Romance भंवर (पूर्ण) - Page 14 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:- 111

दोनो वहां से निकलकर पीछे के रास्ते सड़क पर आए और एक कार को बड़ी सफाई से उड़ाकर जगदीश राय के आवास तक पहुंच गए।…. "इसके घर में घुसकर मारना रिस्की है अपस्यु, पुलिस पहुंच जाएगी यहां। हम इतने तैयार भी नहीं है।".

अपस्यु:- किसने कहा हम तैयार नहीं है, पीछे देखो कौन आ रहे है।

जेके और पल्लवी पूरी तैयारी के साथ चले आ रहे थे। आते ही जेके कहने लगा…. "अबे ये कौन है जो मेरा टारगेट तुझसे मरवा रहा है।"

अपस्यु:- वो जो कोई भी है, उसका लिंक जरूर उस डायरी से है, जिसकी फोटो मैंने आपको दी थी।

जेके:- ये तो वैसे भी मरता लेकिन अभी इसे मारने का मन नहीं था। आज राठी ब्रदर्स या शुक्ला को टपकाना था।

पल्लवी:- वक़्त बहुत कम है क्योंकि 15 मिनट में पुलिस पेट्रोलिंग यहां होगी। तुम दोनो का कोई अभी पीछा तो नहीं कर रहा था ना।

ऐमी:- जो हमे फसाकर अपना काम निकलवाना चाहते थे, उनके 5 लोगों को सुला आए हैं। पीछा करने का तो सवाल ही नहीं होता।

पल्लवी:- दैट्स माय बॉय.. चलो जी अपने शागिर्द कि मदद कर दो..

जेके:- ठीक है, अपस्यु, ऐमी तुम दोनो सामने के गेट इनको उलझाओ, मैं और पल्लवी अंदर उस जगदीश को परम पिता जगदीश के पास पहुंचाकर आते हैं।

इस काम के लिए अपस्यु ने ऐमी को बाहर ही रखा, क्योंकि वो नहीं चाहता था कि हर जगह 2 लोग दिखे। अपस्यु बाउंड्री के फैंस को चेक किया, अंदाज़ा सही था, करंट दौड़ रहा था ऊपर के लोहे में।

जेके, अपस्यु को बिजली विभाग वाला ग्लोब्स थामते हुए कहा… "सिक्योरिटी गार्ड के ऑफिस में करंट ऑफ का तरीका मिल जाएगा, जल्दी करना।"

अपस्यु तेजी से उस बाउंड्री पर चढ़ गया। बॉडी तो पुरा मास्क पहले से थी, मोटे परत की ग्लोब्स लगने के बाद, झटका का कोई सवाल ही नहीं था। लेकिन अंदर आते ही मोशन सेंसर एक्टिव हो गए और तुरंत ही अलार्म भी बजने लगा।

यह एक अलर्ट अलार्म था जो केवल सिक्योरिटी वालों के लिए था। सिक्योरिटी वाले ने अपस्यु को देखा और उसने सभी गार्ड और बॉडी गार्ड को तुरंत अलर्ट अलार्म से जगाना शुरू किया। जब तक वो सभी बाहर आते, तबतक अपस्यु गेट पर खड़े गार्ड के केबिन में दाखिल हो गया और सभी अलार्म एक साथ ऑन करके फैंस करंट सप्लाई को बंद कर दिया।

अपस्यु को तो वक़्त काटना था। अपना काम करने के बाद अपस्यु ने जेके को बढ़ने के लिए संकेत दिया और खुद वहां के लॉन में आकर गार्ड से लरने की तैयारी करने लगा।

पहले तो उसपर फायरिंग शुरू हुई, लेकिन अपस्यु के बुलेट प्रूफ जैकेट के आगे सब बेअसर था। सभी गार्ड तेजी से अपस्यु के ओर दौड़े। अपस्यु भी तेजी से भागता हुआ लॉन के चक्कर लगाने लगा। अपस्यु को पकड़ने के लिए वो सभी गार्ड जो एक साथ दौड़ रहे थे, सब बिखर गए और अलग अलग दिशा से अपस्यु को पकड़ने की कोशिश करने लगे।

अपस्यु के पीछे से 2 गार्ड दौड़ लगा रहे थे और सामने से 2 चले आ रहे था। अपस्यु अपने दोनो मुट्ठी में छोटी सी चाकू दबाए आगे बढ़ा और अपने घुटनों पर आते हुए दोनो गार्ड के पाऊं को काटते हुए आगे फिसल गया और वो दोनो पीछे जाकर गिर पड़े।

अपस्यु खड़ा होकर फिर से दौड़ लगा चुका था। देखते ही देखते बिखरे हुए गार्ड अब कर्राहते हुए जमीन कर बैठे कोई पाऊं पकड़े था, तो कोई अपने पेट के स्क्रैच को संभाले था।

इधर जेके अपने तय समय पर काम खत्म करके अपस्यु को लौटने के संकेत देने ही वाला था कि वहां पुलिस के कई जीप की सायरन की आवाज़ आने लगी। अपस्यु को भनक थी कि ऐसा कुछ होने वाला है इसलिए ऐमी को वो बाहर रहने कहा था।

ऐमी बाहर अपना काम कर चुकी थी। आने वाले दो ओर के रास्ते को वो वहां बाहर खड़ी जितनी भी कार थी उससे ब्लॉक कर चुकी थी और जिन कार के पेट्रोल पाइप काट सकती थी उनके काटकर सबको आग के हवाले कर चुकी थी।

जेके दोनो की होशियारी पर खुश होते हुए अपस्यु को लौटने का संकेत दिया। जबतक 2 मुख्य मार्ग से पुलिस पैदल गस्त करती हुई पहुंचती, चारो जेके की कार में छोटी सी गली के रास्ते, जेके के ठिकाने तक पहुंच चुके थे।

इधर अपार्टमेट में पागल कर देने वाले इस सिऊंड ने पूरे अपार्टमेंट को परेशान कर रखा था और श्रेया के लिए चिंता का विषय उसके साथी की गिरती नवज थी। उसके लिए पहले से पदेशनी कम थी क्या जो अब ये साउंड। श्रेया फ्लैट नंबर102 से निकलकर अन्य लोगों की तरह ही अपार्टमेंट सेक्रेटरी के घर पर हल्ला बोल दी।

श्रेया तकरीब 5 मिनट वहां रुकी और वापस उस फ्लैट में पहुंचीं। जब वो वापस पहुंची और वहां का नजारा देखी, उसके होश ही उड़ गए। श्रेया पागलों की तरह छटपटाने लगी और नागिन सी फुफकार मारने लगी।

श्रेया अपने फ्लैट में पागलों कि तरह भटक रही थी। कुछ ही देर में उसके लोग श्रेया के फ्लैट में पहुंचे।… "तुम लोग ने 102 में देखा या नहीं।"..

गुफरान आंखों से धधकते शोले निकालते….. "5 साथी मारे गए हैं और हम यहां बस योजना बना रहे है। अभी वो कुत्ता और उसकी गर्लफ्रंड अंदर ही होगी। पहले उसे ठोको फिर समझते रहेंगे की क्या करना है।"..

तकरीबन 10 साथी उनके जमा थे, सब लोग "हां हां" करने लगे। श्रेया सबकी भावनाओ में शरीक होती हुई कहने लगी…. "पापा को अपनें लिए एक कातिल चाहिए तो कहीं और से इंतजाम करेंगे। परिणाम का बाद में सोचेंगे पहले साफ करो दोनो को। हां लेकिन सब साथ रहना। क्योंकि हमें उसे कमज़ोर नहीं समझना चाहिए।"..

जेन:- स्प्रे मारकर बेहोश करेंगे फिर इत्मीनान से उसके अंग-अंग को चीरकर अपने कलेजे कि आग को ठंडा करेंगे। सब लोग मस्क पहनो और स्प्रे लो।

बस कुछ ही पल में सब तैयार हो गए। स्टाफ क्यूटर्स के दरवाजे से सब लोग अपस्यु के फ्लैट दाखिल हुए। अंधेरे हॉल में जैसे ही उन लोगों ने रौशनी की… हॉल में लगा प्रोजेक्टर चलने लगा और वहां आवाज़ गूंजने लगी…. "मुझे मारने आए आप सभी लोगों को नमस्कार। मैं रात के 3-5 के बीच, तुम लोगों को भाड़े पर काम देने वाले जगदीश राय को साफ कर रहा होऊंगा, उसके बाद घूमने निकल जाऊं वो मूड पर है।"..

"खैर ये सब तो तुम्हारे काम की बात नहीं थी, लेकिन अब जो कह रहा हूं उसे सुनने और समझने में कोई चूक ना हो। यदि मुझे मारने कि इक्छा हो तो जगदीश राय के बंगलो आ जाना, वरना अपने 5 लोगों की लाश 102 से उठाकर निकल जाओ। कॉन्ट्रैक्ट मुझे मारने का मिला था तो मुझे मारना चाहिए था, मेरे परिवार पर हमला करना माफी के लायक नहीं।"

"तुम्हारे ग्रुप को मै केवल एक चेतावनी देकर मै छोड़ रहा हूं, कि उन पांचों की डिटेल मैंने अपने पास रख ली है। अगली बार मुझे शंका हुआ कि तुमने मेरी सुपाड़ी ली है, तो मै तुम्हारा पता लगाऊंगा। पहले मारूंगा और फिर तुम्हारी लाश से पूछना शुरू करूंगा…. "भाई बता अब तुझे किसने मुझे मारने कि सुपाड़ी दी थी, या अपने 5 लोगों का बदला लेने आया है"। ज़िन्दगी प्यारी हो तो बदला भूल जाओ वरना मृत्यु ही एक मात्र सत्य है और मैं, अपस्यु रघुवंशी, उस सत्य से तुम सबको अवगत करवा दूंगा।"…

अपस्यु का संदेश सुनने के बाद सब लोग अजीब ही गुस्से के साथ, श्रेया के फ्लैट में लौटे और हर कोई अपस्यु पर हुए आज के हमले के बारे ने पूछने लगा। किसी को खबर नहीं थी कि यह स्टेप लिया जा चुका है। श्रेया सबको शांत करती हुई कहने लगी….

"कल रात अपस्यु से बात करने के बाद मुझे लगा कि वो ऐमी या आरव के लिए कुछ भी कर सकता है। जगदीश राय पर एजेंसी वालों का सिकांजा बढ़ रहा था यदि वो गवाह बान जाता या अपना मुंह खोल देता तो पदेशानी का कारन बन जाता, इसलिए यह फैसला लिया गया था।"

गुफरान:- इसका मतलब जित्तू (वहीं आदमी जिसे ऐमी ने जहर का इंजेक्शन दिया था) को इन्हीं दोनो ने कुछ किया था और तुम कह रही थी इन दोनों (अपस्यु और ऐमी) के डिक्की में माइक्रोफोन और जीपीएस फिट करने घुसा था। तुमने हमसे पूरी कहानी छिपाई।

प्रदीप:- श्रेया, तुम्हारे बकवास प्लान के वजह से हमारे 5 साथी मारे गए। साफ शब्दों में कह गया अगली बार कुछ होगा तो हमारे ग्रुप का वो पता लगाएगा… जब तुम उसे अपने जाल म फसा ही रही थी फिर उसके परिवार पर हमला करवाने किसने कहा था। उसमे भी तुमने ऐमी को चुना। वो तो खुद भी एक ट्रेंड फाइटर है और शायद हम सब से बेहतर हो। ऊपर से दोनो को देखी थी ना इंडिया गेट पर, फिर भी उसपर हमला। जहालत है ये तो….

श्रेया:- मुझे लगा जिस लड़की से वो प्यार करता है, उसके घायल होने या मरने के बाद, वो अपना आपा खोकर बिना कुछ सोचे जगदीश राय को खत्म कर देगा और उसका वकील सिन्हा तो उसे निकाल ही लेगा, इसलिए मैंने सब कुछ प्लॉट कर दिया।

जेन उसे एक थप्पड़ खींचकर मारती…. "देख लिया उसको उकसाने का नतीजा। खुद ही कहती थी ना की उसके जैसा एक भी अपने टीम में हो फिर तो दुनिया जीत लेंगे। हर पॉवर को क़दमों में लाकर झुका देंगे। फिर क्यों उसको छेड़ दी।"

श्रेया:- कल पिए म जब उसको सुनी तो लगा कि उसे हम कुछ ज्यादा ही आंक रहे है। सेक्स और पॉवर उसकी भी ख्वाहिश है और इसका भी दिमाग आम लड़कों जितना ही है, बस एबिलिटी थोड़ी ज्यादा है।

प्रदीप:- आम लड़का, हाहाहाहा… उस भूत को आम लड़का समझ रही थी। 5 मिनट में तो उसने 4 लोगों को काट दिया। कब आया कब गया कीसी को भनक तक नहीं। तुम उसे फसाने के लिए जाल बुन रही थी और उसने डिक्की में जिसे बंद किया, उसपर बाहर से नजर रखवाए था। उसने पता भी लगा लिया कि हम जित्तू को 102 में लेकर गए है और तुम फालतू की टेक्नोलॉजी से उसके बदन में ट्रैकिंग डिवाइस ढूंढ रही थी।

"हमारे साथियों को मारने के बाद कितने विश्वास से कहता गया है कि वो अब जगदीश राय को साफ करेगा। वही जगदीश राय जिसपर 3 बार हमले करवा चुके है पर उल्टा मुह की खाने पड़ी थी। उसे तो यहां तक पता था कि उसने क्या किया और लोग उसे कहां ढूंढने आ सकते है। शुक्र करो उसने अपने घर में मौत का जाल नहीं बिछा रखा था। सामान्य सा लड़का है बस… । तुम जरा अपनी ओवर स्मार्टनेस कम करो श्रेया तो हमसब के लिए अच्छा होगा। भूत जैसे शिकारी को फसाने की चाहत है और अक्ल रत्ती भर भी नहीं।"

गुफरान भी गुस्से में लाल होते… "ऐमी को कोई मारने आया था, सिर्फ इस ख्याल से ही उसने सबकी बलि ले ली। परिवार की बीच रहने वाला मासूम सा लड़का जिसके चाकू का घाव देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये वही मासूम है। उसे तुम इतना कम कैसे आंक सकती है। बिना सोचे जब वो इतना कर सकता है, फिर जब ध्यान स सोचकर करेगा तो अंदाज़ा भी है वो क्या कर सकता है और कहां तक घुस सकता है। बदला भूलकर पहले सबूत मिटाओ और सर्विलेंस पर रखो 24 घंटे, ताकि पता तो चले ये हमारे ग्रुप के पीछे पड़ा है कि नहीं। अच्छा हुआ वो फ्लैट ने नहीं था वरना 10 लोगों में से 5-7 को तो लपेट ही लेता।

जेन:- जिस श्रेया को हम अपने पापा की तरह चालक समझ रहे थे वो तो आज बेवकूफी कर गई और तुम गुफरान बोलते बोलते फिर से साबित कर दिए की तुम सबसे बड़े बेवकूफ हो। सब कुछ आंखों के सामने है, फिर भी ये सोच रहे हो कि उसकी जगह पर तुम 10 लोग टिक जाते। 4 सूरमा को तो 5 मिनट में उनकी जगह पर साफ कर दिया और तुम्हारे यकीन कि मै दाद देती हूं , उसके घर में घुसकर 10 लोग जाओगे मारने। बस भी करो तुम लोग और जाकर पहले सबूत मिटाओ ताकि वो हम तक पहुंचने का उसे कोई लिंक ना मिले।

श्रेया:- जेन सही कह रही है। वैसे भी अपस्यु ने यह कत्ल, यह सोचकर किया की किसी ने उसके ऐमी को मारने की कोशिश की थी, इसलिए आवेश में उसने 5 कॉन्ट्रैक्ट किलर को मारा डाला। अब उसे मारने गया है जिसने ये कॉन्ट्रैक्ट दिया था। मतलब साफ है, परिस्थिति कैसी भी हो वो अपना आपा नहीं खोने वाला। तुम सब सही कह रहे हो, हमारे 5 साथी के मरने के पीछे केवल और केवल मेरी बेवकूफी थी और अपस्यु उसे हमारा साथी के तौर पर नहीं बल्कि अलग सोच के साथ कत्ल किया है। उसके पीछे जाने से अच्छा है कि मेरी बेवकूफी को भूलकर उसे साथ मिलाकर काम किया जाए।

सभी लोग अभी बात कर ही रहे थे कि श्रेया के पास कॉल आया… "पापा आप इतनी रात को जाग क्यों रहे हो।"

पापा:- क्योंकि मै तुम्हारी पहली सफलता पर बधाई देना चाहता हूं। जिस सोच के साथ अपस्यु पर दाव खेला था वह सही हो गया। उम्मीद से परे है इसका काम और इसे मुमकिन तुम्हारी कोशिश ने बनाया है। इसे पूरे काबू में रखो ये लड़का कुछ भी कर सकता है।

श्रेया को लग गया कि हो ना हो अपस्यु ने जगदीश राय को खत्म कर दिया होगा। श्रेया ने तुरंत न्यूज लगाया और न्यूज में अभी वही चल रहा था… "मशहूर उदयोगपति जगदीश राय के घर में घुसकर, कुछ अज्ञात लोगों ने उसका कत्ल कर दिया। पुलिस मामले की छानबीन में लगी।"… टीवी की न्यूज सभी आंख फाड़े देख रहे थे और बस अपस्यु के क्षमता के बारे में पुनः आकलन करने में जुट गए।
 
Update:- 112

सुबह के 7.30 बज रहे थे। फ्लैट की बेल जोड़ों से बज रही थी। अपस्यु ने जैसे ही दरवाजा खोला, एसपी के साथ पुलिस की पूरी टीम दरवाजे पर खड़ी थी। अपस्यु पुरा दरवाजा खोलते हुए… "सॉरी मै वो सो रहा था सर, आइये ना अंदर।"

अपस्यु सबको हॉल में बिठाकर, ऐमी को जगा दिया और वापस से उनके बीच चला आया। अपस्यु के आते ही एसपी ने सीधे सवाल करने शुरू कर दिए, मामला था इस अपार्टमेंट में हुए कल रात की वारदात और उसी वारदात का एक लिंक जगदीश राय के घर तक जाता था, क्योंकि चोरी कि गई कार इसी अपार्टमेंट के बाहर से उठाई गई थी और शक था कि जिसने यहां कत्ल किए है वही जगदीश राय के यहां भी गया होगा।

अपस्यु। के चेहरे पर घोर आश्चर्य के भाव थे और वह जिज्ञासावश पूछने लगा कि कल इस अपार्टमेंट में हुआ क्या था, क्योंकि कल शाम शॉपिंग मॉल की घटना से बाद उसकी अभी आंख खुल रही है।

एसपी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अपस्यु से उसके साथ हुई कल शाम की घटना के बारे में पूछने लगा। बेहोश होने के पहले तक का अपस्यु ने बता दिया और उसके बाद सीधा उसकी आंख यही खुली।

इतने में ऐमी सबके लिए चाय ले आयी और सबको चाय देने के बाद आगे की घटना का जिक्र करती हुई पूरी बात बताई। कैसे फिर वहां पार्किंग में अजिंक्य और उनके थाने के लोग पहुंचे, सभी हमलावरों को अरेस्ट करने के बाद फिर वहां से अपस्यु को हॉस्पिटल लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया की घबराने वाली बात नहीं है, बस बेहोश किया गया है, उसी के साथ अजिंक्य सर ने डॉक्टर से अकेले में कुछ बात की और डॉक्टर ने मुझे कुछ दवा लिखकर दी।

अजिंक्य सर खुद यहां आए थे। उनके हवलदार की मदद से हमने अपस्यु को लिटाया और फिर मुझे वो दावा खिलाकर यहां से चले गए। उसके कुछ देर बाद नींद आ गई और अभी जाग रही हूं। एसपी पुरा मामला सुनने के बाद क्रॉस चेक किया और अजिंक्य से पूरे मामले की जानकारी लेकर वहां से चलते बाना।

उनसब के जाते ही अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और किचेन में पहुंचकर, ऐमी के कमर में हाथ डालकर उसके गले को चूमने लगा… ऐमी गहरी श्वांस लेती अपने हाथ को किचेन स्लैब से टिका दी और अपनी आखें मूंद ली।

अपस्यु गले को चूमते हुए अपने हाथ धीमे से खिसकाते हुए लोअर के अंदर ले जाने लगा… "अम्मम ! बेबी अभी रुक जाओ ना प्लीज, काम बहुत परे है। खत्म तो कर लेने दो।"….. गले पर हल्के दातों का निशान देते हुए अपस्यु हाथ को धीमे से पैंटी के अंदर खिसकाते उसे चूमने लगा।

श्वांस दोनो की ही चढ़ आयी थी, तभी अपस्यु के फोन की घंटी बज गई। एक पूरी रिंग होकर कट गई लेकिन अपस्यु ने ध्यान नहीं दिया। वो धीरे-धीरे अपने हाथ चलाते, ऐमी की उत्तेजना को बढ़ाने में लगा था। तभी फिर से दोबारा रिंग होना शुरू हुआ।

ऐमी, अपस्यु को धक्का देकर दूर की…. "हद है फोन बज रहा है अपस्यु, उठाओ उसे पहले।"… अपस्यु गुस्से में फोन को घूरा और फोन उठाकर हॉल में चला आया…. "हां बोल भाई"..

आरव:- कहां था, पूरी घंटी हुई फिर भी कॉल नहीं उठाया।

अपस्यु:- कुछ काम कर रहा था। तू सुना कैसी चल रही है छुट्टियां।

आरव:- अरे यार तेरा कल रात का शो हमदोनो ने देखा, अब मैडम को भी इक्छा हो रही है, वैसे ही एक इजहार की।

अपस्यु:- हाहाहाहा.... प्यारी सी ख्वाइश है कर दे पूरी, इसमें इतना सोच क्यों रहा है। वो छोड़ तू आराम से रह और चिंता ना कर, समझा।

आरव:- कामिना, अब कौन मन की भाषा पढ़ रहा?

अपस्यु:- जुड़वा तो मरने के बाद भी जुड़वा होते है, फिर तू सोच कैसे लिया कि तेरी बात मै ना समझूं या तू मेरी ना समझेगा।

आरव:- हम्मम ! सो तो है, बस मन ना लग रहा तुम लोगों के बिना। तू और ऐमी यहां होते तो बात ही कुछ और होती।

अपस्यु:- अभी लावणी को समय दे समझा, और ज्यादा बहस नहीं।

आरव:- ठीक है गुरुजी समझ गया। चल मै फोन रखता हूं।

अपस्यु ने सोचा, "ये फोन बार-बार तंग ना करे इसलिए खुद ही सबको फोन लगा दूं"। अपस्यु ने फिर एक तरफ से सबको कॉल लगाना शुरू कर दिया। जब वो कुंजल को कॉल लगाया तब उसका फोन व्यस्त आ रहा था। अपस्यु किचेन में झांककर देखा तो ऐमी फोन पर लगी थी, वह समझ गया दोनो लगे हैं, इसलिए उससे छोड़ बाकी सबसे बात कर लिया।

कुछ देर बाद उखड़ा सा चेहरा बनाती ऐमी हॉल में आयी और टेढ़े मुंह अपस्यु को फोन देती कहने लगी… "कुंजल है लाइन पर बात कर लो"..

अपस्यु इशारों में अपने दोनो कान पकड़ते सॉरी कहने लगा… ऐमी फोन उसके पास रखकर रूम में चली गई। जबतक अपस्यु कुंजल से बात करता, ऐमी नहाकर, तैयार होकर कमरे से बाहर निकली। ऐमी को देखकर ही समझ में आ गया, आज इसका पारा फिर चढ़ा…. "कहीं बाहर जा रहे है क्या बेबी।".. अपस्यु ऐमी का हाथ पकड़ कर खींचते हुए बाहों में लेकर पूछने लगा।

ऐमी:- खाना ऑर्डर कर दिया है, 12.30 बजे तक आ जाएगा। मै घर का रही हूं।

अपस्यु, ऐमी के कानो के नीचे से बाल को किनारे करते चूमते हुए कहने लगा… "सॉरी बाबा, वो कॉल आ गया था।"

ऐमी:- कोई बात नहीं है अपस्यु, मै जा रहीं हूं तुम खाना खा लेना।

अपस्यु, ऐमी से अलग होकर उसको अपनी ओर घुमाया, और अपने दोनो कान पकड़ कर कहने लगा…. "गलती हो गई बाबा, मुझे मान जाना चाहिए था। तुम जब कही तब हट जाना चाहिए था। अब माफ भी करो और गुस्सा शांत करो।"

ऐमी, अपनी आखें शुकुड़ती…. "अगली बार ऐसे जिद तो नहीं करोगे ना, और कहूंगी अभी नहीं, तो मान जाओगे ना।"..

अपस्यु:- हां बाबा सच में। चलो अब गुस्सा छोड़ो और आराम से बैठ जाओ। आज मै तुम्हे अपने हाथों का बना खिलाऊंगा…

ऐमी:- येस ! यह अच्छा विचार है। वो चीज वाली आलू दम जो तुमने मियामी में खिलाई थी, वहीं बनाओ।

अपस्यु:- ठीक है फिर वो रेस्ट्रो के खाने का आर्डर कैंसल कर दो, और जबतक तुम बाजार से चीज ले आओ, मै बाकी का काम करके रखता हूं।

ऐमी:- प्रदीप को भेज दो ना, अब क्या बाजार भी मै ही जाऊं…

अपस्यु:- नाह ! उन गावरों को रहने दो, मुझे और भी कुछ याद आ गया है, मै खुद बाजार जाता हूं, जबतक तुम आलू छिलकर रखना और 8-10 प्याज काट लेना।

ऐमी:- जी सर जैसा आप कहें।

अपस्यु, ऐमी को काम समझकर निकल गया, वो जबतक किचेन में अपना काम समाप्त करती तबतक अपस्यु भी बाजार से लौट आया था। अपस्यु जब लौटकर आया, ऐमी किचेन में ही थी। अपस्यु किचेन में जाकर सारा समान रख दिया और पीछे से ऐमी को गले लगाते, उसके गाल को चूमते हुए…. "चलो अब तुम जाओ मैं सब रेडी करता हूं।

ऐमी मुस्कुराती वहीं किचेन स्लैब पर बैठती हुई कहने लगी…. "नाह ! तुम पकाओ और मै तुम्हे देखती रहूंगी।…

लगभग 8.30 से 10 बजने को आए थे। श्रेया और उसकी पूरी टीम उन दोनो पर नजर बनाए-बनाए पक से गए थे। रात को इतने बड़े काम की अंजाम देने के बाद भी सुबह उठकर एक शब्द की भी चर्चा नहीं। ना ही पुलिस उनके दरवाजे पर थी तो उनके हाव-भाव में कोई बदलाव।

सब के सब अपना सर पटक रहे थे और दोनो के बीच का रोमांस देखकर बस यही सोच रहे थे… "पागल है क्या दोनो, पूरी दिल्ली में पुलिस प्रशासन हिली हुई है। पूरा अपार्टमेंट पागल बना हुआ है, और इन्हे कोई फर्क ही नहीं पर रहा। आपस में ही लगे है।"

सादिक, श्रेया का साथी और जेन के भाई का किरदार निभाने वाले… "यार या तो ये बहुत ज्यादा होशियार है या लापरवाह। इतने बड़े कांड के बाद कुछ तो चर्चा होती ना।"

श्रेया:- यह भी तो हो सकता है कि उनके अनुसार उन लोगों ने पुरा मैटर रात को हो सॉल्व कर लिया हो, इसलिए कल के इजहार के बाद दोनो बस आपस में ही लगे है।

जेन:- हां लेकिन अब हम क्या करें, उनका रोमांस देखकर तो मुझे अंदर से कुछ रोमांटिक और कुछ एग्जॉटिक सी फीलिंग आने लगी है।

सादिक:- मेरा भी वही हाल है।

श्रेया:- हम्मम ! कहीं ऐसा तो नहीं कि इसने मुझे कल रात जित्तू के पास देख लिया था और शक हो की हम उसके घर में घुसपैठ करके उनपर नजर बनाए हुए हूं।

जेन:- प्वाइंट में दम तो है, लेकिन उनके प्रतिक्रिया इतने नेचुरल है कि कुछ समझ पाना नामुमकिन है। वैसे जिस हिसाब से दोनो के बीच का प्यार और रोमांस है, उसे देखकर तो यही लगता है कि, अगर वो तुम्हे कल सबके साथ देख लेता तो वहां 5 की जगह 6 लाश होती।

श्रेया:- हम्मम ! ठीक है, कुछ देर और वॉच पर रहो, मै कुछ सोचती हूं।

इधर ऐमी किचेन स्लैब पर बैठी अपस्यु को प्यार से खाना बनाते हुए देख रही थी। अपस्यु बड़े ही प्रेम से और पुरा ध्यान खाना पकाने पर दिए हुए था… "कुछ बोलो भी ऐमी, पास हो और इतनी ख़ामोश।"..

ऐमी:- नाह तुम्हे देखने का मज़ा ही कुछ और है। अपनी ये शर्ट क्यों नहीं उतार देते। जरा नजर भर तुम्हारे दिलकश बदन को देख लूं।

अपस्यु अपनी नजर ऐमी पर दिया, आंखों में शरारत और होटों पर कातिलाना हंसी… अपस्यु अपने होंठ आगे बढ़ाकर ऐमी के होठों को चूमते… "अब कौन रिझा रहा है।"..

ऐमी:- हीहीहीही… पहले शर्ट उतारो फिर बताती हूं।

अपस्यु:- तुम खाली बैठी हो, इतनी मेहनत तो तुम भी कर सकती हो।

ऐमी:- नाना, आज मै आलसी हूं, सब तुम्हे ही करना होगा…

"उफ्फ ! मार ही डाला।"… अपस्यु आंख मरते हुए अपनी शर्ट उतार लिया और उसे लपेटकर ऐमी के मुंह पर फेंक दिया। ऐमी, अपस्यु की इस हरकत पर हंसती हुई कहने लगी… "नजर ना लगे, इन्ना सोना। चलो अब अपने पैंट उतारो।"

अपस्यु, आश्चर्य में अपनी आखें बड़ी किए….. "क्या?"

ऐमी:- हीहीहीही.. पैंट उतारो।

अपस्यु:- हट पागल, मै कहता हूं तुम अपने ये जीन्स उतारो।

"पहले ही कहीं मै आज आलसी हूं, बाकी तुम्हारी मर्जी है, मुझे कोई ऐतराज नहीं।"… ऐमी हंसती हुई आंख मारते कहने लगी…

अपस्यु, हंसते हुए अपना सर झुका लिया और अपना काम करने लगा।… "बेबी, शर्ट की तरह पैंट भी फेको ना। प्लीज।"..

"आज पागल हो गई हो तुम।" .. अजीब शर्म सी हंसी हंसते हुए अपस्यु ने अपने पैंट उतरकर भी ऐमी के मुंह पर मरा। … "भिंगे होंठ तेरे, प्यासा दिल मेरा… मेरे इमरान हाशमी, अंदर तो काफी सेक्सी बॉक्सर पहन रखी है, कहीं और परफॉरमेंस तो नहीं देने वाले थे।"..

अपस्यु:- बस भी करो, अब खुश तो हो ना..

ऐमी:- नाह ! वो आखरी वस्त्र, बॉक्सर भी उतार कर दो।

अपस्यु:- पागल, सुंबह-सुबह कोई पोर्न तो नहीं देख ली।

ऐमी:- आय हाय लड़का तो शर्मा गया। अच्छा तुम्हारी लाज्जा को देखते हुए छोड़ती हूं। जाओ नहा लो, सब तो लगभग पक गया है।

अपस्यु:- बस 5 मिनट का रह गया है, जबतक ये पकता है, तबतक मैं तुम्हे भी निर्वस्त्र कर दूं।

ऐमी फाटक से किचेन स्लैब से नीचे उतरती…. "अभी कुछ देर पहले ही ना कान पकड़ कर बोल रहे थे, मै मना कर दूंगी तो मना हो जाओगे। तो चलो अब मना हो जाओ।"

अपस्यु खा जाने वाली नज़रों से घूरा .. "बहुत शरारत सूझ रही है मिस ऐमी, अभी बताता हूं तुम्हे।"… अपस्यु दौड़ा, ऐमी भागी.. भागते दौड़ते, सामान गिराते पीछा चालू था। ऐमी की खिल खिलहट पूरे घर में गूंज रही थी और अपस्यु उसके पीछे दौड़कर पकड़ने कि कोशिश में लगा था….

अंततः अपस्यु ऐमी को पकड़कर कमर से उठाया और तेजी से गोल घूमते हुए उसके कान के नीचे गले पर अपने दांत जोड़ से गड़ाते हुए कहने लगा… "मेरे तो सीधे-सीधे इमोशंस थे, लेकिन ये सुबह से जो तुम मुझे परेशान कर रही हो ना, अभी बताता हूं।"..

एमी:- क्या करोगे नहीं मानूंगी तो, रेप ही करोगे ना, और क्या.. हीहीहीही।

अपस्यु, ऐमी को उठाकर डायनिंग टेबल पर बिठाते हुए… "तुमने वो सुना है"..

ऐमी:- क्या ?

अपस्यु:- बोंडेज एंड डिसिप्लिन (Bondage and Discipline), डमिनेंस एंड सबमिशन (Dominance and Submission) सदोचिज्म एंड मसोचिज्म (Sadochism and Masochism).

ऐमी, अपनी दोनो आखें फाड़े अपस्यु को देखती हुई… "क्या बीडीएसएम (BDSM)"

अपस्यु:- येस । बिल्कुल यही, सही सुन रही हो।

ऐमी, अपस्यु के बालों पर प्यार से हांथ फेरती…. "बेबी ऐसा ना करो ना, प्लीज। एक बार और सोच लो ना बेबी। मूड तो मेरा भी बहुत हो रहा है, लेकिन ये…."

अपस्यु:- ई.. हा.. हा.. हा… अब तो यही फाइनल है।

ऐमी:- ठीक है फिर हंटर खाने तैयार रहना, मेरी तैयारी पूरी है। सबमिसिव और डिसिपिलन बनकर रहना।

इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"
 
Update:- 113

इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"

इधर श्रेया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था और उधर दोनो के रोमांस में कोई तब्दीली नहीं नजर आ रही थी। ऐमी डायनिंग टेबल पर बैठी गौर से अपस्यु का चेहरा देख रही थी। अपस्यु उसे सीने से लगाते हुए कहने लगा…. "खुलकर जीने का मज़ा ही कुछ और है।"..

ऐमी, अपस्यु से अलग होती मुस्कुराती हुई उसे देखने लगी… "आज ऐसा लग रहा है कि हम अपनी सोच में बेवकूफ थे। लेकिन जो बीत गया उसे जाने दो और जाकर तुम नहाकर आओ।"

अपस्यु:- तुम भी साथ चल रही हो क्या?

ऐमी, अपस्यु को धक्के देकर दूर हटती… "शाम को जब लौटेंगे तब देखते है, अभी जाओ नहा लो, जबतक मै किशोर को बुला लेती हूं। आज घर का काम करवा लेते है।"..

अपस्यु:- सारे काम 2 बजे तक खत्म कर लेना अभी कह देता हूं।

ऐमी:- हां ठीक है मैंने सुन लिया अब तुम जाओ।

अपस्यु चला गया और उसे जाते देख ऐमी मुस्कुराती हुई किशोर को कॉल लगा दी। अभी वो किशोर से बात करके कॉल रखी ही थी कि बेल बजने लगी। ऐमी दरवाजा खोलकर देखी तो बाहर श्रेया खड़ी थी…. "अपस्यु नहीं है क्या?"

ऐमी:- क्यों वो नहीं रहता तो तुम घर में नहीं आती क्या?

श्रेया, पूरी तरह चौंकती…. "क्या?"

ऐमी, हंसती हुई…. "मज़ाक कर रही थी आओ अंदर। कई बार आंटी के साथ देखी हूं तुम्हे, इसलिए थोड़ा सा मज़ाक।"

श्रेया अंदर आती हुई… "तुमसे कभी ठीक से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन अच्छे से जानती हूं तुम्हे।"

ऐमी:- जी इस ज़र्रे नवाजी का शुक्रिया। (कामिनी जानती तो कल कुछ ढंग के लोग भेजती, इतने कमजोर प्लेयर को कॉन्ट्रैक्ट तूने दिया की तेरा खून करने का मन करता है)

श्रेया:- अपस्यु नहीं है क्या ? (देखने से लगता नहीं कि ये इतनी बड़ी फाइटर होगी। अपने फिगर को क्या मेंटेन किया है। तब उस अपस्यु की नजर इसपर से हटती नहीं। पहले इसे अपस्यु से थोड़ा दूर करना होगा, तब मुझे इनके बीच जगह मिलेगी)..

ऐमी:- कहां खो गई, मै कब से पूछ रही हूं, कुछ लोगी क्या?

श्रेया:- सॉरी कुछ सोच रही थी, इसलिए ध्यान नहीं दी। नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस अपस्यु से थोड़ी बात करनी थी।

ऐमी:- नहाने गया है थोड़ी देर में आ जाएगा.. (और तू कामिनी जल्दी से भाग जाना बात करके, क्योंकि ये वक़्त सिर्फ हम दोनों का है)

श्रेया से और बात करना ऐमी को उबाऊ सा लगने लगा इसलिए वो श्रेया को हॉल में बिठाकर किचेन में चली गई। तकरीबन 15 मिनट बाद अपस्यु हॉल में आया… "हेल्लो श्रेया"..

श्रेया:- हेय अपस्यु, क्या हो रहा है?

अपस्यु:- अपनी होने वाली बीवी के साथ हूं, वो भी अकेले तो होना क्या है, खट्टे-मीठे पल का मज़ा उठा रहे है।

श्रेया:- यहां पूरी कॉलोनी सदमे में है और तुम रोमांस में लगे हो।

अपस्यु:- ना तो मै पुलिस हूं और ना ही जो मरे उनमें से किसी को जानता, सो क्या फर्क पड़ता है।

श्रेया:- कमाल है, मै उसी लड़के से आज मिल रही हूं क्या, जो कुछ दिन पहले एक किसी अनजान के शव को नंगे पाऊं कांधा दे रहा था।

अपस्यु:- अखबार और न्यूज में ऐसे खबरे रोज आती हैं, क्या हर खबर के लिए तुम्हारी ऐसी ही भावना होती है। सामान्य सी बात है यार, जिसे नहीं जानते उसके लिए क्या कर सकते है। सुबह सुना मैंने भी, अफ़सोस तो कर लिया अब क्या चाहती हो छाती पीट लूं…

अपस्यु अपनी बात समाप्त ही किया था ठीक उसी वक़्त किशोर दरवाजे पर खड़ा होकर बेल बजाने लगा।… "ऐमी दरवाजे पर देखो शायद किशोर आया हुआ होगा।"…. ऐमी दरवाजा खोलती… "आइए सर"..

जैसे ही किशोर अंदर आया श्रेया की आखें बड़ी हो गई। हालाकि किशोर को श्रेया के बारे में नहीं पता था, लेकिन श्रेया किशोर के बारे में सब जानती थी। दिल्ली का एथिकल हैकर जो अपने सिक्योरिटी सिस्टम के लिए मशहूर था।

ऐमी:- किशोर सर वेलकम…

किशोर, ऐमी के सर पर एक हाथ मारते….. "कितनी बार तुमसे कहा है की ये बोरिंग नाम से मत पुकारा कर। कॉल में रेक्स।"..

अपस्यु दूर से ही… "ऐसा भी क्या फैशन किशोर भईया.. ये तो.. सेक"..

अपस्यु आधे पर ही था तो… "देखो अपस्यु अगर वो नाम बोला तो मै यहां से चला जाऊंगा।".. किशोर हड़बड़ी में अपनी बात कहते हुए अपस्यु के पास पहुंचा।

अपस्यु:- ठीक है नहीं कहता, कुछ लोगे आप?

किशोर:- काम बहुत परे है, क्या करना है वो बता। वहीं रेगुलर चेक करूं की कहीं कोई तेरी जासूसी तो नहीं कर रहा या आज कोई नई मांग है।

ऐमी:- हां सिक्योरिटी अलार्म भी चाहिए जो मोबाइल पर नोटिफिकेशन दे। कल का केस तो पता ही होगा यहां अपार्टमेंट में क्या हुआ है। कब कौन कहां से दुश्मनी निकालने आए किसे पता।

श्रेया:- ठीक है अपस्यु मैं चलती हूं।

"अरे श्रेया कहां जा रही हो। बैठो थोड़े गप्पे मारेंगे। किचेन का काम लगभग खत्म है।"…… ऐमी अपनी बात कहती, हंसती हुई अपस्यु के ओर देखने लगी।

श्रेया:- नहीं जाने दो, वैसे भी तुम्हारे होने वाले पतिदेव कह ही चुके हैं कि आज वो अकेले तुम्हारे साथ खट्टे-मीठे पल बांट रहा है।

श्रेया गेट तक बड़े आराम से निकली और बड़ी तेजी के साथ अपने फ्लैट में गई। बाकी लोगों को सर्विलेंस से सब खबर लग चुकी थी कि अपस्यु के यहां कौन आया है, अब बस सबको भेद खुलने का डर था।

श्रेया की साथी जेन और सादिक अपने अपने शब्दो में चिंता जाहिर करते हुए पूछने लगे….. "हम तो अपस्यु को नॉन टेक्निकल समझते थे, लेकिन इसके पास टैक्निकल टीम भी है।"..

श्रेया, जोर जोर हंसती हुई…. "जानती हो उसमे और हम सब में क्या फर्क है?"

श्रेया की पूरी टीम एक साथ… "वो शिकार है और हम शिकारी।"..

श्रेया:- नहीं, हम बेवकूफ शिकारी है और वो चालाक शिकार। कम से कम उन्हीं दोनो से तो कुछ सीख लेते। कल रात इतने शिकार किए उसने, लेकिन पुलिस को देखकर जरा भी पैनिक नहीं हुए और एक तुमलोग हो, एक लीगल हैकर क्या घुसा उसके घर में, पैनिक हो गए।

"सर्विलेंस पर रहो, यदि ये किशोर इसके साथ है, इसका मतलब इसे शुरू से पता है कि हम कौन है, फिर तो कोई गम ही नहीं, डायरेक्ट डील करेंगे, लेकिन नतीजा निकालने से पहले आराम से सर्विलेंस पर रहो, पूरे दिन में एक यही तो काम का आदमी आया है।

इधर श्रेया के जाने के बाद…. "अपस्यु, बेबी किशोर भईया को अपना काम करने दो, जबतक हम घर से होकर आते है। वैभव और पापा से मिल लेते है। कल से नहीं मिले।"..

अपस्यु, घूरती नज़रों से… "ऐमी देखो मुझे तुम ऐसे जान बूझकर परेशान नहीं करो, हम कहीं नहीं जा रहे।"

ऐमी, अपनी घूरती नजर अपस्यु पर डालती…. "तुम चल रहे हो और इस बात पर कोई बहस नहीं होगी। जाओ चेंज करके आओ।"..

अपस्यु छोटा सा मुंह बनाए अपने कपडे बदल कर आया।… "दरवाजे और कार की चाबी तो लेते आओ बेबी, श्रेया को देते चलते है, आने में देर हो गई तो।"..

दोनो थोड़े ही देर में श्रेया के दरवाजे पर पहुंचे, श्रेया के हाथ में सारी चाबियां देते हुए अपस्यु कहने लगा… "मेरे घर में कुछ काम हो रहा है श्रेया, प्लीज तुम थोड़ा देख लेना, हमे अभी ऐमी के घर जाना है।"

श्रेया:- ओय तुम दोनो झूठे हो, जा रहे हो रोमांस करने कहीं बाहर और मुझे जबरदस्ती काम दे रहे।

अपस्यु, श्रेया के दोनो गाल खिंचते…. "प्लीज अपने दोस्त की मदद कर दो, और वैसे भी मैंने सच कहा था। ऐमी खडूस हो गई है, रोमांस ना करूं मैं इसलिए बहाने से मुझे घर से बाहर ले जा रही है।

ऐमी गुस्से में अपस्यु का हाथ खींचकर ले जाने लगी और उन दोनों को देखकर श्रेया हंसने लगी। दोनो ऐमी की कार से जैसे ही अपार्टमेंट से बाहर निकले… "क्या हुआ ऐमी।"..

ऐमी:- आरव अभी-अभी किडनैप हुआ है।

अपस्यु:- हम्मम ! और कोई जानकारी।

ऐमी:- सिंगल बीप साउंड भेजा है, मतलब केवल वही किडनैप हुआ है, लावणी नहीं।

अपस्यु:- चलो फिर स्वागत कि तैयारी करते है।

ऐमी:- क्यों नहीं सर, वैसे भी कल के एक्शन ने बहुत निराश किया था, शायद आज कुछ टक्कर के लोग मिले। चलो जरा दुश्मन की जानकारी निकाली जाए।

अपस्यु और ऐमी दोनो ही अपने तीसरे फ्लैट पहुंचे जहां पुरा वर्क शॉप था इनका। ऐमी तुंरत अपने कंप्यूटर के साथ लग गई। सभी जानकारी पुख्ता करने लगी। कुछ बधाएं थी इसलिए ऐमी ने पल्लवी को गोवा एयरपोर्ट पर नजर दिए रहने के लिए बोली। इधर जबतक अपस्यु पुरा बैग तैयार कर चुका था, उसमे सारे जरूरत के प्रयाप्त समान के साथ अपने नए सेल रिप्लेसमेंट लिक्वड (cell replacement liquid) के इंगेजेक्शन बैग में डालकर तैयार हो गया।

ऐमी अब भी कंप्यूटर पर नजर बनाए थी। अपस्यु उसके कंधे से लगकर गाल को चूमते…. "क्या पता चला ऐमी।"..

ऐमी, अपस्यु के ओर मुड़कर अपस्यु के होंठ को चूमती…. "हाई टेक प्रोफेशनल, 12 लोगों की एक टीम है। अभी से 10 मिनट पहले एक प्राइवेट प्लेन में गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरे है।

अपस्यु, भी ऐमी के होंठ को चूमते…. "जो भी है उसे हमारे बारे में सब पता है और शायद कोई सौदा करना चाहते है।"..

ऐमी:- चलो कम से कम आज मुंह छिपाकर तो नहीं लड़ना होगा।..

ऐमी अपना लैपटॉप बैग में पैक करके दोनो आराम से कार में जकार बैठ गए और बस इंतजार, इंतजार, इंतजार… तकरीबन डेढ़ घंटे बाद… "बेबी तैयार हो जाओ, वो लोग पहुंच गए।"

अपस्यु:- कौन से रास्ते पर है ऐमी।

ऐमी:- जिस हिसाब से ट्रैफिक लाइट को हैक करके अपनी तस्वीरें गायब करते चल रहे है, उस हिसाब से तो लग रहा है कि ये लोग अपने पसंदीदा रास्ते पर होंगे।

अपस्यु कार पूरी रफ्तार से भागते हुए… "ऐमी, पल्लवी भाभी अभी सर्वर पर थी क्या बैठी।"..

ऐमी:- हां वही बैठी है।

अपस्यु, पल्लवी को कॉल लगाया… "जी कहिए।"..

अपस्यु:- कुछ नहीं आपसे बात ही नहीं करनी मुझे।

तकरीबन 2 मिनट बाद पल्लवी प्राइवेट लाइन से कॉल लगाती… "आरव को कुछ समय पहले दिल्ली लाया गया है। मै और जेके थोड़े ऑफिशियल काम में फसे है, जल्द ही फ्री होकर हम भी ज्वाइन करेंगे। हमारे आने का इंतजार करना। ऐसा ना हो आने से पहले ही सारा एक्शन खत्म हो जाए।

अपस्यु:- भाभी, वो तो परिस्थिति तय करेगी ना। फिलहाल मैं कुछ कहता हूं ध्यान से सुनना और जल्द से जल्द जवाब देना, अभी हम दोनों ही दिल्ली उत्तराखंड के हाईवे पर है। अब ध्यान से सुनना, 12 लोगों की एक टीम जो काफी हाई टेक है और काफी योजनाबद्ध। दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कहां जाकर हमसे डील कर सकते है।

तकरीबन 5 मिनट बाद पल्लवी एक लोकेशन साझा करती हुई कहने लगी…. "जिस हिसाब से तुमने उनका ब्योरा दिया है, उस हिसाब से तुम्हारे साथ डील वो भेजे गए पते पर ही करने वाले है। इस जगह में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की हाई सिक्यूरिटी है ,जो आज ही सुबह की गई है।..

ऐमी, अपस्यु का चेहरा देखती हुई मंद मंद मुस्कुराने लगी। अपस्यु उसके सर पर एक हाथ मारते हुए… "मै जान रहा हूं तुम क्या सोच रही हो।"..

ऐमी:- अच्छा बताओ मै क्या सोच रही हूं?

अपस्यु:- यही ना की जिसके टेक्नोलॉजी हमने चोरी किए। जिसके ट्रेनिंग मॉड्यूल हमने चुराया, आज वो हमारे सामने होगा वो भी इस बात से अनजान।

ऐमी:- नाह ! मै तो एक्साइटेड हूं यह सोचकर, क्या होगा जब तुम एक एक्सपेरिमेंटल बेबी से भिरोगे, जो तुम्हारा मौसेरा भाई है।

अपस्यु:- फिलहाल तो उसने आरव को उठाकर एक दुश्मन की तरह दस्तक दिया है, तो उससे उसी की भाषा में मिलना है, आगे वक़्त की मर्जी। और हां कुछ रिश्ते आपके माता पिता के जाने के बाद ही चले जाते है, इसलिए वो मेरा भाई नहीं है।..

लोकेशन मिलने के बाद दोनो बस 5 मिनट में अंदर वहां थे। ऐमी वहां के सारे सिक्यूरिटी सिस्टम भेदने के बाद दोनो अंदर पहुंचे। जैसे ही वहां का सुरक्षा चक्र भेदा गया, वैसे ही किडनैपर को खबर लग गई की उसकी जगह पर घुसपैठ हुई है।…
 
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यह साल 2008 था। अपस्यु अपने दर्द को तो कुछ ही दिनों में भुल गया था किन्तु आरव और ऐमी को उबारने में लगभग 1 साल का वक़्त लग गया था। एक दिन अपस्यु अपने मां के ख्याल में डूबा हुआ था और उसे वो घटना याद आयी, जब उसने अपनी मां सुनंदा से अपने ननिहाल के बारे में पूछा था।

इस सवाल पर उसकी मां के छलकते आंसू याद गए और उन आशुओं में एक दर्द की कहानी बयां हो गई, जो उसकी बड़ी बहन कंचन और जीजा वीर प्रताप के साथ घटा था। इस घटना को याद करके अपस्यु के मन में इक्छा सी हो गई अतीत को जानने की। जानने की तलब इसलिए भी थी, की कहीं दोनो बहन के साथ हुए हादसे में कुछ कड़ियां जुड़ी तो नहीं।

अपस्यु पता लगाते हुए पहुंचा था प्रताप महल। प्रताप महल के छानबीन से अपस्यु को पता चल चुका था कि दोनो बहन के साथ बहुत ही बुरा हुआ। हालांकि वजह अलग-अलग थी, लेकिन घटना एक जैसी। अपस्यु खाली हाथ वहां से वापस आ रहा था और तभी लौटते वक़्त एक घटना हुई थी।

कुछ लोग पीछे के भुल-भुलैया में कुछ गुत्थियां सुलझा रहे थे। सफलता भी हाथ लगी और अंत में फिर वही हुआ जिसे देखकर अपस्यु हंसने लगा था। अपनो के हाथ एक धोखा। अपस्यु धोखेबाज को पहचान चुका था और वो कुछ दिन के बाद अपस्यु को दिल्ली में भी दिखा गया। वो धोखेबाज किसी और जगह नहीं बल्कि उसी एथिकल हैकर किशोर के यहां दिखा था, जो उस धोखेबाज को हैकिंग का ज्ञान दे रहा था।

अपस्यु ने बड़ी चतुराई से ऐमी को उस धोखेबाज के पीछे लगा दिया। फिर तो एक के बाद एक कहानी खुलती चली गई। हालांकि अपस्यु के अतीत से इसका कोई संबंध नहीं था, लेकिन अपने मौसेरे भाई दृश्य के धोखेबाज दोस्त के पीछे पड़ने से, अपस्यु के भविष्य कि तैयारी इतनी आगे पहुंच गई की उसके दुश्मन के पहचान होने के बाद वो काफी बौने नजर आने लगे।

अपने भाई दृश्य के इस दुश्मन के पीछा करने से अपस्यु के हाथ 2012 में एक ऐसी वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी हाथ लगी, जिसके दम पर वो किसी भी खुफिया विभाग के नेटवर्क को एसेस कर सकता था, वो भी बिना उसके नजर में आए। ऐसा भी नहीं था कि अपस्यु ने अपने भाई दृश्य से केवल कुछ लिया ही था, जिस प्रकार वो चोरी से उसके कई सारे अच्छे चीजों को अपना रहा था, ठीक उसी प्रकार वो कई ऐसे मौके पर गुप्त तरीके से उसकी मदद भी करते आया था।

साल 2012 में उसके भाई दृश्य को उसके लक्ष्य में सफलता हासिल हुई थी, उसके बाद फिर कभी अपस्यु ने उसकी खबर नहीं रखी, लेकिन उसका दिल जानता था, अनजाने में ही सही एक ना एक दिन उसके रास्ते टकराएंगे। इन सब मामलों में एक बात और सत्य थी, अपस्यु जहां अपने भाई को हीरो मानता था वहीं उसके दिल में दृश्य के लिए काफी नफरत भी भरी हुई थी।

दृश्य अपने बदले के दौर में एक ऐसी कहानी लिख रहा था, जिसके गुस्से के आगे जो आया वो तबाह सा हो गया। जब वो बदला लेने के लिए निकला था तब ना जाने कितने लोगों के खून से अपनी कहानी लिखी थी। इस कहानी को लिखने के क्रम में दृश्य यह बिल्कुल भुल चुका था कि बहुत सारे लोग पैसों के कारन केवल साथ देते है, जिनको मरना जरूरी नहीं था। और यही एक बड़ी वजह थी, जिस कारन अपस्यु दृश्य से उतनी ही नफरत भी करता था और उसके अनाथालय में उन्हीं घटना से अनाथ हुए बच्चे पल रहे थे।

मज़े की बात एक और थी। दृश्य अपने बदले के क्रम में 2 नाजायज बच्चो को भी पीछे छोड़ आया था, जिसमें से एक उसे मिल गया था जो इस वक़्त उसी के पास था। लेकिन अपने जीत के साथ ही वो अपना दूसरे बच्चे को भुल चुका था जो इस वक़्त सिन्हा जी के देख रेख में पल रहा था।

अपस्यु को भली-भांति पता था कि दृश्य को शायद ही कभी पता चले कि उसका कोई मौसेरा भाई भी है, लेकिन अपने इस नाजायज बच्चे का पता लगाकर वो एक ना एक दिन उसके दरवाजे तक जरूर पहुंचेगा, लेकिन ऐसे आरव को उठाकर पहुंचेगा उसे उम्मीद ना थी। अपस्यु और ऐमी को भी उन लोगों के दिल्ली पहुंचने से पहले तक जारा भी अंदाजा नहीं था कि आरव को दृश्य ने उठाया है। लेकिन जैसे ही दिल्ली के ट्रैफिक कैमरे से केवल उनकी इमेज गायब होनी शुरू हुई, अपस्यु और ऐमी को समझते देर ना लगी ये नया दुश्मन कौन है।

जैसे ही अपस्यु ने अपने भाई के सिक्योरिटी सिस्टम को भेदकर जैसे ही वहां कदम रखा, उन लोगों तक भी ये खबर पहुंच गई….

"भाई, लगता है मीटिंग की जगह पर कोई घुसपैठ हुई है।".. दृश्य का कंप्यूटर एक्सपर्ट और उसके छोटे भाई जैसा साथी आरूब मामले की जानकारी देते हुए दृश्य से कहने लगा।

दृश्य:- अरूब, देखो कौन घुसा है।"..

अरुब ने लैपटॉप ऑन करके जैसे ही स्क्रीन पर देखा, आश्चर्य से उसकी आखें बड़ी हो गई, और वो स्क्रीन घुमा कर सबको दिखाने लगा….

"वाउ.. क्या रोमांटिक कपल है लव, कितना पशनेटली नाच रहे है।".. दृश्य की जान अश्क उन्हें देखकर मुस्कुराती हुई कहने लगी।

दृश्य, अश्क को अपनी बाहों में समेटकर… "मै कबसे इतना पैशनेटली तुमसे एक किस्स चाह रहा हूं, उसपर कोई ध्यान ही नहीं है। सच ही लोग कहते है, शादी के बाद प्यार हवा हो जाता है।

अश्क:- इसलिए बाहर प्यार बर्षा रहे थे उसी की एक नाजायज कड़ी तो आज मै समेटने जा रही हूं, और एक परा है अपने दादा-दादी के पास। लव सच-सच बताओ और कितने नाजायज बच्चे है जो मेरी जानकारी में नहीं है।

दृश्य:- हद है क्यूटी, मै जब भी रोमांस के मूड में होता हूं, तुम पुरानी बात छेड़ देती हो।

अश्क:- मेरा मूड था अभी रोमांस का, लेकिन आपके नाजायज अफेयर मुझे याद आ गए और अब मेरा मूड आपसे झगड़ा करने का हो रहा है।

दृश्य:- हां ये अच्छा है। जारा फ्लैशबैक में जाओगी। एक बच्चा क्या 2 बच्चा ले लो, मेरे ओर से एक गिफ्ट, कौन भावनाओ में बहा था। मै किस दौर से गुजर था उस वक़्त तुम्हे याद है क्यूटी। मुझे पता है आज भी वो वाकया याद करके तुम रोती हो, लेकिन क्या ही करे, बुरा दौड़ था वो भी और हम कितने नासमझ।

अश्क, दृश्य में सिमटती हुई…. "जाने दो, बीती बातों को याद करने से केवल दर्द ही मिलेगा। चलो चलकर अपने बच्चे को वापस लाए। ना जाने वो लोग अपने बच्चे को किस तरह का हथियार के रूप में ढाल रहे होंगे…"

दृश्य:- कोई बात नहीं होगी उनसे क्यूटी, यदि हमारा प्रस्ताव मान गए तो ठीक वरना सबकी लाश पर से अपना बच्चा लेकर जाऊंगा।

इधर जबतक अपस्यु और ऐमी एक दूसरे को देखकर मदहोश होकर नाच रहे थे, दृश्य की पूरी टीम पहुंच गई…. "शुक्रिया मेरा वक़्त बचाने के लिए, वरना लगा था कि कहीं मुझे पता बताकर बुलाना ना पड़ता। देखो मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है तुमसे, मेरा कुछ तुम्हारे पास है उसे शांति से लौटा दो। फिर तुम अपने रास्ते और मै अपने रास्ते"… दृश्य अंदर घुसते ही अपस्यु से कहने लगा।

अपस्यु:- कमाल है बिना निजी दुश्मनी के ही तुमने मेरे भाई को उठा लिया। खैर ऐसा क्या है जो तुम्हे मुझसे चाहिए?

मुखिया:- तुम्हारे पास एक लड़का है वैभव वो और तुम्हारे अनाथालय के 60 बच्चे जो वीरदोई के है मुझे वो सब चाहिए।

अपस्यु:- ना ही मै कोई अनाथालय चलता हूं और ना ही मेरे बच्चे अनाथ है। उन सबका पिता तुम्हारे सामने खड़ा है, और जबतक मै जीवित हूं, उन्हें कोई हाथ भी नहीं लगा सकता।

"कितने प्यारे लगते है दोनो साथ में, तुम दोनो अलग रहकर काफी तरप जाओगे, इसलिए दोनो के आत्मा की तृप्ति आज ही एक साथ कर देंगे, और तुम्हारी लाश पर से उन सबको ले जाएंगे। ".. अश्क उस जगह पर हुंकार भरती हुई कहने लगी…

अपस्यु:- जैसा तुम चाहो स्वीटहार्ट। हम दोनों तो कबसे मरने को तैयार है, बस साथ मारने का मजा और भी बढ़ जाता यदि मेरा भाई आरव भी साथ होता…

दृश्य:- मरने वाले की आखरी इक्छा पूरी कर दो आदिल, छोड़ दो उस लड़के को। और कुछ तो डिमांड तो नहीं है…

उसके कहने पर आरव को खोल दिया गया… वो भागकर अपस्यु और ऐमी के ओर आया। उसके आते ही ऐमी उसके चेहरे से लेकर पूरे बदन को व्याकुलता से देखती हुई आरव के गले लग गई…. "तुझे कहीं चोट तो नहीं आयी।"..

आरव, ऐमी से अलग होते… "नहीं आयी भाभी, तुम परेशान ना हो।"…

ऐमी:- बेबी आज मै और आरव है, आप ड्रिंक एन्जॉय करो। हमारे हथियार दो और बैकअप देते रहना।

आरव:- क्या बात कर रही हो। यार ये लोग चिड़ियाघर से भागे जरूर लगते है लेकिन सभी प्रोफेशनल है, अपस्यु को भी बोले आए।

अपस्यु, दोनो के बैग से रॉड निकालकर फेकते हुए…. "मै हूं ना, बस जो भी करना खुद पर काबू रखकर।"… फिर अपस्यु अपना बॉटल निकालकर दृश्य से कहने लगा… "अब क्या मुहरत का इंतजार कर रहे हो, आ भी जाओ।"..

जैसे ही आरव और ऐमी रॉड लेकर अपनी पोजीशन लिए, उसे देखकर दृश्य की टीम से आदिल कहने लगा…. "ये तो सिंडिकेट का लगता है। हमारे जैसी फाइटिंग स्टाइल।"..

दृश्य:- हां तो देर किस बात की है आदिल इन्हे भी उनके गुरुओं के पास जल्दी पहुंचा दो। चलकर फिर उन बचे हुए वीरदोयी से भी तो हिसाब लेना है।

आदिल ने अपने 2 लोगों को इशारा किया और वो लोग भी उन्हीं की तरह रॉड लेकर मैदान में उतर गए। वो दोनो तेजी से दौड़ते हुए ऐमी और आरव की ओर बढ़ने लगे। आरव इशारे से ऐमी को अपनी पोजीशन पर रुकने के लिए कहा और खुद तेजी से दौड़ता हुए आगे बढ़ने लगा।

जो 2 लोग दौड़ते आ रहे थे उनमें से एक अपने घुटने पर स्लाइड करते हुए आरव के पाऊं को निशाना बनाया, तो दूसरा हवा में उछलकर आरव के सर को। आरव उनकी नीति देखकर मुस्कुराए बिना नहीं रह सका और अगले ही पल आरव 360⁰ बैंक फ्लिप लेकर 3 फिट पीछे आ गया।

जो आदमी हवा से उछलकर सर को निशाना बना रहा था, वो अपना खाली वार करने के बाद सीधा आरव के सामने गिरा, जिसपर आरव ने बिना कोई रहम दिखाए अपना रॉड उसके कनपट्टी पर चला दिया और वो आदमी वहीं बेहोश।

दूसरा जो स्लाइड करते हुए आ रहा था वो सीधा ऐमी के पाऊं के पास रुका। जबतक वो खुद को दूसरे वार करने के लिए तैयार करता, उससे पहले ही ऐमी ने एक लात उसके मुंह पर दिया और वो भी बेहोश होकर किनारे हो गया।

इस तरह के लड़ाई की उम्मीद दृश्य को कतई नहीं थी। उसने आदिल के ओर इशारा किया और आदिल सहित सभी 6 लोग मैदान में कूद पड़े। तभी उन 7 में से एक लड़ाकी, अपने कपड़ों से कई सारी चाकू निकालकर लगातार फेकने लगी।

उन चाकुओं की बरसात के पीछे से, 6 लोगों की टीम भी आगे बढ़ने लगी। इधर जैसे ही चाकू फेकने शुरू हुए, आरव और ऐमी ने अपने दोनो हाथ के 4 फिट के रॉड को बीच से जोड़ते हुए उसे 8 फिट के 1 रॉड में तब्दील कर दिया और बीच से पकड़कर इतनी तेजी के साथ गोल-गोल घुमा रहे थे कि ऐसा लग रहा था कोई पंखा नाच रहा हो। सभी चाकू टकराकर दाएं बाएं गिर रहे थे।

"क्या निम्मी तुझे अपने पास बुलाकर नहीं सिखाई तो तूने तो वफादारी ही बदल ली।"… ऐमी अपने रॉड घूमती हुई कहने लगी…

तभी अपस्यु अपना एक पेग खिंचते हुए, पास परे 2 चाकू को उठाया और दोनो चाकू इस तेजी से निम्मी के उपर फेका की जबतक निम्मी को पता चलता उसे बचना है, उसके दाएं और बाएं दोनो हाथ में चाकू घुस चुका था। जैसे ही निम्मी का खून गिरा, वैसे ही पूरी टीम ठहर गई और निम्मी कर्राहते हुई अपना मस्क उतारती हुई कहने लगी…. "वफादारी तो शुरू से जैसी थी वैसी ही है, बस आपसे बहुत कुछ सीखने की चाहत थी है और सदा रहेगी।"

निम्मी को अप्पू ने थामा। अपने साथी का खून गिरते देख सब लोग आग बबूला हो गया, इसी बीच अश्क गुस्से में खड़ी हुई, लेकिन दृश्य ने उसका हाथ पकड़कर इशारों में इंतजार करने कहने लगा..

सभी 5 लोग आदिल की अगुवाई में ऐमी और आरव को घेरे खड़े थे। सबके हाथ में एक ही जैसे रॉड और बस फर्क साइज का थोड़ा सा। आते ही सभी एक साथ टूट परे। वहीं ऐमी और आरव के बीच नज़रों का कुछ संवाद हुआ और ऐमी 2 स्टेप पीछे लेकर तेजी से दौड़ी, आरव ने जल्दी से अपना हाथ आगे किया।

ऐमी दौड़कर हवा में आरव के हाथ पर तकरीबन 4 फिट उछली, जहां आरव ने उसके उछाल को नई गति देकर तकरीबन 8 फिट उछाल दिया। ऐमी हवा में फिलिप करती, उनके घेरे के पार खड़ी हो गई। सभी लोगों का ध्यान जैसे ही भटक कर पीछे गया, आरव के अपने रॉड की मार से उन्हें अवगत करवा दिया।
 
Update:- 115

ऐमी दौड़कर हवा में आरव के हाथ पर तकरीबन 4 फिट उछली, जहां आरव ने उसके उछाल को नई गति देकर तकरीबन 8 फिट उछाल दिया। ऐमी हवा में फिलिप करती, उनके घेरे के पार खड़ी हो गई। सभी लोगों का ध्यान जैसे ही भटक कर पीछे गया, आरव के अपने रॉड की मार से उन्हें अवगत करवा दिया।

जैसे ही आरव का वार शुरू हुआ यह लोग भी हरकत में आए और आरव पर हमला करना शुरू कर दिया। इधर ऐमी कूदकर अपनी पोजिशन लेती ही अगुवाई कर रहे आदिल पर अपना वार की। यह वार इतना तेज और खतरनाक था कि आदिल बचाव करते हुए 2 फिट तक पीछे गया।

इतने में ही अपस्यु ने अपने हाथो की रस्सी को बड़ी तेजी के साथ उछालकर आदिल के पाऊं में फसा दिया और फसाकर खींच दिया। अभी वो ऐमी के वार से बचकर 2 फिट पीछे आया था और पुरा ध्यान सामने ही था। जैसे ही पाऊं में रस्सी फसी उसने अपना संतुलन खोया और इतना वक़्त काफी था आरव और ऐमी के लिए की अगुवाई कर रहे मुखिया को टारगेट कर ले।

आरव अपने ओर से दो लोगों का तेज वार अपने कंधे पर झलेकर थोड़ा आगे जगह बनाया। वहीं ऐमी तेजी के साथ अपने दोनो पाऊं फिसलाकर 180⁰ की लाइन बनाती नीचे बैठी और 2 लोग जो उसकी ओर अपना रॉड उसके सर पर चला चुके ये उसका वार खाली करती, दोनो के नीचे पाऊं के ज्वाइंट पर ऐसा प्रहार की, दोनो वहीं अपना पाऊं पकड़ कर नीचे बैठ गए।

ऐमी और आरव के टारगेट, लड़खड़ाता हुआ वह आदिल था जिसे पहले तो 1 रॉड आरव का लगा, जो कि उसके कानपट्टी पर था और जैसे ही वो नीचे गिरने लगा ऐमी ने अपना एक रॉड उसके जबड़ों पर चिपकाकर, रोल करती हुई पाऊं को हवा में ले गई और बॉडी शॉट देते उसके मूर्छित शरीर पर प्रहार करती खुद से दूर कर दी।

दृश्य और अश्क इनके लड़ाई का तरीका देखकर दातों तले उंगलियां दावा ली। 3 लोग कुल खड़े बचे थे, ऐमी और आरव अपने पोजिशन पर खड़े होकर, उनको देखकर मानो ऐसे हंस रहे थे जैसे वो उन्हें आगे बढ़कर सामना करने का निमंत्रण दे रहे हो।

तभी अश्क खड़ी हुई और अपने कपड़ों से छोटे-छोटे बॉम्ब निकलती वहां के फ्लोर पर पटकती हुई धुएं करती तेजी से आगे बढ़ने लगी…. अपस्यु अबतक अपने प्यारे से कॉकटेल का 5 जाम खींच चुका था। अपस्यु के इशारा मिलते ही दोनो आकर उसकी जगह बैठ गए और अपस्यु खड़ा होकर बीच में आया।

धुएं कि आड़ में उनके 3 ट्रेंड जो खड़े थे, वो हमला की मंशा से आगे बढ़े, जिसे दिशा वहां का कंप्यूटर एक्सपर्ट अरुब बता रहा था। उनलोगों ने सोचा ये छोटा से ट्रिक और धुएं कि आड़ में अपस्यु को मार सकते है।

लेकिन ये अपस्यु था, जिसके सुनने और हवा को परखने की क्षमता इतनी अद्भुत थी कि उनसे अबतक ये रू-बरू नहीं हुए थे। वो लोग बेफिक्र होकर आगे बढ़े और बस धुएं के अंदर उनकी चींख ही गूंजकर रह गई। इधर पीछे से वह अश्क भी वहां पहुंच चुकी थी और जैसे ही धुएं छांटा नजारा ही कुछ और था।

अश्क को अपस्यु ने पीछे से जकड़ रखा था और बड़ी तेजी के साथ जैसे ही अपस्यु ने उसका मास्क उतारा, तभी वहां का धुआं छंट चुका था। दृश्य को आभाष हो चला था कि उन लोगों ने अपने दुश्मन को थोड़ा कम आकां, और जिसे इस वक़्त अपस्यु ने जकड़ रखा था वो थी दृश्य की जान से ज्यादा प्यारी पत्नी।

जबतक दृश्य यह साबित करता की वो इन सबका मुखिया क्यों है, उससे पहले ही अपस्यु अश्क का गर्दन घूमाकर, उसके होंठ से होंठ लगाकर एक छोटा सा चुम्बन लिया और झटक कर उसे साइड कर दिया। साइड करने के तुरंत बाद वो ऐमी और आरव को देखा और नज़रों के छोटे से इशारे से बहुत कुछ समझा चुका था।

जैसे ही अपस्यु अपनी नजर की भाषा समझाकर आगे मुड़ा, ठीक उसी वक़्त ऐमी और आरव के मुंह खुले रह गए। गुस्से में पागल दृश्य ने इतनी तेजी के साथ अपना कांधा अपस्यु के शरीर से ऐसे टकराया, की अपस्यु 6 फिट दूर जाकर गिरा।

अपस्यु जब खड़ा हो रहा था तब वो खांश रहा था और मुंह से उसके खून भी निकल रहा था। ऐमी अपने लैपटॉप से टक्कर का तुरंत आकलन की और जो स्क्रीन पर था वो चौंकाने वाले तथ्य थे। ऐमी और आरव तुरंत हरकत में आते हुए बैग पर लपके और दोनो अपस्यु के इशारे को समझकर बस उसी पर काम कर रहे थे।

इधर गुस्से में दृश्य जैसे हल्क बाना हुआ था। अपस्यु ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ था कि हवा में गति को महसूस करते वो तेजी के साथ साइड हुआ। ऐसा लगा जैसे कोई पागल सांढ सिंघ मारने पर उतारू है। अपस्यु पुरा डिफेंस मोड पर आ चुका था। उसने 50 रॉड चला दिए होंगे, लेकिन दृश्य के शरीर पर तो जैसे कुछ असर ही नहीं हुआ हो।

गुस्से में पगलाया दृश्य, अपस्यु को दोनो हाथों से हवा में उठा लिया और फुटबॉल की भांति उछाल कर फेंक दिया। अपस्यु हवा में फ्लिप करते नीचे आकर खड़ा हुआ। एक बार फिर पगलाया दृश्य, अपस्यु के ओर बड़ी तेजी के साथ बढ़ा और एक हाथ से उसका गर्दन पकड़ कर हवा में 5 फिट उठा दिया। उसके आंखों में जैसे कोई सैतान नजर आ रहा था।

वहीं अपस्यु मौत की इस पकड़ में जब आया तब वो मुस्कुराते हुए उसके पकड़ को महसूस कर रहा था। ऐमी ने जैसे ही इधर से सिग्नल दिया अपस्यु थोड़ा और मुस्कुराया और चौंकाने की वहीं पुरानी प्रक्रिया शुरू हो गई। अपस्यु सामने वाले के शरीर पर मार झेलने की अभूतपूर्व क्षमता को महसूस कार ही चुका था इसलिए वो पाऊं से कनपट्टी पर हमला करने के बदले बड़ी सफाई से दृश्य की छोटी उंगली को तोड़ डाला।

दृश्य अचानक ही अपना हाथ झटका और अपस्यु तुरंत उसकी पकड़ से निकलकर खांसते हुए वहीं बैठ गया। दृश्य के ठीक चार कदम आगे अपस्यु बैठकर खुद को सामान्य करने में लगा था। पगलाया दृश्य फिर से पागलों कि तरह अपस्यु को मारने कि कोशिश करने लगा, लेकिन वो चाहकर भी अपने कदम हिला नहीं पा रहा था। वो अपने हाथ आगे बढ़ाने की कोशिश करने लगा, लेकिन कुछ कर नहीं पाया। चीखना और चिल्लाने की कोशिश करने लगा किन्तु कोई आवाज़ निकल नहीं रही थी।

दृश्य एक एक्सपेरिमेंटल बच्चा था, जिसकी क्षमता का ज्ञान ऐमी, अपस्यु और आरव को उसी दौरान हो चुका था, जिस दौरान दृश्य के धोखेबाज दोस्त के पीछे ऐमी को लगाया गया था। दृश्य तो किसी प्रोफेशनल को यहां सबक सिखाने के हिसाब से आया था।

किन्तु अपस्यु को जब यह इल्म हुआ कि किसी प्रयोग से किसी इंसान की क्षमता सामान्य इंसान की तुलना में 200 गुना बढ़ाई जा सकती है, तो फिर यह भी संभव था, जब वो अपने दुश्मनों से भिड़ने निकले, तो अपस्यु को 200 नहीं बल्कि 10000 गुना ज्यादा क्षमता वाले किसी काल से ना भिड़ना पर जाए। बस इसी सोच के साथ लगभग 1 साल की कठिन परिश्रम करके, इन्होंने माइक्रो सब्सटेंस का इजाद किया जिसके परिणाम काफी कमाल के थे। इसी माइक्रो सब्सटेंस की मदद से ऐमी और आरव ने मिलकर दृश्य को अपनी जगह पर ही लॉक कर दिया।

ऐमी और आरव ने जैसे ही दृश्य को फंसाया, दोनो उछलने लगे, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर की मेहमान नहीं थी। खुशी से उछलकर जब आरव और ऐमी ने उस बड़े से हॉल के दूसरी ओर का नजारा देखा, दोनो एक साथ बोल परे… "उम्मीद से परे, ये खतरनाक है।"… हुआ कुछ यूं कि जैसे ही अपस्यु ने अश्क को होंठ लगाया, वो भी उतनी ही पागल हो गई जितना दृश्य था, साथ में उसके कंप्यूटर एक्सपर्ट का भी पूरा दिमागी संतुलन बिगड़ चुका था।

अश्क और आरुब अपने लैपटॉप पर बैठकर कमांड पर कमांड देने लगे और देखते ही देखते वहां पर कई सारी ब्लास्टिंग तितली डिवाइस और साथ में बुलेट उगलता एक ड्रोन उस जगह पहुंच चुका था।… "अबे भाग उस हल्क के पीछे सभी वरना इसकी पगलाई बीवी और मुंहबोला भाई मिलकर, हमे नरकवासी बाना देंगे।"…

तुरंत ही तीनों आकर दृश्य के पीछे छिप गए। उन्हें पीछे छिपते देख अश्क ज़ोर से चिल्लाती हुई कहने लगी….. "भागकर लव के पीछे कहां छिप गए चूहे, दम है तो सामने आओ।"

आरव:- अरे भाभी आप तो कुछ ज्यादा ही नाराज हो गई, कहां आप भी एक किस्स के बदले हमारी जान लेने पर तुली हो। वैसे भी नीचे फर्श पर आपकी पूरी टीम बिछी हुई है, इन्हे हॉस्पिटल में एडमिट तो करवा दो, कहीं कोई टपक ना जाए।

आरव की बात सुनकर अरुब को भी होश आया कि उसके साथी घायल पड़े है, तुरंत ही उसने सबको एक बड़ी सी वैन में लोड करवाकर हॉस्पिटल भेजने का इंतजाम करवाने लगा और इधर तबतक अश्क, गुस्से में बौखलाए, आरव को जवाब देने लगी…. "खबरदार जो मुझसे कोई रिश्ता जोड़ा तो, अभी बाहर निकल चूहे।'

आरव:- रिश्ता तो हमारा बहुत पुराना है, भले आप मानो की ना मानो। फिलहाल इतना ही कहूंगा, यदि आपको मेरे भाई का किस्स अच्छा नहीं लगा तो अपने पति को कह दो वो मेरे भाई की होने वाली पत्नी को किस्स कर ले। चुम्मा का जवाब चुम्मा से दो ना, कहे मारने पर तुली हो।

आरव और अश्क के बीच बातों का द्वंद चल रहा था इसी बीच जेके का संदेश अपस्यु के पास पहुंचा। संदेश में साफ लिखा था….. "नेशनल सिक्योरिटी वालों को इस जगह पर भारी हथियार होने के संकेत मिल रहे है। पूरी फोर्स तुरंत ही पहुंचने वाली है।"..

अपस्यु ने ऐमी को इशारा किया कि तुरंत ही खेल को विराम लगाए। ऐमी हालात को समझती हुई, दृश्य के कंप्यूटर एक्सपर्ट को एक छोटा संदेश भेजकर तुरंत ही दृश्य को उस माइक्रो सब्सटेंस से आज़ाद की। जैसे ही दृश्य कैद से आजाद हुआ पागलों कि तरह उन्हें मारने के लिए अपना हाथ बढ़ाया ही था…. "लव नहीं, बस बहुत हुआ। इन्हे अपने साथ लेकर चलो।"

दृश्य, अश्क की बात सुनकर उसकी ओर देखने लगा। अश्क ना में अपना सर हिलती हुई उस कुछ ना करने का इशारा करने लगी और इन सबको साथ लेकर चलने के लिए अपने हाथ जोड़ ली। हालांकि अपस्यु का कोई इरादा नहीं था इन लोगों के साथ जाने का, लेकिन फिर भी समय की किल्लत और गायब होने की जल्दी में, इन्हे भी दृश्य के साथ उसके हैलीकॉप्टर में बैठना परा।

आलम यह था कि वो तीनो एक ओर बैठे थे और अपस्यु अपने लोगों के साथ ठीक उनके सामने बैठा था। दृश्य अब भी खुन्नस खाए…. "क्यूटी मुझे रोक क्यों ली। इनका सिना चीरकर मै दिल निकालने वाला था।"

अरूब अपना लैपटॉप दृश्य के ओर घूमते हुए सामने के स्क्रीन का नजारा दिखा दिया, जहां लिखा हुआ था…. "द डेविल गैंग।".. जैसे ही दृश्य के आंखों के सामने यह नजर आया, सवालिया नज़रों से वो तीनो के ओर देखने लगा।

दृश्य की ऐसी उठती नजर लाजमी थी, क्योंकि "द डेविल गैंग" एक ऐसा मददगार साथी था इनके सफर का, जो बिना सामने आए अरूब को कंप्यूटर भाषा की उन गहरायों तक पहुंचाया जहां से उसे कुछ भी करने का विश्वास पैदा हुआ। एक ऐसा साथी जिसे अरुब ने जब भी याद किया मदद करके ही गई थी।

इन्हीं की मदद से अरूब ने कई सारे कठिन फायरवॉल को भेदना सीखा था, यहां तक कि सिंडिकेट की नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी को भी बड़े आसानी से ऑपरेट करना सीखा था। हालाकि सिंडिकेट के उसी टेक्नोलॉजी को ऐमी ने चुरा भी लिया था, जिस बात का इल्म इन्हे अब तक नहीं है।

अपस्यु, दृश्य के नजर में उठते सवाल का जवाब देते हुए कहने लगा…. "जिसके लक्ष्य बड़े हो उन्हे मदद मिलती रहती है। हम नहीं भी होते तो भी आप अपने जंग में सफल होते ही। हम तो आपके बड़े से मकसद की सफलता के एक बहुत ही छोटे जरिया मात्र थे।"..

दृश्य:- तुम्हे शुरू से पता था कि हम कौन है और यहां क्यों आए है?

अपस्यु:- शुरवात से तो नहीं लेकिन दिल्ली में पहुंचकर जो आपने ट्रैफिक सीसीटीवी को हैक किया, उससे मुझे समझ में आ गया था कि आरव को किसने किडनैप किया है। रही बात "क्यों आने कि", तो मैं उम्मीद कर रहा था अपनी मुलाकात 2012 में ही हो जानी चाहिए थी, आप 2 साल देरी से आए।

दृश्य:- फिर भी तुमने मुझे मेरे बच्चे को सौंपने के बदले लड़ाई चुना, ऐसा क्यों?

अपस्यु:- वो इसलिए क्योंकि उस वक़्त मैंने सही ही कहा था, ना तो मै कोई अनाथालय चलता हूं और ना ही उन बच्चों का अभिभावक इतना कमजोर है। आप सही रास्ता चुने या गलत, ना तो मै उन बच्चो को छोड़ सकता हूं जो आपके बदले कि राह में यतीम हो गए और ना ही वैभव को, जिसकी मां अपने लोगों के अत्याचार से दम तो तोड़ दी, लेकिन अपने बच्चे को उसने कभी किसी गलत हाथ में नहीं सौंपा।

अपस्यु की बात सुनकर कुछ पल दृश्य ख़ामोश रहा फिर जिज्ञासावश पूछने लगा…. "क्या जो वीरदोयी के बच्चे तुम्हारे पास है वो अनाथ है, और क्या तुम उनकी क्षमता को जानते हो?"
 
Update:- 116

अपस्यु:- डॉक्टर भार्गव, जिसने अपने प्रयोग से उनके पिता में सामान्य मनुष्य से 20 गुना ज्यादा कि क्षमता निहित किया और डॉक्टर सांतनु ने आप में आम मनुष्य की तुलना में 200 गुना ज्यादा क्षमता दिया था। मेरे बच्चे उन्हीं क्षमता के साथ पैदा हुए, लेकिन वो कोई हथियार नहीं जिसे कोई भी अपने मकसद के लिए इस्तमाल करे। सभी आम मनुष्य होंगे जो आम जीवन बिताएंगे। जिनमे बदले की भावना ना हो अपितु बौद्धिक विकास से न्याय करने की क्षमता हो।

अश्क:- ओय ये बताओ कि मेरे हॉर्स (hourse) के हॉर्स पॉवर को तुम लोगों ने कैसे सिज कर लिया।

ऐमी:- जब हमने देखा प्रयोग से किसी इंसान के अंदर 200 गुना क्षमता बढ़ाई जा सकती है, उसी वक़्त हमने ठान लिया था कि इन क्षमता वालों को रोकने के उपाय भी होने चाहिए। इसलिए हमने अपनी प्रोग्रामिंग 10000 गुना क्षमता वाले मनुष्य को ध्यान में रखकर किया, और नतीजा आपके सामने है।

दृश्य, ऐमी का हाथ थामते…. "सवालों के घेरे में एक अरमान कहीं दब कर रह गए थे।"..

ऐमी,अपनी आखें बड़ी करती… "सर कहीं आप इस छछूंदर की बात को सीरियसली लेकर मुझे किस्स तो नहीं करने की सोच रहे।"..

जैसी ही यह बात अश्क के कानो तक गई…. "मिस्टर दृश्य प्रताप सिंह ये मै क्या सुन रही हूं। भूलना मत की मै यही हूं, और साथ में यह भी भूलना मत क्या हुआ था रचना मैडम और वर्षा के केस में।"..

दृश्य:- अरे मेरी बुलेट हर वक़्त फायर होने के लिए क्यों तैयार रहती हो, जिस तरह से इसने मदद की हमारी, जिस तरह से ये लड़ती है और इसका नाम भी ऐमी है।

अश्क:- हां दृश्य इसका नाम भी ऐमी है, शायद हम ही इंसाफ नहीं कर पाए अपनी ऐमिं के साथ, जिसे सब कुछ मिलना चाहिए था वह हमारे लिए सब कुछ त्याग गई।

दृश्य, अश्क को खुद में समेटते हुए…. "रोकर याद ना करो ऐमी को वरना उसे भी रोना आ जाएगा। और देखो जब वो इस जहां से गई थी हमारे लिए अपने जैसे ऐमी को मदद के लिए पीछे छोड़ गई थी।'..

ऐमी, अपस्यु और आरव को सवालिया नज़रों से ऐसी देखी मानो वो समझने कि कोशिश कर रही हो। अारूब ऐमी के आश्चर्य को विराम देते हुए ऐमी की पूरी कहानी बता दिया।

एक दूसरे से बातों के दौरान सभी राजस्थान पहुंच चुके थे। दृश्य सबको प्रताप महल में लेकर चला आया। कंचन और वीर प्रताप को जैसे ही पता चला की दृश्य और अश्क आए है, वो दोनो भागकर अपने बेटे और बहू से मिलने पहुंचे। दरवाजे पर ही 10 मिनट रोककर पहले तो गीले-शिकवे दूर होते रहे, फिर हर कोई प्रताप महल के नीचे दरबार में बैठक लगाने पहुंचे।

कंचन की नजर दृश्य के साथ आए मेहमानों पर गई और वो दृश्य से पूछने लगी ये सब कौन है। अपस्यु और ऐमी कंचन के पाऊं छूते हुए, एक छोटा सा परिचय दिया और जाकर बैठ गए, किन्तु आरव ने जैसे ही कंचन के पाऊं छुए, उसके आशु छलक आए।

खड़ा होकर आरव अपने छलकते आशु के साथ कंचन को देखने लगा और अचानक ही उसके गले लगकर, कंचन के गलो को चूमते हुए आकर अपस्यु और ऐमी के पास बैठ गया। उस माहौल में अभी-अभी क्या हुआ किसी को भी समझ में नहीं आया। कंचन चिंखकर दृश्य को अपने पास बुलाई… इस से पहले की आरव की हरकत पर वो कुछ बोल पता, कंचन गुस्से से लाल आखें उसे दिखाती हुई एक थप्पड़ जर दी।

वह थप्पड़ इतनी तेज थी कि उस दरबार में थप्पड़ की गूंज आखिर में काम कर रहे लोगों ने भी सुनी… दृश्य जब ठीक से देखा तो कंचन के आंखों में भी आशु थे और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आरव की हरकत में इतना बुरा मानने जैसा क्या था।

"कंचन क्या हुआ, इतने दिन बाद दृश्य यहां आया और तुम उसे ऐसे थप्पड़ मार रही, वो भी एक छोटे से लड़के के प्यार दिखाने कि वजह से।" … कंचन के पति वीर प्रताप कंधों से पकड़कर कंचन से कहने लगे। लेकिन ऐसा लग रहा था कंचन ने उसकी बात सुनी ही नहीं। वह एक बार फिर दृश्य को उतनी ही तेजी से थप्पड़ मारती हुई, अपने कदम धीरे-धीरे आरव और अपस्यु के ओर बढ़ा दी।

कंचन जैसे-जैसे अपने कदम बढ़ा रही थी, उसके आशुओं का सैलाब उतना ही बढ़ता जा रहा था। वह जैस ही अपस्यु और आरव के पास पहुंची, टूटकर वहीं उनके बीच बैठ गई। बेसुध सी सामने देखती हुई पूछने लगी… "अपनी मां को साथ नहीं लाया।"

कंचन की आवाज़ धीमी थी, किसी को समझ में नहीं आया वो क्या बोली, लेकिन कंचन कि आवाज़ अपस्यु और आरव के दिल तक जरूर पहुंची थी। दोनो भाई, कंचन के उस बहन प्रेम को महसूस कर रहे थे, जिसके बच्चों कि आखें बता गई की वो किसके बच्चे है। अपस्यु अपने एक और बिछड़े परिवार से मिलने की खुशी में मुस्कुरा रहा था, वहीं आरव अपनी मासी के लिए तो पहले से आशु बहा चुका था, इसलिए वो सीधा कंचन की गोद में लेट गया और हाथ बढ़कर कंचन के आशु पोछने लगा।..

दृश्य, अश्क और वीर प्रताप तीनों ही दुविधा में बस कंचन को देखे जा रहे थे…. "ऐसे सब घुर क्या रहे हो। एक मेरा बेटा है जिसे 2 साल पहले कहीं थी अपनी मासी का पता लगाओ कहां है इस वक़्त, लेकिन ये दुनियाभर के लोगों का पता अपने उस कंप्यूटर से लगा लेता है.. एक मेरी बहन और उसके परिवार का पता नहीं लगा पाया। एक ये दोनो है, इन्हे अपनी मासी के भी बारे में पता है, और अपने भाई के बारे में भी। क्यों रे सोनू, मोनू"..

अपस्यु:- मासी आप हमसे मिल चुकी है पहले क्या?

कंचन:- हां बेटा बिल्कुल। तुम दोनो जब पैदा लिए थे तब तुम दोनो को सबसे पहले मैंने ही अपने गोद में उठाया था। वो तो हमारे सुहाने दौड़ थे रे पागल। मै और वीर उस वक़्त यूएसए में थे और सुनंदा, चन्द्रभान के साथ यूरोप में थी। तू जब पैदा हुआ था तब मैने ही तो नाम दिया सोनू और मोनू। सुनंदा की वही एक आखरी अच्छी याद आखों में है, उसके बाद हम दृश्य का पांचवा जन्मदिन मनाने भारत आए हुए थे। तब से लेकर आज तक फिर दोबारा कभी मुलाकात नहीं हुई। जल्दी बता ना कहां है मेरी बहन।

अपस्यु:- मां और पापा की एक हादसे मै मौत हो गई।

पहले बिछड़े परिवार के मिलने की खुशी में रोई कंचन, अब अपने बहन के गम में टूटकर रोनी लगी। फिर कभी ना मिल पाने का दर्द आखों से छलक आया… अपस्यु मुसकुराते हुए कंचन को शांत करवाते हुए कहने लगा…. "ऐसे रोकर आप मेरी मां को याद करोगी मासी, तो आज रात वो मेरे कमरे में भूत बनकर आएंगी और मुझे दौरा-दौरा कर मारेगी। इसलिए जो चला गया उसे हंसकर याद कीजिए।"…

कंचन आरव के सर पर हाथ फेरती, दोनो को बारी-बारी देखती हुई कहने लगी…. "तेरी आखें बिल्कुल सुनंदा जैसी है।"..

आरव:- ये तो हमे भी पता है मासी, रोज ही सुलेखा आंटी मुझसे ये कहती है।

कंचन:- सुलेखा, हीहीहीही.. उसका नाम सुनकर ही हंसी आ जाती है। तुम जानते हो जैसे रामायण में भगवान श्री राम थे और उनका भक्त हनुमान, ठीक वैसे ही सुलेखा के लिए सुनंदा थी। वो तो पूरी भक्त थी।

ऐमी, जिज्ञासावश….. "दोनो के बीच की कहानी क्या थी?"..

कंचन:- अरे मैंने अपनी बच्ची पर तो ध्यान भी नहीं दिया। तेरी छोटी..

अपस्यु, बीच में ही बात काटते हुए…. "मासी ये है ऐमी, आपकी होने वाली बहू।"..

कंचन:- हाएं ! ये कब हुआ.. मै तो समझी की ये तेरी बहन है।

कंचन की बात सुनकर सभी लोग हंसने लगे। तभी कंचन ऐमी के कपड़ों को देखती हुई कहने लगी…. "आज क्या घर से लड़ाई करने निकली थी जो ऐसे चुस्त कपड़े पहन कर चली आयी, अरे यहां तो सबने एक जैसे कपड़े पहन रखे है। दृश्य तू तो अपना बच्चा किसी से लेने गया था ना… फिर ये लोग लड़ाई के कपड़ों में। बहू (अश्क) आगे आकर सारा मामला मुझे अभी के अभी समझाओ।"..

अश्क सामने आकर खड़ी हो गई और सारा मामला समझती क्या, वो सीधा वीडियो ही चलाकर दिखा दी… जैसे-जैसे वीडियो आगे बढ़ने लगी, कंचन तीनों के चेहरे घूरने लगी। और अंत आते-आते दृश्य और अश्क को देखकर हंसती हुई कहने लगी….. "मतलब तुझसे 4-5 छोटे तेरे भाइयों ने धूल चटा दी। और मेरी ये होने वाली बहू ऐमी तो काफी खतरनाक है। शर्म करो तुमलोग 12 लोग गए थे और 3 लोग का मुकाबला नहीं कर पाए।"..

दृश्य:- मां बहुत चालाक है तीनों। याद है जीजू क्या कहते है हमेशा, बल पर छल भारी पड़ता है। आज तक सभी गद्दार पीछे से छल करते थे, जिसका तोड़ हम बड़ी आसानी से निकाल लेते थे, ये तो सामने सिना तानकर हमसे छल कर गए और हमे पता तक नहीं चला।

सभी लोग कई अरसे बाद मिल रहे थे। ऐमी को अश्क के साथ भेज दिया गया और दोनो बहू को पूरे सज संवर के आने के आदेश मिले। वहीं अपस्यु ने आरव को गोवा वापस छोड़ने की बात कही और वहीं से कंचन को पता चला कि सुलेखा की बेटी लावणी और आरव का विवाह भी तय हो चुका है।

सुलखा एक बार और चर्चा में थी। कंचन सुलेखा और सुनंदा के वो किस्से भी कह गई, जो आज तक अपस्यु और आरव के लिए राज बने हुए थे। गांव के किसी आईयाश के कुकर्म का नतीजा था, जो सुलेखा पैदा हुई थी। उस मासूम के पैदा होने के खबर ने ही पूरे गांव को चौंका दिया था।

उसकी मां को तो सबने मार दिया और सुलेखा को एक ब्राह्मण परिवार ने अपने पास पालने के लिए रख लिया। सुरवती दिनों से ही जब वो काम करने लायक हुई तबसे उसे काम करवाया जाने लगा था। चूंकि उस ब्राह्मण परिवार को उन्हीं के पूर्वजों ने बसाया था इसलिए सुनंदा का उस घर में आना जाना लगा रहता था। यहीं से सुनंदा और सुलेखा की दोस्ती की कहानी शुरू हुई थी।

दोनो साथ खेले, इस लालच में सुनंदा, सुलेखा के आधे काम कर दिया करती थी और वहीं से दोनो खेलने निकल जाय करती थी। बातों के दौरान सुनंदा की हिम्मत की वो दास्तां भी पता चली जिसे वो चुपचाप सुलेखा के उज़्ज़वल भविष्य के लिए कर गई और किसी को कानो कान खबर तक नहीं हुई थी।

एक तो सुलेखा के मां का सच गांव में किसी से छिपा नहीं था, ऊपर से सुलेखा का सुंदर होना, उसके लिए काल बनता जा रहा था। बढ़ती उम्र के साथ कईयों के नजर में भी बदलाव आने शुरू हो चुके थे और कई छुब्द मानसिकता के रोगी सुलेखा को नोचने की फिराक में थे। अलहर सा बचपन बीतने के बाद सुलेखा जवानी के दहलीज पर कदम रखी थी और आए दिन उसके साथ कोई ना कोई जबरदस्ती छेड़-छाड़ कर ही देता।

सुनंदा के साथ हंसने और बोलने वाली सुलेखा, अपने बातों से सबको हंसने पर विवश करने वाली सुलेखा, अब बिल्कुल शांत-शांत रहना शुरू कर दी थी। बाहर तो किसी तरह बचकर वो चली भी आती लेकिन 24 घंटे घर के अंदर तकती नज़रों से कौन बचाए।

सुनंदा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। उसकी सबसे प्यारी साथी को वो घुटते देख रही थी। उस वक़्त सुनंदा ने अपनी बहन की घुटन और पिरा को भी बड़े नजदीक से देखा था, और फिर उसने ठान लिया कि बस बहुत हुआ अत्याचार। क्या कलेजा था उसका। सुनंदा को पता था कि एक बार फटे कपड़े गांव वालों के नजर में आ गए, फिर कपड़ों के साथ इज्जत भी फट जाती है। यह बात सुनंदा को भाली भांति पता थी, लेकिन केवल सुलेखा को बचाने के लिए वो एक दिन उस घर से रोती हुई, फटे कपड़ों में निकली, और मामला था जबरदस्ती का।

पंचायत ने उस परिवार को तो भगा दिया और चूंकि सुलेखा ने एक इन पूरे मामलों में सुनंदा की जान बचाई इसलिए पंचायत ने सुलेखा की शादी की जिम्मेदारी हमारे परिवार को सौंप दी, लेकिन उस दिन के बाद से सुनंदा लोगों के तानों के बोझ के अंदर दबती चली गई। कहते-कहते कंचन ने एक बार सुनंदा के जज्बे को भी नमन कि, क्योंकि वो लोगों के तानों को कभी ध्यान ही नहीं दी और बस इस बात से खुश हुई जा रही थी कि सुलेखा को हमारे परिवार ने एक बेटी की तरह विदा किया, एक अच्छे परिवार में।
 
Update:- 117

पंचायत ने उस परिवार को तो भगा दिया और चूंकि सुलेखा ने एक इन पूरे मामलों में सुनंदा की जान बचाई इसलिए पंचायत ने सुलेखा की शादी की जिम्मेदारी हमारे परिवार को सौंप दी, लेकिन उस दिन के बाद से सुनंदा लोगों के तानों के बोझ के अंदर दबती चली गई। कहते-कहते कंचन ने एक बार सुनंदा के जज्बे को भी नमन कि, क्योंकि वो लोगों के तानों को कभी ध्यान ही नहीं दी और बस इस बात से खुश हुई जा रही थी कि सुलेखा को हमारे परिवार ने एक बेटी की तरह विदा किया, एक अच्छे परिवार में।

वहीं जिस जगह सुनंदा कि शादी हो चुकी थी और गौना बाकी था, वो परिवार शादी तोड़कर चले गए। पंचायत भी इसमें कुछ नहीं कर सकती थी, क्योंकि हमारे परिवार ने पहले भी एक कि हुई शादी तोड़ने पर कुछ नहीं कहा था। परिवार के लिए तो मानो सुनंदा एक बोझ की तरह ही थी, अब बस या तो जहर दे दो या कहीं जाकर किसी से भी विवाह कर आओ। उसी दौरान जयपुर का एक घराना आगे आया और उसने सुनंदा से शादी का प्रस्ताव रखा था। वहीं से फिर चन्द्रभान और सुनंदा की शादी हुई।

अपस्यु जब इतिहास सुन रहा था फिर उसने इतिहास को और खंगालने की कोशिश की और कंचन पर जोड़ डालते हुए पूछने लगा… "जब समाज इतना पिछड़ा था, फिर जयपुर का रघुवंशी घराना कैसे मिला।"..

कंचन अपस्यु के सवाल को बिल्कुल समझ चुकी थी कि अपस्यु अतीत की उन बातों से क्या जानने की कोशिश कर रहा है। सुनंदा कुछ पल ख़ामोश रहने के बाद अपस्यु को उसके दादा पक्ष के भी इतिहास से अवगत कराने लगी।

जयपुर का रघुवंशी परिवार एक ऐसा परिवार था जहां कोई भी अपनी लड़की या लड़का नहीं देना चाहता था। समाज से एक निकाला गया परिवार था। बेहद ही बदनाम और अलग किया हुआ, जिसके पास ना तो कोई संपतिं थी और ना ही कोई इज्जत।

अपस्यु को पूरी कहानी समझ में आ चुकी थी। इतिहास के पन्ने जब कंचन ने पलट दिए तब बहुत सी तस्वीरें साफ हो चुकी थी। कंचन से मिलने के बाद अपस्यु अपनी मां को और करीब से जान पाया था, और जब करीब से जाना, अपस्यु की मुस्कान और भी गहरी हो गई।

बातों के दौरान फिर पहले तो दृश्य को एक बार और चपेट परी की आखिर क्यों वो अपने भाई को नहीं ढूंढ पाया, फिर अपस्यु को भी एक चपेट परी की आखिर क्यों वो सबकुछ जानते हुए भी छिपाए रखा और कबसे वो यह सच्चाई जान रहा है?

पहले दृश्य ने बताना शुरू किया कि जब वो सुनंदा मासी की तलाश कर रहा था तो जहां वो रहते थे वहां की फाइल में वो लापता घोषित थे और पासपोर्ट के हिसाब से वो 2007 में भारत आए हुए थे। लेकिन यहां कितना भी तलाश किया तो केवल फाइल में उनका यहां आना तो दर्ज है, लेकिन उसके बाद एक रहस्य बनकर रह गया, इसलिए वो ढूंढने में पूरी तरह से असमर्थ रहा।

वहीं अपस्यु अपनी बात का जिक्र में कहने लगा वो दृश्य को 2008 से जनता है। उस वक़्त सभी की नज़रों में उसके मौसा और मौसी एक हादसे का शिकार हो गए थे और उसका मौसेरा भाई यूएसए में उसके कातिलों तक पहुंचने की जद्दजहद कर रहा था। कहानी वहीं धोक से शुरू हुई, जहां अपस्यु ने बताया कि वो निराश होकर इस जगह से लौट रहा था, लेकिन पीछे के भुल भुलैया में गुत्थी सुलझा रहे कुछ लड़के और लड़कियों के साथ धोका हो गया।

कैसे फिर अपस्यु ने उस धोखेबाज का पीछा किया। चूंकि वो एक हैकर था, इसलिए ऐमी को उसके पीछे लगाना काफी आसान था, और जब एक बार ऐमी उसके पीछे लगी फिर तो पूरी कहानी लाइव देखने जैसा था। वहीं से फिर सारी बातों का पता चलता रहा।

जब बात अाई की इतने लंबे समय तक अपने भाई का गुमनाम तरीके से साथ देने के बाद, जब चारो ओर खुशियां वापस लौटी थी, तब सामने क्यों नहीं आए? अपस्यु इस सवाल के जवाब में अपनी सोच साफ कहते हुए कहने लगा, किसी ने दृश्य को अनाथ बना दिया और उससे बदला लेने के लिए दृश्य ने कितनों को अनाथ कर दिया, बस उसे इस बात से नफ़रत थी। उसे नफरत थी कि जब दृश्य खुशियां समेट रहा था, अपने बिछड़े परिवार से मिल रहा था, तब उस खुशी में वो ये भुल गया कि उसकी बदले कि कहानी ने कई मासूम को अपने परिवार से जुदा कर दिया।

किए की साजा देना आवश्यक है किन्तु कईयों के लाश पर चढ़कर मुख्य आरोपी को यदि आप सजा देते हो, फिर आप खुद भी सजा के भागीदार हो, फिर यह कहके पल्ला नहीं झाड़ सकते कि जो लोग मरे वो किसी खरनाक लोगों के साथ काम करते थे। काम करना किसी की मजबूरी हो सकती है तो किसी का शौक। इसका यह अर्थ नहीं कि साथ काम करने वाले हर किसी को मौत कि साजा दी जाए। और दृश्य के प्रति ये नफरत पूरी उम्र रहेगी।

बातों के दौरान अपस्यु ने अपने चिल्ड्रंस केयर में लाए गए पहले उन हर 60 बच्चों की कहानी बता दिया, कौन-कौन किं हालातों में उसे मिले थे। बातों के दौरान उसने वैभव और उसके मां की भी कहानी बता गया, जो दृश्य और अपने वीरदोयी समाज को एक जैसा मानते थे और उस बच्चे को दृश्य को ना सौंप कर उसे सौंप गई। क्योंकि अपस्यु ने लाशों के बीच से उन बच्चो को उठाया था, जिसे देखने ना तो वो लोग सामने आए, जिसके लिए उनके माता-पिता मारे गए और ना ही वो सामने आए जो इनको अनाथ बनाकर आगे बढ़ गए।

अपस्यु के दिल का विकार जब फूटा तो वो न्याय और बदले की पूर्ण परिभाषा को समझा चुका था। गुस्से में गूंजती उसकी आवाज़ सुनकर जैसे पुरा प्रताप महल शर्मसार हो रहा हो। कंचन, वीर प्रताप और दृश्य तीनों ही एक ऐसी सच्चाई से अवगत हो रहे थे जिसपर उनका ध्यान कभी नहीं गया। उनको तो अब तक ऐसा लग रहा था जैसे उसके बेटे ने समाज से दो ऐसे नासूर जड़ों को उखाड़ दिया जिसे बड़े-बड़े देश की एजेंसी नहीं उखाड़ सकी।

लेकिन सब सच से रू-बरू हुए तब एहसास हुआ की ये कितनी बड़ी गलती कर आए थे। खुद भी तो कई जिंदगियां पीछे छोड़ आए थे, जो बड़ा होकर ना जाने क्या बनता। तीनों को ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बड़े खामोशी से उनके की गई गलती को सही करके चुपचाप आगे बढ़ गया।..

दृश्य से ये जिल्लत बर्दाश्त नहीं हुई… वो घुटते हुए पूछने लगा… "गुस्से के उस दौर में मैंने क्या कर दिया वो मुझे अभी समझ में आ रहा है। लेकिन मै भी क्या करूं जब सब लोग ही उसके परिवार के दुश्मन बने थे और वो सब के सब जान से मारने के लिए आगे बढ़ रहे थे।"..

दृश्य की सवाल पर अपस्यु मुस्कुराने लगा और मुकुरेते हुए कहने लगा… "आज आप भी मुझे मारने ही आए थे। मेरे भाई को आपने उठवाया था, और आपकी पत्नी ने पुरा गोला बारूद सीधा हमपर तान दिया था। आप को क्या लगा जब मै सिंडिकेट के उस नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी को चुरा सकता हूं, तो क्या आपके मारक खिलौनों का जवाब नहीं था मेरा पास, या आपको मारने की वजह नहीं थी। मेरे 60 बच्चे, जिसके सर से उसका साया उठ गया, उसकी वजह आप हो। मकसद आपको जलील नहीं करना है, बस इतना समझना है कि गुस्सा, बदला और ताकत के नशे में इतने अंधे ना हो जाए कि कभी जब एहसास हो कितनी बड़ी गलती हो गई तो लौटकर आने का मौका भी ना हो।"

"जय हो, जय हो, बाबा अपस्यु की जय हो, आज ही मिले हो और उगल दिए पुरा ज़हर। चलो अब भैय्या से माफी मांगो और उन्हें भी दिल से माफ करो। उनकी सारी गलती तुमने सुधार दी ना। और हां बेबी मुझे यकीन है कि तुम्हारे संगत में उन बच्चों को, अपने नालायक अभिभावक से अच्छी ज़िन्दगी मिलेगी। अब जब सबके बाप तुम बन गए और वो सब एक अच्छी ज़िन्दगी देख रहे है, फिर कैसा गीला।"… ऐमी किसी राजकुमारी कि तरह तैयार होती ऊपर से नीचे उतर हुई अपस्यु के सारी बातों पर विराम लगती हुई कहने लगी।

अपस्यु की नजर जब उसपर पड़ी, फिर क्यों वो कहीं और मुरे, बस एक टक उसे ही देखता रहा। दोनो को नजरें जैसे ठहर सी गई थी। तभी दृश्य उसे एक हाथ मारते…. " सर इधर भी थोड़ा। इतना गिल्ट फील करवा दिए अब क्या माफ भी नहीं करेगा।"..

अपस्यु मुसकुराते हुए…. "केवल एक शर्त पर।"

दृश्य:- हर शर्त मंज़ूर है, अब बताओ भी।

अपस्यु:- ना तो आप मेरे चिल्ड्रंस केयर में एक पैसा डोनेट करोगे और वैभव भी हमारे पास ही रहेगा।

दृश्य:- क्या यार इतना गिल्ट फील करवा गए और ऊपर से उनके लिए कुछ करने की सोच रहा था, तो तू मना कर रहा है। मां तुम ही कुछ कहो क्योंकि इसके सामने तो मै खुद को काफी छोटा महसूस कार रहा हूं।

ऐमी:- भईया केवल नंदनी रघुवंशी इसके ऊपर है, बाकी हम सब के लिए ये बाप है इतना ही समझ लो। बेबी अब बस भी करो ये कैसी शर्त है, जबतक कुछ सुधारने का मौका नहीं दिए, फिर इतना जमीर जागने का क्या फायदा?

अपस्यु:- नहीं थोड़ा घुटने दो ऐमी। जबतक पछतावा नहीं होगा तबतक ये परिपक्व नहीं होंगे। हां 3 साल आप कुछ ना कर पाने का पछतावा लिए घूमो, फिर मै कुछ सोचता हूं।

ऐमी:- आज चौथा दिन चढ़ रहा है बेबी और 6 दिन बचे है सोच लो।

अपस्यु, ऐमी की बात सुनकर हंसते हुए कहने लगा…. "अच्छा ठीक है भईया, आप एक पैसा भी डोनेट नहीं करोगे बल्कि उन बच्चो के ऊपर अपना वक़्त दोगे।.… और हां कोई लड़ाई की ट्रेनिंग नहीं और ना ही लड़ाई झगड़े जैसा कोई बात होगा। बस खेलना कूदना, उनके मासूम से सवालों का जवाब देना और वक़्त बिताना। इतना ही होगा"..

दृश्य:- थैंक्स ऐमी। वरना ये तो मुझसे ना जाने कितना खुन्नस खाए हुए था। वैसे एक बात का फैसला मै अभी से कर चुका हूं, मै अब जो भी करूंगा वो अपस्यु के विचार से ही करूंगा।

अपस्यु:- लगता है किसी मिशन पर निकल रहे हो, इसलिए ऐसी बातें कर रहे हो।

दृश्य:- हां सही समझे। फिलहाल मै एक काम को समेत रहा हूं। उम्मीद है जब तुम वीरदोयी को जानते हो, तो तुम्हे ये भी पता होगा कि लड़ाई में बचे हुए वीरदोयी कहां होंगे। आज मै तुमसे वैभव को लेने के बाद, एक धरती के बोझ से मिलने जा रहा था, जिसे इस दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं। अब समस्या ये है कि उस धरती के बोझ के पास बचे हुए वीरदोयी की फौज है। पहले तो मैंने सोचा सबको मारते हुए मकसद को पूरा कर लू, लेकिन अब इस ख्याल से भी डर लगने लगा है।

अपस्यु:- होना भी चाहिए ऐसे ख्याल, क्योंकि हर ज़िन्दगी की कीमत है। बाद में बात करते है इसपर, फिलहाल वो देखो भाभी कितनी सेक्सी बनकर आयी है, पहले उनपर ध्यान दो।

दृश्य, एक हाथ अपस्यु के सर पर मारते…. "पहले मेरी क्यूटी को चूमा, अब उसपर नजर गड़ाए है। अपनी वाली को देख वो भी कितनी प्यारी और मासूम लग रही है। कोई देखकर कह नहीं सकता कि ये इतनी खतरनाक फाइटर है।"..

अपस्यु:- क्या भईया आपको ठीक से तारीफ भी नहीं करनी आती। ऐमी क्या दिलकश लग रही है। एक काम करो आप हमे वापस दिल्ली छोड़ दो।

दृश्य:- मां ये दिल्ली वापस जाना चाहता है , तुम ही बात कर लो अब।

ऐमी जैसे ही दिल्ली जाने की बात सुनी, तुरंत सीढ़ियों से नीची आती हुई कहने लगी…. "मै अपने ससुराल आयी हूं, आज तो कहीं नहीं जाने वाली।"… ऐमी, अपस्यु को देखकर हंसती हुई कहने लगी।

कंचन:- कोई कहीं नहीं जा रहा है। बाकी इसके पापा से बात करके उन्हें सूचना देनी है क्या वो बताओ।

ऐमी:- नहीं नहीं मासी, मैंने पहले ही उनको संदेश भेज दिया है, आप उसकी चिंता ना करे।

कंचन:- तेरे पापा कैसे है, उन्हें जारा भी चिंता नहीं क्या, तू बाहर है।

अपस्यु, कंचन के कांधे से टिकते हुए अपना हाथ ऐमी के खुले कमर पर चलाते हुए कहने लगा…. "मासी इसके पापा के 2 वारिस है, एक आरव और दूसरा वैभव, वो इसे अपनी बेटी नहीं मानते।".. अपस्यु हाथ चलाते हुए कुछ जोर कि ही चिकोटी ऐमी के कमर पर काट लिया, अचानक ही चूड़ियों की खंखनाहट तेज हो गई। पायल की आवाज छम-छम करने लगी और ऐमी खिल-खिलाती हुई झटककर कंचन से अलग होकर खड़ी हो गई।
 
Update:- 118

कंचन:- अब तुम्हे क्या हुआ, ऐसे भागी क्यों?..

ऐमी:- मासी मेरी कमर लाल हो गई और आप पूछ रही है क्या हुआ। आपका बेटा छेड़खानी कर रहा है।

कंचन, अपस्यु को घूरती हुई…. "एक बात बता, इतनी बड़ी-बड़ी बातें करने वाला इतना बेशर्म कैसे हो सकता है। मै यहां खड़ी हूं और जारा भी लिहाज नहीं।"..

दृश्य और अश्क, दोनो (अपस्यु और ऐमी) को देख रहे थे और इन दोनों को देखते हुए, उन्हें अपने भी पुराने दिन याद आ गए। दोनो एक दूसरे के करीब, और करीब होते चले जा रहे थे। कंचन का इधर अभी पुरा फोकस अपस्यु पर ही था, तभी अपस्यु चिल्लाते हुए कहने लगा…. "मासी वो देखो दोनो को, और आप मुझे डांट रही थी।"…

छोटी छोटी नोक झोंक के बीच हंसी मज़ाक का काफी लंबा दौड़ चलता रहा। इसी बीच आधे घंटे की निजी मुलाकात दृश्य और अपस्यु के बीच भी हुई, जहां एक बार फिर दोनो के रास्ते मिल रहे थे। अपस्यु पूरी बात समझकर एक छोटी सी योजना पर दोनो साथ मिलकर काम करने के लिए राजी हो गए।

एक सुखद मुलाकात थी ये अपस्यु के लिए। जब वो वापस लौटा, तब उसकी मां का पूरा इतिहास उसके सामने था। उसकी खुशी उसके चेहरे से झलक रही थी जिसे ऐमी भी महसूस करते जा रही थी।

कुछ दिन अपस्यु और ऐमी के लिए काफी रोमांस और रोमांच से भड़ा परा था, जिसमें वो दोनो खुलकर जीने के एक अलग ही एहसास में डूबे हुए थे। वहीं श्रेया दोनो को देखकर अजीब ही कस-म-कस में दिख रही थी। श्रेया और उसकी पूरी टीम कितने भी नतीजों पर क्यों ना पहुंचे, लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे थे कि अपस्यु को उसकी सच्चाई पता है या नहीं है।

ऊपर से श्रेया पर उसके पापा का प्रेशर बढ़ता जा रहा था, जो जल्द से जल्द अपने दूसरे टारगेट को एलिमिनेट होते देखना चाहता था, जिसके लिए श्रेया और टीम को खुलकर काम करने लिए 50 करोड़ की राशि दी गई थी।

इसी बीच अपस्यु के आमंत्रण पर मेघा भी भारत पहुंच चुकी थी, जो कि विक्रम की मेहमाननवाजी स्वीकार करती हुई राठौड़ मेंशन में अपने भाड़े के सिपाही जेम्स हॉप्स और उसकी टीम के साथ ठहरी हुई थी। उसके दिमाग में भी बहुत गहरी साजिश कहीं दूर से पक रही थी, जिसका नतीजा सोचकर वो अपने पूरी टीम के साथ पहुंची थी।

हर कोई अपने दिमाग पर बोझ दिए बस हर दिन अपने योजना को सुदृढ़ करने में लगे हुए थे। 10 दिनों की छुट्टी में अब मात्र 3 दिन बच गए थे। ऐमी, अपस्यु को रोमांस के चले एक लंबे दौर से जगाती हुई ,अब काम पर ध्यान लगाने की सलाह देने लगी, और अपस्यु के लिए अब वक़्त आ चुका था हर किसी के योजना को समझने का।

12, अगस्त 2014 की सुबह…

अपस्यु और ऐमी दोनो ही सुबह-सुबह मेघा के कॉल पर उससे मिलने राठौड़ मेंशन निकल चुके थे। एक बहुत लंबा इंतजार और फैसले के घड़ी के इतने करीब, ऐमी और आरव जब वीडियो कॉल पर थे तब उनकी एक्साइटमेंट देखने बनती थी। ..

दोनो राठौड़ मेंशन के दरवाजे पर थे, और गार्ड ने उनको बाहर खड़ा कर अंदर कॉल लगा रहे थे। तभी उस वक़्त कुसुम पूजा करके मंदिर से लौट रही थी और जब उसने दरवाजे पर अपस्यु को खड़ा देखी, उत्साह से अपने गाड़ी से बाहर निकली….. "सर आप यहां खड़े क्यों है।"..

अपस्यु:- क्या करे बड़े लोगों की हवेली है, कुछ देर तो इंतजार करना ही पड़ता है।

"यहां आप से बड़ा कौन है।".. कुसुम जैसे अपस्यु के अभिवादन में अपने शब्द कहीं हो और खुशी से चिल्लाती हुई कहने लगी, जल्दी से दरवाजा खोला जाए। गार्ड ने तुरंत दरवाजा खोला और कुसुम अपस्यु का हाथ पकड़कर वहां के हर चीज का इतिहास बताती हुई उसे लेकर आगे बढ़ने लगी।

पीछे से ऐमी कार को पार्क करती, वो भी उनके साथ हो गई। ऐमी पर नजर पड़ते ही कुसुम मुस्कुराती हुई कहने लगी…. "क्या सर जब से इन्हे परपोज किया है, हर जगह साथ लेकर ही जाते हो।"..

ऐमी:- कुसुम, तुम सर के बदले अपस्यु को भईया कह सकती हो और मुझे भाभी। चलेगा ना।

कुसुम, अपना प्यारा सा चेहरा बनाती….. "बहुत दिन के बाद मै दिल से खुश हुई हूं। मै बयान नहीं कर सकती की मै कितनी खुश हूं भईया। आप को यहां देखना मतलब, ऐसा लग रहा है किसी भक्त के घर भगवान स्वयं चलकर आए है।"

अपस्यु उसकी बातें सुनकर हंसते हुए कहने लगा…. "पहले ठीक से इंसान तो बन जाऊं, और तुम मुझे भगवान बाना रही हो।"

तीनों बात करते हुये, राठौड़ मेंशन पहुंचे। हॉल में पहुंचते ही कुसुम चिल्लाती हुई सबको इकठा करते, सबको अपस्यु से मिलवाने लगी। हर किसी को लगा कि अपस्यु कुसुम के साथ आया है, लेकिन तभी मेघा बीच में आती हुई दोबारा सब को अपस्यु का परिचय कराते हुए कहने लगी कि यह वही लड़का है जो रुकी फैक्टरी का काम आगे बढाने का काम अपने जिम्मे लिया है।

कुछ देर अपस्यु से मिलकर सब चले गए। कुसुम के आग्रह पर ऐमी उसके साथ जाकर उसका घर देखने लगी। वहीं अपस्यु डियनीग टेबल पर अपना मोबाइल रखकर मेघा और लोकेश से प्रोजेक्ट क्लीयरेंस संबंधित बातें करने लगा।

इसी बीच नंदनी का कॉल अपस्यु के मोबाइल पर आया और उसी के साथ नंदनी की तस्वीर भी स्क्रीन पर दिखने लगी। रिंग बजते ही लोकेश और मेघा का ध्यान भी फोन पर गया। फोन पर फ़्लैश होती फैमिली फोटो पर जैसे ही लोकेश की नजर गई वो दोबारा तस्वीर देखने पर विवश हो गया।

अपस्यु फोन काटकर फोन को साइलेंट पर डाला और प्रोजेक्ट के अन्य परेशानी के बारे में समझाने लगा। इस बीच नंदनी के 2-3 कॉल आए। हर बार लोकेश का ध्यान अपस्यु के फोन पर ही रहता। अपस्यु अपनी बात खत्म करते हुए नंदनी का कॉल पिक किया और कुछ देर के बाद वापस हॉल में आया।

लोकेश:- प्रोजेक्ट पर अच्छा काम किया है तुमने। वैसे तुम्हारे पापा क्या करते है अपस्यु।

अपस्यु:- वो एक हादसे में मर गए थे।

लोकेश:- ओह माफ करना। वैसे तुम्हारे पापा का क्या नाम है?

अपस्यु:- जी स्वर्गीय भूषण रहुवशी।

लोकेश:- और तुम्हारी मां का नाम?

अपस्यु:- नंदनी रघुवंशी।

"अपस्यु एक काम करना तुम अपना बायोडेटा इसे दे देना, फिलहाल तुमसे कुछ सीरियस डिस्कस करना है, उम्मीद है तुम्हारे पास वक़्त हो।"… मेघा अपस्यु को साइड ले जाकर पूछने लगी।

अपस्यु:- हाहाहाहा… आज शाम से लेकर पूरी रात फ्री ही हूं, बस तुम कहीं बिज़ी नहीं हो जाना।

मेघा:- बिल्कुल नहीं डार्लिंग, शाम को मिलती हु, तैयार रहना…..

मेघा अपनी बात कहती हुई निकल गई। अपस्यु एक बार फिर लोकेश के पास पहुंचा…. "सॉरी सर वो मेघा मैम ने बीच में टोक दिया। आप कुछ पूछ रहे थे।"..

लोकेश:- नहीं, मै बस ऐसे ही पूछ रहा था, अच्छा लगा तुमसे मिलकर।

लोकेश आगे कोई भी बात ना करते हुए, तेजी के साथ वहां से निकलकर विक्रम के कमरे में पहुंच गया और इधर ऐमी भी घूमकर लौट आई थी। दोनो वापस निकले राठौड़ मेंशन से। कार थोड़ी दूर आगे बढ़ी होगी, ऐमी अपस्यु के जांघ पर अपना हाथ फेरती उसे पैंट कि जीप तक बढ़ाने लगी… "अरे, अरे अरे.. ये क्या जर रही हो स्वीटी"..

"फीलिंग हॉर्नी बेबी, इसलिए तुम्हे रिझा रही हूं।"… ऐमी बड़ी अदा से कहने लगी।

"आज मज़ा तो मुझे भी आ रहा है, और एक अंदर से उमंग तो है, लेकिन कार में"… अपस्यु बोलते बोलते रुका…

"बेबी जल्दी से मेरी ओर देखो ना।" … जैसे ही अपस्यु मुड़ा, ऐमी उसके होठों को चूमती…. "जल्दी से कार मुक्ता अपार्टमेंट लगाओ।".. इतना कहती ऐमी नीचे झुकी और अपस्यु के पैंट के बटन को खोलती उसके जीप को नीचे की। अपस्यु अपने कमर को हल्का ऊपर किया और ऐमी पैंट को सरकाती हुई उसके पाऊं में ले आयी।

जल्द ही उसके पूरे बाल अपस्यु के जांघ पर फैले हुए थे और अपस्यु का चेहरा ऊपर अजीब ही मादक एहसाह में डूबा हुआ था। थोड़े ही देर में वो मुक्ता अपार्टमेंट में थे। दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए, तेजी से कदम बढ़ाते फ्लैट के ओर चल रहे थे।

जैसे ही दोनो फ्लैट के अंदर हुए, अपस्यु ने दरवाजा बंद किया और ऐमी उसे खींचकर अपने ऊपर लेती, होंठ से होंठ लगाकर चूसने लगी। अपस्यु भी होंठ को चूमते हुए उसके जीन्स के बटन खोलने लगा। ऐमी, अपस्यु को चूमती हुई अपने हाथ नीचे ले गई और जीन्स खोलने में अपस्यु की मदद करती, तुरंत जीन्स को पैंटी सहित निकलकर बाहर फेंक दी।

अपस्यु भी ऐमी के जीभ को अपने जीभ से लगाए उसे लगातार चूमते हुए अपने हाथ को नीचे ले जाकर फोरप्ले करने लगा। चुम्बन के बीच में ही ऐमी ठंडी आहें लेती, अपने पंजे को अपस्यु के पीठ से जकड़कर, किस्स को तोड़ती हुई बदहवासी में कहने लगाई…. "बेबी ये दीवाल मज़ा नहीं से रहा, बिस्तर पर चलो।"..

अपस्यु अपने होंठ ऐमी के गले से लगाकर उसके चूमते हुए हटा और अपने बदन से कपड़े निकालते बिस्तर तक पहुंचा, ऐमी भी पीछे-पीछे वैसे ही पहुंचीं। जैसे ही बिस्तर के पास दोनो पहुंचे, ऐमी ने धक्का देकर अपस्यु को बिस्तर पर लिटाया और उछलकर उसके कमर पर बैठती, पूर्ण मज़ा के ओर बढ़ने लगी।

ऐमी लिंग को योनि में डालकर, धीरे-धीरे अपने कमर हिलती, अपस्यु का हांथ पकड़ कर अपने स्तन पर डाली और धीरे-धीरे मज़े लेने लगी। अपस्यु भी कुछ देर स्लो मोशन धक्के का मज़ा लेते हुए बैठ गया और ऐमी के होंठ को अपने होठ से लगाते हुए, पूर्ण जोश की रफ्तार शुरू कर चुका था। जोश ऐसा की दीवाना बना दे।

ऐमी का नरम और गोरा बदन, हर धक्के की थाप पर बड़ी ही मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था। उत्साह से ऐमी, अपस्यु के पूरे होंठ को चूस रही थी और अपने दोनो पंजे अपस्यु के पीठ में पूरे घुसे हुए थे। एक कामुक पल पुरा मस्ती में बिताने के बाद, दोनो निढाल बिस्तर पर गिर गए और ऐमी अपस्यु के सीने में घुसकर खामोशी से बस उसकी धड़कने सुनने लगी…

"बेबी, बहुत लंबा साल इंतजार किया है। अब बस इसे अंजाम तक पहुंचाओ।"… ऐमी, अपस्यु में कुछ और सिमटती हुई कहने लगी।

"तुम जैसा चाहोगी वहीं होगा ऐमी। हम एक साथ बिजली गिराने वाले हैं पहले इन्हे झटकों का मज़ा तो लेने दो।"…

"हम्मम ! उस सार्जेंट जेम्स हॉप्स का क्या करोगे।"…

"जेके और पल्लवी से थोड़े देर बाद मुलाकात होने वाली है, वहीं देखते है इनका बारे में क्या निष्कर्ष निकला है।"…

"अपस्यु, बेईमान तुम्हे पता चल गया ना श्रेया के पीछे कौन है।"…

"ज्यादा बोझ क्यों लेती हो, श्रेया और उसकी टीम तो बेचारे बेकार में पीस गए हमारे बीच। टीम तो उनकी अच्छी है, लेकिन नवसिखियों की टीम है, जो ट्रेनिंग के बाद सीधा हमारे पीछे आ गए। लेकिन तुम सही कही थी, उसके साथ रहा तो हमारा भविष्य योजना काफी मजबूत होगा। जिस हिसाब से उसकी बेचैनी मै आजकल देख रहा हूं, उस हिसाब से तो लगता है कि आज से कल तक में वो अपने दूसरे टारगेट से भी भिड़ा देगी।"…

"हम्मम ! यहां हर किसी की प्लैनिंग चल रही है, और मै बेकार में आज एक्साइटेड हो गई। ये वक़्त फोकस बनाए रहने का था। बेबी, इतने दिन से रोमांस कर रहे है फिर भी आज मैंने तुम्हे फसा दिया। मुझे ये स्टेप नहीं लेना चाहिए था।"…

"पागल कहीं की। लगता है तुम्हे मज़ा नहीं आया क्या, यदि ना है तो बोल दो, मैं दूसरे राउंड के लिए तैयार हूं।"

"मुझे ना लगता है सुबह सुबह तुम्हारी वाली बेशर्मी ही घुस गई थी जो मै इतनी हॉर्नी हो गई। चलिए उठिए सर, चलकर जरा माहौल का जायजा लिया जाए।"..

इधर राठौड़ मेंशन में नंदनी की तस्वीर देखने के बाद तो जैसे लोकेश खुद में अब जीता हुआ महसूस कर रहा था। हर खींचती श्वांस में वो अपने अंदर आने वाले ताकत को महसूस करने लगा था। उसके कई सालों की योजना अब सफल होने वाली थी। लोकेश तुरंत ही अपने पिता विक्रम और मेघा के साथ प्राइवेट प्लेन में उदयपुर स्थित अपने छोटे से लंका में पहुंचा।

एक पुरा इलाका जो लोकेश के नियंत्रण में था। जहां हर तरह के अंतरराष्ट्रीय हथियार से लेकर, दुनियाभर कि नई तकनीक दिन रात लोकेश के इशारे पर काम कर रही थीं। अपनी जगह पर खड़ा होकर लोकेश अट्टहास भरी हंसते हुए विक्रम से कहने लगा….

"पापा इतने दिनों से आपको इसी दिन के लिए रोक रखा था। यें पूरी तैयारी बस जैसे आज का ही इंतजार कर रही थी। बस 2 दिन और दे दो, और मुझे जारा अपनी बुआ के बारे में छानबीन करने दो। जैसे ही यह सुनिश्चित हुआ की वही नंदनी रघुवंशी है, सबसे पहले बिजली उस राजीव मिश्रा और उसके समस्त परिवार पर गिरेगी, जो हमसे मिलकर काम करने की बजाय हमारे पार्टनर के झांसे में आकर, मेरे ही खिलाफ कार्यवाही कर रहा था। राजीव मिश्रा के साथ ही जाने वाले की लिस्ट में है होम मिनिस्टर जिसने बहुत दर्द दिए है और फिर एक बार खत्म हो जाएगा नंदनी के पुरा वंश और इस बार भी वो केवल अकेली जिंदा बचेगी।"
 
Update:- 119

जबसे लोकेश को नंदनी के बारे में पता चला था, वो जीत के अलग ही घोड़े पर सवार था। मेघा 8 अगस्त को ही सार्जेंट जेम्स हॉप्स और उसकी टीम के साथ भारत पहुंची थी। पिछले 3 दिनों के दौरान, इनके बीच बातचीत का वो दौर चला जो नए परिणाम लिख चुका था।

मेघा जब लोकेश की महतवाकांक्षाएं सुनी, फिर तो वो तुरंत पाला बदलने की नीयत भी बना चुकी थी, साथ ही साथ उसे समझ में आ चुका था कि हवाले के पैसे गायब करने में लोकेश का हाथ नहीं हो सकता, फिर ये दुश्मन कौन था, जो पर्दे के पीछे से उन्हें घाटा दे रहा था।

इन सभी मामलों कि गुत्थी सुलझाते हुए लोकेश ने इसमें राजीव मिश्रा को पूरे प्रकरण का दोषी करार देते हुए कहने लगा…. "वो अब हमारा साथ छोड़कर होम मिनिस्टर का कुत्ता बना हुआ है और शुरू से उसके पॉलिटिकल एजेंडा को साधने के लिए, ये होम मिनिस्टर के साथ तब से काम कर रहा है जबसे वह होम मिनिस्टर नहीं था।"

मेघा, लोकेश और विक्रम तीनों ही मीटिंग चेंबर में बैठे हुए था, सुरक्षा के लिहाज से काफी प्रभावित करने वाला एक ऐसी जगह, जहां ना तो कोई कंप्यूटर था और ना ही कोई मोबाइल लेकर जा सकते थे। लोकेश अपनी चर्चा आगे बढ़ाते हुए कहने लगा….

"नंदनी के मिल जाने के बाद मायलो ग्रुप का पूर्ण अधिग्रहण का रास्ता खुल चुका है। जैसे ही नंदनी रघुवंशी और उसके पूरे परिवार की डिटेल मिल जाती है, उसके तुरंत बाद ही उसके पूरे परिवार को मारकर नंदनी रघुवंशी को यहां इस बेस पर लाया जाएगा और उसके बाद से ही मायलो ग्रुप का पूर्ण बागडोर उनके हाथ में होगी।"

15 अगस्त की शाम को सभी पार्टनर के बीच एक मीटिंग का प्रस्ताव भी रखा गया जिसमें मायलो ग्रुप के पूर्ण कंट्रोल में आने के बाद, आगे की रूप रेखा कैसी होगी। इसी के साथ उसी मीटिंग में राजीव मिश्रा का भी फैसला हो जाना था और साथ ही साथ उसके सरपरस्त होम मिनिस्टर का भी।

मेघा जो अब तक केवल दर्शक बनी हुई थी, गहराई से लोकेश को सुनने के बाद जिज्ञासावश पूछने लगी कि वो अपने और जिंदल के रिश्ते को कैसे देख रहा है। इस सवाल के जवाब में लोकेश ने मेघा के साथ बिजनेस डील की पूरी कहानी समझा गया… वो अपने पार्टनशिप को नई दिशा देना चाहता है। चूंकि बेटिंग का धंधा बहुत ही तेजी से फल फुल रहा है इसलिए बेटिंग के धंधे को पूरा ऑपरेट यूएसए से किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी उसी पर होगी।

बेटिंग धंधे को जब मेघा गहराई से परख रही थी, तब उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि इस धंधे में इतना ज्यादा फायदा हो सकता है। लोकेश के इस नए प्रस्ताव के साथ मेघा अपनी हाथ मिलती हुई उसने अपने हिस्से का काम पूछ लिया।

लोकेश उसे नंदनी की पूर्ण डिटेल देते हुए बताने लगा कि ये अपस्यु और कोई नहीं बल्कि नंदनी रघुवंशी का बेटा है। जैसे ही मेघा ने इन सब के बीच अपस्यु को फंसती हुई देखी, वो लोकेश को समझाती हुई उसके बारे में बताती चली गई।

मेघा, लोकेश को अपने इस छोटे से दुश्मन के बारे में अवगत कराती हुई कहने लगी, ये वो बंदा है जिसने एक रात में उसे 15 मिलियन यूएसडी का प्रोफिट निकाल कर दिया था, और उसी की वजह से वो भारत आयी है, क्योंकि वो अपस्यु को अपने टीम में लेना चाहती है।

लोकेश, मेघा के मुंह से उसकी तारीफ सुनकर बस इतना ही कहा…. "जिनके मकसद बड़े होते है वो छोटे प्यादे कि चिंता नहीं करते। आज जी भर के मिल ले अपने इस छोटे आशिक़ से, क्योंकि किसे पता उसका कल हो ना हो।".. लोकेश की बात पर मेघा हंसती हुई उसकी हां में हां मिलाई और वहां से वापस दिल्ली लौट आयी।

दिल्ली में जेके और पल्लवी से मुलाकात…

अपस्यु और ऐमी, जेके और पल्लवी के सामने बैठे हुए थे। जेके मीटिंग की शुरवात करते हुए…. "अपने भाई के साथ मुलाकात कैसे रही।"..

अपस्यु:- भईया, इस वक़्त मुद्दा उनका नहीं है, उसके बारे में हम फिर कभी बात करेंगे। अभी हम जिस विषय पर बात करने आए है उसपर चर्चा कर ले।

जेके:- नाह ! पहले मुझे जानना है कि यूएसए में वो चमत्कार आखिर तुमने किया कैसे। टेक्नोलजी की वो कौन सी कड़ी है जो छिपा गए। यार केवल कुछ वायर मिले वहां सबूत के नाम पर। ऐसा केस तो पहले कभी सुना भी नहीं। ना कोई धमाका हुआ ना हो कोई शोर, चुपचाप मौत आयी और 4 लोगों को काल के गाल में समेट लिया।

अपस्यु:- आपको याद है हमलोग फ्यूचर प्लान करते हुए सोच रहे थे कि क्या हो यदि हमसे ज्यादा क्षमता वाला कोई इंसान हमारे सामने हो, फिर उसे रोकेंगे कैसे?

जेके:- हां याद है मुझे, और तब तुमने बताया था कि पहले के योगी कुछ मंत्र फुकते थे और बड़े से बड़ा राक्षस अपनी जगह स्थिर हो जाता था।

अपस्यु:- बिल्कुल सही । बस हमने भी वो मंत्र खोज निकाला। चोरी कि हुई टेक्नोलॉजी से हम छोटे-छोटे डिवाइस जब बनाना सीख चुके थे, उसी वक़्त ये ख्याल आया कि जब एक सिलिकॉन पुरा माइक्रो चिप तैयार कर जाता है तो क्यों ना माइक्रो डस्ट पर काम किया जाए…

जेके और पल्लवी दोनो ऐमी का चेहरा आश्चर्य से देखते…. "तुमने थेओरी दिया और ऐमी ने कर दिखाया। क्यों …"

अपस्यु मुसकुराते हुए ऐमी को भींचते…. "येस ! आप सबके सामने पेश है माइक्रो सब्सटेंस पार्टिकल, जिसे आप डस्ट भी कह सकते है। और इस डस्ट को हम 1 किलोमीटर के दायरे से कमांड कर सकते है। इसके नतीजे आप सोच भी नहीं सकते कैसे थे। ये आपकी बुक के अंदर घुसकर उसे पूरा स्कैन कर सकते है। किसी भी नट बोल्ट को ओपन कर सकते है। पिलर के बेस को काटकर उसे अलग कर सकते है। सामने के फेंसिंग के ज्वाइंट को खोलकर आप जहां चाहें वहां रख सकते है।

फिर छत पर 20 स्नाइपर क्यों ना हो, उन्हें पता भी नहीं चलता कि किसी ने पिलर के बेस को काटकर और फेंसिंग के नीचे के सारे बोल्ट खोलकर, आपके जाने का इंतजार कर रहे है। फिर तो कई बार वो स्नाइपर वाले, उस फेंसिंग से भी टिक जाते है, लेकिन वो फेंसिंग नहीं हिलती क्योंकि बोल्ट की जगह वो डस्ट ले चुका होता है। और जैसे ही सभी एजेंसी वाले छत से जाते है फिर ऐसा भी हो सकता है कि वो माइक्रो डस्ट जेनरेटर को खिसकाकर नहीं, बल्कि उसके नीचे जाकर उसे उठा कर किनारे तक लेकर आ जाए, ताकि कोई भारी चीज ऊपर खिसक रही है किसी को पता ना चले।

ये डस्ट भईया, ये डस्ट.. बड़े कमाल की चीज है… 4 लोगों को कल के गाल में भेजने के बाद, वो हवा में तैरते हुए फिर हो सकता है कमांडिंग की जगह पहुंच जाए, मुझे नहीं पता इस बारे में। और इन्वेस्टिगेशन करने आया ऑफिसर वहां परे रसियन मेड वायर को देखकर, सर खुजाते हुए सोचने लगे कि साला इन रसियन के पास ऐसी कौन सी तकनीक विकसित हो गई जो मात्र कुछ वायर सबूत में छोड़े है, और जेनरेटर को ऊपर से नीचे फेंक दिया।

जेके ताली बजाता हुए…. "क्या बात है कमाल कर दिया तुम दोनों ने"..

ऐमी:- बेबी लेकिन ये तो कॉम्प्लेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है, बिना 2 लोगों के कमांड के संभव नहीं, फिर ये कैसे किया?

अपस्यु:- कांड होने के बाद वीरभद्र के चेहरा नहीं देखी क्या। उस वक़्त मेरे साथ वीरभद्र काम कर रहा था।

पल्लवी:- तुम लोगो ने जान बूझकर ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया ना, ताकि वो तकनीक हम तुमसे उधार नहीं मांग सके…

ऐमी:- ये फ्यूचर तकनीक है भाभी, इसका ऑपरेटिंग सिस्टम कॉम्प्लेक्स ही बना, तब जाकर संभव हुआ था। आपको क्या लगता है हमने इसे सिंगल हैंड ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने की कोशिश नहीं की थी क्या, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। कोई नहीं आप मायूस क्यों होते हो, आप दोनो जब भी बुलाओगे हम वहां जरूर होंगे, इतना तो भरोसा है ना।

पल्लवी:- नाह बिल्कुल भरोसा नहीं ! मै कई रात इस अपस्यु को बुलाई, लेकिन कामीना मुझे जलता छोड़ दिया, आया नहीं।

जेके:- पल्लवी अभी मीटिंग कॉल ऑफ नहीं हुआ है। बेहतर होगा फोकस कहीं ना जाए। अपस्यु जैसा तुमने कहा था वैसा हमने पता करवाया, नंदनी के राज ओपन होने से क्या परेशानी आने वाली है, वो भी मैंने तुम्हे बता दिया था और उम्मीद है कि तुम इतने दिनों में उसपर काम कर चुके होगे।

अपस्यु:- हां काम पुरा पुख्ता हो चुका है, और मै आंख मूंदकर आगे बढ़ सकता हूं।

जेके:- अच्छी खबर है ये तो। लेकिन अभी भी बहुत कुछ अनिश्चित है। ऐमी क्या तुम लोकेश के ऑपरेटिंग सिस्टम में घुसने में कामयाब हुई।

ऐमी:- नहीं भईया, यह संभव नहीं। जबतक डिवाइस उनके सर्वर से कनेक्ट नहीं होगा, तबतक पॉसिबल नहीं। रिमोट एसेस से हैक नहीं किया जा सकता।

जेके:- हम्मम ! फिर तो अपस्यु को अपने आगे के योजना के तहत मेघा के सामने ओपन होना होगा, वरना पहली बार ऐसा होगा की हम बिना दुश्मन को जाने अपनी योजना पर आगे बढ़ेंगे, जिसका परिणाम बुरा हो सकता है। अब तो नंदनी की बात खुलने से तुम्हे उन्हें सामने से भटकने का एक पूरी वजह मिल गई है।

अपस्यु:- लेकिन पार्थ के दी हुई खबर के अनुसार, मेघा और लोकेश के अलावा मेघा की विदेशी टीम भी उनके बेस पर जाती हुई दिखी थी। ऐसे में यदि मेघा को वहां कुछ अच्छा ऑफर हो, जो कि हुआ ही होगा, क्योंकि लोकेश अपने बेस पर उसकी पूरी टीम ले गया है तो उसकी कोई लंबी प्लांनिंग तो जरूर रही होगी। ऐसी हालत में वो हमे डबल क्रॉस भी कर सकती है। और यदि वो जेम्स हॉप्स ने कहीं इतिहास खोदना शुरू कर दिया, तो तुरंत ही सब कनेक्ट कर देगा। क्योंकि मै यदि नंदनी रघुवंशी के इतिहास को लेकर आगे बढ़ता हूं, तो वो चन्द्रभान रघुवंशी को भी तो ढूंढेंगे।

पल्लवी, अपस्यु की बात पर जोर से हंसती हुई कहने लगी…. "फिल्मों के भाड़े के सिपाही और रियल के भाड़े के सिपाही में जमीन आसमान का अंतर होता है। जो तुम्हारे पास बचा है उसे तो वो सिपाही बचा लेंगे, लेकिन जो खो गया है उसका पता कभी नहीं लगा सकते, ऐसे में तुम्हे लगता है कि वो इतने कंफ्यूज से माहौल में इतिहास उल्टेगा।

अपस्यु:- मै समझ नहीं भाभी, आप ये कहना चाहती है कि जेम्स हॉप्स की टीम का ध्यान मुझ पर जाता भी है तो भी वो मुझे कनेक्ट नहीं कर सकते?

जेके:- हां सही आकलन है। जैसे तुम आरव के केस में एयरपोर्ट सिक्योरिटी में नहीं घुसे थे हैक करने, जबकि तुम्हारा पता लगाना तो फिर भी टेढ़ी खीर होती। फिर ये कैसे सोच सकते हो कि ये प्राइवेट सिक्यूरिटी का काम करने वाला, कम अक्ल बैल, यूएसए जैसे देश में, सरकारी विभाग के फाइल को एसेस कर सकता है। जेम्स हॉप्स की पूरी टीम एक साथ है तो लड़ाई के दौरान जो कठिनाई ये देने वाले है, उन पर सोचो, तुम्हारा सच का पता लगाना इनके बाप के बस की बात नहीं, और यही सत्य है।

अपस्यु:- ठीक है उस जेम्स हॉप्स से ध्यान हटा भी लिया तो भी क्या मेघा जाल में फसेगी…

ऐमी:- जब वो लोकेश के ऑफर को स्वीकार कर सकती है, तो तुम्हारे क्यों नहीं, तुमने तो उसे 15 मिलियन डॉलर का फायदा करवाया था। वैसे भी वो 2 लोगों के बीच चुपचाप तमाशा ही देखने वाली है, और जो अंत में बचेगा उसके लिए वफादार साबित हो जाएगी…

जेके:- ऐमी के प्वाइंट में दम है। खिलाड़ी वो भी कमजोर नहीं और मुझे लगता है तुम्हे उसपर दाव खेलना चाहिए।

अपस्यु:- ठीक है आज शाम की मीटिंग में उसे थोड़ा झटका डेटा हूं।

जेके:- याद है ना मेरी बात, विक्रम और जिंदल को मौत ना मिले.. बस उनकी बची हुई ज़िन्दगी, मौत से बदतर कर दो…

अपस्यु:- ऐसा ही होगा भईया।

जेके:- ठीक है फिर मीटिंग कॉल ऑफ करते है और इसी के साथ हमारा दिल्ली से पैकअप भी हो गया। सॉरी तुम्हे ऐसे वक़्त में छोड़ कर जा रहा हूं। हालांकि जाने की इक्छा तो नहीं, लेकिन तुम दोनो पर मुझे पुरा यकीन है।

अपस्यु:- जेके भईया, भाभी.. अपना ख्याल रखना..

पल्लवी अपस्यु की बात सुनकर हंसती हुई उसे गले लगाती…. "क्या हुआ, हमारा शेर ऐसा मायूस होकर आज हमे विदा कर रहा है।"…

अपस्यु:- कुछ नहीं, बस यूं ही.. आपका जाना अंदर से कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। वादा करो कुछ भी खतरा हो तो आप तुरंत बैंकअप के लिए संपर्क करोगे।

पल्लवी, अपस्यु से अलग होती हुई कहने लगी…. "मै अपने और जेके के ओर से वादा करती हूं कि इस पूरे केस में हम तुम्हारी मदद लेंगे, और बिना जानकारी के कहीं कोई कदम नहीं उठाएंगे… चल अब हंस। और हां इन सब के बावजूद अगर हम मरते है, तो हंसकर हमे विदा करना, क्योंकि किसी केस में हम चारों काम करे और वो हमे मात दे जाए, मतलब हमे किसी कमजोर ने नहीं मारा है।"

ऐमी अपस्यु के पास आकर खड़ी हो गई और दोनो को जाते हुए देख रहे थे… "चिंता मत करो, हम पुरा सेविलेंस देंगे उन्हें। मैंने कुछ डस्ट गिफ्ट कर दिया है।"..

दोनो भी वहां से मुसकुराते हुए निकले। ऐमी सीधे अपने घर लौटकर, वहां अपना काम करने लगी और इधर अपस्यु, आज शाम मेघा को फसाने की पूरी तैयारी में जुट गया।…
 
Update:-120

शाम लगभग ढलने को थी। मेघा की अपस्यु से मिलने की रुचि जो सुबह थी, वो कहीं ना कहीं ठंडी पर चुकी थी। वैसे भी मेघा अब अपस्यु से मिलकर करती भी क्या, जो कभी भी शिकार हो सकता था। इन्हीं सब बातों का आकलन करती हुई मेघा पब के लिए निकल गई।

7 बजे के करीब वो एक आलीशान पब में पहुंची। जैसे ही वो पहुंची, एक वेटर उसे ड्रिंक सर्व करने पहुंच गया। मेघा उस वेटर को देखकर कहने लगी… "जाकर ये ड्रिंक उसके मुंह पर मार आओ, जिसने भी भेजा है।"..

वेटर:- सर ने बताया था आप का जवाब ऐसा ही कुछ होगा, इसलिए साथ में एक पत्र भी दिया है।

मेघा उस पत्र को देखी, उसपर बड़े अक्षरों में "अपस्यु" लिखा था। मेघा उसकी अदा पर मुस्कुराती हुई ड्रिंक उठाई और अपने कदम बढ़ाती बार काउंटर तक पहुंची…. "हेय हीरो ! कोई उम्मीद नहीं थी कि तुम यहां मिलोगे।"..

अपस्यु:- हाय ये झूठ बोलने की अदा। मुझे ऐसा क्यूं लग रहा है आंटी की आप मेरा पीछा कर रही है।

मेघा, आंखें गुर्राती :- सिर्फ 31 साल का होना से आंटी की श्रेणी में आता है। बहुत ही भद्दा था ये…

अपस्यु:- अच्छा तो फिर मैं अपने से 9-10 साल बड़ी लेडी को क्या कहूं?

मेघा:- चलो कहीं अकेले में चलकर सब समझाती हूं कि क्या कहना चाहिए और क्या करना चाहिए मुझ जैसी हॉट, टॉप क्लास मॉडल के साथ।

अपस्यु:- हम्मम ! तुम्हारी अदा और तुम्हारी बातें आज कुछ मैच नहीं हो रही मेघा। लगता है तुम्हे जो मुझ से उम्मीदें थीं वो कोई और पुरा कर रहा है।

मेघा:- तुम कहना क्या चाहते हो…

अपस्यु अपने राउंड टेबल को घुमाया और उसके होंठो को अपने होंठ से छूकर खड़ा हो गया और चलते-चलते…. "सॉरी स्वीट हार्ट, तुम मुझे शाम को मिलने का वादा करके अपना कार्यक्रम बदल ली। फिर कभी मुलाकात होगी।" … इतना कहकर, अपस्यु फिर माईक लेकर जोड़ से कहने लगा…. "श्रेया तुम केवल बेवकूफ हो, इस से ज्यादा कुछ नहीं। मेरा पीछा करने से अच्छा, मुझ से सामने से बात करती तो तुम्हारे लिए मै ज्यादा फायदेमंद होता। मै ज़रा अकेले घूमना चाहता हूं इसलिए प्लीज मेरे पीछे मत आना।"…

मेघा को अपने लिए कही बात तो समझ में आ गई, लेकिन बीच में ये श्रेया कौन आ गई, इसपर वो सोचती रह गई। तभी मेघा ने देखा पब के कोने से एक लड़की उठकर अपस्यु के पीछे भागी। मामला थोड़ा पेंचीदा था, इसलिए मेघा भी उसके पीछे जाने लगी, और इन दोनों के पीछे लोकेश का एक शातिर आदमी, जो सुबह से अपस्यु के पीछे था, पब के पीछे सुनसान से जगह को सुनिश्चित करने के बाद…. उसने तुरंत लोकेश से संपर्क किया…

"सर आप का शक सही निकला। शायद इस लड़के को आपके बारे में सब पता है।"… इतना कहने के बाद लोकेश से वो आज सुबह से लेकर अब तक की घटनाओं का ब्योरा देने लगा, जिसमें एक क्लोज डोर मीटिंग की बात बताया, जो इतना हाई टेक जगह था कि जितने भी जतन उसने किए, लेकिन अपस्यु के साथ किसकी बात हुई और क्या बात हुई, वो सुन नहीं सका। अपस्यु, मेघा को उलझाने के लिए कैसे उस पब में पहले से पहुंचा और साथ में यह भी उसपर एक लड़की पहले से नजर बनाए हुई थी जिसके बारे में अपस्यु को पहले से पता था। ..

लोकेश ने जब उसके आखरी के कुछ बातें सुनी, फिर वो समझ चुका था कि जितना छोटा उसने अपने इस नए दुश्मन को समझा था वो उतना भी छोटा नहीं। अपने जासूस कि बात पर वो तेज हसने लगा। फोन लाइन के दूसरे ओर उसके अट्टहास भरि हंसी वो जासूस सुन रहा था, तभी एक चींख निकली और वो जासूस सदा के लिए ख़ामोश हो गया।

दूसरे फोन लाइन से लोकेश को आवाज़ आयी… "काम हो गया।"… लोकेश उसे फिर आज रात अपस्यु को खत्म करने का हुक्म देकर लाइन कट किया, और दूसरे लाइन से मेघा को सुनने लगा।…

इधर पब से निकलकर अपस्यु पार्किंग के ओर बढ़ा, श्रेया दौड़ती हुई उसके पीछे पहुंची और उसके कपड़े को पकड़ कर खींचने लगी… अपस्यु पीछे मुड़कर उसे देखते ही हसने लगा।…. "मै अभी एक काम निपटा रहा हूं, इसलिए अभी कुछ भी समझा नहीं पाऊंगा। तुम सीधा अपने फ्लैट चली जाओ, मै आज रात तुमसे मिलता हूं।".. श्रेया इससे पहले कुछ कहती सामने से मेघा भी उसी के ओर आने लगी। उसे देखते ही अपस्यु एक बार फिर बोला…. "अब जाओ यहां से और हमारे बारे में अपने टीम से भी डिस्कस मत करना। वरना अपनी बेवकूफी का एक परिणाम तुम पहले भी देख चुकी हो। अब जाओ।"…

श्रेया अनगिनत सवाल अपने मन में लिए वहां से चली गई। इधर जबतक अपने इठलाते क़दमों को आगे बढ़ती हुई मेघा अपस्यु के पास पहुंची…. "ओह तो ये श्रेया है।"

अपस्यु:- हां जबसे मेरा और ऐमी का रिश्ता सामने आया है, बेचारी का दिल टूट गया और मुझे रिझाने के लिए ये मेरे आस पास ही मिल जाती है।

मेघा:- ओह ! मतलब तुम्हे बस संका थी और उसी आधार पर तुमने एक तीर मारा था।

अपस्यु:- हां हर होशियार इस अंधेरे के तीर का शिकार हो ही जाता है। हम तो कुछ नहीं जानते, लेकिन जैसे ही उसे आभाष करा दो हमे उसके बारे में सब पता है फिर हड़बड़ी में गड़बड़ी कर ही जाते है। खैर छोड़ो, आज तो मै शिकार पर निकला हूं, खाली हाथ थोड़े ना अपनी रात बिताऊंगा..

मेघा:- हीहीहीही… शिकार यहां खुद तैयार हैं। वैसे हां ये सही है कि अब काम को लेकर तुम में कोई रुचि नहीं रही। लेकिन फुरसत की एक रात के लिए तो हमेशा ही रुचि रहेगी… क्यों ना आज रात तुम मेरा शिकार कर लो…

अपस्यु, मेघा को आंख मारते… "आ जाओ बैठ जाओ फिर, आज रात फिर से एक बार सिना जोड़ी का खेल हो जाए।".. "नहीं प्लीज वो खेल नहीं।"…. "क्यों तुम्हे मज़ा नहीं आया था क्या।"…. "हीहीहीही… मज़ा था या साजा आज तक तय नहीं कर पा रही, लेकिन जो भी था, वो कातिलाना था।"…

दोनो की हॉट एरोटिक बातें शुरू हो गई। लोकेश उनकी बात सुन सुनकर विचित्र ही मनोदशा में चला गया था। कभी एक मन सोचता कि लड़के ने तुक्का मरा और मेरा एक एजेंट मरा गया, तो फिर दिमाग में ख्याल आता कि मेघा को कहीं कोई ऑफर देने से पहले उसे फसा तो नहीं रहा। कुल मिलकर लोकेश की भी वहीं हालत हो चुकी थी, जैसा कुछ दिन पहले श्रेया की थी। …

बिल्कुल भ्रमित करने वाला माहौल, जिसमे एक पल लगे कि ये लड़का अपस्यु सब कुछ जान रहा है और लंबी योजना पर काम कर रहा है, तो अगले पल लगता कि कुछ नहीं जानता केवल एक दिलफेंक आवारा है जो अपनी मर्जी का कर रहा।

इधर लोकेश उनकी आवाज़ साफ सुन रहा था.. दरवाजा खुलने से बंद होने तक की आवाज़। फिर उधर से को हंसी की किलकारियों के साथ कभी मादक आह तो कभी तेज जोड़ की चीखें। कभी मेघा की मिन्नतें तो कभी अट्टहास भरी हंसी। और इसी बीच एक तेज खटाक की आवाज़ और उस ओर से आने वाली सभी आवाज़ बंद…

लोकेश अपने ऑपरेटर से जवाब तलब करते… "क्या हुआ ये आवाज़ आना क्यों बंद हो गया।"

ऑपरेटर:- सर लगता है ब्रा पाऊं के नीचे आ गया होगा, डिवाइस बेकार हो गई है।

लोकेश चिल्लाते हुए…. "आखिर उसे पता कैसे चला की हमने माईक ब्रा में छिपा रखी थी।"

ऑपरेटर:- सर दोनो का जोश को देखकर लगता नहीं कि उन्हें कुछ पता भी होगा।

लोकेश:- कुछ भी करो लेकिन मुझे अभी उसकी बात सुननी है।

ऑपरेटर:- बस कुछ देर सर..

वो ऑपरेटर कंप्यूटर पर काफी तेज खिटीर पिटीर करते अपने हाथ चलाया और एक मिनट बाद लोकेश को इशारे से मेघा को कॉल लगाने के लिए कहने लगा। लोकेश ने मेघा को कॉल लगाया। पहली घंटी पूरी हो गई मेघा ने कॉल नहीं लिया। लोकेश ने दोबारा फोन लगाया.. कुछ देर के बाद मेघा कॉल पिक करती… "अभी .. आह्ह्हह्ह ! बाद में बात करो!" .. तेज चढ़ती श्वांस में मेघा ने जल्दी से अपनी बात कही और कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।

इधर से ऑपरेटर जीत का अंगूठा दिखाते, फोन के माईक से आ रही आवाज़ को सुनाने लगा। अब भी मेघा की मादक सिसकारी आ रही थी। कभी तेज दो कभी धीमी। ऐसा लग रहा था जैसे वहां सब बिना वीडियो के पोर्न के ऑडियो का पूरा मज़ा ले रहे थे।

और कुछ देर बाद वहां बिल्कुल सन्नाटा पारा रहा, बस बीच-बीच में एक दो बार चूमने कि आवाज़ और लगभग 15 मिनिट… "कहां जा रही हो मुझे छोड़कर"

मेघा:- आह्ह ! क्या मज़ा दिया है तुमने… एक हॉट शॉवर लेकर वापस आती हूं।

अपस्यु:- तुम ऐसे नंगी खड़ी ना रहो मेरा खड़ा हो जाता है…

मेघा:- हीहीहीहीही… तुम्हारा क्या होता है और क्या नहीं ये मुझे क्यों बता रहे हो। मैं तो यहां जबतक हूं पूरी ओपन हूं।

तभी फिर कुछ क़दमों कि आवाज़ और फोन से बिल्कुल आवाज़ आना बंद हो गया। लोकेश वापस से चिल्लाया, ऑपरेटर अपना छोटा सा मुंह बनाते…. "सर अब दोनो बाथरूम के अन्दर रास लीला मना रहे, तो इसमें मै क्या कर सकता हूं। शूटर को भेजकर दोनो को खत्म ही कर दीजिए ना।

लोकेश:- नहीं, शूटर को वापस बुला लो। इसपर से सारे सर्विलेंस हटाओ, हम गलत जगह फोकस कर रहे है। इसे और इसके परिवार को हम जब चाहे तब मार सकते है, और जब मारना ही है तो इसपर इतना ध्यान क्यों। वैसे भी इसकी जो भी प्लांनिंग होगी वो उद्योगपति विक्रम राठौड़ और लोकेश राठौड़ के लिए होगी। इसकी तो रूह ही समझेगी की मै क्या हूं?

इधर जैसे ही अपस्यु फ्लैट पहुंचा, उसका खेल शुरू हो चुका था। सेक्स के दौरान वो इतना हावी रहा की मेघा पागल हो गई उन उन्माद में। जैसे ही वो माईक टूटा अपस्यु को एक छोटा सा विंडो मिल गया। तुरंत ही उसने ब्रा की कारीगरी में छिपे माईक को दिखाते हुए, अपस्यु ने मेघा से कहा था कि ये बेकार हो गया है, अब लोकेश उसकी बात सुनने के लिए कोई नया हथकंडा अपनाएगा।

मेघा तो दंग थी, लेकिन अपस्यु ने उसके सारे आश्चर्य के भाव को पुनः एक कामुक उन्माद में परिवर्तित करते हुए बस अभी उसे फॉलो करने और एन्जॉय करने का सलाह दिया। फोन छोड़कर दोनो बाथरूम में जाने के बदले एक कमरे में गए…

मेघा, जैसे ही कमरे में पहुंची…. "तो वो तुम और तुम्हारी टीम थी जो लोकेश से बदला लेने के चक्कर में हमारे पैसों का नुकसान किया।"..

अपस्यु:- क्या बात है, मैंने एक माईक क्या दिखा दिया तुम तो जड़ से पकड़ना शुरू कर दी।

मेघा:- यह मेरे सवाल का जवाब नहीं..

अपस्यु:- जब बात बदले कि हो रही हो, तो सीधा सा गणित होता है मेघा, गेहूं के साथ घुन भी पिसता है। क्या ऑफर किया लोकेश ने अपने बेस पर, आज सुबह की मीटिंग में…

मेघा:- ओह तो तुम्हे उसके साम्राज्य और उसके ठिकाने का पूरा पता है और वो होशियार समझता है कि तुम्हारी प्लांनिंग दिल्ली के बॉडी गार्ड को देखते हुए होगी। खैर तुम्हे उसके साम्राज्य के बारे में पता होने से क्या होता है, तुम और तुम्हारी फैमिली वैसे भी मरोगे, क्योंकि उसके पाले सैतानो का मुकाबला करना किसी के बस की बात नहीं। तुम्हारे जाने का थोड़ा सा अफ़सोस तो होगा डार्लिंग, लेकिन खुशी इस बात की होगी की हमारे बीच रहकर जिस दुश्मन को पहचान ना पाए, वो मर जाएगा। चिंता मत करो, तुम्हारे इस राज के बारे में मै किसी को नहीं बताउंगी।

अपस्यु:- हाहाहाहाहा… जी शुक्रिया, वैसे एक बात बताओ, हवाला के पैसे जाने का शक तो पहले एक दूसरे पर ही किए होगे, फिर अब तुम दोनो मिल गए तो पुरा इल्ज़ाम किस गरीब के सर फोड़ दी?

मेघा:- अच्छा सवाल है। वैसे कमाल का गेम था वो भी वाकई, लेकिन ये क्यों भुल जाते हो, हम लंबे समय से पार्टनर्स है और बिना भरोसे धंधा नहीं होता। और कहते है ना जो गड्ढा खोदता है लोग उसी में फंसते है। बस तुम्हारे खेल का नतीजा भी वही होगा। तुम्हारा क्लोज वो होम मिनिस्टर और उसके साथ तुम्हारे प्यारे भाई का वो ससुर राजीव मिश्रा साथ में उसकी पत्नी, बेटी, बेटा सब मरेंगे। ये कतई नहीं सोचना कि मै तुम्हारी बातों में आकर ये राज खोल रही, बस तुमने मुझे एहसास करवाया की कोई मुझ पर लगातार नजर दिए है सो उसके बदले मैंने तुम्हे यह जानकारी दी।
 
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