Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh - Page 8 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh

अपडेट - 58

तो दोस्तों जैसा की अब तक की कहानी में आपने देखा कैसे प्रीति अपने भाई सनी की तरफ आकर्षित होने लगी है और अब उसके भाई की कल्पना और ख्यालो से hi अपने यौवन में गर्मी का एहसास करने लगती है और साथ hi सनी को अपने पास महसूस करने के लिए अब उसके पसंद के कपडे यहाँ तक की ब्रा और पंतय भी भी उसकी पसंद की पहनने लगी है.

इतना सब कुछ होने के बाद भी फिलहाल प्रीति के दिल और दिमाग में एक जंग छिड़ी हुई है और अब भी वप इस पशोपेश में है की क्या उसका सनी की तरफ इस तरह आकर्षित होना और उसके ख्यालो से अपने शरीर में इस तरह एक्ससिटेमेंट महसूस करना सही है या नहीं, लेकिन अब जवानी की इस कामुक अवस्था में जहा प्रीति ने अब तक अपना यौवन सहेज कर रखा था वो सनी के ख्याल मात्रा से hi भांग होने के लिए मचलने लगा था और आज रात भी प्रीति के साथ कुछ ऐसा hi होता है....

रात में अपने बिस्तर पर लेती हुई प्रीति जिसकी आँखों में नींद की बजाय उस वक्त टेरेस पर सनी के साथ हुई मस्ती भरी बात चित और मस्ती के ख्याल घूम रहे थे उनके बारे में सोचते हुए, चेहरे पर एक हसीं मुस्कराहट लिए, " उफ़ क्या हो रहा है मुझे ये आजकल, क्यों में सनी की तरफ इस तरह से खींची जा रही हु, ".

और हर एक बात को वापस यद् करते हुए, उफ्फ्फ मेरा भाई आज इतने फ्रैंकली मुझसे ये बात पूछ रहा था की उसके द्वारा खरीदी हुई ब्रा पंतय में उसकी बेहेन कैसी दिखाई देती है, अब उसे कैसे और क्या बताती मैं, जब से उसने मुझे ये ब्रा पंतय दिलाई है और मेने इनको पहना है, ये सोच hi मुझे इतना गरम महसूस करवा रही है की बता नहीं सकती हु....

उफ्फ्फ बातो बातो में और मस्ती में उस दिन शॉपिंग के वक्त मेने उससे कह तो दिया की मुझे अपनी गफ समझ ले लेकिन में ये कैसे भूल गयी की गफ बनने के बाद एक लड़के को लड़की भोत सरे हक़ दे बैठती है, जैसे की सनी मुझसे वो साडी बाटे पूछ रहा है.... वैसे अगर सनी सच में मुझे अपनी गफ बना ले तो बुरा भी क्या है, इतना हॉट एंड हैंडसम लड़का मेरा बर्फ होगा, कैसे लड़किया मर रही है उसे अपना यार बनाने के लिए और मेरे साथ तो वो इसी घर में है फिर क्यों में खुद को नहीं आगे बढ़ा प् रही.

एक तरफ जहा दिल में इतने सरे अलग अलग विचार चल रहे थे वही दिमाग ये भी प्रश्न कर रहा था की, क्या सनी के मन में भी मेरे लिए कुछ है या वो बस मस्ती में hi मुझसे ये सब बाटे कर रहा था, कुछ करने से पहले ये जानना भी तो जरुरी है न....

और तभी प्रीति को पता भी नहीं होता है और अपने भाई सनी के बारे में सोचते हुए आज फिर उसके हाथ उसकी कमसिन कुंवारी छूट पर पहुंच जाते है जो इस वक्त भाई के बारे में सोच कर पूरी तरह से अपना रास बहा रही थी, जिसे महसूस करते hi प्रीति की जवानी का जोश अपनी चरम पर पहुंच जाता है और तुरंत एक झटके से बिस्तर से उठ कर वो अपने रूम में लगे आयने के सामने पहुंच जाती है...

वह कड़ी हो कर कुछ देर खुद को निहारने के बाद प्रीति मुस्कुराते हुए अपने सरे कपडे उतर भाई सनी द्वारा दिलाई गयी वो रेड ब्रा और पंतय में खुद को देखने लगती है. आज पहली बार प्रीति ने खुद को इतने गौर से देखा था और खास कर जब वो अपनी चूचिया उन रेड ब्रा में कासी हुई देखती है तो एक साथ दोनों हाथो से उन चुचिओ को ब्रा सहित पकड़ कर मसलते हुए, अह्ह्ह्ह सनी देख ले कैसी दिख रही है तेरी गफ और बेहेन इस रेड ब्रा में उम्मम्मम, उफ्फ्फ पता नहीं मुझमे वो हिम्मत कब आएगी जब में हकीकत में तेरे सामने इस रूप में औ और मेरे हाथो की जगह तेरे हाथ मेरे इस गरम तड़पते हुए जिस्म पर पड़े और मुझे मर्दाने स्पर्श का एहसास कराएंगे...

उम्म्म्म अह्ह्ह उम्मम्मम तुझे नहीं पता लेकिन अब तो में खुद चाहती हु की तुम्हारे सामने ऐसे कड़ी राहु उम्मम्मम ओह्ह्ह मेरे भाई... और इसी सोच के साथ प्रीति का एक हाथ पीछे की तरफ जाता है और ब्रा के हुक खोलने की म्हणत कर देता है, ब्रा का हुक खुलते hi एक झटके से वो कैसे मुलायम से चुके पुरे आज़ाद हो जाते है और कप्स से बहार झाकने लगते है.

प्रीति, जिसने आज तक कभी ये सब कामुक क्रीड़ाये करने की सोची भी नहीं थी, खुद को आयने के सामने ये सब करते देख बहुत ज्यादा कामुक महसूस करने लगी थी और साथ hi उसके जिस्म की कामाग्नि उसे और बहका रही थी जिसके एवज में वो उस ब्रा को तुरंत अपने शरीर से अलग कर निचे जमीं पर फेक देती है और दोनों हाथो में अपनी दोनों चुचिओ को भर, निप्पल्स को उंगलिओ के बिच फसा कर मरोड़ते हुए चूचिया मसलने लगती है, अह्हह्ह्ह्ह सनी उम्मम्मम मसल न भाई ऐसे hi मेरी चूचिया उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ आज तक किसी ने हाथ तक नहीं लगाया है इनको अब नहीं रहा जाता है उफ्फफ्फ्फ़ आकर चूस ले न अपनों बेहेन की चूचिया उम्मम्मम्म ओह्ह्ह सनी प्ललस्सस्स्स्स आजाए भाई...

जिस्म की गर्मी और वासना की आग में जल रही प्रीति को अब कुछ नहीं सूझ रहा था और वो अपना कण्ट्रोल खुद पर से खोटी जा रही थी और इसी कारन एक हाथ उसकी चुकी से हैट कर उसकी पंतय के अंदर घुस चूका होता है, और उसकी उंगलिया इस वक्त उस कासी हुई पनियाई छूट की फको को फैलते हुए असली कौमार्य को छेड़ने लगती है... ऐसा न था की प्रीति के लिए अपनी छूट पर हाथ लगा कर घिसना पहली बार था लेकिन जबसे सनी को ज़हन में रख कर उसका हाथ उसकी छूट पर पड़ा है तो उसके जिस्म में एक अलग hi करंट की लेहेर दौड़ उठती है और आज भी वैसे hi हुआ, पंतय में डेल हुए हाथ की उंगलिओ ने जब उसकी छूट की फैंको को फैला छूट के डेन पर दस्तक दी तो प्रीति की टंगे कम्प सी गयी और आँखे भरी होते हुए अपने आप बंद हो चली और..

अब बस उसकी बंद आँखों के सामने उसके भाई सनी का चेहरा घूम रहा था और दोनों हाथ अपनी अपनी जगह, चुकी और छूट पर अपना हमला बोल रहे थे, उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह सुन्न्नीयीय उम्मम्मम्म प्लस छोड़ड़ड़ड़ूऊ मुझे अह्ह्ह्ह भईईई उम्म्म छोड़ो अपनी छोटी बेहेन को अपने लू डी से, घुसा दो पूरा इस छूट में अह्ह्ह्हह एसससस फुकककक मीटी ओह्ह्ह्हह सुन्न्नीयीय... और इसी विचार से छूट घिसते हुए जब उसकी आँखे एक बार को खुलती है तो वो खुद को आयने में अपने भाई को सोच कर अपनी छूट घिसते हुए देख और ज्यादा बहक जाती है और आयने के करीब आ कर खुद की नजरो से नजरे मिला कर एक तंग उप्पेर की तरफ उठा छूट को आयने के सामने नजर आये ऐसा कुछ दृश्य करके दोबारा घिसने लगती है...

अह्ह्ह्हह सुन्न्नीयीय उम्मम्मम छोड़ो न मुझे अहहहहह उम्मम्मम भांग कर दो मेरे कामुमार्य को अब, नहीं सही जाती मुझसे ये तड़प अह्ह्ह, नहीं रहना मुझे अब और कुंवारी, उम्मम्मम्म प्लस अपनी बेहेन का कुंवारा पैन उससे छिन्न कर उसे भी इस कामुक खेल को महसूस करने की रेहम कर दो अह्ह्ह्हह आओ न सनी छोड़ दो मुझे उम्म्म्म मुझे लुंड चाहिए अब तेरा मेरी इस छूट में बस्सस अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम्मम अह्ह्ह छोड़ दे अपनी गफ रूपी बेहेन को.. उम्म्म अह्ह्ह्हहबहहहहहह सनी उम्म्म्म और ऐसे hi इस खेल को कुछ देर और लहेल्ते हुए अपने भाई से छोड़ने के बारे में सोचते सोचते आज भी प्रीति की छूट अपना काम रास बहा देती है और जैसे hi प्रीति की छूट अपना पानी बहती है, प्रीति का जिस्म कंपते हुए हवा में उड़ने लगता है और प्रीति ऐसे hi अधनंगी, जिस्म पर सिर्फ एक पंतय डाली बिस्तर पर गिर पड़ती है और अपनी साँसों पर काबू पाने की कोशिश करती है....

छूट रास निकलने के बाद दोबारा प्रीति उसी पशोपेश में आजाती है, " उफ़ ये मुझे क्या हो रहा है, क्या सनी के बारे में इस तरह सोचना सही है, वो मेरा भाई है और अगर ये सही मन भी लू तो क्या सनी मुझे इस रूप में अपनाएगा, क्या वो मेरे साथ हमारे इस रिश्ते को स्वीकारेगा.... और इन्ही सब बातो को सोच चेहरे पर एक रहत भरी मुस्कान के साथ प्रीति कब नींद की आगोश में चली जाती है उसे hi नहीं पता चलता है...

वह दूसरी तरफ जैसा की हमें पता है की मेरे पापा मीन्स मर मानव के घर पर न रहने की वजह से जब तक वो वापस नहीं लौट आता तब तक महिमा (मेरी मम्मी ) ने मुझे अपने साथ अपने कमरे में अपने बिस्तर पर सुलाने का वडा किया होता है..

तो इसी वजह से अभी इस वक्त में अपनी मम्मी के रूम में उनके बिस्तर पर बैठा हुआ होता हु और मम्मी अलमारी में कपडे ज़माने में व्यस्त होती है. मम्मी ने इस वक्त एक लाइट येलो रंग का गाउन पहना हुआ था, जिसमे में से उसकी काळा रंग की ब्रा और पंतय कुछ हद तक नजर आ रही थी, और मम्मी का मुँह अलमारी की तरफ होने से उनके चूतड़ इस वक्त ठीक मेरी आँखों के सामने होते है और चूँकि गाउन पारदर्शी था तो मम्मी की काळा रंग की ब्रा और पंतय मुझे काफी हद तक दिखाई दे रही थी..

घर की सबसे मस्त और गदरायी औरत का ये रूप देख मेरे लुंड ने एक झटके से फुंकार भरी और पाजामे में hi अपनी औकाद में आने लगा था और मम्मी की गांड देख, " उफ्फफ्फ्फ़ सच क्या गांड है मुनमय की उम्म्म पिछली रात इसी गांड को उप्पेर उप्पेर से रगड़ा था नींद के बहाने, उफ्फफ्फ्फ़ मन तो कर रहा है की अभी मम्मी का ये गाउन उठाऊ और लुंड को एक hi झटके में गांड में उतर दू अह्ह्ह्ह मुम्ममय. " एक तरफ प्रीति है जिसकी जाने को आज सुबह से देख देख कर लुंड की हालत ख़राब हो रही है और एक तरफ मम्मी, उफ्फ्फ दोनों माँ बेटी ने तो लुंड की हालत ख़राब कर रखी है, मन तो करता है की सच में दोनों को पटक के कास के रगड़ दालु ahhhhhhh....Abhi में ये सोच hi रहा था की मम्मी मेरी तरफ पलट जाती है और ये देख में तुरंत वह पड़ा कम्बल अपने पेरो पर दाल देता हु जिससे की मेरे खड़े लुंड पर मम्मी की नज़र न पड़े...

मम्मी, मेरी तरफ मुद कर :- क्या बात है सनी, आज इतना चुप चुप क्यों बैठा है तू..

मैं, कम्बल में से लुंड पर हाथ रख :- कुछ नहीं मम्मी बस ऐसे hi, देख रहा हु आप दिन भर कितना काम करती हो.. थकती नहीं हो क्या अब..

मम्मी :- अरे बीटा में एक हाउसवाइफ हु और मुझे अब काम न करू तो थकन लगेगी..

मैं, असली थकन तो तब लगेगी जब में अपने लुंड से तुम्हारी दुमदार चुदाई करूँगा:- मुझे वो सब नहीं पता, अब सब काम चोरो भोत हो गया, अपने बेटे के लिए भी वक्त निकालो न.. भूल गयी आपने वडा किया था की अब आप मेरे लिए भी पूरा वक्त निकलोगी..

मम्मी:- ओह्हो देखो तो इसको, बीटा इसी लिए तो तुझे अपने पास सुलाती हु, फिर भी अब्ब तक तुझे मुझसे शिकायत है...

मैं:- हैं मुझे शिकायत है क्युकी आज मुझे आपने मेरी किश नहीं दी अब तक..

मम्मी, हस्ते हुए मेरे पास आ कर बिस्तर पर बैठ जाती है, और मेरे दोनों गलो पर एक एक किश करते हुए :- उम्मम्माह उम्मम्माह मेरा बीटा, अब तो खुश है न...

मैं, मम्मी क होठो को गलो पर महसूस कर लुंड को हाथ में दबाते हुए: हाय मम्मी सच्ची जब आप ऐसे प्यार करती हो तो भोत ाचा लगता है..

मम्मी :- ः बढम्याश, चल ाव मेरा काम भी हो गया, अब सो जाते है...

और ये बोल कर हम दोनों रोज की तरह सो गए और में जान करके मम्मी से एक दम चिपक कर सोया था जिससे की मुझे मम्मी के उन मोठे दुधारू स्तनों का एहसास मिलता रहे...

दोस्तों यहाँ में आपको बता दू की महिमा ने उस अनजान कॉलर से मिलने की बात पर हाँ कर दी थी तो

सोते सोते इस वक्त महिमा के दिमाग में ये बात भी चल रही थी की, " क्या मेने उस अनजान कॉलर से मिलने को रज़्ज़ी हो कर सही किया, कही कुछ गलत तो नहीं होगा.. लेकिन उसने ये भी कहा है की ये एक जनरल मीटिंग होगी तो मिलने में हर्ज़ भी क्या है. काम से काम मुझसे ये तो पता चल जायेगा की आखिर कौन है वो घर का hi सदस्य जो मुझे पाने के लिए ये सब कर रहा है और रिश्तो को इस तरह बदनाम करना चाहता है. परागर कही उसने मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो... "

और इन्ही सब बातो में अपने दिमाग को झंझोरते हुए, " ओफ्फो अब इतना सोच कर क्या फायदा, एक बार मिल तो लेती हु ताकि उससे पिक्सहा छूटे, ये रोज रोज के उसके कॉल करने के नाटक खत्महो जायेंगे और ऐसे कैसे कुछ गलत करेगा वो मेरे साथ... नहीं, और वैसे भी उसकी बातो से भले उसके अंदर की ठरक और हवस झलकती होगी लेकिन वो मुझे खुद का रिश्तेदार होने का दवा करता है तो इतना तो लिहाज करेगा hi की मेरी मर्जी के खिलाफ कोई कदम न उठाये... " और खुद को इस बात की तसल्ली देते हुए वो भी नींद की आगोश में चली जाती है.

वही दूसरी तरफ दूसरे शहर में जहा सीमा, मानव और रागिनी बिज़नेस के किसी काम से गए हुए थे, और हमने देखा की शाम को रागिनी अपने पुराने दोस्त राजीव से मिल कर कुछ खास काम को अंजाम देने की बात करके आयी थी, वो मानव और सीमा जो एक hi कमरे में रह रहे थे उनके पास आती है....

रागिनी :- भैया, जिस कॉन्ट्रैक्ट के लिए हम यहाँ आये है, उसकी ब्रीफिंग मेने आज क्लाइंट को दे दी है और अब कल वो आपसे मिलना छह रहे है ताकि ये डील सिग्न हो सके...

मानव :- थॉट्स ा वैरी फैंटास्टिक न्यूज़ रागिनी, ऑफ़ कोर्स में कल मिल लूंगा उन लोगो से, बताओ कितनी बजे जाना है हमे वह...

रागिनी :- भैया जाना तो 11 बजे है सुबह पर कल में नहीं आ पाऊँगी, वैसे भी मेने सारा पेपर वर्क तो आज रेडी करवा दिया है कल मेरी जरुरत नहीं है और में सोच रही थी की में और सीमा कल थोड़ा मार्किट में भी घूम लेंगे...

मानव, ये सोच की इसी बहाने सीमा रागिनी के साथ रहेगी और में श्वेता को ले कर बहार जा सकूंगा :- ठीक है रागिनी, जैसा तुम्हे ठीक लगे मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है..

सीमा, जो इस वक्त इन दोनों की बाटे चुप चाप बैठे सुन रही थी, मन में विचार करते हुए, " इसका मतलब कल फिर वो श्वेता पापा के साथ अकेली होगी, क्या ये ठीक रहेगा, में नहीं चाहती की पापा उसके साथ अकेले रहे पर अब में बुआ को कैसे ना कहु और वैसे भी कुछ hi देर की बात है फिर तो हम वापस लौट आएंगे hi और मुझे नहीं लगता अब पापा ऐसा कुछ करेंगे, क्युकी यहाँ आये हमे इतने दिन हो गए अब तक उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, " और यही सोच सीमा भी रागिनी की बात में हामी भर देती है...

इसके बाद रागिनी अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए मन में विचार कर मन hi मन खुश होते हुए " बस कल अब सही मौका है मुझे मेरा प्लान एक्सेक्यूटे करने का " और इसी विचार के साथ वो अपने मोबाइल से राजीव को मैसेज कर देती है, फाइनली वे अरे मीटिंग टुमारो और ये समझ लो की अब कल का दिन पूरा तुम्हारे नाम, और ख़ुशी से अपने रूम म जा कर सो जाती है....

दोस्तों उम्मीद है में वापस सबसे वैसे hi जुड़ पाव जैसे कहानी के शुरू से जुड़ा हुआ हु और आशा करता हु आप अपना साथ बनाये रखेंगे...

अपने कमैंट्स दे कर मुझे मोटीवेट करना न भूले 😜

 
अपडेट :- 59

सुबह होते hi रागिनी जो श्वेता के साथ रूम शेयर कर रही थी, उसे बता देती है की आज उसे मानव के साथ क्लाइंट को मिलने जाना है और कॉन्ट्रैक्ट सिग्न करके सरे पेपरवर्क को कोलेटे कर देना है, और ये भी बताती है की वो और सीमा आज मार्किट में थोड़ी शॉपिंग करेंगे तो पूरा दिन बहार hi रहेंगे.



ये सुन कर श्वेता, जो इस ट्रिप पर कुछ और hi अरमान ले कर आयी थी की कैसे अपने बॉस मानवके साथ बिस्तर गरम करेगी और उनके लुंड को अपनी छूट और गांड में ले कर उसका मजा लुटेगी लेकिन सीमा के साथ होने की वजह से उसके सरे अरमानो पर पानी फिर जाता है, बुआ की बात सुन कर मन hi मन खुश हो जाती है की, "फाइनली आज मुझे मानव सर के साथ वक्त मिलेगा और अब आज किसी भी तरह से मौके का फायदा उठा कर मानव सर का लुंड छूट में डलवाना है, उफ्फ्फ कितने दिन hi गए मेरु छूट को लुंड नहीं मिला है है "

लेकिन साथ hi उसके दिमाग में एक और विचार भी चल रहा था, " क्या मानव सर भी इस मौके का फायदा उठाना चाहेंगे, उनके दिमाग में तो आजकल अपनी बेटी सीमा की नजरो में शरीफ बने रहने का भूत जो चढ़ा है, साली इस कामिनी सीमा को भी साथ आने की क्या जरुरत थी, खैर कुछ भी कर के आज तो मुझे सर से छुड़वाना hi है, क्या पता ऐसा मौका दोबारा कब मिलेगा फिर से. लेकिन आज मुझे ऐसा कुछ करना होगा की मानव सर भी अपने उप्पेर काबू न रख पाए और सब कुछ भुला कर पहले की तरह एक जानवर जैसे मेरी छूट फाड् कर रख दे, और इसके लिए मुझे कोई न कोई तरकीब तो निकालनी hi पड़ेगी. "

वही पास वाले दूसरे कमरे में मानव जो इस वक्त बिस्तर में लेता हुआ था, अपनी आँखे खोल देखता है की उसकी बेटी सीमा रोज की hi तरह सुबह सुबह नाहा कर रेडी हो चुकी थी और जब उसकी नज़र अपनी बेटी पर पड़ती है तो उसका हाथ अपने आप hi उसकी अंडरवियर में घुस कर लुंड को थम लेता है, और थामे भी क्यों नहीं...

सीमा इस वक्त एक टाइट कैसे हुए जीन्स जिसमे से उसकी गांड का शेप भोत अचे से नज़र आ रहा था और जिसे देख कोई भी बस यही चाहेगा की अभी इसी वक्त जीन्स उतर कर उन चिकने चूतड़ों परथापपद मर मर कर लाल कर दू और उसके बाद वही ड्रेसिंग टेबल पर आगे की ततफ झुका कर गांड मर दू, और साथ hi एक वाइट कलर का टीशर्ट जो की एक दम स्किन टाइट था, जिसमे से उसकी मोती रसीली चूचिया भोत अचे से उभर कर बहार आ रही थी और इस वक्त अपने बाल बांधने की वजह से सीमा के दोनों हाथ उप्पेर थे जिससे की चूचिया पूरी तरह से सामने उभर लिए मानव की नजरो को सलामी दे रही थी...

मानव, लुंड सहलाते हुए " उम्मम्मम वाकई में पागल हु जो पूरी दुनिया की औरतो और लड़कीओ के पीछे पड़ा हु, मेरे अपने घर में इतना गज़ब का गदराया माल है, मेरी अपनी बेटी सीमा, इतने नस्ट मोठे चूतड़ और रसीले ामो की मालकिन उफ्फ्फ अगर ये इतनी उसूलो वाली न होती तो पक्का अभी इसी वक्त इसकी गांड में लुंड पेल देता अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़, " और अभी मानव आंखे बंद कर अपने लुंड को सहलाते हुए बेटी की चुदाई के सपने hi देख रहा होता है की उसके कान में सीमा की आवाज पढ़ती है...

सीमा :- पापा, उठिये नहीं तो आपको लेट हो जायेगा, बुआ ने कहा था न आज आपको किसी मीटिंग में जाना है...

मानव, नींद से जागने की एक्टिंग करते हुए :- उम् ओह हाँ बेटी, में तो भूल hi गया था, ाचा हुआ याद दिला दिया...

और इसी बात पर सीमा ने पलट कर अपने पापा को एक प्यार भरी स्माइल दे दी और यहाँ बेटी को इस तरह सज कर एक दम मस्त पटाखा बानी हुई देख लुंड एक झटका मार देता है, लेकिन आज उसने ये भी नोटिस किया की सीमा का बर्ताव अब उसके प्रति वापस बदल रहा है, शायद जो कड़वाहट उसके मन में मानव के लिए थी वो अब काम हो रही है..

और इसी बात को सोच मानव, " लगता है सीमा का गुस्सा मेरे प्रति अब काम होने लगा है , बस अब कुछ भी करके मुझे उसकी नज़रो में ाचा बने रहना है " और इसी बात को और पुख्ता करने के लिए..

मानव, उठ कर सीमा के पास जाते हुए :- बेटी तुमसे कुछ बात करनी थी...

सीमा :- हाँ पापा कहिये...

मानव :- देखो बेटी में जनता हु की तुम कही न कही अब भी मुझसे नाराज़ हो, लेकिन जैसा मेने तुमसे वादा किया है अब में सुधर कर बताऊंगा और दोबारा ऐसी कोई हरकत नहीं करूँगा जिससे तुम्हे ये लगे की में तुम्हारी मम्मी को धोखा दे रहा हु.. जो हो गया उसे तो में बदल नहीं सकता पर आगे के हालत अचे हो ये हमेशा कोशिश रहेगी.

सीमा, गहरी सास लेते हुए :- पापा मेने पहले भी आपको कहा है की जो मेने अपनी आँखों से देखा है उसे भूलना इतना आसान नहीं है लेकिन फिर भी में यही चाहूंगी की आप मेरी मम्मी को वो सरे हाकौर खुशिया दे जो वो डेसेर्वे करती है, आपका उनको धोखा देना मुझे अभी भी कही न कही खटक रहा है और ये इतनी आसानी से नहीं भुला सकती हु मैं... बस इसलिए इस बात का ध्यान रखना की दोबारा ऐसा कुछ न कर बैठो..

मानव, खुद से बात िनितीयते करते हुए :- ी क्नोव बेटी और मई ये भी जनता हु की आज भी तुम्हारे मन में ये शंका होगी की आज रागिनी और तुम्हारे हमारे साथ नहीं होने की वजह से में और श्वेता दिन भर अकेले रहेंगे और में कही उसके साथ वापस से वही सब न करने लग जाऊ जो पहले हुआ था, है न?

सीमा, जवाब मांगती हुई नज़रो से , अपना सर हाँ में हिला देती है, कह रही हो, "की हाँ आज भी मेरे मन में इस बात का दर है."

मानव, बेटी की प्रतिक्रिया देख उसका हाथ पकड़ते हुए:- बेटी मेने कहा न अब में वो गलतिया नहीं दोहराऊंगा, एक बार बस अपने पापा पर विश्वास कर के देखो, एक दिन क्या एक महीना भी अब तुम मुझे उस श्वेता या किसी भी औरत के साथ अकेला चोर डौगी तब भी में उनको टच तक नहीं करूँगा. और आज भी हम दोनों सिर्फ बिज़नेस डील फाइनल करने साथ जायेंगे उसके बाद वो उसके रूम में होगी और में अपने...

सीमा, ये देख की मानव आज बिना उसकी किसी छतवानी के से श्वेता से दूर रहने की बात कर रहा है और मन को ये यकीं दिलाने की कोशिश करते हुए की, "शायद अब पापा को अब गलती का एहसास हो रहा है और उन्हें एक मौका देना गलत नहीं होगा, चूँकि अगर ऐसा नहीं होता तो वो ऐसे सामने से मुझे कही आ कर इस तरह की बात नहीं करते " और यही सोच कर सीमा चेहरे पर मुस्कान लिए सर हाँ में हिला देती है और अपनी पलकें झुका कर पापा को ये आश्वासन देती है की कही न कही अब उनकी बेटी उनको एक और मौका देने के बारे में सोच रही है....

बस फिर क्या था, मानव को बेटी की आँखों में वही भरोसे की किरण देखनी थी जो आज उसे दिख गयी थी और इस बात से खुश हो कर वो सीमा को "थैंक यू बेटी " बोल बाथरूम में नहाने चला जाता है.

रेडी होने के बाद मानव, श्वेता, रागिनी और सीमा चारो ब्रेकफास्ट करने पहुंच जाते है जहा सीमा मानव के ठीक सामने बैठी थी और मानव की नज़रे चोरी छिपे अपनी बेटी की टीशर्ट में उभर के सामने आती हुई कासी मोती मोती चूचियों पर hi जा रही थी और पास बैठी श्वेता ने मानव की नज़रो को अचे से पकड़ लिया था, और पकड़ती भी कैसे नहीं, उसे इतने अचे से पता जो था की उसका बॉस कितना ठरकी है और औरत के गदराये जिस्म का कितना प्यासा है...

अपनी बेटी पर इस तरह नज़र गाड़ते हुए देख श्वेता के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ये सोच कर की, " लगता है मुझे अब सर को मेरी चुदाई करने के लिए मजबूर करने का रास्ता मिल hi गया है, जहा छह कर भी सर अपने आप पर काबू नहीं रख पाएंगे. "

ब्रेकफास्ट ख़तम करने के बाद चारो होटल से बहार निकल आते है और सीमा और रागिनी पहले कार में बैठ मार्किट की तरफ निकल पड़ते है. जब वो दोनों गाड़ी में बैठ रहे थे तब भी मानव की नज़र बेटी के कैसे चूतड़ों पर थी, जिसे श्वेता ने भोत अचे से देख लिया था.. और सीमा के गाड़ी में बैठते hi तुरंत मानव के करीब आ कर

श्वेता :- क्यों सर, मस्त फिगर है न सीमा ma'am का भी..

मानव, जिसमे ज़हन में अब भी बेटी का जिस्म घूम रहा था तुरंत बोल पड़ता है :- हाँ भोत hi गदराया और कैसा हुआ बदन है सीमा का...

मानव बोलते तो बोल गया लेकिन बाद में उसे एहसास होता है की वो अपनी hi बेटी के बारे में ऐसी बात बोल रहा है और तुरंत सफाई देते हुए..

मानव :- नहीं ऐसा कुक्सह नहीं है में तो बस ऐसे hi...

श्वेता, मुस्कुराते हुए:- क्या सर, अब आप भी किसको समझा रहे हो, मुझे नहीं पता क्या आप वो भूखे भेड़िये है जिसको सिर्फ औरत का जिस्म दीखता है, खास कर मेरी और सीमा की उम्र वाली औरतो का...

मानव, हस्ते हुए :- ः वाकई में पूरी चुड़क्कड़ रैंड हो गयी है तू श्वेता, तुझे भोत अचे से पता है मुझे क्या पसंद है और क्या नहीं..

श्वेता :- इसलिए तो कह रही हु सर की अब और न तड़पाओ अपनी इस रैंड को और जगाओ अपने अंदर के उस भेड़िये को, जो मेरे जिस्म को अचे से रगड़ रगड़ के नोच खाये... कितने दिन हो गए आपके लुंड का स्वाद चखे मेरी छूट को, अब नहीं रहा जाता है मुझसे...

मानव :- तू फिर वही बात ले कर बैठ गयी श्वेता, मेने कहा न अभी में ऐसा कुछ करने की रिस्क नहीं ले सकता और जब तक सीमा हनारे साथ है तब तक तो बिलकुल नहीं... अब चलो हमें लेट हो रहा है..

और ये बोल मानव कार में बैठ जाता है और श्वेता भी ये सोचते हुए कार में बैठ जाती है की, " चाहे कुछ भी हो जाये सर आज तो में आपका लुंड ले कर hi दम लुंगी "...

रागिनी और सीमा अलग अलग दुकानों पर से अपनी जरुरत के हिसाब से शॉपिंग करने में व्यस्त हो जाती है की तभी रागिनी के पास राजीव का मैसेज आजाता है की " सब कुछ तैयार है अब और इंतज़ार न करवाओ हमे रागिनी जी " और ये मश्ग पढ़ कर रागिनी के चेहरे पर एक स्माइल आजाती है, जिसे सीमा अचे से भांप लेती है..

सीमा, बुआ के मजे लेते हुए :- अहीएम ाहीम, क्या बात है ऐसा किसका मैसेज आ गया बुआ जो चेहरा मुस्कुरा उठा..

रागिनी :- ः क्या तू भी सीमा, किसी का नहीं राजीव का मैसेज था..

सीमा :- ओह्हो राजीव जी, वैसे बुआ आखिर ये चक्कर क्या है हाँ, कल भी ाचा खासा वक्त आवे राजीव जिनके साथ बिताया और आप बता रही हो की पिराना दोस्त है, कही ये दोस्ती याराना तो नहीं बन गयी है..

रागिनी :- ः अब तुमसे क्या छिपाना सीमा, बस ये समझ लो की हम दोनों एक दूसरे को अचे से समझते है, वो मेरी ज़िन्दगी के अकेलेपन को भली भांति समझता है और उसके साथ वक्त कहा गुज़रता है पता नहीं चलता...

सीमा :- हाय हाय क्या बात है बुआ, अब तो आईएम सिरे ये दोस्ती नहीं उससे बढ़ कर है हेहेहे...

रागिनी :- ः चुप कर तू अब, तुझे सब बता देती हु इसलिए अब मेरे hi मजे ले रही है तू...

सीमा :- हहै नहीं नहीं बुआ, ाचा सॉरी, वैसे अभी क्यों यद् किया है राजीव जी ने आपको..

रागिनी, अपना प्लान एक्सेक्यूटे करते हुए :- वो दरअसल बात ये है अब हम कल परसो तक तो वापस घर चले जायेंगे तो राजीव चाहता है की आज का दिन में उसके साथ बितौ लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा की में कैसे जाऊ

सीमा :- कैसे जाऊ मीन्स व्हाट बुआ, दिक्कत क्या है...

रागिनी :- दिक्कत कैसे नहीं है सीमा, अब तुम यहाँ हमारे स्थायी थी ताकि थोड़ा घूम फिर सको और ऑफिस के काम में चक्कर में मैं तुम्हे कोअन्य hi नहीं दे पायी और अब आज हम साथ निकले है तो अब में तुम्हे ऐसे अकेले चोर कर राजीव के साथ कैसे जा सकती हु...

सीमा :- ओफ़्फ़्फ़ो बुआ में कोई छोटी बच्ची नहीं हु समझी आप, और हमारा घूमना घूमना तो चलता रहेगा, फिलहाल आप अपना वक्त एन्जॉय कीजिये.. कही राजीव जी किसी और के साथ न हो जाये हहहह...

रागिनी :- हट पागल लड़की, वैसे भी हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं है समझी, ये कोई उम्र है अब मेरी

सीमा :- प्यार उम्र नहीं देखता प्यारी बुआ... चलो अब राजीव जी को मश्ग करो जल्दी से की यू अरे मीटिंग हिम टुडे..

रागिनी :- अरे यू सूरे सीमा, पक्का तुम अकेली तो नहीं पड़ोगी न...

सीमा :- आईएम दमन सूरे बुआ, अपना दिन एन्जॉय करो आप में मैनेज कर लुंगी...

और ये बोल कर रागिनी राजीव को मश्ग कर देती और सीमा के साथ शॉपिंग ख़तम करके रागिनी राजीव को मिलने चली जाती है और सीमा भी शॉपिंग ख़तम करके वापस होटल आजाती है.

वही दूसरी तरफ मीटिंग ख़तम होने के बाद मानव श्वेता को ले कर वापस होटल जाने के लिए निकल जाता है लेकिन श्वेता जिसकी छूट में अब लुंड की प्यास भोत ज्यादा भड़क चुकी थी और वो किसी भी तरह से मानव से छुड़वाने के लिए मचल रही थी, उसके मन में कुछ और hi प्लान चल रहा था और उसी के मुताबिक..

श्वेता :- सर, डील भोत जल्दी फाइनल हो गयी न, मुझे नहीं पता था की हम इतनी जल्दी फ्री हो जायेंगे..

मानव :- हाँ श्वेता बात तो तुमने सही कही ये, आल थैंक्स तो रागिनी, उसने सारा काम पहले hi भोत अचे से पूरा कर दिया था...

श्वेता, जिसने अभी एक स्किन टाइट लेग्गिंग और कुरता पहना हुआ tha,manav का हाथ पकड़ अपनी जांघो पर रख कर :- तो सर फिर अब जल्दी फ्री हो गए है तो क्या इरादा है आपका..

मानव, श्वेता की मंशा समझते हुए, उसकी जांघ पर हाथ का दबाव बढ़ा मसलते हुए :- इरादा क्या है अब श्वेता, होटल जायेंगे और रेस्ट करेंगे या फिर रागिनी और सीमा को शॉपिंग में ज्वाइन कर लेंगे...

ये सुन श्वेता का मुँह एक बार उतर सा जाता है क्युकी उसे छुड़वाने के सिवई कुछ नहीं सूझ रहा था, और श्वेता का ये चेहरा देख मानव उसके हालत समझते हुए

मानव, जांघो पर दबाव बना कुर्ते के निचे से टैंगो के बिच हाथ डालते हुए, छूट पर दबाव बना :- ः मुझे पता है श्वेता भोत आग लगी है है तेरी इस छूट में पर तू समझ क्यों नहीं रही है, मेने तुझसे कहा न की अभी में ऐसा कुछ नहीं करना चाहता हु जिससे की सीमा को किसी तरह का शक करने का मौका मिले.

श्वेता, सीमा का नाम सुन मन hi मन गुस्सा करते हुए, की पता नहीं ये साली सीमा क्यों बिच में आ जाती है हमेशा, पर खुद के गुस्से पर काबू पते हुए :- सर, मुझे सब पता है लेकिन आप भी तो मेरी बात समझो न, वैसे भी आज ाचा मौका है हम जल्दी फ्री हो गए है. और में ये भी अचे से जानती हु की आपका लुंड भी फुदक रहा है मेरी रसीली छूट में घुस कर दुमदार चुदाई के लिए, मुझे पता है आप इतने दिनों तक बिना चुदाई के पहली बार रखे है और कही न कही आपका अपने पर काबू ख़तम हो रहा है...

ये बात कहते वक्त श्वेता ने अपना हाथ धीरे से मानव के लुंड पर रख दिया था और सहलाने लगी थी, चुकी वो अचे से जानती थी की चाहे मानव कितना भी बेटी के आगे शरीफ बनने की कोशिश करे लेकिन औरत का जिस्म उनकी भोत बड़ी कमजोरी है और वो उससे ज्यादा देर दूर नहीं रह सकता है..

लुंड पर श्वेता के हाथो का दबाव पा कर मानव का अब खुद पर काबू खो सा रहा था लेकिन कही न कही वो अब भी सीमा की बातो को ज़हन में रखे हुए था की तभी उसके हाथो को एक ऐसी गर्मी का एहसास होता है जैसे की उबलते हुए पानी में हाथ दाल दिया हो..

दरअसल श्वेता ने मानव का हाथ जो टैंगो के बिच था उसे अब उठा कर अपनी लेग्गिंग के अंदर घुसा सीधा अपनी पनियाई हुई गरम प्यासी छूट पर रख दिया था, और जैसे hi मानव अपने हाथ को उसकी छूट में घुसा महसूस करता है तो खुद पर रहा सहा काबू भी अब वो खोने लगा था और श्वेता जो इस बात को अचे से समझ चुकी थी तुरंत मानव के करीब खिसकते हुए, अपने हाथो से छूट पर मानव के हाथ का दबाव बनाते हुए...

श्वेता :- क्या हुआ सर, देखो कैसे मचल रही मेरी छूट आपके लुंड के लिए... और ये वही छूट है जिसे आप हर रोज अपने इस दुमदार लुंड से पेलते थे, आज इतने अचे मौके पर क्या अपनी इस रंडी ोी रसीली छूट को नहीं छोड़ोगे क्या, बोलिये न सर...

मानव, जो अब श्वेता के लुंड सहलाने और उसकी छूट में अपने हाथ को महसूस कर अपना काबू खुद पर खोने लगा था, मन hi मन ये विचार करते हुए, " वैसे श्वेता की बात तो सही है, अभी भोत वक्त है हमे और जल्दी फ्री होने के कारन अगर में श्वेता के साथ मज़े कर भी लू तो सीमा को कोई शक नहीं होगा और आज सुबह hi में उससे इस बारे में अचे से बात करके आया हु तो कही न कही ये भी तय है की सीमा अब मुझपर उतना शक नहीं करेगी... "

और यही सोच मानव गाड़ी के ड्राइवर को गाड़ी होटल के विपरीत दूसरी तरफ ले जाने का इशारा करता है, और उसके ऐसा करने पर..

श्वेता :- क्या हुआ सर, आपने गाड़ी क्यों मुद्वा दी, होटल तो उस तरफ है न..

मानव, मुस्कुराते हुए, छूट पर मौजूद अपने हाथ की दो उंगलिया श्वेता की छूट में घुसते हुए :- क्यों मेरी रंडी, लुंड नहीं चाहिए क्या मेरा???

श्वेता, चौकते हुए :- क्या मतलब सर...

मानव, उंगलिओ से श्वेता की छूट घिसते हुए :- अरे मेरी रैंड, वह होटल में अगर कुछ उच्च नीच हुई और सीमा आ गोई तो पकडे जाने का दर है इसलिए तुझे दूसरी होटल में ले जा रहा हु जहा इतने दिनों से अकेले पड़े मेरे लुंड को तेरी इस छुडासी छूट में पेल पेल कर मस्त कर सकू...

श्वेता, छूट में उंगलिओ के घर्षण से और छोड़ने की बात सुन मस्त होते हुए, वाह सर ये तो भोत अछि बात है, इस वक्त आपका लुंड लेने के लिए तो मई कही भी चलने को तैयार हु....

और मन hi मन श्वेता भी शैतानी मुस्कराहट के साथ खुद से कहती हुई, " आज बताती हु सर आपको, इतने दिनों से मुझे प्यासी रखा है वो भी उस कामिनी सीमा की वजह से, आज देखो आपको कैसे चुदाई का इतना कायल बना देती हु की दोबारा आपकी बेटी को देख कर भी मुझे छोड़ने के लिए मचल जाओगे ".

और ये बोल दोनों होटल की तरफ बढ़ जाते है...

दूसरी तरफ वह घर पर जैसा की हमने देखा मैं (सनी) और महिमा रोज की तरह hi साथ में रात गुज़रते है, जहा में पूरी रात अपनी मम्मी के बदन की खुशबु और उसकी गर्माहट को महसूस करते हुए मस्ती में सोया रहता हु. और मेरी आँख सीधा सुबह मम्मी के उठाने पर खुलती है.

उठने पर जब मुझे यद् आता है की में मेरे रूम में नहीं इस वक्त मम्मी के कमरे में सोया हु तो इस एहसास को जीते हुए," हैए कितनी मस्त नींद आती है यार यहाँ, और रात कब निकल जाती है पता नई चलता, मम्मी के इतना पास सोते हुए मन तो करता है की उनको ढेर सारा प्यार कर दू, उनकी तड़प जिसमे वो आजकल इतनी बेचैनी से चल रही है उसे भी अचे से मिटा दू और साथ hi इतनी हसीं औरत के जिस्म का मजा भी लूट लू, मन तो करता है की रात में सीधा पीछे से मम्मी की गांड में hi लुंड पेल दू ः! "

और इन्ही सोच से हस्ते हुए में बिस्तर से उठ खड़ा होता हु और अपने रूम में जा कर कॉलेज के लिए रेडी हो जाता हु..

रेडी हो कर निचे आने पर में देखता हु की प्रीति भी ब्रेकफास्ट टेबल पर आ कर बैठी हुई है और जैसे hi मेरी नज़र उसपर गिरती है, जो आज एक भोत hi पतले कपडे की सफ़ेद रंग ोी लेग्गिंग्स और उसके साथ एक शार्ट लेंथ वाला ब्लू रंग का कुरता पहनी हुई थी, कुरता इतना टाइट था की उसकी गोल मटोल चुचिओ का शेप उस कुर्ते के उप्पेर से साफ नज़र आ रहा था और जो अगर एक ार कुर्ते के कपडे पर कट लग जाये तो जो छपाक के उछाल कर उनमे से बहार निकल आये...

प्रीति को उस ड्रेस में देख कर सबसे पहले तो मेरी आँखे उसपर से नज़ारे हटाने को ना कह रही थी और दूसरी ख़ुशी मुझे इस बात की हो रही थी की ये ड्रेस भी प्रीति ने वही पहना था जो शॉपिंग के दौरान मेने उसको पसंद कर के दिया था..

जो लड़की एक समय पर मुझसे सीधे मुँह बात भी नहीं कर रही थी आजकल उसमे इतना बदलाव, मेरे साथ घूमना फिरना, कॉलेज ले जाना, शॉपिंग करवाना और कभी बेहेन बनती है तो कभी गफ बन कर मस्ती करना... प्रीति में इतने बदलाव कैसे.... खैर मुझे क्या जो भी है ाचा hi है न, वैसे भी घर में hi अगर इतनी कमसिन हसीं जवान लकड़ी है तो उसके करीब आने का मौका मिल रहा तो भला में क्यों पीछे हेतु..

में तो यही चाहूंगा की जो मस्ती में उसने मुझे मेरी गफ कहा, काश भोत जल्दी मेरी रियल गफ बन जाये ताकि उसकी ये उफनती जवानी को अपनी बहो में भर मस्त हो सकू...

और इसी सोच के साथ में डाइनिंग टेबल पर जा बैठता हु, मैं :- अरे वाह प्रीति, आज भी जल्दी जाग गयी, गुड मॉर्निंग..

प्रीति, मुझे देख रात भर अपने भाई के बारे में सोच इस जवान यौवन से की गयी छेद चढ़ को याद करके, तू रात भर सोने कहा देता है मेरे भाई :- हम्म्म हैं सनी नींद खुल गयी तो जग गयी, गुड मॉर्निंग

मैं, प्रीति के मुँह से इतना सीधा और प्यार भरा जवाब देख यव सोच की इसका रवैया सच में बदल गया है अब, और में थोड़ी मस्ती करते हुए :- हम्म्म वैसे आज भी कॉलेज चोर्ने का मत कहना में कोई फ्री नहीं बैठा तेरे लिए रोज रोज...

प्रीति :- हैं मुझे ोाता है और में रोज तुझे परेशां भी नहीं करने वाली, आज में अपनी गाड़ी ले क्र चली जाउंगी.. चलो अब मुझे लेट हो रहा है में चलती हु.. Bye

और ये बोल प्रीति वह से उठ कड़ी होती है और कॉलेज जाने के लिए निकल जाती है और उसी के पीछे में भी घर से पार्किंग में निकल जाता है..

वह जा कर देखता हु की प्रीति बस रवाना होने hi वाली थी की मेरी नज़र एक बार लेग्गिंग में कैसे उसके चूतड़ों और उन मांसल जांघो पर पड़ती है और ये देख उसे आवाज देता हु..

मैं, प्रीति एक इन रुक जरा...




प्रीति, रुक क्र पीछे मुड़ते हुए:- क्या हुआ सनी, जल्दी बोल मुझे लेट हो रहा है..

मैं, उसके पास जा कर :- भोत मतलबी है, मुझे थैंक्स तो बोल हँ

प्रीति :- किस बात के लिए थैंक्स कहु तुझे..

मैं :- किस बात के लिए? देख मेरी वजह से तू इतने मस्त मस्त ड्रेसेस पहन रही, देख मेरी चॉइस कित्ती पसंद है तुझे की अब रोज मेरी पसंद के कपडे पहन रही.. तो थैंक्स बोल इसलिए मुझे..

प्रीति, ओह सनी मुझे hi नहीं पता में ये सब क्यों कर रही हु पर अब में सिर्फ तमहरि पसंद के कपडे पहनना चाहती हु, में चाहती हु तू रोज मुझे ऐसे hi नोटिस करे :- हहै जा नहीं बोलती इसमें थैंक्स में तुझे, क्या कर लेगा...

मैं :- कर तो क्या सकता हु, नहीं बोलना तो तेरी मर्जी.. मतलबी!!!! (और गाड़ी स्टार्ट करते हुए ) वैसे एक बात बोलनी है तुझे... तू न इस ड्रेस में भोत अछि लग ऋ, क्यूटनेस और हॉटनेसस का मिक्स मसाला.. संभल क रहना कॉलेज में आज लड़को की नज़र तुझ पर hi रहने वाली है...

और ये बोल मेने गाड़ी आगे बढ़ा दी और में कॉलेज के लिए निकल गया...

लेकिन मेरी बात सुन यहाँ प्रीति के जिस्म में अलग hi मस्ती की लेहेर दौड़ गयी, " उफ्फ्फ्फ़ क्या सनी में मुझे हॉट कहा.. मेरे भाई को में हॉट लगी... हे भगवन उसका मुझे हॉट कहना मुझे इतना ाचा क्यों लगा... "

सनी द्वारा की गयी तारीफ का असर प्रीति की टैंगो के बिच भी हुआ जिसे महसूस कर, " उफ्फ्फ्फ़ ये मुझे क्या हो रहा है क्यों में ये सब बातो से एक्ससिटेड फील कर रही हु," और साथ hi मन ने खुद से कहती है की, " मेरे भाई ये रूप मेरा मेने सिर्फ तुम्हे दिखने के लिए बनाया है मुझे कॉलेज के लड़को की नज़रो की परवाह नहीं, अभी जो तुम यहाँ मुझसे कह कर गए, जिस नज़र से मुझे देख क्र गए, मेरा इस तरह तैयार होना सार्थक हो गया है "..

और इसी बात को सोच वो भी सलग के लिए निकल गयी लेकिन गाड़ी चलते हुए अब भी प्रीति इसी उलझन में थी की मुझे सनी की बाटे अछि और एक्ससिटिंग ालगति है उसका इस तरह मुझे नोटिस करना भी ाचा लगता है, रात भर मेने उसको सोच कर न जाने क्या क्या हरकते की, यहाँ तक की अपनी छूट का रास भी मेरे भाई को सोच कर बहा रही हु... क्या मेरा ये सब करना सही होगा.. क्या एक बेहेन का भाई के प्रति इस तरह आकर्षित होना सही है.. उफ्फ्फ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा आजकल मुझे क्या हो रहा है...

और इसी पशोपेश में वो आज कॉलेज जा कर अपनी सहेली मोनाल से इस बारे में बात करने का सोच गाड़ी की रफ़्तार बढ़ा देती है...

आज के अपडेट में बस इतना hi.... आगे की कहानी अगले अपडेट me...jaha अब ये देखना है की श्वेता ऐसा क्या करने वाली है और मानव और श्वेता का ये मिलान, मानव और सीमा के रिश्ते को किस मोड़ पर ले जाता है, प्रीति क्या अपने इस पसोपेश और दिमाग में चल रही जुंग के निष्कर्ष पर पहुंचेगी या नहीं... देखने के लिए जुड़े रहिये, कहानी के संग..... 🤗

शुक्रिया dosto..ese hi जुड़े रहिये 🤗

 
अपडेट - 60


कॉलेज पहुंच कर प्रीति सुबह सुबह पहले तो सीधा अपनी क्लास अटैंड करने चली जाती है लेकिन आज उसका मन क्लास में बिलकुल भी नहीं था और होगा भी कैसे, उसके ज़हन में अब सिर्फ और सिर्फ सनी और उसकी बाते घूम रही थी और इसी उलझन को दूर करने के लिए वो बस इंतज़ार कर रही थी की कब क्लास ख़तम हो और वो अपनी सहेली मोनाल से इस बारे में कुछ बात कर पाए..

और ये मौका उसे अब सीधा ब्रेक टाइम में मिलता है जब वो और मोनाल दोनों कैंटीन में जा कर बैठे हुए थे, लेकिन प्रीति को अब भी ये समझ नहीं आ रहा था की वो मोनाल से एक्साक्ट्ली पूछे क्या और कैसे, और प्रीति के चेहरे को उलझन में फसा देख..

मोनाल :- क्या बात है प्रीति कोई परेशानी है क्या, तू कुछ डिस्टर्ब लग रही है..

प्रीति :- उम् यार मोनाल, परेशानी है भी सही और नहीं भी, मुझे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा है.

मोनाल :- ः क्या बोल रही है तू, साफ साफ बता बात क्या है

प्रीति:- यार मोनाल, तूने hi कहा था न की अगर तुझे चांस मिलता सनी से बात करने का और उसके करीब जाने का तो तू हसी ख़ुशी चली जाती

मोनाल, सनी नाम सुन आँखों में चमक लेट हुए :- चली जाती मीन्स व्हाट प्रीति!!! ये तो तूने रोक रसखा है मुझे इसलिए वार्ना अब तक तो में कबका सनी के साथ होती.... ये भी कोई पूछने की बता है...

मोनाल, तुरंत मनो जैसे प्रीति की व्यथा समझ चुकी हो :- लेकिन एक मं!! आज तू अचानक से ये मुझसे क्यों पुग्छ रही है... क्या चल क्या रहा है तेरे दिमाग में, और कही तू भी सनी के साथ कुछ करने का इरादा तो नहीं बना रही ः..

प्रीति, चुप चाप रह अपना सर एक बार झकझोरते हुए :- नाहीइ...

मोनाल :- नाहीइ? पक्का...

प्रीति :- नहीं ी मैं, हैं, पता नहीं...

मोनाल :- क्या मतलब तेरा... हाँ या ना साफ बोल न..

प्रीति, अब तंग आ कर :- यार यही तो मुझे भी समझ नहीं आ रहा है न मोनाल...

मोनाल :- एक काम कर पहले तो तू शांत हो जा, और अब साफ साफ बात क्या चल क्या रहा है तेरे दिमाग में..

प्रीति, अब इतने दिनों से अपने अंदर भरा अपने भाई सनी के लिए जो कुछ भी था सब मोनाल के आगे निकलते हुए :- यार दरअसल में खुद कन्फ्यूज्ड हु मुझे समझ hi नहीं आ रहा की में क्या कर रही हु, हर वक्त जब भी में सुन्न्नी के साथ होती हु तो मुझे भोत अच्छा फील होता है जैसे की बस ऐसे hi साथ में घूमती राहु, जब भी कभी में उसको मेरे इर्द गिर्द घूमती हुई पाती हु तो में भोत सेफ फील करती हु...

प्रीति, बात कंटिन्यू रखते हुए :- यहाँ तक की जब में ये देखती हु की वो मुझे नोटिस कर रहा है या उसकी नज़रे मुझ पर hi तिकी है तो उसका नोटिस करना, घूरना सब कुछ ाचा लगता है, मुझे ये मन होता है की में और अचे से तैयार हो कर उसके सामने जाऊ अपने आप को उसकी नज़रो को देखने का मौका दू...

मोनाल, चेहरे पर स्माइल के साथ :- हाँ तो इस सब में बुराई क्या है मेरी जान ये तो सब अछि बता है न, और सनी जैसे डैशिंग लड़के के लिए ऐसा फील करना तो और अछि बात है, बस ये समझ ले की जो मुझे सनी को पहली बार देखते महसूस हुआ वो तुझे अब होने लगा है, तू उसे पसंद करने लगी है, उसकी तरफ आकर्षित होने लगी है और ये तो भोत अछि बात है इसमें कटाई कोई बुराई नहीं है प्रीति....

प्रीति, रात में अपने यौवन से किये छेड़छाड़ को यद् करते हुए :- यार पर वो मेरे ख्यालो से जाता hi नहीं है रात रात भर मेरे ज़हन में घूमता रहता है और पता है इस चक्कर में मुझे नींद भी नहीं आती है.. और...

मोनाल, परिरि को अधूरी बात करते हुए रुकते देख, एक्सपेरिंस की वजह से बाटत के इशारे समझते हुए उसके मजे लेते हुए, आँख नर के :- और क्या मेरी जान, क्या वो तेरे जवान जिस्म से खिलवाड़ करता है..

प्रीति, एक बार चारो तरफ देख, मोनाल का इतना फ्रैंकली ये बात पूछना उसे पानी पानी कर देता है लेकिन फिर भी आज वो हर चीज बताने के मूड से आयी थी, और नजरे नीची करके मोनाल की बातो की हामी भर देती है, जिसे देख मोनाल चपक से उछलती हुई प्रीति के पास आ कर बैठ जाती है...

मोनाल :- वाह मेरी जाएं, उस दिन तो तू भोत ढींगे हक रही थी की ऐसा कुछ नहीं है बला बला और इतने में सनी को अपने बिस्तर तक ले पहुंची ः..

प्रीति, शर्म से लाल होते हुए :- यार मोनाल अब मजे मत ले और बता न ये सब क्या हो रहा है..

मोनाल, अब और मस्ती में आते हुए :- पहले तू मुझे और डिटेल में और साफ साफ बता की और क्या क्या हुआ रात में जो तुझे नींद नहीं आई...

प्रीति, चिढ़ते हुए :- मोनाललल अब क्या बताऊ, पिछली दो रातो से में सो नहीं पाई हु, जब भी आँख बंद करती हु तो सनी का चेहरा देखती हु, और फिर उसके बाद बॉडी में अलग hi करंट दौड़ जाता है, मन करता है की खुद को महसूस करू बस, एक अजीब सी गर्मी उत्पन्न हो जाती है पुरे शरीर में और...

मोनाल, बेसब्र हो कर, मस्ती के साथ :- और फिर तेरे अपने हाथ बिना कुछ कहे बिना बोले सीधा तेरे जिस्म पर घूमने लगते है, कभी पैर पर कभी गले पर कभी टशीट या टॉप जो पहना है उसके अंदर घुस जाते है तो कभी तुझे अपनी ये कासी गोल मटोल चूचिया दबाने का मन कर जाता होगा और जब ज्यादा गरम होती होगी तब तेरा ये हाथ सीधा तेरी गरम कमसिन छूट पर पहुंच जाता होगा है न...

प्रीति, मोनाल के मुँह से इतना फ्रैंकली सुन कर चौक जाती है लेकिन सब बाते सुन शर्म से पानी पानी होते हुए एक बार फिर हामी भरते हुए :- उम्म्म्म हैं मोनाल हैं, मुझे सच में ये सब करने का मन करता है और पिछली दो रातो से यही सब हो भी रहा है, और इतना hi नहीं कुछ देर के लिए तो मुझे ऐसा भी महसूस हुआ की ये सरे काम कर तो मेरे हाथ रहे हो लेकिन ज़हन में एहि सब था की में मेरे जिस्म को सनी को सूप चुकी हु और वो मेरे इस कमसिन उफनती जवानी वाले कोमल जिस्म को अपने हाथो से मसल रहा हो...

मोनाल :- ाचा और जब तूने ऐसा सनी के लिए महसूस किया तो क्या हुआ फिर...

प्रीति :- यार जैसे hi मुझे ऐसा महसूस हुआ न मेरी पूरी बॉडी गर्मी में तपने लग गयउ, चेहरे पर पसीना पसीना हो गया और मेरे हाथ, मेरे हाथ बिना रुके मेरी टैंगो के बिच मेरी छूट को जोर जोर से घिसने लग गए.. उफ्फ्फ मोनाल यार मेने पहले भी फिंगरिंग की है लेकिन ये दो रातो में जो आनंद और सुकून रिलैक्स होने का मुझे मिला वो पहले कभी नहीं मिला था..... अभी भी देख में सनी की बाटे कर रही हु तो एक्ससिटिंग महसूस कर रही हु..

मोनाल, तू hi नहीं यहाँ मेरी छूट भी पानी पानी हो रही है :- ः मेरी जान देखा मेने कहा था न सनी में कुछ बात तो है, अब तू खुद एग्री करेगी इस बात पर हैं न, वार्ना उसके नाम की और उसको सोच कर ऐसे छूट में उंगलिया नहीं कर रही होती..

प्रीति, मुस्कुरा कर एग्री करते हुए :- ाचा मेरी माँ मान ली तेरी बात लेकिन अब मुझे क्या करना चाहिए, इस सब का कोई उपाय भी तो बता, क्यों में ये सब महसूस कर रही हु...

मोनाल :- अब बताने समझने को क्या रहा है प्रीति, सीधी सी बात है की तू सनी को दिल से पसंद करने लगती है, उसके प्रति तेरे मन में प्यार जग रहा है और साथ hi तेरा ये जिस्म उसके मरदाना स्पर्श को पाने की हसरत दिखा रहा है, तेरी ये उफनती हुई जवानी मचल रही है सनी की बहो में जाने के लिए, तेरे ये गोल मटोल रसीली क्सहुँचिया तड़प रही है सनी के हाथो मसले जाने के लिए और जिस छूट को तू उंगलिओ से शांत करने में लगी वो हकीकत म तो और ज्यादा बेकाबू हो रही है जो अब बस सनी के साथ मिलान होने के बाद hi शांत हो सकती है समझी मेरी जांणण....

प्रीति, हैरानी और ख़ुशी के मिक्स एहसास में उलझते हुए :- क्या, क्या सच म प्यार इसी को कहते है मोनाल, क्या सच में मेरी बॉडी इस चीज के लिए इतने बदलाव दिखा रही है..

मोनाल :- हाँ यार प्रीति ये प्यार और एक दूसरे में समां जाने की जो तालाब होती है न वो चीज hi ऐसी होती है, जब तक नहीं मिलेगी तब तक नहीं रुकने वाली, तू तो बस इस चीज को आगे बढाती रह और मौका देख कर सनी से अपने मन की बात शेयर कर और फिर उसके साथ बिस्तर भी शेयर कर लेना हाहाहा...

प्रीति, ज़हन में ये यद् करकी, लेकिन मोनाल को ये नहीं पता न अभी की सनी मेरा अपना सागा भाई है और में अपने भाई के लिए ये सब महसूस कर रही :- चुप कर कामिनी, अभी तो मुझे ये भी नहीं पता की सनी मेरे बारे में क्या सोचता है, वो मुझे स्वीकार करेगा या नहीं....

मोनाल, आँख मरते हुए :- कोई पागल hi हो तुझ जैसी khubsurat,hot,kamsin,itne कैसे हुए वेल डेवलप्ड फिगर की मालकिन और वर्जिन लड़की को एक्सेप्ट न करे... ः

प्रीति, खुद की तारीफ सुन खुश होते हुए, साथ hi अपनी विर्जिनिटी की बात सुन शरीर में उत्तेजना महसूस कर :- यार पता नहीं अब क्या होगा और क्या नहीं पर में इस चीज में रुकना नहीं चाहती हु, अब में इसको और जीना चाहती हु और जैसा तूने कहा में सनी के साथ आगे बढ़ने को तैयार हु अगर वो भी राज़ी है तो..

मोनाल, खुश होते हुए :- ये हुई ना बात, और सनी जरूर राज़ी होगा और न हो तो यार हम लड़किया है, लड़को को कैसे रोज़ाना है ये अब मुझे तुझे बताने की जरुरत नहीं है ः...

प्रीति :- हाहाहा हैं और वैसे भी जब मेरे साथ इतनी अनुभवी कामिनी सहेली हो तेरे जैसी तो रहा सहा सीखा hi देगी क्यों....

मोनाल :- हैइए नेकी और पूछ पूछ... लेकिन यार तुझे सीखा कर मेरा hi नुकसान है इस बार तो..

प्रीति :- वो कैसे...

मोनाल :- कैसे क्या, तुझे नहीं पता क्या में तो खुद सनी पर डोरे डालने की सोच रही इतने दिन से, इसलिए तो तुझसे भी पूछा की कही तुम दोनों के बिक्सः कुछ है तो नहीं, अब जब कुछ होने वाला है तो तू कहा मुझे ये मौका देगी की में सनी के साथ हमबिस्तर हो सकू हाहाहा..

प्रीति, आँख दिखते हुए :- अब तो इस बारे में सोचना भी मत हाहाहा

मोनाल:- ः ठीक है ठीक है, तेरे लिए चल में ये दुःख सह लुंगी ः... वैसे अब तो बस जल्दी से मुझे तुझसे ये खबर सुनने का इंतज़ार है की, " अब तू वर्जिन नहीं रही " हाहाहा..

प्रीति, शर्म से पानी पानी होते हुए लेकिन साथ hi अपने भाई को अपना कुंवारा पैन सौपने की बात से मस्त होते हुए :- ओह hello, इतनी भी जल्दी नहीं है मुझे समझी, और तू सपने देखना बंद कर दे, मुझे अभी भी वक्त चाहिए, किसी बात की जल्दी नहीं करने वाली, वैसे भी अभी ये कहा पता की सनी मेरे बारे में क्या सोचता है..

मोनाल :- मेरी जान ये सब बाटे कहने की होती है जब उस मर्द का जिसे हम पसंद करती है उसका हाथ पड़ता है न हमारे इस जिस्म पर तो कपडे कब उतर जाते है और कब हम उनके निचे उनके धक्के सहते हुए मजे ले रही होती है पता भी नहीं चलता है ः..

प्रीति, भाई क साथ नंगी सोने और उसके धक्के सहने की बात सुनते hi छूट में गुदगुदी महसूस करते हुए :- यार तू सच में भोत बेशरम और कामिनी है....

मोनाल :- ः मेरी जान यही तो असली मजा है. ज़िन्दगी का...

प्रीति :- ः अचल बस बस ठीक है अब, चल भोत देर होगयी अब हमें चलना चाहिए एंड यार थैंक्स, इस चीज को ले कर समझ hi नहीं आ रहा था की मुझे क्या करना चाहिए अब भोत रिलैक्स फील हो रहा..

मोनाल, कैंटीन से जाने के लिए खड़े होते हुए :- कामिनी अब मुझे थैंक्स बोलेगी एक थप्पड़ खायेगी, बस जा जिले अपनी जिंदगी, मौज कर ः और वैसे अभी तो असली रिलैक्सेशन तो तब मिलेगा जब सच म सनी का हठ्ठ ुह्हम्म्म्म ुह्हम्म्म्म..

और इससे पहले की मोनाल अपनी बात पूरी करती प्रीति फिर उसकी तरफ आँखे बड़ी कर देखने लगती है जिसे देख मोनाल की हसी छूट जाती है और साथ hi प्रीति भी हसने लगती है और दोनों कैंटीन से बहार निकल जाती है...

वह दूसरी तरफ मानव श्वेता को ले कर दूसरी होटल पहुंच जाता है और होटल के रूम में घुसते hi श्वेता टपक से मानव पर टूट पड़ती है और अपने हप्तहो को अपने बॉस के हप्तहो से ऐसे चिपका देती है जैसे किसी ने हप्तहो के बिच चिपकू गम लगा दिया हो.

मानव खुद भी जो इतने दिनों से शराफत का नाटक कर रहा था, आज उसी भरे जिस्म की गदरायी औरत श्वेता के इतने पास होने से खुद पर काबू खो देता है और अंदर के भूखे भेड़िये को जागते हुए श्वेता के होठो को चूमने लगता है और साथ hi उसको अपनी बहो में उठा कर बिस्तर की तरफ बढ़ता है और सीधा बिस्तर पर पटक देता है..

बिस्तर पर गिरते hi श्वेता अपने हाथ उप्पेर की तरफ कर फैला देती है जैसे पूर्ण समर्पण दिखा रही हो और मानव द्वारा अपने जिस्म नोचन के लिए इंतज़ार में तड़प रही हो...

ये देख मानव से अब रहा नहीं जाता है एयर तुरंत सीमा का कुरता कमर से उप्पेर उठा कर टैंगो के बिच छूट के ठीक उप्पेर दोनों हाथ रख लेग्गिंग को जोर से खींच देता है और अगले hi पल करे में चररररर चररर करके श्वेता की लेग्गिंग के छूट के मुहाने से फटने की आवाज आती है...

श्वेता :- अह्ह्ह्हह सिररर कितना इंतज़ार करवाया है आपने मुझे, जैसे लेग्गिंग फड़ी है वैसे hi अब मेरी छूट भी फाड् क्र रख दो उम्मम्मम्म

मानव, फटी लेग्गिंग में हाथ दाल छूट को भींचते हुए अपना मुँह कुर्ते के उप्पेर से चुचिओ में भर जोर से काट ते हुए :- साली रंडी भोत चल मची है न तेरे इस भोसड़े में कुटिया देख आज कैसे इसको फाड़ता है मेरा लौड़ा... और ये बोल दो उंगलिया वापस से श्वेता की छूट में दाल उसकी चुदाई करने लगता है..

इतने दिनों की प्यासी श्वेता इस वॉर को ज्यादा देर झेल नहीं पति है और शरीर में कप कपि के साथ अपना छूट रास बहा देती है...

भले hi श्वेता की छूट ने रास बहा दिया था लेकिन इतने दिनों की प्यास इतनी जल्दी कहा बुझनी थी और इसी के उपरांत श्वेता बिस्तर पर उठ बैठी है और अपने कुर्ते को खुद अपने हाथो से निकल पूरी नंगी हो जाती है और मानव को भी मादरजात नंगा कर देती है...

श्वेता, मानव का लुंड हाथ में पकड़ :- हैईईई कितना इंतज़ार करवाया है इसने मुझे उम्म्म्म भोत दिनों बाद हाथ आया है आज तो इसको जैम कर प्यार करुँगी...

और ये बोल अपना मुँह निचे की तरफ ले जा क्र मानव के लुंड को मुँह में भर चूसने लगती है. इतने दिनों बाद ऐसे किसी जवान गरम औरत के मुँह की गर्मी को लुंड पर महसूस करने से मानव की भी हालत ख़राब हो जाती है और आंखे बंद कर श्वेता के माथे को पकड़ दाना दान उसका मुँह छोड़ना शुरू कर देता है....

कुछ देर की मुँह चूसै के बाद श्वेता अपने मुँह से मानव का लुंड निकल कर सांस लेने के लिए रूकती है और तभी एक कामुक प्यार भरी नजर से लुंड सहलाते हुए मानव की आँखों में देख कहती है :- उम्मम्मम्मम्म ओह्ह्ह्ह कितना रसीला और मजेदार लुंड है आपका "पापा" अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह िम्म्म्म...

मानव जो इस वक्त श्वेता द्वारा लुंड चूसे जाने के आनंद में मस्त था, जैसे hi उसके कान में पापा शब्द गिरता है एक दम से चौक जाता है लेकिन साथ hi उसकी पकड़ श्वेता के माथे पर मजबूत हो जाती है और उसका लुंड भी श्वेता के चेहरे के सामने एक झटका मार देता है...

मानव :- "पापा", ये क्या बोल रही है तू रैंड, पापा कौन है यहाँ तेरा साली....

श्वेता, लुंड को हौले से सहलाते हुए :- उम्म्म मेरे पापा नहीं है तो क्या हुआ, सीमा के पापा तो है न यहाँ,, और मानव की तरफ आँख मर देती है...

मानव, सीमा का नाम सुन वापस सेहमते हुए :- साली रंडी अभी यहाँ सीमा कहा सा गयी बिच में...

श्वेता :- क्यों नहीं आ सकती भला, वो भी तो मेरे जैसे hi जवानी से भरी हुई गदरायी औरत है, जैसी आपको पसंद है, हैं न सर...

मानव, इस वक्त उसे बेटी के बारे में ऐसा सुन गुस्सा आजाता है और श्वेता के बालो को कास के पकड़ कर, लुंड पूरा उसके मुँह में ठूसते हुए:- साली रंडी मेरी बेटी की तुलना तू खुद से कर रही, और ख़बरदार जो मेरी बेटी को बिच में लायी तो समझी...

श्वेता, मुँह पूरा खोल लुंड गले तक ले क्र निकलते हुए :- ुग्ग्ग्ग्घहहहह उम्म्म उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ाचा सर, अब रहने भी दो, मुझे नहीं पता क्या की आपको एक जवान औरत के सामने कोई रिश्ता नहीं दीखता, आप वो जानवर हो जो औरत की छूट मरने के लिए कुछ भी कर सकते हो... और अगर ऐसा नहीं है तो क्यों सुबह अपनी hi बेटी की गांड पर नज़र दाल क्र खड़े थे होटल के बहार...

मानव, जैसे hi होटल के बहार वाला सन यद् करता है उसके सामने सीमा के वही जीन्स में कैसे चूतड़ सामने आजाते है और जिन्हे यद् कर उसका लुंड एक बार दोबारा झटका मर देता है.. जिसे देख श्वेता तुरंत उस झटके मरते लुंड को हाथ में पकड़ तेज गति से मुठियाने लगती है..

श्वेता, लुंड मुठियाते हुए :- ओह्ह्ह पापा का लुंड तो बेटी की गांड यद् करके झटके मर रहा है, क्या हुआ पापा भोत मस्त लग रही थी न आपकी बेटी सीमा की गांड....

मानव, हालत के आगे कमजोर पड़ते हुए, कुछ बोलने की बजे अब सीमा को ज़हन में सोचने लगता है और वो सरे वाकिये याद करने लगता है जब उसने सीमा को कमरे में कपडे बदलते देखा था और अपनी hi बेटी की ब्रा और पंतय को सूंघते हुए लुंड पर लपेट क्र लुंड का माल छोरा था....

श्वेता, अपने प्लान में कामयाब होते देख मुस्कुराते हुए, अपनी दोनों चुचिओ के बिच मानव के लुंड को फसा कर घिसने लगती है और :- क्या हुआ सर, बेटी की जवानी के ख्यालो में खो गए...

मानव, वापस होश में आते हुए :- नाह, नाह, ऐसा कुछ नहीं है समझी...

श्वेता, घर्षण बढ़ाते हुए:- क्या एयर अब मुझसे क्या छिपाना, में तो रैंड हु न आपकी, और में कहा किसी को कुछ कहूँगी... मुझे भोत अचे से पता है की आपका ये लुंड अब आपकी बेटी सीमा की जवानी यद् कर केफुदक रहा है, देखो इसकी नसे कैसे फूल गयी है जब से मेने आपको पापा कह कर लुंड चूसा है... उम्मम्माह क्यों पापा सही कहा न, चाहते हो न आप अपनी सीमा बेटी को रगड़ रगड़ के छोड़ना, हैं न पापा...

और हर बात पर श्वेता " पापा " शब्द पर कुछ ज्यादा hi ज़ोर दे रही थी और इसी वजह से अब मानव का खुद पर बास नहीं रहता है और वो श्वेता को खींच कर बिस्तर पर कुटिया बना देता है और उसके दोनों चूतड़ों को हाथो में दबोच जानवर की तरह उन पर बरस पड़ता है और तडडडड तडडडड तडडडड करके दो चार थप्पड़ चूतड़ों पर लगा देता है...

मानव की हर एक मार पर श्वेता भी "अह्हह्ह्ह्ह पापा उम्म्म्म एस्सस और जोर से अह्ह्ह्ह" की चीख भरी ाःह निकल देती है जिसे सुन मानव का जोश और बढ़ जाता है और उसी वजह से श्वेता के चूतड़ों पर चढ़ अपना लुंड उसकी छूट के मुहाने रख एक करारा जोरदार वाला धक्का मरता है जिससे उसका लुंड श्वेता की छूट फाड़ते हुए पूरा अंदर घुस जाता है...

इतने दिनों से लुंड की प्यासी श्वेता को जब एक करारे धक्के के साथ लुंड अपनी छूट की गहराई में महसूस होता है तो वो मुँह से "ahhhhhhhhhhh उम्मम्मम्मम्म हैइए अह्ह्ह्हह पापा मजा करा दिए आज तो आपने अपनी बेटी के उम्नन्न कब से तड़प रही थी इसके लिए अह्ह्ह्हह्हह" बोलते हुए चिल्ला पड़ती है और निचे से अपनी कमर उप्पेर उठा कर मानव के हर धक्के का जवाब देने लगती है.

मानव जो अब छोड़ तो श्वेता को रहा था लेकिन ज़हन में जिसे अपनी बेटी सीमा hi थी, फिलहाल किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था, उसके मुँह से किसी भी तरह का कोई शब्द नहीं निकल रहा था लेकिन मन hi मन वो श्वेता को सीमा समझ चूका था और इसी कारन हमेशा से कुछ ज्यादा hi जोश में उसकी चुदाई करने में व्यस्त था.

लुंड के बेरहम झटको और मार की वजह से श्वेता ये तो समझ गयी थी की मानव अब बेटी को छोड़ने के ख्याल से कुछ ज्यादा hi मज़े में आ गया है लेकिन वो मुँह से कुछ बोल नहीं रहा था और इसी लिए वो मानव को उकसाने के लिए...

अह्ह्ह्हह्हह पापा और छोड़ो न अपनी बेटी को उम्मम्मम कब से प्यासी है आपकी बेटी उग्गफफग, इतना मस्त तो किसी ने नहीं छोड़ा मुझे आज तक अह्ह्ह्हह उम्म्म्म, में ऐसे hi आपसे नाराज़ हो रही थी, आज पता चला की रश्मि और श्वेता आपकी रंडी बन कर इतने खुश क्यों थे और क्यों वो आपसे छोड़ने के लिए इतने तड़पते है अह्ह्ह्ह उम् ओह्ह पापा...

ये सुन अब मानव के धक्को में और तेजी आजाती है और साथ hi उसके दोनों हाथ श्वेता की चूचिया जोर से भींचते हुए निप्पल मरोड़ने लगते है..

मानव के तेज और गहरे धक्को के साथ चुचिओ पर इस तरह के वार से मीठे तेज दर्द की अनुभूति से मस्त होती हुई श्वेता, :- अज्झहहहह उम्मम्मम्म ओह्ह्ह पापा हैं छोड़ो ऐसे hi और तेजजज और अब से आपको बहार औरतो को छोड़ने की जरुरत नहीं है उम्म्म्म आपके अपने घर में आपकी अपनी बेटी सीमा आपके इस लुंड को अपनी जवानी से खुश करेगी अह्ह्ह्हह उम्मम्मम्मम, मुझे अब ाओंके लुंड से रोज छोड़ना है पापा ऐसे hi इतनी hi बेरहमी से उम्मम्मम्म, अह्ह्ह्ह क्या अपनी बेटी सीमा को अपनी रैंड बनाओगे आप पापा.. अह्ह्ह्ह कहिये न पापा कहिये प्लसससससस...

मानव जो इतनी देर से चुचाप लेकिन एक भूखे भेड़िये की तरह श्वेता की छूट मार रहा था, अपनी बेटी सीमा के उसकी रैंड बन घर में hi छुड़न की बात से खुद पर से सारा काबू खो देता है और श्वेता की कमर पकड़ और तेज धक्को के साथ पूरा लुंड छूट की गहराई में बच्चेदानी तक उतर कर :- हैं बेटी सीमा, बनाऊंगा में तुझे मेरी रैंड उम्म्म्म ओह्ह्ह्ह कितना मस्त गदराया जिस्म है बेटी तेरा.. जब से तेरे जिस्म को ढंग से देखा है बस ये लुंड तेरी छूट और गांड में उतरने को मचल रहा था... ले छुड़वा अपने बाप से मेरी रैंड बेटी सीमा अह्ह्ह छुड़वा ले ओह्ह्ह्ह कितनी मज़ेदार छूट है बेटी तेरी.....

श्वेता, मानव क मुँह से सीमा के बारे में सुन कर, विजयी मुस्कान के साथ और ज्यादा गरम होते हुए मस्त हो जाती है और अपने चूतड़ उठा उठा कर मानव के लुंड से पापा पापा अह्ह्ह्ह एस्सस पापा फुककक में, छोड़ो अपनी रंडी सीमा को, कहते हुए छुड़वाने में मस्त हो जाती है.

मानव अब आंखे बंद कर बस सीमा सीमा करते हुए श्वेता की जगह सीमा को सोचते हुए, अपनी बेटी को अपने लुंड के आगे कुटिया बनते हुए चुड़ते देख बेकाबू हो जाता है और साडी चढ़े पर करते हुए एक जानवर की तरह श्वेता की छूट मरने लगता है, और ऐसी hi चुदाई श्वेता को चाहिए भी थी...

बेटी को छोड़ने की गर्मी और हवस और वही श्वेता को इतने दिनों बाद इतनी घमासान चुदाई मिलने के सुख से दोनों पूरी मस्ती में चुदाई में मग्न हो जाते है और तभी श्वेता को ये एहसास होता है की मानव की गति और तेज हो रही है और वो झड़ने के करीब है..

श्वेता :- अह्ह्ह्हह उम्म्म पापा हाँ छोड़िये और तेज अपनी रंडी बेटी को अह्ह्ह्हह, पापा आज अपनी बेटी की छूट में अपना बीज बो दो... भर दो मेरी छूट अपने लुंड के पानी से अह्ह्ह भोत मन है आपकी वेति सीमा का की उसके पापा उसकी छूट में उनके लुंड का पानी डेल अह्ह्ह्ह प्लस पापा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..

और मानव तो जैसे ये सुनने का hi इंतज़ार कर रहा था, और बेटी की छूट में लुंड का पानी भरने की बात सुन कर hi उसके लुंड ने श्वेता की छूट में पिचकारी मरते हुए अपना गाड़ा रास चोर दिया जिसकी गर्माहट महसूस करते हुए श्वेता भी मानव का साथ देते हुए झड़ने लगती है एयर दोनों कंपते हुए अकड़ते जिस्म को लिए बिस्तर पर एक दूसरे के उप्पेर गिर पड़ते है.

घमासान चुदाई के बाद अपनी साँसों पर काबू होने के बाद दोनों मानव और श्वेता रिलैक्स होते है और तभी मानव मन hi मन ये सोचता है की, " उफ्फ्फ्फ़ ये मेने क्या किया आज, अपनी बेटी सीमा के बारे में सोच इतना गरम कैसे हो गया "..

श्वेता जो पास में hi मानव के साथ नंगी लेती पड़ी थी मानव का पशोपेश समझ जाती है और वो नहीं चाहती थी की मानव अब इस बात से अपना मन बदले," क्या बात है सर, आज तो बेटी का नाम ले कर भोत जैम कर चुदाई की है आपने मेरी, कसम से मजा hi आ गया मइहे तो ".

इस बात पर मानव श्वेता की चुकी को ज़ोर से भींच कर, " साली रंडी सब तेरी वजह से हुआ, तूने मुझे उकसाया न होता तो आज में मेरी hi हेति के बारे ये सब नहीं सोचता., शर्म भी नहीं आई न तुझे कुटिया एक बाप को उसकी बेटी के जिस्म के लिए उकसाते हुए "

श्वेता, मानव के मुरझाये लुंड को सहलाते हुए, " ः सर इसमें कैसी शर्म, और क्या मुझे ये नहीं बता की मर मानव खन्ना जब किसी औरत की जवानी लुटता है तो वो उसके साथ क्या रिश्ता है वो कभी नहीं देखता, उसे बस उस जाने को रगड़ रगड़ के रोंदने से मतलब होता है, फिर क्षे वो उसकी अपनी बेटी hi क्यों न हो.. और ये बात का यकीं मुझे तब हुआ जब आप सीमा ma'am के चूतड़ घर रहे थे...

मानव :- ः सच भोत बड़ी रैंड है तू श्वेता

श्वेता :- वैसे सच बताओ सर, क्या आपको मजा नहीं आया सीमा मां को ज़हन में रख मेरी चुदाई करके, बोलिये न पापा हहै

मानव, पापा सुन फिर मस्त होते हुए :- सच कहु तो आज तेरी चुदाई में जो मजा आया ऐसा पहले कभी नहीं आया मुझे...

श्वेता :- अच्छा सर, तो लूट लेना मजे जब मन करे , वैसे भी अब आपकी बेटी सीमा सच में तो इतनी आसानी से अपने पापा को अपनी जवानी लूटने देने से रही तब तक श्वेता को hi सीमा समझ लो..

मानव, इस बात को सुन दोबारा श्वेता पर चढ़ते हुए :- साली रैंड मन गया तुझे, जो बेटी मुझे शराफत के रस्ते ला रही थी उसी बेटी को मेरे निचे लिटा कर उसकी चुदाई करने का मन बनवा रही तू मेरा कुटिया कही की ः..

श्वेता, लुंड पकड़ कर :- हहै क्या करू सर सब, आपके इस लुंड को लेने के लिए तो आपकी बेटी क्या में दुनिया की किसी भी औरत चाहे वो मेरी अपनी माँ बेहेन क्यों न हो, उसको भी आपके निचे लिटा दू... और ये बोल निचे से अपनी गांड उठा देती है जिससे मानव का खड़ा होता लुंड वापस उसकी छूट में घुस जाता है... अह्ह्ह्हह पापा क्या कहते हो एक बार और मरोगे क्या अपनी प्यासी रंडी बेटी सीमा की छूट...

मानव, जैसे खुद तैयार था और "हाँ सीमा बेटी क्यों नहीं अब तो रोज तेरी छूट मरने का मन करेगा मेरा रंडी" बोलते हुए एक बार दोबारा श्वेता की छूट फाड़ने में लग जाता है एयर इस घमासान के बाद दोनों श्वेता और मानव होटल से निकल कर वापस अपने रूम की तरफ बढ़ जाते है...

वही घर पर महिमा जो की अपने रोज के काम काज में व्यस्त थी, उसके फ़ोन पर एक घंटी बजती है, और कॉल उसी अनजान कॉलर का था, जिसका नंबर देख महिमा का दिल जोरो से धड़कने लगता है और इसी तेज धड़कन के साथ वो फ़ोन रिसीव करती है..

महिमा :- hello

कॉलर :- है महिमा जी, कैसी है आप

महिमा :- में ठीक हु बोलो कैसे फ़ोन किया..

कॉलर :- अरे बस आपको याद दिलाने के लिए की आज इतनी मिन्नतों के बाद आप मुझसे मिलने वाली है

महिमा :- हाँ यद् है मुझे पर तुम ये एक साधारण सी मीटिंग है ये तुम भी मत भूलना समझे

कॉलर, एक बार आप मिलो तो सही :- अरे महिमा जी क्यों फ़िक्र कर रही हो मैंने आपको कहा न पहले hi की ये बिलकुल एक साधारण सी मेल मिलाप की परिचय करने के लिए मीटिंग होगी बस..

महिमा :- हम्म ठीक है...

कॉलर :- ठीक है महिमा जी जगह में आपको मैसेज कर देता हु आप तय समय पर पहुंच जाना, ये नाचीज आपका ब्व्सबरी से इंतज़ार करेगा, bye!!!

महिमा :- ok bye!!!

ये बोल महिमा फ़ोन रख लेती है ये सोचते हुए की चलो आज आखिर पता तो चलेगा की आखिर ये अनजान कॉलर जो मेरा रिश्तेदार होने की बात करता है वो है कौन!!!!

और वही दूसरी तरफ कॉलर खुश होते हुए विजयी हसी हस्ते हुए, " आखिर आज वो दिन आ hi गया जब महिमा जी मेरे साथ मेरे पास होंगी और अगर सब प्लान के मुताबित रहा तो आज मुझे उन्हें पाने से कोई नहीं रोक सकता, जल्दी आईये महिमा जी, अब और इंतज़ार नहीं होता उफ्फ्फ "...

आज के अपडेट के लिए इतना hi, आगे की कहानी अगले अपडेट में.... धन्यवाद् दोस्तों 🤗

 
अपडेट - 61


घमासान और दुमदार चुदाई के बाद दोनों मानव और श्वेता वापस होटल पहुंच जाते है जहा रूम में सीमा पहले से hi मौजूद थी, जिसे देख एक बार तो मानव चौक जाता है क्युकी उसे लगा था की शॉपिंग के चलते अभी भी वो मार्किट में hi होगी, लेकिन दूसरे hi पल अपनी बेटी को देख कर अभी कुछ hi समय पहले बेटी बानी श्वेता की दुमदार तरह से की गयी चुदाई उसे याद आ जाती है और सीमा के जिस्म को एक बार फिर उप्पेर से निचे तक देख उसकी जवानी में खो जाता है, " हैए सच कितनी जवान और गदराया जिस्म है सीमा का, श्वेता सही कहती है जो अगर सच में सीमा बेटी की जवानी लूटने का मौका मिले तो मजा hi आजायेगा "

अभी मानव ये सब सोच hi रहा था की उसके कानो में सीमा की आवाज पड़ती है...

सीमा, जो मानव के लेट आने से विचारो में फांसी हुई थी :- क्या बात है पापा, आप लेट हो गए आने में, बुआ तो कह रही थी की आअज ज्यादा देर का काम नहीं था वह..

मानव, ये महसूस करते हुए की चुदाई के चक्कर में आने में देरी हो चुकी है :- हाँ बेटी बात तो सही है वह आज ज्यादा देर का काम नहीं था डील तो जाते hi सिग्न हो गयी थी...

सीमा, अपने विचारो को शक में परिवर्तित करते हुए :- तो फिर इतनी देर कैसे हुई आने में???

मानव, वाकई इतना आसान भी नहीं सीमा को पाना, भोत टेडी खीर है :- वो मार्किट में थोड़ा काम आ गया था इसलिए बेटी..

सीमा :- ऐसा क्या काम आ गया पापा मार्किट का? और सच में मार्किट का hi काम था या..

मानव, सीमा को बिच में hi टोकते हुए :- या कही श्वेता के साथ मस्ती मरने तो नहीं गया मैं... यही पूछना छह रही हो न तुम सीमा!

सीमा इस बात पर कुछ नहीं बोल बस चुप्पी साढ़े कड़ी रहती है, अपनी सवालिया नज़रो के साथ... जिसे समझ मानव तुरंत बात को आगे बढ़ता है..

मानव :- क्या हुआ चुप क्यों हो यही पूछना था न! मुझे लगा था की में तुम्हारी नज़रो में मेरे प्रति नजरिया शायद बदल पाउँगा लेकिन में नाकामयाब रहा, सुबह hi मेने तुमसे वडा किया था न की म ऐसा कुछ नहीं करूँगा अब जिससे तुम्हे शर्मिंदगी महसूस हो और न hi तुम्हारी मम्मी को किसी प्रकार का धोखा दूंगा फिर तुम ऐसे सोच भी कैसे सकती हो...

मानव, बात जारी रखते हुए, अपना ऑफिस का बैग पलंग पर रख उसे खोल कुछ सामान निकल :- तुम्हे यकीं नहीं है न तो ये देखो, मुझे देरी इसलिए हुई क्युकी डील सिग्न करने के बाद लौटते समय मुझे एक ज्वेलरी की शॉप दिखी तो वह से में महिमा के लिए ये नेकलेस खरीदने चला गया क्युकी तुम्हे पता है तुम्हारी मम्मी को नेकलेस कितने पसंद है... एयर ये देखो वही पास में मॉल था तो वह से उसके लिए ये साड़ी खरीदने लग गया इसलिए आने में देर हो गई..

इसके बाद भी अगर तुम्हे लगता है की मेने कोई गुनाह किया है तो तुम जो चाहे वो समझो में अपनी सफाई में कुछ नहीं कहना चाहता हु और ये बोल मानव सीधा बाथरूम में घुस जाता है...

यहाँ सीमा हकीकत देख कर पछतावा करते हुए की शायद मेने पापा पर जरुरत से जुडा शक दिखा दिया वो तो मम्मी को खुश करने ले लिए साड़ी और नेकलेस ले कर आये और मेने न जाने क्या क्या सोच समझ लिया...

(यहाँ आपको बता दू की मानव को श्वेता की चुदाई के बाद लौट ते वक्त लेट होने का अंदाज़ा हो गया था इसलिए रस्ते में ये सब सामान खरीद लिया था और जैसा की उसने सोचा था ठीक वैसा hi सीमा का बर्ताव देख ये खरीददारी उसके बचाव में काम आई.)

सीमा अभी यही सब सोच में डूबी थी की उसके फ़ोन पर रागिनी का मश्ग आता है, " मुझे लौटने में देर हो जाएगी, शायद रात भी हो जाये "

और ये मश्ग देख सीमा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है की, " लगता है बुआ और राजीव की ये मीटिंग कुछ ज्यादा hi लम्बी चल रही है ः " और इसी वाट पर वो बुआ को " no वर्रिएस एन्जॉय ुर टाइम " का एक मश्ग वापस भेज देती है..

(दोस्तों रागिनी और राजीव के इस मिलान को फिलहाल में पुरे विस्तार से नहीं बता रहा हु और इसका कारन आपको आने वाले उपदटेस में पता चल जायेगा.😜)

प्रीति के कॉलेज से घर पहुंचने पर महिमा उसे ये बताकर घर से निकल जाती है की वो किसी काम (कॉलर से मिलने ) से मार्किट जा रही है और आने में वक्त लगेगा.

कुछ hi देर में मैं ( सनी ) भी कॉलेज से जल्दी निकल कर घर पहुंच जाता हु और सीधा सोफे पर जा कर गिर पड़ता हु, और गिरते hi मम्मी को आवाज लगते हुए, " मम्मी भूख लगी है भोत जोर की कुछ खाने का दो ".

मेरी आवाज सुन प्रीति सीधा अपने रूम से बहार निकलती है और मेरे सामने आकर, " मम्मी मार्किट गयी है सनी, तू फ्रेश हो जा खाना में लगा देती हु. "

प्रीति की आवाज सुन उसकी तरफ देखता हु और देखते hi एक बार के लिए मेरे होश उड़ जाते है और उड़े भी क्यों नहीं, सामने का नज़ारा hi इतना हसीं था.

प्रीति जो मम्मी के जाने के बाद घर में अकेले होने का मौका देख और ये जान कर की अब उसके अलावा घर में कोई और रहेगा तो वो सिर्फ मैं, तो यही सोच कर वो फटाफट से अपने कपडे चेंज करके एक क्रॉप टॉप जो उसकी चुचिओ के कुछ इंच निचे hi ख़तम होता है, जिसमे उसका गोरा पेट और नाभि पूरी तरह सेसाफ झलक रही होती है, और वो टॉप भी इतना टाइट की उसकी कासी गोल मुलायम चुचिओ का ाककर मनो देखते hi बनता है और टॉप निचे से जीतता शार्ट उप्पेर से उतना hi डीप, और थोड़ा लूसे होने की वजह से उसकी छुचिओ का क्लीवेज भी भोत अचे से नज़र आ रहा था, साथ hi निचे उसने जंघे नहीं पूरी तरह नहीं ढकने वाला एक शार्ट डाला हुआ था, जिसमे उसकी गोरी चिकनी जंघे भोत अचे से दिखाई दे रही थी जिन्हे देख मन में बस यही ख्याल आये की, " हईये क्या हसीं माल है मेरे सामने, इतना कैसा बदन, कमसिन सा, और मस्त चिकना मुलायम सा जिस्म "

प्रीति को ऐसे देख एक बार तो मेरा मन हो गया की अभी इसे सोफे पर पटक कर उसपे चढ़ जाऊ लेकिन फिर अपने आप पर काबू पते हुए,

मैं :- प्रीति, तू... और क्या कहा तूने, तू मुझे खाना देगी, आज सूरज सही दिशा से hi ऊगा है न.. ऐसा चमत्कार कैसे हो रहा भला..

प्रीति, जिसने ये नोटिस कर लिया था की जब से मेने उसे देखा मेरी नज़र चोरी चीजे उसके जवान जिस्म को hi देख रही है :- हैं क्यों में नहीं खिला सकती क्या तुझे, हँ, एक तो कोई अच्छा काम करने जाओ वो भी पसंद नहीं आता तुझे..

और ये बोल प्रीति अपनी कासी गांड मटकते हुए किचन में चली जाती है और उसकी गांड शॉर्ट्स में ऐसे मटकते देख एक बार अपना लुंड सहला कर एडजस्ट करते हुए में भी उसके पीछे पीछे किचन में चला जाता हु..

किचन में जा कर में चुप चाप उसके पीछे खड़ा रहता हु और अपनी नज़र कभी उसकी मांसल चिकनी जांघो पर तो कभी टांगो पर तो कभी उन कैसे चूतड़ों पर टिकाये रखता हु और जैसे hi वो किसी काम से इधर उधर मुड़ती है या चलती है तो आगे उसके कासी चुचिओ के उभार को उप्पेर निचे होते हुए देखने में लीन रहता हु...

घर की सबसे जवान लड़की, सबसे कमसिन और कैसे हुए जिस्म की मालकिन का जिस्म आज इस तरह छिपा होने के बाद भी मुझे नंगा दिखाई दे रहा था और ये नज़ारा देख अब मेरे लुंड ने अपनी औकाद में आना शुरू कर दिया था..

प्रीति, जो तिरछी नज़रो से ये सब भोत अचे से देख रही थी और समझ चुकी थी की इस वक्त मेरी नज़रे कहा कहा घूम रही है :- क्या देख रहा है कब से वह खड़े खड़े सनी तू, खड़ा hi रहेगा या मेरी हेल्प भी करेगा..

मैं, जो अपनी नज़रे एक पल के लिए भी हटाने के मूड में नहीं था :- में क्या हेल्प करू, मुझे नहीं आता कुछ में यही खड़ा रहूँगा ः

प्रीति, जो खुद यही चाहती थी की आज सनी उसे जी भर कर ताड़े, आखिर उसके लिए hi तो तैयार हुई हु :- हँ कैसा भाई है बेहेन की मदद भी नहीं कर सकता...

और ये बोलते बोलते प्रीति जान कर के निचे जमीं पर कुछ सामान गिरा देती है, और पीछे मुद कर उसे लेने के लिए निचे झुकती है और जैसे hi वो निचे झुकती है तो टॉप में से कुछ हद तक दिखने वाला क्लीवेज अब अपनी हद में न रह कर भोत आगे निकल चूका था

प्रीति के झुकने से और टॉप लूसे होने के कारन अब ैंडर पहनी ब्लैक रंग की हाफ कप वाली ब्रा जो उसकी चुचिओ की साइज के आगे छोटी साबित हो रही थी उसमे से उसकी गोरी मुलायम और मखमली चूचिया मेरी नज़रो के सामने थी, या ये कह दू की उस ब्रा में प्रीति की चुचिअ उप्पेर से साफ़ बहार थी और अगर थोड़ा और भाग बहार दिखाई देता तो उन चुचिओ की वो कड़क निप्पल्स भी मेरी नज़रो के सामने आ जाती...

सामने अपनी बेहेन के हसीं जिस्म का इतना हसीं नज़ारा देख मेरी नज़रे वह से हटने का नाम नहीं ले रही थी और प्रीति ये सब देख मन hi मन खुश होते हुए जान कर कुछ देर ऐसे hi झुकी रहने के बाद कड़ी हो जाती है और वापस अपने काम में लग जाती है.., और अपने भाई की नज़रो का इस तरह उसके जवान यौवन पर पड़ने से अब प्रीति की टैंगो के बिच हलचल शुरू हो चुकी थी.

मैं, प्रीति के जिस्म की नुमाइश से गरम होने लगा था और अब उसके पास जा कर ठीक उसके पीछे जा कर खड़ा हो,:- प्रीति एक बात पुछु तुझसे..

प्रीति, मेरे अचानक उसके पीछे इस तरह आ कर खड़े होने से मुझे अपने इतने करीब प् कर शॉक सी होते हुए :- कमीने, डरा दिया न मुझे तूने सनी, बोल क्या पूछना है अब...

मैं, उसके मजे लेते हुए :- वैसे आजकल तू मुझ पर कुछ ज्यादा मेहरबान नई हो रही, मुझे हज़म नहीं हो रहा तेरा ये बदला बदला रूप ः

प्रीति, मन hi मन खुद को जवाब देते हुए, क्या करू भाई अब तुझपे दिल आ गया है तेरी बेहेन का हहै :- वाह ये भी ठीक है अब अचे से रहती हु तो भी हज़म नई होता तुझे और जब लड़ती थी तो कहता था की लड़ाकू है, तू फिक्स कर ले की में तुझे कैसे चाहिए हु..

मैं, कैसे क्या मुझे तो तू हर पोज़ में अलग अलग तरीके से चाहिए, धीरे से दबी आवाज में :- तू जैसे देना चाहे वैसे ले लूंगा में तुझे तो..

प्रीति, जो मेरी ये बात सुन लेती है और सुनते hi उसके शरीर में मस्ती की लेहेर दौड़ जाती है, फिर भी जैसे जताते हुए की उसने कुछ न सुना हो :- क्या... कुछ कहा क्या तूने सनी??

मैं, बात सँभालते हुए :- हाँ मेने ये कहा की मुझे तो वो लड़ाकू जंगली बिल्ली जैसी प्रीति भी चाहिए और ये समझदार क्यूट एंड हॉट प्रीति भी चाहिए ः...

प्रीति, आज hi के दिन दोबारा मेरे मुँह से खिड़ के लिए हॉट शब्द सुन कर खुश होते हुए :- क्या कहा तूने मुझे, "हॉट".. सुबह भी तू यही बोल के भगा था न कॉलेज...

मैं, पीछे से hi उसके कानो के करीब जा कर :- हाँ तो जब तू दिख रही इतनी हॉट तो कहूंगा न इसमें गलत क्या है.

प्रीति, ये सही मौका है सनी के मन की बात जानने का :- ाचा, पर तुझे शर्म नहीं आती अपनी बेहेन को हॉट बुलाने में..

मैं :- ले तो इसमें शर्म की बात की, तू बेहेन होने के साथ साथ लड़की भी है और एक लड़की को हॉट नहीं कहु तो किसे कहु भला, और वैसे भी कोई दूसरी लड़की को जब मई हॉट बोलू तो वो भी किसी की बेहेन होगी hi न, तो जब दूसरे की बेहेन को कह सकता हु तो तुझे क्यों नहीं...

प्रीति, मेरी इस बात पर उसके मन में एक चीज साफ़ हो चुकी थी की, कही न कही सनी मुझे एक बेहेन के साथ साथ बाकि लड़कीओ को जिस नज़र से देखता है वैसे भी देख रहा है और इसी बात पर उसकी तरफ मुड़ते हुए :- अच्छाआ ये बात है तो चल बता फिर, ऐसे क्या फैक्टर्स होते है जिससे तुम लड़के हम लड़कीओ को हॉट डिक्लेअर करते हो...

मैं :- अब वो तो देखते hi तुरंत अंदर से आता है न, कोई फिक्स क्राइटेरिया थोड़े बना हुआ है

प्रीति, अपने आप को आगे की तरफ कर ताकि वो मुझे अचे से अपने शरीर की बनावट दिखा सके :- ाचा चल फिर ये बता मुझमे क्या दिखा जो हॉट लगी...

मैं, उप्पेर से निचे तक उसको देख, अपनी नज़रे उसकी , नंगी टंगे, मांसल जांघो पर टिका कर :- वो में नहीं बताने वाला जा ः..

प्रीति, चिढ़ते हुए :- ाचा इसका मतलब तूने झूट बोलै है न सनी.

मैं, उसको और छेड़ते हुए :- मैंने कोई झूट नई बोलै, पहले तू मेरे सवाल का जवाब दे की इतनी मेहरबान क्यों हो रही मुझ पर फिर में तुझे जवाब दूंगा

प्रीति :- ले फिर वही बात, में कोई मेहरबान नई हो ऋ समझा, वो तो मम्मी बोल क गयी थी तुझे खाना देना है तो दे रही और तुझसे अचे से बात इसलिए करती हु क्युकी मेरा अभी लड़ाई करने का मूड नहीं हहै

मैं, उसको अपनी तरफ खींच लेता हु, उसकी कमर में हाथ दाल :- ाचा और ये जो तू रोज मेरी पसंद के ख़रीदे हुए कपडे पहनती है वो किसलिए.. तेरे पास तो और भी भोत ड्रेस है न.. बोल बोल

प्रीति, मेरे हाथो को अपनी नंगी कमर पर महसूस कर शरीर में एकक कम्पन महसूस करती है और साथ hi उसके जिस्म को गर्मी का एहसास होने लगता है, " क्या बताऊ अब तुझे, तेरे लिए hi तो पहने है ये कपडे " :- हाँ तो वो मेरी मर्ज़ी है मेरे कपडे जब जो चाहे पह्नु

मैं :- कमर अपर हाथो का दबाव बनाते हुए, ाचा लेकिन ये कपडे तो मेने मेरी गफ के लिए ख़रीदे थे न, तो क्या तू अब भी खुद को मेरी गफ मानती है या नहीं..

प्रीति, इस बात पर नज़रे झुका कर, " अगर नहीं मानती तो इस तरह अपनी जवानी का प्रदर्शन नहीं करती " :- नाह में भला क्यों मनु खुद को तेरी गफ, वैसे भी में तो तेरी बेहेन हु न...

मैं, चेहरे को उसके करीब ले जा कर, धीरे से :- तो फिर निकल इन कपड़ो को अभी के अभी, इन्हे ोाहनने का तुझे हक़ नहीं..

प्रीति, कपडे उतरने की बात सुनते hi शरीर में करंट महसूस कर और साथ hi टैंगो के बिच छूट से गीलेपन का एहसास महसूस कर :- कीय.. कीय.. ये क्या बोल रहा है तू सनी, में क्यों निकलू, मेरे कपडे है ये..

मैं :- नहीं ये मेरी गफ के लिए ख़रीदा है मेने, और तू मेरी गफ नहीं तो निकल इन्हे... एक मिनट, वैसे ये बता की सिर्फ ये बहार के कपडे तूने मेरी पसंद के पहने है या अंदर के भी...

प्रीति, सीधा सटीक सवाल सुन कर पानी पानी होते हुए, उफ़ कितना फ्रैंकली पूछता है ये सब, अब कैसे बताऊ इसे की सब उसी की पसंद का है, और यही सोच में वो अपनी आँखे नीची कर लेती है मनो जवाब में हां कह रही हो. जिसे में भोत अचे से समझ जाता हु... लेकिन तभी प्रीति मुझे धक्का दे देती है, में कुछ नहीं बता रही बेशरम, अपनी बेहेन से ऐसी बाटे करता है....

मैं, उसके धक्के से पीछे की तरफ हो जाता हु लेकिन तुरसंत hi उसको पास अपनी तरफ खींच लेता हु और इस बार इस तरह खींचा की वो एक दम से मुझसे चिपक जाती है और उसकी चूचिया सीधा मेरे साइन में घुस जाती है, जिनका दवाब महसूस करना hi भोत आनंदमयी प्रतीत होता है और अब उसके चेहरे और मेरे चेहरे में बस कुछ hi दुरी का फैसला रहता है..

मैं, ऐसे hi उसे पकडे हुए :- नाह आज नहीं प्रीति, उस दिन भी तू भाग गयी थी आज तो नहीं जाने दूंगा अपना जवाब लिए...

प्रीति, थोड़ा पीछे हैट जिससे उसकी चुचिओ का दबाव मेरे साइन ओर काम हो जाता है लेकिन उसकी बढ़ी हुई धड़कन की वजह से वो दोनों गोल गोल चूचिया ठीक मेरे नज़रो के निचे तेजी से उप्पेर निचे हो रही थी :- उम्म्म चोर न प्लसस, और कौनसा जवाब किए तुझे ऐसा... किस सवाल की बात कर रहा है तू

मैं :- वही, जो अभी पूछा फिर से, की तूने ये सब मेरी पसंद के कपडे क्यों पहने हैं, बहार भी और अंदर भी....

प्रीति : अंदर भी.. ये शब्द सुनते hi अपनी नज़रे उप्पेर उठा कर सीधा मेरी आँखों में देखती है

मैं :- क्या हुआ, तुझे क्या लगता है मुझे नहीं पता होगा क्या... मुझे भोत अचे से पता है की इस वक्त ये शॉर्ट्स, टॉप से ले कर अंदर की ब्रा और पंतय सब तूने मेरे साथ खरीदी हुई hi पहनी है...

प्रीति, इस बार कुछ जवाब नहीं दे पति है और ऐसे hi चुपचाप आँखों में आँखे दाल कड़ी रहती है..

मैं, उसकी कमर में अपने हाथो की पकड़ मजबूत करते हुए :- वैसे सच कहु, वाकई भोत हॉट लग रही है तू इन कपड़ो में, सच्ची गफ बनाने का मन हो गया तुझे देखते hi आज तो अभी भी और सुबह भी...

मेरी ये बात सुन प्रीति की धड़कने और तेज हो जाती है और इस बार बिना किसी नाटक के, जैसे वो भी अब इस पल में इस माहौल में मेरे संग खोना चाहती थी, चूँकि कॉलेज से वो भी कुछ ऐसा hi सोच कर मन बना कर आयी है :- सच सनी, तो फिर बता न ऐसा क्या ाचा लग गया तुझे मुझमे की तू अपनी बेहेन को hi गफ बनाने की सोच रहा...

मैं, उसको अपने से थोड़ा दूर कर उप्पेर से निचे एक hi नज़र में निहारकर उसकी आँखों में देख :- ाचा नहीं लगने का क्या है ये बता मुझे तो तू पहले मुझे, एक लड़के को अपनी तरफ आकर्षित करने का हर गन है तुझमे प्रीति, कोई भी तुझे पाने के किये कुछ भी कर जाये फिर चाहे वो तेरा अपना भाई यानि मैं भी क्यों न हु, और ये बोल आँख मर देता हु...

प्रीति, भाई द्वारा खुद को पाने की बात सुनते hi प्रीति का रोम रोम खिल उठता है, उसके रोंगटे खड़े होने लगते है :- सच, तो अगर में ये भूल जाऊ की हम भाई बेहेन है और सच में बर्फ गफ है तो तू क्या करेगा मुझे पाने के लिए सनी

मैं, दोबारा उसको अपने करीब खींच एक दम पास होते हुए:- मुझे नहीं लगता की मुझे ये भूलने की जरुरत है की हम भाई बेहेन है, और मुझे ये भी पता है की कही न कही तुझे भी अब इस बात से फरक नहीं पड़ता की हम भाई बेहेन है क्यों...

प्रीति, इस बात को सुन चोकते हुए, की जैसे मेने उसके मन की बात सुन ली हो क्युकी प्रीति तो पिचके कुछ दिनों से hi अपने भाई यानि मेरी होने का इरादा बना चुकी थी और आज तो इस बात पर दृढ हो चुकी थी....

मैं :- क्यों सही कहा न मेने प्रीति, या पड़ता है तुझे फरक इस बात से...

प्रीति, अब खुद को रोक क्र फायदा नहीं और इसी सोच से :- क्या लगता है तुझे सनी, अगर फरक पड़ता तो इस तरह तेरे सामने और तेरे साथ कड़ी रहती मैं, इस तरह अपना बर्ताव बदलती में तेरे लिए...

मैं, :- ाचा तो फिर बता न मेरी बातो के जवाब क्यों नहीं दिए तूने इतना पूछने पर भी...

प्रीति, मुस्कुराते हुए :- क्युकी में चाहती थी की तू खुद ये चीजे नोटिस करे और मुझे बताये जैसे तूने अभी बताया...

इससे पहले की प्रीति कुछ और बोल पति में उसे कस के अपनों तरफ खींच लेता हु और अपने होठ उसके होठो पर रख चुम लेता हु, इस चुम्बन के लिए प्रीति तैयार नहीं थी इसलिए चौक जाती है, लेकिन मुझे चुम्बन में उसका साथ नहीं हो ऐसा कही महसूस नहीं होता hai..kuch देर के चुम्बन के बाद में अपने होठ उसके होठो से हटा लेता hu..or प्रीति की तरफ स्माइल के साथ देखने लगता हु..

प्रीति, अभी जो हुआ उसे समझते हुए खुद को संभल कर तेज बड़ी हुई साँसों को थमते हुए :- ये क्या था सनी.....

मैं :- क्यों नहीं आया पसंद तुझे प्रीति, तू hi तो कह रही थी की तुझे अब फरक नहीं पड़ता हमारे भाई बेहेन के रिश्ते में इस तरह का प्यार होने से....

में अपनी बात पूरी करता इससे पहले hi इस बार प्रीति की तरफ से उसके होठ मेरे होठो पर आ जाते है, जैसे मनो अपनी रजामंदी का साबुत पेश कर रही थी और फिर अगले कुछ मिनट तक मेरा और प्रीति का ये चुम्बन चलता है उसके बाद दोनों एक दूसरे से अलग होते है..

कुछ देर अलग रहने के बाद, जब मेरी नज़र दोबारा प्रीति के उन रसीले होठो पर पड़ती है तो मुझे सब्र नहीं होता और उसे वापस अपनी तरफ खींच कर किचन स्टैंड पर बिठा देता हु और वापस से एक मस्त गहरे चुम्बन में गम हो जाते है और इस बार उसके हाथ मेरे सर पर घूम रहे थे, दोनों की जीभ एक दूसरे से लड़ाई करने में व्यस्त थी, होठ दोनों के एक दूसरे के होठो का रास पिने में मशगूल थे और तभी मेरा एक हाथ उसकी वो मुलायम सी गोल चुकी पर पहुंच जाता है और हल्का दबाव देते हुए उसे मसलने लगता हु...

जैसे hi मेरा हाथ प्रीति की चुकी पर जाता है हमारा चुम्बन तोड़ते हुए उसके मुँह से एक हलकी सी दर्द भरी आह्ह्ह्हह उम्म्म निकल जाती है, जो की निकालनी लाजमी भी थी क्युकी आज से पहले उसकी इन रसीले ामो को किसी भी मर्द ने हाथ नहीं लगाया था...

उसकी आह सुन कर कुछ देर रुक में उसकी आँखों में देखता हु जो एक असमंजस में थी लेकिन अगले hi पल मेने मेरर दोनों हाथ उसकी दोनों चूचिओं पर रख हलके हलके से दबाना शुरू कर दिया जिससे उसकी आँखे बंद होती चली गयी और जैसे hi उसको दर्द का अनुभव होने लगा था में अपने होठ वापस उसके होठो पर टिका देता हु....

हाथो में प्रीति की चुचिओ को दबाते हुए उसके होठो को चूमने में मैं इतना गम था की और कुछ करने का सूझ नहीं रहा था, बेहेन के होठो के रास ने साडी भूख और प्यास मिटा दी थी और दोनों में से कोई भी अब अलग होना नहीं छह रहा था की तभी दरवाजे की घंटी बज जाती है...

घंटी सुनते hi एक झटके से हमारी किश टूट जाती है और प्रीति एक झटके से किचन स्टैंड से उतर जाती है... अभी भी उसकी साँसे भोत तेज चल रही थी लेकिन वो अब अपनी नज़रे इधर उधर दौड़ा रही थी जैसे उसे एहसास हुआ हो की जिस्म की गर्मी और भाई के प्रति आकर्षण ने आज उसको भोत आगे बढ़ा दिया...

इससे पहले की में कुछ और बात करता या कहता दरवाजे की घंटी एक बार फिर बज उठती है जिसे सुन..

प्रीति, साँसों को सँभालते हुए, अपने बिखरे बालो को ठीक करते हुए, बिना किसी प्रतिक्रिया के, घबराती हुई वो कमरे में भाग जाती है, जिसे जाता देख मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है की, " कितना रसीला बदन है मेरी बेहेन का.. उम्म्म मजा आ गया आज उसके कैसे बदन को और उसकी उन मुलायम चुचिओ को महसूस करके"...

इससे आगे कुछ सोचता इतने में फिर दरवाजे की घंटी बज जाती है, " इस वक्त किसे आना था, इतना मस्त माहौल बना था यहाँ साला " और ये सोच में दरवाजे की तरफ बढ़ जाता हु जहा खोलने पर सामने कामिनी भाभी को पता हु जो कॉलेज से लौटी थी...

प्रीति के साथ की गयी मस्ती से लुंड को वैसे hi अपनी औकाद में आ चूका था और सामने कामिनी भाभी को कड़ी देख अब लुंड का अपना काबू खो चूका था इसी वजह से उनको घर के अंदर बुला दरवाजा बंद कर उन्हें सीधा अपने कमरे में ले जाता हु और मेरी रैंड कामिनी भाभी को अचे से रगड़ रगड़ क्र छोड़ कर अपने लुंड का पानी उनकी छूट में भर देता हु जिसके बाद वो अपने कमरे में चली जाती है.

लेकिन वही कमरे में भागी प्रीति, रूम में जाते hi सीधा बाथरूम में घुस जाती है और मेरे साथ हुए इंसिडेंट को याद करने लगती है...

उफ्फ्फ्फ़ प्रीति ये कैसा एहसास था आज का, तूने अपने भाई सनी के होठो को चूमा, उसने तेरे होठो को चूमा, (अपनी चुचिओ पर हाथ ले जा ) उफ्फ्फ्फ़ ये कैसा दर्द था जो सनी के हाथ इनपे पड़ते hi मुझसे महसूस हुआ... और ये दर्द अब तक मुझे क्यों फील हो रहा है... िष्ठ्हह मुझे समझ नहीं आ रहा में इस ससब पर कैसे रियेक्ट करू....

उम्म्म्म सनी सच ऐसा एहसास मुझे आज से पहले कभी नाजी हुआ, ये मेरी जिंदगी की पहली किश थी वो भी अपने भाई के साथ... िष मुझे चुने वाला पहला मर्द मेरा hi भाई है... उम्म्म और यही सब सोच बाथरूम में कड़ी प्रीति कब अपना हाथ शार्ट में घुस छूट घिसने लगती हसि उसे hi नहीं पता लगता है और एक हाथ में छूट और दूसरे हाथ में अपनी चुकी पकड़ ज़हन में अपने भाई सनी के ख्याल लिए चरम पर पहुंच जाती है...

यहाँ घर से निकल कर महिमा सीधा उस कॉलर के बताये हुए अड्रेस पर पहुँचती है. जिस जगह पर कॉलर ने बुलाया था वो एक खूबसूरत और शानदार सा रिसोर्ट निकलता है और जैसे hi वो उस रिसोर्ट क्र अंदर घुसती है तो उसके स्वागत के लिए कुछ लोग आलरेडी मैं गेट पर खड़े हुए होते है...

महिमा इस तरह का स्वागत और स्पेशल ट्रीटमेंट देख चौक जाती है क्युकी उसकी बात कॉलर से ये हुई थी की ये एक साधारण सी मीटिंग रहेगी.. और इसी विचार से अब मैं गेट पर महिमा एक असंजस की स्तिथि में कड़ी होती है..

अब क्या महिमा रिसोर्ट के अंदर जाएगी, या वही से वापस चली आत्येगी... उसके दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा है... उस कॉलर ने साधारण सी मीटिंग को वाकई साधारण रखा या नहीं... ये सब अब अगले अपडेट में.. तब तक के लिए... धन्यवाद् मित्रो... 🤗
 
अपडेट - 62


घर से निकल कर महिमा सीधा उस कॉलर के बताये हुए अड्रेस पर पहुँचती है. जिस जगह पर कॉलर ने बुलाया था वो एक खूबसूरत और शानदार सा रिसोर्ट निकलता है और जैसे hi वो उस रिसोर्ट क्र अंदर घुसती है तो उसके स्वागत के लिए कुछ लोग आलरेडी मैं गेट पर खड़े हुए होते है...

महिमा इस तरह का स्वागत और स्पेशल ट्रीटमेंट देख चौक जाती है क्युकी उसकी बात कॉलर से ये हुई थी की ये एक साधारण सी मीटिंग रहेगी.. और इसी विचार से अब मैं गेट पर महिमा एक असमंजस की स्तिथि में कड़ी होती है..

वो अब इस उलझन में होती है की क्या उसका यहाँ आने का डिसिशन सही है या उसने कही गलती कर दी, पर फिर उसके दिमाग में कॉलर की वही बात घूमने लगती है, "की ये एक साधारण सी मीटिंग रहेगी "..

पर फिर अगर कोई साधारण मीतोंग करने थो तप ऐसे आलीशान रिसोर्ट में क्यों, कही सिंपल सी जगह पर क्यों नहीं..

न जाने ऐसे कितने सवालो से घिरी महिमा अपनी hi सोच में डूबी हुई थी की तभी उस रिसोर्ट के स्टाफ में से एक लड़की की आवाज उसके कान में पड़ती है..

लड़की :- वेलकम ma'am, आपका ईद रेसट में भोत भोत स्वागत है एंड वे अरे प्लैसेड तो सर्वे यू ma'am.. प्लीज अंदर आईये ma'am

महिमा, जो अब तक सोच में डूबी थी, उस लड़की की आवाज सुन वापस हकीकत में आती है और फिर अपने दिमाग में ये फाइनल करके की, " अब जब आयी हु तो पीछे हटने का कोई फायदा नहीं है, अब तो पता करके hi जाना है की आखिर ये कॉलर है कौन ", वो रिसोर्ट के अंदर चली आती है...

अंदर आकर महिमा उस लड़की से :- स्वागत के लिए शुक्रिया, में दरअसल यहाँ....

इससे पहले की महिमा अपनी बात पूरी कर पति :- ी क्नोव मां आप यहाँ किसी से मिलने आयी है, लेकिन आप कुछ कहे इससे पहले मैं आपको बता दू की आपको कुछ भी कहने या बताने की जरुरत नहीं है, हमे अचे से पता है की आप यहाँ किस्से मिलने आयी है और इसी वजह से आप आज हेनरी स्पेशल और खास मेहमान है..

महिमा, मन में hi, ओह मतलब उस कॉलर ने hi ये सारा इंतेज़ाम करवाया है लेकिन क्यों आखिर और वो कहा है :- अच्छा...

लड़की :- जी ma'am, अब आप प्लीज मेरे साथ चलिए ताकि में आपको आपकी मंजिल तक पंहुचा सकू...

और ये बोल वो लड़की महिमा को अपने साथ ले जाती है और महिमा को लगा था की शायद वो उसे कैफेटेरिया या कैंटीन एरिया की तरफ ले जाएगी यहाँ वो उस कॉलर से मीटिंग एक्सपेक्ट कर रही थी पर अपने बढ़ते कदम से जब वो रिसोर्ट के अंदर चलते जा रही थी तो वो देखती है की रिसोर्ट का एकमात्र कैफ़े तो पीछे छूट रहा है, ये देख वो फिर सोच में पद जाती है की उसे कहा ले जाया जा रहा हाउ..

महिमा, :- हम कहा जा रहे है और तुम मुझे कहा ले जा रही हो...

लड़की :- बस ma'am पहुंच hi गए अब हम..

और ये बोल वो लड़की महिमा को एक खूबसूरत से गार्डन एरिया में ले जाती है जो पूरा फूलो से सजा हुआ था और जिसमे भोत hi अचे ढंग से लाइटिंग की गयी थी... यहाँ का नज़ारा वाकई खूबसूरत था जो महिमा को भी पसंद आ रहा था लेकिन उसके दिमाग में अब भी वही सवाल की आखिर ये सब क्यों...

इससे पहले की महिमा उस लड़की से इस बारे में कुछ पूछ पाती वो लड़की वह से ऐसे गायब हुई जैसे को जादूगरनी हो और महिमा वह पर अकेली कड़ी रह जाती है..

जैसे hi महिमा मुद कर वह से जाने को होती है की उसके कान में आवाज गिरती है, " इतनी जल्दी कहा जा रही हो महिमा जी, अभी तो मुलाकात शुरू भी नहीं हुई है हमारी! "

और ये आवाज सुन महिमा के कदम वही रुक जाते है क्युकी ये आवाज उसी कॉलर की थी और वो वापस पीछे मुद कर कड़ी रह जाती है क्युकी उसके सामने अब इस वक्त एक जवान मर्द खड़ा था, लेकिन जिस उत्सुकता से वो उसे देखना चाहती थी की आखिर वो है कौन, उस कॉलर ने भी अपना खेल अचे से रचा था और इसी वजह से उसने अभी अपने चेहरे पर एक मास्क लगा रखा था जिसमे से सिर्फ उसकी आँखे दिखाई दे रही थी...

कॉलर, महिमा को सामने देख, पास आते हुए :- हईये वाकई जैसा देखा, सुना वैसे हु आपको पाया महिमा जी... क्या रंग रूप है आपका मज़ेदाररर, इतनी खूबसूरत हसीं जवान औरत को आज इतना पास देख मुझे समझ नहीं आ रहा कैसे रियेक्ट करू...

महिमा, नार्मल बेहवे कर थोड़ा कठोर आवाज में :- ये सब क्या नाटक है , हमारी एक नार्मल मीटिंग की बात हुई थी न ... और रिसोर्ट किसलिए कही और मिल सकते थे न ...

कॉलर :- ऐसे कैसे कही और मिल सकते थे महिमा जी, और ये सब नाटक नहीं है कोई, आप जैसी हसीं खूबसूरत औरत अजा पहली बार मुझसे मिल राहु है, जो आपपका एक पागल दीवाना बन कर रहा गया है, भला फिर आपसे मिलान के इस मौके को साधारण कैसे बनाये रखता मैं..

महिमा :- कोई खास मीटिंग नहीं है समझे तुम और ये क्या ये मास्क पहन चेहरा क्यों ढाका हुआ है तुमने अपना, में यहाँ इसलिए आयी ताकि ये जान सकू की कौन हो तुम आखिर...

कॉलर, महिमा के करीब जाते हुए :- अरे महिमा जी मुझे पता है आप यहाँ किसलिए आयी है लेकिन इतनी भी क्या जल्दी है आपको, अभी तो हमारी मीटिंग शुरू हुई है, सब्र रखो सब दिखाऊंगा आपको अचे से...

महिमा, कॉलर की दोहरे मतलब की बात समझते हुए :- क्या मतलब है तुम्हारा, सब दिखाऊंगा का क्या मतलब है...

कॉलर, अपना हाथ आगे कर :- ः अरे मेरा मतलब चेहरा दिखने से है, ज्यादा मत सोचिये आप, खैर अब यही खड़े खड़े बाटें क्र लोगी क्या साडी, आइये बैठिये आपके लिए इतना खास बनाया है इस शाम को तो जरा लुत्फ़ उठाईये...

महिमा, अब खुद को समझा कर की ज्यादा बेहेस कर मतलब नहीं, कुछ देर और रुक जाती हु जब इतना रुकी और ये बोल कॉलर दवाई आगे बढ़ाये हाथ को पकड़ आगे बढ़ जाती है...

महिमा के ऐसे उसका हाथ पकड़ने और आगे बद्गते hi तुरंत कॉलर एक झटके से महिमा को अपनी तरफ खींच लेता है और :- हईये वाकई महिमा जी आपका जवाब नहीं, आपकी सुंदरता का तो में पहले से दीवाना था और आपके जिस्म की ये खुशबु, हईये इतनी खुशनुमा और मन मोहन खुशबु है आपकी, बस चले तो कभी आपको अपने से दूर न करू मैं...

महिमा, पीछे हैट ते हुए, :- बकवास बंद करो अपनी समझे और दूर हटो मुझसे..

कॉलर, जल्दबाजी करना ठीक नहीं होगा ये सोच पीछे हैट कर, उप्पेर से निचे तक एक बार फिर इतने पास से महिमा को निहारते हुए, वही टेबल पर पड़े कुछ गिलास की तरफ इशारा करते हुए :- उम्म्म सच कह रहा हु महिमा जी, आप सी खूबसूरत हसीं औरत मेने जिंदगी में कभी नहीं देखि, अलग hi नशा है आपके जिस्म का आपकी इन नशीली आँखों का और इस गदराये हुए हसीं कामुक जिस्म का... वैसे इतनी नशीली हो आप फिर भी बोलिये क्या लेंगी आप इन सब में से, बियर, वाइन, व्हस्की या और कुछ...

महिमा, जो अब न चाहते हुए भी कही मन के किसी के कोने में उस कॉलर की बातो से परबहावित होते हुए :- में ये सब नहीं पीती हु समझे, और पीती होती तो भी यहाँ तुम्हारे साथ पि लेती ये तुमने सोच भी कैसे लिया...

कॉलर :- उफ्फ्फ यही अदा तो आपकी कायल करती है मुझे आप जैसी औरत की, आपका ये ऐटिटूड, ये गुरुर और आँखों का ये तेज, उफ्फ्फ आपके इस कामुक शरीर पर बिलकुल सूट करता है और यही सब के तो दीवाने है हम.... चलो ये सब नहीं तो कोल्ड ड्रिंक तो चलेगी न, उसका भी इंतेज़ाम किया हाउ...

महिमा :- देखो में यहाँ खाने पिने नहीं आयी हु समझे, और तुमने अब तक ये मास्क नहीं हटाया, और तुम्हारा नाम क्या है ये भी बताओ मुझे...

कॉलर, महिमा के चारो तरफ घूमते हुए, उसके कैसे बदन को घूरते हुए, पीछे उसके कैसे चूतड़ों पर नज़र गड़ाए :- अरे महिमा जी मैंने कहा न सब बताऊंगा बस सब्र तो रखिये...

कॉलर, और पीछे से महिमा के एक डैम करीब आकर सात जाता है :- वैसे सच hi कहा था मैंने, आपका पति है बड़ा बेवकूफ, इतनी हसीं औरत को कैसे प्यार करना है उन्हें वाकई नहीं पता है, भोत सही बात कही गयी है ये, " की जिसके पास जो चीज होती है या जिसे वो चीज आसानी से मिल जाये तो उस चीज की कदर नहीं की जाती है "...

महिमा, अपने शरीर के इतने करीब एक अनजान शख्स को पाकर घबराहट के साथ साथ एक अजीब सा अनुभव महसूस कर रही थी जो वो खुद भी नहीं समझ प् रही थी, जिस कारन तुरंत उस कॉलर की तरफ मुड़ते हुए :- फिर बकवास शुरू कर दी तूने अपनी, और किसने कहा की मेरी कदर नहीं की जा रही.. और तुम्हे इस बात की चिंता क्यों है की मेरी ज़िन्दगी में क्या हो रहा है और क्या नहीं...

कॉलर :- अरे महिमा जी मुझे चिंता इसलिए है क्युकी मुझे हम जैसे मर्दो के लिए बुरा लग रहा है, चूँकि आप जैसी मदमस्त औरते ऐसे मर्दो के साथ बांध दी गयी है जो आपके शरीर, खूबसूरती और कामुकता से बिलकुल भी इंसाफ नहीं कर रहे है और हम यहाँ इंसाफ करना चाहते है तो हमारे नसीब में ये सुख नहीं होता है..

महिमा :- तुम्हे ऐसा क्यों लग गया की मेरे साथ इंसाफ नहीं होता है.. मुझे मेरे पति भोत प्यार करते है और भोत खुश रखते है समझे..

कॉलर :- हैं भोत अचे से पता है मुझे की आपको आपके पति कितना खुश रखते है, आपने खुद फ़ोन पर आपके मुँह से साडी हकीकत बयान की थी की आपके मन में कितनी और कैसी कैसी छाये होती है और आपका पति कितनी इच्छाएं पूरी कर पता है..

महिमा, ये यद् कर की छूट की खुजली और जिस्म में चुदाई की भूख की वजह से कॉल पर उसने इसी शख्स के सामने भोत सी बाते स्वीकारी थी और अब उन्ही बातो को वो झुटला नहीं सकती :- ऐसा कुछ नहीं है वो तो मेने बस ऐसे hi कह दिया था समझे और वैसे तुमने कहा था की हमारे बिच यहाँ ऐसी कोई बात नहीं होगी तो फिर ये सब बाते क्यों?

कॉलर, बियर की बोतल खोल दो गिलास भरते हुए, एक महिमा की तरफ बढ़ाते हुए:- अरे महिमा जी बाते hi तो कर रहे है, वही बाटे जो हमने फ़ोन पर की वो अब यहाँ कर रहे, और कुछ थोड़े न कर रहा हु में... और ये लिए एक पेग तो चल जायेगा, में भी आपका अपना hi हु और अचे से पता हाउ की कभी कभी आप भी नशा करने में विश्वास रखती है..

महिमा, इसे ये बात कैसे पता, मेरे कभी कभी बियर पिने की बात तो मेरे घर में भी सबको नहीं पता है, सवालिया नज़रो से :- तुम्हे कैसे पता....

कॉलर, महिमा पूरी बात कर पति इससे पहले hi :- हाहा महिमा जी अब तो आपको समझ जाना चाहिए की आपकी कोई बात मुझसे छिपी नहीं है, और लो लीजिये एक घूंट तो मार लो चलेगा...

महिमा :- नहीं मुझे नहीं पिणि समझे तुम और चलो अब ये बताओ की कौन हो तुम मुझे अभी क्र अभी ये जानना है, तुमने मिलने को कहा में मिलने आ गयी अब क्यों इतने नाटक कर रहे हो..

कॉलर :- बताता हु महिमा जी बताता हु पर इससे पहले मुझे आपसे कुछ बाटे जननी है..

महिमा :- मई अब और कुछ नहीं बताने वाली समझे..

कॉलर, बियर का एक घूंट मार महिमा के करीब आते हुए :- अब ऐसे न करिये महिमा जी, अपने दीवाने की इतनी बात तो रख लीजिये... देखो ये वीरका नशा भी फीका हो गया है आपके सामने होने से,

और महिमा का हाथ अपने हाथ में पकड़, " उफ्फ्फ है महिमा जी क्या मुलायम एहसास है आपकप चुने का... सच मैंने इतनी मुलायम एहसास को कभी नहीं महसूस किया... उम्म्म मन तो करता है की अभी आपको कास कर अपनी बहो में जकड लू और जी भर प्यार कर लू..

महिमा, अनजान शख्स की बहो में जाने की बात उसके शरीर में करंट फैला देती है और हाथ छुड़वाते हुए :- क्या कहा तुमने... जबान संभल कर बात करो तुम

कॉलर :- अरे महिमा जी चिंता न करिये में ऐसा कुछ नहीं करूँगा... में बस सच बता रहा हु की अगर आप मेरे नसीब में होती तो....

महिमा, उत्सुकता वश :- तो क्या...

कॉलर, एक घूंट और मारते हुए महिमा के कानो के करीब चेहरा ला कर :- तो आपको कभी अपने आप से अलग नहीं करता, और जिस तरह आपका पति आपको अकेला चोर कर घूमता है में एक पल अलग नहीं करता और आपके इस जिस्म के साथ पूर्ण इंसाफ करता..

महिमा, कॉलर की आवाज को इतने पास से कण में महसूस कर, तेज साँसों के साथ :- इंसाफ कैसा इंसाफ, क्या बोल रहे हो तुम

कॉलर:- जी हाँ महिमा जी, जो आपके इस जिस्म के हक़मे है वो हर चीज इसे मिलती, और जैसे इनदिनों आप तड़पती है अकेले अपने इस जिस्म की आग मई, अगर आप मेरे साथ होती हो एक दिन भी ऐसा नहीं होता जब आपको इस तड़प का एहसास करना होता, आपके इस जिस्म की गर्मी और कामुकता को भोत hi अचे से शांत करता में...

महिमा, अब आवाज थोड़ी लचीली कर :- क्यों ऐसा क्या करते तुम मेरे साथ..

कॉलर, ये समझ कर की उसे हरा सिग्नल मिल रहा है, महिमा को दोनों हाथ पकड़ पीछे धकेलते हुए दिवार के सहारे सत्ता कर :- में वही करता जो एक जवान मर्द को इतने गदराये जिस्म की मालकिन के साथ करना चाहिए, उसकी इतनी उफनती जवानी को लूटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रखता में..

ये जो मोती मोती चूचिया इस कदर छिपाते हुए फिखाने का जो शौक रखती हो न, उन मोती दुधारू चुहईआ को दिन रात अपने हाथो में भर निचोड़ता रहता और इनका दूध पिता रहता... और आपके ये मोठे भरी चूतड़, हैए जिन्हे ले कर पीरा दिन घर में दौड़ती रहती हो न तुम, मन करता है की बार बार रोज रोज आपकी गांड मर मर कर अपने लुंड का पानी उसने भरता राहु...

और....

महिमा, कुछ देर सोचते हुए :- और क्या, और क्या करते...

कॉलर, जो अब महिमा के इतने पास होते हुए, इतने दिनों की तड़प से मचलते हुए काबू खोते हुए :- औरऔर आपकी उस रसीली छूट को चूस चूस कर सारा काम रास खली करता, उस काम रास का इतना प्यासा है आपका ये दीवाना की पूछो मत... मन तो कर रहा है की....

महिमा, अपना हाथ उसके चेहरे से ले कर माथे पर फिरते हुए, कामुक आवाज में :- क्या मन कर रहा है तुम्हारा..

कॉलर :- ओह महिमा जी मन तो कर रकः hi की अभी आपको दबोच लू और यही आपके इस ब्लाउज को पहाड़ कर आपकी चूचिया निचोड़ दू और फिर...

महिमा, तेज साँसों के साथ :- और फिर क्या...

कॉलर :- और फिर महिमा जी, आपकी सर्जरी उठा कर आपकी टैंगो के बिच घुस जाऊ और आपकी उस रसीली छूट का सारा रास चूस चूस कर पि जाऊ उम्मम्मम्मम...

महिमा, और क्या मन है तुम्हारा बताओ मुझे सुन्ना है उफ्फ्फ भोत ाचा लग रहा है सुनने में...

कॉलर, खुश होते हुए :- मैंने न कहा था आपको की बस एक बार मुलाकात करो आप भी समझ जाओगी की आप क्या मिस कर रही हो....

कॉलर, अब अपना हाथ महिमा के पेट पर रख उप्पेर चुचिओ की तरफ बढ़ाते हुए :- ओह महिमा जी, आप सच में जानना चाहती है की मेरा क्या मन कर रहा है अभी...

महिमा, अनजान मर्द के हाथो के स्पर्श से सहमति हुए :- हैं बताओ मुझे...

कॉलर, खुश होते हुए की उसका प्लान कामयाब हो रहा मिलने का, अपने हाथ को महिमा की साड़ी के पल्लू के अंदर कर दोनों हाथो को चुचिओ पर रख उन्हें सहलाते हुए :- मन कर रहा है को अभी आपका ये ब्लाउज फाड् कर इन दोनों दुधारू चुक्चिओ को निचोड़ निचोड़ कर पि jau....aur...

महिमा, अनजान मर्द के हाथो को अपनी चुचिओ पर महसूस कर सिहर उठती है और एक झटके से साइड में सरक उसके हाथ झटकते हुए :- ये क्या कर रहे हो तुम... बेशरम कही के...

कॉलर, अचानक से महिमा के ऐसे हटने से सकपका गया, लेकिन दोबारा महिमा के करीब आ कर उसकी दोनों चुचुईओं को इस बार ज़ोर से भींचते हुए :- उफ्फ्फ्फ़ महिमा बेशरम hi सही, अब नहीं रहा जा रहा है मुझसे, कब तक तड़पायेगी तू मुझे ऐसे, आज तो में तुझे प् कर hi रहूँगा... न जाने कब से तुझे अपने निचे सुलाने के सपने देख रहा हु,...

महिमा, अब तक महिमा जी बोलने वाले मुँह से ऐसे सीधा महिमा सुन और इस तरह का ज़ोर महसूस कर, विरोध करते हुए :- ये क्या कर रहे हो तुम कमीने चोरो मुझे, ये सब करने नहीं आयी में समझी...

कॉलर, जो अब अपना काबू लगभग खो hi चूका था :- नहीं आयी थी तो अब मन बने ले न महिमा, मुझे अचे से पता है तू भी एक लुंड की प्यासी औरत है और तेरे जिस्म में भी चुदाई की इतनी hi गर्मी है... आजाना आज हम दोनों एक दूसरे की तड़प मिटा देते है उफ्फफ्फ्फ़..

महिमा, जो अब तक कॉलर को इसलिए उकसा रही थी ताकि उसके असली इरादे जान सके और ये जान सके की कौन है ये उसका घर का सदस्य जो उसके बारे में ये सब सोच रखता है, लेकिन यहाँ कॉलर के इस तरह हावी होने से घबराते हुए उसके चेहरे की तरफ हाथ बढ़ाते हुए :- कमीने हरामी कौन है तू चेहरा दिखा मुझे....

कॉलर, महिमा का अपने चेहरे पर पहुंचते पहुंचते रोकते हुए उसे पकड़ कर पीछे की तरफ मुद देता है जिससे की उसका खड़ा लुंड अब महिमा की चूतड़ के बिचगिसे करने लगता है और दूसरे हाथ से वो महिमा का पल्लू हटा एक चुकी को ब्लाउज के उप्पेर से जोरसे भींच लेता है...

कॉलर, अपना काम जारी रखते हुए :- इतनी क्या जल्दी है चेहरा देखने की... आज तो तुझे मेरा लुंड देखना है की कैसे तेरी छूट और गांड में घुसता है और ूंकप फाड़ कर रखता है... उफ्फ्फफ्फ्फ़ सच कितनी बार लुंड हिलाया है तेरी छूट और गांड छोड़ने के सपने देख कर स...

महिमा, छूटने की कोशिश करते हुए :- चोर हरामी क्या कर रहा है ये तू, भोत बुरा होगा तेरे साथ अगर तू नहीं रुका तो...

कॉलर, इस बात से आप खोते हुए, चूतड़ के बिच लुंड का जोर का धक्का मरते हुए :- चुप कर साली रंडी, भोत अचे से पता है की कितनी प्यासी है तू लुंड के लिए.. भेनचोद इतने नाटक क्यों कर यही है अब, तेरे पति में तो दम है नहीं और जब में तेरी जवानी को मजा देना छह रहा तो नाटक कर रही हरामज़ादी... तुझ जैसी औरत को तो रंडी बना कर दिन रात लुंड छूट मुँह और गांड में बरी बरी पेलना चाहिए सड़कछाप कुटिया साली....

महिमा, जिसने आज तक अपने खिलाफ ऐसी कोई गालिया सुन्ना सोचा भी न था जब उसके कान में पड़ती है तो उसे भोत गुस्सा आजाता है और अपने खिलाफ ऐसी घटिया बाते सुन, वो इस बार आपके हद से ज्यादा ज़ोर करती है जिससे वो शख्स पीछे हाथ जाता है और पलट कर वो बिना रुके एक जोर का थप्पड़ उसके चेहरे पर जदडदड देती है... Tadakkkkkkkkkkkkkkkkkkkk

जैसे hi उस शख्स के चेहरे पर थप्पड़ पड़ता है तो उसके चेहरा का मास्क एक hi झटके में टूट कर ज़मीं पर गिर पड़ता है और...

और महिमा के हाथो पड़े उस करारे थप्पड़ से सँभालने का समय मिलता उससे पहले अपने चेहरे से निचे गिरते हुए उस मास्क को सँभालते हुए वो कॉलर हड़बड़ा जाता है जैसे की वो अभी इस वक्त अपनी पहचान इस तरह से महिमा के सामने रखने की सोचा भी न हो..

अपनी पहचान छुपाने की इस नाकाम कोशिश में वो शख्स जमीं पर गिरे उस मास्क को उठाने के लिए निचे झुकता है और तभी उसका चेहरा अब महिमा की नज़रो के सामने से गुजरता है.. जिस बात से वो कॉलर अब तक अनजान था चूँकि वो किसी भी तरह जल्द से जल्द उस मास्क को वापस चेहरे पर लगाना चाहता था, ये सोच कर की इससे पहले की महिमा उसे देख ले वो अपना चेहरा छिपा ले.

लेकिन हकीकत से अनजान जहा उस शख्स को लग रहा था की शायद वो अपनी पहचान छिपाने में कामयाब हो जायेगा वही दूसरी तरफ जब महिमा की आँखों के सामने वो चेहरा गुज़रता है तो उसके पैरो के टेल ज़मीं खिसक जाती है...

और चौकाने वाली, गुस्से भरी, उलझनों से घिरी, अपनी भावनाओ को कैसे व्यक्त करना और उस चेहरे को देख क्या प्रतिक्रिया देना इस असंजस में, साड़ी का पल्लू ज़मीं पर गिरे हुए अपनी मोती चूचियों क कैसे उभार को उस ज़ीने महीन से ब्लाउज में काम और बहार निकलते हुए ज़्यादा चोर कर एक भोत hi गहरी और कड़क आवाज से बोल पति है....

RAHULLLLLLLLLL TUMMMMMMMMMMM!!!!!!

 
सबसे पहले तो भोत भोत शुक्रिया कहानी पसंद करने के लिए भाई लोगो.. साथ hi ये कहना चाहूंगा की, दोस्त कहानी अनेक पत्रों से मिल कर बानी है तो किन्ही एक या दो पत्रों से hi कहानी को आगे नहीं बढ़ा सकते है, हर किरदार, हर सन और हर समबन्ध के बारे में मैंने अचे से सोच रखा है और कहानी उसी हिसाब से आगे बद्री रहेगी, में आपकी चाहत और रुझान को समझ रहा हु और एक लेखक होने के नाते उसका पूरा सम्मान करता हु पर आपसे यही इल्तेजा करूँगा की कहानी में सही समय पर जो सही होगा वो हो जायेगा बस धीरज बनाये रखे और साथ चलत्व रहे.. धन्यवाद्
 
अपडेट - 63




हड़बड़ात और घबराहट में अपनी पहचान छिपाने की जल्दबाजी में निचे गिरते हुए मास्क को सँभालते हुए राहुल के कान में जब महिमा के मुँह से खुद का नाम सुनाई देता है तो कुछ देर के लिए मनो उसकी साँसे थम जाती है और फिर उसे ये एहसास हो जाता है की अब और इस चीज को छिपाने की कोशिश करने का कोई फायदा नहीं है और जिस स्तिथि में राहुल अभी निचे झुका हुआ था वैसे hi रुक जाता है और महिमा की तरफ देखने की हिम्मत ना होने के बावजूद एक बार उसकी तरफ देखता है, जिससे सामने कड़ी महिमा को अब और यकीं हो जाता है की इस वक्त इस कमरे में उसके साथ जबरदस्ती करने वाला और उसके जिस्म का भूखा और कोई नहीं बल्कि उसका अपना बड़ा बीटा राहुल hi है...

उस एक पल की नज़र में राहुल को महिमा की आँखों की हैरानी और गुस्से के मिश्रण भरे रूप से अपनी मम्मी के मूड का अंदाज़ा तो हो hi जाता है पर फिर भी अब सच सामने आने के बाद उसके हाथ में कुछ करने को नहीं था और वो अब भी हाथ आया मौका गवाना नहीं चाहता था इसलिए दोबारा वापस सीधा खड़ा हो जाता है और, दोनों के बिच उस गेहेन चुप्पी को तोड़ते हुए:- " हाँ मम्मी मैं!" और ये बोल वो महिमा के करीब आता है..

अब भी महिमा एक दम चुप्पी साढ़े आश्चर्य और हैरानी भरी नज़रो से बिना पलके झपकाए उसे एक मूरत की तरह कड़ी बस देखे जा रही थी और राहुल जो अब चाहे जो हो देखा जाये इस सोच के साथ हाथ आये मौके को गवाना नहीं चाहता था और इसलिए महिमा के दोनों हाथो को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर मजबूती बढ़ाते हुए :-

मम्मी ऐसे क्या देख रही हो, हाँ में hi हु आपका अपना बीटा जो आपका इस कदर दीवाना है की आपको पाने के किये कुछ भी कर जायेगा और आज वैसा hi किया, मुझे बस आपकी भूख है, आपके जिस्म की भूख है, दिन भर आपको अपने इर्द गिर्द घूमते डेझ और आपकी मौजूदगी मेरे खुद पर काबू होने की परीक्षा लेती है और में रोज इसमें हार जाता हु, और अब आपको पाने की चाहत इस हद तक बढ़ गयी है की मुझे और कुछ भी नहीं दीखता है...

राहुल, बात जारी रखते हुए :- सच मम्मी और जब से आपने ये बताया है की आपको भी पापा से प्यार नहीं मिलता है तब से मेरी ये आपके लिए चाहत आपको पाने का मकसद बन चुकी है, में आपके इस कामुक खूसूरत बदन का भोत अचे से रसपान करना चाहता हु और आपके जिस्म की भूख को, आपकी इस चुदाई की प्यास को, आपके कामुक बदन की गर्मी को शांत करना चाहता हु...

अब इससे आगे राहुल कोई और शब्द बोलता इससे पहले उसके गाल पर एक तेज तर्राट थप्पड़ और महिमा जड़ देती है और बात इस एक थप्पड़ पर नहीं रूकती, एक के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा और न जाने कितने hi थप्पड़ एक hi बार में बिना रुके महिमा राहुल के गाल पर रसीद देती है...

पुरे कमरे में इस वक्त बस राहुल के गाल पर पद रहे महिमा के हाथो थप्पड़ की आवाज गूंज रही थी और अपने हाथ रोकते हुए महिमा भरे गुर्रे से :- नालायक तुझे जरा भी शर्म आ रही है अपनी मम्मी के सामने ये सब बोलने और ये सब करने में.... मुझे यकीं नहीं हो रहा की तू मेरी परवरिश है... चींईईई इतनी घटिया सोच है मेरे बेटे की...

राहुल, एक साथ इतने थप्पड़ खाने के बाद मनो जैसे पूरी तरह से होश में आया हो, लेकिन अब भी अपनी हवस के आगे हारते हुए :- नहीं आ रही मुझे शर्म मम्मी, और क्यों आये मुझे शर्म... इस वक्त मेरे लिए आप सिर्फ एक लुंड की प्यासी औरत हो जो अपने जिस्म की भूख दबा कर बैठी है और मैं एक मर्द जो महिमा के इस कामुक हसीं गदराये जिस्म को पाने के अलावा कुछ और नहीं सोच सकता, जो आपको अपने निचे लिटाने के सपने न जाने कितने दिनों से देख रहा है, न जाने कितने hi महीनो से मेरा ये लुंड आपकी उस रसीली छूट में जाने के लिए झटके मार रहा हाउ मम्मी...

महिमा, पूरी तरह शॉक होते हुए की उसका अपना बीटा इतनी बेशर्मी से उसे छोड़ने की बात कर रहा है और उसकी हवस इतनी हावी है की उसे और कुछ दिख नहीं रहा है, एक तेज आवाज में :- बस्सस राहुल, बस्स्स कररररररररर नालायक! तुझे ज़रा भी अंदाज़ा है की तू क्या बोल रहा है... और एक मर्द और औरत होने से पहले तू ये कैसे भूल गया की तू अपनी सगी मा के बारे में ऐसा सोच और बोल रहा है... इतनी हवस अपनी hi मा के लिए... चींईईई मुझे तो अब भी यकीं नहीं हो रहा की मेरा अपना बीटा मेरे लिए ऐसी सोच रखता है...

राहुल :- क्यों क्या गलत है मम्मी मेरे ऐसे सोचने में? क्या बुराई है अगर में अपनी hi मम्मी के बारे ये सब सोच रखता हु और उन्हें पाने के लिए तड़प रहा hu...aur जब फ़ोन पर बात हुई तब आपने भी तो मुझसे साडी बाटे शेयर की थी न, कही न कही मुझसे बात करते हुए आपको भी ाचा लग रहा था न, फिर जब अब सच्चाई सामने आ गयी तो इतना बदलाव क्यों मम्मी....

महिमा :- हैं मन की मेने फ़ोन पर भोत सी ऐसी बाटे की लेकिन उसके पीछे सिर्फ यही एक मकसद था की मुझे ये जानना था की आखिर तुम हो कौन, कौन है जो अपने hi घर की औरतो के बारे में ऐसी सोच रखता है...

राहुल, महिमा को मजबूती से पीछे डिवए की और धकेल दोनों हाथो पर बढ़ाव बनाते हुए :- पर इस सच्चाई का क्या की आप भी एक प्यासी औरत हो जो छोड़ने के लिए मचल रही है, जिसे लुंड ली भूख है लेकिन उस भूख को दबा कर रखा है, क्या आप नहीं चाहती की कोई आपके इस जिस्म को रगड़ रगड़ के पेले, एक कड़क ताकतवर लुंड आपकी दुमदारर धक्को से आपकी छूट की कुटाई करे और आपको कुटिया बना कर पीछे से आपकी गांड मरे बोलो मम्मी बोलो....

और इतना बोल राहुल अपना मुँह महिमा की चूचियों में घुसा कर ज़ोर से दबा देता है, जो इस वक्त आधी ब्लाउज के बहार थी और आधी ब्लाउज के अंदर....! और मुँह दबाते हुए, " उम्म्म मुन्नी बोलो क्या आप नहीं चाहती की कोई आपकी इन मोती दुधारू चुचिओ को कास कर निचोड़ निचोड़ कर रख दे और नंगी करके जैम कर चूसे उम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ कितने दिनों से देख रहा इनको आज मुझे इनको पिने का मौका दे दो मम्मी "..

महिमा जो अब अपने बेटे की बातो और हरकतों से एक दम स्तब्ध थी, एक पुतले के जैसे बेटे द्वारा उसके जिस्म से खिलवाड़ होते महसूस कर रही थी और उसकी आँखों में गुस्सा भरा होने से पूरी लाल हो चुकी थी और साथ hi मन में एक hi चीज की उसका बीटा आज उसके लिए इतनी हवस से भरा है, और इतनी बेशर्मी से उसे छोड़ने और गांड मरने की बाटव कर रहा है... कुछ देर यही सोच से स्तब्ध महिमा एक बार फिर से राहुल को जोर का धक्का दे पीछे हटा देती है और एक थप्पड़ और लगा देती है..

महिमा, इस बार पहले से तेज आवाज में :- बस्स्स कररर रहललललल, बस्स्स कररर!!! और कितना निचे गिरेगा तू, और कितना अफ़सोस करवाएगा मुझे इस बात का की तू मेरा बीटा है हुए तूने मेरी कोख से जन्म लिया है!!!!! और कितना घटियापन उगलेगा अपने इस जिबान से.... पागल हो चूका है तू पूरा! ये भी भूल चूका है की में तेरी माँ हु और तू एक शादी शुदा मर्द है जिसकी कामिनी जैसी समझदार बीवी है, उसके बारे में तो सोच कुछ!

महिमा :- क्या लगता है तुझे, तेरे ये सब करने से में तेरे साथ इस पाप में शामिल हो जाउंगी... अरे नालायक तुझे अब तक समझ नहीं आ रहा की हम किस पवित्र रिश्ते में बढे हुए है और तू क्या पाप कर रहा है... तू मेरे साथ वो सब करने की बात इतने बेशर्मी से बोल रहा है जो में सपने में सोच भी नहीं सकती...

राहुल, आगे बढ़ महिमा का हाथ पकड़ उसे बिच में टोकते हुए, इस बार थोड़ा ज्यादा ज़ोर दिखते हुए :- मम्मी बस अब मुझे न समझाओ इतना सब, मुझे नहीं लगता में कुछ गलत क्र रहा हु.... मान जाओ मेरी बात और कर लेने दो अपने इस बेटे को उसकी मम्मी से प्यार, सौप दो मुझे अपना ये जिस्म और छोड़ लेने दो आज आपको, में वडा करता हु की आपकी साडी तड़प साडी प्यास और सारा अकेलापन दूर कर दूंगा.

महिमा, बेटे के मुँह से इतने बेशर्मी से छोड़ने की डिमांड सुन कर हैरानी भरे स्वर में, और खुद को छुड़ाते हुए :- चुप!!! एक दम चुप हो जा नालायक... तुझे समझ भी आ रहा है की तू क्या बोल रहा है और क्या करने को कह रहा hai...dur हैट मुझसे, मुझे तेरी शकल भी नहीं देखनी है अब समझा....

राहुल, अब अपना जोर बढ़ाते हुए और हवस के आगे हार अपनी मम्मी के खिलाफ hi काबू खोते हुए दोनों चुचुईओं को कस के दबोच के भींच देता है और, :- चुप तू हो जा महिमा, भोत नाटक कर लिए, तुझे समझ नहीं आ रहा क्या की तेरा ये बीटा तेरे जिस्म के लिए कितना तड़प रहा है, क्यों नहीं समझ रही की मेरा ये लुंड तेरी चूर और गांड में घुसने के लिए मचल रहा है.. और अगर तू यव चाहती है की मेरे मन में ऐसी बाटे नहीं आये तो क्यों ये जिस्म ऐसा बना रखा है तूने, क्यों इतना गदराया जिस्म लिए ये एक सड़कछाप रंडी जैसी आधी चूचिया नंगी लिए और इन मोठे चूतड़ों को मटका मटका के मेरे आगे घूमती है घर में, तुझे तो साली कुटिया बना कर यही अभी इसी वक्त गांड मार कर मेरी रखेल बनाऊंगा में समझी...

महिमा को अब ये सुन भोत गहरा आघात लगता है की उसका अपना बीटा ये सब बोल रहा है और ये सुन उसके अंदर न जाने कहा से हिम्मत आ जाती है और पूरी ताकत से ज़ोर के झटके से राहुल को पीछे हटती है और धक्का इतना तेज होता है की राहुल पिक्सी हट्टे हुए लड़खड़ा जाता है और उसके सँभालने से पहले महिमा फिर से उसके चेहरे पर थप्पड़ रसीद देती है.

अपनी मम्मी के हाथो बुरी तरह से थप्पड़ खाने और उस करारे धक्के की वजह से राहुल पूरी तरह हिल गया और मम्मी की तरफ देख जब ये एहसास हुआ की महिमा ने कितना रौद्र रूप लेलिया है, उसे इस बात का एहसास होता है की जोश जोश में वो कितना बेकाबू हो चूका था और क्या कुछ बोल गया था, और यही सब सोच वो अब एक दम चुप खड़ा था की तब महिमा सामने से उसके पास आ कर...

महिमा :- तू मेरा बीटा नहीं हो सकता, छी, अपनी मा को रखेल बनाएगा तू... इससे ाचा तो मेने तुझे पैदा hi नहीं किया होता, ाचा होता अगर मेरी तेरे जैसी कोई औलाद hi नहीं होती! खैर अब भी क्या बिगड़ा है, अभी भी तूने इस रिश्ते की कहा कदर की है कहा लाज राखी है, पागल हप गया है तू, अँधा बना दिया है तेरी इस हवस ने, और अब यही हवस इस रिश्ते के ख़तम होने का कारन बनेगी... मेरा बीटा ऐसा नहीं हो सकता, तू मेरा बीटा नहीं है...

और कान खोल कर सुन ले तू, आज के बाद मेरा सिर्फ एक hi बीटा है और वो है सनी... अपनी मम्मी के लिए इतनी हवस और ठरक भरी राखी तूने आज उसी ने तुझसे तेरी मम्मी चिन्नन ली है समझा.... आज के बाद तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं होगा, मर गयी तेरी मम्मी तेरे लिए और मर गया मेरा बड़ा बीटा आज से मेरे लिए.... चींईईई घटिया आदमी....

और इससे पहले की राहुल इस बात पर कोई प्रतिक्रिया देता या कुछ करता, अपनी आँखों में आंसू लिए महिमा खुद को सँभालते हुए कपडे व्यवस्थित करके उस जगह से भगति हुई बहार निकल जाती है और सीधा अपनी गाड़ी में बैठ घर को निकल जाती है.

और यहाँ कमरे में अपनी हवस से हरा हुआ मम्मी के आगे बेकाबू हुआ राहुल महिमा के अंतिम शब्दों, " की अब हमारे दोनों के बिच कोई रिश्ता नहीं " को याद करके और ज़्यादा गुस्से में आजाता है, " साली रंडी को लुंड तो चाहिए पर नाटक कर रही है, मुझे नहीं फरक पड़ता की क्या रिश्ता है और क्या जाता है, वैसे भी अब सच्चाई सामने आ चुकी है तो अब चाहे कुछ बी हो जाये में मम्मी को पा कर hi रहूँगा, "मेरी माँ महिमा को मेरे लुंड की गुलाम बनाना, उसके मेरी रखेल बना कर कुटिया की तरह गांड मरना hi मेरा मकसद बन गया है ". और यही सोच के साथ राहुल भी वह से निकल जाता है.

अपने बड़े बेटे की हरकतों से महिमा घर पहुंचने पर भी भोत hi गुस्से में थी और खुद को कोस श्री थी की, "कैसा बीटा पैदा किया ये मेने जो मेरे hi जिस्म को पाने की छह में अँधा और पागल हो गया और रिश्तो की साडी मर्यादा भूल चूका है ".. और इसी तरह कुछ देर सोचने के बाद उसे ख्याल आता है की उसे डिनर भी बनाना है और उस काम में लग जाती है.

पुरे वक्त महिमा घर में मौजूद सदस्यों में किसी से कुछ बात नहीं करती है और साथ hi इस बात का भी ख्याल रखती है की किसी को उसके ख़राब मूड की कोई भनक नहीं लगे. और वही डाइनिंग टेबल पर बैठी प्रीति सामने बैठे उसके भाई सनी यानि मुझे तिरछी नज़रो से देखते हुए खाना खा रही थी और मन hi मन दिन में हुए उस वाकये को याद करके अपनी छूट में गीलापन महसूस कर रही थी, की कैसे मेने उसके जवान उफनते यौवन को अपने हाथो से मसला था और यहाँ उसके सामने बैठा हुआ मैं एक तक अपनी नज़रे प्रीति पर टिकाये हुए था..

और उसकी कासी जवानी और एक कैसे हुए टीशर्ट में कैद उसकी मुलायम गोल चूचियों के आकर को देख बस यही याद कर रहा था की, दोपहर में इन्ही चुचुईओं को मसलने का मौका मिला था, और वही देख लुंड में अकड़न महसूस करता हु और तभी प्रीति की नज़र मेरी नज़रो से मिलती है और वो मेरी नज़रो का पीछा करते हुए उसकी चुचुईओं तक पहुंच जाती है जिसे देख उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आजाती है और साथ hi मरे शर्म के अपनी नज़रे नीची झुका लेती है, पर कही न कही अपने भाई द्वारा अपने यौवन को निहारते देख प्रीति के टैंगो के बिच का गीलापन बढ़ रहा था.

डिनर टेबल पर अपनी बेहेन के जिस्म के नज़ारे का मजा उठाते हुए मेने खुद से यही कहा की, हईये सनी क्या मस्त जवानी है प्रीति की और दोपहर में जो कुछ हुआ और अभी सामने प्रीति की स्माइल से ये पक्का है की कही न कही उसके इस जिस्म ने अब अपना काबू चोर दिया है और प्रीति से ये कुंवारापन ज्यादा देर नहीं सहा जायेगा.. अगर इतनी हसीं जवानी को पाने के लिए मेने अब कुछ नहीं किया तो कही बाद में मुझे पछताना नहीं पद जाये..

इसी सोच क साथ मेने अपना डिनर ख़तम किया और मेरे साथ साथ बाकि सब भी वह से अपने कमरे में चले गए. अभी मैं बहार बैठ कर टीवी देख रहा था की किचन का काम ख़तम करके मम्मी मेरे पास आती है और..

मम्मी :- सनी कितनी देर बैठेगा यहाँ, सोना नहीं है क्या तुझे अब...

मैं :- बस मम्मी आ hi रहा हु सोने, मेने सोचा दोनों साथ में चलते है रूम में इसलिए यहाँ बैठा था.

मम्मी, जो राहुल के साथ हुए वाकिये के बाद वो आज की रात अकेले गुज़ारना चाहती थी :- सनी, क्या तुन आज के लिए तुम्हारे कमरे में hi सो सकते हो क्या...

मैं, वैसे तो मेरे लिए मम्मी का ऐसा बोलना अजीब था की अचानक से क्या हो गया जो मम्मी आज साथ सोने से मन कर रही है, लेकिन तभी मुझे ये ज़हन में आता है की, अगर मम्मी के साथ नहीं सोना है तो आज सही मौका है प्रीति की तरफ अपने कदम बढ़ने का, वैसे भी लोहा गरम है, ठंडा होने से पहले हथोड़े का वॉर कर लेना चाहिए :- उम्म्म ठीक है मम्मी जैसे आप कहे... चलो गुड नाईट मम्मी... और ये बोल में और मम्मी दोनों अपने अपने कमरे में चले गए.

आज के अपडेट में इतना hi.. आगे की कहानी अगले अपडेट में...

साथ hi दोस्तों आप सभी का साथ देख कर भोत ाचा लगता है और कहानी लिखने का मोटिवेशन मिलता रहता है, जिसके लिए आप सभी का धन्यवाद्.. और भोत से साइलेंट रीडर भी होंगे तो उनसे भी में ये चाहूंगा की अपने कमैंट्स के ज़रिये अपना साथ देते चले... शुक्रिया 🤗🤗🤗

 
फर्स्ट ऑफ़ आल थैंक्स फॉर थे कमेंट डिअर..

नाउ अबाउट ु बिकमिंग डिसअप्पोइंटेड, ी वद से तहत थे स्टोरी है नॉट ओवर येत, इतस इन प्रोग्रेस स्टेज, सो ात थिस पॉइंट ऑफ़ टाइम, ी कैन जस्ट आस्क फ्रॉम यू इस तो हैवे पेशेंस, बे विथ थे स्टोरी लिखे ु र टिल नाउ एंड रेस्ट ु विल गेट तो क्नोव व्हाट हप्पेंस ंद व्हाट नॉट... थैंक्स डिअर 🤗🤗🤗
 
अपडेट - 64

अपने रूम में पहुंचने के बाद अब मेरे ज़हन में इस वक्त बस प्रीति hi घूम रही थी, प्रीति का कैसा जिस्म, कैसा हुआ फिगर, वो गोल मुलायम सी चूचिया जिन्हे आज दिन में मुझे मसलकर दबाने का मौका मिला, उसके वो रसीले होठो का रास और भोत कुछ.. और इसी बिच एक ख्याल ये की प्रीति अभी एक दम कैसा हुआ जिस्म ले कर घूम ताहि, और जहा तक मुझर पता है उसका कभी कोई बर्फ नहीं, तो इसका मतलब मेरी बेहेन एक दम कुवारी कमसिन काली है और अगर मौका बन जाये तो मुझे उसका कुंवारा पैन नसीब हो सकता है, और कुंवारी छूट का ख्याल आते hi मेरा लुंड एक झटके से अपनी औकाद में आजाता है और झटके मरने लगता है..

जिसे महसूस कर में खुद से ये कहते हुए, की बीटा सनी अब यहाँ रुक कर समय बर्बाद करके कोई फायदा नहीं है अगर अपनी खूसूरत हसीं छोटी बेहेन की जवानी का मजा लेना है और उसके जिस्म का रसास्वादन करना है तो तुझे कुछ करना पड़ेगा और वो यहाँ कमरे में रुक कर नहीं होने वाला hai..aur यही सोच में कुछ देर रुक कर प्रीति के कमरे की तरफ चल पड़ता हु.

ऐसा तो था नहीं था की दोपहर में मेरे और प्रीति के बिच जो कुछ हुआ उसका असर सिर्फ मुझ पर hi था, वह अपने कमरे में बिस्तर पर लेती प्रीति पर भी इस बात का पूरा आदर था और दोपहर से पहले भी कही न कही प्रीति तो अपने भाई सनी की तरफ आकर्षित हो hi रही थी और उसने मन hi मन इस बात को स्वीकार भी कर लिया था और खुद के लिए सनी की छह बढ़ते हुए भी महसूस किया था.

और इसी सब सोच और वाकिये को याद कर प्रीति जिसने इस वक्त एक ढीला सा टॉप और लोअर पहन रखा था और उप्पेर कम्बल दाल रखा था, के ज़हन में भी फिलहाल वही सब घूम रहा था और अपने एक हाथ को कम्बल के अंदर से hi पाजामे के ांदसर और पंतय के उप्पेर से छूट की नमी और गर्माहट महसूस करते हुए,

" ओह्ह्ह्ह सनी कितनी मजबूती से मसले थे तूने मेरे बूब्स मेरे भाई उम्म्म उफ्फफ्फ्फ़, ज़िन्दगी में पहली बार किसी मर्द ने मुझे हाथ लगाया और वो भी मेरे अपने भाई ने hi, िष्ठ्हह कितना कठोर हाथ था उफ्फ्फ मेरी चूचिया पूरी भींच ली थी उम्मम्मम्मम, अह्ह्ह्हह ".

प्रीति अब एक हाथ को अपने टॉप के अंदर घुसा जिसके अंदर उसने इस वक्त ब्रा नहीं पहनी थी, अपने एक चुके की निप्पल को ऊँगली और अंगूठे के बिच ऐंठते हुए, जैसा उसने आज से पहले कभी नहीं किया था लेकिन भाई के हाथो की गर्मी ने आज उसकी उत्तेजना भोत बढ़ा दी थी, जिस वजह से निप्पल इस तरह मरोड़ने पर भी उसे उस मीठे से दर्द में आनंद मिल रहा था और साथ hi अब दूसरा हाथ जो उसकी पंतय के उप्पेर घूम रही थी उसे पंतय के अंदर घुसा कर छूट को मुट्ठी में भरते हुए,

" अह्ह्ह्ह सनी मुझे नहीं पता था तेरे इतने करीब आ कर और इस तरह मेरे जिस्म पर हाथ फिरवा कर मुझे इतना मजा आएगा उम्म्म ईशःठ, उम्म्म्म ये कैसा दर्द है और इस दर्द में मुझे इतना मजा क्यों आ रहा है उम्म्म, उफ्फ्फ क्यों मेरी चूचिया दोबारा तुम्हारा हाथ मांग रही है सनी ईशःठ मेरे इतना ज़ोर से इन्हे भिचने पर भी मुझे वो मजा नहीं आ रहा जितना तेते चुने मात्रा से आ रहा था, उम्मंन अह्ह्ह्ह फुकककक sunny,ummm ओह्ह्ह्हह्ह.."

और अब प्रीति पर उत्तेजना इतनी हावी हो चुकी थी की जिस कम्बल से उसने अपना तन ढाका हुआ था वो अब उसके जिस्म की गर्मी को और बढ़ा रहा था जो उससे अब सहा नहीं जा रहा था और वो उस कम्बल को अपने जिस्म से हटा फेकती है और अपनी एक चुकी को भींचते मसलते निप्पल मरोड़ते हुए उसकी उस गरम कासी कमसिन छूट को घिसने में इतनी मस्त हो जाती है की अपनी टैंगो के सहारे अब वो अपनी टैंगो के सहारे चूतड़ हवा में लहरा रही थी और छूट पर अपने हाथो की गति बढ़ा चुकी थी...

अह्हह्ह्ह्ह सनी ये क्या किया है तूने ुमनममम इतनी गरम में पहले कभी नहीं हुई िष्ठ्हहहह ुह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे भाई, आजाना क्यों तड़पा रहा है अपनी बेहेन को अब, कर ले मेरे इस कमसिन जिस्म से जी भर प्यार उम्मम्मम्म अह्ह्ह्हह्हह सुननीयिययियीय, िष्ठ्हह.

छूट के उप्पेर अपनी उंगलिओ से चल रही घिसाई से प्रीति अब भोत ज्यादा गरमा चुकी थी और उसी गर्मागर्मी में छूट घिसते और चूचिया मसलते हुए प्रीति जो इतनी देर से अपने चूतड़ों को हवा में लहरा रही थी एक झटके से उलटी हो जाती है और पेट के बल बिस्तर पर लेट जाती है, जिसके साथ hi उसका हाथ भी उसके पेट के निचे उसके वजन टेल आजाता है. लेकिन अपने यौवन की तड़प के मरे आज प्रीति को कुछ नहीं सूझ रहा था और इसी कारन उसका हाथ अब भी उसकी छूट से हटने को राज़ी नहीं था.

और अपनी कमसिन चिकनी खिल कर फूल बनने को तैयार काली सी छूट पर उंगलिया फेरती हुई प्रीति अपना मुँह तकिये में धंसे हुए पीछे से अपनी नंगी कासी चिकनी गोरी गांड को उप्पेर की तरफ उठा कर कामाग्नि को शांत करने में व्यस्त हो जाती है, वही कामाग्नि जिसमे इस वक्त प्रीति इतनी बुरी तरह से जल रही थी जहा वो अपने hi भाई के साथ सम्भोग करने को मचल चुकी थी और इसी तड़प में प्रीति बेकाबू हो जाती है और दो उंगलिओ की मदद से अपनी छूट की फांको को फैला देती है.

छूट के फैलते hi उसकी कमसिन छूट की गुलाबी पंखुडिया एक दूसरे से अलग हो जाती है और जैसे hi छूट की फको ने अलग हो कर जगह बनाई, गरम मचलती हुई प्रीति की एक ऊँगली सीधा उसके अंदर घुसने को चली जाती है. ऊँगली जैसे hi अंदर घुसती है तो प्रीति को छूट में एक अजीब सी जलन होती है लेकिन मस्ती में मस्त प्रीति अब अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म ओह्ह्ह भइईईई उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ उम्मम्मम्मम्म एसससससस उम्म्म्म करते हुए अपने चूतड़ों को हवा में hi हिलने लगती है, लेकिन इस दौरान उसकी टंगे इस तरह कम्प रही थी मनो उनमे कोई जान hi न बची हो...

जिस्म की गर्मी और तड़प में जलती प्रीति खुद में इतना खो सी गयी थी की उसे इसके अलावा अब कुछ नहीं दिख रहा था और वो अपनी इस कामाग्नि को कीड़ी तरह से पूर्ण रूप से शांत करना चाहती थी जो इस वक्त अपने भाई के बारे में सोच और छूट पर हो रहे खिलवाड़ से और ज्यादा भड़क रही थी.... और अभी प्रीति अपनी इस मस्ती में मस्त थी की उसको दरवाजे पर किसी के खटखटाने की आवाज सुनाई पड़ती है...

आवाज सुन पसीने से लतपथ प्रीति जो अभी उस हाल में थी जहा उसका टॉप चुचुईया बहार किये एक तरफ हुआ पड़ा था और उसका लोअर पंतय के साथ घुटनो के निचे तक खिसका हुआ था, को मन hi मन फ़्रस्टेशन और गुस्सा आजाता है चूँकि इस वक्त उसे अपनी छूट को शांत करने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा था और इस खटखटाहट ने उसके इस खेल को बिच में hi रोक दिया... और भड़ास निकलती हुई खुद से पूछती है, " अब किसे आना था ईद वक्त और क्यों... और आना था तो अभी आना था क्या हँ!"

और ये बोल न चाहते हुए भी खुद की हालत ठीक करते हुए कम्बल व्यवस्थित बिस्तर पर रख वो दरवाजे की तरफ बढ़ती है और दरवाजा खोलती है.

दरवाजा खोलते hi प्रीति के चेहरे पर से छूट को ऐसे गरम चोर्ने का गुस्सा और चिचिड़ापन एक झटके में गायब हो गया, होता भी क्यों नहीं क्युकी सामने इस वक्त दरवाजे पर मैं खड़ा था..

मुझे इस तरह अपने कमरे के दरवाजे पर खड़ा देख प्रीति मन hi मन सोचने लगती है की कह सनी ने कुछ सुन या देख तो नहीं किया, उफ्फ्फ क्या हुआ था मुझे, अभी कुसग देर पहले में खुद सनी को अपने पास होने की बाटे करते हुए छूट घिस रही थी और उस वक्त सनी मेरे सामने है जैसे मेरी बात सच हो गयी है, और जो कुवह सोचा उसके सच होने के ख्याल से hi प्रीति की धड़कने तेज होजाती है और आवाज में कम्पन आजाता है..

प्रीति :- सु.. सु.. सनी तू यहाँ इस वक्त..

मैं :- क्यों नहीं आ सकता क्या और ये क्या तू मुझे देख इतना घबरा क्यों रही है ः.. भूत थोड़ी हु में

प्रीति, खुद को सँभालते हुए :- नाह नाह नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi, ासाहनक तूने दरवाजा खटखटाया न तो बस इसलिए... बता न क्या काम था इस वक्त तुझे मुझसे..

मैं :- कुछ काम नहीं था, बस मुझे नींद नहीं आ रही थी तो चला आया..

प्रीति, एक तरफ सनी का आना उसे भोत ाचा लगा और वो उसके साथ वक्त बिताने के लिए भोत उत्सुक थी लेकिन भाई के साथ होने पर वो किस हद तक बहक जाये इस चीज को सोच :- ओह्ह्ह्ह अच्छा ये बात है..

मैं, कमरे के अंदर घुसते हुए :- क्यों नहीं आ सकता क्या में अपनी बेहेन के साथ वक्त बिताने प्रीति

प्रीति :- क्यों नहीं आ सकते तुम सनी...

मैं, प्रीति जो जल्दबाजी में अपने कपडे सही से ठीक भी नहीं कर पाई थी जिस कारन उसके बाल थोड़े थोड़े बिखरे हुए थे और थोड़े बंधे हुए, टॉप आलरेडी लूसे था hi और बिना ब्रा के उसकी मुलायम गोल चुचिओ का शेप भोत अचे से नज़र आरहा था और उत्तेजना के मरे उसमे से उसके खड़े हुए निप्पल्स भी थोड़े भोत दिखाई पद रहे थे और ये सब नज़ारा देख, प्रीति के और करीब आते हुए :- वही तो अब तेरे कमरे में आने का हक़ तो है न मुझे, चाहे वो आधी रात में भी क्यों न औ मैं..

प्रीति, मुझे इतना करीब पा कर तेज धड़कनो से सिर्फ ह्म्म्मम्म कह पति है और हल्का पीछे होते हुए : हम्म्म पूरा हक़ है तुझे सनी पर तूने मेरी भी नींद उदा राखी है अब उसका क्या...

प्रीति ने शायद सीधे तरीके से नींद की बात करि थी लेकिन मेने उसे अपने अंदाज में मोड़ते हुए :- नींद तो तूने भी मेरी उदा दी है उसका क्या.. और प्रीति को आँख मर देता हु..

प्रीति, अब मेरी बात समझते हुए भी नासमझ बनकर :- क्योऊ मेने क्या किया है, तू मेरे कमरे में आया है में थोड़ी...

मैं, प्रीति को कमर में हाथ घुसा अपने पास खींचते हुए :- हम्म्म पर नींद कमरे में आने से थोड़ी उड़ती है मेरी प्यारी बेहेन...

प्रीति :- तो कैसी उड़ती है सुननीयीय...

मैं, अपने हाथ को उसके टॉप के अंदर करते हुए कमर पर फिरा कर, आँख मार कर :- वैसे hi जैसे दोपहर में आयी थी तू मेरे पास...

प्रीति, दोपहर में हुए वाकिये और मेरे हाथ को महसूस कर वापस करंट महसूस करते हुए, हल्का धक्का दे कर पीछे हैट जाती है, और नज़रे झुका कर :- देख सनी, मुझे नहीं पता दोपहर में हमारे बिच जो हुआ वो क्या क्यों और कैसे हुआ, और मुझे अब उस बारे में कोई बात नहीं करनी है और प्लस तू भी मत कर...

मैं, वापस प्रीति के करीब जा कर :- कैसे नहीं करू प्रीति वो बात, कैसे भुला दू में ये बात की में दुनिया की सबसे खूबसूरत, क्यूट हॉट एंड सेक्सी लड़की को प्यार कर रहा था, उसे महसूस कर रहा था और इतने हसीं पालो को में छह कर भी नहीं भुला सकता प्रीति...

प्रीति, नजरे उप्पेर करके :- क्या सच में मैं तझे इतनी खूबसूरत लगती हु सनी और क्या सच में तू मुझसे इतना प्यार करता है भाई..

मैं, प्रीति की कमर में हाथ दाल एक फुम मुझसे चिपका कर होने होठ उसके होठो से लंगभग चिपकते हुए:- अब भी तुझे यकीं नहीं होता तो तू बता कैसे यकीं दिलो तुझे मैं प्रीति... मन की हमने कभी सीधे मुँह बात नहीं की पर उस नोकझोक में भी तेरे लिए प्यार था और जब से तुझे मेने फोटोशूट के लिए तैयार किया और तेरे साथ वक्त बिताया तब मुझे समझ में आ गया था...

मैं, चेहरा पीछे कर उसकी आँखों में देखते हुए :- वैसे क्या तुझे मेरे लिए कोई फीलिंग्स नहीं प्रीति, सच सच बता बेहेन...

प्रीति, आँखे झुका :- पता नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आता है सनी, जिस दन से तूने कॉलेज में मेरी साइड ली तब से में तेरे प्रति अलग फीलिंग्स महसूस कर रही हु, तेरा मेरी साइड लेना, मेरे लिए लड़ना, मेरी केयर करना, ये सब ने मुझे तेरी तरफ आकर्षित किया है भाई... पर मुझे अब भी समझ नहीं आता की मई क्यों इतनी उलझी हुई हु...

मैं, अब प्रीति को उलझन में देख इसी को सही मौका मान उसको अपनी तरफ खींच कर एक हुग कर लेता हु, हुग इतना टाइट होता है की अब उसकी बिना ब्रा में टॉप में छिपी चुचुईओं का एहसास मुझे हो रहा था साथ hi उन कड़े निप्पल्स को में मेरे साइन पर महसूस कर प् रहा था, और इसी तरह में अपनर होठ प्रीति के बालो को उसकी गर्दन से हटा वह अपने होठ रख देता हु.

मेरे होठो को अपनी गर्दन पर महसूस करते hi प्रीति जो पहले से hi तड़प रही थी, एक सिहरन के साथ मचल उठती है और अपना चेहरा उप्पेर उठा कर उसका एक हाथ मेरे सर पर रख देती है जिससे उसकी गर्दन का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा अब मेरे होठो की पहुंच में आ चूका था, " ओह्ह्ह्हह्ह सुन्न्नीयी क्या कर रहा है ये तू उम्म्म्म "

मैं, उसकी गर्दन को उप्पेर से चूमते हुए उसके टॉप को कंध से निचे सरकते हुए वह चुम लेता हु और, " उम्म्म्म प्रीति क्या तुझे मेरा तेरे पास होना तुझे ऐसे प्यार करना ाचा नहीं लग रहा बोल "

प्रीति, अपनी आँखे बंद किये मेरे होठो से उसके गर्दन और कंधो पर महसूस कर :- अह्ह्ह्ह सनी भोत ाचा लग रहा है उम्मम्मम्म ये सब भोत नया नया है पर मुझे भोत ाचा अनुभव हो रहा है भाई ुम्नम्म

मैं, जैसे यही सुनने के इंतज़ार में था और प्रीति के चेहरे को ठीक अपने सामने रख उसको आँखों में आँखे दाल :- जब तुझे सब इतना ाचा लग रहा तो फिर किस बात की उलझन है प्रीति.

प्रीति :- ओह्ह्ह सनी इस वक्त मुझे कुछ नहीं समझ आ रहा है, भोत अलग अलग तटीके की भावनाये मेटे मन में उमड़ रही है उम्म्म एक तरफ जी करता है तुझे ढेर सारा प्यार करू और करवौ और वही दूसरी तरफ पता नहीं मन में एक घबराहट और दर बी है उम्म्म्म...

मैं, इससे पहले की प्रीति अपनी बात पूरी करती अपने होठ सीधे उसके होठो से चिपका लेता हु और भोत hi धीमे से पैशन के साथ प्रीति के होठो को चूमने लगता हु.. होठ चूमते हुए होना एक हाथ उसकी कमर पर फिरने लगता हु जिससे अब प्रीति मेरे होठो को उसके होठो पर महसूस करते hi तुरंत पिघल सी जाती है और कुछ hi देर में वो अपना मुँह खोल कर मेरे इस चुम्बन का साथ देने लगती है और समर्थन देते हुए अपनी जीभ को मेरे मुँह में घुसा मेरी जीभ से लड़ते हुए चुम्बन को और गहरा और मज़ेदार करने में मदद करती है..

प्रीति के होठो को इस तरह रसपान करते हुए अब मैं अपना हाथ जो अब तक कमर पर था उसे उसके कैसे चूतड़ों पर ले जाता हु और दोनों चूतड़ कस के अपने हाथो में ब्बिंच लेता हु जिससे वो एक दम चिंहुक पड़ती है और अपनी दोनों टंगे कास के जोड़ लेती है जिससे उसकी मसल जंघे एक दम से अकड़ जाती है और इस बात का फायदा उठाते हुए उसे चूमते चूमते hi में चूतड़ों को पकड़ हवा में उठा लेता हु और सीधा बिस्तर पर लिटा लेता हु...

बिस्तर पर लिटाते hi अब मैं अपने होठ उसके होठो से हटा इस गहरे चुम्बन को तोड़ देता हु और चुम्बन तोड़ने पर जब मेरी नज़र प्रीति के चेहरे पर पड़ती है तो अभी भी प्रीति की आंखे बंद थी और उसकी साँसे भोत तेज़ चल रही थी जिससे उसकी चूचिया उप्पेर निचे होती हूँ साफ़ नज़र आरही ठु, जिससे साफ़ दिख रहा था की प्रीति अब तक चुम्बन के इस हसीं एहसास से बहार नहीं आयी है..

कुछ देर ऐसे hi रहने के बाद में अपने हाथ की ऊँगली प्रीति के होठो पर रख :- क्या हुआ प्रीति, अब उलझन दूर हुई या नहीं...

मेरी बात सुन प्रीति उस आनंदमयी ख्यालो से बहार आती है और मेरी ऊँगली जो उसके होठो पर थी, अपने दोनों होठो को एक दूसरे से अलग कर उस ऊँगली को चूसने लगती है और कुछ देर चूसने के बाद उसे बहार निकल अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है और मुस्कुरा देती है जैसे की मेरी बात पर हामी भर रही है...

में उसके चेहरे को वापस अपनी तरफ करके उसे निहारते हुए :- वाकई भोत खूसूरत है तू प्रीति, बोल उम्म्म्माः एक बार दोबारा उसके होठो पर अपने होठ रख देता हु... और होठ चूमते हुए अब में अपने हाथ को निचे ले जा उसके पेट पर घूमने लगता हु और ऊँगली से उसकी नाभि को छेद देता हु..

मेरे ऐसा करने से प्रीति मरे उत्तेजना के कस के मेरा चेहरा पकड़ लेती है और मेरे होठो को पूरा मुँह में भर चूसने लगती है जैसे आज उन्हें खा hi जाएगी... और वह निचे मेरे हाथ निचे उसके पेट और नाभि में घूमने से उसका पेट एक झटके में पूरा अंदर होने लगता है और बहसर होने लगता है

प्रीति, चुम्बन तोड़ते हुए:- उम्मम्मम सनी क्या कर रहा है तू ये, क्या प्यार करने में इतना आनंद मिलता है भाई उम्मम्मम उफ्फ्फफ्फ्फ़ मुझे समझ नहीं आ रहा में किस दुनिया में जी रही ईशःठ

मैं, जो प्रीति को सुनते हुए अपना हाथ धीरे धीरे उसके पेट पर सहलाते हुए उप्पेर की तरफ करने लगा था ठीक उसकी चुकी के निचले हिस्से पर पंहुचा कर ऊँगली से कुरेदते हुए :- ओह्ह्ह प्रीति अभी तो तूने देखा hi कहा है की इस प्यार में कितना आनंद है, भोत कुछ बाकि है अभी तो बहना...

प्रीति, मेरी ऊँगली को चुकी के निचले हिस्से पर महसूस कर आँखे बंद कर, इसशहहह सनी उम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ ahhh,karke रह जाती है.

और तभी में अपना एक हाथ उप्पेर ले जा उसकी वो मुलायम गोरी गोल चुकी पर रख देता हु और हलके से पूरी तरह दबा देता हु..

अपनी चुकी पर इस तरह मेरा हाथ दोपहर के बाद एक बार दोबारा महसूस करते hi प्रीति का शरीर मनो उसके काबू में नहीं रहता है और इतनी देर से उसके शरीर की कामाग्नि जो भड़क रही थी उसे और हवा मिल जाती है और वो एक मादक सी सिसकी भर देती है ahhhhhhhhhh िष्ठ्हहहहहह उम्म्म्म सनी उम्मम्मम्मम्मम..

मैं उसकी चुकी को हाथो से दबाते हुए उसकी आँखों में देखते हुए निप्पल को उंगलिओ के बिच फसा कर मसलने लगता हु जिसे महसूस करते hi प्रीति की आँखे एक दम बड़ी हो जाती है और मुँह खुल जाता है, मनो कह रही हो की ये क्या कर दिया तूने सनी... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ उम्म्म्म ईशःठ अह्ह्ह्ह भईईई की सिसकी के साथ वो मचल उठती है और मीठे दर्द के एहसास में मुझ पर झपट्टा मरते हुए अपने होठ वापस मेरे होठो पर सत्ता देती है..

होठो के चुम्बन के साथ अब उसकी कासी ुनचुइ मुलायन चुकी को मसलने का काम जारी रखता हु और कुछ देर बाद हाथ को दूसरी चुकी के उप्पेर रख उसकी निप्पल को नाख़ून से कुरेद देता हु..

मस्ती में डूबी प्रीति जब अपने दूसरे बूब की निप्पल जो अब तक कड़क हो कर सलामी दे रही थी पर बिलकुल ुनचुइ थी, मेरे टच को महसूस करते hi सिहार जाती है और एक गहरी सांस लेते हुए जोर की अहह भर लेती है उम्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाई उनननमममम uffffffffffffrf ईशःठ...

प्रीति अभी इस सिहरन से बहार आती उससे पहले hi में अपने दूसरे हाथ से उसके टॉप को उप्पेर उठा देता हु. अब तक जिन चुचिओ को सिर्फ हाथो से महसूस कर रहा था, मेरी बेहेन की वो चूचिया अब पूरी तरह से मेरी नज़रो के सामने एक दम नंगी थी.. गोरी त्वचा वाली मस्त गहरे भूरे रंग की वो अकड़ी हुई चोकलाती घेरे के बिच अकड़ी हुई उन निप्पल्स वाली वो मुलायम रसीली चूचिया देख मेरा मुँह पानी पानी हो गया और नीचर मेरे लुंड ने भी एक झटका मार दिया..

वही दोस्ती तरफ किसी मर्द के सामने वो भी अपने hi भाई के सामने पहली बार अपनी नंगी चूचिया लिए लेती प्रीति अपनी आँखे कास के बंद कर लेती है और इस एहसास को जीते हुए की उसकी चूचिया अब उसके भाई के सामने, उस भाई के सामने जिसे वो चाहने लगी है, पूरी नंगी आज़ाद हो चुकी है, प्रीति की छूट में से पानी रिसस्स जाता है...

मैं, प्रीति की दोनों चूचियों को अपने हाथ में भर दबाते हुए :- उफ्फ्फ्फ़ प्रीति कितनी खूबसूरत चूचिया है तेरी, वाकई जितनी सुन्दर तू बहार से उससे कही ज्यादा सुन्दर खजाना तूने अंदर छिपा रखा था.. हैए इनको तो देख कर hi प्यार करने का दिल हो गया.. उम्म्म्म कितनी मुलायन है प्रीति तेरी चूचिया और कितनी मस्त आकार वाली है बेहेन उम्मम्माह..

प्रीति, भाई द्वारा चूचिया मसाले जाने और आज पहली बार किसी लड़के के मुँह से अपने जिस्म और चूचियों के बारे में सुन कर पूरी तरह गरमा जाती है और खुद बा खुद उसके हाथ मेरे हाथो पर आजाते है और मेरे हाथो को कभी दबाते हुए जिससे उसकी चूचिया दबने लगती और कभी उसके विपरीत उनसे हटाने के लिए उपयोग करते हुए, इस्स्स्सस्स्स्स अह्ह्ह्हह उम्मम्मम सुंननीयिययीय उम्मम्मम्म uffffffffff दुःख राहाआआ है िध्ह्हह्ह्ह्ह..

अब अपनी कासी मुलायम नंगी चुचिओ के इस तरह पहली बार मरदाना हाथो से दबने से प्रीति को एक मीठा दर्द भी अनुभव हो रहा था जिस कारन हर बार दबाव बनाने पर उसके मुँह से सिसकी निकल रही थी और साथ hi उसकी आँखे बंद हो जाती, और इसी बिच अब में उसकी एक चुकी को दबाते हुए दोस्ती चुकी की निप्पल पर अपनी जीभ टच करा देता हु, और जीभ के थूक की वजह से गीलेपन और उसकी सॉफ्टनेस को कड़े हुए निप्पल पर महसूस करते hi एक झटके से प्रीति की आँख खुल जाती है और एक बिन पानी मछली की तरह अपनी छाती उप्पेर की तरह उठा देती है, "अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह िष्ठ्हह सुंननीयिययीय उम्मम्मम्मम भईई ये क्या कर रहा हैई उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ "

प्रीति के इस तरह मचलने से मुझे उसकी उत्तेजना का अनुभव हो जाता है और में अब उसकी इस तड़प को और बढ़ाते हुए बिना उसकी बात के जवाब दिए निप्पल को पूरा मुँह में भर लेता हु और चूसते हुए उसकी चुकी को धीरे धीरे पूरा मुँह में लेने लगता हु... उम्मम्मम्मम्हाआअह उम्मम्मम्ममाआहहहहह...

इस तरह अपनी चुकी के मेरे मुँह में घुसा कर अब चूसने से प्रीति पूरी तरह से पागल हो जाती है और हो भी क्यों नहीं, आज पहली बार किसी ने उसकी इन रसीली चुचुईओं को इस तरह मुँह में भरा था और इस असीम आनंदायी नए अनुभव को प्रीति संभल नहीं पति जिसका असर अब सीधा उसकी छूट पर हो रहा था जो बिना रुके अपने काम रास की धरा बहा रही थी... उम्मम्मम्मम ओह्ह्ह्हह सुंनंनीयी issssssssss ुमनमममममम भईईई अह्ह्ह्हह क्या कर रहे हो ये तुममममममम ufffffffffffff.

अपने भाई से कभी एक तो कभी दूसरी चुकी चुस्वाति हुई मस्ती में मचलती हुई प्रीति अब मदहोशी के आलम में इस तरह खो चुकी थी की वो इस अनुभूति से बहार नहीं आना छह रही थी और अपनी बेहेन प्रीति की इस मस्ती को देख मैं जो उसके ुन्छुए कमसिन बदन पर जड़ी उन मुलायम रसीली कासी हुई गोलाई भरी चुचिओ को और ज्यादा दबाव के साथ मुँह में भर कर चूसने लगता हु और उन्हें चूसते हुए अब अपना एक हाथ निचे की तरफ ले जा कर उसके लोअर के अंदर से उसकी पंतय को पार करते हुए उसी कुंवारी चिकनी छूट जो इस वक्त भट्टी की तरह जल रही थी और अपना रास निरंतर बहा रही थी उसपर रख देता हु.

प्रीति जो अब पूरी तरह अपने होश से बेकाबू तजि और मेरे हाथ अपनी छूट पर महसूस कर उस नशे में आगे बढ़ जाती है और अपनी गर्दन को दाईं बाईं तकिये पर पीटने लगती है और मुँह से सिसकिया ाहींन भरने लगती है अह्ह्ह्हह उम्मम्मम ओह्ह्ह्हह्ह भाईउऊउउउ ीीिष्ठ्हहहह और इसी के साथ उसकी टंगे एक दम अकड़ चुकी होती है जिन्हे वो मदहोशी और उत्तेजना में कभी मोड़ रही रही थी तो कभी सीधा करके बिस्तर पर पटक रही थी...

उम्म्म्मणम्म ओह्ह्ह्हह्ह मम्मीयीय उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह सुन्न्नीयीय ीुफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की तेज सिसकियों के साथ अब प्रीति अपने कुंवारे यौवन पर मेरे हाथो को महसूस कर हवा में उड़ने लगी थी और ये देख अब मेने उसकी चुकी को पूरा मुँह में भर लिया और निप्पल को दांतो के बिच फसा खींचने और चूसने लगा साथ hi उसकी छूट की फांको को फैला कर अपनी ऊँगली अंदर घुसा देता हु जहा मेरी ऊँगली का मिलान उसके छूट के डेन से हो जाता है और वह उंगलिया अब अपने ाफी छेद चढ़ करते हुए उस डेन को सहलाने लग पड़ती है..

छूट के डेन पर हुई छेड़छाड़ से प्रीति अब अपना काबू खुद पर से पूरा खो बैठती है और मेरे सर को खींचते हुए चुचिओ से अलग करने की कोशिश करती है जिससे मेरे दांतो में फांसी उसकी निप्पल भी खींचने लग जाती है और निप्पल और छूट पर हो रहे एक साथ दोहरे प्रहार से प्रीति भोत ज्यादा मचल उठती है और उसके मुँह से अब अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सुननममममममम सुन्न्नीयीय ये क्या कर रहा है टूउउउ उम्मम्मम्म uffffffffffftftff अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ishhhhhhhhhhh हयईईई मर्डर गयी मेई उम्मम्मम्म भईई रुक्खककक जाआआआ ufffffffffff ahhhhhhhhhh की तेज तेज आहें निकलने लगती है..

मुझे पता था की छूट के इतना कैसे होने और कुंवारेपन की वजह से उसे अभी और तड़पना जरुरी है और इसी कारन मेने ये कदम उठाया था और इसका सकारात्मक असर अब मुझे प्रीति के हर प्रतिक्रिया से साफ़ दिखाई दे रहा था... उम्म्म्म अपनी मचलती और टंगे उप्पेर निचे कर खुद को हवा में लहराती हुई बेहेन प्रीति की छूट पर ऊँगली का दबाव और बढ़ाते हुए जिससे की खुद बा खुद hi मेरी उंगलिया प्रीति के इस तरह उप्पेर निचे होने से उसकी छूट के डेन पर घिसने लग पड़ी थी..

यहाँ प्रीति की कमसिन गुलाबी छूट को इस तरह घिसते हुए उसकी गर्मी महसूस कर में भी पूरी तरह मस्त हो रहा था और होना लाजमी भी था, आखिर इस वक्त मेट्री अपनी बेहेन का रसीला कैसा हुआ बदन मेरे आगे पूरा नंगा पड़ा था औरवो भी बिलकुल एक तड़पता हुआ और मचलता हुआ जो इस वक्त अपनी शरीर की भूख और छूट की इस कामाग्नि को शांत करने के लिए तत्पर थी..

और यही सब देख मेने एक झटके से प्रीति की छूट में मेरी एक ऊँगली अंदर घुसना शुरू कर दिया, छूट जो पूरी तरह कासी हुई थी और प्रीति की छूट के मुहाने पर hi घुसना शुरू होते hi प्रीति के मुँह से एक तेजज आअह्ह्ह निकल जाती है उम्मम्मम्मम्म ओह्ह्ह्हह्हह सुंनंनिय्य्य्यय्य idhshhhhhhhhhh, और इसी तेज आह के साथ प्रीति का पूरा जिस्म कांप उठता है और वो मेरे मुँह को उसकी चुकी पर कस्सस के दबा देती है उम्मम्मम्मम्ममोह्ह्हह्ह्ह्ह सुंनंनिय्य्य्यय्य रुक्खककक जाआआआ उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ुष्ठ्हहब्ब्ध कहते हुए वो चूतड़ों को झटके देते हुए शांत होने लगती है.

प्रीति के इस तरह कांपने और झटके देने से में ये समझ चूका था की उसकी छूट ने अपना रस बहा दिया है और वो झाड़ चुकी है, इसलिए मेने अपनी उंगलिया वही रोक दी और उसके चेहरे पर चूमने लगा साथ hi उसकी चुकी को बिलकुल हलके हाथो से सहलाने लगता हु और ऐसा में तब तक करता हु जब तक की प्रीति की साँसे काबू में नहीं आजाती है...

आज के अपडेट में इतना hi, आगे की कहानी अगले अपडेट में😜🤗🤗🤗🤗 शुक्रिया दोस्तों... इसी तरह साथ बने रहिये...


और हाँ इस बार उम्मीद करता हु की आप सभी का साथ और कमैंट्स अगले अपडेट से पहले hi कहानी को 300 पेजेज के आकड़े को प्राप्त करने में मदद करेंगे. 🤗🤗🤗😜
 
अपडेट - 65


तो पिछले अपडेट में हमने देखा की किस तरह मेने प्रीति के जवान जिस्म को नंगा किया और उसकी जवान कासी मुलायम चुचिओ को चूसते हुए उसकी छूट सहला कर मेरी बेहेन को पूर्ण रूप से मदहोश करते हुए उस रसीली तड़पती छूट से काम रास बहाया और फिर झड़ने के बाद प्रीति इस आनंद की अनुभूति में मेरे सामने नंगी लेती पड़ी थी.

अब आगे...

झड़ने के बाद प्रीति वैसे hi बिस्तर पर नंगी लेते अपनी साँसों को काबू पाने की कोशिश करने लगती है और इसी दौरान में उसकी तेज साँसों की वजह से उप्पेर निचे होती हुई चुचिओ को एक तक निहारने में मस्त था और अपने एक हाथ से उसकी उस मुलायम गदरायी गोरी मस्त चुकी को सहलाते हुए,

मैं, मुस्कुराते हुए उसका माथा चुम:- क्या हुआ प्रीति, सब ठीक है न.

प्रीति, मुझे देख :- नहीं पता सनी, मुझे hi नहीं समझ आ रहा की मई क्या फील कर रही हु ईद वक्त , पर ाभु जो भी हुआ सच कह रही हु इस तरह का अनुभव मेने मेरी जिंदगी में पहले कभी नहीं किया उम्मम्मम्म ओह्ह्ह्हह, देख न अब तक मेरी धड़कने कितनी तेज चल रही है भाई ईशःठ..

और ये बोल प्रीति ऐसे hi नंगी मुझसे लिपट जाती है और अपनी साँसे सँभालने लगती है, जिसकी मदद में मैं अपना हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए उसे शांत करने लगता hu....kuch देर ऐसे रहने के बाद अब प्रीति थोड़ी नार्मल होती है.

इतनी देर जिस्म की आग, भाई के प्यार करने के मदमदत एहसास और मदहोशी के नशे में झूमती हुई प्रीति को अब ये एहसास होता है की वो नेति बहो में बिलकुल नंगी लिपटी हुई है तो वो तुरंत मुझसे अलग होती है और वह जमीं पर पड़े कम्बल को खींच कर अपना बदन धक् लेती है.

मैं, प्रीति के इस तरह अपने आप को ढकने से, उसके चेहरे को पकड़ :- क्या हुआ प्रीति...

प्रीति, मुस्कुरा कर के :- कुछ नहीं सनी बस ऐसे hi...

मैं :- तो फिर अब क्यों छिपा रही है मुझसे तू तेरी ये खूबसूरती वो भी तब जब मेने इसे इतने अचे से देख भी लिया और तेरी इस मदमस्त जवानी का रसपान भी कर लिया...

प्रीति, मेरे इस तरह खुल्लम खुल्ला ऐसे बात करने पर, शरमाते हुए :- चुप कर जा सनी अब, बेशस्राम कैसे कुछ भी बोल रहा है..

मैं, अपना हाथ कम्बल में दाल उसकी चुकी को दबाते हुए:- अब किस बात की शर्म प्रीति, वैसे भी जो सच है वही कहा न.... अब है तेरी ये जवानी एक दम मदमस्त और बार बार चूसने चूमने layak...mujhe नहीं पता था की मेरी बेहेन इतनी हसीं और कामुक लड़की है....

प्रीति, दोबारा मेरे चुकी दबाने से सिसकते हुए :- स्स्स्सस्स्स्सीीीीिहहहहहहहह उफ्फ्फफ्फ्फ़ सनी उम्मम्मम्मम्मम उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मुझे नहीं पता में कैसी हु और कैसी नहीं, पर आज से पहले मेने ऐसा बर्ताव कभी करने की सोचा भी नहीं था पर पता नहीं जब से तूने मुझे छुआ है मुझे एक अलग hi नशा चढ़ गया है िष्ठ्हहहहहह...

मैं, प्रीति की बात सुन निप्पल्स को ऐंठते हुए :- अच्छा इसका मतलब मेरे अभी इस कमरे में आने से पहले भी तू मेरे बारे में भोत कुछ सोच रही थी न...

प्रीति, कम्बल में अपना हाथ घुसा मेरे हाथ को पकड़ कर चुकी दबवाती हुई :- िष्ठ्हहहह उम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ हआ बोल तो रही पिछले कुछ दिनों से मुझे तेरे करीब रहना तेरी पसंद से रहना और आज दोपहर के बाद तो बस तेरे हाथो का टच, उनका मेरी चुचुईओं को दबाना वही सब घूम रहा है अह्ह्ह्हह, बता न ऐसा क्या किया है तूने और क्यों....

मैं, अब हाथ को चुकी से निचे उसकी छूट पर ले जा कर छूट के ऊपरी भाग पर उंगलिया फिरते हुए :- क्योऊ... क्यूँउउ क्या प्रीति, अब इतनी हसीं खूबसूरत हॉट और सेक्सी लड़की के साथ ये सब न करू तो क्या करू फिर, और अभी तो भोत कुछ करना बाकि है तेरे साथ, अभी तो हमने इस प्यार भरे रिश्ते की शुरुआत की है बहना 😜

प्रीति, छूट के ऊपरी भाग में मेरी उंगलिया महसूस कर सिहरती हुई :- िष्ठ्हहहहह उफ्फ्फफ्फ्फ़ सनी, इतना कुछ तो कर चूका है तू आज एक दिन में... जो लड़की आज तक खुद के अलावा किसी के सामने नंगी ंशी हुई आज वो तुझसे नंगी लिपटी हुई, मेरे उन अंगो पर तूने अपना हाथ जमाया है जिनपर मेने भी इतने अचे से हाथ नहीं चलाया है, इसके बाद अब और क्या बचा है करने को उम्मम्मम अह्ह्ह्ह...

मैं, मुस्कुराते हुए :- सच में सुन्ना चाहती हसि क्या तू प्रीति...

प्रीति :- हैं सुन्ना है मुझे बता भी अब...

मैं, प्रीति की छूट फैला उसमे ऊँगली को हैजा सा अंदर कर घिसते हुए :- अभी तो तेरी इस कासी कमसिन कुंवारी छूट को भोत अचे से प्यार करना है, इसे मेरी इन उंगलिओ से घिसना है, इन उंगलिओ को तेरे इस कैसे हुए छेद में डालना है, इसके बाद अब तक तो सिर्फ तेरी चूचिया और होठो का रसपान किया है मेने... अभी तो...

प्रीति, छूट में ऊँगली जाती महसूस कर दोबारा गर्माते हुए अपनी टंगे हलकी फैला कर :- िष्ठ्हहह अब्ब्बभी तो क्या सुननयीय बोल न...

मैं, छूट के डेन को अंगूठे से घिसते हुए :- और अब में उससे और आगे बढ़ कर तेरी इस खूबसूरत गुलाबी पंखुडिओ वाली छूट को फैला कर अपनी जीभ से इसका रास चखना चाहता हु, तेरी छूट को अपने मुँह में भर इसे चूस चूस मर इसका रास पीना चाहता हु... और...

प्रीति, छूट चूसने की बात सुन पूरी तरह गर्माते हुए :- अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम सुननीयीय इस्स्स्सस्स ोरररररररर...

मैं, प्रीति का हाथ पकड़ अपने लोअर के उप्पेर से hi लुंड पर रख और मेरी ऊँगली को थोड़ा दबाव बना उसकी छूट के अंदर घुसते हुए :- ोरररररर मेरी प्यारी बेहेन प्रीति, फिर तेरी इस कुंवारी कासी रसीली छूट में मैं मेरा ये कड़क लुंड दाल कर तेरा कुंवारापन छींटे हुए तुझे भोत अचे से पूरी मस्ती में छोड़ना चाहता हु अह्ह्ह्ह...

प्रीति, एक तरफ मेरी ऊँगली उसकी कासी छूट में घुसने से मदमस्त मीठा दर्द महसूस करती है वही दूसरी तरफ मेरे लोअर के उप्पेर से hi लुंड पर हाथ रखने से उसका अकार और साइज महसूस करते हुए जब ये सुनती है की में अपने इसी लुंड को उसकी छूट में घुसा कर उसे छोड़ने की बात कर रहा हु, घबराहट और उत्तेजना भरे स्वर में :- उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ सुननीयीय उम्मम्मम्म क्याआ बोल रहा है तू भाई िष्ठ्हह्ह्हम्मम्मम उफ्फ्फफ्फ्फ़ क्या सच में तू मुझे अपने इसको (लुंड ओर दबाव बनाते हुए) छूट में घुसाने की बात कह रहा है ईशःठ बेशरम उम्मम्मम्मम्मम

मैं, प्रीति के हाथ को लुंड पर और दबाते हुए साथ hi अब अपनी ऊँगली को उसकी छूट में धीरे धीरे अंदर बहार करते हुए :- हैं प्रीति सच में, मुझे भोत ख़ुशी होगी अगर मेरे नसीब में मेरी बेहेन यानि तेरी कुंवारी छूट की सील तोडना लिखा होगा तो उफ्फफ्फ्फ़ कितनी रसीली और प्यारी छूट है प्रीति तेरी..

प्रीति, जिसने कभी नहीं सोचा था की एक दीन्वो अपने भाई से इस तरह छूट में ऊँगली करवाते हुए उसके मुँह से अपने कुंवारेपन छीनने की बाटे कटे करते हुए सुनेगी, आज तक उसने सिर्फ अपनी सहेली मोनाल के मुँह से ये सुना जरूर था की चुदाई के दौरान लुंड और छूट का मिलान होता है पर इस तरह मेरे लुंड के उसकी छूट में घुसाने कीबात से टंगे कस्ते हुए मेरा हाथ छूट के उप्पेर जोर से पकड़ते हुए :- िष्ठ्हहह सुननीयिययी उम्मम्मम्मम्म uffffffffff मुझे कुछ समझ नहीं आ र्ष है हैइए उफ्फफ्फ्फ़ उफ्फफ्फ्फ़ थोड़ा ढिर्र ऊँगली दाल न छूट में दर्द होता हाउ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ िष्ठ्हहह भईई...

मैं, अब प्रीति की छूट में ऊँगली डालने की रफ़्तार और बढ़ाते हुए और साथ hi अब प्रीति के हाथ को लोअर के उप्पेर से पकड़ लोअर के अंदर घुसा देता हु और अपना मुसल कड़क लुंड उसके हाथो ने दबा देता हु, और जैसे hi प्रीति के मुलसयाम नरम हाथ मेरे लुंड पर अपनी पकड़ बनाते है लुंड एक जोरदार झटके के साथ अपनी औकाद में आजाता है, :- अह्ह्ह्हह्हह प्रीति उम्म्म्म कितना नरम हाथ है तेरा उफ्फ्फफ्फ्फ़ कितना मस्त महसूस हो रहा मेरे लुंड पर और जोश में आते हुए इसी कारन से उसकी छूट में ऊँगली और तेजी से अंदर बहार करते यूए छूट छोड़ने लगता हु.......

जैसे hi प्रीति, ज़िन्दगी में पहली बार अपने हाथो में मस्त कड़क और मोठे लुंड को महसूस करती है तो उसके बदन में एक तेज रफ़्तार से करंट दौड़ जाता है तभी इस एहसास के साथ जब वो अपनी छूट की ऊँगली द्वारा हो रही चुदाई को महसूस करती है तो खुद से hi अपने चूतड़ उठाते हुए अब ऊँगली पर दबाव बनाते हुए छूट उप्पेर निचे घिसने लगती है अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम सुन्न्नी भोत ाचा लग र्ष है उनममम िष्ठ्हह भौ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उनननममम सुननीयिययी करता रह रुकना मत अह्हह्ह्ह्ह उम्म्म्म भईई....

और प्रीति की ये बात सुन मुझे यकीं हो गया की अब प्रीति की छूट पूरी तरहसे गरमा गयी है और पानी बश्शने लगी है तो मेटे अपनी उंगलिओ की गति और तेज कर दी और पूरी गति से एक ऊँगली को अंदर बहार करने लगता हु...

अह्हह्ह्ह्ह ुम्मणममम इस्स्स्सह्ह्ह्ह सुन्न्नीयी हसससससननननन एसससससस उफ्फ्फफ्फ्फ़ भईईई िष्ठ्हहहह अह्ह्ह्ह करते हुए अपनी छूट की चुदाई में मस्त होती हुई प्रीति अब अपने हाथ में पकडे मेरे लुंड को कास के मुट्ठी में पकड़ लेती है और उसेसहलाते हुए आगे पीछे करते हुए मुठियाने लगतीहै और साथ hi पूरी मस्ती में अपनी छूट की चुदाई करवाने लगती है उम्मम्मम शहहहहह अह्ह्ह्हह भ्सी उम्म्म्मम्न ufffffffffff ओह्ह्ह्हह्हह...

मेरे और प्रीति दोनों के hi जिस्म में लगी आग अब पूरी तरह भड़क चुकी होती है और अभी प्रीति की मस्ती देख उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार करते हुए अंगूठे से छूट के डेन को घिसने लगता हु साथ hi उसकी एक निप्पल को मुँह में भर जोर जोर से चूसते हुए खींचने लगता हु....

अपने कामुक शरीर पर इस तरह हर दिशा से वार होते हुए महसूस कर अब प्रीति की काम वासना अपने चरम पर पहुंच रही थी और इस कारन अब उत्तेजित होते हुए प्रीति ने अपनी कमर को हिलने की गति बढ़ा दी थी और अपने हाथ से मेरे हाथ को छूट पर जोर से दबाने लगी थी और दूसरे हाथ से मेरे लुंड पर पकड़ और मजबूत करते हुए उसे हिलने लगती है... अह्ह्ह्हह्हह ुम्मणममम सुन्न्नीयीय उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ भईईई क्या हो रहा है मुझे अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम्म भोतमजा आ रहा हैईईई उफ्फ्फफ्फ्फ़ ओह्ह्ह्हह ुमननममममममहसससससननननहहहहहहहह

और प्रीति को इस तरह उत्साहित और उत्तेजित होते डेझ में समझ गया की अब वो किसी भी वक्त झाडसाकति है और तभी मेने अपना लोअर निचे सरकते हुए अपना लुंड लोअर से बहार निकल दिया जिस्सेकी अब मेरा लुंड पूरी ततः नग्न अवस्था में प्रीति की नजरो के सामने था.....

एक मुसल कड़क मोठे पूरी औकाद में आये हुए भाई के लुंड को देख प्रीति की आखे बड़ी हो के एकटक उसे देखने मेंव्यस्त हो गयी और बाकि का उसका शारित ऊँगली की चुदाई सेऔर लुंड को इस तरह नंगा देखने की उत्तेजना और गर्मी को सहनाही सका और इसी दौरान प्रीति अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम ओह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह ुष्ठ्हहहह करती हुई अपनी आँखों को खोल बंद करते हुए कमर के झटको के साथ दोबारा झड़ने लग जाती है उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फगफ्फफ्फ्फ्फ्फ़...

दो बार झड़ने के बाद अब प्रीति पूरी तरह से थक चुकी थी और सीधा बिस्तर पर गिर पड़ती है और अपनी उखड़ी हुई साँसों को सँभालने लगती है..

प्रीति का ये हाल देख में भी उसके पास hi बैठ कर उसे सँभालते हुए...:- कैसा लग रहा है प्रीति ab,maja आया न आज उम्म्माह

प्रीति, अपनी आँखे खोल थूक गटकते हुए :- ओह्ह्ह्हह सुननयीय आज से पहले इस तरह कभी में नहीं झड़ी और जितना फ्री और रिलैक्स आज मुझे महसूस हो रहा है पहले कभी नहीं हुआ भाई ुणंममम

मैं,:- वैसे एक बात तो है, तू वाकई भोत गरम लड़की है प्रीति, और जितनी गरम उतनी hi कमसिन कासी हुई, सच मुझे भी आज तेरे साथ इस तरह प्यार का मस्ती भरा खेल खेलने में भोत मजा आ रहा है... उम्म्म्मशआह

प्रीति, ये महसूस कर की मेरा लुंड अब भी उसके हाथ में hi है, हाथ में लुंड को सहलाते हुए :- उफ्फफ्फ्फ़ सुननीयीय पर एक बात कहु तुझसे, तेरा ये लुंड कितना मोटा है भाई, और जितना मोटा उससेज्यादा लंवा और कड़क उफ्फफ्फ्फ़... और तू क्या काग रहा था की ये लुंड मेरी इस छूट में घुसा कर मेरी चुदाई करना चाहता है हैईईई...

मैं, :- उम्म्म हैं प्रीति सही सुना तूने, में मेरा ये मुसल लुंड तेरी छूट में पेल कर तुझे भोत मजे से रगड़ कर छोड़ते हुए तेरा कुंवारापन चिन्ना चाहता हु...

प्रीति, मोठे लुंड के छूट में घुसने की बात से घबराते हुए :- लेकिन सनी ये कितना मोटा और लम्बा है, ये मेरी छूट में कैसे जायेगा.. नहीं भाई मुझे नहीं लेना ये लुंड... उम्म्म में तो इमेजिन भी नहीं कर सकती की ये मेरी छूट में घुसेगा िष्ठ्हह..

मैं, ये समझते हुए की प्रीति के लिए ये पहली दफा है जब उसने लुंड देखा है और आज तक उसने अपनी छूट में ठीक से ऊँगली नहीं डलवाई तो लुंड जाने की बात से घबराना लाजमी है, उसे सँभालते हुए :- अरे प्रीति तू इतनी टेंशन क्यों ले रही है, में कुछ गलत नहीं करूँगा समझी और वैसे भी मुझे पता है इसे लेते हुए तुझे तकलीफ होगु इसलिए तो तुझे इतनी देर से इस तरह प्यार करते हुए इसके लिए तैयारकर रहा हु न...

प्रीति, कही न कही जिस्म की इस इच्छा को समझते हुए की उसका शरीर इस लुंड की छह कर रहा है और उसकी छूट में लेने की बात से नए अनुभव की तरफ आकर्षित होते हुए और मेरे लुंड को सहलाते हुए :- सुंननीयियय में मानती हु तेरी सब बाटे सही है और कही न कही मुझे भी इस अनुभव को जीना है पर भाई देख न तूने आज सिर्फ एक ऊँगली डाली और मेरा क्या हाल हुआ है जब ये लुंड मेरी छूट में जायेगा तो पता नहीं मेरा क्या हाल होने वाला है, मई इसको लेने से पहले अचे से तैयार होना चाहती हु, खुद को प्रेपर करना चाहती हु, जैसा तूने कहा की इसको लेने के बाद तेरी ये बेहेन कुवारी नहीं रहेगी और चूड़ी हुई लड़की हो जाएगी तो में मेरा ये पहला अनुबाव अचे से जीना चाहती हु और इसके लिए मुझे थोड़ा वक्त चाहिए पप्स भैई उम्मम्मम्मम

मैं, प्रीति की बात समझते हुए और मन hi मन ये जानते हुए की अब प्रीति की छूट में आग लग चुकी है आज नहीं तो कल वो मेरे लुंड के निचे आ कर hi रहेगी, पर फिलहाल जितना मिला उसी में संतुष्टि रखने में फायदा है वार्ना कही हल्द्बाजी और चुदाई की भूख में सब गड़बड़ न हो जाये :- उम्मम्मम्म प्रीति तेरे संग इस हद तक आगे बढ़ने के बाद अब मुझे खुद को रोकने की बिलकुल इच्छा नहीं है, मन कर रहा हाउ की अभी तेरी छूट को खा जाऊ और तेरे कुंवारेपन को भोग लू ुमनममममम...

प्रीति, लुंड को मुट्ठी में पकड़ कर :- सनी मुझे पता है तू क्या चाहता है मेरे भाई और में तुझसे वडा करती हु की तुझे ये ख़ुशी भोत जल्दी दूंगी , आज तेरे साथ में यहाँ पूरी नंगी सोइ हुई हु और कितनी देर से तुझसे अपने शरीर से खेलने दे रही हु और मेने अपना पूरा जिस्म तेरे आगे नंगा रख तुझसे जी भार प्यार करवाया है तो मुझे थोड़ा वक्त और देदे ताकि में तेरे इस मोठे से लुंड को लेने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाऊ और हैं जितना बेचैन तू मुझे छोड़ने के लिए है अब उतनी hi बेचैनी की आग मुझमे भी भड़कने वाली है आज तेरे इस लुंड को देखने के बाद भाई उम्म्म्म..

मैं :- उम्मम्ममाहाहहहह ठीक है प्रीति मुझे तू कह रही है तो में आज यही रुक जाता हु पर मुझे उस पल का इंतज़ार रहेगा जब तू मेरे पास आएगी और मेरे इस लुंड को अपनी छूट के मुहाने पर रख खुद से कहेगी की, " सुननीयीय आज छोड़ दे मुझे भोत मचल रही है मेरी छूट तेरे लुंड से छोड़ने के लिए "

प्रीति, शरमाते हुए :- उम्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ धत्त्त बेशरम में ऐसा कभी नहीं कहने वाली समझा, वो तो वक्त आर पर अपने आप हो जायेगा जैसे आज इतना कुछ हुआ है..

मैं, उसकी छूट पर हाथ घुमा :- ः वोटो वक्त hi बताएगा प्रीति, देख लेना तू खुद आएगी अब मेरे पास छोड़ने के लिए ः

प्रीति :- ठीके है देख लेंगे हहै..

मैं, प्रीति की एक चुकी भींचते हुए :- वैसे भोत मस्त जिस्म है तेरा प्रीति वाकई, ये कासी छूट और ये चूचिया तेरी मस्त मुलायम रसीली, अब तो इनको जब मन करे तब चूसने के लिए मुँह घुसा दूंगा ः..

प्रीति :- िष्ठ्हह उफ्फफ्फ्फ़ धिर्री दुखता है उम्म्म्म हहै चूस लेना सनी आज से अब ये तेरे लिए hi है बसससससस मुझे भी भोत मजा आता है जब तू इन्हे ऐसे दबाता और चूसते है तो ummmmm...chal अब सोना नहीं है, इतना थका दिया ह तूने मुझे हहै

और कुछ देर और ऐसे hi बाते करके प्रीति को सुला कर में वापस अपने कमरे में लौट आता हु और खुद से बात करते हुए की, " भले आज प्रीति की चुदाई नहीं कर पाया में लेकिन अब उसके जिस्म में लुंड लेने की और छूट शांत करवाने की भूख जरूर बढ़ा दी है, और वही आग भोत जल्दी उसकी कुंवारी छूट छुड़वाने मेरे पास आएगी....

अगली सुबह मैं और प्रीति तो अपने अपने कमरे में मस्ती से सो रहे थे लेकिन निचे कामिनी भाभी और राहुल भैया डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और मम्मी किचन में ब्रेकफास्ट बनाने में लगी हुई थी और कल राहुल भैया और मम्मी के बिच जो ोाँद हुआ उसके बाद से दोनों के बिच किसी तरह की कोई बात नहीं हुई न hi राहुल भैया मम्मी के सामने आये थे. और कही न कही अब मम्मी के सामने आने में उन्हें एक दर भी था की उनकी पोल पट्टी सबके सामने खुल न जाये वही दूसरी ततः वो चोरी छिपी नज़रो से अब भी मम्मी के जिस्म पर नज़रे गड़ाए हुए थे और खुद मन में यही सोच रहे थे, " चाहे कुछ भी कहो, मम्मी का बदन है गज़ब का और इस जिस्म को पाने के लिए तो हर तरह का रिश्ता कुर्बान है, बस एक बार मम्मी छोड़ने मिल जाये "...

अभी राहुल यही सोच रहा था की उसके कानो में उसकी पत्नी कामिनी, जो फ़ोन में शायद न्यूज़ पढ़ रही थी, की आवाज पड़ती है..

कामिनी :- चींईईई कैसे कैसे लोग है दुनिया में, एक दम बेशरम किस्म के...

राहुल, पत्नी की बात सुन :- ऐसा क्या हो गया कामिनी, किसने क्या बेशर्मी कर दी...

कामिनी :- देखो न राहुल, कैसे कैसे लोग है दुनिया में, आज की एक न्यूज़ में बता रहे है की , " एक बेटे ने अपनी hi मा के साथ जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाने की कोशिश करि ".. मतलब हद है, हैं न!!!!

कामिनी की ये बात सुन महिमा जो किचन में ब्रेकफसिलट तैयार कर चुकी थी उसके बहार लेट हुए, राहुल की तरफ अब भी गुस्से भरी नज़रो से देखते हुए :- सही कहा कामिनी तूने, आअज कल के ज़माने में रिश्तो की कोई कदर hi नहीं रही है... सबको बस एक hi चीज़ दिखाई देती है...

कामिनी :- हैं वही तो मम्मी, देखिये न अब मा के साथ hi जबरदस्ती.... सोच कर hi कितना अजीब लग रहा है मुझे तो..

महिमा, राहुल की तरफ देखते हुए :- जो हम सोच भी नहीं सकते, करने वाले उसे करने के लिए कुछ भी कर जाते है...

कामिनी :- में तो कहती हु की ऐसे बेटो की माँ बनने से तो ाचा है की ऐसे बेटे hi न हो!!!!

राहुल, जो अब तक दोनों की बाटे सुन रहा था और अपनी मम्मी की नज़रे देख ये समझ गया था की उनका इशारा उसकी तरफ hi है और कामिनी की आखरी बात सुन :- कॉमन कामिनी, अब आधी अधूरी कहानी जान कर तुम इस तरह बेटे पर तो ब्लामे नहीं कर सकती हो न...

कामिनी, चोकते हुए :- नहीं कर सकती से क्या मतलब है तुम्हारा राहुल???? और कोनसी हकीकत जणू और में??? एक इंसान अपनी hi माँ से जबरदस्ती कर रहा है, चाहे कैसी भी स्तिथि हो कुछ भी मनोदशा हो, ये चीज तो हर तरह से एक गुनाह hi है...

राहुल, तिरछी नज़र से महिमा को देख :- पर ये भी तो हो सकता है न की उस बेटे के अपने मा के प्रति कुछ अलग विचार हो और शायद मा से उसे मनचाहा प्यार नहीं मिल रहा हो या ोहिर ये भी हो सकता है की उसने अपनी hi माँ को किसी तरह की परेशानी में देखा हो और वो उसकी मदद करना छह रहा हो...

(यहाँ परेशानी से राहुल का मतलब अकेलेपन में चुदाई के लिए तड़पने की परेशानी से है जो वो इंदिरेक्ट्ली महिमा को सुना रहा )

कामिनी :- ओह कॉमन राहुल, अरे यू सीरियस!!!! तुम्हे पता भी है तुम क्या कह रहे हो... दुनिया में शायद hi ऐसा कोई बीटा होगा जिसे उसकी माँ प्यार न करे समझे और ये कौनसा प्यार है जिसके लिए माँ से hi जिस्मानी सुख पाने की जबरदस्ती करनी पद जाये...

राहुल :- कामिनी.......

अभी राहुल अपनी बात करता उससे पहले महिमा :- पाप है ये कामिनी पाप और कुछ भी नहीं, और जो इसे माँ का प्यार पाने का जरिया समझ रहे है ये उनका घोर अपराध और गलत फेमि है... माँ बेटे के रिश्ते का अपमान है और कुछ नहीं...

कामिनी :- हाँ एक्साक्ट्ली माँ, मतलब ये कैसी बात हुई राहुल...

महिमा:- और में तो कहती हु इसे प्यार तो किसी भी तरह से नहीं कहा जा सकता है, बल्कि ये तो उस बेटे की माँ के प्रति हवस है जो उसे इंसान से जानवर बना रही है और अपनी hi माँ के साथ ये सब करने पर मजबूर कर रही है... और इस गुनाह की कभी कोई माफ़ी नहीं हो सकती सिर्फ सजा मिलनी चाहिए ऐसे बेटो को तो...

कामिनी :- में पूर्ण रूप से सहमत हु माँ इस बात पर आपसे पर आपको क्या लगता है क्या सजा मिलनी चाहिए इस लड़के को...

महिमा, राहुल की तरफ बिना पालक झपकाए देखते हुए :- में तो कहती हु की अपनी hi मा से जबरदस्ती शारीरिक समबन्ध बनाने जैसी घिनौनी हरकत करने वाले बेटे से सरे रिश्ते तोड़ देने चाहिए और वो भी ज़िन्दगी भर के लिए, इस गुनाह की कोई माफ़ी नहीं है और kamini,jaisa तुमने पहले कहा की ऐसा बीटा होने से ाचा तो बीटा हो hi नाहा, बिलकुल सही कहा!!!!! कलंक है वो बेटे के नाम पर!!!

राहुल, जो इतनी देर से बीवी और मम्मी की बाटे सुन रहा था अपनी मम्मी की आखरी बाते सुन कर मन hi मन गुस्सा हो जाता है और बिना कुछ कहे "चलो मुझे देर हो रही है में ऑफिस के लिए निकलता हु बोल कर वह से चला जाता है " और यहाँ सास बहु दोनों भी फिर इस बात को वही ख़तम कर के अपने काम में लग जाते है.

घर से निकल कर गाड़ी में बैठ राहुल गुस्से में खुद से बात करते हुए, " पाप है तो पाप सही, गुनाह है तो गुनाह सही, लेकिन अब मुझे तुम्हारा गदराया बदन उत्तेजित करता है तो करता है मम्मी, नहीं रहा जाता जब आप सामने होती हो तो, बस यही मन करता है की आपकी तड़पती जवानी को अपने निचे ला कर रगड़ रगड़ कर छोड़ कर उस रसीली छूट में मेरा वीर्य भर दू, और इसके लिए मुझे हर सजा मंज़ूर है... अब अगर घर का बीटा मम्मी से इतनी सी उम्मीद कर रहा है तो बुराई क्या है, वैसे भी शारीरिक सुख तो पापा दे नहीं रहे जब घर में hi लुंड मिल रहा तो नाटक कर रही है हँ... लेकिन कुछ भी हो मुझे एक बार तो मम्मी का जिस्म चखना है और वो में चख कर रहूँगा और इसी गुस्से में राहुल गाड़ी के एक्सेलरेटर पर पैर दबाते हुए ऑफिस के लिए निकल पड़ता है.

वही दूसरी तरफ दूसरे शहर में सुबह सुबह मानव की नींद खुलती है और सीमा को कमरे में न पा कर वो उसे ढूढंते हुए और इस उत्सुकता में की कही सीमा नाहा रही हो तो उसके जवान जिस्म का नज़ारा दिखाई पद जाये, वो बिस्तर से उठता है और बाथरूम की तरफ बढ़ने लगता है जहा अंदर से उसे सीमा के गुनगुनाने की आवाज सुनाई पड़ती है.

बेटी की आवाज सुनने से hi लोअर में सोया मानव का लुंड अंगड़ाई लेने लगता है और उसे हाथ में सहलाते हुए वो उस दरवाजे की तरफ आगे बढ़ता है और कही किसी तरह से अंदर झाकने की तरकीब खोजता है और तभी उसकी नज़र कीहोल में पड़ती है जिसे देख उसके चेहरे पर एक मुस्कान आती है और वो निचे घुटनो के बल बैठ कीहोल के अंदर झाकने लगता है.

अंदर झाकते hi मानव की आँखे एक दम खुली के खुली रह जाती है और उसका हाथ अपने आप अपने लोअर के अंदर लुंड पर पहुंच जाता हाउ और उसे सहलाने लगता है और ऐसा होता भी क्यों नहीं अंदर बाथरूम में इस वक्त सीमा एक लाल रंग की पंतय और लाल रंग की ब्रा में कड़ी थी, जहा उसकी वो ब्रा उसकी वज़नदार चुचिओ को संभल नहीं प् रही थी और वज़न के कारन वो निचे ज़मीं की तरफ हलकी सी झुकी हुई थी और मस्त गोर चिकने चूतड़ों के बिच फांसी वो लाल पंतय जो नाम मात्रा के लिए गांड छिपा रही थी वो बिलकुल इस वक्त मानव की नज़रो के सामने थी.

अभी ये नज़ारा देखते हुए मानव ने अपनी पालक झपकाई नहीं थी की अंदर सीमा उसके विपरीत दिशा में घूम पीठ और चूतड़ मानव की तरफ कर ब्रा के हुक भी खोल देती है और अपने मुलायम कंधो से अपनी मोती चुचिओ का वज़न सह रही ब्रा की उन स्ट्रैप्स को निकलते हुए बदन से अलग कर देती है.

अपनी आँखों के सामने अपनी बेटी द्वारा इस तरह ब्रा उतारते देख और फिर उसकी नंगी पीठ देख और ये कल्पना करते हुए की अगर सीमा एक बार पलट जाये तो उसकी वो रसीली दुधारू मुलायम चूचिया मेरी नज़रो क सामने आजाये, मानव पाजामे के अंदर hi पूरी गति से अपने लुंड को मुट्ठी में भर हिलने लगता है..

हसीं नज़ारे ने मजा दुगुना तब होता है जब उप्पेर शावर में से गिरता हुआ पानी सीमा का बदन भिगोने लगता है और बेटी के जिस्म पर गिरती हुई पानी की उन बूंदो को देख मानव उन बूंदो में अपने लुंड के पानी की बूंदो का एहसास लड़ने लगता है और साथ hi सर से होतु हुई नंगी पीठ से सरकते हुए पानी को बेटी सीमा की पंतय के अंदर घुसते हुए चूतड़ों से चिपकते देख अब मानव के लुंड ने विकराल रूप ले लिए था और नसे फूलने लगी थी और इसी वजह से अब उसने लुंड पर मुट्ठी की पकड़ और टाइट कर ली थी और मुठ मरने की गति पुरे जोरो पर थी.

वह सीमा इस बात से अनजान की आज उसकी जवानी का मजा उसके पापा इस हद तक ले रहे थे की इस वक्त उनकी नज़रे उसके अर्धनंगे जिस्म पर एक तक जमी हुई थी, वो अपने गीले बालो को सँभालते हुए दोनों हाथ कभी उप्पेर कर, तो कभी चेहरे पर घूमते हुए तो कभी अपनी दोनों चुचिओ पर ले जा उन्हें दबा कर पानी से धोने में मस्त थी और ये सब नज़ारे अब मानव के लुंड को और बेकाबू कर रहे थे और तभी सीमा अपनी पंतय के अंदर अपना एक हाथ घुसा कर छूट को पानी से धोने के लिए उसे मुट्ठी में पकड़ कर हल्का सा दबाव बना लेती है, जिसे देख मानव के लुंड का सब्र टूट जाता है और मन hi मन ये सोचते हुए की , "अह्ह्ह्ह सीमा बेटी काश मेरा हाथ इस वक्त तेरी उस नरम गरम छूट पर होता और में उसे दबोच कर मस्त घिसते हुए चाटने का मौका नसीब कर पता उम्म्म मजा आजाता उफ्फ्फ्फ़ कितना मस्त बदन है बेटी तुम्हारा अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ " अपने पाजामे में hi लुंड अपनी पिचकारी चोरते हुए सारा पानी बहा देता है.

लुंड की पिचकारी छूटने के बाद भी मानव का बेटी सीमा के जिस्म से नज़र हटाने का मन नहीं होता है और वो वैसेही बैठे हुए सीमा का पूरा नहाना एन्जॉय करता है और जब सीमा बाथरूम से बहार निकलने वाली होती है ये देख वो तुरंत वापस वह से उठ कर बिस्तर पर आजाता है.

और बिस्तर पर आकर बस दोबारा अपनी बेटी सीमा के नज़रो को याद करते हुए सोचने लगता है, " वाकई कितना हसीं और जवान भरा जिस्म हिअ सीमा का, उफ्फ्फ मन तो किया था बाथ्रून का दरवाजा तोड़ वही अंदर घुस जाऊ और इस लुंड को बेटी की छूट में पेल मस्ती भरी चुदाई कर दू उफ्फफ्फ्फ़ लेकिन पता नहीं ये मौका कभी हकीकत में नसीब होगा भी या नहीं, में जितना जवान जिस्म का प्यासा और चुदाई का भूखा, सीमा मेरी विपरीत एक दम उसूलो और रिश्तो की इज्जत करने वाली, वैसे भी अभी तो मेरी सच्चाई जान कर हमारे रिश्ते में थोड़ी खटास सी आ चुकी है और अब धीरे धीरे जब वो रिश्ता वापस सुधर रहा है तो में अपने जोश में आकर किसी तरह की गलती नहीं कर सकता हु.

अभी मानव इसी विचारो में खोया था की दरवाजे पर दस्तक होती है और दरवाजा खोलने पर सामने रागिनी कड़ी होती है जो ये यद् दिलाने आयी थी की कुछ hi देर में उन्हें घर के लिए वापस निकलना है और सीमा को भी आवाज दे कर जल्दी रेडी होने को कह कर वापस चली जाती है, जिसके बाद सब रेडी हो कर घर वापस आने के लिए निकल पड़ते है.

दोस्तों कहानी के अपडेट में जैसे hi समय मिलता hau,niyat गति से लिखता आ रहा हु पर मुझे आपका साथ भी उतना hi ज़रूरी है और में जानता हु की कहानी बहोतो के द्वारा पसंद की जा रही है परन्तु में चाहूंगा की अगर अपने कुछ मिनट निकलकर अगर अपना कीमती कमेंट भी साथ में पोस्ट करोगे तो मुझे कहानी लिखने में ज्यादा मज़ा आएगा वार्ना कभी कभी कमैंट्स की कमी 😜 देख कहानी लिखने का उत्साह धीमा पद जाता है.... साथ बनाये रखने के किये धन्यवाद्...

 
Back
Top