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- Dec 5, 2013
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Update:-141
नीलू:- तुम दोनो भागो यहां से और जब हमारे कार मॉडिफाइड हो जाएंगे तब मुझे बुला लेना। यहां के सब लोगो को लेकर हम धमा चौकड़ी मचाने दिल्ली आएंगे.. और अभी के लिए एक पार्टी नाईट… काया सब को बुला लो यहीं उन्हें भी खुशखबरी दे दूं जरा….
अपस्यु:- प्लीज़ मुझे यहां मत रोको, मुझे एमी के साथ होना है..
नीलू, उसे आखें दिखाती…. "आज हम लोगों के बीच रुको, कल तुम और काया यहीं से साथ में चले जाना।"..
अपस्यु:- मरवा दिया तुमने, चलो कोई ना आज यहां की खुशियों में शरीक हो जाते हैं।
पार्टी नाईट यहां शुरू हो चुकी थी और अपस्यु सबकी खुशियों में शरीक होकर झूम रहा था। वहां की खुशियां तब दुगनी हो गई जब उन सब ने नीलू का अनाउंमेंट सुना, जिसे सुनकर सब ऐसा मेहसूस कर रहे थे, मानो एक अच्छी जिंदगी अब यहां शुरू होने वाली है।
पार्टी का माहौल केवल विषेन गांव में ही नहीं बल्कि मुंबई से थोड़ी दूर स्थित लुनावला के एक रिजॉर्ट में भी था, जहां राधाकृष्ण बंधु, यानी कि कलकी, परमहंस और युक्तेश्वर राधाकृष्ण अपने कई करीबी लोगों के साथ पार्टी मना रहे थे।
जाम टोस्ट हुआ और कालकी चिल्लाती हुई कहने लगी…. "प्रभु उन्हें सजा दे ही देते हैं, जो हमारा रास्ता काटने की कोशिश करते हैं।"..
युक्तेश्वर:- लोकेश जैसे कीड़े को साफ करने और दिल्ली का सारा मामला सुलझाने के लिए, मै श्रेया को बधाई देता हूं। ये श्रेया और उसकी टीम का कमाल ही था, जो दिल्ली में हमारा पुरा मामला सैटल कर आयी।
श्रेया:- नहीं मै इसके पीछे नहीं थी। हां जगदीश राय की कहानी का सेहरा मेरे सर दे सकते हो, लेकिन लोकेश के पीछे तो स्वयं काल लगा हुआ था, मायलो ग्रुप के मालिक का लड़का अपस्यु। लोकेश को तो प्रभु भी नहीं बचा सकते थे। यहां इस महफिल में कहना ग़लत नहीं होगा कि अपस्यु यदि आपके पीछे है, तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप उससे रहम की भीख मांग ले और अपनी बची हुई जिंदगी उसके हिसाब से जी ले।
परमहंस:- इतने पहुंच वाले और क्षमता वाले ग्रुप के सामने, जब श्रेया उस लड़के अपस्यु की तारीफ कर रही है, मतलब उसके अंदर जरूर कुछ बात रही होगी। इसलिए जैसा की श्रेया ने कहा, वो बहुत क्षमता वाला है, इसलिए मै अपने भाई बहन के ओर से ये अनाउंसमेंट करता हूं कि लोकेश ने मायलो ग्रुप के साथ, हमारे सात्विक ट्रस्ट की कंपनी, वेरिएंट ग्रुप के बीच जो एक जंग छेड़ी थी, उसे मैं विराम देते हुए, हम नए मालिकों के साथ साफ-सुथरी प्रतियोगिता रखेंगे और प्रोफिट के लिए मार्केट के दूसरे सेक्टर्स में उतरेंगे, ताकि हमारा कभी आमना-सामना ना हो।
यदि भविष्य में आमना सामना होता भी है तो हम टेबल पर बैठकर मुद्दे को सुलझा लेंगे, क्योंकि बुद्धिमानी इसी में है कि ईगो के चक्कर में नए दुश्मन नहीं पाले जाए। तुम सब का क्या कहना है।
कलकि:- मै तो परम की बात का परम भक्त हूं, बिल्कुल सही कहा परम।
युक्तेश्वर:- हां सही है, जब दोस्त बनाकर काम होता है तो दुश्मन क्यों बनना। चलो पार्टी एन्जॉय किया जाए।
देर रात 1 बजे तक उनकी पार्टी चलती रही। सभी लोगों के जाने के बाद, तीनों भाई बहन एक टेबल पर बैठ गए। जहां अपस्यु और उसके क्षमता को लेकर चर्चा होने लगी। इस संदर्व में उन्होंने होम मिनिस्टर के ऑफिस के कुछ लोगों से बात भी किए और पूरे मामले की जानकारी भी लिया, की आखिर कैसे 15 अगस्त की रात अरेस्ट हुए इतने मजबूत लोग बाहर नहीं आ पाये। फिर जो उनको कहानी पता चली, होम मिनिस्टर के पीए शुक्ला से, उसपर तो तीनों स्तब्ध रह गए। जिन लोगों लोग को अपस्यु ने फंसाया था, उन्हीं के पैसे से उनको सजा दिलवा दिया।
सभी बातों पर गौर करती हुई कलकि कहने लगी…… "परम, युक्ते, क्या कहना है इसके बारे में।
युक्तेश्वर:- दीदी, इसमें बहुत गहराई है। हम इससे दुश्मनी नहीं करने का फैसला तो कर चुके हैं, अच्छा फैसला है, लेकिन..
परमहंस:- छोटे लेकिन क्या ?
युक्तेश्वर:- लेकिन इसके कुछ लोगों को करप्ट करना होगा, ताकि इसके अंदर की इंफॉर्मेशन मिलती रहे। मायलो ग्रुप हमारा डायरेक्ट कॉम्पिटीटर है, हम ब्लैक और व्हाइट दोनो घंधे में जितना नुकसान पिछले 1 साल से उठा रहे हैं, उतना तो हमने 4 साल में नहीं कमाया था। अब अगर ये मायलो से हमे टारगेट करता है और अपने बेस से हमारे ब्लैक को टारगेट करेगा तो अगले एक साल में हम बर्बाद हो जाएंगे।
परमहंस:- बात तो सही है दीदी, और पैसा किसे प्यारे नहीं। भले ही ब्लैक मनी का छोटा हिस्सा देकर उसने लोकेश और उसके कॉन्टैक्ट को खत्म किया हो। लेकिन जैसे ही उसे धंधे के बारे में पता चलेगा, वो उसमे हाथ जरूर डालेगा। और जिस हिसाब से पैसे खर्च करके उसने सबको सजा दिलवाया है, एक बात तो साफ है कि वो लोगों की सही कीमत जानता है और कौन कैसे टूटेगा उसका पूरा ज्ञान है। ऐसे लोग जब हमारे ब्लैक और व्हाइट दोनो धंधे को टारगेट करेगा, तब हमे बर्बाद होने ने महीना भी नहीं लगेगा।
कलिका:- "कभी-कभी जितने से ज्यादा हारना जरूरी होता है। कभी-कभी खुद को बलवान साबित करने से ज्यादा अच्छा, खुद को बेवकूफ और कमजोर दिखाना ज्यादा अच्छा है। बस नजर रखो और उसका एक भी आदमी, फिर चाहे वो लोकेश के गैंग का हो या फिर इससे जुड़ा हुआ कोई भी, अपने आस पास भी मंडराए तो समझ लेना वो हमे टारगेट कर रहा है।"
"वो अपनी रक्षा कर सकता है, अपने फैमिली कि रक्षा कर सकता है, लेकिन हर किसी पर नजर रख पाए संभव नहीं। उसे जितने दो, हमे नुकसान पहुंचाने दो और हम एक साथ पहला 10 टारगेट लेंगे। ऐसा मरेंगे उसे, की वो बौखलाकर पागल हो जाएगा। परेशान हो जाएगा कि पैसे बढ़ाए या परिवार बचाए और तब हम आमने-सामने बैठकर बातें करेंगे।"
"पैसे वो कमाये या हम अंत में आने तो हमारे पास ही है। वैसे भी वो लोकेश हमे 40000 करोड़ का नुकसान दे चुका था, अग्ला 100000 करोड़ का भी ये हमे नुकसान देदे, तब भी ये केवल हमारे हिस्से को ही बर्बाद करेगा, हमे नहीं। कर लेने दो इसे हमे बर्बाद, जीत लेने दो इसे अगर ये हमसे जितना चाह रहा है तो। अनुकूल टक्कर भी देते रहो, ताकि उसे लगे नहीं की जीत आसानी से मिल रही। पंगे करने का शौक है तो कर लेने दो पंगा… हम तीनो अंत में खेलना शुरू करेंगे।"
शतरंज की विषाद बिछ चुकी थी और दोनो ही पक्षों ने अपनी पहली चाल चल दी थी। शायद इस बार दोनो ही पक्ष एक जैसा खेल दिखाने के इरादे से उतरे थे। अपनी चाल चलकर बस सामने वाले पर नजर दिए रहना और दोनो को कोई भी हड़बड़ी नहीं थी कि सामने वाला चाल अगली चाल चलने में कितनी देर लगाने वाला है।
बहरहाल तकरीबन डेढ़ बजे तीनों भाई बहन ने अपने सभा को समाप्त किया और सोने चले गए। वहीं अपस्यु की सभा भी लगभग उतने ही बजे खत्म हुई, लेकिन वो सोने के बजाय, कार निकाला और ऐमी के पास चल दिया।
अंधेरी रात और लगभग सब सोए हुए। अपस्यु कार खड़ी करके अपने आंख मूंदकर आकलन करने लगा कि ऐमी कहां होगी। और जैसे ही उसे ऐमी का ख्याल आया, उसी के साथ प्यारी सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। वो समझ चुका था कि ऐमी इस वक़्त कहां होगी, लेकिन इससे पहले कि ऊपर छत पर जाता, पीछे से उसके कंधे पर हाथ पड़ा और अपस्यु पीछे मुड़कर देखने लगा..
"निम्मी तुम, नींद नहीं आ रही थी क्या?"… अपस्यु पीछे मुड़ते हुए पूछने लगा..
निम्मी:- मैंने सुना था आप हर वक़्त चौकन्ने रहते है। इसे चौकन्ना कहेंगे। जितने लापरवाह आप अभी हुए हैं, इतने में तो पिस्तौल की पूरी मैग्जीन खाली हो जाती।
अपस्यु:- हा हा हा हा… मुझे माफ़ कीजिए मिस, आगे से इस बात का खास ख्याल रखूंगा।
निम्मी:- मुझे समझने के लिए आप का शुक्रिया। मुझे यकीन था आप जरूर आएंगे, इसलिए इंतजार कर रही थी।
अपस्यु:- लोकेश का क्या हुआ यही जानना है ना?
निम्मी:- आप को कैसे पता?
अपस्यु:- ये सीने कि आग ही कुछ ऐसी होती है। रुको दिखता हूं।
अपस्यु ने अपने मोबाइल का स्क्रीन ऑन किया और वहां लगे नाईट विजन कैमरे में वो लोकेश को देख पा रही थी जो नीचे लेटा काफी छटपटा रहा था। … "इसे कही कैद कर दिया है।"
अपस्यु:- केवल कैद ही नहीं किया है बल्कि जिंदगी में अंधेरा भी भर दिया है। बस दिन के कुल 1 घंटे की रौशनी इसके हिस्से में है जो इसके खाना पहुंचने के वक़्त होगा, बाकी 23 घंटे अंधेरे में जिएगा।
निम्मी:- आह ! सुकून मिला सुनकर। 4 दिन बाद मै निकल रही हूं, दृश्य भईया के साथ, क्या पार्थ भी चल सकता है हमारे साथ?
अपस्यु:- जब उसे चाहती हो फिर इतनी दूरी क्यों बनाई हुई थी।
निम्मी:- खुलकर चाहने का अवसर तो अब मिला है पहले तो शंका थी कि वो मुझे चाहता है, या मेरे जिस्म को। और बस इसी ख्याल से अपनी चाहत को समेटी थी क्योंकि पता ना अपनी नादानी में एक और बड़ी गलती कहीं ना कर जाती। वैसे भी सच कहूं तो प्यार जैसे कोई बात नहीं है, बस उसके साथ अब अच्छा लगने लगा है।
अपस्यु:- इसी को तो चाहत कहते हैं। खैर तुम उसे आराम से ले जाओ और दोनो एक दूसरे का ख्याल रखना। अब जाओ तुम आराम करो।
निम्मी:- ऐमी छत पर सो रही है लेकिन..
अपस्यु:- हां लेकिन तुम सब को आश्चर्य तब हो गया होगा जब मेरी मां पहले उसके साथ सोई होगी और देखते ही देखते मेरा पूरा खानदान वहीं सो गया होगा।
निम्मी हंसती हुई…. "आप सब पूरे मेंटल हो। मैं पहली बात इतने जिंदा लोगों को देख रही हूं। और हां आप लोगो की संगति में मेरा भाई भी सुधर गया है। अब पहले की तरह उसका व्यवहार नहीं रहा। मैं जा रही हूं, सुभ रात्रि।
निम्मी के साथ अपस्यु भी अंदर गया। छत पर जब वो पहुंचा तब वहां का नजारा ही कुछ और था। सब लोगो के बीच में ऐमी लेटी हुई थी।… "जब हमे ही परेशान करना है तो हम क्यों ना परेशान करें?"..
अपस्यु अपनी बात सोचकर मुस्कुराया। जुगाड भिड़ाया और नकली बारिश का खेल शुरू हो गया। कच्चे पक्के से सभी आंख मिंजते हुए हड़बड़ा कर उठे और तेजी में नीचे भागने लगे। सभी जम्हाई लेते हुए नीचे आ गए। कुछ वक़्त लगा सामान्य होने में, जबतक वीरभद्र, उसकी मां और निम्मी भी उनके पास पहुंच गई।
सब थोड़े से परेशान होते हुए, बारिश के बारे में कह ही रहे थे कि तभी उनका ध्यान निम्मी पर गया जो हंस रही थी… "ये कमीना अपस्यु, उसका सर फोड़ दूंगा मै".. आरव थोड़े गुस्से में कहने लगा….
नंदनी:- भाई को ऐसा बोलता है, थप्पड़ खाएगा क्या?
कुंजल:- और तक रात के 2.30 बजे आकर जिसने हमारे ऊपर पानी डाला और अपनी होने वाली को ले उड़ा, उसका कुछ नहीं। उसके नाम पर तो आपकी जुबान भी नही खुलती।
नंदनी भिड़ पर गौर करती…. "ऐमी कहां है।"..
स्वास्तिका:- तब से सब क्या कोरियन भाषा में समझा रहे थे। आपका चहेता अपनी बीवी के लिए हमे परेशान करके उसे ले गया। खुद तो एक दूसरे के साथ गुटुर-गुटूर कर रहे होंगे और फालतू में हमारी नींद खराब कर दिया।
इधर लोगों की जब भगदड़ मची थी, तब सब सीढ़ियों कि ओर जा रहे थे और ऐमी मुस्कुराती हुई पानी टंकी के ओर। दोनो की नजर जब एक दूसरे से मिली, दोनो मुसकुराते हुए एक दूसरे को चूमने लगे और चोर की तरह नीचे उतर गए। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए घरवालों के रिएक्शन के बारे में सोच रहे थे।
नीलू:- तुम दोनो भागो यहां से और जब हमारे कार मॉडिफाइड हो जाएंगे तब मुझे बुला लेना। यहां के सब लोगो को लेकर हम धमा चौकड़ी मचाने दिल्ली आएंगे.. और अभी के लिए एक पार्टी नाईट… काया सब को बुला लो यहीं उन्हें भी खुशखबरी दे दूं जरा….
अपस्यु:- प्लीज़ मुझे यहां मत रोको, मुझे एमी के साथ होना है..
नीलू, उसे आखें दिखाती…. "आज हम लोगों के बीच रुको, कल तुम और काया यहीं से साथ में चले जाना।"..
अपस्यु:- मरवा दिया तुमने, चलो कोई ना आज यहां की खुशियों में शरीक हो जाते हैं।
पार्टी नाईट यहां शुरू हो चुकी थी और अपस्यु सबकी खुशियों में शरीक होकर झूम रहा था। वहां की खुशियां तब दुगनी हो गई जब उन सब ने नीलू का अनाउंमेंट सुना, जिसे सुनकर सब ऐसा मेहसूस कर रहे थे, मानो एक अच्छी जिंदगी अब यहां शुरू होने वाली है।
पार्टी का माहौल केवल विषेन गांव में ही नहीं बल्कि मुंबई से थोड़ी दूर स्थित लुनावला के एक रिजॉर्ट में भी था, जहां राधाकृष्ण बंधु, यानी कि कलकी, परमहंस और युक्तेश्वर राधाकृष्ण अपने कई करीबी लोगों के साथ पार्टी मना रहे थे।
जाम टोस्ट हुआ और कालकी चिल्लाती हुई कहने लगी…. "प्रभु उन्हें सजा दे ही देते हैं, जो हमारा रास्ता काटने की कोशिश करते हैं।"..
युक्तेश्वर:- लोकेश जैसे कीड़े को साफ करने और दिल्ली का सारा मामला सुलझाने के लिए, मै श्रेया को बधाई देता हूं। ये श्रेया और उसकी टीम का कमाल ही था, जो दिल्ली में हमारा पुरा मामला सैटल कर आयी।
श्रेया:- नहीं मै इसके पीछे नहीं थी। हां जगदीश राय की कहानी का सेहरा मेरे सर दे सकते हो, लेकिन लोकेश के पीछे तो स्वयं काल लगा हुआ था, मायलो ग्रुप के मालिक का लड़का अपस्यु। लोकेश को तो प्रभु भी नहीं बचा सकते थे। यहां इस महफिल में कहना ग़लत नहीं होगा कि अपस्यु यदि आपके पीछे है, तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप उससे रहम की भीख मांग ले और अपनी बची हुई जिंदगी उसके हिसाब से जी ले।
परमहंस:- इतने पहुंच वाले और क्षमता वाले ग्रुप के सामने, जब श्रेया उस लड़के अपस्यु की तारीफ कर रही है, मतलब उसके अंदर जरूर कुछ बात रही होगी। इसलिए जैसा की श्रेया ने कहा, वो बहुत क्षमता वाला है, इसलिए मै अपने भाई बहन के ओर से ये अनाउंसमेंट करता हूं कि लोकेश ने मायलो ग्रुप के साथ, हमारे सात्विक ट्रस्ट की कंपनी, वेरिएंट ग्रुप के बीच जो एक जंग छेड़ी थी, उसे मैं विराम देते हुए, हम नए मालिकों के साथ साफ-सुथरी प्रतियोगिता रखेंगे और प्रोफिट के लिए मार्केट के दूसरे सेक्टर्स में उतरेंगे, ताकि हमारा कभी आमना-सामना ना हो।
यदि भविष्य में आमना सामना होता भी है तो हम टेबल पर बैठकर मुद्दे को सुलझा लेंगे, क्योंकि बुद्धिमानी इसी में है कि ईगो के चक्कर में नए दुश्मन नहीं पाले जाए। तुम सब का क्या कहना है।
कलकि:- मै तो परम की बात का परम भक्त हूं, बिल्कुल सही कहा परम।
युक्तेश्वर:- हां सही है, जब दोस्त बनाकर काम होता है तो दुश्मन क्यों बनना। चलो पार्टी एन्जॉय किया जाए।
देर रात 1 बजे तक उनकी पार्टी चलती रही। सभी लोगों के जाने के बाद, तीनों भाई बहन एक टेबल पर बैठ गए। जहां अपस्यु और उसके क्षमता को लेकर चर्चा होने लगी। इस संदर्व में उन्होंने होम मिनिस्टर के ऑफिस के कुछ लोगों से बात भी किए और पूरे मामले की जानकारी भी लिया, की आखिर कैसे 15 अगस्त की रात अरेस्ट हुए इतने मजबूत लोग बाहर नहीं आ पाये। फिर जो उनको कहानी पता चली, होम मिनिस्टर के पीए शुक्ला से, उसपर तो तीनों स्तब्ध रह गए। जिन लोगों लोग को अपस्यु ने फंसाया था, उन्हीं के पैसे से उनको सजा दिलवा दिया।
सभी बातों पर गौर करती हुई कलकि कहने लगी…… "परम, युक्ते, क्या कहना है इसके बारे में।
युक्तेश्वर:- दीदी, इसमें बहुत गहराई है। हम इससे दुश्मनी नहीं करने का फैसला तो कर चुके हैं, अच्छा फैसला है, लेकिन..
परमहंस:- छोटे लेकिन क्या ?
युक्तेश्वर:- लेकिन इसके कुछ लोगों को करप्ट करना होगा, ताकि इसके अंदर की इंफॉर्मेशन मिलती रहे। मायलो ग्रुप हमारा डायरेक्ट कॉम्पिटीटर है, हम ब्लैक और व्हाइट दोनो घंधे में जितना नुकसान पिछले 1 साल से उठा रहे हैं, उतना तो हमने 4 साल में नहीं कमाया था। अब अगर ये मायलो से हमे टारगेट करता है और अपने बेस से हमारे ब्लैक को टारगेट करेगा तो अगले एक साल में हम बर्बाद हो जाएंगे।
परमहंस:- बात तो सही है दीदी, और पैसा किसे प्यारे नहीं। भले ही ब्लैक मनी का छोटा हिस्सा देकर उसने लोकेश और उसके कॉन्टैक्ट को खत्म किया हो। लेकिन जैसे ही उसे धंधे के बारे में पता चलेगा, वो उसमे हाथ जरूर डालेगा। और जिस हिसाब से पैसे खर्च करके उसने सबको सजा दिलवाया है, एक बात तो साफ है कि वो लोगों की सही कीमत जानता है और कौन कैसे टूटेगा उसका पूरा ज्ञान है। ऐसे लोग जब हमारे ब्लैक और व्हाइट दोनो धंधे को टारगेट करेगा, तब हमे बर्बाद होने ने महीना भी नहीं लगेगा।
कलिका:- "कभी-कभी जितने से ज्यादा हारना जरूरी होता है। कभी-कभी खुद को बलवान साबित करने से ज्यादा अच्छा, खुद को बेवकूफ और कमजोर दिखाना ज्यादा अच्छा है। बस नजर रखो और उसका एक भी आदमी, फिर चाहे वो लोकेश के गैंग का हो या फिर इससे जुड़ा हुआ कोई भी, अपने आस पास भी मंडराए तो समझ लेना वो हमे टारगेट कर रहा है।"
"वो अपनी रक्षा कर सकता है, अपने फैमिली कि रक्षा कर सकता है, लेकिन हर किसी पर नजर रख पाए संभव नहीं। उसे जितने दो, हमे नुकसान पहुंचाने दो और हम एक साथ पहला 10 टारगेट लेंगे। ऐसा मरेंगे उसे, की वो बौखलाकर पागल हो जाएगा। परेशान हो जाएगा कि पैसे बढ़ाए या परिवार बचाए और तब हम आमने-सामने बैठकर बातें करेंगे।"
"पैसे वो कमाये या हम अंत में आने तो हमारे पास ही है। वैसे भी वो लोकेश हमे 40000 करोड़ का नुकसान दे चुका था, अग्ला 100000 करोड़ का भी ये हमे नुकसान देदे, तब भी ये केवल हमारे हिस्से को ही बर्बाद करेगा, हमे नहीं। कर लेने दो इसे हमे बर्बाद, जीत लेने दो इसे अगर ये हमसे जितना चाह रहा है तो। अनुकूल टक्कर भी देते रहो, ताकि उसे लगे नहीं की जीत आसानी से मिल रही। पंगे करने का शौक है तो कर लेने दो पंगा… हम तीनो अंत में खेलना शुरू करेंगे।"
शतरंज की विषाद बिछ चुकी थी और दोनो ही पक्षों ने अपनी पहली चाल चल दी थी। शायद इस बार दोनो ही पक्ष एक जैसा खेल दिखाने के इरादे से उतरे थे। अपनी चाल चलकर बस सामने वाले पर नजर दिए रहना और दोनो को कोई भी हड़बड़ी नहीं थी कि सामने वाला चाल अगली चाल चलने में कितनी देर लगाने वाला है।
बहरहाल तकरीबन डेढ़ बजे तीनों भाई बहन ने अपने सभा को समाप्त किया और सोने चले गए। वहीं अपस्यु की सभा भी लगभग उतने ही बजे खत्म हुई, लेकिन वो सोने के बजाय, कार निकाला और ऐमी के पास चल दिया।
अंधेरी रात और लगभग सब सोए हुए। अपस्यु कार खड़ी करके अपने आंख मूंदकर आकलन करने लगा कि ऐमी कहां होगी। और जैसे ही उसे ऐमी का ख्याल आया, उसी के साथ प्यारी सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। वो समझ चुका था कि ऐमी इस वक़्त कहां होगी, लेकिन इससे पहले कि ऊपर छत पर जाता, पीछे से उसके कंधे पर हाथ पड़ा और अपस्यु पीछे मुड़कर देखने लगा..
"निम्मी तुम, नींद नहीं आ रही थी क्या?"… अपस्यु पीछे मुड़ते हुए पूछने लगा..
निम्मी:- मैंने सुना था आप हर वक़्त चौकन्ने रहते है। इसे चौकन्ना कहेंगे। जितने लापरवाह आप अभी हुए हैं, इतने में तो पिस्तौल की पूरी मैग्जीन खाली हो जाती।
अपस्यु:- हा हा हा हा… मुझे माफ़ कीजिए मिस, आगे से इस बात का खास ख्याल रखूंगा।
निम्मी:- मुझे समझने के लिए आप का शुक्रिया। मुझे यकीन था आप जरूर आएंगे, इसलिए इंतजार कर रही थी।
अपस्यु:- लोकेश का क्या हुआ यही जानना है ना?
निम्मी:- आप को कैसे पता?
अपस्यु:- ये सीने कि आग ही कुछ ऐसी होती है। रुको दिखता हूं।
अपस्यु ने अपने मोबाइल का स्क्रीन ऑन किया और वहां लगे नाईट विजन कैमरे में वो लोकेश को देख पा रही थी जो नीचे लेटा काफी छटपटा रहा था। … "इसे कही कैद कर दिया है।"
अपस्यु:- केवल कैद ही नहीं किया है बल्कि जिंदगी में अंधेरा भी भर दिया है। बस दिन के कुल 1 घंटे की रौशनी इसके हिस्से में है जो इसके खाना पहुंचने के वक़्त होगा, बाकी 23 घंटे अंधेरे में जिएगा।
निम्मी:- आह ! सुकून मिला सुनकर। 4 दिन बाद मै निकल रही हूं, दृश्य भईया के साथ, क्या पार्थ भी चल सकता है हमारे साथ?
अपस्यु:- जब उसे चाहती हो फिर इतनी दूरी क्यों बनाई हुई थी।
निम्मी:- खुलकर चाहने का अवसर तो अब मिला है पहले तो शंका थी कि वो मुझे चाहता है, या मेरे जिस्म को। और बस इसी ख्याल से अपनी चाहत को समेटी थी क्योंकि पता ना अपनी नादानी में एक और बड़ी गलती कहीं ना कर जाती। वैसे भी सच कहूं तो प्यार जैसे कोई बात नहीं है, बस उसके साथ अब अच्छा लगने लगा है।
अपस्यु:- इसी को तो चाहत कहते हैं। खैर तुम उसे आराम से ले जाओ और दोनो एक दूसरे का ख्याल रखना। अब जाओ तुम आराम करो।
निम्मी:- ऐमी छत पर सो रही है लेकिन..
अपस्यु:- हां लेकिन तुम सब को आश्चर्य तब हो गया होगा जब मेरी मां पहले उसके साथ सोई होगी और देखते ही देखते मेरा पूरा खानदान वहीं सो गया होगा।
निम्मी हंसती हुई…. "आप सब पूरे मेंटल हो। मैं पहली बात इतने जिंदा लोगों को देख रही हूं। और हां आप लोगो की संगति में मेरा भाई भी सुधर गया है। अब पहले की तरह उसका व्यवहार नहीं रहा। मैं जा रही हूं, सुभ रात्रि।
निम्मी के साथ अपस्यु भी अंदर गया। छत पर जब वो पहुंचा तब वहां का नजारा ही कुछ और था। सब लोगो के बीच में ऐमी लेटी हुई थी।… "जब हमे ही परेशान करना है तो हम क्यों ना परेशान करें?"..
अपस्यु अपनी बात सोचकर मुस्कुराया। जुगाड भिड़ाया और नकली बारिश का खेल शुरू हो गया। कच्चे पक्के से सभी आंख मिंजते हुए हड़बड़ा कर उठे और तेजी में नीचे भागने लगे। सभी जम्हाई लेते हुए नीचे आ गए। कुछ वक़्त लगा सामान्य होने में, जबतक वीरभद्र, उसकी मां और निम्मी भी उनके पास पहुंच गई।
सब थोड़े से परेशान होते हुए, बारिश के बारे में कह ही रहे थे कि तभी उनका ध्यान निम्मी पर गया जो हंस रही थी… "ये कमीना अपस्यु, उसका सर फोड़ दूंगा मै".. आरव थोड़े गुस्से में कहने लगा….
नंदनी:- भाई को ऐसा बोलता है, थप्पड़ खाएगा क्या?
कुंजल:- और तक रात के 2.30 बजे आकर जिसने हमारे ऊपर पानी डाला और अपनी होने वाली को ले उड़ा, उसका कुछ नहीं। उसके नाम पर तो आपकी जुबान भी नही खुलती।
नंदनी भिड़ पर गौर करती…. "ऐमी कहां है।"..
स्वास्तिका:- तब से सब क्या कोरियन भाषा में समझा रहे थे। आपका चहेता अपनी बीवी के लिए हमे परेशान करके उसे ले गया। खुद तो एक दूसरे के साथ गुटुर-गुटूर कर रहे होंगे और फालतू में हमारी नींद खराब कर दिया।
इधर लोगों की जब भगदड़ मची थी, तब सब सीढ़ियों कि ओर जा रहे थे और ऐमी मुस्कुराती हुई पानी टंकी के ओर। दोनो की नजर जब एक दूसरे से मिली, दोनो मुसकुराते हुए एक दूसरे को चूमने लगे और चोर की तरह नीचे उतर गए। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए घरवालों के रिएक्शन के बारे में सोच रहे थे।