

नेहा:- फिर तेरा क्या होगा?

मेघा:- कुछ nahi...Jab से सच में सुमित से प्यार का एहसास हुआ था तब से hi पता था सुमित मेरा कभी नहीं hoga...Aur अगर हो भी गया तो उससे hi ये एहसास होना चाहिए.

तभी ओट. में राज आता है.

भैया!!!!

सुमित के पास आ कर राज बोलै.

सुमित:- इतना डरा हुआ क्यों है? कोई बात है क्या? बोल मई देख लूंगा.

राज:- बात आप से hi रिलेटेड है.

सुमित:- मुझसे?

राज:- कीर्ति से रिलेटेड.

सुमित:- मेरी कीर्ति या तेरी?

राज:- आपकी.

बात तो दोनों की बहुत धीरे से चल रहा था ताकि सर्जरी में किसी को डिस्टर्ब ना ho...Sumit कोने में चला आया.

सुमित:- बता.

राज:- कीर्ति की इंगेजमेंट फिक्स्ड हो गया है.

सुमित:- एक तेज दर्द सुमित के सीने में उठा जैसे किसी ने चाक़ू भोंक दिया ho...Aaknkhein बंद कर के उस दर्द को सेहन करने की कोशिश किया लेकिन शायद कामयाब नहीं हो पाया.

एक पल बिना रुके वो ओट रूम से निकल gaya...Sumit को ऐसे जाते देख मेघा भी उसका पीछा करने लगी.

सुमित सीधे हॉस्पिटल की छत की तरफ जाने laga...Chhat में पहुँच कर एक कोने में चला गया...5 फ्लोर निचे जमीन की तरफ देखने लगा.

मेघा जब वह पहुंची तो सुमित को देख वो भी दर gayi...Wo कुछ कहती इससे पहले hi सुमित निचे बैठ गया.

मेघा अब्ब सुमित के पास गयी.

मेघा:- Sumit...Ye सब क्या है?

सुमित:- वो कीर्ति...

दर्द में इतना hi बोल पाया सुमित.

मेघा:- हाँ सुना मैंने भी.

सुमित अब्ब आगे कुछ नहीं बोलै.

कुछ देर चुप रहने के बाद.

सुमित:- प्लीज तुम जाओ यहाँ se...Akela छोड़ दो मुझे.

लेकिन मेघा सुमित को ऐसे अकेला छोड़ने को तैयार नहीं थी.

फिर निचे देखते हुए सुमित.

सुमित:- इतना हिम्मत नहीं है अब्ब mujhme...Suicide का ख्याल बहुत पहले आता tha...Wo भी सिर्फ ख्याल.

बस अभी अकेला रहना चाहता hun...Iss लिए यहाँ छत में आ गया.

मेघा:- कब तक ऐसे hi अकेले तड़पते rahoge...Pichle कुछ महीने से तुम खुद को सभी से दूर करते आ रहे ho...Dekho क्या हालत बना रकः है? दर्द बाटने से काम होता hai...Naa की उसको अपने अंदर दफनाने से.

सुमित:- लेकिन दर्द ऐसा है जो बांटा भी नहीं जा सकता और ना hi बांटना चाहता हूँ.

वक्त भी ऐसा है की हमेशा ख़ुशी बाटने वाला सुमित के हिस्से में आज बाटने के लिए अगर कुछ है तो भी ये दर्द. :सिघ2:

मेघा:- कुछ तो bolo...Dard हल्का हो jaayega..Tumhe ऐसा देख....

सुमित:- हल्का hoga...Khatm नहीं.

और वैसे भी कहने के लिए बहुत कुछ tha...Bahut अरमान tha...Vaada....Pyaar...Aur न जाने क्या kya...Lekin अब्ब सब कुछ भूलता जा रहा hun...Aakhir बताओ भी तो किसे? जो मुझसे दूर जा रही है? जिसकी जिंदगी में मेरा कोई अहमियत नहीं है.

प्लीज चली जाओ tum...Mujhse और बर्दास्त नहीं हो रहा है.

आखिरी लाइन सुमित ने मेघा को देख कर कहा.

मेघा:- नहीं आज तुम्हे बोलना hi hoga...Aise ख़ामोशी से एक बार फिर दर्द का घूंट पीने नहीं दूंगी.

अब्ब सुमित से भी और कण्ट्रोल नहीं हो रहा tha...Dhire धीरे आँखों से आंसू की धार बहना सुरु हो गया.

सुमित:- पता नहीं कैसा प्यार है ये? आज भी कीर्ति को गलत नहीं मान पा रहा hu...Aur उसकी भी क्या गलती? मई hi पड़ा था उसके पीछे उसके लाख मन करने के baawjud...Ummeed...Shayad यही एक चीज मुझे ले डूबा.

आज नहीं तो क ये होना hi था.

मेघा:- अभी हिम्मत rakho...Hum बात करेंगे कीर्ति से.

मेघा ने ये कह तो diya...Lekin उससे भी पता था कीर्ति से बात करने का कोई फायदा नहीं.

सुमित:- Nahi...Abb उससे और परेशान नहीं karunga...Wo अब्ब अपने जिंदगी में खुश रहे यही सही है.

और mai...Kab तक ऐसे hi आशिक़ की रारह अपना जिंदगी गुजारता rahunga...Bhula दूंगा usse...Bhula दूंगा.

भले hi सुमित की आवाज में दर्द था लेकिन आखिरी की बात में दृढ निश्चय tha...Aur ये कहने के बाद चेहरे में एक बार फिर दर्द भरे निशान आ गए.
 
अपडेट 75

तो ये बात है? इतने दिनों से ये सब चल रहा था और मुझे आज पता चल रहा है.

थोड़ा गुस्से के साथ कीर्ति के पापा बोले.

क. डैड:- और Kirti...Tumne मुझे बताया भी नहीं?

कीर्ति:- इग्नोर कर रही थी isse...Picchle कुछ साल बिलकुल शांत हो गया tha...Pata नहीं आज इससे क्या हो गया?

सुमित की और देख गुस्से से बोली Kirti...Kirti की नफरत देख सुमित और भी टूट ता जा रहा था.

क. डैड:- ये सब जाने के बाद भी तू यहाँ इसके साथ आ gaya...Samjhaana चाहिए था isse...Lekin तू भी अपने बीटा के मोह में अँधा हो गया है.

नाराजगी भरी आवाज में कीर्ति के पापा ने सुमित के पापा से कहा.

स. डैड:- मई इसके साथ नहीं खुद मई इससे यहाँ ले कर आया हूँ.

इस बात से कीर्ति के सभी घर वाले हैरान हो गए.

क. डैड:- क्या? समझाने की जगह तू इससे और बढ़ावा दे रहा है?

स. डैड:- अगर गलती करता तो जरूर रोकता.

क. डैड:- तो क्या ये सही है?

स. डैड:- सही भी नहीं है.

क. डैड:- तो फिर?

स. डैड:- सच्चा प्यार करता hai...Teri बेटी के लिए अच्छा hi चाहता hai...Fir गलत कैसे हो गया?

लेकिन किस्से प्यार करना chahiye...Ye इससे समझ में नहीं aaya...Bas ये सही नहीं किया.

इस बात पर कीर्ति और उसके पापा दोनों hi उन्हें गुस्से से देखते है.

क. डैड:- Accha...Choice ख़राब hai...To इस ख़राब चॉइस को भूल जाने के लिए क्यों नहीं समझाया?

स. डैड:- मई कौन होता हूँ इसको चॉइस भूल जाने के लिए कहने वाला? बस इसके चॉइस पर सलाह दे सकता हूँ की क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

इससे यही सलाह दिया था की सच्चा प्यार करता है तो करता reh...Aise डरपोक बन कर बिच में hi भूल जाने की झूठा दिलाशा मत दे खुद ko...Kyu की एक बार इंसान खुद को हारा हुआ मानने लगता है तो जिंदगी भर हारता hi रहता hai...Bahut वक्त लग जाता है खुद को संभालने में.

मई हमेशा अपने बेटे को एक फाइटर के रूप में देखना चाहता hun...Sirf जीतने वाला nahi...Agar सामने हार hi है फिर भी आखिरी पल तक लड़ता rahe...Aise में हार भी गया तो भी मुझे अपने बीटा पर गर्व होगा.

अपने पापा की इस बात सुनने पर सुमित को hi अपने पापा पर गर्व महसूस hua...Unke बीटा होने का.

स. डैड:- मौका दे रहा था इससे अपने प्यार साबित करने के liye...Agar इसका प्यार सफल हो जाता तो जिंदगी भर इससे खुद पर गर्व होता की एक असंभव सा दिखने वाली चीज संभव कर के दिखाया hai...Aur इससे अपने प्यार का कीमत पता चलता की प्यार कितना अनमोल होता है और इससे पाने के लिए न जाने कितने हालातों से गुजरना पड़ता है.

और इसका प्यार असफल हो जाता है तो इससे अपना गलती dikhega...Kaha कहा पर गलतियां किया है और क्या गलतियां किया hai...Issi सिख से ये आगे बढ़ेगा.

लोग कहते है किसी का भी सबसे बड़ा शिक्षक (टीचर) उसके माँ बाप और स्कूल कॉलेज की टीचर होते hai...Sahi भी hai...Lekin मैंने अपने जिंदगी के अनुभव से सीखा है की जिंदगी खुद सबसे बड़ा शिक्षक hai...Jindagi के ऐसे पहलु होते है जिससे हम बहुत कुछ सिख सकते है ख़ुशी के पल से भी और ग़म से भी.

इतना कह कर सुमित के पापा ने थोड़ा सांस लिया और फिर.

स. डैड:- तुम गलत चॉइस हो ये नहीं कह रहा hun...Tum खुद में बहुत अच्छी ho...Aur तुम्हारा पूरा अधिकार है अपने डिसिशन लेने ka...Tum सुमित के लिए गलत ho...Aur सुमित तुम्हारे लिए गलत hai...Shayad ये बात अब्ब सुमित भी समझ गया होगा.

क. डैड:- वाह क्या बात hai...Math का टीचर आज जिंदगी का ज्ञान देता फिर रहा है.

इस मजाक उड़ाने वाली हंसी पर सुमित से रहा नहीं gaya...Lekin वो कुछ बोलता उससे पहले उसके पापा उसका हाथ पकड़ लेता है.

स. डैड:- Jindagi...Iss विषय का शिक्षक तो अभी भी बन नहीं पाया hun...Ek विद्यार्थी हूँ और जो भी खुद सीखा है वो बता रहा हूँ.

और jindagi...Ye ऐसा शिक्षक है जो तेरा इस अहंकार वाली हंसी को आसानी से पाचताप वाली आंसू में बदल सकता hai...Bas वक्त की देरी है.

क. डैड:- सपना देखता reh...Waise भी सपना hi तो देखता आया है आज tak...Jo कभी पूरा नहीं हो सका.

स. डैड:- और तू भी वैसा का वैसा hi रह gaya...Bas दुसरो के बारे में अपना ओपिनियन बना लेता है और उससे में अदा रहता है भले hi वो सही है या गलत.

जरुरी तो नहीं है कहना लेकिन फिर भी तेरे जानकारी के लिए कह hi देता hun...Aaj वो सपना निकाल कर फेंक दिया hai...Vakt के साथ खुश हूँ और जिंदगी भी सही चल रहा hai...Abb बस अपना बीटा और बेटी की कुछ जिम्मेदारियां है.

कीर्ति के पापा इस बात पर कोई जवाब नहीं देते है.

ऐसे hi कुछ देर सुमित को देखने के बाद.

क. डैड:- तुम्हे तो मई बहुत शरीफ समझता था.

सुमित कोई जवाब नहीं देता.

क. डैड:- लेकिन आज कल तो शरीफ दिखने वाले लड़के hi छुपा ृष्टं निकलते है.

सुमित फिर भी कोई जवाब नहीं देता.

क. डैड:- वैसे एक बात bataao...Tumhe मई अपना दामाद बनाऊ क्यों?

कीर्ति:- पापा?

क. डैड:- मई सुमित से बात कर रहा हूँ.

क. डैड:- अच्छा तो सुमित bataao...Tum में ऐसा क्या ख़ास है की मई कीर्ति का हाथ तुम्हारे हाथ में दू.

इस बार कीर्ति की पापा की आवाज थोड़ा धीमा tha...Sumit को भी लगा इस बार कुछ जवाब देना chahiye...Lekin अगले hi पल.

क. डैड:- यही की तुम पढाई काम आवारापन ज्यादा कर रहे ho...College काम बार में ज्यादा समय रहते ho...Exam में पास होना भी किसी चमत्कार से काम नहीं.

अरे कोई पेशेंट तुम जैसे डॉक्टर से इलाज करने के लिए राजी नहीं होगा अगर असलियत जान ले तो फिर मई सब कुछ जानते हुए अपने बेटी का शादी तुम से करवौ.

अगर कीर्ति भी राजी होती फिर भी मई इस शादी का खिलाफ hi hoti...Garv है मुझे अपने बेटी पर जो कॉलेज जाती है तो सिर्फ पढ़ाई करने के liye...Naa की तुम जैसे आवारा के मीठी मीठी बातों में आयी जो पढाई के अलावा लड़की फ़साने में ज्यादा ध्यान देते है.

सुमित hi जानता था की कैसे उसने खुद को संभाला.

स. डैड:- सुमित की इतनी taarifein...Tujhe कहा से पता चला?

क. डैड:- सच कड़वा होता hai...Bhale hi कितना भी बुरा क्यों न lage...Mahesh याद hai...Party में एक दिन सभी के बारे में बातें चल रही thi...To इसका प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पता चल गया.

सुमित टैलेंटेड तो hai...Bas लड़की की चक्कर छोड़ दे.

स. डैड:- और तू बहुत मजे से सुन रहा था.

क. डैड:- मुझे क्या पड़ी है किसी के बारे में इतना सोचने ki...Bas जो भी पता था वो कह दिया.

स. डैड:- लेकिन बातों से तो ऐसा लग नहीं रहा था.

क. डैड:- फिर भी सच तो ये hi है.

स. डैड:- तूने सुमित से पूछा था ये सवाल की सुमित में तेरा दामाद बनने की क्या खासियत है? सवाल सुमित से पूछा है तो जवाब मई नहीं दूंगा.

बस 5 saal...Fir भी सुमित जवाब नहीं dega...Agar हमारी दोस्ती तब तक रहा तो देख लेना सुमित में क्या खासियत hai...Jawaab तेरा आँखें खुद तुझे देगा.

क. डैड:- कमाल hai...Apne बीटा का इस हरकत पर भी साथ दे रहा hai...Maar पीट कर समझाना चाहिए था ताकि अकाल ठिकाने आ जाये.

अगर मुझे पहले पता चलता की मेरी बेटी के पीछे पड़ा है तो हाथ पेअर तोड़ कर रख देता.

स. डैड:- नहीं कर पाटा.

क. डैड:- क्या?

स. डैड:- हाथ पेअर तोड़ने की बात कर रहा hai...Chhuu भी नहीं सकता है.

इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था जिससे कीर्ति के पापा भी कुछ नहीं बोल पाए.

क. डैड:- सही hai...Tera घमंड उस वक्त तुझे ले डूबा tha...Abb तेरा बीटा को ले डूबेगा.

इसके बाद कुछ देर कोई बात नहीं होता.

कीर्ति:- Sumit...Tumse कुछ बात करनी है.

पहली बार ऐसा हुआ की कीर्ति ने बुलाया था और सुमित को कोई ख़ुशी नहीं हुआ.

सुमित:- कहो.

कीर्ति:- अकेले में.

कीर्ति अपनी पापा की और देखते hai...Wo परमिशन देते है.

दोनों फिर रूम से बाहर जाते है.

कीर्ति:- क्या बात है? इतना शांत क्यों हो?

सुमित:- बोलने के लिए अब्ब शब्द बाकी नहीं है.

कीर्ति अब्ब हसने लगती hai...Kirti की ये हंसी सीधा सुमित के दिल पर वार कर रहा था.

कीर्ति:- न जाने इतने साल में इतना बोल लिया तुमने की अब्ब तुम्हारे पास बोलने के लिए शब्द hi नहीं hai...Kamaal है.

ये कह कर कीर्ति और हसने लगती है.

कीर्ति:- इतना परेशान कर दिया था तुमने मुझे की आज तुम्हे परेशान देख बहुत ख़ुशी मिल रहा है.

सुमित की तरफ देख कर.

कीर्ति:- वैसे मुझे किसी को दुखी देखना अच्छा नहीं लगता पर पता नहीं क्यों तुम्हे दुखी देख कर बहुत अच्छा लग रहा है.

जैसे को taisa...Ye कहावत आज सही साबित हो gaya...Tumne मुझे जितना परेशान किया hai...Abb तुम भी उतना hi परेशान हो.

तुम तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो.

सुमित:- आज तुम बोलो.

कीर्ति:- Haan...Aaj मई बोलूंगी और तुम sunoge...Kuch ऐसा बोलूंगी की आज के बाद कुछ सुन्ना भी नहीं चाहोगे तुम.

सुमित:- (इन हिज मंद) मंजूर है.

कीर्ति:- ऐसा नहीं है की मुझे तुम्हारे प्यार का एहसास नहीं tha...Jaanti हूँ तुम्हारा प्यार सच्चा hai...Lekin mai...Mujhe भी तो पसंद आना चाहिए तुम्हारा प्यार.

जब से एक बार तुम गलत लगने लगे तब से तुम से बिलकुल hi नफरत होने laga...Bhale hi तुम्हारा प्यार कितना भी सच्चा ho...Tumhara बातें, तुम्हारा चेहरा और tum...Sab से नफरत होने लगी.

जितना मई तुम्हे अवॉयड करती थी उतना hi तुम मेरे पास आते थे उससे मेरा नफरत और भी बढ़ gaya...Besharmi की भी हद्द होती है.

आज तुम्हारा जो हाल है वजह तुम खुद ho...Bahut पहले ठुकरा दिया था tumhe...Tum hi मेरे पीछे पड़े थे और आज ये हाल hai...Aur सच कहु तो तुम्हारा ये हाल मेरे लिए किसी सुकून से काम नहीं है.

इतना कहने के बाद कीर्ति एक नजर सुमित को देखती है और हँसते हुए कहती है.

कीर्ति:- क्या कहते थे तुम विवेक को? विचित्र praani...Khud देख लो तुमसे विचित्र कौन होगा?

तुम मेरे पीछे 8 साल से पड़े हो...8 साल यानी की 96 mahine...Aur मेरे पास तुम्हारे लिए 96 मिनट भी नहीं hai...Yahi है तुम्हारा औकात.

ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Aur साथ hi उसके होंठो में दर्द भरी मुस्कान छा गया.

कीर्ति:- अभी भी बेशर्मी के साथ खड़े हो.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

सुमित:- अगर तुम्हारा इजाजत हो तो ये बेशर्मी दो बार और दिखाना चाहता हूँ.

कीर्ति:- क्यों और कब?

हैरानी से कीर्ति की मुंह से निकला.

सुमित:- तुम्हारा इंगेजमेंट और शादी के दिन.

कीर्ति को विश्वाश नहीं हो रहा था और खुद सुमित को भी.

कीर्ति:- अब्ब तुम खुद hi कुल्हाड़ी पर पेअर मारना चाहते हो तो मई क्या kahu...Accha hi hai...Tumhara शकल देखने लायक होगी.

सुमित:- थैंक यू.

फिर कीर्ति वह से चली गयी.

पहली बार ऐसा था की सुमित को कीर्ति के पीछे मुड़ने की और मुस्कुराने की उम्मीद नहीं tha...Wo बस मुश्कुराते हुए कीर्ति को जाते देखता रहा.

सुमित:- बस 2 मुलाक़ात aur...Fir तुम्हे भुला dunga...Bhulaana hi पड़ेगा.

आखिरी लाइन कहते हुए सुमित रोने hi वाला था की हालात और जगह देख रू भी नहीं पाया.

वो दुखी मन वापस आ गया.

स. डैड:- (तो कीर्ति) तुमने hi कहा था सुमित पिछले 3 साल से तुमसे नहीं मिला hai...Lekin सामने न आ कर भी तुम्हे अपने प्यार का एहसास दिलाने का हजार कोशिश कर चूका है.

अगर तुम राजी होती तो मई इसके (क. डैड) परवाह किये बिना तुम दोनों की शादी करा deta...Lekin तुम hi तैयार नहीं ho...Khair तुम्हारा डिसिशन hai...Sahi hi होगा तुम्हारे liye...Khush रहना तुम.

स. डैड:- (तो क. डैड) तू तो बचपन का दोस्त है और तुझसे वैसे भी ज्यादा नाराज नहीं रह sakta...Agar दोस्त का जरुरत पड़े तो आगे भी कुछ कहने के लिए मत हिचकना.

इतना कह कर वो सुमित को अपने साथ ले कर वह से निकल गए.

स. डैड:- यहाँ आने का मकशद यही था की तुझे जिंदगी के ऐसे पल भी हो सकते है ये समझाना चाहता tha...Agar कीर्ति मान जाती तो बहुत ख़ुशी होता मुझे bhi...Lekin ये एक ऐसा मुश्किल पल है जिसको अगर झेल लिया तो देखना आगे का जिंदगी और भी खुशनुमा हो जायेगा.

सुमित:- कीर्ति से अलग हो कर कैसी ख़ुशी?

स. डैड:- अभी नहीं samjhega...Vakt आने दे.

सुमित:- पापा अभी बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहा hun...Ho सकता है कुछ दिन तक आप निराश हो जाए मुझे ऐसे देख kar...Lekin पापा विश्वाश कीजिये फिर से उठ कर खड़ा हो jaaunga...Bas थोड़ा वक्त dijiye...Aapne मेरे बारे में जो सोचा है उससे भी बड़ा बन कर दिखाऊंगा.

सुमित की आवाज में आत्मविश्वाश तो था लेकिन इस बात में भी दर्द hi हावी था.

स. डैड:- जितना चाहे उतना वक्त le...Mujhe विश्वाश है तुझ par...Mujhe हमेशा जीतने वाला बीटा नहीं chahiye...Haar के सामने भी ना झुकने वाला बीटा चाहिए भले hi वो हार उससे कितना भी तोड़ दे.

सुमित:- आज के लिए सॉरी Papa...Waha कुछ बोल नहीं paaya...Aisa लगता है मैंने खुद के साथ वह आप को भी हरा दिया.

स. डैड:- किसने कह दिया की तू वह हार गया था?

सुमित अपने पापा को हैरानी से देखता है.

ा. डैड:- अपने भावना से जीता है tune...Itna गुस्सा और दर्द के बावजूद अपने दिल पर काबू tha...Yeh देख मई सच में खुश हु.

उम्र और हालात ऐसे है की कीर्ति के पापा पर तेरा कभी भी हाथ उठ सकता था जैसे वो तुझे उक्षा रहा tha...Aur कीर्ति से प्यार की भीख में गिड़गिड़ाता तो वो भी कोई हैरानी की बात नहीं होती.

लेकिन तूने अपने भावना पर काबू रखा hai...Bahut बड़ी बात है ye...Bas बीटा कुछ वक्त aur...Dekhna जिंदगी में जो भी दर्द झेले है तूने ये सभी खुशियां बन कर सामने aayenge...Bas तू ऐसे hi मजबूती से आगे बढ़.

इतना समझ hi गया होगा दिल की बात हमेशा सुनने पर ठोकर hi लगता hai...Thoda दिमाग से भी सोच और ाही फैसले le....Ye नहीं कहूंगा की प्यार मत kar...Jindagi में प्यार का भी अलग hi जरुरत hai...Bas सही लड़की से प्यार कर.

सुमित:- अब्ब किसी और से प्यार? ऐसी हालात में?

स. डैड:- बिलकुल nahi...Aur प्यार करते नहीं प्यार हो जाता hai...Abb तो तेरा उम्र भी हो चूका है शादी के liye...Abb तो अपनी बीवी से hi प्यार करना :D...Fir galat...Pyaar किया नहीं जाता प्यार हो जाता है ये बात समझ लेना.

आखिरी की बात सुमित के पापा ने ऐसे कहा था की सुमित को भी हंसी आ गया.
 
:फैंट: क्या था ये? :ीक: जो भी था बहुत hi अच्छा था :तूहैप्पी: इतना तारीफ़ तो मैंने भी खुद का आज तक नहीं किया :D...Agar मुझे hi अपने अपडेट पर रिव्यु देना हो तो नीस अपडेट, सुपर्ब अपडेट, बाद अपडेट, वर्स्ट अपडेट, तरय ओने अगेन टाइप अपडेट होगा :डी.

इतना डिटेल्ड में पढ़ने के लिए और इतना अच्छा रिव्यु देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. :थैंक्स:

अब्ब ऐसे hi रिव्यु मिस्टेक पर फोकस कर के लिखिए. :अप्प्रोवे:
 
अपडेट 76

सुमित सोने hi वाला था की उसके पापा रूम में आ गए.

स. डैड:- आज तुझे एक कहानी सुनाने आया हूँ.

सुमित:- कहानी?

स. डैड:- बचपन में तो बहुत परेशान करता था, पापा ये कहानी सुनाइए वो कहानी सुनाइए?

सुमित:- और आप को कोई कहानी याद नहीं रहता था.

बचपन की बातें याद आते hi एक बार फिर से सुमित के चेहरे में मुस्कान आ गया.

सुमित:- सुनाते वक्त बिच में hi भूल तो नहीं जाएंगे?

स. डैड:- Nahi...Ye कहानी तूने hi डिमांड किया tha...Abb बीटा का इच्छा हो और बाप पूरा ना कर sake...Ye हो सकता है?

सुमित:- मैंने डिमांड किया था कोई कहानी?

स. डैड:- अब्ब तेरा यादाश्त कमजोर हो रहा hai...Ye कहानी काम मेरा बायोग्राफी ज्यादा hai...Tune hi तो डिमांड किया था.

सुमित:- Haan...Lekin आज आपको कैसे याद आ gaya...Hamesha तो टालते आ रहे थे?

स. डैड:- बस इसी वजह से ताल रहा था क्यों की वो सही वक्त नहीं लग रहा tha...Koi ख़ास कहानी तो नहीं है लेकिन शायद तेरे लिए जरुरी हो सकता hai...Aur आज hi सही वक्त लग रहा है.

सुमित:- सुनाइए फिर.

सुमित भी अब्ब थोड़ा एक्ससिटेड लग रहा था.

स. डैड:- तुझे क्या लगता है ये जो तू बचपन में इतना शैतान था और जवानी के शुरुवात में आवारा, और बात करने की tarika...Relaxed और कारेफ़री आदत कहा से आया होगा तुझ में?

सुमित कुछ सोच hi रहा था की...

स. डैड:- कुछ ऐसा hi हुआ करता था मई bhi...Bilkul hi carefree...Kisia से कोई मतलब nahi...Apne hi तरीके से जीना जो मन करे वही karna...Doston के साथ मिल कर पुरे गांव वालों के नाक में दम कर के रखना.

जो दिल में आये वो बेझिझक कहना भले hi कोई गुस्से में नक् फुला le...Kisi का कोई परवाह नहीं था.

बस जिंदगी अपने तरीके से जीता tha...Koi रुकावट nahi...Koi टेंशन नहीं.

सुमित:- लेकिन अब्ब तो आप को देख कर ऐसा नहीं लगता?

स. डैड:- वक्त वक्त की बात hai...Aur वक्त के अनुसार खुद को बदलना भी पड़ता hai...Abb बुढ़ापे में बचपना करूँगा तो अच्छा लगेगा क्या?

सुमित:- आप hi तो कह रहे थे की आप पर किसी का कोई असर नहीं होता tha...To फिर ये बदलाव क्यों?

स. डैड:- थोड़ी ना किसी के कुछ कहने पर ये बदलाव आया है या फिर लोग क्या सोचेंगे इस वजह से कोई बदलाव आया hai...Abb वक्त के साथ ऐसे जीने का मन कर रहा है तो ऐसे hi जी रहा hun...Kabhi मजाक तो कभी सीरियस.

चल अब्ब तुझे अपनी कहानी की तरफ ले चलता हूँ.

जैसे की तू भी जानता है बचपन मेरा गांव में hi gujra...Uss वक्त के हिसाब से हमारा परिवार एक मिडिल क्लास tha...Naa hi कुछ ज्यादा ऐशो आराम और ना hi ज्यादा garibi...Kul मिला कर सब कुछ ठीक ठाक था.

हमारे माँ और पिताजी के हम दो hi बीटा thhe...Iss लिए परवरिश में भी कोई समस्या नहीं tha...Mai बड़े बीटा होने की वजह से पापा के थोड़ा करीब tha...Papa का भी अच्छा ख़ासा इज्जत और मान सम्मान था गांव mein...Papa का करीब था और पापा की गांव में pahunch...Issi वजह से गांव के बहुत लोग मुझे जानते थे.

बचपन में तो ये किसी सेलिब्रिटी वाली फीलिंग से काम नहीं tha...Mai किसी को नहीं जानता था लेकिन सब मुझे जानते थे. :D...Wo अलग बात है की ये सब पापा की वजह से मुझे जानते hai...Lekin बचपन में इन् बातों से क्या फर्क पड़ता hai...Apni तारीफ़ suno...Papa की नाम से कोई भी काम किसी से भी करवा लो.

बचपन या फिर जवानी की सुरुवात तक ऐसे hi मौज मस्ती में बिता.

अब्ब पापा के बहुत करीब था ये जितना अच्छा था मेरे लिए उतना hi बुरा bhi...Jab भी पापा गुस्सा होते मेरा खैर नहीं tha...Kitna पिटाई हुई है ये गईं भी नहीं सकता.

पड़ोस की गांव में हॉस्पिटल tha...Hospital होना वैसे तो लोगो के लिए अच्छी बात hai...Lekin मेरे लिए buri...Papa को जब भी पिटाई करना होता बेफिक्र होकर मारते thhe...Agar एक दो हड्डी टूट भी गया तो हॉस्पिटल किस दिन काम आता? :(

इतना सुनते hi सुमित जोर जोर से हसने लगता है.

स. डैड:- अगर बचपन में मैंने भी तेरा ऐसे hi पिटाई करता तो हसने की हिम्मत नहीं करता तू?

सुमित की पापा की बात से तो सुमित को डरना चाहिए था लेकिन उन्होंने ये बात हँसते हुए कहा तो सुमित और भी हसने लगा.

सुमित:- हसने दीजिये Papa...Thoda बहुत मार तो आपसे भी खाया hai...Uss वक्त सोचता था काश आपको भी कोई पीट कर मेरा बदला ले le...Lekin दादाजी ने तो बहुत पहले hi बदला चूका दिया tha...Thanks दादाजी.

स. डैड:- बहुत कमीना hai...Apne hi पापा को पिटवाना चाहता था?

सुमित इस बात पर सिर्फ हस्ता है.

स. डैड:- मई तो और भी कमीना tha...Uss वक्त पापा पर बहुत गुस्सा आता था.

सुमित:- अब्ब?

स. डैड:- अब्ब क्या बहुत पहले hi रीलीज़ हो गया hai...Wo जो भी करते थे सोच समझकर hi करते thhe...Pyaar भी बहुत करते thhe...Jab भी गुस्सा शांत होता था खुद hi मिठाई खिलाने ले चलते thhe...Apne hi हाथो से मलहम लगाते थे.

सुमित:- और चाचा? उनकी कितनी पिटाई होती थी?

स. डैड:- बहुत kam...Naa hi वो ज्यादा मार खाता tha...Aur ना hi पापा के उतना करीब tha...Bas माँ का लाडला था.

सुमित:- अच्छा hi hai...Bach गए.

स. डैड:- अच्छा तो बिलकुल भी नहीं hai...Hamesha उसके दिल में यही सवाल होता था की ऐसा मुझ में क्या था की पापा मेरे ज्यादा करीब thhe...Yaa फिर गांव वाले भी मुझे ज्यादा भाव देते थे.

कोशिश तो वो भी करता tha...Lekin बात नहीं बन पाटा tha...Ye भी अलग hi टैलेंट है की लोगो को इन्फ्लुएंस कैसे करना है? ये एक टैलेंट शायद बचपन से hi मुझ में था.

बस यही एक प्रॉब्लम है उस में की वो चाहता है ज्यादा से ज्यादा लोग उसके आस पास rahe...Uski तारीफ़ kare...Issi लिए आज भी थोड़ा बहुत शोऑफ करता रहता है.

और मुझे निचा दिखने का एक मौका भी नहीं chhodta...Jo आज तक कर नहीं पाया hai...Bachpan में जब भी वो मुझे निचा दिखाने का सोचता उल्टा उससे hi आईना दिखा देता tha...Iss बात का नाराजगी शायद अब्ब भी है उस में.

जब थोड़ा रीलीज़ हुआ उससे समझाने की कोशिश भी kiya...Lekin वो इस बात को दिल में ले चूका tha...Iss में मुझे मेरा भी गलती नहीं लग रहा था तो मैंने भी ये कोशिश छोड़ दिया.

आज जब सोचता हूँ तो हो सकता है अनजाने में कभी गलती हो भी सकता hai...Lekin दिल में हर बात को लेना ये भी सही नहीं है.

दिल का वो बुरा इंसान नहीं hai...Bas मुझसे हमेशा से नाराज hi रहा hai...Aur लोगो के अटेंशन को हमेशा सबसे ऊपर रखता hai...Waise भी मुझे इन् बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग मेरे बारे में गलत सोचते है या नहीं?

बस उससे शिकायत है तो एक बात ki...Wo अपने साथ साथ आरव को भी उसी तरफ ले जा रहा hai...Ek दो बार आरव से भी बात किया था लेकिन वो भी समझना नहीं चाहता तो छोड़ diya...Mujhe kya...Jaisa काम करेंगे वैसा hi फल मिलेगा.

ये क्या कुछ ज्यादा hi फॅमिली मटर में घुस गया.

हाँ कहा tha...Bachpan में.

बचपन या फिर जवानी की hi बात करू और दोस्त ना हो ऐसा कैसे हो सकता hai...Dosti भी गजब का था और hai...Jo दोस्त पहले हुआ करते थे वो आज भी hai...Bahut से दोस्त ऐसे है जो कुछ भी करने के लिए तैयार hai...Kuch दोस्त ऐसे भी है जो उतना पसंद नहीं karte...Dosto के बिच जब भी बात करता तो कुछ ज्यादा hi बोलने लग jaata...Ye बात कुछ दोस्तों को पसंद भी नहीं था.

एक वो भी है जो तेरा ससुर भी बन सकता tha...Lekin उसका बदकिस्मती.

सुमित भी इस बात पर हँसता है और फिर.

सुमित:- बचपन से जवानी तक आ गए लेकिन एक बात अभी भी नहीं बताया आपने?

स. डैड:- क्या?

सुमित:- आपकी लव स्टोरी?

स. डैड:- मेरा लव story...Impossible.

सुमित:- क्यों?

स. डैड:- वो क्या कहते हो तुम log...Haan सख्त launda...Kuch ऐसा hi हुआ करता था mai...Kisi लड़की के प्यार में इतना दम नहीं था की मेरा दिल चुरा sake...Aur मई किसी लड़की के पीछे जाओ ये मई किसी बुरे सपने में भी नहीं सोच सकता था.

वो अलग बात है की मई तेरी माँ का क्रश tha...Aur हमारी शादी एक अरेंज्ड मैरिज था.

सुमित:- शादी के बाद pyaar...Interesting कांसेप्ट.

स. डैड:- ये तो तेरे साथ भी होने वाला hai...Haan शादी के बाद थोड़ा बहुत प्यार तो हो hi gaya...Pyaar और responsibility...Shaadi के बाद hi अच्छे से सीखा है. :डी

स. डैड:- बचपन की बात हुए एक बहुत जरुरी चीज भूल गया बताने के लिए.

सुमित:- क्या?

स. डैड:- पढ़ाई.

सुमित:- आप पढ़ते भी थे?

स. डैड:- वो तो अभी भी तुझसे ज्यादा पढता हूँ.

सुमित:- उस टाइम की hi पढाई की कहानी सुनाइए?

स. डैड:- पढाई की शुरुवात तो हुआ था पापा की जिद्द की वजह se...Bachpan में हमेशा बंक करता था स्कूल और दोस्तों के साथ घूमने निकल जाता था.

लेकिन पापा को ये बात बिलकुल भी पसंद नहीं tha...Aur सबसे ज्यादा पिटाई इसी बात को ले कर होता tha...Papa के टाइम में बहुत काम लोग पढाई लिखे करते थे और जो भी पढ़े लिखे होते थे उनका इज़्ज़त भी होता था.

पापा किसी कारण से पढाई नहीं कर पाए थे और मुझे और तेरे चाचा को किसी भी हाल में पढ़ाना चाहते थे.

सुरुवात में तो पढाई शब्द से साफ़ नफरत tha...Bas पापा की दर से स्कूल चला जाता था.

लेकिन एक दिन अचानक से बदलाव आ गया.

मुझे टाइफाइड हो गया था और उसी पड़ोस की गांव की हॉस्पिटल में एडमिट किया gaya...Doctor ने बहुत अच्छे से इलाज kiya...Jab हॉस्पिटल में था तो बहुत से पेशेंट उस डॉक्टर को दिखाने aate...Unka बहुत इज़्ज़त tha...Har कोई उनका दिल से इज़्ज़त करते thhe...Aisa लगता था कोई सामान्य इंसान तो बिलकुल भी नहीं है.

लोगो को मौत से बचाना आसान काम तो बिलकुल भी नहीं hai...Aur उनका म्हणत, उनका ज्ञान देख कर मई काफी प्रभावित था उनसे.

बस ऐसे hi एक बार उनसे पूछ लिया.

स. डैड:- डॉक्टर sahab...Mujhe भी डॉक्टर बनना है.

वो मुस्कुराये और.

डॉक्टर:- इसके लिए तो तुम्हे बहुत पढ़ाई करनी पड़ेगी.

स. डैड:- क्या बिना पढ़ाइये किये डॉक्टर नहीं बन सकता?

डॉक्टर:- (विथ स्माइल) बन सकते ho...Jis दिन सूरज सुबह पश्चिम की और से उगना सुरु होगा.

ये काफी था मुझे समझने के liye...Thaan लिया अब्ब तो पढ़ना hi hai...Doctor बनना hi है किसी तरह.

मजाक मस्ती तो करता hi था लेकिन साथ में पढाई bhi...Doctor से बिच बिच में पूछता रहता था की कैसे पढ़ना chahiye...Doctori के लिए क्या पढ़ना chahiye...Vagera vagera...Wo भी अच्छे से समझाते थे.

10तह तक आने के बाद पढ़ाई में काफी अच्छा हो गया tha...Science और Maths...Jaha बाकी की विद्यार्थी इन् विषय से दूर भागते थे मुझे यही पढ़ने में मजा आता था.

10तह का एग्जाम अच्छा gaya...11th में पास की hi छोटी सेहर में जाने लगा.

11 और 12 भी अच्छे से पढ़ कर अच्छे मार्क्स के साथ पास हो गया.

लेकिन जब पहली बार मेडिकल कॉलेज में एंट्रेंस देने गया तो क़ुएस्तिओन्स देख कर सर चक्र gaya...Padha कुछ था और क़ुएस्तिओन्स कुछ और hi तरह का?

बहुत मुश्किल से पास हो paaya...Admission मिल सकता था लेकिन स्कालरशिप nahi...Middle क्लास होने की वजह से इतना पैसा दे पाना भी पॉसिबल नहीं था.

खैर, इसमें अपना आर्थिक हैसियत को दोष नहीं दे सकता tha...Agar सच में काबिल होता तो स्कालरशिप मिलना चाहिए था.

एक और कोशिश kiya...Marks थोड़ा अच्छा aaya...Lekin नतीजा wohi...Scholarship नहीं मिला.

एक और बार कोशिश kiya...Coaching भी liya...Lekin वही natija...Thoda और अच्छा मार्क्स लेकिन स्कालरशिप नहीं.

बहुत बुरा लग रहा tha...Mehnat इतना किया था लेकिन इस म्हणत का फल नहीं मिल रहा था.

घर में पापा और माँ दोनों hi सपोर्ट कर रहे थे अभी bhi...Kisi तरह मुझे इस जुंग को जीत ते हुए देखना चाहते थे.

एक और कोशिश kiya...Marks बहुत अच्छा aaya...Lekin स्कालरशिप फिर नहीं मिला.

अब्ब सच में टूट चूका tha...Pehli बार खुद को हारा हुआ महसूस kiya...Abb और दम नहीं था.

अब्ब तो जैसे साइंस से hi नफरत हो गया tha...Maths ले कर बैचलर में एडमिशन करवा liya...Papa भी नाराज thhe...Lekin बाद में मान गए.

इतना कह कर वो सुमित को देखने lage...Sumit भी चुप था.

स. डैड:- बस यही कहानी सुनना tha...Ek कहानी हार की.

सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.

स. डैड:- यही वो हार tha...Jisne मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था...2-4 दिन सिगरेट और दारु की नशा में खुद को डूबा दिया था.

यही वो कहानी है जो तू बार बार पूछ रहा था तेरे चाचा ने जब ये बात उठाया था.

हर नशा के कहानी के पीछे प्यार नहीं होता hai...Kuch टूटे सपने भी होते है.

सुमित:- सॉरी Papa...Mera उस जिद्द ने आपके भरे हुए जख्म को ताजा कर दिया.

स. डैड:- मैंने खुद ताजा किया hai...Aaj नहीं बहुत साल pehle...Aur अपने कमजोरी से डरना नहीं उससे लड़ना chahiye...Ye बात बहुत पहले hi समझ आ गया था भले hi देरी से आमाझ में aaya...Issi लिए तो तुझे डॉक्टर बनने पर जोर दे रहा था.

मेरे पापा पढ़े लिखे नहीं थे इसी लिए मुझे पढ़ना चाहते thhe...Mai डॉक्टर नहीं बन पाया इसी लिए तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता था.

सुमित बस ध्यान से उनकी बात सुन रहा था.

स. डैड:- लेकिन जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता tha...Issi लिए तुझे जो भी पढ़ने का मन था वही पढ़ने देना चाहता tha...Lekin तू था की कोई भी सब्जेक्ट अपने मन से पढ़ना नहीं चाहता tha...Bas यही बात मुझे पसंद नहीं था.

सुमित:- सच कहु तो उस वक्त तक मुझे मेरे जिंदगी का लक्ष्य नहीं मिल पाया था.

कीर्ति ने मेरे साथ अच्छा किया या गलत ये तो नहीं pata...Lekin उसकी पीछे पीछे मैंने भी मब्ब्स सेलेक्ट किया ये सही था.

आपका अधूरा सपना भी पूरा कर paaunga...Aur एक अच्छा सर्जन बनने का मेरा मकशद भी.

सुमित की पापा इस बात पर कुछ नहीं बोले.

सुमित:- और आपका वो नशा कैसे chhuta...Ek बार ये आदत लग जाती है तो आसानी से छूट टी नहीं है.

स. डैड:- Papa...Jab उन्हें पता चला तो वो काफी गुस्से में thhe...Unke सामने जाते hi हाथ पाउ फूल गौए थे mere...Lekin हैरानी की बात टॉट ये था की उन्होंने बहुत प्यार से समझाया mujhe...Shayad उनका प्यार hi था जो मुझे उस वक्त जरुरत था.

पापा और माँ के साथ कुछ दोस्त भी थे जिन्होंने उस वक्त मुझे sambhala...Warna सपना टूटने का dard...Har कोई संभल नहीं सकता.

जो मेरे साथ हुआ था वही तेरे साथ हुआ hai...Uss वक्त मेरे पापा थे मुझे संभालने के liye...Aaj मई हूँ.

ये कहानी इतने दिनों से इस लिए नहीं बता रहा था क्यों की आज मुझे सही वक्त लग रहा hai...Kal तक एक उम्मीद भी था की कीर्ति तुझे मिल सकती है और इस कहानी की जरुरत nahi...Lekin आज जो भी हुआ उस वाकः से ये बताना बहुत जरुरी है.

बीटा बस यही kahunga...Aise दर्द जो होते है अंदर से तोड़ के रख देते hai...Khud से hi हार जाना, दूर दूर तक कोई उम्मीद न dikhna...Ye मेरे साथ भी हुआ tha...Aaj तेरे साथ भी हो रहा hai...Bahut हिम्मत है तुझ में जो ये सेह रहा है.

अभी कुछ दिन और सेहन कर le...Dekhna राष्ट खुद मिल jaayega...Jaldbaazi में कोई गलत फैसला ना लेना जो मैंने लिया था.

सुमित:- क्या गलत फैसला?

स. डैड:- मैंने एक hi मेडिकल कॉलेज को सब कुछ मान लिया tha...Usmein स्कालरशिप न मिलने की वजह से मैंने जल्दबाज़ी में कोर्स चेंज कर लिया.

अगर थोड़ा और रिसर्च करता तो बहुत दूर दूसरा कॉलेज में उतने मार्क्स में स्कोलरहिप मिल jaata...Utna रेपुटेड कॉलेज नहीं था इस वजह से मेरे ध्यान में भी नहीं आया लेकिन मब्ब्स तो कर hi सकता था न.

बस यही कहूंगा कीर्ति hi सब कुछ नहीं hai...Thoda दिन और बर्दास्त कर le...Fir तुझे भी रीलीज़ होगा.

हर ग़म का कोई न कोई इलाज होता hai...Mere ग़म का इलाज वक्त tha...Tera भी वही है.

ग्रेजुएशन करने के बाद मेरा शादी भी हो gaya...Suru सुरु में तेरी माँ को ज्यादा वक्त नहीं देता tha...Lekin प्यार hi था शायद वो जो मुझे इस बात में उसका शिकायत भी नहीं दिखा.

धीरे धीरे उसकी प्यार भी अच्छा लगने laga...Aur उसके साथ अपना वो ग़म भी भूलने लगा और जिंदगी में वापस पहले की तरह लौटने लगा.

धीरे धीरे मैथ्स भी अच्छा hi लगने laga...Koi भी विषय हो ज्ञान तो देता hi hai...Kuch नया पढ़ने का लिखने का शौख तो हमेशा hi tha...Maths में भी अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर समझने लगा और अपना hi कॉन्सेप्ट्स बनाने laga...Dhire धीरे सब अच्छा लगने लगा.

और जब तू पैदा हुआ तो सोचा तेरा परवरिश और पढाई में कोई कमी नहीं आने dunga...Mera मेडिकल में सेलसेक्शन ना होने का एक वजह आज ये भी लगता है की मेरा इंग्लिश थोड़ा कमजोर था.

बस इसी वजह से तुझे जल्दी hi सेहर ले आया पढ़ाने के लिए ताकि तेरा पढाई में कोई रुकावट न आ paaye...Bas तुम दोनों की पढाई ख़त्म होने के बाद वापस से गांव में hi बस जाने का मन है.

आज सोचता हूँ मेडिकल तो गुजरा हुआ सपना है अगर आगे बढ़ा तो बहुत कुछ सिख पाऊंगा जिंदगी से और किताब से bhi...Bhale hi मैंने मेडिकल में एडमिशन नहीं लिया लेकिन आज भी कई साड़ी चीज मेडिकल रिलेटेड पढता रहता हूँ अच्छा भी लगता है.

बस कोई भी चीज हो किसी भी फील्ड ka...Interesting लगे तो सिखने की हर कोशिश करता हूँ.

इसी लिए हमेशा कहता आया हूँ सबसे बड़ा शिक्षक खुद जिंदगी hi है.

तू भी रीलीज़ करेगा कीर्ति के जाने के baad...Kya गलती हुआ है तुझसे और आगे की जिंदगी कैसे जीना hai...Ek कीर्ति गयी है कोई आएगी बाद में जो सच में तुझसे प्यार करेगी और जिंदगी भर साथ चलेगी.

सुमित:- समझ रहा हु Papa...Shayad आप सही कह रहे hai...Bas थोड़ा वक्त chahiye...Aap भी तो कह रहे है थोड़ा वक्त के बाद संभल जाऊँगा.
 
अपडेट 77

कुछ जल्दी hi नहीं आ गए आप डॉ. सुमित?

विकाश ने सुमित को देखते hi पूछ liya...Baaki सब ने राहत के सांस लिया.

मेघा:- इतने बड़े सर्जन जो hai...Lunch के लिए भी अलग से वक्त निकलना पड़ता है इन्हे.

कीर्ति:- तुम्हारे इंतजार में सुबह से भूखी हूँ.

सभी का जवाब सुनने के बाद सुमित ने थोड़ा सांस लिया और कीर्ति की और देख हँसते हुए कहा.

सुमित:- रोका किसने hai...Raj सामने hai...Isse hi खा जाओ.

राज:- भाई sahab...Uksaiye mat...Waise भी दिमाग बहुत खाती है ye...Aur आप है की पूरा का पूरा hi खा लेने की सलाह दे रहे है.

कीर्ति:- क्या मई तुम्हारे दिमाग खाती हूँ?

राज:- ओह्ह sorry...Tum तो खून चुस्ती हो :lol1:

कीर्ति:- रुको बाद में बताती हूँ तुम्हे.

ऐसे hi दोनों की नोक झोक पर सभी हसने लगते है.

राज:- देखा भैया aapne...Pyaar के साइड effect...Aap की hi जिंदगी सही चल रहा hai...Single लाइफ बेस्ट लाइफ.

राज ने मजाक को आगे बढ़ाया लेकिन ये सुनते hi सुमित का चेहरा भाव हीं हो गया.

राज ने भी जल्द hi समझते हुए.

राज:- सॉरी भैया.

सुमित:- कोई बात nahi...Aise hi सॉरी कहने लगा तो हमेशा सॉरी hi कहता रह जाएगा.

आदत दाल रहा हूँ अब्ब.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

सुमित:- अब्ब तुम्हे क्या हो गया?

कीर्ति को थोड़ा सीरियस देख सुमित ने पूछा.

कीर्ति:- वो तुम्हारी वाली कीर्ति से मिलना है.

सुमित:- क्यों?

कीर्ति:- मुंह नोचना है uski...Mera नाम बदनाम करके रख दिया है.

सुमित:- अब्ब उसने क्या कर दिया?

कीर्ति:- मुझे dekho...Kitna मस्त रहती hun...Jindagi के हर पल को एन्जॉय करती hun...Aur एक वो hai...Khadoos...Pata नहीं कैसे किसी का दिल तोड़ सकती है.

सुमित:- अब्ब इसमें उसकी क्या गलती? उससे मई पसंद नहीं हूँ तो वो क्या कर सकती hai...Khair अब्ब मई भी उससे आगे का सोच जिंदगी में आगे बढ़ रहा hun...Wo भी खुश मई भी खुश.

कीर्ति:- मतलब मेघा के चांस है.

अचानक से कीर्ति की इस बात पर 3 लोग हैरान रह जाते hai...Sumit, मेघा और विकाश भी.

सिचुएशन भी ऐसा ावक्वार्ड हो गया था की कोई कुछ नहीं बोल रहा था.

कीर्ति:- जोक्स apart...Tumhe ऐसे आगे बढ़ते देख बहुत अच्छा लग रहा hai...Tourist से स्टूडेंट तक का ये सफर सच में तारीफ़ के लायक है.

राज:- टूरिस्ट?

कीर्ति:- पहले 1सत ईयर में इनका दर्शन महीने में एक बार होता tha...Bilkul टूरिस्ट के jaise...Abb dekho...Internship में 1 मिनट का भी बंक नहीं.

सुमित:- पहले स्टूडेंट tha...Bunk मारना, मस्ती करना ये आम बात tha...Abb डॉक्टर हूँ, रेस्पोंसिबल होना तो पड़ेगा hi...Aur इंटर्नशिप hi है जिसमे जितना सिख पाऊंगा उतना अच्छा hoga...Baad में अकेले काम करना पड़ेगा और कुछ बेसिक नहीं आएगा तो शर्म से दुब मरने की हालात हो जाएगा.

विकाश:- और कितना रेस्पोंसिबल हो गया है ये तेरा कॉपी hi बता रहा है.

विकाश सुमित के हाथ से कॉपी उठा कर पेज पलटने लगता hai...Har एक टॉपिक का नोट.

तब तक सभी का लंच आ जाता है.

विकाश के हाथ से कॉपी मेघा लेती है.

और रैंडम्ली एक पेज पर लिखा कुछ पढ़ती है.

मेघा:- जनाब का अभी से पग (पोस्ट ग्रेजुएशन) का प्रिपरेशन चल रहा है.

टका.

राज:- अब्ब ये टका क्या है?

कीर्ति:- त्रिकार्बोक्सीलिक एसिड Cycle...1st ईयर Biochemistry....Itna भी नहीं pata...Padhaai के मामला में अभी भी नहीं sudhre...Bataati हूँ बाद में.

मेघा:- अभी से 1सत ईयर का रेविसिओं भी स्टार्ट.

सुमित:- नेक्स्ट पेज में जाओ.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

और जब मेघा नेक्स्ट पेज में पहुँचती है तो हैरानी में उसकी आँखें बड़ी हो जाती है और वो सुमित को सवालिया नजरो से देखती है.

सुमित:- तरीकीक्लिक एंटी डेप्रेस्सेंट (टका) 2ंद ईयर फार्माकोलॉजी.

ये सुनते hi सभी के मुंह से लगभग एक hi वक्त एक hi शब्द निकलता है, "क्या?"

विकाश:- अबे तुझे ये डिप्रेशन कब से हो गया? जो एंटी डेप्रेस्सेंट लेने लगा है?

सुमित:- पता nahi...Jo भी सिम्पटम्स देखता हूँ खुद में सभी डिप्रेशन के hi लग रहे है.

राज:- लेकिन डिप्रेशन की दवाई?

सुमित:- ले नहीं रहा hun...Lene का सोच रहा हूँ.

मेघा:- लेकिन साइड इफेक्ट्स?

सुमित:- दवाई है तो थोड़ा बहुत साइड इफेक्ट्स तो होगा hi...Waise भी मेरा कंडीशन जो है उसमें दवाई साइड इफ़ेक्ट से ज्यादा काम hi करेगा.

और जो भी साइड इफेक्ट्स है वो उतना भी नहीं होगा जो ग़म अभी सेह रहा हूँ.

कोशिश तो पूरा है की बिना दवाई के hi डिप्रेशन से बहार आ जाओ.

कोशिश भी कर रहा हूँ बहुत non-pharmacological मेझस के saath...Lekin आखिर में कुछ काम नहीं आया तो दवाई के सहारे hi काम चलना पड़ेगा.

किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या बोलना चाहिए.

सुमित:- कुछ महीने पहले जब साइकाइट्री वार्ड में था तब एक पेशेंट का काउंसलिंग किया था की अगर डिप्रेशन कण्ट्रोल से बाहर जा रहा है तो दवाई लेना chahiye...Abb बात खुद पर आ रहा है तो इंकार भी कैसे कर सकता हूँ?

इस बात पर भी कोई कुछ नहीं बोलता.

सुमित ने महसूस किया की अब्ब सब सीरियस हो गए hai...Maahaul को फिर से हंसी मजाक में बदल दिया usne...Hans तो सभी रहे थे लेकिन अंदर से सब अलग हो सोच में पड़े thhe...Jab उनसे रहा नहीं गया तो धीरे धीरे सबजाने लगे.

आखिर में सुमित और मेघा hi बाकी थे.

मेघा:- जान सकती हूँ इस मुस्कान की वजह?

सुमित:- तुम्हारे बारे में hi सोच रहा हूँ.

मेघा:- मेरे बारे mein...Kirti से फुर्सत मिल गया?

सुमित:- क्या तुम भी टांग खिंच रही हो?

मेघा:- अच्छा bataao...Kya सोच रहे थे मेरे बारे में?

सुमित:- अब्ब 2 दिन hi बाकी है हमारे इंटर्नशिप के लिए.

मेघा:- हाँ तोह?

सुमित:- खुश तो बहुत होगी तुम?

मेघा:- किस बात की ख़ुशी.

सुमित:- 2 दिन के बाद मुझे कभी देखना नहीं पड़ेगा और न hi कभी कोई irritation...Bahut परेशान किया है ना मैंने tumhe...College के पहले दिन से ले कर आखिरी दिन तक.

सुमित ने हँसते हुए hi कहा.

मेघा:- हाँ पहले थोड़ा बहुत परेशान थी tumse...Bilkul भी पसंद नहीं थे तुम.

सुमित:- अब्ब?

मेघा:- अब्ब तो और भी पसंद नहीं हो.

मेघा ने भारी दिल से kaha...Sumit की बात से उससे एकदम से याद आ गया की 2 दिन बाद यूँ तेज मुलाक़ात नहीं हो पायेगा.

सुमित को पाने की ख्वाहिश तो बहुत पहले hi भूल चुकी थी wo...Lekin अब्ब नजर से भी dur...Shayad ये उसने कभी सोचा भी नहीं था.

सुमित भी मेघा की दिल की बार से अनजान नहीं था.

मेघा:- सच कह रहे हो na...Kabhi दिखोगे तो नहीं?

मेघा अपने मजाक में भी दर्द छुपा नहीं पायी.

सुमित:- बिलकुल नहीं.

मेघा:- सच में बहुत खुदगर्ज़ हो चुके ho...Kya हम दोस्त सिर्फ कॉलेज तक hi थे?

सुमित:- मेरा दोस्ती जिंदगी भर के लिए होता hai...Lekin हालात ऐसे hi की कल क्या होगा इसका गारंटी नहीं दे सकता hun...Badalne की सोच रहा hun...Kitna बदल जाऊँगा ये भी नहीं पता.

अभी सब से दूर खुद में hi जीना चाहता हूँ कुछ वक्त के liye...Haan अगर कभी जरुरत पड़े तो एक आवाज dena...Tumhare लिए हमेशा तैयार हूँ.

मेघा:- अच्छा ये सब chhodo...Ye बताओ पग किस सब्जेक्ट में करोगे अब्ब तो मब्ब्स भी ख़त्म हो गया है.

सुमित:- सर्जरी.

मेघा:- कुछ और?

सुमित:- नहीं सिर्फ और सिर्फ सर्जरी.

मेघा:- नीस choice...Lekin रैंक भी बहुत अच्छा चाहिए सर्जरी के liye...Agar पहले बार में ना हो पाया तो?

सुमित:- कैसे नहीं होगा? पूरी जान दाल दूंगा म्हणत में और जिद्द bhi...Bahut हो गया compromise...Abb फिर से जिद्दी सुमित बनना hai...Surgery से कुछ भी काम नहीं.

अब्ब इश्क़, मोहब्बत की फ़ालतू की चक्कर में पड़ना hi नहीं hai...Kaam से मतलब है abb...MBBS का पढाई तो मजाक बना के रख दिया tha...Acche से padhunga...Surgeon banunga...Best Surgeon...Uske बाद जिंदगी के आगे के faisla...Shaadi सेटल वगेरा.

सुमित की इस बात में मेघा को अपने जवाब मिल gaya...Abb सुमित प्यार करना hi नहीं चाहता भले hi वो कितनी भी कोशिश कर ले.

अब्ब उससे भी लगा रहा था उससे भी आगे का सोचना chahiye...Apne ख़ुशी के लिए और सुमित की ख़ुशी के लिए.

सुमित:- तुम बताओ? किस सब्जेक्ट में पग करोगी?

मेघा:- मेडिसिन.

सुमित:- और डीएम (सुपरस्पेशलिटी)?

मेघा:- कार्डियोलॉजी.

सुमित:- गलत वक्त में पैदा हो गया.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- 10 साल छोटा होता तो मेरा दिल का इलाज तुम hi karti...Aur मुझे भी मौका मिलता इतनी अच्छी कार्डियोलॉजिस्ट से इलाज करवाने की.

मेघा ने इस बात पर कुछ जवाब नहीं दिया.

मेघा:- तभी कह रहे थे tum...Kisi से प्यार नहीं करोगे? क्या अभी भी वजह कीर्ति hi है?

सुमित:- Nahi...Sach कहु तो अब्ब हिम्मत hi nahi...Ek बाद हुआ गलती tha...Dusri बार वो भी galti...Baar बार हो रहा है तो ये बेवकूफी है.

प्यार शादी ये तो बाद की बात hai...Agar होना होगा तो हो jaayega...Lekin पढाई? जिंदगी एक मौका और दे रहा है एक अच्छा सर्जन बनने का, अपने सपने पूरा करने ka...Ye वक्त अब्ब निकल गया तो हमेशा के लिए निकल जाएगा.

मेघा को भी अब्ब अपने सवाल का हर एक जवाब मिल गया.
 
आपको स्पोइलर देना नहीं चाहता :D...Kuch उपदटेस और आगे जाइये स्टोरी के खुलने के साथ पता चलेगा आखिर भूल किसकी है, कितनी बार हुआ है और कैसे?

आपका ये क्वेश्चन आपका एनालिसिस को बहुत अच्छे से दिखा रहा hai...Aapke सवाल और कन्फूसिओं का जवाब तो है लेकिन ये स्पोइलर हो जाएगा fir...Thoda आगे जाने के बाद कुछ कन्फूसिओं और बढ़ेगा फिर सब क्लियर :अप्प्रोवे:
 
कामदेव भाई का उपाय और विचार तो मिल चुके hai...Afsosh है तो अब्ब इस बात का की उनका विचार अब्ब पढ़ने को नहीं मिलता :(...रियेक्ट करके hi निकल लेते है :क्राई: और जी...1000 तरीके भी काम पद jayenge...Itne तरीके से कोशा है मेरे मासूम चरक्टेर्स को की अगर कोई सुन ले तो कान से खून निकल कर मर जायेंगे :(
 
अपडेट 78

Tum...Kyu आये यहाँ? प्लीज जाओ यहाँ से.

सुमित का हाथ पकड़ कर मेघा ने kaha...Sumit अपना हाथ छुड़ाते हुए अंदर आ गया.

अंदर आते hi बहुत लोगों के भीड़ dikha...Sabhi खुश thhe...Koi खाने में व्यस्त था तो कोई अपने hi धुन में.

कुछ लोग थे जो आगे स्टेज में विवेक और कीर्ति को बधाई दे रहे थे और उनसे बातें कर रहे थे.

कीर्ति को देखते hi सुमित के चेहरे में एक मुस्कान आ गया.

चारो तरफ नजर दौड़ाते हुए.

सुमित:- सजावट काफी अच्छा है.

मेघा:- सुमित क्यों आये ho...Seh नहीं पाओगे तुम ये सब.

मेघा की आवाज में फ़िक्र था.

सुमित:- वादा किया tha...Nibhana तो पड़ेगा hi.

मुस्कुराते हुए सुमित न कहा.

मेघा की ध्यान सुमित की बातो से ज्यादा उसकी आँखों में था.

मेघा:- तुमने आज फिर पिया है?

सुमित:- (हँसते हुए) पिया तो नहीं है फिर भी पुरे नशे में हूँ.

मेघा:- कैसा नशा?

सुमित:- नींद ki...Saala इंटर्नशिप की आखिरी दिन भी मिगहत ड्यूटी रख दिया उन् लोगो ne...Pichle 30 घंटा से सोया नहीं hun...Shayad इस लिए आँखों में कीर्ति की प्यार से ज्यादा नींद की कमी दिख रहा है.

मेघा कुछ नहीं boli...Usse अभी भी दर था की सुमित कही कुछ हंगामा न कर दे.

सुमित:- खैर अब्ब तो आदत हो चुकी है.

मेघा:- किस चीज की?

सुमित:- दोनों hi चीज ki...Kirti की नफरत और नींद की कमी की भी.

अब्ब तो ऑफिशियली डॉक्टर hun...Neend की कमी और बिजी लाइफ schedule...Iski आदत तो हो hi jaayega...Acchi बात hai...Ye जिंदगी की बिच रास्ते में साथ तो नहीं छोड़ेगा.

फीका मुस्कान के साथ सुमित ने कहा.

सुमित:- पूछना hi भूल gaya...Tum कब आयी?

मेघा:- कुछ देर पहले.

सुमित:- चाओ aage...Kirti को कोंग्रटुलते भी तो करना है...

चेहरे में मुस्कान लिए सुमित इससे आगे कुछ नहीं बोलै.

मेघा सुमित को रोकने की कोशिश करती है लेकिन सुमित ने तो ठान hi लिया था की जो भी होगा वो देख लेगा.

वो सीधा कीर्ति की नजर के सामे फर्स्ट रौ की चेयर में बैठ gaya...Wo बैठा भी उस जगह था जहा उससे कीर्ति, उसकी पापा और विवेक तीनो ने देख liya...Lekin किसी ने कुछ कहा नहीं.

हैरानी में कीर्ति सोच में पद गयी की ये सुमित का प्यार है या जिद्द?

विवेक को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन फिर भी वो चुप hi रहा.

कीर्ति की पापा भी खुद को तैयार कर रहे thhe...Dil में ूँजे भी दर था की कही सुमित कुछ गड़बड़ ना कर de...Rishtedaar और दोस्तों के बिच शर्मिंदा होने का अलग hi दर सत्ता रहा था.

धीरे धीरे इंगेजमेंट का फंक्शन सुरु hua...Sumit अपने hi चेयर पर बैठे सब कुछ मुस्कुराते हुए hi देखने लगा.

कीर्ति को अजीब भी लग रहा था की सुमित ने अब्ब तक कुछ गड़बड़ नहीं किया.

मेघा को भी एक अनजाना सा दर लग रहा tha...Kabhi वो सुमित के पास आ कर उससे समझाती तो कभी कीर्ति के पास जा कर उससे कुछ बातें करती रही.

और जब वक्त रिंग सेरेमनी की आया तो जो भी सुमित को जानते थे उन्हें यकीं था की सुमित जरूर कुछ करेगा.

लेकिन उनके उम्मीद के ठीक विपरीत सुमित मुस्कुराते हुए hi सब कुछ देखता रहा.

और सभी रिश्तेदार और दोस्तों के बधाई देने के बाद सुमित के शरीर में हलचल सुरु हुआ.

वो अब्ब उठ कर स्टेज में गया और कीर्ति के पास जा कर धीरे ऐ बस इतना hi कहा.

सुमित:- कोंग्रटुलतिओन्स!!!

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया लेकिन अगले hi पल पीछे खिंच liya...Aur मुद कर वह से जाने लगा.

लेकिन थोड़ी देर आगे जाने के बाद वापस पलट कर कीर्ति के पास आ गया.

सुमित:- अगर दिल और दिमाग में कोई सवाल है तो पूछ सकती ho...Pata नहीं कही ये hi आखिरी मुलाक़ात साबित ना हो जाए.

मेरा तो कोई सवाल और गिला शिकवा बाकी नहीं है.

कीर्ति:- कुछ देर पहले तक तो नहीं tha...Aur तुमसे कोई मतलब भी तो nahi...Abb बस एक hi सवाल hai...Tumne कोई हंगामा नहीं किया इस इंगेजमेंट में?

सुमित:- प्यार किया है tumse...Tumhara ख़ुशी चाहता हूँ ना की तुम्हारी dukh...Agar इसी विचित्र प्राणी के साथ खुश हो तो यही सही.

अभी भी सुमित की आवाज में भरपूर प्यार था.

कीर्ति:- तुम्हे आज यहाँ एक्सपेक्ट नहीं किया था.

सुमित:- वादा किया था उस दिन की इंगेजमेंट के दिन aaunga...Fir क्या tha...Aa गया अपना वादा पूरा करने और हो सकता है आखिरी बार देखने के लिए भी.

कीर्ति:- आखिरी बार? कुछ hi दिन में शादी भी तो hai...Uss दिन भी आ सकते हो.

सुमित की हालात पर हँसते हुए कीर्ति ने कहा.

सुमित:- उस दिन के लिए वादा नहीं कर सकता.

कीर्ति:- क्यों? इतना hi हिम्मत रह गया है तुम में?

सुमित:- Himmat...Himmat की तो बात hi मत karo...Khud को बर्बाद कर देने तक का हिम्मत था मुझ mein...Khair अब्ब हिम्मत किसी और चीज के लिए बचा के रखा है.

कीर्ति:- क्या?

उत्शुकता बस कीर्ति की मुंह से निकल गया.

सुमित:- तुम्हारी बदकिस्मती जो ये तुम जान नहीं paaogi...Himmat बताने से ज्यादा कर के दिखाने में विश्वाश रखता हूँ जो की तुम कभी देख नहीं paaogi...Abb एक या दो पल aur...Bas उतने वक्त के लिए hi हम साथ है.

कीर्ति ने इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- मैंने अपना पोस्टिंग अस ा मेडिकल अफसर एक गांव में लेने का फैसला किया hai...Dates का पता nahi...Kabhi भी जाना पद सकता hai...Jyadatar चांस ये है की तुम्हारे शादी से पहले hi मुझे यहाँ से निकलना पद सकता है.

इसी लिए कोई वादा नहीं कर सकता की तुम्हारी शादी में आ पाऊंगा या nahi...Agar यही रहा तो जरूर aaunga...Vaada रहा.

कीर्ति:- नौकरी की बात आते hi प्यार gaayab...Jaanti थी तुम्हारा प्यार की गहराई को पहले से hi.

सुमित:- (मुस्कुराते हुए) प्यार अपनी jagah...Jimmedaari अपनी jagah...Ye बात भले hi देर से समझ में aaya...Lekin समझ में आ hi गया.

अगर दूसरी तरफ से भी कोई सच्चा प्यार करे तो सिर्फ प्यार का गहराई hi नहीं खुशियों की ऊंचाई भी दुनिया यार karega...Lekin अफसोश.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Kirti भी कुछ नहीं बोली.

सुमित:- अब्ब शायद तुम्हारा कोई सवाल नहीं hai...Accha चलता hun...Hameaha खुश रहना.

इतना कह कर सुमित वह से जाने laga...Bhaari दिल के साथ चेहरे में एक झूठा मुस्कान लिए वो अपने आखिरी नजर तक कीर्ति को देखते हुए वह से निकल गया.

मेघा:- (तो कीर्ति) अभी भी वक्त hai...Gusse में और नाराजगी में जाने वाले इंसान लौट कर वापस आ सकते है लेकिन मुस्कुराते हुए जाने वाले इंसान कभी वापस नहीं लौट ते है.

कीर्ति:- हु केयर्स?

वह से निकलने के बाद सुमित के आँखों में आंसू थे लेकिन दिल में एक santushti...Aisi संतुष्टि की अब्ब कुछ हो नहीं sakta...Sab कुछ ख़त्म हो चूका है हमेअह हमेशा के लिए.

अब्ब किसी तरह वो खुद को तैयार कर रहा था अपने जिंदगी के एक नए शुरुवात के लिए.
 
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