Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 43 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

कुछ मित्रों ने यह प्रश्न किया था की क्या पिछले दो प्रसंगों के बाद गितवा और अरविन्द कहानी के बाहर हो जाएंगे,

इस पोस्ट से यह स्पष्ट हो गया होगा की ऐसा नहीं है , गीता और अरविन्द दोनों रहेंगे हाँ अब कहानी के बाकी पात्र एक बार फिर प्रमुखता में आएंगे

छुटकी, छुटकी की बड़ी बहन, उनकी ननद, सास और पति,... और गाँव की अन्य लड़कियां और औरतें,...

बस एक बात और

यह कहानी मजा पहली होली का, ससुराल में का सीक्वेल है और जहाँ वह कहानी खतम होती है छुटकी की अपने दीदी जीजा के साथ जीजू के मायके की ट्रेन यात्रा, वहीँ से ये शुरू होती है और पहले २७ भाग तक उसी तरह चलती है, होली और छुटकी की दीदी के गाँव के परिवेश में

मेरे कुछ मित्रों का आग्रह था मैं कभी इन्सेस्ट में भी लिखने की कोशिश करूँ

मजा पहली होली का, ससुराल में इसी बात से शुरू हुयी थी की इसमें कुछ भी अग्राह्य या टैबू, निषिद्ध नहीं होगा,... और यह कहानी उसी का सीक्वेल है तो

और छुटकी या उसकी दी का इन्सेस्ट का रिश्ता नहीं हो सकता था क्योंकि उनके कोई सगे भैया नहीं थे, इसलिए पहले नैना और सास की बात चीत में गीता का जिक्र आया

और भाग २७ से ५४ तक कहानी एक इन्सेस्ट कथा के रूप में ही चली,

और दूसरी बात

क्या इस कहानी में क्या आगे इन्सेस्ट प्रसंग नहीं आएंगे

हो सकता है आएं, लेकिन बस वो तड़के की तरह होंगे , अरविन्द और गीता की तरह भाग २७ से भाग ५४ तक चलने वाले नहीं जो लगभग एक कहानी के बराबर है

सभी मित्रों का आभार जिन्होंने मेरे बेबी स्टेप्स का इन्सेस्ट के क्षेत्र में सपोर्ट किया, सराहा।

अब बात होगी कुछ अगली पोस्टों में सिर्फ ननद भौजाई की कबड्डी की।
 
I am adding another video, of Mauri

two things were important in the previous song, ... andromorphic description of village pond, which has been raised to the status of deity, after Gauri Ganesh, it is the Pokhara or village Pond, which is being worshipped, and secondly lingo of the song has more khadi boli rather than Awadhi, showing change and continuity of the tradition.

Now in some places esp. in cities, there is no pond nearby so a small ditch is dug and one can see that how traditions metamorphose, but remain the same, change and continuity.

secondly mostly bawdy songs in village are sung when males are not there or male of other side ( bride or groom) but in this case women never bother about the presence of groom and tease the sis in law. Girls irrespective of the age are present. and more importantly bride never feels alone. Right in front of her and even groom daughters of the house are teased ( of course when songs reach beyond a point camera does close or gets edited).

and to me these rituals are very important rite de passage, help in understanding of our milieu, mores and traditions. my sole purpose of writing erotic was to pen stories which are based in our soil and should not look imported, with only change of name.

so please do look at the video and, it is a distraction, but story will continue from tomorrow pakka.

This is an explanatory Vlog from you tube which will throw some light on this custom.
 
भाग ५८ -

मंजू भाभी, मिश्राइन भाभी और स्ट्रेटजी

9,62, 626





deduplicate list online

बस छुटकी की दूसरी शर्त का मैंने फायदा उठाया और उसे समझा दिया की मैच के दौरान या उसके ठीक पहले, वो गीता को,... गीता कबड्डी में आएगी तो उसके सामने छुटकी ही ,... बस शर्त के मुताबिक़ वो छुटकी को मार नहीं सकती और छुटकी के आगे हार मान जाती,... मेरी बड़ी मुश्किल सुलझ गयी।

तबतक मंजू भाभी, रामजनिया और कजरी की भौजी आ गयीं,... और मंजू भाभी ने और रमजनिया ने ननदों की स्ट्रेटजी के बारे में बताना शुरू कर दिए।

मंजू भाभी ने पिछले चार साल से कबड्डी खेली थी और दो साल तो वो वाइस कैप्टेन भी थीं.

रमजनिया खेलती नहीं थी क्योंकि अब तक खाली बबुआने क लड़कियां और औरतें, लेकिन रहती जरूर थी और मुझे उसकी नज़र और अकल दोनों पे भरोसा था. उसी के भरोसे मैंने चंदू का किला जीता था वरना पूरे गाँव की औरतों ने ऐसा चैलेन्ज दिया था की उसका लंगोटा खुलवाना बड़ा मश्किल है और अब ननदो की शलवार स्कर्ट खुलवानी थी, ....

बात मंजू भाभी ने शुरू की और रमजानिया बीच बीच में जोड़ती जा रही थी,...





deduplicate list online

सारांश ये था की जब कोई भौजाई जाती थी तो वो घेरा चौड़ा के अर्द्ध चंद्राकार बना लेती थी, और सबसे कमजोर कच्ची उमर की लड़कियां एकदम सेंटर में पाल्हे से सबसे दूर,... बस वो भौजाई को उकसाती और भौजाई को लगता की उसे छू के भागना आसान है , बस वो और अंदर और अंदर जब उसे छू के लौटने लगती तब तक गीता और बाकी सब पीछे से कूद के ,... दो सबसे मोटी पहले ऊपर चढ़ जातीं और फिर वो दुर्गत बस थोड़ी देर में हाथ उठा के वो हार मान लेती

"लेकिन जब उनकी ओर से कोई आता तो ,"

छुटकी ने पूछा वो तो रीजनल रैली में मेडल जीत के आयी थी कबड्डी का,स्टेट में अंडर १५ में सेलेक्शन बस होते होते रह गया।कुछ दिन पहले की ही तो बात है।





deduplicate list online

और अबकी जवाब रमजनिया ने दिया,...

' अरे वो छिनार सब बहुत चतुर चालाक , ख़ास तौर से गितवा और नैना,... वो सब जानती थीं की भौजाई सब तो दिन भर चूल्हा फूंक फूंक के और रात भर मर्दो के साथ रतजगा कर के, चार चार बच्चे जन के दूध पिया के, ताकत तो होगी नहीं ज्यादा, और ननदें सब चढ़ती जवानी,... तो बस आतीं तो वहीँ लाइन पार कर के खाली इधर उधर, इधर उधर,... पहले चार पांच बार तो बस छकाती,.. सांस भी उन सबो की ज्यादा,... बस भौजाई सब थोड़ी देर में थकने लगती और वो सब इस लिए नहीं आतीं थी की मारेंगी बस थकाने,... और जब थकी भौजाई उधर जाती तो दबोच लेतीं। भौजाई लोग शुरू में ही अपनी सब तगड़ी तगड़ी तो उसमें से आधा तो,... बस उसके बाद जो लड़की आती वो जानती थी की अब ये सब थकी हैं तगड़ी सब ख़तम है तो बस मार के चली जाती।

तब तक कजरी की भौजी भी आ गयी थी,गुलबिया, हमरे नाउन की बहुरिया





deduplicate list online

वो पिछले साल ही होली के पहले गौने से आयी थी और पिछले साल की कबड्डी में दर्शक के तौर पे थी उसने भी रामजनिया की बात की ताकीद की और ये जोड़ा की हमने ये देखा की उ गितवा, दो तीन भौजाई तो छुड़ा के करीब पाल्हा तक लेकिन गितवा अकेले और पता नहीं क्या बोली की वो हाथ पैर ढीला छोड़ दीं और फिर बाकी सब लड़कियां पकड़ के छाप लीं।

अब मेरी आँख खुली, गितवा की ट्रिक

जो थोड़ी जवान भौजाई थीं गितवा क भाई अरविंदवा सब पे चढ़ाई किया होगा, और किसके जांघ पे तिल है, किसके दायीं चूची पे किसकी गाँड़ कहाँ कहाँ मारा है सब गितवा को बताया होगा और वही बात गितवा उनके कान में की भौजी जोर से बोल देईन कब ट्यूबुलवा पे हमरे भैया से चोदवाई हो, मालूम भले सबको हो, लेकिन वहां सास भी उसकी रहतीं और बाकी औरतें, बस, और कम से कम मिनट भर के ध्यान तो हट ही जाता है और कबड्डी में इतना टाइम बहुत है हार जीत का अंतर् करने में।





deduplicate list online

और अपनी स्ट्रेटजी बनाने में इसका मुझे ध्यान रखना होगा वैसे भी अब टीम में तीन चार ही पुराने लोग रह गए थे।

तब तक बाकी लोग भी आगए, चमेलिया, अरे वही कुसुमा, कल्लू क मेहरारू मेरी बाकी जेठानियाँ और एक बार फिर मज़ाक चालू लेकिन मंजू भाभी ने फिर से स्ट्रेटजी की बात शुरू की ,..

हाँ ये फायदा हो गया था की इन पुराने लोगों से मुझे ननदों की टीम में कौन ११ होने वाले हैं सबका अंदाजा मिल गया।

लेकिन थोड़ी देर में बाकी लोग भी आ गए और टीम पूरी हो गयी.

पुरानी टीम में से मंजू भाभी के अलावा सिर्फ मिश्राइन भौजी और दूबे भाभी थीं,





deduplicate list online

और वो भी इसलिए की जब मैं रमजानिया, नाउन क बहू कजरी का भौजी और चमेलिया को जोड़ने की बात कर रही थी उन्ही दोनों ने मेरा सपोर्ट किया और ये भी कहा की बहुत हो गया अबकी कुछ भी हो ननदों को हराना ही होगा, और उसके बाद रगड़ रगड़ के वो नंगा नाच करवाया जाएगा की, मंजू भाभी ने बताया की दोनों लोग पिछले साल भी लेकिन जब टीम का कप्तान ही हारने पे तुला हो तब भी मंजू भाभी के साथ ये दोनों लोग मुकाबला कर रही थीं.
 
स्ट्रेटजी- ननदों की, नैना की





deduplicate list online

लेकिन थोड़ी देर में बाकी लोग भी आ गए और टीम पूरी हो गयी. पुरानी टीम में से मंजू भाभी के अलावा सिर्फ मिश्राइन भौजी और दूबे भाभी थीं, और वो भी इसलिए की जब मैं रमजानिया, नाउन क बहू कजरी का भौजी और चमेलिया को जोड़ने की बात कर रही थी उन्ही दोनों ने मेरा सपोर्ट किया

और ये भी कहा की बहुत हो गया अबकी कुछ भी हो ननदों को हराना ही होगा, और उसके बाद रगड़ रगड़ के वो नंगा नाच करवाया जाएगा की, मंजू भाभी ने बताया की दोनों लोग पिछले साल भी थीं लेकिन जब टीम का कप्तान ही हारने पे तुला हो,... तब भी मंजू भाभी के साथ ये दोनों लोग मुकाबला कर रही थीं.

और आज उन दोनों लोगो ने बहुत काम की बाते बतायीं जैसे हमें सामने वाले टीम के ११ नहीं बल्कि १५ लोगों के बारे में सोचना चाहिए, ...

अबकी नैना है तो वो अपनी पसंद और दो चार नई नई कम से कम टीम में जोड़ेगी वो तो पिछले साल वाली टीम के साथ साथ, और नाम दूबे भाभी ने चटपट गिनवा दिए पांच -छह लड़कियों के, और चमेलिया और रमजनिया उन दोनों ने अपनी बात जोड़ी की उनमे से कौन चार होंगी। सब की सब कच्ची कली, टिकोरे बस आना शुरू ही हुए थे। नैना समझती थी की उनके गेम के बारे में हमें पता नहीं होगा, अभी छोरिया हैं तो भागने में कन्नी काटने में बहुत फुर्ती होगी,... इसलिए सरप्राइज पैकेज के तौर पे तीन चार नयी खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करेगी,... जैसे हम लोग प्लानिंग कर रहे हैं वो भी अपनी स्ट्रेटजी गितवा के साथ मिल के बना रही होगी।





deduplicate list online

बस अब पंद्रह नाम हमारे पास थे सामने की टीम के, नैना ननदिया की कप्तानी में ननदों की टीम के जिन्हे न सिर्फ आज सालों बाद हम भौजाइयों को हराना था बल्कि उन ननदों को नंगा नचाना था और अगवाड़ा पिछवाड़ा दोनों चौड़ा करना था। रोज इन ननदों के भैया भौजाइयों की लेते थे, आज हमारी बारी थी इन ननदों की लेने की।

और हमारी टीम की जीत दिलाने में हमारे चार सरप्राइज खिलाडी भी इम्पोर्टेन्ट होने वाले थे,... तीन जिन का नाम मैंने सजेस्ट किया था, कलुआ की मेहरारू चमेलिया, कहारिन,

उसका मर्द घर के कुंवे पे पानी भरता था , जो गाँव में अकेली मेरी देवरानी थी, उम्र में भी मुझसे छोटी,





deduplicate list online

नाउन की बहू और कजरी की भौजाई गुलबिया उम्र में मेरी समौरिया ही होगी, पिछले साल डेढ़ साल पहले गवना आया था, मरद पंजाब कमाने गया था,...





deduplicate list online

और रमजनिया मुझसे उमर में चार पांच साल बड़ी होगी, लेकिन पटती बहुत थी मुझसे और गाँव में सबके घर का भेद अगर किसी को मालूम था तो रमजनिया को और उसी की बदौलत चंदू का किला मेरा मतलब है लंगोट भेद पायी थी और जो बीड़ा मैंने सब जेठानियों को कहने पर उठाया था , चंदू का ब्रम्हचर्य खतम करने वाला,...





deduplicate list online

लेकिन उन तीनों से बीस निकली चौथी, जिसका नाम मंजू भाभी ने जुड़वाया था, चननिया,

अहिराने की, देखा तो मैंने पहले था कई बार लेकिन इन तीनों की तरह मेरी भेंट मुलाकात नहीं थी. उमर में रमजनिया क समौरी, लेकिन देह से बहुत तगड़ी खूब कर्री,... और दांव पेंच में भी कई बार रतजगे में देखा था, अहिराने , और भरौटी की दो चार बियाहता ननदें भी मिल के , बाएं हाथ से उनको निपटाती थी और दाएं हाथ से उन सबके पेटीकोट का नाड़ा खींचती थी बल्कि तोड़ देती थी और सारी रात क्या कोई मरद चोदेगा,... मैं तो नयी बहुरिया थी , एक दो बार सास के साथ रतजगे में गयी थी तो देखा था और आज भी मैच के पहले जो जो बातें उसने बोली





deduplicate list online

अब जिन मेरी जेठानियों को लगता था की मेरा अति उत्साहहै, मैं नयी हूँ अभी कितना दिन हुआ है आये,... मैं लाख कोशिश करूँ जीतेगी तो नैना ननदिया ही , वो भी मान गयीं की पासा आज पलटेगा।

चननिया ने एक से एक ट्रिक बताई , खासतौर से मेरी दो जेठानियों को जो मुझसे दो चार साल ही बड़ी थी और उन्हें और वो लोग ध्यान से सुन रही थीं।

मैं भी साथ ही ये सोच रही थी की अब ननदों की ट्रिक तो पता चल गयी थी उनकी टीम का भी अंदाज लग गया था तो मार्किंग भी कर लेनी चाहिए,... उनकी टीम की सबसे तगड़ी दो खिलाड़ी थीं, नैना और गीता दोनों छरहरी, गन्ने और अरहर के स्कूल की चैम्पियन, खूब तगड़ी, सारे दांवपेंच और देह के साथ दिमाग भी उसी तरह से तेज,... और अब नैना बियहता हो गयी थी तो गितवा ही ननदों की , न खाली बबुआने की बल्कि चमरौटी, भरौटी, अहिरौटी, सब की, तो इन दोनों के लिए,...सिर्फ मैं ही नहीं सब भौजाइयां सोच रही थीं अगर ये दोनों किसी तरह से पार लग जाएँ तभी,...

और जो एक दम कोरी चार ननदें थीं, छुटकी की उमर वाली कच्ची अमिया,... कच्चे टिकोरे देख के खाली लौंडो का पैंट नहीं टाइट होता हम भौजाइयों के मुंह में भी पानी आता है, इनके साथ चुसम -चुसव्वल खेलने में, बस आ रही कच्ची अमिया पे ठोर लगाने में कितना मजा आएगा,...





deduplicate list online

उनके लिए टीम की दो सबसे सीनियर मेंबर्स को लगाया, और ये सुन के वो दोनों लोग एकदम खुस आखिर कच्ची अमिया किसे नहीं अच्छी लगती कुतरने के लिए , भोग लगाने के लिए,... लेकिन उनका काम था जब वो सब आएँगी तो बस उन्हें ललचाना अपने को छूने की लिए , और उनकी टीम हमारी टीम के इन्ही दोनों को सबसे कमजोर मानती इसलिए उन कच्ची कलियों को शुरू में ही भेजेगी, हाँ लेकिन असली खेल करतीं चमेलिया और गुलबिया, कजरी क भौजी वो दोनों पीछे से गपुच लेतीं ,

और चननिया ने याद दिलाया असली खेल है कपडे फाड़ने का उतारना नहीं, फाड़ देना , एक बटन खोले , दूसरी फाड़ेगी और तीसरी चीथड़े चिथड़े कर के सामने वाली टीम की ओर जिससे कमजोर दिल वाली ननदें जब आएं तो पकडे जाते ही हार मान ले,

और झाड़ना भी है , हँसते हुए मैंने याद दिलाया।





deduplicate list online

एक बार कोई खिलाड़ी झड़ गयी या उसने हार मान लिया तो बस वो दुबारा जिन्दा नहीं हो सकती , लेकिन उसके लिए चार मिनट का समय ही था,... अगर चार मिनट में उसने हार नहीं मानी या नहीं झड़ी तो वो खेल से बाहर हो जायेगी लेकिन दूसरी टीम का कोई खिलाड़ी जब मरेगा या खेल से बाहर होगा तो उसके बदले में विपक्षी टीम अपनी टीम के किसी भी खिलाड़ी को जो खेल से बाहर होंगे उन्हें जिन्दा कर सकता है या खेल में वापस ला सकता है लेकिन अगर वो झड़ गयी है या उसने हार मान लिया है तो वो खेल से हमेशा के लिए बाहर ,

अबकी दोनों पुरानी टीम मेंबर एक साथ बोलीं पक्का झाड़ दूंगी वो कच्ची कलियाँ है

लेकिन मुझे उन दोनों से ज्यादा गुलबिया और कल्लो की मेहरारू मेरी देवरानी चमेलिया पे भरोसा था कितनी बार पांच मिनट में वो मुझे चूस चूस के झाड़ चुकी है।ऊँगली से ज्यादा जीभ चमेलिया की, और पूरी देह, सबसे बड़ी बात गुलबिया और चमेलिया दोनों की पकड़, वो सँड़सी जिससे बड़ा बड़ा बटुला भी उतर जाता है, उससे भी तगड़ी थी और इन कच्ची अमियों की ककड़ी सी कलाइयां जब इन दोनों की पकड़ में आ जाएंगी तो बिना झड़े,... दो मिनट में पानी फेंक देंगी स्साली सब,...
 
जीत के बाद- ननद पर चढ़ेंगे देवर





deduplicate list online

लेकिन मैं मान गयी,... जो मेरी दो जेठानियाँ मुझसे थोड़ी ही बड़ी, एकदम अर्जुन की तरह चिड़िया की आँख देखती थीं सीधे मुद्दे पर आ गयीं,

" अरे असली बात है स्साली छिनरों को झाड़ने की, जो चुदी चुदाई हैं अपने भाइयों से चुदवा के उनको झाड़ने में थोड़ा टाइम लग सकता है लेकिन जो एकदम कच्ची कलियाँ है ,... "

और रमजानिया और कजरी की भौजी, नउनिया बहू ने तुरंत फिर से कन्फर्म किया चार, नाम एक एक का बता के, अभी भी अनचुदी हैं, हाँ लेने लायक पूरी हैं , झांटे भी आ गयी हैं और हर महीने बिना नागा खून खच्चर भी होता है , और बाकी चार जो रिजर्व खिलाड़ी हैं उनमे भी दो,...





deduplicate list online

और अब दूबे भाभी मैदान में आ गयीं, और उन्होंने मेरी जेठानियों को बात की ताकीद की, इसी होली में उन सब ननदों की चड्ढी उन्होंने फाड़ी थीं,... अब बिना बुर रंगे ननद भौजाई की होली तो पूरी नहीं होती, ... बोलीं अब आएगा मज़ा ननद सालियों को मजा, होली में तो चड्ढी फाड़ के लाल गुलाबी रंग उन सब की चुनमुनिया में लगा था अबकी सफ़ेद रंग वो भी अंदर तक, ...

मंजू भाभी उनकी पक्की सहेली, हमारी कप्तान, हँसते हुए बोलीं अरे ननदें तो नंगी पुंगी ही अच्छी लगती हैं,...





deduplicate list online

मैं क्यों चुप रहती मैंने भी अपनी मन की बात कह दी, उनके भैया का पहला मुद्दा होता है हम सब के कपडे उतरवाने का तो आज हम लोगों का मौका है, हम लोग जीतेंगी भी, ननदों को नंगा नचाएंगी भी,...

तो पहला प्लान यही बना की हर ननद पे डबल नहीं बल्कि ट्रिपल अटैक होगा, एक भौजाई चूँची रगडेगी,... दूसरी ऊँगली करेगी और तीसरी चूस चूस के थेथर करेगी तभी चार मिनट में झाड़ पाएंगे हम लोग,...





deduplicate list online

और यह सोच सोच के सब भौजाइयां एकदम खुस आज आएगा मजा, जो स्साली रतजगे में छिटक के भाग जाती थीं उन्हें खुले मैदान में सबके सामने रगड़ने का मजा, दिखा दिखा के ऊँगली करने का मज़ा,... नैना और गितवा तो पकड़ में ही नहीं आती थीं और ये सब कच्चे टिकोरे भी,... आज कुछ भी हो हम सब जीत के दिखा देंगे,...

लेकिन मैंने वीटो लगा दिया नहीं,...

वो चार,जो बारी कुँवारी है, जिनकी अभी तक नहीं फटी है, चुनमुनिया कोरी है,... एक बार भी लंड का स्वाद नहीं लिया उनको चूस के ही झाड़ा जाएगा, ऊँगली नहीं होगी."





image upload

अब सब सन्न, होली में भी ननदों के ऊँगली नहीं होगी तो कब होगी, ...

फिर दूबे भाभी बोलीं, मिश्राइन भाभी के बाद उमर में सबसे बड़ी, शायद यह सोच के की मैं नहीं चाहती की जिन बेचारियों ने अपना कुंवारापन बचा के रखा है, साजन के पास ले जाने के लिए उन्हें हम क्यों फाड़ के,... और शायद एक अच्छी सलहज की तरह मैं अपने होने वाले नन्दोईयों का भला सोच रही होऊं, इसलिए ऊँगली से फाड़ने को मना कर रही हूँ,... मुझे प्यार से समझाती,

" अरे नयको, तुम नयी आयी हो न साल भर का छह महीना नहीं हुआ, तोहें यह गाँव क रिवाज और ननदों का चाल चलन नहीं मालूम, आज तक कोई ननद इस गाँव की बिना फड़वाये गौने नहीं गयी, और आधी तो आठ महीने बाद लौटती हैं तो कोरा में एक, ... और हम सब सकल मिलाते हैं की बच्चे की सकल उसके किस सगे, चचेरे भाई से मिलती है,... तो तोहरे बचाये से ये कउनो ननद बचेंगी नहीं, अगली होली तक ये कच्ची अमिया वाली दस पांच लौंडे चढ़वा चुकी होंगी अपने ऊपर। "





image upload

मैंने दूबे भाभी से बड़े आदर से कहा,

" आप जो कह रही हैं एकदम सोलह आना सच है, लेकिन बस एक बात अगली होली तक काहें, ....ये सब बेचारी हमारी प्यारी दुलारी ननद हैं रोज हमको चिढ़ाती है रात का हाल चाल पूछती हैं,... अरे रंग पंचमी में तो अभी दो दिन बाकी है न , बस सी रंगपंचमी के ख़तम होने के पहले ही कउनो ननद नहीं बचेगी, बिना फड़वाये, हमरे जेठानी का हुकुम,... और जंगल में मोरा नाचा किसने देखा तो कब रात में अमराई में,... दिन में गन्ने के खेत में कौन चाप दिया पता भी नहीं चलेगा न,... तो आपकी आँख के सामने, अरे हम गुलबिया चमेलिया हाथ गोड़ पकड़ के अपनी जेठानी लोगन के सामने, जउनो कउनो स्साली मना न करे की हमने नहीं फड़वाई है,.... लेकिन बस आज कबड्डी में ऊँगली से फाड़ने के लिए,... "





deduplicate list online

लेकिन जो मैंने प्लान बताया फिर तो सब हो हो कर के,... और मंजू भाभी ने मेरी ओर तारीफ़ की नजरों से देखा,...क्या देवरानी है

मैं बोली,

" अरे रंग पंचमी आज ख़तम थोड़े हो रही है असली हंगामा तो कल होगा जब देवर लोग भी होंगे,...हाँ आज हम सब जीते रहेंगे तो कल भी, ननदों को भौजाइयों का हर हुकुम मानना पडेगा,,... आज तो रगड़ाई होगी ही स्सालियों की कल भी,... ( उस दिन सास और सब लोग नहीं होते थे, देवर भौजाई और ननद ) तो बस उन छिनरों पे उनके भाइयों को चढ़ाएंगे , ... एक तीर से दो शिकार, बहिनचोद देवरों से उनकी बहिन अपने सामने चुदवायेंगे, स्साले सब बहिनो की चूँची आते ही ताड़ना शुरू कर देते हैं, सोच सोच के मुट्ठ मारते होंगे तो खुल के हम लोगों के सामने ही, अपनी बहिनिया की ,... और वो कच्ची कुंवारी अपना कुंवारापन अपने भाई के हाथ भौजाइयों के सामने ही न्यौछावर करेंगी, कहीं कोने अंतरे, बँसवाड़ी में झाड़ी झंख़ाडी में नहीं,...

जब तक भौजाई देवर से ननद की न फड़वाये तब तक कौन होली, स्साली एक बार हम सबके सामने अपने अपने भाइयों से चुदवा लेंगी, मोबाइल में फोटो वीडियो सब तो साल भार निगाह नीची कर के,... उस के बाद हम सब के भाइयों के आगे खुद शलवार का नाड़ा खोलेंगी , "





deduplicate list online

सबसे ज्यादा दूबे भाभी खुश मुझे अँकवार में भरती बोलीं,

"मान गए नयको तोहार सास देख सुन के अइसन बहुरिया लायी हैं जो आज तक नहीं आयी। आज ननदों क हार पक्की। "

" एकदम लेकिन वो स्साले देवर अपनी बहिनिया चोदने के लिए,..... "किसी ने वाजिब सवाल खड़ा किया

लेकिन जवाब कल्लू बो, चमेलिया के पास पहले से तैयार था,गाँव में मेरी अकेली देवरानी, उसकी भी पहली होली थी, ...

" काहें नहीं , अरे ससुरों को पहिले भांग पिला पिला के धुत्त कर देंगे , ... फिर आँख पे उनकी बहनों की ही फटी शलवार बांध देंगे,... उसके बाद जब चुदाई होने लगेगी, झड़ने का टाइम आएगा तब पट्टी खुलेगी,...तब पता चलेगा की जिसको चोद रहे हैं वो न भौजाई है न नयकीभौजाई क छुटकी बहिनिया, बल्कि उनकी अपनी सगी बहिनिया, जिसके टिकोरे देख देख के वो मुट्ठ मारते थे,... फिर झड़ते समय कौन मरद लंड निकालता है ,... "





image upload

चमेलिया की बात सुन के एक बार खूब हो हो हुआ और मंजू भाभी ने छुटकी मेरी छोटी बहिनिया को प्यार दुलार से देखते हुए चिपका लिया, आज की कब्बडी में छुटकी का बड़ा रोल था न सिर्फ गितवा को चित्त करने के लिए बल्कि गाँव में किसी को नहीं मालूम था,..

. की वो कबड्डी की रीजनल चैम्पियन टीम में है, और स्टेट लेवल पे अंडर १५ में बस इसलिए होते होते रहगया था की फेडरेशन के जो बॉस थे, ... जिस लड़की को उन्होंने लिया,... 'उसकी असल में भी लिया', और उसकी माँ उनकी पुरानी रखैल थी, और जब एक दो सेलेक्टर्स, और टीम की कप्तान ने बोला भी तो समझा दिया की अरे जिसको सेलेक्ट किया है वो इसी साल ओवरएज हो जाती, तो उसको रिजर्व में रखना,... मत खिलाना, स्टेट का सर्टिफिकेट रहेगा तो नौकरी में कालेज में एडमिशन में हर जगह मदद मिल जायेगी, ... फिर छुटकी का अगले साल,...





image upload

और अब चमेलिया ने देवरों को लुभाने ललचाने में, ...और मेरी बहन है भी ऐसी, जब से हम लोग स्टेशन पर उतरे हैं हमारा गाँव तो छोड़िये, ... आस पास के गाँव जवार में भी उसी की चरचा,... चेहरा तो लगे दूध के दांत नहीं टूटे और जोबन जबरदंग,...

. ..





deduplicate list online

"एकदम सही बोल रही है , और सालियों की गाँड़ भी मरवा देंगे उनके भाइयों से ," मेरी एक बड़ी उम्र की जेठानी हँसते हुए बोलीं,...

और मेरा ध्यान देवरों की ओर चला गया, मिश्राइन भौजी के यहाँ से होली खेल के जब हम भौजाइयों की टोली वापस आ रही थी,तीन दिन पहले की ही तो बात है

सब के सब भांग में टुन्न, तीन चार गिलास से कम डबल भांग की डोज वाली ठंडाई न किसी ननद ने पी न भौजाई ने,... रस्ते में एक लड़का दिखा,...

इन्ही दूबे भाभी ने ललकारा मुझे,...

" अरे नयको देखा स्साला बच के ना जाए, अरे पजामा फाड़ के देख, इस नयी उमर की नयी फसल का अभी खड़ा वड़ा होता भी है नहीं, मशीन से पानी निकलता है की नहीं,... "





image upload

बस फिर क्या था, हम भौजाइयों ने उसे छाप लिया,... दो चार ने दौड़ाया, वो गन्ने के खेत की ओर भागा और वहां मैं पहले से खड़ी थी,... आँचल से कालिख और रंग निकाल के हाथ में लगा के तैयार और उसे दबोच लिया,...





image upload

दोनों हाथों ने पहले तो चेहरे की रंगाई पुताई,... फिर और जब उसका हाथ चेहरे पे,... वही तो मैं चाहती थी, जो काम मैं सुबह से ननदों की शलवार से कर रही थी वही देवर के पाजामे से किया, नाड़ा खोला नहीं, तोड़ दिया,... पाजामा सररर नीचे,... स्साले ने अंदर भी जांघिया पहन रखी थी, ... उसके नाड़े की भी वही हालत,... और वो भी सररर कर के,... और पल भर में पाजामे और जांघिया दोनों के दस दस टुकड़े अलग अलग दिशा में गन्ने के खेत में,

और पकड़ के हिलाते मैं बोलीं,

"बाबू बहुत लुका के रखे थे कउनो खास चीज है का, अपनी बहिन के लिए बचा रहे थे की महतारी के लिए,... "





image upload

तब तक रज्जो भाभी ने पहिचान लिया, मुझसे थोड़ी ही बड़ी, मेरी ही पट्टी की, बोलीं, स्साला ये तो सुनितवा क छोट भाई हो,...





image upload

दूबे भाभी खिलखिलाते हुए मुझे देख रही थीं, वहीँ से गुहार लगाई, अरे नयको देख नूनी है की लंड,...

मोहिनी भौजी बोलीं, वो भी मुझसे दो साल पहले ही गौना आई थीं,...

अरे नूनी होगा तब भी छोड़ थोड़ो देंगे,... देवर होली में पकड़ में आया है,... अरे अपनी बहन के भोंसडे में छिपते तो वहां से भी निकाल के ले आती,...





image upload

मैंने एक झटके में खींच के सुपाड़ा खोल दिए, ... बेचारा बहुत घबड़ा रहा था लेकिन मेरी पकड़ में आ गया था चारों ओर से भौजाइयां घेरे खड़ी थी, एक बड़ी उमर की मेरी जेठानी ने उसे चिढ़ाया,...

" अरे तोहार महतारी अभी नूनी खोल के कडुवा तेल लगाती हैं की नहीं,... "

तो दूसरी ने हँसते हुए बोला, " अरे ननदें स्साली तो सब भाई चोद हैं ही सास सब भी बेटाचोद, ... अब कडुवा तेल लगा के अपनी बिल में,... "

सुनितवा के भाई का अब थोड़ा थोड़ा खड़ा होने लगा था, मैं रंग की एक कोट लगा चुकी उसके छोटे छोटे खूंटे पे, जोर से हड़काया मैंने, स्साले हिलना मत अभी नहीं तो यहीं निहुरा के गांड मार लूंगी, चिकने गांड तो मरवाने लायक हो गए हो,... "

मैंने रंग के बाद अपने दोनों हाथ में पक्का पेण्ट लगा लिया, देवर के खूंटे और ननद की चूँची पे जबतक चार पांच कोट रंग न चढ़े रंगपंचमी के दस पंद्रह दिन बाद तक निशान न रहे तो कौन भौजी,... लेकिन तब तक वो तो नहीं बोला, लेकिन दूबे भाभी ने सुनीतवा के छोटे भाई की ओर से जवाब दे दिया,...

" अरे नयको तोहार पहली होली, तोहार देवर, पूँछ काहें रही चेक कर के देख लो, गांड़ मरवाता है की नहीं , नहीं तो निहुराय के मार लो, अगवाड़ा पिछवाड़ा दोनों चेक कर लो ,... "





image upload

मैं ऐसी देवरानी नहीं थी जो जेठानी की बात न मानूं, पेण्ट पुते बाएं हाथ की एक ऊँगली कलाई के पूरे जोर से सीधे उसके पिछवाड़े पेल दिया पूरा जोर लगा के और दाएं हाथ से मैंने मुठियाना शुरू किया ,... साथ में पेण्ट की पुताई भी,... नूनी तो अब कतई नहीं थी फनफना रहा था,...

अब वो बेचारा गिड़गिड़ा रहा था भौजी छोड़ दा, हाथ जोड़त हैं।

" अबे स्साले, उखाड़ के थोड़े ले जाउंगी, तोहरे बहिन महतारी के लिए छोड़ दूंगी, चल सुनीता क नाम ले के दस गारी दे,... "

कोई बड़ी उम्र की मेरी जेठानी बोलीं अपनी महतारी का भी नाम ले ले के,...

पांच मिनट , आठ मिनट दस मिनट,... मैं जोर जोर से मुठिया रही थी और सोच रही थी ये स्साले इस गाँव के लौंडे इनकी महतारियाँ कहाँ कहाँ से चोदवा के,... मेरी सास तो खैर दर्जन भर गदहे घोड़े के साथ सोई थीं तो ये पेट में आये,...

और अब वो किनारे पे पहुँच रहा था, पहली बार लग रहा था पानी निकलने वाला था,...

" भौजी छोड़ दा पता नहीं कइसन लग रहा है का हो रहा है, भौजी,... " मैं समझ गयी का हो रहा है , मुठियाने की रफ़्तार बढ़ाते मैं ने और उसे उकसाया,...

" अरे सुनीतवा के बारे में सोच, ओकर छोट छोट चूँची पकड़ के चोद रहे हो, खूब मस्त चुदवाने लायक है वो,... सोचो तो आराम से,... "





image upload

और बस में फलफलकार, कटोरी भर तो नहीं लेकिन मेरी मुट्ठी भर मलाई निकल आयी,... सब मेरे हाथ में,... और रंग के साथ अब वो सफेदा भी मैंने उसके चेहरे पे पोत दिया और छोड़ते हुए बोली,... जायके सुनीता से चटवाना बोलना बहिनिया देख नया स्वाद,...

रज्जो भौजी ने ज्ञान दिया स्साले गांडू रोज सुनीतवा से चुसवाया कर जल्द ही लम्बा भी हो जाएगा और मोटा भी।

और मेरा ध्यान वापस आया किसी के सवाल से

"लेकिन सबके सगे भाई हैं भी की नहीं "

सवाल तो एकदम सही था,... जो कच्ची कुँवारी थी, बिन चुदी अगर आज हम उनकी नहीं फाड़ते इसलिए की कल उनके भाई से सबके सामने फड्वायंगे और कोई देवर ही न पकड़ा में आया जो उनका भाई हो तो,...

अभी मुझे बियाह के आए साल भर नहीं हुया था था इसलिए सब ननदों की कुंडली मेरे पास नहीं थी, पर मेरी साथ की थीं न और रमजानिया. जिसने मुझे चंदू देवर का लंगोटा खुलवाने की तरकीब बतायी, न गाँव का कोई लौंडा बचा था न लौंडिया जिसके पेट की भी बात रमजानिया से छिपी हो. सबकी कमजोरी, किसका किससे चक्कर है, कौन बबुवाने वाली अपने हरवाह से फंसी है तो कौन अहिराने के किस ग्वाले से अपना दूध दुहवाती है, सब,... हालंकि गाती नहीं थी, मेरी उसकी दोस्ती पक्की थी इसलिए मेरी बात और,... तो उसी ने उन चारो कच्ची कलियों का नाम ले ले के बताया उस ने गिना दिया तीन के नाम जिनके सगे भाई थे , दो के बड़े एक का छोटा,...





deduplicate list online

और जिसके सगा भाई नहीं है, मेरी एक नयी नयी आयी जेठानी ने पूछा

और अबकी चननिया ने जवाब दिया,

" अरे उस स्साली का एक मुस्टंडा चचेरा भाई है आस पास की कउनो लौंडिया बची नहीं उससे लेकिन उसकी बहन पे कोई ज़रा भी तो कटखने कुत्ते ऐसा दौड़ता है “





deduplicate list online

बस सर्वसमत्ति से तय हुआ की उस ननद के ऊपर उसका वही चचेरा भाई, और वो जिम्मेदारी भी चननिया और कजरी की भौजी के जिम्मे,

लेकिन आज तो पहली लड़ाई ननदों को कबड्डी में हराने की बात थी, उनके भाइयों को उनके ऊपर चढ़ाने की बात तो कल के लिए थी, इलसिए पहले कब्बड्डी की, खासतौर से ननदों की कमजोरी के बारे में पहले से सोच के तैयारी कर के जाना जरूरी था, और किस ननद का कैसे मुकाबला किया जाए,.... हाँ सगुन के लिए आज अगर दूबे भाभी या मिश्राइन भाभी चाहेंगी तो उन कच्ची ननदों की भी बिन चुदी चूत में एक एक पोर ऊँगली की बिना झिल्ली फाड़े , और जीतने के बाद खाली जो नैना की कबड्डी की टीम में कोरी हैं उन्ही को उनके भाइयों से थोड़ी फड़वाना है, हारने के बाद तो सारी ननदों की हार होगी,... इसलिए गाँव की जितनी भी कच्ची कोरी ननदें है सब का हिसाब किताब होगा और कल किसके ऊपर किसका कौन भाई चढ़ेगा, ... ये जिम्मेदारी मैच के बाद तय करने की होगी, रमजनिया, चननिया की और फाइनल फैसला दूबे भाभी के हाथ में

लेकिन अभी थोड़ी देर में शुरू होने वाली कबड्डी

अब अगला सवाल था किस ननद की कौन कौन कमजोरी लगती है तो फिर वही चारो चननिया, गुलबिया, चमेलिया और रमजनिया काम आयीं, किसके गुदगुदी लगती है और कहाँ ,... किसकी साँस जल्दी फूलती है,... और मैं रामजनिया को मान गयी वो बोली की उन चारों के अलावा बाकी सब के यार भी हैं बस उनका नाम ले ले के बिचारि बदनामी के डर से

" सिवाय गितवा और नैना और के " मंजू भाभी ने हँसते हुए कहा और फिर खोल के बोला, अरे नैना के इतने यार है किसका किसका नाम कौन गिनायेगा और गितवा तो खाली भाई अरविंदवा से और उसका भी एकदम खुल्ल्म खुल्ला,...





deduplicate list online

" गितवा को तो छुटकी सम्हाल लेगी " मैंने अब राज की बात खोली लेकिन शर्त वाली बातें नहीं बतायीं

" अकेले " मेरी जेठानियाँ बोली तो मैंने करेक्शन जारी किया

" नहीं , गुलबिया, चमेलिया और चांननीया रहेंगी न उसके साथ "

फिर और बात चली तो मैंने अल्टीमेट सरेंडर वाली पिक्स अपने मोबाइल में दिखायीं और पिक्स देखकर तो सबकी हालत खराब एक एक फोटो दस बार, और कजरी की भउजाई गुलबिया तो बोलने लगी
 
अल्टीमेट सरेंडर





deduplicate list online

फिर और बात चली तो मैंने अल्टीमेट सरेंडर वाली पिक्स अपने मोबाइल में दिखायीं और पिक्स देखकर तो सबकी हालत खराब एक एक फोटो दस बार, और कजरी की भउजाई गुलबिया तो बोलने लगी

केतना बढ़िया एक हाथ से एह लौंडिया के दोनों हाथ दबाय के गोड़वा से ओकर दोनों टंगिया फैलाय के कैसे घचाक से बुरिया में ऊँगली पेल देहले बा. "





deduplicate list online

और जो टैग वाली थी जिसमे दो औरतें चढ़ी थीं उसे देख के दूबे भाभी ने रमजानिया और चमेलिया दोनों को समझाया, देखो ऐसी तरह चढ़ जाना तुम दोनों और हचक के पेलना, कउनो साली ननद बचनी चाहिए।

सारी ट्रिक एक से एक,... और सबसे ज्यादा मज़ा आया आखिरी राउंड देखने पर जब सब ने देखा की कैसे जीतने वाली स्ट्रैप ऑन से हचक हचक के नयी नयी लौंडिया को चोद रही हैं,





deduplicate list online

तो पीछे से किसी ने बोला, ये कहाँ से आएगा,...

तो कजरी की भौजी गुलबिया नाउन बहू, हंस के बोली अरे चाकी क खूंटी, नहीं तो गोरू का खूंटा उखाड़ के ले आएंगे न खूब लम्बा भी मोटा भी और कड़ा भी

दूबे भी ने न सिर्फ हामी भरी बल्कि और उसमे सुधार भी कर दिया,

" अरे मैं लाऊंगी कंडोम, बस खूंटी के ऊपर उहे निरोध लगा के गपागप,... अगवाड़ा पिछवाड़ा सब "

" एकदम और कल तो देवर भी रहेंगे न, तो उन सबकी भी गाँड़ मारने के काम आएगा,... " कजरी की भौजी, हमारे नाउन की बहुरिया, मेरी पक्की सहेली गुलबिया बोली,

" एकदम साल्ले गांडू, रोज तो अरहरिया में निहुर के गांड़ मरौव्वल करते हैं और भौजाई से मरवाने में नखड़ा,...ननद और देवर को बगल बगल निहुरा के मारेंगे खूंटा लगा लगा के एही फोटुवा की तरह,... " रज्जो भाभी बोलीं,

थीं तो मेरी जेठानी, हमारी पट्टी की ही,... दो घर छोड़ के, उनकी सास और मेरी सास में भी खूब दोस्ती थी,... और हम दोनों में भी,... बहुत छनती थी, मैं जैसे बिदा होके ससुरे में उतरी उसी दिन से,... मैं पैर छूती थी उनका तो बहुत डाँट पड़ती थी, हमार छोट बहिन हो, गले लगा करो,... और थी भी मेरी समौरिया, दो चार साल बड़ी रही होंगी, मुझसे दो तीन साल पहले गौने उतरी थीं और देवरों ननदों के बारे में हमारे उनके विचार एकदम मिलते थे, ननदों का नाम ले के बुलाने का तो खैर रिवाज नहीं था चाहे जितनी छोटी क्यों न हों, फलनवा क बहिनिया, बिन्नो लल्ली पर बिना उसके गाली लगाए वो नहीं बोलती थीं,...





upload pictures online

और का जउन काम ननदिया अगवाड़े से करती हैं वो देवर स्साले पिछवाड़े से करते हैं दूबे भाभी ने फैसला सुना दिया।

और पूरे गाँव में हम देवरानियों को तो छोड़ दीजिये बाइस पुरवा में दूबे भाभी और मिश्राइन भाभी की बात कोई नहीं टालता था, हम लोगों की सास भी नहीं। तो बस दूबे भौजी की बात मतलब हम देवरानियों के लिए हुकुम,...

सारी भौजाइयां खुस और आज ये सोच सोच के की जीतने के बाद एक से एक कच्ची कलियाँ मिलेंगी भोगने को, और खाली जो खेल रही हैं वही थोड़ी , सारी की सारी ननदें,

मेरे मन में भी कुछ आया और मैंने लेकिन कुछ सोच के मिश्राइन भौजी से कहा, हमारी पीढ़ी में सबसे बड़ी और उनकी इज्जत भी बहुत थी और वो भी कुल पुरवा में और सब बिरादरी में, यहाँ तक की सास लोग भी,... वो बड़ी जोर से मुस्कारयी और उन्होंने मंजू भाभी और दूबे भाभी से कुछ फुसफुसा के मुझे आँख से इशारा किया की मैं अभी कुछ न बोलूं

चलिए मेरे पेट में तो बात पचती नहीं तो बता ही देती हूँ कहाँ हज्मौला ढूंढती रहूंगी।

बात ये थी की मुट्ठी करने की, ये नहीं की होता नहीं था लेकिन एक दो भौजाइयां, और वो भी उस ननद की जो लड़कोर हो जिसके भोसड़े से दो चार बच्चे निकल चुके हों , पर वो भी कितने साल से तो भौजाइयां जीती नहीं थीं,... तो वो भी ,





deduplicate list online

तो वही बात और मेरा मानना था की शादी शुदा और कुँवार में का फरक करना अगर वो कुँवार रोज गपागप हमरे देवर का अपने भैया क लंड घोंट रही हो , ... तो वही बात लेकिन कोई बात में खलल न पैदा करे इसलिए मैंने मिश्राइन भौजी को पकड़ा और उन्होंने सबसे कहा,

बात असल में मेरे मायके की होली की याद की थी,... और जब मैं बियाह के बाद ससुरे में उतरी थी तो जैसे किसी ननद को देखती थी, बस यही सोचती होली में इसकी मुट्ठी करने में बड़ा मजा आया, होली में ऊँगली तो सबकी होती है लेकिन ननद हो तो बस सीधे मुट्ठी,...

ज्यादा पुरानी बात नहीं तीन चार साल पहले की, मैं छुटकी की उमर की थी, रीतू भाभी उसी साल दो चार महीने पहले गौने में आयी थीं,... और उनकी भी पहली होली थी, लेकिन असली बात थी बुआ की,...

वो आयी थी होली में खूब हो हो,... हो रहा था सब लड़कियों औरतों ने आंगन में गोल घेरा बना रखा था बीच में बुआ, और साथ में माँ, चाची, माँ की मोहल्ले की दो चार जेठानी देवरानी,... बुआ की साड़ी तो सुबह होली शुरू होते ही चीथड़े चीथड़े हो गयी थी फिर पेटीकोट ब्लाउज , और मोहल्ले की औरतों ने जो उनकी भौजाई लगती थीं, कच्चे मिटटी वाली आँगन में उन्हें रगड़ रगड़ कर घिसराया था,...





image upload

कीचड़, कालिख, रंग पेण्ट,... और अब माँ,... उनकी दोनों खुली फैली जाँघों के बीच, एक टांग चाची ने पकड़ रखी थी एक पडितायिन चाची ने कस के फैला रखी थी,... और उन्हें चिढ़ा रही थीं,

" बिन्नो मायके ससुरार में बहुत टांग फैलाये होगी लौंडन के आगे आज तानी भौजाइयों के भी आगे फैला लो, काहें छिनरपन कर रही हो , जो होना होगा सो तो होगा ही,... "

माँ बड़े आराम से अपने दाएं हाथ की सब चूड़ी कंगन निकाल रही थीं, बुआ लाख कोशिश करें टांग सिकोड़ तो सकती नहीं थीं, उनकी खुली बुर साफ़ साफ़ दिख रही थी।

तभी उनकी निगाह मेरे ऊपर पड़ी, ... रीतू भाभी मुझे दबोचे थीं, मेरा टॉप उन्होंने फाड़ दिया था एक उभार बाहर खूब भाभियों के रंग से रंगा पुता, और रीतू भाभी का हाथ मेरे शलवार में अंदर ग्घूसा मेरी चुनमुनिया रगड़ता ,... पहले तो उन्होंने रीतू भाभी को हड़काया,...

" अरे कइसन भौजाई हो, होली में ननद क कपड़ा अभी देह पर बचा है, ... ननद तो निसूती ही होली के दिन,... "





image upload

बस क्या था चरर चरर पहले मेरा टॉप फटा , और भाभियों ने लूट लिया फिर ब्रा,... ननद की शलवार, चड्ढी का नाडा खोलते नहीं तोड़ देते हैं, जिससे लाख कोशिश कर के भी वो न पहन पाए, ये भी उस दिन रीतू भाभी से मैंने सीखा था,...

माँ फिर बिजी हो गयीं, नारियल के तेल की शीशी से सीधे तेल अपनी कोहनी से चुआ के दाहिनी हथेली में पूरा चिपोड़ा,... फिर बुआ की बुर को फैला के सीधे शीशी का मुंह उसके अंदर खोल दिया,... बुर छलछला गयी तेल से,... छलक के बाहर,... फिर सीधे तीन ऊँगली अंदर डाल के पेल दिया





image upload

बुआ जोर से चीखीं लेकिन आँगन में इत्ती जोर से हल्ला हुआ की उनकी चीख उसी में दब गयी, गोल गोल तीन ऊँगली बुआ की बुर में घुमाते उन्होंने मेरी ओर देखा,... और खुस हो गयीं,

रीतू भाभी ने मुझे सच में निसूती कर दिया था एक जोबन वो कस के रगड़ मसल रही थीं और दाएं हाथ की दो ऊँगली मेरी दोनों फांको को पकड़ के रगड़ रही थी, मैं गिनगीना रही थी अब झड़ी की तब,...

माँ ने रीतू भाभी की ओर देख के जैसे हामी में मुस्करा दिया,... और बोली, देख ले ननदों के साथ का करते हैं ,... बोल वो भाभी से रही थीं लेकिन साफ़ था सुना मुझे रही थीं, तीन चार साल बाद तेरी भी शादी होगी अभी से सीख, ... होली में ननदों के साथ,...

फिर पूरी ताकत से चौथी और पांचवी ऊँगली, लेकिन माँ के ऊँगली के नक्क्ल फंस रहे थे , बुआ चीख रही थीं, चूतड़ पटक रही थीं,... पडितायिनं चाची ने इशारा किया और फिर एक साथ मोहले की चार चाचियों ने किसी ने निपल नोचा, किसी ने क्लिट पे नाख़ून गड़ाया, बस बुआ का ध्यान बटा और माँ ने पूरी ताकत से पेल दिया, थोड़ी सी मुट्ठी घुसी फिर गोल गोल घुमाते,...





image upload

तब से मेरे मन में ये बात थी और अब मिश्राइन भाभी ने हरी झंडी दे दी थी लेकिन अभी किसी को बताना नहीं था और सबसे पहले मैच तो हम लोग जीतें

" देखो जीतने के बाद आज वो मजा आएगा जो आज तक न आया होगा, और कल भी ऐसी होली होगी देवरों और ननदों के साथ, जो आज तक कभी हुयी न होगी। फिर ननद हार गयीं तो साल भर झुक के,.... अपने अपने मायके के भाइयों का सोचो फायदा ,... तो बस सब कुछ भूल के पूरी ताकत लगा के जीतना है और क्या होगा उन ननद छिनरों का वो मैं तय करुँगी लेकिन कउनो ससुरी बचेगी नहीं। "





image upload

उसके बाद तो खूब हो हो हुआ कुछ देर में फिर मैंने एक एक करके अलग अलग सबको उसका रोल बताया और टीम की रणनीति भी , फिर हम लोग उस बाग़ की तरफ चल पड़े जिधर ननद भौजाई की कबड्डी होने वाली।





image upload

अबकी हमारी टीम एकदम अलग थी, ६ वो थे जो मेरी टीम की कोर स्ट्रेंथ थी।

मैं और छुटकी। छुटकी तो जिले की कब्बडी टीम तीन साल से थी और कुछ समय पहले स्टेट की अंडर 15 वाली टीम में बस होते होते रह गयी थी.

लेकिन असली चार थीं, गुलबिया कजरी की भौजी नउनिया बहू जो पिछले साल गौने आयी थी, उमर में मेरी समौरिया, चमेलिया, कल्लू की मेहरारू, गाँव में अकेली मेरी देवरानी, मेरे बाद जिसका गौना हुआ था, देह की बड़ी कड़ी,.. रमजनिया उमर में मुझसे थोड़ी बड़ी होगी पर हर चीज में होशियार और उसी के सहारे मैंने चंदू का किला जीता था और इन चारो में उमर में सबसे बड़ी लेकिन बहुत तगड़ी जिससे ८ -१० गाँव की ननदें नाम सुनने पे भागती थीं, अहिराने की चननिया, जो मंजू भाभी ने सजेस्ट किया था.

हम छह के अलावा टीम की कप्तान थीं मंजू भाभी, ३४-३५ की उमर की जिनके छोटे देवर चुन्नू को मैंने आज ही छोटे से बड़ा किया था, और दो और सीनियर लोग साल दो साल बड़ी, दूबे भाभी और मिश्राइन भाभी , जो जोश में और मस्ती में हम लोगों की ही टक्कर की थीं। तो ये हो गयी नौ।

बची दो तो वो मेरी दो जेठानियाँ,
 
जोरू का गुलाम भाग १९३

बिजनेस कोचिंग का

update posted, please read, enjoy and comment,

Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७ मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में, मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें

exforum.live
 
भाग ५९ कबड्डी ननद और भौजाई की

हमारी टीम

९,८३,३७१





अबकी हमारी टीम एकदम अलग थी, छ वो थीं जो मेरी टीम की कोर स्ट्रेंथ थी। मैं और छुटकी। छुटकी तो जिले की कब्बडी टीम में तीन साल से थी और कुछ समय पहले स्टेट की अंडर 15 वाली टीम में बस होते होते रह गयी थी. लेकिन असली चार थीं, गुलबिया कजरी की भौजी नउनिया बहू जो पिछले साल गौने आयी थी, उमर में मेरी समौरिया,





चमेलिया, कल्लू की मेहरारू, गाँव में अकेली मेरी देवरानी, मेरे बाद जिसका गौना हुआ था, देह की बड़ी कड़ी,..





रमजनिया उमर में मुझसे थोड़ी बड़ी होगी पर हर चीज में होशियार और उसी के सहारे मैंने चंदू का किला जीता था और इन चारो में उमर में सबसे बड़ी लेकिन बहुत तगड़ी जिससे ८ -१० गाँव की ननदें नाम सुनने पे भागती थीं, अहिराने की चननिया, जो मंजू भाभी ने सजेस्ट किया था.

हम छह के अलावा टीम की कप्तान थीं मंजू भाभी, ३४-३५ की उमर की जिनके छोटे देवर चुन्नू को मैंने आज ही छोटे से बड़ा किया था, और दो और सीनियर लोग साल दो साल बड़ी, दूबे भाभी और मिश्राइन भाभी , जो जोश में और मस्ती में हम लोगों की ही टक्कर की थीं। कप्तान तो मंजू भाभी थी लेकिन हिम्मत बढानेवाली, अनुभवी और कोच कहें, मेंटर कहें मिश्राइन भौजी ही थीं तो ये हो गयी नौ।





बची दो तो वो मेरी दो जेठानियाँ,

असल में कई साल से बबुआने में नयी बहुएं तो टिकती ही नहीं थी सब मर्द के साथ नौकरी पे और साल दो साल पे कभी आएँगी लेकिन होली में तो शायद ही कोई,...

और गलती उनसे ज्यादा हमारी पट्टी के मर्दों की थीं, गलती भी क्या मन ,...हमारे गाँव के मर्द जो शहर में रहते थे, तो होली में अपनी साली सलहज के साथ ससुराल की ओर मुंह करते और बहुएं अपने मायके का, नहीं तो शहर की कालोनी की होली।

लेकिन ये दो एकदम अलग मिट्टी की बनी थीं, रज्जो और मोहिनी।





और जो दो चार थीं, जिनके मरद शहर में रहते थे वो कभी गाँव कभी शहर सबका साल भर के अंदर पेट फूल गया तो दो चार बच्चा दे देने के बाद न होली खेलने का जोश बचता न ताकत।

रज्जो भौजी के मर्द पंजाब में थे , वो भी आती जाती थीं लेकिन गौने की रात ही उन्होंने कसम दिला दी थी अगले पांच साल तक खाली कबड्डी होगी पेट नहीं फूलेगा। उनकी माँ भी बड़ी समझदार गोली खिला के और छह महीने की खुराक दे के भेजा था,... फिर उन्होंने तांबे का ताला लगवा लिया, साल में दो चार महीने मरद के पास बाकी टाइम गाँव में सास ससुर के पास, और गाँव में भी जवान होते देवरों की कोई कमी तो थी नहीं।





वही हाल मोहिनी का था, दोनों से मेरी खूब पटती थी। लेकिन होली की कबड्डी टीम में पहले उन्हें जगह नहीं मिली थी।

असल में पहले मेरी सबसे बड़ी उम्र की जेठानियाँ ही, औसत उम्र भौजाई की टीम की ३५-३६ के बीच की होती थी, आधी तो ४०-४५ पार वाली शायद ही किसी के चार पांच बच्चे न हों तो बस, और अब मेरी टीम की औसत उमर २४-२५ के बीच की होगी, हम ६ तो ( छुटकी की उमर क्या बताना )

मतलब मैं मेरी दो जेठानियाँ रज्जो और मोहिनी, कजरी की भौजी गुलबिया, कल्लू की मेहरारू, गाँव में मेरी अकेली देवरानी चमेलिया और रमजनीया तो १८ से २३ के बीच वाले, दूसरी बात आज मोटिवेशन भी जबरदस्त था जीतने के बाद रगड़ाई का जोश और कमिटमेंट भी, ... और सबसे बढ़ के हम सब में विश्वास था,.. हम होंगे कामयाब,... और नैना ननदिया की टीम में ओवरकॉन्फिडेंस इत्ते साल से जीतते आ रहे हैं,

लेकिन ननदों को नहीं मालूम था जमाना बदल गया है उनके गाँव में कोमल भौजी आ गयी है और साथ में उनकी सबसे छुटकी बहिनिया छुटकी भी है,....

और जैसा मुझे उम्मीद थी नैना ने पहले यही जिद की की छुटकी भी हमारी टीम में शामिल होगी और मैंने साफ़ मना कर दिया,... वो कोई गाँव की भौजाई थोड़े ही है अरे गाँव के लड़कों की बात है सब उसके जीजा लगेगें,... ये बात मानती हूँ लेकिन लड़कियां उसकी ननद कैसे लगेगीं,

सास सब न्यूट्रल थीं उन्होंने साफ़ कर दिया की मैं और नैना जैसे तय करें

दस मिनट तक हुज्जत हुयी आखिर मैंने कहा की ठीक है छुटकी खेलेगी लेकिन वो हमारी बारहवीं खिलाड़ी रहेगी और उनकी ओर से ११ खिलाड़ी रहेंगे, नैना तो शायद मान जाती वो इतना श्योर थी और किसी तरह आज खुले आम छुटकी की रगड़ाई करना चाहती थी पर उसके टीम की बाकी लड़कियां उसके पीछे पड़ गयीं अंत में नैना ने कहा

“आप बस मेरी एक यही बात मान लीजिये उसके बदले में आप की जो शर्त हो “





मैंने बस दो तीन बाते बताई , पहली मैच सिर्फ घंटे भर का होगा, ( पहले टाइम अनलिमिटेड होता था तो ननदें पहले तो भौजाइयों को थका देती थीं और उसके बाद आराम से रगड़ रगड़ के हराती थीं ) लेकिन नैना ने कहा डेढ़ घंटे से कम में क्या, दोनों ओर जोड़ के २२ खिलाड़ी हैं और ये सास लोगों ने बीच का रास्ता निकाला - बीस बीस मिनट के चार राउंड, पहले और तीसरे राउंड के बाद तीन तीन मिनट का और दूसरे राउंड के बाद हाफटाइम चार मिनट का। और नैना मान गयी , लेकिन सिर्फ ये शर्त लगा दी की मैच ड्रा नहींहोगा , उस समय जितने खिलाड़ी बचे होंगे उसके आधार पर फैसला हो जाएगा और ये बात मैंने मान ली।

दूसरी बात झाड़ने वाली, जो खिलाड़ीन झड़ गयी या बोल दी की वो झड़ गयी है बस वो खेल से बाहर उसे दुबारा जिन्दा नहीं कर सकते,...

और मेरे आगे कुछ बोलने के पहले नैना बोली,... सब शर्तें आप अम्पायर लोग को बता दें सब मैंने मान लिया लेकिन आज आपकी बहना की अच्छी तरह फटेगी सबके सामने,

टीम का नाम अम्पायर लोगों को बताना था और तीन लोगों में मेरी सास, एक मेरी चचिया सास, और एक और उन्ही की साथ थी,... लेकिन उन सब ने सुबह सुबह छुटकी का भोग लगाया था और मेरी सास तो मैं रात को दिन कहूं तो वो हाँ में हाँ मिलाने वाली थीं।

जो मैं सोच रही थी की गुलबिया, चमेलिया, रमजानिया और चननिया के भौजाइयों के टीम में शामिल होने ननदें बड़ी जोर से उछलेंगी पर वैसा ज्यादा कुछ नहीं हुआ जो दो चार लड़कियां उछली तो मेरे कुछ बोलने के पहले गितवा ने उन्हें आड़े हाथ लिया, होली में इ सब का,... और गितवा के भाई का तो हर पट्टी में , और गितवा की भी फुलवा की छोटकी बहिनिया से जबरदस्त दोस्ती थी और उसी के साथ और भी,... नैना को कुछ फरक नहीं पड़ता था। और असली बात ये थी की नउनिया की छुटकी बिटिया, गुलबिया की ननद कजरी तो नैना की खास थी और उसकी टीम में थी , तो अगर उसे कजरी को अपनी टीम में खिलाना था तो गुलबिया, कजरी की भौजी को कैसे मना करती, और एक बार गुलबिया आ गयी तो बाकी सब भी,...

लेकिन थोड़ी बहुत भुनभुनाई भौजाइयां ही, ज्यादातर जो इस बार टीम में नहीं थी... बबुआने में ये सब,... आज तक तो ऐसा,... लेकिन मिश्राइन भौजी ने एक बार आँखे तरेरी सब चुप और मंजू भौजी ने समझाया अरे आज एक बार बस जीत जाएँ हम लोग सबसे पहले तुंही लोग कच्ची कली क भोग लगाओगी।
 
कबड्डी टीम नैना ननदिया की





और मैच शुरू हुआ ननद भाभी का

और सास के अम्पायर पैनल ने अनाउंस भी कर दिया दोनों ओर की टीम का नाम, छुटकी को भौजाई माना जाएगा होली के खेल के लिए , अगर जो भौजाई या ननद पांच मिनट में ( टाइम सास लोगों ने बढ़ा दिया था -चार मिनट में कउनो नहीं झड़ सकता कहके) या मान लेगा की झड़ गयी हाथ उठा के या उसकी पीठ ३ मिनट तक लगातार जमीन से लगी रही और बिना रुके उसकी ऊँगली होती रही ( ये नियम भी मेरी सास ने जोड़ा ) तो वो खिलाड़ी भी खेल से बाहर, ...

और जीतने के बाद अगर भौजाइयां जीती (मेरी मंझली ननद जोर से चिल्लाईं आज तक कभी जीती हैं का, और अबकी तो नैना भी है और सब ननदों ने जो टीम में थीं और जो बाहर थीं सबने जोर से हो हो करके हल्ला किया ) तो मिश्राइन भौजी तय करेंगी की ननदों का का होगा और





अगर ननदें जीती तो नैना।

लेकिन मैं अहिराने की चननिया और भरौटी की रमजनिया की ओर देख रही थी, उन दोनों ने जो बताया था एकदम वही हुआ, नैना ने टीम एकदम चेंज कर दी थी , चार नयी ननदें, लेकिन हम लोगों ने पंद्रह के हिसाब से सोचा था और वही चार जो इन दोनों ने बताया था वही सब उमर में कम।

रमजनिया ने मेरे कान में बोला की उन चार में से एक तो भरौटी का ही एक लौंडा है ट्रैक्टर चलाता है उस से फंसी है, वो खुद एक बार गन्ने के खेत में दोनों को पकड़ चुकी है, और उसे तो वो आसानी से निपटा देगी, लेकिन बाकी तीन की अभी तक नहीं फटी है। दोनों ने आपस में कानाफूसी कर के मुझे बताया की पूरी टीम में पांच बिनचुदी हैं,





और छह चुद रही हैं मतलब उनकी बुर और गाँड़ में मुट्ठी की जा सकती है ,

चुदी हुयी नैना और गीता के अलावा, लीला, नीलू, चम्पा और, कजरी . थीं।

लीला और नीलू की शादी हो गयी थी बस इसी साल जेठ में दोनों का गौना होना था था।





बारी कुँवारी में चार तो छुटकियाँ थीं, बेला, नीता,, पायल और कम्मो,





सब की सब छुटकी की उमर में और एक बड़ी उमर वाली रेनू, नीलू, लीला और चंपा की उम्र की पर उसका चचेरा भाई कटखना कुत्ता था किसी ने अगर देख भी लिया तो लट्ठ ले कर चढ़ दौड़ता, तो बेचारी चाह कर भी,..

तो नैना और गीता हैं जिनके बारे में सबको मालूम था पर बाकी चार की भी सारी कुंडली रमजानिया और चननिया के पास थीं, और उन चारों में कजरी भी नाउन की बिटिया , गुलबिया की ननद। वो बस एक दो बार वो भी किसी से पक्का नहीं फंसी थी.

उस टीम को औसत उम्र हमारी टीम से ६-७ साल तो कम होगी ही। कम से कम पांच तो छुटकी की ही उमर की होंगी।

मैं नैना को मान गयी उसने एकदम से यंग टीम उतारी थी और हर बार की तरह वो सोच रही थी की बड़ी उमर की सब भौजाइयां होंगी पंद्रह मिनट में हांफ जाएंगी इसलिए वो मान गयी और उसका असली निशाना छुटकी ही था। फिर आप कितना प्लानिंग करो जो खिलाड़ी कभी खेला नहीं है उसके बारे में ,क्या प्लानिंग कर सकते हो ?

नैना ने एकदम सही सोचा था की पिछले दो तीन साल से जो ननदों की टीम लगातार जीत रही है उस हर एक खिलाड़ी के बारे में , उसकी क्या ताकत है, का कमजोरी है वो क्या दांव लगाती है, उसकी क्या काट है ये सब मैंने सोचा होगा, पिछले मैचों में हारी हुयी भाभियों से पूछा होगा, इसलिए उसने आधी टीम नयी उतार दी, जिसके खेल के बारे में मुझे तो क्या गाँव में किसी को भी अंदाजा न हो। लेकिन हमने जो चननिया और रमजनिया को रखा था वो तो उड़ती चिड़िया के पर गिन लेती थीं उन सब ने मुझे अच्छी तरह एक एक के बारे में,...

और मैच शुरू हुआ ननद भाभी का।

आज हल्ला बहुत जोर से हो रहा था, जो भौजाइयां कभी उम्मीद भी नहीं करती थीं उन्हें मिश्राइन भाभी ने समझा दिया था की जीतने के बाद जो नहीं खेल रही थीं उन्हें भी कच्चे टिकोरे चखने को मिलेंगे।

और लड़कियां भी , नैना ने उन्हें ललकार रखा था कभी छुटकी का नाम ले के एक से एक गन्दी गालियां तो कभी मेरा नाम लेकर

और सच बोलूं तो मेरा मन भी, कभी नैना की टीम में कच्ची कलियों को देख रही थी कजरी की उमर वाली मतलब २८-३० साइज वाली ५-६ तो थीं ही, पांच तो बिनचुदी थीं, स्साली सब की फटेगी, ... और फिर पहले किस को भेजा जाया,...

मैंने मन ही मन स्ट्रेटजी बना ली थी, और छुटकी भी कब्बड्ढी की एक्सपर्ट वो भी तेज निगाह से देख रही थी और मेरी चार सहयोगी, गुलबिया, चननिया, चमेलिया और रमजनिया वो भी ध्यान लगा के नैना की ट्रिक देख रही थीं।

नैना की टीम सोच रही थी मैं इन चारों में से किसी को भेजूंगी लेकिन मैंने रज्जो भाभी को भेजा और समझा दिया की कुछ हो बस न मरना न मारना। खाली ऐसे चक्कर काट के आ जाना जिससे मैं उन की ट्रिक समझ के तरीके से,... और वही हुआ।
 
कबड्डी- पहला राउंड





मैंने मन ही मन स्ट्रेटजी बना ली थी, और छुटकी भी कब्बड्ढी की एक्सपर्ट वो भी तेज निगाह से देख रही थी और मेरी चार सहयोगी, गुलबिया, चननिया, चमेलिया और रमजनिया वो भी ध्यान लगा के नैना की ट्रिक देख रही थीं। नैना की टीम सोच रही थी मैं इन चारों में से किसी को भेजूंगी लेकिन मैंने रज्जो भाभी को भेजा और समझा दिया की कुछ हो बस न मरना न मारना। खाली ऐसे चक्कर काट के आ जाना जिससे मैं उन की ट्रिक समझ के तरीके से,... और वही हुआ।

नैना ने अर्ध चंद्रकार गोला बना लिया था सबसे सेण्टर में नैना और गीता, उनके चारो और चार पांच नयी लड़कियां जो रज्जो को उकसा रही थीं अंदर आने के लिए ,... मैं समझ गयी असली खेल उन चार का है जो जाने वाले को नहीं दिख रही हैं ,.... और वो अचानक दाएं बाएं से मिल के दीवार बनाने वाली थीं रज्जो को रोकने के लिए, छुटकी ने जोर से सीटी मारी,... रज्जो वैसे भी ज्यादा अंदर नहीं घुसी थीं बस वो पलट के वापस , ...

लेकिन तबतक सामने की लड़कियों ने झप्पटा मारा , पर गिरते गिरते भी वो किसी तरह लाइन पार कर गयीं और हम लोगों ने सांस ली।

उनकी और से एक नयी कच्ची कली आयी, ...

बेला देख के मेरा मन मचल रहा था एकदम छोटे छोटे चूजे २८ भी नहीं होंगे लेकिन थी बड़ी फुर्तीली, ...





गनीमत थी मैंने सबको समझा दिया था की कोई इसके पास भी नहीं आएगा हाँ दूर दूर से , सबसे आगे छुटकी, मिश्राइन और दूबे भाभी को मैंने सबसे पीछे छुपा के रखा था और दोनों के साथ एक एक पहरेदार, रमजनिया और गुलबिया,...

बेला भी बस लाइन के आस पास ,... और वो भी लौट गयी.

दो रेड ऐसे ही निकल गए और ननदों ने समझ लिया मामला टेढ़ा है लेकिन हम लोग भी प्वाइंट स्कोर नहीं कर पा रहे थे, और पंद्रह मिनट के बाद ब्रेक होने वाला था, ...,

और मैंने छुटकी को भेजा। अबतक मैंने छुटकी को समझा के रखा था वो पीछे ही रहे,... और ज्यादा जोश न दिखाए, मैं नहीं चाहती थी ननदों को अंदाज लगे की छुटकी जिसका शिकार वो सब करना चाहते हैं हमारे ग्रुप की सबसे बड़ी शिकारी है।

अगली बार छुटकी ही गयी,...

लड़कियों ने खूब हो हल्ला किया चुदवाने आयी है मार लो इसकी,... लेकिन उन्हें छुटकी का अंदाजा नहीं था /
 
Back
Top