Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 18 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 99

तेरा ध्यान किधर है?

राहुल सर ने बहुत तेज आवाज में kaha...Sumit की ये लापरवाही उन्हें बिलकुल पसंद नहीं आया.

सुमित:- सॉरी sir...Kuch देर के लिए कंसन्ट्रेट नहीं कर पा रहा था.

1 घंटे के सर्जरी के बाद चाहते हुए भी सुमित सर्जरी में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा था.

फिर सुमित सर्जरी में ध्यान देने लगा.

डॉ. राहुल:- बहुत बार कह चूका हूँ जितना ड्यूटी टाइम तुम लोगो का hai...Utna hi काफी hai...Lekin तुझे तो ओवरटाइम करना hai...Aur इतना सर्जरी कर चूका है पिछले एक हफ्ते में की इस सर्जरी में कंसन्ट्रेट नहीं कर पाए रहा है.

ये तुरप (प्रोस्टेट सर्जरी) है...90 मं से ज्यादा टाइम लग गया तो सर्जरी को यही रोकना padega...Aur तू है की हर चीज में देरी कर रहा है.

राहुल सर का हाथ (सर्जरी के लिए) और मुंह दोनों एक साथ चल रह था.

सुमित:- सर ओवरटाइम का प्रॉब्लम नहीं hai...Ussi से कॉन्फिडेंस बढ़ रहा hai...Aaj किसी सोच में अटका हुआ hun...Usse बाहर निकल hi नहीं पा रहा हूँ.

डॉ. राहुल:- गेट आउट.

पहली बार राहुल सर ने सुमित के चेहरा को देखते हुए कहा.

सुमित:- सॉरी सर?

हैरानी के साथ सुमित ने पूछा.

डॉ. राहुल:- अब्ब क्या हिंदी में बताना पड़ेगा.

सर का गुस्सा देख सुमित भी अब्ब बिना कुछ बोले वह से निकल गया.

उससे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था.

बाहर आ कर ओट ड्रेस चेंज कर के वो हॉस्पिटल प्रेमिसे से बाहर निकल जाता है.

तभी वो आशीष को फ़ोन लगाता है.

आशीष:- हाँ bol...Jarur कोई काम होगा? वर्ण तू क्यों याद करेगा मुझे!!

सुमित:- अब्ब और नहीं होगा मुझसे.

आशीष:- क्या मतलब?

सुमित:- अब्ब तो समझ जा topic...Explain करने की मूड में नहीं हूँ.

आशीष:- इस बार भी जल्दबाज़ी!!!

सुमित:- नहीं इस बार देर कर चूका hun...Abb मुझसे नहीं हो paayega...Thak चूका हूँ खुद को बदलने की हर एक कोशिश करके.

आशीष:- मुझे अभी भी जल्दबाज़ी hi लग रहा है.

सुमित:- इस बार फैसला कर चूका hun...Bas तुझे ये बता रहा हूँ की इस टॉपिक में कोई बायत मत करना और सुग्गेस्टिव तो देना hi mat..Abb छिड़ होने लगा है mujhe...Abb तो ये मेरा पर्सनल लाइफ के साथ साथ प्रोफेशनल लाइफ पर भी असर दाल रहा है.

इतना कह कर सुमित फ़ोन कट कर देता है.

कॉफ़ी के दो घूँट hi पीया था की संजना भी वह आ गयी.

संजना:- पागल हो क्या तुम? सर्जरी करते वक्त ऐसा केयरलेस कैसे कर सकते हो तुम?

सुमित:- प्लीज Sanjana....Jaao यहाँ se...Abhi मूड ठीक नहीं है.

संजना:- ऐसे कैसे?

सुमित:- प्लीज जाओ.

इस बहार सुमित के आवाज में गुस्सा भी था.

सुमित की इस रूप से हैरान हो कर संजना वह से निकल जाती है.

आधा घंटा के बाद सुमित के मोबाइल में फ़ोन आता hai...Phone राहुल सर का था.

डॉ. राहुल:- ध्यान कहा था आज तेरा?

सुमित:- सॉरी sir...Kuch पर्सनल प्रॉब्लम था इस वजह से.

डॉ. राहुल:- शायद ये परेशानी अभी भी hoga...Abhi ज्यादा कुछ कहूंगा नहीं.

देख एक बात कहता हूँ अच्छे से sunn...Chahe कितना भी बड़ा सर्जन बन जा लेकिन सर्जरी करते वक्त दिमाग एकदम स्थिर rakh...Aise हजार तरह के सोच के साथ करेगा तो पेशेंट के साथ साथ अपने लिए भी परेशानी खड़ा करेगा.

आज तू हर के स्टेप में गलती कर रहा tha...Painting से ले कर इरीगेशन तक और देर इतना कर रहा था की पेशेंट को कभी भी वाटर इंटोक्सिकेशन सिंड्रोम (कम्प्लीकेशन) हो सकता tha...Tera स्किल और नॉलेज बहुत अच्छा है लेकिन कुछ ऐसी गलती से हमेशा बच.

परवल प्रॉब्लम सब का होता hai...Usse suljha...Agar नहीं सुलझ रहा है तो और टाइम ले लेकिन ऐसे आधा मन के साथ सर्जरी कभी मत करना.

आज गुस्सा तो आ रहा था लेकिन इतना भी नहीं की तुझे निकाल diya...Aisa हर रेजिडेंट (MD/MS स्टूडेंट) के साथ देखा है maine...Tujhe ओट रूम से निकलने का वजह ये समझाना था की कितना बड़ा गलती कर रहा है तू.

सुमित:- समझ गया sir....Aaj मई खुद शर्मिन्दा हूँ इस गलती से.

डॉ. राहुल:- अब्ब मत dohrana...Aur हाँ बार बार एक hi गलती मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं.

इतना कह कर राहुल सर फ़ोन कट कर देते है.

सुमित अभी भी साफé में बैठा था और इतने में उसके मोबाइल में एक मैसेज आता है.

मेघा:- कहा बिजी हो सर्जन?

और फिर मेघा का फ़ोन आता hai...Lekin सुमित मोबाइल स्विच ऑफ करके वह से निकल जाता है.


प्रेजेंट


एक लड़की ने दूर khola...Usse देखते hi.

सुमित:- इस बार लेट नहीं किया डार्लिंग तुमने.

कीर्ति:- तुम हो संजना!!!!

जाना पहचाना चेहरा देख कीर्ति कुछ ज्यादा hi हैरान रह गयी.


सुमित ने तो बिना देखे hi कह दिया tha...Lekin जब सुमित की नजर उस लड़की पर पड़ा तो.

सुमित:- ओह्ह सॉरी!!

लड़की:- बहुत जल्दबाज़ी में लग रहे है जीजू आप.

कीर्ति:- जीजू?

कीर्ति की दिमाग चकराने लगा था अब्ब.

कीर्ति:- तुम तो मेघा की दोस्त हो ना? एक दो बार देखा है.

लड़की:- हाँ कीर्ति.

कीर्ति को इस में भी हैरानी हुआ.

लड़की:- अरे कंफ्यूज मत ho...Memory अच्छा है mera...Kisi से मिल लू तो उसकी चेहरा और नाम बहुत मुश्किल से भूलती हूँ.

सुमित:- बातों में इंट्रोडस करना भूल hi गया.

ये है मेरी साली साहिबा मिस Anita...Jo अपने दोस्त मेघा से मिलने यहाँ आयी है.

सुमित:- (तो अनीता) लेकिन मेघा कहा गयी?

अनीता:- Hospital...Abhi गयी hai...Kuch जरुरी काम था शायद.

कीर्ति:- लेकिन मेघा से मिलने यहाँ क्यों आयी हो? कोई कुछ जवाब देता उससे पहले सुमित के मोबाइल में फ़ोन आता है.

सुमित:- हाँ संजना बोलो.

कीर्ति के भी कान खड़े हो गए abb...Lekin दूसरी तरफ की कोई आवाज कीर्ति को सुनाई नहीं दिया.

सुमित:- Ok मई आ रहा हूँ.

फ़ोन कट करने के बाद.

सुमित:- एक इमरजेंसी केस hai...Intestinal ऑब्स्ट्रक्शन का...3-4 घंटे बाद आऊंगा.

कीर्ति:- ये सर्जरी तो फाइनल ईयर रेजिडेंट भी कर सकते hai...Tum hi क्यों?

सुमित:- Sorry...Intestinal ऑब्स्ट्रक्शन ट्यूबरक्लोसिस की वजह से hai...Agar थोड़ा भी गलती हुआ तो एडहेसिव की वजह से बार बार ऑब्स्ट्रक्शन होता रहेगा.

कीर्ति:- और तुम ये सर्जरी कर पाओगे?

सुमित:- क्यों नहीं? प्रैक्टिस बहुत किया hai....Ovetime कर कर ke...Final ईयर तो प्यार और मोह माया से उठ कर ोवेटीमे सर्जरी में बिता hai...Issi का फायदा है. :डी

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा और यही बात कीर्ति की दिल में चुभ गया.

सुमित:- अच्छा चलता hun...Aate वक्त मेघा से भी मिलवा dunga...Puraani दोस्ती नाम के लिए hi सही लेकिन है.

कीर्ति का दिमाग अब्ब फटने hi वाला था कन्फूसिओं की वजह se...Sumit की शादी की बात से पहले hi उसकी दिल टूट गया था और ऊपर से ये कन्फूसिओं.

सुमित की शादी संजना से हुआ है तो मेघा यहाँ क्या कर रही है? सुमित की आवाज में अभी संजना के लिए वो प्यार नहीं था जो हॉस्पिटल से आते वक्त था और गेट खुलने के बाद?

और उससे भी बड़ा sawaal...Kaun है संजना?

यही सवाल कीर्ति को बार बार परेशान कर रहा था.
 
फ्रेंड्स गेट रेडी फॉर रेगुलर updates...Next अपडेट आज hi....Ek नया मोड़ के साथ...4-5 उपदटेस के बाद वो उपदटेस पोस्ट होंगे जो आप सभी पढ़ने के लिए इतने दिनों का इंतजार कर रहे थे...रोमांस

उपदटेस भी रेगुलर होंगे 2,3 डेज के गैप mein...Bas लाइफ और पढ़ाई ऐसे hi चलता रहे :D...Koi दुर्घटना घाट जाए तो कुछ नहीं कह sakta...Aap सभी के कमैंट्स भी जल्द आये तो अपडेट और जल्दी पोस्ट karunga....Abb डिले होगा तो आप सभी के रिव्यु के इंतजार में :lol1:
 
अपडेट 100

फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे हो तुम?

हॉस्पिटल कैंटीन में सुमित को देखते hi गुस्से में मेघा ने पूछा.

पिछले 2 हफ्ते से सुमित या तो मेघा की फ़ोन कट कर रहा था या फिर सुमित की मोबाइल स्वित्चेद ऑफ hi मिलता.

सुमित:- ओह्ह मेघा तुम.

फीका सा जवाब दिया सुमित ने.

मेघा:- कुछ पूछा है मैंने तुमसे?

सुमित:- थोड़ा बिजी हूँ मई फिलहाल.

मेघा:- अच्छा किस चीज में बिजी हो?

सुमित पर अब्ब मेघा का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

चाय की आखिरी घूंट पी कर.

सुमित:- अभी एक सर्जरी में जा रहा hun...Baad में मिलता हूँ.

मेघा कुछ बोलती उससे पहले सुमित वह से निकल गया.

कुछ दूर बैठी संजना भी पिछले कुछ दिनों की हरकत देख हैरान थी.

मेघा को भी सुमित की इस बदलाव कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Aaj नहीं तो कल सुमित को जवाब देना hi होगा इसी सोच के साथ वो भी वह से चली गयी.

ात इवनिंग.

अभी भी कह रहा hun...Galat कर रहा है tu...Bahut गलत.

एक बार फिर आशीष ने सुमित को समझाने के लिए फ़ोन किया.

सुमित:- अच्छा क्या गलत है?

आशीष:- तुझे दिखाई नहीं देता मेघा का प्यार? और क्या तू मेघा से प्यार नहीं करता.

सुमित ने एक लम्बी सांस ले कर कहना सुरु किया.

सुमित:- करता hun...Bahut प्यार करता hun...Aur इसी प्यार की वजह से उससे अलग होने जा रहा हूँ.

आशीष:- क्या kya...Kya मतलब?

सुमित:- अगर एक शब्द में कहु तो मई मेघा को डेसेर्वे नहीं करता.

आशीष:- अबे एक शब्द को गोली maar...Aur पूरी वजह bataa...Kyu तू मेघा को डेसेर्वे नहीं करता.

सुमित:- अब्ब मई वो सुमित नहीं रहा जो आशिक़ हुआ करता tha...Pyaar के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता tha...Aaj वो सुमित हूँ जो प्यार मई टूट चूका hai...Usse खुद अपने प्यार मई विश्वास नहीं रहा.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

आशीष को भी लगने लगा की कुछ तो गलत हुआ है.

आशीष:- अब्ब क्यों हुआ तुझे?

सुमित:- कीर्ति से अलग होने के बाद मई कुछ इस तरह से टूट गया की अभी तक जुड़ नहीं पाया हूँ.

उस जुदाई ने मुझे अंदर तक मेरे वजूद को हिला के रख दिया था.

सच कहते है लोग प्यार में टूट जाने के बाद इंसान पहले जैसा नहीं रहता.

नार्मल तो हो चूका hun....Lekin कुछ और hi normal...Jo पहले से काफी अलग है.

आशीष:- क्या बात कर रहा है? कीर्ति को तो भुला चूका है ना तू? फिर ये सब?

सुमित:- उसकी प्यार को तो कब का भुला चूका hun...Abb तो कीर्ति खुद मेरे पास आ गयी और कहती है की वो भी मुझ से प्यार करती hai...Uski तरफ मुद कर भी नहीं देखूंगा.

आशीष:- फिर परेशानी क्या है?

सुमित:- यही की उस इंसिडेंट ने मुझे पूरी तरह से बदल गया.

हमेशा खुद पर विश्वाश tha...Ussi विश्वाश के साथ सब कुछ हासिल kiya...Har एक इच्छा पूरा kiya...Apna hi नहीं हर एक दोस्त की मुशीबत दूर करता था.

कीर्ति नाराज हो गयी तो विश्वाश था आज नहीं तो कल मना hi लूंगा उससे.

लेकिन वक्त का कड़वा sach...Haar गया इस मामले mein...Kirti की प्यार तो चला hi gaya...Saath में खुद पर जो विश्वाश था जो अभिमान था वो सब भी. :(

पल भर में सब कुछ टूट ता हुआ महसूस hua...Jo हर किसी का परेशानी दूर करता था वो खुद का परेशानी दूर नहीं कर saka...Aur परेशानी भी क्या? प्यार.

कुछ भी keh...Ek सच्चा आशिक़ था यार mai...Dil टूट gaya...Jaha मेरे सभी दोस्त में प्यार काम हवस ज्यादा भरा tha...Unn में मई hi एक था सच्चा प्यार करने वाला.

कीर्ति की भी गलती नहीं tha...Usse मई पसंद नहीं था तो नहीं tha...Kya कर सकता था? लेकिन मेरा प्यार तो हार गया न?

एक नहीं 5 ब्रेक ups...Bhale hi पहले के 4 प्यार ऐसे hi नाम का tha...Lekin 5 ब्रेअकूपस लड़की की तरफ से hi hua...Khud में hi कमजोरी दिखने लगा.

एक बार इंसान के अंदर का अभिमान पूरी तरह से टूट जाता है तो इंसान वैसा बिलकुल नहीं रहता.

कॉन्फिडेंस डाउन तो था hi...Upar से मेन्टल और इमोशनल trauma...Puri तरह से हार गया यार.

वो तो माँ, पापा, मेघा और तूने sambhala...Pata नहीं कैसे एक जीरो में हीरो देख लिया सभी ने.

तुम सभी की वजह से जिंदगी का मकशद तो मिल gaya...Lekin इंसान वैसा नहीं raha...Puri तरीके से बदल गया हूँ.

अब्ब आशीष को समझ में आया सुमित कितना टूट चूका है.

आशीष:- तूने कहा na...Megha ने तुझे संभाला hai...Bahut प्यार करती है यार वो tujhse...Bas तुझे दिखाई नहीं देता.

इस बात पर सुमित हँसता है.

आशीष:- क्या हुआ? क्यों हंस रहा है?

सुमित:- तू कहता है मुझे नहीं पता की मेघा मुझे पसंद नहीं karti...Megha से भी पहले से जानता हु मई की वो मुझसे प्यार करती है.

पहली मुलाक़ात में वो मुझसे अत्त्रक्टेड thi...Uss वक्त मेरा भूल था की मैंने उसके साथ गलत किया.

जब मई उससे खुदसे नफरत करने पर मजबूर कर रहा था तो कहा से उससे मेरी अच्छाई दिख गयी की वो मुझसे प्यार करने लगी.

तब से ले कर वो मुझसे प्यार करती hai...Aur प्यार भी ऐसा की हर दिन के साथ बढ़ता hi जा रहा hai...Wo इसी इंतजार मई है की मई कब उससे अपने दिल की बात बोलूंगा.

आशीष:- तू भी उससे प्यार करता है और वो भी तुझसे प्यार करती hai...Ye बात तू भी जानता है फिर परेशानी क्या है? कह दे अपनी दिल की बात और जिंदगी की सफर में साथ आगे बढ़ जा.

सुमित:- अगर ये कर दिया तो मेघा के साथ धोखा होगा.

आशीष:- अब्ब ये क्या कह रहा है?

सुमित:- वो तो मुझसे प्यार करती hai...Wo मेरे लिए सबसे सही hai...Lekin मई उसके लिए नहीं.

आशीष:- तू भी तो उससे प्यार करता है?

सुमित:- करता hun...Lekin अब्ब वो विश्वाश नहीं रहा की आगे भी प्यार निभा पाऊंगा या nahi...Wo जो प्यार डेसेर्वे करती hai...Wo मई नहीं दे पाया तो उसके साथ अन्याय होगा.

आशीष:- भाई मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है?

सुमित:- बहुत कोशिश किया मैंने अपने दिल की प्यार जगाने ki...Megha से प्यार भी hai...Lekin वो विश्वाश नहीं है की कितना साथ निभा paaunga...Abhi भी खुद को कही न कही लाचार hi महसूस करता हूँ.

आशीष:- ऐसा तो नहीं था यार तू?

सुमित:- बस दिखने के liye...Mein जितना मस्त हुआ करता था अब्ब वो कही खो सा गया hai...Kuch अलग hi सीरियसनेस आ गया है.

वो तो दोस्तों के साथ और मेघा के साथ नार्मल दिखने के लिए ऐसा मस्ती और बेवकूफी करता hun...Lekin मेरे अंदर अभी भी तूफ़ान चल रहा है.

सच कहु तो एक साल पहले तक anti-depressant में tha...Mental ट्रामा भी बहुत दर्दनाक hai...Bahut मुश्किल से उभरा हुआ हूँ.

आशीष:- अब्ब तो मुझे भी दर लग रहा है यार.

सुमित:- दर mat...Pyaar के अलावा सभी चीज में रिकवरी कर रहा hun...Ek ऐसा धक्का लगा है जिसने मुझे अंदर से तोड़ दिया tha...Abhi तक उससे उठ hi रहा hun...Haan बहुत हद्द तक ठीक है अब्ब.

आशीष:- बस यार मेघा को जाने मत dena...Baaki सब ठीक हो जाएगा.

सुमित:- क्या लगता है तुझे? अबे ये मेरी भी ख्वाहिश hai...Megha मेरे साथ रहे हमेशा hamesha...Mujhe प्यार kare...Har एक पल हर एक मोड़ में मेरा साथ दे :क्राई:

उसी वजह से उसके पास रहता tha...Uske साथ घूमता tha...Shayad उसकी प्यार में सब कुछ भुला कर उसका हो jaau...Lekin अभी तक अपना उस कमजोरी hi भारी पड़ा रहा.

इस वजह से इतने वक्त तक उसके दिल में एक आशा को जिन्दा rakha...Lekin और धोखा नहीं कर सकता उसके saath...Aur कहु भी तो क्या? कुछ साल मेरे लिए और रुक जाओ...

आशीष:- अभी भी लगता है यार की तू गलत कर रहा है?

सुमित:- जानता hun...Lekin मजबूर हूँ.

आशीष:- क्या वो तेरे बिना खुश रहेगी?

सुमित:- इतनी जल्दी तो nahi...Lekin बाद में जरूर रहेगी.

और अगर मेरे साथ rahi...Aur मेरा वो घाव नहीं भरा तो हमेशा के लिए दुखी रहेगी.

आशीष:- तो क्या करेगा अब्ब तू?

अब्ब तो आशीष भी हार मान चूका था.

सुमित:- कुछ nahi...Pichhli बार नफरत पैदा करने की कोशिश की तो प्यार कर baithi...Iss बार कुछ नहीं करूँगा.

अगर उससे लगेगा की अब्ब मुझे उसकी कोई परवाह नहीं तो वो खुद मुझसे नफरत करेगी.

इतना कह कर सुमित ने फ़ोन कट कर दिया और मेघा की फोटो पॉकेट से निकाल कर.

सुमित:- तुमने मुझे सँभालने की हर एक कोशिश किया लेकिन मई संभल नहीं paaya...Dil का ये घाव पता नहीं कब bharega...Saath रहने की इच्छा के बावजूद साथ नहीं रह सकता. :क्राई:

ी डोंट डेसेर्वे यू.
 
अपडेट 101


आफ्टर 4 मोनथस


सुमित और मेघा का रेजीडेंसी ख़त्म होने में बस 2 महीना बाकी रह गया था.

सुमित का ऐसे मुंह फेर लेना मेघा को बहुत चुभ रहा था.

न जाने कितने रातें इस उम्मीद में बिता की कल एक नया सवेरा होगा और उसका सुमित फिरसे उसके पास आ jaayega...Pehle की तरह उसको कुछ नया सा सरप्राइज देगा और जो प्यार दीखता था उससे सुमित की आँखों में उससे सुमित अपने जुबान के रास्ते चासनी की मिठास भरी आवाज में कहेगा.

लेकिन ये इंतजार इंतजार hi रह gaya...Sumit की व्यबहार में ना hi प्यार आया और ना hi rukhapan...Bas वो मेघा को और ज्यादा नजरअंदाज करने लगा.

मेघा जब भी सुमित से बात करती सुमित बात को hi घुमा deta...Kayi बार तो मेघा गुस्से में चली जाती.

लेकिन जब गुस्सा का भी फायदा नहीं दिखा तो मेघा प्यार से सुमित से बातें करने lagti...Lekin इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ.

थक हार कर आखिर मेघा ने सोच लिया की वो खुद सुमित को अपने दिल की बात batayegi...Ye बात तो पता चल hi जायेगी की सुमित का क्या ख्याल है उसके बारे mein...Roj रोज की परेशानी से अच्छा है की एक बार में hi सच पता चल jaaye...Chahe वो मीठा हो या कड़वा.

सुमित को पार्किंग में देख मेघा भी पार्किंग में चली जाती hai...Sumit बाइक निकाल hi रहा था की संजना भी वह आ जाती है.

संजना:- Hello सुमित.

सुमित:- हाँ कहो.

संजना:- एक बात पूछनी थी तुमसे.

सुमित:- यहाँ? कही बाहर चलते है?

संजना:- नहीं nahi...Bahut मुश्किल से कही मिलते हो tum...Iss बार मिस कर दिया तो पता नहीं कब मौका मिलेगा.

तब तक मेघा भी वह पहुँच जाती hai...Sumit बस हाथ हिला कर उससे Hi कहता है.

सुमित:- कुछ जरुरी बात है क्या?

संजना:- बहुत जरुरी.

सुमित:- हाँ कहो.

संजना:- तुम किसी से प्यार करते हो?

उम्मीद भरी आवाज में संजना ने pucha...Aur उसी नजर से मेघा ने.

सुमित अपने दिल को मजबूत करने की हर एक कोशिश कर रहा tha...Shayad वो जानता था ये hi वो वक्त है जब उससे सबसे मुश्किल फैसला लेना है.

सुमित:- तुम ये क्यों पूछ रही हो?

संजना:- पहले मेरी सवाल का जवाब दो?

सुमित:- नहीं पहले मेरे सवाल का जवाब दो?

संजना:- ठीक hai...Agar तुम सिंगल हो तो मई तुमसे शादी के लिए ऑफर करने वाली हूँ?

ये सुन कर तो मेघा का गुस्सा सातवे आसमान में पहुँच gaya...Bas वो सुमित की जवाब का इंतजार कर रही थी.

सुमित:- शादी.

संजना:- Haan...Abb तुम bataao...Single हो या कमिटेड?

सुमित ने अब्ब अपना दिल को पत्थर का बना liya...Aankh बंद किया तो मेघा की चेहरा दिखने laga...Aur मुंह से जवाब निकला...

सुमित:- सिंगल.

बस इतना hi काफी था मेघा की दिल तोड़ने के liye...Ek बार फिर सुमित ने उसका दिल तोड़ diya...Abb उसका धैर्य ने जवाब दे diya....Aankho से आंसू के कुछ बून्द गिरने के साथ hi वो वह से निकल gayi...Uska सब कुछ ख़त्म हो चूका tha...Uska pyaar...Sumit के ऊपर vishwash...Sab कुछ.

मेघा को जाते देख सुमित भी काफी लाचार महसूस कर रहा tha...Usse लग रह था की उसने खुद अपने जिंदगी को खुद से दूर कर दिया.

वो अपने ख्याल में खोया hi था की.

संजना:- तो तुम तैयार हो शादी के लिए?

सुमित:- तुम्हे मुझसे प्यार है?

संजना:- प्यार का तो पता nahi...Lekin तुम बहुत अच्छे लगते हो mujhe...Attractive, बोल्ड, एनर्जेटिक, केयरिंग एंड ात लास्ट हस्बैंड मटेरियल.

सुमित:- ऐसा हुआ करता था mai...Lekin अब्ब नहीं हूँ.

संजना:- क्या मतलब?

सुमित:- वही जो तुमने suna...Aisa फिरसे बनने की नाकाम कोशिश कर रहा tha...Lekin बन नहीं पाया.

संजना:- फिर भी मई तुमसे शादी करना चाहती हूँ.

कुछ देर सुमित ने सोचा और फिर कहा.

सुमित:- कीर्ति को जानती हो तुम?

संजना:- Haan...Tumhari एक्स.

सुमित:- उसी की बहुत गुण तुम में देखा है मैंने.

वो भी मुझसे ऐसे hi अत्त्रक्टेड thi...Lekin जब बात प्यार की आई तो एक कदम भी साथ आगे नहीं बढ़ पाए हम.

वैसा hi तुम्हे अब्ब लग रहा hai...Thoda यूनिक सोच कर तुम मुझ पर अत्त्रक्टेड ho...Lekin जान जाओगी मुझे तो खुद नफरत करोगी.

प्यार करने लायक नहीं हु mai...Abhi जिंदगी की उस दौर से गुजर रहा हूँ जहा मई न चाहते हुए भी उसके साथ गलत कर बैठा हूँ जिसे मुझ पर सबसे ज्यादा भरोषा था.

तुम्हारे साथ तो एक दोस्ती से आगे कुछ भी नहीं है.

संजना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था...

सुमित:- पहले तो बहुत अच्छी दोस्त थी तुम मेरी.

लेकिन जब तुम में कीर्ति की झलक दिखने लगा तो खुद को रोक liya...Tumhare अट्रैक्शन को और बढ़ावा नहीं देना चाहता था और ना hi मई खुद इस चक्कर में पड़ना चाहता था.

जब भी ये बात तुम मुझसे कहना चाहती thi...Bahut अच्छे से बात को घुमा देता tha...Lekin आज जरुरी था तुम्हे सब कुछ बताना.

हम दोस्त से ज्यादा कुछ नहीं बन सकते.

संजना:- तुम किसी से तो शादी karoge...To फिर मई क्यों नहीं?

सुमित:- अभी शादी के लिए तैयार नहीं hun...Na जाने कितने साल लग jaayenge...Karunga या नहीं वो भी नहीं pata...Abb किसी के दिल में और झूठा उम्मीद नहीं जगा सकता.

इतना कह कर सुमित ने बाइक वह से आगे बढ़ा दिया.

संजना:- मई इंतजार करुँगी.

संजना की आवाज में जिद्द tha...Bike रोक कर सुमित ने कहा.

सुमित:- जिद्द अच्छी बात नहीं है Sanjana...Ek बार यही जीडस मुझे ले डूबा था.

फिर सुमित वह से निकल गया.

फ्यू हॉर्स लेटर

सुमित:- मई ी के इन सर?

डॉ. राहुल:- यस के इन.

आज राहुल सर बहुत hi अच्छे मूड में थे.

सुमित:- कुछ काम था सर?

डॉ. राहुल:- बात करना था.

फिर राहुल सर बोलना सुरु करते है.

डॉ. राहुल:- अब्ब 2 मोनथस बाद तेरा पग कम्पलीट हो जाएगा. तेरा 3 साल का रेजीडेंसी बहुत शानदार रहा. मेरा करियर अस ा प्रोफेसर में मैंने 5, 6 hi ऐसे स्टूडेंट्स को इतना अच्छा सर्जन बनते देखा hai...Basics से ले कर एडवांस्ड स्किल में बहुत hi अच्छा hai...Ummeed है तेरा ये नॉलेज और स्किल बहुत लोगों के काम आये.

बहुत एक्सपेक्टेशंस है tujhse....Lekin दर है की कही सब उल्टा न हो jaaye...Jo भी मई देख रहा हूँ तू बहुत डिस्टर्बेद hai...Koi लारेषणी है क्या?

सुमित:- हाँ sir...Ek पर्सनल प्रॉब्लम है.

डॉ. राहुल:- प्यार का?

सुमित:- हाँ सर.

डॉ. राहुल:- ये वही लड़की है naa...Medicine की रेजिडेंट.

सुमित:- हाँ मेघा.

डॉ. राहुल:- तुझसे मिलने सर्जरी की वार्ड में आती थी तो कभी नजर पद जाता tha...Waise भी मुझे प्यार से उतना मतलब नहीं है.

सुमित ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया.

डॉ. राहुल:- अगर साथ रहना है तो बात कर, मामला सुलझा le...Aur अगर साथ नहीं रहना है तो सब कुछ ख़त्म kar...Agar दोनों नाव में प्यार रखेगा तो ज्यादा वक्त नहीं लगेगा डूबने के लिए.

सुमित बस उनकी बात सुन्न hi रहा था कोई जवाब नहीं दे रहा था.

डॉ. राहुल:- अभी तुझे बुलाने का मकशद प्यार पर ज्ञान देना नहीं hai...Bas ये समझाना है की सही फैसला सही वक्त में लेना चाहिए.

देख Sumit...Bahut से लोग है इस दुनिया mein...Har एक फील्ड में अच्छी पकड़ वाले लोग मिल jaayenge...Uss फील्ड में उनका नॉलेज अच्छा होता है उस फील्ड के लिए वो काबिल होते है.

लेकिन कभी सोचा है सिर्फ कुछ hi लोग होते है जो सफल रहते है और बाकी लोग भी सहमत होते है की इस में कुछ अलग hai...Warna हज़ारो, लाखो की भीड़ में क्या फर्क होता है.

वही एक जैसा ज्ञान, काबिलियत, सोच, makshad...Lekin उन् लाखों में भी कोई ऐसा एक जरूर होता है जो सब कुछ वैसा hi होने के बाद भी कुछ अलग होता है.

कभी सोचा है इस बारे में?

सुमित:- सर आपके सवाल का कुछ विचार तो hai...Lekin फिलहाल आपका सुन्ना चाहूंगा.

डॉ. राहुल:- अगर मई अपना विचार कहु तो faisla...Ek सही faisla...Wo भी सही वक्त mein...Jo उसका विवेक दिखता है.

सूना तो होगा hi हज़ारो एम्प्लाइज के बिच एक दो तंग आ कर स्टार्टअप सुरु करते है और कुछ hi वक्त में अपने म्हणत से करोड़पति बन जाते है.

अपना hi एक्साम्प्ले le...Medical एंट्रेंस में लाखों बच्चे परीक्षा देते है लेकिन हज़ार सफल होते hai...Bahut में एक बात कॉमन देखने को मिलता hai...Knowledge, हार्डवर्क और एआईएम. लेकिन उन् में भी कुछ hi सक्सेसफुल होते है.

थोड़ा बहुत लक फैक्टर हटाने पर दिखेगा की जो भी सफल हुए है उन्होंने कुछ अलग तरह का डिसिशन लिया है वो भी सही वक्त में.

प्रोफेशन से ले कर बिज़नेस और बिज़नेस से ले कर leadership...Sabhi जगह काम आता है wisdom...Aur विजडम के लिए चाहिए सही डिसिशन.

फिर वो सुमित को देखते है.

डॉ. राहुल:- पढ़ाई और म्हणत में हमेशा अच्छा hi देखा hai...Lekin विजडम यहाँ पर तुझे पीछे देखा है.

3 साल में. जब भी तुझे अकेला में देखा है तू हमेशा कन्फ्यूज्ड hi रहा hai....Aur यही कन्फूसिओं सबसे बड़ा दुश्मन है विजडम ka...Sahi फैसला लेने hi नहीं देता.

कन्फूसिओं कुछ पल से ज्यादा का नहीं होना chahiye...Yaa तो इस पार या उस paar...Apna विचार और फैसला भी वैसा hi होना chahiye...Agar वही पर अटका रहा तो कभी आगे बढ़ नहीं पायेगा.

और सबसे इम्पोर्टेन्ट है present...Past को ज्यादा सोचेगा तो रिग्रेट होगा और फ्यूचर को ज्यादा सोचेगा तो tension...Present hi है जहा पे म्हणत करेगा तो फुरुरे सिक्योर होगा hi और आने वाले वक्त में पास्ट का रिग्रेट नहीं hoga...Bas इस पल को कन्फूसिओं में बर्बाद मत करना.

सोचा था तू खुद समझ जायेगा लेकिन मुझे hi समझाना पड़ा.

बस ये विजडम की कमी है तुझ mein...Lekin पोटेंशियल है तुझ mein....Bas इस कन्फूसिओं के चक्कर में आगे नहीं बढ़ पा रहा hai...As ा सर्जन बहुत आगे जाएगा ये अभी से दिख रहा है लेकिन किस दिशा में वो तुझे भी पता नहीं hoga...Bas ये दिशा पता करना है और जिंदगी में कुछ नया करना है तो ये कन्फूसिओं को गोली मार, अपने विचार को साग रख और आगे बढ़.

फिर वो सुमित के पास आते है और उसके कंधे में हाथ रख कर कहते है.

डॉ. राहुल:- मेरा तो आगे हो रहा है...5-10 साल बाद रिटायर हो jaaunga...Abb करियर के आखिरी के कुछ सालों में नई जनरेशन को अच्छे से ट्रैन करना है.

नॉलेज और स्किल सीखने के साथ कुछ गलतियां जो नहीं करना है वो भी समझाना जरुरी है.

अगर परेशानी प्यार का है तो या तो अपना ले या फिर दूर हो jaa....Yaa तो खुशियां मिलेगा या फिर dard...Tere लिए भी अच्छा रहेगा और उस लड़की के लिए bhi...Lekin आगे का राष्ट जरूर मिलेगा.

मई नहीं चाहता की मेरा बेस्ट रेजिडेंट ये कन्फूसिओं और टेंशन में अपने पोटेंशियल के हिसाब से काम न कर सके.

फिर राहुल सर वह से जाने लगते hai...Gate में पहुँच कर.

डॉ. राहुल:- उम्मीद है की खबर में तेरे कामयाबी के कहानी सुनने और पढ़ने को milega...Apne विवेक से सही फैसला लेने की कोशिश करना जिंदगी के हर एक मोड़ पर.

यही है इस गुरु का उपदेश.
 
अपडेट 102

राहुल सर की बात सुमित की दिमाग में छाप चूका tha...Sahi तो थे वो, 3 साल से वो एक फैसला नहीं ला पा रहा tha...Aur जी दागी के पिछले 8-9 साल में भी वो काफी पीछे रह गया tha...Sahi फैसला ना ले पाने की कारण.

ऐसे hi 2 महीने और बीत gaye...Kal कॉलेज का आखिरी दिन था.

इस बिच मेघा का दिल तो टूट hi गया tha...Jab कही सुमित और उसकी नजर टकरा जाता तो वो भी सुमित से मुंह फेर लेती थी.

ये सब देख सुमित को और भी दर्द हो रहा tha...Sumit ने फैसला तो ले hi लिया था की वो मेघा से दूर हो jaayega...Lekin मेघा की यादों से वो दूर नहीं हो पा रहा था.

मेघा की यादें उससे और तड़पाने लगा tha...Thik वैसा hi हाल था जैसा कीर्ति के समय हो गया था.

मेघा से मिलने की, बातें करने की मन तो बहुत था लेकिन अब्ब ये सब संभव नहीं था.

सुमित:- मेघा से इस सोच से दूर हुआ की मई उससे वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai खुद संभल जाऊँगा.

लेकिन संभल नहीं पा रहा hun...Ulta दर्द बढ़ता hi जा रहा hai...Abb तो ये दर्द असहनीय होता जा रहा है.

जब कीर्ति से अलग हुआ संभालने के लिए तुम thi...Tumne मेरा दर्द को बांटा tha...Lekin जब तुमसे अलग हो रहा हूँ तो अब्ब संभालने के लिए कोई नहीं है.

मुझे तुम्हारी आदत पद चूका है Megha...Pata नहीं ये कैसा फैसला था तुम भी दुखी हो मई भी dukhi...Lekin खुश कौन है?

बाद की ख़ुशी बाद mein...Filhaal जो दर्द है वही तो संभाला नहीं जा रहा है.

इतना कह कर सुमित सर्जरी के वार्ड से निकल कर अपने रूम की तरफ जा hi रहा था की कॉलेज के गेट में मेघा मिल गयी.

सुमित:- मेघा.

सुमित से और रहा नहीं गया...6 महीने बाद उसने आखिर मेघा को बुला hi लिया.

लेकिन मेघा का जवाब.

मेघा:- एवरीथिंग इस ओवर Sumit...Tumhari शकल तक देखना पसंद नहीं करती हूँ मई.

नफरत भरी मेघा की ये आवाज सुमित की कान में मानो उबले हुए तेल की काम कर गया.

सुमित:- सुनो तो....

लेकिन मेघा वह से निकल gayi....Lekin सुमित के दिमाग में बहुत कुछ छोड़ गयी सोचने के लिए.

रूम में आने के 1 घंटा तक भी सुमित का मन अशांत tha...Baar बार वो अपने फैसले पर सोच रहा था.

दिमाग में चल रहे हलचल को शांत करने का कोई तरीका न मिलता देख सुमित शावर लेने चला गया.

एक तो ठण्ड का मौसम ऊपर से बर्फ की तरह ठंडा paani...Sumit का दिमाग ने अब्ब काम करना hi बंद कर दिया.

कुछ देर बाद जब होश में आया तब ठन्डे दिमाग से सोचना सुरु kiya...Aise hi एक ख्याल उसके दिमाग में आया.

सुमित:- 2 दिन मई मेघा यहाँ से चली jayegi...Hamesha हमेशा के liye...Jab मैंने मेघा से अलग होने का फैसला लिया तो मेघा मेरे पास thi...Mere साथ thi...Vishwash था एक आवाज लगाऊंगा वो दौड़ कर मेरे पास आ jaayegi...Lekin abb...Abb तो वो जा रही hai...Mujhse नफरत करने लगी hai...Ek बहार चली गयी तो हमेशा के लिए चली जायेगी.

फिर मेरा क्या होगा?

यही काफी था सुमित को अंदर से हिलाने के लिए.

सुमित:- पता नहीं क्या फैसला ले लिया? मई खुश नहीं hun...Wo खुश नहीं है.

मई तो बिलकुल भी खुश नहीं हूँ और शायद hi कभी ख़ुशी मिलेगा इस फैसला se...Megha भी कैसे खुश होगी बाद में? अगर उससे प्यार करने वाला नहीं मिला तो?

मई तो करता हूँ न उससे प्यार.

ये सोचते hi सुमित को रेअलिज़तिओन हुआ की वो कितना प्यार करता है मेघा से.

सुमित:- सहित yaar...Ye क्या ब्लंडर कर diya...Mujhe मेघा से प्यार hai...Aur प्यार करने या दिखने की चीज थोड़ी न है महसूस करने की hai...Megha महसूस करती थी मेरा pyaar...Issi लिए तो साथ थी.

यही प्यार तो चाहती थी wo...Kirti से ब्रेकअप क्या हुआ मई तो प्यार का मतलब hi भूल गया tha...Pyaar के नाम में सोचता था मेघा को कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी टाइप का प्यार dunga...Jo की होता hi नहीं है.

लेकिन ये बात पहले क्यों समझ में नहीं आया?

अगले hi पल सुमित को अपने सवाल का जवाब मिल गया.

सुमित:- शायद उस वक्त मेघा साथ thi...Wo तो हमेशा से साथ thi...Issi लिए समझ नहीं paaya...Lekin वो जा रही है अब्ब मुझे छोड़ kar...Aur शायद यही दर उसकी एहमियत और मेरा प्यार मुझे समझ में आ रहा है.

कुछ देर रूम में टहलने के बाद.

सुमित:- अब्ब बहुत hua...Kal hi मई जा कर मेघा से बात karunga...Usse वक्त मांगूंगा की थोड़ा वक्त लग सकता है उससे पुराना सुमित मिलने के liye...Lekin मिलेगा जरूर.

प्यार करती है वो mujhse...Jarur हाँ कहेगी.

बेवकूफ था mai...Shaadi के कुछ hi टाइम बाद अपना पुराना रूप में आ hi jaata...Megha की प्यार hi तो है जो मुझे बदल रहा था और पूरी तरह से बदल सकता hai...Kuch टाइम बाद मई भी उससे वो प्यार देता जो वो डेसेर्वे करती hai...Lekin उस वक्त ये समझ क्यों नहीं आया?

प्यार की बातें दिमाग में आते hi सुमित मुस्कुरा उठा.

बस ऐसे hi हसीं ख्याल के साथ सुमित सू गया.

अगले दिन अपना ड्यूटी ख़त्म करने के बाद सुमित सीधा मेघा से मिलने gaya...Bahut कोशिश के बाद भी वो नहीं mili...Phone भी नहीं लगा.

बहुत मुश्किल के बाद आशा (मेघा की रूममेट) मिली.

सुमित:- मेघा कहा है?

आशा सुमित को गुस्से से देखती है.

आशा:- अब्ब क्या चाहिए तुम्हे?

सुमित:- उस वक्त गलती हो gaya...Samajh नहीं पाया अपने प्यार को?

आशा:- अब्ब समझ में आया?

सुमित:- हाँ.

आशा इस बात पर थोड़ा हंसती है.

आशा:- लेकिन देर कर दिया tumne...Megha आज सुबह hi यहाँ से चली गयी.

सुमित:- क्या?

सुमित को तो विश्वाश hi नहीं हुआ.

आशा:- बहुत देर और बेवकूफी कर दिया तुमने.

सुमित:- मई उसका घर का पता जानता hun...Abhi जाता हूँ उससे मिलने.

आशा:- लेकिन तुम उसकी दिल की बात नहीं जान पाए और ना hi अब्ब क्या है वो जानते हो.

सुमित:- जानता हूँ वो भी मुझसे प्यार करती थी और करती है.

आशा:- करती है?

सुमित:- Haan...Naaraj है wo...Manaa लूंगा.

आशा:- अगर मई कहु की वो नफरत करती है तो?

सुमित:- वो मुझसे नफरत नहीं कर sakti....Agar करनेकागि है तो फिरसे प्यार में बदल दूंगा उसकी नफरत.

सुमित की आवाज में इस बार आत्मविश्वाश था.

आशा:- 1 मं.

फिर आशा अपने रूम में जा कर 1 डेरी के कर आती है.

आशा:- ये lo...Megha का आखिरी सामन इस हॉस्टल में.

सुमि ने जब डेरी का 1सत पेज पलटाया उसके होंठो में एक मुस्कान आ गया.

मेघा की खूबसूरत अक्सर में लिखा था "माय लव स्टोरी"
 
अपडेट 103

माय लव स्टोरी

बचपन के ज्यादातर वक्त तो दादा और दादी के साथ hi gujra...Khas कर के दादा जी के saath...Hamesha उनकी कहानी सुनती thi...Aur वो भी बहुत साड़ी कहानिया सुनाते थे.

राजा और रानी की kahaniya...Kaise एक राजा अपने रानी के लिए सब कुछ करता hai...Uska अपने रानी के प्रति pyaar...Bahut मजा आता था ऐसी कहानिया सुनने mein...Maa की लोरी के बाद दादाजी की कहानिया सुन कर hi सोती thi..Aur जिस दिन दादाजी कहानी नहीं सुनाते थे उस दिन खाना खाये बिना hi मुंह फुला लेती thi...Fir क्या tha...Mujhe मनाने के लिए एक अच्छी सी कहानी सुनाते थे. :)

जब भी वो राजा रानी के कहानी सुनाते थे. मई हमेशा खुद को एक रानी के रूप में कल्पना karti...Jab उनसे राजा के बारे में पूछती तो वो प्यार से कहते.....

"तू तो मेरी राजकुमारी hai...Ek राजकुमार आएगा और तुझे उड़ने वाले घोडा में बिठा कर ले जाएगा." ये सुनते hi मई काफी खुश हो jaati...Bas इंतजार करती की कब मेरा राजकुमार aayega...Aur जब उनसे पूछा तो....

तू अच्छे से पढ़ लिख कर बड़ी हो jaa...Fir एक क्या बहुत राजकुमार तेरे लिए आएगा अपना रिश्ता ले kar...Unn में से एक hi वो खुसनसीब होगा.

फिर क्या था मई बहुत म्हणत से पढाई करने lagi...Dadaji से एक बार पूछा भी tha...Mujhe बाद में क्या बनना चाहिए?

बहुत प्यार से उन्होंने जवाब diya...Jo तेरी marji...Bas अभी मन लगा कर पढ़ना.

दादाजी भी मेरी पढाई में कोई कमी नहीं rakhte...Jab भी वो सेहर जाते मेरे लिए नए किताब कॉपी, पेंसिल, पेन laate...Aur साथ hi कुछ खिलौना और चॉकलेट्स भी.

दादाजी के अलावा दादी, माँ और पापा भी मुझे बहुत प्यार करते thhe...Lekin मई दादाजी की बहुत करीब थी.

पता नहीं किस का नजर लग gaya...Jab मई 6तह क्लास मई पहुंची तो दादाजी की तबियत बिगड़ने lagi...Unke लिए बहुत प्राथना भी kiya...Lekin उनकी तबियत बिगड़ती hi गयी.

उनके आखिरी वक्त में...

मेघा:- दादा जी आपके लिए पूजा किया hai...Ye लड्डू खा लीजिये.

मुश्कुराते हुए उन्होंने लड्डू का एक टुकड़ा अपने मुंह में रख कर.

दादाजी:- अब्ब शायद मेरा वक्त आ गया है.

मेघा:- अगर आपको कुछ हो गया तो मई भगवान् जी से हमेशा के लिए नाराज हो जाउंगी.

दादाजी:- ऐसा नहीं kehte...Unki वजह से hi तो आज तक मई जिन्दा hun...Jab तू अपने माँ की कोख में थी तभी मुझे कैंसर tha...High ग्रेड ka...Doctor भी कहते थे की अब्ब ज्यादा वक्त नहीं है मेरे पास.

लेकिन तुझे देखने की और तेरे साथ खेलने की इच्छा सकती की वजह से hi मैंने ऑपरेशन कराया और कैंसर को भी मात दे दिया.

तब से hi तेरे और अमित (मेघा की भाई) के साथ खेलते आया hun...Budhaapa में भी तुम दोनों के साथ बच्चा बन गया हूँ. :डी

जितना भी जिंदगी है एक वरदान जैसा hai...Ek दिन तो सभी को जान hi hai...Abhi रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) भी काफी ज्यादा hai...Kuch hi समय है मेरे पास.

मई कुछ बोल नहीं paayi...Bahut उदास थी दादाजी की हालत देख कर.

दादाजी:- और हाँ तुझे बहुत पढ़ लिख कर अपना नाम कमाना hai...Logon के काम आना hai...Shiksha में बहुत ताकत होती hai...Issi के जरिये तुझे काफी ऊपर जाना hai...Samajh रही है न मेरी बात.

मेघा:- हाँ दादा जी.

दादाजी:- अब्ब कुछ hi समय बचा है मेरे paas...Kya मेरे साथ नहीं खेलेगी?

मेघा:- खेलूंगी दादाजी.

उनका मन पसंद खेल था लुका chipi...Aur इसी खेल में वो एक दिन लता नहीं कहा छुप gaye...Kabhi मिले hi नहीं :क्राई:

उनके जाने के बाद मई बहुत royi....Bahut दिन उदास rahi...Dadaji के जाने के बाद पापा ने samjhaya...Mujhe दादाजी की सपना ुरा करना है.

बहुत वक्त के बाद खुद को संभाला दादाजी की सपना पूरा करने के लिए.

उनकी दो बात मेरे दिमाग में छाप गया tha...Padh लिख कर मुझे काफी आगे जाना है और अच्छे से पढ़ने के बाद मुझे मेरा राजकुमार मिल जाएगा जो मुझे उड़ने वाले घोड़े में अपने साथ ले जाएगा.

बाद में पता चला दादा जी को स्ट्रोक (ब्रेन हेमोरररहगे) था ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह se....Unhe तो बचा नहीं पायी लेकिन सोच लिया की बाकी लोगो को जरूर bachaungi...Dada जी ने hi तो कहा था मुझे लोगो का काम भी आना है.

सुना था डॉक्टर बनने के लिए बहुत पढाई करनी पड़ती hai...Tabhi से और म्हणत करना सुरु कर दिया.

जब 10तह क्लास में आयी तो मुझे मेरे जिंदगी का राजकुमार भी मिल gaya...Jiski मई हर रोज कल्पना करती thi....Mera सुमित.

बात दरअसल ये है की जान में 8तह क्लास में थी तब हमारे स्कूल और सेहर के एक स्कूल के बिच क्रिकेट मैच का फाइनल tha...Match सेहर मई hi tha...Aur में पहली बार सेहर मई आयी थी.

जब स्टेडियम मई पहुंची तो देखा दोनों स्कूल की और से ठीक ठाक भीड़ था.

टॉस के दौरान पहली नजर सुमित पर padi...Opponent टीम का captain...Kaafi अच्छा पर्सनालिटी था uska....Thoda लम्बा बाल जैसे फिल्मों में हीरो का होता hai...Uss पर से चलने का andaaz...Kaafi प्रभावशाली था.

और जब टॉस के वक्त उसने अंग्रेजी बोलै तो मई उसका फैन hi हो gayi...Aawaj से भी वो हीरो nikla...Aur ऐसी अंग्रेजी आज तक कभी सुना hi नहीं tha...Bhale hi वो 10तह मई था लेकिन हमारे स्कूल के 10तह के कोई भी स्टूडेंट उसके आस पास भी नहीं था.

क्रिकेट की बात थी तो कुछ समझ में नहीं आय लेकिन मन कर रहा था की सुनती जाओ और वो बस यूँही बोलता hi jaaye...Pata नहीं कैसा जादू था उसकी बोली मई.

खैर टॉस सुमित ने hi jeeta...Hero कभी हार ाक्त है भला :डी

और टॉस जीतने के बाद खुद सुमित बैटिंग करने aaya...Aur आते hi धमाल मचा दिया.

मैदान की हर तरफ चौका और छक्कों की barsaat...Mai तो देखते hi रह gayi...Mai अपना टीम को छोड़ सुमित की सपोर्ट में उछालने lagi...Shayad तभी से था ये दीवानगी. :लव:

मन करता था सुमित ऐसा hi खेलता रहे और मई देखती राहु.

आखिर में सुमित ने 152 रन बनाया वो भी 57 बॉल में और कोई उससे आउट भी नहीं कर paaya...Hamaare टीम को जीत के लिए चाहिए था 230 रन्स 20 ओवर में.

अब्ब मैच से किसे मतलब tha...Meri नजर बार बार फील्डिंग कर रहा सुमित पर hi jaata...Ummeed तो था की बोलिंग कर के 2, 4 डंडा भी उड़ा de...Lekin वो बोलिंग करने नहीं आया.

मैच तो वो काफी पहले जीत चूका tha...Aakhiri बॉल में जीत के लिए चाहिए था हमारे टीम को 140 runs...Lekin ाखी बॉल में बाउंड्री में उसने उड़द कर ऐसा कैच पकड़ा की मुझे दादा जी की कहानी की उड़ने वाला घोडा का याद आ गया.

सुमित के लिए काफी खुश thi...Lekin थोड़ा उदास भी की सुमित की एक नजर भी मुझ पर नहीं pada...Match के बाद सोचा एक ऑटोग्राफ तो ले कर रहूंगी लेकिन वो मौका भी नहीं मिला.

यही था सुमित के लिए मेरी पहली मुलाकात जो अफ़सोस दो तरफा न हो saka...Lekin इसी मुलाकात में मई सुमित की दीवानी बन चुकी थी.

धीरे धीरे वक्त तो अपने हिसाब से आगे बढ़ hi रहा tha...Mai भी उसी हिसाब से अपना म्हणत कर रही थी पढ़ाई में.

10तह बहुत अच्छे नंबर से पास kiya...Papa ने भी मेरी म्हणत देख मुझे सेहर भेज दिया एक ृष्टिसार के पास जो दूर के चाचा thhe...Lekin जाते वक्त पापा ने समझाया की सिर्फ पढाई पर ध्यान देना है.

11तह और साथ में कोचिंग क्लास भी अच्छे से पढ़ रही thi...Aur उसी बिच एक दिन ऐसा भी आया की मई ख़ुशी से पागल हो उठी.

श्रवण महीना का अंतिम सोमबार tha...Puja करने जब वही के भोलेनाथ की मंदिर मई गयी और पूजा कर के वापस लौटने पर मुझे वही शख्स mila...Shayad ये भोलेनाथ का वरदान hi tha...Jiska व्यक्तित्वा (पर्सनालिटी) के प्रति मई आकर्षित thi...Wohi आकर्षक चेहरा हुए वही लम्बे बाल जो काफी हंसमुख दिख रहा tha...Abb तो उसके चेहरे में आये छोटे दाढ़ी और मुछ उससे और भी खूबसूरत दिखा रहा tha...Hero था wo...Mera हीरो.

सोचा इस बार तो बात करके hi rahungi...Aur जब हिम्मत जुटाया तो उसी बिच मेरी दोस्त कीर्ति मिल gayi...Jo मेरे साथ hi कोचिंग में. पढ़ती thi...Ek बार फिर से सुमित से मुलाकात होते होते रह gaya...Dukh तो बहुत हुआ.

लेकिन हार नहीं maani...Thoda म्हणत करने के बाद पता लगा hi लिया की सुमित रश्मि का भैया hai...Rashmi कीर्ति की दोस्त hai...Rashmi को एक या दो बार hi देखा था कीर्ति की वजह se...Kabhi बात नहीं हुआ उससे.

लेकिन सुमित के लिए सोचा उससे दोस्ती कर hi लेती hun...Sumit को देख सकुंगी शायद बातें भी हो jaaye....Aur बातों hi बातों mein...Kuch ज्यादा hi सोच रही hun..Shayad इंट्रोवर्ट हूँ इस वजह से सोचती ज्यादा हूँ करती काम.

रश्मि से दोस्ती करती उससे पहले hi 11तह के एग्जाम का डेट आ gaya...Dadaji और अपने सपना पूरा करने के लिए तैयारी में लग gayi...Ek परीक्षा ख़त्म होता की दूसरा आ jaata...Aur रश्मि से दोस्ती भी नहीं कर पा रही थी.

12तह का एग्जाम भी अच्छा hi gaya...Aur एंट्रेंस एग्जाम में तो सपना hi पूरा हो गया.

मेरा बचपन का एक सपना पूरा हो gaya...Full स्कालरशिप मिल hi गया मब्ब्स mein..Aur जब कॉलेज ज्वाइन किया तो एक हफ्ते बाद उससे भी बड़ा सपना पूरा हो गया.

Sumit...Haan मेरा हीरो Sumit...Wo भी मेरे hi क्लास में tha...Aur एंट्री भी उसका हीरो जैसा hi tha...Anatomy के प्रोफेसर से जैसे उसने बात किया मई तो देखते hi रह गयी.

और क्लास ख़त्म होने के बाद तो मानो मेरा सपना सच हो hi gaya...Khud उसने मुझसे बात kiya...Lekin ये kya..."Beauty क्वीन"

भला कोई पहले hi मुलाकात में ऐसा फ्लिर्टिंग करता है? अच्छा तो लग रहा था लेकिन ऐसे कैसे दिखाती :D...Thoda मेरा भी तो दबदबा होना चाहिए.

अभी के लिए इतना hi...Fir बाद मई लिखूंगी आगे की kahani...Abhi तो मेरी प्रेम कहानी की सुरुवात hai...Mai सुमित से कितना प्यार करती हूँ और उसके लिए क्या क्या किया है ये तो सुमित को भी नहीं pata...Kabhi बताया hi नहीं maine...Aur बताओ भी क्यों? वो भी तो मुझसे प्यार करता है लेकिन उसने कभी बताया?

सुमित तो मेघा की डेरी में hi खो गया tha...Dadaji वाले भाग में वो भी इमोशनल हो गया था बाकी की भाग पढ़ते वक्त उसका होंठो में एक मुस्कान था.

सुमित:- इतना प्यारररररर!!!! वो भी मेरे लिए.

सुमित खुद को बहुत किस्मतवाला समझ रहा tha...Aakhir वो था भी.

जल्दी से सुमित ने अगला पेज को paltaya...Uss में भी बहुत कुछ लिखा था.

बिना कोई देरी किये सुमित ने आगे पढ़ना जारी रखा.
 
अपडेट 104

सुमित का मेरे इतने पास मेरे hi क्लास में देखना किसी सपना से काम नहीं tha...Aur ऊपर से उसने hi मुझसे बात की सुरुवात kiya...Isse ज्यादा ख़ुशी की बात क्या हो सकती थी?

हैरानी की बात भी था की उसने मुझसे hi बात क्यों किया? खूबसूरती? क्लास में और भी लड़कियां खूबसूरत thi...Padhai? मुझसे भी ज्यादा पढ़ाकू thi...Dil? पहली नजर में कोई कैसे दिल पढ़ लेता है?

खैर मेरे लिए यही काफी था की सुमित ने मुझसे बात kiya...Hairaani से भरे सपनो की ये जिंदगी काफी अच्छा लग रहा tha...Man करता था इसी जिंदगी में जीती राहु.

धीरे धीरे क्लास चलने laga...Sumit की साड़ी अच्छाई में से एक बात खटकने laga...Beauty क्वीन नहीं उसका बंक maarna...Hafte में एक बार hi दर्शन होता है :(...लेकिन जब भी होता है कमाल का मुलाक़ात होता tha...Uska मुझसे छेड़ना और मेरा रूठने की नाटक karna...Kaafi अच्छा लगता था.

उसकी baatein...Pata नहीं कहा से सीखा hai...Bahut अच्छी बातें करता hai...Agar उससे पहले से प्यार ना भी करती तो भी उससे प्यार करने लग जाती.

दिल करता है की वो बस बोलता रहे और मई सुनती rahu...Bhale hi आवाज कौवा का थालेकिन मेरे लिए कोयल से काम nahi...Majaak कर रही हूँ आवाज भी कोयल जैसा hi है :लव:

हर चीज में वो मेरे सपनो का राजकुमार tha...Kisi चीज में कोई कमी nahi...Padhaai, खेलकूद, बातें, क्रिएटिविटी और Pyaar...Bas सिगरेट और दारु की आदत को छोड़ kar...Khair बड़ी बात नहीं है ye...Kuch hi दिन की बात hai...Chutki बजा कर छुड़वा दूंगी :lol1:

वो भी मुझसे प्यार करता है इस बात का अंदाजा मुझे तब हुआ जब प्यार की परीक्षा में वो सफल हो गया.

जब घर जा रही थी और मेरा आखिरी बस भी छूट गया तो दिमाग में सुमित hi aaya...Aur उससे बुलाते hi वो नशे की हालत में भी आ pahuncha...Aur बिना अपनी कोई परवाह किये वो मेरे लिए 100 कम से भी ज्यादा का सफर के लिए राजी हो गया वो भी इतनी नशे mein...Agar प्यार न होता तो ऐसा क्यों करता?

और जब उसकी पीछे बाइक में बैठी और उसने जो तेज गति में बाइक चलना सुरु किया तो दादाजी की वो बात याद आ गयी और सच में अब्ब तो सुमित राजकुमार लगने laga...Mera राजकुमार :लव: और उसका बाइक वो उड़ने वाला घोडा.

सपनो की इस दुनिया में थोड़ा दर तो लग रहा था लेकिन उससे ज्यादा विश्वाश था अपने सुमित पर.

और जब घर पहुंचे तो सुमित ने सारे घरवालों को भी अपने बस में कर liya...Pata नहीं कुछ तो बात है उस mein...Jo किसी को भी बातों से अपनी और कर लेता hai...Maa और दादी तो काफी प्रभावित थी hi लेकिन हैरानी की बात तो ये था की पापा भी.

मन में एक दर था की पापा ने मुझे सेहर पढ़ने के लिए भेजा था और साफ़ कहा था की प्यार वीआर की चक्कर से दूर rehna...Yahi दर था की बाद में कैसे उन्हें बताउंगी की मई सुमित से प्यार करती हूँ?

लेकिन सुमित और उनको साथ देख कर ये दर भी दूर हो gaya...Abb तो विश्वाश था की सुमित को वो मन नहीं कर पाएंगे.

सोच लिया था अब्ब तो सुमित को प्रोपोज़ कर hi dungi...Lekin तभी एक ख्याल आया की उससे hi प्रोपोज़ karwaungi...Thoda स्पेशल फील करने को मिलेगा खुद के लिए :डी

घर की ये सफर के बाद सफर आयी तो शायद ये सुहाने दिन भी ख़त्म हो gaye...Jo सुनहरे ख्याल में जीने लगी थी एकदम से उसमें अंधकार छा gaya...Jab पता चला की वो मेरा इस्तेमाल कर रहा है मेरी दोस्त कीर्ति को पाने के लिए.

कितना गलत है वो :( प्यार शब्द से hi नफरत होने lagi....Kya सोचा था उसको और क्या निकला wo...Socha था अब्ब उससे कभी बात नहीं करुँगी.

लेकिन जब उसने मुझसे कहा की एक आखिरी कोशिश करने की उसको कीर्ति से मिलाने की फिर वो मेरी जिंदगी से निकल jayega...Mai मान gayi....Usse पीछा छुड़ाना तो चाहती थी लेकिन इससे ज्यादा ये देखना चाहती थी की ये इंसान और कितना निचे गिर सकता है?

टूर की सुरुवात में तो उससे मकार इंसान कोई नहीं लगता tha...Accha भी लग रहा था की कीर्ति ने इस धोखेबाज़ के साथ सही किया और जो कहानी कीर्ति ने सुनाया उससे पता चल रहा था की ये कितना घटिया इंसान है.

लेकिन जब एक दिन सुमित को रट हुए उसकी बातें सुनी कीर्ति के लिए उससे मेरा ख्याल एकदम से बदल gaya...Mujhe कीर्ति समझ कर जो भी उसने कहा उसकी एक एक बात में सच tha...Sach और झूठ को न पहचान सकू इतना मुर्ख भी नहीं थी.

जिस इंसान की वजह से प्यार से विश्वाश उठ गया था उसी इंसान की वजह से वापस सच्चा प्यार पर विश्वाश होने लगा.

सुमित से प्यार तो बहुत पहले से करती thi...Jab उससे मुलाक़ात हुआ तो उसकी इन्ही अच्छाई से प्यार गहरा हो gaya....Acchayi सिर्फ देखने से hi पता नहीं चलता महसूस भी कर सकते hai...Aur ये सुमित की हर चीज में दीखता tha...Aur सुमित की कीर्ति के लिए जो प्यार देखा उससे पता चला की सुमित एक सच्चा आशिक़ है.

बहुत hi अजीब हालात था मेरे liye...Mai जिससे प्यार करती हूँ वो मेरी दोस्त से प्यार करता है और मेरी दोस्त कीर्ति अब्ब सुमित को बिलकुल भी पसंद नहीं करती.

फिर भी कभी ये ख्याल नहीं आया की कोई साजिश कर के सुमित को कीर्ति से हमेशा अलग कर दू और सुमित के दिल में अपने लिए जगह banau...Shayad सुमित का कीर्ति के लिए सच्चा प्यार hi था की ऐसी घटिया सोच कभी दिमाग में आया hi नहीं.

भले hi कितना भी दर्द हो मेरे दिल में सुमित को कीर्ति से hi मिलाना चाहती thi...Shayad सुमित का ख़ुशी मेरा भी ख़ुशी बन गया tha...Suna था सच्चा प्यार ऐसा hi होता है आज महसूस कर रही thi...Apne प्यार की hi ख़ुशी में अपना ख़ुशी.

हर एक कोशिश किया सुमित को कीर्ति से मिलाने ki...Lekin कीर्ति अब्ब सुमित को देखना भी पसंद नहीं करती thi...Abb जबरदस्ती भी तो नहीं कर सकती thi...Bas सुमित पर तरस आता था.

सुमित का जैसा पेरवालित्य था उससे अब्ब वो काफी अलग बन चूका tha...Itna मजबूर कभी नहीं देखा usse...Fir भी वो बेचारा प्यार करता hi रहा कीर्ति से.

और धीरे धीरे वो वक्त भी आ गया जब सुमित को पूरी तरह से टूट ते हुए dekha...Kirti की shaadi...Sumit का ये हालत देख मुझे भी बहुत बुरा लग रहा tha...Hamesha सुमित को खुश देखना चाहती थी लेकिन इतने सालो से सिर्फ मजबूर और हारा हुआ देख रही थी.

आखिरी वक्त में भी कीर्ति की बेरुखी ने सुमित को तोड़ कर रख diya...Galti भले hi सुमित की थी कीर्ति की मन करने के बाद भी उसके पीछे लगा रहा लेकिन कीर्ति ने भी अच्छा नहीं kiya...Acche से इग्नोर भी कर सकती थी जब सुमित नहीं मान रहा tha...Lekin उसकी बेरुखी ने सुमित को न जाने कितने साल पीछे धकेल दिया.

उसके बाद सुमित ने इंगेजमेंट के दिन जो किया उससे उसके लिए मेरा प्यार और भी बढ़ गया.

सुमित एक सच्चा परवमई था और उसने उस दिन साबित भी कर diya...Kirti के ख़ुशी के लिए वो हमेशा हमेशा के लिए कीर्ति की जिंदगी से चला गया बिना कोई इमोशनल ब्लैकमेल और तमाशा कर ke...Kaafi पहले hi चले जाना चाहिए tha...Lekin एक उम्मीद था शायद की कीर्ति मान hi जायेगी.

लेकिन जब एहसास हुआ तो कीर्ति की ख़ुशी के लिए चला गया उसकी जिंदगी से दूर.

सुमित को ऐसा टूटा देख मुझे भी काफी बुरा लग रहा tha...Dar था की कही कुछ गलत कदम न उठा le...Lekin मेरा सुमित इतना भी कमजोर नहीं है की मुशीबत से लड़ने की जगह मुशीबत से भाग jaaye...Dil के दर्द के बावजूद अपनों के लिए इस हालात से भी लड़ने को तैयार था.

कीर्ति ना सही मई hun...Bas इसी ख्याल के साथ सुमित को फिरसे संभालने में लगी थी.

वो मेरे सामने कमजोर नहीं दिखना चाहता था लेकिन फिर भी उसका दर्द समझ सकती थी.

उसका और मेरा पोस्टिंग अलग गाँव में tha...Sumit को संभालने के लिए हमेशा उससे बातें करती थी फ़ोन par...Padhne के लिए प्रेरित karti...MBBS से hi क्या होगा? आगे की पढाई भी तो जरुरी hai...Aur वो सर्जन बनना चाहता है.

उससे किसी भी हाल में सर्जन बना कर hi rahungi...Bas इसी सोच के साथ फ़ोन में उससे पढाई की बातें hi karti...Jo मुझे आता था वो सुमित को पढ़ाती थी और जो मुझे कन्फूसिओं था या फिर पता था वो भी सुमित से पूछती थी.

सुमित को कीर्ति की ख्याल से अलग कर के पढाई और जिम्मेदारी की और डाइवर्ट करना चाहती थी.

पग की पहली परीक्षा में तो सुमित का नतीजा नहीं aaya...Usse उसका कॉलेज ऑफ़ चॉइस नहीं mila...Lekin दूसरी बार तो उसने वो कमाल कर दिया की किसी भी कॉलेज अफ़्फोर्ड नहीं कर सकता था उससे मिस करने की.

सुमित बहुत खुश tha...Kehta था की उसने कर dikhaya...Apna और अपने Maa-Papa का सपना पूरा कर diya...Mujhe भी बराबरी का क्रेडिट diya...Kaafi खुश था wo...Lekin उससे भी ज्यादा खुश मई थी. :हैप्पी:

अब्ब मेरा सुमित कोई हारा हुआ प्रेमी नहीं था एक जिम्मेदार इंसान बन गया था.

दिल में एक ख्याल आया की काश ऐसे hi सुमित का ख्याल जिंदगी भर रख पाउ :ब्लश: लेकिन ये सही वक्त नहीं tha...Abhi अभी तो सुमित अपने दर्द से बाहर निकला है.

मैंने भी वही कॉलेज में ज्वाइन कर लिया अस मेडिसिन रेजिडेंट.

हमारे बिच वैसे hi बातें होने लगा जैसे होता tha...Wohi बॉन्डिंग वही understanding...Uska care...Uski baatein...Pyaar तो वक्त के साथ बढ़ता hi जा रहा था.

फिर से लगने लगा की सुमित भी मुझसे प्यार करता hai...Bas इंतजार था की कब वो प्रोपोज़ करेगा.

लेकिन इस साइलेंट लव स्टोरी की मजा hi कुछ और था.

ना वो अपनी दिल की बात बता रहा था और ना mai...Bas यार के दो पल साथ bitaate...Iss में भी अलग hi मजा था.

लेकिन वो मजा कहा जो प्रेमी जोड़ी की बातों में होती है.

जब और इंतजार नहीं हुआ तो सोचा अब्ब मई hi उससे अपनी दिल की बात बताउंगी.

लेकिन अचानक से क्या हुआ उसको, वो मुझे इग्नोर करने laga...Pata नहीं क्या हुआ उससे ये अचानक.

और हद्द तो तब हुआ जब उसने संजना को प्रोपोज़ कर दिया वो भी मेरे सामने.

जबरदस्ती उसका प्यार हासिल करना कभी नहीं chaha...Khwahish तो हमेशा था की मुझे उसका प्यार मिले लेकिन उसके इच्छा के खिलाफ nahi...Ek बार फिर मेरा दिल टूट गया.

मुझसे प्यार करना या नहीं करना ये उसका फैसला hai...Lekin दोनों बार उसने हे गलती किया की मेरे दिल में प्यार दो बार प्यार जगा कर बिच रास्ता में छोड़ diya...Ye उसने बहुत गलत किया.

अब्ब तो सच में विश्वाश उठ गया प्यार se...Abb उसको कभी माफ़ नहीं कर paaungi...Bhale hi कोई मज़बूरी hoga...Lekin मुझे बताना भी सही नहीं समझा.

मेरा विश्वाश, मेरा प्यार, मेरा इंतजार और मेरा धैर्य, मेरा सपना सबका मजाक उड़ाया है सुमित ने. कभी उससे अपने सपनो का राजकुमार माना था और aaj...Aaj जो किया उससे सपना मई भी नहीं सोचा था.

इतना गलत तो तुम नहीं थे Sumit...Shayad तुम्हे समझ नहीं सकीय ये मेरी गलती thi...Jiska मुझे हमेशा पछतावा रहेगा.

अब्ब तो बस यही दुआ है की तुम हमेशा मेरी जिंदगी से दूर चले jaao...Ek बार को तो इस दर्द से उभर जाउंगी लेकिन तुम्हारा शकल कभी देखना नहीं चाहूंगी.

किस्से शिकायत करू? उपरवाले से? किस्मत से? जिससे भी शिकायत करुँगी तो भी जवाब यही aayega...Bewkoofi में hai...Jo तुम पर दुबारा से भरोषा कर लिया.

बस यही थी मेरी kahani...Haar गया मेरी यार और मेरा सपना. :क्राई:

थे एन्ड

आखिरी के कुछ लाइन्स पढ़ते hi सुमित के दिल में दर बैठ gaya...Megha सच में बहुत नाराज है उससे.

आशा:- एक बात तो मेघा ने डेरी में लिखा hi नहीं.

सुमित:- क्या?

आशा:- जब तुम्हारा 1सत एंट्रेंस में तुम्हे कॉलेज ऑफ़ चॉइस नहीं mila...Ussi एंट्रेंस में मेघा का रिजल्ट कुछ ऐसा था की उससे अन्य कॉलेज अन्य सब्जेक्ट मिल jaata...Yaha तक की रेडियोलोजी bhi...Lekin उसने तुम्हारे लिए इंतजार किया.

तुम्हारे साथ पढ़ना चाहती thi...Jitna हो सके जिंदगी के उतना वक्त तुम्हारे साथ बिताना चाहती thi...Aur दूसरे साल भी उसका रिजल्ट वैसा hi tha...Aur जब तुमने इस कॉलेज में एडमिशन लिया तो उसने भी यही ले लिया.

सुमित को ये सुन कर सच में हैरानी हुआ उसने कभी सोचा भी नहीं था की मेघा प्यार में अपना करियर दाव पर लगा सकती hai...Megha का प्यार तो सुमित देख चूका था आज जूनून भी देख लिया.

सुमित ने मेघा की डायरी में "थे एन्ड" को क्रॉस करके वह पर लिख दिया "इंटरवल".

जिसे देख आशा भी मुस्कुरा कर बोली.

आशा:- मन पाओगे?

सुमित:- मनाना hi पड़ेगा.

सुमित की आवाज में. वही पुराना आत्मविश्वाश लौट आया था.
 
अपडेट 105

बीटा कुछ दिन तो रुक jaata...Abhi तो आया है घर.

सुमित को रेडी होता देख उसकी माँ बोली.

सुमित:- नहीं Maa...Pehle hi बहुत लेट कर चूका hun...Aur आपको तो खुश होना chahiye...Aapki बहु लाने जा रहा हूँ.

और आप hi तो परेशां कर रही थी बार बार की शादी कब कर रहा है?

स. माँ:- हाँ तो कब तक कुंवारा बैठा rahega...Budhaape देहलीज में आ चूका hai...Aur रश्मि की शादी की भी 2 साल हो गया है.

सुमित:- बुढ़ापा :ीक: आज भी 20-25 साल के बच्चों से ज्यादा जवान हूँ. :स्मार्त्य:

कुछ देर से साइड में बैठी रश्मि भी सुमित के पास आ कर. उसके बालों को हाथ लगाती है.

रश्मि:- आपका बुढ़ापा का सबूत आपके फूल रहे बाल बता रहे है.

सुमित रश्मि से थोड़ा दूर हैट कर.

सुमित:- तू मेरी फ़िक्र chhod...Apne पति को sambhaal...Kuch hi साल में तकला हो जाएगा.

रश्मि:- खबरदार जो मेरे रोहन के बारे में कुछ कहा.

सुमित:- अच्छा अब्ब मेरा रोहन!!! शादी के वक्त तो पूरा घर में बवाल मचाया था.

रश्मि:- Wo...wo अरेंज्ड मैरिज कौन करना चाहता है.

सुमित:- और अब्ब?

रश्मि:- अरेंज्ड मैरिज में प्यार नहीं हो सकता है क्या?

सुमित:- और अब्ब मुझे प्यार के बारे में सीखा रही है?

रश्मि:- आपको कैसे...

फिर रश्मि को कुछ याद आया...

रश्मि:- वैसे भैया आपने सही कहा....35 की उम्र में भी आप 20-25 से काम नहीं wo...Ladkiyan के पीछे भागने mein...Abhi भी वही कर रहे हो?

सुमित:- पहली बात तो मई 35 का नहीं 33 hun...Aur दूसरी बात मेघा के पीछे nahi...Usko वापस लाने जा रहा हूँ.

सुमित का सामान लगभग पैक हो hi गया था ki...Rashmi को कुछ नजर aaya...Usse उठा कर.

रश्मि:- ये क्या है?

सुमित:- इससे विग कहते है?

रश्मि:- ये तो मुझे भी पता hai...Lekin किस लिए? आपके बाल तो ठीक ठाक है.

सुमित:- बाद में बताऊंगा.

स. माँ:- ले चाय पी कर jaana...Apna ख्याल तो रखता hi nahi...Pata नहीं गांव में कैसे रहेगा.

सुमित:- फ़िक्र मत कीजिये Maa...Gaanw में आपकी बहु है ख्याल रखने के लिए.

रश्मि:- देखिये Maa...Shaadi हुई भी नहीं और अभी से भैया आओकी बात काटने के लिए भाभी को ला रहे hai...Shaadi के बाद तो आपको भूल hi जाएंगे. :lol1:

सुमित:- ये भी देखिये माँ की 2 साल में 2 hi बार घर आयी hai...Abb बताइये कौन किसको भूल रहा है? :हिंतहिंट:

रश्मि:- आप जाइये जल्दी se...Kahi ट्रैन मिस न हो जाये? वर्ण पूरा दिन भाभी को याद hi कर्रे रह जाएंगे. :lol1:

सुमित:- जा रहा hun...Lekin ट्रैन से nahi...Mera 8तह लव मेरे बाइक से.

सुमित निकलने hi वाला था की उसके पापा वह आ गए.

स. डैड:- विश्वाश तो पूरा है और कहने की जरुरत तो नहीं hai...Lekin फिर bhi..."All थे बेस्ट."

सुमित:- थैंक यू.

सुमित:- (तो रश्मि) वैसे ये विग बाद में तेरा टकलू रोहन के hi काम आएगा.

रश्मि:- भैया आप....

सुमित:- ठीक hai...Wig की जरुरत nahi...Lekin 2 साल बाद जब पूरी तरीके से तकला हो जाएगा तो भेज देना मेरे paas...Dermatology की भी ठीक थक नॉलेज है और सर्जन भी hu...Kar दूंगा हेयर ट्रांसप्लांट.

सुमित रश्मि का चेहरा देख हसने लगा और अपने माँ और पापा के पेअर छू कर निकलने hi वाला था की.

रश्मि:- सोचा था आप वापस आये है तो मई भी आ गयी कुछ दिनों के liye...Lekin आप तो एक दिन भी ढंग से नहीं रुके.

सुमित:- इस बार सच में वक्त नहीं है.

रश्मि:- ये तो हर डॉक्टर का एक्सक्यूज़ है :डी

सुमित कुछ कहता उससे पहले hi...

रश्मि:- आल थे best...Abb मुलाकतापकी शादी में hi होगी :तूहैप्पी:

फिर सुमित बाइक में वह से निकल gaya...Aur हमेशा की तरह सुमित की बाइक इस बार भी हवा से बातें कर रहा था.

लेकिन मेघा का ख्याल आते hi...Bike की स्पीड नार्मल कर दिया.

सुमित:- सेफ्टी first....Waise भी साड़ी जिंदगी तो है hi मेघा के साथ गुजारने के लिए. :)

थोड़ी और देय पहुंचने के बाद सुमित ने बाइक की स्पीड और भी काम कर दिया.

सुमित:- इन् रास्तो में मेघा के साथ यादें hai...Har एक याद को फिरसे जीना है.

और थोड़ा देर hi sahi...Thoda और intejaar...Waise भी इंतजार का फल मीठा होता है.

और ऐसे hi अपने ख्यालों में खोया सुमित जब आधा राष्ट पार कर चूका था.

भूख तो सुमित को नहीं tha...Lekin सामने मौजूद ढाबा को देख उससे मेघा के साथ का वो पल याद आ गया जब वो चोला भटूरा खाने यहाँ मेघा के साथ आया था.

सुमित:- अरे yaar...Mujhe पसंद नहीं है.

मेघा:- कभी खाया है?

सुमित:- हाँ 2-3 बार.

मेघा:- कहा?

सुमित:- घर के पास के hi होटल में.

मेघा:- कही भी खा लेते हो और कहते हो की चोला भटूरा पसंद nahi...Yaha बेस्ट मिलता hai...Try करना hi पड़ेगा.

सुमित:- अरे नहीं.

सुमित की मेघा के सामने कुछ नहीं chala...Aakhir हार मान कर सुमित को खाना hi pada...Aur खाने के बाद सुमित ऊँगली चाटता hi रह गया.

मेघा:- अब्ब बोलो.

सुमित:- बोलने के लिए कुछ है hi nahi...Bas खाने के लिए थोड़ा और भूख है. :डी

सुमित की इस बात पर हँसते हुए मेघा ने एक और आर्डर किया.

सुमित:- (इन हिज मंद) कुछ तो बात है मेघा में जो बहुत साड़ी बातों में मुझे गलत साबित कर देती है :). बहुत चीजों के लिए मेरा नजरिया बदल गया.

शायद इन्ही बातों की वजह से उसके इतने करीब आ गया. :हैप्पी:

अपने इन्ही ख्यालों में खोया हुआ सुमित चोला भटूरा खा hi रहा था की कुछ दूर आगे बैठे लड़कियों की आवाज सुमित के कान में पड़ा.

लड़की 1:- अच्छा तो ये bata...Kab प्रोपोज़ कर रही है सुमित को फिर से.

लड़की 2:- पता nahi...Abb तो शायद वो मुझसे नाराज हो गया होगा.

ये सुनते hi सुमित के मन में ख्याल आया.

सुमित:- हर बार सुमित का hi चुटिया काट ता है.

मुस्कुराते हुए सुमित वह से उठ गया और मेघा के लिए भी एक चोला भटूरा आर्डर कर के वह से निकल गया.

अपने hi धुन में बाइक चला रहे सुमित जब मेघा की गांव में प्रवेश किया तो अलग hi उत्साह उसके मन में भर आया.

सुमित:- बस कुछ पल aur...Fir तो मेरे इस आँख और दिल को सुकून पहुँचने के साथ hi तुम्हारे हर गीले शिकवे को दूर कर दूंगा. :लव:
 
अपडेट 106

सुमित गांव में पहुँचने के बाद मेघा के घर के कुछ दूर में रहने की जगह तलाश करने लगा.

थोड़ी मुश्किल के बाद उसने एक जगह 2 हफ्ते के लिए किराए का रूम ले लिया.

ये सब काम में उससे शाम तक का वक्त लग गया.

मेघा से मिलने का इच्छा तो बहुत tha...Lekin ऐसे hi वो मेघा के सामने जाना नहीं चाहता tha...Ek बार फिर से सरप्राइज देना चाहता था.

जब शाम थोड़ा और गहरा हो gaya...Wo मेघा के घर पहुँच gaya...Ghar के थोड़ी दूर में जा के बैठ गया जहा उससे घर के आँगन और घर के बाहर का नजारा अच्छे से दिख सके.

होंठो में मुस्कान और खुली आँखों से सुहावना सपना देखते हुए वो मेघा की इंतजार करने लगा.

कुछ पल का इंतजार कब 2 घंटे का हो गया उससे खुद पता नहीं chala...Macchar ने काट काट कर उसके हाथ पाँव फुला दिया था लेकिन फिर भी वो हार मानने को तैयार नहीं था.

अचानक hi उससे ख्याल आया...

सुमित:- अगर ऐसे hi मच्चर काटता रहा तो पक्का मलेरिया और डेंगू हो jaayega...Yaa फिर फाइलेरियासिस, जापानीज इन्सेफेलाइटिस...

कुछ ज्यादा hi ज्ञान आ रहा है :डोह:

अभी के लिए निकलना hi बेहतर hai...Swasthya अच्छा रहेगा तो 2 हफ्ते अच्छे से मेघा के साथ वक्त बिताऊंगा. :हैप्पी:

फिर सुमित निकलने hi वाला था की कुछ सोचते हुए वो फिर रुक गया.

मेघा का इंतजार तो था hi लेकिन साथ में किसी और का भी.

कुछ देर में एक बच्चा मेघा के घर जाते dikha...Sumit उसके पास गया और...

सुमित:- मेरा एक काम karoge...Ek चॉकलेट दूंगा.

चॉकलेट सुनते hi बच्चा खुश हो गया और अपना सर हां में हिलाया.

सुमित:- ये मेघा को do...Aur कहना उसके शुभचिंतक ने दिया है.

फिर सुमित अपने हाथ में प्लास्टिक में पैक किया हुआ सामान उस बच्चे को देता है और एक चॉकलेट उस बच्चे को.

फिर सुमित अपना रूम लौट आया और रात के खाना के बाद मेघा की यादों में hi सू गया.


अगली सुबह


मेघा अपने 2 सहेलियों के साथ घर से थोड़ा दूर एक तालाब के पास टहलने आयी थी.

तालाब के पास में hi एक आदमी को देख वो तीनो hi हैरान रह gaye...Wo आदमी का हुलियाबहुत अलग tha...Apne चेहरे को मफलर से कुछ बिचित्र तरीके से ढाका tha...Aur उसके कारनामे तो और भी बिचित्र था.

वो आदमी बांस से बना एक लम्बी लकड़ी को पानी में डूबा रहा था और निकाल रहा tha...Nikaalte वक्त वोलकडी को गौर से देखता और उसके चेहरे में एक निराशा आ जाता.

मेघा:- ये क्या कर रहे है आप?

आदमी:- मछली मार रहा हूँ.

आवाज भी अत्त्पत्ति लग रहा था उसका.

मेघा:- ये कैसा तरीका है?

आदमी:- मई अपना इस बलची से मछली मार रहा hun...Lekin एक भी अभी तक हाथ नहीं लगा.

मेघा:- ये कैसी बेवकूफी भरी बातें कर रहे है aap...Macchli मारने के लिए बलची में धागा होना chahiye...Fir एक काँटा और खाने के लिए भी कुछ रखना चाहिए.

आदमी:- वो सब तो पुराना तरीका है.

मेघा:- Kya!!!!:eek: फिर ये कौनसा नया तरीका है?

तीनो बहुत हैरान हो गए.

आदमी:- कुछ दिन पहले टीवी में देखा tha...Baans में फेविकोल लगा कर मछली मार सकते hai...Macchli चिपक जायेगा.

दूकान वाले ने डुप्लीकेट फेविकोल पकड़ा दिया.

अब्ब दोनों को ये आदमी पागल लग रहा था लेकिन मेघा को कुछ गड़बड़.

कुछ देर से मेघा उस आदमी की आँखों में देख रही थी और बोलने का तरीका तो बहुत hi अजीब लग रहा था.

सहेली 1:- पागल हो क्या?

आदमी:- हाँ मेघा के प्यार में.

आवाज एकदम से बदल gaya...Aur साथ hi उस आदमी ने अपना मफलर भी खोल लिया.

तीनो की हैरानी की कोई ठिकाना नहीं tha...Khaas कर मेघा ke...Lambe लम्बे बाल जो वास्तविकता से थोड़ा दूर लग रहा tha...Chhota सा मंच और उससे भी छोटा daadhi...Megha तो कुछ देर के लिए देखती hi रह गयी. :ीक:

सहेली 1:- कौन हो तुम?

उसकी आवाज में थोड़ा दर भी था.

रिश्ते में तो तुम दोनों के जीजा lagunga...Aur नाम है सुमित सफस.

सहेली 2:- ये सफस क्या है?

सुमित:- मेघा hi बेहतर बता सकती है.

सहेली 2:- (तो मेघा) तू hi बता de...Aur इससे कैसे जानती है?

मेघा:- बेकार की चीज और लोगो पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए अनीता.

सुमित:- बेकार लोग :डी

सुमित को मुस्कुराता देख मेघा अपना मुंह घुमा लेती है.

अनीता:- मेघा को देख कर लगता है की वो आपको पसंद नहीं करती hai...Behtar यही होगा आप मेघा के पीछा छोड़ दे.

सुमित:- न पसंद होना और नाराज होने में बहुत फर्क hai...Megha की नाराजगी भी जायज hai...Khair उससे मनाके hi मानूंगा.

सुमित की आवाज आत्मविश्वाश से भरा था लेकिन ये काफी था मेघा को भड़काने के लिए.

मेघा:- अच्छा अब्ब तुम तय करोगे की तुम मुझे ना पसंद हो या फिर नाराज हो.

तुम जानते हो सुमित तुम्हारा समस्या क्या है? तुम अपने बारे में और दूसरे के बारे में भी खुद hi एक ालय राय बना लेते हो और फैसला भी खुद कर लेते हो.

और दूसरी baat...Ziddi तो तुम हो hi...Abb मुझे मनाने की ज़िद्द पकड़ रखा hai...Ye जानते हुए भी की मुझे तुम में कोई इंटरेस्ट नहीं है abb...Afsosh की बात है की कीर्ति वाली बात के बाद भी तुम समझ नहीं पाए की हर बार ज़िद्द सही चीज नहीं है.

खैर इस बार समझ जाओगे.

मेघा ने अपना सारा गुस्सा एक hi सांस में निकाल दिया.

मेघा का गुस्सा तो सुमित को पहले भी पता tha...Lekin इस बार का गुसा देख उससे अंदाजा हो गया की मेघा सच में नाराज hai...Bahut नाराज.

फिर मेघा अपने सहेलियों के साथ वह से जाने lagi...Sumit भी मेघा के पीछे चलते हुए कहने लगा.

सुमित:- समझता हूँ...

सुमित अपनी बात पूरा कर पाटा उससे पहले hi...

मेघा:- क्या अब्ब मुझे अकेला छोड़ डोज.

इस बात से सुमित को एहसास हो गया की मेघा को फिलहाल अकेला छोड़ देना hi ठीक है.

सुमित:- कुछ पल के लिए hi अकेला छोड़ रहा हूँ जिंदगी में तो साथ रहना hi है. :डी

मेघा आँखों से अपना गुस्सा दिखाते हुए वह से निकल गयी.

सुमित कुछ देर वही तालाब के पास बैठा रहा.

सुमित:- (इन हिज मंद) अब्ब आगे क्या करना चाहिए?

सुमित:- कुछ nahi...Pehle भी प्लानिंग करने के चक्कर में सब कुछ बिगाड़ चूका हूँ.

कुछ चीजें अपने आप होना चाहिए.

जब मेघा को यकीं होगा की मुझे अपने भूल का एहसास है तो माफ़ कर देगी.

बस उसके करीब रहने की कोशिश करना है.

फिर सुमित वह से अपने किराये वाला घर की और जाने laga....Raashte में मेघा का घर भी था.

घर के बाहर hi मेघा के पापा और मेघा थे.

जैसे hi सुमित वह से गुजरने लगा.

कैसे हो सुमित?

मेघा की पापा की आवाज सुनते hi सुमित रुक गया.

सुमित:- ठीक हूँ Uncle....Aapne मुझे पहचान लिया?

मुस्कुराते हुए सुमित ने जवाब दिया.

म. डैड:- अभी उतना बुद्धा भी नहीं हूँ की मुझे अल्झाइमर (इंसान धीरे धीरे सब कुछ भूलने लगता है) हो जाए.

सुमित कुछ जवाब दे पाटा उससे पहले hi....

म. डैड:- मेरी बेटी भी डॉक्टर hai...Bataati रहती है बीमारी और इलाज के बारे में.

लेकिन तुम यहाँ इस गांव में क्या कर रहे हो?

यही वो सवाल था जिससे सुमित बचना चाहता था.

सुमित:- जी वो रिसर्च करना था.

म. डैड:- कैसा रिसर्च?

सुमित:- अब्ब सर्जन बन चूका हूँ तो एक रिसर्च करने का socha...Surgery के बाद कॉम्प्लीकेशन्स के टाइप के बारे में.

म. डैड:- लेकिन इस गांव में क्यों?

सुमित:- अपने सेहर में तो बहुत रिसर्च कर चूका hun...Socha बाहर किया जाए एक research...Pehla ख्याल इसी गांव के बारे में आया.

कुछ दूर कड़ी मेघा भी यही सोच रही थी की ये लड़का झूठ भी कितना विश्वाश के साथ बोल लेता है.

म. डैड:- चलो अच्छा hai...Abb यहाँ आये hi हो तो आओ चाय पी लो.

सुमित:- अरे नहीं अंकल.

म. डैड:- क्यों?

सुमित:- मेघा मुझसे नाराज है.

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा और मेघा सुमित को हैरानी से घूरने लगी.

म. डैड:- क्यों?

अब्ब वो मेघा की तरफ देखते hai...Lekin जवाब सुमित ने दिया.

सुमित:- आखिरी साल में अपने करियर पर ज्यादा ध्यान देने laga...Megha को नजरअंदाज कर दिया.

जब एहसास हुआ तो माफ़ी मांग लिया लेकिन मेघा अभी भी नाराज है.

म. डैड:- (तो मेघा) दोस्ती में तो छोटे मोठे समस्या होता रहता hai....Isko इतना बड़ी बात नहीं बनाना चाहिए.

मेघा:- (इन हेर मंद) छोटी बात :माध:

मेघा:- छोटी बात नहीं है पापा ye...Swarthi इंसान किसी के सागा नहीं होते है.

ये बात सुमित को चुभ gaya...Lekin उससे भी मेघा की बातों में सच्चाई दिख रहा था.

म. डैड:- लेकिन एहसास होना उससे भी बड़ी बात hai...Kabhi कभी माफ़ करना भी सीखना चाहिए.

आओ सुमित andar...Chai पीने.

सुमित:- एक hi शर्त पर अंकल.

म. डैड:- क्या?

सुमित:- चाय मेघा बनाएगी.

मेघा ने गुस्से से सुमित को घुरा तो सुमित ने मुस्कुरा कर जवाब दिया.

मेघा:- नहीं पापा.

म. डैड:- देखो मेघा ऐसी बातों में जिद्द नहीं करते.

फिर मेघा की पापा अंदर चले gaye...Sumit भी जा hi रहा था मुस्कुराते हुए लेकिन रास्ते में hi.

मेघा:- अब्ब तो झूठ भी बोलने लगे.

सुमित ने मेघा की तरफ देखा और कहना सुरु किया.

सुमित:- अब्ब हमारे प्यार में कोई झूठ नहीं.

मुंह से निकल hi गया है तो वो रिसर्च सच में करूँगा.

फिर मुस्कुराते हुए सुमित अंदर चला गया जिससे देख मेघा बुरी तरह से छिड़ गयी. :माध:
 
अपडेट 107

सुमित घर के अंदर जाते hi मेघा की माँ और दादी का पेअर छू कर उनका आशीर्वाद लेता hai...Aur उनसे बातें करने लगता है.

तभी दो लड़का भी वही हॉल में आते hai...Ek के कंधे में हाथ रख कर सुमित ने पूछा.

सुमित:- कैसे हो सूरज?

इस बात को सुन कर सभी हैरान रह gaye...Yaha तक की सूरज भी.

मेघा:- तुम सूरज को कैसे जानते हो?

सुमित:- बस जानता हूँ.

सूरज:- लेकिन कैसे.

सुमित:- Socho...Sochne से hi बड़े बड़े अविष्कार होता hai...Mujhe पहचानना तो मामूली बात है.

सूरज कंफ्यूज हो कर वह से अपने फॉस्ट के साथ निकल गया.

मेघा हैरानी से सुमित को देख रही thi...Sumit मेघा को देख बस मुस्कुरा रहा tha...Jaise hi मेघा को कुछ याद aaya...Wo सवालिया नजरो से सुमित को देखती है.

सुमित का मुस्कान और बढ़ गया जिससे मेघा का अनुमान सही साबित हो गया.

फिर सुमित बात को बदल देता है और मेघा की माँ और दादी से बात करने लगता hai...Megha किचन में चाय बनाने जाती है.

चाय बना लेने के बाद.

मेघा:- ये लो स्पेशल कॉफ़ी तुम्हारे लिए.

म. डैड:- हम सब के लिए चाय और सुमित के लिए coffee...Wo भी special....Kya ख़ास बात है?

एक घूंट चाय पी कर मेघा के पापा ने पूछा.

तभी सूरज और उसका दोस्त वापस आ जाते है.

मेघा:- 2 दिन का मेहमान है Sumit...Acche से ख्याल रखना तो बनता है.

सुमित की आँखों में देख 2 दिन पर ज्यादा जोर दे कर मेघा ने कहा.

म. डैड:- ये भी सही बात है.

सुमित:- नहीं uncle....Megha को शायद अल्झाइमर (भूलने वाली बीमारी) हुआ है. :डी

सुमित ने भी मेघा की आँखों में देखा.

म. डैड:- और ऐसा क्यों?

सुमित:- बाहर hi तो बताया था यहाँ मई रिसर्च करने आया हु.

अब्ब रिसर्च ख़त्म होने में 2 हफ्ते भी लग सकता है और 2 साल भी.

म. डैड:- बोरिंग होता होगा इतना वक्त लग रहा है तो? वो भी गांव में.

सुमित:- बिलकुल नहीं Uncle...Apna hi गांव है.

और रिसर्च भी ऐसा है की मुझे अपना ये रिसर्च टॉपिक बहुत पसंद hai...Pehle भी कर चूका hun...Bhale hi असफलता हाथ लगा ho...Lekin इस बार मजा आ रहा hai...Research सफल करके hi मानूंगा.

ये कहते हुए सुमित कभी कभी प्यार से मेघा की आँखों में देख लेता tha...Megha भी छिड़ रही thi...Lekin कुछ कर पा नहीं रही थी.

सुमित:- (इन हिज मंद) रिसर्च से ज्यादा तो ये मिशन लग रहा hai...Khair इस मिशन में सफल होना hi है.

म. डैड:- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ये तुम्हारा research...Khair तुम्हे तुम्हारा सफलता mile...Yahi आशीर्वाद है.

सुमित:- बहुत बड़ी आशीर्वाद दे दिया aapne...Koshish करूँगा आपके इस आशीर्वाद का मान राखु.

सुमित उत्शुक हो कर मेघा की और देखते हुए बोलै और इसी उत्शुकता में कॉफ़ी का एक घूंट पिया.

सारा उत्शुकता एक hi पल में khatm...Kuch बोल भी नहीं सकता था सब के bich...Lekin उसके चेहरे का भाव देख सभी को समझ में आ गया.

मेघा:- ओह्ह सॉरी Sumit...Cheeni (शुगर) रखना hi भूल गयी.

फिर वो सभी से नजर बचा कर सुमित की और देख मुस्कुराती hai...Wo जानती थी सुमित को कड़वा कॉफ़ी से कितनी नफरत है.

सुमित मेघा की और देख कर सारा कॉफ़ी एक hi घूंट में पी लेता है.

ये देख कर मेघा को थोड़ा अजीब तो लग रहा tha...Abhi भी मेघा को याद था सुमित ने एक साफé में जब कॉफ़ी आर्डर किया था तो एक कड़वी फ्लेवर डिलीवर हुआ tha...Waiter को अच्छे से बताने पर भी जब उसने मानने से इंकार कर दिया तो मैनेजर तक को घुटने में ला दिया था उस दिन.

लेकिन aaj...Aaj तो मुस्कुराते हुए एक hi घूंट में पी गया.

म. माँ:- चीनी के साथ पी लेते बीटा.

सुमित:- नहीं aunty....Cheeni काम कर रहा हु खाने में.

अचानक से सुमित को सिर्फ यही जवाब मिला.

म. दादी:- चीनी वाली बीमारी (डायबिटीज) है क्या तुम्हे?

सुमित:- Nahi...Jab भी कुछ वक्त के लिए चीनी खाता hun...Motaa होने लगता हूँ.

म. दादी:- मोटा होना तो अच्छी बात hai....Dekho कितना कमजोर लग रहे हो.

म. माँ:- ये खुद डॉक्टर hai...Jise हमसे सेहत के बारे में पता है. :डी

म. दादी:- ये बात भी ठीक hai...Pata नहीं मई भी किसे सीखा रही हूँ.

मेघा:- ठीक है Sumit...Har तेज सुबह यहाँ aao...Tumhe करेले की जूस pilaaungi...Tumhare सेहत के लिए अच्छा रहेगा. :ेविलौगह:

ये सुनते hi सुमित की हालत ख़राब हो gaya...Swaad में कड़वा उससे कभी बर्दास्त नहीं था.

सुमित:- तुम कहती हो तो जरूर आऊंगा. :लव:

सुमित और मेघा की बहुत देर से बात सुन रहा सूरज की दोस्त को ये देख बहुत गुस्सा आ रहा था.

सुमित:- अच्छा तो अब्ब चलता हूँ.

म. माँ:- फुर्सत माइक तो जरूर आना बीटा.

सुमित:- जरूर aunty...Abb तो आना जाना लगा रहेगा.

ये बात भी मेघा को देख कर कहा सुमित ने.

Suraj's फ्रेंड:- लगता है डॉक्टर साहब बहुत फ़ालतू बैठे hai...Bahut फुर्सत है इनके पास.

उसका गुस्सा आखिर बाहर निकल hi गया.

सुमित:- आपका नाम जान सकता हूँ?

Raju...Dusri तरफ से जवाज आया.

सुमित:- अच्छा राजू ji...Bhale hi डॉक्टर hun...Lekin आँखें जासूस से काम नहीं hai...Aur मेरा ये जासूस नजर बता रहा है की आपको कोई बहुत बड़ी बीमारी hai...Dua कीजिये कैंसर न हो.

सुमित को राजू का बोलने का तरीका बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था.

राजू:- Cancer...Loot मचने का बहुत अच्छा तरीका है.

सुमित:- आईने में देखिये.

राजू:- आईने में देखने की जरुरत आपको है.

सुमित:- अगर नहीं देखा तो ये आपका जो पीला आँखें है वो उस हद्द तक बढ़ जाएगा जिसके बाद मई भी इलाज नहीं कर पाऊंगा.

ये सुनते hi राजू आईना की और bhaaga...Aankhein सच में पीला था.

सुमित:- ये जॉन्डिस hai...Kuch भी कारण हो सकता hai...Agar सही समय पर पता नहीं चला तो परिणाम कुछ भी हो सकता है.

राजू को थोड़ा दर लगने लगा था लेकिन फिर भी.

राजू:- किसी अच्छे डॉक्टर से इलाज karunga...Lekin आपसे नहीं.

ये सुनते hi...

म. डैड:- ये क्या बदतमीज़ी है Raju...Tabhi से तुम्हारे बोलने के तरीका देख रहा hun...Koi ऐसे बात करता है?

और जिस डॉक्टर ने इतने दूर से hi तुम्हारे आँखों को देख कर क्या गड़बड़ है बता दिया जो तुम्हे खुद नहीं दिख रहा tha...Usse कितना अच्छा डॉक्टर चाहिए?

और ये कितना बड़ा डॉक्टर है जानते हो? तुम्हारे पड़ोस के hi राजेंद्र chacha...Koi उनके पेट के दर्द का वजह पता नहीं कर पा रहे thhe...Maine hi मेघा से बात करके सुमित के पास भेजा था.

10 मिनट में बीमारी पता कर के अच्छे से सर्जरी कर दिया.

राजू ये सुन कर और भी गुस्सा हो जाता है जिससे दिखा नहीं पा रहा tha....Jis सुमित को वो सभी के नजरो में निचा दिखाना चाहता था उसका कद और ऊँचा कर दिया.

म. डैड:- सुमित ये बातें बताना जरुरी नहीं samjha...Tum काफी अच्छे डॉक्टर ho...Vishwash था बिना जान पहचान के भी किसी मरीज का अच्छे से इलाज कर डोज.

सुमित:- शुक्रिया अंकल.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ.

गेट के पास.

सुमित:- Raju...Mujhse भी बहुत अच्छे डॉक्टर्स hai...Kisi से भी दिखा सकते ho...Dikha lo...Baad में पछताना न pade...Aur वैसे भी अभी छूती में हु मई कुछ वक्त के liye...Tumhara इलाज तो मई चाह कर भी नहीं कर पाऊंगा.

इतना कह कर सुमित एक नजर मेघा को देख कर वह से चला gaya...Kaafi खुश था wo...Megha की पापा, माँ और दादी का विश्वास आज भी उस पर वैसा hi था.

राजू:- (इन हिज मंद) इलाज तो तेरा मई karunga...Mai पछताओ या न pachtaau...Tu जरूर पछतायेगा. :माध:

सुमित कुछ आगे गया hi था की फिर वापस आ गया.

सुमित:- Megha....Research के लिए सोच रहा हु कैंडिडेट्स के बारे में तुमसे बात करू.

क्या तुम मदद करोगी?

मेघा कुछ बोलती उससे पहले hi.

म. माँ:- इस में पूछने वाली बात क्या है? जरूर मदद करेगी.

सुमित:- शुक्रिया Megha...Shaam को तैयार रहना. :)

इस मुस्कान से मेघा छिड़ gayi...Lekin घर वालो के सामने ज्यादा रियेक्ट भी नहीं कर पा रही थी.

सुमित अब्ब वह से निकल गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) अच्छा हथियार है ये research...Megha के घर की गेट पास :lol1:
 
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