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मर्द का बच्चा. अपडेट 48.
सुबह 8 बजे किसी क दरवाजा खटकने से दोनों की नींद खुली.
अभी तक दोनों एक दूसरे क बहो मई चिपके नंगे सो रहे थे.
दोनों अपने आप को देखा तो खुद को नंगा प् क्र दोनों झट से उठ क्र लक्ष्मी तो चादर hi खींच क्र लपेट ली और लल्लू जिस टॉवल को पहन क्र सोया था वही लपेट लिया.
फिर लल्लू अपना कपडा उठा क्र पहन लिया और लक्ष्मी को भी उसका कपडा उठा क्र दिया और पहले लक्ष्मी को वाशरूम से हो आने को बोलै.
लक्ष्मी बीएड से उतर क्र जैसे hi कड़ी होने क लिए अपने पैरो पर भर दी वैसे hi उसके मुँह से एक कराह निकल गया.
दोनों तंग क बिच जॉइंट मई बहुत दर्द था.
होना hi था ये तो आज कच्ची काली से फूल जो बानी थी.
लल्लू उठ क्र लक्ष्मी को अपने गॉड मई उठा लिया और उसे वाशरूम तक छोड़ आया.
वह एक टॉवल जा क्र दे दिया.
लक्ष्मी स्नानं क्र वह से टॉवल लपेट क्र निकली.
फिर अपने बैग से कपडे निकल क्र पहनने लगी तब तक लल्लू फ्रेश होने चला गया.
जब लल्लू वह वह से आया तो लक्ष्मी एक लाल साडी पहने कड़ी थी.
लल्लू- अब कैसी हो आप. क्या अभी भी दर्द है.
लक्ष्मी बुरा सा मुँह बना क्र है क्र दी.
लल्लू- चल सकती है आप.
लक्ष्मी- कैसे चलूंगी सब क सामने. लंगड़ाती हुई सब क सामने कैसे जाउंगी. सब क्या सोचेंगे.
लल्लू- फिर क्या करे अभी.
लक्ष्मी- आप बहार जाओ. मई नहीं जाउंगी. मई यही रहूंगी.
लल्लू- ठीक है मई देखता हु कोई दबाई.
फिर लल्लू कपडा पहन क्र दरवाजा खोल बहार आ गया.
आँगन मई काफी सरे लोग बैठे थे.
लल्लू को बहुत सरम आ रहा था. आज पहली बार वो इतना लेट उठा था.
घर की सभी लड़किया और काकी माँ भ ममी सब आँगन मई बैठे थे तो कोई काम क्र रही थी.
छोटी बुआ- तो जनाब की नींद पूरी हो गई.
लल्लू- जी बुआ. वो रात लेट नींद आई thi.to…
छोटी बुआ- मुझे बताना था न. मई तो छत पर hi थी. तुम्हे तो नहीं देखि मई.
लल्लू- wo...wo..
रोमा- बुआ, भाई तो लक्ष्मी जी की मोहिनी सूरत मई खोये थे. इनका सारा नींद चैन तो भाभी ने चुरा लिया. फिर इन्हे कैसे नींद आती.
गौरी- पता है बुआ रात भाई न भाभी की घूँघट उठा रहे थे तो इनका हाथ कम्प रहा था.
सब ठहाका लगा क्र हुस्स दिए.
ऋतू- सोनम जा जाकर बहु को ला कमरे से. उसे सब ने अकेला छोड़ दिया है.
सोनम वह से उठ क्र कमरे की और चली गई.
लल्लू कोमल को देख क्र.
लल्लू- दी चाय दो न.
रागिनी- जा अपनी बीबी से मांग. उसे बोल हम सब क लिए चाय बनाये.
तब तक सोनम भी वह आ गई.
सोनम- ऋतू से, माँ भाबी को बुखार है. कोई दबाई हो तो दो न.
काजल- मई देती हु.
फिर काजल उठ क्र कमरे मई चली गई और वह से दबाई ले क्र लक्ष्मी क पास चली गई.
काजल- बीटा ज्यादा दर्द है. ओह्ह मई भी क्या पूछ रही हु.( दर्द तो होगा hi मुशल जैसा जो है मुआ का.)
ये लो बीटा अभी चाय भेज रही हु. उसके बाद ये दबाई खाना. ये बुखार और दर्द दोनों को सही क्र देगा.
तब तक बड़ी ममी भी वह आ गई.
ममी- क्या हुआ मेरे बेटे को.
काजल- कुछ नहीं, हल्का सा बुखार आ गया है. दबाई दे दी है. अभी ठीक हो जाएगा.
काजल रूम से चली जाती है चाय लेन.
ममी- बीटा तबियत ज्यादा ख़राब हो तो डॉक्टर क पास चले.
लक्ष्मी- नहीं माँ. मई ठीक हु. बस हल्का सा बुखार है.
तभी वह रागिनी चाय ले क्र आ जाती है.
रागिनी- लो बीटा. ये चाय क साथ ब्रेड खा लो. फिर दबाई ले लेना.
ममी- ये अचानक बुखार कैसे आ गया.
रागिनी बड़ी ममी को एक तरफ ले जा क्र.
रागिनी- अरे भाभी रात दोनों ने फर्स्ट नाईट मनाई है. इसी लिए ऐसा हुआ है. बच्चिया सब बता रही थी.
रागिनी आहिस्ता से सब बताई बड़ी ममी को तब जा क्र उनके पल्ले पड़ा.
ममी मुसकुडते हुए लक्ष्मी क पास आई और उसके सर पर हाथो से सहला क्र माथा चुम ली.
फिर वो रागिनी काकी क साथ कमरे से बहार आ गई.
रागिनी- सोनम बीटा एक दो बहन अपने भाबी क पास चले जाओ. वह वो अकेली रहेगी कमरे मई तो उसे और तबियत ख़राब जैसा hi लगेगा
फिर सोनम और कोमल उठ क्र वह से लक्ष्मी क पास आ गई.
दोनों बीएड पर बैठ क्र लक्ष्मी क साथ बाटे करने गई.
इधर आँगन मई सभी औरते सदी की तयारी मई बिजी हो गई.
लल्लू भी दालान पर जा क्र काका लोगो से काम का पूछ क्र उन लोगो क साथ काम मई हाथ बताने लगा.
लल्लू को ज्यादातर बहार का hi काम मिला था तो वो बहार hi बिजी हो गया वो आँगन नहीं आ पाया. उसका बड़ा मन था की आ क्र एक बार लक्ष्मी को देखे की वो कैसी है लेकिन टाइम नहीं मिल रहा था. बहुत काम बचा हुआ था अभी. साम मई मेहमान आने वाले थे. फिर बारात भी जाने वाली थी.
उसके यहाँ रिवाज था की बाराती जाने से पहले दिन मई लड़के क यहाँ की खाना कहते है. तो वो सब भी ब्यबस्ता देखना था.
इन्ही कामो मई वो फशा हुआ था.
इधर लक्ष्मी अब थोड़ी सही थी. वो हलके हलके चल प् रही थी तो बहार आ क्र सब क साथ बैठ गई और सब सदी की तयारी उसका बिष गण बजाना सब देख रही थी.
साम मई लल्लू फ्री हो पाया.
वो सीधा आँगन मई आया और लक्ष्मी को ढूंढने लगा.
अब किसी से पूछ भी नहीं सकता था को लक्ष्मी कहा है. नहीं तो सब उसी का गजल बना देते. उस मई भी लड़किया तो अभी इसी तक मई रहती थी की कब लल्लू लक्ष्मी से रिलेटेड कोई बात करे या कोई हरकत करे और सब पकड़ क्र उसका क्लास लगा दे.
लल्लू पूरा घर छान मारा लेकिन उसे लक्ष्मी कही नहीं दिखी.
लल्लू- maa...maa.
लल्लू काजल को देख क्र उसे रोक लिया.
काजल- क्या है बीटा. अभी बहुत काम है अभी डिस्टर्ब मत क्र.
लल्लू- माँ लक्ष्मी जी कहा है.
लल्लू धीरे से माँ से पूछा.
काजल- क्यू क्या काम है.
लल्लू- माँ, काम क चक्कर मई सुबह से उस से मिला नहीं हु. तो इसी लिए…
काजल- वो यहाँ नहीं है. मंदिर गई है सब क साथ. अभी आती होगी. अब छोड़ मेरा रास्ता अभी बहुत काम करने को पड़ा है.
लल्लू मुँह बना क्र साइड हो गया.
शाम का समय था आँगन मई औरते पूजा की तयारी करती हुई वह की जो क्षेत्रीय लोक गीत होता है वो गए रही थी.
इधर बहार दालान पर बारातियो का आना सुरु हो गयाबथा जो गरियो मई अपना अपना सुबिधा क हिसाब से बैठते जा रहे थे.
आँगन मई साडी विवाह की रश्मि पूरी हो जाने क बाद लड़का को ले क्र सभी लड़की वालो क यहाँ चल दिए.
लल्लू राघव क साथ उसके कार मई hi बैठा था.
लड़की वालो का गौण इनके यहाँ से दूर था 10 बज गए वह पहुंचने मई.
वह थोड़ा पहले राघव को घोड़ी पर बैठा क्र सब लग गए नागिन डांस मई.
गाजे पजे क साथ नाचते हुए सब लड़की वाले क यहाँ पहुंचे.
वह फिर सब का स्वागत हुआ और फिर राघव का जयमाला होना था तो उसका तयारी होने लगा.
थोड़ी देर मई दुल्हन को ले क्र लड़की वाले आ गए और वही स्टेज पर दोनों का जयमाला हुआ.
फिर राघव को विवाह क लिए आँगन मई ले जाया गया.
जहा सभी रश्मि पुरे होने मई सुबह हो गया.
सभी बाराती खाना खा क्र वह से पहले hi आ गए थे.
वह सिर्फ अनिल और सुनील काका रह गए.
सब लल्लू को भी रुकने को कह रहे थे लेकिन लल्लू को तो अपने घर जा क्र लक्ष्मी को देखने की जल्दी थी. वैसे भी वो आँगन जा क्र अपनी भाबी को देख आया था.
लल्लू जब अपने आँगन आया तो सब उठ चुके थे तब तक सुबह हो गया था.
लल्लू आ क्र सब से पहले अपने कमरे मई गया लेकिन एक बार फिर उसे निराशा hi हाथ लगा.
लक्ष्मी वह नहीं थी.
लल्लू कपडा बदल क्र बहार आ गया.
घर की सभी औरते उसे घेर क्र बैठ गए.
लल्लू से सभी वह क्या क्या हुआ, भाभी कैसी है, उनका परिवार कैसा है सब तरह तरह का सबल पूछने लगे.
लल्लू सब को जल्दी जल्दी जबाब देता उन लोगो से पीछा छुड़ाना छह रहा था. लेकिन लल्लू उनके जितने सबल का जबाब देता उतने hi और सबल वो लोग लल्लू से और क्र देते.
अंत मई लल्लू से रहा नहीं गया.
लल्लू- अरे कितने सवाल करोगे आप लोग. अभी थोड़ी देर मई तो आ hi जाएंगे राघव भैया अपने दुलहनिए को ले क्र फिर जी भर क्र देख लेना.
अभी कोई एक कप चाय पीला दो पहले.
तभी पीछे से ऋतू काकी चाय ले क्र आ गई.
ऋतू- मुझे लग hi रहा था की तू चाय मानेंगे. ले मई पहले hi बना दिया था.
लल्लू चाय पिता सोच रहा था की लक्ष्मी क बारे मई कैसे पूछे सब से.
फिर लल्लू नजर घुमा क्र देखा तो सोनम और कोमल भी यहाँ नहीं थी.
लल्लू- दी कहा है. वो अभी तक नहीं उठी है क्या.
गौरी- दीदी को धुंध रहे हो या बीबी को.
लगता है हमारा भाई डी और बी का फर्क भूल गया है.
सब गौरी की बात सत जोर से हुस्स दिए.
लल्लू- यहाँ तो बैठना hi बेकार है.
लल्लू बहाना बना क्र सोनम दी क कमरे मई घुस गया जहा सोनम और कोमल दोनों लक्ष्मी क साथ बैठ क्र बाटे क्र रहे थे.
लल्लू भी वही आ क्र बैठ गया.
कोमल- तुम यहाँ क्या क्र रहा है.
लल्लू- ये आज कैसा सबल है. इस से पहले तो कभी नहीं पूछा था आप ने.
कोमल- अभी यहाँ लेडीज टॉक चल रहा है चल भाग यहाँ से.
लल्लू- आयी….. ये कैसा टॉक है जो एक भाई को उसकी प्यारी बहन से अलग क्र दे.
सोनम- ये ऐसा टॉक है जो उसके पति को उसकी पत्नी से अलग क्र देता है.
सोनम लल्लू क कान को पकड़ क्र उसे कमरे से निकल दी.
लल्लू बुरा सा मुँह बनता वह से बहार आ गया.
रोमा- क्या भाई… मिल आये अपने दीदी काम बीबी से.
बड़ी ममी- क्या बोल रही है रोमा बीटा. कुछ सोच क्र तो बोलै क्र.
लल्लू वही बैठा था. तभी सोनम और कोमल क साथ लक्ष्मी बाई आँगन मई आ गई.
गौरी- लो आ गई आप की रामप्यारी. अब जितना देखना है देख लो.
सब हुस्स दिए.
लक्ष्मी भी शर्मा गई.
लल्लू चोर नजरो से लक्ष्मी को देख रहा था तभी…
रानी- देखो भाई कैसे देख रहा है भाभी को.
लल्लू- हे भगवन अब मई यहाँ बैठ भी नहीं सकता.
लल्लू उठ क्र अपने कमरे मई चला गया.
वह जा क्र लल्लू अपने बीएड पर लेट गया.
लल्लू- ये सब तो अब लक्ष्मी जी की और देखना भी बंद करवा देंगे.
क्या karu,kya करू. बड़ा देखने का मन क्र रहा है और सब निर्दई उसे मुझ से दूर रखने का हर तरह का प्रयाश क्र कर रहे है.
लल्लू खुद से बाटे करता हुआ बीएड पर लेता हुआ था.
रात तो सोया नहीं था इसलिए अभी बीएड पर लेट hi नींद आ गया.
पता नहीं कितना समय हुआ था.
लक्ष्मी- उठिये, भैया और भाभी आ गए है. अब उठ जाइये.
लल्लू आँख खोला तो लक्ष्मी लल्लू पर झुकी उसे उठा रही थी.
लल्लू लक्ष्मी को बहो मई ले क्र उसे भी बीएड पर अपने साथ सुला लिया.
लक्ष्मी- क्या क्र रहे है. दरवाजा खुला हुआ है. कोई आ जाएगा.
लल्लू- कितना तरपति हो. क्या तुम्हे मजा आता हैंउझे तारपा क्र.
लक्ष्मी- मई क्या करू. कोई न कोई साथ hi होते है. फिर मई क्या कृ.
लल्लू- अभी तो कोई साथ नहीं है न. अभी थोड़ी देर मेरे साथ लेट जाओ.
लक्ष्मी- भैया भाभी आये है. चलिए न, उन्हें देखने चलते है. सब वही है.
लल्लू- ये तो और भी अच्छी बात है. अभी इधर कोई नहीं आएगा. हम इत्मिनान से प्यार भरी बाटे क्र सकते है.
लक्ष्मी- क्या क्र रहे है कोई आ जाएगा. छोड़िये न.
लल्लू- पहले ये बताओ की अब तुम कैसी हो.
कितने देर से तुम्हे देखा नहीं था. अब कलेजे को थोड़ी ठंढक पहुंची है.
लक्ष्मी- हुत्त बेसरम,
लक्ष्मी लल्लू को अपने पास से धकेल क्र दूर क्र दी.
लल्लू मुँह बना क्र बैठ गया.
लक्ष्मी- आ जाइये फ्रेश हो क्र. मई तब तक दीदी लोगो क साथ जा रही हु भाभी को देखने.
लक्ष्मी बहार चली गई.
लल्लू- सब लड़किया एक जैसी hi होती है. सदी ब्याह का नाम सुन क्र hi देखने को तैयार हो जाती है. चाहे अपना सदी hi क्यू न होने को हो.
हुस्स है यहाँ पति तरप रहा है और एक मेरी श्री मति जी है जिन्हे कोई फिक्र hi नहीं.
लल्लू अपने आप से बाटे करता उठ क्र वाशरूम चला गया.
फ्रेश हो क्र बहार आया और फिर वो भी भैया भाभी को देखने चला गया.
सभी लेडीज वह रस्म मई लगे हुए थे.
वो लोग दोनों को ले क्र पूजा वाले कमरे मई चले गए.
लल्लू थोड़ी देर ये सब देखा फिर आ क्र आँगन मई बैठ गया.
दो घंटे बाद सब फ्री हुए.
भाभी क गौण से कुछ मेहमान भी साथ आये थे तो फिर लल्लू उन लोगो क खातिरदारी मई लग गया. अब घर मई सब से छोटा वही था तो कोई भी काम होता तो सब उसे hi करने को कहते.
लल्लू रात खाना खाने तक इन्ही लोगो मई लगा रहा.
चार मेहमान आये थे. सब को खिला क्र फिर उनके सोने का व्यवस्था करने क बाद जब लल्लू फ्री हुआ फिर आँगन मई जा क्र खाना खाया.
लेडीज पार्टी खाना खा रही थी.
लल्लू भी जा क्र अपने लिए खाना निकल क्र एक साइड बैठ खाने लगा.
खाना खाने क बाद लल्लू दालान पर मेहमानो को देखने चला गया की वो सोये या नहीं.
उन्हें किसी चीज की जरुरत तो नहीं है.
चारो मेहमान सो गए थे.
लल्लू वह से वापस आ क्र अपने कमरे मई आया तो लक्ष्मी अभी नहीं आई थी.
लल्लू अपना कपडा बदल क्र सोने की तयारी करने लगा.
काफी देर इंतजार करने क बाद भी कब लक्ष्मी नहीं आई तो लल्लू को नींद आ गया.
रात क किसी समय लल्लू की नींद खुली.
देखा तो लक्ष्मी अभी भी नहीं आई थी.
लल्लू फिर सोने की कोसिस करने लगा.
सुबह चार बजे उठ क्र नदी किनारे चला गया.
बहुत दिन हो गए थे नदी की और गए हुए.
वह जा क्र लल्लू फ्रेश हुआ और वही एक पैर क निचे ध्यान मई बैठ गया.
अभी तक लल्लू तीन द्वार खोल चूका था और चौथे द्वार की और जा रहा था.
अब ग्रीन गेट की बरी थी.
लल्लू ध्यान मई बैठा ग्रीन गेट क पास पहुंच गया.
ग्रीन गेट को खोलने को जैसे hi हाथ बढ़ाया लल्लू ने वो गेट अपने आप से खुल गया.
अंदर प्रवेश क्र गया लल्लू. यहाँ भी वैसा hi था जैसे बांकी क तीन जगह उसे देखने को मिला था.
लल्लू वह हवा मई लटका इधर उधर भटकता आगे बढ़ रहा था लेकिन आगे जाने का गेट नहीं दिख रहा था. फिर उसे याद आया की गेट उप्पेर मिल रहे है.
तो वो अब उप्पेर की और चल दिया काफी उप्पेर जाने क बाद उसे एक ब्लू कलर का चमकता हुआ कुछ दिखा.
लल्लू वह जा क्र देखा तो वो एक गेट hi था.
लल्लू उस गेट क पास जा क्र संत हो क्र उसे खोल लिया.
ब्लू गेट खुलते hi लल्लू को अपने अंडर खींच लिया.
लल्लू वह जैसे कोई चुम्बक हो ऐसे खींचा चला गया.
ब्लू अट्मॉस्फेरे मई लल्लू मिडिल मई पहुंच क्र रुक गया.
वह से फिर लल्लू उप्पेर की और सफर सुरु क्र दिया अपना.
आगे उसे इंडिगो कलर का गेट दिख रहा था. लल्लू खुश हो गया.
गेट क पास पहुंच क्र लल्लू जैसे hi उसे खोलने को हाथ बढ़ाया वो गेट लल्लू को अपने मई समां लिया और दूसरी और छोड़ दिया.
अंदर यहाँ भी बांकी जगहों की तरह hi था.
वो हवा मई ुरता बदलो को चिर क्र उप्पेर उठता जा रहा था.
अब एक लास्ट रह गया था.
लल्लू यहाँ इंडिगो अट्मॉस्फेरे मई आ क्र उसके जैसा hi हो गया था.
कोई देख ले अभी लल्लू को तो दर क्र भाग जाइएगा कोई भूत समाज क्र.
पूरी बॉडी बाल तक लल्लू क इंडिगो कलर का हो गया था.
लल्लू उप्पेर ुरर्ता हुआ आगे बढ़ रहा था.
बहुत उप्पेर उसे वैलोट कलर का गेट दिखा.
वह पहुंच क्र लल्लू सीधा उस मई प्रवेश करता चला गया.
यहाँ प्रवेश करते hi लल्लू ान वीएलओट कलर मई बदल गया था.
वह चारो और इंद्रधनुष बना हुआ हवा मई तैर रहा था.
लल्लू एक जगह स्थिर हो क्र चारो और देख रहा था तभी वो सभी इंद्रधनुष चमकने लगा और वो सभी ुरर्ता हुआ आ क्र लल्लू क सरीर मई प्रवेश करने लगा.
असीम दर्द का एहसास हो रहा था लल्लू को.
लल्लू जोर जोर से गाला फार क्र चिल्ला रहा था लेकिन जब तक वो सरे इंद्रधनुष उसके अंडर समां नहीं गए. लल्लू को दर्द होता रहा.
ख़त्म होने क बाद लल्लू बेहोश हो गया.
होश आया तो 10 बज रहा था.
लल्लू वह से उठ क्र जल्दी से घर की और चल दिया. मोबाइल निकल क्र देखा तो कई कॉल थे घर से सोनम क.
लल्लू जल्दी जल्दी चलता हुआ घर पहुंच गया.
सोनम- कहा था तू अब तक. कॉल क्यू नहीं उठा रहा था. पता है हम कितना दर गए थे.
सुबह 8 बजे किसी क दरवाजा खटकने से दोनों की नींद खुली.
अभी तक दोनों एक दूसरे क बहो मई चिपके नंगे सो रहे थे.
दोनों अपने आप को देखा तो खुद को नंगा प् क्र दोनों झट से उठ क्र लक्ष्मी तो चादर hi खींच क्र लपेट ली और लल्लू जिस टॉवल को पहन क्र सोया था वही लपेट लिया.
फिर लल्लू अपना कपडा उठा क्र पहन लिया और लक्ष्मी को भी उसका कपडा उठा क्र दिया और पहले लक्ष्मी को वाशरूम से हो आने को बोलै.
लक्ष्मी बीएड से उतर क्र जैसे hi कड़ी होने क लिए अपने पैरो पर भर दी वैसे hi उसके मुँह से एक कराह निकल गया.
दोनों तंग क बिच जॉइंट मई बहुत दर्द था.
होना hi था ये तो आज कच्ची काली से फूल जो बानी थी.
लल्लू उठ क्र लक्ष्मी को अपने गॉड मई उठा लिया और उसे वाशरूम तक छोड़ आया.
वह एक टॉवल जा क्र दे दिया.
लक्ष्मी स्नानं क्र वह से टॉवल लपेट क्र निकली.
फिर अपने बैग से कपडे निकल क्र पहनने लगी तब तक लल्लू फ्रेश होने चला गया.
जब लल्लू वह वह से आया तो लक्ष्मी एक लाल साडी पहने कड़ी थी.
लल्लू- अब कैसी हो आप. क्या अभी भी दर्द है.
लक्ष्मी बुरा सा मुँह बना क्र है क्र दी.
लल्लू- चल सकती है आप.
लक्ष्मी- कैसे चलूंगी सब क सामने. लंगड़ाती हुई सब क सामने कैसे जाउंगी. सब क्या सोचेंगे.
लल्लू- फिर क्या करे अभी.
लक्ष्मी- आप बहार जाओ. मई नहीं जाउंगी. मई यही रहूंगी.
लल्लू- ठीक है मई देखता हु कोई दबाई.
फिर लल्लू कपडा पहन क्र दरवाजा खोल बहार आ गया.
आँगन मई काफी सरे लोग बैठे थे.
लल्लू को बहुत सरम आ रहा था. आज पहली बार वो इतना लेट उठा था.
घर की सभी लड़किया और काकी माँ भ ममी सब आँगन मई बैठे थे तो कोई काम क्र रही थी.
छोटी बुआ- तो जनाब की नींद पूरी हो गई.
लल्लू- जी बुआ. वो रात लेट नींद आई thi.to…
छोटी बुआ- मुझे बताना था न. मई तो छत पर hi थी. तुम्हे तो नहीं देखि मई.
लल्लू- wo...wo..
रोमा- बुआ, भाई तो लक्ष्मी जी की मोहिनी सूरत मई खोये थे. इनका सारा नींद चैन तो भाभी ने चुरा लिया. फिर इन्हे कैसे नींद आती.
गौरी- पता है बुआ रात भाई न भाभी की घूँघट उठा रहे थे तो इनका हाथ कम्प रहा था.
सब ठहाका लगा क्र हुस्स दिए.
ऋतू- सोनम जा जाकर बहु को ला कमरे से. उसे सब ने अकेला छोड़ दिया है.
सोनम वह से उठ क्र कमरे की और चली गई.
लल्लू कोमल को देख क्र.
लल्लू- दी चाय दो न.
रागिनी- जा अपनी बीबी से मांग. उसे बोल हम सब क लिए चाय बनाये.
तब तक सोनम भी वह आ गई.
सोनम- ऋतू से, माँ भाबी को बुखार है. कोई दबाई हो तो दो न.
काजल- मई देती हु.
फिर काजल उठ क्र कमरे मई चली गई और वह से दबाई ले क्र लक्ष्मी क पास चली गई.
काजल- बीटा ज्यादा दर्द है. ओह्ह मई भी क्या पूछ रही हु.( दर्द तो होगा hi मुशल जैसा जो है मुआ का.)
ये लो बीटा अभी चाय भेज रही हु. उसके बाद ये दबाई खाना. ये बुखार और दर्द दोनों को सही क्र देगा.
तब तक बड़ी ममी भी वह आ गई.
ममी- क्या हुआ मेरे बेटे को.
काजल- कुछ नहीं, हल्का सा बुखार आ गया है. दबाई दे दी है. अभी ठीक हो जाएगा.
काजल रूम से चली जाती है चाय लेन.
ममी- बीटा तबियत ज्यादा ख़राब हो तो डॉक्टर क पास चले.
लक्ष्मी- नहीं माँ. मई ठीक हु. बस हल्का सा बुखार है.
तभी वह रागिनी चाय ले क्र आ जाती है.
रागिनी- लो बीटा. ये चाय क साथ ब्रेड खा लो. फिर दबाई ले लेना.
ममी- ये अचानक बुखार कैसे आ गया.
रागिनी बड़ी ममी को एक तरफ ले जा क्र.
रागिनी- अरे भाभी रात दोनों ने फर्स्ट नाईट मनाई है. इसी लिए ऐसा हुआ है. बच्चिया सब बता रही थी.
रागिनी आहिस्ता से सब बताई बड़ी ममी को तब जा क्र उनके पल्ले पड़ा.
ममी मुसकुडते हुए लक्ष्मी क पास आई और उसके सर पर हाथो से सहला क्र माथा चुम ली.
फिर वो रागिनी काकी क साथ कमरे से बहार आ गई.
रागिनी- सोनम बीटा एक दो बहन अपने भाबी क पास चले जाओ. वह वो अकेली रहेगी कमरे मई तो उसे और तबियत ख़राब जैसा hi लगेगा
फिर सोनम और कोमल उठ क्र वह से लक्ष्मी क पास आ गई.
दोनों बीएड पर बैठ क्र लक्ष्मी क साथ बाटे करने गई.
इधर आँगन मई सभी औरते सदी की तयारी मई बिजी हो गई.
लल्लू भी दालान पर जा क्र काका लोगो से काम का पूछ क्र उन लोगो क साथ काम मई हाथ बताने लगा.
लल्लू को ज्यादातर बहार का hi काम मिला था तो वो बहार hi बिजी हो गया वो आँगन नहीं आ पाया. उसका बड़ा मन था की आ क्र एक बार लक्ष्मी को देखे की वो कैसी है लेकिन टाइम नहीं मिल रहा था. बहुत काम बचा हुआ था अभी. साम मई मेहमान आने वाले थे. फिर बारात भी जाने वाली थी.
उसके यहाँ रिवाज था की बाराती जाने से पहले दिन मई लड़के क यहाँ की खाना कहते है. तो वो सब भी ब्यबस्ता देखना था.
इन्ही कामो मई वो फशा हुआ था.
इधर लक्ष्मी अब थोड़ी सही थी. वो हलके हलके चल प् रही थी तो बहार आ क्र सब क साथ बैठ गई और सब सदी की तयारी उसका बिष गण बजाना सब देख रही थी.
साम मई लल्लू फ्री हो पाया.
वो सीधा आँगन मई आया और लक्ष्मी को ढूंढने लगा.
अब किसी से पूछ भी नहीं सकता था को लक्ष्मी कहा है. नहीं तो सब उसी का गजल बना देते. उस मई भी लड़किया तो अभी इसी तक मई रहती थी की कब लल्लू लक्ष्मी से रिलेटेड कोई बात करे या कोई हरकत करे और सब पकड़ क्र उसका क्लास लगा दे.
लल्लू पूरा घर छान मारा लेकिन उसे लक्ष्मी कही नहीं दिखी.
लल्लू- maa...maa.
लल्लू काजल को देख क्र उसे रोक लिया.
काजल- क्या है बीटा. अभी बहुत काम है अभी डिस्टर्ब मत क्र.
लल्लू- माँ लक्ष्मी जी कहा है.
लल्लू धीरे से माँ से पूछा.
काजल- क्यू क्या काम है.
लल्लू- माँ, काम क चक्कर मई सुबह से उस से मिला नहीं हु. तो इसी लिए…
काजल- वो यहाँ नहीं है. मंदिर गई है सब क साथ. अभी आती होगी. अब छोड़ मेरा रास्ता अभी बहुत काम करने को पड़ा है.
लल्लू मुँह बना क्र साइड हो गया.
शाम का समय था आँगन मई औरते पूजा की तयारी करती हुई वह की जो क्षेत्रीय लोक गीत होता है वो गए रही थी.
इधर बहार दालान पर बारातियो का आना सुरु हो गयाबथा जो गरियो मई अपना अपना सुबिधा क हिसाब से बैठते जा रहे थे.
आँगन मई साडी विवाह की रश्मि पूरी हो जाने क बाद लड़का को ले क्र सभी लड़की वालो क यहाँ चल दिए.
लल्लू राघव क साथ उसके कार मई hi बैठा था.
लड़की वालो का गौण इनके यहाँ से दूर था 10 बज गए वह पहुंचने मई.
वह थोड़ा पहले राघव को घोड़ी पर बैठा क्र सब लग गए नागिन डांस मई.
गाजे पजे क साथ नाचते हुए सब लड़की वाले क यहाँ पहुंचे.
वह फिर सब का स्वागत हुआ और फिर राघव का जयमाला होना था तो उसका तयारी होने लगा.
थोड़ी देर मई दुल्हन को ले क्र लड़की वाले आ गए और वही स्टेज पर दोनों का जयमाला हुआ.
फिर राघव को विवाह क लिए आँगन मई ले जाया गया.
जहा सभी रश्मि पुरे होने मई सुबह हो गया.
सभी बाराती खाना खा क्र वह से पहले hi आ गए थे.
वह सिर्फ अनिल और सुनील काका रह गए.
सब लल्लू को भी रुकने को कह रहे थे लेकिन लल्लू को तो अपने घर जा क्र लक्ष्मी को देखने की जल्दी थी. वैसे भी वो आँगन जा क्र अपनी भाबी को देख आया था.
लल्लू जब अपने आँगन आया तो सब उठ चुके थे तब तक सुबह हो गया था.
लल्लू आ क्र सब से पहले अपने कमरे मई गया लेकिन एक बार फिर उसे निराशा hi हाथ लगा.
लक्ष्मी वह नहीं थी.
लल्लू कपडा बदल क्र बहार आ गया.
घर की सभी औरते उसे घेर क्र बैठ गए.
लल्लू से सभी वह क्या क्या हुआ, भाभी कैसी है, उनका परिवार कैसा है सब तरह तरह का सबल पूछने लगे.
लल्लू सब को जल्दी जल्दी जबाब देता उन लोगो से पीछा छुड़ाना छह रहा था. लेकिन लल्लू उनके जितने सबल का जबाब देता उतने hi और सबल वो लोग लल्लू से और क्र देते.
अंत मई लल्लू से रहा नहीं गया.
लल्लू- अरे कितने सवाल करोगे आप लोग. अभी थोड़ी देर मई तो आ hi जाएंगे राघव भैया अपने दुलहनिए को ले क्र फिर जी भर क्र देख लेना.
अभी कोई एक कप चाय पीला दो पहले.
तभी पीछे से ऋतू काकी चाय ले क्र आ गई.
ऋतू- मुझे लग hi रहा था की तू चाय मानेंगे. ले मई पहले hi बना दिया था.
लल्लू चाय पिता सोच रहा था की लक्ष्मी क बारे मई कैसे पूछे सब से.
फिर लल्लू नजर घुमा क्र देखा तो सोनम और कोमल भी यहाँ नहीं थी.
लल्लू- दी कहा है. वो अभी तक नहीं उठी है क्या.
गौरी- दीदी को धुंध रहे हो या बीबी को.
लगता है हमारा भाई डी और बी का फर्क भूल गया है.
सब गौरी की बात सत जोर से हुस्स दिए.
लल्लू- यहाँ तो बैठना hi बेकार है.
लल्लू बहाना बना क्र सोनम दी क कमरे मई घुस गया जहा सोनम और कोमल दोनों लक्ष्मी क साथ बैठ क्र बाटे क्र रहे थे.
लल्लू भी वही आ क्र बैठ गया.
कोमल- तुम यहाँ क्या क्र रहा है.
लल्लू- ये आज कैसा सबल है. इस से पहले तो कभी नहीं पूछा था आप ने.
कोमल- अभी यहाँ लेडीज टॉक चल रहा है चल भाग यहाँ से.
लल्लू- आयी….. ये कैसा टॉक है जो एक भाई को उसकी प्यारी बहन से अलग क्र दे.
सोनम- ये ऐसा टॉक है जो उसके पति को उसकी पत्नी से अलग क्र देता है.
सोनम लल्लू क कान को पकड़ क्र उसे कमरे से निकल दी.
लल्लू बुरा सा मुँह बनता वह से बहार आ गया.
रोमा- क्या भाई… मिल आये अपने दीदी काम बीबी से.
बड़ी ममी- क्या बोल रही है रोमा बीटा. कुछ सोच क्र तो बोलै क्र.
लल्लू वही बैठा था. तभी सोनम और कोमल क साथ लक्ष्मी बाई आँगन मई आ गई.
गौरी- लो आ गई आप की रामप्यारी. अब जितना देखना है देख लो.
सब हुस्स दिए.
लक्ष्मी भी शर्मा गई.
लल्लू चोर नजरो से लक्ष्मी को देख रहा था तभी…
रानी- देखो भाई कैसे देख रहा है भाभी को.
लल्लू- हे भगवन अब मई यहाँ बैठ भी नहीं सकता.
लल्लू उठ क्र अपने कमरे मई चला गया.
वह जा क्र लल्लू अपने बीएड पर लेट गया.
लल्लू- ये सब तो अब लक्ष्मी जी की और देखना भी बंद करवा देंगे.
क्या karu,kya करू. बड़ा देखने का मन क्र रहा है और सब निर्दई उसे मुझ से दूर रखने का हर तरह का प्रयाश क्र कर रहे है.
लल्लू खुद से बाटे करता हुआ बीएड पर लेता हुआ था.
रात तो सोया नहीं था इसलिए अभी बीएड पर लेट hi नींद आ गया.
पता नहीं कितना समय हुआ था.
लक्ष्मी- उठिये, भैया और भाभी आ गए है. अब उठ जाइये.
लल्लू आँख खोला तो लक्ष्मी लल्लू पर झुकी उसे उठा रही थी.
लल्लू लक्ष्मी को बहो मई ले क्र उसे भी बीएड पर अपने साथ सुला लिया.
लक्ष्मी- क्या क्र रहे है. दरवाजा खुला हुआ है. कोई आ जाएगा.
लल्लू- कितना तरपति हो. क्या तुम्हे मजा आता हैंउझे तारपा क्र.
लक्ष्मी- मई क्या करू. कोई न कोई साथ hi होते है. फिर मई क्या कृ.
लल्लू- अभी तो कोई साथ नहीं है न. अभी थोड़ी देर मेरे साथ लेट जाओ.
लक्ष्मी- भैया भाभी आये है. चलिए न, उन्हें देखने चलते है. सब वही है.
लल्लू- ये तो और भी अच्छी बात है. अभी इधर कोई नहीं आएगा. हम इत्मिनान से प्यार भरी बाटे क्र सकते है.
लक्ष्मी- क्या क्र रहे है कोई आ जाएगा. छोड़िये न.
लल्लू- पहले ये बताओ की अब तुम कैसी हो.
कितने देर से तुम्हे देखा नहीं था. अब कलेजे को थोड़ी ठंढक पहुंची है.
लक्ष्मी- हुत्त बेसरम,
लक्ष्मी लल्लू को अपने पास से धकेल क्र दूर क्र दी.
लल्लू मुँह बना क्र बैठ गया.
लक्ष्मी- आ जाइये फ्रेश हो क्र. मई तब तक दीदी लोगो क साथ जा रही हु भाभी को देखने.
लक्ष्मी बहार चली गई.
लल्लू- सब लड़किया एक जैसी hi होती है. सदी ब्याह का नाम सुन क्र hi देखने को तैयार हो जाती है. चाहे अपना सदी hi क्यू न होने को हो.
हुस्स है यहाँ पति तरप रहा है और एक मेरी श्री मति जी है जिन्हे कोई फिक्र hi नहीं.
लल्लू अपने आप से बाटे करता उठ क्र वाशरूम चला गया.
फ्रेश हो क्र बहार आया और फिर वो भी भैया भाभी को देखने चला गया.
सभी लेडीज वह रस्म मई लगे हुए थे.
वो लोग दोनों को ले क्र पूजा वाले कमरे मई चले गए.
लल्लू थोड़ी देर ये सब देखा फिर आ क्र आँगन मई बैठ गया.
दो घंटे बाद सब फ्री हुए.
भाभी क गौण से कुछ मेहमान भी साथ आये थे तो फिर लल्लू उन लोगो क खातिरदारी मई लग गया. अब घर मई सब से छोटा वही था तो कोई भी काम होता तो सब उसे hi करने को कहते.
लल्लू रात खाना खाने तक इन्ही लोगो मई लगा रहा.
चार मेहमान आये थे. सब को खिला क्र फिर उनके सोने का व्यवस्था करने क बाद जब लल्लू फ्री हुआ फिर आँगन मई जा क्र खाना खाया.
लेडीज पार्टी खाना खा रही थी.
लल्लू भी जा क्र अपने लिए खाना निकल क्र एक साइड बैठ खाने लगा.
खाना खाने क बाद लल्लू दालान पर मेहमानो को देखने चला गया की वो सोये या नहीं.
उन्हें किसी चीज की जरुरत तो नहीं है.
चारो मेहमान सो गए थे.
लल्लू वह से वापस आ क्र अपने कमरे मई आया तो लक्ष्मी अभी नहीं आई थी.
लल्लू अपना कपडा बदल क्र सोने की तयारी करने लगा.
काफी देर इंतजार करने क बाद भी कब लक्ष्मी नहीं आई तो लल्लू को नींद आ गया.
रात क किसी समय लल्लू की नींद खुली.
देखा तो लक्ष्मी अभी भी नहीं आई थी.
लल्लू फिर सोने की कोसिस करने लगा.
सुबह चार बजे उठ क्र नदी किनारे चला गया.
बहुत दिन हो गए थे नदी की और गए हुए.
वह जा क्र लल्लू फ्रेश हुआ और वही एक पैर क निचे ध्यान मई बैठ गया.
अभी तक लल्लू तीन द्वार खोल चूका था और चौथे द्वार की और जा रहा था.
अब ग्रीन गेट की बरी थी.
लल्लू ध्यान मई बैठा ग्रीन गेट क पास पहुंच गया.
ग्रीन गेट को खोलने को जैसे hi हाथ बढ़ाया लल्लू ने वो गेट अपने आप से खुल गया.
अंदर प्रवेश क्र गया लल्लू. यहाँ भी वैसा hi था जैसे बांकी क तीन जगह उसे देखने को मिला था.
लल्लू वह हवा मई लटका इधर उधर भटकता आगे बढ़ रहा था लेकिन आगे जाने का गेट नहीं दिख रहा था. फिर उसे याद आया की गेट उप्पेर मिल रहे है.
तो वो अब उप्पेर की और चल दिया काफी उप्पेर जाने क बाद उसे एक ब्लू कलर का चमकता हुआ कुछ दिखा.
लल्लू वह जा क्र देखा तो वो एक गेट hi था.
लल्लू उस गेट क पास जा क्र संत हो क्र उसे खोल लिया.
ब्लू गेट खुलते hi लल्लू को अपने अंडर खींच लिया.
लल्लू वह जैसे कोई चुम्बक हो ऐसे खींचा चला गया.
ब्लू अट्मॉस्फेरे मई लल्लू मिडिल मई पहुंच क्र रुक गया.
वह से फिर लल्लू उप्पेर की और सफर सुरु क्र दिया अपना.
आगे उसे इंडिगो कलर का गेट दिख रहा था. लल्लू खुश हो गया.
गेट क पास पहुंच क्र लल्लू जैसे hi उसे खोलने को हाथ बढ़ाया वो गेट लल्लू को अपने मई समां लिया और दूसरी और छोड़ दिया.
अंदर यहाँ भी बांकी जगहों की तरह hi था.
वो हवा मई ुरता बदलो को चिर क्र उप्पेर उठता जा रहा था.
अब एक लास्ट रह गया था.
लल्लू यहाँ इंडिगो अट्मॉस्फेरे मई आ क्र उसके जैसा hi हो गया था.
कोई देख ले अभी लल्लू को तो दर क्र भाग जाइएगा कोई भूत समाज क्र.
पूरी बॉडी बाल तक लल्लू क इंडिगो कलर का हो गया था.
लल्लू उप्पेर ुरर्ता हुआ आगे बढ़ रहा था.
बहुत उप्पेर उसे वैलोट कलर का गेट दिखा.
वह पहुंच क्र लल्लू सीधा उस मई प्रवेश करता चला गया.
यहाँ प्रवेश करते hi लल्लू ान वीएलओट कलर मई बदल गया था.
वह चारो और इंद्रधनुष बना हुआ हवा मई तैर रहा था.
लल्लू एक जगह स्थिर हो क्र चारो और देख रहा था तभी वो सभी इंद्रधनुष चमकने लगा और वो सभी ुरर्ता हुआ आ क्र लल्लू क सरीर मई प्रवेश करने लगा.
असीम दर्द का एहसास हो रहा था लल्लू को.
लल्लू जोर जोर से गाला फार क्र चिल्ला रहा था लेकिन जब तक वो सरे इंद्रधनुष उसके अंडर समां नहीं गए. लल्लू को दर्द होता रहा.
ख़त्म होने क बाद लल्लू बेहोश हो गया.
होश आया तो 10 बज रहा था.
लल्लू वह से उठ क्र जल्दी से घर की और चल दिया. मोबाइल निकल क्र देखा तो कई कॉल थे घर से सोनम क.
लल्लू जल्दी जल्दी चलता हुआ घर पहुंच गया.
सोनम- कहा था तू अब तक. कॉल क्यू नहीं उठा रहा था. पता है हम कितना दर गए थे.