जीत के बाद- ननद पर चढ़ेंगे देवर

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लेकिन मैं मान गयी,... जो मेरी दो जेठानियाँ मुझसे थोड़ी ही बड़ी, एकदम अर्जुन की तरह चिड़िया की आँख देखती थीं सीधे मुद्दे पर आ गयीं,
" अरे असली बात है स्साली छिनरों को झाड़ने की, जो चुदी चुदाई हैं अपने भाइयों से चुदवा के उनको झाड़ने में थोड़ा टाइम लग सकता है लेकिन जो एकदम कच्ची कलियाँ है ,... "
और रमजानिया और कजरी की भौजी, नउनिया बहू ने तुरंत फिर से कन्फर्म किया चार, नाम एक एक का बता के, अभी भी अनचुदी हैं, हाँ लेने लायक पूरी हैं , झांटे भी आ गयी हैं और हर महीने बिना नागा खून खच्चर भी होता है , और बाकी चार जो रिजर्व खिलाड़ी हैं उनमे भी दो,...

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और अब दूबे भाभी मैदान में आ गयीं, और उन्होंने मेरी जेठानियों को बात की ताकीद की, इसी होली में उन सब ननदों की चड्ढी उन्होंने फाड़ी थीं,... अब बिना बुर रंगे ननद भौजाई की होली तो पूरी नहीं होती, ... बोलीं अब आएगा मज़ा ननद सालियों को मजा, होली में तो चड्ढी फाड़ के लाल गुलाबी रंग उन सब की चुनमुनिया में लगा था अबकी सफ़ेद रंग वो भी अंदर तक, ...
मंजू भाभी उनकी पक्की सहेली, हमारी कप्तान, हँसते हुए बोलीं अरे ननदें तो नंगी पुंगी ही अच्छी लगती हैं,...

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मैं क्यों चुप रहती मैंने भी अपनी मन की बात कह दी, उनके भैया का पहला मुद्दा होता है हम सब के कपडे उतरवाने का तो आज हम लोगों का मौका है, हम लोग जीतेंगी भी, ननदों को नंगा नचाएंगी भी,...
तो पहला प्लान यही बना की हर ननद पे डबल नहीं बल्कि ट्रिपल अटैक होगा, एक भौजाई चूँची रगडेगी,... दूसरी ऊँगली करेगी और तीसरी चूस चूस के थेथर करेगी तभी चार मिनट में झाड़ पाएंगे हम लोग,...

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और यह सोच सोच के सब भौजाइयां एकदम खुस आज आएगा मजा, जो स्साली रतजगे में छिटक के भाग जाती थीं उन्हें खुले मैदान में सबके सामने रगड़ने का मजा, दिखा दिखा के ऊँगली करने का मज़ा,... नैना और गितवा तो पकड़ में ही नहीं आती थीं और ये सब कच्चे टिकोरे भी,... आज कुछ भी हो हम सब जीत के दिखा देंगे,...
लेकिन मैंने वीटो लगा दिया नहीं,...
वो चार,जो बारी कुँवारी है, जिनकी अभी तक नहीं फटी है, चुनमुनिया कोरी है,... एक बार भी लंड का स्वाद नहीं लिया उनको चूस के ही झाड़ा जाएगा, ऊँगली नहीं होगी."

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अब सब सन्न, होली में भी ननदों के ऊँगली नहीं होगी तो कब होगी, ...
फिर दूबे भाभी बोलीं, मिश्राइन भाभी के बाद उमर में सबसे बड़ी, शायद यह सोच के की मैं नहीं चाहती की जिन बेचारियों ने अपना कुंवारापन बचा के रखा है, साजन के पास ले जाने के लिए उन्हें हम क्यों फाड़ के,... और शायद एक अच्छी सलहज की तरह मैं अपने होने वाले नन्दोईयों का भला सोच रही होऊं, इसलिए ऊँगली से फाड़ने को मना कर रही हूँ,... मुझे प्यार से समझाती,
" अरे नयको, तुम नयी आयी हो न साल भर का छह महीना नहीं हुआ, तोहें यह गाँव क रिवाज और ननदों का चाल चलन नहीं मालूम, आज तक कोई ननद इस गाँव की बिना फड़वाये गौने नहीं गयी, और आधी तो आठ महीने बाद लौटती हैं तो कोरा में एक, ... और हम सब सकल मिलाते हैं की बच्चे की सकल उसके किस सगे, चचेरे भाई से मिलती है,... तो तोहरे बचाये से ये कउनो ननद बचेंगी नहीं, अगली होली तक ये कच्ची अमिया वाली दस पांच लौंडे चढ़वा चुकी होंगी अपने ऊपर। "

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मैंने दूबे भाभी से बड़े आदर से कहा,
" आप जो कह रही हैं एकदम सोलह आना सच है, लेकिन बस एक बात अगली होली तक काहें, ....ये सब बेचारी हमारी प्यारी दुलारी ननद हैं रोज हमको चिढ़ाती है रात का हाल चाल पूछती हैं,... अरे रंग पंचमी में तो अभी दो दिन बाकी है न , बस सी रंगपंचमी के ख़तम होने के पहले ही कउनो ननद नहीं बचेगी, बिना फड़वाये, हमरे जेठानी का हुकुम,... और जंगल में मोरा नाचा किसने देखा तो कब रात में अमराई में,... दिन में गन्ने के खेत में कौन चाप दिया पता भी नहीं चलेगा न,... तो आपकी आँख के सामने, अरे हम गुलबिया चमेलिया हाथ गोड़ पकड़ के अपनी जेठानी लोगन के सामने, जउनो कउनो स्साली मना न करे की हमने नहीं फड़वाई है,.... लेकिन बस आज कबड्डी में ऊँगली से फाड़ने के लिए,... "

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लेकिन जो मैंने प्लान बताया फिर तो सब हो हो कर के,... और मंजू भाभी ने मेरी ओर तारीफ़ की नजरों से देखा,...क्या देवरानी है
मैं बोली,
" अरे रंग पंचमी आज ख़तम थोड़े हो रही है असली हंगामा तो कल होगा जब देवर लोग भी होंगे,...हाँ आज हम सब जीते रहेंगे तो कल भी, ननदों को भौजाइयों का हर हुकुम मानना पडेगा,,... आज तो रगड़ाई होगी ही स्सालियों की कल भी,... ( उस दिन सास और सब लोग नहीं होते थे, देवर भौजाई और ननद ) तो बस उन छिनरों पे उनके भाइयों को चढ़ाएंगे , ... एक तीर से दो शिकार, बहिनचोद देवरों से उनकी बहिन अपने सामने चुदवायेंगे, स्साले सब बहिनो की चूँची आते ही ताड़ना शुरू कर देते हैं, सोच सोच के मुट्ठ मारते होंगे तो खुल के हम लोगों के सामने ही, अपनी बहिनिया की ,... और वो कच्ची कुंवारी अपना कुंवारापन अपने भाई के हाथ भौजाइयों के सामने ही न्यौछावर करेंगी, कहीं कोने अंतरे, बँसवाड़ी में झाड़ी झंख़ाडी में नहीं,...
जब तक भौजाई देवर से ननद की न फड़वाये तब तक कौन होली, स्साली एक बार हम सबके सामने अपने अपने भाइयों से चुदवा लेंगी, मोबाइल में फोटो वीडियो सब तो साल भार निगाह नीची कर के,... उस के बाद हम सब के भाइयों के आगे खुद शलवार का नाड़ा खोलेंगी , "

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सबसे ज्यादा दूबे भाभी खुश मुझे अँकवार में भरती बोलीं,
"मान गए नयको तोहार सास देख सुन के अइसन बहुरिया लायी हैं जो आज तक नहीं आयी। आज ननदों क हार पक्की। "
" एकदम लेकिन वो स्साले देवर अपनी बहिनिया चोदने के लिए,..... "किसी ने वाजिब सवाल खड़ा किया
लेकिन जवाब कल्लू बो, चमेलिया के पास पहले से तैयार था,गाँव में मेरी अकेली देवरानी, उसकी भी पहली होली थी, ...
" काहें नहीं , अरे ससुरों को पहिले भांग पिला पिला के धुत्त कर देंगे , ... फिर आँख पे उनकी बहनों की ही फटी शलवार बांध देंगे,... उसके बाद जब चुदाई होने लगेगी, झड़ने का टाइम आएगा तब पट्टी खुलेगी,...तब पता चलेगा की जिसको चोद रहे हैं वो न भौजाई है न नयकीभौजाई क छुटकी बहिनिया, बल्कि उनकी अपनी सगी बहिनिया, जिसके टिकोरे देख देख के वो मुट्ठ मारते थे,... फिर झड़ते समय कौन मरद लंड निकालता है ,... "

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चमेलिया की बात सुन के एक बार खूब हो हो हुआ और मंजू भाभी ने छुटकी मेरी छोटी बहिनिया को प्यार दुलार से देखते हुए चिपका लिया, आज की कब्बडी में छुटकी का बड़ा रोल था न सिर्फ गितवा को चित्त करने के लिए बल्कि गाँव में किसी को नहीं मालूम था,..
. की वो कबड्डी की रीजनल चैम्पियन टीम में है, और स्टेट लेवल पे अंडर १५ में बस इसलिए होते होते रहगया था की फेडरेशन के जो बॉस थे, ... जिस लड़की को उन्होंने लिया,... 'उसकी असल में भी लिया', और उसकी माँ उनकी पुरानी रखैल थी, और जब एक दो सेलेक्टर्स, और टीम की कप्तान ने बोला भी तो समझा दिया की अरे जिसको सेलेक्ट किया है वो इसी साल ओवरएज हो जाती, तो उसको रिजर्व में रखना,... मत खिलाना, स्टेट का सर्टिफिकेट रहेगा तो नौकरी में कालेज में एडमिशन में हर जगह मदद मिल जायेगी, ... फिर छुटकी का अगले साल,...

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और अब चमेलिया ने देवरों को लुभाने ललचाने में, ...और मेरी बहन है भी ऐसी, जब से हम लोग स्टेशन पर उतरे हैं हमारा गाँव तो छोड़िये, ... आस पास के गाँव जवार में भी उसी की चरचा,... चेहरा तो लगे दूध के दांत नहीं टूटे और जोबन जबरदंग,...
. ..

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"एकदम सही बोल रही है , और सालियों की गाँड़ भी मरवा देंगे उनके भाइयों से ," मेरी एक बड़ी उम्र की जेठानी हँसते हुए बोलीं,...
और मेरा ध्यान देवरों की ओर चला गया, मिश्राइन भौजी के यहाँ से होली खेल के जब हम भौजाइयों की टोली वापस आ रही थी,तीन दिन पहले की ही तो बात है
सब के सब भांग में टुन्न, तीन चार गिलास से कम डबल भांग की डोज वाली ठंडाई न किसी ननद ने पी न भौजाई ने,... रस्ते में एक लड़का दिखा,...
इन्ही दूबे भाभी ने ललकारा मुझे,...
" अरे नयको देखा स्साला बच के ना जाए, अरे पजामा फाड़ के देख, इस नयी उमर की नयी फसल का अभी खड़ा वड़ा होता भी है नहीं, मशीन से पानी निकलता है की नहीं,... "

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बस फिर क्या था, हम भौजाइयों ने उसे छाप लिया,... दो चार ने दौड़ाया, वो गन्ने के खेत की ओर भागा और वहां मैं पहले से खड़ी थी,... आँचल से कालिख और रंग निकाल के हाथ में लगा के तैयार और उसे दबोच लिया,...

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दोनों हाथों ने पहले तो चेहरे की रंगाई पुताई,... फिर और जब उसका हाथ चेहरे पे,... वही तो मैं चाहती थी, जो काम मैं सुबह से ननदों की शलवार से कर रही थी वही देवर के पाजामे से किया, नाड़ा खोला नहीं, तोड़ दिया,... पाजामा सररर नीचे,... स्साले ने अंदर भी जांघिया पहन रखी थी, ... उसके नाड़े की भी वही हालत,... और वो भी सररर कर के,... और पल भर में पाजामे और जांघिया दोनों के दस दस टुकड़े अलग अलग दिशा में गन्ने के खेत में,
और पकड़ के हिलाते मैं बोलीं,
"बाबू बहुत लुका के रखे थे कउनो खास चीज है का, अपनी बहिन के लिए बचा रहे थे की महतारी के लिए,... "

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तब तक रज्जो भाभी ने पहिचान लिया, मुझसे थोड़ी ही बड़ी, मेरी ही पट्टी की, बोलीं, स्साला ये तो सुनितवा क छोट भाई हो,...

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दूबे भाभी खिलखिलाते हुए मुझे देख रही थीं, वहीँ से गुहार लगाई, अरे नयको देख नूनी है की लंड,...
मोहिनी भौजी बोलीं, वो भी मुझसे दो साल पहले ही गौना आई थीं,...
अरे नूनी होगा तब भी छोड़ थोड़ो देंगे,... देवर होली में पकड़ में आया है,... अरे अपनी बहन के भोंसडे में छिपते तो वहां से भी निकाल के ले आती,...

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मैंने एक झटके में खींच के सुपाड़ा खोल दिए, ... बेचारा बहुत घबड़ा रहा था लेकिन मेरी पकड़ में आ गया था चारों ओर से भौजाइयां घेरे खड़ी थी, एक बड़ी उमर की मेरी जेठानी ने उसे चिढ़ाया,...
" अरे तोहार महतारी अभी नूनी खोल के कडुवा तेल लगाती हैं की नहीं,... "
तो दूसरी ने हँसते हुए बोला, " अरे ननदें स्साली तो सब भाई चोद हैं ही सास सब भी बेटाचोद, ... अब कडुवा तेल लगा के अपनी बिल में,... "
सुनितवा के भाई का अब थोड़ा थोड़ा खड़ा होने लगा था, मैं रंग की एक कोट लगा चुकी उसके छोटे छोटे खूंटे पे, जोर से हड़काया मैंने, स्साले हिलना मत अभी नहीं तो यहीं निहुरा के गांड मार लूंगी, चिकने गांड तो मरवाने लायक हो गए हो,... "
मैंने रंग के बाद अपने दोनों हाथ में पक्का पेण्ट लगा लिया, देवर के खूंटे और ननद की चूँची पे जबतक चार पांच कोट रंग न चढ़े रंगपंचमी के दस पंद्रह दिन बाद तक निशान न रहे तो कौन भौजी,... लेकिन तब तक वो तो नहीं बोला, लेकिन दूबे भाभी ने सुनीतवा के छोटे भाई की ओर से जवाब दे दिया,...
" अरे नयको तोहार पहली होली, तोहार देवर, पूँछ काहें रही चेक कर के देख लो, गांड़ मरवाता है की नहीं , नहीं तो निहुराय के मार लो, अगवाड़ा पिछवाड़ा दोनों चेक कर लो ,... "

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मैं ऐसी देवरानी नहीं थी जो जेठानी की बात न मानूं, पेण्ट पुते बाएं हाथ की एक ऊँगली कलाई के पूरे जोर से सीधे उसके पिछवाड़े पेल दिया पूरा जोर लगा के और दाएं हाथ से मैंने मुठियाना शुरू किया ,... साथ में पेण्ट की पुताई भी,... नूनी तो अब कतई नहीं थी फनफना रहा था,...
अब वो बेचारा गिड़गिड़ा रहा था भौजी छोड़ दा, हाथ जोड़त हैं।
" अबे स्साले, उखाड़ के थोड़े ले जाउंगी, तोहरे बहिन महतारी के लिए छोड़ दूंगी, चल सुनीता क नाम ले के दस गारी दे,... "
कोई बड़ी उम्र की मेरी जेठानी बोलीं अपनी महतारी का भी नाम ले ले के,...
पांच मिनट , आठ मिनट दस मिनट,... मैं जोर जोर से मुठिया रही थी और सोच रही थी ये स्साले इस गाँव के लौंडे इनकी महतारियाँ कहाँ कहाँ से चोदवा के,... मेरी सास तो खैर दर्जन भर गदहे घोड़े के साथ सोई थीं तो ये पेट में आये,...
और अब वो किनारे पे पहुँच रहा था, पहली बार लग रहा था पानी निकलने वाला था,...
" भौजी छोड़ दा पता नहीं कइसन लग रहा है का हो रहा है, भौजी,... " मैं समझ गयी का हो रहा है , मुठियाने की रफ़्तार बढ़ाते मैं ने और उसे उकसाया,...
" अरे सुनीतवा के बारे में सोच, ओकर छोट छोट चूँची पकड़ के चोद रहे हो, खूब मस्त चुदवाने लायक है वो,... सोचो तो आराम से,... "

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और बस में फलफलकार, कटोरी भर तो नहीं लेकिन मेरी मुट्ठी भर मलाई निकल आयी,... सब मेरे हाथ में,... और रंग के साथ अब वो सफेदा भी मैंने उसके चेहरे पे पोत दिया और छोड़ते हुए बोली,... जायके सुनीता से चटवाना बोलना बहिनिया देख नया स्वाद,...
रज्जो भौजी ने ज्ञान दिया स्साले गांडू रोज सुनीतवा से चुसवाया कर जल्द ही लम्बा भी हो जाएगा और मोटा भी।
और मेरा ध्यान वापस आया किसी के सवाल से
"लेकिन सबके सगे भाई हैं भी की नहीं "
सवाल तो एकदम सही था,... जो कच्ची कुँवारी थी, बिन चुदी अगर आज हम उनकी नहीं फाड़ते इसलिए की कल उनके भाई से सबके सामने फड्वायंगे और कोई देवर ही न पकड़ा में आया जो उनका भाई हो तो,...
अभी मुझे बियाह के आए साल भर नहीं हुया था था इसलिए सब ननदों की कुंडली मेरे पास नहीं थी, पर मेरी साथ की थीं न और रमजानिया. जिसने मुझे चंदू देवर का लंगोटा खुलवाने की तरकीब बतायी, न गाँव का कोई लौंडा बचा था न लौंडिया जिसके पेट की भी बात रमजानिया से छिपी हो. सबकी कमजोरी, किसका किससे चक्कर है, कौन बबुवाने वाली अपने हरवाह से फंसी है तो कौन अहिराने के किस ग्वाले से अपना दूध दुहवाती है, सब,... हालंकि गाती नहीं थी, मेरी उसकी दोस्ती पक्की थी इसलिए मेरी बात और,... तो उसी ने उन चारो कच्ची कलियों का नाम ले ले के बताया उस ने गिना दिया तीन के नाम जिनके सगे भाई थे , दो के बड़े एक का छोटा,...

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और जिसके सगा भाई नहीं है, मेरी एक नयी नयी आयी जेठानी ने पूछा
और अबकी चननिया ने जवाब दिया,
" अरे उस स्साली का एक मुस्टंडा चचेरा भाई है आस पास की कउनो लौंडिया बची नहीं उससे लेकिन उसकी बहन पे कोई ज़रा भी तो कटखने कुत्ते ऐसा दौड़ता है “

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बस सर्वसमत्ति से तय हुआ की उस ननद के ऊपर उसका वही चचेरा भाई, और वो जिम्मेदारी भी चननिया और कजरी की भौजी के जिम्मे,
लेकिन आज तो पहली लड़ाई ननदों को कबड्डी में हराने की बात थी, उनके भाइयों को उनके ऊपर चढ़ाने की बात तो कल के लिए थी, इलसिए पहले कब्बड्डी की, खासतौर से ननदों की कमजोरी के बारे में पहले से सोच के तैयारी कर के जाना जरूरी था, और किस ननद का कैसे मुकाबला किया जाए,.... हाँ सगुन के लिए आज अगर दूबे भाभी या मिश्राइन भाभी चाहेंगी तो उन कच्ची ननदों की भी बिन चुदी चूत में एक एक पोर ऊँगली की बिना झिल्ली फाड़े , और जीतने के बाद खाली जो नैना की कबड्डी की टीम में कोरी हैं उन्ही को उनके भाइयों से थोड़ी फड़वाना है, हारने के बाद तो सारी ननदों की हार होगी,... इसलिए गाँव की जितनी भी कच्ची कोरी ननदें है सब का हिसाब किताब होगा और कल किसके ऊपर किसका कौन भाई चढ़ेगा, ... ये जिम्मेदारी मैच के बाद तय करने की होगी, रमजनिया, चननिया की और फाइनल फैसला दूबे भाभी के हाथ में
लेकिन अभी थोड़ी देर में शुरू होने वाली कबड्डी
अब अगला सवाल था किस ननद की कौन कौन कमजोरी लगती है तो फिर वही चारो चननिया, गुलबिया, चमेलिया और रमजनिया काम आयीं, किसके गुदगुदी लगती है और कहाँ ,... किसकी साँस जल्दी फूलती है,... और मैं रामजनिया को मान गयी वो बोली की उन चारों के अलावा बाकी सब के यार भी हैं बस उनका नाम ले ले के बिचारि बदनामी के डर से
" सिवाय गितवा और नैना और के " मंजू भाभी ने हँसते हुए कहा और फिर खोल के बोला, अरे नैना के इतने यार है किसका किसका नाम कौन गिनायेगा और गितवा तो खाली भाई अरविंदवा से और उसका भी एकदम खुल्ल्म खुल्ला,...

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" गितवा को तो छुटकी सम्हाल लेगी " मैंने अब राज की बात खोली लेकिन शर्त वाली बातें नहीं बतायीं
" अकेले " मेरी जेठानियाँ बोली तो मैंने करेक्शन जारी किया
" नहीं , गुलबिया, चमेलिया और चांननीया रहेंगी न उसके साथ "
फिर और बात चली तो मैंने अल्टीमेट सरेंडर वाली पिक्स अपने मोबाइल में दिखायीं और पिक्स देखकर तो सबकी हालत खराब एक एक फोटो दस बार, और कजरी की भउजाई गुलबिया तो बोलने लगी