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- Dec 5, 2013
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एक और ना खुश subah...Shayad आज कुछ ज्यादा hi...Ek उम्मीद था शायद अब्ब वो भी ख़त्म हो गया था.
कुछ देर यूँही खामोश रहने के बाद सुमित आईना (मिरर) के सामने चला गया.
अपने शकल को देखते हुए.
सुमित:- Looser...Jis शब्द को मई खुद से दूर रखा करता tha...Aaj बहुत पास आ गए hai...Shayad इतना पास की अब्ब तो दोनों का मतलब हो एक हो गया है.
फिर हारा हुआ मुस्कान के साथ.
सुमित:- वक्त हुआ करता था जब मई ऐसे डिस्ट्रक्शन से खुद को दूर रखता tha...Apne में hi मस्त रहता tha...Lekin abb...Abb न जाने क्या हाल बना लिया है खुद का?
आईना में एक बार फिर अपना hi चेहरा देख कर.
सुमित:- अब्ब तो ना hi कुछ कर पा रहा हूँ और ना hi दूर जा पा रहा hun...Pata नहीं इसकी वजह मेरा वरकॉन्फिडेन्स था या मेरा जिद्द.
फिर सुमित बीएड पर आ कर बैठ जाता है.
कुछ देर ऐसे hi निराश बैठने के बाद.
सुमित:- लेकिन प्यार भी तो बहित करता hun...Saccha वाला प्यार.
इतना कहने के बाद सुमित की आँखों में आंसू के कुछ बूँद छलकने लगे.
सुमित:- कीर्ति ने कल मेरे साथ जो भी किया उसके बाद भी नफरत नहीं कर पा रहा hun...Ulta और प्यार आ रहा hai...Abhi भी दिल मानने को तैयार नहीं की कीर्ति को मुझसे प्यार nahi...Aur न जाने कितना इंतजार करना पड़ेगा कीर्ति को पाने के लिए.
सुमित इस वक्त खुद को बहुत hi टूटा हुआ महसूस कर रहा tha...Apno की बहुत याद आ रहा tha...Aur ऐसे hi उसकी याद अपने पापा के साथ हुई बातों की और चला गया.
कॉलेज (बी फार्मेसी) के दौरान डिनर के वक्त.
स. डैड:- और बता? क्या चल रहा है.
सुमित:- सब ठीक thaak...Aap बताइये?
स. डैड:- क्या लगता है तुझे?
सुमित:- बातों में frustration...Pakka जॉब प्रॉब्लम hoga...Agar उस प्रिंसिपल से कोई प्रॉब्लम है तो batiye...Ladkon को तैयार करता hun...Vakt में पेरासिटामोल खिला दूंगा.
सुमित की इस जवाब पर उसके पापा उससे घूरते है.
सुमित:- आप ढंग से पढ़ाते तो है ना? अगर गलती आप का है तो फिर मई भी कुछ नहीं कर सकता.
स. डैड:- अपने स्टूडेंट्स को तो अच्छे से hi पढ़ाता hun...Aur वो अपने लाइफ में आगे भी बढ़ रहे है.
अफसोश है तो अपने hi नालायक बीटा को पढ़ा नहीं paaya...Mehnat करने के लिए बचपन से पढ़ाता आया hun...Lekin तू तो कामचोर वाली डिग्री में hi पीएचडी करेगा.
सुमित इस बात में सिर्फ मुस्कुराता है.
रश्मि:- सही कहा पापा आपने.
स. डैड:- तू भी काम nahi...Iss सुमित को देख कर तेरा भी वही हाल हो रहा है पढाई में जैसा इसका हो रहा है.
सुमित:- (तो रश्मि) करवा ली बेइज्जती?
सुमित की इस बात पर रश्मि सुमित को घूरती hai...Papa सामने होने की वजह से कुछ नहीं बोल रहे थी.
वही सुमित की माँ ये सब देख कर हंस रही थी.
स. डैड:- तुझसे कुछ और पूछना था? लेकिन तूने hi बातों में उलझा दिया.
सुमित:- हाँ puchiye...Bas आपके बोरिंग मैथ्स वाले सवाल nahi...Wo आपको hi मुबारक और आपके स्टूडेंट्स को.
स. डैड:- आज कल बहुत बिजी हो गया hai...Ghar में भी ज्यादा नहीं rehta...Aur खाते वक्त भी सिर्फ हाथ में mobile...Aur बात भी कोई शुरुवात करे तो hi करता है?
सुमित:- थोड़ा पढ़ाई में व्यस्त हूँ.
स. डैड:- पढाई और तू?
सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं दे पाटा.
स. डैड:- सच बता? कही ये गफ बर्फ वाला चक्कर तो नहीं?
उनके इस सवाल पर सभी हैरान रह जाते hai...Sabse ज्यादा तो Sumit...Wo अभी मोबाइल में भी अभी नयी बानी गफ से hi चाट कर रहा था.
स. माँ:- ये क्या कह रहे है आप? मेरा सुमित ऐसा नहीं है.
स. डैड:- Galatfehmi...Kabhi इस ग़लतफहमी में ना padna...Ye आज कल के generation...Kuch ज्यादा hi तेज hai...Aur इस लड़के ki...Iss की तो बात hi मत करो.
अगर ऐसे hi खुला छोड़ डौगी तो कल शादी कर के आ jaayega...Wo भी व्हाट्सप्प फेसबुक में.
सुमित:- आज तक का सबसे बुरा जोके था.
स. डैड:- और तुझ पर भरोषा कर के ऐसे hi खुला छोड़ दिया तो बाद में हम खुद जोके बन जाएंगे.
इस बार सुमित कोई जवाब नहीं देता.
स. डैड:- लेकिन फ़िक्र की कोई बात नहीं.
कुछ सोचते हुए वो बोले.
सुमित:- क्यों?
स. डैड:- तू भले hi लाख कोशिश कर le...Koi लड़की तुझसे पटेगी nahi...Shakal बिलकुल hi badsurat...Padhai लिखे में zero...Smartness नाम की गुण तुझ में दूर दूर तक नहीं.
कुल मिला कर बेकार वाले केटेगरी का hai...Pyaar तो दूर की बात है कोई देखेगी भी नहीं.
सुमित:- (विथ स्माइल) तारीफ़ के लिए शुक्रिया.
और आज का din...Isa बात को याद करते हुए.
सुमित:- सच में अब्ब तो बेकार hi हूँ mai...Pyaar तो दूर की बात है अब्ब तो कीर्ति मेरी तरफ देखती भी नहीं.
कुछ ऐसे hi कल की बातें और पुरानी यादें सुमित को परेशान कर रहा tha...Vakt और हालात भी ऐसा था की हर तरफ से नेगेटिव बातें hi दिमाग में आ रहा था.
सुमित:- अब्ब और nahi...Abb कीर्ति को कभी परेशान नहीं karunga...Pehle hi उससे इम्प्रेस करने की चक्कर में उसके दिल में अपने लिए नफरत और बढ़ा चूका हूँ.
अब्ब करूँगा तो सिर्फ intejaar...Shayad आगे किसी मोड़ में कीर्ति को भी मुझसे प्यार हो जाए.
इस उम्मीद में भी अब्ब वो विश्वाश नहीं था.
तभी उसके रूम में नॉक hua...Door खोलने पर सामने मेघा थी.
मेघा:- रेडी हो jaao...Aaj गांव में जाना है.
सुमित:- आज मई नहीं aaunga...Mood नहीं है.
मेघा:- तो उनको यही जवाब दूँ? की तुम्हारा मूड नहीं है?
सुमित:- जवाब किसको देना है?
मेघा:- गांव वाले सभी को बुला रहे है.
सुमित इस बात पर सोच में पद गया.
सुमित:- किसने क्या काण्ड कर दिया अब्ब?
मेघा:- फेयरवेल programhai...Issi लिए बुला रहे है.
ये बात सुमित के लिए और भी हैरानी का था.
सुमित:- आता हूँ थोड़ी देर mein...Ready हो कर.
इतना कह कर सुमित अपने रूम में चला गया.
आफ्टर 10 मिनट्स.
चारों hi निचे गांव की तरफ जा रहे थे.
सुमित भी कुछ देर में कीर्ति की तरफ देख लेता.
सुमित:- (इन हिज मंद) प्लीज एक बार तो मेरी तरफ dekho...Aur बस इतना कह do...Ye एक मजाक hai...Sirf मजाक.
सुमित उम्मीद भरी नजरों से कीर्ति की और देख रहा tha....Sumit का इस दुआ ने कोई काम नहीं kiya...Ek बार भी कीर्ति ने सुमित की तरफ नहीं देखा.
दिल की अरमान अधूरा hi रह गया एक बार फिर से.
फिर किसी तरह खुद को संभालते हुए सुमित आगे बढ़ गया.
गांव में पहुँचने के बाद सभी ने देखा की करीब 20 से 30 लोग आये थे waha...Unn में से एक बुजुर्ग बोले.
बुजुर्ग:- क्यों सुमित बीटा? बिना कुछ बताये hi वापस जाने वाले थे.
सुमित:- नहीं दादा ji...Aisi बात नहीं है.
बुजुर्ग:- Fir...Kaisi बात है?
सुमित:- Socha...Disturb क्यों करू.
जल्दबाज़ी में यही बहाना मिला सुमित को.
बुजुर्ग:- Haan...Hum तो आज जैसे एक hi दिन में इस गांव को वो क्या कहते hai...Haan Amrika...Hum एक hi दिन में इतना म्हणत कर रहे है की एक दिन में hi इस गांव को अमरीका बन denge...Aur तुम्हारा आने से हम डिस्टर्ब हो जाएंगे.
सुमित:- नहीं nahi...Mera वो मतलब नहीं था.
बुजुर्ग:- एक hi तो उम्र होता hai...Budhaapa ka...Jab बेरोजगार होने का उतना दुःख नहीं hota...Vakt hi वक्त hai...Accha hi लगेगा बात करने में.
सुमित:- चलिए आप की इसी बात par...Aaj का पूरा दिन आप सब के naam...Ye छूती वाली बेरोजगारी मुझे भी पसंद है.
अब्ब सुमित को भी उनसे बात करना अच्छा लग रहा था.
बुजुर्ग:- और मेघा beti...Tum इतना चुप क्यों हो? उस दिन तो बहुत समझा रही thi...Ye बीमारी है ये मत खाइये वो khaiye...Aur आज?
जा रही ho...Lekin थोड़ा ज्ञान हमारे पास भी छोड़ते जाओ.
मेघा:- लेकिन आप मानते कहा hai...Dama (अस्थमा) की बीमारी hai...Lekin फिर भी दिन भर सिगरेट पीते रहते है.
बुजुर्ग:- (मुस्कुराते हुए) बीमारी चीज hi ऐसी hai...Jo नहीं करना चाहिए वो hi करने का मन करता है.
सुमित:- (तो हिमसेल्फ) प्यार रोग भी ऐसा hi है.
फिर सभी गांव वालों के साथ बात काटने लगते hai...Gaanw वाले भी उनसे बात कर के खुश थे.
सुमित कुछ पल के लिए अपना ग़म भूल gaya...Itna ज्यादा इज़्ज़त मिल रहा tha...Shayad इस वजह se...Warna हर कोई ठुकरा hi रहा था उससे.
ये माहौल कीर्ति और विवेक को बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा tha...Shayad सभी सुमित और मेघा के ऊपर ज्यादा ध्यान दे रहे थे इस वजह से.
कीर्ति की गुस्सा की एक और वजह थी Megha...Pehle जब भी दोनों के बिच मन मुतास होता था तो मेघा hi उससे बात करती thi...Lekin कल रात के बाद बात करना तो दूर मेघा ने उसकी तरफ देखा भी nahi...Iss से कीर्ति का गुस्सा सुमित के लिए और भी बढ़ गया.
खैर वो दोनों ने बस इसी गुस्से में आज के पूरा दिन वह पूरा दिन निकाल diya...Aur इस गुस्से के आग में घी डालने का काम कर रहा था सुमित और मेघा की ख़ुशी.
सुमित एयर मेघा दोनों hi बहुत खुश दिख रहे thhe...Dono एक बार फिर गांव वालों से घुल मिल गए थे जैसे वो दोनों भी यही के है.
और जब शाम हो गया तब.
सुमित:- बहुत बहुत शुक्रिया आप सभी ka...Itna प्यार इतना सम्मान देने के liye...Ye पल ये खुदही हमेशा याद रहेगा.
सच में ये एक्सपीरियंस सुमित के लिए बहुत अच्छा tha...Usne तो बस अपना और अपने दोस्तों का कम्युनिकेशन स्किल अच्छा बनाने के लिए ये किया tha...Lekin इसका परिणाम जो भी निकला वो उसके उम्मीद से भी कही अच्छा था.
कई गांव वाले कुछ दिन और रुकने की बात करने लगे तो कोई फिर आने की.
बुजुर्ग:- बीटा जानते हो हमने ये विदाई कार्यक्रम क्यों किया?
सुमित ने ना में सर हिलाया.
बुजुर्ग:- तुम सभी में एक बात बहुत अच्छा laga...Tum लोग बात करने में हिचकिचाते nahi...Gaanw में सभी के घर gaye...Haal चाल pucha...Thoda बहुत स्वस्थ्य परिक्षण kiya...Aur हम सब के बिच घुलने की कोशिश किया.
ये आज के वक्त में कही कहि सा गया hai...Har इंसान इतना व्यस्त हो गया है की दुसरो से कोई मतलब hi nahi...Agar किसी को नहीं पहचानते और वो तुम्हारे आस पास भी है लेकिन कोई काम नहीं है उससे तो वो हमेशा के लिए अजनबी रह जाएगा.
सही कहु या गलत इस बात को वो मई नहीं jaanta...Lekin तुम सभी की दुसरो से बातें करने की कोशिश घुलने मिलने की कोशिश बहुत अच्छा लगा.
और जब भी बात करते हो ऐसा लगता है दिल से बात कर रहे हो ना की सिर्फ दिखावा की बातें.
बात भी ऐसे की सामने वाला खुश हो जाए.
सुमित:- दादा जी अगर सच कहु तो पहले ऐसे बात नहीं कर पाटा tha...Ye पहला कोशिश है.
बुजुर्ग:- कोशिश तो किया na...Yahi काफी है.
सुमित भी बस हां में सर हिलाता है.
बुजुर्ग:- कोई परेशानी है तुम्हे? कभी कभी मैंने ऐसा महसूस किया है.
सुमित:- नहीं तो.
बुजुर्ग:- अगर कभी आये तो जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी उस परेशानी को ख़त्म karo...Agar ना कर पाए तो वक्त के लिए छोड़ do...Kuch परेशानी वक्त के साथ ठीक होता है तो किसी का समाधान वक्त के साथ मिलता hai...Jaldbaazi में गलत फैसला मत कर लेना.
शायद उनको भी सुमित का परेशानी समझ में आ गया tha...Akele में जब उन्होंने सुमित को देखा tha...Uski नजर ने बहुत कुछ कह दिया था.
सुमित ने भी इस बात को अच्छे से suna...Ye बात भी उसके हालात से hi मिल रहा था.
बुजुर्ग:- और Sumit...Ye भी याद rakhna...Jaise हो वैसे hi rehna...Har किसी का ताकत उसका व्यक्तित्वा (पर्सनालिटी) hi होता hai...Jo उसको किसी भी हालात में लड़ना सिखाता है.
और एक जरुरी baatein...Ye बातें करने की कला कभी मत bhulna...Akele तो तुम एक ho...Lekin अगर अपनी बातों से दूसरे को अपने साथ मिला दिया तो एक से अनेक हो jaaoge...Aur किसी भी परेशानी को आसानी से संभाल सकते हो.
सुमित:- याद रखूँगा दादा ji...Aapki ये baatein...Bilkul सही कहा आपने.
अब्ब आज्ञा दीजिये.
बुजुर्ग:- ऐसे kaise...Pehle तुम सब अपना फेसबुक अकाउंट देते जाओ.
उनकी इस बात पर सभी हैरानी से उनको देखते है.
बुजुर्ग:- अपने जमाने में पुरे 7 तक पढ़ा tha...Thoda बहुत अंग्रेजी समझ में आता hai...Upar से इंटरनेट की jamaana...Sabhi रिश्तेदार से जुड़ने के लिए फेसबुक चला लेता हूँ.
मुश्कुराते हुए वो bole...Fir सभी अपना ईद उन्हें देते hai...Aur ऐसे hi कुछ देर और बात करने के बाद सभी वह से चलते है.
कीर्ति और विवेक को कुछ ख़ास मजा नहीं आया इस वेकेशन mai...Abb दोनों को इंतजार था कल ka...Ghar वापसी का.
सुमित और मेघा को भी पुरे वेकेशन में मजा नहीं aaya...Sumit का दिल टूट गया और Megha...Wo सुमित के हाल देख कर दुखी थी.
सुमित को आज का दिन और गांव वालो से बात चीत बहुत अच्छा laga...Wo बुजुर्ग की बात सुमित के जख्म के लिए थोड़ा बहुत मलहम का काम कर रहा tha...Lekin जख्म भी इतना गहरा था की जो शायद hi कभी भरेगा.
बुजुर्ग की बात की सुकून के बाद कल फिर कीर्ति से बिछड़ने की दर्द सुमित के दिल को सताने लगा.
एक बार फिर से उम्मीद भरी नजरों से सुमित ने कीर्ति को देखना सुरु कर दिया दिल को झूठी तसल्ली देते हुए.
एक और ना खुश subah...Shayad आज कुछ ज्यादा hi...Ek उम्मीद था शायद अब्ब वो भी ख़त्म हो गया था.
कुछ देर यूँही खामोश रहने के बाद सुमित आईना (मिरर) के सामने चला गया.
अपने शकल को देखते हुए.
सुमित:- Looser...Jis शब्द को मई खुद से दूर रखा करता tha...Aaj बहुत पास आ गए hai...Shayad इतना पास की अब्ब तो दोनों का मतलब हो एक हो गया है.
फिर हारा हुआ मुस्कान के साथ.
सुमित:- वक्त हुआ करता था जब मई ऐसे डिस्ट्रक्शन से खुद को दूर रखता tha...Apne में hi मस्त रहता tha...Lekin abb...Abb न जाने क्या हाल बना लिया है खुद का?
आईना में एक बार फिर अपना hi चेहरा देख कर.
सुमित:- अब्ब तो ना hi कुछ कर पा रहा हूँ और ना hi दूर जा पा रहा hun...Pata नहीं इसकी वजह मेरा वरकॉन्फिडेन्स था या मेरा जिद्द.
फिर सुमित बीएड पर आ कर बैठ जाता है.
कुछ देर ऐसे hi निराश बैठने के बाद.
सुमित:- लेकिन प्यार भी तो बहित करता hun...Saccha वाला प्यार.
इतना कहने के बाद सुमित की आँखों में आंसू के कुछ बूँद छलकने लगे.
सुमित:- कीर्ति ने कल मेरे साथ जो भी किया उसके बाद भी नफरत नहीं कर पा रहा hun...Ulta और प्यार आ रहा hai...Abhi भी दिल मानने को तैयार नहीं की कीर्ति को मुझसे प्यार nahi...Aur न जाने कितना इंतजार करना पड़ेगा कीर्ति को पाने के लिए.
सुमित इस वक्त खुद को बहुत hi टूटा हुआ महसूस कर रहा tha...Apno की बहुत याद आ रहा tha...Aur ऐसे hi उसकी याद अपने पापा के साथ हुई बातों की और चला गया.
कॉलेज (बी फार्मेसी) के दौरान डिनर के वक्त.
स. डैड:- और बता? क्या चल रहा है.
सुमित:- सब ठीक thaak...Aap बताइये?
स. डैड:- क्या लगता है तुझे?
सुमित:- बातों में frustration...Pakka जॉब प्रॉब्लम hoga...Agar उस प्रिंसिपल से कोई प्रॉब्लम है तो batiye...Ladkon को तैयार करता hun...Vakt में पेरासिटामोल खिला दूंगा.
सुमित की इस जवाब पर उसके पापा उससे घूरते है.
सुमित:- आप ढंग से पढ़ाते तो है ना? अगर गलती आप का है तो फिर मई भी कुछ नहीं कर सकता.
स. डैड:- अपने स्टूडेंट्स को तो अच्छे से hi पढ़ाता hun...Aur वो अपने लाइफ में आगे भी बढ़ रहे है.
अफसोश है तो अपने hi नालायक बीटा को पढ़ा नहीं paaya...Mehnat करने के लिए बचपन से पढ़ाता आया hun...Lekin तू तो कामचोर वाली डिग्री में hi पीएचडी करेगा.
सुमित इस बात में सिर्फ मुस्कुराता है.
रश्मि:- सही कहा पापा आपने.
स. डैड:- तू भी काम nahi...Iss सुमित को देख कर तेरा भी वही हाल हो रहा है पढाई में जैसा इसका हो रहा है.
सुमित:- (तो रश्मि) करवा ली बेइज्जती?
सुमित की इस बात पर रश्मि सुमित को घूरती hai...Papa सामने होने की वजह से कुछ नहीं बोल रहे थी.
वही सुमित की माँ ये सब देख कर हंस रही थी.
स. डैड:- तुझसे कुछ और पूछना था? लेकिन तूने hi बातों में उलझा दिया.
सुमित:- हाँ puchiye...Bas आपके बोरिंग मैथ्स वाले सवाल nahi...Wo आपको hi मुबारक और आपके स्टूडेंट्स को.
स. डैड:- आज कल बहुत बिजी हो गया hai...Ghar में भी ज्यादा नहीं rehta...Aur खाते वक्त भी सिर्फ हाथ में mobile...Aur बात भी कोई शुरुवात करे तो hi करता है?
सुमित:- थोड़ा पढ़ाई में व्यस्त हूँ.
स. डैड:- पढाई और तू?
सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं दे पाटा.
स. डैड:- सच बता? कही ये गफ बर्फ वाला चक्कर तो नहीं?
उनके इस सवाल पर सभी हैरान रह जाते hai...Sabse ज्यादा तो Sumit...Wo अभी मोबाइल में भी अभी नयी बानी गफ से hi चाट कर रहा था.
स. माँ:- ये क्या कह रहे है आप? मेरा सुमित ऐसा नहीं है.
स. डैड:- Galatfehmi...Kabhi इस ग़लतफहमी में ना padna...Ye आज कल के generation...Kuch ज्यादा hi तेज hai...Aur इस लड़के ki...Iss की तो बात hi मत करो.
अगर ऐसे hi खुला छोड़ डौगी तो कल शादी कर के आ jaayega...Wo भी व्हाट्सप्प फेसबुक में.
सुमित:- आज तक का सबसे बुरा जोके था.
स. डैड:- और तुझ पर भरोषा कर के ऐसे hi खुला छोड़ दिया तो बाद में हम खुद जोके बन जाएंगे.
इस बार सुमित कोई जवाब नहीं देता.
स. डैड:- लेकिन फ़िक्र की कोई बात नहीं.
कुछ सोचते हुए वो बोले.
सुमित:- क्यों?
स. डैड:- तू भले hi लाख कोशिश कर le...Koi लड़की तुझसे पटेगी nahi...Shakal बिलकुल hi badsurat...Padhai लिखे में zero...Smartness नाम की गुण तुझ में दूर दूर तक नहीं.
कुल मिला कर बेकार वाले केटेगरी का hai...Pyaar तो दूर की बात है कोई देखेगी भी नहीं.
सुमित:- (विथ स्माइल) तारीफ़ के लिए शुक्रिया.
और आज का din...Isa बात को याद करते हुए.
सुमित:- सच में अब्ब तो बेकार hi हूँ mai...Pyaar तो दूर की बात है अब्ब तो कीर्ति मेरी तरफ देखती भी नहीं.
कुछ ऐसे hi कल की बातें और पुरानी यादें सुमित को परेशान कर रहा tha...Vakt और हालात भी ऐसा था की हर तरफ से नेगेटिव बातें hi दिमाग में आ रहा था.
सुमित:- अब्ब और nahi...Abb कीर्ति को कभी परेशान नहीं karunga...Pehle hi उससे इम्प्रेस करने की चक्कर में उसके दिल में अपने लिए नफरत और बढ़ा चूका हूँ.
अब्ब करूँगा तो सिर्फ intejaar...Shayad आगे किसी मोड़ में कीर्ति को भी मुझसे प्यार हो जाए.
इस उम्मीद में भी अब्ब वो विश्वाश नहीं था.
तभी उसके रूम में नॉक hua...Door खोलने पर सामने मेघा थी.
मेघा:- रेडी हो jaao...Aaj गांव में जाना है.
सुमित:- आज मई नहीं aaunga...Mood नहीं है.
मेघा:- तो उनको यही जवाब दूँ? की तुम्हारा मूड नहीं है?
सुमित:- जवाब किसको देना है?
मेघा:- गांव वाले सभी को बुला रहे है.
सुमित इस बात पर सोच में पद गया.
सुमित:- किसने क्या काण्ड कर दिया अब्ब?
मेघा:- फेयरवेल programhai...Issi लिए बुला रहे है.
ये बात सुमित के लिए और भी हैरानी का था.
सुमित:- आता हूँ थोड़ी देर mein...Ready हो कर.
इतना कह कर सुमित अपने रूम में चला गया.
आफ्टर 10 मिनट्स.
चारों hi निचे गांव की तरफ जा रहे थे.
सुमित भी कुछ देर में कीर्ति की तरफ देख लेता.
सुमित:- (इन हिज मंद) प्लीज एक बार तो मेरी तरफ dekho...Aur बस इतना कह do...Ye एक मजाक hai...Sirf मजाक.
सुमित उम्मीद भरी नजरों से कीर्ति की और देख रहा tha....Sumit का इस दुआ ने कोई काम नहीं kiya...Ek बार भी कीर्ति ने सुमित की तरफ नहीं देखा.
दिल की अरमान अधूरा hi रह गया एक बार फिर से.
फिर किसी तरह खुद को संभालते हुए सुमित आगे बढ़ गया.
गांव में पहुँचने के बाद सभी ने देखा की करीब 20 से 30 लोग आये थे waha...Unn में से एक बुजुर्ग बोले.
बुजुर्ग:- क्यों सुमित बीटा? बिना कुछ बताये hi वापस जाने वाले थे.
सुमित:- नहीं दादा ji...Aisi बात नहीं है.
बुजुर्ग:- Fir...Kaisi बात है?
सुमित:- Socha...Disturb क्यों करू.
जल्दबाज़ी में यही बहाना मिला सुमित को.
बुजुर्ग:- Haan...Hum तो आज जैसे एक hi दिन में इस गांव को वो क्या कहते hai...Haan Amrika...Hum एक hi दिन में इतना म्हणत कर रहे है की एक दिन में hi इस गांव को अमरीका बन denge...Aur तुम्हारा आने से हम डिस्टर्ब हो जाएंगे.
सुमित:- नहीं nahi...Mera वो मतलब नहीं था.
बुजुर्ग:- एक hi तो उम्र होता hai...Budhaapa ka...Jab बेरोजगार होने का उतना दुःख नहीं hota...Vakt hi वक्त hai...Accha hi लगेगा बात करने में.
सुमित:- चलिए आप की इसी बात par...Aaj का पूरा दिन आप सब के naam...Ye छूती वाली बेरोजगारी मुझे भी पसंद है.
अब्ब सुमित को भी उनसे बात करना अच्छा लग रहा था.
बुजुर्ग:- और मेघा beti...Tum इतना चुप क्यों हो? उस दिन तो बहुत समझा रही thi...Ye बीमारी है ये मत खाइये वो khaiye...Aur आज?
जा रही ho...Lekin थोड़ा ज्ञान हमारे पास भी छोड़ते जाओ.
मेघा:- लेकिन आप मानते कहा hai...Dama (अस्थमा) की बीमारी hai...Lekin फिर भी दिन भर सिगरेट पीते रहते है.
बुजुर्ग:- (मुस्कुराते हुए) बीमारी चीज hi ऐसी hai...Jo नहीं करना चाहिए वो hi करने का मन करता है.
सुमित:- (तो हिमसेल्फ) प्यार रोग भी ऐसा hi है.
फिर सभी गांव वालों के साथ बात काटने लगते hai...Gaanw वाले भी उनसे बात कर के खुश थे.
सुमित कुछ पल के लिए अपना ग़म भूल gaya...Itna ज्यादा इज़्ज़त मिल रहा tha...Shayad इस वजह se...Warna हर कोई ठुकरा hi रहा था उससे.
ये माहौल कीर्ति और विवेक को बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा tha...Shayad सभी सुमित और मेघा के ऊपर ज्यादा ध्यान दे रहे थे इस वजह से.
कीर्ति की गुस्सा की एक और वजह थी Megha...Pehle जब भी दोनों के बिच मन मुतास होता था तो मेघा hi उससे बात करती thi...Lekin कल रात के बाद बात करना तो दूर मेघा ने उसकी तरफ देखा भी nahi...Iss से कीर्ति का गुस्सा सुमित के लिए और भी बढ़ गया.
खैर वो दोनों ने बस इसी गुस्से में आज के पूरा दिन वह पूरा दिन निकाल diya...Aur इस गुस्से के आग में घी डालने का काम कर रहा था सुमित और मेघा की ख़ुशी.
सुमित एयर मेघा दोनों hi बहुत खुश दिख रहे thhe...Dono एक बार फिर गांव वालों से घुल मिल गए थे जैसे वो दोनों भी यही के है.
और जब शाम हो गया तब.
सुमित:- बहुत बहुत शुक्रिया आप सभी ka...Itna प्यार इतना सम्मान देने के liye...Ye पल ये खुदही हमेशा याद रहेगा.
सच में ये एक्सपीरियंस सुमित के लिए बहुत अच्छा tha...Usne तो बस अपना और अपने दोस्तों का कम्युनिकेशन स्किल अच्छा बनाने के लिए ये किया tha...Lekin इसका परिणाम जो भी निकला वो उसके उम्मीद से भी कही अच्छा था.
कई गांव वाले कुछ दिन और रुकने की बात करने लगे तो कोई फिर आने की.
बुजुर्ग:- बीटा जानते हो हमने ये विदाई कार्यक्रम क्यों किया?
सुमित ने ना में सर हिलाया.
बुजुर्ग:- तुम सभी में एक बात बहुत अच्छा laga...Tum लोग बात करने में हिचकिचाते nahi...Gaanw में सभी के घर gaye...Haal चाल pucha...Thoda बहुत स्वस्थ्य परिक्षण kiya...Aur हम सब के बिच घुलने की कोशिश किया.
ये आज के वक्त में कही कहि सा गया hai...Har इंसान इतना व्यस्त हो गया है की दुसरो से कोई मतलब hi nahi...Agar किसी को नहीं पहचानते और वो तुम्हारे आस पास भी है लेकिन कोई काम नहीं है उससे तो वो हमेशा के लिए अजनबी रह जाएगा.
सही कहु या गलत इस बात को वो मई नहीं jaanta...Lekin तुम सभी की दुसरो से बातें करने की कोशिश घुलने मिलने की कोशिश बहुत अच्छा लगा.
और जब भी बात करते हो ऐसा लगता है दिल से बात कर रहे हो ना की सिर्फ दिखावा की बातें.
बात भी ऐसे की सामने वाला खुश हो जाए.
सुमित:- दादा जी अगर सच कहु तो पहले ऐसे बात नहीं कर पाटा tha...Ye पहला कोशिश है.
बुजुर्ग:- कोशिश तो किया na...Yahi काफी है.
सुमित भी बस हां में सर हिलाता है.
बुजुर्ग:- कोई परेशानी है तुम्हे? कभी कभी मैंने ऐसा महसूस किया है.
सुमित:- नहीं तो.
बुजुर्ग:- अगर कभी आये तो जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी उस परेशानी को ख़त्म karo...Agar ना कर पाए तो वक्त के लिए छोड़ do...Kuch परेशानी वक्त के साथ ठीक होता है तो किसी का समाधान वक्त के साथ मिलता hai...Jaldbaazi में गलत फैसला मत कर लेना.
शायद उनको भी सुमित का परेशानी समझ में आ गया tha...Akele में जब उन्होंने सुमित को देखा tha...Uski नजर ने बहुत कुछ कह दिया था.
सुमित ने भी इस बात को अच्छे से suna...Ye बात भी उसके हालात से hi मिल रहा था.
बुजुर्ग:- और Sumit...Ye भी याद rakhna...Jaise हो वैसे hi rehna...Har किसी का ताकत उसका व्यक्तित्वा (पर्सनालिटी) hi होता hai...Jo उसको किसी भी हालात में लड़ना सिखाता है.
और एक जरुरी baatein...Ye बातें करने की कला कभी मत bhulna...Akele तो तुम एक ho...Lekin अगर अपनी बातों से दूसरे को अपने साथ मिला दिया तो एक से अनेक हो jaaoge...Aur किसी भी परेशानी को आसानी से संभाल सकते हो.
सुमित:- याद रखूँगा दादा ji...Aapki ये baatein...Bilkul सही कहा आपने.
अब्ब आज्ञा दीजिये.
बुजुर्ग:- ऐसे kaise...Pehle तुम सब अपना फेसबुक अकाउंट देते जाओ.
उनकी इस बात पर सभी हैरानी से उनको देखते है.
बुजुर्ग:- अपने जमाने में पुरे 7 तक पढ़ा tha...Thoda बहुत अंग्रेजी समझ में आता hai...Upar से इंटरनेट की jamaana...Sabhi रिश्तेदार से जुड़ने के लिए फेसबुक चला लेता हूँ.
मुश्कुराते हुए वो bole...Fir सभी अपना ईद उन्हें देते hai...Aur ऐसे hi कुछ देर और बात करने के बाद सभी वह से चलते है.
कीर्ति और विवेक को कुछ ख़ास मजा नहीं आया इस वेकेशन mai...Abb दोनों को इंतजार था कल ka...Ghar वापसी का.
सुमित और मेघा को भी पुरे वेकेशन में मजा नहीं aaya...Sumit का दिल टूट गया और Megha...Wo सुमित के हाल देख कर दुखी थी.
सुमित को आज का दिन और गांव वालो से बात चीत बहुत अच्छा laga...Wo बुजुर्ग की बात सुमित के जख्म के लिए थोड़ा बहुत मलहम का काम कर रहा tha...Lekin जख्म भी इतना गहरा था की जो शायद hi कभी भरेगा.
बुजुर्ग की बात की सुकून के बाद कल फिर कीर्ति से बिछड़ने की दर्द सुमित के दिल को सताने लगा.
एक बार फिर से उम्मीद भरी नजरों से सुमित ने कीर्ति को देखना सुरु कर दिया दिल को झूठी तसल्ली देते हुए.