अपडेट 64
आज सुमित ऐसे hi फ्रेश होने छत पर गया tha...Waha पर बैठे अपने पापा को देख थोड़ा हैरानी भी हुआ.
सुमित:- आप वह?
स. डैड:- हाँ ऐसे hi.
सुमित:- ऐसे hi? ऐसा तो नहीं lagta...Kuch सोच में दिख रहे है?
इस बात पर सुमित के पापा थोड़ा मुश्कुराते हैं.
स. डैड:- उम्र hi अब्ब ऐसा hai...Thoda बहुत सोचना पड़ता है.
सुमित:- और वैसे भी आप तो सोचते hi रहते है?
स. डैड:- बिलकुल galat...Jarurat से ज्यादा कभी कुछ नहीं सोचता हूँ.
सुमित:- तो फिर बता hi दीजिये आज का soch...Mujhe भी तो पता चले आप के सोच में क्या क्या बातें आते है? आपके और आपके जनरेशन के सोच से बिलकुल hi अपरिचित हूँ.
स. डैड:- उसके लिए कभी अपने बाप के लिए भी वक्त निकालना पड़ता hai...Abb लड़कियों के चक्कर में रहेगा दिन रात तो कैसे पता चलेगा.
इस बात पर सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.
स. डैड:- अब्ब तू कबसे इतना सीरियस होने लगा? वो क्या कहते hai...Haan चिल रह.
इस बात पर सुमित फिर से मुस्कुराया.
स. डैड:- हाँ ऐसे hi...Aise hi अच्छा लगता है तू.
एक बात याद rakh...Jaisa है तू वैसा hi reh...Kabhi किसी के लिए किसी वजह से खुद को जबरदस्ती बदलने की कोशिश मत kar...Warna खुद को hi खो बैठेगा.
सुमित:- सही कह रहे है आप.
कुछ सोचते हुए बोलै सुमित.
स. डैड:- बाप hun...Sahi सलाह hi दूंगा.
सुमित:- वैसे पापा एक बात पूछ सकता हूँ?
स. डैड:- परमिशन की जरुरत कब से पड़ने लगा तुझे?
सुमित:- नहीं बात कुछ और है?
स. डैड:- चल bata...Wo बात और है की अगर कुछ उल्टा सीधा पूछा तो दोनों hi गाल को लाल कर दूंगा.
सुमित की पापा की हंसी से सुमित के मन का संकोच काम हो गया.
सुमित:- आप भी अपने टाइम पर मेरे तरह hi नशा करते थे?
इस बात से सुमित के पापा के चेहरे के भाव थोड़ा बदल गया.
स. डैड:- बिलकुल भी नहीं.
सुमित:- लेकिन डिनर के टाइम मुझे कुछ और hi laga...Kuch तो बात छुपा रहे है आप.
स. डैड:- अभी भी वही कहूंगा तेरी तरह तो बिलकुल भी nahi...Aur वैसे भी तुझसे क्या छुपाना.
सुमित:- बताइये फिर?
स. डैड:- कोई ख़ास बात नहीं hai...Agar तू जानना hi चाहता है तो ये तेरे लिए सरप्राइज रहेगा. :डी
सुमित:- सरप्राइज क्यों?
स. डैड:- क्यों तुम लोग hi सिर्फ सरप्राइज दे सकते हो वो भी predictable...Jaise की माँ और पापा की बिर्थडेज़ और एनिवर्सरी में सुरप्रीसेड केक जो बिलकुल भी सरप्राइज नहीं होता.
जिस दिन तू पूरी तरह से नशा मुक्त हो जाएगा उसी दिन बताऊंगा ये kahani...Abb तुझ पर hai...Jitna जल्द नशा मुक्त होगा उतना जल्द ये कहानी सुनेगा.
सुमित:- बहुत नाइंसाफी है ये?
स. डैड:- इस में मई कोई हेल्प नहीं कर सकता.
कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद.
सुमित:- अभी तक आपने मेरे पढ़ाई के बारे में नहीं पूछा.
स. डैड:- जितना मई तुझे जानता हूँ पढाई में तुन बहुत अच्छा hai...Padh hi लेगा अच्छे से.
लेकिन जो मई नहीं जानता था वो बहुत हैरानी की बात tha...Pehle ये सही कर लू बाकी सब तो चलता hi रहेगा.
फिर कुछ देर और बात करके सुमित अपने रूम में चला जाता है सोने.
रात के 11 बज रहे थे.
तभी सुमित के मोबाइल में मेघा का फ़ोन aaya...Thoda आश्चर्य की बात था सुमित के liye...Bahut काम hi दोनों के बिच फ़ोन में बात होता tha...Warna तो अब्ब सिर्फ कॉलेज में hi थोड़ा बहुत बात होता था.
सुमित:- हाँ Megha...Kaho क्या बात है?
मेघा:- कुछ काम था.
सुमित:- इतनी रात को?
मेघा:- हाँ और इस काम का वक्त से कोई लेना देना नहीं.
कुछ कन्फूसिओं था सर्जरी mein...Wohi क्वेश्चन पूछना था?
सुमित:- जैसे में तो बहुत बड़ा सर्जन हूँ?
मेघा:- तुम hi तो खुद को न्यूरोसर्जन कहते थे?
सुमित:- वो तो बाद की बात है.
मेघा:- और न्यूरोसर्जन बनने की और ये एक छोटा सा कदम है.
सुमित:- अच्छा ठीक hai...Pucch lo...Agar मेरे बस का है तो जरूर बताऊंगा.
फिर मेघा सवाल पूछती है और लउकीली वो सवाल का जवाब सुमित के पास tha..Fir इसी टॉपिक में दोनों के बिच कुछ देर बात होती है.
आफ्टर थे टॉपिक.
मेघा:- वैसे तुम्हारे बातों से लग रहा है बहुत खुश हो तुम?
सुमित:- हाँ पापा से बात किया tha...Alag hi ख़ुशी मिल रहा है आज.
मेघा:- यही तो समझा रही थी तुम्हे हॉस्टल छोड़ कर घर में शिफ्ट हो jaao...Lekin तुम समझ hi नहीं रहे थे.
सुमित:- पापा का सामना करने की हिम्मत नहीं था उस वक्त.
मेघा:- कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चों का बुरा नहीं चाहते है और ना hi करते है.
सुमित:- तो फिर जा कर बता दो अपने पेरेंट्स को तुम्हे यहाँ कोई लड़का पसंद आ गया है तुम उसी से शादी करोगी?
मेघा:- पागल हो क्या :माध: घर से निकाल देंगे.
सुमित:- यही to...Yahi सोच मेरा भी था.
मेघा:- चलो chhodo...Ant भला तो सब भला.
सुमित:- वैसे तुम इतनी रात तक?
मेघा:- आज थोड़ा पढाई करने के लिए जाग रही हूँ.
सुमित:- कुछ दिनों के लिए तो ठीक hai...Lekin आदत मत बना लेना.
मेघा:- यह बात तुम कह रहे हो?
सुमित:- Haan...Kyu की भुगत चूका hun...Pehle तो रात भर जागने में मजा आता था अब्ब ये आदत सा बन गया है या फिर मज़बूरी.
वैसे भी बहुत कुछ सिख लिया है अब्ब तो :डी
मेघा:- और क्या क्या सीखा है?
सुमित:- बहुत kuch...Aur सबसे बड़ी sikh...Nature के खिलाफ कभी नहीं जाना chahiye...Pura हेल्थ का वाट लग चूका है.
फिजिकल हेल्थ में तो प्रॉब्लम आया भी hai...Mental हेल्थ बुरी तरह से प्रभावित हुआ tha...Aisa लग रहा था साइको बन रहा hun...Psychosis, डिप्रेशन और बहुत से साइकियाट्रिक कंडीशंस है जो पढ़ा भी नहीं था ऐसा सिम्पटम्स दिखने लगा था.
अब्ब थोड़ा बहुत सही लग रहा है.
कुछ दे मेघा चुप hi रही.
मेघा:- चलो इस सब से उभरने के लिए एक खुश खबरि है तुम्हारे लिए.
सुमित:- वो क्या? :?:
मेघा:- बहुत बड़ी खुशखबरी है.
सुमित:- (बड़बड़ाते हुए) कीर्ति से रिलेटेड कुछ है क्या?
लेकिन मेघा ने सुमित की ये बात सुन लिया.
मेघा:- उससे भी बड़ा.
सुमित:- उससे भी bada...Jaldi बताओ.
सुमित की बातों में एक्ससिटेमेंट आ गया.
मेघा:- Surprise...Kal बताउंगी.
ये कह कर मेघा ने फ़ोन कट कर दिया.
सुमित के चेहरे में अब्ब मुस्कान था.
सुमित:- (तो हिमसेल्फ) आज जब खुश हूँ तो बहुत सुरपरिसेस मिल रहा hai...Waise तो जिंदगी खुद एक सरप्राइज hai...Kahi भी कभी भी कोई न कोई सरप्राइज मिल जाता hai...Yaji तो मजा है जिंदगी जीने का.
शायद 2-3 साल में यही मिस कर रहा था.
