Romance भंवर (पूर्ण) - Page 13 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-101

"मां आपको पता नहीं, केवल इस अपस्यु ने ही नहीं, बल्कि इस ऐमी की बच्ची ने भी हमे बहुत दर्द दिए है। एक किस्से हो इनके परेशान करने के तो मै बताऊं ना। जब भी मौका मिला है हमे ऐसे उलझकर बेबस कर देते जिसकी कोई सीमा नहीं। और हमे फसाकर दोनो बाहर बैठकर मज़े लेते रहते थे… आज मौका मिला है.. मै तो सोच रही हूं दोनो ने जब अपनी फीलिंग जाहिर कर दी है, उसके बाद तो हमेशा साथ ही दिखने वाले है… अब तो किसी के कहने से भी रुकने कहा वाले। मै तो कहती हूं 1 महीना दोनो को रूम म पैक कर दो और वो भी मोबाइल के बिना"..

नंदनी:- जो पहले से सजा झेल रहे हो उन्हें और कितनी सजा दोगे। जहां ये इतने लंबे अरसे से पराए नजर आ रहे थे, वहां इनके लिए महीने तो क्या साल भर अलग रख दो घूट लेंगे, लेकिन कुछ कहेंगे नहीं। मेरे हिसाब से दोनो की शादी ही बेहतर सजा होगी। हमेशा दोनो साथ रहेंगे…

अपस्यु:- आप लोगों को हमारे बारे में जानना था, आपने जान लिया। लेकिन अभी हम शादी नहीं कर सकते।

ऐमी:- येस.. अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है।

नंदनी:- एक चोरी छिपे शादी, जिसमें घर के ही लोग होंगे बस। तुम्हे बाहर जो और जैसा मेंटेन करना हो कर लो, हम में से कोई कुछ नहीं बोलेगा।

कुंजल:- नाह ! ऐसे कैसे मात्र कुछ लोग की के बीच शादी होगी… हम बारात लेकर जाएंगे। पूरे बाजे-गाजे के साथ, एक रॉयल वेडिंग होगी।

अपस्यु:- बहना बिल्कुल सही बोली, पहले आपस में तो फैसला कर लो कि करना क्या है, जबतक हम घूमकर आते है। चलो ऐमी…

ऐमी:- हां ये भी सही है, अब इन्हीं को फैसला कर लेने दो…

अपस्यु अपने चेयर से खड़ा हुआ और अपना एक हाथ ऐमी के ओर बढ़ा दिया। ऐमी मुस्कुराती हुई वह हाथ थाम ली और दोनो सबके सामने से वहां से जाने लगे… "वाह मतलब दोनो सामने से रोमांस पर निकल रहे है और आप सब बैठकर सोचते रहो। यही मुझे लावणी को देखने की भी सजा मिल जाती है।"..

आरव की बात सुनकर सभी हसने लगे और इधर दोनो सबको अनदेखा करके निकल गए। जैसे ही बाहर आए ऐमी मुस्कुराती हुई कहने कहीं… "मैं बहुत बकबक करती हूं।"…. "बहुत नहीं, बहुत से भी ज्यादा.. और उतनी ही प्यारी भी"

ऐमी अपना सर अपस्यु के सीने से टिकाकर उसके कंधे में दोनो हाथ फसा दी और अपस्यु ऐमी की कमर में हाथ डालकर, दोनो खुले एहसासों में डूबे, बस खुशी से मुसकुराते चल रहे थे। कार दिल्ली-देहरादून के हाईवे पर थी और कुछ देर की ड्राइविंग के बाद दोनो घाटी में पहुंचे, कार को सड़क से नीचे उतारकर, दोनो कुछ दूर अंदर पेड़ों के बीच जाकर, एक पेड़ के नीचे बैठ गए, कुछ दूर आगे ही पहाड़ का किनारा था और नीचे खाई।

अपस्यु पेड़ से टिककर बैठा था और ऐमी उसके गोद में सर रखकर आखें मुंदी बस खो सी गई। अपस्यु उसके सर पर धीरे-धीरे हाथ फेरते हुए, उसके चेहरे को देखकर आंनद ले रहा था… "यहां सुलाने लाए थे क्या? कुछ कहो ना"..………. "मन नहीं, जब तुम नहीं होती तो बहुत कुछ होता है कहने को"……... ऐमी उठकर अपना सर अपस्यु के सीने से टीकाती, खुद को सिकोड़कर अपस्यु में पूरी तरह सिमटती, प्यारी सी धीमी आवाज़ में कहने लगी… "मै पूरी होना चाहती हुई, मेरी भी शादी की इक्छा है अपस्यु।"..

"हां जनता हूं ऐमी"… अपस्यु, ऐमी को बाहों में समेटकर उसके सर पर चूमते हुए कहने लगा और अपना चेहरा उसके सर पर टिका कर अपनी आखें मूंद लिया। धीमी-धीमी चलती श्वांस की चलने कि मधुर ध्वनि और धड़कनों को महसूस करना, खोए से आलम में प्रेम रस घोल रहे थे।

दोनो पहली बार बेफिक्र होकर एक दूसरे को महसूस कर रहे थे और ना जाने कब से इस पल को जीने की एक चाहत अंदर कहीं दबी सी थी।…. "अपस्यु मेरी एक छोटी सी इक्छा है।"………….. "जो तुम्हारी इक्छा है वहीं मेरी भी इक्छा है।"….……….. "ठीक है पहले तुम अपनी इक्छा बताओ।"….……… "नाह तुमने शुरू किया है पहले तुम, बस उसके जवाब में मैं इतना ही कहूंगा इंडिया गेट पर मेरी प्लांनिंग है, वो भी फुल डीजे साउंड और अपना पसंदीदा मूव"…

ऐमी, अपस्यु से अलग होती हुई उसके आखे मुंदे, खोए से चेहरे को देखने लगी। ऐमी के उठने के बाद, अपस्यु के चेहरे पर खुशी और भी फ़ैल गई थी। ऐमी उसके गाल को हाथो में थामती अपने होंठ को उसके होंठ के करीब ले गई। दोनो के होंठ स्पर्श करते ही एक दूसरे में गुम हो जाने कि अनुभूति होने लगी।

अपस्यु अपनी बाहें फैलाकर ऐमी को अपने बाहों के घेरे में ले लिया, और ऐमी अपने दोनो पाऊं, अपस्यु के पाऊं के दोनो ओर करती आराम से उसके गोद में बैतकर होठों के स्पर्श को और गहरा, और मादक बनाती होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगी।

अपस्यु भी अपने हाथ के घेरे की पकड़ को थोड़ा और मजबूत करते, ऐमी को खुद में समेटकर चूमना शुरू कर दिया। दोनो बिल्कुल खोकर एक दूसरे को चूम रहे थे। बीच में दोनो की आखें खुलती होंठ अलग होते, लंबी और गहरी श्वांस दोनो अंदर खिंचते, मुसकुराते हुए एक दूसरे को देखते और बेकरारी में वापस होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगते। ।

दोनो किस्स में खोए हुए थे, तभी दोनो के कंधे पर हाथ पड़ा, किसी के हाथ होने का एहसास हुआ और दोनो अपने प्यार में लिप्त किस्स को तोड़ते अपनी आखें खोलकर देखने लगे… दोनो एक दूसरे से अलग होते खड़े हो गए और सामने वही पुलिस वाला अजिंक्य और उसकी बहन विन्नी को देखकर थोड़े हैरान थे।

थोड़ा असमंजस सी स्तिथि पैदा हो गई। दोनो सामने अजिंक्य को देखकर क्या कहे कुछ समझ नहीं पा रहे थे… "पब्लिक प्लेस पर रोमांस करोगे तो ऐसे ही सिचुएशन फेस करना पड़ता है। विन्नी तो राखी बांधने आयी थी तुम्हे, लेकिन ऐसा लगता है कि तुम्हारे लिए आज का दिन भी अपनी गर्लफ्रेंड के लिए ही है।"..

अपस्यु:- हेय विन्नी कैसी हो ?

विन्नी:- कल मिलती हूं अपस्यु अभी बिज़ी हो शायद।

ऐमी:- नहीं हम 4 बजे तक घर पर ही थे और वहीं से, सबके परमिशन के साथ निकले थे। हमे जरा भी आइडिया नहीं था। वी आर सॉरी।

अजिंक्य:- हम जैसे छोटे लोगों के सर पर तो बेवकूफ का टैग, पैदा होने के साथ ही लग जाता है ना। चल विन्नी।

अपस्यु:- क्या भैय्या, हमेशा आवेश में गलत सोच लेते हो, और बाद में सॉरी-सॉरी करते रहते हो। अब हमे 12 साल बाद प्यार मिला था, सो थोड़े एक दूसरे में खो गए थे.. अब क्या इसी पर डिस्कस करते रहोगे.. और क्या विन्नी भाई बोली है तो अपने भाई और भाभी को ऐसे कोई शर्मिंदा करता है क्या?

अजिंक्य:- 12 साल पुराना प्यार.. यार तू कुछ भी निर्मल करता है कि नहीं.. खैर बांध दे राखी इसे विन्नी और जी लेने दे छोड़े को भी कुछ पल अपने प्यार के साथ…

विन्नी, दोनो को देखकर हंसती हुई अपस्यु के हाथ पर राखी बांध दी। जैसे ही दोनो जाने के लिए पलट रहे थे तभी अपस्यु अजिंक्य को रोकते… "भैय्या आप वो लड़का क्रिश को जानते हो क्या?"

अजिंक्य:- कौन वो रेस्टुरेंट को दुकान बोलने वाला लड़का, जो विन्नी के साथ पढ़ता है।

विन्नी:- चलो भईया, इन्हे आज अकेला छोड़ दो, बचपन का प्यार मिला है। कल बात कर लेना।

अजिंक्य:- तू रुक एक मिनट… क्या हुआ अपस्यु वो लड़का फिर मेरी बहन के चक्कर काटता है क्या?

अपस्यु:- हां वो चक्कर काटता है, और "फिर" जैसी कोई बात नहीं है, वो लगातार चक्कर काटता है। मै चाहता हूं कल आप जाकर उसके परिवार से मिले और दोनो को फाइनल चक्कर कटवा कर एक कर दीजिए।

अजिंक्य कुछ सोच में पड़ गया… "क्या हुआ भईया, इतना क्या सोच रहे हैं। मैंने घर परिवार और लड़का सबके विषय में पाता करवा चुका हूं। 2 दिन पहले ही यूएसए से लौटा हूं तो उधर आने का मौका नहीं मिला, वरना घर तो आता ही ये बात करने।"..

अजिंक्य:- बात वो नहीं है अपस्यु। गांव और रिश्तेदारों से क्या कहेंगे वो सोच रहा हूं।

अपस्यु:- कौन ईमानदार पुलिस वाला है। और कौन अब अपने बहन के अधिकारों का हनन बस दक्यानुषी सोच से कर रहा है।

अजिंक्य:- लेकिन समाज के बनाए नियम।

अपस्यु:- यदि समाज डाका डालने के नियम को बना दे तो क्या कानूनन जायज है?

अजिंक्य:- लेकिन समाज में ऐसा कोई नियम कहां है। भ्रमाओ नहीं मुझे।

अपस्यु:- किसी की खुशियों पर, नियम के नाम से डाका डालना आपको अपराध नहीं लग रहा क्या? वैसे भी शास्त्र में जहां कभी वर्ण था ही नहीं फिर आज विवाह के लिए एक ही जात का नियम कहां से आ गया। जाकर पहले शास्त्र उलट आइए.. फिर बात करते हैं। या नहीं तो कल प्रवचन के लिए पहुंचता हूं।

अजिंक्य:- रहने दीजिए बाबा जी मै सहमत हो गया आपकी बातों से। तू ही मेडिएटर होगा और कल ही रिश्ते की बात करने चलेंगे..

"ये हुई ना बात भैय्या".. अपस्यु अपनी बात कहते हुए विन्नी के ओर देखने लगा। विन्नी की आखें उसे धन्यवाद कह रही थी और चेहरा खिला हुआ था। दोनो के वहां से जाते ही ऐमी, अपस्यु के सीने से लगती हुई कहने लगी… "सबने मिलकर हमसे बदला लिया है।"

अपस्यु:- छोड़ो उसको, कल से काम शुरू होगा, ध्रुव कल आ रहा है।

ऐमी:- हम्मम ! इधर कोई तैयार नहीं है। यदि आरव को छोड़ दिया जाए तो बाकी सब दम तोड़ देंगे। पार्थ को हुआ क्या है अपस्यु, उसकी प्रशिक्षण स्तर बढ़ने के बदले धीरे-धीरे नीचे आ रहा है।

अपस्यु:- मतलब साफ है वो अतीत भूलता जा रहा है। चलो ये भी अच्छा है। खैर समस्या ना तो प्रकाश है और ना ही विक्रम। इन दोनों के पास अतुलनीय बल है लेकिन छल नहीं।

ऐमी:- 3 महीने का वक्त ज्यादा लग रहा है, आंटी को जल्द ही मायलो ग्रुप का चार्ज दिलवा दो।

अपस्यु:- नहीं शेड्यूल से चलने दो। मै एक उलझन में हूं बस उसपर विचार शुरू करना है।

ऐमी:- मस्क एंड हायड थेओरी ना। उसी की बात पर सोच रहे ना।

अपस्यु:- एग्जैक्टली। उसी पर सोच तो रहा हूं, लेकिन लूप बहुत ज्यादा है, किसी एक क्लू से सब सामने होगा।

ऐमी:- मुझे ये बकवास आइडिया लग रहा है और प्रैक्टिकली संभव भी नहीं। ऐसा रील लाइफ में ही सब कुछ चलता है कि…. मर गए, छिप गए और फिर एक दम से सामने आ गए। आज कल इंटरनेट है, मोबाइल है, और फिर आप का बॉडी स्कैन है। सारा डेटा कहीं ना कहीं स्टोर होते रहता है। ऐसे छिपने के लिए जितने फुल प्रूफ प्लान और कंडीशंन की जरूरत पड़ेगी, उससे कहीं कम कोशिश में उस शार्क के झुंड को धर दबोचेंगे जो खुद को सबसे बड़ा छलिया समझता है।..

अपस्यु ऐमी की आंखों में देखते हुए हसने लगा और उसके कमर में हाथ डालकर, खुद में पुरा समेटते हुए उसके होठ को चूमते…. "मतलब तुमने सब प्लान कर लिया है।"

ऐमी:- तुम यहां थे नहीं, करने को कोई काम भी नहीं था और सच कहूं तो इस बार तुम्हे देखने की कभी-कभी इक्छा ऐसे जोड़ करती की खुद कर काबू करना मुश्किल हो जाता था। दिमाग को थोड़ा उलझाना था इसलिए अपने आखिरी शिकार पर पुरा प्लान कर लिया।

जैसा की हमने तय किया था, हालांकि प्लान में पहले तो प्रकाश ही था, विक्रम तो अब जुड़ा है, फिर भी, जैसा हमने तय किया था इनको एक अज्ञात मौत देने के बाद, सबको उनके सामन्य जीवन जीने के लिए अलग कर देंगे।

अपस्यु:- और प्लान एक्जीक्यूशन टाइम..

ऐमी:- लोकसभा चुनाव .. जून 2016।

अपस्यु:- कमाल कर दिया ऐमी। वैसे जब मै यूएसए में था तब तुम मुझे मिस भी कर रही थी या फिर प्लान पर ही वर्कआउट कर रही थी।

ऐमी:- मूझेसे दूर तुम इन्हीं की वजह से तो हो। इनको जितनी जल्दी और जितनी सावधानी से साफ कर दूं, उतनी ही जल्दी हम साथ होंगे…

ऐमी अपनी बात समाप्त करती अपस्यु के होटों को चूमती वहां से चलने के लिए कहने लगी। दोनो ऐमी के बंगलो में पहुंचे और वर्क सेक्शन वाले कमरे में पहुंचते ही… अपस्यु हसरत भरी नजरों से देखते हुए कहने लगा…. "आज भी कुछ नहीं होगा क्या?"

ऐमी:- ऑफ ओ.. मुझे गुस्सा मत दिलाओ अपस्यु, यहां से काम करके निकलेंगे। तुम मेरे ही घर में ऐसा सोच भी कैसे सकते हो। ऊपर से वहां पुरा परिवार इंतजार कर रहा होगा। पता नहीं डैड और वैभव को आ जाना चाहिए, अब तक वहीं है।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है पूरी आउटलाइन समझाओ मुझे, फिर चलते है।

तकरीबन एक घंटे तक नई योजना पर पूरी चर्चा चली। हर बड़िकियों और पहलू पर गौर करने के बाद अपस्यु..… "यहां कुछ तो कमी लग रही है मुझे ऐमी, 3 दिन बाद हम मुक्ता अपार्टमेंट में ही एक बार और चर्चा करते है।"

ऐमी, अपस्यु की हालत पर हंसती हुई कहने लगी…. "सरियसली अपस्यु, तुम्हे नहीं लगता आज कल कुछ ज्यादा ही एडवांटेज लेने की कोशिश करते हो।"

अपस्यु:- और तुम्हे नहीं लगता कि आजकल कुछ ज्यादा ही तुम मुझे, मेरी खुशियों से मशरूम रखने की लगातार कोशिश करती हो। रियली, 2-3 महीने में कभी एक मौका.. जस्टिफाई है क्या?

ऐमी:- सारी इक्छाओं को वश में करना सीखो बच्चा, तभी जीवन सुखी होगा..

अपस्यु:- हाहाहाहाहा.. ठीक है बाबा समझ गया.. अब नहीं करता परेशान। नऊ हैप्पी..

ऐमी:- बिल्कुल नहीं सर.. परेशान करते रहिए.. मूड-मूड पर डिपेंड करता है।

अपस्यु:- ज्यादा भावनाओ को बढ़ावा ना दो, वरना नतीजे के लिए तैयार रहना।

ऐमी:- मैं तो शुरू से तैयार हूं.. पहले टेस्ट तो हो जाने दो, फिर नतीजों को भी समझ लेंगे।

अपस्यु:- रहने दो कोई फाइटिंग टेस्ट के मूड से नहीं हूं मै। सभी बात हो गई हो तो चले यहां से।

"बस एक बात, ध्यान से सुनो। श्रेया और मेघा के साथ तुम्हे कंप्लीट इंगेज होना पड़ेगा। समझ लो इस प्लान के दो मुख्य बिंदु तुम्हारे हिस्से में है, जिसके बिना हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। जो भी उन्हें चाहिए उन्हें दो। दोनो को जितना पसंद है, तो जिताओ। दोनो अगर सोचती है कि तुम्हारा वो इस्तमाल अच्छे से कर सकती है, तो उन्हें करने दो तुम्हारा इस्तमाल। इस बार भी हम वहीं खेल रचेंगे.. बिल्कुल उनके सामने होंगे, लेकिन कभी नजर नहीं आएंगे।"…
 
Update:- 102

"बस एक बात, ध्यान से सुनो। श्रेया और मेघा के साथ तुम्हे कंप्लीट इंगेज होना पड़ेगा। समझ लो इस प्लान के दो मुख्य बिंदु तुम्हारे हिस्से में है, जिसके बिना हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। जो भी उन्हें चाहिए उन्हें दो। दोनो को जितना पसंद है, तो जिताओ। दोनो अगर सोचती है कि तुम्हारा वो इस्तमाल अच्छे से कर सकती है, तो उन्हें करने दो तुम्हारा इस्तमाल। इस बार भी हम वहीं खेल रचेंगे.. बिल्कुल उनके सामने होंगे, लेकिन कभी नजर नहीं आएंगे।"…

सभी बातों पर चर्चा होने के बाद अपस्यु और ऐमी वहां से वापस लौट आए। रास्ते भर वहीं हसरत भरी नजर और दिल के अरमान। खैर जैसे ही दोनो घर पहुंचे एक बार फिर से दोनो को घेर लिया गया। हर कोई अपस्यु और ऐमी पर शादी के लिए दवाब बनाने लगे और दोनो अभी कुछ दिन रुक जाने के लिए विनती कर रहे थे।

लेकिन घर में कोई ऐसा नहीं था जो उनकी बात सुने। ऐमी, अपस्यु को देखकर मुस्कुराने लगी और हर किसी के भावनाओं को ध्यान में रखकर ऐमी ने जनवरी से फरवरी के बीच कोई भी तारीख तय कर लेने बोल दी। ऐसा अनाउंसमेंट सुनकर तो हर कोई खुशी से उछल पड़ा।

अगले दिन ध्रुव भी इंडिया लैंड कर चुका था। दिन भर अपने ससुराल में ही आराम करने के बाद शाम को वो अपस्यु से मिलने चला आया। दोनो के बीच कंपनी को शुरू करने को लेकर चर्चा शुरू हो गई। अपस्यु ने एक हफ्ते का वक्त लिया और इतने वक़्त में सारा काम पूरा हो जाने का आश्वासन दिया। ध्रुव को थोड़ा आश्चर्य भी हुए किन्तु अब साथ में ही थे तो यह कारनामा भी देख ही लेना था।

अगले दिन, सुबह ही ध्रुव, अपस्यु के साथ निकल गया। सबसे पहले तो सिन्हा जी के पास ही दोनो पहुंचे। सिन्हा जी से चूंकि ये ऑफिशली मीटिंग थी, इसलिए पहली बार ध्रुव को एहसास हुआ कि कितना मुश्किल होता है एक नामी वकील से मिलना।

सुबह के 11 बजे की मीटिंग री-शेड्यूल होकर 3 बजे की कब हो गई, ध्रुव को पता भी नहीं चला। अंततः 3 बजे के आसपास सब सामने थे। .. "11 बजे से आपने 3 बजा दिया, मै ये भूलूंगा नहीं"..

सिन्हा जी:- छोटे मैं थोड़ा व्यस्त हूं, काम थोड़ा जल्दी खत्म कर लें।

अपस्यु:- ठीक है बापू, आप पूरी जानकारी दो, कैसे शुरू होगा प्रोजेक्ट?

सिन्हा जी:- पेपर तैयार है एक सिग्नेचर ले लेना वो जाहिल सोमेश सौरव से। एक दिल्ली मुंसिपल कॉर्पोरेशन में अर्जी देकर सील साइन की रिसीविंग ले लेना। और एक गरेंटर का सिग्नेचर, यदि ये भागते हैं तो पैसों की भरपाई कहां से हो उसके लिए।

अपस्यु:- अब ये यहां 2000 करोड़ का गैरेंटर कहां से लाएंगे।

सिन्हा जी:- अब लूप ही ऐसा है। सरकार सपोर्ट ही नहीं कर रही, तो हम क्या कर सकते है। इकनॉमिक कॉरिडोर में बात करो। फौरन इन्वेंटमेंट वाले सब क्लियर कर देंगे। वहां आदिल रशीद करके होगा, उससे मिल लेना। जितनी जल्दी पूरा करोगे उतनी जल्दी मै हियरिंग होगी।

अपस्यु:- ठीक है एक हफ्ते के बाद की हीयरिंग की डेट ले लो आप।

दोनो लौटकर जब वापस आए तब ध्रुव उसे अपने साथ मिश्रा हाउस लेकर चला गया। दोनो वहीं हॉल में बैठकर सभी पेपर पर नजर दे रहे थे, तभी अपस्यु के मोबाइल की घंटी बजी…

"जी आदेश करें"… अपस्यु कॉल उठाते हुए कहने लगा।

ऐमी:- क्या कर रहे हो।

अपस्यु:- समझ गया कि ये याद दिलाने वाला कॉल है। कल का वादा याद है मुझे.. बापू ने जान बूझकर आज ऑफिस में परेशान कर दिया.. वरना अब तक तो मैं तैयार भी रहता।

ऐमी:- हीहिहीहीहिही डैड ने बदला लिया क्या किसी बात का?

अपस्यु:- शायद तुम से प्यार करने का इनाम मिल गया। भड़ी मीटिंग छोड़कर आने वाला आदमी आज मुझे 4 घंटे इंतजार करवा दिया।

ऐमी:- हां ठीक है ये तो कहानी घर घर की है.. जल्दी सब सेट अप करके कॉल करो। वरना मै नाराज हो जाऊंगी।

अपस्यु:- हाहाहाहा.. मतलब अब रूठना-मानना भी करना होगा क्या?

ऐमी:- रहने दो तुमसे नहीं होगा ये मानना .. जाओ जल्दी से सब तैयार कर लेना .. लव यू..

कॉल रखते ही…. "ओह मतलब अपस्यु भी किसी के साथ इंगेज हो गया। और वो और कोई नहीं बल्कि वही हॉट बाला ऐमी होगी.."

अपस्यु आश्चर्य से ध्रुव को देखते हुए…. "तुमने अपनी हिंदी पर मेहनत कि है, राइट।"

ध्रुव:- अब तक तो किसी ने नोटिस नहीं किया सिवाय तुम्हारे ...

अपस्यु:- मै भी नहीं कर पाता लेकिन ऐमी का नाम जब तुमने लिया तब एक दम से ख्याल आया कि ये पहले वाला टोन नहीं है।

ध्रुव:- हाहाहाहा.. मतलब मुझे थैंक्स ऐमी को कहना चाहिए..

अपस्यु:- उसे अगर थैंक्स कहना हो तो आज रात 9 बजे इंडिया गेट पहुंच जाना…

दोनो की बात चल ही रही थी कि इतने में लावणी भी हॉल से गुजरी… "ओ भोली सूरत वाले"…

लावणी अपने बढ़ते कदम रोककर वापस आयी… "मै आप से नाराज हूं, और मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी।

अपस्यु:- बैठ ना कहां जा रही है। कुछ गप्पे लड़ाते है।

लावणी:- गप्पे लड़ाने के लिए मेरे पास मेरे होने वाला है, और उसी से मुझे फुरसत नहीं मिलती जो मै किसी और से बात कर पाऊं।

अपस्यु, लावणी को पकड़ कर बिठाते …. "अच्छा ले मैंने अपने कान पकड़े, कह तो तेरे पाऊं पकड़ लूं, तब गुस्सा खत्म होगा तेरा।"

लावणी हंसती हुई…. "मस्का मारना कोई आप से सीखे भईया। लेकिन फिर भी मै नहीं मानने वाली। मैं नाराज हूं।

अपस्यु:- अच्छा कैसे मनेगी वो बताओ।

लावणी:- कान इधर लाओ बताती हूं।

अपस्यु थोड़ा झुक गया और लावणी धीरे से अपनी बात कह दी। उसकी बात सुनने के बात अपस्यु आश्चर्य से उसे देखते…. "मेरी मां, तू नाराज ही रह। रहने दे मुझ से नहीं हो पाएगा।"

लावणी:- हुंह ! फिर ठीक है जाओ आप।

अपस्यु:- अरे बात को समझ बेटा, होने वाला होता तो कर देता। तू मेरी खूंखार मां को नहीं जानती है। केवल मेरी ही मां नहीं बल्कि तू अपनी मां को नहीं जानती है क्या? तू क्या चाहती है 2 पाटन के बीच मै पीस जाऊं?

लावणी:- हुंह ! हुंह ! हुंह !

अपस्यु:- अच्छा सुन थोड़ा सा राहत दे दे, तेरी बात को मैंने भेजे में उतार लिया है, अच्छा वक़्त देखकर सब सेट कर दूंगा। लेकिन प्रॉमिस नहीं कर सकता।

लावणी:- हुंह ! हुंह ! हुंह !

अपस्यु:- ऑफ ओ ! तुम्हे उस नालायक ने सिखाया है ना। अच्छा एक छोटा सा मंडवाली चलेगा। उस से अच्छा प्लान है मेरे पास।

लावणी:- ठीक है बताओ।

अपस्यु उसके कान में अपनी बात कहने लगा। सुनकर लावणी थोड़ी सी शर्मा गई… "क्या भईया, आप भी ना"..

अपस्यु:- ले अच्छा आइडिया बता रहा हूं। और हां जबरदस्ती का रिश्ता तूने जोड़ा है, बाकी हम दोनों भाई जुड़वा है।

लावणी:- साइड टॉपिक डिस्कस मत करो, और आप का आइडिया बकवास है। मेरे वाले पर काम करो।

अपस्यु:- तू रहने से मै आरव से ही बात कर लूंगा।

लावणी:- हां ये सही है.. आप उसी से बात कर लेना।

ध्रुव:- अरे यार यहां तो मै "ओड मैन आउट" हो गया। मुझे भी समझा दो क्या पजल खेल गए तुम दोनो।

लावणी:- कौन सा आप भागे जा रहे हो जीजू, ये पजल भी सॉल्व हो ही जाना हैं। लेकिन मैं देख रही हूं, इकलौती साली पर आपका कोई फोकस ही नहीं है।

साची:- पहले होने वाली बीवी पर फोकस तो कर ले, ये तो जब से आया है सोते हुए भी एक ही बात जपता है… "फैक्टरी शुरू करवाना है किसी तरह। खुद को प्रूफ करना है।"

अपस्यु:- रात में इसके साथ कर क्या रही थी पहले ये तो बताओ?

साची:- तुम्हे क्या इंक्वायरी है, मैं अपने होने वाले के साथ रात में क्या कर रही थी। ज्यादा जिज्ञासा बाढ़ रही है क्या?

ध्रुव:- हाहाहाहा.. रहने दो वरना बेचारा कहीं सोच सोच कर डिप्रेशन में ना चला जाए।

लावणी:- दिमाग खराब हो गया सबका।

साची:- क्या ?

लावणी:- आप सब पागल हो गए हो ना जगह देखते हो और ना कौन बैठा है। कभी भी कुछ भी शुरू कर देते हो।

साची:- भुटकी पोगो जाकर देख, हम बड़ों के बीच क्या कर रही हैं?

लावणी:- मुझे अपस्यु भईया से कुछ बात करनी थी, इसलिए बैठी हूं।

साची:- तो इसे भी लेती चली जा ना, कौन सा मैंने पकड़ रखा है।

अपस्यु:- कुछ जरूरी बात है क्या?

लावणी:- नहीं कोई जरूरी बात नहीं थी। बस यूं ही.. आप ने कहा ना गप्पे लड़ाते है।

साची:- तू इकलौती नमूना है भुटकी जो इस बाबा से बात करने की इच्छा जाहिर कर रही है।

अपस्यु:- ठीक है चल मेरे साथ, मुझे कुछ काम है तो गप्पे लड़ाते-लड़ाते काम खत्म कर लूंगा। काम भी होता रहेगा और तुमसे बातें भी।

लावणी:- मुझे कहीं खड़ा करके या किसी चेयर पर बिठाकर, काम करने तो नहीं निकल जाओगे ना। ऐसा है तो पहले बता दो..

अपस्यु:- बिल्कुल नहीं। तुम्हे एक मिनट के लिए भी बोर नहीं होने दूंगा। हैप्पी ना..

लावणी:- वेरी हैप्पी… मै तैयार होकर आती हूं।

अपस्यु:- कॉल कर देना मै घर जा रहा हूं। ध्रुव तुम भी साची को कहीं घूमाने ले जाओ और हां आज रात सपने मत देखना काम के, वो हो ही जाना है, रात भर जाग कर फोकस कहीं और करना ताकि मेरी जिज्ञासा और बढ़े और मैं और भी ज्यादा डिप्रेशन में चला जाऊं।

ध्रुव:- हाहाहाहा.. बिल्कुल ऐसा ही होगा।

साची:- भागो दोनो यहां से, बेशर्मों शर्म भी नहीं आती।

अपस्यु हंसता हुआ वहां से निकल आया। घर आया तो घर पर कोई भी नहीं था। सभी शॉपिंग और मूवी देखने के लिए गए हुए थे। तभी अपस्यु को लगा कि आगे के स्टाफ वाले क्वार्टर में कुछ हलचल हो रही है…. "दोनो लड़के तो गाड़ी लेकर गए हैं, फिर ये स्टाफ क्वार्टर में कौन होगा। स्टाफ कवर्टर का 1 गेट हॉल से भी था, अपस्यु जैसे ही गेट खोला, अंदर की हालत देखकर, अपने सर पिट लिया..

दो लड़कियां इस कदर एक दूसरे में लगी थी कि कोई दरवाजा खोल चुका है उन्हें होश तक नहीं।… "ओय नंग धड़ंग अतरंग लड़कियों, यहां हो क्या रहा है।

जेन:- मज़ा आ रहा देखने में तो देखो वरना दरवाजा बंद कर दो। कपल लव मेकिंग कर रहे है, उन्हें डिस्ट्रब ना करो।

अपस्यु:- और ज्वाइन करने की इच्छा हुई तो..

जेन की गरलफ्रेंड लिसा.. "सॉरी डियर, हमने गुफरान और प्रदीप से कमिटमेंट किया है, सो अभी 2 रिलेशन में है और हम खुश हैं। बाद में ट्राय करना।

अपस्यु:- बहुत क्लियर थॉट्स है रिलेशन के। कमाल है ये तो.. वैसे ये प्लाई बोर्ड पार्टीशन है क्यों इतने धक्के-मुक्की कर रही हो.. यहां फैमिली रहती है..

जेन:- जानती हूं दोस्त। क्या करे आज वाइल्ड सेक्स का मौका मिला है.. 9 बजे तक कोई नहीं है ना। सब जब लौटेंगे तो हमे पहले मैसेज मिल जाएगा।

अपस्यु:- कमाल की ट्यूनिंग है। कहां से इतने इनोवेटिव क्रिएशन आते है।

लिसा:- प्लीज अब दिस्ट्रव मत करो। अंदर आराम से बैठ कर शो एन्जॉय करके मास्टरबेट कर सकते हो, और पुरा शो एन्जॉय कर सकते हो.. वी डांट माइंड।

अपस्यु:- मैं ही जाता हूं, और तुम दोनो जरा ये दीवार कम पिटो, कोई रहे या ना रहे।

जेन:- ओके बॉस समझ गई…

अपस्यु दोनो को अपने हाल पर छोड़कर दरवाजा बंद किया और अंदर आते ही कॉन्ट्रैक्टर को कॉल लगाकर पार्टीशन की जगह थोड़ी और बढ़ा कर 2 इंच की कंक्रीट पार्टीशन के लिए बोल दिया और तैयार होने चला गया।

कुछ देर बाद लावणी का भी कॉल आ गया, वो भी तैयार होकर नीचे पार्किंग में पहुंची हुई थी। अपस्यु ऑडी की चाबी लेकर नीचे आया, लेकिन जब पार्किंग में पहुंचा तो चारो में से एक भी कार नहीं थी।

अपस्यु कुछ देर सोच में पर गया… "क्या हुआ भईया".. लावणी पीछे से आती हुई पूछने लगी..

अपस्यु:- यदि कुंजल अपने के से गई होगी तो उसके साथ स्वास्तिका होगी। मां और आरव 1 गाड़ी में गए होंगे। यानी 1 ड्राइवर और मैक्सिमम 2 कार की जरूरत थी। ये चारो कार किधर गायब हो गई।

लावणी:- छोड़ो ना भईया वो अपनी फटफती निकल लो ना।

अपस्यु:- हेलमेट पहने रहूंगा तो बात कैसे होगी। वैसे भी मेरी 2 कार और 1 ड्राइवर का हिसाब नहीं मिल रहा।

लावणी:- ठीक है फिर आप जाओ, मै बाद में बात कर लूंगी।

अपस्यु:- पागल, आराम से काली पीली में चलते है।

अपस्यु ने टैक्सी रुकवाई और दोनो सवार हो गए… "एक तरह से यह भी अच्छा ही हुआ भईया, वरना कहां आप ड्राइविंग करते हुए बात करते"..

अपस्यु:- वो छोड़ पहले ये बता की तू इतना परेशान क्यों है?

लावणी:- कहां से मै परेशान दिख रही हूं बताओ तो जरा..

अपस्यु:- सुन ऐसे ही नहीं मुझे सब बाप मानते है। काम की बात पहले कर लेते है फिर आराम से बात करेंगे…

लावणी:- भईया आप कैसे समझ जाते हो इतना।

अपस्यु:- ये "कैसे" का जवाब देने लगुंगा तो तू भी मेरे साथ कभी दोबारा बात नहीं करेगी। अब मैटर क्या है वो बता।

लावणी:- भईया मेरा एक दोस्त है मैक्स, हम केजी से ही साथ पढ़ते हैं। समझिए ना वो मेरा बहुत ही क्लोज फ्रेंड है।

अपस्यु:- कोई परेशानी हुई क्या उसे, जो तू इतनी उदास हो गई उसकी बात करते-करते…

लावणी, रोती हुई अपस्यु के गले लगती… "भईया मै ना.. वो एंगेजमेंट हुई थी, उसी की ट्रीट देने के लिए एक पार्टी का सोच रही थी"… इतने में ही लावणी की हिचकियां शुरू हो गई…

अपस्यु उसे खुद से अलग करते उसके आशु पूछते हुए, पानी पिलाया… "फिर क्या हुआ, उसे गलत फहमी हो गई क्या और तेरा अच्छा दोस्त बिछड़ गया?

लावणी ना में सर हिलाते… "भैय्या, जब मै उसके घर गई तो उसके मोम का रो रोकर बुरा हाल था, 2 हफ्ते से उसका पता नहीं चल रहा और पुलिसवाले कुछ बताते भी नहीं। मुझे बहुत डर लग रहा है भईया।"..

अपस्यु उसे गले लगाकर सांत्वना देते हुए कहने लगा… "चुप हो जा, कुछ नहीं हुआ होगा तुम्हारे दोस्त को, मैं ढूंढ़ता हूं उसे।"

"मुझे बहुत डर लग रहा है भईया… वो मेरा बेस्ट फ्रेंड है। उसे कुछ हुआ तो नहीं होगा?"

अपस्यु यूं तो लावणी को हौसला दे तो रहा था, लेकिन 2 हफ्ते से गायब कोई लड़का जिंदा हो, अपने आप में एक बड़ा सवाल था। एक अच्छे और सच्चे दोस्त का जाना क्या होता है, ये अपस्यु से बेहतर कौन जान सकता था। मन तो ना उम्मीद ही था लेकिन अपस्यु की प्रार्थना इतनी सी थी कि लावणी अपने दोस्त को ना खोए।
 
Update:-103

अपस्यु यूं तो लावणी को हौसला दे तो रहा था, लेकिन 2 हफ्ते से गायब कोई लड़का जिंदा हो, अपने आप में एक बड़ा सवाल था। एक अच्छे और सच्चे दोस्त का जाना क्या होता है, ये अपस्यु से बेहतर कौन जान सकता था। मन तो ना उम्मीद ही था लेकिन अपस्यु की प्रार्थना इतनी सी थी कि लावणी अपने दोस्त को ना खोए।

अपस्यु लावणी को शांत करके उससे मैक्स की डिटेल पूछने ही वाला था कि इतने में ऐमी का कॉल चला आया…. "काम हो गया क्या अपस्यु"

अपस्यु:- अपनी भुटकी थोड़ी परेशान है।

ऐमी:- क्या हुआ, कोई चिंता की बात है क्या ?

अपस्यु:- हां थोड़ी सी…

ऐमी:- ठीक है छोड़ दो अभी ड्रॉप करते है, पहले इसे देखते है। मुक्ता अपार्टमेंट आऊं क्या?

अपस्यु:- नहीं मै ही तुम्हारे पास आता हूं, इंतजार करो।

कुछ ही देर में तीनों साथ में थे। अपस्यु ने ऐमी को पूरा मामला बता दिया। ऐमी को भी थोड़ी चिंता हुई, लेकिन उसने भी मुस्कुराकर लावणी को सांत्वना देती हुई कहने लगी… "हम ढूंढ लेंगे मैक्स को"…

अपस्यु:- कोई ड्राइवर है क्या यहां, लावणी को घर छुड़वा दो।

ऐमी:- नहीं रहने दो। साथ में ही रखो, इसे भी अपने दोस्त के लिए कुछ कर लेने दो।

अपस्यु:- हां ये भी सही है। भुटकी तैयार है इन्वेस्टिगेशन के लिए।

लावणी:- हां भैय्या.. बस कैसे भी मेरे कानो में पर जाए की वो सुरक्षित है, फिर मुझे अच्छा लगेगा।

ऐमी, लावणी के पीठ थपथपाती… "ऐसे छोटे मुंह बनाकर और हौसला खोकर ढूंढने जाओगी, तो समझो तुमने पहले से उसे मरा हुआ मानकर खोज रही हो । इसलिए खुश रहो और विश्वास के साथ चलते हैं ढूंढने.. ठीक है हां..

लावणी, मुस्कुराती हुई… "थैंक्स दीदी, चलो चला जाए"

ऐमी लावणी से उसकी पूरी ऑनलाइन डिटेल, जैसे कि एफबी, व्हाट्स एप, ईमेल, और फोन नंबर लेकर अपने वर्क सेक्शन में चली गई। अपस्यु हॉल में ही बैठकर अजिंक्य को कॉल लगा दिया… "हां अपस्यु बोलो"

अपस्यु:- सर सेक्टर 10 के थाने का एक मामला है। लड़का एक हफ्ते से गायब है और थाने से कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं हो रही।

अजिंक्य:- किसी भी थाने में मिसिंग केस का वहीं हाल है। रोज 2 केस केवल मिसिंग के आते हैं। हम जबतक पिछला केस में लगे रहते है, तबतक 4 केस और दर्ज हो जाते है। यही कारन रहता है कि मिसिंग केस की प्रोग्रेस काफी स्लो रहती है।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है सर। अच्छा खुद से इन्वेस्टिगेशन करेंगे तो थाने से कोई हेल्प मिलेगी।

अजिंक्य:- मै साफ साफ बताता हूं। इंजन में तेल डाल दो, यदि गाड़ी सही पते पर पहुंचने वाली होगी, तो तुम्हे लग जाएगा कि सामान्य सी घटना हुई ह। तब तुम आराम से सुकून में रह सकते हो। अगर कहीं तुम्हे ऐसा लगे कि इंजन में तेज डालने के बाद भी, गाड़ी को केवल घुमा फिरा रहा है। तब तुम्हे जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी खुद से ही अपने काम खत्म करने की जरूरत है।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है मै समझ गया।

अभी अपस्यु की बात खत्म ही हुई थी कि ऐमी हॉल में आ गई… "कोई खबर"

ऐमी:- पूरी खबर है, चलो..

अपस्यु:- कहां ..

ऐमी:- पागल सोमेश के यहां।

लावणी:- कौन वो एमपी साहब।

अपस्यु:- हां वही। .. बैग ले लो, शायद जरूरत पर जाए…

ऐमी तुरंत ही बैग लेकर चली आयी। थोड़ी ही देर में तीनों एमपी के बंगलो के मुख्या दरवाजे पर थे। उनका गार्ड अपस्यु को देखकर तीनों को अंदर लिया और फोन से एमपी को बता दिया कि अपस्यु आ रहा है।

"अपस्यु, ऐमी .. बड़े दिनों बाद.. साथ में ये कौन है। ओह ये तो वही है ना लावणी, जिसकी शादी तय हुई है आरव के साथ"..

ऐमी:- अंकल वो लड़का मैक्स कहां है?

सोमेश:- कौन मैक्स.. कोई विदेशी लगता है।

अपस्यु:- ऐमी बैग खोलो ये ऐसे ना सुनने वाला..

सोमेश:- अरे यार ये बैग को अलग रखो और आराम से बैठकर बात करो। सच में मुझे नहीं पता ये मैक्स कौन है?

लावणी अपने मोबाइल से उसकी तस्वीर निकलती… "ये है मैक्स"..

सोमेश:- ये लड़का। मेरे ही पास है। सुरक्षित है, ऐसे घुरो मत दोनो, और पीछे ही बैठे रहो।

अपस्यु:- मुंह का शटर खोलकर बताओगे, आप ये आज कल पढ़ने लिखने वालों को क्यों उठा रहे हो।

सोमेश:- यार मै जन प्रतिनिधि हूं। इसके एरिया में गया तो कॉलर पकड़ कर गाली-गलौज पर उतर आया।

ऐमी:- कोई नई बात बताओ, ऐसे घटना से नेता को कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्य मुद्दा वो भी बिना घुमाए।

सोमेश:- उसके पास मेरे कुछ आपत्ति जनक वीडियो हाथ लग गए थे और मेरा राजनीतिक कैरियर दाव पर लग गया था, इसलिए मजबूरी में उठवाना परा।

अपस्यु:- वीडियो मिला..

सोमेश:- हां मिल गया….

अपस्यु:- फिर जिंदा रखने की वजह..

सोमेश:- मारने का मोटिव नहीं था कसम से। बस मुझे तो वो वीडियो निकलवाना था। ये जवान लोग ही तो टीआरपी देते है। पकड़ कर रख लिया, पिट दिया। अब जाएंगे रोकर मीडिया के पास। मै सुर्खियों में आऊंगा। मारने से क्या फायदा मिलता। लेकिन तुम्हे कैसे पता की वो यहां है।

ऐमी:- पागल और बेवकूफ का इतना बड़ा कंबो मैंने आज तक नहीं देखी। उसका मोबाइल लोकेशन यहीं आपके आवास के आसपास का है।

सोमेश:- वो नए लड़के थे ना ध्यान नहीं दिया होगा.. तुम लोग जाओ मै उसका इलाज करवाकर जैसे उठाया था ठीक वैसे ही भेज दूंगा।

अपस्यु:- वो जिंदल की फैक्टरी शुरू करवानी है। मुझे बापू ने 4-5 पेपर दिए है, उनको सिग्नेचर चाहिए।

सोमेश:- वहीं 2000 करोड़ वाला प्रोजेक्ट ना..

अपस्यु:- हां..

सोमेश:- 50 करोड़ दिलवा दे भाई, नेक्स्ट ईयर इलेक्शन आने वाले है।

अपस्यु:- ज्यादा है, बहुत ज्यादा है..

सोमेश:- समझा कर ना। वो पार्टी में 20 करोड़ देना भी है। नहीं दिया तो इस बार टिकिट भी ना दे कहीं।

अपस्यु:- 10 करोड़ दिलवा दूंगा। फिर आगे भी तो ऑफिस है, काम शुरू होने के बाद उन्हें भी मैनेज करना होगा ना।

सोमेश:- एक काम कर ना फिर 100 करोड़ दिलवा दे मैं सारा ऑफिस मैनेज कर लूंगा। मेरे पेटेशन के 10 करोड़ तो वैसे ही दे रहा है ना।

अपस्यु:- २% के काम का ५% मांग रहे हो, शर्म तो नहीं आयी होगी।

सोमेश:- अरे यार उस जिंदल को क्या कमी है। 400 करोड़ तो वो बर्बाद करके 2 साल से सोया हुआ ही था ना। ५% ले रहा हूं तो सब क्लियर करके पुरा प्रोजेक्ट चालू भी तो करवाकर दूंगा। पैसे देदो और कान में तेल डालकर सो जाओ।

अपस्यु:- तुम पर भरोसा ना है। चलो डील लॉक करते हैं। एक हफ्ते में क्लीयरेंस दिलवाओ तो 10 करोड़ और फैक्टरी का काम जैसे-जैसे क्लीयरेंस के साथ पूरा होता जाएगा, मैं वैसे-वैसे पैसे देता जाऊंगा। बोलो मंजूर…

सोमेश:- बस वो 10 करोड़ को 20 करोड़ कर दे, बाकी सब मंजूर है। कल किसी को भेज देता हूं। वो प्रोजेक्ट क्लीयरेंस वाला जो पेपर है दे देना…

अपस्यु:- ठीक है मंजूर.. लावणी, बेटा हैप्पी ना। तुम्हारे फ्रेंड सुरक्षित है और हफ्ते दिन में घर पहुंच जाएगा..

लावणी:- वेरी हैप्पी भईया.. मेरा तो दिल घबरा रहा था। आप को भी थैंक्स ऐमी दीदी..

अपस्यु:- कोई नहीं वैसे भी मैक्स को कुछ नहीं होना था..

सोमेश:- लावणी अपने दोस्त को थोड़ा समझना.. समाज सेवा अच्छी चीज है लेकिन अगर वो अपनी जान बचाकर कि जाए तो। अपस्यु और ऐमी थे तो यहां तक पहुंच भी गए, वरना प्रोसेस से आते तो महीनों लग जाते तब तक तो कहानी हिट हो जाती।

अपस्यु उसे घूरते हुए… "वोटर बना रहे हो क्या? हमारा नस्ता आया कि नहीं।"

सोमेश:- आ रहा है.. 20 मिनट का डिलीवरी टाइम है, आ जाएगा..

ऐमी:- ठीक है जबतक पिज़्ज़ा आता है तबतक उन बेवकूफों से मिलवा दो जो मोबाइल समेत लोगों को उठा रहे है।

सोमेश ने बाहर स्टाफ से 2 लड़के को बुलाने के लिए कहा.. दोनो सामने खड़े थे। ऐमी दोनो को अपने करीब बुलाई और खींचकर दोनो को 2 तमाचा मारती हुई… "अंकल पुराने लोग है तो ऐसे बेवकूफों को लीड करने क्यों भेजते हो।"..

सोमेश:- यही दोनो तो वो नायाब हीरे हैं, जिन्होने वीडियो का इंफॉर्मेशन दिया था।

अपस्यु:- और इसके इंफॉर्मेशन का सोर्स क्या है वो तो नहीं पूछे होगे। मोबाइल या लेपी से कैसे वीडियो निकलकर बाहर गई, उसकी कोई जांच पड़ताल की या नहीं।

सोमेश:- वह तो पहली प्राथमिकता थी। वो लड़का मैक्स ने जब मेरी कॉलर पकड़ी थी ना, उसी समय मेरे हाथ से मोबाइल गिरा था। यही दोनो ने तो ध्यान लगाया, तब पता चला था मोबाइल कहां गिरा था। जब तक दोनो पहुंचते तब तक उसने लॉक तुड़वाकर कांड कर लिया था।

अपस्यु:- ओह बंदा इंटेलिजेंट है बस थोड़ा अनुभव की कमी है। दोनो को इनाम दे देना और अच्छे से अनुभवी लोगो के पीछे रखो इनको, ताकि काम कि बारीकी को सीखे।

इतने में पिज़्ज़ा भी आ गया, तीनों ही वहां बैठकर पिज़्ज़ा का लुफ्त उठाने के बाद वहां से निकलने लगे.. तभी छन, छन, छन.. मधुर सी पायल की आवाज के साथ, भारतीय परिधान को बड़ी ही खूबसूरती के साथ पहने हुए एक कन्या अंदर आयी। उसे देखकर तो अपस्यु ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया… "नेता जी ये इतनी खूबसूरत लड़की कौन है।"

"लसिता बेटा यहां आओ देखो कुछ मेहमान आए है।"… अपनी बेटी को बुलाने के बाद कहने लगा… "मेरी बेटी शुरू से यूके में रहकर पढ़ी है। वो इंटेलिजेंट है स्मार्ट है और साथ ही साथ पूर्णतः भारतीय संस्कृति को मानने वाली"..

लासिता उनके बीच आकर सबको नमस्ते की और काम का नाम बताकर वहां से जाने लगी। इसी बीच अपस्यु… "तुम अगर यहां आकर बैठती हो तो "वी डांट माइंड" (we don't mind).. लिसा"।

आवाज़ सुनकर ही वो चौंक गई और अपना चेहरा उठाकर अपस्यु को देखने लगी। जिस चेहरे को अपने काम-लीला कि व्यस्ता के कारन तब नहीं देख पाई थी, वो अब देख रही थी।

लसीता घबराकर पानी पीती हुई… "जी मेरा नाम लासीता है। लिसा नहीं।"..

अपस्यु:- जी आप के चेहरा मेरी एक दोस्त जेन से मिलता है।

सोमेश:- अरे ये तो कमाल हो गया, लसिता के भी एक क्लोज फ्रेंड का नाम जेन है।

"ठीक है नेता जी अब हम चलते है। कल वो पेपर लेने किसी को भेज देना।"… सभा समाप्त करके तीनों वहां से निकल आए। लावणी काफी खुश लग रही थी। वो रह-रह कर दोनो को थैंक्स कह रही थी।

लावणी को उसके घर के सामने ड्रॉप कर करने के बाद ऐमी अपस्यु से कहने लगी… "मुक्ता अपार्टमेंट आ जाना 1 घंटे में, मैं इंतजार कर रही हूं।"

अपस्यु हंसते हुए गले लगाते…. "ठीक है, मैं भी पहुंचा उधर"..

अपस्यु नीचे उतर गया और ऐमी वहां से चली गई। अपस्यु आकर सबसे पहले पार्किंग में कार को ही चेक किया। अब भी ऑडी और लंबोर्गिनी गायब थी, बीएमडब्लू और कुंजल की लंबोर्गिनी लगी हुई थी।

अपस्यु ऊपर आया… "कहां चले गए थे, ऐसा भी क्या जरूरी काम था जो सबके साथ नहीं आ पाए।".. कुंजल गुस्सा होते हुई पूछने लगी।

अपस्यु:- सॉरी बाबा। अगली बार से ये गलती नहीं होगी। बाकी सब कहां है।

कुंजल:- दीदी और भाई कहीं बाहर निकले है। मां किचेन में श्रेया के साथ है।

अपस्यु:- गुफरान और प्रदीप कहां है?

कुंजल:- दोनो अपने क्वार्टर में ही है।

अपस्यु:- ठीक है जरा बुला ला दोनो को.. मै जबतक चेंज करके आया।

अपस्यु जब चेंज करके लौटा दोनो हॉल में ही बैठे हुए थे…. "ये बताओ मेरी ऑडी कहां है।"

प्रदीप:- सर वो गराज गई है।

अपस्यु:- 8082 लंबोर्गिनी कहां है?

गुफरान:- वो भी गराज में है।

अपस्यु:- 2 गाड़ी गराज में है, और तुम दोनो हॉस्पिटल में नहीं आश्चर्य है। ड्राइवर के साथ गाड़ी के मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ रहा है। ये तो कमाल हो गया, क्यों ?

गुफरान:- सॉरी सर, वो ऑडी मेरी बेवकूफी के वजह से गराज में है, और लंबर्घिनी मां जी को ड्राइविंग सीखाते वक़्त डैमेज हुई थी।

"क्यों इनकी क्लास ले रहा है.. जाओ तुम दोनों। आज सुबह से ऐमी से नहीं मिले, जो उनका गुस्सा इन दोनों पर उतार रहे।"… नंदनी पीछे से आती हुई कहने लगी।

अपस्यु:- कहने को 4 गाड़ी हो और काम के वक़्त एक भी ना मिले तो दिमाग खराब होता ही है मां। कैसी है डॉक्टर साहिबा.. लंबे समय के बाद मुलाकात हुई है।

श्रेया, अपना हाथ आगे बढ़ाती… "शादी की बधाइयां और हां मै श्रेया हूं और ये नाम मुझे सुनने में काफी प्यारा लगता है। वैसे आंटी यें तो चीटिंग हुई, अपस्यु को खाली समझकर, मै अपने प्यार का प्रस्ताव देने वाली थी। कुछ दिन चोरी छिपे मिलते फिर कुछ सालों बाद शादी की बात करते, आपने तो बीच से पत्ता है काट दिया।"

नंदनी:- हाहाहाहा… वो क्या है ना बेटा घर में पहले से 2 डॉक्टर है, लेकिन कोई सिंगर नहीं थी, इसलिए अपनी बहू के लिए ऐमी को चुन लिया।

श्रेया:- हाहाहाहा.. मतलब अपने परिवार को ही चलता फिरता मल्टी इंडस्ट्री बनाने की सोच रहे है, क्यों? एक ही छत के नीचे इंजिनियर, डॉक्टर, वकील, इकोनॉमिस्ट और हिस्टोरियन। ओह सॉरी साहित्यकार तो छूट ही गए जो अपने प्रवचन से लोगों का मार्गदर्शन करेंगे, और हम जैसे डॉक्टर्स के क्लीनिक को बंद करवा देंगे।

श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..
 
Update:-104

श्रेया की बात पर सभी हसने लगे। तभी श्रेया सब लोगों से इजाजत मांगती हुई, अपस्यु को 2 मिनट बाहर आने के लिए कहने लगी… "एक छोटी सी हेल्प चाहिए।"..

अपस्यु:- कैसी हेल्प श्रेया।

श्रेया:- बस 1 दिन के लिए मेरे बॉयफ्रेंड बन जाओ, मेरे पीछे भूत परा है और उसी से पीछा छुड़ाना है।

अपस्यु:- कौन सा भूत पड़ा है।

श्रेया:- पहले बताओ हेल्प करोगे की नहीं।

अपस्यु:- मै फ्री सर्विस नहीं देता पता है कि नहीं।

श्रेया:- हां ठीक है चाय समोसे की पार्टी दे दूंगी। अब खुश।

अपस्यु:- नाह ! मै एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल पीने वाला हूं, उसी की पार्टी चाहिए।

श्रेया:- एक ड्रिंक कि कॉस्ट क्या पड़ती होगी..

अपस्यु:- हर जगह का अलग अलग है मै जहां पीता हूं वहां शायद 2500 रुपए लेता है।

श्रेया:- और कितनी ड्रिंक में तुम्हारा कोटा पुरा हो जाता है?

अपस्यु:- यही कोई 20 से 25 के बीच..

श्रेया:- पागल हो गए हो। हम जो पीती है वहीं पिलाएंगे.. 400 से 500 का फूल वोदका, और ये फाइनल है। नो बारगेनिंग..

अपस्यु:- ठीक है मंजूर है तुम बताओ कब चलना है।

श्रेया:- जल्द ही जब तुम्हे फ्री टाइम मिल जाए।

अपस्यु:- ठीक है, २-३ दिन थोड़ा व्यस्त हूं कल मै कॉल करके बता दूं तो चलेगा क्या?

श्रेया:- हां बिल्कुल.. और थैंक्स ए लौट .. ये एहसान रहा।

अपस्यु:- काम होने के बाद थैंक्स कहना। गुड नाईट..

श्रेया अपने कमरे चली गई और अपस्यु अंदर आ गया… "क्या कह रही थी वो".. नंदनी जिज्ञासावश पूछने लगी..

अपस्यु;- कोई लड़का उसे परेशान कर रहा है उसी के बारे में हेल्प मांग रही थी।

कुंजल:- अपनी परेशानी काम है क्या, जो दूसरे के फटे में जाओगे। मना कर दो, उसके भी तो भाई है, दोस्त है और भी कई सारे लोग हैं।

अपस्यु:- जी दीदी जी, और कोई आदेश..

कुंजल:- भाई देखो मेरी बात की मज़ाक में मत लो, जो कही वो सुनो।

नंदनी:- जाने दे, अब देखी तो मै भी थी, बेचारी की नानी मरी थी तब तो अकेली ही सब कर रही थी, अब नहीं होगा कोई उस लायक इसलिए जिसे लायक समझी उसे कह दी।

कुंजल:- हुंह ! पुलिस और प्रशासन क्यों है फिर…

अपस्यु:- कुंजल तेरा भाई समझदार है, अब तू चिंता मतकर और ये बता की तुम और स्वास्तिका कब निकल रहे हो मुंबई?।

कुंजल:- हम दोनों कल जा रहे है।

"कहां जाने की बात हो रही है।"…. पीछे से आरव आते हुए पूछने लगा।…

स्वास्तिका:- डफर वो हमारे जाने के बारे में पूछ रहा होगा.. क्यों अपस्यु..

अपस्यु:- तू एक बात बता आरव, गुप्ता ब्रदर्स वाला काम कब तक अटका कर रखेगा, जब काम नहीं करना था तो काम क्यों लिया।

आरव:- यार वो एंगेजमेंट और बाकी सब कामों में फसा रह गया, ध्यान ही नहीं दे पाया।

अपस्यु:- हम्मम ! कल ही गोवा जाओ और उनका काम खत्म करो।

आरव:- हम्मम ! ठीक है मै काम खत्म कर आता हूं।

अपस्यु:- एक काम कर, लावणी को भी ले जाना, तुमलोग भी थोड़ा घूम फिर लोगे….

आरव:- अब उसके लिए तो लंबा प्रोसीजर लगेगा। इसकी परमिशन उसकी परमिशन..

अपस्यु:- गर्लफ्रेंड् को घुमाने नहीं ले जा रहा है। अपनी होने वाली बीवी को घुमाने ले जा रहा है, और अगर किसी को ऐतराज होता है तो कल ही कोर्ट मैरिज करवा दूं क्या?

नंदनी:- मेरे दोनो बेटे कमाल के है। इस आरव को अपनी होने वाली के साथ घूमने जाना है और काम का बहाना ये दूसरा वाला बना रहा है। कमाल है.. और मै तो यहां बेवकूफ बैठी हूं जो कुछ समझ भी ना पाऊं। क्यों ?

अपस्यु:- ठीक है आरव गुप्ता ब्रूदर्स की फाइल मुझे देदे मै ही ये काम कर लूंगा, खुश मां..

नंदनी:- हां खुश..

अपस्यु:- अच्छा मां कल आप भी इन दोनों के साथ मुंबई चली जाना, वहां दीपेश से भी मिल लेना और 10 दिनों में सबको लेकर चली आना। स्वास्तिका का काम हो गया है। उसे बस वहां अब अपना एग्जाम देना है।

नंदनी:- क्या सच में ?

अपस्यु:- हां बाबा सच.. आरव तू वो फाइल ले आ, मै मुक्ता अपार्टमेंट जा रहा हूं बचे लोगों के काम के साथ इसे भी पुरा कर लूंगा।

कुछ ही देर में आरव वो फाइल लेकर चला आया.. नंदनी ने क्रॉस चेक के लिए वो फाइल सच में देखी और देखने के बाद…. "तू सच जह रहा था क्या?"

अपस्यु:- छोड़ो ना मां, अब मैंने काम अपने जिम्मे के लिए है ना.. वैसे भी जिसके साथ शादी होनी है, उसके साथ 4-5 दिन घूमने नहीं जा सकते, इससे अच्छा तो गर्लफ्रंड ही बनाए रखते। लड़की उधर से झूट बोलकर निकलती और लड़का उधर से। बेसिकली गार्डियन को झूट ही ज्यादा पसंद आता है।

नंदनी:- इधर आ तू..

अपस्यु:- नहीं आना मुझे..

नंदनी:- तू इधर आता है या मै वहां आऊं..

अपस्यु अपने दोनो गाल पर हाथ रखे नंदनी के पास आया.. "गाल से हाथ हटा और थोड़ा झुक जाओ।"… "सॉरी वो भावनाओ में निकल गया।"… "हाथ हटाओ अभी।"… अपस्यु हाथ हटाकर थोड़ा नीचे झुका और नंदनी खींचकर उसे 2 तमाचा मारती हुई… "जाकर बैठ जा, और ज्यादा ज्ञान मत दिया कर की गार्डियन को क्या करना चाहिए या क्या नहीं। ठीक है आरव, तू ये गुप्ता ब्रिदर्स के फाइल को निपटा बेटा और लावणी को भी साथ लिए जाना।"

अपस्यु सबसे बात करने के बाद खाना खाकर मुक्ता अपार्टमेंट निकला। हॉल में चेयर पर बैठकर ऐमी कुछ फाइल चेक कर रही थी। अपस्यु पीछे से उसे गले से लगाया, उसके गर्दन पर किस्स किया और सामने के पन्नों को देखकर कहने लगा… "इसका समय नजदीक आ रहा है। फाइल डंप कर दो"

ऐमी अपने हाथ ऊपर ले जाकर अपस्यु के गालों को सहलाती हुई… "हां सही कह रहे इस विक्रम में दम नहीं है। लेकिन आज कल संयोग भी कम नहीं। तुम्हे याद है वो डोनेशन वाली लड़की कुसुम।"..

अपस्यु, फिर से उसके गर्दन को चूमते हुए अपने हाथ उसके पेट पर ले जाते… "हां याद है ना कुसुम, परसो ही तो बाजार में मिली थी।"..

ऐमी अपस्यु में बढ़ते हाथों को दबोच कर पकड़ती… "वो तुम्हारी दूर कि कजिन हुई और विक्रम राठौड़ की छोटी बेटी।"..

अपस्यु, आश्चर्य होकर सामने लगे बड़े से राउंड टेबल पर बैठकर फैमिली डिटेल देखने लगा… "अरे यार ये भगवान को भी दुश्मनी है क्या.. ये जिंदल के यहां ध्रुव और अब ये विक्रम के यहां कुसुम। हर परिवार में ऐसे लोग है जिसके कारन हमे सोचना पड़ता है।"

ऐमी:- कमाल है अपस्यु ये सोचते-सोचते तुम्हारे पाऊं कहां चला आया?

अपस्यु, राउंड टेबल से उतर कर सीधा चेयर पर। अपने दोनो पाऊं फैलाकर ऐमी के उपर बैठकर उसके गर्दन पर चूमते… "लो पाऊं से परेशानी थी ना, अब तो कोई समस्या नहीं है ना।"

ऐमी अपस्यु को धक्के देकर टेबल से गिराती हुई… "5 दिन बोली वो नहीं तुमसे बर्दाश्त हो रहा। क्या करूं मै तुम्हारा कुछ समझ में नहीं आ रहा।"

अपस्यु:- एक किस्स तो कर लेने दो कम से कम..

ऐमी:- नाह ! अच्छी किस्स के बाद क्या होता है वो हम दोनों को पता है। इसलिए नो। अब आराम से बैठो क्योंकि पुरा रायता फैला है और कुछ समझ में नहीं आ रहा।

अपस्यु, ऐमी के पीछे जाते उसके गर्दन के नीचे चूमते हुए धीरे-धीरे कंधों से नीचे अपने हाथ के जाते… "रायता मै समेट लूंगा, अभी तुम मेरे अरमान समेटो।

बेल बजी और नजर सीसी टीवी पर गई तो बाहर आरव खड़ा था.. "हीहीहीही.. मज़ा आ गया".. ऐमी खिलखिलाकर हंसती हुई भागी और दरवाजा खोल दी। जैसे ही आरव अंदर आया ऐमी उसके गले लगती हुई कहने लगी.. "थैंक गॉड आ गए, वरना परेशान कर रखा था इसने।"..

आरव, दोनो को घूरते हुए… "तुम दोनो मुझे बस एक बात समझाओ अपने अपार्टमेंट में कुछ गड़बड़ी चल रही है क्या?"

तीनों ही आकर बैठे… "तुझे क्या लगा पहले वो बताओ"..

आरव:- नहीं, पहले तुम मेरे सवाल का जवाब दो, क्योंकि मुझे उस श्रेया एंड कंपनी पर शक तो पहले से था, लेकिन इतनी सारी रैंडम घटना एक साथ नहीं हो सकता।

अपस्यु:- कुछ घटना बताओ..

आरव:- "पहला तो ये की जिस दिन मै आया पूरी कॉलोनी का हमारे यहां आकर झगड़ा की, जबकि कुछ लोगो को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो दरअसल है कुछ और, और दिखा कुछ और रहे है। उसके अलावा आज अपस्यु ने कहा ना कार के बारे में, तब बातें दिमाग में और भी स्ट्राइक कर गई, मां का कार ऐक्सिडेंट बैंक टू बैंक।"

"फिर ये गुफरान और प्रदीप को देख लो.. कुंजल भी कह रही थी ये बात… "दोनो का व्यव्हार ड्राइवर जैसा नहीं है, बल्कि किसी ऑफिस का हाई क्लास ऑफिसर जैसा ऐटिट्यूड है। उसकी वो गर्लफ्रेंड देखो, जेन और लिसा। एक दिन में उनसे पट भी गई और पड़ोस में जो उसका बॉयफ्रेंड रहता है श्रेया का भाई, उसे कोई फर्क ही नहीं परा।"

"और सबसे ज्यादा गुस्सा तो तुम दोनो पर आ रहा है, ऐसा हो नहीं सकता कि तुम दोनो के पास उसकी डिटेल ना हो। बजाय इसके कि साथ बैठकर डिस्कस करो तो कितनी चालाकी से हम सबको दूर भेज दिया। तुम दोनो के दिमाग में पहले चल क्या रहा है वो बताओ। और हां मुझे सच जानना है।"

अपस्यु, ऐमी की आंखों में झाकने लगा। ऐमी उसका हाथ थामती अपने पलकें झुकाकर सहमति दी… "जिंदल और विक्रम सेकंड लास्ट टारगेट है।"

आरव ये सुनकर जैसे झटका खाया हो। आरव ने जाकर विष्की की बॉटल निकाली और जैसे ही बॉटल में मुंह लगाने लगा, अपस्यु बॉटल हाथ से पकड़कर उसके मुंह से अलग किया… "तू पागल है, ये बियर, वाइन या शैम्पेन नहीं है.. विष्की है, आराम से पेग बनाकर ले"

आरव गुस्से में उससे सीधा एक पंच दे दिया… "पागल मारने से पहले बता तो देता, ऐसे कौन मारता है यार।".. अपस्यु अपना नाक पकड़ते बोला।

"हां तो ठीक है बच, मै एक बार और मार रहा हूं"…. कहते हुए अपस्यु को एक लात जमा दिया और अपस्यु झटका खाकर पीछे हटा। इन दोनों के झगड़े के बीच ऐमी कब वो विश्की की बॉटल उड़ाई किसी को पता भी नहीं चला। वो आराम से तीनों के लिए पेग बनाई और अपना पेग उठाकर कहने लगी… "मार आरव मार.. तू बिना रहम किए मार. अपस्यु माय लव .. बेबी मार मत खाना बस बचते रहो।"…

दोनो अपना ध्यान ऐमी पर जमाते… "बेवरी कहीं की हमे उलझकर पीने भी लगी।"

ऐमी:- दारू जब बाहर आ जाए तो इंतजार नहीं करवाना चाहिए, वरना दारू बुरा मान जाती है।

ऐमी की बात सुनकर दोनो भाई हंसते हुए फिर से बैठ गए और टोस्ट करते हुए अपना-अपना जाम खींचने लगे…. "दिल तोड़ा है तुम दोनो ने। मतलब मुझे साइड करके तुम दोनो अलग ही प्लांनिंग में थे।"

ऐमी:- तुझे बताने के बाद भी तुझे साथ नहीं लेंगे, ये तो तय है। हां जानने का हक है और हम बताते भी। फर्क यही बस तुझे वक़्त से पहले बताना पड़ रहा है वो भी उस कामिनी श्रेया की वजह से।

आरव:- तुम दोनो पागल हो गए हो क्या। जानते हो ना 1 से भले 2 और 2 से भले 3।

अपस्यु:- आरव…. मां है, 120 बच्चे है, कुंजल है, स्वास्तिका है, लावणी है। हम तो सोच चुके है, तुझे सोचना है।

आरव:- यहां हर कोई अपनी किस्मत जीता है और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत लिखता है। हर किसी को एक ना एक दिन मारना है। इसके साथ यह भी सत्य है कि सब एक साथ मर जाए ये भी संभव नहीं। जो बचते है वो अपनो की अच्छी-बुरी यादों के साथ आगे बढ़ते है।

ऐमी, अपस्यु के ओर देखने लगी.. आरव भी अपस्यु के ओर देखने लगा.. दोनो को अपने ओर देखते हुए…. "क्या? मुझे ऐसे क्यों घुर रहे हो दोनो।"

ऐमी:- आरव साथ है..

अपस्यु:- हां ठीक है अब तीन लोगों के बीच क्या वोटिंग कर रहे हो।

आरव:- कमिने हो दोनो.. कितनी दूर से खेल जाते हो अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल होता है। पहले तो मुझे लगा था कि तुम दोनो पार्थ और स्वास्तिका को लेकर परेशान होगे और विक्रम का केस को भी हैंडल कर रहे होगे, मै तो यही सोचकर आया था.. लेकिन आज अगर मै नहीं आता यहां तो तुम दोनो सबकुछ प्लान करके निकल लेते और मुझे पता तक नहीं चलता।

अपस्यु:- वैसे ये सब मामला नहीं भी होता तो भी मै तुझे लावणी के साथ भेजता ही। आज दिन में मेरे कान में कह रही थी, हमारी शादी करवा दो जल्दी भईया।

आरव:- क्या बात कर रहा है। वैसे अरमान मेरे भी कुछ ऐसे ही थे। क्या है कुछ वक़्त उसे भी दे दूं.. कभी वक़्त ही नहीं दे पता। फिर ये भी रहता है कि दोनो परिवार इतने नजदीक है कि कुछ छिपता ही नहीं।

ऐमी:- कोई नहीं आराम से 10 दिन घूम आओ जबतक यहां सब क्लियर करते है। तुम लोग जबतक लौटोगे उससे पहले हम राठौड़ मेंशन में घुसने का प्लान कर चुके होंगे। लेकिन फिलहाल हमारे हर काम के बीच में ये श्रेया और उसकी टीम आ रही है। वो हमारे इतने अंदर तक घुस चुकी है कि दूर बैठकर वो लावणी के बेस्ट फ्रेंड को हमारे ही एक क्लोज कॉन्टैक्ट के हाथों उलझा दी।

"नाह ! तुम जैसा सोच रही हो वैसा नहीं है ऐमी। हां परिस्थिति उलझी जरूर है लेकिन इन परिस्थितियों को मैंने है उलझने दिया है। क्यों होने दिया वो मै तुम्हे बताऊंगा… क्या करना है वो तुम दोनो मुझे बताओगे।"
 
Update:- 105

"नाह ! तुम जैसा सोच रही हो वैसा नहीं है ऐमी। हां परिस्थिति उलझी जरूर है लेकिन इन परिस्थितियों को मैंने है उलझने दिया है। क्यों होने दिया वो मै तुम्हे बताऊंगा… क्या करना है वो तुम दोनो मुझे बताओगे।"

अपस्यु अपनी बात कहकर कुछ देर ख़ामोश रहा, ऐमी और आरव इंतजार में उसका चेहरा देख रहे थे.. दोनो को घूरते एक मिनट हो गया, दूसरा मिनट चलने लगा.... "अब बोल भी दो, 10 सेकंड का पॉज समझ में आता है, लेकिन ये तो लंबा होता जा रहा है।"..

अपस्यु:- तुम दोनो को विश्की में मजा आता है और मै अपने कॉकटेल को मिस कर रहा हूं।

ऐमी, अपस्यु को देखकर हंसती हुई नौटंकी कहने लगी और उठकर कॉकटेल का सारा सामान लेने चली गई.. इधर आरव उसे घूरते हुए… "थू.. बेवड़ा कहीं का, अच्छा होता तुझे लावणी जैसी बीवी मिलती। तुम दोनो दुश्मन के हाथों नहीं बल्कि शराब पीकर लीवर खराब होने से मारोगे।"

अपस्यु:- मै जब मारूं ना तो तू हंसते रहना, मरने का दर्द कम हो जाएगा। वरना आज तक तो तूने दर्द नहीं दिया लेकिन आखिरी वक़्त ने दर्द दे जाएगा और मै बेबस कुछ कर भी नहीं पाऊंगा..

आरव, अपना एक पेग खिंचते… "कमिना इमोशनल ना किया कर… अभी तो हम साथ मिलकर धमाल करेंगे.. ठीक से जिए ही कब है, सब खत्म हो जाए तो हम तीनो एक लंबा वैकेशन लेंगे"

ऐमी:- तीनों काहे.. सिर्फ हम दोनों.. तू लावणी के साथ जाना..

आरव:- हां तो चारो एक लंबा वैकेशन लेंगे..

ऐमी, अपस्यु को ड्रिंक देती… "बसंती जबतक तेरी ये जुबान चलेगी, मेरे ये हाथ चलेंगे।

अपस्यु.. अपना ड्रिंक लेने के बाद…

हां तो कहानी की सुरवात होती है जब मै साची को कंफ्यूज कर चुका था, तुमलोग सब यूएसए के लिए निकल गए थे, और अचानक ही उसी बीच एक लड़की की एंट्री होती है। शक की कोई गुंजाइश नहीं, समन्या रूप से मिली और कुछ बात करके चली गई। दिमाग में शक की सुई तब घूम गई जब मै अपने पाऊं में आयुर्वेद उपचार किए हुए था और वो बड़ी ही सफाई से उसका सैंपल ले गई।

आरव:- ओ तेरी, यानी वो अतीत के तार को जोड़ रही थी और श्रेया इस बात की जांच कर रही थी कि गुरु निशी का कोई शिष्य तो नहीं?

अपस्यु..……….

हां यही ख्याल मेरे मन में भी आया। मुझे लगा मै सबके सामने हूं, और बेझिझक सबसे यही कहता रहा हूं कि मै गुरुकुल से पढ़ा हुआ छात्र हूं, तो हो ना हो मुझ पर शक हुआ है। पहले अपनी पहचान छिपाने की जरूरत थी, इसलिए लैब जाकर मैंने उस सैंपल में कुछ एंटीबायोटिक्स के चूर्ण मिलाकर वापस चला आया।

दिमाग अब भी इसी प्वाइंट को सोच रहा था कि हमारी सच्चाई कों किसने पहले भांप लिया। मैंने श्रेया के बारे में पता करना शुरू किया। लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। ना तो एक छोटी सी क्लू और ना ही कोई ऐसा लूप जहां से अंदर घुसा जाए। एक समन्य सी प्रोफाइल जो आम परिवार की होती है।

मैंने चीजों पर गौर किया और मुझे लगा की इस बीच एक ही ऐसा है, जिसे मैंने छेड़ा था, वो था होम मिनिस्टर और वही इकलौता ऐसा दिख भी रहा था जिसमें क्षमता हो की वो किसी को भी, कहीं भी प्लॉट कर सकता है।

आरव:- होम मिनिस्टर के होने का तो सवाल ही नहीं होता है, ये हम सब जानते हैं। मतलब एक बार और उसकी छानबीन किए और कुछ नतीजा नहीं निकला होगा।

ऐमी:- राइट, हमारे हाथ कुछ नहीं लगा..

अपस्यु…

हां हमारे हाथ कुछ नहीं लगा। ना तो कौन है श्रेया उसका कुछ पता लगा पाए थे, और ना ही उसका मकसद क्या है उसका कुछ भी अंदाज़ा था। फिर मैंने ऐमी से कहा इसपर से ध्यान हटाएं और हम अपने मिशन पर फोकस करते हैं।

अच्छी बात यह थी उस वक़्त की तुम में से कोई नहीं था यहां पर और मैंने सुलेखा आंटी से हेल्प मांगी थी कि किसी तरह तिकड़म भिड़ाकर वो मां को यूएसए ले जाए।

ओह हां सॉरी वो ड्राइवर और ऐक्सिडेंट वाली बात तो रहा ही गई। मां ने जब ऐक्सिडेंट किया था, तभी श्रेया की सो कॉल्ड मां ने, उनके दिमाग में ड्राइवर की बात डाली। कमाल की प्लैनिंग किसी अनजाने को घर में घुसाने कि। इंटरव्यू में आए सभी लोग उसी के आदमी थे।

सुनिश्चित करने के लिए मैंने मां को श्रेया के घर भेजा था और मै खुद इंटरव्यू ले रहा था और मेरा शक सही निकला। श्रेया का भाई वहां आकर, देखकर गया था कि मै ड्राइवर रखने में इंटरेस्टेड हूं या नहीं। मुझे पता था कि वो पूरे फ्लैट छानबीन शुरू करने वाले होंगे, इसलिए बड़ी ही सफाई से सारे सामान को यहां शिफ्ट करना परा और जितनी चीज़ें उन्हें मेरे घर से मिलनी चाहिए, उतनी चीजें छोड़ दिया।

जितना सोचा था उससे कहीं खरनाक इनकी टीम निकली इस बात का अंदाज़ा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है की मेरे पूरे वर्क सेक्शन को इन लोगों ने छेड़ा। वहां की पूरी जानकारी ली, लेकिन एक समान भी अपने जगह से एक इंच नहीं खिसकी थी। कंप्लीट परफेक्शन…

आरव:- कुछ समझ में नहीं आया थोड़ा डिटेल तो दे ना।

ऐमी:- हाई रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी।

अपस्यु.. …..

हां उन्होंने यही इस्तमाल किया था। पूरे कमरे की फोटोग्राफी की गई। हर चीज को चेक करने के बाद उसे बिल्कुल वैसा ही रखा गया। केवल यह भूल गए हमारे वर्किंग सेक्शन एंट्री टाइल्स के नीचे वेट मशीन लगा है जो सबका वजन रीड करके हमारे सिस्टम पर अपलोड कर देता है। खैर मै जो दिखाना चाहता था वो मै दिखा चुका था, और लौटने के बाद इंतजार में था कि उनकी प्रतिक्रिया क्या है और मेरे लिए रणनीति क्या होगी।

ऐमी:- ओय हर बात इतनी डिटेल, तो यह भी बता दो कि अपनी क्या डिटेल छोड़े थे..

आरव:- बस कर पागल कितनी पिलाएगी। मेरा हो गया..

ऐमी:- 2 पेग ही तो लिए है.. इतने में तेरा क्या होगा..

आरव:- नाह ! मेरा हो गया। इतने में फुल..

अपस्यु:- अरे यार साथ बैठे है तो तेरा खाली ग्लास खटकेगा ना.. चल बेटा 1 पेग और लेले…

आरव:- नाह मै नहीं लूंगा मैंने लावणी से वादा किया है।

ऐमी:- होने वाली बीवी के लिए दोस्त की बात टाल रहा। अब तो तेरी भाभी हूं कमिने, तू मेरी बात टाल रहा है..

अपस्यु:- जाने दो ऐमी ये आजकल ज्यादा भाव खाने लगा है। अब हमारी बात क्यों सुनने लगा।

आरव झुंझलाते हुए…. "हद है कोई नहीं पीना चाहता उसे जबरदस्ती पिलाओ। मै नहीं पीता, जिद किए तो उठकर चला जाऊंगा।

अपस्यु:- जा तू जा .. अभी चला जा। मतलब हमें छोड़कर चला जाएगा। जब जाना ही था तो आया ही क्यों। हां अब तुम्हे इन कर लिया है ना तो सारी इंफॉर्मेशन भी दे दूंगा.. जा भाई तू जा।

ऐमी:- अब ले भी ले, पीने का मन तो तेरा भी होगा…

हाय रे मंडली की जबरदस्ती, ना चाहते हुए भी ग्लास फुल करना ही परा… छोटे से ब्रेक के बाद अपस्यु फिर से बोलना शुरू किया…

मुझे 2 बात क्लियर करनी थी… पहली तो ये की क्या कोई मुझे गुरु निशी के शिष्य के रूप में खोज रहा है या फिर ये कोई अचानक से टपका है, जो मेरे काम और कॉन्टैक्ट देखकर इंप्रेस हुआ है, और मुझे अपने साथ मिलाना चाहता है।

इस कन्फर्मेशन के लिए मैंने सिन्हा जी के साथ किए कुछ हाई प्रोफाइल काम कि फाइल वहां छोड़ आया था। साथ में हम अब होम मिनिस्टर के साथ काम कर रहे है उसका भी क्लू छोड़ा था, अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में।

मै जबसे वापस आया पुरा ध्यान बनाए था। अंदाज़ा हो चला था कि इस अपार्टमेंट में 30% अब उसके लोग है। सिन्हा जी के ऑफिस में लोग पहुंचे हुए है। वो सोमेश के घर भी पहुंच चुके थे। शक ये भी है कि अजिंक्य जो कि एक मजबूत कॉन्टैक्ट भी नहीं होगा, वहां भी पहुंच चुके होंगे।

मेरे आते ही ये लोग एक्टिव हुए और बस हमारा टेस्ट शुरू हो गया.. उन लोगों ने मामला उलझा दिया था मैक्स और एमपी के बीच। वो तो शुक्र है कि सोमेश में कुछ तो बुद्धि बाकी थी और उसने मैक्स को नहीं मारा। नहीं तो इन लोगों ने ऐसा जाल बुना था टेस्ट का, जिसमें देखना चाहते थे कि फैमिली फ्रेंड के लिए क्या कर सकते है, ताकि इस बात से अंदाज़ा लगा सके कि फैमिली फ्रेंड्स के लिए जब ये हदें है तो फैमिली के लिए कितनी हदें होंगी।

यानी इस घटना ने मकसद तो साफ कर दिया है कि कोई मेरा "डाय हार्ड फैन" (die hard fan) है जो मुझे अपने ओर करना चाहता है। और मकसद अपना काम करवाना नहीं ही है, क्योंकि इतनी शातिर टीम मैंने आज तक नहीं देखी। जिस हिसाब का ये टेस्ट था, उससे तो साफ है कि वो मुझे एक परफेक्ट एसाशियन (assissian) के रूप में देख रहे है, जो उनके टारगेट को सफाई से एलिमिनेट (eliminate) करे। मैं उनके टेस्ट में पास हो चुका हूं और श्रेया अब सीधा जाल बुनना शुरू कर चुकी है। यदि मै उनके जाल में फसा तो इनडायेक्टली श्रेया के जरिए मुझसे काम निकलवाएंगे, नहीं तो फिर फैमिली को उलझाकर अपना काम निकलवाएंगे। वो लोग अपने योजना के आखरी चरण में है और अपना काम निकलवाने के लिए इन 2 में से कोई भी रास्ता अपना सकते है।

मैंने उन्हें हर वो अनुकूल माहौल दिया जिसके तहत वो पुरा अंदर तक घुस सके। मैंने जान बूझकर यूएसए निकलने से पहले उन्हें प्लाई बोर्ड पर्टेशन दिया, ताकि घर में घुस सके। शार्प इतने है की जैसे हम सामने वाले को अपने हिसाब से काम के लिए राजी कर लेते हैं, ठीक वैसे ही ये लोग बड़ी दूर से खेलते आ रहे है। इनके पास हमारे हर फैमिली मेंबर कि प्रोफाइल है और उनके सभी क्लोज फ्रेंड्स की लिस्ट। और उन क्लोज फ्रेंड्स के पूरी फैमिली डिटेल।

जिस लिसा की बात आरव कर रहा है, वो और कोई नहीं बल्कि सोमेश की बेटी है। यूके में रह रही लड़की तक का डेटा ले लिया। उसके इंट्रेस्ट और सब कुछ। हम जैसे साची के लिए पूरे दूर से खेलकर आए थे, वैसे ही कोई मेरे लिए बहुत दूर से खेलते आ रहा है। श्रेया अचानक प्लॉट नहीं हुई, बल्कि पुरे होमवर्क के बाद आए है। बस सवाल ये है कि कौन.. कौन अपने सारे काम छोड़कर अपनी इतनी शातिर टीम को मुझे फसाने में लगाए है। अपना कोई लिस्टेड टारगेट में से कोई है, जो अनजाने में ही मेरे कॉन्टैक्ट और शार्प काम को देखकर इंप्रेस हुआ, या कोई थर्ड पार्टी है जो अचानक ही हमारे कुंडली में आ धमाका।

ऐमी:- कंप्लीट फेसबुक प्रोफाइल खंगाली गई है और वहां के डेटा के हिसाब से हर किसी पर नजर रखी गई है। जाहिर सी बात है उनके पास साइबर डिपार्टमेंट है, फिर जरूर हैकर भी होंगे.. छानबीन का तरीका और किसी भी बात में अपना प्वाइंट ना बताकर बल्कि माहौल ऐसा बना देना की उसकी भाषा सामने वाला बोले, साफ मतलब है कि सभी प्रशिक्षित लोग है। फिर ये बात आती है कि 20 से 25 साल के बीच के लोगों ने इतना प्रशिक्षण प्राप्त कहां से किया होगा। मतलब साफ है या तो अनाथों की टीम को कोई एक्स एजेंट ट्रेंड कर रहा है या फिर ये ट्रेंड एजेंट है, जो हमारे पीछे है।

अपस्यु:- पहला वाला अंदेशा ही सही है, क्योंकि सरकारी एजेंसी के इतने लोग किसी टारगेट को फसाकर अपना काम तो नहीं ही निकलवाते हैं। सो ये कोई ऑर्गनाइजेशन है और इनके पास ऐसे बच्चे है, जिन्हें ये शुरू से प्रशिक्षित कर रहे हैं। ट्रेंड कोई एक्स एजेंट ही कर रहा है जो जाल बिछाने और फसाने में माहिर है। और ऐसे एजेंट की कोई डिटेल नहीं मिल सकती क्योंकि गवर्नमेंट एजेंट की फाइल मेंटेन नहीं करते, बल्कि उन्हें जला देते है। हां लेकिन अपने सभी एक्स एजेंट पर नजर बनाए रखने के लिए एजेंसी की पूरी एक टीम रहती है। सो इन बातों से एक बात और साफ हो जाती है कि कोई विदेशी ट्रेनर है जो अपने काम में पुरा माहिर है।

ऐमी:- चक्कर तो वहीं है ना.. अब हम कुछ भी करेंगे, इनकी नजर हम पर ही बनी रहेगी। मनाकी हम शार्प प्लान करके, बिना नजर में आए अपना काम करते रहे है, लेकिन जब वो लोग नजर बनाए है तो क्या ऐसा कभी नहीं होगा की हमसे कोई गलती नहीं होगी..

आरव:- हाहाहाहा.. तो यहां भी चूहे बिल्ली का खेल शुरू है। बस हमारे लापरवाह रवैया ने हमे बचा लिया। अगर उन्हें भनक भी होती की हम टेक्निकली साउंड है फिर हम उन्हें समझ भी नहीं पाते। तुम दोनो शुरवात में कह रहे थे कि मै 10 दिनों के लिए जबतक बाहर जाऊंगा तबतक सब साफ करके हम राठौड़ मेंशन घुसने वाले होंगे।

ऐमी:- हां अपस्यु ने आज अचानक कहा कि प्लान री-शेड्यूल करना है और 3 महीने के बदले हमे डेढ़ से दो महीने में अब घुसना है।

अपस्यु:- हां, जैसा कि अभी ऐमी कह रही थी, क्या हमसे कभी कोई गलती नहीं होगी। बस यही बात मेरे दिमाग में है। श्रेया मुझे फंसाना चाहती है, तो मै फंसता जाऊंगा। उसका ध्यान बाकी लोगों से हटेगा। राठौड़ मेंशन में फैमिली शिफ्ट होने का मतलब है कि हम मां और कुंजल के ओर से बेफिक्र हो जाएंगे। यह डर नहीं रहेगा कि श्रेया उनके करीब बैठकर अतीत के पन्ने कुरेदे।

आरव:- ऐसा नहीं लग रहा की जिंदगी थोड़ी बोरिंग सी हो गई है और जिंदगी एक रूम में पैक होकर रह गई है। कोई भी आहट हो तो डर सा माहौल पैदा हो जाता है।
 
Update:-106

आरव:- ऐसा नहीं लग रहा की जिंदगी थोड़ी बोरिंग सी हो गई है और जिंदगी एक रूम में पैक होकर रह गई है। कोई भी आहट हो तो डर सा माहौल पैदा हो जाता है।

ऐमी:- राइट … एग्जैक्टकली मेरा भी यही कहना था आज अपस्यु को..

अपस्यु:- समझ गया तुम दोनों क्या कहना चाह रहे हो। मुझे उम्मीद भी यही थी इसलिए तो तुम दोनो पर छोड़ा था कि क्या करना है। स्वास्तिका और पार्थ से अब हम कोई उम्मीद नहीं कर सकते.. उसे साइड लाइन में रखो। मां के आस पास इन दोनों के होने से हम थोड़े रिलैक्स होंगे.

आरव:- बोर मत कर.. जल्दी से राज खोल, ग्राउंड कैसे क्लियर करेंगे…

अपस्यु:- मै घुसकर पागल बनाता हूं श्रेया को.. ये साइडलाइन कहानी है, जो हमारे रेगुलर काम के साथ चलेगी। 10 दिन बाद जब तुम लौटोगे आरव, तब श्रेया की टीम पर बिजली गिरेगी… और उन्हें उलझाकर हम बीच उसी भी विक्रम को चौंकते हुए अंदर घुस जाएंगे….

तकरीबन 15 मिनट तक अपस्यु अपने योजना का पुरा विवरण सबको डेटा रहा। योजना काफी कारगर थी लेकिन इसी बीच ऐमी कहने लगी… "यह योजना है तो सही पर इसमें केवल श्रेया पर बिजली गिरेगी बस। हां विक्रम पर कहर बरसने वाला वाला है वो तो थी है लेकिन इस कामिनी और इसके टीम को सस्ते में क्यों छोड़ रहे। मै थोड़ा फर बदल करना चाहूंगी इसमें।".. ऐमी जब अपस्यु के योजना मै फर बदल कर बताने लगी, दोनो भाई के दिमाग की घंटी बज गई।

आरव:- ये सैतानी खोपड़ी अब चली है ना… पूरी डिटेल..

ऐमी लगभग 10 मिनट तक अपनी योजना को विस्तार रुप से बताई। अपस्यु और आरव के बीच बीच में सवाल आते रहे जिसके कुछ के जवाब तो ऐमी पहले से सोच चुकी थी लेकिन कुछ फसे मामले में आरव ने उसे पूरा करना का जिम्मा ले लिया। योजना पूर्णतः सामने आने के बाद तो जैसे दिमाग में पूरी कहानी ही सेट हो गई हो।

अपस्यु:- इतनी दूर की प्लैनिंग। तुमने तो श्रेया को पूरी तरह से लपेट लिया इसमें।

आरव:- योजना जटिल है, लेकिन इस एक प्लान से हम सबके आगे खड़े होंगे और सब हमारे पीछे। मैंने अपना माथा बहुत खपा लिया, अब तुम दोनो इस योजना की पूरी बारीकी को समझो। मै चला गोवा अपनी लावणी के साथ। वैसे देखा जाए तो तुम दोनो का भी हनीमून पीरियड ही माना जाएगा। कोई तो होगा नहीं, तो काम के साथ एन्जॉय करो।

अपस्यु:- काहे के मज़े .. यहां हरताल चल रहा है।

ऐमी खाली बॉटल उठाकर अपस्यु के हाथ पर मारती हुई…. "अति बेशर्मी तुममें घुस गई है। छोड़ो ये, कितने समय बाद हम सब साथ है, चलो कुछ तूफानी प्लान करते है।

अपस्यु:- नहीं मै सोने जा रहा हूं, तुम दोनो आराम से तूफानी बर्फानी सब करते रहो।

ऐमी आरव के ओर देखी और आरव चुपचाप वहां से निकल गया। जैसे ही अपस्यु कुछ दूर आगे बढ़ा होगा, छापक से उसके ऊपर पानी परा। वो गुस्से में पलटा और दोनो भाई कुछ देर तक उठापटक करने के बाद हंसते हुए खड़े हो गए।

तीनों अपने ये खूबसूरत से पल कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे थे। कभी अनारकली और सलीम का कॉमिक रोले प्ले किया जा रहा था तो कभी टूटे दिल देवदास का। तीनों के बीच मस्ती का सिलसिला जारी रहा।

अगली सुबह…

नंदनी सुबह सुबह ही अपने समधियाना यानी कि मिश्रा हाउस में दस्तक दे चुकी थी। सुलेखा, अनुपमा और नंदनी तीनों वहीं हॉल में बैठकर बातें कर रही थी। बातों की शुरवात ही लावणी के गोवा जाने से हुई। यूं तो थोड़ी असमंजस जैसी स्तिथि बनी थी, लेकिन नंदनी को ना कहने की हिम्मत उन दोनों में तो नहीं हुई, इसलिए सुलेखा ने राजीव को कॉल लगाया।

राजीव को भी कुछ समझ में नहीं आया क्या कहे, और नंदनी को मना करने की हिम्मत वो भी नहीं जुटा पाया, इसलिए बात को उसने फिर सुलेखा पर ही फेक दिया। होना क्या था, 5 मिनट तक जब कोई फैसला दोनो नहीं ले पाई, तब नंदनी ही दोनो को सारी बातें समझते हुए… "उन्हें घूमने देने जाने चाहिए"… ऐसा अपना प्रस्ताव रखकर फैसला उन्हीं दोनो पर छोड़ दिया…

साची जो थोड़ी दूर बैठकर उनकी सारी बातें सुन रही थी… "छोटी छोटी ख्वाहिशें होती है। यहां मायका और ससुराल इतने नजदीक में है कि बेचारे दोनो पीस कर रह जाते हैं। क्यों इतना सोच रहे है, अब जाने भी दो ना। या दोनो साथ होंगे तो दिमाग की सुई एक ही जगह अटक गई है। ऐसा है तो वो कहीं भी ही सकता है। बाहर निकलो अपने जहनी पुराने ख्यालतों से और आंख खोलकर देखोगे तो पता चलेगा इनके अलावा भी दुनिया होती है।"..

सुलेखा:- दीदी मुझे तो लगता है ये अपना रास्ता साफ कर रही है लावणी के बहाने।

साची:- छोटी मां मुझे घूमने जाना हो कहीं ध्रुव के साथ और आप सब ऐस रोड़ा आटकाओगे तो मै कोर्ट मैरिज करके चली जाऊंगी, लेकिन जाऊंगी जरूर।

नंदनी:- अपस्यु से तेरी बात हुई थी क्या, क्योंकि वो भी ऐसा ही कुछ बोल रहा था।

आगे फिर ताना बाना शुरू हो गया। एक ओर तीनों ही औरतें छोटे से शहर में उस वक़्त की तात्कालिक स्तिथि को बताने लगी कि उनके ज़माने में क्या होता था और साची आज के परिवेश में लड़कियों को कैसा होना चाहिए उसपर बात कर रही थी।

सभी बैठकर बातें कर ही रही थी कि लावणी हॉल में सबको नमस्ते करती हुई बाहर जाने लगी… "कॉलेज जा रही है लावणी, 2 मिनट सुन तो".. नंदनी, लावणी को पीछे से टोकती हुई कहने लगी।

लावणी:- जी मां…

नंदनी:- जा बैग पैक कर ले, कुछ दिनों के लिए तेरी कॉलेज से छुट्टी।

लावणी ने जैसे ही यह बात सुनी उसे अपस्यु की बात याद आ गई… "दोनो को साथ वक़्त बिताना है उसके लिए जल्दी शादी करवाने क्यों कह रही हो। तुम दोनो को कहीं बाहर भेजने का इंतजाम मै करता हूं।".. अपस्यु की बातों का ख्याल आते ही लावणी अंदर से गुदगुदा गयी। लेकिन बाहर से अपने इमोशन संभालती… "कहीं फैमिली टूर है क्या मां"..

सुलेखा:- देखो तो बदमाश को। कल शाम अपस्यु के साथ गई थी, वहीं दोनो भाई बैठकर यें प्लान किए होंगे और नाटक तो देखो, जैसे कुछ जानती ही नहीं।

नंदनी, सुलेखा की बात पर चौंकती हुई…. "आप तो ऐसे बता रही है जैसे दोनो भाई को काफी करीब से जानती हो।"

नंदनी की बात सुनकर सब लोग सुलेखा को ही देखने लगे…. "बस लगा की कहीं दोनो (लावणी और आरव) बात करे तो हम मना नर दें, इसलिए अपस्यु से मिलकर अपना काम करवाया हो।

लावणी:- क्या मां आप भी। मेरा दोस्त मैक्स, 2 हफ्ते से गायब था और उसके मम्मी पापा की हालत मुझसे देखी नहीं गई इसलिए मै भईया से उसके विषय में बात करने के लिए गई थी।

सभी लोग सुनकर अफ़सोस करने लगे। चिंता जताते हुए फिर पूछने लगे… "क्या हुआ कोई खबर मिली कि नहीं।"

लावणी:- कमाल के है अपस्यु भईया, और ऐमी दीदी भी। हालांकि दोनो किसी जरूरी काम के बारे में बात कर रहे थे, शायद इंडिया गेट पर कोई प्रोग्राम था, लेकिन मेरी समस्या सुनने के बाद सारे काम कैंसल करके मैक्स को ढूंढने में लग गए। और मैक्स को ढूंढ निकाला। बेस्ट है दोनो।

अनुपमा:- और आरव..

लावणी:- वो भी बेस्ट है, लेकिन कल आरव नहीं थे ना। मैंने कॉल किया था, पर वो सब लोगों के साथ थे, तो मैंने सोचा वापस आएंगे तब बता दूंगी।

साची:- हां ठीक है, लेकिन अब जा पैकिंग कर ले..

लावणी अरमान को बिल्कुल काबू किए तेजी से अपने कमरे पहुंची और उत्साह से वूहू वुहू करके उछालने और नाचने लगी।…. "गोवा पहुंच पर भी नाच सकती है, अभी पैकिंग कर ले।"… दरवाजे पर खड़ी साची कहने लगी और बाकी सभी औरतें पीछे खड़ी होकर लावणी का उत्साह देख रही थी। हर किसी को महसूस हो रहा था कि क्यों थोड़ी सी आज़ादी इन्हे भी देनी चाहिए।

लेकिन बेचारी लावणी, दरवाजे पर सबको खड़े देख कर शर्म से पानी-पानी हो गई। वो फाटक से दरवाजा बंद करके बस लज्जाए जा रही थी। आलम ये था कि पैकिंग के बाद तभी बाहर आयी जब आरव उसे लेने आया। आंखों पर काला चश्मा चढ़ा रखी थी, ताकि किसी से नजर ना मिले और आरव के पीछे वो छिप-छिप कर चल रही थी।

रात के लगभग 11.30 बज रहे होगे, सभी लोग उड़ान भर चुके थे और अपस्यु हॉल में बैठा गाना सुनते एक अंदाजन श्रेया के आने का इंतजार कर रहा था। इसी बीच घर कि घंटी बजी और दरवाजे पर गुफरान था।… "क्या काम है गुफरान।"..

गुफरान:- सर वो कुछ पैसे चाहिए थे।

अपस्यु:- कुछ पैसे मतलब कितने..

गुफरान:- सर वो 2000 रुपए चाहिए थे।

अपस्यु:- तुम रात में मुझसे पैसे मांगने आए हो।

गुफरान:- सर वो जरूरत तो रात की है, सुबह मै आपके पैसे लौटा दूंगा।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है सुन तू मेरे लिए कॉकटेल का पूरा सामान ले आना, एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल..

अपस्यु ने उसे उसके 2000 रुपए दिए और बाकी अपने सामान के 20k थमा दिया। तकरीबन 5 मिनट बाद गुफरान का फोन आया और वो दुकानदार को फोन दे दिया। उस दुकानदार ने कुछ सवाल किए और सारा सामान पैक करके दे दिया।

गुफरान आकर अपस्यु को सारा समान दिया और बचे हुए पैसे वापस करके वहां से जा ही रहा था कि… "अच्छा सुनो, मां से ये सब मत बताना".. "ओह हो तो आंटी से छिपकर कांड किया जा रहा है।"..

अपस्यु:- नाईट वाक, अच्छा है, अच्छी सेहत बनाओ। हम तो चले… गुड नाईट।

श्रेया:- अच्छा है, वैसे कोई कॉल करने वाला है पर कुछ याद भी हो तो ना।

अपस्यु:- मैम अगर आपको बात करनी है तो कृपया अंदर आ जाइए, अन्यथा सुभ रात्रि क्योंकि अब मै इंतजार नहीं कर सकता।

श्रेया:- हीहीहीही.. घर में कोई नहीं ..

अपस्यु श्रेया को बीच में ही रोककर…. "तू तब से यहां खड़ा होकर क्या कर रहा है? तेरा काम हो गया ना?

गुफरान:- हां भाई।

एक नपा तुला थप्पड़ परा.. "सर से सीधा भाई। जब क्लोज होंगे तब ये इस्तमाल करना। चलो अब जाओ। और सुन पैसे कल सुबह कब वापस करोगे।"

गुफरान:- सर वो 10 बजे तक कर दूंगा।

अपस्यु:- ठीक है जाओ… हां मिस आप जारी रखिए..

श्रेया:- भूल गए ना मेरा काम?

अपस्यु:- कुछ नहीं भुला हूं सब याद है, मुझे फिलहाल आप की इजाज़त हो तो जाऊं, बहुत दिनों बाद मौका मिला है।

श्रेया, गेट से अंदर ताक-झांक करती…. "अकेले हो फिर भी इतनी हड़बड़ी मची है पीने की।"…

अपस्यु:- मै दिल्ली में थोड़े ना रहता था जो मेरे यहां कोई ज्यादा दोस्त होंगे..

श्रेया:- अच्छा पड़ोस में तुम्हारी एक दोस्त है और तुम ज्यादा कम की बात कर रहे हो।

अपस्यु श्रेया का हाथ पकड़कर खिंचते हुए अंदर किया और दरवाजा बंद करते हुए…. "तो सीधा अंदर आओ ना। अब एक सिम्पल सवाल.. क्या तुम्हे मेरे साथ बैठकर लेना है, या जाना है।"..

श्रेया:- पीकर यहां लुढ़क भी गई तो कोई फर्क नहीं पड़ना, मेरे यहां भी कोई नहीं है।

अपस्यु:- जे हुई ना बात, चलो फिर तुम आराम से बैठो आज खिदमत में हाज़िर है एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल …

श्रेया:- देखना कहीं एटम फटे ना, वरना यहां भूचाल सा मच जाएगा…

दोनो इधर-उधर की बातें करते हुए ड्रिंक का मज़ा लेने लगे। 1 ड्रिंक पीने के बाद श्रेया ने खुद कॉकटेल बनना शुरू की और अपस्यु को बढ़ाते जाने लगी। महज आधे घंटे में वो अपस्यु को 15 पेग पिला चुकी थी और खुद अभी तक दूसरे ड्रिंक को पकड़ी हुई थी।

अपस्यु "एक्सक्यूज मी" करते हुए उठा और लड़खड़ाते हुए किसी तरह बाथरूम तक पहुंचा। काम खत्म करके आने के बाद अपस्यु फिर बैठा। श्रेया ने फिर से ड्रिंक देना शुरू की। 3 पेग और पिलाने के बाद… "अपस्यु आज तक तुमने बताया नहीं की तुम कौन से आश्रम में पढ़े हो।"..

अपस्यु, श्रेया को गौर से देखते… "वो क्या है ना बेबी तुमने कभी पूछा ही नहीं। वैसे एक बात कहूं तुम बहुत हॉट दिखती हो। बिल्कुल रेड चिली"

श्रेया:- हीहीहीही… ये नया अवतार अपस्यु बाबू का। चलो अब पूछ लिया, बता दो..

अपस्यु:- अम्म्म ! ठीक है मै सब बताऊंगा लेकिन एक शर्त पर..

श्रेया:- कैसी शर्त..

अपस्यु:- हम एक-एक सवाल करके खेलेंगे.. एक तुम पूछो एक मै..

श्रेया:- और यदि मुझे किसी सवाल का जवाब नहीं देना हुआ था…

अपस्यु:- सिम्पल, मुझे आकर एक जबरदस्त किस्स दे देना वो भी लिप टू लिप वाला।

श्रेया:- ये क्या बकवास है? तुम होश में तो हो..

अपस्यु:- रॉक सॉलिड होश में हूं। कुछ लोगों को पचती नहीं, लेकिन मै अभी 20 पेग और ले सकता हूं। मेरी छोड़ो तुम तो होश में हो ना..

श्रेया:- हीहीहीही.. पागल हो तुम। हां मै भी होश में हूं। लेकिन ये तो चीटिंग होगी ना। मैं तो ईमानदारी से खेलूंगी, नहीं मन हुआ जवाब देने का तभी ना कहूंगी, लेकिन तुम्हारा क्या भरोसा.. कहीं जान बूझकर मुझे किस्स करने का मन हो और तुम ना कह दो तो।

अपस्यु:- ओय शुक्र करो वो मस्त वाला खेल नहीं खेला, जिसमें एक जवाब ना देने पर कपड़े उतारने कहते है। वैसे भी ऐसा कोई सवाल नही जिसका जवाब मै ना दे सकूं, गूगल भी करना पड़े तो भी जवाब दूंगा.. अब जो नहीं आता सो नहीं आता, उसमे कुछ नहीं किया जा सकता.. भरोसा हो तो खेलो नहीं तो कोई बात नहीं।

(पापा को मै कबसे इस प्लान पर काम करने कह रही थी, लेकिन वो वक़्त मांग रहे थे। कितना मुश्किल होता है बिना सीधा सवाल किए हुए जवाब निकालना ये बात थोड़े ना समझ में आएगी। ये लो देखो, दारू अंदर गई नहीं की सारे राज बाहर आने शुरू)

(अभी तो तुझे पिलाते-पिलाते 12.30 ही बजे है। तुम्हे तो आज पूरी रात जगाऊंगा जानेमन। पूछ ले सवाल तू,आज तो मेरा अतीत जान कर ही चली जाना लेकिन बातों के दौरान तुम जरा बचकर चलना जानेमन, कहीं मुंह से कुछ निकल गया तेरे, तो मेरा राज जानने के चक्कर में अपने राज मत खोल देना)
 
Update:-107

(पापा को मै कबसे इस प्लान पर काम करने कह रही थी, लेकिन वो वक़्त मांग रहे थे। कितना मुश्किल होता है बिना सीधा सवाल किए हुए जवाब निकालना ये बात थोड़े ना समझ में आएगी। ये लो देखो, दारू अंदर गई नहीं की सारे राज बाहर आने शुरू)

(अभी तो तुझे पिलाते-पिलाते 12.30 ही बजे है। तुम्हे तो आज पूरी रात जगाऊंगा जानेमन। पूछ ले सवाल तू,आज तो मेरा अतीत जान कर ही चली जाना लेकिन बातों के दौरान तुम जरा बचकर चलना जानेमन, कहीं मुंह से कुछ निकल गया तेरे, तो मेरा राज जानने के चक्कर में अपने राज मत खोल देना)

"क्या हुआ, नींद लग रही है क्या? तो जाओ सो जाओ".. अपस्यु श्रेया को उसके ख्यालों से जागते हुए कहने लगा..

श्रेया:- ठीक है मुझे मंजूर है लेकिन एक शर्त तुम्हारी तो एक शर्त मेरी भी है, अगर 10 सेकंड से ज्यादा का समय लिए तो उसे झुटा जवाब मना जाएगा, ऐसी सूरत में सामने वाले के लगातार 2 सवाल का जवाब देना होगा।

अपस्यु:- और यदि 2 सवाल का जवाब नहीं दे पाया तब?

श्रेया:- 5 सवाल तक जाएगा और फिर भी नहीं बता पाए तो सामने वाले का कहा मानना होगा!

अपस्यु:- सभी शर्तों पर राजी, चलो सवाल पूछो।

श्रेया:- किस आश्रम में तुम पढे?

अपस्यु:- फुस की बनी आश्रम में।

श्रेया:- अरे मतलब आश्रम या गुरुकुल जो भी है उसका नाम पूछी मै।

अपस्यु:- जो भी हो तुम्हे पहले क्लियर पूछना चाहिए। अब मेरा टर्न है, उसके बाद तुम्हारा। बताओ कितने ब्वॉयफ्रेड रहे है तुम्हारे?

श्रेया, बॉयफ्रेंड वाले सवाल हंसती हुई कहने लगी…. "तुम्हारी पहले से एक गर्लफ्रेंड है, लेकिन दूसरी लड़की के पास कोई बॉयफ्रेंड है या नहीं उस पर ध्यान है। जैसा सोची वैसा ही सवाल आया।"

अपस्यु:- 10 सेकंड हो गए है तुम्हारे..

श्रेया, हंसती हुई… "ठीक है फिर 2 सवाल पूछो"

अपस्यु:- पहला सवाल तुम्हारे कितने बॉयफ्रेंड रहे है?

श्रेया:- एक भी नहीं।

अपस्यु :- दूसरा सवाल क्या होगा जब तुम्हे कोई लड़का परपोज कर रहा हो और पीछे से तुम्हारी मां आ गई।

श्रेया:- मेरी मां नहीं… नहीं कहीं आती जाती।

अपस्यु:- गलत जवाब जब कहीं नहीं आती जाती फिर आज कहां चली गई। इसका हिसाब एंड में करेंगे। गेम के दौरान तुमने झूट बोल।

श्रेया उसकी ओर ड्रिंक बढ़ाती अजीब से हसने लगी, ऐसा मानो उसका भेजा फ्राई यहां चल रहा हो। ड्रिंक बढ़ाने के बाद… "अपने आश्रम या गुरुकुल का नाम बताओ?"

अपस्यु:- श्रीवल्लभ आश्रम, मत्तुर, कर्नाटका । मेरी बारी.. तुम्हे बॉयफ्रेंड के लिए कैसा लड़का ढूंढ रही हो?

श्रेया:- जब जरूरत होती है तब किसी को भी बॉयफ्रेंड बना लेती हूं। बस एक ही रिक्वायरमेंट होती है, कोई सीरियस एफैर नहीं। तुम बताओ तुम्हारे पापा कहां है।

अपस्यु:- इस दुनिया में नहीं रहे। तुम्हारे पापा कहां है वैसे..

श्रेया:- मेरी सौतेली मां के साथ रहते है। तुम्हारी ये धन संपत्ति तुम्हारे पापा की अर्जित है।

अपस्यु:- स्टार्टअप केवल उनका था, बाकी पुरा हम दोनों भाई का अर्जित किया हुआ है। तुम्हारे पापा क्या करते है।

श्रेया:- मुझे इसपर बात नहीं करनी..

अपस्यु, एक ड्रिंक खिंचते… "मतलब अब किस्स दोगी।"

श्रेया:- जी नहीं बस मुझे बात नहीं उसपर करनी कोई और सवाल पूछो।

अपस्यु:- ठीक है अपनी आदतें बताओ?

श्रेया:- एफबी पर लिखी है पढ़ लेना। तुम्हारे ये अजीब नाम किसने दिया?

अपस्यु:- रुको पहले, तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया, पहले उसपर बात कर लें। मैंने तुम्हारी आदत पूछ रहा था और तुम एफबी भेज रही हो। देखा जाए तो जवाब टाला है तुमने।

श्रेया:- हां तो, इतने दिन में तुमने अभी तक मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट तक ना भेजी, मुझे बुरा लगा इस बात का, इसलिए ऐसा जवाब दी।

अपस्यु:- मैंने नहीं भेजा तो तुम भेज देती, देखा जाए तो भागीदारी बराबर है।

श्रेया:- सेलेब्रिटी अकाउंट लिया है एफबी से और कहते हो रिक्वेस्ट भेजूं, तुम्हारी तो प्रोफाइल भी ओपन नहीं होती।

अपस्यु:- दिमाग से रह गई थी ये बात। वैसे भी एफबी मै ज्यादा इस्तमाल नहीं करता, इसलिए नहीं भेज पाया। चेक करो अभी भेज दिया है।

श्रेया, अपना फोन चेक करके खुश हो गई और अपस्यु के फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करती वो खड़ी होकर उसके पास चली आयी… "किस्स रोमांटिक चाहिए या लस्टी"..

अपस्यु खड़ा होते… "तुम शुरू तो करो, फिर तो किस्स खुद व खुद एडजस्ट हो जाना है।"

श्रेया हंसती हुई अपस्यु के ओर देखने लगी। अपस्यु उसके सामने खड़ा तो हुआ लेकिन खड़ा होकर भी लड़खड़ाता रहा। श्रेया उसे चेयर पर ही बैठने बोली और खुद अपने दोनो पाऊं, अपस्यु के दोनो पाऊं के ओर करती उसके चेहरे को थाम कर होंठ से होंठ लगाकर, अपस्यु के होंठ को छूकर उसके आगे बढ़ने का इंतजार करने लगी।

अपस्यु भी माहौल और मिजाज पुरा भांपते हुए, अपने होंठ को पुरजोर श्रेया के होंठ से लगाते उसे बेहताशा चूमने लगा। एक बार जब चूमना शुरू किया फिर वो छोड़ने का नाम कहां ले रहा था। श्रेया की श्वांस पूरी तरह चढ़ गई, बदन में अजीब सी सुरसुराहट होने लगी। श्रेया अपने हाथ उसके चेहरे और गर्दन पर फेरने लगी। किस्स लंबी, और लंबी होते चली गई।

श्रेया के दिमाग से सारी बातें बाहर और वासना ने उसकी जगह ले ली। जब श्रेया की श्वांस पूरी तरह चढ़ गई, अपस्यु को लग गया कि अब माहौल कुछ और ही बन रहा है, फिर वो चूमना बंद करके अपने होंठ पीछे किया और श्रेया बदहवासी में अपनी आखें मूंदे अपने होंठ आगे बढ़ती रही लेकिन अपस्यु के होंठ उसके होंठ से मिले नहीं।

अचानक ही उसे समझ में आया कि किस्स अब खत्म हो गयी है। अजीब सा उखड़ा चेहरा बनाए, वो अपनी श्वांस सामान्य करने लगी और ख़ामोश वो अपनी जगह आकर बैठ गई। वो अब भी बाहर नहीं निकाल पाई थी उन्माद के उन पलों से, बस खुद को किसी तरह सामान्य करने में लगी थी।

अपस्यु:- आह !! ये अब तक का बेस्ट किस्स था मेरी लाइफ का।

श्रेया:- रात बहुत हो गई है। मुझे अब चलना चाहिए..

अपस्यु:- ठीक है दोस्त, वैसे कोई लड़का होता तो हाथ पकड़कर बिठा भी सकता था। लेकिन कोई नहीं तुम जाओ..

श्रेया:- अच्छा और कोई लड़का होता तो उसके साथ ये किस्स वाला खेल खेलते क्या?

अपस्यु:- लड़का होता तो दोनो साथ ने नहाते, चलोगी क्या? बात करती हो। रहने दो, सिचुएशन कॉम्प्लिकेटेड हो गई है। तुम जाओ सुबह मिलता हूं और वो भूत भागने वाला काम भी कर दूंगा। और सॉरी यदि तुम्हे किस्स पसंद ना आयी हो तो।

श्रेया:- सॉरी मै थोड़ी ओवर रिएक्ट कर गई। पहले एक जाम उठाकर मूड बनाते है फिर इस खेल को जारी रखते है।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है वो किस्स वाला शर्त हटा रहा हूं मै।

श्रेया:- फिर मै ये नहीं खेलूंगी, बाय..

अपस्यु, अपने हाथ से ड्रिंक बनाकर सर्व करते हुए…. "तुम लड़कियों का समझ में नहीं आता, कब मूड क्या रहता है।

श्रेया, जाम को टोस्ट करती हुई…… "समझ जाते अगर मूड तो फिर मुझे भड़कना ही नहीं पड़ता।"

अपस्यु:- मतलब मै समझा नहीं..

श्रेया:- कुछ नहीं । अब मेरा टर्न है.. तुम्हारा ये बोरिंग सा नाम अपस्यु किसने रखा।

अपस्यु उसे खा जाने वाली नज़रों से घूरते हुए…. "मेरे गुरु श्री अरविंदो रामनाथम ने। किस जानवर से तुम्हे ज्यादा दर लगता है.."

श्रेया:- शातिर इंसान । चलो बताओ तुम्हारे पापा की मृत्यु कैसे हुई।

अपस्यु:- शायद हार्ट अटैक था। बहुत बच्चा था ठीक से याद नहीं और फिर कभी मां से इस बात की चर्चा नहीं की। अच्छा चलो अभी तुम बताओ किस्स करने से पहले तक तो बड़ी कॉन्फिडेंस से आयी थी, किस्स के बाद ये मूड इतना चिड़चिड़ा क्यों हो गया?

श्रेया:- मुझे नहीं जवाब देना इसका और ना ही अभी किस्स का मूड है। सो जब बॉयफ्रेंड बनाकर ले जाऊंगी तब यह किस्स दूंगी। एक-एक सवाल में बोरिंग हो रहा है गेम। थोड़ा मूड चेंज करते हैं।

अपस्यु, ड्रिंक बनाकर सर्व करते… "अरे यार ग्लास खाली तो करो?"

श्रेया:- आराम से ले रही हूं बाबा, तुम लो ना अपना, मै ले लूंगी। एक काम करो तुम ड्रिंक बनना छोड़ो, मै तुम्हे बनाकर देती हूं, तुम बस सवालों का जवाब दो। और हां एक गलत सवाल पर अब एक कपड़े उतरेंगे, सिर्फ तुम्हारे लिए, मेरे लिए किस्स वाला ही शर्त रहेगा …. बोलो मंजूर..

अपस्यु:- एक प्रॉब्लम है, सारे कपड़े उतारने के बाद मै क्या करूंगा।

श्रेया:- हीहीहीही.. पोल डांस करना। ठीक.. चलो अब जल्दी जल्दी जवाब दो.. तुम्हारा नाम..

अपस्यु:- अपस्यु रघुवंशी।

श्रेया:- तुम्हारी आदतें..

अपस्यु:- नई चीजों का ज्ञान लेना और मेरे दोस्त ये अपना प्यारा कॉकटेल पीना।

श्रेया:- दुनिया में सबसे प्यारा, कोई एक खास, जिसके लिए कुछ भी कर कर जाओ…

अपस्यु:- आरव और ऐमी.. मेरे लिए ये एक ही हैं 2 नहीं।

श्रेया:- मां से कम प्यार है, क्या उनके लिए कुछ कर गुजरने वाली फीलिंग नहीं?

अपस्यु:- इतना तो मै तुम्हारे लिए भी कर दूंगा वो भी दिमाग में बिना कोई सोच रखे कि कितना क्लोज रिलेशन है। बस मै जिन लोगों के बीच हूं, वो सब खुश रहने चाहिए। बहरहाल सबसे प्यारे की बात हो रही थी और उसमें आरव और ऐमी सबसे प्यारे है। रही बात मां की तो ये दोनो सबसे प्यारे तो जरूर है लेकिन मां के लिए मै इन दोनों को छोड़ सकता हूं।

श्रेया:- जब ऐसी बात है तो मां सबसे प्यारी हुई ना।

अपस्यु:- बेवकूफ मां ना होती तो ये अपस्यु ना होता। भले वो ऐमी और आरव जितनी प्यारी नहीं है, लेकिन वो नहीं होती तो मुझे कहीं और पैदा लेना पड़ता.. फिर तो आज का तुम्हारा ये साथ भी खत्म था समझी।

श्रेया:- हम्मम! कभी किसी का कत्ल किए हो।

अपस्यु:- नाह ।

श्रेया:- सिचुएशन ऐसी फसी तुम्हारे पास, किसी को कत्ल करना ही आखरी उपाय बचा हो, वरना तुम्हारा कोई करीबी मरा जाएगा, ऐसे सिचुएशन में क्या करोगे..

अपस्यु:- सिचुएशन आने तक इंतजार काहे करना, सर दर्द खत्म करो और आगे बढ़ो, बहुत से काम देखने है।

श्रेया:- अगर कोई किसी पर अन्याय कर रहा हो।

अपस्यु:- हर किसी की अपनी लड़ाई है और उसे खुद लड़नी पड़ती है। मै तो निर्मम स्तिथि में भी लोगों को देखता हूं तो दया नहीं दिखता।

श्रेया:- तुम काम क्या करते हो?

अपस्यु:- साहित्य से पढ़ रहा हूं?

श्रेया:- जीविका के लिए क्या करते हो?

अपस्यु:- पिताजी का धन बैंक में है, उसका ब्याज खाता हूं। सिन्हा जी के केस में हेल्प करता हूं, उससे अच्छे खासे पैसे मिल जाते है। कभी-कभी फजुल खर्च दिल खोल कर करने होते हैं तो अंडरग्राउंड फाइट लर लेता हूं। लेकिन ये दोस्तो वाला सीक्रेट, किसी को बताना मत।

श्रेया:- अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रिलेशन में हो और उसके बावजूद भी यदि किसी के साथ फिजिकल रिलेशन बनाते हो, तो क्या तुम्हारी नजर में ये धोखा होगा या नहीं?

अपस्यु:- भगवान की पूजा में कहते है, कुछ भी जूठा प्रयोग में नहीं लाया जाएगा। हम पुरा ऐतिहातन सारे काम करते हैं। लेकिन जो मिठाई, फल, फुल इत्यादि बाजार से लेते है, देने वाले का हाथ साफ था या नहीं। बाजार तक आने में वो सामान जूठा हुआ कि नहीं, ये कभी नहीं देखते। मोरल ऑफ द स्टोरी, जो नहीं दिखा वो हमेशा सुद्घ होता है, और जो नज़रों के सामने जूठा हुआ उसे फिर बदल देते हैं। सिम्पल फिलॉस्फी, जो हर किसी पर लागू होता है।

श्रेया:- कमाल की फिलॉस्फी, चरण कहां है गुरुदेव।

अपस्यु अपने दोनो पाऊं सीधा उसके जांघों पर रखते… "लो बच्ची, मत्था टेक लो, पाप कट जाएंगे।'"

श्रेया, अपस्यु के पाऊं हटाती हुई… "मेरे आज के सवाल खत्म, तुम्हारी बारी"

अपस्यु:- आज के सवाल से मतलब क्या कल भी खेलना है?

श्रेया:- नेक्स्ट टाइम जब भी मौका मिला।

अपस्यु:- तुम्हारी उम्र..

श्रेया:- 21 साल 3 महीने और 6 दिन। सॉरी रात के 12 बज गए तो 7 दिन हो गए।

अपस्यु:- तुम्हारा फिगर?

श्रेया:- 34-26-34

अपस्यु:-बॉडी वेट

श्रेया:- 58 किलोग्राम

अपस्यु:- तुम्हारी राशि?

श्रेया:- कर्क राशि।

अपस्यु:- बेस्ट फ्रेंड..

श्रेया:- कोई नहीं।

अपस्यु:- तुम्हारा ननिहाल

श्रेया:- नेपाल

अपस्यु:- क्या तुम्हे नेपाली भाषा आती है।

श्रेया:- बिल्कुल नहीं।

अपस्यु:- पैतृक स्थान..

श्रेया:- उसपर प्लीज कोई सवाल नहीं। मै उस जगह को भी याद नहीं करना चाहती जहां मेरी मां को अपमानित किया गया था।

अपस्यु:- ऐसी जगह जहां घूमना पसंद हो?

श्रेया:- चेरापूंजी, एक जिज्ञासा है की वहां की बारिश देखूं।

अपस्यु:- फेवरेट स्पोर्ट्स

श्रेया:- स्विमिंग..

अपस्यु:- मुझमें तुम्हे सबसे अच्छा क्या दिखा..

श्रेया:- कंप्लीट बैलेंस नेचर..

अपस्यु:- तुम्हे अपने आप में सबसे ज्यादा क्या पसंद है..

श्रेया:- कभी ना हार मानने वाला आत्मविश्वास।

अपस्यु:- क्या तुम्हे बुरा लगता है कि तुम्हारे पापा तुम्हारे पास ना रहकर, तुम्हारे सौतेली मां के पास रहते है।

श्रेया:- पहले लगता था अब शायद आदत हो गई है।

अपस्यु:- जिंदगी में एक काम जो बिल्कुल फुरसत में करना पसंद कर…

श्रेया:- तालाब किनारे मछली पकड़ना।

अपस्यु:- 2 किस्स.. एक झूठा जवाब.. पहले बताओ ओओओ..

अपस्यु बताओ करते हुए लड़खड़ाया, थोड़ी देर तक बड़बड़ाते रहा और फिर आराम से नींद के आगोश में चला गया। श्रेया ने घड़ी देखी, सुबह के 5 बज रहे थे। नींद उसे भी काफी लग रही थी। जागने के बाद का उसका रिएक्शन जानने के लिए श्रेया ने पहले तो 3-4 ड्रिंक ली, सोए अपस्यु से कहने लगी… "कमाल की चॉइस है तुम्हारी अपस्यु, मै भी फैन हो गई इस ड्रिंक की"… और हॉल में ही क्राउच पर जाकर सो गई।"…

सर भारी, बदन पुरा टूटा हुआ और आखें जब खुली तो शाम के 4 बज रहे थे। श्रेया चौंककर थोड़ी सक्रिय हुई, लेकिन सर इतना भारी था कि दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। टेबल पर एक छोटा सा नोट परा हुआ था….

"मेरा कॉकटेल पीने पर मज़ा तो बहुत आता है लेकिन सोकर जागना उतना ही दुखदाई होता है। नोट के पास ही जूस रखा है, पी लेना, वरना कोई काम नहीं कर पाओगे। तुम्हारे फ्लैट की चाभी निकालने के लिए तुम्हारे तिजोरी में हाथ डालना परा उसके लिए सॉरी। आगे का वक़्त आनदमय हो, धन्यवाद।"
 
Update:- 108

सर भारी, बदन पुरा टूटा हुआ और आखें जब खुली तो शाम के 4 बज रहे थे। श्रेया चौंककर थोड़ी सक्रिय हुई, लेकिन सर इतना भारी था कि दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। टेबल पर एक छोटा सा नोट परा हुआ था….

"मेरा कॉकटेल पीने पर मज़ा तो बहुत आता है, लेकिन सोकर जागना उतना ही दुखदाई होता है। नोट के पास ही जूस रखा है, पी लेना, वरना कोई काम नहीं कर पाओगे। तुम्हारे फ्लैट की चाभी निकालने के लिए तुम्हारे तिजोरी में हाथ डालना परा उसके लिए सॉरी। आगे का वक़्त आनदमय हो, धन्यवाद।"

दिन के 10 बज रहे थे। अपस्यु लगभग अपनी नींद पूरी करके जाग चुका था। श्रेया क्राउच पर बेसुध लेटी हुई थी। अपस्यु उसे छोड़कर निकल गया। कुछ देर बाद वो आया और छोटा सा स्प्रे श्रेया के नाक पर कर दिया, ताकि नींद और गहरी हो जाए।

श्रेया की और गहरी नींद सुनिश्चित करने के बाद अपस्यु ने गुफरान और प्रदीप को बुलवाकर, श्रेया को उठवाया और ले जाकर उसके फ्लैट में लिटा दिया। उसी दौरान अपस्यु ने उसके फ्लैट की एक छोटी सी झलक चारो ओर की ली और वहां से वापस अपने फ्लैट आ गया। लौटकर उसने सबसे पहले मेघा को कॉल लगाया…. "हेल्लो हैंडसम, कैसे हो।"..

अपस्यु:- मस्त हूं। वहां क्या हो रहा है?

मेघा:- होना क्या है, बिजनेस, बिजनेस और बिजनेस..

अपस्यु:- और फन..

मेघा:- ओह तो तुम ऐसे आ रहे हो। क्या हुआ मेरी याद आ गई क्या?

अपस्यु:- तुम नहीं तुम्हारी वो सेक्सी बदन, जो इतना मादक है कि ख्याल से ही बदन में आग लग जाए।

मेघा:- तारीफ का शुक्रिया। वैसे ऐसे बदन के मज़े लेने हो, तो तुम यूएसए क्यों नहीं चले आते।

अपस्यु:- तुम ही इंडिया क्यों नहीं आ जाती। इसी बहाने काम से के छोटा सा ब्रेक भी मिल जाएगा हर तुम्हारे मज़े भी हो जाएंगे। ऊपर से यहां के फैक्टरी का काम तुम अपनें हाथों से शुरू भी कर सकती हो।

मेघा:- आइडिया बुरा नहीं है, कल सुबह तक सोचकर बताती हूं। बाय बाय डार्लिंग…।

अपस्यु:- बाय बाय स्वीटहार्ट…

मेघा से बात करने बाद अपस्यु नहाने चला गया। मस्त चकाचक तैयार हुआ। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सेलेब्रिटी कैजुअल आउटफिट में तैयार होकर निकल रहा हो। तैयार होने से पहले ही अपस्यु ने प्रदीप को गाड़ी तैयार रखने के लिए बोला दिया था।

अपस्यु कार में बैठकर अपार्टमेंट के बाहर निकल रहा था और उधर मिश्रा आवास साची और ध्रुव बाहर निकल रहे थे। अपस्यु की कार देखकर साची ने हॉर्न देकर कार रोकने का इशारा की।… "सर वो लड़की कार रोकने के लिए कह रही है।"..

अपस्यु:- तू ड्राइवर है या मुर्गी चोर साले। इतने दिन से साची मेरे घर पर आती है और तू कह रहा है कि वो लड़की गाड़ी रोकने कह रही। सुधार जाओ, वरना मै सुधारने पर आया तो खर नहीं।

प्रदीप ने गाड़ी किनारे खड़ी की और अपस्यु उतरकर बाहर आया…. "ओय हैंडसम ऐसे चकाचक होकर किधर जा रहा है।".... साची उसके करीब आती हुई पूछी।

अपस्यु:- ऐमी से मिलने जा रहा हूं, कुछ विशेष काम हो तो कहो..

साची, अपस्यु के गले लगती उसके कान में धीमे से "थैंक्स" कहती हुई अलग हुई। अपस्यु थोड़े आश्चर्य होकर पूछने लगा… "यूं अचानक ऐसे थैंक्स, तुम ठीक तो हो साची"..

ध्रुव:- काम का जिम्मा तुमने अपने सर ले लिया और उसके बाद मुझे पूरे हफ्ते की छुट्टी मिल गई। इसलिए हम चले…..

अपस्यु:- हिनीमून पर …

साची:- मेरे घर वाले, तू.... हर कोई एक ही बात सोचते रहो। सब पागल हो गए है। और तुम क्या हंस रहे हो धुव्र।

"तू कितनी बड़ी बेवकूफ है वो बस उसी बात पर हंस रहा है। कह तो ऐसे रही है जैसे मन में तेरे लड्डू ना फुट रहा होगा।..".. अपस्यु अपनी बात कहते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और ध्रुव ताली देते हुए हसने लगा।

साची:- बेशर्म हो गए हो दोनो, ध्रुव चलो भी। छोड़ो इसे, वरना बाबा जी शाम यहीं कर देंगे।

साची के कुछ दूर आगे जाते ही ध्रुव अपस्यु के करीब आकर धीमे से कहने लगा… "यार मुझे तो लगा ये अपनी फिलॉस्फी के चक्कर में मेरे अरमान पर पानी ना फेर दे, थैंक्स, अब सब क्लियर है।"

अपस्यु:- मज़े करो दोस्त और आराम से लौटना, जबतक यहां का काम शुरू करवाता हूं। अच्छा सुनो ऑफिस के लिए बिल्डिंग रेंट पर लोगो या अपना कोई परमानेंट ऑफिस।

ध्रुव:- इसपर बाद में डिस्कस करता हूं। ये सारा मामला सिस देखती है, और उससे अभी बात करने का मन नहीं है।

इतने में ही साची तेज-तेज हॉर्न बजाने लगी। ध्रुव, अपस्यु को बाय कहता वहां से निकला। अपस्यु भी जैस ही कार के ओर मुड़ने लगा, प्रदीप को कार के बाहर खड़ा देखकर…. "अबे अब तू बाहर क्यों खड़ा था, जरा बताएगा।"

प्रदीप:- आप बाहर खड़े थे इसलिए मै भी बाहर खड़ा था।

अपस्यु:- जी चलिए अब अंदर सर, और कार सिन्हा जी के यहां ले लीजिए।

कुछ ही देर में कार बंगलो के अंदर थी और अपस्यु कार के बाहर। मोबाइल कार में ही छोड़कर अपस्यु अंदर पहुंचा और हॉल में लगे म्यूज़िक सियस्टम को फुल वॉल्यूम पर डालते हुए उसने "सैटरडे सैटरडे (saturday-saturday)" सोंग चला दिया और हॉल में ही नाचना शुरू कर दिया।

छुट्टी का दिन था, सिन्हा जी अपने दोनो बच्चो के साथ बच्चे बने खेल रहे थे। इतने में तेज म्यूज़िक की आवाज़ पर भन्नाते हुए कहने लगे… "जो भी पागल आज इसका दोषी पाया जाएगा उसकी तो खैर नहीं।"…

ऐमी हंसती हुई भागी और भागते-भागते कहने लगी… "डैड आप का दामाद है, उसका का कुछ नहीं बिगाड़ सकते".. और भगति हुई नीचे आकर अपस्यु के साथ कदम से कदम मिलाती वो भी नाचने लगी। अपस्यु उसके बाहों मै लेकर घूमने लगा.. ऐमी खिली सी हंसती हुई कहने लगी… "भावनाओ में बहकर किस्स मत करने लगना वरना सिन्हा जी पागल हो जाएंगे।"

"अजी अब सिन्हा जी हो या नंदनी रघुवंशी, जिसे पागल होना है होते रहे"… कहते हुए अपस्यु अपने होंठ ऐमी के होंठ के ओर बढ़ाने लगा… ऐमी खिल-खिलाकर हंसती हुई उसे धक्के दी और जाकर म्यूज़िक बंद कर दी।

अपस्यु थोड़ा हट दिखाते हुए म्यूज़िक की पुनः फुल वॉल्यूम में चलाया और ऐमी के ओर अपना हाथ बढ़ा दिया…. "हीहीहीही… पागल हो गए हो तुम।".. ऐमी भी हाथ पकड़ती हुई कहने लगी।

अपस्यु हाथ को खींचा और ऐमी गोल घूमकर सीधा अपस्यु के बाहों में आकर गिरी.. दोनो की नजरे एक दूसरे पर टिकी हुई थी… "आज ये सुबह-सुबह जो तुम्हे बदमाशियां सूझ रही है ना.. हटो भी .. डैड है यहीं पर।"

अपस्यु:- जा नहीं हटता मै, जिसे जो करना है कर ले…

ऐमी अपस्यु के बाहों से खड़ी होती डांस मूव करती… "वैसे ये तुम्हरा हीरो वाला लुक कातिलाना है। कहीं बाहर चल रहे है क्या?"

अपस्यु, वापस से खींचकर ऐमी को अपने बाहों में लेते… "मेरा कोई प्लान नहीं, बस आज दिल बेईमान है। आज शाम से लेकर कल रात तक में एक एक्शन की उम्मीद है, वो यदि रोमांस के साथ एक्शन हो, तो ज़िन्दगी में रोमांच आ जाएगा ना लव।"..

ऐमी:- अच्छा सुनो तो मैं क्या कह रही हूं..

दोनो अभी थोड़ी हटखेलियां शुरू ही किए थे कि पीछे से प्रदीप जोड़ से चिल्लाते हुए कहने लगा… "सर आपका फोन बज रहा है।"..

ऐमी, अपस्यु की बाहों में थी। ऐमी के चेहरे पर खिली सी हंसी थी वहीं अपस्यु के चेहरे पर सुकून की मुस्कान और दोनो की नजरे एक दूसरे को निहार रही थी। इसी बीच प्रदीप पहुंच गया फोन कि घंटी लेकर..

पीछे की आवाज़ सुनकर अपस्यु ऐमी से अलग हुआ और प्रदीप को घूरने लगा। अपस्यु को देखकर ऐमी और जोर से हंसती हुई जाकर पहले म्यूज़िक बंद की और फ्रिज से चॉकलेट निकालकर खाती हुई वहीं सोफे पर बैठी। अपस्यु भी उसके पास आकर बैठा और प्रदीप के हाथ से फोन लेकर, जाकर दरवाजे के बाहर वहीं खड़े होकर इंतजार करने कहने लगा।

ऐमी, अपस्यु को घूरती हुई…. "आप प्रदीप है ना।"

प्रदीप:- येस मैम..

ऐमी:- भईया आप वहां आराम से बैठो। मीना बाहर आकर भईया के लिए कुछ चाय नाश्ता लगा।

प्रदीप:- नहीं मैम रहने दीजिए।

ऐमी:- वो मुझसे नहीं कहिए, मीना आएगी उसी को मना कीजिएगा।

इधर जबतक अपस्यु, नंदनी को वापस कॉल लगाने लगा। उधर से कॉल पिक होते ही…. "क्या कर रहे हो भाई "

अपस्यु:- कुंजल बेटा तुझे यही वक़्त मिला था क्या कॉल करने…

अपस्यु की बात सुनकर ऐमी उसके हाथ से फोन छीनकर फोन स्पीकर पर डाली… "अपस्यु आज खिसका हुआ है, तुम उसकी बात छोड़ो, बताओ कैसे फोन करना हुआ"

कुंजल:- भाभी आपसे ही बात करनी थी, कई बार आपके नंबर पर कॉल लगाई लेकिन कोई जवाब ही नहीं आया। फिर जैसा अंदाज़ा था वैसा ही हुआ, और रिएक्शन भी वैसे ही देखने मिल रहे।

अपस्यु को लग गया अब हो गया.. वो आराम से ऐमी के गोद में अपना सर डालकर लेट गया। ऐमी,उसके बालों में हाथ फेरती कुंजल से बात करने में व्यस्त हो गई। अपस्यु रात का जगा था, बालों में हाथ फेरने से कब उसे नींद आयी पता भी नहीं चला।

लगभग आधे घंटे तक कुंजल से बात करने के बाद ऐमी जब अपस्यु को देखी तो वो गहरी नींद में चला गया था। ऐमी उसे सुकून से सोते हुए देखकर मुस्कुराने लगी…. "मीना, तेल लेकर आ जरा।"

मीना तेल लेकर ऐमी के हाथ में देती…. "दीदी वो साहब ने कुछ नहीं लिया।"..

ऐमी:- क्यों भईया, आपने कुछ नहीं लिया, बात क्या है?

प्रदीप:- मैम वो मैं चाय नहीं पीता।

ऐमी:- मीना सुन, भईया को स्टाफ क्वार्टर दिखा दे, वहां आराम कर लेंगे और जाकर देख तो डैड और वैभव क्या कर रहे।

मीना, ऐमी के बताए सारे काम करके वापस आती…. "बड़ा अजीब आदमी है दीदी, स्टाफ क्वार्टर दिखाई तो कहता है कि ये तो गरीबों का क्वार्टर है, इससे अच्छा तो हमारे यहां है, जबकि ये तो बंगलो है और हमारे तो फ्लैट में बना है स्टाफ क्वार्टर।

ऐमी:- जाने दे उसे, तुझे ऊपर जाकर बोली थी डैड और वैभव को देखकर आने।

मीना:- दीदी दोनो खेल रहे हैं।

ऐमी:- ठीक है दोनो का खाना ऊपर ही लगवा देना और कहना कोई आवाज़ ना करे, अपस्यु सो रहा है। और हॉल का ये दरवाजा बंद कर दे और सबको बोलना वो साइड का दरवाजा इस्तमाल करे।

हॉल का वो पुरा हिस्सा ही सबसे अलग करके ऐमी, अपस्यु के बालों में तेल डालकर धीरे-धीरे मालिश करने लगी। अपस्यु सुकून से उसके गोद ने निश्चिंत होकर सोता रहा। उसकी भी गहरी नींद लगभग 4 बजे ही खुली। ऐमी अब भी मुसकुराते हुए उसका चेहरा देख रही थी और उसके बालों मै हाथ फेर रही थी।

"मज़ा आ गया। कितनी देर से सोया हूं मै।"… अपस्यु अपना हाथ ऊपर ले जाते ऐमी के गालों पर हाथ फेरते हुए पूछने लगा।

ऐमी:- कोई काम जब नहीं था तब ये सोने का हिसाब क्यों। चलो जकर फ्रेश हो जाओ, मै खाना लगती हूं।

अपस्यु:- कम से कम रूम तक तो चलो।

ऐमी, अपनी आखें दिखती…. "बाहर चल तो रहे है हम, फिर ये बेचैनी क्यों? जाओ फ्रेश होकर आओ।

अपस्यु जबतक फ्रेश होकर आया, ऐमी खाना लगा चुकी थी। दोनो साथ बैठकर खाने लगे। खाना, खाने के बाद अपस्यु वहीं सोफे पर लेटते हुए… "आह ! मज़ा आ गया। मै क्या सोच रहा था जबतक मै आराम करता हूं, तुम तैयार क्यों नहीं हो जाती।"..

ऐमी:- अभी 2 घंटे तक सोए थे फिर अब खाकर भी लेट रहे हो, मै क्या इंसान नहीं हूं जो खाने के बाद सीधा तैयार होने चली जाऊं। एक तो तुम्हारे चक्कर में भूख से मेरी जान निकाल गई, अब जब पूरे गले तक खा ली हूं तब तुम मुझे तैयार होने कह रहे। स्वार्थी कहीं के, मै नहीं जा रही कहीं। मै भी अपने कमरे मे जा रही हूं लेटने।

ऐमी गुस्से में उठकर वहां से अपने कमरे में चली गई। कुछ ही देर बाद अपस्यु भी पहुंचा ऐमी के कमरे में और ऐमी के चेहरे के सामने अपना चेहरा करके सो गया। ऐमी बिना कुछ बोले अपना चेहरा दूसरी ओर की और खुद को चादर से ढककर सोने लगी। सोने का नाटक करते हुए कब उसे नींद आ गई, ऐमी को भी पता नहीं चला।
 
Update:-109

ऐमी गुस्से में उठकर वहां से अपने कमरे में चली गई। कुछ ही देर बाद अपस्यु भी पहुंचा ऐमी के कमरे में और ऐमी के चेहरे के सामने अपना चेहरा करके सो गया। ऐमी बिना कुछ बोले अपना चेहरा दूसरी ओर की और खुद को चादर से ढककर सोने लगी। सोने का नाटक करते हुए कब उसे नींद आ गई, ऐमी को भी पता नहीं चला।

ऐमी जब जागी तब अपस्यु ठीक उसके आंख के सामने कुर्सी पर बैठा हुआ था। अपस्यु को अपने नज़रों के सामने देख ऐमी मुस्कुराई और अपने आंखों के इशारे से उसे अपने करीब बुलाई।

अपस्यु बिस्तर किनारे बैठकर, अपना चेहरा आगे करते ठीक उसके चेहरे के सामने किया और उसे देखकर मुस्कुराने लगा। अपस्यु के होंठ को चूमकर ऐमी… "सॉरी वो थोड़ी चिड़चिड़ापन आ गया था।"..

अपस्यु:- कोई बात नहीं है, अब जाकर तैयार हो जाओ। और हां हम इंडिया गेट चल रहे हैं।

ऐमी चहकती हुई उठकर बैठती हुई…. "क्या सच में"..

"जी हां बिल्कुल सच में। एक ख्वाहिश तो जताई थी, उसमें भी देर कर दूं, नाह। चलो अब जल्दी से चलते है।'.. अपस्यु अपनी बात कहते हुए उठा और वो भी तैयार होने चल दिया।

तकरीबन घंटे भर बाद ऐमी अपने कमरे से बाहर आयी। जब पहली नजर उसपर गई तो अपस्यु का मुस्कुराता चेहरा खिली सी हंसी में बदल गया। एक दिन ख्वाहिशों के झरोखे से अपस्यु ने अपनी इक्छा जताई थी, जब कभी भी मै तुमसे अपने दिल का हाल बताऊंगा तब तुम ठीक वैसे ही तैयार होना जैसे कोई युवती अपने शादी के लिए लड़कों वालों को दिखाने के लिए तैयार होती है।

ऐमी के दिमाग में अब तक थी यह बात और ना जाने कबसे वो भी इसी मौके का इंतजार कर रही थी। गहरे हरे रंग में बड़ी सी लाल बॉर्डर की साड़ी पहने जब वो अपस्यु के नज़रों के सामने आयी, उसका चेहरे की रंगत बता रही थी कि आज वो किसके लिए तैयार होकर आयी है। और जिसके लिए तैयार होकर आयी थी उसकी नजर के भाव को पढ़कर ऐमी अंदर से खुश हो गई।

वह अपनी खिली सी मुस्कान के साथ एक-एक कदम बढ़ाती सीढ़ियों से नीचे आ रही थी और अपस्यु अपनी नजर उसके मनमोहित रूप पर जमाए, अपने कदम ऐमी के ओर बढ़ा रहा था। दोनो जैसे ही करीब हुए अपस्यु उसके अभिवादन में अपना एक हाथ आगे बढाते हुए थोड़ा सा झुका। ऐमी अपस्यु के इस स्वागत को देखकर खुलकर हसने लगी…. "बस भी करो, अब नजरें हटाओ भी"..

"आज तो नजर वैसे भी नहीं हटने वाली है, तो चले क्या?"…. "येस ! चलते है।"..

दोनो वहां निकले, अपस्यु ने प्रदीप को फ्लैट लौट जाने के लिए कहा और दोनो ऐमी की कार में इंडिया गेट पहुंच गए। शाम के समय इंडिया गेट का नजारा काफी मनमोहक था और काफी लोग भी जमा थे। अपस्यु अपना फोन निकालकर एक छोटा सा संदेश भेजा और उसके तुरंत बाद ही वहां आतिशबाजियों होने लगी।

छोटी आतिशबाजी होती तो लोग एकबार ध्यान देते लेकिन यह आतीबाजी जब शुरू हुई तो फिर रुकने का नाम कहां के रही थी। हवाओं में धुएं से लिख दिया गया था…. "आप सब गवाह है एक अनोखे पल का.. होने वाले मोहब्बत के इजहार का आनंद ले।"

इंडिया गेट, उसपर से तकरीबन 20 मिनट की आतिशबाजी। प्रशाशन कोना-कोना छन मार रही थी, मीडिया धुएं से लिखे संदेश को लगातार ब्रेकिंग न्यूज बनाकर…. "कौन अपने प्यार का इजहार करने वाला है".. उसका सस्पेंस क्रिएट कर रही थी। कुछ टीवी देखने वाले, मीडिया को गाली से रहे थे, तो बहुत से दर्शक इस इजहार के गवाह बनना चाहते थे और वो चैनल की टीआरपी को इस कदर बढ़ा रहे थे कि ये घटना मीडिया इवेंट सा बनता जा रहा था।

जब आतिशबाजियों समाप्त हुई तब अचानक भिड़ में से पहले एक लड़की निकलकर इंडिया गेट में सामने थिरकने लगी। क्या डांस मूव थे उसके। उस लड़की ने जैसे ही 2 डांस मूव परफॉर्म की, वो वहां के लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई…..

इस सोलो परफॉर्मेंस के 2 मूव करने के बाद, लोगो को पता चला कि वहां मोब डांस शुरू हो चुका है। अचानक ही वहां डांस करने वालों का पूरा हंजूम लग गया। डीजे की म्यूज़िक इतनी तेज थी कि वहां घूम रहे हर सैलानी और स्थानीय लोगों को उस ओर आने पर मजबूर कर दिया।

अपस्यु मुसकुराते हुए ऐमी के ओर अपना हाथ बढ़ा दिया। दोनो के रिश्ते में छिपाने जैसा कुछ भी नहीं था, और इजहार तो कब से ये एक दूसरे की आंखों में देखकर कर चुके थे, लेकिन फिर भी ना जाने क्यों ये समा और यहां का माहौल देखकर दोनो का ही दिल जोड़ों से धड़क रहे थे और आने वाले पल की कामना करके रोमांचित हो उठा था।

एक दूसरे के आंखों में आखें डालकर मुसकुराते हुए दोनो हाथ थामे उस मोब डांस के ओर बढ़ रहे थे। डांस ग्रुप का एक हिस्सा भिड़ के बीच में था, जैसे ही अनलोगों ने अपस्यु और ऐमी को आते देखा बीच से रास्ता बना दिए और फोकस लाइट दोनो पर परने लगी।

फिर क्या, ध्यान पीछे से आ रहे क्यूट से कपल पर गई जो एक दूसरे का हाथ थामे, मुसकुराते हुए नज़रों से नजरें मिलाए चल रहे थे। ना तो नजर हटी एक दूसरे से और ना ही दोनो ने एक बार भी सामने देखा। मोब डांस के बीच जैसे ही अपस्यु पहुंचा, अपने घुटनों पर बैठकर दोनो बाहें फैला दिया।

अपस्यु ने जैसे ही दोनो बाहें फैलाई ऐमी खिल खिलाकर हंसने लगी किन्तु भावनापूर्ण आशु उसके आंखों से छलक रहे थे, जो इस खुशी के पल को दर्शा रहा था। अपने कोट के अंदर की जेब से अपस्यु ने वहीं उजला और नीला फुल निकालकर सामने बढ़ाते हुए कहा…. "तुम्हारे लिए मै हमेशा, आई लव यू ऐमी"

ऐमी हंसती हुई अपस्यु से लिपटकर कहने लगी… "हमेशा के आगे भी यदि कोई जहां है और मै जब भी इस जहां में रहूं तुम ही मुझे मिलना..लव यू टू"

कुछ देर ऐमी लिपटे रहने के बाद अपस्यु से अलग हुई और अपना हाथ आगे बढ़ा दी। जैसे ही अपस्यु ने ऐमी का हाथ थामा, झन्नेटेडर म्यूज़िक बजने लगी। परफॉर्मेंस करने आए युवक और युवतियां, दोनो के इर्द गिर्द करतब वाला डांस दिखाने लगे।

तभी अपस्यु ने माइक हाथ में लिया और जोर से कहा… "चेंज थे म्यूज़िक" और जैसे ही धुन बदली एक बार फिर ऐमी और अपस्यु वहां पर थिरकना शुरू किए और जब इन दोनों ने उस जगह पर नाचना शुरू किया तब सभी डांसर मुंह पर हाथ दिए उनके डांस को देखकर यही सोच रहे थे…. "बिना नजरें एक दूसरे से हटाए, क्या साड़ी में इतने छोटे स्टेप के साथ ऐसा भी डांस किया का सकता है।"..

इन दोनों के नज़रों के विश्वास का किसे ज्ञान था। सामने यदि खाई भी हो, तो ऐमी, अपस्यु के आंखों में देखकर बस उसके कदम से कदम मिलाकर बढ़ती रहेगी, आगे जहां उसका प्यार ले जाए। दोनो तबतक वहां नाचते रहे, जबतक वहां पुलिस नहीं आ गई। अरेस्ट भी करने आया तो कौन, शहर का सिटी कमिसनर और दोनो को कमीसनर ऑफिस ही लाया गया।

कमिश्नर ऑफिस में पहले से सिन्हा जी और होम मिनिस्टर बैठे हुए थे। अपने डैड को सामने देख ऐमी शर्माकर अपस्यु के पीछे छिप गई और ऐमी का हाल-ए-दिल समझते हुए अपस्यु भी सिन्हा जी से कहने लगा…. "क्या है बापू, आप यहां क्यों आ गए।"

सिन्हा जी:- अब मेरी बेटी और दामाद को कोई छोटा ऑफिसर अरेस्ट करता तो मेरे प्रेस्टिज पर पड़ती, इसलिए आना पड़ा।

अपस्यु:- तो इसके लिए आपने सर को यहां बुला लिया। हद होती है किसी भी बात की।

होम मिनिस्टर:- हद क्यों होगी। तुम दोनो को टीवी पर देखकर आज मै अपने पोस्ट का ख्याल छोड़कर, केवल एक अभिभावक के तौर पर आया हूं। मुझे भी तो मिलना था अपनी बहू से।

होम मिस्टर साहब खास तौर पर ऐमी से मिलने के लिए अपने सारे काम छोड़कर पहुंचे थे। और ऐसा नहीं था कि कोई 1 या 2 मिनट की ये मुलाकात थी। निश्चिंत होकर मिले और सुनिश्चित होकर वहां से निकले। उनके जाते ही सिन्हा जी खड़े हो गए। अपस्यु और ऐमी को देखकर वो मुस्कुराते दोनो को गले से लगाए और वो भी वहां से निकल लिए।

ऐमी, अपस्यु के कांधे पर अपना सर टिकती…. "हम लाइव आ रहे थे क्या"?

अपस्यु:- क्या पता, हां शायद..

ऐमी:- फिर तो आंटी, कुंजल, आरव और सब लोगों ने देखा होगा।

अपस्यु:- हां तुम्हारी मासी-मौसा और मामा-मामी ने भी देखा होगा।

ऐमी गुस्से से सीधी होकर बैठी और घूरती हुई कहने लगी…. "अच्छे खासे चल रहे मोमेंट में आग लगाना इसे ही कहते है अपस्यु।"

अपस्यु, उसका सर अपने सीने पर टिकाए उसके गाल को स्पर्श करते… "सॉरी, बाद में बात करते है इसपर".. ऐमी खुद को थोड़ा और अपस्यु के अंदर समेटती… "नाह ! बाद में भी नहीं, और कभी भी कभी नहीं"…

"सर आप का बेल तो यहां आने से पहले हो चुका है, आप जा सकते है।"… एक हवलदार उनके करीब आकर कहा। दोनो वहां से उठकर चल दिए। दोनो जब कार में बैठकर अपने प्यार का कारवां आगे बढ़ा रहें थे तभी अपस्यु को कुछ भनक लगी… "क्या साड़ी में कोई एक्शन कर पाओगी"…

ऐमी:- साड़ी के एक्शन में वो मज़ा नहीं आएगा। चलो फिर मॉल कुछ ढंग के कपड़े ले लिए जाए।

दोनो ने रास्ते में पड़ने वाले शॉपिंग मॉल के पार्किंग में गाड़ी रोका और शॉपिंग के लिए चल दिए। दोनो को तो सबने अभी-अभी टीवी पर देखा था, इसलिए कुछ लोगों के आकर्षण का केंद्र दोनो बने हुए था…. "हीहीहीही… अपस्यु हम लाइव थे , कमाल है अबतक किसी का कॉल नहीं आया।"

अपस्यु:- कैसे आएगा, मैंने मोबाइल स्विच ऑफ कर रखा है।

ऐमी:- चालक हां ।

ऐमी ने मूड और सिट्यूशन के हिसाब से आउटफिट सेलेक्ट कर लिया। स्त्रचबल जीन्स, टी-शर्ट और ऊपर एक जैकेट। दोनो वहां से पार्किंग में आए और कार की बैंक सीट पर एक दूसरे को किस्स करने लगे। दोनो व्याकुलता से एक दूसरे को किस्स कर रहे थे और एक दूसरे के बदन पर हाथ फेर रहे थे।

बस 2 मिनट ही हुए होंगे, की कार पर अंधाधुन फायरिंग शुरू हो गई। बुलेटप्रूफ कार थी इसलिए गोली अंदर तो नहीं आयी, लेकिन अपस्यु और ऐमी की आंखों में एक चमक जरूर आ चुकी थी। दोनो एक दूसरे से अलग हुए और ऐमी, अपस्यु के कानो में कहने लगी…."आज सुबह से इन लोगों ने हमारे रोमांस को महसूस किया है लेकिन अब पागलपन को देखेंगे। इन सब में कोई एक श्रेया का साथी होंगा। फाइट के बाद इन्हे एहसास हो जाना चाहिए, कि क्यों हमे उलझाने के लिए भी इन्हे कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए था। इन्हे फायर करके जान से मारने कि कोशिश नहीं करनी चाहिए थी"..

अपस्यु:- तुम अंदर ही बैठी रहो, जब लगे तुम्हे फाइट करनी चाहिए तब उतर आना।

ऐमी, अपस्यु के होंठ चूमती… "जब उस एक को मारना तो कोई रहम मत करना।"

अपस्यु नीचे झुका, नीचे से कवर हटाकर एक सेट ग्लव्स पहना और वहीं से छोटी सी चाकू को अपने हाथ में रखकर कार के दूसरे दरवाजे से बाहर निकला । हमलावर अब भी वहीं खड़े थे। बुलेटप्रूफ कार पर गोली चलाने का कोई फायदा तो नहीं हुआ, इसलिए कांच को तोड़ने के लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे थे।

अपस्यु को यह तो पता था कि अभी हुए हमला का दोषी किसी ऐसे को बनाया जाएगा, जो श्रेया या उसके ऊपर जो भी है, उसके हिट लिस्ट में है। लेकिन दिमाग वहीं नहीं काम कर रहा था कि श्रेया उसे अनलझाने वाली कैसे है।

अपस्यु के नीचे उतरते ही कुछ लोग गन लिए कार के दूसरे हिस्से में आए, लेकिन वहां कोई नहीं था। 4 लोग हथियार के साथ फ़ैल गए और अपस्यु को ढूंढने लगे। इधर कांच तोड़ने वाले लोगों को कुछ नहीं सूझा, तब वो लोहे की मजबूत आड़ी ही लेकर पहुंच गए।

2 लोगों के हाथ में आड़ी थी और वो दोनो के दोनो कार को काटने के इरादे से आ रहे थे…ऐमी सामने घनघनाती आवाज़ में चालू हुई आड़ी को देखकर अपनी आखें बड़ी कर ली…. "रियली, ये आड़ी" ..

ऐमी ने अपस्यु को तुरंत संदेश भेजा…. "यार ये बेज्जती है, यहां कोई कॉमेडी शो चल रहा है क्या, 2 लोग आड़ी लेकर आ रहे है कर काटने। हद होती है बेवकूफी की, पेट्रोल डालकर आग लगाना बजाय कार काटने आ रहे है। ऐसे लोगों को हमे मारने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। मै उस श्रेया का खून कर दूंगी।"
 
Update:-110

ऐमी ने अपस्यु को तुरंत संदेश भेजा…. "यार ये बेज्जती है, यहां कोई कॉमेडी शो चल रहा है क्या, 2 लोग आड़ी लेकर आ रहे है कर काटने। हद होती है बेवकूफी की, पेट्रोल डालकर आग लगाना बजाय कार काटने आ रहे है। ऐसे लोगों को हमे मारने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। मै उस श्रेया का खून कर दूंगी।"

अपस्यु:- एक्शन रोमांटिक से ये एक्शन कॉमेडी कैसे हो गया। कोई नहीं मुझे वो अकेला मिल गया जो श्रेया का साथी लगता है। आगे जैसा तुम सही समझो, मै गन मैन को क्लियर करके उसे दबोचता हूं।

अपस्यु, अपनी कार की आड़ लेकर दूसरी और दूसरे से तीसरे कार के पीछे छिपकर फैले लोगों को देख रहा था, तभी अपस्यु के पीछे से एक गनमैन उसपर पिस्तौल तान दिया…. "लड़का मिल गया है।"..

"पागल कहीं का"… पालक झपकते ही अपस्यु ने एक हाथ से ट्रिगर कि उंगली गन सहित पकड़ा और दूसरे हाथ को कलाई के ठीक नीचे ले जाकर उल्टा घुमा दिया। उसकी कलाई टूट गई और वो चिल्लाता हुए जमीन पड़ गिर गया। उसकी आवाज़ के पीछे बाकी के तीन लोग अंधा फायरिंग करते हुए पहुंचे। लेकिन अपस्यु वहां नहीं था।

तीनों ही अपने घायल साथी को घेरकर पूछने लगे कि वो गया किधर… इतने में अपस्यु बिल्कुल उसके पास खड़े होकर… "ओह हो बेचारे का कलाई तोड़ डाला रे, किसने किया।"

तीनों का ध्यान जैसे ही अपस्यु पर गया.. जबतक वो सोचते की गन भी निकालना है, तबतक अपस्यु ने अपने दाएं-बाएं वाले आदमी के हाथ की उंगली को पकड़ कर उल्टा घुमा दिया और सामने वाले को एक जोरदार लात उसके सीने पर दिया। जिनकी उंगलियां टूटी वो उंगली पकड़कर नीचे जमीन में थे और जिसे लात परी थी वो एक सस्ती सी कार के दरवाजे में घुसकर फिट हो गया था।

नीचे पड़े घायल कॉन्ट्रैक्ट किलर पर अपस्यु ने कहर बरसाते हुए, तीनों पर लात और घुसों के हमला करके, उन्हें बेहोश करने के बाद खड़ा होकर दूसरी ओर ऐमी को देखने लगा। अपस्यु जबतक ऐमी को देखने में व्यस्त था, इतने में श्रेया का वो टीम मेट वहां पहुंचा और अपस्यु के चेहरे पर स्प्रे छिड़क दिया। स्प्रे के छिड़काव से ही अपस्यु का सर घूम गया और पूरा बदन स्थूल पड़ने लगा।

इधर अपस्यु के संदेश पढ़ने के बाद ऐमी हसने लगी और तभी उसे बाहर किसी के चिल्लाने कि आवाज़ आने लगी। ऐमी हंसती हुई कहने लगी… "ये दिन आ गए की अब किड्डो को मारना पर रहा है।"

दोनो आरी वाले सामने से घनघनाते हुए चले आ रहे थे। ऐमी पहले से ही अपने डिक्की और दरवाजा खोल रखी थी, जैसे ही वो नजदीक पहुंचे ऐमी ने दरवाजे पर जोर से लात मारी। चूंकि आरी आगे के ओर था इसलिए दरवाजा दोनो के आड़ी से तेजी से टकराया। दोनो लड़खड़ा कर गिर गए और उनके हाथ से आड़ी छूटकर नीचे पड़ी थी। ऐमी फुर्ती से बाहर निकली और उनके खड़े होने से पहले डिक्की से वो अपना हथियार निकाल चुकी थी।

रॉड लेकर ऐमी तेजी से उनके ओर दौड़ी। वो दोनो जबतक गन निकालते तबतक ऐमी उसके करीब पहुंच चुकी थी। ऐमी तेजी दिखती हुई एक के हाथ पर तेज रोड का हमला करके उसका हाथ तोड़ चुकी थी और ठीक उसी वक़्त उसके दूसरे साथी पर अपना हाई किक चलाते हुए उसके चेहरे पर ऐसा किक मारी की उसका दिमाग घूम गया।

जिसके चेहरे पर ऐमी का लात परा, वो अपने झन्नाते दिमाग को जबतक शांत करके सामने देखता, ऐमी तेजी से रॉड उसके कंधे से लेकर पाऊं पर बरसाती हुई जय हड्डियां तोड़ कर नीचे गिरा चुकी थीं और वो पुरा कर्राहते हुए नीचे धम्म से गिरा। ऐसा खतरनाक हमला देखकर उसके दूसरे साथी की तो आंखें फटी रह गई।

ऐमी वापस पलटी और जिसका हाथ टूटा था उसके पास बैठती हुई जिज्ञासावश पूछने लगी…. "भाई तू ये आड़ी लेकर मेरी प्यारी कार को काटने आया था।"..

आदमी, कर्रहते हुए… "बहन बहुत दर्द हो रहा है, हमे तो बस तुम्हे मारने के लिए कहा गया था और वही हम करने आए थे।".

ऐमी:- भाई मारने मतलब जान से मारने या हाथ पाऊं तोड़ने।

आदमी:- हाथ पाऊं तोड़ने के लिए तो बॉडी बिल्डर आते है। हम तो गन वाले है।

ऐमी:- भाई ये आड़ी फिर..

आदमी:- वो कभी-कभी हम घायल लोगों को नए तरीके से मारने या लाश को ठिकाने लगाने के लिए इस्तमाल करते है।

ऐमी को उससे बात करने में मज़ा आ रहा था, लेकिन इससे पहले की वो कुछ और पूछती ऐमी की नजर भी अपस्यु से मिल गई जो उसे खड़ा होकर देख रहा था। दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए ही थे कि तभी वो श्रेया का टीम मेट वहां पहुंच गया। ऐमी बचने के संकेत तो दी लेकिन दोनो में से किसी को पता नहीं था कि यहां पर कोई हथियार प्रयोग होने के बदले बेहोशी का स्प्रे छिड़काव होगा।..

ऐमी किसी तूफान कि तरह खड़ी हुई। अपने रॉड को पीछे के हाथ से चलाती हुई नीचे पड़े उस आदमी पर ऐसे चलाई की उसका नाक और दांत टूट टूट चुके थे। ऐमी के आंखों के सामने अपस्यु एक कार के पीछे अचेत होता का रहा था और उसके पास वो आदमी, अपने एक हाथ में स्प्रे लिए दूसरे हाथ से उसकी तस्वीर निकाल रहा था।

ऐमी पूरी गति से दौड़ लगाती, कार के छत के ऊपर छलांग लगा दी और उसके छत से स्लाइड करती, वहां खड़े आदमी के मुंह पर, गति के साथ जोर वाला अपने लात जामाती ऐमी उस पार उतरी। नीचे बेहोश परे अपस्यु का सर अपने गोद में लेकर उसके बालों में हाथ फेरी और जैकेट निकालकर अपस्यु के सर के उसके नीचे डालकर उसे लिटाती हुई….. "बस 2 मिनट बेबी"…। गुस्से में लाल ऐमी की आखें अब उसपर टिकी थी जिसने अपस्यु को लिटाया था। ऐमी अपने हाथ से रॉड को मजबूती से पकड़ी और दौड़ती हुई हवा में उछलकर उसके सर पर रॉड चला चुकी थी।

वो भी एक फाइटर था शायद, लेकिन पहले अचानक अपने चेहरे पर हुए ऐमी का स्लाइड किया वो धांसू किक, उसके होश उड़ा चुके थे और जैसे ही खड़ा होकर कुछ सोचता, उससे पहले ही ऐमी उछलकर रॉड चला चुकी थी। अगर वो अपने दोनो हाथ से सर ना बचाया तो शायद उसका सर बुरी तरह से फट जाता। फोरहैंड से जैसे ही उस आदमी ने रॉड का हमला रोका, उसका फोरहैंड की हड्डियां चुर हो गई। ऐसा टूटा उसका हड्डी की वो पिरा से पागल हो गया।

रात के तकरीबन 2 बजे अपस्यु की नींद खुली। वो अपने बिस्तर पर लेटा था और ऐमी भी उसके पास सोई हुई थी। अपस्यु उठकर कप 2 चाय बनाकर लेकर आया और ऐमी को जगा दिया…. "तुम ठीक हो बेबी".... ऐमी अपस्यु के चेहरे को स्पर्श करती पूछने लगी…

अपस्यु:- हां ठीक हूं।

ऐमी:- बात कर सकते हो यहां, जगह सुरक्षित है।

अपस्यु:- कभी-कभी किसी को कम आंकना कितना भारी पर जाता है। ये बेहोश वाला स्प्रे भी इस्तमाल कर सकता था, मैंने सोचा तक नहीं था।

ऐमी:- पूरी तरह से चौंकाया…

अपस्यु:- मै यहां हूं, इसका मतलब वो कहां है, श्रेया का टीममेट।

ऐमी:- कार की डिक्की में पैक करके नीचे पार्किंग में छोड़ा है।

अपस्यु:- उनका मकसद तुम पर जानलेवा हमला करके मुझे अपने टारगेट के साथ उलझाना था ना।

ऐमी:- हां। उन्होंने क्लू छोड़ा है उस आदमी के जरिए..

अपस्यु:- मतलब उस आदमी को भी पूरी बात पता नहीं या फिर उसके अंदर कोई ट्रांसमीटर लगाया हो, ताकि वो उसे छुड़ाकर ले जा सके।

ऐमी:- कोई फायदा नहीं है अब तो। मैंने उसे इंजेक्शन लगा दिया है, ज्यादा से ज्यादा 1 घंटे का मेहमान होगा वो अब तो। रुको चेक करके बताती हुं वो डिक्की में है या गया।

ऐमी ने पार्किंग की सीसी टीवी ऑन की जो कि सर्वर से बंद आ रहा था।… "हां उसे लेकर गए पार्किंग से, अपार्टमेंट का सीसी टीवी बंद आ रहा है।"..

अपस्यु:- हम्मम ! छानबीन में टारगेट कौन निकला है, वो तो बताओ?

ऐमी:- जगदीश राय….

अपस्यु:- कौन जगदीश राय… वहीं जिसके यहां से मैने केस की फाइल उड़ाई थी। वो अंडरग्राउंड फाइटिंग करवाने वाला जगदीश राय।

ऐमी:- हां वही जगदीश राय।

अपस्यु जोर जोर से हंसते हुए कहने लगा…. "भंवर है ये भंवर… वक़्त है फंसने का, लेकिन मेरे दिल को अब भी सुकून नहीं की उस श्रेया ने मामला उलझाने के लिए तुम्हे मारने की कोशिश की है। मुझे सुकून नहीं मिला ऐमी। उलझाने के लिए उन्हें कोई और तरकीब सोचना चाहिए था। आज तुमपर हमला करवाकर मामला फसाने की चाहत थी, कल को मां होगी, कुंजल होगी, कोई भी हो सकता है।"

ऐमी:- शांत हो जाओ, 8 दिन और तो रह गए है बस, फिर तो उस श्रेया को लपेट ही रहे है।

अपस्य:- सजा तय हो चुकी है और उन्हें भुगतान तो करना ही पड़ेगा। मै जानता हूं कि तुमने ऐसे तो उसे डिक्की में नहीं छोड़ा होगा। ऐमी कहां है वो डिक्की वाला आदमी इस वक़्त।

ऐमी:- उसे छोड़ो, जगदीश राय को खत्म करते है ना।

अपस्यु:- बेबी सूट उप करो आज रात शिकार होगा। आखरी शिकार जगदीश राय होगा और शुरवात करेंगे उन लोगों से जिसने डिक्की से श्रेया के साथी को उड़ा ले गया।

ऐमी:- छोड़ो भी उन लोगों को अभी। इस वक़्त वो लोग इसी अपार्टमेंट में है और यहां हम कुछ नहीं कर सकते।

अपस्यु:- यहां तो हम आसानी से कुछ भी कर सकते हैं, तुम फ्लैट नंबर बताओ। जब मुझे पता है कि केवल मै नहीं बल्कि मेरा परा परिवार यहां अंजान लोगों से घिरा है फिर मै अपात कालीन स्तिथि के लिए तैयार ना रहूं। बस देखती जाओ और सूट उप करो।

ऐमी:- यहां से सारा सामान ले गए फिर सूट उप कैसे करेगे?

अपस्यु:- लोग छिपी हुई चीज ही ढूंढ़ते है, नज़रों के सामने की चीज को नजरंदाज कर देते हैं। हॉल के दीवारों पर गौर करोगी तो सब मिल जाएगा। मैं इमरजेंसी के लिए हमेशा तैयार रहता हूं।

दोनो ही जल्द ही सूट उप हो गए। जैसे ही सूट उप हुए, अपस्यु कमरे के पीछे की खिड़की खोला और ऐमी को दिखाने लगा। डिज़ाइन की तरह दिखने वाला दीवार पर लगा 2 छोटी-छोटी स्टील की पटरियां जो नीचे तक जाती थी, अपस्यु उसमे हुक फसा दिया और स्लाइड करते हुए सीधा नीचे आ गया। उसके पीछे ऐमी भी नीचे उतर आयी।

कोई बड़ी बात थी नहीं ऐमी के लिए पता करना की छुड़ाकर उनके साथी उस आदमी को कहां लेकर गए है। फ्लैट 102 में ऐमी माइक्रो डिवाइस भेजकर सुनिश्चित कर चुकी थी। अपस्यु ने तुरंत ही 102 नंबर फ्लैट की पटरियां ढूंढ निकाली और जल्द ही सिसा कट्टर से खिड़की का ग्लास कट करके दोनो उस फ्लैट के एक कमरे में दाखिल हुए।

किसी के होने की आहट से, उस कमरे का आदमी जाग गया। जैसे ही उसने लाइट जलाई… ऐमी ने उसके पीछे से मुंह पकड़ा और अपस्यु ने उसके गर्दन के वोकल कोर्ड में चाकू घुसेड़ दिया। लाइट बंद करके अपस्यु दरवाजे की आड़ से हॉल में देखने लगा।

3 लोग हॉल में थे और नीचे वो आदमी लेटा हुआ था, जिसे ऐमी ने इंजेक्शन लगाया था। उन लोगों के बीच श्रेया भी थी। श्रेया को देखकर अपस्यु ने ऐमी का हाथ थाम कर रुकने का इशारा किया… 3,2,1…0

जैसे ही कंटडाउन शून्य हुआ, दिमाग को इरिटेट करने वाला काफी तेज आवाज़ होने लगी। आवाज़ इतनी तेज थी कि फ्लैट के अंदर तक काफी जोर से आ रही थी। श्रेया अपने साथियों से कुछ कहती हुई वहां से निकल गई, और दोनो उसके जाने के बाद 10 की गिनती से तेज दौड़ लगा दिए। श्रेया के जाने के बाद, वो तीनो फिर से तिल-तिल मरते अपने साथी को देख रहे थे।

तीनों ही अपने साथी की हालत पर इतने हताश थे कि जबतक उन लोगों ने अपना ध्यान अपने मरते साथी से हटाकर ऊपर किया, तबतक उनका काल बड़ी तेजी से उसके पास पहुंच चुका था। तीनों ने जैसे ही अपना सर ऊपर किया, एक के गले में ऐमी अपनी चाकू उतार चुकी थी। अपस्यु एक आंखों में चाकू घोंपते हुए, दूसरे हाथ का चाकू उसके गले में उतार दिया।

आखरी बचा आदमी जिसके नज़रों के सामने सब कुछ इतना जल्दी हुआ की वो भय से लड़खड़ा गया। ऐमी फुर्ती से उसके पीछे पहुंचकर उसका मुंह दबायी और उसके गर्दन को आगे की ओर ऊंचा कर दी। अपस्यु बड़े ही स्लो तरीके उसका गला रेतते हुए कहने लगी…. "अपनी महत्वकांक्षा के लिए किसी के परिवार पर हमला नहीं करना चाहिए बेटा"..

लगभग 2 मिनट के अंदर ही सबका काम तमाम करने के बाद अपस्यु ने वहां से निकलने का इशारा किया। दोनो उसी कमरे की खिड़की से बाहर निकले, लेकिन बाहर निकलने से पहले, वहां पड़ी लाश के सर को खिड़की की जांच से टकराकर चकनाचूर कर दिया ताकि कांच काटने के सबूत ना रहे।

दोनो वहां से निकलकर पीछे के रास्ते सड़क पर आए और एक कार को बड़ी सफाई से उड़ाकर जगदीश राय के आवास तक पहुंच गए।…. "इसके घर में घुसकर मारना रिस्की है अपस्यु, पुलिस पहुंच जाएगी यहां। हम इतने तैयार भी नहीं है।"..
 
Back
Top