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रश्मि:- भैया गलती तो सच में आप का hi है.
पूरी कहानी सुनने के बाद रश्मि ने कहा.
सुमित:- बहुत बड़ी गलती hai...Itna की भले hi वो मुझे माफ़ कर de...Mai खुद को माफ़ नहीं कर सकता.
रश्मि:- आपने सच्चे दिल से माफ़ी मांग लिया है na...Wo माफ़ कर देगी.
सुमित:- माफ़ कर चुकी है wo...Lekin ऐसे माफ़ किया है जो मेरे लिए पचा पाना भी मुश्किल है.
रश्मि:- कुछ समझ में नहीं आया.
सुमित:- समझ तो मुझे भी नहीं आ रहा hai...Kya से क्या हो रहा है.
रश्मि अभी भी सवालिया नजरो से सुमित को देख रही थी.
सुमित:- तूने पूछा था न की क्या वो मुझसे प्यार करती है? जवाब है हाँ.
4 बार रिलेशनशिप में रहा hun...Bhale hi बस नाम का hi प्यार ho...Kaafi एक्सपीरियंस है.
ना खुश आवाज में सुमित ने कहा.
सुमित:- ऐसे में मेघा के फीलिंग से कैसे अनजान रह सकता hun...Har पल मेरे पास है wo...Uski हर बातों में मुझे उसका प्यार महसूस होता hai...Har पल मुझे आगे बढ़ने की हालातों से लड़ने की हौसला देती hai...Har पल मुझे खुश रखने की कोशिश में रहती hai...Bhale hi उससे मेरा इग्नोर करना कितना भी बुरा लगता ho...Fir भी मेरे लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहती है.
इतना pyaar...Kaise महसूस नहीं होगा?
आँख बंद करते हुए सुमित ने कहा.
रश्मि:- फिर आप उसके साथ hi क्यों आगे नहीं बढ़ जाते? क्यों उस कीर्ति के hi पीछे पड़े है?
सुमित:- क्यों की मई उस लायक नहीं समझता खुद को.
मेघा मुझसे इतना प्यार करती hai...Fir भी मई उसके सामने बहुत उनकंफर्टबले फील करता hun...Wo इतनी अच्छी है की उसके सामने जाते hi मुझे एहसास होता है मई कितना गलत हूँ.
रश्मि:- माफ़ तो कर चुकी है न wo...Abb जो भी गलती हो चूका है उससे भुला कर आगे badhiye...Uss गलती को अच्छाई से बदल दीजिये.
सुमित:- विश्वाश तोडा है uska...Abb भले hi उससे जोड़ भी du...Jab भी देखूंगा यही दिखेगा की कहा कहा से तोडा hai...Aur कहा कहा से जोड़ रहा हूँ.
गलती से भी दर्दनाक उस का पश्चाताप hai...Shayad डेसेर्वे भी करता हूँ.
ये पश्चाताप की आग किसी तरह सेह रहा hun...Agar मेघा से प्यार करने का भूल कर बैठा तो शायद ये आग कही मुझे जला न दे.
रश्मि:- क्या मतलब?
सुमित:- मई इस प्यार के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं hun...Aur मेघा का प्यार भी ऐसा है जो कर किसी का सपना होता hai...Koi तो हो जो हमे टूट कर प्यार kare...Aur यही सब सोच कर मेघा का प्यार अपना भी लू तो मेघा के साथ ना इंसाफ़ी होगा.
मई उससे कभी वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai तो ऐसा कन्फ्यूज्ड इंसान बन जाऊँगा और यही सोचता रहूँगा की मैंने कीर्ति के साथ गलत किया या मेघा के साथ?
आज कीर्ति से मेघा अच्छी लग रही hai...Kal मेघा के साथ किसी बात पर बहस हो गया और कोई और अच्छी लगने लगी तो मेघा को भी कही छोड़ ना du...Galat एक्साम्प्ले है ye...Bahut गलत.
कीर्ति से बड़े बड़े वाडे किया hai...Uska क्या मोल रह जाएगा?
समस्या से दूर भागना समस्या का हल नहीं hai...Ye तो ऐसा है जैसे आँख बंद कर लेने से ये सोच लेना की सूरज गायब हो गया hai...Uska कोई अस्तित्वा अब्ब है hi नहीं.
पिछले 2-3 सालिन में यही महसूस किया है की प्यार किया नहीं जाता है हो जाता hai...Jabardasti मेघा से प्यार करने का कोशिश भी तो नहीं कर सकता हूँ.
रश्मि:- फिर मेघा का क्या होगा?
सुमित:- वो तो मेरे समझ के भी परे hai...Abb तक तो उसको मुझसे इर्रिटेट हो जाना चाहिए tha...Uske दिल में अपने लिए नफरत भरने की एक नाकाम कोशिश भी कर चूका hun...Abb वो भी कोशिश नहीं कर सकता.
खैर आज नहीं तो कल उसका मेरे लिए प्यार ख़त्म हो jaayega...Yahi उम्मीद कर सकता हूँ अब्ब.
उसके लिए भी यही सही hai...Kab तक झूठी उम्मीद ले कर baithegi.Jab उम्मीद टूटता है बहुत दर्द होता hai...Mujhse ज्यादा कौन महसूस कर सकता है इस बात को.
रश्मि:- आपकी बात गलत नहीं hai...Fir भी ऐसा लग रहा है जैसे कुछ तो गलत होने जा रहा है.
सुमित:- अब्ब जो भी ho...Jyada फर्क नहीं padta...Papa की ये बात सही लग रहा hai...Kuch सवाल के जवाब वक्त के पास होता है.
बस अब्ब ये वक्त जहा ले chale...Kirti का इंतजार तो rahega...Lekin अब्ब उससे परेशान भी नहीं करना chaahta...Jo होगा उससे hi किस्मत मान lunga...Waise भी अब्ब ये प्यार का पागलपन वक्त के साथ काम होता जा रहा hai...Shayad बर्दास्त करना सिख लिया है.
बेफिक्र आवाज में सुमित ने कहा.
रश्मि:- भैया एक बात पुछु? मेघा अउ Kirti...Aapke बिचार में कौन सही है.
ऐसे hi रश्मि को ये ख्याल आया.
सुमित:- आज तक जज तो नहीं kiya...Kismein क्या अच्छाई है और क्या buraai...Aur कौन अच्छी है.
कीर्ति मेरी प्यार hai...Acchi तो वैसे भी वो लगेगी hi.
लेकिन Megha...Bahut अच्छी dost...Wo दोस्त जो शायद hi मई डेसेर्वे करती hun...Bahut काम लोगो में से है वो जिसके लिए दिल से रेस्पेक्ट आता है.
कीर्ति का प्यार मई डेसेर्वे करता हूँ लेकिन मेघा का दोस्ती? ये हमेशा से सवाल हो रहा hai...Mere लिए भी.
आँखें बंद कर के सुमित ने जो भी महसूस kiya...Wo बातों के जरिये कह diya...Ye जवाब रश्मि के साथ साथ खुद के लिए भी था.
आफ्टर 3 इयर्स
हैप्पी मकर संक्रांति
रश्मि:- भैया गलती तो सच में आप का hi है.
पूरी कहानी सुनने के बाद रश्मि ने कहा.
सुमित:- बहुत बड़ी गलती hai...Itna की भले hi वो मुझे माफ़ कर de...Mai खुद को माफ़ नहीं कर सकता.
रश्मि:- आपने सच्चे दिल से माफ़ी मांग लिया है na...Wo माफ़ कर देगी.
सुमित:- माफ़ कर चुकी है wo...Lekin ऐसे माफ़ किया है जो मेरे लिए पचा पाना भी मुश्किल है.
रश्मि:- कुछ समझ में नहीं आया.
सुमित:- समझ तो मुझे भी नहीं आ रहा hai...Kya से क्या हो रहा है.
रश्मि अभी भी सवालिया नजरो से सुमित को देख रही थी.
सुमित:- तूने पूछा था न की क्या वो मुझसे प्यार करती है? जवाब है हाँ.
4 बार रिलेशनशिप में रहा hun...Bhale hi बस नाम का hi प्यार ho...Kaafi एक्सपीरियंस है.
ना खुश आवाज में सुमित ने कहा.
सुमित:- ऐसे में मेघा के फीलिंग से कैसे अनजान रह सकता hun...Har पल मेरे पास है wo...Uski हर बातों में मुझे उसका प्यार महसूस होता hai...Har पल मुझे आगे बढ़ने की हालातों से लड़ने की हौसला देती hai...Har पल मुझे खुश रखने की कोशिश में रहती hai...Bhale hi उससे मेरा इग्नोर करना कितना भी बुरा लगता ho...Fir भी मेरे लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहती है.
इतना pyaar...Kaise महसूस नहीं होगा?
आँख बंद करते हुए सुमित ने कहा.
रश्मि:- फिर आप उसके साथ hi क्यों आगे नहीं बढ़ जाते? क्यों उस कीर्ति के hi पीछे पड़े है?
सुमित:- क्यों की मई उस लायक नहीं समझता खुद को.
मेघा मुझसे इतना प्यार करती hai...Fir भी मई उसके सामने बहुत उनकंफर्टबले फील करता hun...Wo इतनी अच्छी है की उसके सामने जाते hi मुझे एहसास होता है मई कितना गलत हूँ.
रश्मि:- माफ़ तो कर चुकी है न wo...Abb जो भी गलती हो चूका है उससे भुला कर आगे badhiye...Uss गलती को अच्छाई से बदल दीजिये.
सुमित:- विश्वाश तोडा है uska...Abb भले hi उससे जोड़ भी du...Jab भी देखूंगा यही दिखेगा की कहा कहा से तोडा hai...Aur कहा कहा से जोड़ रहा हूँ.
गलती से भी दर्दनाक उस का पश्चाताप hai...Shayad डेसेर्वे भी करता हूँ.
ये पश्चाताप की आग किसी तरह सेह रहा hun...Agar मेघा से प्यार करने का भूल कर बैठा तो शायद ये आग कही मुझे जला न दे.
रश्मि:- क्या मतलब?
सुमित:- मई इस प्यार के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं hun...Aur मेघा का प्यार भी ऐसा है जो कर किसी का सपना होता hai...Koi तो हो जो हमे टूट कर प्यार kare...Aur यही सब सोच कर मेघा का प्यार अपना भी लू तो मेघा के साथ ना इंसाफ़ी होगा.
मई उससे कभी वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai तो ऐसा कन्फ्यूज्ड इंसान बन जाऊँगा और यही सोचता रहूँगा की मैंने कीर्ति के साथ गलत किया या मेघा के साथ?
आज कीर्ति से मेघा अच्छी लग रही hai...Kal मेघा के साथ किसी बात पर बहस हो गया और कोई और अच्छी लगने लगी तो मेघा को भी कही छोड़ ना du...Galat एक्साम्प्ले है ye...Bahut गलत.
कीर्ति से बड़े बड़े वाडे किया hai...Uska क्या मोल रह जाएगा?
समस्या से दूर भागना समस्या का हल नहीं hai...Ye तो ऐसा है जैसे आँख बंद कर लेने से ये सोच लेना की सूरज गायब हो गया hai...Uska कोई अस्तित्वा अब्ब है hi नहीं.
पिछले 2-3 सालिन में यही महसूस किया है की प्यार किया नहीं जाता है हो जाता hai...Jabardasti मेघा से प्यार करने का कोशिश भी तो नहीं कर सकता हूँ.
रश्मि:- फिर मेघा का क्या होगा?
सुमित:- वो तो मेरे समझ के भी परे hai...Abb तक तो उसको मुझसे इर्रिटेट हो जाना चाहिए tha...Uske दिल में अपने लिए नफरत भरने की एक नाकाम कोशिश भी कर चूका hun...Abb वो भी कोशिश नहीं कर सकता.
खैर आज नहीं तो कल उसका मेरे लिए प्यार ख़त्म हो jaayega...Yahi उम्मीद कर सकता हूँ अब्ब.
उसके लिए भी यही सही hai...Kab तक झूठी उम्मीद ले कर baithegi.Jab उम्मीद टूटता है बहुत दर्द होता hai...Mujhse ज्यादा कौन महसूस कर सकता है इस बात को.
रश्मि:- आपकी बात गलत नहीं hai...Fir भी ऐसा लग रहा है जैसे कुछ तो गलत होने जा रहा है.
सुमित:- अब्ब जो भी ho...Jyada फर्क नहीं padta...Papa की ये बात सही लग रहा hai...Kuch सवाल के जवाब वक्त के पास होता है.
बस अब्ब ये वक्त जहा ले chale...Kirti का इंतजार तो rahega...Lekin अब्ब उससे परेशान भी नहीं करना chaahta...Jo होगा उससे hi किस्मत मान lunga...Waise भी अब्ब ये प्यार का पागलपन वक्त के साथ काम होता जा रहा hai...Shayad बर्दास्त करना सिख लिया है.
बेफिक्र आवाज में सुमित ने कहा.
रश्मि:- भैया एक बात पुछु? मेघा अउ Kirti...Aapke बिचार में कौन सही है.
ऐसे hi रश्मि को ये ख्याल आया.
सुमित:- आज तक जज तो नहीं kiya...Kismein क्या अच्छाई है और क्या buraai...Aur कौन अच्छी है.
कीर्ति मेरी प्यार hai...Acchi तो वैसे भी वो लगेगी hi.
लेकिन Megha...Bahut अच्छी dost...Wo दोस्त जो शायद hi मई डेसेर्वे करती hun...Bahut काम लोगो में से है वो जिसके लिए दिल से रेस्पेक्ट आता है.
कीर्ति का प्यार मई डेसेर्वे करता हूँ लेकिन मेघा का दोस्ती? ये हमेशा से सवाल हो रहा hai...Mere लिए भी.
आँखें बंद कर के सुमित ने जो भी महसूस kiya...Wo बातों के जरिये कह diya...Ye जवाब रश्मि के साथ साथ खुद के लिए भी था.
आफ्टर 3 इयर्स
हैप्पी मकर संक्रांति