Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 12 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

थैंक्स एटर्निटी भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Waise तो लव हॉर्मोन ऑक्सीटोसिन होता है लेकिन इस उम्र में सेक्स हॉर्मोन का असर बहुत ज्यादा होता है टेस्टोस्टेरोन और estrogen...Ye बॉडी का फिजिकल डेवलपमेंट के साथ साथ मेन्टल चंगेस भी लाता है जैसे की अपोजिट सेक्स के लिए फीलिंग्स, लड़को में थोड़ा ज्यादा एग्रेसिव बिहेवियर.

और जहा तक आपका सवाल है माँ और पापा का प्यार गर्लफ्रेंड के लिए प्यार के सामने भूल जाता hai...Mujhe लगता है दोनों hi प्यार में ज्यादा फर्क नहीं होता है लेकिन बहुत से लोगों का प्यार का जूनून गफ के प्यार के लिए बहुत ज्यादा होता है.

एक्साम्प्ले के लिए किसी 20-25 की उम्र के लड़का का पेरेंट्स का डेथ हो जाता hai...Kuch वक्त ग़म में जीने के बाद जल्द वो नार्मल होने लगता hai...Lekin वही उसकी गफ उससे दूर हो गयी तो बहुत लम्बा वक्त लगता है नार्मल होने के liye...Ek जूनून hi है ये.

मेंटली और इमोशनली वो उससे उभारना भी नहीं chaahta...Baar बार अपने सच्चे प्यार को याद करता है साथ बिठाये पल, yaadein...Agar भुलाना चाहा भी तो शक होने लगता है की वो सच में प्यार था भी या nahi...Aisa फील होता है जैसे उसकी जिंदगी hi उससे दूर हो गयी है और उसका जेने का सहारा hi ख़त्म हो गया.

यही जिद्द कहे या जूनून जो बाकी के प्यार से काफी अलग बनाता है बर्फ और गफ के प्यार को.

खैर ऐसा तो अभी तक फील करने का मौका नहीं मिला :डी बस ऑब्सेर्वशन्स के बेस्ड पर अपनी इस फीलिंग को यहाँ रख रहा हूँ :डी

कीप सपोर्टिंग भाई.
 
अपडेट 63

मेघा:- अब्ब तुम्हे क्या हुआ?

सुमित:- बस आज के क्लास se...Jaisa सोचा था वैसा नहीं था.

मेघा:- तुम तो कहते थे आसानी से पढ़ लोगे.

सुमित:- कुछ ज्यादा hi आसान है.

मेघा:- मतलब? :हम्म:

सुमित:- सोचा था सर्जरी का क्लास hai...Kuch सर्जरी वेर्गेरी करने को milega...Lekin सर्जरी तो दूर की बात है सिर्फ प्रोसेदूरेस का नाम hi पढ़ने को mila...Aur कुछ अजीबो गरीब दिखने वाले इंस्ट्रूमेंट्स. :वेरिसद:

सुमित को ऐसे देख मेघा को हंसी आ गया.

मेघा:- तो क्या सोचा था पहले दिन hi नेउरसुरजों बन जाओगे :lol1:

सुमित:- वक्त लगेगा जानता hun...Lekin इतना ज्यादा वक्त लगेगा ये पता नहीं था.

मेघा:- तुम hi तो कहते थे इंतजार का फल मीठा होता है.

मेघा अभी भी सुमित की मजे ले रही थी.

सुमित:- ऐसा कब कहा मैंने?

मेघा:- कभी तो कहा hai...Lekin याद नहीं आ रहा है.

सुमित:- नहीं ऐसा डायलाग कभी नहीं कह सकता हूँ मई.

मेघा:- इतना यकीं?

सुमित:- हाँ अब्ब ये डायलाग कुछ ख़ास नहीं raha...Bacche बच्चे बोलते hai...Mera डायलाग है तो कुछ यूनिक होना चाहिए.

मेघा:- Unique...Hmm...Yaad आया सुमित सफस.

ये सुनते hi सुमित कुछ पल के लिए चुप हो गया.

सुमित:- काहे की SFS...Abb एसबीएस bolo...Straight बैकवर्ड सुमित...4 साल से एक hi जगह अटका हुआ hun...Yaa फिर कहो कागि पीछे छूट गया हूँ.

एक अलग hi इर्रिटेशन था सुमित की आवाज mein...Abb मेघा भी मजाक के मूड से बाहर आ गयी.

मेघा:- पीछे रह गए हो? ये किसने कह दिया.

सुमित:- खुद ne...Mujhe सबसे अच्छे से मई hi जानता हूँ.

मेघा:- अभी भी अच्छे से खुद को नहीं जान पाए हो.

सुमित:- और वो कैसे?

मेघा:- अभी तुम आगे बढ़ने की सोच तो रहे हो naa...Aur आगे बढ़ भी रहे ho...Abhi के लिए ये भी बहुत है.

सुमित:- बढ़ तो रहा hun...Lekin कछुआ की रफ़्तार से.

मेघा:- भूलो mat...Agar अपना मंजिल की और दृढ निश्चय के साथ आगे बढ़ोगे तो इसी रफ़्तार से अपने उस मंजिल को हासिल कर लोगे जो बहुत से केयरलेस खरगोश अपने घमंड में हासिल नहीं कर सकते.

सुमित:- ये कछुआ और खरगोश की कहानी और सच्चा pyaar...Abb तो कहानी में hi अच्छा लगता है.

मेघा:- हर बात को इतना नेगटिवेली क्यों लेते हो?

सुमित:- सच है ye...Bhale hi कड़वा hai...Lekin सच से दूर भागने की जगह अब्ब इसको स्वीकार कर रहा हूँ.

सुमित:- (इन हिज मंद) तुम्हारे सामने और लूज़र बनना नहीं चाहता hun...Lekin अभी positivity...Wo दूर दूर तक दिख नहीं रहा hai...Bas किसी तरह ये वक्त निकल जाए और काश पहले की तरह कॉंफिडेंट और स्ट्राइटफॉरवर्ड बन saku...Kabhi कभी तो खुद से नफरत होता है की इतना नेगेटिव क्यों बन गया हूँ?

मेघा:- और भूलो mat...Jitne भी गलतियां करोगे वो भी यही सिखाएगा की आगे से ये गलती नहीं करना hai...Jab जागो तब sabera...Khone के लिए कुछ नहीं है अब्ब और पाने के लिए बहुत कुछ.

आखिर के वो line...Sidha सुमित के दिमाग़ में असर कर गया.

फिर कुछ देर बात करने के बाद.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ.

फिर मेघा हॉस्टल चली जाती है और सुमित अपना घर.

ात डिनर टाइम

स. डैड:- चल बता आज की अपडेट?

सुमित:- अपडेट किस बात की?

स. डैड:- सिगरेट और दारु की काउंट.

सुमित:- 8 सिगरेट्स और दारु आज पिया नहीं है.

8 सिगरेट्स की बात सुन्न कर सभी को बहुत हैरानी हुआ.

स. डैड:- और कल तक कितना पीटा था?

सुमित:- 30 के आस पास सिगरेट्स और दारु 1 पेग से 1 बोतल तक.

स. माँ:- इतना ज्यादा?

वो सुमित को डरते हुए देखती hai...Sumit इस बार कुछ नहीं बोलता.

स. डैड:- ये भी काम hi hai...Aise हालात को मैंने भी देखा है.

इस बार सुमित की पापा भी काफी सीरियस हो कर बोले.

स. माँ:- ऐसे हालात? मतलब आप भी पीते थे? मुझे तो कभी पता नहीं चला.

स. डैड:- अरे नहीं nahi...Mera एक दोस्त था ऐसा hi...Din भर नशे में hi रहता था.

सुमित की माँ तो चुप हो गयी लेकिन सुमित को पापा की बात पर कही न कही शक हो गया.

वो अपने पापा से भले hi कितना भी क्लोज tha...Lekin उनके अतीत से बिलकुल hi अनजान था.

जल्द hi पापा से इस बारे में बात करने का उसने मन बना लिया.

रश्मि:- 30 hi क्यों? हाफ सेंचुरी पूरा कर लेते.

सुमित:- उस में तो तेरा कॉपीराइट hai...Daily 50 चुगली करने की कॉपीराइट. :लाफिंग:

सुमित की इस बात पर रश्मि अपना मुंह घुमा लेती hai...Uske माँ और पापा दोनों अभी भी सीरियस दिख रहे थे.

स. माँ:- अपना सेहत का तो सोच.

सुमित:- उसी लिए तो छोड़ रहा हूँ ये सब.

सुमित ने किसी सोच में डूब कर ये जवाब दिया.

सुमित:- (इन हिज मंद) सिगरेट में कपड़ का दर तो नहीं है फिलहाल लेकिन लंग कैंसर. और अल्कोहल से लिवर सिरोसिस.

इस सोच ने सुमित को अंदर तक हिला दिया.

सुमित:- (इन हिज मंद) पहले hi इतना लेट हो चूका hun...Abb और nahi...Dhire धीरे सभी नशे से दूर होने के बाद अपना हेल्थ चेकउप करवाऊंगा.

काश ज्यादा देर ना हुआ हो. :प्रे:
 
अपडेट 64

आज सुमित ऐसे hi फ्रेश होने छत पर गया tha...Waha पर बैठे अपने पापा को देख थोड़ा हैरानी भी हुआ.

सुमित:- आप वह?

स. डैड:- हाँ ऐसे hi.

सुमित:- ऐसे hi? ऐसा तो नहीं lagta...Kuch सोच में दिख रहे है?

इस बात पर सुमित के पापा थोड़ा मुश्कुराते हैं.

स. डैड:- उम्र hi अब्ब ऐसा hai...Thoda बहुत सोचना पड़ता है.

सुमित:- और वैसे भी आप तो सोचते hi रहते है?

स. डैड:- बिलकुल galat...Jarurat से ज्यादा कभी कुछ नहीं सोचता हूँ.

सुमित:- तो फिर बता hi दीजिये आज का soch...Mujhe भी तो पता चले आप के सोच में क्या क्या बातें आते है? आपके और आपके जनरेशन के सोच से बिलकुल hi अपरिचित हूँ.

स. डैड:- उसके लिए कभी अपने बाप के लिए भी वक्त निकालना पड़ता hai...Abb लड़कियों के चक्कर में रहेगा दिन रात तो कैसे पता चलेगा.

इस बात पर सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

स. डैड:- अब्ब तू कबसे इतना सीरियस होने लगा? वो क्या कहते hai...Haan चिल रह.

इस बात पर सुमित फिर से मुस्कुराया.

स. डैड:- हाँ ऐसे hi...Aise hi अच्छा लगता है तू.

एक बात याद rakh...Jaisa है तू वैसा hi reh...Kabhi किसी के लिए किसी वजह से खुद को जबरदस्ती बदलने की कोशिश मत kar...Warna खुद को hi खो बैठेगा.

सुमित:- सही कह रहे है आप.

कुछ सोचते हुए बोलै सुमित.

स. डैड:- बाप hun...Sahi सलाह hi दूंगा.

सुमित:- वैसे पापा एक बात पूछ सकता हूँ?

स. डैड:- परमिशन की जरुरत कब से पड़ने लगा तुझे?

सुमित:- नहीं बात कुछ और है?

स. डैड:- चल bata...Wo बात और है की अगर कुछ उल्टा सीधा पूछा तो दोनों hi गाल को लाल कर दूंगा.

सुमित की पापा की हंसी से सुमित के मन का संकोच काम हो गया.

सुमित:- आप भी अपने टाइम पर मेरे तरह hi नशा करते थे?

इस बात से सुमित के पापा के चेहरे के भाव थोड़ा बदल गया.

स. डैड:- बिलकुल भी नहीं.

सुमित:- लेकिन डिनर के टाइम मुझे कुछ और hi laga...Kuch तो बात छुपा रहे है आप.

स. डैड:- अभी भी वही कहूंगा तेरी तरह तो बिलकुल भी nahi...Aur वैसे भी तुझसे क्या छुपाना.

सुमित:- बताइये फिर?

स. डैड:- कोई ख़ास बात नहीं hai...Agar तू जानना hi चाहता है तो ये तेरे लिए सरप्राइज रहेगा. :डी

सुमित:- सरप्राइज क्यों?

स. डैड:- क्यों तुम लोग hi सिर्फ सरप्राइज दे सकते हो वो भी predictable...Jaise की माँ और पापा की बिर्थडेज़ और एनिवर्सरी में सुरप्रीसेड केक जो बिलकुल भी सरप्राइज नहीं होता.

जिस दिन तू पूरी तरह से नशा मुक्त हो जाएगा उसी दिन बताऊंगा ये kahani...Abb तुझ पर hai...Jitna जल्द नशा मुक्त होगा उतना जल्द ये कहानी सुनेगा.

सुमित:- बहुत नाइंसाफी है ये?

स. डैड:- इस में मई कोई हेल्प नहीं कर सकता.

कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद.

सुमित:- अभी तक आपने मेरे पढ़ाई के बारे में नहीं पूछा.

स. डैड:- जितना मई तुझे जानता हूँ पढाई में तुन बहुत अच्छा hai...Padh hi लेगा अच्छे से.

लेकिन जो मई नहीं जानता था वो बहुत हैरानी की बात tha...Pehle ये सही कर लू बाकी सब तो चलता hi रहेगा.

फिर कुछ देर और बात करके सुमित अपने रूम में चला जाता है सोने.

रात के 11 बज रहे थे.

तभी सुमित के मोबाइल में मेघा का फ़ोन aaya...Thoda आश्चर्य की बात था सुमित के liye...Bahut काम hi दोनों के बिच फ़ोन में बात होता tha...Warna तो अब्ब सिर्फ कॉलेज में hi थोड़ा बहुत बात होता था.

सुमित:- हाँ Megha...Kaho क्या बात है?

मेघा:- कुछ काम था.

सुमित:- इतनी रात को?

मेघा:- हाँ और इस काम का वक्त से कोई लेना देना नहीं.

कुछ कन्फूसिओं था सर्जरी mein...Wohi क्वेश्चन पूछना था?

सुमित:- जैसे में तो बहुत बड़ा सर्जन हूँ?

मेघा:- तुम hi तो खुद को न्यूरोसर्जन कहते थे?

सुमित:- वो तो बाद की बात है.

मेघा:- और न्यूरोसर्जन बनने की और ये एक छोटा सा कदम है.

सुमित:- अच्छा ठीक hai...Pucch lo...Agar मेरे बस का है तो जरूर बताऊंगा.

फिर मेघा सवाल पूछती है और लउकीली वो सवाल का जवाब सुमित के पास tha..Fir इसी टॉपिक में दोनों के बिच कुछ देर बात होती है.

आफ्टर थे टॉपिक.

मेघा:- वैसे तुम्हारे बातों से लग रहा है बहुत खुश हो तुम?

सुमित:- हाँ पापा से बात किया tha...Alag hi ख़ुशी मिल रहा है आज.

मेघा:- यही तो समझा रही थी तुम्हे हॉस्टल छोड़ कर घर में शिफ्ट हो jaao...Lekin तुम समझ hi नहीं रहे थे.

सुमित:- पापा का सामना करने की हिम्मत नहीं था उस वक्त.

मेघा:- कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चों का बुरा नहीं चाहते है और ना hi करते है.

सुमित:- तो फिर जा कर बता दो अपने पेरेंट्स को तुम्हे यहाँ कोई लड़का पसंद आ गया है तुम उसी से शादी करोगी?

मेघा:- पागल हो क्या :माध: घर से निकाल देंगे.

सुमित:- यही to...Yahi सोच मेरा भी था.

मेघा:- चलो chhodo...Ant भला तो सब भला.

सुमित:- वैसे तुम इतनी रात तक?

मेघा:- आज थोड़ा पढाई करने के लिए जाग रही हूँ.

सुमित:- कुछ दिनों के लिए तो ठीक hai...Lekin आदत मत बना लेना.

मेघा:- यह बात तुम कह रहे हो?

सुमित:- Haan...Kyu की भुगत चूका hun...Pehle तो रात भर जागने में मजा आता था अब्ब ये आदत सा बन गया है या फिर मज़बूरी.

वैसे भी बहुत कुछ सिख लिया है अब्ब तो :डी

मेघा:- और क्या क्या सीखा है?

सुमित:- बहुत kuch...Aur सबसे बड़ी sikh...Nature के खिलाफ कभी नहीं जाना chahiye...Pura हेल्थ का वाट लग चूका है.

फिजिकल हेल्थ में तो प्रॉब्लम आया भी hai...Mental हेल्थ बुरी तरह से प्रभावित हुआ tha...Aisa लग रहा था साइको बन रहा hun...Psychosis, डिप्रेशन और बहुत से साइकियाट्रिक कंडीशंस है जो पढ़ा भी नहीं था ऐसा सिम्पटम्स दिखने लगा था.

अब्ब थोड़ा बहुत सही लग रहा है.

कुछ दे मेघा चुप hi रही.

मेघा:- चलो इस सब से उभरने के लिए एक खुश खबरि है तुम्हारे लिए.

सुमित:- वो क्या? :?:

मेघा:- बहुत बड़ी खुशखबरी है.

सुमित:- (बड़बड़ाते हुए) कीर्ति से रिलेटेड कुछ है क्या?

लेकिन मेघा ने सुमित की ये बात सुन लिया.

मेघा:- उससे भी बड़ा.

सुमित:- उससे भी bada...Jaldi बताओ.

सुमित की बातों में एक्ससिटेमेंट आ गया.

मेघा:- Surprise...Kal बताउंगी.

ये कह कर मेघा ने फ़ोन कट कर दिया.

सुमित के चेहरे में अब्ब मुस्कान था.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) आज जब खुश हूँ तो बहुत सुरपरिसेस मिल रहा hai...Waise तो जिंदगी खुद एक सरप्राइज hai...Kahi भी कभी भी कोई न कोई सरप्राइज मिल जाता hai...Yaji तो मजा है जिंदगी जीने का.

शायद 2-3 साल में यही मिस कर रहा था. :)
 
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अपडेट 65

हाँ बताओ? क्या सरप्राइज है?

कॉलेज पहुँचते hi सुमित ने मेघा से पूछा.

मेघा:- बाद में.

सुमित का बेसब्री देख मेघा हँसते हुए बोली.

सुमित:- रात भर तो इंतजार किया hi hai...Abb और इंतजार नहीं होता.

मेघा:- थोड़ा और इंतजार कर lo...Intejaar का फल मीठा होता है.

सुमित:- लेकिन इंतजार कड़वा होता है. :युक:

मेघा:- हाँ वो तो तुम्हारे चेहरे से hi पता चल रहा है.

सुमित:- तो फिर प्लीज तरस khaao...Abb तो बता दो. :प्रे:

मेघा:- लेकिन तुम इतना क्यों बेसब्र हो रहे हो? एक नार्मल सी सरप्राइज hi तो है.

सुमित:- तुमने कहा था ना ये सरप्राइज कीर्ति से रिलेटेड से भी ज्यादा सुर्प्रिसिंग hai...Bas तभी से इसी बारे में सोच रहा hun...Raat में भी छैन की नींद नहीं आया.

बस ये जानना चाहता hun...Kya सरप्राइज है.

मेघा:- वो कहते है न वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता. :lol1:

सुमित:- ये कहावत फिर कभी बाद mein...Abhi तो बस वो सरप्राइज बता दो.

मेघा:- नहीं ये तो सही वक्त आने पर hi बताउंगी.

इतना कह कर मेघा क्लास की तरफ चली gayi...Sumit भी पीछे लग गया लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ.

सुमित का बेचैनी बढ़ता hi जा रहा tha...Aur हद्द तो तब हुआ जब.

प्रोफेसर:- Sumit...Tumhara ध्यान किधर है?

सुमित:- सरप्राइज में.

ये कहने के बाद सुमित को माहौल का अंदाजा hua...Professors और कुछ स्टूडेंट्स उससे घर रहे थे और कुछ हंस रहे थे.

सुमित:- सॉरी sir...I मैं.

प्रोफेसर:- आज तो तू मुझे सरप्राइज दे रहा hai...Kal तक तो काफी अटेंटिव था लेकिन आज?

सुमित इस बार कोई जवाब नहीं दे paaya...Side में hi बैठी मेघा मुंह छुपा कर हंस रही थी.

प्रोफेसर:- अगली बार से ऐसा नहीं होना chahiye...Jaanta हूँ अच्छा स्टूडेंट है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की केयरलेस बन jaayega...Surgery में नॉलेज के साथ साथ स्किल्स भी चाहिए और कॉमन मिस्टेक्स बहुत kam...Baar बार समझाना मुझे भी अच्छा नहीं लगता.

इस बार प्रोफेसर की आवाज में काफी गुस्सा tha...Sumit ने कुछ जवाब नहीं दिया.

बाकी की क्लास सुमित ने ध्यान देने की पूरी दिखावा किया.

सुमित:- अब्ब तो दया karo...Sir से दांत भी खिला दिया सबके saamne...Abb क्या पिटवाना चाहती हो?

मेघा:- जो जैसा करता है वो वैसा hi भरता है. :डी

सुमित:- फिर से कहावत :डोह:

सुमित कुछ देर इंतजार करता hai...Fir भी मेघा कुछ नहीं बताती.

सुमित:- जब मन करे बता देना.

सुमित के आवाज में इस बार इर्रिटेशन tha...Aur वो वह से जाने लगा.

मेघा:- अगर मई इर्रिटेट हो गयी तो बताउंगी भी नहीं.

सुमित:- मज़बूरी का सही फायदा उठा रही हो.

मेघा:- अच्छा chalo...College ख़त्म होने के बाद बताउंगी.

इस बात से भी सुमित को राहत नहीं मिला.

बाकी की दिन भी सुमित के लिए बोरिंग साबित hua...Ghadi का धीरे चलने की एहसास से सुमित ने अपने hi घडी में दो पंच भी मार diya...Lekin वक्त की चाल में कोई बदलाव नहीं आया.

सुमित का ये बेचैनी देख मेघा को हंसी भी आ रहा था.

और आखिर वो वक्त आ hi गया.

सुमित:- अब्ब तो बता दो.

मेघा:- इतना भी क्या जल्दी है?

सुमित:- Please...Abb मेरा धैर्य जवाब दे रहा hai...Bataao वर्ण मई...

मेघा:- वर्ण क्या?

सुमित:- वर्ण मई रू दूंगा. :क्राई:

मेघा:- अच्छा बताती हूँ...2 हफ्ते बाद इंटरकॉलेज फार्माकोलॉजी क्विज कम्पटीशन है.

ये सुन कर सुमित ठगा हुआ महसूस करने laga...Yahi बात सुनने के लिए इतना इंतजार और बेसब्री?

सुमित:- इस में सुर्प्रिसिंग क्या है?

मेघा:- तुमने ध्यान से सुना nahi...Ek बार फिर रिपीट करती हूँ...इंटरकॉलेज.

सुमित अब्ब सोचने लगा और जब थोड़ा हिंट मिलने लगा तब मेघा ने एक कॉलेज का नाम बताया.

अब्ब सुमित के चेहरे का भाव बदलने लगा.

मेघा:- सही सोच रहे ho...Kirti भी पार्टिसिपेंट है इस क्विज में.

अब्ब तो सुमित का चेहरे का रंग एक दम से बदल gaya...Murjhaya चेहरे में एक नयी जान आ गया.

मेघा:- थोड़ा पढाई लिखे भी कर लेना?

सुमित:- वो क्यों?

मेघा:- तुम्हारा मार्क्स और रिजल्ट...3 बेस्ट स्टूडेंट्स को चूसे कर रहे hai...Abhi तक तो पोजीशन के हिसाब से सेलेक्ट कर रहे hai...Iss क्राइटेरिया में तुम दूर दूर तक नहीं हो.

सुमित:- कोई टेंशन नहीं hai...Wo 3रद कौन है? Arun...Usse मन लूंगा.

मेघा:- अगर वो न माना तो?

सुमित:- सिलेक्टर को जा कर bolunga...Mai बेस्ट हूँ कंटेस्टेंट के रूप में. ज्यादा से ज्यादा नॉलेज टेस्ट करेगा हम दोनों ka...Aashaani से जीत जाऊँगा.

मेघा:- उसको ुँडेरेस्तिमाते नहीं कर रहे हो?

सुमित:- नहीं कॉंफिडेंट हु अपने mein...Aur जब बात प्यार की हो तो कॉन्फिडेंस के साथ म्हणत भी करूँगा पढ़ाई में.

इतना कह कर सुमित अपने hi दुनिया में खो gaya...Uske चेहरे की ख़ुशी और बदलते भाव को देख कर मेघा भी मुस्कुराने लगी लेकिन जल्द hi ये मुस्कान बिलकुल hi गायब हो गया. :(

खुद के लिए दुखी है या सुमित के लिए ख़ुशी? इस बात का फैसला नहीं कर पा रही थी वो.

सुमित:- सच mein...Intejaar का फल मीठा होता है.

इतना कह कर सुमित वह से अपने घर की तरफ निकल गया.

क्या बात है? इतना बदलाव?

सुमित का नया रूप देख उसके पापा ने कहा.

सुमित:- Badlaaw...Soch रहा हूँ जब बदल hi रहा हूँ तो अंदर का बदलाव hi क्यों? बाहर से भी बदल जाओ.

सुमित ने अपने गाल पर हाथ चला कर कहा जहा कुछ देर पहले दाढ़ी (बियर्ड) हुआ करता था.

रश्मि:- अब्ब जा कर सही अकाल आया hai...Warna उस जंगल के साथ तो बिलकुल hi बन्दर दीखते थे.

सुमित:- बन्दर कब से दाढ़ी रखने लगे?

रश्मि:- बात का मतलब samjhiye...Mera मतलब था बहुत बुरे दीखते थे आप और अब्ब भी.

सुमित:- वो तो दिखूंगा hi...2 किलो मेक उप रोज थोड़ी न लगाता हूँ.

रश्मि:- कुछ ज्यादा नहीं बोल रहे है आप? :माध:

सुमित:- अच्छा ज्यादा हो गया? चल 1.5 किलो. :lol1:

इतना कह कर सुमित अपने रूम में चला गया और रश्मि पीछे से घूरती रही.

रूम में पहुँचने के बाद सुमित का अंदाज़ अलग hi tha...Wo कुछ गाना गन गुनाते हुए आईना के सामने बहुत सी बातें सोच रहा tha...Wo इस वक्त को भुला कर 2 हफ्ता बाद की जिंदगी जी रहा था.

कीर्ति से कब मिलेगा? कैसे मिलेगा? वो एहसास कैसा रहेगा? कीर्ति का गुस्सा उसके लिए काम हुआ या नहीं? यही कुछ सोच था जिस में सवाल सुमित खुद से करता और जवाब भी खुद hi देता था.

नाश्ता करने के लिए जब वो निचे आया तब सामने मौजूद 2 शख्स को देख थोड़ा हैरानी तो हुआ लेकिन अगले hi पल नार्मल हो गया.

सामने आरव और उसके पापा थे.

आरव को देख.

सुमित:- (इन हिज मंद) इसका टाइमिंग तो आशीष से भी बेकार है.

फ्रेंड्स अब्ब स्टोरी का स्पीड थोड़ा तेज बढ़ेगा.
 
अपडेट 66

क्या बात है छोटे? बहुत दिनों के बाद दिख रहा है? सब कुछ ठीक तो है न?

सुमित के पापा के इस बात पर उसके चाचा मुस्कुराते हुए बोले.

Aarav's डैड:- हाल चाल तो आपका पूछने आया था भैया?

ये मुस्कान मुस्कान काम व्यंग ज्यादा लग रहा था.

स. डैड:- पूछने की क्या जरुरत hai...Dekh hi रहा है कितना तंदुरुस्त hun...Wo बोलते है ना फिट एंड fine...Lekin तू थोड़ा मोटापा का शिकार हो गया hai...Thoda बहुत योग कर लिया कर.

ा. डैड:- Motaapa...Haan थोड़ा saa...Wo क्या है ना आरव का फ्यूचर सिक्योर्ड है तो इसी ख़ुशी में कोई टेंशन नहीं hai...Bas अच्छे से खाओ पियो और चैन से सू jaao...Baaki के वक्त अपने बेटे की सफलता देखो.

ये बात सुनते hi सुमित का अपने हंसी पर से कण्ट्रोल छूट gaya...Lekin जल्द hi वो संभल गया.

आरव:- इस हंसी का वजह जान सकता हूँ?

सुमित:- जान कर क्या करेगा? कुछ सोच रहा tha...Waise भी मेरा सोच में से कुछ तुझे समझ में नहीं आता और कुछ से मिर्च लग जाता hai...Ye दूसरा केटेगरी hai...Jaane दे वर्ण मुंह फुला लेगा.

आरव:- चल बता hi दे? क्या सोच रहा था?

सुमित:- अब्ब चाचा जी को सुकून मिल रहा है तेरे सिक्योर्ड फ्यूचर से तो सोचा कोई ऐसा काम मिल गया होगा जिसमें तू बहुत hi अच्छा hai...Movies पायरेट कर के बेचने की.

और हुआ भी wohi...Aakhiri लाइन सुनने के बाद आरव का चेहरा एकदम से लाल हो गया.

आरव:- वो बचपन था.

सुमित:- बचपन की बहुत सी आदतें बुढ़ापे तक साथ नहीं छोड़ता.

इस पर आरव गुस्से में घूरता hi रहा.

ा. डैड:- वैसे Sumit...Haalaath से तो लग रहा है ये काम अब्ब तुम्हे करना पद सकता है?

सुमित:- इस हालात से तो मई भी अनजान hun...Jara समझाइये.

ा. डैड:- सूना है पढ़ाई में मन नहीं लगता tumhara...Kuch साल पहले से hi आवारा बन गए ho...Ladkiyon के चक्कर mein...Cigarette, दारु की chakkar...Bahut गलत hai...Lekin आज कल के generation...Kuch समझते कहा है.

इस बात पर सुमित को गुस्सा तो आया लेकिन कुछ सोच कर मुस्कुराने लगा.

ा. डैड:- वैसे भैया इसी वजह से आया tha...Aap तो जानते hi है सुमित कितना जिद्दी hai...Kisi की नहीं सुनता? आपका तो कोई मान hi नहीं रखा isne...Kuch वैल्यू नहीं? कुछ इज़्ज़त नहीं?

सोचा हाल चाल जानते हुए कुछ ज्ञान भी देता चालू सुमित को?

इस बात पर सुमित के पापा कुछ देर मुस्कुराने के बाद कहते है.

स. डैड:- बहुत देर कर दी वजह बताने में?

ा. डैड:- हाँ वजह था भी aisa...Thoda इंतजार कर रहा tha...Aap तो जानते hi है इंतजार का फल मीठा होता है.

स. डैड:- नहीं कड़वा होता है.

ा. डैड:- ये तो मैंने कभी सुना नहीं.

स. डैड:- आँखों से देखा और कानो से सूना हर बात सही नहीं होता hai...Mehsus कर lena...Tujhe भी पता चल जाएगा इंतजार का फल कड़वा hi होता है.

इस पर आरव के पापा कुछ नहीं बोलते.

स. डैड:- Sumit...Tera चाचा कुछ ज्ञान देना चाहते hai...Aur ज्ञान को कभी ना मत kehna...Marte वक्त रावण भी लक्ष्मण को सही ज्ञान दे कर गए thhe...Ye तो तेरा जीता जागता ज्ञान का भंडार चाचा hai...Kuch सीख ले.

इस बात पर दोनों hi आरव और उसके पापा हैरानी से सुमित के पापा को देखते hai...Taarif था या vyang...Dono को hi समझ में नहीं आया.

ा. डैड:- Sumit...Kuch बातें hai...Jo तुम्हे बुरा लग सकता hai...Lekin जितना जल्द तुम इन् बातों को रीलीज़ करोगे उतना hi अच्छा होगा तुम्हारे लिए.

आरव तुम से उम्र में 1 साल छोटा है लेकिन पढ़ाई में 1 साल आगे hai...Ye बात को शायद तुम अभी हलके में ले रहे हो लेकिन बाद में.....

फिर ऐसे hi उन्होंने कुछ देर अपनी बातें कहना जारी रखा जिसमें हर शब्द सुमित को निचा दिखा रहा tha...Sumit भी मुस्कुराते हुए सुनता गया.

ा. डैड:- उम्मीद है तुम्हे समझ में आ गया है.

सुमित:- जी चाचा ji...Aapka हर एक बात दिमाग़ में घर कर गया है और हर एक बात में सच्चाई था.

ा. डैड:- और bhaiya...Aapka बीटा तो आपसे भी 2 कदम आगे निकल चूका है.

स. डैड:- वो कैसे?

ा. डैड:- आप भी नशा करते thhe...Lekin आपका बीटा तो नशेड़ी hi बन गया.

आप जो इतना महान दिखाते है खुद को लेकिन अपने hi बेटे को गलत रास्ते में जाने से रोक नहीं paaye...Aur मुझे आना पड़ा सही गलत का राष्ट दिखाने.

स. डैड:- तेरा बहुत बहुत shukriya...Warna मुझे तो लगा था मेरा बीटा हाथ से निकल गया hai...Abb उससे कोई सुधर नहीं sakta...Jo तूने आज किया है वो कोई फरिश्ता hi कर सकता है.

सुमित के पापा ने मुश्कुराते हुए ऐसे तारीफ़ किया जो आरव के पापा को पचाना बहुत मुश्किल हो रहा था.

आरव:- वैसे Sumit...Tera सिगरेट और अल्कोहल का तो काफी किस्सा सुना hai...Kitna पीटा है?

लंग कैंसर और लिवर किररहोशिस तो हो hi गया hoga...Aisa चीज पी रहा है जो सिर्फ और सिर्फ नुकशान hi करता है.

नफरत भरी आवाज में आरव ने कहा.

कुछ देर से खामोशी से सुन रही सुमित की माँ को इस बात पर बहुत गुस्सा आया.

स. माँ:- आरव...

वो कुछ बोलती उससे पहले.

सुमित:- बच्चा है ये Maa...Daantiye mat...Agar रोने लगा तो चॉकलेट भी नहीं है मेरे पास चुप कराने के लिए.

आरव:- वैसे आईडिया अच्छा है टॉपिक डाइवर्ट कराने के लिए.

सुमित:- तू कहता है तो कनवेर्स कर देता हूँ.

लंग कैंसर तो होता रहता hai...Mai सोच रहा हूँ अब्ब तक ुरोथेलिअल कार्सिनोमा (यूरिनरी ब्लैडर कैंसर) क्यों नहीं हुआ? और जहा तक बात है दारु और लिवर सिरोसिस की तो उस में क्या है लिवर ट्रांसप्लांट करा लूंगा और फिर से लग जाऊँगा.

आरव:- कुछ ज्यादा hi कॉंफिडेंट नहीं है तू?

सुमित:- बात सुमित से कर रहा है मेरे भाई.

आरव:- ये सब chhod....Cigarette से ब्लैडर का कैंसर कब से होने लगा?

सुमित:- उम्र से तो छोटा है hi...Gyaan में भी है ये बात तो प्रोवे मत kar...Log हसेंगे तुझ पर अगर ऐसे hi कुछ भी बकता रहा तो.

आरव:- मैंने क्या गलत कह दिया?

सुमित:- हर बात में galat...Pehle तो सिगर्रेट और दारु सिर्फ नुकशान करता है.

4तह ईयर में hai...Ye तो पढ़ hi लेना चाहिए था अब्ब तक सिगरेत्ते इस प्रोटेक्टिव अगेंस्ट अल्सरेटिव Colitis...Aur जहा तक बात दारु की है तो एक बार पढ़ लेना काम दोसे में अल्कोहल का ब्रेन में इफ़ेक्ट और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम में इफ़ेक्ट?

आरव:- तब तो हर किसी को पीना सुरु कर देना चाहिए?

सुमित:- जेहेर hai...Lekin 100% बुरा भी नहीं hai...Teri तरह. :डी

आरव:- क्या मतलब?

सुमित:- इतना ना समझ भी नहीं है तू.

इस बार आरव चुप रहा.

ा. डैड:- अच्छा भैया चलते hai...Jo काम करने आये थे वो कर दिया hai...Ummeed है सुमित सुधर जाएगा.

स. डैड:- बहुत बहुत शुक्रिया तेरा एक बार फिर se...Ummeed है तुझे समझ में आ गया होगा इंतजार का फल कड़वा होता है.

आरव के पापा ने कुछ जवाब नहीं diya...Lekin उन्हें अच्छे से समझ में आ गया था इंतजार का फल कड़वा होता है.

कितने उम्मीद से आये थे की सुमित या उसके पापा को आज निचा dikhayenge...Unka गुस्सा का उनके खिलाफ hi इस्तेमाल करेंगे लेकिन सुमित की पापा की हर एक बात पर मुस्कुराना उन्हें उनके हर एक उम्मीद को कुचलते जा रहा tha...Aakhir में उनका मन hi कड़वा हो गया.

स. डैड:- गेट को अच्छे से लगते हुए जाना.

गेट से निकलते hi जब आरव के पापा ने सूना तो ना चाहते हुए भी गेट को सत्ता कर वो और आरव निकल गए.

स. डैड:- ये वाला मातुरित्य तो बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया tha...Samajhdaar हो गया है.

सुमित:- कैसा मातुरित्य?

स. डैड:- जैसे आरव की क्लास ले रहा था सोच रहा था अपने चाचा को भी नहीं bakshega...Mujhe hi बात संभालना पड़ेगा.

सुमित:- अभी उनसे उनका हर बात पर बड़ी आवाज में जवाब देना और खुद को डिफेंड करना तो बचपना है.

वैसे भी क्या कहता मई कोई बेवड़ा और नशेड़ी नहीं hun...Aur इस बात पर उनसे लड़ना ये अपने कमी को नजर अंदाज करना होगा सामना नहीं.

उनको जवाब dunga...Lekin बातों से nahi...Apne काम se...Wo मुझे निकम्मा समझते hai...Mera कामयाबी hi मेरा जवाब hoga...Aaj उनका हर एक बात मेरे दिल और दिमाग में घर कर गया hai...Unka इसी ज्ञान यानी की मेरे कमजोरी को अपना ताकत बनाऊंगा एक दिन.

सुमित की पापा बस सुन hi रहे थे सुमित की बात.

सुमित:- लेकिन Papa...Unka ये बर्ताव समझ से hi बाहर hai...Wo भी बचपन से है.

स. डैड:- जितना भी फ़्रस्ट्रेशन है सब मेरे वजह से tha...Mera गुस्सा तुझ पर निकाल रहा tha...Aur आज वो मौका मिला था जो आज तक इंतजार कर रहा tha...Lekin इंतजार का फल मिला भी तो कड़वा :lol1:

सुमित:- आपसे क्या प्रॉब्लम है उनका?

स. डैड:- है एक छोटी सी kahaani...Kisi दिन लम्बा कर के सुनाऊंगा.

सुमित:- ये तो मेरा जैसा डायलाग है.

स. डैड:- सही कहता था तेरा Chacha...Mera कुछ वैल्यू hi नहीं hai...Izzat hi नहीं hai...Apne बाप पर hi चोरी का इलज़ाम लगा रहा hai...Wo भी डायलाग चोरी का.

सुमित:- बस बस Papa...Aap मुझसे भी बुरा एक्टर है.

स. डैड:- जानता हूँ बचत अच्छा एक्टर है...2-3 साल तक सही एक्टिंग करता रहा tu...Pata hi नहीं चला.

इस बात पर सुमित थोड़ा सीरियस होने लगा.

स. डैड:- अब्ब किस ख़ुशी में ऐसा सदा हुआ चेहरा बना रहा है?

सुमित:- नहीं कुछ याद आ गया था.

स. डैड:- जानता hun...Lekin ये yaadein...Ye तो जिंदगी भर साथ चलता hai...To क्या जिंदगी भर सदा हुआ चेहरा ले कर ghumega...Abb muskura...Warna सच में कड़वा फल खिला dunga...Karela.

सुमित भी इस बात पर मुस्कुरा देता है.

सुमित:- पापा मई सोच रहा था की आप चाचा को समझाते क्यों नहीं? ऐसे झगड़ा अच्छी बात भी तो नहीं है.

स. डैड:- तूने देखा नहीं है उसका फ़्रस्ट्रेशन अच्छे se...Hamesha मुझसे पीछा होम का दुःख है usse...Aur अभी तक है.

समझाया भी बहुत hai...Baatein भी बहुत किया hai...Lekin वो सुने तब न.

जो अब्ब तक ये बातें अपने दिल में दबा कर रखा है अब्ब क्या sunega...Aur बार बार भैंस के सामने बीन बजाने की बेवकूफी मई भी नहीं कर सकता.

अपने तक तो ठीक hai...Lekin उसका बीटा भी उसके जैसा hi बन रहा है इस बात पर भी आँख में पट्टी बाँध रखा है usne...Aarav का तेरे प्रति व्यव्हार इसी लिए है क्यों की बचपन से वो यही सब देखता और सीखता आया है.

उसको जवाब वक्त hi dega...Jab मुंह के बल गिरेगा तभी अकाल ठिकाने आएगा.

सुमित इस मामले में ज्यादा नहीं जानता था तो इतना में hi चुप हो गया.

आफ्टर फ्यू डेज

मेघा:- बहुत खुश दिख रहे हो?

सुमित:- हाँ क्विज में सेलेक्ट हो गया hun...Arun मान गया.

मेघा:- तैयारी कैसा है फिर?

सुमित:- Perfect....Sab दवाई को पानी बना कर पी लिया hai...Bas यही बाकी है.

फिर सुमित एक टेबलेट मेघा को देता है.

मेघा:- ये तो सेदटयवेस (स्लीप िन्दुसिंग) है.

सुमित:- हाँ इंतजार नहीं hota...Kal कीर्ति से जो मुलाक़ात hogi...Raat का इंतजार मुझसे सहा नहीं jaayega...Bas इसी लिए.

मेघा वो दवाई फेंक देती है.

सुमित:- अरे मरवाओगी tum...Saamne वाले महेश अंकल के हाथो से?

मेघा:- क्या मतलब?

सुमित:- उनके लिए दवाई ले जा रहा tha...Aur तुमने फेंक दिया.

मेघा:- तब तो कुछ और hi कह रहे थे.

सुमित:- मजाक था. :लोटपोट:

इतना कह कर दवाई उठा कर सुमित वह से निकल गया.

मेघा बस सुमित को ख़ुशी में देखते hi रह गयी.
 
अपडेट 67

कितना टाइम लग रहा है? पता नहीं कब सुरु होगा?

ये बेचैनी भरी आवाज विकाश का था.

सुमित:- हो जाएगा suru...Jaldbaazi किस चीज की है.

सुमित ने जवाब तो विकाश का था लेकिन नजर कीर्ति की और.

कीर्ति सुमित को आज इस क्विज में देख हैरान भी थी और गुस्सा bhi...Wo सुमित को इग्नोर करने की हर एक प्रयास कर रही थी.

उसी की साइड में बैठा विवेक सुमित को नफरत भरी नजर से घूर रहा tha...Lekin सुमित को इस बात से कोई फ़िक्र नहीं tha...Uska नजर, ध्यान और सब कुछ तो बस कीर्ति पर hi tha...Chehre में एक अलग hi रौनक और तेज गति से धड़कता दिल की धड़कन ये बात भी साफ़ कर रहा था.

मेघा कभी सुमित की और देखती तो कभी कीर्ति ko...Kabhi उससे सुमित के लिए ख़ुशी हो रहा था तो कभी खुद के hi दिल में दर्द महसूस हो रहा था.

विकाश:- (सुमित की कान mein)Kya कर रहा है yaar...Megha तुझे hi देख रही है.

सुमित:- आँखें हैं तो देखेगी hi. :डेड:

विकाश:- वो क्या सोचेगी?

सुमित:- गलत सवाल... वो क्या सोचेगी नहीं वो क्या सोच रही है? सोचना भी सही नहीं hai...Wo क्या देख रही है?

और जवाब है आशिकी.

विकाश:- Aaaashiquiiii...Ye क्या बोल रहा है?

इस बार हैरानी में विकाश का आवाज थोड़ा तेज हो गया.

सुमित:- दिख नहीं रहा hai...Tab से hi नैन माताका चल रहा hai...Abb तू बोर मत kar...Bahut मजा आ रहा है अभी.

विकाश:- तू मेघा से प्यार नहीं करता?

इस बार सुमित थोड़ा सीरियस हो कर विकाश की और mudaa...Aur शख्त आवाज में.

सुमित:- बहुत पिटेगा tu...Mujhse नहीं मेघा se...Agar ये बात मेघा को पता चला तो.

विकाश:- मतलब तुम दोनों एक दूसरे से प्यार नहीं करते?

थोड़ा हैरानी भी था विकाश की इस बात में और थोड़ा ख़ुशी भी.

सुमित:- अबे nahi...Wo दोस्त है meri...Best फ्रेंड.

इस बात से विकाश की ख़ुशी कई गुना बढ़ गया.

विकाश:- और वो सामने वाली लड़की?

सुमित:- मेरी एक्स गफ.

विकाश:- सच बोल रहा है तू?

सुमित:- वैसे किसी का कसम तो नहीं खाता हूँ जल्दी लेकिन चल आज तेरा hi सर का कसम खा लेता हूँ.

अब्ब विकाश कुछ नहीं bola...Khushi में बोलै भी नहीं जा रहा था.

सुमित का भी पूरा ध्यान अब्ब कीर्ति पर tha...Kuch दिन पहले तक मुरझाया चेहरा में एक नयी जान वापस आ गया tha...Hansta मुस्कुराता इस चेहरे में एक अलग hi रौनक था.

हर बार की तरह इस बार भी सुमित का आत्मविश्वाश बढ़ रहा था की जल्द hi कीर्ति उसकी हो जायेगी.

फिर सुरु हुआ क्विज का दौर.

सभी पार्टिसिपेंट्स अपने टीम और पॉइंट्स के लिए दिमाग़ घुमा रहे थे सुमित को छोड़ kar...Wo तो अपना दिल और दिमाग़ दोनों hi कीर्ति के पास रख कर बैठा था.

विकाश:- अबे सुमित कुछ तो आंसर bol...Kuch समझ में नहीं आ रहा है इसका आंसर?

सुमित:- दिमाग़ का बत्ती jala...Aakhir टोपर है तू क्लास का?

विकाश:- लेकिन ये क्वेश्चन कभी पढ़ा नहीं है.

सुमित:- तो 2ंद टोपर से पूछ? मुझ जैसा बैकबेंचर और जस्ट पास वाले से क्या पूछ रहा है?

विकाश मेघा को पूछता है लेकिन वो भी नहीं बता पाती है.

सुमित:- अब्ब तो एक hi राष्ट है.

विकाश:- क्या?

सुमित:- आँखें बंद कर.

विकाश:- इससे क्या होगा?

सुमित:- अबे कर न.

विकाश:- हाँ कर लिया?

सुमित:- दिमाग़ में जो दवाई का नाम पहले aaye...Wo बता दे.

विकाश आंसर देने hi वाला था की.

सुमित:- रुक ruk...Aaram se...Confident हो कर जवाब दे.

विकाश कॉन्फिडेंटली अपना जवाब देता hai...Aur जवाब था गलत.

विकाश का चेहरा लटक जाता है.

सुमित:- इसी लिए कहता हूँ लक वुक कुछ नहीं होता hai...Mehnat kar...Kaamyaabi मिलेगा.

फिर सुमित हँसते हुए फिर कीर्ति की दर्शन में लग जाता है.

विकाश सुमित को घूरे जा रहा था और मेघा को सुमित की इस हरकत पर हंसी आ रहा था.

फिर वो क्वेश्चन कीर्ति की टीम की पास गया.

और कीर्ति सही जवाब देती है.

सुमित:- मेरी कीर्ति का कोई जवाब नहीं.

कीर्ति से भी ज्यादा खुश सुमित दिख रहा था.

विकाश:- ये तूने जान बुझ कर किया न?

सुमित:- बिलकुल nahi...Mujhe भी पता नहीं tha...Kirti की ख़ुशी में शामिल हो रहा था bas...Kirti की जीत hi तो मेरा जीत है.

विकाश अपने सर पर हाथ रख कर अगले क्वेश्चन के लिए तैयार हो गया.

मेघा बस सुमित की हरकत को देख रही thi...Sumit को इतना खुश और एक्ससिटेड देखने की उम्मीद आज पूरा जो हुआ था.

ऐसे hi क्विज चलता रहता है.

विकाश:- अबे yaar...Tu यहाँ क्या करने आया है?

सुमित:- आशिकी.

शार्ट एंड स्वीट आंसर.

ऐसे hi कुछ देर और क्विज चलने के बाद.

विकाश:- ऐसे तो हार hi jaayenge...Aas पास भी नहीं है हम बाकी के टीम्स के सामने.

सुमित:- हीरो का खेल हमेशा लास्ट में आता है.

इतना कह कर सुमित फिर अपने काम में व्यस्त हो गया.

फिर से क्विज का दौर chala...Iss बार विकाश और मेघा अपने टीम को काफी ऊपर तक ले कर गए.

और आखिर में.

विकाश:- (तो सुमित) जीतने का आखिरी मौका है.

सुमित:- विजयी भाव.

विकाश:- आशीर्वाद नहीं आंसर मांग रहा hun...Mujhe इसका आंसर नहीं पता.

सुमित:- मेघा से पूछ फिर.

मेघा:-- मुझे भी नहीं पता.

विकाश:- आखिरी मौका hai...Tu सोच कर dekh...Agar सही हो गया तो जीत जाएंगे.

उम्मीद भरी आवाज में विकाश ने कहा.

सोचने का नाटक कर सुमित ने एक आंसर कहा.

विकाश:- सूरे

सुमित:- हाँ.

विकाश:- मुझे सही जवाब तो पता नहीं है लेकिन इस्स्में शक हो रहा है.

तू कहता है तो यही जवाब देता हूँ.

इतना कह कर विकाश जवाब देने hi वाला था की.

सुमित:- अबे रुक.

फिर सुमित कीर्ति की और देखता hai...Kaafi खुश दिख रही thi...Sumit जानता था की ये जवाब गलत हो गया तो ये सवाल कीर्ति की पास जाएगा और कीर्ति का एक्ससिटेमेंट देख उससे पता चल गया था की कीर्ति सही जवाब जरूर देगी.

फिर सुमित थोड़ा सख्त हो कर आंसर चेंज कर देता है.

विवेक भी कन्फ्यूज्ड हो कर दूसरा जवाब देता hai...Aur वो बिलकुल सही था.

जीत की एक्ससिटेमेंट काम होने के बाद.

विकाश:- हरवाने की पूरा प्लान बना लिया था तूने.

सुमित:- अंत भला तो सब भला.

इतना कह कर सुमित कीर्ति की तरफ gaya...Jo जीत के इतना पास आने के बाद हार कर बहुत मायूस थी.

सुमित:- प्यार में हमेशा हारने की ठेका मई hi क्यों लू? एक दो बार तुम भी तो महसूस करो ये दर्द.

मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jawaab में कीर्ति गुस्से से देखती है.

सुमित:- वैसे एक बात तो कहना भूल hi gaya...Khubsurat तो तुम पहले भी thi...Aaj कुछ नया पता चला तुम्हारे बारे में.

"ब्यूटी विथ ब्रेन."

बहुत प्यार से सुमित ने कहा और उतना hi गुस्से से कीर्ति ने सुमित को देखा.

सुमित:- वैसे तो ये पुराना डायलाग hai...Lekin आज कहना जरुरी है.

गुस्से में भी तुम बहुत खूबसूरत लगती हो.

कीर्ति कुछ कहती उससे पहले विकाश और मेघा वह आ गए.

कीर्ति:- कोंग्रटुलतिओन्स.

सुमित:- थैंक यू.

कीर्ति:- तुम्हे नहीं कहा है?

सुमित:- विनिंग टीम में hun...Issi लिए सोचा मुझे भी कहा है तुमने.

कीर्ति:- विनिंग टीम में तो ho...Lekin एक बोझ jaise...Jaanti हूँ कितना कंट्रीब्यूशन है तुम्हारा.

सुमित:- इसी लिए तो प्यार करता हूँ tumse...Itna कुछ जानती हो मेरे बारे mein...Accha बता hi दो कितना है मेरा कंट्रीब्यूशन?

कीर्ति:- "विन" शब्द में "स" अल्फाबेट का जितना रोले है उतना hi.

सुमित:- "स" फॉर Sumit...Sahi अल्फाबेट सिलेक्शन है तुम्हारा.

कीर्ति इस बात पर कुछ नहीं कहती.

सुमित:- वैसे भी मेरा जीत तुम्हारा hi तो जीत है pagli...Pata नहीं कब समझोगी तुम ये बात.

बहुत देर से खुद पर कण्ट्रोल कर रहा विवेक से अब्ब कण्ट्रोल नहीं हुआ.

विवेक:- बहुत हुआ...

सुमित:- सार्वजनिक Beizzati...Ye शब्द सुना है कभी?

विवेक चुप हो gaya...Gusse में उससे बोलने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे.

फिर कुछ देर बाद सभी अपने अपने घर की और जाने lage...Iss बिच कीर्ति ने सुमित को पूरी तरीके से इग्नोर कर दिया था.

जाते वक्त सुमित कीर्ति को पीछे से तब तक देखता रहा जब तक कीर्ति उसकी नजरों से ओझल ना हो gayi...Aur उसके बाद फिर से वही हारा हुआ मुस्कान.

लेकिन दिल में ये सुकून जरूर था की बहुत दिनों बाद कीर्ति से मिला और उससे बातें किया.

विकाश:- थैंक यू.

सुमित:- किस बात की?

विकाश:- तू नहीं होता तो हम जीत नहीं पाते.

सुमित:- इस में मैंने क्या किया? टीम को सिर्फ तूने और मेघा ने संभाला था.

विकाश:- सुमित एक बात बता?

सुमित:- हाँ पूछ.

विकाश:- तू इतना रिलैक्स्ड कैसे था? हारने की कोई दर नहीं था क्या?

सुमित:- ओने साइडेड जीतने की क्या majaa...Thoda कॉम्पिटिटिव होना chahiye...Thrill का मजा hi कुछ और है.

विकाश:- अगर इस थ्रिल के चक्कर में हार जाते तो?

सुमित:- हार और जीत तो होता रहता hai...Jaruri है तो इस का experience...Jeet से कॉन्फिडेंस मिलता है तो हार से नया पाठ.

विकाश:- ये भी सही hai...Lekin एक बात बता तू बहुत hi कॉंफिडेंट नजर आ रहा tha...Kab आंसर देना है और कब इग्नोर करना है तुझे ये बात अच्छे से पता था.

इस बात पर सुमित थोड़ा मुस्कुराता है.

सुमित:- सीनियर्स सिर्फ रैगिंग और दारु साथ पीने के लिए नहीं होते है.

विकाश:- मतलब?

सुमित:- ये क्विज कम्पटीशन 5 साल से चल रहा hai...Seniors से बात करने पर पता चला की मार्क्स का पैटर्न लगभग शामे hi hai...Iss साल कुछ नया होता भी नहीं दिख रहा था.

पता था कब आंसर देना है और कब nahi...Thrill बनाने के liye...Jab आंसर देने का वक्त आता तुम लोग सही सही आंसर दे रहे थे और मुझे आशिकी करने का मौका भी. :डी

फिर कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद विकाश भी चला जाता hai...Aur बचे मेघा और सुमित.

मेघा:- खुश तो बहुत होंगे तुम.

सुमित:- हाँ बहुत.

मेघा:- और ये ख़ुशी का वजह ये क्विज में 1सत आना तो बिलकुल भी नहीं है.

सुमित:- बिलकुल nahi...Agar हार भी जाता तो टेंशन नहीं होता.

बस अपने टीम की इज़्ज़त का ख्याल आ गया लास्ट में और एक mauka...Kirti को भी तड़पाने की. मई hi कब तक तड़पुं :डी

मेघा:- ऐसे खुश चेहरा में बहुत अच्छा दिख रहे हो.

सुमित:- अब्ब ये तुम्हारा हाथ में है. :अप्प्रोवे:

मेघा:- कैसे?

सुमित:- ऐसे hi कीर्ति से मिलने की सुरपरिसेस देती raho...Mai खुश हो जाऊँगा.

इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Sach में बहुत खुश था wo...Abhi भी उसके दिमाग में कीर्ति के साथ जुडी ये यादें hi घूम रहा था.

मेघा भी सुमित की ख़ुशी में खुश होने की कोशिश करते हुए अपने हॉस्टल की और जाने लगी.
 
अपडेट 68

क्या सोच रहे हो?

सुमित को लंच टाइम में अकेले देख मेघा ने पूछा.

सुमित:- Soch...Abb सिर्फ सोच hi तो बाकी है.

मुस्कुरा कर सुमित ने जवाब दिया.

मेघा:- आज लंच का कोई प्लान नहीं है?

सुमित:- Nahi...Tum jaao...Warna फिर लेट हो जाएगा.

मेघा:- आज कोई व्रत है?

सुमित:- Vrat...Haan कह सकती ho...Kabhi कभी...

सुमित इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले.

विकाश:- मई ी ज्वाइन?

सुमित बस विकाश की तरफ देखता है लेकिन कुछ कहता नहीं है.

विकाश:- डिस्टर्ब तो नहीं कर दिया? कोई सीरियस बात चल रहा था क्या?

मेघा:- अरे नहीं.

विकाश:- या फिर कोई प्राइवेट बातें?

सुमित:- प्राइवेट बातें चार दीवारी के बिच होता hai...Naa की सबके सामने ऐसे खुले आसमान में.

विकाश:- ये भी सही है.

सुमित:- चल bata...Kya काम है? फ़ालतू के काम के लिए तो तेरे पास कोई फुर्सत मिलेगा तो नहीं.

विकाश:- हाँ काम तो है.

सुमित:- और वो काम पढ़ाई के अलावा होना चाहिए.

विकाश:- Afsosh...Padhai रिलेटेड hi काम है.

सुमित:- अब्ब तो बक्श दे yaar...Bahut मुश्किल से इसा 3 घंटे की घुटन से राहत मिला hai...Aur तू फिर उसी दलदल में धकेल रहा है.

विकाश:- अभी की बात नहीं कर रहा hun...Soch रहा था बाद में लिहरारी में साथ में पढ़ेंगे.

सुमित:- किस गृह का नाम लिया तूने अभी?

विकाश:- गृह

सुमित:- कुछ तो कह रहा tha...Kahi बैठ कर पढ़ना है?

विकाश:- Library...Lekin ये गृह कैसे?

सुमित:- जहा पर एलियन रहते है उस जगह को क्या कहना चाहिए?

दो बार hi लाइब्रेरी गया हूँ बुक्स lene...Waha का जो हालत देखा बता नहीं sakta...Jald hi रीलीज़ हो गया ये स्कीम मेरे लिए नहीं है. :ओहनो:

विकाश:- कुछ ज्यादा hi बुराई कर रहा है लाइब्रेरी ka...Har एक बुक मिल जाता hai...Padhne के लिए भी बहुत अच्छा एनवायरनमेंट hai...Har फैसिलिटी अवेलेबल है.

सुमित:- हाँ कमी है तो सिर्फ बीएड की? :हम्म:

विकाश:- क्या मतलब?

सुमित:- पढ़ाई के बाद जो गहरी नींद आता hai...Uss आनंद का बयान शब्दों में नहीं कर सकता hun...Aur बीएड ना होने की वजह से सारा मजा खिड़किडा हो जाता है.

इस बार विकाश कुछ नहीं बोलै.

सुमित:- इन शार्ट, ी ऍम नॉट लाइब्रेरी मटेरियल.

विकाश:- आउट मेघा, तुम?

उम्मीद भरी आवाज में विकाश ने पूछा.

मेघा:- सुमित से थोड़ा jyada...Alliens से बहुत काम. :lol1:

सुमित:- ऐसे दुसरो को भी पढ़ने के लिए मोटीवेट करेगा तो तेरा hi टोपर की कुर्शी खतरे में आ जाएगा.

विकाश:- टॉप करने से ज्यादा नॉलेज जरुरी है.

सुमित:- पहली बार समझदारी की बात किया है तूने.

विकाश:- आज तक पढ़ाई में कुछ कमी महसूस किया है तो ग्रुप डिस्कशन ki...Isse क्या मिस कर रहा हूँ और क्या गलत पढ़ रहा हूँ ये भी पता चलेगा और दोस्तों के साथ पढ़ने से पढ़ने में और भी मन लगा रहेगा.

सुमित:- तब तो गलत सर्किल ज्वाइन कर रहा है.

विकाश:- तुम दोनों पढ़ने में बहुत अच्छे ho...Fir कैसे गलत फ्रेंड सर्किल है ये?

सुमित:- आज पहली बार टोपर को बैक बेंचेर का तारीफ़ करते सुना है.

विकाश:- मार्क्स doesn't ऑलवेज रिफ्लेक्ट नॉलेज एंड टैलेंट...

विकाश अब्ब आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

सुमित:- वाह अब्ब इंग्लिश में भी तारीफ़ :तूहैप्पी: मेघा सच में तुम लकी हो मेरे liye...Aaj कॉलेज में सबसे पहले तुम्हे hi देखा था.

विकाश को समझ में नहीं आ रहा था सुमित उसकी बात को सीरियसली ले भी रहा है या नहीं.

विकाश:- क्या सोचा फिर?

सुमित:- चल ये भी तरय करके देखते hai...Topper का पढ़ने की तरीका और टाइम table...Try करने में क्या प्रॉब्लम है.

फिर सुमित मेघा की तरफ देखते हुए.

सुमित:- आज व्रत मेरा है तुम्हारा नहीं...10 मिनट बाकी hai...Jaldi चलो.

फिर तीनो कैंटीन की तरफ जाते है.

मेघा:- तुम भी?

सुमित:- हाँ कुछ काम याद आ गया.

मेघा और विकाश एक टेबल में बैठते hai...Sumit 5 टेबल आगे जा कर एक लड़के के सर में पीछे से मारता है और.

सुमित:- क्या हाल चाल है लोवेबिरदस? अपने में hi लगे रहते हो.

कीर्ति:- कुछ भी.

सुमित:- जो दिख रहा है वो बोल रहा hun...Evidence बेस्ड.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं बोलती.

राज:- भैया आप यहाँ?

सुमित:- अब्ब ये मत बोलना की यहाँ भी डिस्टर्ब कर रहा हूँ.

राज:- अरे nahi...Kaisi बात कर रहे है आप?

सुमित:- सब पता है mujhe...Pehle प्राइवेसी के लिए रूम से निकलवा दिया और अब्ब यहाँ से भी भगा रहा है. :डी

राज:- Nahi...Aap गलत सोच...

सुमित:- कुछ ज्यादा hi सीरियस hai...Nahi सुधरेगा तू.

सुमित ने हँसते हुए कहा तो राज भी चुप हो गया.

राज:- एक बात पूछना था आपसे.

सुमित:- 100 बात puch...Lekin टाइम 5 मिनट hi बाकी है अब्ब.

राज:- जब आप मेरा लव मटर इतनी आसानी से सोल्वे कर सकते है तो अपना प्यार को मनाने के लिए इतना वक्त क्यों लग रहा है?

कीर्ति:- हाँ ये सवाल मेरा भी hai...Le चलो तुम्हारे कीर्ति के paas...Acche से समझा दूंगी.

सुमित:- कोई फायदा नहीं.

कीर्ति:- ऐसे कैसे कोई फायदा nahi...Kabhi कभी जरुरत होता है तो रेअलिज़तिओन ki...Jaise तुमने मुझे रीलीज़ करवाया की मई गलत hun...Aise hi कीर्ति को रीलीज़ होगा तो वो जरूर समझेगी.

सुमित:- अगर मई ये कहु की वो समझना hi नहीं चाहती तो?

कीर्ति:- साफ़ बोलो.

सुमित:- जब तुम दोनों को पहली बार देखा तो समझ गया की राज के पास ज्यादा ऑप्शन नहीं है तुम्हे समझाने की.

तुम्हे देखा तो पता चला बहुत नाराज हो तुम राज se...Ek उम्मीद तुम्हे भी था की राज सुधर jaaye...Aisa नहीं था की तुम राइ से बिलकुल भी प्यार नहीं करती और उससे कोई मौका नहीं देना चाहती.

लेकिन मेरा केस थोड़ा अलग hai...Jo नफरत ग़लतफहमी से सुरु हुआ था वो ग़लतफहमी अब्ब नहीं hai...Kirti भी जानती है की मैंने उससे धोखा नहीं दिया.

लेकिन अब्ब उससे मुझसे कोई प्यार भी नहीं hai...Jitna हो सके उतना अवॉयड कर रही hai...Realization भी किस बात की? उससे अच्छे से रीलीज़ है की वो मुझसे प्यार बिलकुल भी नहीं करती.

इस बात पर राज और कीर्ति भी कुछ नहीं बोले.

कुछ देर बाद.

कीर्ति:- तो तुम क्यों लगे हो उसके पीछे? उससे भूल जाओ और आगे badho...Tum उससे अच्छा hi डेसेर्वे करते हो.

सुमित:- कल मैंने 3 सिगरेट पीया था?

कीर्ति:- क्या मतलब?

सुमित:- और दारु 3 दिन पहले.

कीर्ति और राज दोनों की hi सर के ऊपर से जा रहा था सुमित की बात.

सुमित:- कुछ हफ्ते पहले तक दिन में 20 से 30 सिगरेट्स आराम से फंक लेता था.

दोनों hi अभी तक समझने की कोशिश कर रहे थे सुमित की baat...Muskura कर सुमित ने कहना सुरु किया.

सुमित:- ये दारु और सिगरेट यूँही बदनाम hai...Asli नशा तो इश्क़ hai...Jo भुलाये नहीं bhulti...Vakt के साथ और भी गहरा हो जाता है.

सिगरेट और दारु तो आसानी से छूट रहा है लेकिन ये Ishq...Marte दम तक साथ नहीं छोड़ेगा.

राज:- लेकिन?

सुमित:- टाइम उप...5 मिनट ख़त्म आउट क्लास का वक्त शुरू.

इतना कह कर सुमित वह से क्लास के लिए निकल गया.

दूसरी तरफ सुमित के पापा स्कूल ख़त्म होते hi सीधे अपने भाई की घर की तरफ निकल जाते hai...Chehra का भाव साफ़ बता रहा था की कुछ ज्यादा hi जरुरी बातें करने जा रहे है.
 
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आप सभी दोस्तों को दीपावली की हार्दिक सुभकामना :फ्लावर्स: :फ्लावर्स2:
 
फ्रेंड्स पिछले कुछ दिन से ना hi अपडेट दे पा रहा हूँ और ना hi कोई post...Vajah ये है की एक्साम्स की सचेडूले पब्लिश हो गया है.

3 हफ्ते बाद है एग्जाम और 4तह वीक में कम्पलीट हो jaayega...Uske बाद बिलकुल फ्री हो जाऊँगा बहुत बड़ा मेन्टल स्ट्रेस से.

अभी अपडेट डिले होने का वजह मूड hai...3rd ईयर की पढ़ाई वो भी ऑनलाइन बहुत hi मुश्किल और इर्रिटेटिंग hai...Upar से 1सत और 2ंद ईयर दोनों का रेविसे भी करना पद रहा था एग्जाम की वजह se...Mood ऐसा हो गया था ना hi अपडेट लिखने का मन होता था और ना hi कोई एक्टिविटी.

इस बार चाहता हूँ की एग्जाम हो hi jaaye....Preparation बहुत अच्छा है और बहुत बड़ा रिलीफ भी मिल जाएगा.

फिर पहले की तरह hi लाइफ हो jaayega...Straightforward :D...Tab वही पहले की तरह 3 और 4 दिन की गैप्स में उपदटेस दूंगा.

नेक्स्ट अपडेट कल पोस्ट करने की कोशिश करूँगा और एक्साम्स तक 3 या 4 अपडेट पोस्ट कर dunga...Uske बाद रेगुलर स्टोरी एन्ड होने तक (सब कुछ नार्मल रहा तो).
 
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