Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh - Page 4 - SexBaba
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Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh

अपडेट-26

जहा में बुआ की साथ इन सब बातो में व्यस्त था वही सीमा दीदी भी हॉल से उठ कर अब कामिनी भाभी के रूम के दरवाजे पर पहुंच चुकी थी, दरवाजा खुला हुआ hi था इसलिए एक हलके धक्के से hi खुल जाता है हुए कामिनी भाभी अंदर बिंदास सोइ हुई होती है. दीदी उनके पास जा कर उनको आवाज देते हुए जगती है.

सीमा: भाभी अगर कॉलेज की थकन दूर हो गयी हो और नींद पूरी हो चुकी हो तो अब जग भी जाइये हहै.

कामिनी, अपनी ननद की आवाज सुन जागते हुए: ओह्ह्ह सीमा दी आप कब आई.

सीमा: में बस अभी अभी आई, सोचा आपको जगा दू काफी वक्त से सो रही हैं हहै.

कामिनी, उठ कर बीएड के धक्के से लग बैठते हुए: हहै हाँ आज कुछ ज्यादा hi थकन लग गई थी, वैसे आज हमारी ननद को हमारी यद् कैसे ाँ पड़ी भला.

सीमा, बीएड पर बैठते हुए: रहने भी दो भाभी आप तो ठीक है न, ये कहो की आपके पास टाइम नहीं रहा अब, मुझे आये हुए कितने दिन हुए आपने सही से बात भी नहीं की अब तक और मुझे सुना रही हो.

कामिनी: हहै अरे अब आप देख तक रही हो कॉलेज में hi पूरा दिन निकल जाता है समय कहा बचता है.

सीमा: हहै हाँ ी कैन अंडरस्टैंड भाभी और ये क्या दीदी और आप आप लगा रखा है, हम अछि दोस्त है ननद भाभी से पहले तो ये दीदी मत कहा करो हहै.

कामिनी: ः ठीक है ठीक है सीमा, ाचा हुआ तुम अभी आ गयी इसी बहाने कैच बाटे hi हो जाएँगी.

सीमा: हाँ में भी यही सोच कर चली आई हहै.

कामिनी: हम्म्म और बताओ किसी चल रही है मैरिड लाइफ तुम्हारी, अशोक खुश तो रखता है न अचे से (आँख मरते हुए), हहै

सीमा: ः क्या भाभी आप भी.

कामिनी: अरे अब मुझसे क्या शर्माना भला, वैसे तुझमे आये बदलावों को देख कर तो लगता है की अचे से खुश रखते है हमारे नन्दोई जी आपको हहै.

सीमा: हहै, ाचा और जैसे आप तो भैया के साथ खुश hi नहीं, मुझसे ज्यादा अपने आप ने बदलाव देखो कितने उभर उभर कर सामने आ रहे है ः.

कामिनी ने घर आने के बाद वापस कपडे बदल एक कुरता और लेग्गिंग डाला हुआ था जिसमे उसकी आधी चूचिया हमेषः की तरह क्लीवेज के रूप में साफ झलक रही थी.

कामिनी, हहै हाँ खुश तो हु में लेकिन इसका कारन तुम्हरे बड़े भाई नहीं छोटा भाई है : हहै अब तुमसे क्या छिपाना सीमा, तुमभी शादी शुदा हो और अब शरीर की जरूरतों को अचे से समझती हो, और ये भी अचे से समझती हो की मर्द को रिझाने के लिए इन उभारो की कितनी जरुरत होती है हहै.

सीमा, हस्ते हुए: हेहेहे हैए दिया देखो तो कैसे बेशरम हो खुल कर मन भी रही हो.

कामिनी: हहै अब तुमसे कैसा शर्माना.

सीमा: हम्म्म वैसे सच कहु न तो आप वाकई एक हॉटनेस की दुकान हो, परफेक्ट फिगर वाली लेडी बन चिकि हो, और देखो ये आपके बूब्स भी कैसे उछाल रहे मनो बहार आने को तड़प रहे हो, इन्हे इतना खुला क्यों छोरा हुआ है हहै.

कामिनी, अपनी चुकी को हाथ से दबा: हहै अब दिन भर कॉलेज रहती हु उतनी देर कैद hi तो रहते है घर पर तो आज़ादी मिलनी चाहिए न जरा, में तो कहती हु तुम भी खुला छोरा करो हहै.

सीमा: हेहेहे नाह ने ऐसे hi ठीक हु कोई जरुरत नहीं खुला चोर्ने की, और वैसे भी आप खुला चोरटी है जिससे की राहुल भैया इनको पकड़ सके और आप मजे ले सके,, मेरे नसीब में यहाँ वो मजे थोड़ी मिलने उल्टा तड़पती रह जाउंगी हहै.

कामिनी: हहै तो तड़पना क्यों, भले मर्दो वाला एहसास न दे पाव पर तुम चाहो तो में इन्हे मसलने और तड़प दूर करने में मदद कर सकती हु हेठे.

सीमा: धत्तत्तत भाभी कुछ भी,, वैसे भी मुझे लेस्बियन सेक्स करने में कोई दिलचस्पी नहीं है हहै.

कामिनी: हेहेहे ाचा बड़ा ठीक है यहाँ ऐसा न करो बूत जब वपद ससुराल जाओ तो अशोक के सामने ये जरूर करना, सच कहती हु मर्दो की सबसे बड़ी कमजोरी होती है हम औरतो की चूचिया, अशोक इन पर टूट न पड़े तो कहना हहै.

सीमा, अशोक का नाम सुन और उसके सामने ये सब करने की बात सुन थोड़ा मायूस होते हुए: कहा भाभी मेरे नसीब में आप जैसे मजे कहाँ हैं, अशोक को इन सब से कोई मतलब hi नहीं मनो.

कामिनी, ननद की बात सुन और उसका मायूस चेहरा देख सीरियस होते हुए: सीमा, क्या बात है, क्या तुम अशोक के साथ खुश नहीं, और ऐसे क्यों बोल रही हो.

सीमा, बात बदलते हुए: नहीं नहीं भाभी ऐसा कुछ नहीं मेने तो बस ऐसे hi बोल दिया.

कामिनी: देख सीमा मुझे अपना फ्रेंड मानती है न तो सच सच बता, मुझे ऐसा लग रहा है की कुछ तो बात है और तू अब मुझसे छिपा रही है.

सीमा, भाभी की आँखों में देखते हुए : क्या बताऊ भाभी आपको अब, बताने लायक कुछ होना भी तो चाहिए न.

कामिनी: देख अब तू मुझे टेंशन में दाल रही गई, तेरे और अशोक के बिच सब ठीक तो है न, बता मुझे.

सीमा, भाभी की बात सुन कमजोर पड़ते हुए: क्या कहु अब आपको भाभी, पहले प्रॉमिस करो घर में किसी से नहीं कहोगी कुछ.

कामिनी: हाँ ी प्रॉमिस किसी से कुछ नहीं कहूँगी, अब जल्दी बताओ.

सीमा : कुछ भी ठीक नहो है मेरे और अशोक के बिच भाभी, नाह अब वो मुझे पहले जैसा प्यार करते हैं, शुरू के दो तीन महीने सब ठीक रहा उसके बाद वो पूरी तरह बदल गए... आप कह रही न की पति को रिझाना चाहिए ंद आल, जिस रिश्ते में अब वो प्यार hi नहीं रहा वगा सेक्स कहा होगा भाभी.

कामिनी, सीमा की बात सुन चौकते हुए: व्हाटटटटट,, ये क्या बोल रही हो तुम, मुजगे यकीं नहीं हो रहा है इन बातो पर और ऐसा क्या हो गया तुम दोनों के बिच जो ये सब....

सीमा: मुझे भी नहीं पता भाभी, में तो अपनी तरफ से अचे से रिश्ता निभा रही हु और अशोक से प्यार भी भोत करती हु पर पता नहीं उन्हें क्या हो गया है.

कामिनी: तो तुमने अशोक से इस बारे में बात क्यों नहीं की, उससे पूछो न की प्रॉब्लम कहा है.

सीमा: सब कर के देख लिया भाभी और वो खुले मुँह कुछ नहीं कहते है और जब भी में ये बात उठती हु वो काम, ऑफिस इन सब का बहाना बना देते हैं. यहाँ आने से पहले भी में सब सॉर्ट करना छह रही थी लेकिन उन्होंने अब्रॉड ट्रिप का बहाना बाबा बात ताल दी.

कामिनी: हम्म्म तो हो सकता है न सीमा की सच में वर्क लोड hi हो इसलिए तुम्हे टाइम न दे प् रहा हो और ऐसे बेहवे कर रहा हो.

सीमा: पता नहीं भाभी पर में उनके आने का वेट कर रही हु बस, अगर सॉर्ट नहीं होता है कुछ तो मुझे नहीं पता क्या होगा बूत में ऐसे बेजान रिश्ते में नहीं रहना चाहूंगी.

कामिनी: अरे पगली ऐसा सोचना hi क्यों है, सब सही होगा देख लेना.

सीमा: हम्म्म्म let's सी एंड होप सो.

कामिनी: हाँ और उसके बाद भी अगर तुम्हे जब भी जरुरत होगी तो तुम्हारी ये भाभी, ये दोस्त हमेशा तुम्हारे साथ हैं.

और ये बोल ननद भाभी एक दूसरे को प्यारा सा हुग कर देते है.

कामिनी, माहौल लाइट करते हुए: वैसे अगर ये बात है तो इसका मतलब मेरी ननद भोत दिनों से प्यार पाने की प्यासी होगी और इसलिए कही आज मेरी चुचिओ को देख अपनी चुचिओ को भी कुछ आज़ादी देने का तो नहीं सोच रही हहै.

सीमा: हहै धत्त भाभी मेरा ऐसा कोई विचार नहीं है और मुझे इतना क्लीवेज दिखाना पसंद भी नहीं है हहै.

कामिनी: वैसे ाचा hi है की पसंद नहीं वार्ना तुम मुझसे भी ज्यादा हॉट एंड सुन्दर हो, तुम्हे देखने के बाद लोगो में मेरी क्लास और वैल्यू नहीं रह जाएगी हहै.

सीमा: हाहाहा भाभी क्या कुछ भी, ऐसा कभी नहीं हो सकता ु र थे हॉटेस्ट, भैया के सच में मजे है हहै.

कामिनी, मजाक में सच कहते हुए: हाहाहा अब बीवी हु उनकी, वो मजे नहीं लेंगे तो सनी लेगा क्या भला हहै.

सीमा: हहै क्या पता अब इतनी हॉट भाभी देख सनी का मन भी ख़राब हो जाये और आप भी कहा काम, कही मेरे भोले भाई को फसा भी लो हेहेहे.

कामिनी, भोला और वो, हैए वो क्या फसेगा, अब तुम्हे कैसे बताऊ की उस भोले सनी के चक्कर में तो मैं खुद फास चुकी हु और उसकी रैंड बसन चुकी हु हहै: हहै हाँ वैसे आईडिया भूरा नहीं है एक से भले दो भाई हहै.

सीमा: ओह माय गॉड भाभी, सच में भोत कामिनी हो आप हेहेहे.

कामिनी: हहै मजाक कर रही हु डोंट वोर्री तुम्हरा छोटा भाई अभी सेफ है हहै.

ये बोलते hi सीमा अपनी भाभी के गले लग जाती है और..

सीमा: थैंक ु दो मच.. आपने मेरा मूड सही जार दिया वापस एंड थैंक यू मेरी भाभी और मेरी फ्रेंड होने के लिए.

कामिनी: अरे इसमें थैंक यू क्या, ननद भाभी दो बहने hi होती है और इस नाते तुम्हरी ख़ुशी में मेरी ख़ुशी है एंड ये न भूलना की में हमेशा तुम्हरे साथ हु, बस ऐसे hi हस्ती रहो बाकि सब ठीक हो जायेगा, कुछ वक्त की बाटे है ये बस.

सीमा: हाँ उम्मीद तो यही है की सब ठीक हो जाये लेटस सी... थैंक्स एंड लव यू हहै.

और इन्ही बातो के बिच निचे से माँ की आवाज आती है दीदी को बुलाने के लिए जिसे सुन दीदी भाभी के रूम से निकल वापस निचे चली आती हैं.



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ऑफिस में इस वक्त मानव अपने केबिन में बैठा हुआ होता है और केबिन में वो अकेला नहीं होता है उनके साथ उनकी सेक्रेटरी श्वेता भी मौजूद थी और अंदर का नजारा या था की सेक्रेटरी श्वेता इस वक्त मानव की चेयर के पास अपने घुटनो पर बैठी हुई होती है और अपने हाथो से अपने बॉस के लुंड को बहार निकल कर मुँह में ले चूसने में मस्त होती है.

साड़ी का पल्लू जमीं पर गिरा हुआ और ब्लाउज के सरे हुक खोले अपनी चूचियों को बहार निकले बॉस का लुंड चुस्ती श्वेता किसी देसी रैंड से काम नहीं लग रही थी और मानव भी अपने हाथो से श्वेता के सर पर दबाव बनाते हुए लुंड चुसवाने में मस्त थे.

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केबिन में लुंड चूसै का ये खेल चल रहा होता है की दरवाजे पर एक नॉक की आवाज सुनाई देती है जिसे दूँ श्वेता डरते हुए लुंड मुँह से बहार निकल कपडे ठीक करने लगती है जिसे रोकते हुए मानव अब श्वेता को अपने टेबल के और करीब और अंदर आने को कहते हुए जिससे की सामने खड़े इंसान की नजर उस पर न पड़े, और लुंड चूसना जारी रखने को कहता hai.jiske जवाब में..

श्वेता: उफ्फ्फ सर पता नहीं कोण होगा थोड़ी देर बाद चूस लुंगी न प्लस.

मानव, श्वेता की चुकी भींचते हुए: एमट भूल रैंड. है तू मेरी और में तेरा बॉस, जैसा कहा है वैसा कर समझी.

और श्वेता अब बॉस की बात मानते हुए आज्ञाकारी रैंड की तरह टेबल के निचे आते हुए लुंड चूसने लगती है और यहाँ मानव नॉक करने वाले से पूछते हुए..

मानव: एस्सस, कौन है..

रश्मि: सर, इतस में रश्मि, मई ी के इन.

रश्मि की आवाज श्वेता थोड़ी रिलैक्स हो जाती है क्युकी कही न कही पिछली बातो से उसे अंदाजा था की उसके बॉस ने रश्मि को भी सेट कर लिया हुआ है और रश्मि श्वेता और बॉस की चुदाई तो आलरेडी देख hi चुकी है पहले.

मानव: ओह रश्मि येह सूरे आजाओ अंदर.

रश्मि के अंदर आते hi मानव उसे दरवाजा बंद करने को कह देता है और आज रश्मि भी कुछ काम नहीं लग रही थी, एक पूरा पटाखा बन कर आई थी और एक फैशनेबुल कॉटन ब्लाउज जो पतली पतली स्ट्रैप्स के सहारे उसके जिस्म परबँधा हुआ था और जिसमे उसकी चूचिया भोत hi साफ तरीके से दिखाई पद रही थी, जिसे देखते hi मानव की नज़र उस पर तिकी रह जाती है और सामने इतनी मस्त जवानी कड़ी हो और निचे उसका लुंड भी एक ऐसी hi जवान रैंड के मुँह में हो तो उस मर्द को और क्या चाहिए.

मानव, मुस्कुराते हुए और उसे घूरते हुए: क्या बात है रश्मि आज तो एक दम कड़क माल बन कर आई है.

रश्मि: हहै सर अब जिस कंपनी के और एम्प्लोयी के बॉस आप जैसे हो उसके सामने तो ऐसे hi आना चाहिए न.

मानव, निचे श्वेता के लुंड को पूरा मुँह में लेने से और बॉल्स को जोर से बढ़ाने से मस्त होते हुए और ये एहसास करते हुए की या तो रश्मि को यहाँ से भागो या श्वेता के साथ उसकी जवानी भी आज लूट लू: हम्म्म बाकि सब बाद में पहले ये बताओ कुछ काम था जो आना हुआ.

रश्मि, नॉटी स्माइल के साथ: सर काम तो कुछ खास नहीं था बस आपके लिए आज ऐसे तैयार हो कर आई थी तो सोचा एक बार दिखा तो औ हहै.

मानव, मतलब ये रैंड भी सामने से चल के छोड़ने आई है इस बहाने: हाहाहाहा क्या रश्मि तुम भी, दिखाना तो सिर्फ बहाना है ये बोल न तेरी छूट में खुजली हो रही है रैंड.

रश्मि: िष्ठ्हह सिररररररर आपकी यही बाटे तो मुझे गरम करती है, और हाँ सच कहा आपने अब मुझे आपके लुंड की आदत सी पद गई है रोज लेना चाहती हु ममममम उफ़.

मानव: ः तो वह क्यों कड़ी है टेबल के इस तरफ आजा और तू भी शुरू हो जा.. और ये बप्ल मानव निचे लुंड चूस रही श्वेता की और देखता है जो आँखे बड़ी किये हुए रश्मि के भी ज्वाइन करने की बात से मनो संकोच में थी.

और रश्मि अपने बॉस की बात सुनते hi सीधा तब के इस तरफ आजाती है जहा उसकी नजर श्वेता पर पड़ती है जो आलरेडी मानव के लुंड को अपने मुँह में भर चूसने में लगी थी.

रश्मि: अरे वाह श्वेता मां क्या बात hai,aap तो पहले hi चालू हो राखी हो हहै,

श्वेता, लुंड चूसते हुए hi: मऊआअह्ह्ह मुआअह रश्मि हाँ क्युकी में सेक्रेटरी हु न और इस नाते बॉस के लुंड को भी हमेशा खुश रखना होता है. वैसे बॉस मुझे आलरेडी डाउट था hi की अपने रश्मि को भी अपने लुंड की दीवानी बना दिया है हहै.

मानव: हाहाहा हाँ इस रैंड को तो मेने उसी दिन पेल दिया था जिस दिन वो कैमरा वाली बात हुई थी, अब रश्मि ऐसे खड़े hi रहेगी या तू भी अपना जलवा दिखाएगी.

और बॉस की बात सुनते hi रश्मि भी अपनी साड़ी उतारते हुए ब्लाउज खोल चूचिया निकल निचे बैठ जाती है और बरी बरी दोनों रश्मि और श्वेता उनके लुंड की चूसै शुरू कर देते है.

यहाँ मानव कभी श्वेता की तो कभी रश्मि की चुचिओ को दबाते हुए लुंड चुसवाने का मजा लेता है.

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कुछ देर बाद श्वेता को खड़ा क्र मानव उसे टेबल पर टंगे फैला लेटने को बोलता है और अपना मुँह उसकी छूट पर रख चूसने लगता है और रश्मि अब भी निचे बैठी मानव का लुंड चुस्ती रहती है.

केबिन में मानव द्वारा एक रैंड से लुंड चुसवाने और दूसरी रैंड की छूट चाटने से अब माहौल पूरा गरम हो चूका था और छूट चुस्वाति हुई श्वेता के मुँह से मस्ती में मस्त ाहीं निकल रही थी अह्ह्ह्हह ममममम ओह्ह्ह्ह सिररररर.

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और अब मानव अपनी चेयर से खड़े होते हुए श्वेता को टेबल पर कुटिया बना टंगे फैला उसकी छूट और गांड दोनों पर बरी बरी जीभ फेरते हुए चूसने लगते है और रश्मि अब भी मानव के लुंड को निचे घुटनो पर बैठे लुंड चूस रही थी साथ hi बॉल्स को भी बिच बिच में मुँह में भर अपनी थूक से गिला कर चुकी थी.

अब रश्मि को रोकते हुए अपने लुंड को उसके मुँह से निकल मानव टेबल पर कुटिया बानी श्वेता के छूट की फैंको को खोलते हुए उसमे दाल कर रगड़ने लगता है और अगले hi पल एक जोर दर धक्का लगते हुए लुंड को छूट के अंदर उतर देता है.

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इस तरह लुंड के छूट में उतारते hi श्वेता के मुँह से एक जोर की आह निकल जाती है जिसे सुन इस दृश्य को देख रही रश्मि अब सामने की तरफ जा कर अपनी चूचिया श्वेता के मुँह में दे देती है जिससे की आवाज डाब जाये.

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पीछे से छूट में लुंड के धक्के कहती हुई श्वेता अपने बॉस के हर एक धक्के पर रश्मि की चुकी को जोर से मुँह में भींच लेती है जिससे अब रश्मि अपनी सिसकिया नहीं रोक पति है आउट इस गरम माहौल को देख खुद अपने हाथ से अपनी छूट को रगड़ना शुरू कर देती है अह्हह्ह्ह्ह मममममम ओह्ह्ह्हह िष्ठ्हह उफ्फ्फ्गगगग ममममम अह्ह्ह हयईईई सिरररररर उफ्फ्फ्फ़ फुककक मई लड़ छोड़ो आपकी रांडो को अह्हह्ह्ह्ह ममम की आवाज के साथ hi अब मानव श्वेता की पूरी गति से चुदाई करने लगता है और छूट में बॉस के लुंड और रश्मि द्वारा अपनी चुचिओ के मसलने से अब श्वेता बिना देर किये अपनी छूट का पानी चोर देती है अह्हह्ह्ह्ह ममम ओह्ह्ह्ह सिररररर में गयी अह्ह्ह.

श्वेता के झड़ने के बाद मानव अपना लुंड उसकी छूट से निकल वापस अपनों चेयर लार बैठ जाता है और रश्मि को इशारा करता है, इशारे को समझ रश्मि बॉस के पास आते हुए अपनी टंगे फैला चेयर पर बैठे बॉस के लुंड पर बैठ जाती है और लुंड छूट में उतरने लगती है अह्ह्ह्हह इस्स्स्सस्स्स्स मममममममम.

मानव भी रश्मि के चूतड़ पकड़ मसलते हुए निचे से अपने लुंड को रश्मि की छूट में पेलने लगता है और साथ hi पास कड़ी श्वेता के होठो को चूमने का भी मजा लेता है.

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अहजहहह ममममम ओह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ सिर्रर्र एससससस छोड़ो मुझे अझह्ह्ह्हब उफ्फ्फ्फ़ फाड् दो मेरी छूट मममममम ीफ्फ ईशःठ की आवाज करते हुए रश्मि अब लुंड पर जोर जोर से उछलने लगी थी और श्वेता अपने होठो को बॉस के होठो से जोड़े एक हाथ से लुंड पर उछलती रश्मि की चुचिओ को मसल रही थी.

कुछ और देर उछलने के बाद अब रश्मि की गति थकन के कारन धीमी पड़ने लगी थी जिसे देख अब मानव ने उसे सीधा करते हुए वापस अपने लुंड पर बिठा अपने हाथो को उसकी कमर में जकड कर निचे से बिना रुके नॉन स्टॉप धक्के लगाना शुरू कर दिया.

अह्ह्ह्हह्हह ोहजहह िष्ठ्हहहमारररर गईई अहह सिररररर ममम ओह्ह्ह्ह एसससस ऐसी होई मममम ओह्ह्ह और जोर से अह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे उफ्फफ्फ्फ़ मममम की आवाज के साथ अब रश्मि अपनी टंगे पुती तरह फैलाये लुंड को छूट में ले रही होती है और तभी श्वेता आएगी झुकते हुए अपनी जीभ को लुंड ले रही रश्मि की छूट पर रख कर रगड़ना शुरू कर देती, छूट पर बॉस के लुंड और श्वेता ma'am की जीभ की रगड़ से अब रश्मि पुरे जोश में आ चुकी थी और अपने आप hi कमर हिलाते हुए अपनी छूट पर लुंड का मार सहते हुए पूरा साथ दे रही थी अह्ह्ह्ह मममम ओह्ह्ह्हह िध्ह्हः फुकककक ममम.

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अपने hi ऑफिस की एक रैंड की छूट पेलते हुए अब मानव अपनी दूसरी रैंड स्वेता को टेबल पर टंगे फैलाये लेटने को कहता है और उसके ऐसा करते hi अपना मुँह उसकी छूट पर लगा देता hai.Rashmi के छूट में अपना लुंड और श्वेता की छूट में होठ और जीभ घुसते हुए एक साथ दोनों hi औरतो की चुदाई करने के कारन अब उन दोनों के मुँह से hi अह्ह्ह्हह ममममम सिरररररर उफ्फ्फफ्फ्फ़ एसससस छोड़ो मुझे अह्ह्ह्हह िष्ठ्हह छोड़ो अपनी रैंड को अह्ह्ह्ह और जोरसे खा जाओ मेरी छूट अह्ह्ह्हह कमममम फड़ड़ड़ड़ दोऊ ईशःठ एससससस की आवाजे पुरे केबिन में होने लगी थी.

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एक साथ दो दो रणदीव को इस तरह छोड़ने के बाद अब मानव का शरीर भी अकड़ने लगा था और धक्को की गति अपने चरम पर हो चुकी थी जिससे रश्मि भी अब झाड़ जाती है अह्ह्ह्हह ममममम ओह्ह्ह्ह और मानव अपने लुंड को उसकी छूट से बहार निकल देता है और ये देख की अब वो झड़ने वाला है दोनों रश्मि और श्वेता वापस निचे घुटनो पर आ बैतब जाती है और लुंड से निकले मानव में वीर्य की पिचकारी को अपनर चेहरे पर लेलेती है और फिर रणदीव जैसे एक दूसरे के चेहरे पर लगे अपने बॉस के वीर्य को चाट लेती है.

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मानव, चेयर पर बैठते हुए: वाह क्या मस्त रंडिया हो दोनों hi, मजा आ गया आज दोनों को एक साथ पेलने में.

श्वेता: ममममम सिररर मुझे भी भोत मजा आया आज अह्ह्ह सच में लकी हु की आपकी रैंड बन कर hi सही पर इस तरह की चुदाई का मजा लेने को मिल रहा है.

रश्मि: ममम सही कहा ma'am अपने, में तो पिछले कुछ दिनों से और कुछ बार hi सर के लुंड का मजा ले पायी हु पर आप तो वाकई भोत लकी है जो जाने कितने वक्त से सर की रैंड बनने का सौभाग्य प् रही है हहै.

मानव: हाहाहा बस अब बाटे बंद करो और दोनों अपने कपडे ठीक कर अपने अपने काम में लग जाओ, ये मजा तो में अपनी रणदीव को देता रहूँगा हमेशा hi, तुम जैसी जवान जिस्म की रणदीव की जवानी लूटने के लिए hi तो अप्पोइंट किया है हाहाहा.

और इस बात पर तीनो है देते है और अपने अपने कपडे ठीक काट काम में लग जाते है, पर यहाँ रश्मि की आज की चुदाई के बाद कुछ ज्यादा hi खुश नजर आ रही थी, और इसकी वजह उसके दिमाग में चल रही ये बात की..

"वाह आज तो जो मेने सोचा भी नहीं था वो हो गया, में तो सर को कल के लिए आमंत्रण देने आई थी लेकिन आज श्वेता की प्रजेंस में जो हुआ ये तो बोनस hi था, अब में श्वेता को भी अपना हथियार बना कर उसे कर sakungi,sach सर श्वेता को मेरे hi साथ छोड़ने का काम तो आज अपने वाकई में भोत ाचा किया है ः. और अभी तो एक वार और बचा है जो अब भोत जल्द होगा और उसके बाद होगा असली तमाशा हाहाहा, वाह अब आएगा असली मजा तो."



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रत को डिनर के बाद में अपने रूम में था की तभी प्रीति मेरे पास आती है..

प्रीति, पास आते hi: सनी सुन मुझे तुझसे कुछ बात करनी है और तेरी हेल्प चाहिए.

में, चौकते हुए: क्या.. क्या कहा तूने?? तुझे मेरी हेल्प चाहिए, में सही सु सुन तो रहा हु न या मेरे कान ख़राब हो गौए है ः.

प्रीति, चिढ़ते हुए: में मजाक नहीं कर रही हु सनी, मुझे सच में तेरी हेल्प चाहिए.

में, इतराते हुए: देखा आखिर काम लड़ hi गया न तेरा मेरे से, भोत नालायक नालायक करती रहती थी न अब क्या हुआ.

प्रीति: हाँ बाबा पद गया काम और तुझे ये काम करना भी पड़ेगा क्युकी सीमा दीदी ने कहा है की सनी तुम्हारी हेल्प करेगा उससे बात करो, अब अगर तुमने हेल्प नहीं की तो में दीदी से कह दूंगी.

में: ाचा तो अब दीदी के नाम से डरा रही है तू मुझे, जा अब तो नहीं करता हेल्प तेरी.

प्रीति: यार ऐसे क्या कर रहा है प्लस सुन तो ले, भोत जरुरी है प्लस भाई प्लस..

में, भाव कहते हुए: ाचा चल ठीक है सीमा दीदी की वजह से सुन रहा हु वार्ना नई करता... अब बोल क्या हेल्प किए.

और प्रीति यहाँ मुझे अपने कॉलेज में हो रहे फैशन इवेंट के ऑडिशंस और फोटोशूट की बात बताती है. चाहे बेहेन से कितना भी लड़ लो पर जब ये सुनने में आये की कोई उसे तंग कर रहा, परेशां कर रहा है और मौके का फायदा उठा उसके साथ कुछ भी हरकते कर रहा तो भाई को गुस्सा आना लाजमी होता है और अभी प्रीति की बाटे सुन मेरा भी वही हल था.

में: क्या बोलै तूने, वो तुझे इतने दिनों से तंग कर रहा और तू आज बता रही पहले बता दिया होता तो मुँह तोड़ दिया होता सेल का.

प्रीति: देखा बस इसीलिए नहीं बता रही थी, तुझे हर वक्त लड़ने का hi सूझता है. अब ये चोर तू बता की मेरी हेल्प करेगा या नहीं.

में: हम्म्म तीन दिन बाद ऑडिशन है न भोत टाइम है, ठीक है में तेरी मदद करूँगा, कल में कॉलेज नहीं जाने वाला हु तो दिन में कर लेंगे.



प्रीति, खुश होते हुए: वाओ थैंक यू सो मच सनी,,, तूने भोत बड़ी टेंशन दूर कर दी मेरी थैंक्स अगेन. और ये बोल कर वो फिर भगति हुई अपने रूम में चली जाती है.
 
अपडेट-27

रत को डिनर करने से पहले पापा, भैया और बुआ के बिच वही हॉल में बैठे ऑफिस की किसी प्रेजेंटेशन की बात होने लगती है.

पापा: राहुल, वो प्रेजेंटेशन अचे से तुमने रेडी कर ली है न, कल की मीटिंग के लिए भोत जरुरी है ये.

भैया: हाँ पापा मेने अचे से देख ली है और उसमे कोई गलती नहीं होगी. और मेने आपको और बुआ को मेल भी कर दी है एक बार आप दोनों भी देख लेना.

पापा: हाँ रागिनी एक काम करो तुम वो प्रसेनरटीओं देख लो और कोई गलती हो तो राहुल के साथ बैठ कर उसे सॉर्ट भी कर लेना.

बुआ, भैया के साथ काम करने की बात सुनते hi: नहीं भैया इसकी जरुरत नहीं पड़ेगी वैसे तो क्युकी राहुल ने सही से चेक कर लिया होगा, और वैसे भी मुझे कुछ मेल्स भी करने है तो टाइम नहीं मिलेगा, रही बात गलतियों की तो राहुल अब बच्चा नहीं रहा भोत बड़ा हो गया है सब कुछ सोच समझ सकता है हहै.

बुआ का ये टॉन्ट आज फिर भैया के लिए पलटवार hi था जो भैया भोत अछि तरीके से समझ चुके थे. इससे आगे कुछ और बाटे चलती है और तभी माँ डिनर के लिए सबको बुला लेती है.

डिनर के बाद hi बुआ उप्पेर अपने रूम की तरफ चली हटी है लेकिन रूम में घुसने की बजे बुआ सीधा टेरेस की तरफ चल पड़ती है, जिसे देख भैया भी बुआ के पीछे पीछे टेरेस की तरफ चल पड़ते है.

टेरेस पर पहुंच भैया बुआ के पास जाते हुए...

राहुल: बुआ आपने पापा से ऐसा क्यों कहा की आप मेरी हेल्प नहीं करेंगी क्युकी चाहे कितना भी काम हो आप पहले मेरी हेल्प जरूर करती थी.

रागिनी, राहुल को देखते हुए: देखो राहुल मुझे इस बात पर कोई डिस्कशन नहीं करना है और वैसे भी पहले और अब में भोत कुछ बदल चूका है.

राहुल: हाँ वो तो में भी देख रहा हु की में आपसे बात करने की लाख कोशिश कर रहा पर आप आज भी मुझे ट्रिप वाली बात को लिए तने मर रही हो जब मेने अपनी गलती मान आपसे माफ़ी भी मांग चूका पर आपको कोई फरक नहीं पड़ा है.

भैया और बुआ में ये बाटे हो hi रही थी लेकिन एक और इंसान इन बातो को सुन रहा था और वो थी कामिनी भाभी, जिन्होंने भैया को बुआ के पीछे पीछे टेरेस पर आते हुए देख लिया था और उनके आने के बाद वो भी पीछे से टेरेस पर चली आई थी और अब उनकी बाटे सुन रही थी.

रागिनी, राहुल को सवालिया नजरो से देखते हुए: लिखे सीरियसली राहुल, क्या तुम्हे लगता है की तुमने जो हरकत की है वो भूलना इतना आसान है और इतनी आसानी से में तुम्हे माफ़ कर दू?

राहुल, अब फ्रुस्ताते होते हुए: यार बुआ अब कब तक इस बात को ले कर बैठी रहोगी आप, हप गयी गलती अब, आपको देख बहक गया और दबोच लिया मेने आपको और आपकी चुचिओ को, पर अब इसके लिए आप जिंदगी भर तो मुझे ऐसे नहीं सुना सकती न.

रागिनी, गुस्से में आते हुए: शट उप राहुल, ये कोई छोटी मोती बात नहीं है, एक औरत होने के नाते में ये कभी स्वीकार नहीं कर सकती की एक लड़का मेरे शरीर के अंगो को इस तरह जबरदस्ती छूटा है और मसलता है और नाह hi में ऐसा करने वाले किसी इंसान को माफ़ कर सकती हु. ये तो शुक्र मनाओ की तुम मेरे भाई के बेटे हो और परिवार के सदस्य हो इसलिए मेने खुद को रोका हुआ वार्ना अब तक पता नहीं में तुम्हारे साथ क्या कर बैठती, ये बात माफ़ करने वाली नहीं सजा देने वाली है समझे.

अपने पति और बुआ के मुँह से ये सुनने के बाद की राहुल ने जबरदस्ती बुआ के जिस्म पर हक़्क़ जाताना चाहा और उनकी चूचिया और जिस्म को दबोच के मसलने की कोशिश की, कामिनी को अपने कानो पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन फिर भी सच स्वीकार करते हुए अब कामिनी को भी अपने पति पर मन hi मन गुस्सा आ रहा था की उसने एक औरत को बलपूर्वक पाने की कोशिश की और वो भी तब जब वीके औरत और कोई नहीं उनकी अपनी बुआ है छी.

राहुल, बुआ की बात सुन आवाज धीमी करते हुए: बुआ पर मेने इस गलती को मान भी तो लिया है न और उस वक्त में नशे में भी था और आप लग भी इतनी हसीं रही थी की में अपने आप को नहीं रोक पाया, आखिर में भी हु तो इंसान hi हो गयी गलती.

रागिनी: देखो राहुल मेरी बात साफ साफ सुन लो और समझ लो, मेरे लिए ये कोई छोटी बात नहीं, मेरे अपने भतीजे ने मुझे जबरदस्ती से पाने की कोशिश की है, और में इस बात के लिए तुम्हे इतनी आसानी से माफ़ नहीं कर सकती तो बेहतर है तुम मुझे अब काम बात किया करो और अपना ऑफिस का काम भी मुझसे अलग hi रह कर करो.

राहुल: हद है बुआ ऐसी भी क्या जबरदस्ती की थी मेने, सिर्फ कुछ देर के लिए आपको दबोचा और आपकी चूचिया दबोची वही न और इसके लिए आप पहले hi भोत सुना चुकी है और थप्पड़ लगा चुकी है अब बस भी करो.

रागिनी, पूरी तरह झल्लाते हुए: बस राहुल, अब मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी मुझे जो कहना था वो मेने कह दिया, इससे पहले की मुझे और गुस्सा आये, तुम मुझे इस वक्त अब अकेला चोर दो.

ये देख की अब बुआ कुछ समझने वाली नहीं है भैया भी अपने कदम फेर निचे टेरेस से वापस निचे की और बढ़ा लेते है और वह भाभी जिन्हे अब भी अपने पति की हरकतों पर विश्वास नहीं हो रहा था, वो पहले से hi अपने रूम में आ चुकी थी.

रूम में आने के बाद भाभी के दिमाग में अब भी वही सब बाटे चल रही थी जो अभी वो टेरेस पर सुन कर आई है और साथ hi अपने पति पर गुस्सा भी आ रहा था की ऐसी किसी हवस है जो अपनी बुआ को hi जबरन दबोच बैठे, और अब भाभी को ये भी समझ आने लगा था की भैया का उनकी चुदाई करने के तरीके में बदलाव, वो गुस्सा, वो गालिया ये सब उनके लिए नहीं बल्कि मन hi मन वो ये सब बुआ को इमेजिन कर के अपनी भड़ास निकल रहे थे.

भाभी ये सब सोच hi रही थी की भैया भी रूम में आजाते है जो भाभी को रूम में देख अपना मूड बदलते हुए बीएड पर उनके पास आ कर बैठ जाते है लेकिन भाभी के मनमे अब भी पति के प्रति गुस्सा भरा हुआ था क्युकी एक औरत होने के नाते वो भोत hi अछि तरह से समझ प् रही थी की उसके पति ने एक औरत जो उनकी बुआ है उनपर उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन हाथ डाला है जो किसी गुनाह से काम नहीं है.

इसी कारन अब भाभी मन में थान लेती है की कल hi बुआ से अपने पति की करतूतों को विस्तार से जानने के बाद राहुल से इस बारे में बात करुँगी और भोत hi रौदे तरीके से भैया से नींद आने का बहाना कर सो जाती हैं.


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आज मेरी सुबह देर से होती है कुकी कॉलेज जाने का मन नहीं था और इसी कारन रोज से तकदा लेट उठ कर निचे ब्रेकफास्ट करने पहुँचता हु, जहा इस वक्त बुआ भाभी माँ और सीमा दीदी hi मौजूद थे. भैया और पापा आलरेडी साथ में ऑफिस चले गए थे और प्रीति अपने कॉलेज. और इस वक्त वह मौजूद सभी लोग नास्ता करने में लगे हुए थे सिवई माँ के..

में: माँ आपको आज ब्रेकफास्ट नहीं करना है क्या.

माँ: नहीं आज मेने मंदिर जाने का सोचा है पहले वह जाउंगी फिर वापस आ कर कुछ खाउंगी.

में: ओह okay okay माँ.

माँ: और हाँ में अकेली नहीं जा रही हु, आज तू कॉलेज थोड़ा लेट से चले जाना पहले मुझे मंदिर ले चल अपने साथ नाश्ता ख़तम कर के.

में: अरे माँ लेट क्या आज में कॉलेज hi नहीं जा रहा हु मन नहीं है मेरा.

माँ: तेरा मन होता कब है कॉलेज जाने का, खैर ठीक है मत जा अब क्या बोलू तुझे रोज रोज, पर जल्दी से नाश्ता कर क्र रेडी हो जाना तब तक में भी तैयार हो जाती हु.

और ये बोल माँ अपने रूम में चली जाती हैं और उन्ही के साथ कामिनी भाभी भी कॉलेज के किये रवाना होजाती है. अब में दीदी और बुआ hi डाइनिंग टेबल पर रह गए थे जिन्हे देख..

में: क्या बात है बुआ आज आप भी ऑफिस नहीं गई पापा और भैया के साथ.

बुआ: हाँ वो उन दोनों को ऑफिस में आज जल्दी पहुंचना था इसलिए में भी बस कुछ देर में निकलने वाली हु.

तभी मेरी नजर साड़ी पहनी बुआ के उभरते हुए क्लीवेज पर पड़ती है जिसे देख मन तो करने लगा था की इन चुचिओ को अभी दबोच लू और तभी..

में, बुआ की और देखते हुए: अरे सीमा दीदी ये क्या, लगता है आज माँ मेरे लिए दूध बनाना भूल गई है यहाँ पड़ा भी नहीं है.

दीदी: ओह सनी कोई बात नहीं तू पांच मिनट बैठ में अभी बना कर लती हु. और ये बोल दीदी भी वह से उठ किचन में चली जाती है और इसी बात का फायदा उठा में बुआ के पास वाली चेयर पर जा कर बैठ जाता हु.

में, अब खुले आम बुआ की चुचिओ की घूरते हुए: वैसे बुआ मन तो कर रहा है की दीदी को दूध लेन से मन कर दू और मेरी इस मोठे दूध वाली बुआ की चुचिओ से सीधा दूध पीलू क्या कहती हो.

बुआ, इस तरह अचानक से मेरी ऐसी बात सुन सकपकाते हुए: तू पागल हो गया है क्या सनी, कल hi तुझे इतना कुछ सुनाया समझाया मेने और आज वापस तू वही बात ले कर आ गया.

में, अपने हाथ बुआ की जांघ पर रखते हुए हलके से दबाव बना कर: तो कल मेने भी आपको कहा था की मुझे किसी भी हालत में आपकी इन चुचिओ को मसलना है और निचोड़ निचोड़ कर पीना है और वो में एक न एक दिन कर के रहूँगा.

बुआ, आँख दिखते हुए और मेरा हाथ हटते हुए: तुझे सुबह सुबह मार कहानी है क्या मेरे हाथो, या बुलाऊ भाभी को?

में, अपना हाथ अब बुआ के नंगे पेट और कमर में डालते हुए: बुला लो मुझे किसी का दर नहीं पर फिर आप भी इस बात का जवाब सोच लेना की मेरे बचपन में आपने मेरा अपनी जवानी की आग बुझाने और मजे लेने के लिए किस तरह और क्यों फायदा उठाया था.

बुआ, मेरे हाथ को पकड़ते हुए : मत कर न सनी क्यों उस बात को ले कर अब भी पीछे पड़ा है मेने तुझे कल सब सच सच बताया इसका मतलब ये नहीं की तू जो मन में आये करेगा और अब हाथ हटा अपना.

में, ये देख की मेरी बात सुन अब बुआ भी बुरी फास चुकी है और बेबस सी हो गई है, अपने हाथ को पल्लू के अंदर दाल बुआ की राइट चुकी जोर से भींच देता हु: में अपने मन की कहा कर रहा हु बुआ, बस वही कर रहा हु जो आप बचपन में खुद मुझे अपनी गोदी में लिए करवाती थी, aur(chuchi दोबारा दबाते हुए) हईये क्या मुलायम चूचिया है आपकी बुआ जब ब्लाउज के उप्पेर से दबाने में इतना मजा है तो नंगी कर के दबाने में कितना मजा आएगा.

बुआ, नेरे चूचिया दबाने से उनके जिस्म में भी सिहरन सी उठ पड़ी थी फिर भी मेरे हाथ को पकड़ झटकते हुए और आँखों से गुस्सा दिखते हुए, हलकी सी सिसकी के साथ: उफ्फफ्फ्फ़ नालायक ये क्या कर रहा है, शर्म नहीं आती तुझे जरा भी, ये मत समझ की तुझे मेने सच बताया इसका मतलब तुझे कुछ भी करने दूंगी, और आइंदा अगर मुझे हाथ लगाया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा समझा.

इससे आगे में कुछ कह या कर पता की तभी दीदी किचन से बहार आजाती है..

दीदी: ये ले सनी तेरा दूध.

में, बुआ की और देखते हुए: थैंक्स दीदी ु र सो स्वीट, माँ और एक आप hi है जो मेरा ख्याल रखती है अभी अगर मेने बुआ से कहा होता दूध पिलाने का तो वो मन कर देती.

बुआ मेरी बात का मतलब समझते हुए फिर आँख दिखने लगती है.

दीदी: हहै ऐसा कुछ नहीं है बुआ भी तुझे उतना hi चाहती है और वो क्यों मन करती भला, सही कह रही हु न में बुआ.

बुआ, अब दीदी के सामने मेरी बात समझने के बाद भी : हाँ सीमा सही कह रही हो तुम, इस सनी को तो बस बकवास करनी होती. में भला इसे दूध देने से क्यों मन करने लगी.

में, बुआ को देख आंख मरते हुए: ः बुआ तो ठीक है फिर आज रत को आप दूध पीला देना मुझे अपने हाथो से.

बुआ, दूध पिलाने की बात से झेंपते हुए: तू कोई छोटा बचा है जो पिलाना पड़े खुद ले कर पि लेना चाहिए अब तो.

में: देखा दीदी मेने कहा था न बुआ नहीं पिलाने वाली ः.

बुआ, बात को टालते हुए: चुप कर बदमाश, और जा तैयार हो भाभी को मंदिर ले जाना है न, और मुझे भी ऑफिस के किये देर हो रही है में चलती हु अब.

और ये बोल बुआ चेयर से उठ कर जाने लगती है तभी में दीदी की नजर से चिप कर अपने हाथ से बुआ के चूतड़ को धीरे से मसल देता हु और..

में: तो बुआ फिर रत में दूध पिने का इंतज़ार रहेगा मुझे आपके हाथो से ः.

और मेरी ये बात सुन और चूतड़ों को मसलने की वजह से पलट कर मुझे गुस्से से घूरते हुए वो वह से चली जाती है और में उन्हें देख एक चेहरे पर शैतानी मुस्कान ले आता हु. उनके जाने के बाद में भी अपने रूम में आ कर तैयार होने लगता हु माँ के साथ जाने के लिए और यहाँ दीदी भी अपने रूम में चली जाती है.


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तैयार होने के बाद में सीधा माँ के रूम के पास पहुंच जाता हु और एक झटके से दरवाजे को अंदर की तरफ धक्का लगा देता हु.

धक्के से दरवाजा खोल मैं साथ hi एक तेज स्वर में ये बोलने लगा था की माँ में तैयार हु चलिएईईए,, और मेरे मुँह से इतनी बात निकली hi थी की मेरी नज़र अब माँ पर जा गिरती है जो इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के सामने मात्रा ब्लाउज और पेटीकोट में कड़ी हुई थी.

अपनी माँ क गोर जिस्म को सिर्फ एक ब्लाउज और पेटीकोट में देखते hi मेरे लुंड को एक तेज झटका लग पड़ता है और लगे भी क्यों नहीं, जब सामने इतनी हसीं औरत हो जो इस वक्त सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में हो, जिसमे से उसके चूतड़ों का आकार भोत hi साफ़ तरीके से दिखाई पड़े, साथ hi वो गोरा नंगा मांस से भरा हुआ पेट, लचकती कमर और इस सब से उप्पेर ब्लाउज की डोरी खुली होने की वजह से उस रेड ब्रा में दिखती माँ की नंगी गोरी चिकनी पीठ, हईये सख्त से सख्त लौंडा भी ये नज़ारा देख पिघल जाये.

में तो इस नज़ारे को देख अपनी बोलती बंद कर चूका था लेकिन मेरी आवाज सुनते hi और इस तरह दरवाजा खुलते hi ब्लाउज की डोरी बांधने की कोशिश कर रही मेरी माँ भी सकपका जाती है और मुझे वही दरवाजे पर रोकती हुई...

माँ: सनी बस पांच मिनट बहार रुक में अभी आती हु.

में, मन में, बहार क्यों माँ यही खड़े रहने दो मस्त नजारा है और वही दरवाजे की साइड होते हुए: ठीक है माँ में वेट कर रहा हु.

दरवाजे के बहार आने पर भी मेरी नजरे माँ पर hi तिकी हुई थी और चिप कर वही से माँ को ब्लाउज की डोरी बांधने की नकमयाद कोशिश करते हुए देख रहा था. अपने दोनों हाथो में उस दोर्र को पकडे पीठ को सिकोड़ कर माँ गठन लगाने की कोशिश कर रही थी और इसी कोशिश में माँ के ब्रा का वो स्ट्राप भी कभी ढीला तो कभी टाइट हो रहा था और वो गोरी चिकनी चमकदार पीठ तो मनो बार बार मुझे चूमने का आमंत्रण दे रही हो, ये सब देख अब पंत में hi मेरे लुंड ने भौकाल मचा रखा था.

कुछ देर रुकने के बाद और ये देखने के बाद की माँ से अब भी वो डोरी नहीं बांध रही है में दोबारा कमरे में घुस जाता हु..

में: माँ क्या हुआ पांच के पंद्रह मिनट हो गए और कितना वक्त लगेगा.

माँ, इस बार मेरे वह खड़े होने के बावजूद अपनी ब्लाउज की लास बांधने की कोशिश करते हुए hi: बस सनी बीटा 5 मिनट और, ये ब्लाउज नहीं बांध रहा वार्ना कब की रेडी हो जाती मई भी.

में, मौके का फायदा उठा और ये देख की माँ भी अब परेशां हो रही है, माँ के पास जाते हुए: अरे माँ तो इसमें कौनसी बड़ी बात है लाइए में बांध देता हु ये लास.

माँ, थोड़ा हिचकिचाते हुए: लेकिन बीटा,, तू कैसे बंधेगा.. रहने दे में कर लुंगी.

में, माँ की बात अनसुनी कर उनके हाथ से लास को अपने हाथो में लेते हुए: अरे माँ इसमें क्या दिक्कत है और में आपका बीटा hi हु कोई बहार का मर्द नहीं जो आप इतना सोच रही हो, लाओ में बांध देता हु.

और ये बोल में ब्लाउज की उस लास की गठन बांधने लगता हु और ये करते हुए मेरा हाथ माँ की उस नंगी पीठ से लग जाता है, हैए कसम से क्या एहसास होता है माँ की पीठ चुने का, ऐसा लगा मनो किसी चिकनी मुलायम सी सतह पर हाथ रख दिया हो.. और इसी का एहसास लेते हुए में उस लास को कुछ ज्यादा hi खींच कर बांध देता हु जिससे अब माँ की गोरी त्वचा पर भी निशान से पड़ने लगे थे.

माँ: अहह सनी भोत टाइट बांध दिया है तूने इसे थोड़ा ढीला कर हहै.

में, ओह सॉरी माँ, कहते हुए उस लास को ढीला करते हुए वापस गठन लगाने लगता हु और: वैसे माँ आप इतने टाइट और ऐसे ब्लाउज क्यों लती हो जब पहनने में दिक्कत होती है तो ः.

माँ: अरे बीटा पहले ये ब्लाउज मुझे फिट आता था और में आसानी से अपने हाथो से इसकी डोरी बांध लेती थी अभी कुछ महीनो से hi तकलीफ हो रही है.

में, मन में, तकलीफ तो होगी hi न, इतनी मोती मोती चूचिया लटका के घूम रही हो, ये कपडे का छोटा सा टुकड़ा भी कितना भर सहेगा, इन्हे तो नंगी ले कर घुमा करो मेरी मनो तो, ताकि अपकीस बेटे को भी इन्हे देखने नोचने और मसलने का मौका मिल सके और ब्लाउज के हुक्स लगाने और लास बांधने की झंझट भी ख़तम हो जाये ः.

में, दिमाग में चुचिओ को सोच कर : ः माँ लगता है आप पहले से ज्यादा हेअल्थी हो गई हो इसलिए ये फिट नहीं आ रहा है.

माँ, निराशा भरे स्वर में: हाँ मुझे भी ऐसा लग रहा है की अब में मोती हो गयी हु पहले से.

में, इसलिए तो और भी मस्त माल लगती हो और इसे मोटा होना नहीं जिस्म में भराव होना कहते है: अरे नहीं माँ आप बिलकुल भी मोती नहीं हो बल्कि बिलकुल फिट हो, हेअल्थी होना और मोती होने में भोत फरक है.

माँ, कंफ्यूज होते हुए: ाचा क्या फरक है दोनों में.

में: मोती होने का मतलब है की पूरा शरीर hi बढ़ने लगे और फैलने लगे हर तरह से लेकिन आपके साथ ऐसा नहीं है, आपके शरीर के सरे पार्ट्स नहीं फ़ैल रहे सिर्फ कुछ hisse(yaha मेरा इशारा माँ की कमर, चुकी और चूतड़ पर था) फ़ैल रहे है और इसे फैलना भी नहीं कहूंगा में, इसे ये कह सकते है की अब सही से अपने अकार में आ रहे है.

माँ, में क्या कहना छह रहा था वो भी अचे से समझते हुए और मन hi मन अपने बेटे के मुँह से तारीफ सुन खुश होती है लेकिन बहार से कठोर आवाज में : हाँ में सब समझ रही हु तू मेरे किस हिस्से की बात कर रहा है, भोत बेशरम होने लगा है तू सनी आजकल, मेने तुझे डांटना काम कर दिया है इसका ये मतलब मत समझ की तू कुछ भी बोलेगा.

में, ये जानकर की माँ मेरी बात समझ चुकी है: ः माँ मेने तो बस अपने जो पूछा उस बात का सही सही जवाब दिया है और कुछ नहीं, और वैसे भी कल hi मेने आपपको बताया न की आप मेरी गर्लफ्रेंड भी है तो गफ से तो ऐसी बात कर hi सकता हु न.

माँ, मेरी बात सुन अब मेरी तरफ पलट जाती है और कान खींचते हुए: बेशरम तू फिर वही बात बोलै तुझे कल भी कहा था न की मुझे ऐसे मजाक पसंद नहीं है.

माँ जल्दबाजी में यु मेरी तरफ पलट तो गयी लेकिन वो ये भूल गयी थी की वो इस वक्त सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में हैं और उनके इस तरह पलटने से अब माँ की ब्लाउज में कासी हुई गोरी दुधारू चूचियों का उभार अउ क्लीवेज बिलकुल hi साफ़ तरीके से मेरे सामने था जिसे देखते hi मेरी नज़र वही के वही रुक सी गई थी और माँ से अपने कान छुड़वा थोड़ा पीछे सरकते हुए..

में: वूव माँ, क्या सुंदरता है आपकी उफ्फ्फ, सच आप चाहे कान खींच खींच के उखड लो या पिट पिट के जान निकल दो क्युकी आपके इस सुन्दर स्वरुप को देखने ले लिए मुझे ये सब मंज़ूर है.

माँ, मेरी बात सुन और ये एहसास कर के की वो अपने बेटे के सामने कैसे ब्लाउज में अधनंगी चूचिया लिए और सिर्फ पेटीकोट में कड़ी है, शर्म से लाल हो जाती है और वापस पलट कर: तू भोत शैतान हो गया है, माँ से ऐसे बात कर रहा शर्म आणि चाहिए तुझे, अब लास बांध दी है न तूने चल बहार जाकर बैठ में साड़ी पेहेन कर आती हु.

में: हाँ माँ चला जाऊंगा लेकिन लास बांधने की ऐवज में एक हुग तो देदो अपने बेटे को थैंक यू के बहाने.

माँ, इस तरह बेटे को हुग देने की बात सोच कर hi उनकी सासे भरी होते हुए: नहीं अभी कोई हुग नहीं मिलेगा, जा तू यहाँ से.

में, माँ की बात सुन पीछे से जा उनको हग्ग कर लेता हु जिससे मेरा लुंड पेटीकोट के उस पतले कपडे से उनके चूतड़ों पर चुने लग्र है जिसका अनुभव मुझे और माँ दोनों को hi होने लगा था. और इसी में साथ अपने हाथो को माँ के नंगे पेट पर सहलाने लगता हु.

माँ, चूतड़ पर बेटे के लुंड के एहसास और पेट पर हाथो की रगड़ से मचलते हुए: सुननयीयीय ये क्या कर रहा है चोर मुझे, वार्ना थप्पड़ खायेगा अभी.

में, माँ की नाभि में ऊँगली दाल घूमते हुए: में अपनी माँ को हुग कर रहा हु, क्या एक बेटे को ये हक़ भी नहीं है अब..

माँ, आंखे बंद किये मेरी उंगलिओ और मेरे स्पर्शो को महसूस करते हुए कुछ देर चुप रहती है फिर अचानक से hi मुझे थोड़ा जोर से झटका देते हुए अलग करते हुए: अब हो गया न हुग अब तो चोर चल और भाग जा यहाँ से बहार, वह बैठ कर इंतज़ार कर में आती हु थोड़ी देर में.

में, माँ का चेहरा पूरी तरह लाल हो चूका था और साँसे भी भरी जिस कारन उनकी चूचिया समुद्र की लेहरो की तरह उप्पेर निचे हो रही थी, लेकिन अभी मन hi मन माँ के इस तरह धक्का देने से में ये समझ चूका था की अब अगर कुछ किया तो माँ की थप्पड़ भी पद सकती है और यही सोच में एक बार और माँ को हुग करके बहार आ माँ का वेट करने लगता हु.

और यहाँ अपने बेटे के लुंड को चूतड़ पर महसूस करने से और आज पहली बार बेटे को अपनी जवानी इस तरह दिखने के कारन माँ की छूट भी गरमा चुकी थी पर अपने hi बेटे की हरकतों से छूट गीली होने का आभास माँ को गिल्ट भी फील करवा रहा था और इसी वजह से उन्होंने मुझे एक झटके से दूर कर बहार जाने को बोल दिया था.

यहाँ बहार कुछ देर और इंतज़ार करने के बाद माँ भी साड़ी पेहेन रेडी हो रूम से बहार आजाती है जिन्हे देख में एक बार फिर उनके पास जा कर ये कह देता हु की, "वाह माँ क्या लग रही हो आज तो आप, एक दम केहर सा ध रही हो, आज तो जिस किसी की भी नजर आप पर पड़ेगी तो बावरा hi हो जायेगा ः".

और मेरी बात सुन माँ दोबारा आँख दिखते हुए : चुप्प चाप चल अब बिना बकवास किये समझा. जा बाइक निकल अब अपनी.



और ये सुनते hi में भी अपनी बाइक निकलने चला जाता हु और यहाँ माँ मेरी बात सुनते hi मेरे जाने के बाद मुस्कुरा देती है की "कुछ भी बोलता है ये लड़का बिना सोचे समझे".
 
अपडेट-28

फोटोशूट कवने की वजह से प्रीति भी दोपहर में जल्दी hi कॉलेज से लौट आती है और आते hi जब उसे ये पता चला की में आज कॉलेज hi नहीं गया हु वो सीधा मेरे रूम में चली आती है..



प्रीति: सनी आज तू कॉलेज नई गया मुझे बताया क्यों नहीं.

में: क्यों तू कोई कलेक्टर है जो हर बात बताऊ तुझे.

प्रीति, अभी भाई से काम निकलवाना है सो ठन्डे दिमाग से बात करते हुए: हहै हैं य बी सह है पर अगर बता देता तो में और जल्दी आजाती और आज फोटोशूट हो जाता न अपना.

में: तो अभी कौनसी देर हुई है चल अभी लेलेता हु तेरी फोटोज, ताकि में भी इस झंझट से फ्री हो जाऊ.

प्रीति: अभी??? लेकिन अभी कैसे होगा सही लोकेशन भी तो किए न उसके लिए.

में: अरे लोकेशन क्या करनी है तेरे या मेरे रूम में hi हो जायेगा काम, इंडोर शूट्स भोत सही लगते है वैसे भी.

प्रीति: ओह रियली,,, तू सच कह रहा है न या बस ऐसे hi काम ख़तम हो जल्दी से इसलिएबॉल रहा.

में: देख प्रीति तुझे करवाना है तो करवा नहीं तो मुझे कोई फालतू शोक नहीं है, अभी में फ्री हु बाद में फिर मूड नहीं बना तो ऑडिशन से पहले hi रिजेक्ट हो जाना ः.

प्रीति, मौके की नजाकत को समझ: नहीं नहीं भाई में रेडी हु, एक काम कर मेरे रूम में hi चल ले, ड्रेसेस भी तो देखनी होगी अब साडी तो यहाँ ला नहीं सकती न.

में: ाचा चल ठीक है तेरे hi रूम में कर लेते है.

और ये बोल में अप्पन कैमरा और साडी जरुरी चीजे लिए प्रीति के रूम में चला जाता हु जहा उसने अपनी कप्बोर्ड खोल दुकान जमाई हुई थी...

प्रीति: अब बता सबसे पहले कौनसी ड्रेस पह्नु..

में, सरे कपडे देखने क बाद: एक काम कर सबसे पहले ये जीन्स और वाइट वाला टॉप दाल ले उसमे लेता हु तेरी फोटोज.

कुछ देर में प्रीति मेरे बताये हुए कपडे पेहेन कर आजाती है, जिसका टॉप ऑफ शोल्डर था और उससे उसके गोर शोल्डर्स भोत hi अचे से दिखाई अड़ रहे थे और टॉप ऐसा था की अगर थोड़ा और निचे सरका दिया जाये तो उसकी चूचिया बहार hi निकल आये.

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उस ड्रेस में कुछ अलग अलग पोसेस में फोटोज लेने के बाद मेने उसे टॉप चेंज करने को कहा जो इस बार स्लीवलेस और ट्रांसपेरेंट सा था जिसमे एक ब्लैक कलर का इनर डाला हुआ था.

टॉप चेंज करवाने के बाद उस ड्रेस में भी कीच पिक्स क्लिक की और उसे थोड़ा बैक टर्न कर जीन्स की पीछे की पॉकेट में हाथ दाल पोज़ देने को कहा.

इतनी देर से जो में नार्मल फोटोशूट का कार्यक्रम चला रहा था जब प्रीति को टर्न कर ऐसे पोज़ में खड़ा किया तो अब मेरी नज़र पहली बार ढंग से उसके चूतड़ों पर पड़ी, जीन्स में कैसे प्रीति के वो चूतड़ जो अचे से शेप में आये हुए थे उन्हें देख अब आज पहली बार मैं प्रीति को ढंग से नोटिस करने लगा था. मुझे इस तरह अपने चूतड़ों को नोटिस करते देख..

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प्रीति: अब देख क्या रहा है ऐसे, पहली बार तो देख नहीं रहा मुझे तू, जल्दी से पिक्स ले न.

में: हाँ रुक तो सही देख रहा था पोज़ परफेक्ट है या नहीं बस.

और ये बोल में दोबारा पिक्स क्लिक करने लगता हु. और उसके बाद अब में प्रीति की जवानी को और अचे से महसूस करना चाहता था की तभी दिमाग में एक विचार आया...

में: प्रीति तेरे पास शॉर्ट्स नहीं है क्या, उसमे मस्त पिक्स आती जिसे देखते hi कोई भी तुझे सेलेक्ट क्र लेता.

प्रीति, मेरी बात सुन उत्साहित होते हुए: हैं न्न शॉर्ट्स भी है मेरे पास ये देख...

और ये बोल कुछ शॉर्ट्स मेरी तरफ निकल के रख देती है जिसमे से अब मेने उसे एक ब्लू शार्ट और उसपे एक क्रॉप टॉप पहनने को बोलै.

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कुछ देर में जब प्रीति शार्ट और उस टॉप में मेरे सामने आयी तो एक बार तो मन किया की अपनी सबसे छोटी बेहेन और इस मस्त कमसिन जवानी को अभी दबोच के रख दू, शॉर्ट्स उसकी जांघो तक hi ख़तम हो चूका था, उसके निचे उसकी प्रॉपरलय वैक्स की हुई चिकनी नंगी गोरी टंगे, भोत hi अचे भराव से भरी जंघे और क्रॉप टॉप में दिखाई पड़ती उसकी पत्नी चिकनी कमर और नाभि, ये सब देख अब मेरा मन डोलने लग पड़ा था.

प्रीति: कैसी लग रही हु सनी, अछि पिक्स आएँगी न इस ड्रेस में.

में, अछि पिक्स क्या तुझे इस ड्रेस में देख तो कोई भी होश खो देगा: अरे भोत अछि लग रही है प्रीति, इस ड्रेस में तेरी पिछ देख तो कोई तुझे रिजेक्ट कर hi नहीं सकता है.

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और मेरी बात सुन प्रीति खुश हो जाती है और वापस से पोज़ बना कर कड़ी हो जाती है. एक तंग मोड़ कर के दिवार के सहारे हाथ लगा इस कदर प्रीति ने पोज़ लिया हुआ था की उसकी गांड का अकार और उभर अब भोत hi यही तरह से शॉर्ट्स में दिखाई पद रहा था साथ hi उभरी हुई छाती की वजह से उसकी चूचिया भी अचे से शेप में आ रही थी. मन में तो यही चल रहा था की अगर ये प्रीति न हो कोई और लड़की होती तो अब तक सच में दबोच hi लेता और रगड़ देता ः.

इसके बाद मेरी नज़र वह पड़े एक ोनेपीएस पर पड़ती है जो दिखने में hi भोत सेक्सी लग रहा था मेने प्रीति को वो पेहेन आने को कहा. मेरी बात मान प्रीति कुछ hi देर में वो ड्रेस दाल कर आ गई थी जिसे देख मेरे लुंड ने तुरंत झटका मर दिया.

ड्रेस काफी हद तक पारदर्शी थी और लम्बाई में ये भी झांघो तक hi थी जिससे प्रीति की टैंगो के दर्शन भोत अचे से हो रहे थे, पर चुकी ये आखरी ड्रेस थी तो में इसमें प्रीति की जवानी जितना हो सके उतना देख लेना चाहता था जिस वजह से...

में: प्रीति अगर तू कम्फर्टेबले हो तो क्या तू अपनी ब्रा उतर कर ये ड्रेस पेहेन सकती है जिससे की इस ड्रेस की और इसमें ली जाने वाली पिक्स की वैल्यू और बाद जाएगी.

प्रीति, कुछ देर सोचने के बाद: पर सनी ब्रा उतरना सही रहेगा, कुकी ये ड्रेस वैसे hi भोत ओपन है एंड पारदर्शी भी.

में: अरे तू फ़िक्र क्यों करती है तू बेहेन है मेरी मुझे पता है की क्या सही क्या नहीं और वैसे भी तू मॉडलिंग करने का इरादा रखती है और मॉडल्स के लिए ऐसे फोटोज क्लिक करवाना कोई बड़ी बात नहीं है सो ु मस्ट तरय आईटी.

प्रीति, कुछ सोचते हुए: ममम ठीक है में दो मिनट में आई..

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और ये बोल प्रीति अपनी ब्रा भी उतर कर आजाती है, जिसे देखते hi अब लुंड महाराज मेरी बेहेन की इस जवानी का नजारा देख उछाल से गए थे. ड्रेस लूसे होने से प्रीति की बैक पूरी तरह नंगी दिखाई पद रही थी और साथ hi उसकी चूचिया का शेप और साइज इस ड्रेस में बाकि की तुलना में सबसे अचे से दिखाई पद रहा था.

हील्स पेहेन जब प्रीति ने इस ड्रेस में पोज़ देना शुरू किया तो मेरा ध्यान अब पिक्स क्लिक करने में काम और उसके चूतड़, नंगी टंगे, पीठ और चूचियों को देखने में क ऐडा केंद्रित हो चूका था और मन hi मन ये सोच रहा था की इतनी मस्त कमसिन काली घर में दिन रत घूमती रहती है और मेने इस पर आज तक नजर नहीं डाली.

माँ, बुआ और भाभी की जवानी काम थी की एक ये जवानी भी मेरे घर में लूट ली जाये ऐसी हो चुकी है, क्या कैसे चूतड़ है इसके हैए और फिगर भी एक दम मस्त, उफ्फ्फ कुछ करना पड़ेगा जिससे की अब घर के सबसे जवान जिस्म का स्वाद चखने मिल जाये.

यही सोचते हुए में फोटोज ले रहा था की प्रीति की आवाज आती है..

प्रीति: और कितने पिक्स लेने है सनी, मेरे हिसाब से तो भोत हो गई है.

में: हाँ में भी यही कहने वाला था, तुझे ऑडिशन के लिए को पिक्स चाहिए उतनी तो हो गई है, ये साडी पिक्स तुझे एक पेण्ड्रीवे में दाल मर दे दूंगा बाद में.

प्रीति: ोहकाय एंड हाँ थैंक यू सो मच भाई.

और इसी के साथ में प्रीति के रूम से वापस अपने रूम में चला आता हु और मन में अब प्रीति की जवानी hi घूम रही थी और उसकी वो मस्त कासी हुई गांड, नंगी टंगे और चिकना जिस्म यद् कर कर के बार बार लुंड हिचकोले खाये जा रहा था. अपनी बेहेन की जवानी देखने के बाद मचल रहे लुंड को अब मेने बहार निकल अपने हाथ में पकड़ कैमरा में कैद की हुई प्रीति की फोटोज को देखते हुए अब हिलना शुरू कर दिया था.

उफ्फ्फ क्या जवानी है प्रीति की, आज से पहले नजर क्यों नहीं पड़ी हईये मन तो कर रहा था की इस ड्रेस को उप्पेर उठा अभी लुंड उसकी छूट में पेल दू पर ये इतना आसान भी नहीं, जिंगली बिल्ली है इतनी आसानी से नहीं दबोचने देगी, उफ्फ्फ्फ़ लेकिन कुछ भी कर के अब तेरी जवानी का स्वाद भी चख के रहूँगा प्रीति मममम अह्ह्ह्ह हैइए करते हुए लुंड हिला कर में सो जाता हु.

शाम को आँख खुलने पर में रूम से निकल निचे पहुँचता हु जहा मुझे देख बहार हॉल ने बैठी माँ ये कहती है की जा किचन में मेरे लिए चाय और स्नैक्स रखे है वो ले आ..

माँ की बात सुन में जैसे hi किचन में घुसा तो वह में बुआ को खड़ा पता हु जो इस वक्त कुर्ते और एक स्किन टाइट लेग्गिंग पहने हुई थी.

दिन में प्रीति की जवानी और कुछ हद तक अंगो को देखने के बाद, बुआ को ऐसे स्किन टाइट लग्गिंग जिसमे से उनकी जंघे चूतड़ बिलकुल अचे से नजर आ रहे थे, देख लुंड ने दोबारा सलामी देना शुरू कर दिया था और चूँकि अभी किचन में और कोई नहीं था तो बुआ से थोड़े मजे लेने के इरादे से में उनके पास जा खड़ा हो गया.

में: क्या बात है बुआ आज आप ऑफिस से जल्दी आ गई.

बुआ, अपने लिए कॉफ़ी बनाने में व्यस्त रहते हुए hi: हाँ वो आज काम ज्यादा नहीं था इसलिए चली आयी, वैसे तू यहाँ क्या कर रहा है कुछ चाहिए क्या.

में: हाँ वो माँ ने कहा था की किचन में कुछ स्नैक्स रखे है खाने को,, मुझे नहीं पता था की मुझे मेरी बुआ स्नैक्स के रूप ने मिलेगी खाने को ः.

बुआ, मेरी बात का मतलब समझ मेरी तरफ देखते हुए: तू फिर से शुरू हो गया सनी, आज सुबह भी तू अपनी लिमिट क्रॉस कर रहा रहा.

में, बुआ की कमर में हाथ दाल अपनी तरफ खींचते हुए: अच्छा बुआ जी, मेने क्या लिमिट क्रॉस की, अब अपनी बुआ से प्यार करना भी गलत हो गया क्या ः.

बुआ, मेरे हाथो से आज़ाद होते हुए: देख सनी मुझे ये सब नहीं पसंद है तुझे कित्नु बार कहु, और मेरे साथ ऐसी ओछी हरकते न किया कर समझा.

में: अच्छा ये ओछी हरकत है, ऐसा क्या कर दिया है मेने भला, आप तो ऐसे बोल रही हो की मेने आपको जबरदस्ती पकड़ा हो, उल्टा बचपन से आप मेरा उसे करती आई हो,, और इसके बाद भी मेरी कोई हरकत जबरदस्ती की लगी है तो बताओ मुझे अभी इसी वक्त. चाहो तो उसके लिए थप्पड़ भी लगा देना फिर.

बुआ, अब मेरी बातो से सकपकाते हुए: जबरदस्ती नहीं की तूने न hi ऐसा कुछ किया है लेकिन तू जैसे सुबह सीमा के सामने दूध पिलाने की बाटे कर रहा था, अभी भी मुझे खाने की बाटे कर रहा था, में सब कुछ अचे से समझती हु तू कहना क्या चाहता है. और रही बात बचपन की तो मेने तुझे सच बता कर गलती hi कर दी वाकई में, उसी बात को लिए तू मुझे ब्लैकमेल करता रहेगा क्या अब.

में: में आपको कोई ब्लैकमेल नहीं कर रहा बुआ जी अगर करना hi होता और उस बात का फायदा उठाना होता तो अब तक तो उठा लिया होता और ये जो आपसे दूध पिलाने वाली और आपको खाने की बाटे कर रहा हु न वो बाटे न करते हुए हकीकत में ये सब कर चूका होता.

बुआ, चौकते हुए: क्या मतलब तेरा,, हकीकत में क्या कर चूका होता तू?

में, बुआ के करीब होते हुए: अगर सच में आपको ब्लैकमेल करना होता न तो अब तक तो वैसे में आपको हकीकत में खा चूका होता बुआ जी, सच में आपकी इन चुचिओ को नंगा करके अपने मुँह में भर बचपन की भांति दूध पि चूका होता और किसे पता शायद अब तक आपकी छूट का रास चख उसे भी खा ली होती.

बुआ, हैरानी से बिना पलके झपकाए मेरी बात को सुन कर अवाक् सी हो चुकी थी और मेरी सोच के विपरीत बिना गुस्सा किये धीरे से : क्या कहा तूने अभी सनी, तू मुझे ब्लैकमेल करके ये सब कर लेता, अपनी बुआ के साथ??

में, अपना हाथ अब बुआ के कुर्ते से पार करवा उनके चूतड़ों को दबोचते हुए: हाँ बुआ जी और में ये भी जनता हु की आप चाहे कितना भी ना कहो पारर अकेला पैन आपकी तड़प को और बड़ा रहा है और इस बात का प्रमाण है आपके रूम में मिले वो कृत्रिम लुंड का बॉक्स, जिसका आपको उपयोग करते हुए मेने खुद अपनी आँखों से देखा है.

बुआ, दोबारा चौकते हुए और इसी कारन मेरे हाथ को अपने चूतड़ों पर रखे रहने दिए होते हुए hi: क्याआ... क्या कहा तूने.. तूने कब देखा और शर्म नहीं आयी तुझे अपनी बुआ के कमरे में झाकते हुए.

में, हाथ को चूतड़ों से हटा आगे ला बुआ की दोनों टैंगो के बिच लेग्गिंग के उप्पेर से hi छूट पर घिसते हुए: शर्म किस बात की बुआ, जब आपने मुझे अपनी चूचिया पिलाने में कोई शर्म नहीं की तो अब में आपको मस्ती करते देखने में क्यों शर्मो, वैसे सच कहु तो मस्त माल लग रही थी आप बिना कपड़ो के और मुझे न आपकी ये तड़प देखि नहीं जा रही थी उस दिन. कितना तरस रही थी न आप लुंड के लिए भोत मन करता होगा न आपको भी छुड़वाने का.

बुआ, मेरे हाथो को अपनी छूट पर पते hi उसे पकड़ के झटकते हुए और दूर होते हुए: चुप कर जा सनी बास अब,, भोत बोल लिया तूने, जाए यहाँ से मुझे और कोई बात नहीं करनी है अब तुझसे.

में, बुआ की चुकी पर अपना हाथ रख: और आपकी ये चूचिया उस दिन नंगी देखि मेने अह्ह्ह सच बुआ उस दिन से सो नहीं पाया हु में और हर पल इनको चूसने का मन करता रहता है.

बुआ, जिनकी आँखों में मेरी बात सुन शायद गुस्सा भी था और साथ hi उनके शरीर की कांगनी का प्रमाण देते हुए वो आँखे पूरी तरह लाल और लचर बी दिखाई पद रही थी, इसी के साथ मेरे कान खींच : तुझे शर्म नहीं आती ये सब बाटे इतने खुले तरीके से बोलते हुए, और अपनी बुआ को इस तरह पाने की सोच रख रहा है तू पाप है ये समझा, मुझे क्यों मजबूर कर रहा है की में तेरे मम्मी पापा से इस बारे में बात करने जाऊ.

में, अपना कान छुड़वा और दोबारा बुआ की दोनों चुचिओ को हाथ में पकड़ दबोचते हुए: में जनता हु की आप किसी के पास नहीं जाने वाली हो बुआ, और इसका कारन ये है की आप मुझे बचपन से hi अपनी काम अग्नि शांत करने के लिए उसे में लेती आई हो और आज जब में खुद सामने से आपके जिस्म को शांत करने की बात कर रहा हु तो कही न कही आपको भी ये सब ाचा लग रहा है ः.

बुआ, चूचियों से हाथ झटक : ये गलत पफैमी है तेरी समझा, में ऐसा कुछ नहीं सोच रही और ना hi सोचूंगी कभी, तू मेरे भाई का बीटा है और तेरे साथ ऐसा कुछ करने का में कभी जिंदगी में नहीं सोच सकती और हाँ ये आखरी बार है में तुझे समझा रही हु अगली बार समझाउंगी नहीं बल्कि कोई ठोस कदम उठाउंगी.

में: आप चाहे कुछ भी कहे बुआ, जो कदम उठाने है उठा lijiye,bachpan में आपने सच में न सही पर किसी नाटक के जरिये भी आपकी चुचिओ से मुझे दूध पिलाया है और जिस औरत ने मुझे दूध पिलाया है उसकी ख़ुशी का ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ है और आपको ख़ुशी तब मिलेगी जब आपका शरीर तृप्त होगा और आपको तृप्त लिए में हर कोशिश करूँगा चाहे आप कितना भी ठोस कदम क्यों न उठा le.Aur अगर आपको ये बाटे गलत लगती है न तो में अभी यहाँ से जा रहा हु मेरे जाने के बाद जरा अपनी लेग्गिंग में हाथ डालना और खुद से ये सवाल करना की, सब बातो को गलत मैंने के बाद भी आपकी छूट आपके भाई के बेटे की बातो को सुन कर और उसके स्पर्श से गीली क्यों है... और बुआ अगर आपकी छूट गीली नहीं हुई होगी तो मेरा वडा है की आगे से में आपको चुने भी नहीं आऊंगा.



और ये बोल में किचन से बहार निकल जाता हु और दरवाजे के एक तरफ खड़ा हो अंदर देखने लगता हु की बुआ क्या करती है और जैसा मेने सोचा था वैसे hi यहाँ अंदर बुआ मेरे जाने के बाद कुछ देर रुकने के बाद अपने हाथ को लेग्गिंग में दाल देती है, जहा उन्हें अपनी छूट की नमी का एहसास होता है और साथ hi ये एहसास होता है की वाकई उनकी छूट इस वक्त गीलेपन में डूबी हुई है. और बुआ के हाथ डालने के बाद hi उनके चेहरे के भाव बदल चुके थे जिससे मुझे ये समझने में देर नहीं लगी की मेने जो बात एक तुक्के में कही थी वो सही निकली, इसका मतलब अब वो दिन दूर नहीं जब बुआ का जवान जिस्म मेरे निचे होगा और में उसे लूट रहा होऊंगा.

और इसी बिच में दरवाजे से हैट दोबारा बुआ के सामने आजाता हु ये कहते हुए की.. "क्या हुआ बुआ जी, सही निकली न मेरी बात, इसका मतलब आज भी आप अपने इस भतीजे की हरकतों से छूट गीली कर रही हो जैसे बचपन में मजे लिया करती थी ः".

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र इतना बोल कर में हस्ते हुए किचन से बहार निकल आता हु और बुआ वैसे hi लेग्गिंग में हाथ डेल छूट मसलते कड़ी रह जाती है ये सोचते हुए की "आखिर ये सब हो क्या रहा है, और मैं इस तरह क्यों सनी के आगे कमजोर पद जाती हु और पिघलने लगती हु, और उसे कुछ करने कहने से रोक भी नहीं पति हु".
 
अपडेट-29


किचन से बुआ के हाव् भाव देखने के उपरांत वह से निकल वापस उप्पेर अपने रूम की तरफ आने लगा और बुआ भी अपनी लेग्गिंग के अंदर छूट की नमी से गीले हुए हाथ को बहार निकल अपने शरीर के इस अजीब और दिमाग की सोच से विपरीत बर्ताव पर विचार करते हुए हॉल में बैठी माँ और दीदी के पास आ कर बैठ जाती है.

में रूम में जा hi रहा था की तभी दिमाग में एक और तरकीब पनपने लग पड़ती है जिसे सोचते hi ने मुस्कुराते हुए अपने रूम की बजे बुआ के रूम की तरफ चल पड़ता हु. बुआ के रूम में घुसने के बाद में सीधा उसी कप्बोर्ड के पास पहुँचता हु जहा बुआ ने उस दिन अपबा कृत्रिम लुंड यानि डिलडो छुम वाइब्रेटर रखा था.

कप्बोर्ड खोलते hi कुछ कपड़ो को हटाने पर डिलडो का वो बॉक्स मेरे नजरो के सामने आ जाता है जिसे बिना की देर किये खोलते हुए उसमे से वो नलकी लुंड निकल कर अपनी जेब में रख देता हु और उस बॉक्स को वापस ठीक उसी तरह कपड़ो के बिच रख देता हु जैसे पहले रखा हुआ था.

डिलडो छुम वाइब्रेटर को जेब में लिए अब में वापस अपने कमरे में आजाता हु और उसे अपने गद्दे के निचे रख, मन hi मन ये सोच मुस्कुरा उठता हु की "वाह सनी क्या मस्त जाम किया गई तूने, अब देखते है की बुआ को जब ये हथियार नहीं मिलेगा तो किस तरह अपनी गीली छूट और जिस्म की गर्मी शांत करती हैं, क्युकी ये तो तय है की उनमे चुदाई की आग तो बुरी तरह से भभक रही है जिसका प्रमाण अभी किचन में उनके चेहरे के हाव् ब्याव से भोत hi साफ तरीके से पता चल चूका है ः, अब मैं भी देखता हु रागिनी बुआ जी कितने दिनों तक खुद को और अपने जिस्म की इस आग को रोक पति है ः."

दूसरी तरफ रश्मि आज फिर ऑफिस से पापा से लिफ्ट ले कर उसके घर ड्राप करने को बोलती है और पुरे रस्ते पापा भी अपनी कार में बैठी इस हसीं माल की जवानी का उसके अंगो को सहलाते हुए और मसलते हुए भरपूर मजा लेते हुए कुछ hi देर में रश्मि के घर के सामने पहुंच कर कार रोक देते हैं. वह पहुंच..

रश्मि: थैंक यू सर घर पर चोर्ने के लिए..

मानव, रश्मि की साड़ी के पल्लू में हाथ दाल चुके मसलते हुए: क्यों रैंड आज अंदर आने को नहीं कहेगी क्या..

रश्मि, चुकी पर लगे पापा के हाथो को पकड़ कर दबाव बना: िष्ठ्हह सर मेरा बास चले तो आज क्या रोज दिन रत आपको अपने घर में बुला कर चुदती राहु उफ्फ्फ,, पर आज पति घर पर hi है सर..

मानव, चुकी को जोर से भींच कर: अरे वाह ये तो और अछि बात है, क्यों न आज तुझे तेरे पति के सामने hi छोड़ कर उसे भी बता दू की उसकी बीवी कितनी बड़ी चुड़क्कड़ रैंड है ः.

रश्मि: उम्मम्मम ईशःठ सर हहै अगर ऐसा हो जाये तो मुझसे ज्यादा खुश कोण होगा, ितबे बड़े बिजनेसमैन की रैंड बनना भी किस्मत की बात है, पर ये प्रक्टिकली संभव कहा ह सर हहै.

मानव: ः चलो ठीक है आज जब दे रहा हु लेकिन कल ऑफिस में पूरा हिसाब कर लूंगा.

रश्मि, कुछ सोच कर हस्ते हुए: हहै सर, डोंट वोर्री आपसे ज्यादा मुझे इंतज़ार रहता है आपके निचे आ अपना ये जिस्म मसलवाने का, और इसीलिए ये वीकेंड मेरे कुछ खास सोच रखा है.

मानव: ाचा, ऐसा क्या सोचा है तूने रैंड...

रश्मि, अपना हाथ मानव के पंत से hi लुंड पर रख दबाते हुए: ममम सर एक्चुअली फ्राइडे मॉर्निंग से मेरे पति पांच दिन के लिए बहार जा रहे है सो में सोच रही की ये फ्राइडे और ये वीकेंड आपके साथ पूरा रान्दीपना करते हुए जवानी लुटा दू हहै.

मानव: अरे वह रैंड ये तो भोत अछि खबर बताई है तूने, फिर तो इस वीकेंड तुझे तेरे hi घर में रैंड बना कर नंगा नाच करवाते हुए पेलुँगा मैं ः.

रश्मि: ईशःठ सर में भी तो यही चाहती हु, बस अब फ्राइडे तक इंतज़ार करना है.. और फिलहाल अब मुझे जाना होगा ब्बये सर..

और ये बोल रश्मि कार के अंदर hi अपने बॉस के होठो को चुम बहार निकल जाती है और पापा भी कार स्टार्ट कर वह से निकल पड़ते हैं. अपनी नजरो से दूर जाती पापा की कार को देखते हुए रश्मि मन hi मन सोचने लगती है

"मर मानव खन्ना शहर का एक बड़ा नाम, भोत शोक है न तुम्हे मेरी और मुझ जैसी औरतो को अपने निचे लिटाने का, अपनी रैंड बना उनकी जवानी लूटने का न, बस अब तुम्हारा यही शोक तुम पर भरी पड़ने वाला है और औरतो की जवानी लूटने के शौकीन इंसान अब जल्द hi तुम्हारा भोत कुछ लूटने वाला है और तुम छह कर भी कुछ नहीं कर पाओगे . आखिर अब वो वक्त आ hi गया जिस वक्त का में इतने समय से इंतज़ार कर रही थी और ये वीकेंड वाकई में तुम्हारे लिए एक यादगार वीकेंड बनने वाला है, आखिर अब वो समय आ hi गया जब मेरा मकसद पूरा होने वाला है hehe".Or यही सोच रश्मि अपने घर में घुस जाती है.

कुछ देर माँ और सीमा दीदी के साथ बैठने के बाद बुआ भी उप्पेर अपने रूम में आ चुकी थी और दूसरी तरफ कामिनी भाभी जो कॉलेज से लौटने के बाद आराम कर रही थी वो भी जग चुकी थी और तभी उन्हें बुआ और राहुल भैया के बिच टेरेस पर हुई वो सभी बाटे वापस यद् आजाती है और अभी बुआ से इस बारे में बात करने का मन बनाते हुए वो उठ कर सीधा बुआ के कमरे की तरफ चल पड़ती है, जहा बुआ अब तक मेरे साथ हुई बातो की सोच से बहार नहीं निकल पाई थी और वही सब यद् करते हुए बीएड पर बैठी हुई थी.

कामिनी, दरवाजे पर पहुंच: बुआ जी अगर आप फ्री हैं तो क्या में अंदर आ सकती हु.

रागिनी, दूर की तरफ देख: अरे रागिनी तुम, आओ न वह क्यों कड़ी हो.

कामिनी, अंदर आ कर बीएड पर बैठ: क्या बात है बुआ जी आज आप ऑफिस से जल्दी लौट आई

रागिनी: बस बहु आज ज्यादा काम नहीं था तो चली आई, वैसे तुम कहो कोई जरुरी बात करनी है क्या, क्युकी ऐसे तो तुम मेरे रूम में आती नहीं हो हहै.

कामिनी, ये सोचते हुए की बात शुरू कैसे करनी: हहै बुआ जी, हाँ बात तो थोड़ी जरुरी hi है, पर आप बुरा नहीं मनो तो पुछु.

रागिनी: जब पूछने का सोच लिया है तो पूछ डालो कामिनी.

कामिनी, सब जानते हुए अनजान बन कर: वो बुआ जी पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगा की ऑफिसियल ट्रिप से आने के बाद राहुल कुछ बदले बदले से लग रहे है, वह कुछ हुआ था क्या..

रागिनी, राहुल का नाम सुनते hi दोबारा मुँह बनाते हुए: ये बात तुम अपने पति से hi क्यों नहीं पूछती की ऐसे बदला हुआ क्यों है, अब में कैसे बता सकती हु इसका जवाब.

कामिनी: उनसे मेने पूछने की कोशिश की थी पर उन्होंने कुछ न होने का बता बात को ताल दिता.

रागिनी: तो जब उसने कहा की कुछ नहीं हुआ तो मुझसे क्यों पूछ रही हो तुम.

कामिनी : वो इसलिए क्युकी ट्रिप से आने के बाद मेने आपमें और राहुल में भी एक दूसरे के प्रति बात करने के तरीके में बदलाव देखे है और ये भी नोटिस किया की आप उन्हें सही से न कोई बात कहने देती हैं न उनकी कोई बात सुनती हैं, बस इसलिए पूछ रही की ऐसा क्या हुआ ट्रिप पर कययकी उसके पहले सब सही था.

रागिनी, बात को टालते हुए: नहीं कामिनी ऐसा कुछ भी नहीं है हमारे बिच सब ठीक चल रहा है.

कामिनी, सीधा अब पॉइंट पर आते हुए: बुआ जी ये बात आप भी अचे से जानती हो और मैं भी की आप झूट बोल रही हैं, मुझे सच जानना है आपसे और आज मैं वो जान कर hi यहाँ से जाउंगी.

रागिनी: लेकिन कामिनी सच यही है की हमारे बिच कुछ भी नहीं हुआ है, तू तो जानती है न मेरे मूड को, हो सकता है कभी काम के दबाव में मेने राहुल से बेरुखी से बात कर ली हो.

कामिनी : अच्छा ठीक है मान लेती हु की आप सब सच कह रही हो, लेकिन फिर उन बातो का क्या जो मेने कल आपको और राहुल को टेरेस पर करते हुए सुना.

रागिनी, हैरान नज़रो से कामिनी को देखते हुए: क्या... क्या सुना तुमने ऐसा हमारी बातों में.

कामिनी, बुआ की आँखों में आंखे दाल: देखिये बुआ जी मेने काफी कुछ सुना उस वक्त और तब से hi मेने सोच लिया था की में अब पूरी बात जान कर hi रहूंगी और एक औरत होने के नाते में चाहती हु की आप मुझे मेरे पति की साडी हरकतों के बारे में विस्तार से बताये.

Ragini,ab दबे हुए स्वर में : क्या बताऊ बहु तुझे अब, तूने सब कुछ सुन तो लिया है फिर भी अब मुझसे क्या जानना चाहती हो.

कामिनी: में आपके मुँह से सीधा सच जानना चाहती हु बुआ जी क्युकी मुझे इस बात पर यकीं करने में दिक्कत हो रही है की मेरे पति ने अपनी hi बुआ के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की..

रागिनी, अब खुद को कठोर बनाते हुए और राहुल के प्रति अपना गुस्सा उसकी बीवी के आगे निकलते हुए: अगर यकीं नहीं है तो यकीं कर लो कामिनी और हाँ सच यही है की वह पहुंचने पर जब हमें प्रोजेक्ट मिल गया तो राहुल के सेलिब्रेट करने का कहा और इसी वजह से हम एक पब में गए कुछ ड्रिंक्स ली साथ में, फिर उसने मुझे डांस के लिए फाॅर्स किया.

कामिनी, एक तक्क साडी बात सुनते हुए: ok फिर आगे क्या हुआ बुआ जी.

रागिनी: डांस करते वक्त भी उसने मेरे अंगो को चुना चाहा पर मुझे लगा की भीड़ में गलती से हुआ होगा इसलिए में फ्लोर से उतर गयी और कुछ देर रुकने के बाद हम वापस होटल आ गए थे जहा होटल रूम में राहुल ने जबरदस्ती मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे नितम्बो को और मेरी चुचिओ को जोर जोर से भीचना शुरू कर दिया और बस एक hi बात बार बार बोले जा रहा था की वो मुझे हर हाल में पाना चाहता है.

कामिनी, बुआ के मुँह से ये सब सुन अब हैरान होते हुए: ये आप क्या बोल रही हो बुआ जी, राहुल ने आपके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, वो ऐसा कैसे कर सकते है मुझे तो यकीं नहीं हो रहा है.

रागिनी: अब जब बात खुली है तो ये भी जान लो की वो तो भोत पहले से इस मौके की तलाश में था, उसने बताया की वो भोत पहले से मुझे पाना चाहता है और मुझसे जिस्मानी सम्बन्ध बनाना चाहता है और इस बार ट्रिप पर उसने ये काम करने का ये तरीका अपना भी लिया था.

कामिनी, अंदर से पति के लिए गुस्सा होने के बावजूद बुआ से नजरे चुरा कर: बुआ जी मुझे समझ नहीं आ रहा में क्या कहु, एक औरत क लिए अपनी इज्जत क्या मायने रखती है ये में भोत अचे से समझती हु और यहाँ तो मेरे अपने पति ने अपनी hi बुआ पर जबरदस्ती हाथ डालने की कोशिश की है.. चींईईई.. मुझे विश्वास नहीं हो रहा की में ऐसे इंसान की पत्नी हु.

रागिनी: अरे तू क्यों इतना गिल्ट फील कर रही है तेरी क्या गलती है इसमें और रही बात राहुल की तो उसे इसकी सजा मिल चुकी है और में इतनी आसानी से उसे माफ़ नहीं करने वाली और यही कारन है की अब राहुल और मेरे बिच ये तकरार है जो शायद hi ख़तम होगी.

कामिनी: बुआ जी भले hi वो मेरे पति है पर फिर भी में आपसे यही कहूँगी की मी आपसे इस फैसले में आपके साथ हु, इस गलती की कोई माफ़ी नहीं है, अगर एक औरत की मर्जी के खिलाफ उसे कोई हाथ भी लगाए तो ये गुनाह है.

रागिनी: हम्म पर कामिनी जो भी है वीके हमारे परिवार का सदस्य है इसलिए में इस बात को ज्यादा नहीं उछलना चाहती हु और तुमसे भी यही कहना चाहूंगी की ये बात ज्यादा आग न पकडे तो ठीक है.

कामिनी: में समझ सकती हु बुआ जी और आप निश्चिन्त रहिये में ऐसा कुछ गलत नहीं करुँगी, क्युकी किसी एक शख्स जो घर का बड़ा बीटा है उसकी वजह से में हमारे परिवार का नाम बदनाम नहीं होने दे सकती. और साथ hi बुआ जी मुझे पता है की इस गलती की माफ़ी नहीं है पर राहुल की पत्नी होने के नाते में उनके इस गुनाह की आपसे माफ़ी मांगती हु, क्युकी में अचे से जानती हु की उनकी इस हरकत ने आपके स्वाभिमान को कितनी ठेस पहुंचे होगी.

रागिनी: हम्म्म तू माफ़ी मत मांग बहु इसकी कोई जरुरत नहीं और हाँ मुझे ाचा लगा की इस परिवार को इतनी समझदार बहु मिली है जो सही और गलत का इतना अचे से ज्ञान रखती है.

कामिनी: सब आपका आशीर्वाद है बस बुआ जी, ाचा अब में चलती हु मुझे थोड़ा काम है.

और ये बोल भाभी बुआ के रूम से निकल वापस अपने रूम में आजाती है और आज उन्हें अपने पति यानि राहुल भैया पर भोत गुस्सा आ रहा था की वो ऐसी ओछी हरकत भी कर सकते है में कभी सोच भी नहीं सकती थी....

रत को डिनर के समय एक बार फिर पूरा परिवार टेबल पर एक साथ बैठ खाना खा रहा होता है लेकिन मेरा एक हाथ जहा खाना खाने के उपयोग में आ रहा था वही दूसरा हाथ किसी और काम के उपयोग में आ रहा था.

दरअसल डिनर के लिए बैठते वक्त आज में बुआ के पास वाली कुर्सी पर बैठ गया था और तभी से खाना कहते हुए अपने एक हाथ को उनकी जांघो पर रख सहलाना शुरू कर दिया था जिसे बुआ अपने हाथ से बार बार हटते हुए मुझे गुस्से भरी नजरो से घर रही थी. और शुरू में तो मुझे दर भी था की कही बुआ बिलख न जाये लेकिन मेरी सोच के विपरीत बुआ ने ऐसा कुछ नहीं किया और बस गुस्से से मुझे घूरते हुए मेरे हाथो को हटा रही थी.

यहाँ मेरे दिमाग में एक और बात थी की ऊपर से चाहे बुआ कुछ भी कहे लेकिन अंदर से उनका जिस्म भी जल रहा है और यही कारन था की शाम को किचन में उनकी छूट गीली हो चुकी थी, और इसी बात का फायदा उठाते हुए अब मेने अपने हाथ को उनके कुर्ते के निचे दाल उनकी टैंगो को एक दूसरे से दूर कर, छूट के उप्पेर रख जोर से दबा दिया.

मेरी इस हरकत पर बुआ सिहाररर सी गई और मेरे हाथ पर एक जोरदार चिमटी काट ते हुए आँखों को पूरी तरह बड़ी कर घर रही थी मनो कह रही हो की कमीने ये क्या कर रहा है रुक जाए..

लेकिन बुआ के इस तरह मुझे देखने से मुझे और मजा आनेलगा और अब हर थोड़ी थोड़ी देर में अपने हाथ को उनकी टैंगो के बिच घुसा कर छूट को रगड़ने लगा था.

शायद अब बुआ से भी मेरी ये हरकते बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसी वजह से सबसे पहले उठ कर अपने कमरे में चली जाती है और में उन्हें जाता देख ये समझ चूका था की उनकी छूट ने रास बहाना शुरू कर दिया है और उसी की गर्मी अब उन्हें यहाँ बैठने नहीं दे रही थी.

साथ hi मन में ये भी बात पता थी की रूम में जा कर बुआ पक्का अपनी छूट की गर्मी बुझाने के लिए उस डिलडो का उपयोग करना चाहेगी लेकिन बुआ जी वो डिलडो तो आज उस बॉक्स में है hi नहीं ः, अब देखता हु कैसे शांत होती है आपकी छूट की आग....

डिनर के बाद में अपने रूम में आकर प्राची ma'am से बात करने का मन बनाते हुए उन्हें वीडियो कॉल लगा देता हु. और मां द्वारा कॉल रिसीव होने के अगले कुछ मिनट्स में hi वह प्राची ma'am पूरी तरह से नंगी हो चुकी होती है और यहाँ मेरा भी लुंड मेरे हाथ में होता है.

नंगी होने के बाद मेरी बातो से गरम होते हुए जहा प्राची ma'am अपनी छूट रगड़ने में मस्त होती है वही में अपना लुंड सहलाने में.. और इसी तरह हमारी बाटे चलती रहती है वही दूसरी तरफ...

भैया के रूम में आज एक अलग hi माहौल बना हुआ था जहा भाभी भोत hi गुस्से में और बिगड़े हुए मूड में थी और आज बुआ से बात करने के बाद से hi वो भैया के घर आने का इंतज़ार कर रही थी..

कामिनी, उखड़े हुए स्वर में: राहुल सुनिए मुझे आपसे कुछ जानना है और में उम्मीद करती हु की आप सच सच बताएँगे.

राहुल: हाँ डार्लिंग पूछो न क्या जानना चाहती हो.

कामिनी, सीधा अपनी बात रखते हुए: ऑफिसियल ट्रिप पर आपके और बुआ के बिच क्या हुआ था एंड हाँ प्लस ये मत कहना की कुछ भी नहीं हुआ था क्युकी ये झूट में भोत बार सुन चुकी हु अब मुझे सच जानना है.

राहुल, बीवी के मुँह से इतने सीधे तरीके सेइस सवाल को सुन जैसे गांड फट गयी हो: क्ययय..... किया.. मतलब कामिनी तुम्हारा, मेरे और बुआ के बिच क्या हुआ है कुछ भी तो नै.

कामिनी, अब अपना गुस्सा नहीं रोक पति है और भड़कते हुए: अच्छा कुछ नहीं हुआ राहुल?? क्या वह आपने बुआ से जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाने की कोशिश नहीं की? क्या आपने बुआ की चूतड़ और चूचिया नहीं मसली और उनको नहीं दबोचा? क्या आपने बुआ से ये नहीं कहा की आप उनकी गांड मरना चाहते है और चाहे उनकी मर्जी न भी हो तो जबरन आज तो मार के रहूँगा'??

राहुल, कामिनी के मुँह से ये सब बाटे सुन कर अब सिटी पित्ती गुल हो चुकी थी: ये सब क्या बकवास कर रही हो तुम कामिनी, तुम्हे पता भी है तुम मेरी और बुआ के बारे में बात कर रही हो.

कामिनी: हाँ एक्साक्ट्ली में आपके और बुआ जी की hi बात कर रही हु और ये साडी बाटे मेने खुद कल आपको बुआ से करते हुए सुना था टेरेस पर (यहाँ कामिनी ये नहीं बताती है की ये साडी बाटे बुआ ने विस्तार से उसे बताई है)... अब बाटे घूमना बंद करो और मुझे ये बताओ की ये सब सच है न राहुल?

राहुल, ये जानते हुए की अब कोई बहाना बनाने का कोई फायदा नहीं, अपनी नजरे झुका: कामिनी में सब कुछ समझा सकता हु अचे से दो मिनिट मेरी बात तो सुन लो.

कामिनी: ओह तो इसका मतलब ये सब सच है हैं न... (भड़कते हुए) और अब तो कुछ सुनने सुनाने को बचा hi क्या है.

राहुल: प्लस यार मेरी बात तो सुन लो एक बार, में नशे में था उस रत और तुमसे भी दूर था तो हो गई गलती में क्या करू.

कामिनी, भड़कते हुए: गलती???? लिखे सीरियसली राहुल... ये गलती नहीं गुनाह है.. आपने एक औरत की इज्जत पर उसकी मर्जी के खिलाफ हाथ डाला है और हैरानी की बात तो ये है की वो औरत रिश्ते में आपकी अपनी सगी बुआ है.. आपने एक बार भी नहीं सोचा ये सब..

राहुल, अब मुँह लटकाये हुए सफाई देने की कोशिश करते हुए: यार कामिनी मेने कहा न में अँधा हो चूका था पूरी तरह और उस वक्त कुछ भी नहीं सुझा था और तुम भी नहीं थी न साथ में..

कामिनी: में साथ में नहीं थी इसका मतलब तुम किसी भी औरत को ऐसे जबरन दबोच लोगे क्या राहुल...

राहुल: नहीं यार मेरा वो मतलब नहीं है अब तुम्हे में कैसे समझौ... और वैसे भी इस बात की सजा मुझे बुआ उस रत से hi देती आ रही है, तब उन्होंने थप्पड़ लगा कर मुझे गलती का एहसास दिलाया और उसके बाद आज तक वो सीधे मुँह बात नहीं कर रही है, कल जब तुमने ये सब टेरेस पर सुना तो ये नहीं सुना क्या की में किस तरह उन्हें मानाने की कोशिश कर रहा हु.

कामिनी: राहुल, तुमने एक औरत की इज्जत पर हाथ डाला है वो भी उसकी मर्जी के खिलाफ,, और एक औरत के लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं होता है और तुम उनसे ये एक्सपेक्ट करते हो की तुम्हे माफ़ करदे, ु क्नोव व्हाट में तो खुद उनके फैसले का समर्थन करती हु, ऐसा गुनाह करने वाले इंसान को तो कभी माफ़ी नहीं मिलनी चाहिए...

राहुल: यार अब कामिनी तुम तो ऐसा मत बोलो..

कामिनी: क्यों न बोलू राहुल बताइये आप hi... क्या आपको मंजूर होगा की कोई मर्द मुझे या आपकी माँ या सीमा दीदी को hi जबरदस्ती ऐसे बाडोछे और मेरी गांड मरने की बाटे kare,,khair मुझे तो अब ये भी नहीं पता की आपको इन सब से भी कुछ फरक पड़ेगा या नहीं.. जो इंसान अपनी बुआ के साथ ये सब कर सकता है उसके लिए कुछ भी संभव है.

राहुल: क्या बकवास कर रही हो तुम ये, में जान लैलूंगा उसकी अगर कोई तुम्हारे साथ ऐसा करने की सोचे भी तो..

कामिनी: ाचा तो फिर शुक्र मानव की बुआ ने आपको थप्पड़ hi लगाए है जान नहीं ली,, और वापस लौटने में बाद मुझे रैंड बोलना, इतनी बेरहमी से छोड़ना ये सब भी बुआ के प्रति आपका गुस्सा था है न.. और में पगली ये सोच बैठी की शायद मेरे पति को ये समझ आ गया है की कभी कभी मुझे इस तरह का वाइल्ड सेक्स पसंद है..

राहुल: नहीं कामिनी उस रात मेने किसी का कोई गुस्सा नहीं निकला मेने सच में तुम्हे hi वो मजा देने के लिए किया था.

कामिनी: बस अब और झूट नहीं राहुल, और हाँ आपको पता है एक बार को अगर मुझे ये पता चलता न की आपके और बुआ के बिच में शारीरक सम्बन्ध है जो आप दोनों की आपसी सहमति से बने है तो शायद मुझे इतना गुस्सा नहीं आता और बुरा नहीं लगता जितना आज ये जान कर लगा है की मेरे पति ने जबरदस्ती अपनी बुआ को पाने की कोशिश की है... मुझे ऐसा लग रहा है आज की में आपको कभी खुश नहीं रख पाई शायद इसलिए आपको ये करने की नौबत आई...

राहुल: प्लस कामिनी अब ऐसी बाटे तो मत करो और तुमने हर वक्त मुझे खुश किया है, प्लस अपने आप को दोष मत दो और में वडा करता हु तुमसे की इस बात का प्रायश्चित करूँगा और अपनी गलती सुधरने की पूरी कोशिश करूंगा.

कामिनी: मुझे आपके किसी वेड की जरुरत नहीं है राहुल, और मुझे अब आपसे किसी भी तरह की कोई बात नहीं सुन्नी है, काम से काम इस वक्त तो नहीं और हाँ आप बुआ जी से भी ये बात डिसकस नहीं करेंगे की में इस सब में बारे में जान चुकी हु.

राहुल: यार कामिनी प्लस अब ऐसे तो मत कहो, आईएम सॉरी न...

कामिनी: बस्स्स राहुल.. मुझे अब और कुछ नहीं सुन्ना है और में आपको शायद तब माफ़ कर दूंगी जब बुआ जी आपको माफ़ कर दे, उससे पहले मुझसे भी कोई उम्मीद मत रखना.. में ऐसे हवसी और भूके इंसान के साथ नहीं रह सकती जो अपनी बुआ तक को नहीं बक्शे...

राहुल: ठीक है अब तुम्हारा यही फैसलाहै तो यही सही, में बुआ से भोत जल्द माफ़ी ले कर रहूँगा. पर तुम मेरे साथ नहीं रह सकती ये तो मत बोलो प्लस और वैसे भी घर में बाकि लोगो को ये बात पता चली तो भोत बड़ा हंगामा हो जायेगा.

कामिनी: मुझे पता है ये सब और डोंट वोर्री में किसी को कुछ नहीं कहूँगी पर हाँ आज तो में आपके साथ इस कमरे में नहीं रहना चाहती हु, भोत बुरी तरह दिल दुखाया है आपने मेरा.. इसलिए में किसी और के रूम में जा कर सो जाउंगी... गुड नाईट राहुल..

और ये बोल भाभी अपने कमरे से बहार निकल जाती है और भैया उनको जाते हुए देखने के अलावा कुछ नहीं कर पते है और भाभी के जाने के बाद रूम बंद कर बीएड पर बैठ अपने किये काण्ड के बारे में सोचने लगते है.

में अपने कमरे में वीडियो कॉल के थ्रू प्राची ma'am से चुदाई की हसीं मज़ेदार बाटे करने में मशगूल था. और हम दोनों hi अब अछि तरह से गरम हो चुके थे..

में, लुंड सहलाते हुए: उम्म्म्म ma'am तो इसका मतलब आपका पति महीने में सिर्फ तीन से चार बार छूट पेलता है ः..

Ma'am, छूट में ऊँगली करते हुए: ईशःठ अह्ह्ह है सनी और इसी लिए तो तुमसे मिलने के बाद मेरे जिस्म को आग और भड़क गयी और उस दिन फाइनली तुमसे छुड़वा hi ली हहै.

में: हनममम वैसे ma'am क्या कासी हुई छूट है आपकी मजा आ गया था पेलने में भोत ः, अभी भी ये लुंड आपकी छूट में पेल देता पास होती तो.

Ma'am : श अह्हह्ह्ह्ह अब तो मेरी छूट भी गीली हो जाती है जब बी तुम्हे कॉलेज में देखती हु हहै, दाल दो फिर से घर पारर आ कर मेरी छूट में अपना ये मुशल सनी मममम अह्ह्ह.

में: अच्छाआ वैसे गर्लफ्रेंड बन कर hi चुदवाती रहना चाहोगी या कुछ और भी बनना चाहोगी..

Ma'am : मममम अहह अब तो तुम जो चाहो बना कर छोड़ सकते हो हहै... वैसे क्या बना कर छोड़ना चाहते हो अब तुम मुझे.

में, लुंड को जोर से दबाते हुए: अब में इस हसीं खूबसूरत जिस्म की मालकिन प्राची को मेरी गर्लफ्रेंड के साथ अपनी रैंड और रखेल बनाना चाहता हु बोलो बनोगी क्या..

Ma'am, रैंड और रखेल बनने की बात सुन बुरी तरह गरमाते हुए छूट जोर जोर से छोड़ते हुए: अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह ईशःठ सनी ममममम क्या कह रहे हो.. हाँ बन जाउंगी तुम्हारी रैंड और रखेल भी अब तो हहै ममममम प्यार करती हु तुमसे और एक प्रेमिका अपने प्रेमी के लिए रैंड बनना भी पसंद करेगी अह्हह्ह्ह्ह.

में: हईये मेरी प्राची रैंड फिर कल से रैंड बन कर आना मेरे सामने कॉलेज में, ब्रा पंतय पहनना चोर दे और जब मिलेगी तब ऐसे hi तेरी छूट और गांड मरूंगा जैसे की एक बाज़ारू रैंड की मरते है.

Ma'am, पूरी गति से छूट छोड़ते हुए अपने चरम पर पहुंच: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ सनी अह्ह्ह्ह हैं छोड़ लेना अपनी रैंड को अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह में मममममम िष्ठ झड़ने वाली हु में अहब्ब.

में, अभी मेरा झड़ने का कोई इरादा नहीं था, क्युकी ma'am से हो रही बातो को और लम्बी चलने का इरादा था: अह्ह्ह तो झाड़ न नेरी रंडी दिखा मुझे भी अपनी छूट का बेहटा हुआ रास...

और मेरी ये बात सुनते hi प्राची ma'am कनेरा के सामने अपनी टंगे फैलाये ऊँगली करते हुए और कमर झटकते हुए झड़ने लगती है अह्ह्ह्ह उम्मम्मम ओह्ह्ह्हह सनी ी लव ु ममममम अह्ह्ह्हह.

और इससे पहले की में आगे कुछ कह पता मेरे रूम का दरवाजा नॉक होता है, मन में चिढ़ते हुए ये कहते हुए की "इस वक्त कौन आया होगा" में वही बीएड से आवाज लगा के की... कौन है..

सामने से कामिनी भाभी की आवाज आती है की "मैं हु सनी दरवाजा खोलो". कामिनी भाभी की आवाज सुन पहले से hi अकड़ा हुआ पूरी औकाद में आये मेरे लुंड ने एक और झटका दे दिया की " इस वक्त भाभी यहाँ... लगता है आज देवर के लुंड की यद् आ गई है ः, चल बीटा सनी वैसे भी ma'am झाड़ गयी है अब आगे का मजा अपनी रैंड बानी भाभी से लेलेते है " और इसी सोच के साथ में प्राची ma'am से bye बोल कर फ़ोन डिसकनेक्ट कर देता हु और लुंड वापस लोअर में दाल दरवाजा खोलने चला जाता हु.

दरवाजा खोलते hi सामने एक पतले से नाईट गाउन में भाभी कड़ी थी जिसमे इस वक्त उनकी चूचिया नाम मात्रा की छिपी हुई थी...

में, उन्हें देख मुस्कुराते हुए लोअर के उप्पेर से लुंड सहलाते हुए: क्या बात है भाभी जी आज राहुल भैया की बजे अपने देवर जी के बिस्तर में आने का विचार बना लिया क्या ः.



जवाब देने से पहले भाभी सीधा कमरे के अंदर आजाती है और दरवाजा अंदर बंद कर मेरे सामने कुछ देर चुप चाप खड़े रहने के बाद कस्सस के मेरे आलिंगन में आ कर चिपक सी जाती है और सुबकने लगती है....
 
अपडेट-30


भाभी के इस तरह मुझे मजबूती से लिपटने और सुबकने की आवाज से मुझे ये तो समझ आजाता है की कुछ तो हुआ है चूँकि आज से पहले मेने हमेशा मस्त रहने वाली और हस्ती हसती भाभी को इस तरह रुआँसी सी कभी नहीं देखा था, और इसी लिए अब में ऐसे hi अपनी बहो में लिए भाभी को बिस्तर पर ला कर बैठा देता हु और में भी उनके पास बैठ....

में: भाभी, क्या हुआ आपको और इस तरह इतनी उदास हो रो क्यों रही हो.

भाभी, मेरी तरफ नजरे उठा कर देखती है जहा उनकी आँखों में पानी तो था hi साथ hi भैया क प्रति गुस्से से आंखे लाल हुई पड़ी थी: सनी, क्या बताऊ तुम्हे अब मैं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है.

में, भाभी को सँभालते हुए: जो भी है शांति से साफ साफ बताओ... क्या भैया ने आपको कुछ कहा, उनसे झगड़ा हुआ क्या..

भाभी: वो क्या झगड़ा करेंगे सनी, उल्टा में उनसे झगड़ कर यहाँ तुम्हारे पास आई हु और अब उस कमरे में कभी वापस नहीं जाना चाहती हु.

में, बात की गंभीरता समझते हुए: लेकिन भाभी ये तो बताओ की आखिर हुआ क्या है..

भाभी: क्या बताऊ सनी, आज मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा है. मुझे ऐसा लग रहा है की में दुनिया की सबसे बुरी औरत हु जो अपने पति को कैसे खुश रखना है वो भी नहीं जानती या ये कह लो की शायद आज तक मेरा ये जिस्म मेरे पति को मेरी तरफ मोहित hi नहीं कर पाया.

में: ये क्या बकवास कर रही हो आप, शायद hi कोई ऐसा मर्द हो जो आपकी सुंदरता को देख मोहित न होये और आपको पाने की लालसा न रखे.

भाभी: अगर ऐसा है सनी तो फिर राहुल ने किसी दूसरी औरत से जबरदस्ती करने की कोशिश क्यों की, क्यों उस औरत को उसकी मर्जी के खिलाफ दबोचा और जिस्मानी सम्बन्ध बनाने चाहे.

भाभी की बात सुन अब हैरान होने की बरी मेरी थी और मुझे भाभी के शब्दों पर यकीं नहीं हो रहा था को राहुल भैया ने ऐसी कोई हरकत की होगी.

में: भाभी आप ये क्या बोल रही हो, राहुल भैया ने... नहीं मुझे यकीं नहीं हो रहा, ढंग से बताओ आप क्या बताना छह रही हो.

और मेरे ये बोलने पर भाभी मुझे भैया और बुआ के बिच हुए काण्ड की पूरी जानकारी विस्तार से देती है जिसे सुन मुझे तो जैसे सांप hi सूंघ गया हो, मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की मेरा बड़ा भाई बुआ के साथ hi जबरदस्ती करने की हिम्मत जूता लिया.

में: भाभी आप ये क्या बोल रही हो मुझे तो अब भी यकीं नहीं हो रहा की राहुल भैया ने ऐसा किया है.

भाभी: यकीं मुज्जे भी नहीं हुआ था फिर मेने बुआ से सच पूछा और उन्होंने खुद ये बात मुझसे कही.

में अब मन hi मन अपने भाई की बुआ के प्रति हवस और ठरक पर है भी रहा था की, क्या चुतियापा कर दिया भाई आपने ः, हाथ डाला तो वो भी उस औरत पर जो हाथ आणि सबसे मुश्किल थी, और ऐसे सीधा जबरन कोण दबोचता है किसी औरत को ः, थोड़ा तो सब्र से काम लिया होता, बुआ तो हाथ आई नहीं अब बीवी भी कमरा चोर आई.

में: भाभी अगर ये बात सच है तो भोत hi गलत है, अपनी hi बुआ को इस तरह जबरदस्ती से हथियाने की कोशिश, में तो सोच भी नहीं सकता ऐसा कुछ, और इतनी सेक्सी बीवी होते हुए भैया को ये करने की जरुरत पड़ी क्यों.

भाभी: ये सब मुझे नहीं पता, में तो बस इतना जानती हु की में राहुल को आसानी से माफ़ नहीं कर सकती. एक औरत होने के नाते में ये कटाई बर्दाश्त नहीं कर सकती की मेरा hi पति ऐसी छिछोरी हरकत करे.

में, ये सोचते हुए की जो हुआ सो हुआ, बुआ ने भाई को धो भी दिया है ः : भाभी लेकिन अब नाराज़गी का क्या फायदा और वैसे भी बुआ ने उन्हें सजा भी दे दी है, आप और सजा मत दो उन्हें अब.

भाभी, मेरी तरफ देख: सनी ये तुम कह भी कैसे सकते हो, तुम नहीं समझोगे की एक पत्नी के लिए कितना मुश्किल है ये बात स्वीकार करना की उसका पति उसे चोर किसी दूसरी औरत को इस तरीके से पाना चाहता है.

में: अगर ये बात है तो इस हिसाब से तो आपका और मेरा सम्बन्ध भी गलत हुआ न, आप भी तो किसी की पत्नी होते हुए मुझसे चुदवाती आई हो.

भाभी: हाँ कह सकते हो और शायद राहुल की नजर में ये भी गुनाह होगा लेकिन तुमसे छुड़वाने में मेरी मर्जी भी शामिल है तुमने कोई जबरदस्ती नहीं की है मुझ पर और मेने खुद अपनी मर्जी से अपना ये जिस्म तुम्हे सौपा है.

में: ाचा तो आप ये कहना चाहती है की अगर भैया ने बुआ से जबरदस्ती न की होती और बुआ की मर्जी शामिल होती तो आपको उन दोनों के रिश्ते से कोई ऐतराज़ नहीं होता.

भाभी: एक पत्नी होने के नाते इस बात की जानकारी होने पर बुरा लग्न स्वाभाविक होता लेकिन चूँकि में खुद अपने देवर से इस तरह का सम्बन्ध बना चुकी हु तो राहुल से प्रश्न करने का हक्क खो बैठती.

में, भाभी की इस बात पर उनके गलो को चुम कर: मुआअह भाभी वाह क्या बात कही है आपने, पर में अभी आपसे यही कहना चाहूंगा की भले इस वक्त भैया गलत हो और आपकी नाराज़गी भी सही है पर आप भी इस बात को समझती हो की जब हवस सर पर चढ़ती है तो कुछ नहीं सूझता है, और में चाहूंगा की इसीलिए जितना हो सके आपके, बुआ के और भैया के बिच सब सही हो जाये.

भाभी, थोड़ा मूड सही करते हुए और दिमाग शांत कर: हम्म्म इतनी जल्दी में उन्हें माफ़ नहीं कर सकती वार्ना उन्हें अपनी गलती का एहसास hi नहीं होगा, शायद अगर उनका तरीका गलत नहीं होता तो में उन्हें माफ़ कर भी देती पर अब जब तक बुआ उन्हें माफ़ नहीं करेंगी में भी नहीं करुँगी.

में, माहौल बदलते हुए: ः कोई बात नहीं भाभी जी तब तक आप अपने इस देवर के बिस्तर की रौनक बढ़ती रहना हाहाहा.

भाभी, मजाक में गुस्सा करते हुए: हाय राम शर्म नहीं आती तुम्हे, यहाँ में अपने पति से इसी बात पर लड़ कर आई हु की उन्होंने दूसरी औरत से सम्बन्ध बनाने की कोशिश की और तुम मुझे वही करने को कह रहे हो.

में: हाहाहा भाभी वो राहुल भैया थे जो आपके गुस्से को सुन लिए क्युकी उनकी गलती भी थी, लेकिन यहाँ में आपके गुस्सा होने पर और बुरी तरह दबोच कर पेलुँगा जिससे सारा गुस्सा गायब हो जाये.

भाभी: ईशःठ सच में कितने कमीने हो तुम देवर जी, यहाँ भाई भाभी में लड़ाई हुई पड़ी है और तुम अपने मजे की सोच रहे हो.

में: हाँ तो लड़ कर भाभी भी तो इस छोड़ू देवर के पास hi आई है न, और अब तो आप भी ये जान गई हो की आपका पति भी आपको चोर किसी दूसरी औरत के लिए पागल है तो ऐसे में अपनी भाभी को खुश करना देवर का hi काम हुआ न.

और ये बोल अब मेने भाभी को धक्का दे बिस्तर पर लिटा उन पर चढ़ कर चूचिया मसल दी.

भाभी: उफ्फफ्फ्फ़ सनी ये बात जानने से पहले भी तो तुम hi अपनी भाभी को खुशिया दे रहे थे और मुझे भी तुमसे इस तरह अपने जिस्म का एक एक अंग मसलवाने में मजा मिलता है न.

में, भाभी के होठ चुम गाउन में से चुकी बहार निकल चूमते हुए: उम्म्मेह फिर भाभी क्यों भैया पैर इतना भड़क रही हो उन्हें भी कर लेने दो मजे ः.

भाभी, जिस्म के इस तरह मसलन से गर्माते हुए: िष्ठ्हह सनी अगर सही तरीके से और बुआ की मर्जी से राहुल कुछ करते है तो अब शायद मुझे कोई ऐतराज़ नहीं क्युकी में खुद अपने देवर का बिस्तर गर्माती आई हु और आगे भी तुम्हारे लुंड के निचे लेट इस तरह अपना जिस्म मसलवाना नहीं चोर्ने वाली हहै.

में, लुंड को छूट पर दबाब बना घिसये हुए और निप्पल दांतो में फसा काटते हुए: ाचा इतनी पसंद है भाभी को देवर से चुदाई करवानी की अपने पति का बाहरी सम्बन्ध भी मंजूर क्र लेगी.

भाभी: िष्ठ्हहह पसंद है तभी तो खुस सामने से चल तुम्हारे पास आई और तुम्हारी रैंड बन कर रहने को भी तैयार हुई na,tumhare इस मुसल लुंड के लिए तो मुझे सब कुछ मंजूर है देवर जी ईशःठ बस आप मुझे ऐसे hi जिंदगी भर पेलते रहो हहै.

और भाभी की ये बात सुनने के बाद हमारे बिच चुदाई का एक और घमासान शुरू हो जाता है जो भाभी की छूट में झड़ने के बाद hi समाप्त होता है.

और झड़ने के बाद बिस्तर पर लेटते हुए अब मेरे मन में ये बात भी चल रही थी की बुआ ने राहुल भैया के इस हरकत पर उन्हें थप्पड़ो की बारिश में नहला दिया लेकिन में पिछले कुछ दिनों से उनसे इसी तरह मस्ती कर रहा और उन्होंने गुस्से का दिखावा किया बस... और आज तो मेने खुद नोटिस किया की वो भी मेरी हरकतों से गरमा रही थी.

कही इसका मतलब ये तो नहीं की बचपन में जिस तरह उन्होंने मुझसे अपनी जिस्म की आग बुझाने में मदद ली वैसे hi अब जवानी में भी कही न कही उनका मान यही चाहता हो और वो दिखावे के लिए मुझे रोक रही हो, और शायद भैया के उस तरह उन्हें जबरदस्ती करने से उन्होंने खुद को कही न कही कठोर बना कर रोके रखा हो.

खैर जो भी हो अब भले राहुल भैया ने जो किया हो अब आगे का काम तो मुझे hi करना है ः और चाहे भैया कितनी भी कोशिश कर ले, चाहे मेने भाभी से कहा हो की भैया और बुआ का रिश्ता बनना गलत नहीं लेकिन गलत तो तब होगा जब भैया को बुआ की छूट नसीब होगी, बीवी तो पहले से hi मेरी रैंड बन चुकी अब बुआ भी भोत जल्द मेरे साथ होगी. ः थैंक्स राहुल भैया जाने अनजाने hi सही आपने आज मेरी भोत मदद कर दी है... और इसी सोच के साथ में भी नींद की आगोश में चला जाता हु.

सुबह उठ कर जब मैं ब्रेकफास्ट के लिए पहुँचता हु तो आज भी बुआ के पास वाली चेयर पर जाकर बैठ जाता हु. जैसे hi मेरी नज़र बुआ की नज़र से टकराती तो बुआ तुरंत आंखे बड़ी करते हुए घूरने लगती है मनो कह रही हो की आज कोई हरकत मत करना, और उनके इस तरह मुझे देखते hi तुरंत में अपना हाथ साड़ी पहनी बुआ की जांघो पर रख देता हु...

में, चिढ़ाते हुए: क्या बात है बुआ, आज आप फ्रेश नहीं लग रही सुबह सुबह, जैसे मनो नींद पूरी न हुई हो.

ये बात मेने इस लिए कही थी क्युकी कल शाम से hi में बुआ को किश्तों में बार बार गरमाए जा रहा था जिसपर भले वो उप्पेर से दिखावे में कठोर दिख रही हो पर अंदर hi अंदर पिघलने लगी थी और पक्का अपने कमरे में जा कर छूट को उंगलिओ से शांत करने की कोशिश की होगी और हो सकता है उन्हें उस नकली लुंड की जरुरत पड़ी हो और वो उन्हें न मिला हो क्युकी वो तो मेरे पास था ः.. और इसी तड़प में रत भर नींद नहीं आई हो.

सीमा दीदी: हाँ सनी सही कहा तूने, मुझे भी कब से यही लग रहा है की आज बुआ कुछ थकी थकी लग रही जैसे रत भर सोइ न हो.

बुआ: नहीं सीमा ऐसी कोई बात नहीं बस वो आधी रत में नींद खुल गई थी उसके बाद वापस आंख नहीं लग पाई इसलिए..

में, बुआ की साड़ी में दिख रहे नंगे चिकने पेट पर हाथ रख और नाभि में ऊँगली दाल: हाँ दीदी हो सकता है बुआ की नींद उनको लगी प्यास ने तोड़ दी हो, हैं न बुआ.

मेरी बात का मतलब समझते हुए की में किस प्यास की बात कर रहा हु, और मेरे हाथो का इस तरह उनके पेट और नाभि पर चलना अब बुआ के लिए जिस्म में करंट लगने जैसा काम कर गया.

सीमा दीदी: हाँ सनी मेरे साथ भी होता है भोत सी बार की प्यास के मरे पानी पिने उठती हु फिर भोत देर तक नींद नहीं आती है हहै. वैसे बुआ आप कमरे में पानी तो रख के सोइ थी न.

बुआ, अब बात संभालते हुए: नहीं सीमा कल पानी रखना भूल गयी थी इसी कारन तो इतनी दिक्कत हुई.

में, दीदी ये पानी की प्यास नहीं बल्कि बुआ की जिस्म की प्यास है जो छूट से पानी बहा कर बुझेगी: ः दीदी, मेने तो कितनी बार बुआ से कहा है की अगर ऐसे आधी रत में प्यास लगे तो मेरे कमरे में आ मेरा पानी पि लिया करे, उनकी प्यास तुरंत बुझ जाएगी.

बुआ जो मेरे मुँह से मेरे पानी पिलाने की बात को अब समझते हुए मुझे गुस्से से देखने लगती है जिस पर में उनकी नाभि पर चिकोटी काट लेता हु और वो आह निकलते निकलते रुक जाती है.

सीमा दीदी: हाँ बुआ वैसे बात तो सही है आपका और सनी का कमरा है भी पास hi तो आपको चले जाना था उसके रूम में पानी पिने.

बुआ, उफ्फ्फ अब इसे कोण समझाए की उसका भाई किस पानी की बात कर रहा है और ये मुझे आज फिर क्यों सनी का मेरे जिस्म पर हाथ लगाना उत्तेजित कर रहा है, हे भगवन ये सब क्या हो रहा है, मुझे अब यहाँ से इसी वक्त चले जाना चाहिए..

बुआ: अरे क्यों उसकी नींद ख़राब करनी सीमा अब, आगे से में खुद यद् से पानी रख लुंगी और अब मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है मुझे चलना चाहिए.

और ये बोलते हुए बुआ चेयर से उठ आगे बढ़ने लगती है जिस पर में अपना हाथ उनके चूतड़ों पर हलके से घुमा थोड़ा दबाव बना दबा देता हु जिसका एहसास बुआ को भी हुआ था लेकिन बिना किसी प्रतिक्रिया के वो वह से चली जाती हैं और में भी अपने कॉलेज के लिए प्रस्थान कर लेता हु.

कॉलेज में एक दो क्लास अटेंड करने के बाद और कुछ देर कैंटीन में बैठ प्राची मां से प्यार और कुछ मस्ती भरी बाटे करने के बाद दोपहर के समय में वापस घर लौट जाता हु, जहा इस वक्त माँ और सीमा दीदी hi मौजूद होते है.

घर पहुंचने पर...

माँ: आज फिर तू कॉलेज से जल्दी भाग आया, जान सकती हु क्यों..

में: अरे माँ आज कोई खास लेक्टर्स नहीं थे और मेरा मन भी नई हुआ इसी वजह से कॉलेज में रुकने का...

माँ: बहाने बनवा लो तुझसे तो बस, मन होता कब है तेरा वैसे भी.

में, मस्का लगते हुए: हाँ माँ सही कहा ये बहाने hi है असल में तो मुझे आपकी भोत यद् आ रही थी इसलिए चला आया.

माँ, मेरी बात सुन हस्ते हुए: हेहेहे कुछ भी बोलता है तू सनी, आज अचानक मेरी इतनी यद् कहा से आ पड़ी और ने कौनसा विदेश से लौटी हु सालो बाद जो तू भगा चला आया, इतना भी बेवकूफ न समझ अपनी माँ को..

में: ः माँ तो क्या कहु आप सवाल hi इतने करती हो, अब में बच्चा नहीं रहा पहले जैसे की इतने सवालो के जवाब देने पड़े.

माँ: ओह्हो बड़े हो गए हो आप तो, चल अब बाटे बनाना चोर और हाथ मुँह धो ले फिर तेरे लिए खाना लगा देती हु.

में: हाँ माँ भूक तो भोत लगी है, बस पांच मिनट में आया मैं.

और ये बोल में अपने रूम में जा कर हाथ मुँह धो फ्रेश हो वापस निचे आजाता हु जहा माँ आलरेडी टेबल पर खाना लगा रही थी..

माँ जो हमेशा की तरह hi घर में एक सिंपल सी साड़ी पहनी हुई थी जिसके निचे एक झीना सा पतले कपडे का कैसा हुआ ब्लाउज था जिसकी स्लीव्स उनके कंधो से कुछ इंच तक नीची थी और बाकू की पूरी बहे नंगी दिखाई दे रही थी साथ hi पीछे से ब्लाउज के स्ट्राप भी ज्यादा चौड़े न हो कर दो हुक लगे उतने hi थे जिसके निचे ब्रा का स्ट्राप अचे से धक् जाये. और ब्लाउज इतना कैसा हुआ था की पीछे लगे हुक्स को भी मोठे मोठे चुचिओ की वजह से हो रहे खिचाव को झेलने में काफी दिक्कत हो रही थी और अब माँ के चूतड़ों के तो क्या hi कहने, दुनिया में मेरे लिए इससे हसीं नज़ारा कुछ और नहीं हो सकता है.

में, चेयर पर बैठते हुए: लाओ माँ जल्दी से खाना लगा दो अब भोत भूक लगी है.

माँ: हाँ तू बैठ जा खाना रेडी hi है.

में: माँ आप भी तो पास में बैठो न, हर वक्त पूरा परिवार साथ होता है आपके साथ ऐसे अकेले में प्यार भरी बाटे करते हुए बाटे करने का मौका hi कहा मिलता है ः.

माँ, पास वाली चेयर पर बैठते हुए: हहै ाचा बीटा, तो तेरे पास वक्त hi कहा है अपनी माँ के लिए पता नहीं दिन भर कहा इतना व्यस्त रहता है.

में: आप hi कहती हो न कॉलेज जाओ पढाई कर बस इसी सब में,,, और माँ मेने न कोई बहाना नहीं मारा था मुझे आज सच आपकी यद् आयी इसलिए चला आया कॉलेज से ः.

माँ: चलो ाचा किया फिर इसी बहाने मुझे भी अपने बेटे से बाटे करने का मौका तो मिला वार्ना दर्शन भी मिलने मुश्किल हो जाते ह तेरे हहै.

में, माँ के पतले से पल्लू के अंदर से ब्लाउज से निकलते क्लीवेज को देख और ब्लाउज के कसाव को देख: वैसे माँ आपसे एक बात पूछनी थी.

माँ: तो पूछ अब इसमें सोच क्या रहा.

में, माँ की आँखों में देख: माँ आप इतनी खूबसूरत क्यों हो, मेरा मतलब कैसे हो, आपको देख कोई कह hi नहीं सकता की आपके चार चार बच्चे है ः.

माँ, अपनी तारीफ से मन hi मन खुश होते हुए: तूने फिर बकवास शुरू कर दी अपनी, खाना खा जल्दी से अब.

में: अरे माँ बकवास नहीं सच कह रहा हु, आपको पता है अगर आप और सीमा दीदी कही साथ में जाओ तो बहने लगोगी, न की माँ और बेटी.

माँ, ये सोच की क्या में अब भी इतनी जवान लगती हु: चल अब इतनी भी हवा में बाटे मत कर समझा, कुछ भी बोलता है.

में: अरे माँ सच में, आपको पता है मेरी कॉलेज में आपकी hi आगे और आपकी आगे क्या आपसे काम आगे की भी टीचर्स है लेकिन कोई आप जितना फिट और मैनटैनेड नहीं है, कोई कुछ ज्यादा hi मोती है तो किसी में चर्बी भर गई है ः.

माँ: नालायक तू कॉलेज में पढ़ने जाता है या टीचर्स को देखने.

में: ः अरे माँ अब ये तो बस नज़र पड़ी उनपर इसलिए देखा वार्ना ऐसी टीचर्स को देखने में क्या hi मिलेगा मुझे जब मेरे अपने घर में इतनी खूबसूरत और आकर्षित माँ है मेरी.

माँ, मेरी बातो को वो भी मन hi मन पसंद कर रही थी : अच्छा ऐसा क्या दिख गया तुझे मुझमे पता नहीं, मुझे तो ऐसा कुछ खास नहीं लगता.

में: माँ इंसान की खूबसूरती की क़द्र देखने वाला कर सकता है खुद वो इंसान नहीं, और इवन मैंने ये फरक उस दिन आपकी और आपकी सहेलियों के बिच भी देखा है, आप माधवी आंटी, रत्न आंटी और निशा आंटी तीनो से hi कई ज्यादा जवान दिखती हो ः.

माँ, मन में hi, क्या ये बात सच है, क्या में अपने बेटे को इतनी अछि लगती हु, मेरी सहेलिओ से भी ज्यादा, जबकि रत्न और माधवी तो इतनी चुड़क्कड़ औरते है, छुड़वा छुड़वा के इतना ाचा जिस्म बनवा ली है और जो अचे से जानती है की अपने जिस्म से मर्द को कैसे रिझाना है और सनी को में उनसे भी ज्यादा आकर्षित लगती हु.

माँ: तू न सच में बड़ा हो गया है बच्चा नहीं रहा अब, भोत देखने और बोलने लगा है, अपनी hi माँ को स उसकी सहेलिओ के और उसके बिच के शारीरिक फरक को बता रहा है.

में: ः माँ अब इसमें छिपाना क्या है मुझे जो लगा सो बता दिया और आप जब कोई मेक उप नहीं करती है न तब भी एक अप्सरा सी दिखाई देती हो जैसे अभी लग रही हो.

माँ, इस बात पर मुस्कुराते हुए: तू न सच में पागल हो गया है सनी..

में: ः माँ पागल हो जाता और अगर आप मेरी माँ नहीं होती न तो चाहे कितना भी उम्र में फर्क होता हमारी, में आपको मेरी बीवी बनाना पसंद करता बजे किसी मेरी हमउम्र लड़की के.

माँ, हैरानी से मुझे देख और अंतर्मन खुश होते हुए: हवववव क्या बोलै तूने, मुझे अपनी बीवी बनता तू, शर्म भी नहीं आयी तुझे ये बोलने से पहले.

में: ः अरे माँ मेने ये कहा की अगर आप मेरी माँ नहीं होती तो तब की बात कर रहा, अभी नहीं बना रहा आपको अपनी बीवी अब वो चांस तो पापा को लगा न ः.

माँ, अब मेरी बात पर फिर मुस्कुराते हुए: तू न सनी सच में कुछ भी बोलता है, पहले गर्लफ्रेंड और अब बीवी बनाने की बाटे, कब खयाम होगा तेरा ये बचपना.

में: ः अभी आप hi कह रही थी की में बड़ा हो गया हु और अब कह रही हो बचपना भी है, डीडे कर लो अब.

माँ, इस बात पर आगे आते हुए अपने हाथ को मेरे बालो में सहलाते हुए: तू चाहे कितना भी बड़ा हो जाये अपनी माँ के लिए हमेशा बच्चा hi रहेगा.

में, मन में ये सोच की हाँ और उपजा ये बचा आपकी इन चुचिओ का बचपन की तरह hi हमेशा दूध पीना चाहता है, माँ का हाथ पकड़: में तो खुद बच्चा ही रहना चाहा हु, और हमेशा बचो की तरह आपकी गोदी में लेते रहना चाहता हु और आपका प्यार पाना चाहता हु माँ.

माँ, आगे को आती हुई मेरे माथे को चुम लेती है जिससे उनकी साड़ी का पल्लू कंधे से सरक जाता है और अपनी मोती चुचिओ को कैद करने वाली काळा रंग की ब्रा का स्ट्राप दिखाई पद जाता है. जिसे देखते हुए...

में: वैसे माँ आपने आज भी कुछ वैसा hi ब्लाउज पहना है जैसा उस दिन मंदिर जाते वक्त पहना था, इसके हुक्स भी पीछे hi है हैं न.

माँ, उस दिन ब्लाउज बंधवाते वक्त हुई बातो और मस्ती को यद् करते हुए: हैं ये भी कुछ वैसा hi ब्लाउज है.

में: तो माँ आज आपने इसके हुक कैसे लगाए उस दिन तो कितनी दिक्कत हो रही थी आपको (आँख मरते हुए)

माँ, मेरे आँख मरने से इशारा समझ मेरे कण खींचते हुए: आज भी मेने नहीं किये तेरे पापा ने लगाए है इनके हुक समझा.

में, मुँह बनाते हुए: ये क्या माँ, पापा को तकलीफ क्यों दी मुझे भी तो बोल सकती थी न आप, क्या उस दिन मेने ठीक से हुक नहीं लगाए थे क्या ब्लाउज के.

माँ, उस दिन के वाकिये को यद् करते हुए उस एहसास को यद् कर जो मेरे लुंड के स्पर्श से उन्हें मिला था: बिलकुल ठीक से लगाए थे तूने लेकिन उस दिन तो मज़बूरी थी तेरे पापा घर पर नहीं थे इसलिए वार्ना एक माँ को बेटे से ऐसा काम करवाना शोभा नहीं देता.

में, में तो ब्लाउज में हाथ दाल चुकी दबोचने की सोच रहा और आप शोभा की बात कर रही: ओह क्या माँ आप भी इसमें क्या hi बुराई, अब आप तो ऐसे बोल रही हो जैसे मेने आपको पापा की तरह hi मुझे भी पत्नी वाला प्यार देने का कह दिया हो ः.

माँ, बेटे के मुँह से पति वाले प्यार पाने की बात सुन जिस्म में गर्मी सी चढ़ते हुए, न चाहते हुए भी शरीर में अलग hi बिजली सी दौड़ने लग पड़ी थी, हाय ये लड़का क्या क्या बोलता है: तू भोत बोलने लगा है सनी अब, और भोत बकवास हो गई चल अब जल्दी से खाना खतम कर मुझे भोत काम है में जा रही हु.

में, ये समझ की लगता है अब ज्यादा हो जायेगा कुछ कहना: ः अरे माँ आप भी न, में तो मजाक कर रहा था, और बस हो hi गया मेरा कगना भी, अब जाते जाते ये तो बताइये की सीमा दीदी कहा है.

माँ: वो अपने रूम में है तेरे जीजू का कॉल आया तो उनसे बात कर रही होगी शायद.

में: ठीक है माँ, ाचा अब अपने बेटे को एक प्यारी सी किश तो देदो जैसे हमेशा देती हो.

और इस बात पर माँ उठ कर हस्ते हुए अपने उन रसीले होठो की चाप मेरे गलो पर चोरते हुए एक प्यारा सा चुम्बन देदेती है जिस पर..

में, भोले स्वाभाव से अनजान बनते हुए: वैसे माँ मेने सुना है की गलो के साथ होठो पर भी किश किया जाता है क्या ये सही बात है.

माँ: हाँ चूमते होंगे तुझे क्या करना है इस सब से.

में: माँ मुझे भी अनुभव करना है ऐसे चुम्बन का, प्लस एक किश होठो पर भी करो न जैसे अभी गाल पर की.

माँ, बेटे को होठो पर चूमने की बात से hi होठ सुख पड़ते है और निचे छूट के होठो पर अजीब सी सिहरन हो उठती है: नाहीइ, में तुझे नहीं चुम सकती होठो पर और अब उस बात पर कोई बेहेस नहीं चल उठ और जा यहाँ, मुझे भी अब काम है.

और ये बोल माँ फाटक से वह से भाग जाती है और ये सोचते हुए दीदी के कमरे की तरफ बढ़ गया की "माँ चाहे कितना भी भगा लो आपके इस हसीं जिस्म के तो एक एक अंग को घंटो तक चूस चूस के मजा लूंगा देख लेना".

दूसरी तरफ यहाँ ऑफिस में पापा अपनी सेक्रेटरी श्वेता के साथ ऑफिस के कुछ कामो में व्यस्त होते है की तभी दरवाजे पर रश्मि दस्तक देती है..

रश्मि: सर क्या अंदर आ सकती हु..

मानव: अरे रश्मि तुम, आओ प्लस के इन..

रश्मि, अंदर आ सामने की कुर्सी पर बैठते हुए और श्वेता की तरफ देख: सर मुझे आपसे कुछ बात करनी थी अगर आप फ्री हैं तो.

मानव, रश्मि का इस तरह श्वेता को देख समझते हुए की उसे अकेले में बात करनी है: ः तो इसमें सोचना क्या है रश्मि, मुझे अचे से पता है कल तुम्हारे पति बहार जा रहे और तुम इसी सिलसिले में बात करने आई हो और इसके लिए श्वेता को बहार भेजने की जरुरत नहीं, तुम दोनों hi एक दूसरे का रान्दीपना देख चुकी हो क्यों ः.

रश्मि, बॉस की बात सुन श्वेता को देख शर्माने का दिखावा कर नजरे नीची करते हुए: ईशःठ सर क्या आप भी सब खुले आम बोल देते हो, वैसे आप को कैसे पता चला की में यही बात करने आई थी.

मानव: ः अब मुझे ये समझने में देर नहीं लगती, तजुर्बा है मेरा औरत की चल देख hi पता चल जाता है की लुंड के लिए कितना तड़प रही है.

श्वेता: हहै रश्मि तुम अभी तक सर को समझ hi नहीं पाई, और वैसे रश्मि क्या बात है पति बहार जा रहे तो सर को न्योता भी दे दिया, भोत एडवांस निकली तुम तो.

रश्मि, समझ तो ये मानव खन्ना नहीं पायेगा भोत जल्द की उसके साथ क्या हुआ है: हहै ma'am क्या आप भी, अब आप तो खुद देख और मन चुकी है न की एक बार जो सर के हथियार का स्वाद चख ले उसके बाद वो औरत को उस स्वाद की कैसी लत्त लग जाती है हहै.

श्वेता: हाँ ये बात तो सही कही तुमने, में तो इतने वक्त से सर के साथ हु अब तो ऐसा लगता है की पति से ज्यादा मुझे इनके लुंड की जरुरत है जिंदगी में हेठे.

रश्मि: हहै बस मां इसी लिए पति की गैर मौजूदगी में मैं भी चाहती हु की सर से अपने जिस्म को अचे से मसलवा कर साडी जरूरते पूरी करवा लू,,, तो सर फिर कल आप आ रहे है न मेरे घर.

श्वेता: हहै सही है करो अचे से मजे लेलो, सर जैसा मजा शायद hi किसी से मिलेगा तुम्हे.

मानव: ः हाँ अब छूट बुलाये तो लुंड मन कैसे कर सकता है, कल तेरे पति के बिस्तर में तेरी छूट फाड़ूंगा फ़िक्र मत कर मेरी चुड़क्कड़ रैंड ः.

रश्मि: हहै थैंक्स सर, मुझे आपका इंतज़ार रहेगा सर, फिलहाल अब में चलती हु,, bye सर ंद श्वेता ma'am.

श्वेता, रश्मि के जाने के बाद: सच कहा रश्मि ने सर, एक बार जो आपके साथ हमबिस्तर हो जाये वो हर बार होना चाहेगी, इसलिए तो देखो पति क जाते hi रश्मि ने आपको उसके पति की जगह देते हुए आपकी रैंड बन कर घर में छुड़वाने की इच्छा दिखाई हहै.

मानव: अरे अब तुम जवानी भरी कैसे बदन की औरतो को ऐसा न छोड़ो तो मजा भी क्या, छोड़ छोड़ कर जब तक रैंड न बनाऊ मजा कैसे आएगा ः. बस तुम कल यहाँ ऑफिस संभल लेना मेरे पीछे.

श्वेता : हम्म्म सर डोंट वोर्री में सब अचे से संभल लो, आप बस मेरे जैसी hi आपके लुंड की उस दीवानी रश्मि को अचे से मजा देने का काम देखना हहै.

और इसी बात के साथ श्वेता और मानव दोनों वापस अपने काम में लग जाते है.

घर पर दीदी के कमरे में घुसते hi में देखता हु की दीदी अपने बीएड पर मोबाइल लिए बैठी थी, भले उनका ध्यान मोबाइल में था लेकिन इस वक्त उनका चेहरा देख मुझे ऐसा लगा मनो दीदी कुछ परेशां सी हैं. माँ ने बताया था की दीदी जीजू से बात कर रही हैं तो क्या ये परेशानी का लेनदेन भी कही उसी से तो नहीं हैं.

में, दीदी के पास जाते हुए: hi दीदी,, में कब से गेट पर खड़ा हु आप मोबाइल में hi घुसी हुई है अपने भाई पर भी नजरे दाल लो थोड़ी.

दीदी, हलकी सी मुस्कराहट क साथ: अरे सनी तुम, सॉरी मेरा ध्यान नहीं गया इसलिए, आओ न बैठो.

में, दीदी के पास बैठते हुए: हम्म्म अब उपजा ध्यान क्यों जायेगा मुझ पर, पहले जैसा प्यार कहा करतु है अब मुझे आप जो.

दीदी: ऐसे क्यों बोल रहा है, तू जनता है न की में तुझसे कितना ज्यादा प्यार करती हु.

में: अगर प्यार करती तो मेरे सामने ऐसे मुँह लटकाये नहीं बैठी और मेरे बिना पूछे hi अपनी परेशानी की वजह बता देती.

दीदी: अरे नहीं सनी ऐसा कुछ नहीं है और में परेशां नहीं हु.

में, दीदी के हाथ पकड़ को पकड़कर: आप सबसे झूट बोल सकती है लेकिन मुझसे नहीं, अब सच बोलो.

दीदी, क्या सच बताऊ अब तुझे सनी: बस तेरे जीजू से बात हो रही तो उन्होंने कहा की उनका आना पोस्टपोन हो गया और वो एक की जगह दो महीने बाद आएंगे, काम कुछ ज्यादा बढ़ गया ह सो.

में, मन hi मन खुश होते हुए की फिर तो दीदी दो महीने यही रुकने वाली हैं: अरे तो दीदी इसमें परेशानी कैसी, हो जाता है ऐसा कभी कभी, वर्क लोड का किसे पता रहता है और वैसे भी ये तो अछि बात है इसी बहाने आप हमारे साथ और ज्यादा वक्त तक रहेंगी ः.

दीदी, गेहेन सोच क साथ: हहै हाँ ये भी है, चल ये सब चोर तू बता आज कॉलेज से जल्दी कैसे लौट आया.

में: बस कुछ खास लेक्टर्स नहीं थे तो सोचा घर hi चला जाऊ ः.

दीदी: हहै चलो सही है, ाचा सुन मुझे न नींद आरही है, थोड़ी देर सोने का मन कर रहा है, जा तू भी आराम कर ले.



में, दीदी के चेहरा अब भी उदास सा था जो मुझे ाचा नहीं लगा पर उस वक्त दीदी को ज्यादा कुछ कहना या पूछना उनके मूड को देख सही नहीं लगा इसलिए में भी उनके रूम से ये सोचते हुए की जीजू का लेट आना दीदी की उदासी का कारन नहीं हो सकता है बात कुछ और hi लग रही है,, में अपने रूम में आ कर आराम करने लगता हु.
 
अपडेट-31

रत को डिनर बनाते वक्त कामिनी भाभी ने भी आज सीमा दीदी के चेहरे पर कुछ उदासी महसूस कर ली थी जिसे देख..

कामिनी: क्या बात है सीमा, आज कुछ परेशां सी नजर आ रही हो.

सीमा: नहीं भाभी ऐसा कुछ भी तो नहीं, कोई परेशानी नहीं है.

कामिनी, पास जाते हुए: देखो सीमा तुम ये अचे से जानती हो की तुम अपनी परेशानी मुझसे जब चाहो तब शेयर कर सकती हु, और अगर ऐसा करने से तुम्हे थोड़ी भी रहत मिलती हो तो प्लीज जरूर शेयर करना.

सीमा: हाँ भाभी में जानती हु और अगर ऐसा कुछ होगा तो में जरूर बताउंगी.

कामिनी: ाचा चलो अब डिनर तैयार हो गया है सब लोग इंतज़ार कर रहे होंगे.

डिनर करने के दौरान भी सीमा दीदी आज बिलकुल चुप थी मनो अब भी उनके दिमाग में कोई बात घूम रही हो और इसी को लिए कुछ सोचने लगती है. भाभी ने और साथ hi मुझे भी इस वक्त दीदी का यु चुप चाप रहना और दिन में हुये वाकये से डाउट होने लगा की आखिर कुछ बात तो है.

डिनर के बाद सब अपने अपने कमरे में जा चुके थे और भाभी किचन में कुछ काम कर रही होती है की तभी सीमा दीदी वह पहुंच जाती है..

कामिनी, सीमा दीदी को वह देख: अरे सीमा तुम यहाँ, कुछ चाहिए था क्या..

सीमा: भाभी दरअसल मुझे आपसे कुछ बात शेयर करनी है जो दोपहर से hi मुझे परेशां किये जा रही है, क्या आप अभी फ्री हैं?

कामिनी, सीमा की तरफ देख: मुझे तो पहले hi पता लग गया था की कुछ तो बात है, डिनर टेबल पर भी तुम आज चुप थी एक दम, बोलो क्या बात है..

सीमा: यहाँ नहीं, मेरे रूम में चल कर बात करते हैं.

कामिनी: ाचा ठीक है मुझे कुछ वक्त दो में किचन स्लैब साफ़ कर और चेंज करके आती हु तुम्हारे रूम में...

और ये बोल भाभी काम ख़तम कर अपने रूम में चली जाती है और रूम में राहुल भैया से आज भी नाराज़गी जताते हुए रात सीमा दीदी के रूम में hi सोने की बात बोल कर अपने कमरे से निकल सीमा दीदी के पास पहुंच जाती है.

कामिनी, दीदी के कमरे में जा बीएड पर उनके पास बैठते हुए: हाँ तो मेरी प्यारी ननद अब बोलो कौनसी बात है जिसने तुम्हे इतना परेशा किया हुआ है.

सीमा: भाभी मेने आपको उस दिन अशोक और मेरे रिश्ते में चल रही दिक्कतों के बारे में बताया था न..

कामिनी: haan,to उसी बात को ले कर परेशां हो या कुछ और हुआ है..

सीमा: दरअसल आज दोपहर में मेरी अशोक से बात हुई तो उन्होंने कहा की उनका काम एक्सटेंड हो गया है और वो एक महीना और ज्यादा वही रुकेंगे.

कामिनी: हाँ तो इसमें परेशानी की क्या बात है, काम के लिए ये सब तो होता रहता है.

सीमा: नहीं भाभी, मुझे नहीं लगता की उनका कोई काम एक्सटेंड हुआ होगा, ये उनके ना आने का बहाना लग रहा है.

Kamini,serious होते हुए: क्या मतलब, में कुछ समझी नहीं.

सीमा: ी मैं अब देखिये न अशोक को गए अभी आधा महीना भी नहीं हुआ है और इतनी जल्दी एक्सटेंशन भी हो गया, तय समय पूरा होने के इतने पहले तो ये हो नहीं सकता है न, दूसरी बात ये की अशोक के साथ उनके hi कंपनी में काम कर रहे दोस्त भी गए है और शाम को मेने उनकी वाइफ से भी बात की तो उन्होंने बताया की उनके पति ने एक्सटेंशन की कोई बात नहीं की उनसे.

कामिनी: ओह तो तुम ये कहना चाहती हो की अशोक जी ये सब जान कर कह रहा है और जान कर लेट आना छह रहा.. पर वो ऐसा करेगा क्यों..

सीमा: पता नहीं भाभी, मेने आपसे पहले भी कहा था न की हमारे बिच अब दूरिया सी आने लगी है और वो मुझसे दूर रहने के मौके ढूंढ़ते रहते है.

कामिनी: अरे लेकिन ये भी तो हो सकता ह न की वह कंपनी सिर्फ अशोक जी को रोक रही हो शायद.

सीमा: मुझे नहीं लगता ऐसा कुछ होगा और वैसे भी इतने दिनों से गए है वो आज पहला कॉल आया है उनका, और जब मेने उनसे एक्सटेंशन के बारे में सवाल किये तो रूडली ये बोल कर फ़ोन रख दिया की अब काम धंधा चोर तुम्हरे पास नहीं आ सकता मैं, वैसे भी तुमसे ज्यादा जरुरी मेरे लिए मेरी जॉब है.

कामिनी, मन में, बात कुछ सीरियस सी hi लगती है : ओह्ह्ह ऐसे भला कोण कहता है, तुमने दोबारा बात करने की कोशिश की क्या?

सीमा: दोबारा तो उन्होंने कॉल कट कर दिया और मश्ग भेज दिया की मीटिंग में जाना है कॉल मत karna,...mujhe कुछ समझ नहीं आ रहा है भाभी में क्या करू.

कामिनी: देखो सीमा अब जब तक वो आते नहीं हम कुछ नहीं कर सकते, सच क्या है ये उन्ही से पता लग्न है और फिलहाल यही मन लो की वाकई काम बढ़ जाने से वो देरी से लौटेंगे, अशोक क वापस आने पर इस बात को अचे से हल किया जायेगा.

सीमा: हम्म्म में भी वही इंतज़ार कर रही हु की एक बार बस वो लौट आये ताकि चीजे अचे ढंग से क्लियर हो सके.

कामिनी, माहौल हल्का करते हुए: हाँ और वो लेट आ रहे तो ाचा है तुम एक महीना और मायके में रह कर अपनी भाभी से सेवा करवा सकती हो न हहै.

सीमा: हहै क्या भाभी आप भी, वैसे भी आपसे सेवा करवानी नहीं हैं आपकी सेवा करनी है तो बताओ.

कामिनी: ः जब जरुरत पड़ी कभी, और कही तुम्हारे भैया बहार गए उस दिन पक्का सेवा करवा लुंगी.

सीमा, बात का मतलब समझ: िष्ठ भाभी कुछ भी हाँ मतलब हहै, वैसी कोई सेवा नहीं करने वाली मैं तो.

कामिनी: ः ठीक है, वैसे न तुम्हारी आज की उदासी का एक कारन और भी लगा.

सीमा: और क्या कारन, में तो इसी बात से परेशां थी..

कामिनी, मस्ती में: दूसरी बात ये की अब तुम्हे अपने पति से दूर हुए इतने दिन तो हो गए, एक महीना जैसे तैसे निकल भी लेती लेकिन एक महीना बढ़ने से पति के साथ, प्यार और शारीरिक सुख के लिए भी एक महीना ज्यादा इंतज़ार करने पड़ेगा न हेहेहे.

सीमा: धत्त भाभी आप भी न, ऐसी कोई बात नहीं है.

कामिनी: ओह कॉमन सीमा, में भी औरत हु और औरत की जरूरते क्या होती मुझे भी पता है, और दो महीने पति से दूर अकेले सोना हैए मेरी तो जान hi निकल जाये पता नहीं तुम कैसे रहती हो हहै.

सीमा: भाभी अब बास भी करो, और आप तो हो hi इतना हॉट सेक्सी औरत, जायज़ hi है की आप दो महीने कहा रुक पाओगी हहै... और वैसे भाभी एक बात बताऊ आपको, जब अशोक यहाँ थे तब भी हमारे बिच मुश्किल से हफ्ते में एक बार सम्बन्ध बनते थे तो इस बात को सोच कर परेशसँ होने का तो सवाल hi नहीं हहै.

कामिनी: हैए सिर्फ एक बार से क्या होता है, मुझे तो रोज सेक्स मिले तब भी मना नहीं करू पता नहीं तुम कैसे रहती हो और अशोक इतना मुर्ख कैसे हो सकता है की इतनी सुन्दर और सेक्सी बीवी को चोर काम के पीछे भाग रहा हहै.

सीमा: ः भाभी अब क्या करू शायद मुझमे hi कमी होगी की अपने पति को अपने तरफ खींच नहीं पति

कामिनी: में नहीं मानती इस बात को, तुम इतनी मस्त हो की एक औरत होने के बावजूद में खुद भी तुमसे प्यार कर बैठु हहै...

सीमा: हाहाहा भाभी कोई जरुरत नहीं, मुझे लेस्बियन बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बाकि हाँ ऐसे hi जितना प्यार करना है आप कर सकती है भाभी और सहेली होने के नाते हहै.

कामिनी: हाहाहा हाँ पता है मुझे, पर हाँ ये यद् रखना की तमहरि ये सहेली हमेशा साथ hi है तुम्हारे.

सीमा, भाभी को हुग करते हुए: थैंक्स भाभी...

कामिनी: हहै थैंक्स की बच्ची चलो अब सो जाओ, मुझे पता था की बात लम्बी चलेगी इसलिए राहुल से बोलकर आई थी की सीमा के साथ hi सप जाउंगी, उम्मीद है मेरे साथ हमबिस्तर होने में तुम्हे कोई दिक्कत नहीं होगी हहै.

सीमा: हहै हमबिस्तर,, जी कोई दिक्कत नहीं मुझे, हो जाइये हमबिस्तर, बस आशा करती हु की मुझे राहुल भैया समझ कुछ हरकते नहीं करोगी..

कामिनी: ः कोशिश पूरी करूंगी न करने की... चलो अब गुड night..or ये बोल दोनों ननद भाभी सोने लगते है.

सुबह ब्रेकफास्ट के बाद बुआ, भैया और पापा ऑफिस के लिए निकल जाते है और ऑफिस में कुछ वक्त बिताने के बाद ऑफिस से निकल सीधा रश्मि के घर की तरफ बढ़ चलते है. पिछले दिन ऑफिस में hi पापा और रश्मि के बिच जैसे की तय हुआ था की फ्राइडे के बाद से कुछ दिन क लिए पति की गैरमौजूदगी में रश्मि के घर पर इन दोनों की काम क्रीड़ा चलने वाली है और इसी के सिलसिले में सुबह सुबह hi रश्मि का पापा को मैसेज भी आ चूका होता है की "मेरे पति जा चुके है और अब मेरा कमरा और मेरी छूट दोनों hi आपका इंतज़ार कर रही है. "

जैसे hi मानव खन्ना रश्मि के घर में कदम रखते है उनके सामने एक कैसे हुए कुर्ते और उतनी hi कासी हुई लेग्गिंग जिसमे से जंगे और चूतड़ का अक्कार बड़े hi अचे से दिखाई पद रहा था, पहनी हुई जवानी और कौमार्य में दुबे हुए बदन के साथ रश्मि उनके सामने कड़ी होती है.. जिसे देख अपनी तरफ खींच बहो में दबोचते हुए..

मानव: क्या बात है मेरी जान, तू तो बिलकुल कड़क चुड़क्कड़ माल बन के तैयार हुई पड़ी है.

रश्मि: ईशःठ सर, अब में क्या ये नहीं जानती की मेरे बॉस को मेरी जवानी लूटने का कितना शोक है और अब तो मुझे भी खुद आपसे अपनी जवानी लुटवाने और जिस्म रगड़वाने की लत्त लग चुकी है, रही बात चुड़क्कड़ माल बनने कर तैयार होने की तो सर मेने अपने घर में एक पराये मर्द को मेरे जिस्म से खेलने और खिलवाड़ करने बुलाया है, तो इस वजह से मेरा ऐसा तैयार होना तो बनता है न हहै.

मानव, हाथ में चुकी पकड़ भींचते हुए: हाँ मेरी चुड़क्कड़ रैंड ये तो तूने भोत सही कहा, और वैसे hi आज तो तुझे तेरे पति के बिस्तर में पटक के पेलना है, एक मर्द के लिए इससे अछि बात क्या होगी की किसी और की बीवी ने खुद से अपने hi पति के बिस्तर में पराये मर्द की रैंड बनने के लिए उसे अपने घर बुलाया हो, सच तुझ जैसी रैंड तो ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलेगी ः.

रश्मि: ममममम ईशःठ सिररर तो फिर अब रुके क्यों हो, लूट लो न अपनी इस रैंड की जवानी को और सर इन अगले कुछ दिनों में मैं चाहती हु की आप मेरी कुछ कपोल kalpanaye(fantasy) हैं वो भी पूरी कर दें.

मानव, कुरता उठा चूतड़ पर हाथ लगा मसलते हुए: क्यों नहीं, चल बता क्या कपोल कल्पना है तेरी जो आज पूरी करवाना चाहती है.

रश्मि,: िष्ठ सर आज में चाहती हु की आप मुझे भोत बुरी तरह से छोड़ो, मुझे इतना दर्द दो की मेरे जिस्म पर आपकी बेरहमी के निशान पद जाये और आपके जाने के बाद जब में अपना जिस्म देखु तो वो निशान मुझे ये यद् दिलाये की मैं आपकी रखैल बन चुकी हु और आपका मुझे पर और मेरे जिस्म पर मेरे पति से ज्यादा हक्क है.

मानव, रश्मि की बात सुन उत्तेजित होते हुए क्युकी औरत की दर्द भरी चुदाई करते हुए जिस्म को लूटने का अलग hi मजा मिलने वाला था, रश्मि को गोदी में उठा उसके बैडरूम में ले जा बिस्तर पर पटक कर: देख साली अब में तुझे कैसे और कितना दर्द देता हु, रही बात निशानों की तो आज मेरी चुदाई से तेरे जिस्म के एक एक अंग पर निशान होंगे जो तेरे पति के आने पर उसे भी इस बात का प्रमाण देंगे की तू उसके पीछे किसी और द्वारा लूटी गयी है.

रश्मि: अह्ह्ह्हह सर पति को में संभल लुंगी आप बस आज मुझे नोच डालो बुरी तरह, अह्ह्ह भोत आग है मेरे जिस्म में और आपसे मिलने के बाद ये दिनों दिन बस बढ़ती जा रही है उफ्फ्फ्फ़ इमम्म अह्ह्ह.

रश्मि की बात सुन अब मानव उसके उप्पेर चढ़ उसके होठो को बुरी तरह से अपने होठो से चिपका दांतो को गाड़ते हुए चूमने और काटने लगता है, मनो की अब मानव के अंदर क भी जानवर ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया था और इसी वजह से अगले hi कुछ मिनटों में रश्मि के कुर्ते और लेग्गिंग्स के फटने की आवाज कमरे में सुनाई देने लगती है और कपडे फत्ते hi रश्मि पूरी तरह नंगी बिस्तर पर मचल रही होती है.

एक शादी शुदा जवान औरत को उसके hi घर में अपने पति के बिस्तर में इस तरह नंगी पा कर अब मानव से नहीं रुका जाता है और उसकी गोरी मुलायम सी चूच्चिओ को अपने मुँह में दबाते हुए चबाने लगता है साथ hi निप्पल्स को उंगलिओ के नाखुनो के बिच फसा बुरी तरह मरोड़ देता है.

अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह उम्मम्मम िष्ठ्हह सिर्रर्र उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मर गयी अह्ह्ह्ह हईये छोड़ूऊऊ उफ्फ्फ्फ़ मममम की दर्द भरी ाहो के साथ अब रश्मि दर्द और मजे के मिश्रित अनुभव को महसूस कर रही थी. लेकिन उसकी चीखो को अनसुना करते हुए मानव अब अपने निचे लेती हुई इस औरत को कच्चा मांस समझते हुए बस बेरहमी से नोचने में मस्त था.

चूचियों और छाती के ऊपरी भाग पर बेरहमी से काटने नोचने से जैसा मानव ने कहा था ठीक वैसे hi तरीके से रश्मि के जिस्म के उन भागो पर दांत के निशान गड चुके थे और इतने गहरे निशान थे की किसी की भी नजर में आसानी से आ सकते थे.

अह्ह्ह्हह्हह सिररररर ममममम ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ हैं ऐसे hi निशान मुझे मेरे जिस्म पर चाहिए उफ्फफ्फ्फ़ और दर्द दीजिए मुझे अह्ह्ह करते हुए रश्मि अब अपने बॉस का लुंड मुँह में भर हलक तक उतर चूसने लग पड़ी थी और पपुरे जोश में आये हुए मानव ने उसका मुँह भी बुरी तरह छोड़ना शुरू कर दिया था. लुंड हलक तक उतरने की वजह से सांस लेने में भी परेशानी महसूस करती रश्मि भी इस पल का पूरा मजा लेना चाहती थी इसी वजह से इस बेरहम जानवर बने बॉस से अपने जिस्म को मसलवाने का आनंद उठा रही थी.

अह्ह्ह्हह सिररररर भोत खुजली हो रही अब फाड् दो मेरी छूट भी िष्ठ्हह ममम ओह्ह्ह हैए बोलते हुए मानव के सामने रश्मि ने अब अपनी टंगे फैला दी थी जिसे द्केहते hi एक भूखे भेड़िये की तरह मानव उसकी छूट पपर टूट पड़ता है एयर कुछ देर अपने मुँह और दांतो से छूट को चूसने और चाटने के बाद अपने लुंड को उसकी छूट के मुहाने लगा पेलना शुरू कर देता है.

छूट में लुंड के बेहरम धक्को के साथ hi कभी चुचिओ पर तो कभी चूतड़ों पर तेजी से पद रहे थप्पड़ो की मार और अपने बॉस से कभी गले में तो कभी होठो पर तो कभी छाती पर दन्त गाड़ने से पद रहे निशानों के दर्द में कररहति हुई रश्मि अब पूरी तरह बेहाल हो चुकी थी.

अह्ह्ह्हह सिर्रर्र उफ्फफ्फ्फ़ हैइए अह्ह्ह्ह मर्डर गयीईइ में टूओ अह्ह्ह्हह्हह कितने बेहेरेमंम हो ाप्प आह्ह्ह्ह भोत दर्द हो रहा है उफ्फफ्फ्फ़ मममम इसशहहहहह अह्ह्ह्हह और जोर से अह्ह्ह हैं करते हुए दर्द में भी रश्मि को चुदाई की आग ने इतना मस्त कर दिया था की उसे लुंड की छूट ने पिलाई करवाने के अलावा और कुछ नहीं सूझ रहा होता है. और अगले कुछ देर ऐसे hi बुरी तरह ठुकाई के बाद रश्मि और मानव एक साथ झाड़ पड़ते है.

झड़ने के बाद जब कुछ देर अपनी साँसों को संभल रश्मि बिस्तर से कड़ी हो आईने में अपने आप को देखती है तो अपनी चुचिओ के ऊपरी भाग में, छाती पपर, गले की साइड्स में, कंधे पर और होठो को चबाने ने पड़े निशानों को देखते hi दांग रह जाती है और मस्त होते हुए...

रश्मि: अह्ह्ह्हह सर आपने तो सच में hi बुरी तरह नोच डाला है मुझे िष्ठ इतनी जबरदस्त चुदाई तो जिंदगी में कभी नहीं हुई मेरी उफ्फ्फ्फ़.

मानव: ः क्या करू मेरी रैंड तू है इतनी गजब की चीज़, और अगर तेरी जवानी इस तरह न लूटी तो फायदा hi क्या तेरी जवानी का.

रश्मि, वापस मानव के पास बिस्तर में आते हुए: िष्ठ्हह सर सच में तो गुलाम हो गई हु आपकी मममममम जो मर्द एक औरत को इस तरह पेल कर मस्त कर दे, जिंदगी भर वो औरत उस मर्द की गुलामी करने को तैयार हो जाये अह्ह्ह मजा आ गया सर मूवएह.

और ये बोल रश्मि अपने बॉस के लुंड को दोबारा मुँह में भर लेती है और दोनों hi मानव और रश्मि दोबारा चुदाई के इस दर्द भरे मजेदार खेल में दुब जाते है.

ऐसे hi रश्मि को दिन भर में दो बार और भोगने के बाद उसके घर से वापस ऑफिस के लिए निकल पड़ते है और यहाँ रश्मि अपने बॉस से इतनी बेरहमी और बुरी तरह की ठुकाई के बाद अपने बिस्तर पर बेहाल सी नंगी hi पड़ी रह जाती है.

मन hi मन ये सोचते हुए की उफ्फ्फफ्फ्फ़ वाकई बड़ा hi दुमदार है ये मर्द, पता नहीं अपनी बीवी का क्या हाल करता होगा अह्ह्ह्ह, कोण औरत ऐसा मर्द नहीं चाहेगी अपनी जिंदगी में िष्ठ्हह अह्ह्ह पूरा जिस्म hi मसल कर निचोड़ डाला है कमीने ने उफ्फफ्फ्फ़.

खैर रश्मि मजा तो भोत ले लिया तूने इस मर्द का, और भोत मसलवा लिया अपना जिस्म मानव खन्ना से अब वो काम भी कर ले जिस वजह से तू इस शख्स की रैंड बानी और अपने hi घर में उसके लुंड की इतनी बेरहम और दर्द भरी चुदाई सही अह्ह्ह, और यही सोच रश्मि पास में पड़े अपने फ़ोन को उठा सीमा दीदी को कॉल लगा देती है...

सीमा: hello...

रश्मि: hello की बच्ची, कहा बिजी रहती है इतना की एक hi शहर में होते हुए भी मिलने का टाइम नहीं तेरे पास.

सीमा: ओह्हो देखो तो उल्टा चोर कोतवाल को दांते, जब से पापा के यहाँ आई हु तीन चार बार कोशिश की तुझसे बात करने की, तू hi कभी या तो बिजी या फ़ोन स्वित्चेद ऑफ आता है.

रश्मि: हहै अरे वो ऑफिस में रहती हु तो हो सकता है ऐसा हो जाये, अब तू तू जानती है न अब काम का कितना प्रेशर रहता है, और न hi मेरे पापा या मेरे ससुराल वाले इतने पैसे वाले है की तेरे जैसे ऐश कर सकू हहै.

सीमा: हहै कामिनी चल अब बकवास बंद कर अपनी समझी, और बता अभी कहा हैं.

रश्मि, अब तुझे क्या बताऊ सीमा, अभी तो तेरे पापा की बेरहमी की वजह से बिस्तर में नंगी बेहाल पड़ी हु: यार कहा होंगी बस वही ऑफिस में हु, अभी फ्री थी सोचा तुझसे बात कर लू.

सीमा: हम्म्म तो बिजी लेडी, ये बता की कब मिल सकती है तू, अपॉइंटमेंट मिल सकता है तेरा की नहीं हहै.

रश्मि: ः अरे इसीलिए तो कॉल किया न, एक काम करते है कल शाम को मिलते है, वीकेंड है सो में ऑफिस से जल्दी फ्री हो जाउंगी बोल क्या कहती है.

सीमा: उम्म्म्म ठीक है दोने फिर कल शाम को मिलते हैं.

रश्मि: हाँ सही रहेगा और चल अब मेरा ब्रेक खतम होने वाला है कल मिल कर कहिब गप्पे लगाएंगे हहै.

सीमा : ः चल bye...

और ये बोल रश्मि फ़ोन रख अपनी बेहाल छूट और चुकी पर पड़े निशानों को सहलाते हुए अह्ह्ह्ह सीमा कितने बेरहम है तेरे पापा उफ़..

पर तू तो इतने उसूलो वाली है तुझे तो पता भी नहीं होगा की तेरे घर में इतना मस्त छोड़ू मर्द भी है हईये, तेरी जगह ने होती तो कबका घर के इस मजेदार फौलादी लुंड का मजा ले चुकी होती हहै, खैर कोई बात नहीं भोत जल्दी hi तुझे भी सब पता चल जायेगा मेरी प्यारी सहेली, वैसे भी अब तुम बाप बेटी की किस्मत में आगे भोत कुछ होना लिखा है हहै.. और इसी के साथ मन hi मन खुश होते हुए रश्मि वैसे hi अपने बिस्तर पर थकन क मरे सो जाती है.

रत को डिनर टेबल पर आज फिर में रागिनी बुआ के साथ पास वाली hi कुर्सी पर बैठ जाता हु और पिछले कुछ दिनों की तरह hi आज भी अपने हाथो को उनकी जांघो पर मसल रहा होता हु लेकिन आज जब बुआ ने दोबारा मुझे गुस्से वाली उन्ही नजरो से देखा तो मेने अपने हाथो को ूंगकी जांघो को दूर करते हुए उनकी टैंगो के बिच रख छूट पर जोर से दबा दिया जिस वजह से बुआ एक दम कम्प सी गयी और मेरा हाथ पकड़..

बुआ, पास आते हुए धीरे से लेकिन गुस्स्से भरे स्वर में: सनी ये क्या बदतमीज़ी है, हाथ हटा वह से नहीं तो आज यहाँ सबके सामने तू थप्पड़ खायेगा, रोज के नाटक हो गए है तेरे ये अब...

में, हाथ हटते हुए : ः बुआ गुस्सा क्यों हो रही हो, में तो बस ये चेक कर रहा था की आपकी छूट का वो नकली लुंड अचे से ख्याल तो रख प् रहा है या प्यासी hi चोर देता है ः.

चूँकि मुझे पता था की पिछले दो दिनों से वो नलकी लुंड यानि की डिलडो मेरे पास मेरे रूम में पड़ा है जो मेने बुआ के कमरे से चोरी कर लिया था और अभी इसी वजह से जानबूझ कर मेने बुआ के सामने उसी चीज़ का ज़िक्र किया था जिससे की मुझे बुआ के चेहरे की प्रतिक्रिया का पता चल सके और हे जान सकू की बुआ उस नकली लुंड के ना मिलने से कितनी बैचैन है. और में जो चाहता था वैसा हुआ भी..

मेरे मुँह से नकली लुंड की बात सुन कर उन्होंने भले मुँह से कोई जवाब नहीं दिया लेकिन जिन आँखों में अभी गुस्सा भरा था वो अब एक दम से दूसरी तरह घूम चुकी थी और साथ hi डिलडो के बारे में सुन उनके चेहरे के भाव भी बदल चुके थे, जो ये बताने के लिए काफी थे की बुआ उसको अपनी छूट में लेने के लिए कितनी बैचैन है. अगर इस वक्त डिनर टेबल पर और कोई मौजूद नहीं होता तो बात आगे बढ़ाना आसान होता और सही वक्त के इंतज़ार का सोच में भी इस बात को यही रोक खाना खाने लग पड़ता हु.

रात में आज फिर कामिनी भाभी सीमा दीदी के hi कमरे में जा गप्पे लड़ते हुए वही सो जाती है और वही माँ और डैड के कमरे में इस वक्त एक अलग hi बात चल रही होती है..

पापा यानि मानव जो आज दिन में रश्मि की बेरहमी से दुमदार चुदाई करने के बाद बुरी तरह थक हुए थे और इस वक्त अपने बिस्तर पर लेते हुए थे और सोना चाहते थे वही दूसरी तरफ मेरी माँ यानि उनकी पत्नी महिमा एक गाउन पहने उनकी बहो में लिपटी हुई लेती थी..

महिमा: मानव सुनिए न प्लीज आज भोत मैं हो रहा है कीजिये न प्लस.

मानव: माहि डार्लिंग तुम समझती क्यों नहीं हो में भोत थका हुआ हु आज ऑफिस में भोत काम था आअज नहीं हो पायेगा मुझसे.

महिमा, नाराज़गी जताते हुए: हर वक्त काम काम काम, बीवी की तो पड़ी hi नहीं है आपको.

मानव: ऐसा क्यों कह रही हो आज hi मन कर रहा हु न पहले कभी कहा क्या..

महिमा, बिस्तर पर उठ कर बैठते हुए: जब मेरा मूड होता है उस रात आप यही बहाना करते हैं, और हर वक्त का क्या मतलब, अब आप कौनसा पहले जैसे लगभग रोज मेरी चुदाई करते है अब तो हफ्ते में मुश्किल से एक या दो बार करते हो वो भी अगर आपका मूड हो तो, मेरे मूड होने पर या मेरे कहने पारर तो आपको ऑफिस के काम से थकन हो जाती है.

मानव: यार महिमा प्लीज अब फिर मत शुरू हो जाओ, में सच में भोत थका हुआ हु आज तुम्हे नहीं छोड़ सकता बिलकुल हिम्मत नहीं है मुझमे.

महिमा, गुस्से में दूसरी दिशा में करवट करते हुए लेट कर: ठीक है सो जाओ मत करो कुछ, पता नहीं ऑफिस का काम कभी ख़तम होगा भी या ऐसे hi आपके बहाने चलने वाले है.

कुछ hi देर में महिमा को अपने पति के धीरे धीरे आ रही खर्राटों की आवाज सुनाई पड़ती है जिससे उसे और गुस्सा आने लगता है, " उफ्फ्फ देखो सो भी गए बीवी की जरूरतों की तो कुछ पड़ी hi नहीं, कितने दिन हो गए मेरी प्यास को ढंग से बुझाये और मुझे संतुष्ट किये उफ़"

और यही सोचते हुए अब अपने आप hi महिमा का हाथ अपनी चुचिओ के उप्पेर आते हुए उन्हें दबाने लग पड़ता है अह्ह्ह्हह िष्ठ्हहह उफ्फ्फ्फ़ उठो न मानव दबाओ न मेरी चूचिया उम्म्म्म भोत मन कर रहा है अह्ह्ह और ऐसे hi बड़बड़ाते हुए अब उनका दूसरा हाथ अपना गाउन उप्पेर उठाते हुए टैंगो के बिच से छूट पर पहुंच जाता है जो इस वक्त भट्टी की तरह गर्म अऊर प्यास की वजह से गीली गीली हो चुकी थी.

छूट को फैलते हुए उसमे दो उंगलिया छूट में दाल छूट के डेन को घिसते हुए उंगलिअ अंदर बहार करते हुए अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह उम्म्म्म मानव छोड़ो न अपनी माहि को अह्ह्ह्हह उम्म्म जोर से लुंड पेल दो न अह्ह्ह्हह जोर से और जोर से उफ्फ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम अह्ह्ह्हह

अभी महिमा छूट में ऊँगली करते हुए अपनी पति से चुदाई का सोच hi रही होती है की अचानक उसके दिमाग में अपने बेटे सनी द्वारा उसके चूतड़ों और गांड की दरार के बिच उसका लुंड घिसने का वो एहसास यद् आजाता है जो उस दिन ब्लाउज की डोरी बंधवाते वक्त हुआ था... इसके साथ hi अब महिमा को वो सब यद् आजाता है की किस तरह उसका बीटा सनी ब्लाउज के कसाव की वजह से उसकी चुचिओ को घर रहा था और कैसे दोबारा उसको ये कह रहा था की वो उसके ब्लाउज की डोरी दोबारा बांधना चाहता है...

ये सब सोच कर अब महिमा की छूट में चल रही उंगलिओ की गति काफी तेज हो जाती है और तभी उसे सनी की वो बात यद् आ जाती की अगर आप मेरी माँ न होती तो मेरी बीवी बना लेता, और इस बात को यद् करते hi महिमा के दिमाग में ये ख्याल आजाता है की अह्ह्ह सनी की बीवी होती तो शायद अभी वो मुझे छोड़ रहा होता ऐसे ऊँगली नहीं करनी पड़ती ममममम ओह्ह्ह्ह सनी बीटा छोड़ मुझे अह्ह्ह्हह और जैसे hi उसके मुँह से ये शब्द निकलते है की महिमा का जिस्म बुरी तरह से अकड़ने लगता है और उसके साथ hi जिस्म के कम्पन के साथ छूट झड़ने लग जाती है अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह उम्मम्मम्म उफ्फफ्फ्फ़ िष्ठ्हह.

इतनी देर से छूट घिसने और अपने बेटे के बारे में स्पच कुछ ज्यादा hi जोश में आने से महिमा पूरी तरह पसीना पसीना हो चुकी थी और झड़ने के कुछ देर बाद उसे ये एहसास होता है की आज उसने अपने बेटे को सोच कर छूट सहलाई और आरसे बाद उसकी छूट इतने अछि तरह से झड़ी थी.

लेकिन मन hi मन अब उसे ये समझ नहीं आरहा होता है की में ऐसा कैसे सोच सकती हु, एक माँ होते हुए अपने hi बेटे से जिस्मानी सम्बन्ध बनाने की बात सोचते हुए और बेटे की तस्वीर को बंद आँखों में अपने सामने ला अपनी छूट में उंगलिया कर रही थी,,, जो बात सोचना भी पाप है में उसी बात को सोच अपने जिस्म की आग शांत करने में लगी थी.. ये मुझे क्या हो गया था आज, आज से पहले तो ऐसा कभी नहीं हुआ. अगर मानव ने मेरी जिस्म को आज सन्तिष्ठ कर दिया होता तो में में इस गलत और घटिया बात के बारे में कभी सोचती hi नहीं सब मानव की वजह से हुआ है, और इस बात पर अपने पति कोसते हुए और अपने बेटे के प्रति इस तरह की भावनाओ का उमड़ना आखिर क्यों?, खुद से इस बात का सवाल करते हुए महिमा भी नींद के आगोश में चली जाती है.
 
अपडेट-32


एक तरफ जहा माँ अपने जिस्म में उफनती हुई आग पर काबू पाने के लिए अपनी उंगलिओ का इस्तेमाल कर रही होती है वही दूसरी तरफ उनकी ननद रागिनी यानि की मेरी बुआ का भी हाल कुछ खास अच्छा नहीं था. एक तरफ जहा माँ पति के पास लेते हुए होने के बावजूद भी अपनी छूट में लुंड की बजे उंगलिओ को गहराई में उतर कॉमर्स बहा रही होती है वही दूसरी तरफ रागिनी बुआ भी अपने बिस्तर में लेते जिस्म की गर्मी और बेचैनी की वजह से कभी इस तरफ तो कभी दूसरी तरफ करवाते ले रही थी.

रागिनी बुआ इस वक्त अपने पलंग पर एक नाईट गाउन में पेट के बल लेते हुए अपनी जांघो को भोत जोरो से चिपकते हुए गद्दे पर दबाव बना मनो छूट को आज गद्दे से hi रगड़ कर पानी निकलवाना ho,chut घिसते हुए जिस्म की आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही होती है.

बुआ के जिस्म की गर्मी इतनी बढ़ने का एक कारन जहा उनका अकेलापन था तो वही एक दूसरा कारन मैं भी था और अभी इसी वजह से बुआ अपने बिस्तर में इस तरह एक बिन पानी की मछली जैसे मचल रही थी.

(आगे की बाटे बुआ की जुबानी)

मममम उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह क्या हो रहा है मुझे क्यों आज कल इतना ज्यादा उत्तेजित होने लगी हु उफ्फ्फ पहले अह्ह्ह्ह क्यों तड़पा रही है मुझे मेरी ये निगोड़ी छूट उफ्फ्फ्फ़... वैसे hi एक तो अकेलेपन ने जहा मेरी काम वासना को घेर रखा है अब सनी भी मेरी मज़बूरी का फायदा उठा मेरे अंगो से खेलने लगा है अह्ह्ह्ह.

और हैरानी तो मुझे खुद पर इसलिए है की आखिर मैं भी क्यों उसकी हर हरकत पर सिर्फ गुस्सा दिखते हुए चुप्पी साध लेती हु, क्यों उसे कभी मेने कठोरता पूर्वक रोका नहीं, अह्ह्ह और पिछले कुछ दिनों तो मेरा शरीर भी उसकी हर गतिविधि पर समर्थन दे रहा है मनो, उफ्फ्फ क्यों मेरी छूट में उसके चुने से नमी आजाती है अह्ह्ह ईशःठ. मन की जब वो छोटा था तब मेने उससे छह कर बिना दूध के अपनी चूचिया उसे चुसवाई और उसका चूसना मुझे मजा भी देता था उफ्फफ्फ्फ़ पर अब वो बच्चा नहीं रहा है और बचपन में मेरे द्वारा की गयी यही हरकतों ने तो आज उसकी हिम्मत इतनी बड़ा दी है और में न चाहते हुए भी कभी कभी उसको रोक नहीं पति हु उफ्फ्फ.

यही सोचते हुए अपने गाउन को ऊपर सरकते हुए हाथ अंदर दाल कर अपनी पंतय उंगलिओ में फसा निचे सरकते हुए निकल लेती है और छूट की फैंको को खोल घुंडी पर उंगलिअ रख सहलाते हुए, िध्ह्हः उफ्फ्फ हईये अभी भी कितनी गीली हुई पड़ी है मेरी छूट तो अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़, मुझे दर है कही किसी दिन में सनी के आगे कमजोर न पद जाऊ उफ्फ्फ्फमममम, एक तो कम्बख्त वो डिलडो भी पता नहीं कहा रख दिया है मेने, पूरा कमरा छान लिया है कही नहीं मिला उफ्फ्फ्फ़. और आज मुझे नहीं लगता है की मेरी आग मेरी ये उंगलिया बुझा पाएंगे उफ्फ्फ्फ़ अब मैं क्या करू अहह.

अह्ह्ह वैसे कही किसी और के हाथ तो नहीं लग गया वो डिलडो उफ्फफ्फ्फ़, लेकिन उस डिलडो के बारे में मेरे अलावा कोई और जनता है तो वप बस सनी है.. ओह्ह्ह्ह कही ऐसा तो नहीं की सनी ने hi उस डिलडो को चुरा लिया हो.. और आज डिनर करते हुए इसी लिए उसने उस डिलडो की बात की हो जान बुझ कर, क्युकी सिर्फ एक वही है जिसे पता है की में इस डिलडो का कितना उपयोग करती हु और एक यही मेरी काम वासना शांत करने का जरिया है, अह्ह्ह और यही जानते हुए हो न हो उसने उसे चुराया होगा जिससे की वो मुझे और इस आग में जलता हुआ देख सके.

उफ्फ्फ्फ़ सनी तुझे में नहीं चोर्ने वाली हु अह्ह्ह घर में सबसे छोटा है लेकिन इतना शैतान और कमीना है को कोई हद नहीं अह्ह्ह, पक्का उसी ने डिलडो चोरी किया और उसके बाद से hi वो मेरे अंगो को बार बार छू कर मेरे जिस्म की आग भड़का रहा है ये सोचते हुए की कही इसी बहाने में कमजोर कद जाउंगी.

उफ्फ्फ्फ़ बड़ा भाई है जो सीधा जबरदस्ती करते हुए जिस्म दबोचता है तो छोटा भाई उससे एक दम विपरीत, अह्ह्ह उसे पता था की उसके डिलडो चुराने से में अपनी काम वासना पर काबू नहीं प् सकुंगी िष्ठ्हह.. लेकिन चाहे जो भी हो आज में सनी से इस बात को सुलझा कर hi रहूंगी भोत हो गया उसका रोज रोज का ये नाटक, अभी जाती हु उसके कमरे में और उसकी अकाल ठिकाने लगा कर डिलडो भी ले कर आती हु..

और ये सोचते हुए बुआ अपने बिस्तर से उठ कड़ी होती है और गाउन सही कर सीधा मेरे कमरे के बहार आ दरवाजे पर दस्तक देती है. दरवाजे की दस्तक सुन मुझे लगा की इस वक्त कामिनी भाभी hi होंगी और इसी ख़ुशी में झट से पलंग से उठ दरवाजा खोलने चला जाता हु, दरवाजा खोलते hi इससे पहले की में भाभी समझ कर उन्हें अपनी बहो में भींच लेता में देखता हु की भाभी नहीं बुआ सामने कड़ी है, और मन hi मन चैन की सास लेता हु की ाचा हुआ मेने भाभी समझ इन्हे दबोच नहीं लिया ः.

में, इस वक्त बुआ को देख: बुआ आप इस वक्त मेरे कमरे में, क्या हुआ कुछ काम था क्या...

बुआ: हाँ काम था इसलिए आयी होउंगी न वार्ना कोई पागल हु हु नहीं जो रात में दूसरे का दरवाजा खटखातुंगी..

में, मजा और मस्ती के मूड में: अरे बुआ आप तो बिना काम के भी आ सकती हो जब चाहो मैं भला क्यों रोकूंगा उल्टा मैं तो यही चाहता हु की आप हर रात मेरे कमरे में और मेरे बिस्तर पर बिताओ..

बुआ, ये सुन दोबारा गुस्सा करते हुए: चुप कर ये बकवास सुनने नहीं आई हु में तेरी और मुझसे ऐसी बाटे मत किया कर कितनी बार कहा है.

में: ः ाचा ठीक है हो गया चुप, अब येतो बताओ की रात में मेरी यद् कैसे आई आपको.

बुआ, ये सुन कमरे के अंदर आ दरवाजा लगते हुए, जिसे देख..

में, मुस्कुराते हुए बुआ को देख: हैए दरवाजा लगा दिया, आखिर आप क्या करने वाली हैं, कही आज दोबारा दूध पिलाने का मन तो नहीं बना कर आई आप ः.

बुआ, मन में, वैसे hi अपनी छूट जो कमरे से गीली ले कर आई हु ईशःठ लगता है उसपर सनी की बातो का असर होना शुरू होगया है, लेकिन गुस्सा दिखते हुए फिर: चुप कर बदमषः में आज कुछ जरुरी बात करने आई हु और मेरा कुछ सामान यहाँ है उसे लेने आई हु.

में, सामान की बात सुनते hi दिमाग में घंटी बज उठती है, कही बुआ डिलडो की तो बात नहीं मर रही: कौनसा सामान बुआ, मेरे कमरे में आपका कोई सामान नहीं पड़ा है..

बुआ, सीधा पॉइंट पर आ कर: देख सनी मुझे पता है की मेरा वो सामान यही पड़ा है जिसे तूने मेरे कमरे से शायद चोरी किया है क्युकी घर में किसी और को उस चीज के बारे में नहीं पता था न hi कोई और मेरे कमरे में वप जगह जनता था जहा मेने उसे रखा हुआ था.

में, अब मुझे भी यकीं हो गया था की बुआ डिलडो की hi बात कर रही है और इसी के साथ मन hi मन ख़ुशी भी थी की लगता है बुआ की छूट ने उन्हें आज सोने नहीं दिया है और इसिलए उसकी गर्मी मिटने वो मुझ पर शक करते हुए डिलडो मांगने आई है: अरे बुआ आपके कमरे में मेरे काम की क्या चीज होगी और चोरी तो क्यों hi करूँगा, मुझे किसी के कमरे से कुछ चोरी करने की क्या जरुरत है.

बुआ: देख सनी तू जितना भोला बन रहा है न उतना है नहीं, ये मुझे अचे से पता है तो अब नाटक बंद मर के मुझे वो लौटा दे..

में: फिर वही बात और ऐसा है तो ये तो बताओ की क्या चीज चोरी की मैंने आपके कमरे से और क्या लौटा दू???

बुआ, झल्लाते हुए : उफ्फ्फ्फ़ ाचा तो तूने मेरे रूम से मेरी कप्बोर्ड में से वो डिलडो छुम वाइब्रेटर नहीं चुराया.

में: क्याआ... ये क्या कह रही हो आप हुआ, में भला उस नकली लुंड को चुरा कर क्या करूँगा?? मेरे वो किस काम का हाहाहा.. वैसे भी मेरे पास तो असली लुंड है अगर आपको वो चाहिए तो दे सकता हु ः..

बुआ, असली लुंड लेने की बात से छूट के होठो में कंपकंपी सी मच गई थी लेकिन जुबान पर गुस्से से भरे स्वर में और मेरे कान खींचते हुए: नालायक इतना बेशरम बन गया है की कुछ भी बोलने से पहले नहीं सोचता है.. आज तेरी साडी अकाल ठिकाने लती हु रुक जा..

में, अपने कान छुवाते हुए: अरे इसमें क्या बेशर्मी अब.. मेरी बुआ मेरे पास अपना डिलडो जो चोरी हुआ उसे मांगने आई है, और मांगते हुए वो नहीं शर्मा रही तो भला में कुछ कहने से क्यों शर्मो, और रही बात आपके डिलडो की तो आपके पास क्या साबुत की चोरी मेने की है.

बुआ: साबुत ये है की तेरे और मेरे अलावा उस डिलडो के बारे में कोई नहीं जनता है, दूसरी बात आज डिनर टेबल पर तूने जान कर के उस बारे में बात करि... अब भोत बाटे हो गई सच सच बोल दे की वो डिलडो तेरे पास hi है..

Me,ye देख की मेने जो सोचा था वो हो hi गया, अब बुआ पर अपना अगला कदम बढ़ाते हुए: ओह्ह्ह तो आप मेरी बातो से समझ hi गयी... हाँ ठीक है ये सच है की मेने आपके रूम से वो नकली लुंड चुराया है जिसे आप अपनी छूट में घुसा घुसा के मस्त होती हो. बस कर लिया मेने स्वीकार अब आप खुश..

बुआ, छूट में डिलडो घुसा मस्त होने की बात से अब शरीर में अलग hi बिजली दौड़ उठी थी: लेकिन क्यों सनी??? आखिर तुझे क्या मजा आया उसे चुराने में?? और अब मुझे वो वापस चाहिए अभी इसी वक्त..

में: क्युकी में देखना चाहता था की आप उसके बिना कितने दिनों तक रह पति है, में देखना चाहता था की मेरी बुआ जो बहार से इतनी कड़क और गुस्से वाली दिखाई पड़ती है वो अपने जिस्म की जरूरतों के आगे कितने दिनों में हार जाती है, और रही बात लौटने की तो इस वक्त आपके गुस्से तो और आपकी कठोरता देख मुझे नहीं लगता की आपको अभी इसकी इतनी जरुरत पड़ने वाली है...

बुआ, मन में, उफ्फ्फ ये लड़का, अब इसे कैसे समझौ की मुझे उस डिलडो कितनी जरुरत है, कितनी बुरी तरह से जल रही है मेरी छूट इस वासना की आग में अह्ह्ह, और अब गुस्सा शांत कर प्यार भरे स्वर में: सनी आखिर क्यों कर रहा है तू मेरे साथ ऐसा, क्यों इतना तंग कर रहा है मुझे, और आज hi नहीं पिछले कितने hi दिनों से तू मेरे साथ ये गन्दा खेल खेल रहा है क्या चाहता है तू मुझसे आखिर बीटा.... और तू ये क्यों भूल रहा है की बहार से में कितनी भी गुस्सैल या कठोर दिखू, अंदर से मेरे शरीर की भी अपनी जरूरते है और अकेली होने के नाते ये डिलडो hi मेरी जरूरते पूरी करने का सहारा है, इसलिए मुझे वो लौटा दे..

में, ः अब आ रही है न बुआ लाइन पर: ाचा तो आका मतलब ये है की इस वक्त आप ये डिलडो लेने के लिए तड़प रही हो और मेरे पिछले दिनों आपकप तंग करने से, आपके अंगो को चुने से आपके शरीर की आग भड़क गयी है...

बुआ, उफ्फ्फ ये लड़का लगता है आज सब सुन कर hi मानेगा: हाँ हाँ हाँ,... यही मतलब है मेरा की पिछले कुछ दिनों से तू जिस तरह मेरे शरीर को और उसके अंगो को अपने हाथो से मसल रहा है और जिस तरह की बाटे तू मुझसे करता है ुस्साब से न चाहते हुए भी मेरे जिस्म में एक अलग hi प्रकार के हिलोरे उमड़ने लगे है और ना चाहते हुए भी मेरा शरीर की जरूरते मेरा साथ न देते हुए मेरे काबू से बहार हो रही है.

में, बुआ जो इस वक्त बिस्तर के पास कड़ी थी उन्हें वही दिवार के सहारे धक्का दे चिपका उनके सामने आते हुए: अच्छा तो अगर आपको मेरा ये सब करना पसंद नहीं आता था तो मुझे थप्पड़ क्यों नहीं मारा, सिर्फ दिखावटी गुस्सा करते हुए रुक क्यों जाती थी.

बुआ, मेरे ऐसे धक्का लगाने से चौकते हुए लेकिन बिना कुछ कहे: यही बात तो मुझे भी नहींपाता की मेने तुझे कभी पिता क्यों नहीं, अगर पिट दिया होता तो बात यहाँ तक आती hi नहीं..

में, अपने हाथो से बुआ को दिवार के सहारे दबोच कर अपना मुँह आगे बड़ा गाउन से बहार दिखाई पद रही नंगी छाती को चूमते हुए: मऊआआह बुआ इसका मतलब आप अभी भी मुज्जे नहीं रोकेंगी न अगर में कुछ करू तो हहह, मुहाः कितना स्वादिष्ट है आपका जिस्म बुआ..

बुआ, मेरे इस कदर चूमने से अब कुछ ज्यादा hi पिघलते हुए और मेरे बालो को खींच मेरे चेहरे को अपनी छाती से दूर करते हुए : उफ्फफ्फ्फ़ कमीने ऐसा कुछ मत कर की हमारा रिश्ता ख़राब हो जाये समझा, अब अगर इस रिश्ते की कदर करता है तो मुझे डिलडो दे दे और जाने दे यहाँ से...

में, एक हाथ को उनकी टैंगो के बिच से गाउन के उप्पेर hi छूट पर रख रगड़ते हुए: हमारा रिश्ता इतना कमजोर नहीं है बुआ जो इतनी आसानी से ख़राब हो जायेगा और अगर न दू डिलडो तो.. क्या कर लोगी आप..

बुआ, छूट पर हाथ महसूस होते हुए hi दोनों टंगे कम्पनी लग जाती है और खड़ा रहना मुश्किल होता हुए, और मुझे जोर का धक्का देते हुए : ुफगफ्फ कमीने हिम्मत भी कैसे हुई तेरी वह हाथ लगाने की अह्ह्ह,, और डिलडो तो तुझे देना hi पड़ेगा आज किसी बी कीमत में..

में, बुआ के धक्का देने से सीधा बिस्तर पर बैठ जाता हु और तभी तकिये के निचे सेउस नकली लुंड यानि डिलडो को बहार निकल बुआ के सामने करते हुए: ाचा अगर इतनी hi हिम्मत है तो ले कर दिखाओ मुझसे ये डिलडो, और वैसे भी मुझे ये समझ नहीं आता जहा आपका भतीजा असली लुंड देने को तैयार है आप इस नकली लुंड के पीछे पड़ी है ः.

बुआ: वो इसलिए क्युकी तुझे तो अब रिश्तो की कदर रही नहीं है, तू ये नहीं देख प् रहा है की में तेरी बुआ हु और तू मेरा भतीजा, लेकिन में तेरे जैसी नहीं बन सकती समझा... पागल इंसान..

में: नहीं, में सच में ये नहीं देख प् रहा क्युकी जहा से में देख रहा मुझे मेरी बुआ नहीं बल्कि मेरे सामने कड़ी एक अकेली प्यासी औरत दिखाई दे रही है जो सालो से चुदाई के लिए तड़पती आ रही है और इस नकली लुंड से अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करती आ रही है..

बुआ, मेरे मुँह से हे सुन अब अचानक hi उनके भावो में बदलाव सा आते हुए: हाँ लेकिन में इतनी कमजोर नहीं हु की अपनी जरूरतों के लिए रिश्तो की बलि चढ़ा दू samjha...ab तू ये बता की मुझे वो डिलडो देगा या नहीं...

में: ाचा पहले मुझे ये बताओ की आपको इस डिलडो की जरुरत है भी या नहीं.. है तो कितनी जरुरत है इस वक्त...

बुआ, उफ्फ्फ्फ़ इस लड़के का क्या करू मैं: तू सुन्ना चाहता है न तो सुन, इस वक्त मुझे इस्सकी सच में जरुरत है, अगर आज इसका उपयपग नहीं किया तो में रात में सो नहीं पाऊँगी और इसी तरह रत भर जलती रहूंगी, मेरे अकेलेपन ने और मेरी मर्जी हो न न होने पे उपरांत भी पिछले दिनों जो तूने मेरे साथ हरकते की है उस वजह से आज मेरा शरीर भोत hi ज्यादा काम वासना में जल रहा है, और अब इससे पहले hi में अपना आप खो दू यु मुझे ये डिलडो लौटा दे.

में, बुआ की चुचिओ को घूरते हुए और अपने एक हाथ से मसलते हुए: ाचा ठीक है में डिलडो तो लौटा दूंगा आपको बुआ लेकिन मेरी एक शर्त है लौटने की...

बुआ, मेरे इस तरह चुकी मसलने और शर्त की बात सुन एक दम से गुस्से में आते हुए और झट्ट से अपनों गाउन की जिप्प जो आगे की तरफ hi थी उसे खोलते हुए जिससे की अब उनकी चूचिया एक काळा रंग की ब्रा में दिखाई पद रही थी, आँखों में गुस्सा लिए बुरी तरह झल्लाते हुए: उफ्फफ्फ्फ़ आखिर तू चाहता क्या है मुझसे, और तेरी ये शर्त में अचे से जानती हु, आज तू अपनी करके hi मानेगा न तो ठीक है, ये ले नोच ले मेरा जिस्म, करले अपनी हवस पूरी में, अब में आह्हः तक नहीं करुँगी और न hi तुझे किसी चिजसे रोकूंगी, ले बेशरम लड़के छोड़ना चाहता है न तू मुझे, ले अब तुझे इजाजत दे रही हु इस बात की भी.. इसके बाद तो तेरी कोई शर्त नहीं रहेगी न... कर ले अपनी हवस पूरी..

में, अचानक से बुआ की तरफ से इस रवैय्ये से तो में भी चौक सा गया क्युकी मेने ये अंदाजा नहीं लगाया था की बुआ कुछ ऐसा कर बैठेगी, और यहाँ कामिनी भाभी की बात यद् करते हुए की राहुल भैया ने भी बुआ से पहले जबरदस्ती hi की थी और कही अब मेरी हरकते भी उन्हें वैसी hi न लगने lage,yahi सोच बिस्तर से उठ कर बुआ के पास जाकर उनके गाउन की ज़िप बंद करते हुए: बुआए बस्स्स... इतना भी गिरा हुआ नहीं लड़का नहीं मैं हु की एक औरत की मर्जी के बिना उसके जिस्म को भोगने की कोशिश करू.. इतने दिनों आपके साथ जो मस्ती की वो इसलिए क्युकी कही न कही मुझे लगा था की शायद आपकी रजामंदी है इसमें चाहे बहार से दिखाई न पद रही हो..

में: बाकि अगर इस तरह आपकी मर्जी के खिलाफ जा कर या जबरदस्ती hi आपके जिस्म को भोगना होता तो ये काम में उसी दिन कर चूका होता जिस दिन पहली बार आपके कमरे में मैंने आपके इस टॉपिक पर चर्चा की थी... आज आपने इस तरह का बर्ताव कर और इस तरह गाउन खोल कर मुझे गलत साबित कर दिया, मेरे प्यार को गलत साबित कर diya..im सॉरी बुआ आज तक जो कुछ हुआ उसके लिए... और हाँ मेरी ऐसी कोई शर्त नहीं थी की आपको मजबूर कर आपके जिस्म का फायदा उठाऊ...

बुआ, मेरी तरह से ये बाटे सुन खुद भी अपने व्यव्हार पर हैरान होते हुए की ये मैंने क्या कर दिया, मेने सनी को भी राहुल की तरह hi समझ उसके साथ ऐसा व्यव्हार किया लेकिन राहुल के विपरीत सनी ने मेरे जिस्म को मसलने की बजे मुझे चुना भी उचित नहीं समझा वार्ना उसके पास आज पूरा मौका था जो उसका मन चाहे वो करने का, और यही सोच सनी की तरफ हैरानी से कन्फ्यूज्ड होते हुए: आखिर तू चाहता क्या है सनी मुझसे??? इतने दिनों से तू मेरे पीछे पड़ा था आज जब में तुझे तेरी मनोकामना पूरी करने दे रही तो तूने अपना अलग hi रूप दिखा दिया, क्यों कर रहा है तू मेरे साथ ऐसा...

में: बुआ हाँ ये सच है की में आपको पाना चाहता हु, आपको अपने इस बिस्तर पर मेरा साथी बना दिन रत भोगना चाहता हु, मुझे आपके एक एक अंग को चखना है प्यार करना है, लेकिन इस तरह आपको मजबूर करके या आपसे जोर जबरदस्ती करके नहीं, ये सब करना होता तो में भोत पहले कर चूका होता..

बुआ, मेरी और एक तक्क देखते हुए: तो आखिर तू मुझसे चाहता क्या है.. तू जनता है न जो तू कह रहा है वो इतना आसानी से संभव नहीं है, हम एक रिश्ते में बंधे हुए हैं, में छह कर भी तुझे शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना सकती हु.

में: मैंने आपसे पहले भी कहा न बुआ की मुझे आपके और मेरे बिच के बुआ भैतिजे के रिश्ते से पहले मेरा एक मर्द होना और आपका एक औरत होना दिखाई देता है, साथ hi ये दिखाई देता है की इस परिवार के प्रति जिम्मेदारियां उठाते हुए आपने अपनी खुशियों और जरूरतों का त्याग किया है, और अब में आपकी बस वही जरूरतों और खुशिओ की पूर्ति करने की कोशिश करना चाहता हु. लेकिन आज आपके इस रवैये ने मुझे गलत साबित कर दिया और मुझे ये समझा दिया की शायद मेरी सोच भले कैसी भी हो पर में एक औरत को कभी ख़ुशी नहीं दे सकता हु.. मुझे ये एहसास दिलाने के लिए शुकिर्या बुआ जी.

बुआ, अब मेरी बातो से पूरी तरह पिघल कर और ये सोचते हुए की हे भगवन ये लड़का मेरे लिए इतना सोच रहा था और मेने इसे इसके बड़े भाई की तरह hi समझ इतना कुछ सुना दिया, और शर्मिंदगी भरी आँखों से : सनी बीटा मुझे माफ़ कर दे, मेरा वो मतलब नहीं था, मेने कभी सोचा hi नहीं की तू ऐसा कुछ भी सोच सकता है मेरेबरे me..mujhe लगा कक तू सिर्फ मेरे शरीर को पाना चाहता है और इसीलिए आज भी तूने ये सब हरकते की...

में: बुआ इसमें कोई गलत बात नहीं की में आपको पाना नहीं चाहता हु लेकिन इस तरह से नहीं, मुझे लगा था की डिलडो चुराने के बाद शायद मुझे आपकी जरूरते और अचे से समझ में आने लगेंगी और आपको मानाने में आसानी होगी लेकिन अपने तो कुछ और hi कह और कर दिया आज.. में इतना घटिया लड़का भी नहीं हु बुआ की आपको मजबूर करके मजा lunga..ye रहा आपका डिलडो आप लेजैये और आइंदा में आपको बिलकुल तंग नहीं करूँगा ी प्रॉमिस...

इससे पहले की अब में कुछ और कहता, मेरे होठो पर बुआ के गरम नरम होठ आ चुके थे और उन रसीले होठो की गर्मी और रास ने मेटे होठो को इस तरह कास के अपनी पकड़ में जकड लिया था की मुझे अचानक से हुए इस हमले से सँभालने तक का वक्त नहीं मिला...

कुछ देर के इस चुम्बन के बाद बुआ मुझसे अलग होती हैं और में बुआ के इस हमले को अब भी समझने की कोशिश करते हुए उन्हें देखते हुए चुप चाप हैरान खड़ा था..

बुआ, मुस्कुराते हुए: सनी मन की अब भले तू आगे मुझे तंग नहीं करने का वडा काट रहा है लेकिन अगर तेरी ये बुआ चाहती हो की तू आगे की मुझे वैसे hi तंग करता रहे तो...

में, अब ये सुन चौकने की बरी मेरी थी: क्या??? बुआ आप ठीक तो हो न... औरअगर ये आपकी कोई नयी चल है तो माफ़ी चाहता हु अब में आपसे ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं करने वाला हु.. आप जाइये यहाँ से..

बुआ, मेरे करीब आते हुए: नहीं सनी अब तक शायद मेने तुझे गलत समझा, ये समझा की तू सिर्फ मेरे जिस्म को पाना चाहता है और कुछ नहीं लेकिन अभी तूने ये जो बाटे कही उससे आज जिंदगी में पहली बार मुझे ये एहसास हुआ है की कोई मुझे एक औरत होने के नाते प्यार करता है, मेरे व्यक्तित्व को चाहता है न की सिर्फ मेरे शरीर और अंगो की तरफ आकर्षित हुआ है..

में, अब भी कंफ्यूज होते हुए: लेकिन फिर आपकी वो रिश्ते वाली बाटे... मेरा आपका भतीजा होने और वो सबब्ब...

बुआ, मुझे देख स्माइल करते हुए: तूने hi तो कहा न hi बुआ भेतजा होने से पहले हम एक औरत और एक मर्द है, और मर्द और औरत के बिच में प्यार, कामुकता और वासना होती है बस इसके अलावा कोई और रिश्ता नहीं...

में, बुआ की ये बात सुन अब उन्हें कास के अपनी तरफ खींच उन्हें बहो में जकड दोबारा उनके होठो को अपने होठो पर रख देता हु और उनके गरम नरम मुलायम से होठो को पूरी तरह से चूस कर सारा रास निचोड़ अपनी जीभ को उनके मुँह में दाल उनकी जीभ से टकराते हुए गहरा सा चुम्बन लेलेता हु..

में, चुम्बन तोड़ उनकी चुकी को हाथ में पकड़ सहलाते हुए: मुउउउउआअह बुआ पता नहीं कब से आपके इन रसीले होठो का रास पीना छह रहा था आखिर आज वो िस्व्हा भी पूरी हुई...

बुआ: हहै मेने भी आज पता नहीं कितने hi महीनो बाद किसी मर्द के होठो से अपने होठ मिलाये है उफ्फ्फ्फ़...

में, डिलडो छुम वाइब्रेटर को हाथ में पकड़ चालू कर उनकी छूट पर गाउन के उप्पेर से hi रख कर दबाते hue:haha बुआ, क्या अब भी आपको आज रत इस नकली लुंड की जरुरत है या अपने इस भतीजे को आजमाना चाहेगी..

बुआ, छूट पर डिलडो के कम्पन के कारन मेरी बहो में चिपकते हुए: अह्ह्ह्हह सनी उफ्फ्फ आज की रात आखरी बार मुझे इस नकली लुंड से काम चला लेने दे, असली लुंड को में इतनी साधारण तरीके से नहीं चखना चाहती हु, उसको चखने

से पहले में कुछ और भी है जो करना चाहती हु..

में, छूट पर वाइब्रेटर को दबाते हुए और साथ hi एक हाथ से बुआ की चुकी को कास के दबोचते हुए: ाचा ऐसा क्या है जो आप करना चाहती है बुआ असली लुंड को चखने से पहले..

बुआ, छूट पर वाइब्रेटर और हाथो से व्हुची मसली जाने से पूरी तरह बेकाबू होते हुए: ओह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ सुननयीयीय मममममम अह्ह्ह्हह है कुछहहह जरूररीई और आवश्यक काम जो तुझे भोत जल्दी पता चल जायेंगे अह्ह्ह्हह अभी मममममुफफ्फगगफ ओह्ह्ह्ह में झड़ने वाली hu.uffff मई गयी अह्ह्ह्हकरते हुए बुआ वही खड़े खड़े मेरी बहो में लिपटी हुई hi छूट से काम रास बहा देती है.

बुआ: ओह्ह्ह सनी मममम पता नहीं कितने दिनों से इस रास के बहने का इंतज़ार कर रही थी, जब से ये डिलडो तूने चुराया तब से तड़प रही थी मैं हहै..

में: ः आपको इसी तड़प का एहसास करवाने के लिए तो चुराया था मेने इसे बुआ,, ाचा अब ये बताओ की किस आवश्यक काम की बात कर रही थी आप..

बुआ: कहा न बस थोड़ा इंतज़ार कर लो सनी, उसके बाद इस नकली लुंड की बजे में खुद अपनी मर्जी से तुम्हे ये हक़्क़ दूंगी की तुम अपना ये असली लुंड मेरी छूट में पेल दो.. अभी इसके बारे में कुछ मत पूछो बस..

में, बुआ की चुचिओ को मसलते हुए: ः ठीक है बुआ जब इतना इंतज़ार किया है उसने एक दो दिन और सही.. लेकिन हाँ एक दो दिन से ज्यादा अब मुझसे इंतज़ार नहीं हो पायेगा ः..

बुआ: हहै हाँ ठीक है, वैसे भी अब जब मेने भी मन बना लिया है तो इंतज़ार मुझसे भी नहीं होने वाला है.. चल अब फिलहाल में जाती हु अपने कमरे में अब bye..

में, डिलडो अपने पास रखते हुए: ः ठीक है जाइये बुआ लेकिन अब आपको ये डिलडो नहीं मिलेगा वापस, में नहीं चाहता की अब आगे से आप इसका उपयोग करें.

बुआ: हहै अब मुझे भी इसकी जरुरत नहीं है क्युकी अब मेरे पास मेरा भतीजा जो है हहै.. चल अब bye... और ये बोल बुआ और में एक और बार होठो से होठ लगा चुम्बन का मजा ले अलग होते है..

कमरे में पहुंच बुआ मन hi मन ये सोचते हुए सो जाती है की कहा तो में आज सनी को उसकी हरकतों के लिए डांटने और रोकने के लिए गयी थी और कहा hi उसके लुंड को अपनी छूट में ले उसकी होने का वादा करने चली आई हहै उफ्फ्फ्फ़ वाकई इस लड़के की बात hi अलग है, बचपन से hi इसने किसी न किसी तरीके मेरे शरीर को मजा दिया है हहै, अब मेरी बरी है सनी को असली मजा देने की और बस इन आने वाले एक दो दिन में उसे जिंदगी का सबसे हसीं मजा देने की कोशिश करुँगी हहै..

अगले दिन सुबह सुबह भाभी मुझे जगाने को मेरे कमरे में आती है..

भाभी: सनी उठो भी, कॉलेज नहीं जाना है क्या आज..

में, कसमसाते हुए नींद से जागते हुए: ओह क्या भाभी आप भी न इतनी मस्त नींद आ रही थी..

भाभी: हहै देवर जी ऐसा किसके सपने में खोये थे जो आप आज उठना भी भूल गए, रोज तो खुद से जग जाते हो आज इतनी देर तक सोये हुए हो..

में, भाभी जो इस वक्त नाहा कर तारो तजा हुए एक मस्त सी साड़ी में डीप ब्लाउज पहने मुझे इतने आई थी, उन्हें हाथ पकड़ अपने उप्पेर खींचते हुए: और किसने सपने देखेगा आपका ये देवर, जिसके पास इतनी मस्त हसीं माल भाभी हो ः..

भाभी: हेहेहे ाचा जी, अब सुबह सुबह ये सब छोड़िये और उठिये देर हो रही है.

में, करवट ले भाभी को अपने निचे लेट हुए और साड़ी का पल्लू साइड करते हुए ब्लाउज के साथ hi चुकी को मुँह में भर: ंमंमं भाभी जब बिस्तर में इतना गरम माल हो तो उठते नहीं बल्कि उस माल को अपने निचे ले रगड़ते है..

भाभी, मेरे गले में अपने दोनों हाथ दाल प्यार से लिपटते हुए: हैए देवर जी, वो औरत भी कभी उठना नहीं चाहेगी जिसके पास आप जैसा मजेदार देवर हो लेकिन इस वक्त मुझे कॉलेज के लिए देर हो रही है और निचे सब ब्रेकफास्ट पर इंतज़ार क्र रहे है..

में, भाभी के होठो को चुम: मुउउउउउआअह तो उन्हें उनका ब्रेकफास्ट करने दो में मेरा ब्रेकफास्ट कर रहा हु अपने बिस्तर में ः... वैसे क्या बात है एक रात आई आप तो बस मेरे पास लगता है भैया से नाराज़गी ख़तम हो गई..

भाभी: हहै, नहीं ख़तम तो नहीं हुई वो क्या है न दो दिन से सीमा के कमरे में सो रही हु उसे कुछ जरुरी बाटे करनी थी मुझसे इसलिए..

में: दीदी के साथ जरुरी बाटे?? सब ठीक तो है न, मुझे भी दीदी कुछ परेशां स्याग रही थी..

भाभी: अरे हाँ सब ठीक है ऐसी भी कोई चिंता की बाटे नहीं, बस कुछ हम औरतो वाली बातें थी हहै...

में, इस बात पर भाभी के ब्लाउज के साथ hi चुकी को दोबारा मुँह में भर काट ते हुए: ममममम फिर ठीक है वैसे मन तो भोत कर रहा है अभी आपको रगड़ने का भाभी, साड़ी में क्या मस्त माल लग रही हो अभी..

भाभी, मुझे धक्का दे अपने उप्पेर से हटते हुए: चलो हटो जी हहहए.. माल हु तो माल तो लगूंगी hi न अब में हहै, ऐसे hi थोड़े मेरे देवर मेरे जिस्म के दीवाने हुए पड़े है.

में: ः कामिनी रैंड भाभी, मर्द को कैसे रिझाना है भोत अचे से पता है आपको..

भाभी: हहै ाचा चलो अभी भोत बाटे हो गई आज रत आउंगी आपके पास अचे से रगड़ देना, में भी प्यासी हु दो दिनों से ठीहे, अब जल्दी से तैयार हो निचे आजाओ..

और ये बोल भाभी निचे चली जाती है और में लुंड सहलाते हुए ये सोचते हुए की उफ्फ्फ क्या मस्त माल भरे पड़े है मेरे घर में, एक तरफ भाभी है, एक तरफ बुआ और एक तरफ माँ उफ्फ्फ तीन तीन मजेदार भरे हुए माल तो एक तरफ प्रीति एक दम कैसा हुआ माल haha..isshhh चलो भाई अब तैयार होते hai..or इसी के साथ में बाथरूम में घुस रेडी हो ब्रेकफास्ट करने निचे पहुँचता हु. देर से जागने के कारन बुआ और बाकि लोग ऑफिस जा चुके थे और प्रीति भी बस कॉलेज के लिए भाग hi रही थी की मुझे फोटोशूट यद् आ गया...

में, निचे पहुंच प्रीति की और देख: गुड मॉर्निंग एवरीवन, गुड मॉर्निंग चुड़ैल...

प्रीति: इत्ती लेट हो रही तेरी मॉर्निंग आज भी नालायक...

में: मेरा यही टाइम है, और बजवास चोर ये बता मेरे फोटोशूट का क्या हुआ, पसंद आया होगा न सबको, देखते hi तुझे सेलेक्ट भी कर लिया होगा और इसे देखो थैंक्स बोलने का भी टाइम नहीं, मतलबी कही की..

प्रीति: ोये तू होगा मतलबी समझा, और रही बात थैंक्स की तो अभी फाइनल सिलेक्टेड उम्मीदवारों के नाम नहीं घोषित हुए है, सोमवार तक होंगे समझा. अगर सिलेक्शन हुआ तो थैंक्स बोलने की सोचूंगी वार्ना तू मेरे किसी काम का नहीं हहै, अब चल bye मुझे देर हो रही है.

और इतना बोल प्रीति कॉलेज के लिए रवाना हो जाती है और में भी अपने कॉलेज को भाग जाता हु.
 
अपडेट-33


दोपहर के समय घर में माँ और सीमा दीदी को चोर बाकि सभी सदस्य या तो ऑफिस या कॉलेज में होते हैं. माँ और सीमा दीदी भी इस वक्त लंच करने के बाद अपने अपने कमरे में जा चुके थे. यहाँ माँ इस वक्त अपने कमरे में लेते हुए आराम hi कर रही होती है की उनके फ़ोन पर घंटी बज उठती है और कॉल किसी और का नहीं बल्कि आज भी उसी कॉलर का hi था.

फ़ोन की स्क्रीन पर वो नाम देखते hi एक बार तो माँ ये सोच कर चैन की सास लहेति है की इस वक्त घर में और कोई मौजूद नहीं है सिवई सीमा के और वो भी अपने कमरे में है. लेकिन फिर भी इस कॉलर की अचे से खबर लेने का मन बनाते हुए कॉल रिसीव करती हैं...

महिमा: hello...

कॉलर: हैए क्या अलग hi नशा है आपके मुँह से hello सुनने का भी, सच महिमा जी आपको बता नहीं सकता हु मैं की आपसे बात करना कितना मिस करता हु मैं ः.

महिमा: अपनी ये बकवास बंद करो और ये बताओ की मेरे मन कहने पर भी तुमने फिर फ़ोन क्यों किया, इतनी बार कहा कुछ समझ नहीं आता क्या तुम्हे..

कॉलर: नहीं आता इसीलिए तो, और कैसे समझौ अपने मन को जो बस अब आपके लिए hi बैचैन रहता है हमेशा..

माँ: उफ्फ्फ्फ़ तुमने फिर शुरू कर दी अपनी बकवास, अब जल्दी से ये बताओ की फ़ोन क्यों किया है.

कॉलर: अरे इतनी भी जल्दी क्या है महिमा जी, वैसे भी आज तो आप घर वालो के होने का बहाना भी नहीं कर सकती हैं क्युकी मुझे अचे से पता है की दिन के इस समय आप और आपकी बड़ी बेटी के अलावा घर में कोई भी नहीं होगा हैं न...

महिमा, इसे अब ये भी पता है उफ्फ्फ: हाँ सही कहा तुमने पर फिर भी में अनजान लोगो से बिना मतलब की बाटे करना पसंद नहीं करती, मुझसे बात करनी है तो पहले मुझे अपनी पहचान बताओ.

कॉलर: ः महिमा जी, क्या इतनी पहचान काफी नहीं हैं की में कोई आपका अपना hi हु, हम किसी न किसी पारिवारिक रिश्ते में बंधे हुए है, क्या ये काफी नहीं है..

महिमा: hi नहीं बिलकुल काफी नहीं है, रिश्ते तो अलग अलग प्रकार के भोत होते है अब इसमें ये कहा पता चलेगा की तुम कोनसे रिश्तेदार हो.

कॉलर: कोई बात नहीं महिमा जी वो भी बता दूंगा जल्दी hi, फिलहाल ये बताइये की कैसी हैं आप, कितने दिनों बाद बात हो रही है आज हमारी ः.

महिमा, चिढ़ते हुए: मुझे क्या हुआ है में ठीक हु और तुम्हे मेरी खबर करने की कोई जरुरत नहीं है समझे.

कॉलर: अरे जरुरत कैसे नहीं है, उल्टा मेरी रिश्तेदार होने के साथ साथ मेरे दिल और दिमाग में बसने की वजह से आपकी खबर रखना और ज्यादा जरुरी हो गया है ः.

महिमा: उफ्फ्फ्फ़ तुम कब इस बात को समझोगे की तुम जो सोच रहे वैसा हमारे बिच कुछ नहीं होने वाला है चाहे कुछ भी कर लो और खुद कहते हो की मेरे करीबी रिश्तेदार हो तो उसी रिश्ते का लिहाज hi कर लो..

कॉलर: ः महिमा जी, उसी रिश्ते का लिहाज है इसलिए तो आपको पाने की हसरत रखते हैं हम, वो कहते है न अपनों से मिलने वाला प्यार कोई पराया नहीं दे सकता.

महिमा: अगर तुम ये सोच रहे हो तो कह देती हु भोत पछताने वाले हो क्युकी मुझसे तो किसी तरह की कोई उम्मीद रखना भी मत.

कॉलर: ः महिमा जी खैर वो तो आगे आने वाला समय बताएगा, वैसे इजाजत हो तो एक बात पूछ सकता हु क्या आपसे.

महिमा: इतनी बार फ़ोन न करने का कह चुकी तब तो मने नहीं हो अब अगर में इजाजत न भी दू तो तुम कौनसा पूछने से रुकने वाले हो..

कॉलर: ः वाह महिमा जी, आप तो धीरे धीरे काफी कुछ समझने लगी है मेरे बारे में..

महिमा: बस बस अब जो पूछना है वो पूछो जल्दी से..

कॉलर: दरअसल मेने सुना और देखा है की अक्सर शादी के कुछ सालो बाद, खासकर आपके जैसी स्तिथि में जिनकी शादी को इतने साल हो चुके, चार चार बच्चे हो चुके हैं वो भी पूरी तरह परिपक्व, तो ऐसी स्थिति में एक शादी शुदा दम्पति अपने साथी से बोरियत सी महसूस करता है और कही न कही जिंदगी के इस एहम पड़ाव पर कुछ कमी सी महसूस करता है, क्या आप भी अपने पति की तरफ से उस कमी को महसूस करने लगी हो...

महिमा, कॉलर की बात को पूर्ण रूप से समझने के बाद भी: क्या मतलब तुम कहना क्या चाहते हो साफ साफ कहो..

कॉलर: अब इतनी भी नासमझ नहीं हैं आप महिमा जी, हाँ अगर आप मेरे मुँह से hi सुन्ना चाहती है तो ठीक है, मेरे कहने का तात्पर्य ये था की सुहागरात से ले कर आज चार बच्चो की माँ बनने तक के सफर में आपने अपने पति के hi साथ सम्भोग का आनंद लिया होगा हैं न..

महिमा: हाँ तो हर पत्नी अपने पति के साथ hi ये कार्य करती है इसमें नया क्या हैं...

कॉलर: अरे कहा महिमा जी, यही तो मैं पॉइंट हैं मेरी बात का,, आजकल तो एक जोड़ा अपने दांपत्य जीवन में साथी को चोर पराये किसी इंसान से सम्बन्ध बनाने का शोक रखता हैं, पति और पत्नी दोनों hi कुछ सालो में एक दूसरे से बोर होने लग जाते हैं और आपस में सम्भोग नाम मात्रा का रह जाता हैं ः..

महिमा, इन बातो से इनदिनों अपने पति द्वारा उसे प्यार न देने को बात को जोड़ते हुए: तो तुम कहना क्या चाहते हो की में भी उन सभी जैसे बहार किसी पराये मर्द से.. की... तुमने ये सोचा भी कैसे, इतनी घटिया सोच और बकवास दिमाग वाले इंसान हो तुम...

कॉलर: ः महिमा जी मैंने तो ऐसा कुछ कहा hi नहीं में बस एक साधारण रूप से चली आ रही बात बता रहा हु, लेकिन हाँ ये बात जरूर है की मुझे पता नहीं क्यों आपके पति पर डाउट है की क्या वो आज भी आपको उतना संतुष्ट कर पते होंगे ः, अब आप ठहरी इतनी कामुक और गरम औरत, चार बचे होने के बाद भी वक जवान लड़की से ज्यादा नशा है आपके जिस्म में, और क्या इस नशीले जिस्म को आपके पति सही से ठंडा कर पते होंगे ः..

Mahima,man में, ( उफ़ अब इसे क्या बताऊ की पिछले कितने दिनों से मैं खुद संतुष्टि के लिए तड़प रही हु और इसकी बाटे सही है की अब मानव मुझे वैसा शारीरिक सुख नहीं दे रहे हैं), लेकिन इस वक्त अपनी आवाज में गुस्सा दिखते हुए: जस्ट शट उप, और बकवास नहीं सुनूंगी मैं तुम्हारी समझे.. और रही बात मेरे पति और मेरे रिश्ते की तो वो आज भी बिलकुल वैसा hi है जैसा शुरू से था और में उनसे पूरी तरह खुश और संतुष्ट हु समझे..

कॉलर: ः महिमा जी, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की आप ये बात सिर्फ ऊपरी मन से कह रही है और आपका अंतर्मन आपके साथ नहीं है, मुझे तो ऐसा लग रहा है की आप बुरी तरह से तड़प रही हैं संतुष्टि पाने के लिए और कही न कही आपके पति जो इतने बड़े बिजनेसमैन है, अपनी व्यस्तता के कारन अब आपको उतना वक्त नहीं दे प् रहे हैं..

महिमा, उफ्फफ्फ्फ़ इसकी हर एक बात बिलकुल सही है लेकिन इसको इतना सब कैसे समझ आ रहा है मेरी जिंदगी के बारे में, हे भगवन ये कौन है आखिर: जी नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है और अपने दिमाग में ये उलटे सीधे ख्याल लाना बंद करो समझे.. और अगर तुम कही ये सुन्ना चाहते हो की हाँ में अपने पति से खुश नहीं हु और इस बात का फायदा उठा कही तुम्हे कुछ मौका मिल जाये तो ऐसा नहीं होने वाला है, मुझे मेरे पति और परिवार से भोत प्यार है इसलिए तुम्हारी इस घिनौनी हरकतों में नहीं फसने वाली हु..

कॉलर: ः महिमा जी रिश्तेदार होने के नाते में भी तो आपके परिवार से hi जुड़ा हु, तो अब आपका प्यार पाने का हक़ तो मैं भी रखता हु और रही बात मौका परास्त हो कर फायदा उठाने की, तो आपनिशिल्ट रहिये मैं उन लोगो में से नहीं हु, उल्टा उसके विपरीत मैं तो खुद से अपने लिए ऐसा मौका बनाऊंगा की आप स्वयं मुझे कहेंगी की मुझे तुम्हारी जरुरत है, तुमसे मिलना चाहती हु और तुम्हे मुझे प्यार देने का हक़्क़ देना चाहती हु हाहाहा.

महिमा, उफ्फफ्फ्फ़ कितना बेशरम इंसान है ये : अपनी ये घटिया ख्याली पुलाव वाली बाटे दिमाग से निकल दो मेने कितनी बार कहा की ऐसा कभी नहीं होने वाला है तुम्हे समझ नहीं आता क्या..

कॉलर: नहीं आता समझ और आखिर आये भी कैसे, अगर आपको में इतना hi घटिया लगता और मेरी बाटे इतनी hi चुभ रही होती तो जवाब देने के बजे फ़ोन काट चुकी होती और घर में आपके दो जवान बेटे है, इतना होशियार पति है किसी से भी मेरे द्वारा तंग किये जाने की शिकायत कर चुकी होती न.. लेकिन नहीं आपने ये नहीं किया अब इस बात का में क्या मतलब निकलू महिमा जी..

महिमा, उफ्फ्फ वैसे इसने बात तो सही कही मैंने क्यों कभी ऐसा करने की नहीं सोची और को हमेशा इसके फ़ोन को अटेंड कर साडी बकवास सुनती आ रही हु: हाँ वो इसलिए क्युकी तुमने कहा की तुम मेरे रिश्तेदार हो और में नहीं चाहती की घर वालो से बात कर में किसी भी तरह के रिश्ते में कड़वाहट लौ...

कॉलर: ः यही बात है या मेरी दूसरी बात सच की कही आपके पति अब आपको वो मजा नहीं देते हैं और शायद चाहे फ़ोन पर hi सही कोई हैं जो आपका इतना पागलो जैसे दीवाना हुआ पड़ा है और ये जान आप उसे खोना नहीं चाहती हैं..

महिमा, उफ़ मन्ना पड़ेगा ये जो भी है, हैं भोत स्मार्ट और होशियार, हमेशा मुझे अपनी बातो में फसा लेता है: जी नहीं जनाब ऐसा कुछ भी नहीं है समझ आप और मैंने तुमसे पहले भी कहा न की में अपने के साथ पूरी तरह से खुश हु...

कॉलर: ाचा ठीक है मैं आपकी बात मान लूंगा लेकिन उसके लिए आप मुझे ये बताइये की आपके पति ने आपको आखरी वक्त कब छोड़ा था.. कल रत, परसो रत, आज सुबह या कब...

महिमा: ः और तुम्हे लगता है की मेतुम्हेँ ये बात का जवाब दूंगी?? में भला मेरी निजी जिंदगी की बाते किसी अनजान के सामने कैसे खोल दू, तुमने सोचा भी कैसे...

कॉलर: हाहाहा तो इसका मतलब मैं ये समझू की में सही था की अब आपके पति को आपके इस जवान भरे हुए कामुक हसीं जिस्म में कोई दिलचस्पी नहीं रही...

महिमा, उफ्फ्फ अगर मेने इसको नहीं बताया तो मेरा मजाक बन जायेगा और इसकी बता साही साबित होगी, लेकिन ये जो कह रहा वो कुछ हद तक है भी तो सही, मानव अब कहा पहले जैसे मुझे ख़ुशी देते हैं: ऐसा कुछ भी नहीं है समझे और रही बात तुम्हारे सवाल के जवाब की तो परसो रात hi हमारे बिच सम्भोग हुआ था.

कॉलर: ाचा और परसो रात का ये सम्भोग कितनी रातो के बाद हुआ था ये भी तो बताइये न..

महिमा, उफ्फ्फ्फ़: अब वो जान कर क्या करोगे तुम, मैंने तुम्हारा जवाब दे दिया न...

कॉलर: अरे बस जवाब दीजिये न, वडा करता हु अगर मुझे संतुष्टि भरा जवाब मिला तो और कुछ नहीं पूछूंगा...

महिमा, अब इसे कैसे बताऊ की डेड से दो हफ्ते होने को आये मानव ने मुझे पूरी मस्ती में छोड़ा हो इस बात के: उफ्फ्फ्फ़ ठीक है, परसो रात से तीन दिन पहले हुआ था हमारा सम्भोग..

कॉलर: क्या.. तीन दिन के अंतराल के बाद आपको छोड़ा आपके पति ने और परसो के बाद आज तक फिर आप नहीं चूड़ी, इसका मतलब हफ्ते में आप दो से तीन बार चुद रही हो हैं न...

महिमा, उफ्फ्फ दो या तीन बार भी होती तो में खुश होती यहाँ तो दो हफ्ते में एक बार मेरी चुदाई हो रही है: हम्म्म्म हाँ कह सकते हो ऐसा hi कुछ...

कॉलर: माफ़ करना महिमा जी लेकिन यहाँ मेरी बात सच साबित हो रही है की एक दम्पति के बीचबच वक्त के साथ सम्भोग और काम वासना का ये खेल धीमा पड़ने लगता है... और आपके केस में मुझे ये भी पक्का यकीं है की ये ढिलाई आप जैसी कामुक महिला की तरफ से ना हो कर आपके पति की तरफ से हो रही होगी क्युकी मेरा तजुर्बा कहता है की आप आज भी चुदाई के लिए उतनी hi उत्तेजित, उत्साहित और तैयार रहती है जितनी की पहले भी रहती होंगी, या शायद अब कही पति से सुख न मिलने पर आपकी वासना की आग और ज्यादा भभकने लग चुकी है हैं न ः..

महिमा, अह्ह्ह्ह इसकी हर बात इतनी सही कैसे है, बिलकुल सही कहा इसने की मुझे तो रोज चुदाई करवाने का मन होता है लेकिन मानव hi है जो अब मुझे हफ्ते में एक बार भी चुदाई का सुख देना जरुरी नहीं समझते है लेकिन में इसकी बातो पर अपनी हामी नहीं भर सकती हु..: मैंने तुमसे पहले भी कहा न ऐसा कुछनही है और पहले की बात अलग थी अब घर परिवार की जिम्मेदारियां भी तो आती है न माँ बाप पर, और उन जिम्मेदारियों के बिच कभी कभी इन छोटी मोती बातो से समझौता करना पड़ता हाउ समझे..

कॉलर: ः महिमा जी रात में कौनसा जिम्मेदारी उठती हैं आप, रात तो हर औरत अपने मर्द के साथ गुजरती है और मेरा तो मन्ना है की अगर रात में औरत को अचे से रगड़ के छोड़ दिया जाये न तो अगले दिन सुबह अलग hi एनर्जी के साथ शुरू होती है और पूरा दिन दोनों का hi मस्त गुजरता है, दिन की थकन दूर करने का सबसे ाचा तरीका हैं चुदाई तो, जितना ज्यादा मसलो एक दूसरे को उतनी थकन दूर होती hain..agar अप्पके पति की जगह मैं होता न तो आपको..

अभी कॉल चल hi रहा होता हैं की महिमा के कमरे का दरवाजा बहार से सीमा खटखटा देती है..

Mahima,man में, उफ्फ्फ्फ़ काश मानव भी इन बातो को समझ पते हैए, और दरवाजे पर हुई दस्तक से मन के कोने से एक निराशा भरी आवाज आई की अभी कौन होगा काम से काम ये तो सुन लेने दिया होता की ये शख्स अगर मानव की जगह होता तो मेरे साथ क्या करता अह्ह्ह: अब भोत बकवास हो गयी समझे, अब में फ़ोन रख रही हु दरवाजे पर कोई है.. bye और दोबारा फ़ोन मत करना मुझे...

कॉलर: ः ठीक है bye महिमा जी, दोबारा बात करने का इंतज़ार रहेगा मुझे..

और यहाँ महिमा भी ये सोचते हुए की ये जो कोई भी है मुझे जल्दी hi पता लगाना होगा, पर वैसे जो कोई भी हो हैं भोत स्मार्ट और होशियार, औरत को कैसे बातो में लाना है अचे से जनता है, पता नहीं मेरे साथ क्या करने की बात कहने वाला था, मुझे पता है ये दोबारा कॉल तो पक्का करेगा, तभी पूछ लुंगी.. और इसी के साथ दरवाजे को खोल देती हैं..

दरवाजे पर सीमा दीदी कड़ी हुई होती है जो रश्मि से मिलने के लिए घर से बहार जा रही थी तो माँ से मार्किट से कुछ जरुरी सामान खरीदने की लिस्ट बनवाने आई हुई थी, और कुछ देर माँ के साथ उनके कमरे में रुकने के बाद दीदी घर से निकल रश्मि से मिलने चली जाती है.

शाम होते होते मौसम ने भी अलग hi रूप ले लिया था, आसमान में बदलो ने शिरकत करना शुरू कर दिया था और ठंडी हवा के चलनके साथ एक सुहाना सा वातावरण हो चूका था. इस मौसम का लुत्फ़ उठाने का सोच में अभी टेरेस पर पंहुचा hi था की वह एक इंसान पहले से मौजूद था और वि थी मेरी अपनी रागिनी बुआ.

बुआ को देखते hi पिछली रत को हुआ वो पूरा वाकिया मेरे सामने आजाता है और इस वक्त बुआ को इस हसीं सुहाने मौसम में अकेला प् कर मेरे मन में लड्डू फूटने लग पड़ते है. मेरी उपस्तिथि से अनजान बुआ इस वक्त टेरेस के एक तरफ इस तरह कड़ी थी की उनका चेहरा मुझसे विपरीत दिशा में था.

एक हरे रंग के कुर्ते और काळा रंग की लेग्गिंग पहने बुआ इस वक्त ऐसे कड़ी थी जिससे अब उनके चूतड़ बिलकुल मेरे नज़रो के सामने थे जिन्हे देख मैं चुपके से उनके पीछे जा कर अपने हाथ उनकी कमर में डालते हुए कस के जकड लेता हु और साथ hi अपने लुंड के दबाव को उनके चूतड़ों पर डालते हुए कुर्ते की साइड से गले को चुम लेता हु..

अचानक से मेरे द्वारा किये गए इस हमले से बुआ चौक सी जाती है और चिल्लाने hi वाली होती है की तभी मेने अप्पन हाथ ले जा उनके मुँह पर रख दिया...

में: ः बुआ में हु सनी, इतना क्यों घबरा गयी आप..

बुआ, अपनी तेज साँसों को थमते हुए मेरा हाथ मुँह से हटा कर: उफ्फ्फ्फ़ सनी तूने तो मुझे डरा hi दिया था ये कौनसा तरीका है भला..

में, वापस अपने हाथो को उनकी कमर पर लेट हुए पेट सहला कर: ः बुआ क्या करू अब, इस सुहाने मौसम में आपको यहाँ खड़ा पाया तो बस थोड़ी मस्ती सूझ गयी..

बुआ, मेरे हाथो को पकड़ : उफ्फ्फ ये क्या कर रहा है सनी हम टेरेस पर है इस वक्त, किसी ने देख लिया तो पंगे हो जायेंगे चोर मुझे..

में, अपने लुंड का दबाब चूतड़ों पर दबाते हुए: अरे तो इसमें क्या है बुआ, कोई देख भी ले तो में अपनी बुआ को हुग कर रहा हु बस इसमें क्या गलत है..

बुआ, अपने चूतड़ों पर मेरे लुंड का एहसास पते hi खुद से चूतड़ों को पीछे की तरफ लुंड के पास करते हुए: हहै हुग कर रहा है या हुग के बहाने तू मुझे मसलने के तरीके ढूंढ रहा है सनी...

में, अपने एक हाथ को उनकी चुकी पर ले जा दबाते हुए: हाँ तो अब जिसके पास इतनी मस्त माल कड़क और जवानी से भरी बुआ हो उसे मसाले नहीं तो क्या करे ः.. वैसे भी कल रात आपने खुद आपकी तरफ से पहल कर मुझे ये सब करने का हक़्क़ दिया है न अब तो ः..

बुआ, चुचिओ पर दबाव और चूतड़ों पर लुंड की घिसाई से गर्म होते हुए: उफ्फफ्फ्फ़ बीटा हाँ हक़्क़क़ दिया है मेने लेकिन मेने ये भी कहा था की अभी पूरा हक़्क़ पाने के लिए तुझे कुछ वक्त का इंतज़ार करना पड़ेगा, और वो वक्त अभी ख़तम नहीं हुआ है समझा...

में: मममम बुआ तो ख़तम करो उस वक्त को, मेने कहा था न की अगर मेरे काबू से बहार हो गया तो में बिना इंतज़ार किये उसी वक्त आपकी टंगे फैला अपना ये लुंड आपकी छूट में पेल दूंगा..

बुआ: उफ्फफ्फ्फ़ तो तुझे क्या लगता है इतने सालो से जो में इंतज़ार कर रही उसके बाद मुझे भी तेरा साथ मिल रहा है, मेरा मन नहीं हो रहा होगा तुझसे प्यार पाने का क्या... लेकिन में हमारे इस मिलान को हमेशा के किये यादगार बनाना चाहती हु और बस उसी लिए तुझे एक या दो दिन रुकने को कह रही हु सनी..

में, लुंड को एडजस्ट कर बुआ की गांड की दरार में दाल: अह्ह्ह्ह लेकिन बुआ मेरा ये लुंड नहीं मंटा है न अब इसे तो बस जल्द से जल्द मेरी रागिनी बुआ की छूट में घुसना है...

बुआ: िष्ठ्हह सनी ऐसी बाटे कर मुझे और न गरम कर वैसे hi अब डिलडो उसे करना तो बंद करवा दिया है तूने हहै...

में: ः बुआ अगर आप मुझे इंतज़ार कर तडपाओगी तो में भी उस वक्त तक आपको ऐसे hi गरम करता रहूँगा, जिससे जब हमारा मिलान हो तो वो सुख अपने चरम पर होगा..

बुआ: मममममम उफ्फ्फ सनी बस अब मुझे चोर दे न तेरे लुंड की रगड़ से अब छूट में खुजली होने लगी है मत कर अभी प्लस अह्ह्ह..

में, तेजी से दो तीन बार लुंड को गांड में रगड़ कर : अह्ह्ह्ह बुआ होने दो जितनी खुजली हो रही, उसे मिटाऊंगा भी में उतने hi बुरे तरीके से जितने बुरे तरीके से वो आपको तड़पा रही है...

बुआ, मेरे रगड़ने से मचलती हुई लेकिन खुद को संभल मुझसे दूर होते हुए: उफ्फ्फ्फ़ सनी सच भोत बेशरम और पागल लड़का है तू अहह ऐसे खुले में बुआ को रगड़ रहा और गरम कर रहा थोड़ा कुछ तो सोच लिया कर..

में, बुआ को देख लुंड सहलाते हुए: शरमाना कैसा हुआ, अब जो औरत खुद मेरे सामने अगले कुछ वक्त में नंगी होने वाली है उसे रगड़ने में कैसी शर्म ः..

बुआ, नंगी होने की बात से बुरी तरह शरमाते हुए और साथ hi जिस्म में करंट के प्रवाह होने से मचलते हुए: उफ्फ्फ्फ़ कैसी खुल कर सब बोलता हाउ तू बेशरम, अगर ऐसे hi मुझे तड़पाया न तो भूल जाना ये बात की में कभी तेरे सामने नंगी होने वाली भी थी हहै..

में: हाहाहा बुआ अब तो अगर आप ने मन किया तो भी में नहीं रुकने वाला हु..

बुआ: हेहेहे चल अब भोत बाटे हो गई मुझे निचे जाना है कुवह काम है और यहाँ रुकू तो पता नहीं तू और क्या क्या करने पर मजबूर कर देगा हहै..

में: हाहाहा ठीक है जाओ जाओ देखता हु कितनी देर तक ऐसे hi भगति रहोगी आप भी क्युकी में आपका पीछा नहीं चोर्ने वाला ः..

और ये बोल बुआ निचे चली जाती है और में कुछ देर और टेरेस पर रुक मौसम के मजे लेने के बाद निचे चल पड़ता हु.

रत में डिनर के समय तक सीमा दीदी रश्मि से मुलाकात कर लौट आती है.

(दोस्तों रश्मि और सीमा दीदी के बिच क्या वार्तालाप होता है ये यहाँ ना बता कर कहानी के अगले पड़ाव पर बताना चाहूंगा).

अगला दिन यानि रविवार , और आज सीमा दीदी सुबह सुबह hi घर से अपनी सहेली को मिलने जाने की बात कह कर निकल चुकी थी और करीब दिन के 1 बजे के आसपास पापा घर से कुछ जरुरी काम का बहाना करते हुए रश्मि के घर की तरफ बाद चलते है.

रश्मि अपने घर में आज साड़ी पहने, जिसके अंदर एक कैसा हुआ ब्लाउज डेल जिसमे उसकी चूचिया भोत hi अचे तरीके से दर्शन दे रही थी और साथ hi नाभि के निचे से साड़ी बांध अपने चूतड़ों का पूरा आकर दिखते हुए एक मस्त कड़क माल की तरह तैयार हुई आपने बॉस यानि मानव खन्ना के आने का इंतज़ार कर रही थी.

यहाँ मानव रश्मि के घर पर दरवाजे पर पहुंच घंटी बजता है और अगले कुछ hi देर में घर के अंदर मौजूद कड़क जवान माल रश्मि दरवाजा खोल देती है. दरवाजा खुलते hi जैसे hi पापा की नजर रश्मि पर पड़ती है वो उसे अंदर की और धकेल कर अंदर घुस घर का दरवाजा बंद कर देते हैं..

धक्के की वजह से पीछे होती हुई रश्मि खुद को सँभालते हुए..

रश्मि: उफ्फ्फ्फ़ सर आप इस वक्त यहाँ क्या कर रहे हैं और ये क्या तरीका है किसी के घर में आने का...

मानव, रश्मि को वापस अपने पास खींच उसके होठो को अपने होठो पर रखते हुए: अब तू मुझे घर में घुसने का तरीका सिखाएगी साली रैंड...

रश्मि, होठो के चुम्बन को इस तरह तोड़ते हुए जैसे उसको पसंद न आया हो: उफ्फ्फ्फ़ सर ये आप क्या कर रहे हो, छोड़िये मुझे प्लीज सर..

मानव, साड़ी का पल्लू खींच के निचे गिरते हुए और चूचियों पर एक दिन पहले लगाए काटने के निशानों पर दोबारा काटते हुए: क्यों रैंड तुझे चोर्ने के लिए थोड़ी पकड़ा है और वैसे भी तुझ जैसी जवान माल को चूर्ण नहीं बल्कि बांध के दिन रत पेलना चाहिए समझी..

रश्मि: उफ्फफ्फ्फ़ सर प्लीज मत करिये ऐसा में शादी शुदा औरत हु, परसो भी ऐसे hi आपने जबर्दस्ती मुझे नौकरी से निकल देने की धमकी दे मजबूर करके दिन भर लुटा था, अब आज तो मुझे बक्श दीजिये प्लीज.

मानव, ब्लाउज के उप्पेर से चुचिओ को दोनों हाथो में जोर से भींचते हुए: चुप कर हरमन रैंड साली, तुझे मैंने ऑफिस में रखा hi इसलिए है ताकि तेरी जवानी के मजे लूट सक और रही बात नौकरी की तो जब तक तू मुझे अपने इस जिस्म का मजा देती रहेगी तब तक तेरी नौकरी रहेगी और साथ hi अलग से इस जिस्म की कीमत भी मिलती रहेगी समझी..

रश्मि: उफ्फ्फ्फ़ सर क्यों कर रहे हो आप ऐसा मेरे साथ क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद कर रहे हो, एक मिडिल क्लास फॅमिली की होने के कारन में अपने पति की मदद के लिए पैसे जमा कर उनकी मदद करना छह रही और आप मेरी इसी hi मज़बूरी का फायदा उठा कर अपने आमिर और बड़े होने की वजह से इस तरह मुझे मेरे hi घर में आकर नोच रहे हो अह्ह्ह्हह्हह चोरो मुझे अह्ह्ह.

मानव, अपने हाथो से कास के पकड़ बना गले को दबोचते हुए एक हाथ साड़ी के अंदर दाल कर छूट को बुरी तरह से दबोचते हुए: हाँ तो साली अगर इतनी hi जवानी प्यारी थी तो क्यों आई मेरे पपास मेरे ऑफिस में नौकरी करने..

रश्मि, छूट दबोचने के कारन टंगे मोड़ आहें भरते हुए: उफ्फफ्फ्फ़ सर लेकिन मुझे तब ये नहीं पता था की आपके यहाँ नौकरी के बदले मुझे ये कीमत चुकानी पड़ेगी उफ्फ्फ्फ़ परसो भी आप ऐसे hi मुझे नोच कर चले गए अभी तक वो ज़ख्म नहीं भरे है प्लस आज ऐसा कुछ मत करो..

मानव, इस बात पर एक झटके से रश्मि की साड़ी निकल फेकता है और ब्लाउज को दोनों हाथो से पकड़ खींच कर सरे बटन तोड़ते हुए फाड् देता है और रश्मि को वैसे hi बिस्तर पर पटक देता है और अब उसके उप्पेर आ कर दोनों हाथो को अपने हाथो में फटा, टैंगो को अपनी टैंगो से दबा उसकी ब्रा में कैद चुचिओ को मुँह में भर दबाने चूमने और चबाने लगता है और रश्मि इस सख्त और शक्तिशाली मर्द यानि अपने बॉस के निचे इस तरह दबोची जाने से और चुचिओ पर हो रहे हमलो से तड़पते और अहहैं भरते हुए अपने सर को बिस्तर पर दाएं बाएं घूमती हुई सर पटकते हुए मचल रही थी..

रश्मि: अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ सर कुछ तो रेहम कीजिये अब अह्ह्ह्ह सर में आपके बेटी के जैसी हु प्लस इसी बात का तो ख्याल कर के तो मुझे बक्श दीजिये अह्हह्ह्ह्ह.

मानव, इस बात पर ब्रा को खींच लेफ्ट तरफ की चुकी को बहार निकल निप्पल मुँह में भर जो से काटते हुए मुँह में भर राइट चुकी को हाथ से दबोचते हुए: पहली बात तो तू बेटी जैसी होगी मेरी बेटी नहीं समझी रैंड और दूसरी बात अगर मेरी बेटी भी तुझ जैसी कुटिया चुड़क्कड़ रैंड निकलती तो में उसे भी ठीक ऐसे hi निचोड़ता जैसे की इस वक्त तुझे निचोड़ रहा हु समझी, तो ये बेटी का वास्ता तो तू मुझे मत hi दे कुटिया...

अभी रश्मि मानव के इस बात का कुछ जवाब दे पति और मानव आगे कुछ करता उससे पहले मानव के मुँह से अपनी बेटी के बारे में ऐसी बात निकलते hi रश्मि के कमरे के आत्ताच बाथरूम से एक महिला बहार निकलती है और हैरानी और अचम्भे के साथ उसके मुँह से सबसे पहले सिर्फ एक hi वाकया निकलता है जिसे सुन रश्मि पर जानवर की तरह वॉर करने वाला मानव भी भीगी बिल्ली सा बन जाता है...

और जो शब्द उस महिला के मुँह से निकला था वो tha.."KYA कहा पापा आपने अभी"...

 
अपडेट-34


(सबसे पहले तो दोस्तों, आप सभी का दिल से भोत भोत शुक्रिया कहानी में अब तक साथ बनाये रखने के लिए, आपके साथ की वजह से hi कहानी आज इतनी बड़ी हो पायी है और आगे बढ़ती चली जा रही है.. उम्मीद करता हु की आगे भी इसी तरह आपका साथ बना रहेगा और में अपनी तरफ सेहर सभव कोशिश करता रहूँगा की कहानी से माध्यम से आप से जुड़ा राहु...

साथ hi दोस्तों एक गुज़ारिश मेरे उन चुप पाठक बंधुओ (साइलेंट readers)se है वो कहानी को कही न कही पसंद कर रहे है और रेगुलरली पढ़ भी रहे है, उनसे ये कहना चाहूंगा की थोड़ा सा और वक्त निकल कर कमेंट के रूप में अपनी रे, विचार, कहानी के प्रति अपने रुझान जरूर व्यक्त करे... एक बार पुनः आप सभी का भोत भोत धन्यवाद्.) अब बढ़ते है आज के अपडेट की तरफ......

जोश जोश में मानव रश्मि को अपनी बेटी के चुड़क्कड़ होने की स्तिथि में उसे भी भी बुरी तरह छोड़ने की बात बोल तो देता है लेकिन उसके ये बोलने के कुछ समय उपरांत hi उसके कान में खुद की बेटी सीमा की आवाज पड़ती है जिसे सुन वो एक पल में वेह्शी जानवर से भीगी बिल्ली सा बन जाता हैं और सीमा की रश्मि के घर में इस वक्त की उपस्तिथि को न समझ पा कर हैरान परेशां हो जाता हैं..

सीमा जो इतनी देर से अपने पापा को अपनी सहेली की इज्जत से इस तरह जोर जबरदस्ती से खिलवाड़ करते देख रही थी और अंत में अपनी hi बेटी के प्रति ऐसी सोच के बारे में सुन बुरी तरह से गुस्से और हैरानी में डूबी हुई थी की क्या ये सच में मेरे पापा hi हैं??? और इसी गुस्से में वो वह कमरे में आते हुए एक तेज स्वर में चिल्लाते हुए..

सीमा: क्या कहा पापा अभी आपने, और यहाँ ये सब चल क्या रहा हैं आखिर???

मानव, अपनी बेटी सीमा की वह मौजूदगी से बुरी तरह चौकते हुए और रश्मि के उप्पेर से झटके से उठ खड़े हो कर: बब.. बबब... बी.. सीमा बेटीइ तुम यहाँ, k..k.. कैसे...

सीमा, अब भी गुस्से में hi : में यहाँ कैसे वो बाद की बात लेकिन मुझे पहले ये बताओ की यहाँ ये सब क्या चल रहा है और आप ये क्या कर रहे थे चीई...

इससे पहले की अब मानव कुछ बोल पता रश्मि अपने फाटे ब्लाउज पर साड़ी का पल्लू ढकते हुए उठ कड़ी हो सीमा की तरफ रट हुए दौड़ पड़ती हैं: सीमा मुझे बचा ले प्लस मुझे बचा ले, इस आदमी ने मुझे कही का नहीं छोरा है, तूने खुद देखा न कैसे ये मेरे घर में घुस कर मेरी इज्जत लुटता आ रहा है, प्लस मुझे बचा ले..

मानव, रश्मि की ये बात सुन दोबारा हैरान होते हुए : ये क्या बकवास कर रही हो तुम रश्मि, मेने कब जबरदस्ती की तुमसे, और सीमा बेटी ये सब इसी का प्लान था इसी ने मुझे अपने घर पर बुलाया था, मेरी बात सुनो में तुम्हे सब कुछ अचे से समझाता हु...

सीमा, आँखे बड़ी करते हुए : बस्स्स पापा, इतना कुछ करने और मेरा खुद अपनी आँखों से देखने के बाद सफाई देने को बचा hi क्या हैं..

रश्मि, यहाँ आग में घी डालने का काम करते हुए: क्या कहा तूने सीमा, ये तेरे पापा हैं? उफ्फ्फ्फ़ मुझे नहीं पता की ये तेरे पापा है वार्ना में तुझे कभी इस इंसान का सच नहीं बताती, लेकिन अब जब तूने सब देख लिया है तो तू इस इंसान का असली रूप खुद देख चुकी हैं..

मानव, रश्मि की तरफ हैरानी से देख: कामिनी औरत क्या कहा है तूने मेरी बेटी से और किस सच की बात कर रही है ये सीमा और तुम दोनों एक दूसरे को कैसे जानती हो...

सीमा: हम दोनों कॉलेज फ्रेंड्स है लेकिन फ़िलहाल वो जरुरी नहीं है फिलहाल तो मुझे शर्म आ रही और यकीं नहीं हो रहा की मेरे पापा ऐसा काम भी कर सकते हैं...

यहाँ अब ये जानना जरुरी है को आखिर पिछली शाम सीमा जब रश्मि से मिली तो उन दोनों के बिच क्या बात हुई थी ऐसी जिससे की सीमा आज रश्मि के घर आ पहुंची थी.

तो चलिए देखते है पिछली शाम क्या हुआ था...

घर से निकल सीमा सीधा एक रेस्टोरेंट में जा पहुंची थी जहा उसने रश्मि से मिलना तय किया था और रश्मि आलरेडी वह पर मौजूद थी, दोनों hi रेस्टोरेंट के अंदर जा एक कार्नर में साइलेंट सी जगह देख बैठ जाती hain.Rashmi जो की एक साड़ी पेहेन आई हुई थी जिसका ब्लाउज काफी दी और कैसा हुआ था और पल्लू इतना पारदर्शी था की अंदर की गोरी छाती और क्लीवेज किसी को भी अचे से दिखाई पद जाये. शुरुआती hi hello और कुछ इधर उधर की बाटे करने के बाद सीमा की नजर रश्मि के छाती के उस हिस्से पर पड़ती हैं जहा पल्लू नहीं डाला हुआ था और ब्लाउज के बहार वो भाग अचे से झलक रहा था.

ब्लाउज के ख़तम होने के कुछ इंच उप्पेर hi सीमा को रश्मि की चुचिओ और छाती पर कुछ लाल रंग के निशान दिखाई पड़ते है जिसे देख सीमा को ये समझने में देर नहीं लगती की ये निशान सम्भोग के दौरान एक मर्द के द्वारा दिए गए hi हो सकते है और वही देख अपनी सहेली से मस्ती में मजे लेते हुए...

सीमा: क्या बात है रश्मि, लगता है मेरे जीजू यानि तवृ पटी काफी वाइल्ड है, इतनी बुरी तरह कटा है तुझे की निशान hi दाल दिए..

रश्मि, विजयी मुस्कान के साथ सोचते हुए की आखिर मेने जिस वजह से इतना दर्द झेला और ये निशान लगवाए वो काम सफल हुआ, इसकी नजर वह पद hi गयी: हेहेहे नहीं यार सीमा तुझे तो पता है न मेरे पति घर पर काम बहार ज्यादा रहते है..

सीमा: ः तो इसका मतलब वो जब भी आते है तुझे ऐसे निशान दे कर जाते होंगे ताकि जब तक वापस न आये तू इन्हे देख उनको यद् कर सके सही हैं न...

रश्मि: हेहेहे काश ऐसा हो सकता यार, लेकिन बदकिस्मती से ये निशान मेरे पति द्वारा नहीं दिए गए है, किसी और को दें हैं...

सीमा, चौकते हुए: क्या... क्या कह रही है तू ये रश्मि, तू ये कहना चाहती है की तू अपने पति को गैर मौजूदगी में किसी और के साथ???

रश्मि, मायूसी भरा चेहरा बनाते हुए: हाँ सीमा तू सही समझ रही है लेकिन में ये अपनी मर्जी से नहीं कर रही मज़बूरी में करना पद रहा हैं..

सीमा: majburi..esi किसी मज़बूरी रश्मि, ऐसी कोई मज़बूरी नहीं होती जिसमे एक औरत को इस तरह का कदम उठाना पद जाये रश्मि...

रश्मि, गहरी सांस लेते हुए: जो लड़की बचपन में ऐशो आराम से पाली हो, जिसकी शादी एक ऐसे इंसान से होती हैं जो ाचा खासा कमा रहा हो और एक अछि पोजीशन पर हो वो इस मज़बूरी को नहीं समझ सकती है सीमा...

सीमा, रश्मि के तने को सुन: तू कहना क्या चाहती है रश्मि और इसमें ये ऐशो आराम और पैसो को बात कहा से आ गई, तू मुझे साफ साफ अचे ढंग से बता की बात क्या है..

रश्मि: मेरी जान आजकल दुनिया में पैसा है तो सब कुछ है पैसा नहीं तो कोई नहीं पूछता हैं, और मेरी शादी तेरी तरह एक आमिर पति से नहीं हुई है न hi तेरी तरह में एक बड़े घर की बेटी हु...

सीमा: फिर वही बात, तू जानती हैं न की मेने कभी भी इन बातो को मायने नहीं दिए, और तू बात घुमा मत मुझे ये बता की ऐसी क्या मज़बूरी की तुझे ये सब करना पद रहा..

रश्मि: यार सीमा अब तुझसे क्या छिपाना, मेरे पति की इतनी कमाई नहीं होती की हमारा अचे से गुजरा हो सके, और आये दिन छोटी मोती जॉब्स के लिए एक सिटी से दूसरी सिटी भटकते रहते हैं, और तू तो जानती हैं न की आज क्व वक्त में समाज में फाइनेंसियल स्टेटस ाचा होना कितना जरुरी हैं..

सीमा: हाँ तो...

रश्मि: तो इसीलिए मेने शादी के बाद वापस से जॉब करने के फैसला किया जो शादी के दौरान मेने चोर दिया था लेकिन मुझे एक संतोष परैड कोई जॉब नहीं मिल रहा था और अभी कुछ महीने पहले hi भगवन की दया से में एक अछि बड़ी कंपनी में इंटरव्यू देने गयी और वह मेरा चयन हो गया...

सीमा: वाओ ये तो अछि बात है रश्मि, फिर तो सब सही हो गया था तो ये क्यों...

रश्मि: मुझे भी यही लगा था की अब ज़िन्दगी सही रास्ते पर आजायेगी लेकिन ये सोचना मेरी गलती थी और उससे भी बड़ी गलती थी मेरा इस कंपनी में जॉब करना..

सीमा: क्यों ऐसा क्यों...

रश्मि: क्युकी वह मुझे जॉब मेरे टैलेंट को देख कर नहीं मेरे जिस्म को देख कर मिली थी..

सीमा, चौकते हुए: क्या... क्या मतलब..

रश्मि: मतलब ये की उस कंपनी का मालिक एक भोत hi बड़ा ठरकी और गन्दी नियत वाला इंसान है, अपने ऑफिस में मेरी तेरी उम्र की औरतो को नौकरी देता है और फिर पैसो और प्रमोशन का झांसा दे उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनता है..

सीमा: क्या... इतना घटिया काम चीई.. ऐसे भी लोग होते है क्या हे भगवन... लेकिन तू उस झांसे में कैसे आ गयी रश्मि..

रश्मि: मुझे लग रहा था की मुझे बेनिफिट्स मेरे काम और टैलेंट की वजह से मिल रहे हैं लेकिन एक दिन बॉस ने मेरे पति के बारे में पूछा तो मेने सच कह दिया की वो बहार हैं बस इसी बात का मौका उठा वो कभी मुझे घर ड्राप कर्म आते तो कभी पिक करने..

रश्मि: और इसी बिच एक दिन वो मेरे घर के अंदर आ गए और उस दिन मेरे साथ जबरदस्ती सम्भोग करने की कोशिश की और जब मेने रोका तो नौकरी से निकलने की धमकी प्लस मेने कंपनी से कुछ लोन लिया था उसे इसी वक्त चुकाने की कंडीशन रख दी, अब में कर्ज और नौकरी की जरुरत के आगे हर गई और उस दिन से आज तक वो इंसान जब भी मेरे पति नहीं होते घर पर आ कर मेरे जिस्म को ऐसे hi जानवरो की तरह नोच कर चला जाता हैं.

सीमा, अपनी सहेली की बात सुन एक दम हैरान होते हुए: फुकक, ऐसे घटिया लोग भी होते हैं मुझे यकींननही हो रहा, किसी की मज़बूरी का इस तरीके से फायदा उठाना की..

रश्मि: हाँ मेरी जान और ये निशान जो तुझे दिख रहे वो कल hi मिले है उस जानवर से मुझे और उसे ये पता है की मेरे पति अभी कुछ दिन बहार रहने वाले है तो कल फिर आने की बात कह कर गया है.. और में अकेली औरत नहीं हु जो उसकी शिकार बानी हु, ऑफिस में जाने कितनी hi औरते होंगी मेरे जैसी, यहाँ तक की उसने अपनी सेक्रेटरी श्वेता को तो इतना वश में किया हुआ है की ऑफिस में अपने केबिन में जब मर्जी आये तब उसके जिस्म के साथ खेलता है और वो बिना कुछ कहे सब सेहती रहती हैं.

सीमा: व्हाट..... ऑफिस में भी?

रश्मि, रुआँसी होते हुए: हाँ वो मालिक है कप्म्पनी का उसे किसी का दर नहीं और श्वेता के बारे में इसलिए जान पायी क्युकी उसने मुझे और श्वेता को एक साथ उस केबिन में नंगा कर के नोचा था, वो हमें ऑफिस एम्प्लोयी न समझ कोई बाज़ारू रंडिया समझता है और अपनी हवस पूरी करने का खिलौना समझ के रखा हुआ है.

सीमा: माय गॉड.... मुझे तो यकीं नहीं हो रहा है रश्मि की ऐसे लोग भी है दुनिया में.. लेकिन तू और बाकि लोग क्यों झेल रहे हो उसकी ये दरिंदगी, कुछ एक्शन क्यों नहीं लेती हो..

रश्मि: क्या एक्शन ले सीमा, वो इतना बड़ा आदमी है और एक बार कंपनी से नौकरी चोर दी तो कही और भी नौकरी मिलना मुश्किल कर देगा वो उसने ये बात साफ़ कही है हमसे और मुझे इस वक्त नौकरी की भोत सख्त जरुरत हैं..

सीमा: हम्म्म पर ये कब तक चलेगा.

रश्मि: हम्म्म मेने ये बाटे आज तक किसी से नहीं की पर तू मेरी खास सहेली है और क्युकी मुझे तेरी मदद चाहिए इसलिए थोड़ी स्वार्थी हो रही हु यहाँ.

सीमा: अगर मेरी मदद से तू इस जाल से बहार निकल सकती है तो में जरूर करुँगी रश्मि..

रश्मि: हाँ में जानती हु, मुझे अचे से पता है की तुझे ऐसे लोगो से कितनी नफरत है, और इसीलिए में चाहती हु की तू मेरी मदद करे..

सीमा: हाँ बोल न क्या करना है मुज्जे, जितना बन सकेंगे हेल्प करुँगी..

रश्मि: देख सीमा, में उस आदमी को ट्रैप नहीं कर सकती क्युकी नौकरी के साथ साथ भोत कुछ छिन्न जायेगा लेकिन तू अगर उसे ट्रैप करे तो. अगर तू किसी तरह उसकी इस दरिंदगी को जग जाहिर कर दे तो काम बन जायेगा..

सीमा : लेकिन मैं ये कैसे करुँगी, में तो उसे जानती तक नहीं और उसे पकड़ने के लिए उसको लाइव पकड़ना पड़ेगा ेसु कोई हरकत करते हुए..

रश्मि: हाँ तो वो कल मेरे घर आने वाला है फिर से, तू एक काम कर मेरे घर आजा, वो मेरे साथ जो कुछ भी कर रहा है उसको लाइव रिकॉर्ड कर उसके बाद हम इसी हथियार को उसके खिलाफ उसे कर सकेंगे और इसमें क्युकी में इन्वोल्वेद नहीं दिखाई दूंगी तो मेरी तरफ शक भी नहीं जायेगा...

सीमा: हम्म्म बात में तो दम है तेरी, यही एक तरीका हो सकता है उस शख्स को पकड़ने का, और में ऐसे लोग जो औरत की मज़बूरी का फायदा उठाये उनको पकड़ने के लिए तो जरूर hi तेरी मदद करुँगी रश्मि..

Rashmi,man में, बस तू कल एक बार घर तो आजा मेरी जान, मानव खन्ना को जग जाहिर तो में कभी भी कर सकती हु लेकिन मेरा असली मकसद एक बाप को बेटी की नजरो में गिरना है, अगर वो हो गया तो समझो मेरी आधी जीत तो तय हैं हहै: हम्म्म में जानती थी की तू मेरी इस काम में कभी मदद करने से इंकार नहीं करेगी.

सीमा: कॉमन यार रश्मि हम दोस्त है एक दोस्त के काम न आये तो क्या फायदा तू फ़िक्र मत कर कल में पहुंच जाउंगी तेरे घर और उस इंसान का आखरी दिन होगा चैन से जीने का..

रश्मि: ाचा तो चल में अब चलती हु कल मेरे घर पर मिलते हैं ठीक है..

सीमा: हाँ ठीक है दोने, चल bye..

और सीमा रश्मि दोनों hi रेस्टोरेंट से बहार निकल पड़ते है और चूँकि सीमा को वह से मार्किट जाना था सो कैब का इंतज़ार कर रही होती है और रश्मि वह से घर को निकल जातो hai.vaha से निकलते हुए रश्मि मन में ये सोचते हुए की अब देख सीमा में कैसे कुछ साल पहले हुई उस घटना का कैसे हिसाब बराबर करती हु और तेरे उसूलो और संस्कारो को तेरे आगे hi हरने पर मजबूर करती हु हेहेहे..

घर पहुंच कर कुछ देर आराम करने के बाद रश्मि अपना अगला कदम चलते हुए अपने बॉस मानव को फ़ोन लगाती है..

मानव: है रश्मि बोलो...

रश्मि: hi सर, क्या आप अभी फ्री है कुछ खास बात करनी थी आपसे..

मानव: हाँ बोलो फ्री hi बैठा हु मई इस वक्त..

रश्मि: सर मेने ये पूछने के लिए कॉल किया था की आप कल आ रहे हैं न हहै..

मानव: ः क्यों इतनी बैचैन है मेरी रैंड मुझसे छोड़ने के लिए..

रश्मि: मममम सर में बता नहीं सकती आपको की कितनी बेचैनी से कल का इंतज़ार कर रही हु हहै..

मानव: ः हाँ ठीक है आज की रात बिता ले किसी तरह कल दोपहर तक आता हु में तेरी जवानी लूटने को..

रश्मि: ममम हहै सर ठीक है पर सर मेरी एक और इच्छा थी वो बताने के लिए फ़ोन किया आपको..

मानव: कैसी इच्छाए..

रश्मि: दरअसल सर में चाहती हु की कल जब आप मेरे घर पर आये तो मेरे साथ बिलकुल ऐसा व्यव्हार करे जैसे आप मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे हो और मेरी किसी मज़बूरी का फायदा उठाते हुए मुझे आपसे छोड़ने पर मजबूर कररहे हो..

मानव: हाहाहा लेकिन ऐसी इच्छा आई कहा से तेरे मन में कुटिया..

रश्मि: हहै सर जब से आपने कल मेरी दर्द भरी चुदाई की मुझे और ज़लील होने और दर्द सहने का मन कर रहा है और में चाहती हु की कल आप मेरी ऐसे चुदाई करे जिसमे में बिलकुल आपका साथ नहीं दे रही हु और आप मुझे किसी बात से मजबूर कर मेरी जवानी और इज्जत लूट रहे हो...

मानव: ममममम वैसे आईडिया बुरा नहीं है साली, तुझ जैसी औरत की जबरदस्ती चुदाई, मज़बूरी का फायदा उठा कर और वो भी तेरे अपने घर me..hmmm ठीक है कल देख कैसे तेरे जिस्म को नोच कर तेरी छूट को फाड़ता हु hahaa...chal अब bye कल मिलता हु.

रश्मि: हहै bye सर मुझे आपका इंतज़ार रहेगा बेसब्री से..

और फ़ोन रख हस्ते हुए हहै aao.manav खन्ना कल मेरी छूट फाटे न फाटे, कुछ ऐसे बम फटने वाले है जो तुमने कभी सोचे भी नहीं होंगे ः...

वापस वर्त्तमान यानि आज में आते हैं अब....

तो यहाँ मानव को ये पता चलता है की रश्मि और सीमा दोनों hi कॉलेज के समय से एक दूसरे की सहेलिया है और साथ hi रश्मि सीमा के सामने सब जानते हुए भी अनजान बन ये दिखावा करती है की जैसे उसे सीमा और मानव के बिच बाप बेटी के रिश्ते के बारे में कोई जानकारी नहीं थी..

मानव, सीमा की तरफ बढ़ते हुए: बेटी प्लस एक बार मेरी बात सुन लो, में तुम्हे सब कुछ अचे से समझाता हु तुमने अभी जो देखा वैसा कुछ भी नहीं हैं मेरी बात तो सुनो एक बार...

रश्मि, ये सोच कही सीमा उसके पापा की बातो में न आजाये, रोने का नाटक करते हुए: अब क्या सुनाएंगे सर आप, सीमा ने सब कुछ उसकी आँखों से देखा है की कैसे आप मेरे घर में जबरन घुसे और कैसे मेरे साथ जबरदस्ती की और मेरे ये फाटे हुए कपडे आपकी उस दरिंदगी की साफ गवाही दे रहे हैं देखिए (और ये बोल रश्मि वापस अपना पल्लू हटा सीमा के आगे फाटे ब्लाउज में आजातीहै)

सीमा, रश्मि का पल्लू वापस सही कर अपने पापा की आँखों में देख सवाल करते हुए: अब क्या कहना है पापा आपको इस बारे में, अपने मेरी सहेली के साथ hi ये सब किया.. चीई मुझे तो अब भी यकीं नहीं हो रहा है..

Manav,rashmi की तरफ इशारा कर: बेटी ये औरत झूट बोल रही है, इसने खुद मुझे यहाँ अपने घर बुलाया था और आज hi नहीं बल्कि पहले भी कई दफा मुझे घर बुला चुकी है तू इसकी बातो में मत आ बेटी, में इसके साथ किसी भी तरीके की जबरदस्ती नहीं कर रहा था...

सीमा: इसने आपको घर पर बुलाया और आप चले आये हैं न? मतलब आप ये तो मानते है की आपके रश्मि के साथ नाजायज़ जिस्मानी तालुकात हैं.. हैं न पापा??

मानव, अब अपने hi मुँह से सच बोल फास्ट हुए और खुद को बेटी के सामने चुप होते हुए और जहा रश्मि इस बात को और हवा देते हुए...

रश्मि: नहीं सीमा ये इंसान झूठबोल रहा है, हाँ मेने इनसे लिफ्ट ली है कई दफा और बॉस हैं इस बात की इज्जत देते हुए इन्हे घर में चाय पानी के लिए आने को कहा लेकिन मुझे अकेला प् कर इन्होने मेरे साथ हमेशा ज्यादती की है और अगर इस सब में मेरी मर्जी होती तो कौन औरत अपने जिस्म पर इस तरह के दर्दनाक जुल्म सहेगी की निशान पद जाये तू hi बता..

रश्मि: में तो शादी शुदा हु अगर मुझे इनसे कोई सम्बन्ध अपनी मर्जी से रखने होते तो छिपा कर रखती ऐसे अपने जिस्म पर निशान तो नहीं बनवाती न जिससे की मेरे अपने पति hi मुझ पर शक करने लग जाये... ये तो तू भी समझती है न..

मानव, रश्मि की चाल समझते हुए अब ये देख की रश्मि में बुरी तरह फ़साने का सोच रखा है: बेटी तू इसकी बात मत सुन में मंटा हु की मेरे इसके साथ सम्बन्ध हैं लेकिन इसमें इसकी मर्जी भी थी और आज जो कुछ तूने देखा ये सब भी इसकी मर्जी थी इसके कहने पर hi में इसके साथ इस तरह की जबरदस्ती करने का नाटक कर रहा था बस्सस प्लस मेरी बात मन बेटी..

रश्मि: सर अब बस भी करो कितना झूट बोलोगे आप, इतने महीनो से रोंदते आ रहे हो मेरे जिस्म को अब तो सच कह दो आज तो आपकी बेटी ने भी रेंज हाथो पकड़ लिया है आपको... मेने अपनी जिंदगी में इतना घटिया, वेह्शी और गिरा हुआ इंसान नहीं देखा है...

रश्मि, अब पूरी तरह आग में पेट्रोल दाल बढ़ाते हुए: माफ़ करना सीमा यही है तेरे पापा की सचाई, और मुझे नहीं पता था की मेरी खास सहेली का बाप इतना कमीना और गिरा हुआ निकलेगा की औरत की मज़बूरी का फायदा उठा कर इस तरह उसके जिस्म के साथ खेलेगा और अपने आगे नंगा नचाएगा..

सीमा, चुकपचाप रश्मि की बातो को सुन रही थी और अपनों नजरे पापा के सामने गड़ाए हुए थी जो इस वक्त ये कहने और समझने की कोशिश में लगा हुआ था की उसे इस रश्मि ने फसाया है और साथ hi इस बात की ग्लानि भी थी की आज उसकी बेटी ने उसे किसी दूसरी औरत के साथ रेंज हाथो पकड़ लिया और उसे ये स्वविकर्ण पड़ा की उसके उसकी माँ के अलावा परै औरत से भी सम्बन्ध हैं....

सीमा, जो इस बात से पूरी तरह टूट चुकी थी की उसके पापा ने खुद रश्मि के साथ सम्बन्धो को स्वीकारा है लेकिन कही कही न रश्मि की मज़बूरी का फायदा उठाने वाली बात सुन: रश्मि, ऐसा नहीं हो सकता है, मेरे पापा इतनी भी घटिया हरकत नहीं कर सकते की तेरे साथ ऐसी जबरदस्ती करे और तेरी मज़बूरी का फायदा उठाये.. हाँ में मानती हु की उनका तेरी मर्जी होने के बाद भी तुझसे सम्बन्ध बनाना पाप से काम नहीं लेकिन तू भी सच सच बता क्या तूने पापा से कहा था ऐसा नाटक करने के लिए...

रश्मि, बात पलटते देख: तू ये क्या बोल रही है सीमा, तुझे लगता है की कोई औरत सामने से कहेगी की आओ और मुझे दर्द दो मेरी इज्जत लूटो, कुछ तो सोच समझ के बोल तू...

मानव, ये देख की सीमा का भरोसा अब भी उस पर से पूरी तरह नहीं टुटा है: बेटी ये झूट बोल रही है इसने खुद कल शाम मुझे कॉल करके कहा था ऐसा नाटक करने को...

रश्मि, मानव की बात सुन सीमा के मुँह से कुछ न सुन और उसे अपनी तरफ देखते हुए देख: तू मुझे ऐसे क्या देख रही है सीमा, तूने सब अपनी आँखों से देखा उसके बाद भी तुझे यकीं नहीं हो रहा है तुझे लगता है में इस तरह की बात पर झूट कहूँगी...

रश्मि: मुझे यकीं नहीं हो रहा की तू वही सीमा है जिसने चाँद सालो पहले एक इंसान को सिर्फ उसपर कुछ गंदे कमेंट करने और उसके बूब्स और चूतड़ पर एक या दो बार चुने मात्रा से hi भरे ऑफिस में सबके सामने थप्पड़ जड़ दिया था और नौकरी से हाथ धुलवा दिए थे, उसकी इतनी सी गलती पर तूने उसका पूरा जॉब करार ख़राब कर दिया था और आज जब तूने उससे कई गुना ज्यादा और बड़ा कांड अपनी आँखों से देखा और तू इसे मैंने तक को तैयार नहीं..

आज कहा गए तेरे वो उसूल और आदर्श सीमा, या आज वो सब डाब के रह गए क्युकी आज गुनाह करने वाला इंसान तेरे पापा हैं?

सीमा: रश्मि मेने ये नहीं कहा की पापा गलत नहीं है लेकिन पापा जो कह रहे है उसका क्या की तूने उनसे ये सव करने को कहा था.. पापा इतना झूट नहीं बोल सकते मुझसे इसलिए मुझे समझ नहीं आ रहा की में क्या करू...

रश्मि: वाह, आज तुझे सही गलत का ज्ञान करना है, जो देखा उस ब्बात को अनदेखा कर के, तो उस दिन क्यों उस इंसान को बिना उसकी बात सुने थप्पड़ जड़ इतना बदनाम किया बोल...

सीमा: रश्मि उस दिन क्या हुआ था तू अचे से जानती है और अभी वो बात नहीं चल रही है यहाँ सो प्लस उस बात को बिच में मत ला समझी..

रश्मि: वाह सीमा वाह, ठीक है नहीं लती लेकिन आज जो हुआ उसके बाद तू क्या कहेगी? क्या तेरे पापा भी एक घटिया, गिरे हुए और वेह्शी हवसी इंसान नहीं, क्या ये इंसान भी गन्दी बलि का कीड़ा नहीं हुआ??? पैसे वाले हो आमिर हो इसका ये मतलब तो नहीं की मुझ जैसी मिडिल क्लास फॅमिली वाली को मजबूर करके इस तरह उसे करोगे और मुझे लगा था तू मेरी सहेली है मुझे उस दलदल से बहार निकलेगी लेकिन नहीं आज तूने भी अपने राइस बाप की तरह मतलबी हो उनकी hi तरफदारी ki..mujhe तो यकीं नहीं हो रहा है सब कुछ अपनी आँखों से देखने सुनने के बाद भी तू इस घटिया निकम्मे हरामी और दरिंदे की तरफदारी कैसे कर सकती hain....Is इंसान से ऑफिस की न जाने कितनी औरतो की इज्जत से खिलवाड़ किया है और तू अब भी इसे सही मन रही है वाह सीमा वाह...

मानव, तुरंत hi: सीमा नहीं बेटी मेने ऑफिस में किसी लड़की औरत से कोई जबरदस्ती नहीं की और इसके साथ भी कभी कोई जबरदस्ती नहीं की में तेरी कसम खा के कहता हु बेटी मेरी बात मान, क्या तुझे लगता है की में इतना गिरा हुआ काम करूँगा...

रश्मि: बस मर मानव खन्ना बस, और कितना झूट बोलोगे और सीमा तू, तू कब तक अपनी आँखों पर ये रिश्तो की पट्टी बांध कर कड़ी रहेगी, ये इंसान झूट बोल रहा है भोत बड़ा खिलाडी है, तेरे आगे शरीफ बन रहा है और बाकि इसका असली चेहरा कुछ और hi है, औरत को पाने और उसकी इज्जत से खेलने के लिए ये किसी भी हद्द तक जा सकता है, तुझे अगर यकीं नहीं तो कॉल लगा इसकी सेक्रेटरी श्वेता को और पूछ उससे क्या उसका बॉस उसे रैंड की तरह ट्रीट नहीं करता पूछ उससे... माफ़ करना सीमा लेकिन आज मुझे शर्म आ रही है की तू इस घटिया गिरे हुए इंसान की बेटी होने के बावजूद मेरी दोस्त है और सही गलत की पहचान होने के बाद भी इस कमीने इंसान का साथ दे रही है... आखिर बेटी में भी खून तो बाप का hi है न...

रश्मि ने अपनी बात जो सीमा और मानव दोनों इतनी देर से चुप्पी साढ़े सुने hi जा रहे थे, उस बात के ख़तम करते हुए उसके गाल पर झट से एक के बाद एक तीन थप्पड़ पड़ने की आवाज कमरे में गूंज उठती है...

तड़ककककककक,,, तड़ककककक,,,, तड़ककककककक.....

 
अपडेट -35

रश्मि ने अपनी बात जो सीमा और मानव दोनों इतनी देर से चुप्पी साढ़े सुने hi जा रहे थे, उस बात के ख़तम करते हुए उसके गाल पर झट से एक के बाद एक तीन थप्पड़ पड़ने की आवाज कमरे में गूंज उठती है...

तड़ककककककक,,, तड़ककककक,,,, तड़ककककककक.....

कमरे में थप्पड़ लगने की इस आवाज की गूंज से माहौल पूरी तरह से शांत पद चूका था और यहाँ ये थप्पड़ किसी और ने नहीं बल्कि इतनी देर से चुप चाप कड़ी सब कुछ सुन सेह रही सीमा ने रश्मि के गलो पर ज्यादा था...

सीमा, रश्मि को थप्पड़ लगाने के उपरांत गुस्से में आग उगलते हुए: तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे पापा के लिए इतने घटिया शब्द उपयोग करने की और इतना कुछ अनब शनाब बकने की, ख़बरदार जो अब तूने उनके खिलाफ एक शब्द भी उल्टा सीधा कहा तो, मुँह नोच लुंगी में तेरा समझी...

रश्मि, सीमा के हाथो थप्पड़ खा बौखलाते हुए: ओह तो तुझे अब भी लगता है की तेरा ये बाप दूध का धुला हुआ है.. अपनी आँखों से इतना कुछ देखने के बाद भी, मुझे नहीं पता था की तू अपने बाप की तरफदारी करने के लिए सही क्या है ये जानते हुए भी उसे गलत मन लेगी, शर्म आणि चाहिए तुझे सीमा जो एक औरत होते हुए तू दूसरी औरत की इज्जत उतारते हुए देख उस औरत का साथ देने की बजे इज्जत लूटने वाले उस मर्द का साथ दे रही हैं..

सीमा, गुस्से में चिल्लाते हुए: वो इसलिए क्युकी में भोत अचे से जानती हु की मेरे पापा ने तेरे साथ कभी किसी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं का है और ना कभी कर सकते है. हाँ अपनी शफी शुदा जिंदगी से बहार निकल मेरी माँ को धोखा दे कर बहार दूसरी औरतो से सम्बन्ध बनाने की घिनौनी हरकत जो की है वो भले किसी गुनाह से काम नहीं है और इस बात को में कभी स्वीकार नहीं कर सकती लेकिन उन्होंने ये सब उस औरत की मर्जी और सहमति से किया है और इडलिये तेरे ये जो घटिया आउट घिनोने इल्जाम है और जिनके बाबत तू मेरे सामने उन्हें इतना उल्टा सिफॅ और घटिया तरीके से बोल रही है वो में कटाई नहीं सहने वाली हु समझी तू...

रश्मि: ओह तो इसका मतलब तुझे अब भी यही लग रहा है की तेरा ये बाप औरत की मज़बूरी का फायदा नहीं उठता और मुझ जैसी औरत की जवानी भोगने का प्यासा नहीं है और न hi उसने कभी जबरदस्ती की होगी किसी के साथ हाँ...

सीमा, अपने पापा की और देखते हुए: हाँ मेरा यही कहना है की उन्होंने इस तरह के शारीरक सम्बन्ध बनाए तो जरूर है और उसके लिए में उन्हें कभी माफ़ नहीं करने वाली लेकिन जो बदनामी का दाग और औरत की इज्जत का लुटेरा तू उन्हें बना रही है, में इस बात को कटाई सही नहीं मान सकती क्युकी इस सब में उनका साथ देने वाली औरत भी बराबर की गुनहगार है...

रश्मि: लेकिन तू ये इतने यकीं से कैसे कह सकती है की तेरे पापा सही है, कभी किसी को मजबूर नहीं किया जबकि में तुझे सब कुछ तेरी आँखों के सामने होते दिखा चुकी हु और में ऐसी दूसरी औरत इनकी सेक्रेटरी श्वेता से भी तेरी बात करवा सकती हु और पुछवा सकती हु की हमारे बॉस कितने हवसी और ठरकी किस्म के इंसान है, औरत की जवानी के प्यासे...

सीमा: हाँ एक्साक्ट्ली, तुझे पता है क्या.. जब कल तूने मुझे तेरे बॉस का तेरे साथ इस तरह के व्यव्हार करने की बात की तब मुझे सच में लगा था की तेरी सहेली होने के नाते में तेरी पूरी मदद करुँगी और चाहे वो इंसान जो कोई भी हो हम मिल कर उसे एक्सपोज़ करेंगे लेकिन जब तेरे वह जाने के बाद मुझे ये पता लगा की तू जिस बॉस की बात कर रही है वो कोई और नहीं मेरे अपने पापा है मुझे एक झटका सा लगा ठौर तभी मेने बात की तेह तक जाने का फैसला कर लिया था..

रश्मि, हैरानी से: kya..kya मतलब.. तुझे कैसे पता लगा की में तेरे पापा की बात कर रही थी और में इन्ही की कंपनी में जॉब करती हु..

सीमा, पास में पड़े अपने बैग से एक रश्मि का कंपनी आइडेंटिटी कार्ड निकल कर दिखते हुए: मुझे तेरी कर्मभूमि के बारे में पता लगा इस आइडेंटिटी कार्ड से जो कल रेस्टोरेंट से निकलते वक्त तेरे हाथो बैग से मोबाइल निकलते वक्त शायद निचे गिर गया था और चूँकि में वह कड़ी कैब का इंतज़ार कर रही थी तो उस रेस्टोरेंट में काम करने वाले एक आदमी ने तेरा ये कार्ड ला कर मुझे थमा दिया..

रश्मि, अपना कार्ड देख खुद को इस छोटी से गलती के कारन फास्ट हुए देख: ओह हाँ हो सकता है की ये कही गिर गया हो लेकिन इस कार्ड सर यहाँ क्या साबित होता है मुझे तो तू ये बता..

सीमा, पापा और रश्मि की तरफ देखते हुए: साबित ये होता है की, जैसे hi मुझे पता लगा की तू पापा की कंपनी में जॉब करती है मेने तुरंत कंपनी के ऑफिस में फ़ोन किया और जिस सेक्रेटरी की तू बात कररही, मेने उसका कांटेक्ट नंबर निकलवाया और फिर आज सुबह में घर से जल्दी निकल कर यहाँ आने से पहले श्वेता से मिल कर साडी सच्ची देख और सुन कर आ रही हु..

मानव, सीमा के मुँह से ये जान कर की वो साडी हकीकत जान चुकी है, शर्मिंदगी भरी नजरो से बेटो को देखते हुए: श्वेता ने क्या हकीकत बताई तुझे बेटी...

सीमा, उखड़े हुए और रौदे स्वर में पापा की बात का जवाब रश्मि की तरफ देखते हुए: श्वेता ने मुझे ये बताया की उसका और उसके बॉस का यानि मेरे पापा का पिछले कितने लम्बे आरसे से अफेयर चला आ रहा है और उसके बाद उसने मुझे रश्मि का खुद सामने से पापा के केबिन में झांकना और खुद अपनी मर्जी से पापा के साथ सम्बन्ध बनाने की साडी बातो का विस्तार से खुलासा किया और साथ hi ये भी बताया की पापा ने कभी या तो रश्मि से या उससे किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की है और जब मेने उससे आखरी में रश्मि की मज़बूरी का फायदा उठाने की बात कही तो उसने मुझे ये भी बताया की रश्मि तूने खुद पापा को उनके केबिन में श्वेता की उपस्तिथि में अपने घर आने का न्योता दिया tha..sahi कहा न मेने..

रश्मि, मन में, कामिनी श्वेता ने तो सरे किये कराये पर पानी फेर दिया, ये आइडेंटिटी कार्ड कहा से गिर पड़ा एक तो: में नहीं मानती ये सब, श्वेता ने तुझसे सब कुछ झूट कहा है, वो अब भी सच बताने पर अपनी नौकरी जाने का खतरा समझते हुए तेरे पापा को डिफेंड कर रही है और अगर उसके मुताबिक मेने मानव खन्ना को अपने घर बुलाया होता तो इतना सब नाटक क्यों hi करती और खुद उनकी अपनी बेटी को बिच में क्यों घसीटती.. ये तेरे पापा का रचा खेल है सीमा, तू अब भी समझ नहीं प् रही है, अपनी सेक्रेटरी को भी पैसो का झांसा दे कर उन्होंने अपनी तरफ कर के रखा हुआ है..

सीमा: काश ऐसा कुछ होता दोस्त, लेकिन में अपनी आँखों से पापा के ऑफिस के अंदर और बहार लगे कैमरा की रिकॉर्डिंग श्वेता के लैपटॉप में देख कर आई हु जहा तू उनके केबिन में झक्ति दिख रही और उसके अगले hi दिन तू पापा के केबिन में उनसे अपनी सहमति दिखते हुए सेक्स करती है और में वो सब भी देख कर आ रही हु जहा पापा, तू और श्वेता तीनो hi एक साथ इस घटिया खेल को खेलने में मस्ती से लगे हुए होऔर ये सब देखते हुए मुझे कही से भी नहीं लगा की पापा ने तुम दोनों में से किसी को भी जबरदस्ती मजबूर कर के कुछ करने को कहा हो, उल्टा मुझे उनमेये दिखा की तू और श्वेता पापा के साथ सेक्स करने के लिए ज्यादा उत्सुक रहती हो...

रश्मि, अब पूरा भन्दा फुट ते हुए देख: वो तुझे इसलिए ऐसा दिख रहा क्यों ऑफिस में किसी तरह का हल्ला करने पर बदनामी मेरी ज्यादा होती और साथ hi मुझे नौकरी से हाथ धोना पद जाता इसलिए..

मानव, सुकून की सास लेते हुए की उसकी बेटी को सच पता लग गया है और रश्मि के इल्जाम झूठे साबित हो रहे hai,abhi टपक से बिच में पड़ते हुए: बस रश्मि अब तो बस कर तू, अब तो श्वेता के मुँह से सीमा सब कुछ सच जान चुकी है और ये सब साबित हो रहा है की मेने कभी तुझसे या किसी और से कोई जबरदस्ती नहीं की है, और इसी के साथ तेरा ये झूठा खेल यही ख़तम होता है, रही बात आज के नाटक की तो सीमा बेटी जैसा मेने तुझे पहले भी बताया आज इस तरह घर में जबरदस्ती करने के लिए भी मुझे रश्मि ने hi कहा था और अब मुझे इसके ऐसा कहने का कारन समझ आ रहा है, इसने ऐसा इसलिए कहा क्युकी वो मुझे तेरी नजरो में गलत और गुनहगार साबित कर सके..

सीमा: बात यहाँ आपके गुनहगार होने की नहीं है पापा, मेने ये सव इसलिए लिया क्युकी इस सब में मेरे अपने परिवार का नाम जुड़ा है, बदनामी परिवार की होती है, किसी एक के अपने शोक पुरे करने के चक्कर में मैं पुरे परिवार को सजा नहीं दे सकती न...

रश्मि: लेकिन तेरे पापा ने भी वही बदनामी वाले काम किये है जो तू अब भी नहीं समझ प् रही है सीमा..

सीमा: साबुत सामने है और में श्वेता के मुँह से खुद ये सुन कर आई हु की वो अपने पति सर ज्यादा पापा का साथ पसंद करती है और उसने ये भी कहा की तू भी कुछ ऐसा hi महसूस करती है और इसलिए पापा को पति की गैरहाजरी में घर पर भी बुला ली है, अब इसके बाद तो समझने समझने को कुछ बचा hi नहीं है, सब कुछ अछि तरफ साफ तरीके से सामने आ चूका है..

सीमा: और रश्मि एक और बात, मुझे लगा था की तू मेरी सबसे खास सहेली हैं लेकिन मुझे ये नहीं पता था की सालो पहले हुई उस बात का बदला तू इस तरह मेरे घरवालों को फसा काट लेगी, मुझे आज अपनी दोस्त चुनने की कला पर शर्म आ रही है...

रश्मि, तीखे स्वर में: तो और में क्या करती, मेरे भाई ने नशे में सिर्फ तुझसे थोड़ी से बदतमीज़ी hi तो की थी उस रत और तूने उसे सबके सामने ज़लील करते हुए थप्पड़ लगाए और उसके बाद उसकी नौकरी भी छिन्न ली, तुझे पता है आज तक वो सेटल नहीं हो पाया है, कही भी उसे कोई ढंग की नौकरी नहीं मिल रही है और इस सब की वजह सिर्फ तू है सीमा सिर्फ तू...

सीमा: उस रात उसने जो हरकते की वो कोई थोड़ी सी बदतमीज़ी नहीं थी, उसने ऑलमोस्ट मुझे जबरदस्ती करते हुए वो सब करने की कोशिश कर ली थी जिसे आम भाषा में शायद एक गुनाह hi कहते है और उसके लिए तो मेने जो सजा दिवो नाम मात्रा की थी, खैर में पुराणी बाटे यद् नहीं करना चाहती हु अब आउट रही बात वर्त्तमान की तो में अपनी जिंदगी में ऐसी घटिया सोच वाली इंसान को कभी अपना दोस्त नहीं मन सकती हु और इडली आज से तेरी मेरी दोस्ती तो ख़तम hi और साथ hi एक बार और तुझे वारं करती हु की मेरे परिवार वालो पर कोई घिनोना इल्जाम लगाने या ऐसे किसी कार्य में फ़साने से पहले दस बार सोच लेना... चलिए पापा यहाँ से...

और ये बोल सीमा रश्मि के घर से बहार निकल जाती है साथ hi उसके पीछे मानव भी रश्मि को नौकरी से बर्खास्त करने की बात कह सीमा के पीछे रश्मि के घर से बहार निकल जाता हाउ और उन दोनों के जाने के बाद यहाँ रश्मि अपने खेल बिगड़ने का बुरी तरह अफ़सोस जाता रही होती है पर मन hi मन उसे एक बात फिर भी सुकून दे रही थी की कही न कही शायद उसने बाप की परायी औरतो से सम्बन्ध होने की असलियत उसकी बेटी के सामने उजागर कर hi दी है और वो अब यही उम्मीद कर रही थी की सीमा इस बात को उसकी माँ तक पंहुचा दे ताकि बेटी के साथ साथ मानव खन्ना अपनी बीवी की नजरो में भी गिर जाये..

वही दूसरी तरफ रश्मि के घर से निकल कर सीमा और मानव दोनों मानव की कार से घर की तरफ बाद जाते है जहा कार में एक दम चुप्पी सी चाय हुई थी दोनों बाप बेटी में से कोई भी किसी से बात नहीं कर रहा था, मानव तो वैसे hi शर्मिंदगी के घुट पिटे हुए कार चला रहा था और ये सोच रहा था की अब वो अपनी बेटी से क्या बात करे और क्या उसकी बेटी ये सब बाटे घर वालो को बता तो नहीं degi...abhi मानव इस सब सोच में दुबे ड्राइव कर hi रहा होता है की सीमा उसे कार को सड़क के एक किनारे रोकने को बोल देती है...

मानव, कार रोकते हुए: क्या हुआ बेटी कार क्यों रुकवाई...

सीमा: क्युकी मुझे अभी इसी वक्त आपसे कुछ जरुरी बात करनी है जो शायद घर पहुंचने पर नहीं हो सकती...

मानव, थूक का घूंट गले से उतारते हुए: हाँ बेटी बोलो क्या बात है ऐसी..

सीमा, अपने चेहरा मानव की तरफ घूमते हुए सवालिया नजरो से: क्यों पापा? आखिर ये सब क्यों....???

मानव, बेटी का सवाल समझ अपनी नजरे झुकाते हुए: मुझे माफ़ कर दे सीमा, बस गलती हो गई मुझसे बेटी..

सीमा: गलती... पापा ये कोई ऐसी वैसी गलती नहीं है आपने एक गुनाह किया है, अपने माँ को धोखा दिया है.. ऐसी क्या कमी लगी आपको मेरी माँ में ये बताइये मुझे, क्या माँ इस लायक नहीं थी की आपको प्यार दे सके जो आपको इस तरह बहार किसी औरत की तलाश करनी पड़ी...

मानव: नहीं बेटी ऐसी कोई बात नहीं, महिमा में ऐसी कोई कमी नहीं और में उसे भोत प्यार करता हु, मुझे खुद नहीं पता की कब में ऐसे बहक सा गया बेटी..

सीमा: बहक गए? पापा आप कोई छोटे बचे तो हो नहीं, मेरे साथ तीन और बचो के पिता हो, एक बार को बहकने की उम्र मने तो वो आपके बचो की हो सकती है, आपकी ये कोई उम्र नहीं इस तरह बहकने की... और मुझे तो ये सोचकर दर लग रहा है की अगर रश्मि आपको एक्सपोज़ करने में कामयाब हो जाती या ऐसे hi कही किसी केस में फसा देती तो क्या होता.. कितनी बदनामी होती आपको कुछ आईडिया भी है??

मानव: जनता हु में बेटी सब, और मुझे नहीं पता था की वो औरत इतना गन्दा खेल खेल रही है मेरे साथ वार्ना कबका उसको ऑफिस से निकल दिया होता..

सीमा: पापा बात ऑफिस से निकलने की नहीं है यहाँ, बात आपकी अपने आप पर काबू पाने की है, मुझे इस वक्त आप पर इस बात का गुस्सा है की आपने कुछ समय की मस्ती के लिए मेरी माँ को धोखा दिया है, उस माँ को जो दिन रात परिवार का सोचती है उसी में लगी रहती है और यहाँ उनके पति बहत ऐयाशिया करने में मस्त hain.akhir ऐसा क्या है जो आपको माँ से नहीं मिल प् रहा था और ये रश्मि श्वेता जैसी औरतो से सम्बन्ध बनाने पद गए..

मानव: मुझे नहीं पता बेटी, पर जब आज बात खुली है तो में बस तुझे इतना कह सकता हु की में रश्मि और श्वेता की सुंदरता और शरीर की बनवत और उनकी मनमोहक जवानी के आगे खुद के ऊपर से काबू खो बैठा और ये होश नहीं रहा की आखिर में क्या कर रहा हु..

सीमा, चौकते हुए देख: जवानी के आगे काबू खो बैठे?? सीरियसली, पापा ये क्या बात हुई भला, इसका मतलब आपके घर में कामिनी भाभी जैसी एक जवान बहु है, मेरे और प्रीति जैसी जवान बेटियां है, कल को आप बेकाबू होने का बहाना कर कही उनके साथ भी सम्बन्ध बनाने की सोच लोगे हैं न...

मानव: नहीं बेटी कभी नहीं, अपनी hi बहु बेटी केबारे में मैं भला ऐसा कैसे सोच सकता हु, तू ऐसा कह भी कैसे सकती है सीमा की में तुम लोगो के प्रति ऐसी सोच रखूँगा.

सीमा: तो अब में और क्या कहु पापा, मर आज रश्मि के घर जिस इंसान को देख कर आई वो मेरे पापा नहीं थे, कोई भूखा भेड़िया hi लग रहा था, इतनी भी किसी भूख पापा, वो तो ठीक हुआ की मुझे कल रश्मि का कार्ड मिला और मेने सच्चाई पता कर ली वार्ना अगर आज मेने जो देखा वो कोई और देखे तो यही कहता की मानव खन्ना रश्मि के साथ जबरदस्ती करते हुए उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहा हाउ और ट्रस्ट में पापा, वो सन देखने में लग भी ऐसा hi रहा था...

मानव: जनता हु बेटी, में बस हवस और जोश के आगे अँधा हो गया था उस वक्त पता नहीं मुझे क्या हो गया था...

सीमा: हाँ तब तो आप अपनी बेटी तक को भोगने की बाटे करने लग गए थे जिसे सुन मुझे शॉक सा लगा की ये वही इंसान है मेरे वही पापा है जो अपनी बेटियों से प्यार करने कड़वा कर रहे है और वही उनके बारे में ऐसी सोच रखते हैं की..

मानव, ये देख की सीमा भोत ज्यादा hi नाराज़ है और उसका गुस्सा इतनी आसानी से जाने वाला नहीं: आईएम सॉरी बेटी, वो सब बस गलती से मेरर मुँह से निकल गया था, असल में मेरा ऐसा कुछ भी क्षणे का मतलब नहीं था.. तू जानती है में तेरे बारे में कभी ऐसी घटिया बात सुन नहीं सकता तो बोलना तो दूर की बात है..

सीमा: मुझे ये कुछ भी नहीं पता पापा, आज आपने मुझे गलत साबित कर दिया की मेरे पापा एक भोत hi नेक और अचे इंसान है, आज के बाद शायद में आपको वो नेकी से नहीं देख पाव और न hi इस बात को भूल पाव की आप वही इंसान है जो मेरी माँ को बहार की औरतो के लिए धोका देते आ रहे हो..

मानव: बेटी ऐसी बात मत बोल प्लस, में वडा करता हु आजके बाद ये सब बंद, अब में ऐसा कोई काम नहीं करूँगा कभी भी ी प्रॉमिस बेटी.. लेकिन मुझे एक मौका दे दे बस, ससथ hi एक ये वडा कर की तू महिमा से इसबारे में कोई बात नहीं करेगी वर्ण..

सीमा : में छह कर भी माँ से ये सव नहीं कह सकती हु पापा, क्युकी वो टूट जाएँगी, अपने पतिद्वारा दिए जा रहे इस धोके को वो कभी बर्दास्त नहीं कर पाएंगी, इसलिए माँ को कुछ बताने से में खुद दर रही हु पर ये नहीं पता की कब तक में माँ से इस बात को छिपा पाऊँगी..

मानव: प्लस बेटी इस बात को छिपा कर रखना..

सीमा: हम्म कोशिश करुँगी पापा, और में उम्मीद करती हु की अब शायद अआप अपने आप पर काबू रखना सिख जायेंगे... लेकिन साथ hi में ये बात साफ कर दू की मेरी नजर में आप गुनहगार हो और मेरी माँ को धोका देने वाले इंसान हो और पता नहीं ये बात में कभू भूल पाऊँगी या नहीं... फिलहाल अब घर चलिए भोत देर हो चुकी हैं..

मानव भी यहाँ ये समझते हुए की उसकी बेटी से और कुछ बात करना, उसे समझाना या मानाने का इस वक्त कोई फायदा नहीं है क्युकी अभी सीमा का दिमाग जो कुछ हुआ उसी में उलझा हुआ है और ज्यादा बात खींचना बात बिगड़ने जैसा हो जायेगा, एक बार बेटी के दिमाग शांत हो जाये फिर उसे मन कर साडी बाटे क्लियर करने की सोचते हुए कार को घर की तरफ बड़ा देता है..

मानव और सीमा के घर से जाने के कुछ डेट बाद रश्मि किसी शख्स को फ़ोन कर आज उसके घर हुए पुरे वाकिये को बता देती है जिसे सुन वो शख्स...

शख्स: तुझे एक काम दिया था मेने वो भी ठीक से नहीं हुआ, क्या फायदा हुआ मेरी इतनी म्हणत का अब, एक कार्ड नहीं संभल के रख ससक्ति थी तू..

रश्मि: में मानती हु की हमने जो सोचा वो पूरी तरह नहीं हो पाया लेकिन में सीमा को जानती हु वो अपने पापा का बहार किसी से सम्बन्ध और अपनी माँ को धोखा देने की बात नहीं सेह पायेगी और यही बात बाप बेटी के बिच दरार बनाने का काम करेगी...

शख्स: बाप बेटी के बिच दरार बनवा कारक दूसरे के खिलाफ करने से तेरा बदला शायद पूरा हो जायेगा लेकिन मेरा नहीं होगा, मुझे इतनी सी बात से शांति और सुकून नहीं मिलेगा..

रश्मि: अरे अभी आप फ़िक्र क्यों कर रहे हो इतनी, हमारे पास अभी एक और बजी है हाथ में और वह से सारा खेल वापस हमारे पीला में आजायेगा देख लेना...

शख्स: उम्मीद करता हु वह कोई गलती नहीं करेगी तू, वार्ना में तुझे कही का नहीं छोड़ूंगा समझी.. अब यहाँ तूने अपना बदला शायद बाप बेटी के बिच आग लगा कर ले लिया होगा पर मुझे मेरा बदला लेना है और अब उसके लिए तुझे जो भी करना है कर, बस मुझे जल्द से जल्द सफल होने की खबर सुना समझी...

रश्मि: आप बेफिक्र रहिये आपको भोत जल्द hi अछि खबर सुननूंगी में हहै... ब्बये.

और यहाँ घर पहुंच कर सीमा दीदी बिना किसी से कुछ बोले सीधा अपने कमरे में चली जाती है और पापा भी ज्यादा कुछ न बोलते हुए डिनर कर अपने काम

डिनर के बाद सब लोग एक एक कर अपने कमरे में पहुंच चुके होते है और कुछ एक डेड घंटे बाद मेरे मोबाइल में मैसेज आता है जो मैसेज रागिनी बुआ का था की...

"15-20 मिनट बाद मेरे कमरे में आजाना, दरवाजा खुला चोर रही हु"...
 
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