Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh - Page 5 - SexBaba
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Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh

:love3:Thank यू आल दोस्तों....

और रही बात मानव को ले कर hi अपडेट देने की, जो में कुछ कमैंट्स में देख पाया, तो दोस्तों इससे पिछले अपडेट ऐसे मोड़ पर खतम हुआ था की इस अपडेट को ऐसा बनाना जरुरी था... बस ऐसे hi साथ बनाये रखिये, आगे सनी और उसके कारनामे भी अचे ढंग से मिलते रहेंगे... शुक्रिया एक बार दोबारा...
 
अपडेट के लिए इतना लम्बा इंतज़ार करवाने के लिए माफ़ी चाहता हु दोस्तों.. कुछ करने की वजह से रेगुलर अपडेट देने का जो सिलसिला चला आ रहा था उस पर रोक लग गई थी लेकिन आगे से ऐसा ना हो और आपको रेगुलर अपडेट मिलते रहे ऐसी मेरी पूरी कोशिश रहेगी,, बस आप लोग इसी तरह अपना प्यार और साथ बनाये रखे.. धन्यवाद्...





अपडेट-36



बुआ की तरफ से 15-20 मिनट में उनके कमरे में आने का मैसेज प्राप्त करते hi मेरे दिल और दिमाग में एकअलग hi ख़ुशी उत्पन्न हो जाती है की सनी कही आज वो रात तो नहीं जहा बुआ अंततः तेरे निचे आने वाली है और अपनी गरम उफनती हुई जवानी तेरे नाम करने वाली हैं. हो सकता है बुआ को पाने के लिए मेरा इंतज़ार अब चरम पर पहुंच गया हो और अगले 20 मिनट बाद में उस हसीं कामुक औरत के जिस्म को अपने हाथो से मसल रहा हो... और इसी सोच में दुबे हुए अगले 20 मिनट पुरे हो जाते है और में तुरंत hi अपने कमरे से निकल कर बुआ के कमरे की तरफ बढ़ चलता हु.

कमरे के दरवाजे पर पहुंच कर दरवाजे को हल्का सा धक्का लगता हु जिससे की दरवाजा अंदर की तरफ खुलता चला जाता है क्युकी जैसा की बुआ ने बताया था, बुआ ने दरवाजा खुला चोर रखा था. दरवाजा खुलते hi में झट से कमरे के अंदर प्रवेश कर लेता हु लेकिन इस वक्त कमरे के अंदर पूरा अँधेरा चाय हुआ था और किसी भी तरह को कोई भी लाइट नहीं जल रही थी... इसी अँधेरे के बिच से बुआ की आवाज मेरे कानो में पड़ती है जो दरवाजे को अंदर से कुण्डी लगा बंद करने को कहती हैं..

बुआ की आवाज सुन उनकी बात मानते हुए में अँधेरे में hi दरवाजा अंदर से बंद कर देता हु और वही खड़े रह...

में: बुआ ये क्या कमरे में इतना अँधेरा क्यों किया हुआ है, लाइट्स क्यों बंद कर राखी है आपने साडी...

बुआ: क्युकी आज की रात हम दोनों के लिए भोत खास होने वाली है और इसलिए में इसे यादगार बनाना चाहती हु..

में, ये समझते हुए की आज बुआ मेरी होने वाली है पूरी तरह से: लेकिन बुआ ऐसे अँधेरे में कुछ दिख hi नहीं रहा तो याद क्या रखूँगा में ः..

और मेरी इस बात के पुरे होते hi पुरे कमरे में एक डिम सी लाइट जल उठती है, लाइट इतनी थी की पुरे कमरे में उसकी रौशनी पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही थी और इसी रौशनी के बिच मेरी नज़र बुआ पर पड़ती है जो की इस वक्त एक लाल रंग की सुन्दर सी साड़ी पहनी हुई थी, पारदर्शी होने की वजह से उनका गोरा जिस्म, चिकना पेट और पल्लू के निचे लाल रंग के कैसे हुए ब्लाउज में कसाव की वजह से उभर कर बहार निकलती हुई चूचिया अलग hi चमक फैला रही थी.

नाभि के निचे बंधी साड़ी जिससे उनका पेट और कमर भोत hi अचे से नज़र आ रहा था और साथ hi पीछे से ब्लाउज सिर्फ दो पतली डोरियों से बंधा हुआ जिसके निचे काळा रंग की ब्रा के स्ट्रैप्स उनकी नंगी पीठ पर झलक दिखलाये बंधे हुए थे और इस सब के अलावा सबसे अधिक आकर्षित करने वाली उनकी गांड जो इस वक्त साड़ी में बिलकुल कस के कैद हुई पड़ी थी जिसे देख किसी का भी लुंड करंट के झटके लगने सी हल में आ मचलने लग जाये..

इस तरह के पहनावे के साथ होठो पर लाल रंग की गहरी लिपस्टिक, हाथो में चुडिया और हल्का सा मेकअप किये हुए बुआ आज रत अलग hi केहर ध रही थी, आज से पहले मेने बुआ को इतना सज संवर कर तैयार हुए नहीं देखा था और आज ऐसी kamuk,ufanti जवानी भरी महिला को अपने शामे इस रूप में देख मैं कुछ पालो के लिए स्तब्ध hi रह गया था की तभी मुझे इस तरह घूरते पा कर..

बुआ: ऐसे क्या घर रहा है जैसे मुझे पहली बार देख रहा हो.

में, होश में आते हुए: मममम रागिनी बुआ सच कहु तो आपका ये रूप तो मेने आज पहली बार hi देखा है, कसम से क्या कड़क माल लग रही हो मन तो कर रहा अभी मसल दालु आपको..

बुआ: ः बेशरम इंसान, वैसे मसलने का मौका भी में तुझे दूंगी और सच बताऊ तो आज तुझे इसी लिए अपने कमरे में बुलाया है लेकिन सनी खुद को तुझे सौपने से पहले मेरी कुछ शर्ते है या ये कह ले मेरी कुछ इच्छाएं हैं.

में, आगे बढ़ बुआ के गलो पर चुम उन्हें कास के अपनी बहो में जकड कर: आपकी हर शर्त मंजूर है मुझे bua,aap जैसी कड़क माल को मसलने के लिए तो मुझे हर बात मंजूर हैं.

बुआ, मुझसे अलग होते हुए: नहीं सनी ये इतनी आसान और सरल शर्ते नहीं है, तुझे जिंदगी भर इन्हे निभाना पड़ेगा और अगर नहीं निभा सके तो आज अभी बता देना..

में, सोच में पड़ते हुए: बुआ अब ऐसी भी क्या िछाये है आपकी आप बताओ तो सही ः...

बुआ: देख सनी तू तो जनता है मेने अपनी अब तक की जिंदगी बिना किसी साथी के अकेले गुजारी है और पिछले एक डेड साल से मेने किसी भी मर्द को मेरे इस जिस्म को भोगने का मौका नहीं दिया हैं, मैंने अपनी साडी शारीरिक जरूरते खुद से hi पूरी की हैं...

में: हाँ बुआ मुझे ये सब पता है और इसलिए तो में अब आपको और अकेलापन नहीं झेलने दूंगा आपको हर सुख दूंगा..

बुआ: में जानती हु की तू मेरे बारे में कितना सोचता है और मुझे ख़ुशी देना चाहता है और अब मेने खुद भी तुझसे सम्बन्ध बनाने का मन बना लिया है और इसी वजह से आज तू इस वक्त मेरे कमरे में है सनी...

में, बुआ के करीब जाते हुए: तो फिर बुआ अब जल्दी से आपकी वो इच्छाएं और शर्ते भी तो बताओ की आखिर आप क्या चाहती हैं..

बुआ: देखो सनी जैसा की मेने तुझे बताया मेने काफी आरसे से किसी मर्द के साथ सम्बन्ध नहीं बनाया है, ऐसा समझ लो की कभी किसी को भाव hi नहीं दिया है पर जब भी तू मेरे साथ किसी भी तरह को हरकत करता है में कभी खुद को तेरी तरफ आने से रोक नहीं पायी और आज तुझे अपने मन की बात कहु सच तो ये है की जब तू छोटा था तब से hi तेरे प्रति मेरे मन में एक अलग प्यार और जगह बन चुकी थी और यही कारन भी था की तुझसे बचपन में अपनी चूचिया चुस्वाति थी और जब पिछले कुछ दिनों से तू मेरे शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहा था तो में अपनी भावनाये नहीं रोक पाई और पिछली रत जब तूने मुझे वो बाटे कही, की तू मुझे खुश देखना चाहता है मेरी ख़ुशी चाहता है तो ये सब कुछ जानने के बाद तो मेरे दिल में तेरे लिए प्यार और ज्यादा बढ़ गया था और इसीलिए मेने कुछ अपने मन में दबाई हुई इच्छाओ को वापस जगा लिया है और अब चाहती हु की तू मेरी उन इच्छाओ को पूरा करे...

में, बुआ को दोबारा गले लगा: बुआ आप बताओ तो सही में वडा करता हु आपकी हर एक इच्छा पूरी करूँगा..

बुआ: हहै अगर ऐसा है तो सुन, जैसा की तुझे पता है में आज तक बिना शादी किये बिना किसी साथी के सहारे जिंदगी बिताती आयी हु, चाहे मेने चुदाई का स्वाद चखा हो लेकिन एक शादी शुदा औरत हो कर अपने पति से जो प्यार एक औरत पाना चाहती है वो कभी नहीं प् सकीय हु..

में: हाँ बुआ लेकिन आप कहना क्या छह रही हो में ठीक से नहीं समझ प् रहा..

बुआ: ः, दरअसल सनी मेरी हमेशा से इच्छा रही है और पिछले कुछ अर्सो से मेने ये तय किया था की अब अगर में किसी मर्द को अपना जइसन सौपूंगी तो वो मर्द सिर्फ मेरा पति होगा इसके अलावा किसी और को नहीं...

में, बुआ को देखते हुए: क्या.... इसका मतलब ये है की आप मुझसे सम्भोग नहीं करने वाली हैं क्युकी में तो आपका पति नहीं हु..

बुआ: हाँ यही तो में कहना छह रही थी और इसी शर्त की बात कर रही थी की अगर तुम मुझ पर अपना हक़ जाताना चाहते हो और मेरे इस जिस्म को भोगना चाहते हो तो सबसे पहले तुम्हे मुझे अपनाना पड़ेगा, वो भी ऐसे नहीं बल्कि एक बीवी के रूप में अपनाना होगा.

में, बुआ को अपनी बीवी बनाने की बात से उत्साहित तो भोत हुआ पर हकीकत समझते हुए: लेकिन आप मेरी बीवी कैसे बन सकती हो बुआ, हमारे बिच तो बुआ भतीजे का रिश्ता है न..

बुआ: हाँ तो में वही कह रही हु की में अपने भतीजे से नहीं छोड़ना चाहती हु, में चाहती हु की आज अभी इसी वक्त से मेरा भतीजा मेरा पति बने और फिर मुझे अपनी पत्नी बना कर आज इस रात को मेरी सुहागरात में तब्दील कर नए रिश्ते की शुरुआत करे...

में, बुआ की बाटे सुन खुश होते हुए और साड़ी के उप्पेर से hi उनकी चूचिया दबाते हुए: अह्ह्ह बुआ मुझे भला क्या दिक्कत हो सकती है, इतनी सेक्सी भरे जिस्म की औरत मेरी बीवी बन रही है ये तो मेरी खुश किस्मती हुई न... यही समझ लो की आज से अब आप मेरी पत्नी हो और में आपका पति ः...

बुआ, मेरा हाथ छुवाते हुए: उम्मम्मम ईशःठ नहीं नहीं ऐसे नहीं सनी सिर्फ कहने समझने से काम नहीं चलेगा, एक औरत अपने आप को सुहागन तब तक नहीं समझ सकती है जब तक वो सच में सुहागन बन नहीं जाती..

में: क्या मतलब, और अगर ऐसा है तो फिर आपको सच में मेरी बीवी बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा मुझे...

बुआ, वही पास ड्रेसिंग टेबल के ड्रावर में से कुछ सामान निकल मेरे सामने करते हुए: अगर तू सच में मुझे पाना चाहता है और मुझे खुश करना चाहता है तो आअज इसी वक्त तुझे इस सिन्दूर से मेरी मांग भरनी होगी और अपने हाथो से ये मंगलसूत्र मेरे गले में दाल कर मुझे तेरी सुहागन बनाना होगा, तेरे द्वारा मेरी मांग भरी जाने और गले में मंगलसूत्र डालने के बाद में हमेशा के लिए तेरी हो जाउंगी और मुझ पर तेरे अलावा किसी का भी हक़ नहीं होगा...

में, सिन्दूर और मंगलसूत्र को देख बुआ की तरफ मुस्कुराते हुए अपने हाथो में लेते हुए: बस इतनी सी बात बुआ, में तो कभी सोच भी नहीं सकता था की पत्नी के रूप में मुझे इतनी हसीं औरत मिलने वाली है, और आपको मेरी सुहागन बनाना तो मेरे लिए किस्मत की बात होगी...

बुआ, मेरी बात सुन खुश होते हुए: सच सनी, क्या तू सच में मुझे अपनी बीवी बना कर एक सुहागन औरत होने का वो सुख देगा जो मेने इतने सालो में प्राप्त नहीं किया...

में, बुआ के माथे को चुम कर: हाँ बुआ, में आपको ये सुख जरूर दूंगा लेकिन मेरे कुछ सवाल है जिसका जवाब आपसे पाना इस रिश्ते की शुरुआत करने से पहले भोत जरुरी है..

बुआ: कैसे सवाल सनी पूछो न...

में: देखो बुआ भले हम एक दूसरे के लिए पति पत्नी बन जायेंगे लेकिन बहरी दुनिया को क्या कहेंगे, उनके लिए तो हम बुआ भतीजा hi है न, और दूसरी बात घरवालों को हम ये बात थोड़े बता सकते हैं और अगर उन्हें नहीं बताई तो अगले कुछ सालो में वो मेरी शादी किसी और से करवा देंगे, क्या तब आप मेरी जिंदगी में दूसरी लड़की का आना मंजूर कर पाएंगी.

बुआ, मेरे करीब आ मेरे होठो पर एक गहरा चुम्बन करते हुए: उम्मम्मम्माह प्यारे सनी, तुम्हे क्या लगा की मेने इन बातो पर सोचा नहीं होगा क्या, में भली भांति जानती हु की आगे चल कर ये बाटे सामने आएँगी hi.. तो इनका हल ये हैं की में तुम्हारी पत्नी सिर्फ इस कमरे में या तुम्हारे कमरे में बन कर रहूंगी बाहरी दुनिया के लिए हम बुआ भतीजा hi है पर हाँ मेरे मन और नज़र में हमेशा अब तुम मेरे पति बन का कर hi रहोगे और तुम मुझ पर कही भी किसी बी वक्त अपना हक़्क़क़ जाता सकते हो, बस इस बात का ध्यान रहे की समाज या परिवार में हमारे रिश्ते की भनक न लगे..

बुआ: और रही बात आगे चल कर तुम्हारी शादी होने की तो उसके लिए सनी मेरी तरफ से तुम्हे हमेशा मंजूरी रहेगी, में अचे से समझती हु की मेने अपनों जिंदगी भोत जी ली है परचम तो अभी शुरुआत कर रहे हो और आगे चल ये तय है की तुम्हे किसी लड़की से प्यार भी हो सकता हाउ और परिवार वाले किसी से शादी भी करवाएंगे, तो इस सब की तुम्हे मेरी तरफ से कोई रोक टोक नहीं होगी, तुमने शायद सुना नहीं मेने जो कहा वो की जैसे hi तुम मेरी मांग भरोगे तुम्हारा हक़्क़ मुझ पर होगा और तुम्हारे अलावा किसी और मर्द क बारे में मैं सोचूंगी भी नहीं लेकिन चूँकि में दुनिया के दस्तूर समझती हु इसलिए तुम्हे ये नहीं कहा की तुम्हे भी सिर्फ मुझसे hi रिश्ता रखना hoga..tum इस चीज के लिए आज़ाद हो...

में, बुआ की कमर में हाथ दाल अपनी और खींच एक जोर का गहरा चुम्बन करते हुए: उम्मम्मम्मम्हाआअह्ह्ह्हह रागिनी वाकई तुम जैसी समझदार औरत जिसकी बीवी हो वो कितना खुशकिस्मत इंसान होगा उम्मम्मम्माः..

बुआ: मऊआआआह ः मेरी इजाजत है लेकिन इसका ये मतलब नहीं की तुम अपनी पहली बीवी यानि मुझे प्यार करना भूल जाओ आगे चल कर..

में: सच कहु तो अब में शादी hi नहीं करना चाहता किसी और से, में तो सोच रहा घर वालो को कह दू की मुझे शादी नहीं करनी है अब ः, इतनी मस्त भरे जिस्म वाली कामुक और समझदार औरत जो मिल गयी है..

बुआ: हहै काश ऐसा हो जाये, मेरे लिए इससे अछि बात क्या होगी की जिस लड़के को उसके बचपन से hi अपनी जिस्म की गर्मी मिटने के लिए पसंद करती आई हु वो हमेशा के लिए पूरी दुनिया के सामने मेरा पति बन कर रह जाये. लेकिन फिलहाल में इस बात से hi खुश हु की बंद कमरे में hi सही मुझे तुम्हारी सुहागन बनने का मौका मिल रहा है..

में, बुआ की बात सुन मुस्कुरा कर उन्हें देखते हुए सिन्दूर की डिब्बी खोल चुटकी में लेते हुए उनके करीब जा कर उनकी मांग भरने लगता हु, मांग भरते वक्त बुआ अपनी आंखे बंद कर सुहागन बनने के इस एहसास को भोत अचे से महसूस करने लगती है और जैसे hi मेने उनकी मांग अपने हाथो से भरी वो तुरंत आँखे खोल मुझसे कस के लिपट गयी...

में, कुछ देर उनको अपनी बहो में रखने के बाद दूर करते हुए : क्या हुआ ragini(bua को नाम से hi बुला रहा था), अब तो खुश हो न तुम, आखिर अब तुम मिस रागिनी खन्ना से मरस रागिनी सनी खन्ना बन hi गई ः..

बुआ: हहै हाँ भोत खुश हु सनी में और मेरे नाम के साथ तुम्हरा नाम जुड़ने से अब मुझसे जिंदगी की हर ख़ुशी मिल गयी सच, आज से मैं अब तुम्हारी हु सनी, मेरी मांग भर कर तुमने मेरी आत्मा और मन तो अपने नाम कर लिया अब ये मंगलसूत्र पहना कर मेरा जिस्म भी अपने नाम कर लो सनी उम्मम्मम्मम्मम्माः...

मैं, वही खड़े खड़े साड़ी के पल्लू को सरका निचे गिरते हुए जिससे कैसे ब्लाउज में उनकी चूचिया जो इस वक्त भरी साँसों की वजह से उप्पेर निचे हो कर मस्त दिखाई पद रही थी, उनके कंधे और गले से होते हुए छाती तक चुम कर: मुउउउउउउआआआह रागिनी वो भी पहनाउंगा लेकिन ऐसे hi बाकि आम लोगो की तरह नहीं, हम किसी और रिश्ते से किसी और रिश्ते में आये है तो इस नए रिश्ते को अपनाने के तरीके भी तो अलग होंगे न ः...

बुआ, अपनी आंखे बंद किये मेरे सर में अपने हाथ फिरते हुए: उफ्फ्फफ्फ्फ़ सनी िष्ठ कैसे अपनाने वाले हो तुम फिर इस नए रिश्ते को... और ये क्या तुम तो मांग भरते hi बुआ से सीधा रागिनी बुलाने लग गए मुझे हहै...

मैं, बुआ को धक्का देते हुए बिस्तर पर गिरते हुए, और उनके उप्पेर आ कर ब्लाउज के उप्पेर से hi चुचिओ के बाहरी भाग को मुँह में भर चूसने लगता हु और फिर अपने होठो को उनके होठ पर रख जोर से चूमते हुए दांतो में होठ फसा हल्का सा खींच कर चोर देता हु: क्यों रागिनी, अब तुम मेरी बुआ कहा रही बीवी बन चुकी हो, तुम्हारी मांग ने मेरे नाम का सिन्दूर भरा हुआ है और एक पति अपनी पत्नी को बुआ कहे ये कहा ाचा लगेगा ः..

बुआ: मममममम िष्ठ्हह उफ्फ्फ्फ़ सनी नहीं मुझे नाम से hi बुलाओ, सच कहु तो तुम्हारे मुँह से इस तरह सीधा नाम सुन्ना भोत ाचा लग रहा है और सच कहा है तुमने की अब में पत्नी हु तुम्हारी इसके अलावा कोई और रिश्ता नहीं है मेरा तुमसे हहै...

मैं बुआ की इस बात को सुन निचे सरकते हुए साड़ी को एक तरफ हटा उनके गदराये गोर चिकने पेट को चूमने लगता हु और साथ hi उनकी गहरी नाभि में जीभ फिरने लग जाता हु जिससे बुआ के पेट में एक अलग hi कम्पन शुरू हो जाता है और इस कारन वो जोर से मेरा सर पकड़ अपने पेट में दबा देती है...

बुआ: अह्ह्ह मममम सनी उफ्फ्फ्फ़ आज कितने आरसे बाद मुझे एक मर्द ने इस तरह छू कर ये एहसास दिया है उफ्फ्फफ्फ्फ़ प्लस आज की रात मुझे तृप्त कर दो, मुझे ये जाता दो आज रत की हाँ अब में अकेली नहीं रही मेरा पति है जो अब मेरे जिस्म की भूख को हर वक्त शांत करने के लिए मौजूद है अह्ह्ह्हह...

मैं, बुआ की नाभि को चूसते हुए अपने हाथ उप्पेर ले जा चुकी को दबोचते हुए: मम्माह रागिनी आज रात तुम मेरी सुहागन बानी हो इस कारन आज की रात हमारी सुहागरात है और आज की रत में तुम्हे पूर्ण रूप से तृप्त करूँगा और साथ hi ये वडा भी करता हु की आगे भी ऐसे hi मजा देता रहूँगा मऊआआआह..

बुआ: मममम उफ्फ्फ्फ़ सनी एक औरत इससे ज्यादा और क्या चाहती है की उसका पति उसे अचे से शारीरिक सुख देता रहे अह्ह्ह्ह ममममम..

और इसी बात पर में निचे आते हुए बुआ के पेरो की उंगलिओ को अपने मुँह में भर चूसने लगता हु और एक हाथ को उनकी साड़ी के अंदर डालते हुए टैंगो को मसलने लगता हु, जिसके जवाब में बुआ हलकी हलकी सिसकीओ के साथ और अपनी चुचिओ को भरी साँसों की वजह से तेजी से उप्पेर निचे करने में व्यस्त थी..

एक एक कर बुआ के पेरो की साडी उंगलिओ को चूसने के बाद अब अपनी जीभ को उप्पेर की ततः लेट हुए टैंगो को चूमने लगता हु और धीरे धीरे हाथो से साड़ी पेटीकोट उप्पेर सरकते हुए उनकी जांघो तक आ पहुँचता हु. उफ्फ्फ्फ़ वो गोरी मांसल जांघो को देख मनो मेरे मुँह में पानी सा आ गया हो और तुरंत hi जांघो पर अपने होठ रख उन्हें मसलते हुए चूसने लग जाता हु..

बुआ: अह्ह्ह्ह ममममम सनी ये क्या कर रहे हो अह्ह्ह्ह ऐसे तो आज तक किसी ने मुझे मजा नहीं दिया अह्ह्ह भोत ाचा लग रहा है मुउउउउहाम्मम्मम्मम.

बुआ ने अभी ये बात कही hi थी की मेने उनकी साड़ी को कमर के उप्पेर तक सरका छूट ढकी हुई उनकी पंतय को टैंगो के बीचो बिच से मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया... पंतय चूसने पर अब मेरे मुँह में बुआ की छूट के नमकीन रास का स्वाद भी आने लगा था उम्मम्मम्माह..

में: मुउउउउआअह्ह्ह मुहाः रागिनी जब पंतय के उप्पेर से तुम्हारी छूट इतनी स्वादिष्ट लग रही है पंतय हटाने के बाद तो नजाने कितनी मस्त लगेगी मऊआआआह, कब से hi इसको चखने के लिए बेताब था में अहह..

बुआ: ओह्ह्ह्हह्ह ममममम सुननीयीय िष्ठ्हह तो चख लो न आअज तो सब कुछ खा जाओ मेरे जिस्म से उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ में भी तो मचल रही अपनी छूट चुसवाने के लिए अपने पति से अह्ह्ह ममममम..

और इस बात पर मेने बुआ की पंतय को एक झटके में टैंगो से निचे सरका दिया और जिसके उपरांत अब बुआ की चिकनी खूबसूरत छूट मेरी नजरो के सामने थी जिसे देखते hi मुझसे रहा नहीं जाता है और छूट की फैंको को फैलते हुए अपनी होठो को अंदर लाल रंग के फुले हुए छूट के डेन पर रख चुम लेता हु. छूट के डेन पर एक छोटे से चुम्बन मात्रा से hi बुआ कम्प सी उठी है मनो ये जाता रही हो की आज कितने वक्त बाद किसी मर्द के स्पर्श से उनकी छूट सही से जग उठी हो...

बुआ, मेरे सर को अपनी टैंगो के बिच दबाते हुए: अह्ह्ह्हह ममममम सुननीयिययियीय उफ्फफ्फ्फ़ अब मुँह मत हटाना प्लस अह्ह्ह्हह कितने दिनों बाद ये एहसास मिला है मुझे िफ्फ्फ्फ़ कब से तड़प रही थी में अह्ह्ह्ह प्लस और जोर से चूस लो मुझे ममममम.

और अब मेने बुआ की कमर में हाथ दाल जकड़ते हुए अपनी जीभ को उनकी छूट पर रख अचे से रगड़ना और चेतना शुरू करदिया था, बुआ की छूट अब मेरे इस तरह स्पर्श के एहसास से पूरी तरह से पनिया चुकी थी और उनके गीले पैन का स्वाद लेते हुए मैं भी जीभ को छूट के अंदर प्रवेश करवा चूका था. एक हाथ से ब्लाउज में कैद चुकी को मसलते हुए और मुँह से उनकी छूट का छोडन करते हुए अब में अपने काम में पूरी तरह मस्त हो रहा था और बुआ भी इस दोहरे प्रहार से बुरी तरह गरमा चुकी थी जिस कारन खुद से ही अपने एक हाथ की दो उंगलिओ को जीभ से छाती जा रही उनकी छूट पर रख सहलाने लग पड़ती है.

बुआ: अह्ह्ह्हह ममममम सुननीयीय उफ्फफ्फ्फ़ हैं चुस्स्स उफ्फ्फफ्गगफ कितना ाचा चुस्त है उफ्फ्फ पहले पता होता तो बचपन से hi दूध के साथ छूट भी चुसवा लेती तुझसे अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ममम बीटा हैं चूस ले अपनी बुआ उर्फ़ नयी नवेली पत्नी की छूट अह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़...

बुआ को गर्मी देख अब में और जोश में आते हुए मुँह को हटा अपनी दो उंगलिओ को छूट में दाल उन्हें तेजी से छोड़ने लगता हु और खुद उप्पेर की तरफ आते हुए उनके ब्लाउज के दो तीन हुक को मुँह से खोल एक चुकी को बहार निकल मुँह में भर चूसने लगता हु..

एक चुकी मुँह में भर निप्पल को दांतो में फसा खींचते हुए और साथ hi निचे हाथ उनकी छूट को छोड़ने के काम में लगे होने से अब बुआ का हाल और बुआ हो चूका था और वो बिस्तर पर अपना सर पटक पटक कर अपनी तड़प दिखा रही थी..

बुआ: अह्ह्ह्हह मममममम सुननीयीय उफ्फ्फ्फ़ कितनी अछि तरह से पता है तुझे की औरत को कैसे मजा देना है उफ्फफ्फ्फ़ मुझे नहीं पता था की तू इतना ाचा खिलाडी होगा अह्ह्ह्ह तेरी पत्नी बनने का फैसला गलत नहीं है मेरा अह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ ममममम

में, तीसरी ऊँगली को भी छूट में घुसा पूरी गति से छूट छोड़ते हुए जो गीली होने के कारन अब कमरे में फच फच की आवाज भी करने लगी थी: अहह उम्मम्मम्माह रागिनी अभी तो देखती जाओ तुम्हे कितना मजा देता हु आज की रत मेरी बीवी हमेशा यद् रखेगी उम्मम्मम्माह.

छूट में तीन तीन उंगलिओ के इस तरह वार करने से अब बुआ खुद को ज्यादा देर रोक नहीं पति है और कमर को जोर जोर से हिलाते हुए झड़ने लग जाती है अह्ह्ह्हह सनी में गयी उम्मम्मम्मम. उनके झड़ते hi में उन्हें कस के अपनी बहो में भर लेता हु और उनके होठो को अपने होठो से जोड़ एक गहरे चुम्बन में दुब जाता हु...

बुआ, चुम्बन तोड़ते हुए: उम्मम्मम्मम्माह सनी सच में तुम खिलाडी हो वार्ना आज तक में सिर्फ छूट चटवा कर कभी नहीं झड़ी हु अहह और तुमने तो अभी मुझे पूरा नंगा भी नहीं किया ममममम सच कह रही हु ये पहली बार हुआ है की बिना सरे कपडे उतरे और लुंड छूट में डेल मेने अपना पानी निकला है अह्ह्ह्ह मऊआआह.

बुआ की इस बात पर अब में बिस्तर से उठ खड़ा होता हु और खड़े हो कर कुछ पल बिस्तर पर लेती बुआ को निहारने लगता हु..

बुआ, मुझे ऐसे देखते हुए देख: क्या देख रहे हो मेरे पतिदेव ऐसे हहै..

बुआ जो इस वक्त साड़ी कमर तक उठाये टंगे फैलाये नंगी छूट के साथ और एक चुकी ब्लाउज से एक चुकी बहार नीलकली हुई लिए लेती थी.

में: बस यही देख रहा हु की मेरी बीवी अपनी सुहाग रत पर आधी नंगी लेती कैसी दिखती है ः, और सच कहु तो रागिनी, इस वक्त तुम एक काम देवी सी कामुक औरत लग रही हो तुम्हारे अंग अंग में कामुकता झलक रही है... इतनी गरम और हसीं बीवी ढूंढ़ने पर भी कहा मिलती ः..

बुआ: हेहेहे अब बस भोत तारीफ हो गई, और छूट चूस कर पानी निकल दिया इसका ये मतलब नहीं की तुम्हारी पत्नी तृप्त हो गई है हहै..

में: अरे अगर तृप्त हो भी गयी होती तब भी में आज रत तो छोड़ना बंद नहीं करता आज तो पूरी रत पेलना है तुम्हे ः, वैसे भी मेने अपनी पत्नी को कुछ पल की शुरुआती ख़ुशी तो दे दी अब में ये देखना चाहता हु की मेरी पत्नी अपने पति को कैसे खुश करती है हाहा..

बुआ, मेरी बातो से इशारा समझते हुए तुरंत बिस्तर से उठ कड़ी होती है और वैसे hi एक चुकी बहार लिए निचे घुटनो पर बैठते हुए मेरे लोअर को निचे सरका मेरा लुंड बहार निकल हाथ में पलाद लेती है, बुआ के नरम हाथो के स्पर्श से hi लुंड ने झटके लगाने शुरू कर दिए थे और..

बुआ, लुंड को देख सहलाते हुए: मममममम सनी कितना बड़ा लुंड है तेरा उफ्फ्फ और मोटा भी ममममम लगता है आज वाकई में मेरी सुहागरात यादगार होने वाली है हहै..

और ये बोल अब बुआ ने मेरे लुंड के टोपे पर चुम liya.aur लुंड की चमड़ी को अपने हाथ से आगे पीछे करते हुए टोपे को जीभ से चाटने लगी थी. बुआ के जीभ और हाथो के उस मुलायम स्पर्श से लुंड ख़ुशी से झूमते हुए बेकाबू होने लगा था और तभी मुझे लुंड पर गर्माहट का एहसास होने लगता है जिसका कारन ये था की बुआ ने लुंड को अब अपने मुँह में भर लिया था और चूसना शुरू कर दिया था.

में, बुआ के बालो को पकड़ सहलाते हुए: उम्मम्मम रागिनी कब से चाहता था में की तुम्हारे इस मुँह में मैं मेरा ये मुसल लुंड अंदर आजाते देखु ममम अहह आज वो इच्छा पूरी हुई है और तुम्हारे लुंड चूसने का अंदाज hi अलग है, इसलिए तो कहता हु मैं की ऐसी मातुरे और एक्सपीरियंस वाली बीवी मिल गयी है मुझे की अब किसी और की जरुरत नहीं अभह मममममम.

बुआ अपनी तारीफ सुन कर और जोश में आते हुए और बिना कुछ कहे लुंड की बॉल्स को हाथो में पकड़ सहलाने लगती है और अपने मुँह की गति को और बढ़ाते हुए लुंड को अपने गले तक पंहुचा कर बहार निकल चूसने का मजा ले रही थी. ममममममममाआहहह सलूररररपपपपपपपपप मऊआआआह.

बुआ: मममममम सनी उफ्फफ्फ्फ़ सच भोत मस्त लुंड है तुम्हारा सनी, इतना मोटा और लम्बा है की चूसने में भी भोत मजा आ रहा है मम्मुआआह्ह्ह्हह..

और ये बोल बुआ अब लुंड को हाथ से मुठियाते हुए मेरे लुंड की बॉल्स को मुँह में भर चूसने लग जाती है, अह्ह्ह्हह उनके इस तरह बॉल्स को मुँह में लेने से मनो ऐसा लगा जैसे की अंदर भरा वीर्य अभी बहार उबाल कर निकल आएगा.

और इसी वजह से जोश में आते हुए मेने खुद से बुआ का चेहरा पकड़ अपना लुंड उनके मुँह में पेल कर तेजी से मुँह को छोड़ना शुरू कर दिया.

में, बुआ के मुँह को छोड़ते हुए: अह्हह्ह्ह्ह रागिनी चूस और अंदर तक ले अपने पति के लुंड को ममममम कब से तड़पा रही थी तुम उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह और ले अंदर तक..

और बुआ भी मुँह को खोल कर मेरा हर काम में पूरी तरह साथ दे रही होती है ममममम.

कुछ देर की और मुँह चूसै और चुदाई के बाद में उन्हें उनकी साड़ी को पूरी तरह उनके शरीर से हटा सिर्फ बहार निकली चुकी वाले ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ा कर देता हु.

मैं, उन्हें इस तरह देख अपने पास खींचते हुए: वैसे सच कहु तो इस वक्त मेरी बीवी एक मस्त चुड़क्कड़ औरत जैसी दिख रही है इस ब्लाउज और पेटीकोट में ः...

बुआ, मचलते हुए: मममममम सनी अब सच hi है ये, तुम्हारी बीवी तुमसे छोड़ने के लिए अब भोत तड़प रही है, इतनी देर से हम ये छोडन का खेल खेल रहे है लेकिन अभी असल काम तो किया hi नहीं और उसके बिना hi में इतनी मचल रही हु अह्ह्ह... मेरे प्यारे पतिदेव अब असली खेल भी पूरा कर दो ताकि आपकी ये बीवी की इतने वर्षो की प्यास बुझ जाये मममममम.

और बुआ की ये बात सुनते hi मेने उनके ब्लाउज को पकड़ के खींच दिया जिससे उनके बचे हुए हुक्स भी पुरे टूट गए और ब्रा ब्लाउज दोनों को एक साथ hi उतर कर जमीं पर फेक दिया और उनकी दोनों चुचिओ को बरी बरी जोर जोर से मसलने और चूसने लग गया ममममममआयएह.

साथ hi अब उन्हें बिस्तर के किनारे झुका कर पीछे से पेटीकोट को वापस कमर तक उठा लिया और उन्हें मोठे चिकने नंगे चूतड़ों पर कास के दो तीन थप्पड़ लगा diye.."ahhh मेरी जान यही वो चूतड़ है न जो तुम हर वक्त दिखा दिखा के मेरे लुंड को बैचैन करती थी "

बुआ: उफ्फ्फफ्फ्फ़ ोुउउउउछहःहःहःह हाँ यही है मेरे बो चूतड़ जो आज से आपके नाम है जो करना है कर लो सनी मममममम...

और बुआ की ये बात सुन में उनके चूतड़ों को फैला अपना मुँह चूतड़ों के बिच ला कर जीभ से कुरेदने लगता हु जिससे बुआ सिहर उठती है और कम्पनी लग पड़ती हैं....

बुआ: ाभःहःहःपहहहह ओह्ह्ह्हह्ह ममममम सनी ये क्या कर रहे हो अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ ये एहसास तो में जिंदगी में पहली बार महसूस कर रही हु उफ्फ्फफ्फ्फ़ ममममम अह्ह्ह्ह प्लस छोड़ो मुझे अब नहीं रहा जा रहा हो अह्ह्ह्हह ममममममम...

में, बुआ की बात न सुनते हुए अब उनके गांड के छेद पर अपनी जीभ से हलके हलके सहलाते हुए : मूउऊजाआअह मुऊआआह्ह्ह्ह सुनाई नहीं दिया मुझे रागिनी, ठीक से कहो की क्या करवाना चाहती हो तुम.

बुआ, मस्ती में मचलते हुए: अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ सनी क्यों तड़पा रहा है उफ्फ्फ्फ़.. ममममम में कह रही हु की प्लस मुझे छोड़ो, अपनी बुआ को अब अचे से छोड़ कर पूर्ण रूप से अपनी बीवी बना लो अह्हह्ह्ह्ह ममममम मत तड़पाओ मुझे अब और ईशःठ...

बुआ की तड़प देख अब में मुँह हटा उनकी चूतड़ के पीछे आते हुए लुंड को पीछे से उनकी छूट के मुहाने रख हलके हलके रगड़ने लगता हु, जिसपर लुंड का छूट पर इस तरह रगड़ महसूस कर बुआ पीछे मुद मेरी तरफ तरस भरी निगाहो से देखने लगती है मनो कह रही हो की अब तो घुसा दो अंदर...

और बुआ की नजरो में नजरे दाल कर hi में उनकी कमर पकड़ एक जोर का धक्का लगा देता हु जिससे मेरा मुसल आधा उनकी छूट में ह्स्त चला जाता है और इस दौरान में बुआ के चेहरे के बदलते भावो को अछि तरह से नोटिस करता हु जो दर्द और मस्ती के मिश्रण से अलग hi कामुक सुंदरता झलका रहे थे और साथ hi उनके मुँह से निकलती हुई दर्द भरी अह्हह्ह्ह्ह..

बुआ: इस्स्स्सस्स्स्स अह्ह्ब्ब्ब्ब्ब मममममन सुननयीय ुफ्फजफ थोड़ा धीरे उम्मम्मम इतना बड़ा मुसल है आपका और में इतने वक्त बाद ले रही हु कोई लुंड ये तो ख्याल करो अह्ह्ह्हह...

मैं, आगे की तरफ झुक चुकी को हाथ में पकड़ नोचते हुए दूसरा तेज धक्का देते हुए: अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह इतनी गरम औरत की छूट को आराम से पेलने में कहा मजा है मेरी रागिनी, और वैसे भी एक औरत की छूट इतनी कासी हुई मिल जाये तो उसे ऐसे hi पेलना चाहिए अह्ह्ह, धीरे में औरत को भी मजा नहीं आएगा न मेरी जान ः..

बुआ, मेरे धक्के से आगे की तरह सरकते हुए: अह्ह्ह्हह्हह िष्ठ्हहह हयईईई मममममुफफ्फ्फ़ मर गयीईइ अह्ह्ह्ह कितना मोटा लुंड है तुम्हारा उफ्फ्फफ्फ्फ़ ऐसा लग रहा जैसे छूट चिरररर गयी हो अह्ह्ह्हह्हह ममममम..

में कुछ देर ऐसे hi लेते बुआ की पीठ को चूमते हुए और चुचिओ को सहलाने लगता हु और थोड़ी रहत होने के बाद अब वापस धीरे धीरे गति बढ़ाते हुए लुंड को छूट के अंदर बहार करना शुरू कर देता हु...

मैं, कमर पकडे अपनी बुआ की छूट में लुंड पेल सवारी करते हुए: ममममम ोहहभ रागिनी तुम इतने दिनों से डिलडो उसे करती आई हो फिर भी छूट इतनी कासी हुई है ऐसा लग रहा मनो सच में किसी नयी नवेली दुल्हन की छूट पेल रहा हु..

बुआ, अब मेरे धक्को का साथ देते हुए: िस्स्सस्स्स्स अह्हह्ह्ह्ह सनी मममम डिलडो और तुम्हारे मुसल की साइज में भोत फरक है अह्ह्ह ममममम मुझे खुद आज एहसास हो रहा है की नकली लुंड में वो मजा कहा जो आज एक असली लुंड से मिल रहा है मममम अह्ह्ह्ह और रही बात दुल्हन की छूट की तो आज में आपकी नयी नवेली दुल्हन hi तो हु हहै अह्ह्ह्हह ममममममम उफ्फ्फ्फ़.

बुआ की ये बात सुन अब मेने उन्हें पलंग पर फ्लैट पेट के बल लिटा दिया और खुद उनके ऊपर लेट ते हुए चूतड़ फैला लुंड को छूट में उतारनर लगा और रगड़ रगड़ कर मसलना शुरू कर दिया.. दोनों हाथो को गद्दे से डाब रही चुचिओ पर रख उन्हें नोचते हुए लुंड को अब छूट में पूरी गति से अंदर बहार करते हुए पेलने लगा था, कमरे में लुंड की चूतड़ से टकराने से थप थप की आवाज गूंजने लगी थी और साथ hi बुआ के मुँह से निकल रही कामुक मस्ती भरी अहहैं माहौल और भी मस्त कर रही थी...

बिस्तर पर उलटी लेती बुआ अब मेरे लुंड के हर धक्के के साथ साथ अपने चूतड़ों को उप्पेर उठाते हुए अपना साथ दे रही थी.. अह्ह्ह्ह ममममम सनी उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह छोड़ो मुझे अह्ह्ह्ह मममम हैइरर मर गयी अह्ह्ह्हह इसशहहहह मममम छोड़ते रहो उफ़ रुकना मत ममममम आठ में झड़ने वाली हु उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ सनी ममममम..

और बुआ की बात सुनते hi चूचिया दबा रहे हाथो को में निचे की तरफ लेट हुए उनकी छूट पर होठो के बिच रख रगड़ना शुरू कर देता हु... निकल मेरी कामुक दुल्हन, निकल अपनी छूट से वो काम रास जिसके लिए आज तू मेरे निचे इस कदर लेती हुई है आह्हः ये लिए रागिनी... और ये बोल उंगलिओ को छूट के होठो पर जोर से घिसती हुए लुंड की मार और तेज कर देता हु जिसको सहना अब बुआ के लिए मुश्किल हो जाता है और पूरा शरीर कम्पन के मरे हिलने लग पड़ता है और साथ hi छूट में उफनती गर्मी की हिलोरे उस कम्पन के माध्यम से काम रास बन छूट से बह जाती है...

छूट से पानी झड़ने पर में भी कुछ देर बुआ की पीठ पर लेट कर उन्हें सहलाने लगता हु और अपने दांतो को उनकी नंगी गोरी पीठ पर चुभते हुए चूमने लगता हु मममम और बुआ जो इस वक्त झड़ने के बाद अपनी सांसो को सँभालते हुए बिस्तर पर एक सुकून के साथ लेती हुई थी..

बुआ, मेरे इस तरह पीठ को चूमने se:mmmm अह्ह्ह सनी सच इतना अछि तरह से मेरा काम रास का बहाव आज से पहले कभी नहीं आया, उफ्फ्फ्फ़ ऐसा लग रहा है मनो सालो से भरा सारा रास तुम्हारी इस एक चुदाई में hi बह गया हो और मेरा शरीर पूरी तरह हल्का हो गया हो अह्ह्ह ममम..

में, बुआ की पीठ से उतर उन्हें सीधा कर पीठ के बल बिस्तर पर लिटा उनके होठो को चूमते हुए और चूचिया सहलाते हुए: ममममम मेने तुम्हे कहा था न रागिनी की तुम्हे और तुम्हारे शरीर को अब इतना मजा दूंगा की अब तक अकेलेपन में बिताया सारा समय भूल जाओगी, उम्मम्मम्माह और रही बात काम रास की तो तुम्हारा इस जिस्म की

बनावट ऐसी है की इसे जितना रगड़ो, मसलो या नोचो उतना काम है मुऊआआआआह..

बुआ: मममममम अह्ह्ह्ह मेरा तो ang-ang और rom-rom अब तुम्हारे नाम कर दिया है मेने सनी, अह्ह्ह जैसे चाहे नोच डालो मुझे और अगर पहले पता होता की तुम्हे अपना जिस्म सौपने में इतना मजा आने वाला है तो कबका तुम्हारे बिस्तर पर नंगी हो चुकी होती अह्ह्ह्हह...

में, वापस बुआ की टैंगो के बिच आ अपने मुँह से उनकी काम रास के बहाव से गीली हुई छूट को कुछ देर चूसने के बाद अपने लुंड को छूट पर रख दबाव बनाते हुए: अह्ह्ह्हह रागिनी अभी तो और पेलना है तुझे, आज की साडी रात तुझे पेल पेल के अपना बनाना है और अब तक की साडी कसार पूरी करनी है muuuaaaaaaaaaahhh, ऐसी मस्त रसीली छूट वाली बीवी अबके नसीब नहीं होती अह्ह्ह..

बुआ, लुंड के दबाव से वापस साथ देते हुए कमर उप्पेर की तरफ उचकते हुए : अह्ह्ह्ह तो पेलो न मेरे पतिदेव में तो खुद आज साडी रत आपके इस मुसल से अपनी छूट कुटवाने चाहती हु अह्ह्ह्ह ममममम उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ कितना गरम लौड़ा है आपका ईशःठ ऐसा लगता है मनो गरम लोहे का डंडा छूट में उतर रहा हो अह्हह्ह्ह्ह ममममम..

में, लुंड को हौले हौले पूरा छूट की गहराई में दाल कर उनकी दायी चुकी को मुँह में भर चूसते हुए और बायी चुकी की निप्पल अपनी ऊँगली और अंगूठे में फसा कर: मममम तेरी इस गरम भट्टी के लिए मेरे इस गरम लोहे से डंडे की hi जरुरत है रागिनी, और इसकी कुटाई से hi तेरी ये गरम भट्टी ठंडी होने वाली है अह्ह्ह मुउआअह्ह्ह्हह ये ले मेरी जाएं और ये बोल चुकी को जोर से भींच लुंड पूरा बहार निकल वापस एक करारा धक्का लगते हुए लुंड छूट में पेल देता हु...

अह्ह्ह्हह्हह िष्ठ्हहह मममममम हैईईई आज तो छूट का भरता बन जायेगा मेरी ऐसा लग रहा अह्ह्ह्ह ममममम ओह्ह्ह्ह हैइए और पेलो मुझे सनी हआ ऐसे hi अह्ह्ह्ह छोड़ो अपनी बुआ को अह्ह्ह्ह मममममममम हैइए...

मेरे लुंड के नॉन स्टॉप धक्को से अब बुआ वापस से अपना होश खो बैठी थी और वासना पूरी तरह उनपर हावी हो चुकी थी जिसका फायदा उठाते हुए अब मेने भी अपने लुंड को गति चरम पर पंहुचा दी थी और सत्ता सात बुआ की छूट में लुंड को पेल रहा था... छूट के गीलेपन की वजह से लुंड अब भोत hi अचे तरीके से छूट की बाहरी और अंदर की दीवारों पर रगड़ कहते हुए अपना कहर बरसा रहा था और बुआ हर धक्के का साथ अपनी कमर उचका कर दिए जा रही थी...

आगे झुकते हुए अब बुआ के होठो को चूमते हुए और जानवर की तरह उन्हें काट ते हुए मेने अपने धक्के पूर्ण गति से लगाना शुरू कर दिया था और बुआ ने अपनी दोनों टंगे मेरी कमर के पीछे ले जा बांध सी ली थी और निचे से कमर उप्पेर उठा खुद लुंड को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश में लग चुकी थी...

में, आगे की तरफ झुकते हुए पास hi पड़े मंगलसूत्र को उठा कर अपने हाथ में ले साथ hi दो तीन करारे धक्को से छूट में लुंड पेलते हुए उस मंगलसूत्र को बुआ के गले में दाल देता हु: अह्ह्ह्ह ये लो रागिनी अब टुंगरा जिस्म भी मेरा हो गया फाइनली अह्ह्ह मममममममम और उस मंगलसूत्र को जो चूचियों के बिच तक पहुंच रहा था उसे अपने मुँह में ले निप्पल के साथ चिपका जोर से दबाते हुए मरोड़ देता हु मममम..

बुआ, मेरे इस तरह मंगलसूत्र पहनाने से दुगुने जोश में आते हुए: अह्हह्ह्ह्ह सनी ऐसे चुदाई को सेज पर, लुंड छूट में पेलते हुए तो शायद की किसी ने अपनी औरत को मंगलसूत्र पहना कर अपनाया होगा अह्ह्ह्ह मममममम उफ्फफ्फ्फ़, और सही कहा तुमने ममममम मेरा जिस्म सच में तुम्हारे नाम है अब अह्ह्ह्ह िष्ठ्हह मममम इतना मजा मेने जिंदगी में कभी नहीं महसूस किया अह्ह्ह्ह हयईईई ममममममम...

में, कमर पकड़ अब धक्को की स्पीड और तेज कर जंगली जानवर की तरफ बुआ की छूट पेलते हुए: अह्हह्ह्ह्ह रागिनी ममममम हैइए कितनी मस्त औरत है तू साली, ईशःठ बहार से इतने गुस्से वाली दिखती है और अंदर से अह्ह्ह्ह साली तुझे तो अब रोज ऐसे hi पटक पटक के पेलुँगा में, शादी की है तूने न मुझसे अब देख कैसे तुझे सुख देता हु मेरी बीवी होने का साली अह्ह्ह्हह ममममममम उफ्फफ्फ्फ़ में झड़ने वाला हु साली अह्ह्ह्ह बोल कहा लेगी सुहागरात में अपने पति के लुंड से निकलने वाला वीर्य.... अह्ह्ह्ह

बुआ: ममममम सनी उफ्फ्फफ्फग्ग हईये मर डाला लेटी अह्ह्ह्ह जानवर भी थोड़ा रेहम करते है लेकिन मेरा पति तो बेरहम मर्द है िष्ठ्हह ढूंढ़ने पर भी ऐसा छोड़ू पति नहीं मिलता जो मेरे घर में hi था अह्ह्ह्ह मममम िष्ठ्हह..

अह्ह्ह भर दो मेरी छूट में hi अपना वीर्य पतिदेव ममममम भर दो अपनी बीवी की छूट ताकि मुझे भी ये सुहागरात हमेशा यद् रहे अह्ह्ह्ह मममम उफ्फ्फ्फफ्ग पेलो पेलो पेलो अह्ह्ह्ह मेरा भी होने वाला है अह्ह्ह्ह हैइए अहह..



और इसी के साथ कुछ देर और की गरमा गरम चुदाई के बाद में और बुआ दोनों hi झाड़ जाते हाउ और मेरा वीर्य बुआ की छूट में लबालब भर देता हु और उनके उप्पेर गिर पड़ता हु...
 
अपडेट 37


बुआ की दुमदार चुदाई के बाद में सीधा उनके उप्पेर hi गिर पड़ता हु और कुछ देर ऐसे hi उनके उप्पेर पड़े रहते हुए उनकी चुचिओ को हलके हलके सहलाते हुए और होठो को चूमते के बाद पलंग की एक तरफ लेट जाता हु और मेरे ऐसे लेटते hi तुरंत बुआ अपना सर मेरे साइन पर रख चूमने लगती है...

बुआ, मेरी बहो में लिपट ते हुए: उम्मम्मम्माः सनी थैंक यू सो मुछ्छःह, वाकई आज तूने मुझे औरत होने का असली एहसास दिलाया है, इतनी दुमदार चुदाई तो मेने कभी सोची भी नहीं थी जैसी तूने की है उम्मम्माह, आज में भोत खुश हु की मुझे पति के रूप में इतना ाचा, मजेदार और बेरहमी से पेलने वाला इंसान मिला है हहै..

में, बुआ के होठो को दांतो में फसा खींचते हुए: उम्म्म्माः बुआ खुश तो में भी हु की मुझे आपको पेलने का मौका मिला और आपका पति बनने को मिला ः,, मेने नहीं सोचा था की सुहागरात का ये सुख मुझे मेरी अपनी बुआ से hi मिलने वाला है उम्म्म्माः..

बुआ: हहै बस अब हमेशा अपनी बुआ को ऐसे hi रगड़ रगड़ कर पेलते रहना में कभी कुछ नहीं कहूँगी...

में: ः सोच लो बुआ, फिर बाद में वापस अपना गुस्सैल रूप तो नहीं ले आओगी न...

बुआ: धत्त्त, अपने पति पर भला कोई पत्नी गुस्सा या डाट पीटना करती है क्या हहै... अब तो दुनिया में चाहे किसी से भी गुस्सा हो लू, स्ट्रिक्ट हो जाऊ पर मेरे सनी के आगे कभी नहीं, और जैसा मेने कहा मेने तो तुम्हे सच में अपना पति मान hi लिया है.. इसके अलावा भी अब तो ऐसा लग रहा है की मुझे हर पल इंतज़ार रहेगा की कब तुम मेरी चुदाई करने मेरे पास आओगे ममममम..

में, बुआ की छूट को अपनी हथेली और उंगलिओ से दबाव बनाते हुए सहलाते हुए: अच्छाआ इतना पसंद आया क्या आपको मुझसे छुड़वाना बुआ..

बुआ: ममममममम पूछ मत सनी में कह रही हु न इतनी मज़ेदार चुदाई मेने अपनी जिंदगी में कभी एक्सपीरियंस नहीं की है हहै..

में: उम्मम्मम्मम्हाआअह मेरी बीवी रागिनी बुआ... मुझे भी आपकी छूट पेलने में आज खूब मजा आया, इतनी रसीली और मज़ेदार छूट शायद hi किसी और की हो ः...

बुआ: हेहेहे...

में: वैसे बुआ अब जब मेने आपको मंगलसूत्र पहनाया और मांग भरी है तो आप हर रूप में मेरी पत्नी बन चुकी हो हैं न... चाहे किसी को पता हो या न हो..

बुआ: हैं चाहे दुनिया को पता चले न चले तुमने ये ृत पूरी कर के आज मुझे अपनी सुहागन बना लिया है जो में जिंदगी भर रहूंगी.

में: हम्म्म पर बुआ अभी तो हम कमरे में है इसलिए आप ये मांग भरी रख सकती हैं मंगलसूत्र पहन सकती हो... लेकिन कमरे से बहार निकलने के बाद तो ये सब नहीं होगा न.. परन्तु में ये चाहता हु की में कही भी कभी भी आपको देखु तो ये एहसास होता रहे की हाँ अब आप मेरी पत्नी हो और आपके इस जिस्म पर मेरा हक़ है... कुछ ऐसी निशानी तो होनी चाहिए न जो ये दर्शाये..

बुआ: हम्म्म सनी चाहती तो में भी यही हु और अगर संभव होता तो में दिन रत तुम्हारे नाम का ये मंगलसूत्र और तुम्हारे नाम की मांग भरे रहती...

में, कुछ सोच मुस्कुराते हुए: वैसे एक आईडिया है बुआ मेरे पास जिससे आपको भी एहसास होता रहेगा की आप मेरी औरत हो और में भी जब चहु तब ये महसूस कर सकता हु की रागिनी अब मेरी बुआ के साथ साथ मेरी पत्नी है और उसके जिस्म पर मेरा और उसकी छूट पर मेरे लुंड का hi हक़्क़ है सिर्फ ः..

बुआ: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ऐसा कौनसा आईडिया है मेरे पतिदेवववववव...

में तब बुआ को पलंग पर पीठ के बल लिटा गले से मंगलसूत्र निकल कर उनकी कमर में बांध लेता हु, और कमर में भी इस तरह बंधा था की वो नाभि से निचे था जिससे कपडे पहनने पर किसी को दिखाई न पड़े और साथ hi उस मंगलसूत्र का locket/pandel जो था वो उनकी छूट के होठो पर पहुंच रहा था और छूट के होठो को फैला अंदर छूट के डेन पर दस्तक दे सकता था...

इस तरह मंगलसूत्र बांध कर में वापस बुआ के उप्पेर आता हु और एक हाथ निचे ले जा उस मंगलसूत्र के पांडेल को छूट के होठो के बिच जोर से दबा देता हु...

में, पांडेल दबाते हुए: ह्म्म्मम्म अब ठीक है न, ये निशानी किसी को दिखेगी भी नहीं और आप इसे हर वक्त महसूस कर सकती हो और जब मुझे महसूस करना होगा में मौका देख आपकी छूट पर हाथ लगा इस पांडेल को जोर से दबा कर कर लूंगा ः...

बुआ, मंगलसूत्र के इस तरह बंधे जाने से और पांडेल के छूट पर बार बार चुने से गर्माते हुए: अह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ सनी कैसे कैसे आईडिया आते है तुझे भी हहै... मममम वैसे आईडिया भोत सेक्सी है और इससे अब मुझे सिर्फ महसूस नहीं होगा की में तुम्हारी औरत हु बल्कि ये पांडेल हर वक्त मेरी छूट पर घर्षण करते हुए मेरी छूट को तुम्हारे लिए गीली रखेगा मममममम...

में, छूट में वापस तीन उंगलिया दाल और अंगूठे से पांडेल को डेन पर दबाते हुए: ाचा है गीली तो होनी भी किये, जितना ज्यादा मेरे लुंड के लिए ये छूट तड़पेगी उतना hi बुरी तरह मेरा लुंड इसको पेल कर इसकी आग बुझायेगा...

बुआ, आंखे बंद किये मस्त होते हुए: उम्म्म्महहहहह सनी उफ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा है की अब ये आग बुझने को बजे ज्यादा होती जाएगी हमेशा अह्ह्ह्ह, देखो न अभी तो इतनी बुरी तरह तुम्हारे लुंड ने इस निगोड़ी छूट की कुटाई की है और अब वापस से बहने लगी है अह्ह्ह्ह ममममम उफ्फफ्फ्फ़..

में, बुआ के उप्पेर आते हुए वापस अपने लुंड को उनकी छूट में पेलते हुए और चुचिओ को हाथो में भींच जोर से मसलते हुए: तो बहने दो न आज इस निगोड़ी छूट में जितना भी रास समाया हुआ है सारा बहा दूंगा में मेरी बीवी उम्मम्मम्माह..

बुआ, मेरी कमर को कस के पकड़ धक्को को झेलते हुए मस्त होते हुए: अह्हह्ह्ह्ह सुन्न्नी बीटा उम्मम्मम अह्ह्ह हैं ऐसे hi पेल मुझे इफ़फ़फ़फ़फ़ ईशःठ उम्म्म्म हैइए क्या लौड़ा है तेरा उम्म्म्म फुकककक में हरदरररर...

और बुआ की बढ़ती हुई मस्ती भरी चीखो के साथ मेरे धक्को की गति भी बढ़ती चली जाती है और अगली कुछ और देर की छूट कुटाई के बाद में दोबारा बुआ की छूट में अपना रसससस भर देता हु उम्म्म्म ओह्ह्ह्ह बुआ अह्ह्ह और उनके उप्पेर hi लेट जाता हु उम्मम्मम्मम्माह बुआ, साथ hi जवाब में बुआ भी कंपते हुए शरीर में अकड़न के साथ अपना रास बहा मेरे रास से मिलते हुए झड़ने लग जाती है ओह्ह्ह्हह्ह सनी में भी गईइइइइइइइइ.... और इस दूसरी घमासान चुदाई के बाद में और बुआ दोनों hi नंगे आपस में लिपट कर नींद में चले जाते है...

सुबह जब मेरी आँख खुलती है तो बुआ बिस्तर पर नहीं थी लेकिन उनके कपडे अब भी जमीं पर बिखरे पड़े थे जो कल रत उन्होंने पहने हुए थे और मेने अपने hi हाथो से उनके कोमल मदमस्त जिस्म से उतर फेके थे जिन्हे जमीं पर पड़ा देख कोई भी ये आभास लगा सकता है की पिछली रत इस कमरे में एक औरत की किस कदर छूट पेली गयी है... यही सब देख सुबह सुबह मेरे लुंड ने फिर अंगड़ाई सी भर दी और मेरी नजर बुआ को ढूंढ़ने लग पड़ती है और तभी बुआ बाथरूम से नंगी hi बहार निकलती है..

सुबह सुबह एक भरे जिस्म की औरत जिसको पिछली रत बिस्तर में अपनी औरत बना रगड़ रगड़ के पेला हो उसके सामने आने से लुंड पूरा अपनी औकाद में आने लगता है और लुंड को एक करारा झटका तब लगता है जब मेरी नजर बुआ की कमर पर बंधे उस मंगलसूत्र पर पड़ती है जो रत में मेने बंधा था, जिसका पंडाल इस वक्त बिलकुल छूट के बीचोबीच लटक रहा था और बुआ के चलने की वजह से छूट के होठो पर बार बार दस्तक दे रहा था...

में, लुंड पकड़ बुआ को देख: उम्म्म्म बुआ सच ये मंगलसूत्र इस तरह देख लौड़ा वापस फनफना गया, क्या मस्त कामुक माल लग रही हो ऐसे...

बुआ, मंगलसूत्र के पंडाल को पकड़ कर: िष्ठ्हह तुझे मजा आ रहा है यहाँ ये मेरे चलने से बार बार छूट से टकरा रहा है मुझे कितनी दिक्कत होती है, ऐसे तो ये हमेशा मुझे गर्माता रहेगा हहै उम्म्म्म..

में, बुआ को पकड़ अपने उप्पेर खींच चूतड़ फैला थप्पड़ लगते हुए: हईये मेरी बीवी अब तो तुझे दिन रत अपनी छूट पनियते रहना है अपने इस पति के लिए समझी उम्मम्मम्माः, और ये बोल बुआ को बिस्तर पर पटक दोबारा अपना लुंड बिना किसी जानकारी के उनकी छूट में पेल देता हु, और सुबह सुबह दोबारा एक और चुदाई का दौर करने के बाद में बुआ से अलग होता हु और क्युकी घर में सभी जग चुके थे तो में भी अपने कमरे में चल पड़ता हु...

नाहा कर तैयार होने के बाद जब में कमरे से निकल निचे की तरफ जाने hi लगा था की मेरी नजर बुआ के कमरे पर पड़ती है जहा बुआ भी कमरे से बहार निकल निचे की और hi जा रही होती है जिन्होंने इस वक्त एक मस्त नयी सी साड़ी पहनी हुई थी और अंदर डीप गले का एक कैसा हुआ ब्लाउज...

चुपके से जा कर उन्हें पीछे से जकड़ते हुए..

में: क्या बात है मेरी बीवी तो मस्त तरीके से तैयार हो कर निकल रही है आज ः..

बुआ, अचानक से मेरी जकड से चौकते हुए: उफ्फ्फ्फ़ सनी तुम.. ये क्या कर रहे हो किसी ने देख लिया तो हहै.. और अब नयी नयी शादी हुई है मेरी सजना सवर्ण तो बनता hi है न मेरे पतिदेववव...

में: बुआ की साड़ी के उप्पेर से हाथो द्वारा hi छूट पर दबाव बनाते हुए जिससे अंदर बंधा मंगलसूत्र दोबारा छूट के होठो पर दस्तक देते हुए रगड़ने लगता है: इतना सजोगी सरोगी तो दोबारा आपकी इस छूट की सेर करनी पद जाएगी इसी वक्त बुआ रानी.....

Bua,mere हाथो पर अपना हाथ रख: िष्ठ्हह सनी मत कर न अभी वैसे hi जब से ये मंगलसूत्र ऐसे पंतय के अंदर दाल कर कपडे पहने है तब से छूट पर घिसाई हो रही, आलरेडी ये मेरी छूट को अब कभी सूखने नहीं देगा उम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़, और रही बात छूट की सेर करवाने की तो ऑफिस नहीं जाना होता तो में खुद उछलने आजाती मेरे पति के मुसल लौड़े पर..

मैं: ः मेरी चुड़क्कड़ बीवी उम्मम्मम्माआआअह्ह्ह चुदाई न सही एक मस्त सा चुम्मा तो दे दो अब ताकि दिन भट इन रसीले होठो का स्वाद बना रहे..

और ऐसे hi बात करते और सीढ़ियों पर एक दूसरे के होठो को चूमने के बाद में और बुआ साथ में hi निचे आ डाइनिंग टेबल पर बैठ सबके साथ नास्ता करने लगते है..

वही दूसरी तरफ कल से हुए वाकिये के बाद सीमा दीदी ने पापा से किसी तरह की कोई बात नहीं की थी और अभी सुबह डाइनिंग टेबल पर भी पापा किसी न किसी चीज के मांगने के बहाने दीदी से बात करने की कोशिश कर रहे होते है लेकिन दीदी बिना कोई जवाब दिए चुपचाप नास्ता करके उठ कर अपने कमरे में चली जाती है..

साथ hi प्रीति आज उसके फोटोशूट के बाद सिलेक्शन होता है या नहीं इसका रिजल्ट शाम तक आने की बात बोल कर कॉलेज चली जाती है और इसी प्रकार एक एक कर घर के सभी सदस्य अपने अपने काम पर निकल जाते है...

कॉलेज पहुंचकर मेने शुरू की कुछ क्लासेज अटेंड की उसके बाद प्राची मां से थोड़ी देर मस्ती भरी बातें करने का सोच में कैंटीन की तरफ आ जाता हु लेकिन वह में प्राची मां के साथ कामिनी भाभी को भी बैठा हुआ पता हु और दोनों hi औरते भोत मस्ती से है है कर गपशप करने में व्यस्त थी.



आज उन्दोनो को इस तरह साथ देख कर मुझे भी थोड़ी हैरानी सी हुई क्युकी इससे पहले शायद hi मेने उन दोनों को इस तरह साथ में देखा था लेकिन आज उन्हें देख ऐसा लग रहा था मनो काफी समय से अछि दोस्ती हो राखी हो, खैर इन दोनों को इस तरह हसी मजाक करते हुए देख मेरे चेहरे पर एक मुस्कराहट आजाती है की कही न कही भाभी और मां के बिच की ये दोस्ती मेरा hi फायदा करवाएगी, बस भाभी उन्हें ये न बता दे की में उनका देवर हु ः.. और इसी सोच के साथ में वह उन दोनों को डिस्टर्ब किये बिना वापस चला जाता हु..
 
दोस्त शायद आपने गौर नहीं किया है की में एक राइटर की भांति अपने तरीके से hi लिखता आया हु हमेशा से, किसी "स्पेसिफिक" रीडर के कहने से कहानी आगे नहीं बधाई है कभी भी.. रही बात आपके सवालो की जो आप मुझसे क्लैरित्य जानना चाहते है तो दोस्त...

1) सबसे पहले में ये जानना चाहता हु पहले तो की आपको ये कहा लग रहा ह की किसी एक रीडर के कहने पर मेने कहानी में बदलाव किये है...

2) अभी कुछ वक्त से कुछ करने से मैं कहानी आगे नहीं बढ़ा पाया हु इसलिए आपके मन में ये सरे सवाल उठे है

. आज नया अपडेट ले कर आया हु भोत दिनों बाद,,, सो अभी आपसे यही कहना चाहूंगा की कहानी से जुड़े रहिये ,आप खुद उपदटेस पढोगे तो हर सवाल का जवाब मिलता रहेगा.. धन्यवाद् दोस्त...
 
अपडेट - 38


वही दूसरी तरफ ऑफिस में पापा अपने केबिन में बैठे हुए होते है की तभी उनकी सेक्रेटरी छुम रैंड श्वेता उनके केबिन में आ पहुँचती है.

पापा जो अब भी इस सोच में दुबे हुए है की कैसे भी करके सीमा को मानना पड़ेगा उसकी इस तरह से नाराज़गी मुझे अछि नहीं लग रही है अब और मुझसे सही नहीं जा रही है, आखिर मेरी सबसे लाड़ली बेटी है वो...

और तभी मानव (पापा) के कानो में श्वेता की आवाज पड़ती है...

श्वेता: सर, किस सोच में दुबे हुए है आप, सब ठीक हैं न...

Manav(shweta को देख ): अरे श्वेता तुम कब आई... और हाँ सब ठीक hi हैं.. वैसे सब ठीक होने में तुम्हारा भी भोत बड़ा हाथ है, समझ नहीं आ रहा की कैसे तुम्हे धन्यवाद् करू..

श्वेता: मेरा धन्यवाद्, क्यों सर मेने ऐसा क्या काम कर दिया हैं.

Manav(pas कड़ी श्वेता की नजरो में देखते हुए): वही तो तुमने मेरी बेटी को रश्मि, तुम्हारे और मेरे बिच के सम्बन्धो के बारे में बताया और उसकी ये गलत फेमि दूर की जो उसे लगता था की मेने तुम लोगो के साथ जबरदस्ती का रिश्ता बनाये हुए है और मज़बूरी का फायदा उठाया है..

श्वेता : ओह्ह वो बात सर, हाँ सर सीमा ma'am ने मुझे इस बारे में पूछा था, पहले तो मुझे ये समझ नहीं आ रहा की ये सब बाटे सामने कैसे आई, पर फिर भी चूँकि सच यही है की आपने मुझे कभी मजबूर नहीं किया बल्कि अब तो हालत ये है की में खुद आपके साथ ये सम्बन्ध बना कर ख़ुशी से रहने लगी हु..

मानव: हम्म में जनता हु लेकिन रश्मि मेरी बेटी की पुराणी दोस्त निकली और उसने किसी बदले की भावना के साथ हम बाप बेटे के बिच दरार डालनी चाही और साथ hi बदनाम करने के लिए ये सब जाल बिछा रही थी वो तो ठीक हुआ की उसकी बातो में मजबूती नहीं थी और तुमने सीमा को हकीकत से रूबरू कराया.. और उसके लिए में तुम्हारा जितना शुक्रिया ऐडा करू वो काम होगा..

श्वेता : अरे सर क्यों शर्मिंदा काट रहे हो ap..ye तो मेरे लिए अछि बात है की मेरी वजह से आपकी प्रोब्लेम्स कही न कही सुलझ gayi..vaise सर अब सीमा ma'am आप को किसी बात का दोषी तो नहीं मन रही है न..

मानव: जिस बेटी का बाप किसी परायी औरतो के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना रखे हो भला उस बेटी के साथ सब कुछ सही कैसे हो सकता है श्वेता.... सीमा अब भी मुझसे भोत नाराज़ है की मेने इस तरह तुमसे और रश्मि से सम्बन्ध बना रखे है और उसकी माँ को धोखा दे रहा हु.. मेरी जवान जिस्म पाने की इस आग के कारन अब उसे मुझसे बात तक करने का मोह नहीं रह गया है, समझ नहीं आता अब में अपनी बेटी को कैसे मनौ...

श्वेता: हम्म सर ी कैन अंडरस्टैंड, किसी के लिए भी ये बात हजम करना आसान नहीं होगा, क्युकी उनकी नज़र से देखा जाये तो ये कोई छोटी मोती बात तो है नहीं...

मानव: हम्म्म और अब इसीलिए मेने उसके सामने उसकी कसम खा कर उससे वडा किया है की में ये सब चोर दूंगा और उसे वापस एक ठरकी बाप की जगह सिंपल पापा बन कर दिखाऊंगा ः...

श्वेता (मुँह बिगड़ते हुए नाराज़गी जाता): क्या सर... इसका मतलब अब हमारे बिच भी किसी तरह का शारीरिक सम्भोग नहीं होगा???..

मानव: ः मुझे पता था ये सवाल आने वाला है अब.. लेकिन श्वेता तुम मेरी भी मनोदशा को समझो.. में भी नहीं जनता जब पूरा दिन मेरे सामने मेरी ये रंडी आगे पीछे बन थान के घूमती रहेगी तो खुद पर कैसे काबू कर पाउँगा परन्तु में कोशिश पूरी करूँगा और तुम्हारी तरफ से भी में यही चाहता हु की तुम मेरी इस काम में मदद करो..

श्वेता : सर में क्या मदद कर सकती हु भला, उल्टा ने यो खुद अब आपसे छुड़वाए बिना नहीं रह पति हु और आप मुझसे hi कह रहे है की में आपकी इस काम में मदद करू जिसमे आप मेरी तरफ आकर्षित हो कर मुझसे सम्भोग करने से खुद को रोक सकते है... मुझे नहीं पता सर लेकिन भोत मुश्किल काम है ये हहै..

मानव: जनता हु मेरी रंडी की ये काम मुश्किल है लेकिन अभी तुम स्तिथि से पूरी तरह परिचित हो और इस वक्त हमारे खास कर मेरे लिए यही सही है की कुछ दिन में उस तरह के खेल से दूर राहु.. तभी सीमा को यकीं होगा की उसके पापा ने खुद पर काबू पा लिया है..

श्वेता: लेकिन सर कब तक चलेगा ये खेल, मुझे नहीं रहा जायेगा.. आपने hi रोज रोज मुझे रंडी की तरह छोड़ छोड़ कर खुद की रंडी बनाया है और अब आप छह रहे है की में खुद को समझौ की आपके लुंड के बारे में न soche...pata नहीं ये संभव भी होगा या नहीं..

मानव: फिलहाल तो यही ऑप्शन है की तुम खुद को मनाओ बाकि देखते है कितने दिनों तक में मेरे लुंड को अपनी इस रंडी की छूट में जाने से रोक पता हु, एक बार बस सीमा मन जाये फिर हम किसी न किसी तरीके से अपना खेल चालू रख लेंगे ः...

श्वेता: उम्म्म सर तो प्लीज जल्दी से कुछ बी कर के सीमा मां को मनाओ और ये यकीं दिलाओ की अब आप किसी भी परायी औरत के साथ कोई रिश्ता नहीं रखने वाले हो, जिससे मेरी छूट को वापस आपके लुंड का पानी मिलना शुरू हो जाये हहै..

मानव: ः सच में, वाकई तू मेरी पक्की रंडी कहलाने लायक हो गयी है..

श्वेता : हहै सर, आपसे छोड़ने के बाद शायद hi ऐसी कोई औरत होगी जो दोबारा आपसे छोड़ने का ख्याल मन में नहीं लाये..

मानव: ः चलो अब फिलहाल के लिए काम में ध्यान दो, वार्ना ऐसे तो में खुद पर कभी काबू नहीं पाने वाला ः..

श्वेता : हेहेहे सर, ठीक है में भी खुद की भावनाओ को संभजते हुए उनपर काबू पाने की कोशिश करती हु, और जब तक आप का लुंड नहीं मिल रहा, पति के लुंड से hi थोड़ी भोत संतुष्टि पाने की कोशिश करुँगी हहै...

और ये बोल कर श्वेता मानव के केबिन से बहार निकल जाती है और यहाँ ऑफिस में मानव वापस इसी तरकीब की सोच में पद जाता है की कैसे अपनी बेटी सीमा की नाराज़गी दूर की जाये...

कॉलेज से लौटे अभी मुझे घर पहुंचे कुछ hi देर हुई थी की मेरे कमरे में प्रीति दस्तक देती हुई बड़ी तेजी से अंदर को चली आती है , जिसके चेहरे से साफ पता चल रहा था की उसका मूड कुछ खास ठीक नहीं है...

Me(priti को देख): अरे धीरे चल ले इतना भाग भाग के क्यों आ रही है, कोई ट्रैन छूट रही ह क्या तेरी ः..

प्रीति: शट उप, में बिलकुओं भी मजाक के मूड में नहीं हु सनी अभी समझा न..

में: ाचा ाचा ठीक है ,लेकिन अब बताएगी भी की हुआ क्या है, क्यों तेरे चेहरे और मूड की बारह बजी हुई है ..

प्रीति: उस दिन फोटोशूट करते हुए भोत बड़ी बड़ी ढींगे हक रहा था न तू तो की मुझे कोई रिजेक्ट नहीं कर सकता ये फोटोज देखने के बाद चाहे कुछ भी हो जाये हैं na..ye देख आज सिलेक्टेड कैंडिडेट्स की लिस्ट आ गयी है..

Me(list देखते हुए): हाँ तो क्या गलत कहा था मेने... इसमें तेरा नाम तो होगा hi बिना किसी डाउट के ..

प्रीति: हाँ एक्साक्ट्ली वही तो बात है न की इसमें मेरा नाम नहीं है, जिसका मतलब की मेरा कांटेस्ट के लिए चयन नहीं हुआ है मुझे रिजेक्ट कर दिया गया है...

Me(chaukte हुए): नहीं ये कैसे हो सकता है भला प्रीति, तेरे फोटोज देखने के बाद कोई अँधा hi रिजेक्ट करेगा ,तूने ठीक से चेक किया न लिस्ट में..

प्रीति: हाँ मेने एक बार नहीं दो हर नहीं बल्कि भोत बार इस लिस्ट को चेक किया लेकिन इसमें मेरा नाम नहीं है.

Me(man में, मेने इतनी सेक्सी तरीके से प्रीति के फोटोज लिए थे, उसके हर एक अंग का आकर इतने अचे से उभर क सामने आ रहा था फिर ये कैसे हो सकता है): लेकिन ये कैसे संभव है प्रीति, मुझे तो अब भी यकीं नहीं हो रहा है.

प्रीति: मुझे तो पहले hi पता था की मेरा चयन नहीं होना है, और इसका कारन ये है की मेने ये फोटोशूट मेरी कॉलेज के उस लड़के से न करवा कर जो कॉलेज का ऑफिसियल फोटोग्राफर है ,उससे न करवा कर तुझसे करवाया ...

में: hainnn...ye क्या बात हुई ये तो कोई रूल नहीं हुआ और जूरी को इससे क्या लेना देना की फोटोज किसने ली है..

प्रीति: हाँ तेरी बात सही है सनी लेकिन उस फोटोग्राफर की कॉलेज में भोत चलती है कोई उसकी बात नहीं टालता और जूरी को भी उसने hi मुझे रिजेक्ट करने के लिए मजबूर किया होगा..

में: लेकिन वो ऐसा क्यों करेगा, क्या तेरी उससे कोई पर्सनल तौर पर लड़ाई है या दुश्मनी है जो ?

Priti(thoda संकोच के साथ): नहीं दुश्मनी तो नहीं है लेकिन वो लड़का भोत बद्तमीज़ है और उसने...

में: और उसने क्या???

प्रीति: और उसने एक दो बार मेरे साथ भी बदतमीज़ी करने की कोशिश की तो मेने उसे मुँह तोड़ जवाब दे दिया और तभी से वो ऐसा कोई मौका नहीं गावता जहा वो मुझे मजबूर कर सके..

Me(apni बेहेन के ससथ बदतमीज़ी की बात सुन ): क्या कह रही है tu..itta कुछ हुआ तूने पहले क्यों नई बताया, में कल चलता हु तेरी कॉलेज उसकी साडी बदतमीज़ी निकलने..

प्रीति: नहीं तू कही नहीं चल रहा samjha..koi जरुरत नहीं है ,में जानती हु किसे कैसे हैंडल करना है तू उलटी और लड़ाई कर के आएगा...

में: तो तू क्या चाहती है ,उसने तुझे रिजेक्ट किया इस टुच्ची सी वजह से और तू कुछ नहीं करेगी..

प्रीति: अरे यार सनी में तो लिस्ट आते hi तुरंत उसके पास गयी थी कोंफ्रोंट करने के लिए और उसने खुद एक्सेप्ट किया की मेरा नाम उसी ने हटवाया है... और अब उसने नाम वापस ऐड करवाने के लिए एक वाहियात सी कंडीशन राखी है..

में: कैसी कंडीशन??

प्रीति: कल न जो भी सिलेक्टेड कैंडिडेट्स है प्लस जूरी मेंबर्स और इवेंट मैनेज करने वाले लोगो की एक गेट टुगेदर है , एक छोटी सी पार्टी की तरह, और वो चाहता है की में वह औ और उससे ये कहु की में उसे पसंद करती हु और उसकी गर्लफ्रेंड बनना चाहती हु...

Me(man में तो आया की गालिया दे दू लेकिन प्रीति के सामने कण्ट्रोल करते हुए): क्या... उस सेल की इतनी हिम्मत ... मुँह न तोड़ दिया होता कमीने का.. तूने क्या कहा उसे..

प्रीति: मेने उससे यही कहा की ऐसा कभी नहीं होने वाला है चाहे कुछ बी हो जाये..

में: तो तू फिर सीधा जूरी से क्यों बात नहीं कर के आयी की ऐसे कैसे रिजेक्ट क्र सकते हो किसी के कहने पर .

प्रीति: यार सब मिले हुए है, में हेड जूरी के पास गयी थी वो मेरी सीनियर है और अचे से जानती है , उसने भी यही कहा की उस लड़के की कंडीशन मन लो क्या बुराई है, वैसे भी कोनसा सीरियस रिलेशनशिप रखनी है तुम्हे.. इवेंट तो पूरा कर लो एक बार ऐसे hi..

में: हम्म्म्म फिर .

प्रीति: फिर क्या यार.. में ऐसे कैसे मन सकती हु, चाहे कुछ भी हो , पर एक बार उसकी बात मानते hi पुरे कॉलेज के लिए मेरा नाम उसके साथ जुड़ जायेगा और उस इंसान के साथ में एक पल भी नहीं रेग सकती, भोत कमीना और बद्तमीज़ज़ है... और मुझे पता है की वो सिर्फ फिजिकल फन के लिए ये सब कर रहा मेरे sath..kamina कही का..

में: प्रीति तू एक बार उसको मुझसे मिलवा ,सेल की साडी हरकते ठीक करता हु और अकाल ठिकाने लता hu,vo हाल करूँगा की दोबारा किसी लड़की के बारे में बोलने लायक नहीं बचेगा ..

प्रीति: नहीं में किसी तरह का कोई लड़ाई झगड़ा नयी चाहती हु ,और साथ hi इस इवेंट में पार्टिसिपेट भी करना चाहती हु yar..esa चांस और प्लेटफार्म दोबारा नहीं मिलेगा सनी मुझे..

Me(kuch देर सोचने के बाद): ाचा सुन उसने तुझे कल पार्टी में इन्विते किया है न... तो तू कल पार्टी में जाएगी..

प्रीति: तू पागल है क्या सनी, में कहीं नहीं जा रही उस पार्टी में और क्यों जाऊ भला..

में: मेने जितना कहा उतना कर, कल तू उस पार्टी में जा रही है और हाँ ये नहीं कह रहा की ीा कर उसने जो कहा वो करना है.. बस तू उस पार्टी में जाए तो sahi,baki तू मुझपे चोर दे क्या करना है कैसे करना है वो सब.. और हाँ तुझे इवेंट में part दिलवानने का काम अब मेरा समझी...

प्रीति, आँखे बड़ी कर मुझे देखते हुए: तू क्या करने वाला है सनी kal..dekh कुछ उल्टा सीधा मत करना समझा वार्ना में तेरी जान लेलूँगी ...

में: ः तू फ़िक्र मत कर.. तू बस पार्टी में जा बाकि में संभल लूंगा samjhi...or तुझे ऐसा मौका नहीं दूंगा की मेरी जान लेनी पड़े ..

प्रीति: हम्म्म ठीक है तुझ पर भरोसा कर के जा रही हु , उम्मीद करती हु कुछ उल्टा न हो जाये..

में: हाँ तू है मुझे पार्टी लोकेशन और वेन्यू मैसेज कर देना बाकि काम मेरा..

प्रीति: ाचा ठीक है वो में कर दूंगी और हाँ प्लीज कोई उल्टा सीधा काम मत करना ,ऐसा न हो की कॉलेज में मैं hi मजाक बन जाऊ.

में: तू बेहेन ह मेरी तेरा मजाक बनना मतलब मेरा मजाक बनना समझी, जो में कभी नहीं बनने दे सकतहु इसलिए अब तू जाए और मूड चिल कर बाकि कल देखेंगे की कोण है ये लड़का और कैसे तुझे इवेंट में पार्टिसिपेट करने से रोकता है ..

और मेरी इसी बात के साथ प्रीति थोड़ा रिलैक्स होते हुए कमरे से बहार चली जाती है और में भी बिस्तर पर कुछ देर आराम करने को लेट जाता हु....

 
धन्यवाद् दोस्त कहानी पसंद करने के लिए...

बाकि जैसा किमी हमेशा से कहता आया हु कहानी पढ़ते रहिये आपको हरबात समझ आती रहेगी और एक वृत्तेर होने के नाते कहानी को उसी तरह आगे बढ़ाया जायेगा जैसा की सोच रखा है ,

रही बात आपके साइलेंट रीडर होने ki..to में चाहूंगा की कोई भी रीडर साइलेंट रेडेरना रह कर अपने विचार जरूर व्यक्त करे जिससे मुझे भी अपने रीडर्स का कहानी क प्रति रुझान समझने में आसानी हो और साथ hi मोटिवेशन भी मिलता rahe,,dhanyawad दोस्त...
 
अपडेट- 39


कुछ देर रेस्ट करने के बाद में फ्रेश हो अपने कमरे से बहार निकल अपनी नयी नवेली दुल्हन यानि की मेरी बुआ के कमरे की तरफ चल पड़ता हु, ये सोच कर की देखे तो सही हमारी बीवी क्या कर रही..

कमरे में दाखिल होने पर मुझे अंदर कोई भी दिखाई नहीं पड़ता है , शायद बुआ अभी ऑफिस से लौटी hi नहीं थी लेकिन तभी मुझे बाथरूम से पानी छलकने की आवाज सुनाई पड़ती है ,ओह्ह्ह तो बुआ इस वक्त बाथरूम में हैं , और ये जान कर में तुरंत कमरे से निकल कर वापस वही खिड़की की तरफ जाता हु जहा से बाथरूम के अंदर का नजारा मुझे पिछली बार भी अचे से दिखाई पड़ा था.

खिड़की के अंदर देखते hi मेरा मन प्रफुल्लित हो उठा, इसका कारण ये था की बुआ के जिस्म पर अभी एक भी कपडा नहीं था लेकिन अपनी कमर से उन्होंने मेरे द्वारा बंधा गया वो मंगलसूत्र अब भी बांध रखा था, जिसका मतलब ये था की उन्होंने सच में hi उन्होंने मुझे अपने पति के रूप में स्वीकार करलिया है और ये देख कर कोण खुश नहीं होता ...

अभी में ये देख hi रहा था की बुआ ने उस मंगलसूत्र के पंडाल को पकड़ कर अपनी छूट की फैंको के बिच घिसना शुरू कर दिया और अनोहे बंद किये हुए इस मजे का एहसास लूटने में दुब गयी थी, उनके हाथो की गति बढ़ रही थी और मुँह से सिसकिया भी, जो मुझे भोत hi अचे से सुनाई पद रही थी.. उम्मम्मम अह्ह्ह्हह सनी ममममम उफ्फ्फफ्फ्फ़ मेरे पतिदेव छोड़ो अपनी बीवी को अह्ह्ह छोड़ अपनी बुआ को और जोर से ईशःठ ममम ये मंगलसूत्र कभी मेरी छूट नहीं सूखने देता अह्हह्ह्ह्ह , आज पूरा दिन छूट म खुजली हुई है अहहह्जू सनी जल्दी आ कर छोड़ क्यों नहीं देता अपनी बुआ को िष्ठ्हह उम्मम्मम ..उफ्फफ्फ्फ़ फाड् दे न मेरी छूट तेरे मुसल लुंड से अह्ह्ह्ह हैइए उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़..

और ऐसे hi कुछ और देर तक बुआ मेरा नाम लिए अपनी छूट सहलाते हुए झाड़ जाती है..

और ये देख की बुआ अब मेरे लुंड के लिए हर पल बेताब रहती है मुझे खुद पर बड़ा गर्व महसूस हुआ क्युकी एक इतनी मातुरे और एक्सपीरियंस वाली औरत सिर्फ मेरे लुंड के लिए दीवानी हुई पड़ी है इसका मतलब वो मेरे निचे आने के लिए हमेशा तैयार है और अपना जिस्म मुझसे मसलवाने के लिए किसी भो हद को पर कर जाएगी... वाकई सछह में बीवी हो तो ऐसी हो वार्ना न हो ः... और में खुद से ये कहते हुए की चल भाई सनी अब अपनी बीवी को थोड़ा मजा दे hi देते है बेचारी अपने पति के लुंड के लिए भोत तड़प रही है ..

और ये देख की बुआ अब नाहा कर टॉवल लपेट कर hi बाथरूम से बहार निकल रही है में भी उनके कमरे की तरफ वापस चला जाता हु और बिना नॉक किये hi सीधा कमरे में घुस जाता हु और दरवाजा अंदर से बंद कर बुआ को देख स्माइल करता हु.. बुआ जो मेरे इस तरह अचानक कमरे में आने से एक बार के लिए तो चौक hi गयी थी..

बुआ: ओह्ह्ह सनी क्या करता है में तो दर hi गयी थी , ऐसे भला कोण घुसता है कमरे में..

Me,bua के पास जा उन्हें अपनी बहो में खींच: अब अगर ऐसे नहीं घुसता तो मेरी बुआ का ये कातिलाना रूप कैसे देख पता न...

Bua,sharmate हुए: िष्ठ चल हट पागल कही का.. और रही बात मुझ ऐसे देखने की तो तू मुझे इस टॉवल के बिना भी देख चूका है और में तो तेरी बीवी हु तेरे एक बार कहने पर पहने हुए सरे कपडे खोल दूंगी ,तुझे मौके तलाशने की जरुरत कहा ह मेरे बच्चे हेठी..

में, बुआ का टॉवल उनके जिस्म से अलग कर उनके होठो को चुम: उम्मम्माह अहह बुआ सच कभी आप पति बोलती हो कभी ऐसे बीटा या बच्चे, आपके साथ इस तरह के इतने अलग अलग रिश्ते है यही सोच लुंड खड़ा हो जाता है...

बुआ: उम्मम्माआअह मेरे बचे यही तो रिश्तो में प्यार का असली मजा है की आज देख एक बुआ अपने भतीजे की बहो में नंगी कड़ी है और पिछले कुछ दिनों से उसकी बीवी बन चुकी है हहै...

में, छूट पर हाथ लगते हुए: अह्ह्ह हाँ और मेरी वही बुआ अब दिन रत अपने पति उर्फ़ भतीजे के लुंड से छोड़ने के सपने देख छूट घिसती रहती है हैं न...

बुआ: हॉट शैतान ऐसा कुछ नहीं, दिन भर में काम भी करती हु ,इतना भी बेताब नहीं में तेरे लुंड के लिए samjha..jyada ओवर कॉंफिडेंट मत हो अब हहै...

Me,bua की छूट को अपने हाथ में भींच दो उंगलिया झट से अंदर घुसते हुए: ाचा अगर ऐसा है तो अभी आदत बाथरूम में इस मंगलसूत्र को ले अपनी छूट कोण घिस रहा था , वो भी ये कहते हुए की दिन भर से तुम्हारे लुंड की प्यासी हु सनी ममम लुंड दो मुझे अपना ...

बुआ, चौकते हुए और छूट में उंगलिया जाने से उचकते हुए: आह्ह्ह्हह्ह िष्ठ्हहह उम्मम्मम उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ हरामी तूने सब सुना और देखा अह्ह्ह्हह , लेकिन कहा से और तुझे शर्म नहीं आई ये सब देखने में...

में, बुआ की चुकी को मुँह म भर : उम्म्माः आपके बाथरूम की खिड़की से सब दिखाई पड़ता है बुआ हाहाहा... और शर्म किसी मेरी बीवी को नंगा देखने में, शर्म तो आपको आणि किए पति के होते हुए उंगलिया कर छूट घिस रही थी ...

बुआ: अह्हह्ह्ह्ह सच हरामी है तू उम्म्म्म, लेकिन जब तू मुझे यु तड़पते देख hi लिया था तो अंदर क्यों नहीं आया वह क्यों खड़ा रहा...

में: वो इसलिए की कभी कभी एक मर्द को ये देखना भी ाचा लगता है की उसकी औरत कितनी बुरी तरह से उसको पाना चाहती है , ये सुन्ना ाचा लगता है की उसकी वो औरत उससे छोड़ने के लिए कितना तड़प रही है...

बुआ: उम्मम्मम सनी सच्ची कमीना है तू हहै ... तो फिर लय देखा और समझा तूने मुझे अपनी छूट घिसते हुए देख कर...

में, बुआ को धक्का दे बीएड पर गिरते हुए और मुँह उनकी छूट पर रख चाटने शुरू करते हुए: उम्मम्मम्माह मेने देखा की मेरी बुआ भोत प्यासी है सुबह से और अपने पति यानि भतीजे के लुंड से छोड़ने के लिए पागल हो रही है, भतीजे से शादी करने के बाद अब मेरी बुआ की छूट ने वो आग पकड़ी है की उसे हर रोज मेरे लौड़े का स्वाद लेना है और वो रोज मेरे लुंड पर उछलना चाहती है हैं न...

बुआ, मेरा फेस पकड़ अपनी छूट पर जोर से दबा कर और छूट हवा में उठा कर: अह्ह्ह्हह्हह उम्मम्मम्म ओह्ह्ह्हह सुननीयीय हैं जाव से तुझसे छुड़वाने लगी हु अब मुझे हर वक्त तेरे लुंड की जरुरत होती है उम्मम्मम तेरे तगड़े लुंड के लिए मेरी छूट हर वक्त प्यासी रहती है औउम्मम्मम अह्ह्ह खा जा मेरी छूट और छोड़ दाल अपनी बुआ को ईशःठ उम्मम्मम, अजीब आग लगाई है तूने मेरे जिस्म में ममममम अह्ह्ह्हह..

और बुआ की इस तड़प को देख अब में बिना कुछ बोले जीभ को छूट के अंदर दाल जोर जोर से चूसने लग जाता हु और बुआ भी कमर हिलाये मुँह से सिसकिया निकलते हुए पूरा साथ देते हुए छूट चुसवाने में मस्त हो जाती है और अगली कुछ देर में अपनी छूट का रास बहा देती है...

छूट से रास बहाने के बाद में बुआ के उप्पेर चढ़ उनके होठो को चूमते हुए..

में: उम्मम्मम्मम्माह सच भोत hi रसीली और स्वादिष्ट है मेरी रागिनी बुआ उम्मम्माआअह...

बुआ: उम्म्म्माः तो रोज जब मन करे तब आकर खा लिया कर न अपनी बुआ को, ये स्वादिद्त चीज वैसे भी अब जिंदगी भर मेरे इस भतीजे के नाम hi तो कर दी है मेने उम्मम्मम्मम्माः.

में: उम्म्माह वाकई बुआ तुम जैसी औरत हो तो किसी और की जय jarurat,me तो शादी hi नहीं करू ः ,(मन में वैसे hi घर में इतनी छूट है , भाभी, चची और बुआ जैसी मस्त औरते है)...

बुआ: हेहेहे उम्मम्माह ऐसा हो जाये तो मुझसे ज्यादा खुश कोण होगी, ऑफिशियली पति बना कर घूमूंगी तुझे में फिर खुले आम हहै ..

में, लुंड को बुआ की छूट पर रख धीरे से घिसने के बाद एक करारा धक्का दे अंदर गहराई में उतारते हुए: उम्मम्मा अहह वो होगा तब होगा फिलहाल तो मुझर मेरी बीवी को छोड़ लेने दो अचे से ः...

अह्ह्ह्ह और मेरे धक्के से बुआ मुझे अपनी टैंगो से लपेट अपने उप्पेर खींच होठो से होठ जोड़ लेती है और मेरे धक्को का साथ देते हुए लुंड को गहराई नापने में मदद करने लगती है.. उम्म्म्म ओह्ह्ह्ह सुननीयीय सच जब तेरा ये लुंड अंदर छूट में जाता है मुझे और मेरे जिस्म को एक अलग hi सुकून मिलता है उम्म्म्म उफ्फफ्फ्फ़ िष्ठ अह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे और जोर जोर से पेलो अह्ह्ह्ह yesssssss...ab तो में ये सोच पछताती हु की इतने साल मेने ऐसेही क्यों बिता दिए उफ्फ्फ्फ़ ,क्यों पहले hi तेरी बीवी बन कर तेरे इस लुंड का मजा नहीं लिया अह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म ओह्ह्ह्ह...

Me,lund के धक्के गहरे और ताकतवर तरीके से मरते हुए: उम्मम्मम्माह अह्ह्ह्ह बुआ अगर पहले से hi ले लिया होता तो उम्मम्मम्म क्या पता आज मेरे बच्चो की माँ बन चुकी होती तू अह्ह्ह ममममम उफ्फ्फफ्फ्फ़..

बुआ, मेरे बच्चो की माँ बनने की बात से जोश में आते हुए: अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह सनी तो अब बना दे न मुझे अपने बच्चो की माआ उम्म्म्म दे दे मुझे मा बनने का भी सुख उम्मम्मम ओह्ह्ह अह्ह्ह छोड़ दाल जोर जोर से और भर दे मेरी छूट में तेरा बीजजजज उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह हयईईईई...

बुआ की बात सुन अब में भी उन्हें पुरे जोश में पेलने लगता हु और कमरे में चुदाई की मदहोश स्मेल के और बुआ की सिसकिया पूरी तरह फ़ैल चुकी थी उम्मम्मम्मम्म बुआ में तो भर दूंगा तेरी छूट लेकिन तुम मेरी बीवी इस कमरे में हो दुनिया के लिए अब भी शादी शुदा औरत नहीं हो अह्ह्ह ...

बुआ: ओह्ह्ह्हह सनी इसलिए तो में डर्टी हु और अब तक रुकी हुई हु वार्ना तुझे खुद सामने से कहती की अब मुझे बच्चा चाहिए अह्ह्ह्ह उनमममममममअअअअअहह ओह्ह्ह्ह, खैर फिलहाल तो मेरी छूट को छोड़ कर मस्त कर दे उम्मम्मम्हह िष्ठ्हह बच्चा कैसा मैनेज करना है बाद में देखेन्हि हहै उम्मम्मम..

और इसी तरह कुछ देर बुआ की पिलाई के बाद दोनों का hi जिस्म अकड़ने लगता हाउ और वह बुआ अपनी छूट का रास चोर देती है और यहाँ में भी लुंड ऊनी छूट से निकल उनकी चुचिओ पर अपना माल गिरा देता हु और बुआ की एक तरफ लेट जाता हु...

बुआ: उफ्फफ्फ्फ़ सनी उम्मम्ममाह लव ु भतीजे ,वाकई पूरी थकन उतर दी तूने दिन भर की हहै , कितना अचे से छोड़ते हो तुम , भोत ताकतवर लललूण्ड है ये उम्मम्मम्माः..

में: ः बुआ अब औरत भी तो इतनी मजेदार है , आपका नंगा जिस्म देख तो बस हर वक्त निचोड़ने का hi ख्याल आये उम्म्म्माः ..

बुआ: अह्ह्ह्ह तो निचोड़ दिया कर अब ये बुआ तेरी hi तो है हहै...

में, बुआ के होठो को चुम: हम्म्म्म उम्म्म्माः बुआ जनता हु में ः.

बुआ: वैसे सनी तेरी बीवी तो में बन गयी पर अब वाकई में मुझे तेरे बच्चे की माँ बनने की भी भोत इच्छा है , में जानती हु ये इतना सरल नहीं और मुमकिन भी नहीं क्युकी ये बात हज़ारो सवाल खड़े कर देगी पर में मेरे मन को कैसे समझौ ...

में: बुआ देखो अब इस बात की गहराई आप मुझसे ज्यादा समझती है , हमें पहले कोई ऐसा उपाय ढूँढना होगा जिससे की लोग आप के उप्पेर सवाल न उठाये और हमारा काम बी हो जाये लेकिन ये इतना आसान काम नहीं और जल्दबाजी करना ठीक नहीं होगा न...

बुआ: हाँ सनी सही कहा तूने और में इस मामले में कोई जल्दबाजी करना चाहती भी नहीं हु , वैसे भी जब इतना ाचा पति मिल गया है मुझे , मेने तो ये भी नहीं सोचा था हहै, तो अब सही समय पर ये पति से मुझे बच्चा भी जरूर hi मिल जायेगा हहै...

में: उनममममममाः जरूर बुआ ,वैसे भी आपको बचा देने से मेरा hi फायदा है, एक तो बाप बनने की ख़ुशी और दूसरा ये की बचपन में जो आपके बिना दूध की चूचिया चूसी थी अब उन चुचिओ से असली में दूध का स्वाद बी ले सकूंगा हाहाहा...

बुआ: हेहेहेहैं िष्ठ्हहममम सच कमीना है तू , पि लेना बीटा दूध भी पि लेना अब मेरा जिस्म मेरा काम और तेरा ज्यादा है हहै , तू कहे तो तेरे नाम गढ़वा दू मेरे जिस्म पर हहै..

में: उम्मम्माआअह गढ़वा लो में क्यों मन करूँगा हहहह वैसे न भी करो तो अब में जनता हु की मेरी बुआ पर सिर्फ और सिर्फ मेरा अधिकार है और हमेशा रहेगा उम्म्माह..

बुआ: हाँ isme.to कोई दोराहे नहीं है सनी , की जिस दिन तूने मेरी मांग भरी और उसके बाद अपना ये लुंड मेरी छूट में भरा उस दिन से ये रागिनी बुआ सिर्फ तेरी हो गई और हमेशा तेरी hi रहेगी उम्मम्माह, रही बात बचे की तो वो आगे सही वक्त पर देखेंगे , तब तक तू बस मुझे अपने इस लुंड का स्वाद चखता रह , अपनी बुआ को छोड़ता रह और मेरे जिस्म को सुकून देता रह हहह..

में: हाहाहा बुआ वो तो में आप न कहो तब भी करता रहूँगा... वैसे अब मुझे चलना चाहिए डिनर का भी टाइम हो रहा है ..

और ये बोल में बुआ के कमरे से निकल कर अपने कमरे में आजाता हु और कुछ देर में निचे डिनर करने पहुंच जाता हु ..

डिनर करने के बाद में सीधा टेरेस पर चला जाता हु जहा अभी मुझे आये हुए थोड़ी hi देर हुई थी की सीमा दीदी भी आजाती है. और पीछे से मुझे आवाज देते हुए..

दीदी: सनी तू यहाँ क्या कर रहा है अभी...

में: अरे दीदी आप... कुछ नहीं बस ठंडी और अछि हवा चल रही थी तो सोचा थोड़ा टेरेस पर टहल लू.. आप बताओ आज आप टेरेस पर कैसे ..

दीदी: हम्म्म बस मेरा भी कुछ ऐसा hi विचार हुआ था हहै.. वैसे जनाब कहा बिजी रहते हो इतना, तुझे यद् भी है की अपनी दीदी से ठीक से बात कब की थी आखरी बार..

में: ये लो ,ये तो वही बात हुई, उल्टा चोर कोतवाल को दांते ः.. में बिजी हु या आप दीदी, मेने तो कोशिश भी की , आपके कमरे में भी आया बात करने पर आपका hi मूड पिछले कुछ दिनों से पता नहीं क्यों लेकिन ठीक नहीं लग रहा..

दीदी, मन में, अब तुझे क्या बताऊ मेरे भाई, एक तरफ मेरे पति है जो मुझसे बात तक नहीं करना चाहते है और दूसरी तरफ मेरे अपने पापा , जो परायी औरतो के पीछे पागल हुए पड़े है.. दोनों तरफ से ऐसा माहौल है मूड कहा से ठीक रहेगा और दोनों बाटे ऐसी है की के तुझसे अभी शेयर नहीं कर सकती...

दीदी को इस तरह खोया खोया देख..

में: दीदी क्या हुआ कहा खो गयी आप ः..

दीदी: नहीं कुछ नहीं सनी, और हाँ उस दिन तू रूम में आया तब थकन के कारन बात नहीं कर पाई ...

में: दीदी सच बताओ , सब ठीक तो है न , आजकल आप कुछ परेशां सी भी दिखाई देती हो और भोत सी बार अपसेट लगती हो.. पहले की तरह खुश नहीं दिखाई देती हो..

दीदी, मेरा हाथ पकड़ : नहीं मेरे भाई ऐसा कुछ भी नहीं है में बिल्किल ठीक हु सच्ची..

में: पक्का न दीदी... क्युकी आप ठीक नहीं या आप उदास हुई इसका मतलब आपका ये भाई भी वैसा hi हो जायेगा , मेरे लिए आप एक तरफ हो और पूरा परिवार दूसरी तरफ ,आप तो जानती hi हो न ..

Didi,man में, सॉरी सनी अभी में तुझे छह कर भी सच नहीं बता सकती: हाँ मेरे प्यारे भाई में अचे से जानती हु , और वैसे भी तू भी जनता है की अगर मुझे कुछ दिक्कत होगी या ऐसी कोई बात होगी तो सबसे में तुझसे hi शेयर करुँगी.

में: हैं दीदी जनता हु में ये बात और इसलिए तो मेरे लिए आपकी ख़ुशी सबसे ज्यादा मटर करती है, आप बस हमेशा हस्ते रहा करो, और ज्यादा खूबसूरत दिखती हो ः..

दीदी: हेहेहे ाचा इतनी खूबसूरत लगती हु क्या में तुझे ..पागल कही का ..

में: अरे दी सच्ची , अगर आप मेरी बेहेन नहीं होती तो पक्का में आपके प्यार में पद जाता , दुनिया की कोई दूसरी लड़की के बारे में सोचता hi नहीं ..

दीदी, कुछ देर मुझे ऐसे hi देखने के बाद : तू न सच में पागल है सनी, कुछ भी बोलता है कभी कभी तो hehe...bina सोचे समझे कुक ह भी कह देता है ..

में: ले मेने तो सच hi कहा दीदी बाकि आपको मजाक लगे तो में क्या कर सकता हु, बूत इतस फैक्ट की जब में आपके साथ होता हु बाकि सब भूल जाता हु... और दीदी को हग्ग करते हुए, मेरी दीदी सबसे बेस्ट है, ी लव ु सो मच दीदी ...

दीदी, एक भाई के प्रति अपना प्यार दिखते हुए hi हुग का अचे से सपोर्ट करते हुए: ी लव ु तू मेरे भाई, बस तू मेरे साथ है तो मुझे भला कोई बात अपसेट कर सकती है क्या हहै..

में: ः दीदी में तो हमेशा hi आपके साथ हु, आप कहो तो कल से आपकी साड़ी के पल्लू या दुपट्टे से खुद को बांध लू ः..

दीदी: हहहहए पागल लड़का , चल अब सोना नहीं है क्या तुझे..

में: हाँ बस दीदी सोता हु कुछ देर मैं...

दीदी: ठीक है तो तू रुक में जाती हु अब निचे , नींद भी आ रही है मुझे to..bbye गुड नाईट भाई..

और दीदी इसी के साथ मेरे गाल पर एक प्यार भरी किश करके स्माइल के साथ निचे चली जाती है और आज ये पहली बार नहीं था की दीदी ने मेरे गलो को चूमा tha,par आज मेने इस चुम्बन में अलग hi प्यार महसूस किया था, भले hi उनकी तरफ से ये अपने भाई के प्रति प्यार था पर आज पहली बार मुझे दीदी के चूमने का वो एहसास अंतरंग तक ख़ुशी पहुंचाया था, वो ख़ुशी जो शायद आज तक नहीं महसूस हुई thi...or इसी के साथ में भी कुछ देर में निचे अपने कमरे में चला आता हु..

अभी रात के 11:30 के आसपास का कुछ समय hi हुआ था की मेरे फ़ोन पर किसी का मैसेज आने का नोटिफिकेशन शो होता है और जब में उस मैसेज को चेक करता हु तो वो मेरी प्यारी भाभी कामिनी का मैसेज hi था...

मैसेज में जो मेरी बातचीत होती है वो कुछ इस प्रकार :-

भाभी: सो गए या जाग रहे हो देवर जी..

में: बस सोने hi जा रहा था की आपका मैसेज आ गया भाभी.

भाभी: ओह फिर ठीक है मुझे लगा था कही सो नहीं गए होंगे आप हहै..

में: ः, ाचा वैसे इतनी रात गए मश्ग किया आपने कोई जरुरी काम या बात थी क्या जो...

भाभी: उम्मम्मम हाँ देखा जाये तो जरुरी है भी और नहीं भी हहै..

में: ः ाचा ऐसी क्या बात हो गई मेरी भाभी जान की देवर की यद् आयी...

भाभी: क्या करू अब देवर जी तो आजकल पता नहीं कहा व्यस्त हो गए है अपनी भाभी के लिए वक्त hi नहीं.

में: हाहाहा अरे अब हमारे पास तो वक्त hi वक्त है कहो तो सही बात क्या है..

भाभी: अब भी आपको बताना पड़ेगा की बात क्या है, क्या ये काफी नहीं आपको समझने के लिए की मेने आधी रत आपको मैसेज किस काम के लिए किया होगा..

में: नहीं मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ रहा आप hi खुल कर अचे से समझा दो...

भाभी: उफ्फ्फ्फ़ सनी कितना तंग करते हो तुम, एक तो गलती तुमने की और अब सजा मुझे भुगतनी पद रही है ...

में: kya...maine कौनसी गलती की भला भाभी और आप कैसी सजा भुगत रही हो ः..

भाभी: तुमने गलती ये की ,की तुमने मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये, मुझे अपने उस मुसल तगड़े हथियार से मिलवाया और उसका स्वाद चखा कर भोग करवाया, और सजा ये की अब उसे दोबारा भोगे बिना मुझसे रहा नहीं जाता है, हर रात मुझे उसकी जरुरत पड़ने लगी है अब...

में, ये जान कर की भाभी चुदाई के लिए तड़प रही, मजे लेते हुए: तो मेने कोई जबरदस्ती तो की नहीं थी आपसे भाभी, आपने खुद अपनी मर्जी से अपनी टंगे खोली थी मेरे इस लुंड को अपनी छूट में डलवाने , और अगर इतना hi मन था तो बुला लेती हमें , में कहा मन कर रहा था ः..

भाभी: उफ्फ्फ देवर जी बुला तो लेती लेकिन पिछले दिनों पीरियड्स आ गए थे न मेरे , अब आज से hi वापस लुंड लेने लायक हुई है मेरी छूट, और इसी वजह इतने दिनों से नहीं छोड़ने के कारन आज छूट में भोत आग लगी हुई है अह्ह्ह..

में: अरे तो ये बात आप अपने पतिदेव से यानि मेरे भाई राहुल से कहिये न , वो आपके पति है , छूट की आग बुझाने का काम उनका है, आपके देवर का नहीं ः..

भाभी: उफ्फफ्फ्फ़ सनी पिट जाओगे तुम मुझे ऐसे तंग किया तो अहह, तुम भी जानते हो अब मेरी ये छूट तुम्हारे भाई का नहीं तुम्हारा लुंड hi पसंद करती है और उसी से चुद कर तृप्त होती है, वैसे भी तुम्हारे राहुल भैया से कहा था मेने की आज छोड़ो मुझे लेकिन वो थकन का बहाना बना कर सो गए हँ...

में: ओह्ह्ह ये तो भोत बुरा हुआ, भैया को ऐसा नहीं करना चाहिए था न, लेकिन अब में क्या मदद कर सकता हु आपकी भला...

भाभी: उम्म्म सोच तो रही थी की तुम्हारे कमरे में hi चली औ लेकिन कही राहुल जाग गए तो दिक्कत हो जाएगी, और अभी मुझे बिना छूट से पानी निकले नींद नहीं आएगी इसलिए आपको मैसेज किया कुछ मदद hi कर दो वही से प्लस...

Me,aaj सही मौका है भाभी को पूरी तरह अपने वश में करने का और लूटने का : ः लेकिन में आपकी मदद क्यों करू, चुदवाती मुझसे हो आप और पत्नी राहुल भैया की कहलाती हो , मेरा क्या फायदा फिर, मुझे देवर होने के अलावा कोई और रिश्ता नहीं दीखता जिससे की में आपकी चुदाई करू ..

भाभी, ये समझते हुए की सनी आज मेरी तड़प का फायदा उठा रहा है , जो शायद अंदर hi अंदर मुझे और गरम कर रहा यह: तो है तो सही देवर जी आपका रिश्ता मुझसे ,इस देवर भाभी को चोर कर अलग से भी...

में: ाचा , वो कौनसा रिश्ता है भला मुझे तो नहीं यद् ऐसा कोई रिश्ता, बताओ तो..

भाभी, मोबाइल की स्क्रीन को देख मुस्कुराते हुए, पुरे मूड में आते हुए: उफ्फ्फ्फ़ सनी सच भोत कमीने हो तुम... रिश्ता जानना है न तुम्हे, तो मेरा अपने देवर सनी की रैंड होने का रिश्ता है, उसकी एक पालतू रखैल होने का रिश्ता है , और इस रिश्ते में पति से ज्यादा हक़्क़क़ आपको दिए हुए है मेने अह्ह्ह ..

में, भाभी का ये मश्ग पढ़ मेरे लुंड भी औकाद में आते हुए: अच्छा तो तुम मेरी रंडी हो, पालतू रखैल हो मानती हो इस बात को ?.

भाभी: उफ्फ्फ्फ़ हाँ हाँ हैं में मानती हु ये बात की भाभी होने के साथ hi में अपने देवर सनी की रंडी हु िष्ठ्हह ममम..

में: लेकिन में ये बात कैसे मन लू की आप मुझसे झूट नहीं बोल रही .. साबित करो अगर सच में मेरी रखैल रैंड हो तो ...

भाभी: उफ्फफ्फ्फ़ अभी कैसे साबित करू लेकिन सनी में...

में: ज्यादा कुछ नहीं करना है बस मुझे अभी अपने पति के बिस्तर में उसके पास बैठ कर लाइव वीडियो कॉल कर और हाँ ध्यान रहे तेरे जिस्म पर कपडे के नाम पर कुछ नहीं होना चाहिये, पूरा नंगा जिसक दिखा मुझे अभी अपना ,फिर में मानूंगा की तू सच में मेरी रैंड है ...

भाभी, पति के बगल नंगी बैठ देवर को जिस्म लाइव दिखने की बात से घबरा सी जाती है पर साथ hi ये बात मन में एक अलग hi उत्साह भर देती है और बुरी तरह से गर्माते हुए और साथ hi जिस्म में एक करेंट की लेहेर फैलने का एहसास पते हुए: उफ्फ्फफ्फ्फ़ सनी ये तुम कुआ कह रहे हो ऐसे कैसे फोटो भेज सकती हु, राहुल जाग गए तो ,प्ल्ज़ नाहीइ...

में: तो ठीक है फिर , ये साबित हो गया की आप सिर्फ बाटे करना जानती हो हकीकत में कोई मेरे लुंड के लिए तड़पने वाली मेरी पर्सनल रंडी नहीं हो... और अब अपनी छूट की आग भी खुद से बुझा लेना, में सो raha...good नाईट..

भाभी, ये मैसेज पढ़ कर : नहीं सनी प्लसस रुको ....

तो बे कॉन्टिनोएड... ;)

 
अपडेट - 40






भाभी, ये मैसेज पढ़ कर : नहीं सनी प्लसस रुको ..

अभी में भाभी का ये मश्ग सीन करता hi की उससे पहले मेरे फ़ोन पर भाभी का वीडियो कॉल आने लग पड़ता है, जिसे देख में मुस्कुराते हुए, वाह छूट की आग सच में औरत को कुछ भी करने की हिम्मत दे देती है...

Me,call रिसीव करता हु और जैसे hi वीडियो कॉल की स्क्रीन चालू होती है मेरी आँखों के सामने भाभी का चेहरा था जो अँधेरे में इतना क्लियर नहीं था पर कमरे की ढिम्म लाइट में ठीक थक दिखाई दे रहा था..

चूँकि भैया पास में लेते थे तो भाभी कुछ बोल तो सकती नहीं थी बस ईरफ़ोन लगा मुझे सुन रही थी और इसी बात का मजा लेते हुए मेने उन्हें भैया के और करीब जाने को कहा और चूचिया दिखने को kaha..Bhabhi वैसे hi जिस्म की गर्मी में जल रही थी अब बिना कुछ कहे भैया के मुँह के पास जाते हुए अपनी चूचिया गाउन से निकल पूरी नंगी कैमरा के सामने रख दी..

और अब में यहाँ से उन्हें चूचिया ददने का बोलता हु और भाभी अब खूब पर काबू नहीं कर प् रही थी मुझे पता था चुकी पकड़ते hi उनकी सिसकी निकल जाएगी लेकिन फिर भी खुद पर कण्ट्रोल रखते हुए उन्होंने एक बार तो चुकी दबाई लेकिन दूसरी बार नहीं हो पाया उनसे तो वापस सीधी हो कर अपना चेहरा कैमरा के सामने लती है और ये सब ना करने की गुहार लगाती है..

तभी मेने उनसे कॉल पर hi और गर्माने के लिए पूछना शुरू कर दिया..

में: कामिनी, रैंड है न तू अपने देवर की, तड़प रही है न तू उसके लौड़े के लिए बुरी तरह..

और भाभी ये सुन अब तरसती हुई आँखों से हाँ में सर हिला देती है और अपने होठो को काटने लगती है..

में: चल कामिनी फिर अपनी छूट का गीलापन तो दिखा मुझे, उंगलिओ पर पानी ले क्र आ अपनी छूट का साली रंडी..

और जैसे hi वह भाभी ने अपनी छूट पर ऊँगली लगाई यहाँ कैमरा में उनके चेहरे के एक्सप्रेशन बदलने लग गए और साथ hi आंखे बंद होने लगी ,

में: ये देख और मस्ती देते हुए, कितनी चुड़क्कड़ रैंड है तू भाभी, अपने पति के बगल में बैठ देवर के सामने नंगी जिस्म दिखा रही ओट छूट गीली कर रही शर्म हाय है क नहीं कुछ, इतनी भी क्या आग लगा राखी है तूने कामिनी..

और अब मेरी बातो का असर भाभी पर बुरा हो रहा था उनकी साँसे एक दम भरी हो चुकी थी और मुझे समझ आ रहा था की उनका एक हाथ निचे छूट पर हलचल कर रहा है, और ऐसे कुछ देर बाद भाभी की तरफ से कॉल डिस्कोणक्ट हो जाता hai...or भाभी का मश्ग आता है...

भाभी: उफ्फ्फ्फ़ कितने कमीने हो तुम सनी, क्यों आग भड़का रहे ऐसी बाटे करके मेरी ईशःठ बुरा हाल हो रहा है,

Me,kuch सोच कर: ाचा भाभी रूम का दरवाजा खोलो में आ रहा हु..

भाभी: पागल हो क्या राहुल हैं कमरे में और तुम यहाँ आ रहे हो..

में: चुप मेरी रंडी भाभी ,जितना कहा उतना करो समझी, अगर देवर का लौड़ा लेते रेहबा है तो दरवाजा खोलो बास ,आज तुझे तेरे पति के सामने छोडूंगा में...

भाभी, मेरी इस बात से उनके जिस्म में और हिलोरे दौड़ने लग जाती है और जिस्म की आग और छूट की प्यास के आगे हारते हुए वैसे hi नंगी बिस्तर से उठ कर कमरे का दरवाजा धीरे से खोल देती है. में पहले से दरवाजे पर आकर खड़ा था और भाभी को ऐसे नंगी देख तुरंत दबोच लिया और उनके होठ चुम लिए...

दर और घबराहट के मरे की राहुल भैया यही रूम में सो रहे भाभी कैंप सी रही थी पर मेरा इस तरह उन्हें चुना और चुनना जिस्म की आग को भड़का रहा था, वो छह कर भी मुझसे अलग नहीं होना छह रही थी..

और इसी मौके की नजाकत को देख में भाभी को उठा कमरे में ले आया और बिस्तर पर भैया के बगल में धीरे से लिटा दिया , भाभी मुझे प्रश्नोत्तरी निगाहो से देखे जा रही थी की में ये क्या कर रहा हु...

उन्हें मुस्कुराते हुए देख में अपना चेहरा उनकी टैंगो के बिच ले जाता हु और इतनी देर से अपना रास बहती भाभी की उस गीली छूट ने झट्ट से मुँह में दबोच लेता हु और मेरे ऐसा करते hi तुरंत भाभी अपने दोनों हाथो में चादर को कस के पकड़ लेती है और छूट हवा में उठा देती है और एक जोर की भरी गहरी सी सास लेने लगती है और अभी मेने अपनी जीभ चलना शुरू hi किया था की भाभी खुद से hi अपने एक हाथ को मुँह और रख कास के मुँह बंद कर देती है

इस तरह पति के बगल में लेटव छूट चटवाने से अब भाभी पर दर ,घबराहट और वासना तीनो का मिश्रण हावी हो रहा था और इसी बिच कुछ hi देर की छूट चूसै में भाभी अपनी छूट से कॉमर्स बहाने लग जाती है ...

काम रास को पूरा अचे से चाटने के बाद में भाभी के चेहरे के पास जाते हुए मुस्कुराने लगता हु तभी भाभी मेरे कान में धीरे से बोलती है..

भाभी: सच में पागल हो तुम देवर जी, ऐसे पहले कभी नहीं महसूस किया मेने...

में: पहले किसी की रैंड भी तो नहीं बानी न मेरी जान...

भाभी: पति बगल में लेता है और तुमसे छूट चटवा रही, सच में रैंड बना दिया आज तो, उफ्फ्फ्फ़, कही तो चोर दो और कितना रान्दीपना करवाओगे मुझसे आप...

में: अभी तो चूसै हुई है चुदाई बाकि है...

भाभी: उफ्फफ्फ्फ़ यहाँ नहीं में अपनी चीखें नहीं रोक paungi,mujhe कही और जा कर छोड़ लोंदेवार जी वैसे hi भोत मुसल लौड़ा है आपका देवर जी...

ाचा ठीक है मेरी रंडी भाभी, छोडूंगा नहीं पर मेरा लुंड तो आपको यही चूसना पड़ेगा, और ये बोल भाभी को वही भैया के सामने घुटनो पर बिठा अपना लुंड उनके मुँह में दे दिया और मुँह छोड़ने लगा .. हलके गहरे धक्के से भाभी के गले तक लुंड जाने से अब उनकी सांस फूलने लगी और वो खांसने लगती उससे पहले मेने अपना लौड़ा बहार निकला और उन्हें खड़ा कर बाथरूम में ले गया जिसका दरवाजा बंद न कर के भाभी को पकड़ रखने को कहा ताकि उनकी आंखे भैया पर तिकी रहे और में पीछे जा भाभी को आगे झुका उनकी बहती छूट पर अपना लुंड टिका दिया ..

भाभी: अह्ह्ह हैए नजरो के सामने पति लेते है और नजरो के पीछे देवर छूट पर लुंड टिकाये हुए है उफ्फफ्फ्फ़ सच देवर जी ऐसा रान्दीपना तो कभी नहीं सोचा था मेने जैसा आप करवा रहे उम्मम्मम..

और भाभी की ये बात धीमे स्वर में सुनते hi उनके चूतड़ पकड़ लुंड को छूट में उतर दिया और पिलाई शुरू कर दी...

मममम उफ्फफ्फ्फ़ की दबी हुई आवाजों के साथ अब भाभी भी पति की मौजूदगी में चुदाई का ये मजा लूटने में मस्त हो गई थी और में आगे को झुक उनको छोड़ते हुए कानो में धीरे से..

में: मममम बोलो मेरी भाभी कैसा लग रहा पति के सामने पराया लुंड लेने में अहह..

भाभी: अह्ह्ह्हहफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ देवर जी मम्मन कुछ मत पूछो बस छोड़ो मुझे अह्ह्ह नहीं बता सकती अभी ये एहसास और बड़ी मुश्किल से चीखे रोक रही हु मेरी अह्ह्ह ममममम जल्दी से छोड़ डालो मेरी प्यासी छूट उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्द...

में, भाभी की दोनों चूचिया पकड़ अब दनादन धक्के लगाने लगता हु और वैसे hi कुछ देर की दमदार चुदाई के बाद उनकी छूट में अपना माल भर देता हु और वो भी कम्पटी हुई टैंगो पर खड़े खड़े मेरे लुंड के माल के साथ अपना काम रास बहा देती है.. और में भाभी को वैसे hi नंगा उस हाल में चोर अपने कमरे में चला आता हु...

अगली सुबह भाभी मुझे कमरे में जगाने के बहाने आती है लेकिन में पहले से hi जग चूका था बस ऐसे hi बिस्तर पर लेता हुआ था और मुझे ऐसे लेता हुआ देख भाभी कमरे में आ दरवाजा अंदर से बंदकर के मेरे पास आती है..

भाभी: शर्म तो आ नहीं रही होगी आपको ऐसे मजे से लेटने में, मेरी नींद उदा कर के है न..

में: क्यों भाभी मेने क्या किया ऐसा की आपकी नींद उड़ गई..

भाभी: ाचा क्या किया??? रात में जो किया वो काम था क्या उफ्फ्फ्फ़ कितना दर रही थी में पता है तुम्हे, तिम्हारे भैया जग जाते तो...

में: तो क्या में तो कह देता भाभी ने hi मश्ग किया की नींद नहीं आ रही छोड़ने का मन है , मदद करो प्यास बुझाने में...

भाभी: उफ्फ्फ्फ़ शैतान कही के, मेने कमरे में आने को नहीं कहा था आपको समझे...

में: क्या करता भाभी, वीडियो कॉल पर आपका तरसता हुआ चेहरा देखा नहीं गया मुझसे ..

भाभी: ाचा जी , और वो साडी गन्दी बाटे जो आपने मुझसे बुलवाई उनका क्या...

में: वो तो सब सच hi बुलवाया न भाभी अब ः, एक औरत अपने पति के बगल में लेट कर तो उसी से चुदती है न जिसकी वो रखैल हो और आप मेरी रखैल नहीं हो क्या...

भाभी: उफ्फ्फ बेशरम कैसे बिंदास बोल देते हो ये सब...

में: ः भाभी बताओ न नहीं हो क्या तुम मेरी रंडी ..

भाभी: ईशःठ हाँ हु देवर जी सिर्फ और सिर्फ आपकी हु के , रखैल hi बन चुकी हु तभी पति के सामने ऐसे छुड़वा ली आपसे और अब कल रत के बाद तो और ज्यादा पागल हो गयी हु आपसे छुड़वाने को उम्म्म्म, ऐसा मजा पहले कभी महसूस नहीं किया था जैसा कल रत मिला हहै..

में: हाहाहा ये हुई न बात मेरी सेक्सी भाभी ...और तभी निचे से माँ किनवाज आती है भाभी को की सनी उठा या नहीं अब तक जल्दी निचे आओ दोनों. और माँ की आवाज सुन भाभी निचे चली जाती है और उनके बाद कुछ देर में मैं भी निचे ब्रेकफास्ट करने पहुँचजाता हु जिसके उपरांत सब लोग अपने अपने काम पर निकल पड़ते है.

शाम के समय प्रीति मेरे पास आती है एक बार और ये कन्फर्म करने की क्या उसे सच में इस पार्टी में जाना चाहिए की नहीं, लेकिन फिर मेरे मानाने पर वो जाने के लिए तैयार हो जाती है.

जब प्रीति तैयार हो कर आती है तो एक बार को तो मेरे भी मुँह से निकलने hi वाला था की है क्या कड़क माल लग रही है आज तो तू, ब्लैक कलर का एक स्किन टाइट सा ोनेपीएस पहने हुए जो सिर्फ ज़िप के ज़रिये जिस्म पर टिका हुआ था, कंधे पर स्ट्रैप्स के नाम पर एक पतली सी डोरी थी और जिसे देख ये लग रहा था की उसने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी है और पहनी भी हो तो स्ट्रैपलेस होगी, लेकिन हम मर्दो को तो अगर स्ट्रैप्स न दिखे मतलब लड़की अंदर से नंगी है यही लगता है और इसी सोच से मेरे लुंड ने एक दो झटके लगा दिए थे..

प्रीति, मुझे उसे इस तरह घूरते हुए देख: ऐसे क्या देख रहा है तू मुझे, पहली हर तो नहीं देख रहा अब.

में: ः पहली बार तो नहीं देख रहा पर आज तू लग hi इतनी खूबसूरत लग रही है, में तो ये सोच रहा की कैसे बेवकूफ लोग है तेरी कॉलेज में जो इतनी सुन्दर लड़की को रेजवक्ट कर दिया ..

प्रीति: ः चल अब बकवास बंद कर और सीरियसली ये बता की तू उस पार्टी में करने क्या वाला है , क्युकी मुझे वह होना तमाशा नहीं बनवाना है..

में: अरे ने थोड़े कुछ करने वाला हु जो करना है वो तू खुद hi करेगी ..

प्रीति, मेरी बात न समझते हुए: क्या मतलब सनी तेरा, में वह जा कर क्या करने वाली हु..

और उसके ये पूछने पर में उसे कुछ बाटे हिंट के तौर पर बता देता हु की उसे वह जा कर क्या करना है बाकि आगे का सँभालने का काम मेरा.. और इस बात को यहाँ ख़तम कर हम दोनों घर से उस जगह के लिए निकल पड़ते है..

वेन्यू पर पहुंच कर मेने प्रीति को कार से उतरने का बोल और अंदर जाने का बोलै और में कार को पार्क करने पार्किंग एरिया में चला जाता हु. अभी कार पार्क करके में बहार आ hi रहा था की वह के एक स्टोर रूम से मुझे कुछ खुसफुसाहट की आवाजे आने लगी, जिसे सुन में उस कमरे के नजदीक जा पंहुचा..

पहले तो पास जा कर मेने सिर्फ आवाज सुनने की कोशिश की तो मुझे पता लगा को अंदर से एक आवाज मर्द की और एक आवाज किसी लड़की की आ रही है ..

लड़की: उम्म्म्म उफ्फ्फ बस करो यहाँ कोई भी आ सकता है अभी एक कार के आने की आवाज नहीं सुनी क्या तुमने..

लड़का: अरे तुम क्यों चिंता करती हो किसी को कभी पता नहीं चलेगा की यहाँ हम दोनों कुछ कर रहे है..

लड़की: उफ्फ्फ्फ़ नहीं फिर भी प्लस अभी चोरो मुझे जाने दो, हम पार्टी के बाद कही और कर लेंगे प्लस..

लड़का: हैए कैसे जाने दू नीता डार्लिंग, क्या हॉट आइटम बन कर आई हो तुम ,और जब से इस कैसे हुए टॉप में तेरे ये चुके देखे तब से रहा नहीं जा रहा एक बार इन्हे पीला दे बस्स्स...

लड़की: उफ्फ्फ अगर किसी ने देख लिया न तो तुम्हारा तो पता नहीं में कही की नहीं रहूंगी, हर बार का यही नाटक है तुम्हारा उम्म्म..

और ये सब देख अब मेरे लुंड में हलचल होने लगती है ,और चुकी वह सिर्फ एक नाम मात्रा का दरवाजा था तो उसे थोड़ा सरकते हुए मेने अंदर देखना चाहा और जैसे hi अंदर देखा तो लुंड ने एक जोरदार झटका मार दिया, मरेगा भी क्यों नहीं अब, अगर सामने एक मस्त जवान भरे जिस्म की लड़की हो , जो अपने गोर गोर मुलायम से तरबूज जैसे चुचो को टॉप उठा कर बहार निकले हुए कड़ी हो ,जिसकी निप्पल इस वक्त उस लड़के के मुँह में थी और वो बड़ी बेरहमी से उसे मसलते हुए निचोड़ रहा था, उसकी गोरी चुचिओ पर लड़के के हाथो से पद रहे लाल निशान से hi ये मालूम चल रहा था की उन्हें कितनी बुरी तरह से मसला जा रहा है, और दर्द और पकडे जाने के दर के मरे वो लड़की अब उसे रोकने का भी प्रयास कर रही थी..

लड़की: उफ्फफ्फ्फ़ उम्म्म्म अब बस भी करो मेने तुम्हारी बात मन के बूब्स दिखा दिए न अब चलो यहाँ से भोत देर हो चुकी है वैसे भी..

लड़का उसकी चुकी को मसलते हुए होठो को चुम लेता है और कुछ देर और इस खेल को खेलने के बाद दोनों वह से बहार निकल कर पार्टी में शिरकत करने चले जाते है.

कुछ देर बाद में भी पार्टी हॉल में पहुँचता हु जहा इवेंट के लिए सेलेक्ट हुई 9-10 लड़किया, और ऑर्गनिज़ेर्स को मिला कर कुल 18-20 लोग होंगे और वाकई में जब मेरी नज़र उन चयनित लड़कीओ पर पड़ती है और उनके साथ कड़ी मेरे बेहेन प्रीति पर पड़ती है तो दिमाग में ये ख्याल आता है की , सच प्रीति जैसी खूबसूरत और हॉट तो इनमे से कोई नहीं लग रही है , अभी में ये देख hi रहा था की मेरी नज़र उस लड़की पर पड़ती है जो पार्किंग एरिया में उस लड़के को अपने दूध का स्वाद चखा कर आई थी.

मेरे लिए हैरानी की बात तो ये थी की वो लड़की नीता इस वक्त उस लड़के के साथ ,जिसने निचे पार्किंग में उसके जिस्म के साथ मजे लुटे , होने की बजे किसी दूसरे लड़के के हाथो ने हाथ डेल कड़ी थी और हस्ते हुए बाटे करे जा रही थी.

और तभी एक तरफ से प्रीति मेरे पास आ कर कड़ी हो जाती है...

प्रीति: यार सनी मुझे समझ नहीं आ रहा की में कैसे अपनी बात राखु..

में: देख घबरा मत में यही हु न तू बस बिंदास पूछ दाल और हाँ मुझे ये बता की ये लड़की कोण है (नीता की तरफ इशारा करते हुए)

प्रीति: ये नीता ma'am है , जूरी मेंबर्स में से ek,jiske बारे में मेने तुझे घर पर बताया था न और उनके साथ है वो अंशुल सर है ,दस्ते जूरी मेंबर और नीता मां के बॉयफ्रेंड ..

में, बॉयफ्रेंड शब्द सुन कर: क्याआ ये लड़की इसकी गर्लफ्रेंड है सच में...

प्रीति: हाँ में वही तो बोली ,लेकिन तू इतना हैरान क्यों हो रहा है..

में: नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi, और वो कोण है ? (नीता के साथ जिस लड़के को देखा था उसकी तरफ इशारा करते हुए)

प्रीति: वही तो है वो कमीना फोटोग्राफर जिसकी वजह से में रिजेक्ट हुई हु..

में: ओह्ह्ह तो ये है वो जनाब, चल फिर तो अब कोई दिक्कत hi नहीं, तू बिंदास जा कर वो कर जो मेने कहा है ...

में, मन hi मन ये सोच कर की वाह ये तो ऐसा हुआ की चूहा खुद पिंजरे में आ गया है हाहाहा..

और मेरी बात सुन प्रीति सीधा उन लोगो के बिच में जा कर..

प्रीति: मई ी हैवे अटेंशन ऑफ़ ु आल प्लीज, में जानती हु की ये पार्टी सिर्फ सिलेक्टेड लोगो और इवेंट मेंबर्स के लिए एक गेट टुगेदर है और कुकी में रिजेक्ट हो चुकी हु तो यहाँ मेरा कोई काम नहीं , आप सबके मन में भी होगा की में यहाँ क्यों आई हु..

प्रीति: लेकिन में यहाँ बिन बुलाये नहीं आई हु, मुझे विराट सर का इनविटेशन आया था और उनके कहने पर आई हु, और यहाँ आप सब के बिच में विराट सर से कुछ पूछना और फिर कुछ कहना चाहती hu..priti के ये बोलते hi विराट के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी मनो प्रीति ने उसकी बात मन ली है ..

प्रीति: विराट सर क्या आप मुझे ज्वाइन करेंगे प्लस..

जिसके जवाब ने विराट झट से उसके पास आ कर खड़ा हो जाता है..

प्रीति: सर मुझे आपसे कुछ कहना है वो बाद में पहले आपसे और हेड जूरी से एक कॉमन सवाल है क्या पूछ सकती hu..kya में पूछ सकती हु..

विराट: हाँ पूछो प्रीति..

प्रीति: तो मुझे सिर्फ ये बताओ आप की मेरा रिजेक्शन किस बेसिस पर हुआ था, नीता ma'am,anshul सर और आप तीनो ने मुझमे क्या कमी देखि जो मेरा रिजेक्शन किया गया.. एंड हाँ प्लस डोंट टेक में रॉंग में ये इसलिए पूछ रही हु ताकि उस गलती का सुधर कर सकू..

मेने देखा की प्रीति के इस सवाल पर अंशुल और नीना तो एक डीएम चुप से हो गए थे और..

विराट: इसका जवाह हम तुम्हे आलरेडी दे चुके है न प्रीति , और इसी लिए तो हमने रिजेक्ट करने के बाद भी तुम्हे यहाँ पर इन्विते किया..

प्रीति: हाँ सर पर में चाहती हु की आप सबके सामने वो वजह बताये मुझे, नीता मां अंशुल सर, आप hi बताइये क्या में उस लायक नहीं की मॉडलिंग कर saku.aap जूरी मेंबर हो मुझे आपने अब तक रीज़न नहीं बताया..

नीता: नहीं प्रीति वो बात नहीं है , विराट ने तुम्हे बताया था न की सिलेक्शन के लिए तुम्हे क्या करना है ...

और यहाँ तभी पीछे से आते हुए में बोल पड़ता हु..

में: मिस प्रीति , क्या आपको नहीं पता की अगर आपको इस इवेंट में पार्टिसिपेट करना है , सेलेक्ट होना है तो आपको मर विराट की गर्लफ्रेंड बनना होगा, वो आपसे बेइंतेहा मोहब्बत करते है और आप को उनकी मोहब्बत स्वीकारनी होगी..

मेरी आवाज और ये बात सुन कर हॉल में सब लोग मेरी तरफ एक तक्क देखे जा रहे थे.. तभी में नीता और अंशुल की तरफ देख..

में: क्यों जूरी मेंबर्स , यही शर्त है न आपके इस स्पेशल फोटोग्राफर की, और यही वजह है न जिस कारन आपने प्रीति को रिजेक्ट किया है...

विराट, हैरान होते हुए कुकी वह हॉल में इवेंट आर्गेनाइजर भी मौजूद थे और सबके सामने पोल्ल खुलने के दर से : ओह hello! सबसे पहले तो तुम हो कौन और यहाँ कैसे आये और ये सब क्या बकवास कर रहे हो..

में: बकवास , नहीं मर विराट में तो कोई बकवास नहीं कर रहा हु, अगर में गलत बोल रहा हु तो प्रीति तुम hi इस बात को क्लियर कर दो, या जूरी के लोग, मर अंशुल ंद मिस नीता आप क्यों नहीं क्लियर कर देते इस बात को , एंड मुझे गलत साबित कर दो..

ऑर्गनिज़ेर्स में से एक व्यक्ति खड़ा हो कर: एक्सक्यूज़ में मर, क्या मजाक चल रहा है यहाँ एंड तुम कौन हो, ये इवेंट भोत फेयर और फेमस है यहाँ किसी का रिजेक्शन इस तरह की बेतुकी बातो पर नहीं होता एंड विराट इस इवेंट का मैं फोटो शूटर है ...

में: बिलकुल ठीक कहा सर आपने, आपकी हर एक बात सही है, लेकिन अगर ये रीज़न नहीं है तो प्रीति के रिजेक्शन का कोई दूसरा रीज़न हो तो मुझे बतातिये.. सॉरी तो से बूत यहाँ मौजूद जितनी भी लड़किया है, मेरा मन्ना है की मिस प्रीति इन सब को लीड कर रही है, इन आल मन्नेर चाहे टैलेंट हो चाहे ब्यूटी हो या चार्म हो एंड इस बात को कोई नकार नहीं सकता है..

एक बार को तो वो आर्गेनाइजर भी मेरी बात सुन सभी लड़कीओ को देखने के बाद और प्रीति को देखने के बाद शांत हो गया की बात में दम तो है तभी .

विराट: प्रीति तुम चुप क्यों हो और ये कौन है जो बकवास किये जा रहा है ...

प्रीति: सर बकवास कहा , ये वही बोल रहे है जो आपने कहा है मुझसे ...

आर्गेनाइजर: प्रीति डिटेल में बताओ की आखिर बात क्या है..

उनके कहने पर प्रीति सबके सामने उस विराट की पूरी पोल्ल पट्टी खोल देती है और साडी वजह बताती है की क्यों उसे बहार फोटोशूट करवाना पड़ा और किस वजह से रिजेक्ट किया गया और उसके बाद विराट ने उससे क्या शर्त राखी थी ..(यहाँ उसने में उसका भाई हु ये न बता कर सिर्फ शहर का एक ाचा फोटोग्राफर और उसका फ्रेंड बताया, जैसा हमने पहले डीडे किया था)..

ऑर्गनिज़ेर्स, बाकि जूरी टीम की तरफ देखते हुए: अंशुल ,नीता क्या प्रीति सच बोल रही है , क्या वाकई में ऐसा कुछ हुआ था..

नीता: सर हाँ ये सब हुआ था बूत सर विराट का कोई गलत इंटेंसिव नहीं था, इतस जस्ट हे लाइक्स प्रीति अलॉट और वो उसके साथ स्पेशल टाइम स्पेंड करना चाहता था जो प्रीति ने फोटोशूट न करवाने की वजह से उसने मिस कर दिया प्लस प्रीति उसके साथ रौदे हुई , बस इसी वजह से ..

आर्गेनाइजर: सो इसका इवेंट से क्या लेना देना, तुम एक जज हो , तुम खुद इतनी मनुपुलटीवे कैसे हो सकती हो, किसी बेकार से कारन की वजह से कोई अपना टैलेंट न शो कर पाए , ये कहा की समझ है ..

तभी में: ओह तो नीता मां आपका कहना है की विराट प्रीति को पसंद करता है, उसके दिल में प्रीति के प्रति फीलिंग्स है?

नीता: हाँ और अपनी फीलिंग्स एक्सेप्ट करवाने के लिए hi उसने ये सब किया है..

में: हाहाहाहा , ी मैं मुझे समझ नहीं आ रहा की में रियेक्ट कैसे करू... लेट में आस्क यू समथिंग विराट .

में: कितना प्यार करते हो प्रीति से और किस हद तक? .

विराट, अचानक हुए इस सवाल से फिर चौकते हुए: भोत, उसके लिए किसी से भी लड़ जाऊंगा , उसको हमेशा खुश रखूँगा और उसकी हर ख्वाइश पूरी करूँगा..

Me,vo बात पूरी करता इसके बिच hi: हां बला बला बला बला... वही घिसे पिटे डायलॉग्स, वैसे अगर कोई लड़का सच में किसी लड़की से इतना प्यार करे तो उसे कोई दूसरी लड़की नज़र hi नहीं आती है मानते हो इस बात को न..

विराट: हाँ मंटा हु और में भी प्रीति से ऐसा hi प्यार करता हु...

में: ोोोू तो फिर अभी कुछ देर पहले निचे पार्किंग एरिया में बने स्टोर रूम में वो लड़की जबरदस्ती ले गयी होगी न तुम्हे, और उसके खुद से तुम्हारे होठो पर अपने होठ रख दिए होंगे और आगे क्या हुआ वो तो तुम्हे भी पता है ,, तो ये सब तुमने मर्जी के बिना किया है न...

Me,baat जारी रखते हुए ,नीता की तरह देख: कई नीता ma'am सही कहा न मेने अगर ये प्रीति से इतना प्यार करते है तो किसी दूसरी लड़की के साथ खुद अपनी मर्जी से तो ये सब हरकते करेंगे नहीं सही कहा न... यहाँ आने के बाद पता लगा मुझे की आपका भी बॉयफ्रेंड है जिससे आप भोत प्यार करती हैं , तो आपको कभी ऐसा हुआ की उनके अलावा किसी और के साथ जिस्मानी तालुकात रखने का मन हुआ ho..nahi न..

मेरी इस बात को सुन अब नीता और विराट दोनों के hi होश उड़ से गए थे और बाकि पुरे हॉल में हर किसी के दिमाग में यही की विराट किसके साथ मजे मर रहा था जो मेने देख लिया ः... तभी

अंशुल: हे मर, सोच समँझ कर बोलो जरा, तुम्हारे अपने मटर में नीता की पर्सनल लाइफ क्यों घसीट रहे हो ..

में, मन में, भाई लाइफ क्या तेरी गर्लफ्रेंड तो अपना जिस्म दुसरो से घसीटवा रही और तुझे पता नहीं: अरे सर में कहा घसीट रहा में तो बस मां से पूछ रहा की सच्चे प्यार में किसी दूसरे शख्स का ख्याल hi कहा आता है जैसे की आप दोनों का प्यार दिख सा रहा है, जब से मेने इस हॉल में एंट्री ली है तबसे..

नीता तो मनो अब कुछ बोलने की hi नहीं रही थी क्युकी वो समझ गयी थी की अब कुछ बोली मतलब कही उसका नाम बहार ना आजाये..

में: हाँ तो विराट साहब, अब बोलो कैसा प्यार है ये आपका... जब विराट से कोई जवाब नहीं मिला तो ऑर्गनिज़ेर्स की तरफ देख..

में: सॉरी सर , में बस इतना बताना चाहता था की यहाँ टैलेंट की कदर नहीं हो रही है अपने फायदे अपने मजे देखे जा रहे है, प्रीति ने विराट को भाव नहीं दिया उसके साथ काम नहीं किया तो बस इस बात का बदला लेने के लिए उसके टैलेंट को नकार दिया गया..

ये प्यार व्यार तो सब एक नाटक था असल बात ये है की फोटोशूटिंग के बहाने अलग स्पेस मिलने की वजह से विराट अपनी हवस को प्रीति का उसे करके पूरी करना चाहता था और जब प्रीति को उसके इंटेंशन्स पता लगे तो उसने उसको इग्नोर करना शुरू किया तो कॉलेज की मणि हुई हस्ती होने का फायदा उठा उसने जूरी को प्रीति के रिजेक्शन के लिए मजबूर किया...

वार्ना में नहीं मंटा की इस लड़की में कही से कोई कमी है किसी भी तरह की, और रही बात इसे प्यार करने की तो एक लड़की को प्यार देना और शारीरिक सम्बन्ध बनाने में भोत फरक है..

प्यार वो है जहा आत्मा से आत्मा जुड़ती है, एक दूसरे के प्रति इज्जत रेस्पेक्ट और केयरिंग पैदा होती है न की वासना और हवस...

नीता मां शायद आपने प्यार करके भी प्यार को समझा नहीं अब तक या फिर क्या पता आपको भी अब तक प्यार क्या होता है इस बात का एहसास नहीं हुआ है. जिस्मानी सम्बन्ध बनाने से कई परे है किसी इंसान को प्यार करना, अगर किसी लड़की को देख आपको उसका फिगर या जिस्म की बनावट पसंद आती है तो वो प्यार नहीं , हाँ अगर उसे देख उसकी सुंदरता, उसके प्रति भावनाये जगे, और उसके साथ वक्त कहा बीतने लगे वो पता न चले, दिल खुश हो तो वो है असली प्यार.. और मुझे नहीं लगता आज के ज़माने में ऐसा प्यार कोई करता है हर किसी को सिर्फ शारीरिक सुख चाहिए बस और कुछ नहीं...

और माफ़ करना अगर इस इवेंट के भागीदार बनने के लिए प्रीति को ये सब करना पड़े तो इससे ाचा यही हुआ है की इसको रिजेक्ट कर दिया गया है,

पार्टी ख़राब करने के लिए माफ़ी चाहता हु ,चलो प्रीति यहाँ से अब.. और ये बोल में प्रीति को अपने साथ ले आता हु...

हॉल से निकल अभी हम पार्किंग एरिया में hi पहुंचे थे, लेकिन इतनी देर में मेने प्रीति के मुँह से एक शब्द नहीं सुना था और वो अब तक चुप्पी साढ़े हुए बस मुझे देख रही थी..

में: तुझे क्या हुआ अब , कहा खो गयी है तू..

प्रीति, अपनी सोच से बहार निकलते हुए: हम्म्म.. तू सनी hi है न???

में: क्या .. क्या पूछ रही है ठीक है न तू ः..

प्रीति: नहीं तू सच बता तू वही सनी है न जो हमेशा मुझसे लड़ता रहता है, क्युकी अंदर मेने जिस सनी को देखा वो बिलकुल hi अलग था..

में: अलग मतलब ,कहना क्या चाहती ह तू..

प्रीति: अरे कितनी समझदारी और अछि बाटे की तूने, मुझे नहीं पता था की तू एक लड़की और प्यार के बारे में भी इतना कुछ जनता होगा, में तो अब तक शॉकेड हु की मेने तेरे मुँह से यह सब सुना और अबोवे आल तूने आज मेरी तारीफ की वो भी इतने अचे से ...

में: हाहाहा तो तुझे क्या लगा था की में सवह में निकम्मा हु, और हाँ मेने जो कुछ भी कहा अंदर सब सच कहा एंड तेरे बारे में भी जितना कहा सब सच कहा, ी रियली मैं आईटी..

मेरी बात सुन प्रीति ने तुरंत मुझे कास के हग्ग कर लिया और..

प्रीति: ओह सनी सच आज भोत ख़ुशी हुई मुझे तेरे मुँह से ये सब सुन, आज तक मुझे लगा था तू सिर्फ लड़ता रहता है पर आज पता लगा की मेरा भाई कितना ाचा है ,और तूने अंदर क्या छक्के चुराए है सबके मजा आ गया मुझे हहै...

सनी: हाहाहा अरे कोई मेरु बेहेन के बारे में उल्टा सीधा बोल के तो देखे , इससे भी बुरा हाल कर सकता हु में ः... वैसे अब हुग घर जा क्र कर लेना वार्ना कही कोई हमें देख बाटे बनाएगा जैसे मेने विराट को सबके सामने नंगा कर दिया ः ,भाई बेहेन है ये तो हम दोनों जानते है बस ..

प्रीति: हेहेहे हाँ बनाने दो, तुंहरे साथ बनाये तो भी चलेगा आज तो, आज में भोत खुश हु सच..

में: ः पागल लड़की चल अब भोत देर हो रही घर चलते hai....or ये बोल हम कार में बैठ घर को निकल जाते है..

Priti,raste में: वैसे सनी क्या तूने सच में विराट को किसी लड़की के साथ देखा था या बस ऐसे hi कहानी...

में: तू पागल ह क्या ऐसे कहानी बनता तो वो चुप रहता क्या, वो वाकई पार्किंग एरिया में स्टोर रूम में एक लड़की को अपनी बहो में लिए होठ चुम्मे में मस्त था ः...

प्रीति: हाय राम और वो लड़की कोण थी मुझे तो बता.

में: हाहाहा तू सुनेगी तो शॉक हो जाएगी, वो लड़की तेरी नीता ma'am थी जो हॉल में प्यार की दुहाई दे रही थी न, इसलिए तो मेने उसे भी लपेट लिया हाहाहा...

प्रीति: व्हाटटटटटट,,, नीता ma'am, हे भगवन!! वो तो अंशुल सर की गफ है न लेकिन, उफ्फ्फ क्या चल रहा है ये सब , गफ किस की और स्मूच किसी और को ,ची ची ची...

में: हाहाहा इसलिए मेने कहा न आजकल सच्चा प्यार कही नहीं बस सेक्स किए सबको और इसी की फ़िराक में होते hai..haha

प्रीति: हम्म्म यार सच कह रहा है मुझे तो अब भी यकीं नहीं हो रहा की नीता मां भी ऐसा कर सकती है...

में: ः आजकल ये सब भोत नार्मल है, बंदी किसी की और मजे किसी और के साथ ः..

और इसी तरह बात करते हुए हम दोनों घर पहुंच जाते है जहा सब लोग एम् साथ इस वक्त डिनर hi कर रहे होते है ...
 
ही दोस्तों...

जनता हु की कहानी पर एक विराम सा लग गया है लेकिन में आपको ये कहना चाहता हु की ये कहानी अब जल्द hi पूरी की जयेगु और वो भी निरंतर उपदटेस के माध्यम से ,,,,

ये जो विराम लगा वो कुछ जरुरी करने की वजह से लगा हुआ था लेकिन अब कहानी के आगे के अपडेट लिखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है और अगले कुछ hi दिनों में आपको कहानी के आगे के उपदटेस पहले की hi तरह निरंतर मिलना शुरू हो जायेंगे..

इंतज़ार करवाने के लिए माफ़ी चाहता हु लेकिन आशा करता हु की आपका साथ आगे के उपदटेस में बी मिलता रहेगा...
 
अपडेट- 41

घर पहुंचने पर में और प्रीति ,घर के बाकि सभी सदस्यों को डिनर टेबल पर hi बैठे हुए पते है और हम दोनों को देख मम्मी हमे भी डिनर करने का बोलती है जिस पर हम दोनों कपडे बदल कर आने का बोल अपने अपने कमरे में चले जाते है..

उसी दौरान यहाँ पापा सबको ये बताते है की उन्हें और बुआ को ऑफिस के कुछ काम के सिलसिले में एक हफ्ते के लिए बहार जाना पड़ेगा ,जिसे सुनते hi सीमा दीदी पापा की तरफ देखते हुए बुआ से ...

सीमा: बुआ ऐसा क्या जरुरी काम है की आपको पुरे एक हफ्ते के लिए जाना पद रहे है..

रागिनी: क्या बताऊ सीमा तुम्हे अब, काम hi कुछ ऐसा है इस बार, जाना भोत जरुरी है वार्ना एक हफ्ते के लिए मेरा भी इस तरह घर से दूर रहना कहा आसान होता ..

भले बुआ ने सबके सामने घर से दूर न रहने का बहाना बताया लेकिन असली वजह तो ये थी की अब उन्हें एक हफ्ते तक अपने पति यानि की मेरा लुंड नसीब नहीं होने वाला है, ना जाने कैसे में सनी से चूड़े बिना एक हफ्ता निकलूंगी...

सीमा: ाचा तो बुआ ,आप और पापा hi जा रहे हो या साथ में कोई और भी हैं...

रागिनी: हाँ बस में और तेरे पापा और उनकी सेक्रेटरी श्वेता हम तीन लोग hi जा रहे है...

सीमा, श्वेता का नाम सुनते hi उसकी नजर मानव की तरफ जाती है और मन hi मन ये समझते हुए की पापा को वह पूरा मौका मिलने वाला है, भले कितना भी प्रॉमिस कर ले वो श्वेता को देखते hi मजे लूटने लगेंगे: श्वेता क्यों??? उसका वह क्या काम है बुआ ...

इससे पहले की रागिनी बुआ कुछ बोल पति,

मानव: क्युकी जिस काम के लिए हम जा रहे है बेटी , उसका डॉक्यूमेंटेशन और उससे रिलेटेड साडी चीजे श्वेता को अचे से पता है तो हमारे लिए चीजे आसान हो जाएँगी..

सीमा, पापा की तरफ बेरुखी से देखती हुई: ऐसे भी क्या डाक्यूमेंट्स जो कंपनी के दो बॉस को न पता हो कर एक सेक्रेटरी को ज्यादा पता है ..

महिमा, तभी बिच में बोलते हुए: अरे सीमा होगा कुछ जरुरी काम , जाने दे न तू क्यों इतनी पूछताछ कर रही है...

सीमा, अब मम्मी आपको क्या बताऊ: हाँ मम्मी पर में सिर्फ इतना कह रही हु की उसका भी अपना घर परिवार होगा न, एक हफ्ते तक वो भी अकेली परेशां होती रहेगी , एम्प्लोयी है इसका ये मतलब तो नहीं की कुछ भी करो उसके साथ.. और ये बोल सीमा दोबारा अपने पापा को गुस्से भरी निगाहो से देखती है...

रागिनी: नहीं सीमा मेने खुद श्वेता से इस बारे में बात की थी और उसे आने में कोई दिक्कत नहीं है , और सच कहु तो उसने कंपनी का इतना काम संभाला हुआ है की कुछ चीजे उसे हमसे ज्यादा पता है , इसलिए उसे ले जाने से हमें थोड़ी रहत मिलेगी..

सीमा, ये समझते हुए की वो छह कर बी अब इस बात को ताल नहीं सकती थी तभी कुछ सोच: हम्म्म ठीक है में समझ सकती हु बुआ, लेकिन में क्या सोच रही हु की मुझे यहाँ आये इतना वक्त हो गया है और में घर क घर में hi रह कर बोर सी हो गयी हु तो क्यों न मैं भी आप लोगो के साथ चालू...

सीमा की ये बात सुन महिमा भी उसकी बात रखते हुए...

महिमा: हाँ सीमा ये तूने अछि बात कही इसी बहाने तेरा मूड भी फ्रेश हो जायेगा थोड़ा और घूमने का घूमना हो jayega...kya कहते हो जी सही है न (अपने पति मानव की तरफ देखते हुए)..

मानव, ये जनता था की सीमा साथ आई तो कुछ हाथ नहीं आने वाला, इस वजह से बात टालते हुए: में क्या कहूंगा इसमें अब , अगर सीमा चलना चाहती है तो उसकी मर्जी पर में तो बस इतना कहूंगा की वह घूमने का कहा टाइम मिलेगा हमें ऑफिस के कामो के बिच...

सीमा चिढ़ते हुए: तो आप लोग करना ऑफिस का काम में अकेले घूम लुंगी कोई दिक्कत नहीं..

रागिनी: ः अकेले क्यों घूमेगी सीमा तू, में हु न और ऑफिस का काम करते करते घूमना भी होता रहेगा , और तू साथ रहेगी तो मुझे भी कंपनी मिल जाएगी ...

सीमा: ठीक है तो फिर ये तय रहा की में आप लोगो के साथ चल रही हु...

अभी दीदी ने ये बात बोली hi थी की में वह पहुंच जाता हु..

में, बुआ के पास खली चेयर पर बैठते हुए: कहाँ जाने की बाटे हो रही है दीदी....

महिमा: अरे कही नहीं बीटा , तेरे पापा और बुआ कल सुबह ऑफिस के किसी काम से एक हफ्ते के लिए बहार जा रहे है तो सीमा भी साथ जा रही है ..

में, बुआ की तइस पर हाथ रखते हुए: ओह ऐसा क्या, चलो ाचा है दीदी आपका भी मूड थोड़ा फ्रेश हो जायेगा...

सीमा: हाँ न सनी और थोड़ी शॉपिंग भी हो जाएगी कितने दिनों से नहीं हुई है हहै... तुझे कुछ मंगवाना है तो तू बी बता दे..

में, बुआ की कुर्ती के निचे से होते हुए टैंगो क बिच से सलवार पर हाथ रख: नहीं दीदी इस बार आप नहीं बुआ लाएंगी मेरे लिए, वो आज तक मेरे लिए कभी कुछ नहीं ले ...

बुआ, मेरा हाथ अपने हाथो से जोरो से अपनी छूट पर दबाते हुए: क्या ले कर औ तेरे लिए बता फिर इस बार , में पक्का ले कर आउंगी भोत शिकायत करता है न तू मेरी ...

में, हाथ को धीरे धीरे छूट पर घिसते हुए: वो आप जानो क्या लाना है, बस हाँ कुछ ऐसा होना चाहिए जो सबसे अलग और यादगार हो बुआ...

और इसी तरह कुछ गप्पे मरते हुए सब अपना अपना डिनर ख़तम कर अपने अपने रूम की तरफ बाद चलते है...

डिनर के बाद सब अपने अपने कमरे में पहुंच जाते है , बाकि सभी के कमरों में कुछ खास बात नहीं थी लेकिन mahima(mummy) और manav(papa) के कमरे में कुछ और hi माहौल बना हुआ था, और इस माहौल के बनने का कारन था मानव का अगले एक हफ्ते के लिए घर से दूर रहना.

एक तरफ मानव जहा बिस्तर पर लेट सोने की कोशिश में लगा हुआ था वही दूसरी तरफ महिमा बाथरूम से बहार निकलती है जिसने इस वक्त साड़ी उतरी हुई थी और सिर्फ एक काळा रंग के कैसे हुए ब्लाउज में और अपनी नाभि से निचे तक पेटीकोट को बंधे हुए थी...

रूम में आते hi जैसे उसकी नज़र बिस्तर पर लेते अपने पति पर पड़ती है वो तुरंत बिस्तर पर दूसरी तरफ से जा कर उससे चिपक जाती है.. मानव जो इस वक्त अपनी बेटी सीमा के साथ आने से जो पूरी ट्रिप की वाट लगने वाली है, जो उसने श्वेता के साथ मजे मस्ती की सोची थी उस पर पानी फिरता हुआ देख रहा था, वो अपनी बीवी महिमा के इस तरह से चिपकने से थोड़ा चौक कर उसे पीछे धकेलते हुए..

मानव: ये क्या कर रही हो महिमा ..

महिमा: ओफ्फो जैसे आपको पता hi नहीं की में क्या कर रही हु मानव, एक हफ्ते के लिए मुझसे दूर जा रहे हो अब आज की रत तो प्यार कर लेने दो न ...

मानव, चिड़े हुए मन से: क्या महिमा तुम भी, यहाँ मुझे कल इतने जरुरी काम से बहार जाना है, सब ठीक रहेगा या नहीं इस बात की टेंशन है और तुम्हे इस वक्त मस्ती की पड़ी है...

महिमा, अपने पति का हाथ पकड़ कर ब्लाउज के बहार निकलते चुचिओ के उभर पर दबाव बनाते हुए: ाचा तो ऑफिस का काम इतना जरुरी है और बीवी की ख़ुशी , उसकी संतुष्टि का क्या मानव, एक हफ्ते आपके बिना रहना है मुझे , कभी सोचा की कितना मुश्किल होता है मेरे लिए..

मानव: ओफ्फो महिमा अब प्लीज तुम वापस से शुरू मत हो जाना उसी बात को ले कर..

महिमा: मानव इसमें शुरू होने की क्या बात है, काम काम काम हर वक्त आपका एक यही बहाना होता है, बीवी को तो जैसे भूल hi गए हो, यद् बी है आपको की आखरी बार कब मुझे पूरी तरह से संतुस्ट किया था आपने?

मानव: यार महिमा देखो अब तुम्हे समझना चाहिए, तुम आलरेडी चार बचो की माँ हो चुकी हो आप तो अपनी इच्छाओ पर काबू रखो, हमारी अब वो उम्र नहीं रही की हर पल पहले की तरह में तुम्हारे साथ मस्ती करता राहु...

यहाँ मानव की ये बात इसलिए आई क्युकी अब वो महिमा को छोड़ छोड़ कर ुब्ब चूका था और जैसा सब को पता है उसे जवान रसीली छूट का स्वाद लगा हुआ था... जो इन दिनों अपनी बेटी की वजह से मिलना बंद सी हो गई थी..

महिमा, गुस्से में: चार बचो की माँ हु तो क्या हुआ, कोई गलती कर दी जैसे मेने इस छूट से चार बचे निकल कर हाँ? किसने कहा ये की एक औरत के अगर चार बचे है तो उसे चुदाई की भूख नहीं होगी और रही बात उम्र होने की तो आप को लगता होगा ऐसा लेकिन मुझे नहीं, मेरे जिस्म में आज भी गर्मी है जिसे में शांत करवाना चाहती हु , आज भी मुझे वैसे hi छोड़ने का मन होता है जैसे पहले होता था....

मानव, ये देख की महिमा अब गुस्से में आ रही: अरे माहि डार्लिंग मेरा वो मतलब नहीं था पर तुम मेरी भी तो बात समझो न, मुझे काम का टेंशन है अभी भोत आज नहीं हो पायेगा मुझसे इसलिए बोल रहा ये सब न...

महिमा: आपका काम काम और मेरी जरूरते उसके आगे कुछ नहीं? आपको यद् भी है अपकृ बार कब आपने मेरी अचे से जैम कर ली थी? मुझे तो नहीं यद् की आपने कब आखरी बार मुझे पूर्ण रूप से संतुस्ट किया था, हर वक्त बस काम का बहाना...

मानव: अब देखो तुम इस बात को बढ़ाना चाहती हो तो कोई उपाय नहीं है , पर मेरा आज वाकई बिलकुल मन नहीं है प्लस अब मुझे सोने दो भोत नींद आ रही है मुझे और सुबह जल्दी निकलना भी है.. गुड नाईट..

और इससे पहले की महिमा अपनी बात पूरी करती मानव करवट बदल उलटी तरफ मुँह फेर कर सो जाता है और यहाँ महिमा जो पिछले कई दिनों से पति के लुंड के लिए प्यासी थी और साथ hi अगले एक हफ्ते तक पति का लुंड नसीब नहीं होने वाला है इस बात से और ज्यादा तड़पती हुई खुद की अपना एक हाथ पटिकट में घुसा कर छूट घिसने लग पड़ती है.. कुछ देर की छूट घिसाई के बाद जब उसे लगा की इससे वो ठंडी होने की बजे ज्यादा गरम हो रही है तो बिस्तर से उठ कर पेटीकोट में हाथ दाल अपनी पंतय निकल कर वैसे hi ब्लाउज और पेटीकोट में कमरे से दबे पाँव बहार निकल आती है...

यहाँ में अपने कमरे में सोने की कोशिश कर रहा था पर मनो नींद आने का नाम hi नहीं ले रही थी, जैसे की अभी कुछ और देखना रह गया हो.. और इसी बिच नींद न आने के कारन में उठ कर रूम में बहार निकल किचन की तरफ बाद गया, ये सोच की चलो पानी hi पि लिया जाये , इसी बहाने थोड़ा तो टाइम निकलेगा और शायद नींद आ जाये बाद में...

इसी सोच के साथ में अभी किचन की दहलीज पर पंहुचा hi था की अंदर किचन में मुझे कुछ आहत सी सुनाई दी , जिससे की तेजी से आगे बाद रहे मेरे पैर वही थम से जाते है और अब धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए में अंदर किचन में झाँकने लगता हु. जैसे hi मेरी नजर किचन के अंदर पड़ती है , मेरी पलकों ने झपकना बंद कर दिया और साथ hi शरीर में एक अलग hi उत्तेजना का करंट सा उत्पन्न हो गया tha...Ji हाँ और इस सब का कारन था अंदर कड़ी मेरी मम्मी महिमा...

दरअसल पति से गुस्सा होने के और अपने जिस्म की बढ़ती गर्मी के कारन महिमा अपने कमरे से निकल कर सीधा किचन में आ पहुंची थी और फ्रिज से एक बड़ा सा मोठे साइज का बैगन निकल वही किचन स्टैंड के सहारे कड़ी हो अपनी एक तंग वह पड़ी कुर्सी पर रख फैलते हुए उस बैगन को अपनी योनि में दाल जिस्म की आग ठंडी करने में मशगूल थी, बदन की बढ़ती हुई वासना और कामाग्नि की वजह से महिमा ये भी भूल चुकी थी की वो इस वक्त किचन में है और कोई भी उसे देख सकता hai,par वही चुकी रत का समय था तो उसे ये लग रहा था की इस वक्त किचन में किसी आने के चांस न के बराबर है और इसी वजह से उसने उस बैगन को अपनी छूट का रास्ता दिखते हुए वही सफर करवाना तय kiya.lekin उसे क्या पता था की उसका अपना बीटा hi उसे बैगन को उसकी वहुत का रास्ता तय करता इस लेदर देखने वाला है...

काळा रंग के कैसे हुए ब्लाउज में जिसमे वैसे hi मम्मी की चूचियों का उभर समां नहीं रहा था , उप्पेर से इस वक्त उप्पेर क दो हुक और खुलने की वजह से उन उरोजों का और भी अचे से बहार को निकलना, मनो की बुलावा हो कोई आओ और हमे निचोड़ो.. उसके उप्पेर मम्मी का गोरा बदन सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में , जिसमे से उनका पेटीकोट एक तंग कुर्सी पर होने की वजह से पूरा उप्पेर उठा hua..hayeee वो गोरी गोरी टंगे और मांसल जंघे जिसे देखते hi लुंड को मनो झटका सा लगा हो...

टैंगो के ठीक बिच में मम्मी का एक हाथ बैगन थामे छूट को पेलने में लगा हिअ था और दूसरा हाथ ब्लाउज से बहार आने को तड़पते हुए उन भरी गोर गोर उरोजों पर था और उनपर बेरहमी करते हुए बुरी तरह निचोड़ रहा था, मेरी मौजूदगी से अनजान इस वक्त मम्मी अपनी आँखे बंद किये , अपने रसीले होठो को दन्त में फसा काट ते हुए चूतड़ों को कभी आगे तो कभी पैर के तलवो को उप्पेर उठा चूतड़ों को ऊपर की तरफ उचकते हुए अपनी छूट में लगी आग को उस बैगन से शांत करने में पूरी तरह से लगी हुई थी और जो बेचैनी, बेसब्री और काम वासना की वजह से उनके चेहरे का भाव दिखाई पद रहा था उससे ये साफ ज़ाहिर हो रहा था की अगर इस वक्त मैं उनके सामने भी चला जाऊ तो भी वो उस मोठे से बैंगन से होती हुई अपनी खुद की चुदाई को नहीं रोकने वाली हो...

दांतो में फसे हुए दबे होठो से मुँह से निकलती हुई वो सिसकिया और हाथो की बढ़ती हुई गति , साथ hi बढ़ती हुई गति के साथ साथ चूतड़ों को भी उसी गति सड़ हिलना और चुचिओ को कभी दबोचना तो कभी प्यार से सहलाना, अह्ह्ह्हह इस सब हसीं नज़रो को देख अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था और मन में तो यही आ रहा था की अभी किचन में जा कर मेरी तड़पती हुई मम्मी की साडी भूख शांत कर दू...

अभी यही सब सोच रहा था की अंदर दिखाई पड़ता है की अब मम्मी ने अपनी हरकते और तेज कर ली है जैसे मनो की बस अगले कुछ पल में झड़ने hi वाली हो और ऐसा hi hua,agli कुछ देर में मम्मी ने उस बैंगन की मदद से अपना काम रास छूट के रस्ते बहा दिया और कुछ देर अपने आप को सँभालने के बाद कपडे ठीक कर किचन से बहार आने को निकलती है, जिन्हे देख में उनके बहार आने से पहले या उनकी नज़रो में आने से पहले hi वह से हैट कर चिप जाता हु और मम्मी के किचन से जाने के बाद में भी मम्मी के भरे हुए गोर नंगे बदन को यद् करते हुए अपने कमरे की तरफ बाद जाता हु..

वापस अपने कमरे की तरफ आते हुए अब भी मेरी नज़रो में मम्मी का वो रूप और खुद को इस तरह शांत करने वाली तस्वीर hi घूम रही थी जिसका असर अब लोअर में कैद मेरे लुंड पर भोत hi अछि तरह से दिखाई पद रहा था और मन में ये भाव चल रहे थे की सनी तेरी मम्मी ने तो अपनी आग उस बैगन से ठंडी कर ली लेकिन अब इस लुंड को कैसे शांत किया जाये और तभी मुझे ये एहसास होता है की इस घर में दो ऐसी औरते है जो मेरे इस लुंड को शांत करने के लिए हर वक्त मौजूद है , और उनके होते हुए भला क्यों लुंड को इस तरह तड़पाया जाये..

और इसी सोच के साथ में अब अपने कमरे में जाने की बजे सीधा रागिनी बुआ के कमरे की तरफ चला जाता हु और दरवाजा पर धीरे से दस्तक देता हु, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था और शायद रागिनी बुआ सो चुकी थी इसलिए अंदर से कोई हलचल नहीं हुई .. एक दो बार और दरवाजे को खत खतने पर मुझे अंदर से दरवाजे की कुण्डी खुलने की आवाज सुनाई पड़ती है, जिसे सुन में मन hi मन मुस्कुरा देता हु की हाँ बुआ जल्दी खोलो तुम्हारा ये पति अपना लुंड लिए बहार इंतज़ार कर रहा है...

बुआ जो इस वक्त एक गाउन पहनी हुई थी उन्होंने जैसे hi दरवाजा खोला , इससे पहले की वो कुछ बोलती या कहती में झट से उन्हें अंदर की तरफ धक्का देते हुए कमरे में घुस गया और दरवाजा बंद कर उनकी तरफ पलट के खड़ा होगा... मुझे इस तरह कमरे में घुसते hi..

बुआ: सनी.. क्या हुआ इतनी जल्दबाजी में क्यों है और इस वक्त तुम यहाँ क्या कर रहे ,, सब ठीक है न...

बुआ की इस बात को सुनते hi में झट से उन्हें अपनी तरफ खींच कर उनका जिस्म अपने हाथो में दबोच अपने होठ उनके होठो पर रख: उम्मम्मम्माः मेरी रसीली बुआ, अब आपको प्यार करने के लिए भी मुझे वक्त देखना पड़ेगा क्या , क्या आप भूल गयी की में आपका पति भी हु...

बुआ, मेरे चुम्बन का पूरी तरह साथ देते हुए और अपना जिस्म मेरी बहो में ढीला चोरते हुए: ममममम नहीं सनी ऐसी कोई बात नहीं और मैं भला ये कैसे भूल सकती हु की तुम्हारे साथ अब मेरा एक और नया रिश्ता बन चूका है जिस रिश्ते के नाते तुम कभी भी कही भी मुझ पर अपना हक़ जाता सकते हो...

में, चूँकि मेरे दिमाग में अब भी मम्मी का उत्तेजना से भरा वो कामुक चेहरा घूम रहा था, बुआ की बात सुनते hi: ममममम बस तो फिर यही समझ लो की मुझे मेरी इस नयी नवेली दुल्हन की जरुरत महसूस हुई तो उसी जरुरत को पूरा करने चला आया....

बुआ, अब मूड में आते हुए: ओह्ह्ह सनी जरुरत सिर्फ तुम्हारी नहीं मेरी अपनी भी है जो सिर्फ और सिर्फ मेरा ये पति hi पूरी कर सकता है, उल्टा में तो खुद सोच रही थी की में एक हफ्ते के लिए बहार जा रही तो ाचा होगा अगर आज की रत मुझे मेरा ये पति उर्फ़ मेरा ये भतीजा रत भर अचे से छोड़ कर सुकून दे...

में, खड़े खड़े hi बुआ के जिस्म से निघ्त्य को टैंगो से उप्पेर कमर तक उठा पंतय निचे सरका अपने खड़े लुंड को लोअर के उप्पेर से उनकी छूट पर रगड़ते हुए: हईये मेरी बुआ अगर ऐसा था तो फिर आजाती न मेरे कमरे मैं , किसने रोका था भला...

बुआ, अपनी छूट पर लुंड की रगड़ खाने के बाद खुद भी हल्का सा उप्पेर को उठती हुई और लुंड को छूट के बिच फसती हुई : अह्ह्ह्हह मममम कोई बात नहीं मेरे राजा अब मैं नहीं आयी तो क्या हुआ तुम तो आ गए न मेरे पास उम्मम्माआअह...

में, बुआ की बात सुन निचे लुंड रगड़ते हुए और उप्पेर उनके होठ चूमते हुए अपने एक हाथ से उनके गाउन के स्ट्राप को झट से कंधे से निचे खींच गर्दन पर बाईट करते हुए: उम्मम्मम्माह रागिनी बुआ हैं अब में आ गया हु और मेरी बुआ की इस रसीली जवानी को पूरा लूट कर hi जाऊंगा उम्मम्मम्माह..

मेरी हरकतों से अब बुआ भी बेकाबू हो रही थी और मेरे लोअर के अंदर हाथ दाल मेरे कड़क लुंड को हाथ में पकड़ सहलाते हुए: अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह सनी उम्म्म्म उफ्फ्फ कितना गरम लोहे जैसा हो रखा है तुम्हारा लुंड तो उफ्फ्फ्फ़ ...

जैसे hi बुआ के गाउन को मेने उनके कंधो से एक झटके से सरकते हुए निचे की और खींचा तो अंदर काळा रंग की ब्रा में कैसे उनके मोठे मोठे दुधारू बूब्स मेरी नजरो के सामने आ जाते है और जिन्हे देख मुझे मम्मी के उनके ब्लाउज में से बहार निकलते गोर बूब्स की यद् आ जाती है और वही सोच एक झटके में बुआ की दोनों चुचिओ को ब्रा के उप्पेर से hi पकड़ के बुरी तरह दबोच लेता हु...

बुआ: अह्ह्ह्हह सुननयीयीय उम्म्म्म िष्ठ्हह आराम से दबा ना उफ्फ्फफ्फ्फ़ निचोड़ hi देगा क्या पुरे इनको अह्ह्ह हईये...

लेकिन यहाँ अब मेरे दिमाग में बुआ न हो कर मम्मी का जिस्म hi घूम रहा था और इस वक्त मेरे सामने बुआ न हो कर उन्हें मम्मी समझे हुए उनके जिस्म के साथ खिलवाड़ करे जा रहा था और इसी बिच जब मुझे लगता है की अब नहीं रुका जा रहा है तो में बुआ को बिस्तर के एक कोने के पास ले जा कर उनकी एक तंग को अपने हाथो से उठा कर बिस्तर पर रख और कमर में हाथ दाल उन्हें अपने और करीब खींच कर एक झटके में लुंड छूट में पेल देता हु अह्ह्ह बाआआ...

बुआ, जो मेरे इस तरह इस पोजीशन में उनकी छूट में लुंड डेल जाने से थोड़ा दर्द में कराहती हुई: आह्ह्ह्ह उम्मम्मम ओह्ह्ह्हह sunnyyyyyyyyyyyy क्या कर रहा है आराम से उफ्फ्फ्फफ्गगग ऐसे कोण छोड़ता है भला उफ्फफ्फ्फ़ और खड़े खड़े क्यों कर रहे हो लिटा दो न मुझसे ऐसे खड़ा नहीं रहा जाता तुम्हारा इतना मुसल लुंड छूट में लिए उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ummmmmmmmmmmm...

दरअसल जब से मेने मम्मी को किचन में इस तरह एक तंग उठाये खड़े खड़े छूट में बैगन डेल हुए देखा तब से वही मेरे दिमाग में चल रहा था और अब भी मेने बुआ को ठीक वैसे hi खड़ा किया हुआ था जैसे मम्मी किचन में कड़ी थी बैगन लेते हुए... और अब में वही सब यद् करके की कैसे मम्मी बैंगन को अपनी छूट में मजे से ले रही थी , यहाँ में भी बुआ की छूट में अपना लुंड अंदर बहार करते हुए उनकी ठुकाई करने लगा था ...

बुआ की छूट में पद रहे हर एक धक्के के साथ जैसे hi मेरा लुंड अंदर घुसता तो मुझे यही एहसास हो रहा था मनो किएरा ये लुंड बुआ की छूट में न जा कर मम्मी की छूट में उस बैंगन की जगह लेते हुए उनकी ठुकाई कर रहा है....

और इसी ख्याल के कारन अब मेने अपनी गति और ज्यादा बड़ा दी थी और बेरहमी से बुआ को धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था और साथ hi मम्मी की चुचिओ को यद् करते हुए बुआ की दोनों चूचिया ब्रा के कप्स से बहार निकल निचोड़ने लगा था...

मेरे द्वारा इस तरह की बेरहमी से चुदाई होने के कारन अब बुआ की सिसकिया पुरे कमरे में गूंजने आग पड़ी थी और कभी वो लहुड के शरीर को पूरा आगे की तरफ झुका रही hi तो कभी पूरा भर बिलकुल मेरे उप्पेर दाल कर झूलने सी लग रही थी...

बुआ: अह्ह्ह्हह उम्म्म्म सनी उफ्फ्फ कैसे चुदाई कर रहे हो तुम आज , ऐसा क्या हो गया है ुंफ्फफ्फ्फ्फ़ पहले तो इतनी बेररहमी से नहीं छोड़ा आज ऐसा क्या हो गया उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह मर गईइइइइइ रईईईई ..

में, बुआ की बात सुन उनके कण को काटते हुए निप्पल हाथ में पकड़ जोर से मरोड़ कर चुकी को हथेली में दबोच दो तीन थप्पड़ जड़ देता हु, जैसे की इस तरह बुआ के चुचिओ को दर्द देने से मुझे मम्मी की चूचिया मसलने ला सुकून मिल रहा हो: अह्ह्ह्हह्हह बुआ उम्म्म क्या करू अब तुम एक हफ्ते के लिए मुझसे दूर जो जा रही हो , आज पूरा हिसाब करना पड़ेगा न ताकि आप भी एक हफ्ते तक मेरे लुंड की यद् में अचे से रह सको उम्मम्मम्माह...

बुआ, खुद को पूरी तरह ढीला चोरते हुए और अपना भर आगे की और करते हुए: अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह सुननीयीय मर गयी में तो उफ्फ्फफ्फ्फ़ िष्ठ्हहह , और ये बात है तो और पेल मुझे उफ्फ्फ ऐसे hi अह्ह्ह्ह... पता नहीं आज तेरी इस बेरहम चुदाई के बाद में एक हफ्ता रह बी पाऊँगी या नहीं ,, हर दिन तू मुझे इतना मजबूर कर देता है की तुझसे छुड़वाने की तड़प काम होने की जगह बढ़ती जाती है ओह्ह्ह्ह सुंनंनीयियय...

और अब मैं बुआ की बाटे अनसुनी करते हुए अपनी आँखे बंद क्र मन में मम्मी का वो नंगा जिस्म और चेहरा यद् करते हुए बुआ के चूतड़ पकड़ उन्हें आगे झुकाते हुए पूरी गति से पेलना शुरू कर देता हु और क्युकी एक तरफ बुआ की छूट में अंदर बहार होता मेरा लुंड और दूसरी तरफ मन और दिमाग में मम्मी का नंगा जिस्म घूम रहा था जिस कारन में अब अपने आप को और ज्यादा देर नहीं रोक पता हु और लुक गहरे धक्को के साथ लुंड का पूरा माल बुआ की छूट में hi भर देता हु और उनको ले कर बिस्तर पर hi गिर पड़ता हु....

बुआ, बिस्तर पर गिर अपनी साँसों पर काबू पाने के बाद: ओह्ह्ह्हह सनी इतने दिनों से छुड़वा रही तुझसे पर आज जो मजा दिया तूने वो सबसे बेस्ट था मेरे पतिदेव उम्मम्माआअह..

में, बुआ की एक चुकी को हौले से हाथ में पकड़ सहलाते हुए, मन में तो ये सोच रहा था की आज के मजे केलिए आपको मुझे नहीं मम्मी को धन्यवाद् देना चाहिए क्युकी उनकी वजह से hi आज आपका जिस्म मुझे उनका लगा और आपको मम्मी समझ इतना बेरहमी से पेला: उम्मम्मम्माह क्या करू बुआ जब से सुना की अगले एक हफ्ते मुझे मेरी इस पत्नी की छूट नसीब नहीं होने वाली मुझसे रहा नहीं गया....

बुआ: ओह्ह्ह्ह सनी सच कहु तो में खुद नहीं चाहती जाना तुमसे दूर पर काम hi इतना जरुरी है, न जाने अब वह एक हफ्ता तुम्हारे बिना टिहरी इस बुआ की छूट और जिस्म की आग का क्या होगा, पता नहीं कितनी बार ऊँगली करनी पड़ेगी दिन में,, तुम्हे यद् करते हुए हहै...

में: नहीं बुआ, आप मुझसे एक वडा करके जाओगी की आप अब आज के बाद जब तक घर वापस नहीं आजाती हो तब तक छूट को छुओगी भी नहीं, ऊँगली करना तो दूर की बात है समझी...

बुआ, चौकते हुए: क्याआ ...नहीं सनी ऐसे कैसे हो सकता है, तुम जानते हो न मेरे जिस्म की दबी आग को तुमने hi हवा दी और अब जब में तुमसे एक दिन भी बिना चूड़े नहीं रह सकती , तो बिना छूट को सहलाये कैसे रहूंगी जब तुम मुझसे दूर रहोगे तो ..प्लस ऐसा वडा न लो मुझसे...

में: मुझे कुछ भी नहीं पता ये सब, अगर मुझे अपना पति मानती हो तो एक पत्नी की तरह hi मेरी बात माननी पड़ेगी और ये मत भूलो की पत्नी की छूट और उसके पुरे जिस्म पर पति से ज्यादा हक़ किसी का नहीं होता, खुद उस औरत का भी नहीं..

बुआ: उम्मम्माह हैं में जानती हु और मानती हु की अब मेरा जिस्म मेरा नहीं बल्कि तुम्हारा है और तुम जो कहोगे वही होगा पर सनी खुद तुम सोचो न एक हफ्ते तक बिना लुंड लिए रहना कितना मुश्किल है उप्पेर से अब तुम ऊँगली भी करने से मन कर रहे हो....

में: हाँ मेरी प्यारी बुआ बीवी... यही तो मजा है न,,, में चाहता हु की तुम इस एक हफ्ते तक मेरे लुंड के लिए अपनी तड़प खूब बढ़ाओ , ताकि जब तुम वापस आओ तो में कुछ ऐसा करू की इस एक हफ्ते की साडी तड़प मेरी बीवी के जिस्म से अचे से निकल सकू.. पर ये तभी होगा जब आप मेरी इस बात को मान कर मुझसे वडा करोगी , क्युकी में आप पर भरोसा hi कर सकता हु देखने तो आ नहीं सकता ः...

बुआ: ुफगफ्फ सच्ची कमीने हो तुम सनी हहै,, ठीक है जब पति ने कहा है तो पत्नी ुड़की बात मानेगी , अब से इस एक हफ्ते क्या, आगे कभी भी में अपनी छूट में मेरी ऊँगली नहीं घुसङ्गी चाहे कितनी भी आग क्यों न लगी हो जिस्म में , कितना भी छोड़ने का मन क्यों न हो, ये वडा है मेरा की अबसे मेरी छूट और गांड दोनों में hi मेरे पति सनी का लुंड , मुँह और उंगलियों के अलावा कुछ बी नहीं घुसेगा जब तक की वो खुद से कुछ और करने को न कहे उम्मम्मम्माः...

में, बुआ को कस के अपनी बहो में भर चूमते हुए: उम्मम्मम्हाआअह उफ्फ्फ बुआ सच तुम दुनिया की बेस्ट बीवी हो ः..

बुआ: हेहेहे वैसे ये तो बताओ की ऐसा क्या करने वाले हो मेरे वापस लौटने पर जो ये एक हफ्ते की तड़प भुला देगा मेरी...

में: ः बस वो एक सरप्राइज है बुआ वक्त आने पर पता चलेगा उम्मम्मम्माह..

बुआ: ाचा जी ठीक है मेरे पतिदेव मत बताओ, वैसे एक सरप्राइज मेने भी तय किया है आपके लिए जो मेरे वापस आने पर आपको भी पता लगेगा हेठे...

में: हाहाहा चलो फिर दोनों की अपने अपने सरप्राइज का इंतज़ार करेंगे.. अब आप आराम करो सुबह जाना भी तो है न ः...

बुआ: हेहेहे हाँ जाना तो है और आराम जरुरी भी है, तुमने इतनी बुरी तरह से ठुकाई जो की है आज अपणी बुआ की उफ्फ्फ अब भी जिस्म टूट रहा है हहै....


में: ः अब तो इस तरह जिस्म चटवाने की आदत दाल लो रागिनी darling..ummmmaaah.. गुड नाईट... और ये बोल में बुआ के कमरे से निकल अपने कमरे में आ गया और दोनों hi अपने अपने बिस्तर में लुढ़क पड़ते है..
 
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