Romance भंवर (पूर्ण) - Page 17 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-61

USA Trip....

सुलेखा के कानो में जब से अपनी बेटी और आरव की बातें गई थी वो गुस्से में नागिन कि तरह फुफकार मार रही थी। अब तो बस वो सही मौके की तलाश में थी। थोड़ी ही देर में पूरी मिश्रा फैमिली खाने पर थी, और उन्हें ज्वाइन करने यूएस सेनेटर और उद्योगपति प्रकाश जिंदल का बेटा ध्रुव भी पहुंचा हुआ था।

जब साची ध्रुव के साथ बैठी तब कबीर के लिए अच्छा मौका था कुंजल से कुछ बातें करने की। वो कुंजल के पास आकर बैठ गया। एक ओर से कबीर और दूसरे ओर से नीरज, और दोनों ने एक साथ उसे "हाई" कहा… लेकिन कबीर "हाई" कहते हुए, पीछे से उसके पीठ पर हाथ रख दिया। जब कुंजल उसकी इस हरकत पर प्रतिक्रिया देती हुई उसकी ओर मुड़ी, तब कबीर अपनी एटिट्यूड वाली मुस्कान उसे दिखाने लगा।

कुंजल:- इंडिया में तो समझ में आता है कि एक लड़की के पीछे लड़के पड़े है। तुम तो यहां अाकर भी ऐसा कर रहे। इतनी खराब रेपो है कि तुम्हे यूएस में भी कोई गर्लफ्रेंड या टाइमपास नहीं मिल रही।

थे तो मिश्रा परिवार के ही, कुछ तो पिताजी वाला गुण तो रहेगा। बेज्जती ऐसी हुई की कबीर बिलबिलाता हुआ कुंजल के कानों के पास धीरे से कहने लगा…. "हमने सोचा तुम जैसे गवार को हम जैसा इंटरनेशनल हंक मिल जाएगा… वरना यहां तो रोज रात को बिस्तर में नई-नई लड़कियों कि कमी नहीं रहती।"

कुंजल उसकी बातों पर मुस्कुराती हुई धीरे से उसे कहने लगी…. "तुम्हे देखकर ही पता चलता है… उन लड़कियों को रात में कोई मिला नहीं होगा तो अपने मज़े के लिए तुझ जैसे लल्लू को पकड़ ली होगी या फिर तुमने बाज़ार से किसी को उठा लिया होगा… ख्याली पुलाव में डूबे रहो डार्लिंग।"

सामने पूरा परिवार बैठा हुआ था, कबीर अपना गुस्सा भरा चेहरा अनचाही हसी में छिपाए, वहां से उठकर दूसरी जगह चला गया… उसके जाते ही नीरज कुंजल से कहने लगा… "ऐसा क्या बोल दिया उसे, जो वो उठकर भाग गया।"

कुंजल:- उसी से पूछ लेना, फिलहाल मै खाना खा लूं, खाकर बात करते है।

नीरज:- ये भी सही है। वैसे एक बात जो मै कहे बिना नहीं रह पाऊंगा…

कुंजल:- ओह कम ऑन.. अब तुम्हे मै इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की तो नहीं लगने लगी।

नीरज:- हाहाहा… सॉरी मै ऐसे फ्लर्टिंग नहीं करता, और खाते वक़्त तो बिल्कुल भी नहीं। बस थैंक्स कहना था। मेरी बहने कोई दोस्त को लेकर नहीं आयी थी और मेरे पागल घरवाले किसी भी सोसायटी में चले जाएं, उनसे गांव नहीं छूट पता। तुम हो तो कम से कम तुम्हारे साथ वो कहीं घूम तो सकती है। वरना मेरी मजबूरी तो ऐसी है कि, मै जानता भी रहूं की वो लोग गलत है फिर भी उनका विरोध नहीं कर पाता।

कुंजल, नीरज के ओर देखती हुई…. "तुम अपनी बहनों को बहुत प्यार करते हो।"

नीरज:- पता नहीं, शायद मुझे अपनी बहनों से वह लगाव नहीं है जैसा वो दोनों अपने भाइयों से रखती हैं। जब मै उनके ऊपर मेरे घरवालों की पहरेदारी देखता हूं, तो मेरा दिमाग खराब हो जाता है। अभी साची की उम्र ही क्या होगी… आज कल तो भारत में 20-21 में किसी लड़की की शादी नहीं होती, लेकिन इन्हे देखो, यदि लड़का पसंद आ गया तो यहां सब प्लैनिंग हो चुकी है।

कुंजल:- अब इसमें मै क्या कर सकती हूं। ये तुम लोगों का आंतरिक मामला है।

इधर दूसरी ओर पूरा मिश्रा परिवार ध्रुव को खिलाने में जुटा हुआ था। बेचारा सोच कर आया था कि आज साची से आज शाम के बारे में पूछेगा, लेकिन पूरा परिवार था कि घेरे बैठा हुआ था उसे। लावणी के लिए यह अच्छा अवसर था और वो चुपके से वहां से निकल गई।

वेटर को 806 में खाना सर्व करने बोलकर, वो मीठी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लिए, चहकती हुई चल दी आरव के पास। सुलेखा की नजर तो पहले से लावणी पर थी, लेकिन जैसे ही वो माहौल से निकलने की कोशिश करने लगी, अनुपमा ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया।

बेल बजी, और आरव जोर से चिल्लाते हुए कहने लगा "दरवाजा खुला है।".. लावणी अंदर आयी, आरव कुर्सी पर अपना सिर टिकाए आखें मूंदे हुआ था। लावणी अाकर उसके गोद में बैठ गई और अपने दोनों पाऊं ऊपर करती उसके कंधे में अपने बाहों का फंदा डाल दी।

आरव उसके कमर में अपनी बाहों को लपेटकर, अपने होंठ उसके गालों पर फिराते हुए कहने लगा… "मुझे लगा आज भी मै भूखा ही रहूंगा।"…… "ऐसे कैसे भूखा रहते, कल तो भैय्या के लिए परेशान थे, इसलिए मैंने छोड़ दिया। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है।"…

आरव अपने चेहरे को पीछे करके उसे देखने लगा…. "तुम कल रात आयी थी यहां।"

लावणी, आरव के कान के नीचे धीमे से काटती हुई कहने लगी… "हां कुछ नॉटी खयालात के साथ आयी थी, लेकिन तुम्हे बेबस देखकर मुझे लगा।"…

आरव:- क्या लगा लावणी..

लावणी:- बस यही की किसी दिन मै भी भैय्या की तरह तुम्हारे दिल में इतनी जगह बना पाऊं की तुम भी उनके जितना मुझे प्यार करो।

आरव उसे जकड़ते हुए कहने लगा…. "उसके लिए बेबस हुआ था तुम्हारे लिए सब को बेबस कर दूंगा। और कभी सोचना भी मत की तुम्हारे बिना मेरी हालात बहुत अच्छी होती है।"

लावणी:- छोड़ो भी ये बातें। वैसे नॉटी से मेरी बात हुई थी। भैय्या को क्या हुआ था आरव।

आरव:- ये तुम अपस्यु को भैया क्यों कह रही हो, बड़ा ही अजीब लग रहा है।

लावणी:- बोलने में मुझे भी अजीब लग रहा है, लेकिन हमारी शादी के बाद वो मेरे जेठ हुए, तो अभी से भैय्या कहने की प्रैक्टिस कर रही हूं।

आरव:- मछली अभी पानी में ही है, और तुम मसाला पीस कर तैयार रहो फ्राई करने के लिए।

लावणी:- पानी में मछली है, तो कभी ना कभी घर भी आ ही जायेगी पकने, सारी तैयारियां पहले से होनी चाहिए।

लावणी की शरारती नजरों को देखते हुए आरव मुस्कुराने लगा। अपने होंठ को उसके होंठ के पास ले जाते हुए, दोनों अपने कब से सूखे अरमान का इजहार करते उसी में डूब गए। लंबा चला ये किस्स दोनों की श्वांस को सीने में कैद किए बस चलती ही जा रही थी।

तभी वहां के रूम कि बेल बजी, दोनों अपने प्यारे से अनुभव को मुस्कुराहट के साथ तोड़ते हुए, लावणी दरवाजा खोलने चली गई। वेटर दरवाजे पर खाना लिए खड़ा था। लावणी खाना लेकर अंदर आयी और वापस आरव के गोद में बैठकर एक निवाला उसे खिलाती और दूसरा निवाला खुद खाती।

दोनों का खाना अभी मध्य में ही था की साची और कुंजल बिना नॉक किए उस कमरे में आ धमकी। सामने का नजारा देखकर कुंजल बोलने लगी… "ओय कुछ शर्म आती है कि नहीं।"..

आरव, अपना बायां हाथ दिखाते…. "कृपया आप दोनों हमे बिना परेशान किए, आप हमे खाते हुए देख सकते है, और यदि देखा नहीं जा रहा है तो कृपया दूसरे कमरे में चले जाएं।"

"बस 2 मिनट रुक जाओ पीछे से सुलेखा मिश्रा भी आ रही है यहीं"… साची अभी आधा ही बोली थी, कि लावणी हड़बड़ा कर नीचे उतर आयी और भागी उस कमरे से…

आरव:- दोनों ने मिलकर भागा दिया ना उसे, अच्छा नहीं किया..

कुंजल:- पागल हम सच कह रहे है। वो वाकई में तुम्हारा रूम नंबर पूछ रही थी।

आरव:- बेड़ा गर्क हो इसका। क्या वाकई में इधर आ रही हैं वो।

कुंजल:- हां भाई सच कह रही हूं, …

आरव:- भागने दो फिर मुझे भी यहां से। तुम दोनों बोल देना मै यहां हूं ही नहीं कहीं घूमने निकल गया हूं।

आरव अपनी बात कहकर वीरभद्र के कमरे में पहुंच गया और दरवाजा लगाकर उससे बातें करने लगा… इधर साची, कुंजल से आंख मारती हुई पूछने लगी… क्या बातें हो रही थी मेरे भैय्या से..

कुंजल:- वहीं फर्स्ट टाइम बॉय एंड गर्ल टॉक…

साची:- हीहिहिही… तो तूने क्या कहा..

कुंजल:- मैंने कहा पनीर पकोड़ा मस्त बना है, जो भी ऐसा पनीर पकोड़ा बनाकर मुझे खिलाएगा, मै उसकी गर्लफ्रेंड।

साची:- ओह हो मतलब अपने लिए सर्टिफाइड बावर्ची ढूंढ़ रही है।

कुंजल:- हीहीहीही… मेरी छोड़ अपनी बताओ। तुम आज अपने रजिस्टर्ड होने वाले के साथ कहां जाने वाली हो घूमने…

साची:- पता ना अब वो जहां ले जाए…

कुंजल:- क्या हुआ किस शंका में डूबी हो…

साची:- नहीं शंका नहीं है, बस कुछ सोच रही हूं…

कुंजल:- क्या ?

साची, मुस्कुराती हुई… वो मै अभी नहीं, जब उस लल्लू के साथ घूमकर वापस आऊंगी तब बताऊंगी….

कुंजल उसे आंख मारती…. "ओह हो दिल पिघल रहा है क्या?"…

साची:- दिल तो अभी पिघलने से रहा, बस मन बना रही हूं… मन को भा गया तो दिल पिघलने में वक़्त ही कितना लगेगा…

कुंजल:- बेस्ट ऑफ लक डार्लिंग। चल तू इतना मेहनत कर रही है तो मै भी तेरे लिए आज दुआ मांगने जाऊंगी…

साची:- अब तू शिकागो में कहां मंदिर ढूंढ़ने जाएगी…

कुंजल:- किसने कहा मै दुआ मांगने मंदिर जाऊंगी। मै तो स्ट्रिप क्लब जाकर तेरे लिए दुआ करूंगी।

साची का खुला मुंह…… हो... तू सच कह रही है क्या…

कुंजल उसे आंख मारती हुई कहने लगी…. "यहां तक आयी हूं तो, कुछ मस्ती तो बनती है ना यार। सिक्स पैक में लड़के एक-एक कपड़े उतरते हुए।"…

साची:- कुंजल…. सुन ना..

कुंजल:- अब तू नकियाना बंद करके कुछ कहेगी भी…

साची:- सुन ना मै भी चलूंगी साथ में.. तू सब प्लान करके रख लेना..

कुंजल:- आज शाम तो तू ध्रुव के साथ जा रही है ना…

साची:- हां तो कौन सा मै उसके साथ पूरी रात रुकने वाली हूं। 6 बजे लेकर जाएगा, मैक्सिमम 9 बजे तक लौट आऊंगी…

कुंजल, फिर से आंख मारती हुई कहने लगी…. "तो फिर तैयार रहना… why should boys have all the fun."…

शाम के 5.30 बज रहे होंगे, साची बाहर जाने के लिए तैयार थी। बिल्कुल गजब का लुक और अजब सी रौनक उसके चेहरे पर थी। ध्रुव ने जब उसे देखा, तब देखते ही यह गया…

दोनों वहां से निकले, ध्रुव रह-रह कर बस बार-बार साची को ही देख रहा था…. "तुम… बहुत … खूबसूरत … लग… रही… हो…। मेरा … दिल.. पहले.. कभी.. ऐसे... नहीं.. धड़का..

साची:- ध्रुव प्लीज, तुम वो भाषा बोलो जिसमे तुम कंफर्टेबल हो। ये बनावटी भाषा में कोई फीलिंग नहीं आती।

ध्रुव:- ओके स्वीटहार्ट, जैसा तुम कहो…. (रूपांतरित भाषा)

साची:- ये हुई ना बात.. वैसे हम कहां जा रहे है।

ध्रुव:- जहां तुम चाहो…

साची:- मेरा एक अच्छा दोस्त है क्रेज़ी बॉय, उससे कल ही बात हुई थी। उसने कहा यदि किसी को परखना हो तो उसके दोस्तों से मिलो.. सो मै तुम्हारे दोस्तों से मिलना पसंद करूंगी, यदि तुम्हे कोई ऐतराज ना हो तो।

ध्रुव गाड़ी की स्पीड बढ़ाते हुए… "क्यों नहीं जरूर"…

दोनों के बीच आज अच्छी बातें चल रही थी। घूमने और बातों में कब वक़्त बीता पता ही नहीं चला। साची लगभग पौने नौ (8.45) के करीब लौट आयी। आज वो थोड़ा खुश नजर आ रही थी। आते ही वो सीधा कुंजल के पास गयी, जहां लावणी पहले से तैयार होकर उसके पास बैठी थी।

लावणी को देखते ही साची आश्चर्य से पूछने लगी… "ये भी साथ चल रही है क्या?"

कुंजल:- तुम्हे कोई ऐतराज हो तो अभी बता दो, मै इसे नहीं ले जाती।

साची:- ना ना .. इसे भी लेकर चल… कब तक ये भुटकी छोटी बनी रहेगी…

कुंजल… ये हुई ना बात... तो चलो फिर हम चलते हैं…

तीनों होटल से निकली। कुंजल ने स्ट्रिप क्लब जाने के लिए लिमो बुक करवाया था, तीनों उसी में सवार होकर निकल लिए… अंदर का इंतजाम देख कर पहले तो दोनों बहन थोड़ा ना नुकुर करने लगी, लेकिन कुंजल के जोड़ के आगे फिर किसका चले…. सैंपैन की बॉटल खुली, 3 ग्लास में उड़ेला गया.. तीनों ने चीयर्स किया और चुस्कियों में तीनों पीने लगी…

लावणी:- इसका टेस्ट तो दारू जैसा नहीं है, ये तो कोई ऐपल जूस लग रहा है।

साची और कुंजल दोनों एक साथ उसकी ओर घूरते…. "भुटकी दारू का टेस्ट तुझे अच्छे से पता है.. माजरा क्या है।".. फिर जो बेचारी लावणी को दोनों ने घेरा.. उसे कुछ बोलने भी नहीं दी।

तीनों पहुंचे स्ट्रिप क्लब और अंदर जैसे ही एंट्री मेरी… तीनों के अंदर अजीब सी हलचल होने लगी…. "ये कहां आ गए हम।" लावणी वहां के वेटर को चड्डी में टाय पहने सर्व करते हुए देखी और चौंककर पूछने लगी।

कुंजल:- इसे कहते है हमारा आज का फन…

तीनों सोफे पर जाकर बैठ गई। हाथों में फिर से तीनों के एक जाम और सामने देखने लगी। तभी वहां पर पूरा अंधेरा हो गया, और स्टेज के फोकस लाइट पर एक नया ताजा लड़का रंग ज़माने पहुंच गया।

उसके स्टेज पर आते ही वहां मौजूद लड़कियों कि हूटिंग शुरू हो गई। जैसे ही पोल डांस शुरू हुआ, तीनों की जोरदार हंसी भी शुरू हो गई.. फिर जैसे जैसे कपड़े उतार रहे थे.. कुंजल वैसे-वैसे हूटिंग कर रही थी। अब वो लड़का केवल चड्डी में था और तीनों की धड़कने तेज। बड़ी ही अदा से वो पीछे मुड़ा और अपनी चड्डी नीचे सरकाने लगा। साची जो अभी जाम का घूंट पी रही थी वो पीते-पीते सरक गई, और तेज-तेज खांसने लगी.. वहीं इन दोनों से भी आगे देखा नहीं गया और दोनों अपना मुंह फेर कर जोर-जोर से हसने लगी।

जितनी मस्ती करनी थी तीनों ने यहीं तक की, फिर वहां से बाहर निकलकर शिकागो के नाइट लाइफ का लुफ्त उठाने लगी। आज तीनों लड़कियां एक साथ एक ही कमरे में सोयी और रात भर हंसी मज़ाक के साथ छेड़-छाड़ चलती रही। लावणी सो चुकी थी और उसके नींद में कोई खलल ना हो इसलिए साची और कुंजल धीमे-धीमे बात करने लगे।
 
Update:-62

जितनी मस्ती करनी थी तीनों ने यहीं तक की, फिर वहां से बाहर निकलकर शिकागो के नाइट लाइफ का लुफ्त उठाने लगी। आज तीनों लड़कियां एक साथ एक ही कमरे में सोयी और रात भर हंसी मज़ाक के साथ छेड़-छाड़ चलती रही। लावणी सो चुकी थी और उसके नींद में कोई खलल ना हो इसलिए साची और कुंजल धीमे-धीमे बात करने लगे।

अचानक से साची थोड़ी गंभीर होती हुई कुंजल से कहने लगी…. "थैंक्स यार, आज बहुत दिन के बाद लग रहा है जी रही हूं।"..

कुंजल:- चलो सुनकर मुझे सुकून मिला। वैसे आज ध्रुव के साथ गई थी, वहां क्या हुआ।

साची:- अच्छा है यार वो भी। मै सोच रही हूं कि कुछ दिन उसके साथ देखते है वक़्त कैसा बीतता हैं।

कुंजल:- मतलब तू हां कहने वाली है…

साची:- येस.. जैसे वो मुझसे बातें करता है, और मेरे लिए उसके फीलिंग है। मुझे लगता है वो एक मौका तो डिजर्व करता है। और हां तुम्हे अब मेरे साथ जबरदस्ती बात करना नहीं पड़ेगा।

कुंजल:- चढ़ गई है क्या तुम्हे… ये क्या बकवास कर रही हो।

साची:- सच ही कह रही हूं कुंजल। एक बार मैंने भी यही गलती कि थी, मेरे एक करीबी के साथ। तब उसके साथ मेरे इतने अच्छे रिलेशन नहीं थे और मै अचानक उसके साथ बैठकर मीठी-मीठी बातें करने लगी। वो समझ गया मुझे उससे कुछ काम निकलवाना है।

कुंजल:- हां तो फिर उसने किया की नहीं तुम्हारा काम।

साची:- उल्लू, ये मैंने उदहारण मारा था बस.. और तू है कि वहीं पहुंच गई।

कुंजल:- अच्छा सॉरी, हां तो आगे बता..

साची:- हुंह ! सब जान कर भी बात घुमा रही है। तुम अचानक क्यों मुझपर इतना मेहरबान हो गई उसका कारण अपस्यु है ना।

कुंजल:- येप । मुझे लगा मेरे भाई के वजह से तुमने हंसना छोड़ दिया, जीना छोड़ दिया। इसलिए एक छोटी सी भरपाई कह लो या तुम्हारी हंसी वापस लौटने की कोशिश।

साची:- ओय अब वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं रहा, इसलिए अब इस सोच के साथ मुझसे मत बात करना… और हां अगर वो मेरा दोस्त बनाना चाहे तो मुझे कोई ऐतराज नहीं।

कुंजल:- ठीक है मै उसको बोल दूंगी..

साची:- ना तू मत कहना, मै खुद उसे मिलकर बोल दूंगी।

बस इतने से गंभीर माहौल के बाद दोनों फिर से अपने बातों में रम गए और बात करते-करते सो गए… सुबह तीनों की देर से नींद खुली। इधर आरव सुबह से उस कमरे के कई चक्कर लगा चुका था, लेकिन लावणी अब तक सोकर नहीं उठी थी।

आरव के लिए ये पूरा दिन लगभग ऐसे ही गया। मिश्रा परिवार में खुशियों का माहौल चल रहा था क्योंकि आज साची ने हां कह दी था और आगे कि सारी बात तय करने शाम को प्रकाश जिंदल खुद आ रहे थे।

5 बजे की बात है जब ये कांड हो रहा था। लावणी बैंक्वेट के ओर जा रही थी तभी उसका हाथ पकड़कर आरव ने किनारे खींच लिया और उसके कमर में हाथ डालकर उसकी नज़रों से नजरें मिलाकर देख रहा था, तभी उसे सुलेखा और राजीव ने पकड़ लिया।

दोनों को वहां देख लावणी घबराहट से बिल्कुल सहम गई। आरव उसका हाथ थामा, मानो कह रहा हो की डरो मत कोई गलती नहीं की है। लावणी की आखों में देखकर वो उसे जाने के लिए बोल दिया। इधर राजीव पूरे आवेश में था, किन्तु सुलेखा भी उसे रोकते हुए कहने लगी "अभी नहीं, लोग आने वाले हैं"….

आरव उनकी ओर कुछ बोलने के लिए बढ़ा लेकिन कुछ बोलने से पहले ही राजीव मिश्रा बोलने लगे… "तुझे मै बाद में देखता हूं… एक बार इन लोगों को चले जाने दे"।

आरव समझ गया अब तो पक्का एक्शन होने वाला हैं। वो अपने कमरे में आया, वीरभद्र और कुंजल बैठ कर बातें कर रहे थे और आरव दोनों के बीच बैठकर कहने लगा… "तैयार हो जाओ, अब यहां एक्शन होने वाला है।"

वीरभद्र:- अरे इसके लिए तो कितने दिनों से इंतजार कर रहा था। कब और कहां होना है एक्शन।

आरव अपने दोनो हाथ जोड़ते:- बस वीरे बस… हर वक़्त मारपीट के लिए तैयार रहता है। समझ भी लिया कर बात को कभी।

कुंजल:- ठीक से समझाओगे तब ना समझे, क्यों वीरे जी..

आरव:- वेरी फनी… हमे सुलेखा और राजीव मिश्रा ने पकड़ लिया…

कुंजल बिस्तर पर खड़े होकर नाचने लगी… उस नाचते देख वीरभद्र पूछने लगा… "कुंजल जी, आप ये नाच क्यों रही है।"….. "आओ वीरे जी, अब तो हमारे घर में शहनाई बजने वाली है, अपने आरव की शादी तय होने वाली है।"… फिर क्या था वीरभद्र भी कुंजल के साथ एक दो ठुमके लगाते हुए कहने लगा…. "कुंजल जी शादी के लिए अभी ये बच्चा नहीं लग रहा।"

लगातार आरव के साथ दोनों छेड़-छाड़ कर रहे थे, इतने में नीरज वहां पहुंचा और दोनों भाई-बहन को अपने साथ चलने के लिए कहा। दोनों जब वहां पहुंचे पूरा मिश्रा परिवार आरव को ऐसे घूर रहा था मानो अभी खा जाएंगे। वहीं लावणी साची के पास बैठी रो रही थी।

आरव के लिए ये पहला अवसर था, जब वो लावणी को रोते हुए देख रहा था। आरव, लावणी के करीब तो जाना चाहता था लेकिन कुंजल उसका हाथ थामे उसे रोक रही थी…

तभी आरव के ओर कबीर तेजी से बढ़ा और उसके पेट ओर एक लात मारते हुए कुंजल को देखा और कहने लगा… "साला 2 कौड़ी के इंसान, सड़कछाप, हमारे घर की लड़की पर बुरी नजर डालता है।"….

कबीर का ऐसा करना था और इधर लावणी "नहीं" करती दौड़ गई अपने चचेरे भाई को रोकने। इसपर नीरज अपनी बहन को खींचकर वहां से हटाते हुए उसे थप्पड मारा और लाकर साची के पास बिठा दिया। आरव ये मंजर देखकर गुस्से में फुफकारने लगा.. उसकी नजरें कुंजल से मिली जो बिल्कुल सुलेखा के पास खड़ी थी। कुंजल हाथ जोड़ती उसे कुछ ना करने का इशारा करने लगी…

कबीर जैसे कुंजल का खुन्नस आरव से निकाल रहा हो। कहां मार रहा था, कैसे मार रहा था वो देख तक नहीं रहा था। आरव लगातार मार खाए जा रहा था लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं दे रहा था।

उसे इस तरह मार खाते देख कुंजल के भी आंसू निकलने लगे। साची से भी बर्दास्त कर पाना मुश्किल था। अंत में जब सब बर्दास्त के बाहर हो गया तब साची बोलने लगी…. "बस भी करो आप सब, क्यों पागलों कि तरह उसे मारे जा रहे हो। वो अगर उठकर मारने लगे ना, फिर कोई बर्दास्त भी नहीं कर पाएगा।"..

"चुप एकदम, ज्यादा जुबान मत चलाओ।" कबीर चिल्लाते हुए बोला और गुस्से में वहां परे एक फ्लॉवर पोट उठकर उसे मारने के लिए बढ़ा… आरव अपना कपड़ा झारते हुए उठा और कबीर का हाथ पकड़कर, उसे मरोड़ते हुए कहने लगा…. "अबे घोंचू, मै मार खा रहा इसका मतलब मुझे जान से ही मार देगा क्या? साला गधा, इतना भी नहीं देख पा रहा, इतनी खूबसूरत लड़कियां रो रही है और तू रुकने के बदले और हथियार उठा रहा।".. इतना कहकर आरव उसके गाल पर थप्पड लगाते अपने उंगलियों के छाप उसके गाल पर छोड़ दिया।

मनीष मिश्रा, अपने बेटे को मार खाते देख जोड़ से चिल्लाया…. "मार नीरज इसे, तेरे भाई को मार रहा है।"

"अच्छा तू आएगा मुझे मारने, साले तुझे समझ में नहीं आता कि उस लल्लू से मै अब तक मालिश करवा रहा था… ओ ससुर जी.. हां हां आप से ही बोल रहा हूं राजीव मिश्रा… जब बात खुल गई है तो मै सीधा कहता हूं … तुम्हारी बेटी से मुझे बेइंतहा प्यार है, और उससे शादी भी करूंगा… आगे फैसला तुम्हारा है। हंस के विदा करोगे अपनी बेटी को या गुस्से में"…. इतने में नीरज सामने से चिल्लाता हुआ आया। आरव ने कबीर को छोड़ा, वो अपना हाथ पकड़ कर बैठ गया। नीरज का भी वहीं स्वागत किया आरव ने, उसका भी हाथ मरोड़ा और 2 थप्पड देकर छोड़ दिया और अाकर बैठ गया राजीव और मनीष के बीच….

"देखो सर ना तो मै 2 कौड़ी का इंसान हूं और नाही मै लावणी के साथ कोई टाइम पास कर रहा। अब आप फैमिली ड्रामा करोगे, क्योंकि सिर्फ इस बात के लिए की पहले आप को पता चला कि मै आप की बेटी से प्यार कर रहा हूं। किंतु इसके ठीक विपरीत यदि मेरी मां आती बात करने और आप को हमारे बारे में पता चलता तो मुझे यकीन है कि आप जरूर हां कह देते।"…

मनीष:- लेकिन तुम्हारी मां तो नहीं बात कर रही है ना, यहां बुलाओ फिर उन्हें…

आरव, इससे पहले कि अपना फोन निकालता कुंजल तबतक नंदनी को फोन लगा भी चुकी थी। जब कुंजल ने आरव की शादी तय करनी है ऐसी बात कही नंदनी हल्की-बक्कि रह गई। उसके हिसाब से अभी तो उसका बच्चा 22 साल का ही है और 22 साल में शादी। नंदनी कुंजल को तुरंत फोन रखने बोली और अपना बैग पैक करना शुरू की।

नंदनी के पास केवल एक समस्या थी, वो थी यूएस की टिकिट आज के आज किसी तरह लेना, जो की मिलना थोड़ा मुश्किल हो रहा था और वो अपस्यु को ये सब बताना नहीं चाहती थी। इसी क्रम में उसने पूरा मामला सिन्हा जी को बता दी। अब उसके भी बेटे की शादी तय हो रही थी, भला सिन्हा जी कैसे शरीक ना होते.. उन्होंने भी 3 टिकिट बुक करवाई और उसी दिन उड़ चले यूएस।

23 जून को दोनों पहुंच चुके थे। कमरे में, कुंजल आरव के पास बैठकर बातें कर रही थी, और उसके चोट पर गरम पोटली डालकर सिकाई भी कर रही थी। वीरभद्र वहीं थोड़ी दूरी पर बैठकर टीवी देख रहा था, विन्नी और क्रिश एक दूसरे को अपने हाथ से अंगूर खिला रहे थे। नंदनी ने बेल बजाई और वीरभद्र दरवाजा खोलते हुए नंदनी से पूछने लगा…. "मां जी आप कौन है.. और क्या काम है।"..

नंदनी वीरभद्र को किनारे करती सीधा अंदर घुसी और वहां का माहौल देखी.... "तुम लोग क्या क्लब में हो। अनजान लड़का दरवाजा खोल रहा है। वहां वो दोनों लैला मजनू की तरह अंगूर खिला रहे और ये लड़का पता नहीं पीकर कौन से नाले में गिरा होगा, हर जगह चोट के निशान है। यहां चल क्या रहा है कोई बताएगा।

अब तक जो सब आपस में लगे हुए थे, नंदनी की धमाकेदार एंट्री के बाद सब के सब बिल्कुल ध्यान लगाए नंदनी को ही देख रहे थे। इतने में कुंजल अपने भाई की तरफदारी करती अपने मां के पास पहुंची… और एक थप्पड खाकर वापस अपनी जगह पर पहुंच गई।

आखें गुर्राती हुई नंदनी ने आरव को अपने पास बुलाया। आरव अपने दोनों गाल पर हाथ रखते हुए पहुंचा… "हाथ हटा गाल से और नीचे झुक"… आरव ने ठीक वैसे ही किया जैसे नंदनी ने कहा… 2 थप्पड नंदनी उसे रशीद करती… "पहले ये बताओ कि ये जो दोनों लड़के-लड़की एक दूसरे को अंगूर खिला रहे है, वो कौन है।"

"बहन ही समझो उस लड़की को, विनीता नाम है उसका।"…. "क्या कहा फिर से बोल जरा।"… "वो बहन जैसी है।"… नंदनी चार जोरदार थप्पड गाल पर मारती हुई… "बहन मानता है और कोई लड़का उसे तुम्हारे सामने अंगूर खिला रहा है और तू देख रहा है। मतलब इसके घरवालों ने इसे तुम्हारी जिम्मेदारी पर भेजा था और अच्छी जिम्मेदारी यहां निभाई जा रही है।"…. "सॉरी मां..."… "जोर से बोलो, क्या बोल रहे हो।"

"एक साथ 30-40 थप्पड मार ही लो ना, ये क्या अब हर प्वाइंट पर गिन-गिन कर थप्पड मार रही।".. आरव थोड़ा चिढ़कर बोलने लगा…

"नंदनी जी अब जाने भी दीजिए बच्चे ही तो है, और देखिए आरव ने यदि उसे बहन माना है और उन दोनों के रिश्ते में इसे कोई बुराई नहीं लग रही, मतलब लड़का तो अच्छा ही होगा ना।"…

नंदनी:- अनिरुद्ध जी .. आप अपने ये ओपन खयालात ना ही दे तो अच्छा होगा। प्यार जताने और बेशर्मी दिखाने में फर्क होता है। अब इस से ज्यादा मै नहीं बोल सकती बच्चे है यहां पर। और तू मुंह छिपाए क्यों खड़ा है…

कुंजल:- बस भी करो ना मां अब गुस्सा थूक भी दो।

नंदनी:- नालायक कहीं का, और क्या गुल खिलाया जो ये मिश्रा परिवार से मुझे रिश्ता जोड़ने आना पड़ा है। अभी 22 का है और शादी करने चला है। मुंह तो देखो इसका जरा.. बच्चा ही लगता है अभी तो। 3-4 साल तक रुका नहीं गया तुमसे…

आरव अपनी मां के गले लगकर उसके गालों को चूमते हुए कहने लगा…. "इतना गुस्सा करोगी तो ब्लड प्रेशर हाई हो जाएगा। आप अभी आराम करो। बहुत दूर से आयी है, थक गई होंगी।"

थोड़ा मस्का, थोड़ा मनाना और नंदनी अपना गुस्सा समेट कर चली गई सफर का थकान मिटाने। नंदनी के जाते ही वैभव दौड़ कर आरव के गोद में कूदकर चढ़ गया और उसके गालों पर अपना हाथ फेरने लगा। बाकी के लोग नंदनी के जाते ही, अलग-अलग रूम में दुबक लिए।
 
Update:-63

थोड़ा मस्का, थोड़ा मनाना और नंदनी अपना गुस्सा समेट कर चली गई सफर का थकान मिटाने। नंदनी के जाते ही वैभव दौड़ कर आरव के गोद में कूदकर चढ़ गया और उसके गालों पर अपना हाथ फेरने लगा। बाकी के लोग नंदनी के जाते ही, अलग-अलग रूम में दुबक लिए।

शाम का वक्त था नंदनी, कुंजल और आरव को बिठा कर सब पूछ रही थी। पूरी बात वो बड़े ध्यान से सुन रही थी इसी बीच जब उसे पता चला कि आरव को कल सबके सामने पीटा गया और अपशब्द काहे गए, तब तो नंदनी का पारा अंदर ही अंदर चढ़ता रहा। वो अभी अपने घर पर हुई पिछली बेज्जती भुली नहीं थी और अब ये।

नंदनी ने वीरभद्र को मिश्रा फैमिली के पास भेजकर मुलाकात का वक़्त पूछकर आने के लिए बोली… वीरभद्र वापस लौटकर कल शाम का वक्त बोला। उसी शाम नंदनी अपने पूरे परिवार के साथ निकली शॉपिंग करने।…

24 की शाम पूरा मिश्रा परिवार एक ओर बैठ था और दूसरी ओर रघुवंशी परिवार अपने सभी प्रियजनों के साथ। नंदनी ने इशारा किया और वीरभद्र ने लोगों को बुलाना शुरू किया। 12 करोड़ की शॉपिंग नंदनी ने अपनी होने वाली बहू के लिए किया था वहीं सिन्हा जी ने उसमे चार चांद लगाते 20 करोड़ और जोड़ दिए। ऐसा लग रहा था उनके सामने के टेबल पर कोई ज्वेलरी शॉप खुल गई हो… 32 करोड़ सिर्फ गहने और कपड़ों का खर्च था।

सब शांत होकर बस आ रहे सामान को देख रहे थे। तभी उस शांत माहोल में नंदनी की आवाज़ गूंजी…. "वो कौन था जिसने कल मेरे बेटे को 2 कौड़ी का कहा था वो खड़ा हो जाए।"..

अनुपमा:- छोड़िए ना बहन जी कल माहौल ही ऐसा था…

नंदनी:- आप अपनी जगह बैठ जाएं अनुपमा जी। ये कोई अनाथ नहीं जो आप का परिवार बार-बार मेरे बेटे की इज्जत भरी महफ़िल में उछलता रहे। किस तरह के संस्कार है आप के परिवार के..

मनीष मिश्रा:- हम कुछ बोल नहीं रहे इसका ये मतलब नहीं कि..

नंदनी:- कुछ बोल नहीं रहे है से क्या मतलब है आप का.. मेरा बेटा को "दो कौड़ी का" और "सड़कछाप" जब बोला जा रहा था, तब बोला नहीं गया। किसी की औकात जज करने वालों को वैसे भी नहीं बोलना चाहिए क्योंकि हर किसी की औकात एक ही जैसी होती है फिर चाहे वो यहां का वेटर ही क्यों ना हो.. अपनी मेहनत का खाता है।

खैर मुझे इस बहस में नहीं पड़ना। मुझे आप की बेटी पसंद है, आप की बड़ी बेटी के साथ छोटी बेटी का भी इंगेमेंट फाइनल हो गया।.. बात ख़त्म।

राजीव:- बिना मेरी मर्जी के आप मेरी बेटी का रिश्ता एकतरफा कैसे तय कर सकती है।

नंदनी:- आप की रजामंदी जरूरी नहीं, दोनों बच्चे राजी है बस इतना ही काफी है। और हां लावणी आज से मेरी बहू है… कुंजल सगुण की थाली दे बहू को… याद रहे आज से उसकी गार्जियन मै हूं। वो कोई भी गलती करेगी आप हमसे शिकायत करेंगे… किसी को कुछ कहना है।

मनीष जो शांत बैठा हुआ था, वो गुस्से में आते हुए कहने लगा…. "कहीं की डॉन हो क्या, जो बोलोगी वो होगा… आप ने हमे समझ क्या रखा है। यदि हम इनकार कर दे तो?

नंदनी:- तरीके से करते इनकार, फिर मेरा बेटा बीच में आता तो उसका सर काट कर थाली में पेश कर देती। इस उम्र में किसी से प्यार करना गलत नहीं होता, हां प्यार में धोका देना गलत होता है, जो मेरे बच्चे ने नहीं किया। आपने क्या किया.. पसंद नहीं था तो उस माना कर देते "मत मिलो"। मुझ से कहते अपने बेटे को दूर रखो मेरी बेटी से। लेकिन आप लोगों ने क्या किया… भारी महफ़िल में बुलाकर उससे अपशब्द काहे, उसे बेइज्जत किया।

अब ये शादी मेरे लिए इज्जत की बात है। और बात जब इज्जत की आए तो हम से बड़ा डॉन फिर कोई नहीं। विश्वास ना हो तो राजपुताना इतिहास उलट कर देख लेना। हमे आजमाने की कोशिश ना ही करे तो बेहतर होगा, क्योंकि जिस दिन हम आजमाना शुरू करेंगे, फिर किसी की प्रोफाइल कैसी भी हो, घुटनों पर ले ही आते है।

सुलेखा:- मुझे ये रिश्ता मंजूर है।..

सभी लोग सुलेखा को घूरने लगे.. तभी सुलेखा अपनी बात पर आगे कहने लगी… "अच्छा परिवार है। मजबूत गार्जियन, हमारी बेटी को ये पसंद भी करती है, लड़का-लड़की भी एक दूसरे को पसंद करते है। आपस में बात बढ़ाने से कोई फायदा नहीं।"

सुलेखा की बात पर राजीव और मनीष आपस में कुछ चर्चा करने के बाद कहने लगे…. "अब हंस भी दीजिए बहन जी, रिश्ता जुड़ने जा रहा है तो ऐसे टेंशन का माहौल बनाना अच्छा है क्या?..

नंदनी:- सुनिए समधी जी, मै बात दिल से नहीं लगाती किंतु भरी सभा की बेज्जती तो घर में काम करने वाले कर्मचारी भी नहीं सहते। इसलिए मेरी सलाह है कि आप लोग जितनी जल्दी अपनी ये आदत बदलेंगे हमरा रिश्ता उतना ही मजबूत होगा। जिस दिन साची की इंगेजमेंट होगी उसी दिन लावणी की भी होगी। अब हम चलते है।

वहां मौजूद सभी लोग जैसे किसी शेरनी कि दहाड़ सुन रहे हो। सभी जंगली जानवर उसके सामने बस घिघ्या ही रहे थे। नंदनी ने जिस अंदाज़ में बात शुरू की बिल्कुल उसी अंदाज़ में खत्म करके अपने कमरे में वापस लौट आयी और अपने लोगों के बीच बैठकर छुट्टियों का आनंद उठाने लगी।

24 तारीख की सुबह जब अपस्यु दिल्ली अपने घर पहुंचा और सबको कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रहा था, उस वक़्त पूरा परिवार वहां नंदनी की दहाड़ सुन रहा था और जब वो लोग वापस लौटे तब नंदनी ने सबको अपस्यु को कुछ भी बताने से मना कर दी, क्योंकि वो उसे सरप्राइज देना चाहती थी।

अपस्यु वहां के माहौल को देखते हुए तुरंत ऐमी को फोन लगाते हुए कहने लगा… "डिलीट फाइल का बैकअप लेकर फाइल को प्रिंट करो, हम यह काम ख़त्म करके आज यूसए निकल रहे है।"

कुछ ही देर में अपस्यु फाइल लेकर मंत्री जी के आवास पर था। मंत्री जी उसके हाथों से फाइल लेकर शाबाशी देते हुए कहने लगे…. "मुझे यकीन था कि तुम इस काम को कर लोगे।"…

अपस्यु:- क्या सर, बता देते मेरा टेस्ट चल रहा है, मै कुछ और अच्छे से प्लान कर लेता। फालतू में गोली खिला दिए, डमी बुलेट कहते इस्तमाल करने। कहीं मुझे ठोकने का इरादा तो नहीं था।

मंत्री जी:- काफी तेज और चालाक हो। तुम्हे कब पता चला यह एक टेस्ट है।

अपस्यु:- जब मुझे एक ऐसे गन से शूट किया गया, जिस गन को केवल स्पेशल ऑपरेशन में हाई प्रोफाइल सरकारी प्रोफेशनल इस्तमाल करते हैं। किसी प्राइवेट कंपनी के मालिक या किसी ऑर्गनाइजेशन के बस का नहीं वो गन रखना।

मंत्री जी:- हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती, बस यही परख रहा था। तुम खड़े उतरे। आगे से काम मिलता रहेगा। तुम पैसा कैश लोगे या सीधा अकाउंट में।

अपस्यु:- इसके पैसे नहीं ले सकता मै सर। जब कोई काम ही नहीं किया तो उसके पैसे क्या लेना। बस छोटी सी मदद कर दीजिए वही बहुत है।

मंत्री जी:- याद रहे मै भी कोई अनैतिक मदद नहीं करूंगा।

अपस्यु:- आप बहुत आदरणीय है सर मेरे लिए। ना मै अनैतिक करता हूं और ना ही कोई अनैतिक मांग रखूंगा। बस आज यूएस जाने की 3 टिकट अरेंज करवा दीजिए।

मंत्री जी, अपने पीए को अंदर बुलाते हुए…. शुक्ला जी अपस्यु से डिटेल ले लीजिए और 3 यूएस जाने की आज की टिकिट अरेंज कीजिए। और सुनिए आज से ये लड़का कभी भी यहां आ सकता है बिना किसी अपॉइंटमेंट के। सबको बोल दीजिएगा।

अपस्यु, हैरानी से देखते हुए….. "सर आप ये इतना विश्वास, मतलब मै समझ नहीं पा रहा"…

मंत्री जी:- ना ही समझो तो बेहतर है। तुम मेरी वो फैंटेसी हो जिसके सपने मै अपने बचपन से जवानी तक देखता रहा।

अपस्यु वहां से निकला आया। वो जबतक लौटा तब तक तीनों की टिकिट भी पहुंच चुकी थी। दिन के 2 बजे के फ्लाइट से तीनों निकल गए। यूएस के टाइम के हिसाब से तीनों 25 के लगभग रात के 8 बजे शिकागो पहुंचे।

विदेश की हवा में तो जैसे अपस्यु और ऐमी की बिल्कुल रंगत ही बदली सी लग रही थी। एयरपोर्ट के वाशरूम से जब दोनों बाहर आए तो ऐसा लग रहा था हॉलीवुड के मोस्ट हैंडसम एंड मोस्ट ब्यूटीफुल और सेक्सी कलाकार चले आ रहे हो। उनके कपड़े, चेहरे की रंगत और उस चेहरे के ऊपर स्टाइलिश ग्लास और एटिट्यूड के साथ जब दोनों चल रहे थे, अमेरिकन को भी पलट कर देखने पर मजबुर कर रहे थे।

स्वस्तिका तो दोनों को देखकर हंसती हुई कहने लगे…. "द डेविल कपल इज़ बैंक"… ऐमी उसकी बात पर अपना चस्मा आखों के नीचे की और स्वस्तिका को आंख मारती हंसने लगी। तीनों होटल के ओर चल दिए। होटल के दरवाजे पर जैसे ही दोनों की दस्तक हुई, उनके एटिट्यूड को देखकर होटल मैनेजमैंट खुद उनके स्वागत के लिए दरवाजे तक गए…

अपस्यु और ऐमी दोनों मुख्य द्वार से अंदर आ रहे थे और उसी वक़्त होटल कि लॉबी से ध्रुव और साची बाहर जा रहे थे। दोनों को देखकर ध्रुव बिना कहे रह नहीं सका…. "वाउ, दोनों साथ में कमाल के लग रहे। कोई एक्टर और एक्ट्रेस हैं क्या?"

साची:- वो दोनों मेरे दोस्त है, इनफैक्ट वो लड़का मेरा क्रश था।

ध्रुव हंसते हुए… कोई आश्चर्य की बात नहीं, केवल वो लड़का ही नहीं बल्कि वो लड़की भी.. किसी के भी क्रश हो सकते हैं।

"रूको मिलवाती हूं।"… कहती हुई साची ने अपस्यु को आवाज़ लगाई… "ओय हीरो, देखकर भी अनदेखा करने वाले… इधर"… अपस्यु और ऐमी साची के ओर मुड़े, साची इशारे से उसे अपने पास बुलाने लगी। अपस्यु अपना चस्मा अपने सीने पर लगाते, अपने चिर परिचित मुस्कान के साथ साची के ओर बढ़ गया।

"हे ध्रुव इससे मिलो, मेरा क्रश जो ब्वॉयफ्रैंड बनते बनते रह गया अपस्यु।"… "अपस्यु ये हैं मेरे होने वाले मंगेतर ध्रुव जिंदल"…

दोनों अपना अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए एक दूसरे से हाथ मिला रहे थे। ऐसा लग रहा था वहां के हवाओं में इंटेंस म्यूज़िक बजना शुरू हो गया हो। अपस्यु ध्रुव से हाथ मिलाते ही कहने लगा… "तुम लकी हो जो तुम्हे साची मिली। नाइस चॉयस।"

ध्रुव:- दोस्त तुम्हारी चॉयस तो मुझ से भी ज्यादा खतरनाक है।

ऐमी:- हेय हैंडसम तुम मुझ पर ट्राय कर सकते हो। मै सिंगल हूं।

ध्रुव:- क्या सच में…

साची:- हां सच में, ये दोनों बस क्लोज वन है।

ध्रुव:- हाहाहाहा.. तुम दोनों को देखकर कोई भी कंफ्यूज कर जाए। और किसी को यदि पता चले कि तुम दोनों सिंगल हो तो यहां लड़के-लड़कियों की भीड़ लग जाए। अब मै सिंगल नहीं वरना कई लड़कों में मै भी होता। वैसे हमलोग घूमने जा रहे, तुम हमें क्यों नहीं ज्वाइन करते।

स्वस्तिका, थोड़े दूर से ही… "मै जा रही हूं कमरे में, तुम दोनों आओ"…

ध्रुव जब स्वस्तिका को देखा तो कुछ देर गौर से देखने के बाद उसे हाथ हिलाता कहने लगा… "हेल्लो मिस राउडी गर्ल, .. हे ये वही है ना डिस्को में जिसने उन लोगों की पिटाई कि थी।"

साची:- ध्रुव गौर नहीं किया तुमने, उसके साथ जो दूसरी लड़की थी वो यही तुम्हारे सामने खड़ी है।

ध्रुव ने जब दोनों राउडी गर्ल को एक साथ देखा फिर तो वो दोनों से बिना ऑटोग्राफ लिए वहां से हिला नहीं। ध्रुव, अपस्यु और ऐमी को अपने साथ चलने का आग्रह किया, लेकिन अपस्यु "फिर किसी दिन" कहता दोनों के पास से हटा।

ऐमी:- अपस्यु ये तुम्हारी एक्स को क्या हो गया, इतना परिवर्तित रूप।

अपस्यु:- इसपर बाद में बात करें, अभी मै पहले काम खत्म करना चाहता हूं। स्वस्तिका ढूंढो उसे और मौका अच्छा हो तो दबोच लेना।

स्वस्तिका लग गई काम पर। तकरीबन आधे घंटे का वक़्त लगा लेकिन वो मिल ही गई। स्वस्तिका दूर से ही मौका देखने लगी तकरीबन 15 मिनट बाद उसे मौका मिल गया। वो अपस्यु और ऐमी को तुरंत कमरा नंबर 703 के पास बुला ली।

स्वस्तिका पहले से दरवाजे पर खड़ी थी… अपस्यु और ऐमी के आते ही उसने दरवाजे पर "डू नोट डिस्ट्रब" का साइन लगाई और चोरों कि तरह लॉक खोलकर तीनों अंदर दाखिल हुए… कमरे में सुलेखा अकेली थी और तीनों को देखते एक साथ अंदर देख वो पूरी हैरान हो गई।

अपस्यु वहीं कुर्सी पर बैठते हुए कहने लगा…. "आप की बेवकूफियां हमे डुबो देगी… समझी आप।"
 
nah maine ye idea tab nikala jab moti tumhari fate se kutai kiya karti thi .. wo bhi belan se :D... wahin se ye idea aaya ... ppura creadit main shree shree RG ko deta hun :delare:
 
hahaha... bhaiyon me to ye aam baat hai .. wo bhi jab judwa ho to apna hi swag hota hai ... :D..ummid hai story pura enjoy kar rahe honge ...

:thanks: for you beautiful support
 
;) kahani ab high level ki hai to jara high profile bhi dhamaka kar hi liya jaye :D .. isbar no MP MLA .. sidha central MInistry ki hi baaten kyon na ho :D

:thanks: for you beautiful support
 
:yikes: .. ab sachi ke pass dar bhagao pravchan tha to aarav ke pass dar bhago dawa :D ... ummid hai 240 ml ka dose ne pura kaam kiya hoga :D ..

:thanks: for you beautiful support
 
:D .... ye sabhi purshon ko ek hidayat thi ... ladies ke pass ghar me bahut se hathiyar hote hain .. abhi to tawa ka upyog likha hi nahi :D .. isliye sawdhani hi ekmatr upay hai :D
 
fabulous comment maim .... Sachi and kunjal relation is a off bit realtion .. kahani me har chhoti baat ka clarification hoga .. lekin uske liye aap ko aane wale update ki pratiksha karni hogai :D....

rahi baat mishra's boys and kunjal's affair possibilities .. to wo bhi waqt ke hath me hai .. dekhte hain kaun use impress kar pata hai :D.... Disco drama is a masala . yah ek aisa scene samjhiye jaise ki daily routein me hone wali ghatnayen aur unse nipatna .. ab aisa to nahi ki back story agar kayi planning ke sath chal rahi hai to in kirdaron ke present me koi khushi ya fir koi anchaha moment nahi hoga ... bus ye disco ka scene wahi darshata hai... .. Nadni in USA .. not in UAE...

ji jaroor next dekhiye aur mujhe bhi bata dijiyega :declare: ... :thanks: for you beautiful support
 
scene ke piche scene chalne wale hain aur ek ghatna dusri ghatna me koi sambandh na hote huye bhi .. wo link ho jani hai .. kyonki yahan 2 situation sath sath chal rahe hai .. ek present life aur present life me hone wale incidence .. dusra inka past .. aur past ke liye uthaya gaya kadam ... hope aap ko dhire dhire .. past aur present me strong connection dikh jaye ...

:thanks: for you beautiful support
 
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