Romance भंवर (पूर्ण) - Page 17 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-141

नीलू:- तुम दोनो भागो यहां से और जब हमारे कार मॉडिफाइड हो जाएंगे तब मुझे बुला लेना। यहां के सब लोगो को लेकर हम धमा चौकड़ी मचाने दिल्ली आएंगे.. और अभी के लिए एक पार्टी नाईट… काया सब को बुला लो यहीं उन्हें भी खुशखबरी दे दूं जरा….

अपस्यु:- प्लीज़ मुझे यहां मत रोको, मुझे एमी के साथ होना है..

नीलू, उसे आखें दिखाती…. "आज हम लोगों के बीच रुको, कल तुम और काया यहीं से साथ में चले जाना।"..

अपस्यु:- मरवा दिया तुमने, चलो कोई ना आज यहां की खुशियों में शरीक हो जाते हैं।

पार्टी नाईट यहां शुरू हो चुकी थी और अपस्यु सबकी खुशियों में शरीक होकर झूम रहा था। वहां की खुशियां तब दुगनी हो गई जब उन सब ने नीलू का अनाउंमेंट सुना, जिसे सुनकर सब ऐसा मेहसूस कर रहे थे, मानो एक अच्छी जिंदगी अब यहां शुरू होने वाली है।

पार्टी का माहौल केवल विषेन गांव में ही नहीं बल्कि मुंबई से थोड़ी दूर स्थित लुनावला के एक रिजॉर्ट में भी था, जहां राधाकृष्ण बंधु, यानी कि कलकी, परमहंस और युक्तेश्वर राधाकृष्ण अपने कई करीबी लोगों के साथ पार्टी मना रहे थे।

जाम टोस्ट हुआ और कालकी चिल्लाती हुई कहने लगी…. "प्रभु उन्हें सजा दे ही देते हैं, जो हमारा रास्ता काटने की कोशिश करते हैं।"..

युक्तेश्वर:- लोकेश जैसे कीड़े को साफ करने और दिल्ली का सारा मामला सुलझाने के लिए, मै श्रेया को बधाई देता हूं। ये श्रेया और उसकी टीम का कमाल ही था, जो दिल्ली में हमारा पुरा मामला सैटल कर आयी।

श्रेया:- नहीं मै इसके पीछे नहीं थी। हां जगदीश राय की कहानी का सेहरा मेरे सर दे सकते हो, लेकिन लोकेश के पीछे तो स्वयं काल लगा हुआ था, मायलो ग्रुप के मालिक का लड़का अपस्यु। लोकेश को तो प्रभु भी नहीं बचा सकते थे। यहां इस महफिल में कहना ग़लत नहीं होगा कि अपस्यु यदि आपके पीछे है, तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप उससे रहम की भीख मांग ले और अपनी बची हुई जिंदगी उसके हिसाब से जी ले।

परमहंस:- इतने पहुंच वाले और क्षमता वाले ग्रुप के सामने, जब श्रेया उस लड़के अपस्यु की तारीफ कर रही है, मतलब उसके अंदर जरूर कुछ बात रही होगी। इसलिए जैसा की श्रेया ने कहा, वो बहुत क्षमता वाला है, इसलिए मै अपने भाई बहन के ओर से ये अनाउंसमेंट करता हूं कि लोकेश ने मायलो ग्रुप के साथ, हमारे सात्विक ट्रस्ट की कंपनी, वेरिएंट ग्रुप के बीच जो एक जंग छेड़ी थी, उसे मैं विराम देते हुए, हम नए मालिकों के साथ साफ-सुथरी प्रतियोगिता रखेंगे और प्रोफिट के लिए मार्केट के दूसरे सेक्टर्स में उतरेंगे, ताकि हमारा कभी आमना-सामना ना हो।

यदि भविष्य में आमना सामना होता भी है तो हम टेबल पर बैठकर मुद्दे को सुलझा लेंगे, क्योंकि बुद्धिमानी इसी में है कि ईगो के चक्कर में नए दुश्मन नहीं पाले जाए। तुम सब का क्या कहना है।

कलकि:- मै तो परम की बात का परम भक्त हूं, बिल्कुल सही कहा परम।

युक्तेश्वर:- हां सही है, जब दोस्त बनाकर काम होता है तो दुश्मन क्यों बनना। चलो पार्टी एन्जॉय किया जाए।

देर रात 1 बजे तक उनकी पार्टी चलती रही। सभी लोगों के जाने के बाद, तीनों भाई बहन एक टेबल पर बैठ गए। जहां अपस्यु और उसके क्षमता को लेकर चर्चा होने लगी। इस संदर्व में उन्होंने होम मिनिस्टर के ऑफिस के कुछ लोगों से बात भी किए और पूरे मामले की जानकारी भी लिया, की आखिर कैसे 15 अगस्त की रात अरेस्ट हुए इतने मजबूत लोग बाहर नहीं आ पाये। फिर जो उनको कहानी पता चली, होम मिनिस्टर के पीए शुक्ला से, उसपर तो तीनों स्तब्ध रह गए। जिन लोगों लोग को अपस्यु ने फंसाया था, उन्हीं के पैसे से उनको सजा दिलवा दिया।

सभी बातों पर गौर करती हुई कलकि कहने लगी…… "परम, युक्ते, क्या कहना है इसके बारे में।

युक्तेश्वर:- दीदी, इसमें बहुत गहराई है। हम इससे दुश्मनी नहीं करने का फैसला तो कर चुके हैं, अच्छा फैसला है, लेकिन..

परमहंस:- छोटे लेकिन क्या ?

युक्तेश्वर:- लेकिन इसके कुछ लोगों को करप्ट करना होगा, ताकि इसके अंदर की इंफॉर्मेशन मिलती रहे। मायलो ग्रुप हमारा डायरेक्ट कॉम्पिटीटर है, हम ब्लैक और व्हाइट दोनो घंधे में जितना नुकसान पिछले 1 साल से उठा रहे हैं, उतना तो हमने 4 साल में नहीं कमाया था। अब अगर ये मायलो से हमे टारगेट करता है और अपने बेस से हमारे ब्लैक को टारगेट करेगा तो अगले एक साल में हम बर्बाद हो जाएंगे।

परमहंस:- बात तो सही है दीदी, और पैसा किसे प्यारे नहीं। भले ही ब्लैक मनी का छोटा हिस्सा देकर उसने लोकेश और उसके कॉन्टैक्ट को खत्म किया हो। लेकिन जैसे ही उसे धंधे के बारे में पता चलेगा, वो उसमे हाथ जरूर डालेगा। और जिस हिसाब से पैसे खर्च करके उसने सबको सजा दिलवाया है, एक बात तो साफ है कि वो लोगों की सही कीमत जानता है और कौन कैसे टूटेगा उसका पूरा ज्ञान है। ऐसे लोग जब हमारे ब्लैक और व्हाइट दोनो धंधे को टारगेट करेगा, तब हमे बर्बाद होने ने महीना भी नहीं लगेगा।

कलिका:- "कभी-कभी जितने से ज्यादा हारना जरूरी होता है। कभी-कभी खुद को बलवान साबित करने से ज्यादा अच्छा, खुद को बेवकूफ और कमजोर दिखाना ज्यादा अच्छा है। बस नजर रखो और उसका एक भी आदमी, फिर चाहे वो लोकेश के गैंग का हो या फिर इससे जुड़ा हुआ कोई भी, अपने आस पास भी मंडराए तो समझ लेना वो हमे टारगेट कर रहा है।"

"वो अपनी रक्षा कर सकता है, अपने फैमिली कि रक्षा कर सकता है, लेकिन हर किसी पर नजर रख पाए संभव नहीं। उसे जितने दो, हमे नुकसान पहुंचाने दो और हम एक साथ पहला 10 टारगेट लेंगे। ऐसा मरेंगे उसे, की वो बौखलाकर पागल हो जाएगा। परेशान हो जाएगा कि पैसे बढ़ाए या परिवार बचाए और तब हम आमने-सामने बैठकर बातें करेंगे।"

"पैसे वो कमाये या हम अंत में आने तो हमारे पास ही है। वैसे भी वो लोकेश हमे 40000 करोड़ का नुकसान दे चुका था, अग्ला 100000 करोड़ का भी ये हमे नुकसान देदे, तब भी ये केवल हमारे हिस्से को ही बर्बाद करेगा, हमे नहीं। कर लेने दो इसे हमे बर्बाद, जीत लेने दो इसे अगर ये हमसे जितना चाह रहा है तो। अनुकूल टक्कर भी देते रहो, ताकि उसे लगे नहीं की जीत आसानी से मिल रही। पंगे करने का शौक है तो कर लेने दो पंगा… हम तीनो अंत में खेलना शुरू करेंगे।"

शतरंज की विषाद बिछ चुकी थी और दोनो ही पक्षों ने अपनी पहली चाल चल दी थी। शायद इस बार दोनो ही पक्ष एक जैसा खेल दिखाने के इरादे से उतरे थे। अपनी चाल चलकर बस सामने वाले पर नजर दिए रहना और दोनो को कोई भी हड़बड़ी नहीं थी कि सामने वाला चाल अगली चाल चलने में कितनी देर लगाने वाला है।

बहरहाल तकरीबन डेढ़ बजे तीनों भाई बहन ने अपने सभा को समाप्त किया और सोने चले गए। वहीं अपस्यु की सभा भी लगभग उतने ही बजे खत्म हुई, लेकिन वो सोने के बजाय, कार निकाला और ऐमी के पास चल दिया।

अंधेरी रात और लगभग सब सोए हुए। अपस्यु कार खड़ी करके अपने आंख मूंदकर आकलन करने लगा कि ऐमी कहां होगी। और जैसे ही उसे ऐमी का ख्याल आया, उसी के साथ प्यारी सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। वो समझ चुका था कि ऐमी इस वक़्त कहां होगी, लेकिन इससे पहले कि ऊपर छत पर जाता, पीछे से उसके कंधे पर हाथ पड़ा और अपस्यु पीछे मुड़कर देखने लगा..

"निम्मी तुम, नींद नहीं आ रही थी क्या?"… अपस्यु पीछे मुड़ते हुए पूछने लगा..

निम्मी:- मैंने सुना था आप हर वक़्त चौकन्ने रहते है। इसे चौकन्ना कहेंगे। जितने लापरवाह आप अभी हुए हैं, इतने में तो पिस्तौल की पूरी मैग्जीन खाली हो जाती।

अपस्यु:- हा हा हा हा… मुझे माफ़ कीजिए मिस, आगे से इस बात का खास ख्याल रखूंगा।

निम्मी:- मुझे समझने के लिए आप का शुक्रिया। मुझे यकीन था आप जरूर आएंगे, इसलिए इंतजार कर रही थी।

अपस्यु:- लोकेश का क्या हुआ यही जानना है ना?

निम्मी:- आप को कैसे पता?

अपस्यु:- ये सीने कि आग ही कुछ ऐसी होती है। रुको दिखता हूं।

अपस्यु ने अपने मोबाइल का स्क्रीन ऑन किया और वहां लगे नाईट विजन कैमरे में वो लोकेश को देख पा रही थी जो नीचे लेटा काफी छटपटा रहा था। … "इसे कही कैद कर दिया है।"

अपस्यु:- केवल कैद ही नहीं किया है बल्कि जिंदगी में अंधेरा भी भर दिया है। बस दिन के कुल 1 घंटे की रौशनी इसके हिस्से में है जो इसके खाना पहुंचने के वक़्त होगा, बाकी 23 घंटे अंधेरे में जिएगा।

निम्मी:- आह ! सुकून मिला सुनकर। 4 दिन बाद मै निकल रही हूं, दृश्य भईया के साथ, क्या पार्थ भी चल सकता है हमारे साथ?

अपस्यु:- जब उसे चाहती हो फिर इतनी दूरी क्यों बनाई हुई थी।

निम्मी:- खुलकर चाहने का अवसर तो अब मिला है पहले तो शंका थी कि वो मुझे चाहता है, या मेरे जिस्म को। और बस इसी ख्याल से अपनी चाहत को समेटी थी क्योंकि पता ना अपनी नादानी में एक और बड़ी गलती कहीं ना कर जाती। वैसे भी सच कहूं तो प्यार जैसे कोई बात नहीं है, बस उसके साथ अब अच्छा लगने लगा है।

अपस्यु:- इसी को तो चाहत कहते हैं। खैर तुम उसे आराम से ले जाओ और दोनो एक दूसरे का ख्याल रखना। अब जाओ तुम आराम करो।

निम्मी:- ऐमी छत पर सो रही है लेकिन..

अपस्यु:- हां लेकिन तुम सब को आश्चर्य तब हो गया होगा जब मेरी मां पहले उसके साथ सोई होगी और देखते ही देखते मेरा पूरा खानदान वहीं सो गया होगा।

निम्मी हंसती हुई…. "आप सब पूरे मेंटल हो। मैं पहली बात इतने जिंदा लोगों को देख रही हूं। और हां आप लोगो की संगति में मेरा भाई भी सुधर गया है। अब पहले की तरह उसका व्यवहार नहीं रहा। मैं जा रही हूं, सुभ रात्रि।

निम्मी के साथ अपस्यु भी अंदर गया। छत पर जब वो पहुंचा तब वहां का नजारा ही कुछ और था। सब लोगो के बीच में ऐमी लेटी हुई थी।… "जब हमे ही परेशान करना है तो हम क्यों ना परेशान करें?"..

अपस्यु अपनी बात सोचकर मुस्कुराया। जुगाड भिड़ाया और नकली बारिश का खेल शुरू हो गया। कच्चे पक्के से सभी आंख मिंजते हुए हड़बड़ा कर उठे और तेजी में नीचे भागने लगे। सभी जम्हाई लेते हुए नीचे आ गए। कुछ वक़्त लगा सामान्य होने में, जबतक वीरभद्र, उसकी मां और निम्मी भी उनके पास पहुंच गई।

सब थोड़े से परेशान होते हुए, बारिश के बारे में कह ही रहे थे कि तभी उनका ध्यान निम्मी पर गया जो हंस रही थी… "ये कमीना अपस्यु, उसका सर फोड़ दूंगा मै".. आरव थोड़े गुस्से में कहने लगा….

नंदनी:- भाई को ऐसा बोलता है, थप्पड़ खाएगा क्या?

कुंजल:- और तक रात के 2.30 बजे आकर जिसने हमारे ऊपर पानी डाला और अपनी होने वाली को ले उड़ा, उसका कुछ नहीं। उसके नाम पर तो आपकी जुबान भी नही खुलती।

नंदनी भिड़ पर गौर करती…. "ऐमी कहां है।"..

स्वास्तिका:- तब से सब क्या कोरियन भाषा में समझा रहे थे। आपका चहेता अपनी बीवी के लिए हमे परेशान करके उसे ले गया। खुद तो एक दूसरे के साथ गुटुर-गुटूर कर रहे होंगे और फालतू में हमारी नींद खराब कर दिया।

इधर लोगों की जब भगदड़ मची थी, तब सब सीढ़ियों कि ओर जा रहे थे और ऐमी मुस्कुराती हुई पानी टंकी के ओर। दोनो की नजर जब एक दूसरे से मिली, दोनो मुसकुराते हुए एक दूसरे को चूमने लगे और चोर की तरह नीचे उतर गए। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए घरवालों के रिएक्शन के बारे में सोच रहे थे।
 
Update:-142

इधर लोगों की जब भगदड़ मची थी, तब सब सीढ़ियों कि ओर जा रहे थे और ऐमी मुस्कुराती हुई पानी टंकी के ओर। दोनो की नजर जब एक दूसरे से मिली, दोनो मुसकुराते हुए एक दूसरे को चूमने लगे और चोर की तरह नीचे उतर गए। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और दोनो एक दूसरे को देखकर हंसते हुए घरवालों के रिएक्शन के बारे में सोच रहे थे।

ऐमी:- अपस्यु बहुत गलत किये, तुम्हारी मां हम दोनों को उल्टा टांग देगी।

अपस्यु:- वापस मोड़ लू कार..

ऐमी:- अब जब आ ही गए है तो वापस क्या जाना, चलो मासी को परेशान करते हैं।

अपस्यु:- ऐसा क्या, चलो फिर चला जाए।

दोनो रात को 2.30 बजे चले थे और 430 किलोमीटर की दूरी लगभग 2 घंटे में तय करके, प्रताप महल के पास पहुंच गए थे… "बेबी अगली तैयारी क्या फार्मूला वन की है।"..

"ऐसे इंजन के और नट्रॉक्स सस्पेंशन के साथ तो, मुझ जैसे कई फार्मूला इन रेसर मिल जाएंगे, जिसे थोक के भाव से वो लोग डिसक्वालिफाई कर देते है।'… अपस्यु कार को प्रताप महल के ठीक सामने लगाते हुए कहने लगा।

"साइड से रास्ता है, वहां से चोरों कि तरह जाया जा सकता है।" ऐमी अपने लैपटॉप निकलकर प्रताप महल के सिक्योरिटी सिस्टम को हैक करके बोलने लगी।

दोनो फिर उसी रास्ते से, बड़े सफाई के साथ प्रताप महल में दाखिल हो गए। दोनो की खुसुर-फुसुर भी महल में पहुंचने के साथ ही शुरू हो गई।… "मै रूम में नहीं जाऊंगी, तुम सैतनी करोगे, यहीं हॉल में लेटते है।"…. "पागल हो कैसा अजीब लगेगा हॉल में लेटना, कुछ देर बाद सब जाग जाएंगे और हमे फिर सोने नहीं देंगे, पंचायत होगी सो अलग। रूम में ही चलते है।"..

काफी देर समझाने के बाद भी जब ऐमी नहीं मानी तो अपस्यु ने उसका हाथ पकड़ कर खींच लिया और अपने गोद में उठाकर कमरे में ले गया। कमरे में जाते के साथ ही अपस्यु ने ऐमी को बेड पर पटक दिया और जाकर दरवाजे की कुण्डी बंद कर आया।

जबतक वो दरवाजा लगाकर वापस लौटा ऐमी अपने ऊपर के कपड़े उतारकर, केवल ब्रा और पैंटी में बैठ गई। उसे देखते ही… "काफी हॉट लग रही हो।"..

ऐमी:- मेरी जारा भी इकछा नहीं है अपस्यु, लेकिन तुम मानने तो वाले हो नहीं, इसलिए जल्दी करो, मुझे सोना भी है।

"वाह! चढ़ गया भूत तुम्हे। शुभ रात्रि, मैं चला सोने।"… अपस्यु बिस्तर पर जाकर करवट लेकर सो गया। ऐमी पीछे से उसके पीठ से चिपककर, अपना हाथ आगे करके उसके सीने पर चलाती हुई, उसके गर्दन पर किस्स करती हुई… "बेबी थक गए क्या?"

अपस्यु:- हां थका हूं, और सोने दो प्लीज..

ऐमी:- अब जब मैंने कपड़े निकाल ही लिए है तो चलो ना करते हैं।

अपस्यु, ऐमी के ओर मुड़ते हुए…. "कान पकड़ कर माफी मांगता हूं, मुझसे गलती हुई जो तुम्हे कमरे में लेकर आया। मै तो रेपिस्ट हूं ना, जो तुम्हारे साथ जबरदस्ती करता हूं।"

ऐमी, अपस्यु के आखों में झांकती हुई, होंठ हिलाकर सॉरी कहती हुई मुस्कुराने लगी और अपस्यु को बाहों में भींचकर, उसके होंठ से होंठ लगाकर चूमती हुई सो गई।

सुबह के 7 बज रहे होंगे… दृश्य के माता पिता, वीर प्रताप और कंचन दोनो टहलने के लिए निकले। अपने महल के बाहर कार पार्क देखकर… "ये दृश्य सुबह-सुबह कहां गया था।"… दोनो बाहर लगी कार को देखकर यह समझ बैठे की अपस्यु ने कुछ मॉडिफाइड कार जो दृश्य को दी थी, उन्हीं में से एक कार में दृश्य कहीं बाहर गया हुआ था।

उन्हीं के पीछे दृश्य और अश्क भी निकली। दोनो हाथों में हाथ डाले आगे बढ़ ही रहे थे कि दृश्य, अश्क के कमर में हाथ डालकर खुद से चिपका लिया और उसके गले पर किस्स करने लगा….. "अति बेशर्मी कहते हैं इसे।" .. अश्क खुष्फुसती हुई अपनी प्रतिक्रिया दी और दृश्य को आखें दिखाने लगी।

अश्क अभी दृश्य का हाथ छुड़ाकर अलग ही हुई थी कि पीछे से दृश्य की दीदी पायल और उसके जीजू आकाश, दोनो को "गुड मॉर्निंग" विश किया और दोनो को देखकर हंसते हुए आगे बढ़ गए।

अश्क:- लव आप भी ना हुंह। ना वक़्त देखते हो ना जगह, बस शुरू हो जाते है। भईया और भाभी ने लगता है देख लिया।

दृश्य:- अच्छा सॉरी बाबा, प्लीज अब सुबह-सुबह अपना मूड ऑफ ना करो।

दृश्य और अश्क फुसफुसाई सी आवाज़ में निकझोंक करते हुए जैसे ही बाहर निकले…. "दोनो रात को कहां बाहर गए थे।"… पायल, दृश्य घूरती हुई पूछने लगी।

दृश्य:- हम कहीं नहीं गए थे दीदी सच कह रहे है।

पायल:- दृश्य मै क्या करूं तुम्हारा। आंटी मुझे ताने दे रही है कि "देखा तेरा भाई 24 घंटे घर पर रहने की बात नहीं मान सका।"

अश्क, दृश्य को घूरती…. "सच सच बताओ लव कहां गए थे। कम से कम मुझे तो साथ ले चलते।"..

पायल, अश्क का कान पकड़ती…. "मुझे पता है इस पूरी कांड की रचायता तुम ही हो।"..

"ऑफ ओ, पता नहीं कब ये बड़े लोग सुधरेंगे। जूनियर तुम मेरे साथ ही रहना हमेशा, इन लोगों के साथ नहीं रहना।"… जूनियर ऐमी, यानी कि पायल की बेटी उन सबको एक जगह खड़े होकर बातें करते देख, अपनी प्रतिक्रिया देती हुई, अपने साथ जूनियर दृश्य को लेकर बाहर निकल गई।

अश्क:- छोटी है पर प्वाइंट की बात कह गई। कुछ सीखो इन जूनियर्स से। चलो लव मॉर्निंग वॉक करके आते हैं, इन्हे तो हर वक़्त यही लगता है कि हम इनकी सुनते ही नहीं है।

दृश्य की मां कंचन…. क्या बात है अश्क, बहुत खूब। लगता है कुछ क्लासिकल हिंदी मूवी देखकर मुझे 60 के दशक की सास का रोल निभाना ही पड़ेगा। अब तुम दोनों जारा बताओगे की कहीं घूमने नहीं गए तो ये कार कैसे बाहर आयी। वो भी स्पेशल कार। पायल जरा इनका वो डायलॉग दोहराना तो..

पायल:- ये कोई आम कार नहीं है, मेरे भाई ने जेम्स बॉन्ड वाली कार मुझे गिफ्ट की है।

दृश्य और अश्क की नजर भी कार पर गई, दोनो एक दूसरे का चेहरा देखकर मानो इशारे में पूछ रही हो… "ये कार बाहर कैसे आयी।"

दृश्य और अश्क दोनो ने अपना हथेली चिपकाकर कार को खोलने की कोशिश करी, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। 1,2 कोशिश के बाद दृश्य और अश्क दोनो एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे और उन्हें हैरान देखकर आकाश पूछने लगा…. "क्या हुआ दोनो हैरान क्यों हो।"..

अश्क:- आकाश भईया ये हमारी कार नहीं है।

कंचन, उत्सुकता से…. "क्या ये अपस्यु और ऐमी की कार है। या आरव की।"..

दृश्य:- एक बार ही तो दोनो से मिली हो, कभी मेरे लिए तो इतनी खुश नहीं हुई मां।

वीर प्रताप:- मुझे तो आजकल देखती भी नहीं, खुश होना तो दूर की बात है।

कंचन:- ख़ामोश हो जाओ सब, वो लोग यहां आए है तो गए कहां। कब आए?

कंचन की बात सुनकर हर किसी ने ढूंढ़ना शुरू किया। वहीं गांव के कुछ लोगों का कहना था कि सुबह 4 बजे के आस पास उनके यहां कार खड़ी हुई, उन्हें लगा दृश्य आया होगा।

1 घंटे तक गांव में ढूंढ लिया हर किसी ने, लेकिन यह तक पता नहीं चल पाया कि अपस्यु आया था या आरव। अंत में दृश्य ने पहले अपस्यु को कॉल लगाया, फिर ऐमी को और अंत में आरव को।

आरव कॉल उठाते हुए…. "थैंक्स भईया आपने कॉल कर दिया।"..

दृश्य:- क्या हुआ आरव..

आरव:- भईया ऐसे अनजान बनकर मत पूछो। अपस्यु ने ही कॉल लगवाया है ना यहां का हाल जानने। उससे कह देना दोनो जब दिल्ली पहुंचेंगे तो उनका जबरदस्त स्वागत होगा।

दृश्य, हंसते हुए…. "हुआ क्या वो तो बताओ।"

आरव:- कमिने ने कल रात हमारी नींद खराब करके, सबके बीच से ऐमी को लेकर भाग गया। सब बहुत गुस्सा है।

दृश्य:- अब सबके बीच में ऐमी को फसाकर रखोगे उसे परेशान करने के लिए, तो यही सब दिन देखने होंगे ना।

आरव:- हां उसने अपना काम कर दिया अब हमारी बारी है। उससे कहना हम दिल्ली के लिए अभी निकल रहे है, और अपना ख्याल रखे। जब भगोड़े हो ही गए हैं तो कहना आराम से घूमकर आ जाए। उसका स्वागत के लिए हम इंतजार कर लेंगे।

दृश्य:- हां ठीक है आरव सर, और कुछ संदेश देना है दोनो को…

आरव:- नहीं आप को संदेश देना है। दोनो से बचकर रहना, नहीं तो अपने रोमांस के चक्कर में, आपके सुखी जीवन में कब आग लगा दे आपको पता भी नहीं चलेगा। वैधानिक सूचना थी मैंने दे दिया, अब आपको मानना है तो मानो वरना आज दिन भर में तो आपके बुद्धि का विकास हो ही जाना है।

आरव की बात सुनकर दृश्य हंसते हुए कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया और सभी लोगों को यहां अपस्यु और ऐमी कैसे पहुंचे उसका पुरा विवरण बता दिया। दोनो के यहां पहुंचने की कहानी जानकर सबकी हंसी निकल गई। कुछ साल पहले की वो हसीन कहानी ताज़ा हो गई, जब दृश्य और अश्क के ऊपर भी पहरा लगा होता था और दोनो ऐसा ही कुछ हरकत कर बैठते थे।

अपस्यु और ऐमी के बहाने ही सही, लेकिन हर कोई दृश्य और अश्क की एक बार फिर खिंचाई करने बैठ गया। प्रताप महल में पहले से बहुत से लोग पहुंचे थे। बीती बातों का दौड़ ऐसा चला की एक-एक करके सभी लोग आते चले गए और महफिल को ज्वाइन करते चले गए।

एक बड़ी सी महफिल, जहां 4 कपल बैठे थे जो दृश्य के लंबे सफर के शुरू के साथी रहे थे। 6 बच्चे जिनकी गैंग लीडर जूनियर ऐमी थी, वो भी वहां खेल रहे थे। कुछ अभिभावक भी उस महफिल में मौजूद थे, जिसमें एक तो कंचन और वीर प्रताप थे जो स्थाई रूप से प्रताप महल में रहा करते थे और साथ में आयी थी कंचन कि जिगरी सहेली चंद्रिका देवी और अश्क की मां। कुल मिलाकर पूरी पंचायत सुबह-सुबह लग चुकी थी और जब बीते दोनो की बात शुरू हुई, समय का पता ही नहीं चला।

सुबह के 10 बज चुके थे। ऐमी मीठी अंगड़ाई लेकर जागी और अपस्यु के बदन को अपने हाथों में समेटकर, उसके गाल पर अपनी जीभ चलाने लगी। अपस्यु भी अपने आंख मूंदे ऐमी के ओर मुर गया और उसे अपनी बाहों में समेटकर अपनी आखें खोलते हुए… "हर सुबह ऐसे ही जागता रहूं।"..

ऐमी प्यार से अपस्यु के होंठ पर अपने होंठ फिराति…. "बस कुछ दिन और बेबी, फिर हमारी शादी होगी और हमारी रोज ऐसी ही सुबह होगी।"..

अपस्यु अपना हाथ ऐमी के पीठ पर धीरे-धीरे चलाते हुए उसके ब्रा के स्ट्रिप को खोल दिया। "हिहिहिहिहिही, बेबी प्लीज अभी उक्साओ नहीं, वरना मै भी मूड में आ जाऊंगी।"..

अपस्यु, ऐमी को खुद में भींचते… "ऐसा क्यों लगता है कि आज कल तुम बहुत शरारती होती जा रही जो स्वीटी।"..

ऐमी:- मेरी सारी शरारतें तो तुम से ही है, और मुझे पुरा हक है कि मैं तुम्हे तंग करूं।

अपस्यु:- ओह हो इरादे तो बहुत खतरनाक हैं। अच्छा जाओ तैयार हो जाओ, मासी से मिलकर निकलते है।

ऐमी:- नाह, ऐसे ही कुछ देर मुझे समेटे रहो ना।

अपस्यु:- ऐमी, उठो भी, अब जाओ भी।

ऐमी:- प्लीज कुछ देर आराम करने दो ना..

अपस्यु ऐमी को छोड़कर खड़ा हो गया और अपनी आखें दिखाते… "अब तुम उठ रही हो या नहीं स्वीटी।"..

ऐमी:- नहीं उठती मै… जाओ तुम्हे जो करना है कर लो।

अपस्यु तेजी के साथ बिस्तर पर लपका और ऐमी को उल्टा घूमकर उसके कमर पर बैठ गया। अपने दोनो हाथ से ऐमी के पीठ पर मजबूत हाथ का दवाब डालते उसके पीठ दबाते हुए… "खुमारी मिटी या और बदन दबाऊं।"..

ऐमी:- आह ! बेबी मज़ा आ रहा है, ऐसे ही दबाते रहो ना। और हां थोड़े पाऊं भी दबा देना ना।

अपस्यु उसकी बात सुनकर हसने लगा। पहले ऊपर फिर नीचे। जैसे ही हाथ ऐमी के घुटनों के ओर बढ़ने लगे.. "बेबी एक मिनट उठोगे।"..

अपस्यु, ऐमी के ऊपर से हटा, ऐमी अपनी ब्रा पहनकर खड़ी हुई और अपस्यु के बाल बिखेरती हुई….. "तुम्हारा साथ होना ही जिंदगी है, लव"… कहती हुई ऐमी अपने होंठ से अपस्यु के होंठ को प्यार से स्पर्श करती… "तुम मेरी हंसी हो, तुम मेरी खुशी हो। आती हूं फ्रेश होकर।"…

ऐमी की बातों पर हंसते हुए अपस्यु लेट गया। ख्यालों में वो ऐसे डूबा कि उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी आंख लग गई। पानी की छींटें चेहरे पर पड़ने से अपस्यु की आंख खुली। ऐमी सूखे तौलिए से अपनी बाल झटक रही थी और अपस्यु को देखकर मुस्कुरा रही थी।…. "अब उठो भी, साढ़े 10 बज गए हैं और मुझे भूख सी लगने लगी है।"..

दोनो लगभग 11 बजे तक तैयार होकर, मासी से मिलने के लिए कमरे के बाहर आए। जैसे ही कमरे के बाहर निकले, बच्चे उन्हें देखकर डर से सब अपने माता पिता के पास आ गए, सिवाय जूनियर ऐमी के। वो अपस्यु और ऐमी को गौर से देख ही रही थी, तभी पूरी सभा कि नजर भी इन दोनों पर चली गई।
 
Update:-144

तीनों कंचन के कमरे में बैठे थे और कुछ पल की खामोशी के बाद…. "क्या हुआ मासी, इतनी टेंशन में रहोगी तो कैसे काम चलेगा।".. अपस्यु ने बात शुरू की..

कंचन:- हुंह ! अपने बच्चे से मै ठीक से मिली भी नहीं और उसे फालतू में इतना सुना दिया, ये भी ना देखे मेरी बहू आयी है। एक लड़की के लिए वो सबसे बुरा पल होता है जब उसके सामने उसके पति को उल्टा सीधा सुनाया जाए, इतनी भी अक्ल नहीं थी उनमें।

ऐमी:- मासी तो आपने भी तो उन्हें सुनाने में कोई कसर थोड़े ना छोड़ी। हमारे ओर से तो आपने भी बोल ही दिया। अब छोड़ो भी बात को, इतना पकड़ कर रखोगी बात को, तो आपको ब्लड प्रेशर हो जाना है।

कंचन:- मुझे नॉर्मल करने कि कोशिश ना करो, वरना मै चपेट लगा दूंगी ऐमी। अभी मै बहुत गुस्से में हूं।

अपस्यु:- आप का गुस्सा भरा मुंह देखने आए थे हम। सोचा था थोड़े मस्ती मज़ाक और हंगामा करेंगे आपके साथ। अब आप ऐसे गुस्से में रहोगी तो हम चले जाएंगे। मासी भूख भी लगी है हमे।

कंचन:- कहीं ना मुझे नॉर्मल करने की कोशिश ना कर। चल जयपुर घूम आते है, और बाहर ही कुछ खा लेंगे। वैसे भी यहां रहूंगी तो मेरा सर दर्द करने लगेगा। रह-रह कर बातें दिमाग़ में आती रहेगी।

ऐमी:- मासी दिल्ली चलो ना, प्लीज प्लीज प्लीज…

अपस्यु:- हां मासी चलो ना…

कंचन:- में वहां जाकर क्या करूंगी…

ऐमी:- मतलब हमारे पास रहकर क्या करेगी ऐसा कहना है.. हुंह ! मुझे बुरा लगा..

कंचन, कुछ सोचती हुई…. "अच्छा चल ठीक है, चलते है दिल्ली अब तो दोनो खुश ना।"

ऐमी और अपस्यु…. "हां बहुत खुश है मासी"…

कंचन हां बोलकर अपने पैकिंग करने में लग गई, लेकिन तभी ऐमी उसका हाथ पकड़ते… "नाना, कोई पैकिंग नहीं, बल्कि हम आपके लिए शॉपिंग करेंगे।"..

कंचन:- मतलब ऐसे ही खाली हाथ चलूं…

अपस्यु:- कितने सवाल पूछती है। हर चीज में फॉर्मेलिटी। सिर्फ साथ चल दो आप, बाकी आगे क्या होता है वो हम पर छोड़ दो।

कंचन:- पता नहीं तुम दोनो के मन में क्या चल रहा है। ठीक है खाली हाथ ही चलती हूं…

कंचन को तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि वो इन दोनों की बात पर क्या कहे। ज़िन्दगी में पहली बार बिना पैकिंग के बाहर जा रही थी। कंचन ने अपने साथ जूनियर ऐमी और जूनियर दृश्य को लेती हुई, वीर प्रताप को अपने जाने के बारे में बताकर, उन दोनों के साथ निकल गई।

लगभग 2 बजे के करीब सब दिल्ली पहुंचे। ऐमी और अपस्यु ने जब खरीदारी की प्लांनिंग बताई, वो हंसती हुई दोनो के गाल थपथपाती शॉपिंग में लग गई। इधर ऐमी ने कंचन के लिए बहुत सारी चीजें शॉपिंग कर ली और अपस्यु जूनियर्स के साथ शॉपिंग कर रहा था।

कंचन साड़ी और ज्वेलरी की शॉपिंग करके ऐमी के पास पहुंचती…. "तू ना मुझसे काम करवा ले। थका दी है मुझे, आज रात मेरे पाऊं दबाने आ जाना।"

ऐमी:- रात का इंतजार काहे, अभी ही मसाज सेंटर चल दो ना।

कंचन:- क्यों तू रात में मेहंदी लगाएगी क्या?

ऐमी:- हां समझ गई, मुझे ही पाऊं दबाने होंगे।

शॉपिंग खत्म करके सभी पहुंच गए फ्लैट। अपस्यु और ऐमी आगे और कंचन जूनियर्स के साथ पीछे खड़ी थी। जैसे ही दोनो की पहली झलक मिली, कुंजल जोड़ से चिल्लाती हुई… "मां ने कहा है जबतक वो आ नहीं जाती, तबतक आप दोनो बाहर ही रहेंगे।"..

अपस्यु:- और मासी जो साथ आयी है, उनका क्या करना है, उन्हें भी बाहर खड़ा कर दूं क्या?

कुंजल दोनो के पास पहुंचती…. "कहां है मासी"..

अपस्यु और ऐमी दोनो किनारे हुए और सामने उसे कंचन दिखने लगी…. "ये दृश्य भईया की मां है। और ये दोनो क्यूट जूनियर्स दृश्य भईया के बच्चे है।"..

कंचन:- मुझे बाहर ही खड़ी रखोगी या अंदर भी आने दोगी…

कुंजल, सबको अंदर बिठाते…. "मासी आप बहुत अच्छे वक़्त में आयी है। देखो ना भैया अपनी मनमानी पर उतर आए हैं।"..

कंचन:- आज रहने दे बेटा, आज इसे कुछ सुनाओगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। कल पंचायत लगाएंगे और दोनो को सजा देंगे।

कुंजल, अपस्यु और ऐमी को देखते हुए…. "हिहिहिही, क्या हुआ मासी, आपको तंग करने गए थे और उल्टा इन्हे सुना दिया किसी ने"…

कंचन:- छोड़ो इसे, ये मुझे बोलकर लाया है कि दिल्ली मै खूब मस्ती करेंगे, क्या सच बोलकर लाया है या मुझे यहां बोर होना पड़ेगा।

कंचन अपनी बात कह ही रही थी कि बाहर से नंदनी, आरव और स्वास्तिका के साथ घर पहुंची। नंदनी कंचन को देखकर एक बार अचंभे में पर गई, फिर तेजी के साथ उसके पास पहुंचती… "मुझे यकीन नहीं हो रहा दीदी, आप यहां आयी है।"

कंचन:- हां यकीन कैसे होगा, याद होती तो ना कभी बुलाती।

नंदनी:- राठौड़ मेंशन में कल गृह प्रवेश का कार्यक्रम है, तो उसी सिलसिले में आज मै आपसे बात करती दीदी।

कंचन:- ओह इसलिए ये दोनो पहुंच गए मुझे लेने। लगता है तुम्हारी दिल की बात को भांप लेते हैं ये दोनो नंदनी।

नंदनी, अपस्यु के कान पकड़ती…. "दीदी, तुम जानती हो, अपस्यु बिल्कुल सुनंदा दीदी कि कॉपी है, शांत, गंभीर और उन्हीं की तरह बिल्कुल शरारती भी।"

अपस्यु:- आपने मां के बारे में ये बातें कभी नहीं बताया मुझे।

नंदनी:- हां इसलिए नहीं बताई, ताकि तुम्हारी शरारतें और ना बढ़ जाए। वैसे दीदी साथ आयी है इसलिए बच भी गए वरना तुम दोनो की खैर नहीं थी। अब जाओ तुम लोग अपना काम देखो, हम जरा गप्पे लड़ाते हैं।

सभी वहां से निकल गए और उन दोनों को अकेले बात करने के लिए छोड़ दिया गया। 1,2 घंटे घर पर बिताने के बाद अपस्यु ऐमी को लेकर जैसे ही सिन्हा जी के यहां छोड़ने जाने लगा, कुंजल भी उसके साथ हो ली।

ऐमी के घर से लौटते वक़्त… "भाई, वहां मासी के घर क्या हुआ था, किसी ने कुछ कहा था क्या?"

अपस्यु:- ना रे बाबा, बस छोटी सी गलतफहमी हो गई है। वो छोड़ ये बता अब तो दिल नहीं जलेगा ना, तू खुश है ना अब।

कुंजल:- आपने कमाल ही ऐसा किया है कि खुश ना रहूं, बेहद खुश हूं। अब सारे दुश्मन खत्म और फैमिली टाइम शुरू। अच्छा सुनो मै सोच रही थी कल से कॉलेज शुरू कर दू।

अपस्यु:- हां तो परेशानी किस बात की आ रही है?

कुंजल:- वो कॉलेज में स्पोर्ट्स शुरू हो रहे है और मै भी हिस्सा लेना चाहती हूं।

अपस्यु:- बॉक्सिंग में हिस्सा लेगी या कुस्ती में।

कुंजल:- सीट पर बैठकर सिटी बजाने में हिस्सा लुंगी।

अपस्यु, झटके से ब्रेक लगाकर कुंजल को घूरते हुए…. "अब ये मत कहना कि तुमने मेरा नाम प्रतियोगिता में डाल दिया है।"

कुंजल इधर-उधर देखती, धीमी सिटी बजाती हुई….. "बहुत ज्यादा नहीं केवल एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, डांसिंग, और जिम्नास्टिक में नाम डाला है।

अपस्यु:- एथलेटिक्स को जरा एक्सप्लेन करेंगी मैम।

कुंजल:- ऑफ ओ एथलेटिक्स मतलब एथलेटिक्स। तरह तरह की रनिंग, तरह तरह के थ्रो, लोग जंप, हाई जंप, सिर्फ इतना ही।

"सिर्फ इतना ही"… अपस्यु गुस्से में उसे घूरते हुए कहने लगा..

कुंजल:- अपना ये लुक बाद में देना, मुझे बस तुम्हे जीतते हुए देखना है।

अपस्यु:- अब मै कुछ कहूंगा तो तुम गुस्सा कर भाग जाओगी। फिर मै मनाऊंगा और तुम रोने लग जाओगी, क्योंकि मेरी बात तुम्हे बुरी लगी होगी और तुम्हे मनाने के लिए अंत में मुझे कमिटमेंट करना ही होगा। ऐसा ही है ना।

कुंजल:- वाह भईया आपके साथ एक बात कि समस्या नहीं होती, ज्यादा ड्रामा नहीं करना पड़ता।

अपस्यु:- मुझे ऐसा क्यों लग रहा है, मुझे तुम्हारी शादी करवा देनी चाहिए।

कुंजल:- तो भी मै तुम्हारे पास ही रहने वाली हूं, ये क्यों भुल जाते हो।

अपस्यु:- हां ठीक है समझ गया। दुश्मन कहीं की, जब देखो तब बॉम्ब फोड़ देती है।

कुंजल:- मुझे जीत कि सिटी बजानी है और किसी भी खेल में हारे तो देख लेना।

अपस्यु:- हां ठीक है मै पूरी कोशिश करूंगा। अच्छा सुनो अभी हम राठौड़ मेंशन चल रहे है। वहां के लोगों को थोड़ा समझा ले और उसकी भी सुन ले।

कुंजल:- ठीक है गाड़ी रोक दो, मै टैक्सी लेकर यहां से घर चली जाऊंगी।

अपस्यु कार की स्पीड बढाते…. "ऐसे कैसे अकेली भाग जाएगी। वहां बिल्कुल शांत रहना और मेरी मदद करना।"..

दोनो कुछ देर में राठौड़ मेशन पहुंच गए। अपस्यु को देखकर वहां के लोग बहुत ज्यादा खुश नहीं नजर आ रहे थे। 15 अगस्त के के बुरे झटके अब तक वहां मातम की तरह पसरा हुआ था।

लगभग घंटे भर की माथा-पच्ची के बाद ,वहां के लोग कुछ शांत हुए। हालांकि उन लोगों को अपस्यु से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन गम में डूबा हुआ मन कुछ शिकायतें तो जरूर करता है।

एक बात तो यह भी सत्य थी कि लोकेश और कंवल की पत्नी को 2500 करोड़ की धन राशि सौगात में मिली थी और वो दोनो उन पैसों के साथ दिल्ली छोड़ने का मन बना चुकी थी। वहीं कुसुम और उसकी मां, राठौड़ मेंशन से कहीं और शिफ्ट होने का सोच रही थी। अपस्यु ने बहुत समझाने कि कोशिश की दोनो यहीं रुक जाए, लेकिन कुसुम नहीं मानी।

अंत में यही तय हुआ कि अपस्यु उन्हें घर देगा और ये फाइनल था। कुसुम ना चाहते हुए भी हां कह दी। अगले सुबह ही राठौड़ मेंशन पुरा खाली हो चुका था और शाम तक हर कोई राठौड़ मेंशन में शिफ्ट कर चुके थे। राठौड़ मेंशन में उसके असली मालिको की वापसी हो चुकी थी, पुरा मेंशन दुल्हन की तरह चमक रही थी। हर कोई खुश थे और अपने अपने पसंद के कमरे चुन रहे थे।

अगली सुबह सब अपने-अपने काम में लगे हुए थे और अपस्यु अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए काया से मिलने चल दिया। काया कल से एक होटल मै रुकी हुई थी, बेल बाजी और काया दरवाजा खोलती…. "अपस्यु सर आपको आज फुर्सत मिली है।"..

अपस्यु:- चलो चलकर पहले तुम्हारा नया घर दिखाया जाए।

अपस्यु, काया को लेकर अपने फ्लैट ले आया… "काया मैम, चुन लीजिए ऊपर के फ्लोर से कोई भी फ्लैट, जो आपको पसंद हो।"..

अपस्यु:- कोई भी देदो, रहना ही तो है यहां..

अपस्यु, उसे अपने फ्लैट में बिठाते… "ठीक है, 301 और 302 मेरा है, 303 तुम ले लो।"..

काया:- तुम सब तो राठौड़ मेंशन में शिफ्ट कर गए हो ना, मुझे ये घर दे दो।

अपस्यु:- वो शिफ्ट किए है मै नहीं। मुझे अपना काम खत्म होने तक यहीं रहना होगा।

काया:- कल शाम तुम्हारे पुरा परिवार को देखी थी, वो तुम्हे यहां रहने को लेकर राजी नहीं होंगे।

अपस्यु:- इसी बात की चिंता तो मुझे भी है। खैर थोड़ा काम की बात हो जाए..

काया:- हां बिल्कुल, बताओ किसे फसाना है।

अपस्यु:- मतलब…

काया:- मतलब सारे वीरदोयी में मुझे यहां लेकर आए हो, इसका साफ मतलब है किसी को रूप जाल में फंसाना है ना। बस तुम भी दूसरों की तरह कपड़े उतारने मत कह देना, वरना विश्वास टूट जाएगा।

अपस्यु:- हां मुझे पता है विश्वास टूट जाएगा, लेकिन मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं है, मैं मजबूर हूं।

काया, निराशा भरी मुस्कान देती…. "तुमने भी फर्क ना समझा अपस्यु। खैर तुम्हारी ऋणी हूं, इसलिए मै तुम्हारा काम करूंगी।

अपस्यु:- ऐसे मायूस ना हो, पहले बात सुन लो, मै इतना मजबूर नहीं की किसी कमिने को फसाने के लिए तुम्हे कपड़े उतारने कह दूं। और कोई अच्छा है तो उसके लिए तुम्हे क्यों लेकर आऊंगा।

काया:- पहेली बुझाना बंद करो और सीधा-सीधा मुद्दा बताओ।

अपस्यु:- यहां के एक एमपी है सोमेश, उसकी बेटी लिसा को पटाना है।

काया, चौंकती हुई…. "क्या?"

अपस्यु:- हां तुमने सही सुना, अब समझ सकती हो, मै क्यों मजबूर हूं।

काया:- हद है तुम्हरे कहने का मतलब है कि मै एक लड़की को पटाऊं, वो क्या वैसी वाली है।

अपस्यु:- हां लिसा लेस्बियन है, और तुम्हे उसी को पटाना है। हम अपने लक्ष्य की ओर बहुत ही धीमे बढ़ेंगे इसलिए कह नहीं सकते कि तुम्हे उसके साथ… तुम समझ रही हो ना।

काया:- ईईईईईईईईईईईईई… मै लड़की होकर लड़की को चुमुं। मुझ से नहीं होगा, तुम ऐमी से कह दो ये करने। कोई लड़का तो नहीं जो तुम्हारे दिल को चोट पहुंचे।

अपस्यु:- जब हम काम में होते है तो बस अपने लक्ष्य को साधने की कोशिश करते है। फिर उसमे हमारे पर्सनल इमोशंस बीच में नहीं आते। लेकिन ऐमी ये काम नहीं कर सकती।

काया:- कारन..

अपस्यु:- उसका पिताजी, सोमेश मेरा करीबी कॉन्टैक्ट में से है, और लिसा हम सब को जानती है। इसलिए वो ऐमी से पटेगी नहीं और ताज़ा-ताज़ा अभी उसका ब्रेकउप हुआ है, तो हमारे पास अच्छा मौका है।

काया:- पता होता कि ऐसा कुछ होने वाला है तो मै नीलू को भेज देती। मुझे पूरी बात समझाओ की तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है? उसी के बाद मै हां कहूंगी।

तकरीबन आधे घंटे तक अपस्यु ने अपने योजना कि लगभग सारी बातें बता दिया। काया पूरी बात ध्यान से सुनने के बाद… "ठीक है, समझ गई, उस लिसा के साथ मुझे लेस्बो होना पड़ेगा। बाकी उसे पटाने का पूरा बैकग्राउंड तो तुम ही तय करोगे।"

अपस्यु:- हां लिसा और तुम्हारी नजदीकियां का पूरा पटकथा हम लिख देंगे, बस तुम उसका और अपना पूरा ध्यान रखना। कोई हीरो बनने की जरूरत नहीं है, खतरा दिखे तो पीछे हट जाना।

काया:- तुम भुल क्यों जाते हो मै एक वीरदोयी हूं और मुझमें आम इंसानों से 20 गुना ज्यादा क्षमता है।

अपस्यु:- वेरी फनी, भले तुम 4-5 साल सीनियर हो मुझ से लेकिन यहां का बॉस मैं हूं। इसलिए बोल दिया ना कोई हीरो बनने की जरूरत नहीं है, मतलब नहीं है।

काया:- मेरे एक्शन से तुम टेंशन में क्यों आ गए अपस्यु?

अपस्यु:- क्योंकि जो कमजोर दिखते है वो दरअसल कमजोर होते नहीं है। पूर्व आकलन हमे परेशानी में डाल सकती है। मै एक ही बात जानता हूं, ऐसे सफल मिशन का क्या फायदा, जिसमें आपके साथी कहीं खो जाते है। समझी मैम।"

अपस्यु अपनी बात कहकर काया की ओर देखने लगा। काया भी अपस्यु की बातों का अभिवादन करती हुई मुस्कुराई और अपस्यु के कहे अनुसार काम करने का वादा करती हुई, अपने फ्लैट को देखने चल दी।
 
Update:-145

अपस्यु अपनी बात कहकर काया की ओर देखने लगा। काया भी अपस्यु की बातों का अभिवादन करती हुई मुस्कुराई और अपस्यु के कहे अनुसार काम करने का वादा करती हुई, अपने फ्लैट को देखने चल दी।

अपस्यु उसे 303 नंबर की फ्लैट दिखाने लगा। सारा सामान सब कुछ पहले से उस फ्लैट में मौजूद था। काया फ्लैट को देखती हुई… "यहां तो सारा सामान पहले से है।"

अपस्यु:- मेरे तो हर फ्लैट में ऐसे ही जरूरत के सारे समान मिल जाएंगे।

काया:- हम्मम ! अच्छा है लेकिन अपस्यु पुरा दिन घर में रहकर मै बोर नहीं हो जाऊंगी।

अपस्यु:- हां पता है इसलिए मैं 2 ऑप्शन सोच रखा था। या तो मायलो का ऑफिस ज्वाइन कर लो और वहां एक अच्छा सा लड़का देखकर उसे से शादी कर लो, या फिर अपना कोई काम शुरू कर दो, जिसमें तुम्हे रुचि हो। एक बढ़िया सा लड़का देखो और परिवार संग खुशियां बांटो।

काया:- मेरी एक ड्रीम जॉब है, मदद करोगे।

अपस्यु:- कौन सा ड्रीम जॉब..

काया:- रैंप वॉक का। मै एक मॉडल बनना चाहती थी।

अपस्यु:- हां तो बन जाओ। मै स्वास्तिका से बात कर लेता हूं, वो तुम्हे प्रोफेशनली तैयार होना सीखा देगी। यहां पता कर लो कि कौन मॉडलिंग सिखाता है, वहां जाकर ट्रेनिंग ले लेना। बाकी अपनी कंपनी के ब्रांड प्रमोशन के लिए तुम्हे ही ले लिया जाएगा। हैप्पी ना।

काया:- वेरी हैप्पी, और हां थैंक्स.. तुम वाकई बहुत प्यारे हो।

कुछ देर और काया से बात करने अपस्यु जैसे ही वहां से निकलने लगा, कुंजल में उसे तुरंत कॉलेज पहुंचने के लिए बोल दी। यूं तो अपस्यु का मन थोड़ा मिश्रा परिवार घूमकर आने का हो रहा था, लेकिन कुंजल के बुलावे के कारन उसे दौलतराम कॉलेज पहुंचना परा।

"कैसी हो लावणी। और कुंजल दीदी जी क्यों याद किया आपने।"… अपस्यु, कुंजल और लावणी के पास बैठते हुए कहने लगा।

लावणी:- आरव नहीं आया कॉलेज।

अपस्यु:- कल से शायद वो भी आ जाए।

कुंजल:- लावणी अभी जिस काम के लिए बुलाया है उसे तो कह दो।

अपस्यु:- लावणी, लेकिन तू तो भाभी कहती थी ना।

कुंजल:- हिहिहिहिही… कॉलेज है भईया, यहां थोड़े ना भाभी कहूंगी, वरना बेचारी शरमाई, शरमाई सी घूमेगी।

अपस्यु:- ओह ऐसी बात है क्या। वैसे ये टेबल खाली क्यों है? सुनो सुमित भाई, 3 कॉफी देना।

लावणी:- हां कॉफी भी पी लेंगे, लेकिन पहले हमारी भी तो सुन लीजिए।

अपस्यु:- हां बोलिए मिस लवली, आपको देख लो तो अपने आप मुस्कान आ जाती है।

लावणी:- प्रिंसिपल को मैनेज करना है, उन्होंने हमारे कॉलेज से गायब होने के कारन नोटिस दे दिया है।

अपस्यु:- हां ठीक है वो मैनेज हो जाएंगे। और कुछ।

"हां, मुझे क्लास करने में मज़ा नहीं आ रहा, कल से चुपचाप क्लास अटेंड करने आ जाना।"… पीछे से साची उसके कंधे पर हाथ देती हुई कहने लगी।

अपस्यु:- हां ठीक है कल से क्लास अटेंड करने आ जाऊंगा। वैसे कुछ नया ताज़ा।

साची:- हां सुनैना मैम तुम्हारे बारे में अक्सर पूछती रहती है।

अपस्यु:- हां ठीक है कल से आ जाऊंगा, ज्यादा फिरकी लेने की जरूरत नहीं है। पहले चलो प्रिंसिपल ऑफिस, वहां उन्हें मैनेज करना है, बिना छुट्टी के गायब रहे है तो बहुत ही ज्यादा खफा है।

साची:- पर मै क्यों जाऊं?

अपस्यु, साची का हांथ पकड़कर खिंचते हुए बाहर ले जाते…. "नौटंकी मत करो ज्यादा, बस जो बोला वो करो।"….

दोनो को यूं एक दूसरे के साथ जाते देख, लावणी गहरी श्वांस लेती हुई कहने लगी… "ऐसा लग रहा है अब सब नॉर्मल हो गया है दोनो के बीच।"..

कुंजल:- हां सही कही। बहुत बुरे दौर से गुजरना पड़ा था साची को भी। ..

इधर अपस्यु, साची का हाथ खिंचते प्रिंसिपल ऑफिस के ओर बढ़ रहा था… "अरे हाथ तो छोड़ो मेरा, वरना कलाई तुम्हारे हाथ में रह जाएगी। वैसे भी मै ही उल्टा तुम्हे खींचकर लाने वाली थी, बहुत सी बातें करनी है तुमसे।

अपस्यु, साची की कलाई छोड़कर उसकी ओर मुड़ते हुए… "हां जनता हूं, इसलिए खींचकर लाना पड़ा, वरना तुम फटी ढोल कैंटीन में ही पूछना शुरू कर देती।"..

दोनो साथ चलते हुए पार्किंग में पहुंचे और अपस्यु उसे कार में बिठाया…. "फिर से पागलपन वाले राइड पर चल रहे हो क्या?"..

अपस्यु:- नहीं रे बाबा, ये कार साउंड प्रूफ है इसलिए लेकर आया। तुम कुछ पूछो उससे पहले ही बता दूं, 15 अगस्त की रात तुम्हारे पापा भी उसी महफिल में थे और इंटेलिजेंस की पूरी टीम थी वहां पर।

साची, अपस्यु के गले लगती…. "तुम्हारा धन्यवाद, मै अपने पापा से बहुत प्यार करती हूं। तुमने जो भी मेरे लिए किया उसका शुक्रिया।"..

अपस्यु:- अरे झल्ली कार में गले ना लगो, लोग गलत समझ लेंगे।

साची:- जिसे जो सोचना है सोचे, लेकिन जो कुछ भी तुमने मेरे पापा के लिए किया है, उसका शुक्रिया।

अपस्यु:- हां ठीक है, वैसे ध्रुव का क्या हाल है?

साची:- आज कल थोड़े टेंशन में रहता है, बोल रहा था यूएस वापस चला जाएगा।

अपस्यु:- हां बुरा वक़्त उसके लिए भी चल रहा है। लेकिन मै भी क्या कर सकता हूं, प्रकाश जिंदल मुख्य अभियुक्त था।

साची:- छोड़ ये, मै संभाल लुंगी उसे, बस मेरा एक छोटा सा काम कर देना।

अपस्यु:- हां बोलो ना..

साची:- मेरे घर का माहौल ठीक नहीं है। पापा और छोटे पापा में आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर बहस होते रहती हैं। अब तुम लोग राठौड़ मेंशन शिफ्ट कर गए हो, तो कुछ दिनों के लिए अपना फ्लैट ध्रुव को दे देते, जबतक दिल्ली में वो अपना कोई स्थाई ठिकाना नहीं ढूंढ लेता।

अपस्यु:- पागल हो तुम भी, एक कॉल कर देती तो अब तक सब हो भी गया होता। तुम क्या मूहर्त का इंतजार कर रही थी, या मेरे कॉलेज आने का।

साची:- बात वो नहीं है अपस्यु। ध्रुव पुरा लीगल मामले में फसा हुआ है। ध्रुव अपने पिता के बिजनेस को आगे बढ़ा रहा था और प्रकाश अंकल के नाम की जितनी भी चीजें थी, उसपर स्टे लग गया है। यहां तक कि अकाउंट पर भी। ध्रुव पुरा सड़क पर आ चुका है। मेघा दीदी हालांकि अपने हिस्से के आधे पैसे दे रही थी, लेकिन ध्रुव ने नहीं लिया। पता नहीं उसके दिमाग में क्या चल रहा है।

अपस्यु ने उसी वक़्त काया से बात करके उसे कुछ समझाया और कुछ पेपर्स लेकर सिन्हा जी के ऑफिस पहुंचने के लिए कहने लगा। और इधर से अपस्यु ने भी अपना कार स्टार्ट कर लिया।… "अभी तो कहे थे कोई ड्राइव नहीं, सिर्फ बात करनी है।"..

अपस्यु:- तब सिचुएशन ऐसी नहीं बनी थी ना, अब बन गई है।

साची:- मतलब मै समझी नहीं।

"एक मिनट होल्ड करो।"…. साची को रोककर उसने ऐमी को कॉल लगा दिया..

ऐमी:- जी सर कहिए..

"बापू के ऑफिस पहुंचो, एक ऑफिशियल मीटिंग के लिए।"… कहकर अपस्यु ने फोन काट दिया और साची को लेकर सिन्हा जी के ऑफिस पहुंच गया। ऑफिस के रिसेप्शन में बैठकर 2 मिनट भी नहीं हुए होंगे, ऐमी पहुंच गई… "हेल्लो साची कैसी हो।"..

साची:- अच्छी हूं, तुम बताओ।

ऐमी:- मै भी अच्छी हूं। अपस्यु डैड कोर्ट गए है। अगर छोटा काम है तो उन्होंने बोला है हाई कोर्ट से करवा लेने के लिए, और बहुत जरूर है तो 2 बजे में एक बार बात कर लेने, नहीं तो रविवार की सुबह आराम से बात कर लेंगे।

अपस्यु:- नहीं बहुत ज्यादा इमरजेंसी नहीं है। रात को बस बापू के कान में डाल देना ध्रुव की कंपनी लीगल में फस गई है, उसे निकालना है। और अभी चलते हैं, एक फ्लैट काया के नाम पर रजिस्टर करना है और दूसरा साची के नाम पर।

ऐमी:- ठीक है चलो चला जाए।

अपस्यु:- क्या हुआ कुछ कर रही थी क्या?

ऐमी:- नहीं वैभव के स्कूल जाना था वहां से कॉल आया था।

अपस्यु:- कितने बजे जाना है।

ऐमी:- नहीं तुम रहने दो मै चली जाऊंगी। तुम इनका काम करवा दो।

अपस्यु:- ठीक है, तुम जाओ मैं फ्री होकर तुमसे बात करता हूं।

साची:- अरे ये तुम दोनों आपस में ही क्या बातें कर गए, कुछ मुझे भी समझने दो। अपस्यु तुम यहां मुझे क्यों लेकर आए हो, और ये फ्लैट रजिस्ट्रेशन का क्या चक्कर है? प्लीज ऐसे कंफ्यूज मत किया करो।

अपस्यु:- मै एक फ्लैट तुम्हारे नाम से रजिस्ट्रेशन करवा रहा हूं, तुम उसे ध्रुव को गिफ्ट कर देना।

साची:- पागल हो क्या, मै नहीं ले सकती।

अपस्यु:- एहसान नहीं कर रहा मै। उसकी कंपनी लीगल में फसी है, मै क्लीन चिट दिलवाकर जब काम शुरू करवा दूंगा, तब अपना घर खरीदने के बाद मुझे वो फ्लैट वापस कर देना।

साची:- तो इतना चक्कर क्यों घूमना, जबतक काम नहीं शुरू हो जाता तबतक रह लेने दो, बाद में वो शिफ्ट कर जाएगा।

ऐमी:- नाह ! ऐसा नहीं होगा और तुम ज्यादा मुंह मत खोलो। जैसा अपस्यु ने कहा वैसा ही होगा।

लगभग 15 मिनट की मशक्कत के बाद साची राजी हुई। इस बीच काया भी पहुंच गई थी। अपस्यु ने फ्लैट 303 और 304 का रजिस्ट्रेशन दोनो के नाम पर करके वहां से वापस कॉलेज निकल आया। अपस्यु कॉलेज लौटते ही, लावणी और कुंजल के काम से सीधा प्रिंसिपल ऑफिस पहुंच गया।

लेकिन प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर भारी भिड़ थी और वहां मौजूद छात्र काफी गुस्से में नजर आ रहे थे।…. "क्या हुआ यहां, किसी का मर्डर तो नहीं हो गया साची।"..

"रुको पता करके बताती हूं।"…. साची इतना कहकर एक विदर्थी को टोकती… "सुनिए यहां इतने स्टूडेंट क्यों जमा हो हुए है।"..

स्टूडेंट:- आज इस साले प्रिंसिपल का जुलूस निकालना है।

साची:- मैटर क्या है दोस्त..

स्टूडेंट:- हाय पहली मुलाकात में ही दोस्ती। मेरा नाम सुभाष है, बी टेक थर्ड ईयर।

अपस्यु:- भाई दौलतराम कॉलेज में बी टेक स्टूडेंट क्या कर रहे है? ये तो हम जैसे नॉर्मल स्टूडेंट का नॉर्मल डिग्री कॉलेज है।

स्टूडेंट:- तू कौन है बे जो इतनी इंक्वायरी कर रहा है। चल पीछे हट..

अपस्यु:- वाह दोस्त मेरे कॉलेज में आकर मुझे ही पीछे हटने कह रहा है। अब जल्दी मैटर बताएगा, हमारे प्रिंसिपल की घेराबंदी क्यों कर रहा है?

स्टूडेंट:- तेरे प्रिंसिपल ने हमारे एक दोस्त को छेड़ा है, उसे तो आज सबक सीखा कर जाएंगे। थोड़ी देर में पूरी मीडिया यहां होगी, फिर हम तेरे प्रिंसिपल की धज्जियां उड़ा देंगे।

अपस्यु:- चल अपने लीडर को बुला, वरना कहीं मैंने गेट बंद करवा दिया तो यहां से टूटी-फूटी हालात में जाओगे।

स्टूडेंट, अपस्यु का कॉलर पकड़ते… "साले तू मुझे धमाका रहा है। चल भाग यहां से मादारचो..."… कहते हुए उस स्टूडेंट ने धक्का दे दिया। साची बौखलाई आगे बढ़ी ही थी कि अपस्यु उसे रोकते हुए भिड़ से दूर लाया और कहने लगा… "जाकर क्रिश से कहना मेन गेट बंद कर दे और जिसको भी फ्री का एक्शन देखना हो, बोल देना प्रिंसिपल ऑफिस पहुंच जाए।"..

अपस्यु, ने साची को वहां से भेज दिया और तुरंत कार में से अपना 4 फिट वाला 2 रॉड निकलकर, प्रिंसिपल ऑफिस के पास वापस आया। इस बार कोई बात नहीं, अपस्यु ने एक रॉड उस लड़के के पाऊं पर मरा और वो दर्द से चिल्लाते हुए वहीं बैठ गया। उसे दर्द में चिल्लाते देख, कुछ और स्टूडेंट पीछे मुरे। लेकिन इससे पहले वो कुछ बोलते या करते, अपस्यु के रॉड चल रहे थे और छात्र पाऊं पकड़कर नीचे बैठते जा रहे थे।

तकरीबन 10 स्टूडेंट को जब अपस्यु नीचे बिठा दिया तब आक्रोशित स्टूडेंट ने अपस्यु को चारो ओर से घेर लिया। अपस्यु अपना रॉड वहीं नीचे सड़क पर पटकते हुए चिल्लाया… "जिस-जिस को लगता है कि हमारे कॉलेज में आकर हमे ही गुंडई दिखा सकते हैं, वो आगे बढ़े। वरना अपने लीडर को भेज।"..

लेकिन कुछ लड़कों के नसीब में मार खाना लिखा था। वो अपस्यु पर झपटने की कोशिश करने लगे। अपस्यु बड़े आराम से नीचे बैठकर हर किसी के पाऊं को अपने रॉड का शिकार बनाता जा रहा था। 2 मिनट और गुजरे होंगे, वहां 20 लड़के जमीन पर बैठकर बाप बाप चिल्ला रहे थे।… "जिस-जिस को आज मार खाने का भूत सवार है वो आ जाए।".. अपस्यु की मार से घबराए विधार्थी ने बीच से जगह बना दी। इधर अपस्यु का भिर के अंदर से चिल्लाना सुनकर, कुंजल चिल्लाई… "भाई बीच में तुम फसे हो क्या?"..

अपस्यु:- मै क्यों फसने लगा कुंजल, यही लोग मुझे मारने का मुहरत निकाल रहे है। तू भी रॉड लेकर आयी हैं क्या?

कुंजल:- हां थोड़े एक्शन मै भी कर लेती अगर तुम बात करने के मूड में ना आओ तो।

अपस्यु:- अरे इनका लीडर ना आ रहा है। मैं बीच में आराम से बैठ हूं, तू रास्ता बना कर आ जा। आज दोनो साथ में एक्शन करेंगे।

भयभीत छात्र जो अपस्यु से थोड़ी दूरी बनाकर उसे घेरे थे, सबके एक दूसरे को आगे भेजकर खुद पीछे रहना चाह रहे थे और इसी चक्कर में कोई भी हमला नहीं कर रहा था। लेकिन इधर जैसे ही कुंजल को हरी झंडी मिली, वो भी अपना रॉड उठाकर एक्शन में मूड में आ गई। तभी लड़के एक किनारे होते…. "हम सब स्टूडेंट है, आपस में क्यों एक्शन करना दीदी.. आप जाओ भईया के पास।"..
 
Update:-146

भिड़ ने डर से रास्ता छोड़ दिया और कुंजल अपस्यु के पास पहुंच गई। अपस्यु अपने रॉड को जमीन में पटकते… "देखो मुझे प्रिंसिपल सर से भी मिलना है, उनसे कुछ बात करनी है। अब तुमलोग में से कोई यहां आकर मैटर बताएगा, या मै सबकी चमरी उधेड़ दूं।

"मेरा नाम विकास है, और मै अपने कॉलेज के स्टूडेंट संघ का प्रेसिडेंट हूं। देखो हम स्टूडेंट के बीच में लफड़ा नहीं चाहते है। तुम हमें शांति से काम करने दो। आपस में बैर अच्छी नहीं। अभी हम भले 200 है, लेकिन कब ये 200 लोग 2 लाख में बदल जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा।"..

अपस्यु:- पूरे दिल्ली में एक तू ही स्टूडेंट नेता है या यहां और भी लोग है खजूर। तू अकेला नहीं जो भिड़ जुटा सकता है, इसलिए पहले अपनी टोन बदल, और आराम से बात करना सीख।

विकाश:- हम्मम ! देख भाई हम यहां तेरे प्रिंसिपल से मिलने आए हैं, उसने हमारे साथ पढ़ने वाली एक लड़की के साथ अश्लील हरकत की है।

अपस्यु:- लड़की का वीडियो वाइरल हो गया क्या?

विकास:- नहीं वीडियो वाइरल नहीं हुआ है। बस हमे अपने दोस्तो से पता चला। तेरे प्रिंसिपल के बाजू वाले फ्लैट में 4 लड़कियां रहती है, उन्हीं में से 1 के साथ उसने ये अश्लील हरकत की है और बाकी 3 ने कन्फर्म किया हैं। देख दोस्त हम अपने जायज मांग पर है और तूने यहां कईयों को तोड़ दिया।

अपस्यु, कुंजल के कान में कुछ कहा और कार की चाभी उसे देते हुए, विकास से कहने लगा… "देख विकास मुझे 3 दिन का समय दे, यदि बात में सच्चाई निकली तो मैं उसके अगले 2 दिन में अपने प्रिंसिपल को लीगल लेकर जाऊंगा और सजा दिलवाऊंगा। यदि मै ऐसा ना कर पाया, फिर तुम्हे जो सही लगे वो करना, हम में से कोई बीच में नहीं आयेगा।"..

विकास:- ठीक है दोस्त हम 5 दिन रुक लेंगे और वादा रहा यदि वो लोग लड़की गलत निकली तो उन्हें तुम लीगल में लेकर जाना, हम में से कोई भी बीच में नहीं आएगा।

इतने में कुंजल भी वहां आ गई। उसके हाथ में 5 लाख रुपए थे, जो उसने अपस्यु को थमा दिए। अपस्यु उन पैसों को विकास के हाथ में देते हुए… "30 लोग टूटे है, उन्हें 15000 दे देना इलाज के लिए"..

विकास:- बाकी के 50000..

अपस्यु:- इतने सारे मेरे बाहर के दोस्त आए हैं, उन सबके के लिए एक छोटी सी पार्टी अरेंज कर देना।

विकास:- दे रहा है तो पुरा दे ना, फिर दारू तू देगा, चखना हम अरेंज करे।

अपस्यु:- काउंटी पार्टी है मेरे भाई, बाकी के काउंटी कर लेना… और हां विकास बाहर शायद पुलिस आयी हो तो बोल देना मैटर सैटल हो गया है, अंदर आने की जरूरत नहीं है। यहां प्रिंसिपल से मै फोन करवा दूंगा

विकास, अपस्यु की बात सुनकर हंसने लगा और वहां से अपने साथियों को लेकर चला गया। अपस्यु ने भी अपना रॉड कुंजल को दे दिया और जैसे ही खड़ा हुआ, प्रिंसिपल दौड़ते हुए उसके पास पहुंचे।… "तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया, तुम आओ मेरे साथ।"

प्रिंसिपल उसे अपने साथ चेंबर में लाते…. "तुम्हारा धन्यवाद मै कैसे कहूं, मुझे समझ में नहीं आ रहा।"

अपस्यु:- सर बूढ़े हो गए हो लेकिन दिमाग से हवस मिटती नहीं।

प्रिंसीपल:- हाहाहाहा, सीधा इल्ज़ाम। वैसे तुम्हारा नाम क्या है?

अपस्यु:- जी अपस्यु…

प्रिंसिपल:- ओह हो तो तुम हो अपस्यु। तुम्हे तो लगभग हमने कॉलेज से निकाल दिया है, केवल सुनैना के कारन तुम बचे हुए हो।

अपस्यु:- काम की बात कर ले सर…

प्रिंसिपल:- हां काम कि बात। देखो घटना 2 लोगों के बीच की है और सबूत कुछ नहीं।

अपस्यु:- हां लेकिन आप दोषी है। ये मै दाबे के साथ कह सकता हूं।

प्रिंसिपल:- और तुम्हारे ऐसा कहने का आधार..

अपस्यु:- सुनीता नायर, लालनी मिश्रा, अरुणा नामदेव, जसप्रीत कौर, उत्तमरीत डिल्लो.. और भी नाम गिनवा दूं क्या?

प्रिंसिपल:- भाई तुम जासूस हो क्या। हां सबके नाम सही है लेकिन इतने अंदर की खबर तुम कहां से निकाल लाए।

अपस्यु:- आप के दोस्त सोमेश से, कहो तो फोन लगा दूं..

प्रिंसिपल:- मदर.. सॉरी, उसे लगाओ फोन और मेरी बात करवाओ..

अपस्यु ने तुरंत वहीं से सोमेश को कॉल लगा दिया। सोमेश कॉल उठाते ही… "देख अपस्यु मै बहुत बिजी हूं, अगर किसी बात को लेकर भेजा खाओगे तो मै फोन काट दूंगा।"..

अपस्यु:- आपके मित्र आलोक अवस्थी जी है मेरे साथ, और उनके चर्चे आम होने से मैंने अभी के लिए बचा लिया है।

प्रिंसिपल:- तुम मामूली लड़के नहीं हो अपस्यु, फोन स्पीकर पर डालो…

जैसे ही फोन स्पीकर पर हुआ… "सोमेश तूने इस बच्चे से मेरे कॉलेज की कहानी बताई।"..

सोमेश:- वो तो मेरा बाप है, कुछ देर में तू भी ये बात मान लेगा। ये बताओ ये क्या कह रहा है, तुम्हारे चर्चे आम होने से क्या मतलब था उसका।

प्रिंसिपल:- मुझ पर फिर से वही इल्ज़ाम लगा है, लेकिन यार इस बार मै दुखी हूं, बहुत दुखी। 22-23 की बच्ची है यार और मै अचंभे में हूं।

सोमेश:- अपस्यु, आलोक क्लीन है। मैंने जितनी भी लड़कियों के नाम बोले थे, उन सब के साथ बहुत फ्रेंडली रिलेशन था आलोक का। तुम ये समझ लो कि उस समय में जब एक लड़का-लड़की का साथ देखा जाना चर्चा का विषय बन जाता था, उस वक़्त आलोक पूरी रात उनके साथ पढ़ता था। और पढ़ना मतलब केवल पढ़ना। वो अपने समय का फिजिक्स में गोल्डमेडलिस्ट था। वो यूएस, यूके, जर्मनी में कहीं भी हो सकता था, लेकिन उसने अपना घर चुना।

आलोक आईआईटी में पढ़ा सकता था, लेकिन उसने डिग्री कॉलेज चुना और यहां के छात्रों को फिजिक्स पढाता है। इसके कई सारे स्टूडेंट विदेशों में है। इसके लिखे कई सारे टॉपिक टेक्स्ट बुक में है। यूं समझ लो इसकी तारीफ में मेरा पूरा दिन निकल जाएगा लेकिन चर्चा खत्म नहीं होगी। मुझे नहीं पता उस लड़की ने ऐसा क्यों किया, लेकिन मेरा दोस्त क्लीन है।

अपस्यु:- बहुत गहरी दोस्ती लगती है। चलो मै फोन रखता हूं, कल आऊंगा मिलने।

सोमेश:- नाना बिल्कुल मत आना, मै बाहर जा रहा हूं कुछ महीनों के लिए।

अपस्यु, फोन काटते हुए….. "ठीक है सर आप क्लीन है अब मै मान गया। मै आपका काम कर दूंगा लेकिन उसके बदले में मुझे कुछ चाहिए।"..

सोमेश:- हाहाहाहा.. बदले में क्या चाहिए वो भी बता ही दो।

अपस्यु:- आप मुझे फिजिक्स पढ़ाएंगे।

सोमेश:- क्या ? लेकिन तुम तो..

अपस्यु:- हां मै तो हिन्दी का छात्र हूं। लेकिन आपके लिए 30 लड़कों की टांग तोड़ी ना, अब आपका केस भी सॉल्व करूंगा। तो क्या ये सब मेरा विषय है।

प्रिंसिपल:- हम्मम ! ठीक है मै तुम्हे पढ़ा दूंगा, बस इस मामले को सुलझा दो। मै तो अब भी नहीं समझ पा रहा की हुआ क्या? सुबह तक तो सब नॉर्मल ही था।

अपस्यु:- सर एक बात और थी, मेरी बहन कुंजल और मेरी होने वाली भाभी लावणी कुछ दिनों के लिए कॉलेज नहीं आए थे और आपने उन्हें नोटिस भिजवा दिया।

प्रिंसिपल:- वो लड़की साची और आरव तुम्हारे रिश्ते में नहीं है क्या?

अपस्यु:- है ना सर, साची मेरी एक्स गर्लफ्रेंड है और मेरी होने वाली भाभी की चचेरी बहन। और आरव मेरा भाई है, जिसकी शादी लावणी से होने वाली है।

प्रिंसिपल:- कमाल है, पुरा खानदान ही यहां कॉलेज में है। वैसे वो तुम्ही हो ना जिसने होम मिनिस्टर के बेटे को मार खिलवाया था इन्हीं दोनों बहनों के हाथो।

अपस्यु:- हां वो नाचीज़ मै ही हूं। चलता हूं सर, कल मुलाकात करेंगे।

अपस्यु अपनी बात कहकर जैसे ही प्रिंसिपल ऑफिस से बाहर निकला, कुंजल समेत सब लोग वहीं मौजूद थे। जैसे ही अपस्यु बाहर आया सब लोग हूटिंग करने लगे। उन्हें हूटिंग करते देख प्रिंसिपल बाहर आ गया और घूरती नज़रों से सबको देखने लगा। प्रिंसिपल को देखकर हर कोई वहां से भागने में ही भलाई समझे।

पूरे कॉलेज में आज अपस्यु के एक्शन की ही चर्चा हो रही थी। कुंजल तो जैसे खुद में प्राउड टाइप फील कर रही थी और अपने आसपास महफिल सजाए अपस्यु की कहानी बता रही थी। वहीं अपस्यु जब प्रिंसिपल ऑफिस से बाहर आया उसी वक़्त कंचन का संदेश उसके पास पहुंच गया और वो उसे तुरंत घर आने के लिए कह रही थी।

अपस्यु जैसे ही घर पहुंचा, वहां का माहौल काफी टेंशन भरा था, और कंचन का उड़ा चेहरा देखकर लग रहा था बहुत रोई है। जैसे ही वो अपस्यु को देखी, हिचकियां लेती वो लिपट गई। हिचकियां लेती बस किसी तरह एक ही बात रटती रही।…. "किसी तरह दिल को सुकून दिया की ऐक्सिडेंट में मरी थी मेरी बहन लेकिन उसे तो वक़्त से पहले किसी ने छीन लिया।"

कंचन सच बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, और अपस्यु उसे किसी तरह शांत करवा रहा था। काफी वक़्त लगा तब कहीं जाकर वो शांत हुई। किन्तु जब शांत हुई तो बिल्कुल ही शांत थी, शायद अपनी बहन के कत्ल के बारे में सुनकर सदमे में चली गई थी, ठीक वैसे ही जैसे यहां हर किसी का हाल पहली बार का था।

कंचन जब शांत हुई तब उसे रह-रह कर ये बात भी अखरती रही की प्रताप महल में इतने ताने सुनने के बाद भी अपस्यु ने किसी को अपने दर्द कि दास्तां नहीं सुनाई। अपनी मां के लिए सफाई पेश करता रहा, लेकिन यह किसी को नहीं कहा को दृश्य के लड़ाई में तो वो ना होकर भी साथ था, लेकिन उसकी लड़ाई में तो हम कभी थे ही नहीं, और ना ही उसने दृश्य से कभी मदद मांगी।

कंचन, राठौड़ मेंशन में शाम तक रुकी, फिर दृश्य को बुलाकर वो वापस प्रताप महल चली गई, क्योंकि कुछ लोगों को ये कहानी सुनानी जरूरी थी, जिसने भी अपस्यु पर सवाल उठाए थे। रात का वक़्त था, खाना खाने के बाद अपस्यु नंदनी के कमरे में ही आ गया और उसके गोद में सर रखकर लेट गया।

नंदनी उसके बालो में हाथ डाल कर धीरे-धीरे सर को दबाती हुई… "हम्मम ! मेरा बेटा आज चिंता में है क्या?"

अपस्यु:- हां थोड़ी सी मां। वैसे अभी तो मासी का ख्याल आ रहा है। ऊपर से आप पर गुस्सा भी। उन्हें सब बता दिया।

नंदनी:- मुझे लगा सब खत्म हो गया तो मैंने बता दिया। आखिर सच जानने का हक उन्हें भी है।

अपस्यु:- चलो छोड़ो उन्हें, मैंने दृश्य भईया से कह दिया है अभी इस बात को पूरा राज ही रखे। गलती हो गई सबके तरह आपको भी समझा देना चाहिए था अभी बीते बातों की चर्चा किसी से नहीं करने..

नंदनी:- लेकिन क्यों, अब तो सब खत्म है ना?

अपस्यु:- पहली बात… अभी मैंने सबको मना किया है, अपनी बीती कहानी किसी को नहीं बताने और पुरा राज रखने, क्योंकि हमारी पूरी कहानी टीवी पर आएगी। दूसरी बात जिसे हमने खत्म किया वो एक हिस्सा था, दूसरा हिस्सा बाकी है। और चौंकना मत।

नंदनी ऊपर से ही एक चमाट लगाते… "जी तो कर रहा है तबीयत से पिटाई करूं। जरूर यहां कुछ ऐसा कहने आया है जिससे मेरे दिल में छेद होने वाला होगा।"

अपस्यु, उठकर बैठ गया और नंदनी को समझाते हुए कहने लगा…. "मां आप मेरी बात सुनो। मै ये काम खामोशी से करना चाहता हूं और परिवार से अभी किसी को सामिल नहीं कर सकता। मैंने अपने जरूरत के लोगों को साथ ले लिया है। बस आखरी तमाशा जब होगा तब संबको सामिल करूंगा और उसमे आप भी होंगी।

नंदनी:- हम्मम ! तेरी बहुत फिक्र होती है कभी कभी। अब वो बात बताओ जो मुझे परेशान करने वाली है।

अपस्यु:- मै ज्यादातर वक़्त बाहर ही रहने वाला हूं। यूं समझ लो मेरा यहां रहना कभी-कभी होगा। ज्यादातर वक़्त फ्लैट में ही बीतेगा।

नंदनी:- साफ साफ क्यों नहीं कह देता हमारे साथ नहीं रहेगा।

अपस्यु:- मां, ऐसे इमोशनल करोगी तो मै कुछ नहीं कर पाऊंगा। उनकी मां कैसे रहती है जिनके बच्चे बॉर्डर पर होते हैं।

नंदनी:- हां तो उनके बच्चे बॉर्डर पर जाने से पहले कई साल तक अपनी मां के पास रहते है। तू उड़ता-फिरता रहता है। अपस्यु अपने सारे काम यहां से नही कर सकता क्या?

अपस्यु, नंदनी के गाल को चूमते… "मां मै तुम्हारे पास ही तो हूं। एक बात और कल से आप कंपनी का भी कुछ काम देख लो, क्योंकि आरव की अभी डिग्री तो कंप्लीट होने दो, इसी बहाने आप कम के कम सास-बहू सीरियल से तो दूर रहोगी।

नंदनी:- घर में जब इतने थ्रिल और सस्पेंस चल रहे हो फिर टीवी देखने की क्या जरूरत। वैसे तुम्हारा सुझाव अच्छा है, थोड़ा थ्रिल मै ऑफिस में भी बटोर लूंगी, वैसे भी अभी तो पुरा स्टाफ उनका ही होगा। लोगों की ठीक से पहचान करनी भी जरूरी है। एक बात और बेफिक्र होकर आगे बढ़ो पूरी हिम्मत से, यहां पुरा मै अकेले संभालेंगी, सभी को।

एक सुकून भरी रात थी। अपस्यु वापस से नंदनी के गोद में लेट गया। लेटे-लेटे उसने काफी सालों बाद वहीं सुकून की नीद मिली जो कभी अपनी मां के गोद में लेटकर मिलता था। अपस्यु कर्म पथ पर बढ़ चुका था। मार्ग तैयार था और सफर की शुरवात वो कर चुका था…
 
Update:-147

एक सुकून भरी रात थी। अपस्यु वापस से नंदनी के गोद में लेट गया। लेटे-लेटे उसने काफी सालों बाद वहीं सुकून की नीद मिली जो कभी अपनी मां के गोद में लेटकर मिलता था। अपस्यु कर्म पथ पर बढ़ चुका था। मार्ग तैयार था और सफर की शुरवात वो कर चुका था…

नंदनी अपस्यु को माना कर चुकी थी कि किसी को कुछ भी ना बताए, जो करना है करते रहे, बाकी यहां के लोगों को वो खुद संभाल लेगी। अपस्यु काफी सुकून में था, काफी सुबह उसकी नींद खुली और वो सीधा सिन्हा जी के यहां पहुंच गया।

जैसे ही अपस्यु दरवाजे से अंदर गया, वहां का माहौल देखकर… "क्या हो गया मीना इतना उथल पुथल किसने कर दिया।"..

मीना:- किसने, शैतान वैभव ने। ऐमी दीदी की ही सुनता है केवल ये, बाकी ये तो हमारे हाथ भी नहीं आता। दौरा-दौरा कर थका देता है भईया, पाऊं में जैसे पहिए लगे हो।

अपस्यु:- हा हा हा हा… ठीक है एक स्टाफ बढ़ा देते है, तुम्हारा कुछ काम हल्का कर देता हूं। ये ठीक रहेगा ना।

मीना:- ये आप अपने कंजूस शासुर को समझाओ, मै तो उन्हें कह-कह कर थक गई।

अपस्यु:- तुम बापू से क्यों की, ऐमी से बात कर लेती। तू भी ना पागल है।

मीना, बात को टालती… "भईया आप लिए चाय या लाऊं या कॉफी?"

अपस्यु:- मै कुछ पूछ रहा हूं मीना, जवाब क्यों नहीं देती..

मीना:- नहीं जवाब देना तब तो टाल रही थी। हमारे बीच कुछ दिनों से बातचीत बंद है।

अपस्यु:- हा हा हा हा… वैसे इस बार क्या हुआ?

मीना:- नाह ! हम दोनों का मैटर है, हम आपस में समझ लेंगे। हां पर 2 स्टाफ और बढ़ा दो, ये वैभव मेरे बस के बाहर की बात है।

अपस्यु, वहां से उठकर ऐमी के कमरे में जाते हुए… "ठीक है, तुम्हारी नज़र में कोई हो तो देख लेना, वरना मै ढूंढ़ता हूं।"… अपस्यु अपनी बात कहते ऐमी के कमरे में पहुंचा। चादर ताने ऐमी सुकून से लेटी हुई थी।

अपस्यु, बिस्तर पर चढ़ गया, प्यार से ऐमी को देखते हुए उसके चेहरे पर हाथ फेरने लगा। चेहरे पर हाथ का स्पर्श पाते ही ऐमी अपनी आखें खोली। अपस्यु को पास बैठे देख वो मुस्कुराई और चादर से अपने दोनो हाथ निकलकर अपस्यु को अपने बाहों में भर ली, और उसके होंठ चूमती हुई…. "नीचे इंतजार करो बेबी, मै तैयार होकर अाई।"..

अपस्यु:- हम्मम ! जल्दी आना मै इंतजार कर रहा हूं।

कुछ ही देर में ऐमी तैयार होकर नीचे आ चुकी थी। दोनो वहां से मुखर्जी नगर के लिए निकल गए, जहां कॉलेज के प्रिंसिपल आलोक अवस्थी रहते थे। सुबह के 6.30 बजे दोनो वहां पहुंच चुके थे। अपस्यु चोरी से प्रिंसिपल के फ्लैट में चला गया और ऐमी उन चार लड़कियों के फ्लैट में।

आलोक अवस्थी के घर का हॉल पुरा सुनसान था, शायद सभी जॉगिंग के लिए गए थे, वहीं ऐमी जब उन चार लड़कियों के कमरे में गई तो चारो चिर निद्रा में सोई हुई थी। ऐमी बाहर के हॉल में अल्ट्रा एचडी कैमरे को पोजिशन करके एक कमरे में घुसी और बिस्तर पर पानी उड़ेलती हुई 2 लड़कियों को उठाई।

हड़बड़ी में वो दोनो जागते, सामने खड़ी ऐमी को हैरानी से देखने लगी…. "ए कौन है तू, और चोरी से कैसे मेरे कमरे में घुसी।"..

ऐमी:- पुलिस.. 2 मिनट में चारो रूममेट हॉल में.. वरना चारो को घसीटकर थाने ले जाऊंगी और वहां पूछताछ होगी…

ऐमी अपनी बात कहकर हॉल में आ गई, और वहां आराम से बैठकर सुबह का समाचार देखने के लिए टीवी खोली। लेकिन टीवी पर भक्ति चैनल चल रहा था और सामने महीदीपी अपना प्रवचन से लोगों को जीने कि राह सीखा रहा था। सुबह-सुबह महिदीपि को टीवी पर देखकर ही ऐमी का दिमाग खराब हो गया… उसे देखने के साथ ही ऐमी जोर से चिल्लाई… "तुम लोगों का हुआ नहीं रे, जो इतना वक़्त लगा रही है।"..

एक लड़की हड़बड़ा कर बाहर निकल कर आयी… "मैडम वो फ्रेश होकर आ रही है।"..

ऐमी:- साली कमिनियो, ये देख रही है क्या लगा है, सिग्नल जैमर, अंदर अपने यार को फोन लगाना बंद कर वरना पिछवाड़े पर इतने डंडे मारूंगी की मुखर्जी नगर थाने का पूरा नक्शा छप जाएगा। बाहर आओ तुरंत।

ऐमी फिर से एक बार और चिल्लाई, सभी लड़कियां बाहर हॉल में। और फिर शुरू हो गया पूछताछ का दौड़। इधर जबतक अपस्यु हॉल में लगे क्राउच पर आराम से सर टिकाए अपनी सोच में डूबा था। सुबह के 7.15 मिनट हो रहे होंगे। घर का दरवाजा खुला, एक लड़की तौलिए से अपना चेहरा पोछति अंदर घुसी और सुकून की श्वांस लेती क्राउच पर जैसे ही बैठी, पास में अजनबी के लेटे देख… "आआआआआआआआआ"… तेज चींख ..

तेजी के साथ आलोक और उसकी पत्नी भी भागते हुए फ्लैट में पहुंचे… आलोक की बेटी मुंह फाड़ कर चिल्ला रही थी और अपस्यु कुछ दूर पीछे हटकर उसे बड़े गौर से चिल्लाते हुए देख रहा था…

आलोक अपनी बेटी को शांत करवाते…. "तुम यहां क्या कर रहे हो।"..

अपस्यु:- सर मुझे बस 1 मिनट दीजिए… ये खूबसूरत सी लड़की का नाम है रुनझुन, लसिथा उर्फ लिसा की बहुत गहरी दोस्त। शायद जेन और लिसा ने कभी मेरे बारे में इसे बताया हो।..

आलोक की बेटी रुनझुन हैरानी से उसे देखती… "तो वो कमिने लड़के तुम ही हो जिसका नाम अपस्यु है, देखो तुम अभी निकलो मेरे घर से, तुमसे तो लिसा ही बात करेगी।"

आलोक की बीवी, और रुनझुन की मां, आनंदी… "आलोक ये लड़का कौन है, और तुम इसे एक थप्पड़ लगाकर यहां से बाहर क्यों नहीं निकालते। ऐसे आवारा लड़के जो लड़की की डिटेल निकालकर उसके घर में घुसते है, उसे तुम सुन कैसे सकते हो।

आलोक:- अपस्यु क्या तुम्हे लिसा से प्यार है जो तुम उसकी इतनी डिटेल रखे हो या फिर तुम रुनझुन को पसंद करते हो?

रुनझुन:- पापा इससे बात क्यों कर रहे हो? अभी बाहर निकालो इसे?

आनंदी:- आलोक थप्पड़ मार कर बाहर करो।

आलोक:- एक मिनट तुम दोनों जारा अपने गुस्से पर काबू करना सीखो। कितनी बार एक ही बात सीखनी होगी। रुको मै सोमेश और लिसा को ही यहां बुला लेता हूं, सारी बात अभी क्लियर हो जाएगी और यदि दोनो के बीच कुछ होगा तो यहीं इसका रिश्ता भी तय हो जाना है।

रुनझुन:- लेकिन पापा सुनो तो..

आलोक उसे चुप रहने कहा और कॉल लगा दिया। इधर रुनझुन खा जाने वाली नज़रों से देखती हुई उठकर वहां से चली गई। उसकी मां आनंदी भी उठकर जाने लगी तभी, अपस्यु उसे पीछे से टोकते….

"आंटी एक बात तो तय है, आप बिल्कुल माधुरी दीक्षित की तरह खुद को मेंटेन की हुई है। वाह-वाह क्या एंग्री लीड लिया था आपने। बस यहां मां के किरदार कि जगह, बड़ी बहन का किरदार निभाती तो मज़ा आ जाता। एंग्री यंग सिस्टर जो अपनी छोटी बहन के लिए इसलिए परेशान है, क्योंकि एक अनजान लड़का अचानक उसके घर में आ धमाका, जिसे देखकर उसकी बहन परेशान हो गई।"

आनंदी आगे मुड़ी किचेन के ओर जा रही थी। तारीफ की ऐसी चटनी चटाई अपस्यु ने कि आनंदी मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी, खासकर वो शब्द बार बार कान में रस घोल रहे थे.. "एंग्री यंग सिस्टर"..

आनंदी किचेन से ही झूठा गुस्सा दिखती…. "लड़के तुम चाय लोगे या कॉफी।"..

अपस्यु:- एंग्री दीदी चाय ही पीला दीजिए।

"एंग्री दीदी, हिहिही"… आनदी चाय बनाने लगी। चाय जबतक तैयार होती लोकेश भी लिसा को लेकर पहुंच गया। परम्परागत घाघरा चोली, पुरा सलिखे से दुपट्टा, नजरें बिल्कुल भूमि में जमी हुई, छम, छम पायल की आवाज.. लिसा को देखकर अपस्यु अपने मुंह पर हाथ रखते… "इतनी सुबह ये तैयार होकर आयी है, या रात को ही सज सवर कर सोती है।"..

लिसा नजर उठा कर वहां मौजूद लोगों को देखी और तेजी से अपस्यु का हाथ पकड़कर उसे सबके बीच से अलग ले जाती, बिल्कुल धीमे आवाज़ में… "कमिने जेन को भगा दिया, इसे लगभग पटा ली हूं तो तुम इसके घर भी पहुंच गए। क्यों मेरी कुंडली में राहु बनकर बैठे हो। प्लीज मेरा भेद मत खोल देना। कहे तो तेरे पाऊं भी पड़ जाऊंगी।"

अपस्यु:- पहले सॉरी बोल। याद है जेन जब गायब हुई थी, तब मुझे तुमने क्या-क्या सुनाया था। मेरे घर आकर कैसी-कैसी धमकी दी थी। ऊपर से 5-6 लड़के को भी भेजी पिटवाने। उसी का बदला है ये सब। दुनिया गोल है लिसा, अपने कर्मो की सजा तुम्हे यहीं भुगतनी होगी।

लिसा:- यहां कपड़े उतार कर सॉरी बोल दूं, या तेरे फ्लैट में आकर सॉरी कहूं।

अपस्यु:- थरकी कहीं की शर्म है कि नहीं कुछ, कुछ ही दूरी पर सब खड़े हैं।

लिसा:- हां तो। अब तू नहीं मानेगा, मेरे हर गर्लफ्रेंड को ऐसे ही परेशान करेगा तो मजबूरी में मुझे यही सब पागलपन करना होगा ना। वैसे मै जानती हूं तुम्हे मुझ में इंट्रेस्ट नहीं। अब खुलकर बात कर रही हूं तो करेक्टर जज मत कर लेना। साला कितना भी कह दो कि हम मॉडर्न हो गए है, लेकिन इन मामलों में सोच एक ही जगह अटकी रहती है लड़कों कि….. उसके लिए कपड़े उतार सकती है, मेरे लिए क्यों नहीं।

अपस्यु:- लड़कियों की सोच ना बताओगी… अरे इससे काम निकलवाना है चलो सिड्यूस करके अपने पीछे लगाओ और अपना काम बनाओ। उस से भी ना हो तो धमकी ही दे दो रेप केस में फसा दूंगी। सोच तो दोनो ओर की है लिसा, एक को दोषी क्यों देना।

लिसा:- सो तो है, लेकिन सब ऐसा नहीं होते। इसके 2 एग्जाम्पल तो हम दोनों है। वो सब छोड़ो और मेरी कोशिश पर नजर ना लगा। ये मुझे अच्छी लगती है।

अपस्यु:- मुझे क्या पता था तुम इसे पटा रही हो। तुम्हारे एफबी पर देखा था इसे, तो थोड़ा सा छेड़ दिया, तुमसे बदला लेने के लिए। मैने तो अंदाजन तीर मारा था, मुझे क्या पता वो सही निशाने पर लग जाएगी।

लिसा:- क्यों छेड़ दिए। मै हूं ना मुझे छेड़ दिया करो। अपनी गर्लफ्रेंड ऐमी को छेड़ा करो। ना मन भाड़े तो मुझे कह दिया करो, मै 10-20 लड़कियों से इंट्रो करवा दूंगी, उसे छेड़ दिया करो। मेरे भाई उसे ना छेड़ा कर, जिसपर मेरा दिल आया है। तू जानता नहीं पर्दे में रहकर ऐसे रिलेशन के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, वरना बात लीक हो गई तो तुम समझते नहीं कितना बड़ा बॉम्ब भूटेगा।

अपस्यु:- मुझे बता दिया करना किस पर डोरे डाल रही है, वरना मुझे सपना सपना नहीं आएगा। वैसे मेरे बारे में तो इसे बहुत अच्छा बता रखी है। अपने बाप के सामने भी नहीं चुकी मेरी तारीफ करने से।

लिसा:- हीही.. अरे कुछ तो इमोशनल स्टोरी बनानी थी ना और अपने लिए एक इमोशनल बैकग्राउंड तो तैयार करना ही था ना। वैसे वो कामिनी जेन कहां भाग गई बिना बताए, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा। उसकी कोई खबर है क्या तेरे पास।

अपस्यु:- उसकी खबर बाद में लेना पहले यहां से चलो वरना ये लोग तुम्हारी शादी मुझसे तय कर देंगे और मैं पहले से एनेगेज्ड हूं।

लिसा:- डरते क्यों हो अभी इन सबको मस्त ड्रामा दिखती हूं।

अपस्यु:- नाह ज्यादा ड्रामा की जरूरत ना होगी, बस 2 मिनट संभाल लेना।

लिसा:- एक शर्त पर तू मेरी हेल्प करेगा। पापा से तेरे बारे में बहुत सुनी हूं। और जो भी सुनी हूं, अच्छा हो सुनी हूं। मेरी नैय्या भी पार लगा ले, दुआएं दूंगी।

अपस्यु:- क्यों ये रुनझुन नहीं पटी क्या?..

लिसा:- सहमत तो है पर पूरी तरह से खुलती नहीं है। बोलती है उसका एक बॉयफ्रेंड है और उसी के साथ वो ज्यादा खुश है। मुझे वक़्त देना मुश्किल होगा।

अपस्यु:- अभी चलते है, बाद ने इसपर बात करेंगे।..

दोनो उधर से हंसते हुए पहुंचे। लिसा आते ही कहने लगी… "आप सब मिलिए मेरे प्यारे दोस्त अपस्यु से। भारत आने के बाद ये मेरा सबसे करीबी है, मेरे पापा और मम्मी के बाद। लेकिन आप सब कतई ये ना समझे कि ये मेरा बॉयफ्रेंड है।"

सोमेश:- हां वही तो मै तबसे इन लोगों को समझा रहा हूं, इसकी पहले से एंगेजमेंट हो चुकी है और जब अपस्यु के लवर से मिलोगे तो कहना भी पाप हो जाएगा कि ये किसी और के पीछे जा सकता है। दोनो आपस में कितने प्यारे लगते है, किसी की नजर ना लगे।

रुनझुन:- सो कौन सी मिस वर्ल्ड है वो..

"सुबह सुबह यहां तो पूरी पंचायत लगी हैं। नेताजी आप मेरी अर्जी पर काम करने के बदले यहां क्या गप्पे लड़ाने आए हैं।"… ऐमी अपने साथ उन चारो को अंदर लाती हुई कहने लगो।

इससे पहले कि कोई कुछ बोलता… "सब जारा ख़ामोश रहेंगे। मै और ऐमी यहां एक छोटे से काम से आए थे। मामला बता दू सबको, क्योंकि शायद सर ने आप लोगों से साझा ना किया हो। ये 4 लड़कियां आपके पड़ोसी है, शायद आप लोग जानते होंगे या नहीं भी। लेकिन इनमें से एक ने अपने दोस्तो से कहा कि आलोक सर ने उसके साथ अश्लील हरकत की है। इसका नतीजा यह हुआ कि, 200 लड़के इनकी बातों में आकर कल कॉलेज में आलोक सर का जुलूस निकालने वाले थे। मीडिया में कल ये लड़कियां और सर ही छाए रहते, ऐसी इनकी प्लैनिंग थी। ये थी पूरी घटना। अब कृप्या आप सब थोड़े शांत रहेंगे तो मै ये मामला सुलझाकर दूसरे काम भी देखूं। ऐमी, क्या रिजल्ट आया।"

ऐमी, 2 लड़की को आगे लाती… "इस लड़की का नाम है कविता, और दूसरी है मालविका। ये दोनो सात्विक आश्रम और महिदिपी की अनुयायि है। कुछ दिन पहले आलोक सर ने सात्विक आश्रम को ढोंग करने की जगह और महिदिपि को ढोंगी बोल दिए थे। उसी का बदला लेने के लिए ये पूरी साजिश रची गई थी। कल शायद सर की फैमिली यहां नहीं थी, दोनो के लिए अच्छा मौका था और दोनो ने बढ़िया सी कहानी रच दी।

इतनी बात सुनते ही वहां का माहौल ही बिगड़ने लगा।…. "मैंने किसी को कहा क्या बोलने, जो सब पागलों कि तरह बोले जा रहे है। सब एक दम ख़ामोश। मुझे अपना काम कर लेने दीजिए, फिर जो करना हो करते रहना। और तुम दोनो, मुझे जारा बताओगी, तुम किसी की अनुयाई हो तो, उसके लिए कहे गए नेगेटिव शब्दों के लिए, क्या तुम किसी के भी जीवन में आग लगा दोगी?"

मालविका:- मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं लेकिन यदि हमारे गुरु के लिए कोई कुछ कहे तो हम चुप नहीं रहेंगे। हम तो डूबेंगे ही, लेकिन उन्हें भी ले डूबेंगे। गलत तरीके से नहीं फसे तो क्या हुआ, मै आश्रम जाकर भक्तों को बताऊंगी ये बात और फिर तमाशा होगा। इसे तो हम किसी भी तरीके से बर्बाद करके है छोड़ेंगे।
 
Update:-148

मालविका:- मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं लेकिन यदि हमारे गुरु के लिए कोई कुछ कहे तो हम चुप नहीं रहेंगे। हम तो डूबेंगे ही, लेकिन उन्हें भी ले डूबेंगे। गलत तरीके से नहीं फसे तो क्या हुआ, मै आश्रम जाकर भक्तों को बताऊंगी ये बात और फिर तमाशा होगा। इसे तो हम किसी भी तरीके से बर्बाद करके है छोड़ेंगे।

अपस्यु अपने मुख से पहला श्लोक बोला….

बहवो गुरवो लोके शिष्य वित्तपहारकाः।

क्वचितु तत्र दृश्यन्ते शिष्यचित्तापहारकाः॥…


अर्थात:- संसार में शिष्य का धन हरण करने वाले गुरु तो बहुत मिल जायेंगे, लेकिन शिष्य का चित्त हरण करने वाले गुरु बहुत ही कम। इसलिए किसी को गुरु कहने से पहले यह सुनिश्चित करें की वो आपके गुरु कहलाने लायक है कि नहीं।… गुरु कैसे होने चाहिए… तो वो भी सुनो…

फिर अपस्यु अपने दूसरे श्लोक से गुरु को परिभाषित करते हुए कहा…

निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते । गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम् शिवार्थिनां यः स गुरु र्निगद्यते ॥

गुरु कैसा हो, इस विषय में कहे पहले लाइन का अर्थ है…. "जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं"… प्रमाद का मतलब होता है किसी प्रकार के नशे कि अवस्था, और तुम दोनो सात्त्विक आश्रम और माहीदीपी के नशे में हो।

अब दूसरा लाइन का अर्थ समझो…. "निष्पाप रास्ते से चलते हैं, हित और कल्याण की कामना रखनेवाले को तत्त्वबोध करते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं।"… जो हित और कल्याण की कामना रखने वालों को तत्त्वबोध करते है, मतलब ब्रह्म, आत्मा और जगत के विषय में यथार्थ ज्ञान; ब्रह्मज्ञान; तत्वज्ञान; तत्व या किसी अन्य वस्तु की मूल प्रवृत्ति का ज्ञान करवाते है। उन्हें गुरु कहते है।

जब तुम दोनों में ना तो जारा भी चित्त हरण हुआ, ना ही कोई बौद्धिक विकास फिर वो गुरु किस काम का। ना तो तुम्हारे गुरु ने तुम्हे तर्क करने की शक्ति दी है और ना ही दूसरों के मत को सुनने की क्षमता तो किस बात का गुरु। जो तुम्हारे अंदर के नशे को दूर ना कर सका, जो तुम्हे तत्त्वबोध ना करवा सका वो गुरु किस बात का।

आध्यात्म में घुसे हो तो ढंग से आध्यात्म को समझो, यह कोई गुरु वाणी नहीं अपितु जीने के ढंग को अपना नजरिया देता है, लेकिन ऐसा तब होगा जब कहे शब्दों पर चिंतन होगा और उसपर तर्क होंगे। ना की केवल सुनकर ताली बजा दिए और वाह-वाह, कर दिए।

हो सकता है तुम जिसके अनुयाई हो, उन्होंने तुम्हे यह ज्ञान की बात बताई हो, लेकिन इन बातो पर चिंतन और मनन करने के बदले, उन्हें भगवान मानकर चली आयी। अपने मात्र स्त्री होने का फायदा उठाना और एक हंसते खेलते परिवार में जहर घोलने का ज्ञान किस गुरु ने दे दिया तुम्हे।

जाओ यहां से और पहले गुरु और शिष्य की परिभाषा को ठीक से परिभाषित करो। जो तुम्हारे गुरु का अपमान करे उसका विरोध अवश्य करो, किन्तु वो विरोध तर्क से होना चाहिए ना की फुहर तरीकों से। तुम सब जा सकती हो, लेकिन ख्याल रहे आगे से यदि कभी मैंने तुम चारो में से किसी को भी अश्लील हरकत के मामले में टीवी और मीडिया में देख लिया, तो ऐसी धज्जियां उड़ा दूंगा कि तुम भी सोच में पर जाओगी, मैंने इस संसार में जन्म ही क्यों लिया।

दोनो लड़कियां सर झुकाए आलोक से माफी मांगकर वहां से निकल गयी। ऐमी के लिए कोई नई बात तो थी नहीं, लेकिन बाकी के लोग बड़ी हैरानी से उसे सुन रहे थे। अपस्यु इतने प्यार से समझाते हुए अपनी बात रख रहा था, कि सुनने वालों के कान में जैसे वो रस घोल रहा हो। और धीरे-धीरे जब वो अंत में आक्रोशित होना शुरू हुआ, तो हर कोई उस गुस्से को अंदर से मेहसूस कर रहा था…

"यदि आप लोग भी गुरु अपस्यु से ज्ञान लेना चाहते है, तो उनके कहे शब्दो को रिकॉर्ड करके सुनते रहे और जोर से बोले… बाबा अपस्यु की जय।".. लोग थोड़े अचंभे में थे और ऐमी माहौल हल्का करती हुई अपनी बात रखी।

लिसा:- दम है बॉस … दिल्ली यूनिवर्सिटी में ये सब भी पढ़ाई जाती है क्या?

सोमेश चौंकते हुए… "लसिता, तुम तो कह रही थी अपस्यु तुम्हारा दोस्त है, फिर इसके बारे में इतनी तो जानकारी होनी चाहिए थी।

लिसा:- आप भी तो 4-5 साल से इससे जुड़े हो पापा, फिर आपको जानकारी क्यों नहीं? मै तो फिर भी कुछ दिन पहले यूके से यहां लौटी हूं।

अपस्यु:- बस भी करो खिंचाई करना। कल रात मैंने गूगल किया था और कुछ श्लोक को बस यहां फिट कर दिया है।

आलोक:- मैटर पता कहां था जो ये सब गूगल करके फिट करते। तुमने शास्त्र का ज्ञान कहां से लिया है अपस्यु?

ऐमी:- ठीक वैसे ही जैसे अब हम दोनों आपसे फिजिक्स का ज्ञान लेंगे सर। विषय कोई भी हो बस पढ़ने कि रुचि होनी चाहिए। अब हमे चलना चाहिए, क्यों बेबी।

अपस्यु:- हां स्वीटी, वैसे सर से टाइम तो ले लो.. ये कब हमे पढ़ाने वाले है और गुरु दक्षिणा में क्या लेंगे।

आलोक:- कल शाम 7 बजे से, और कोई देर नहीं होनी चाहिए।

अपस्यु:- वो तो हम दोनों के घूमने का समय होता है। कॉलेज में ही पढ़ा दो ना हमे सर, लैब का टेंशन भी नहीं होगा।

आलोक:- कल शाम 7 बजे। बाकी समय ऊपर नीचे मै अपने हिसाब से करूंगा।

ऐमी:- मंजूर है सर, और वो आपकी फ़ी, वो भी बता दीजिए..

आलोक:- वो मै बाद ने बताऊंगा। इतनी सारी बातों में ऐसा उलझा की मै मुख्य बातें ही भुल गया। तुम दोनो को दिल से शुक्रिया। यूं तो मै जाहिर नहीं होने दे रहा था लेकिन कल से मै ठीक से जी नहीं पा रहा था। दिमाग में एक ही बात थी, लोग इन्हीं लड़कियों की सुनेगे और मुझे बदनामी झेलनी पड़ेगी। अपने बीवी बच्चे को कैसे मुंह दिखाऊंगा?

अपस्यु:- अब आप बिल्कुल बेफिक्र रहिए सर। आज ही इन लोगो को मै यहां से कहीं और शिफ्ट करवा देता हूं, लेकिन सबक आपके लिए भी है, दूसरों को ज्ञान तबतक नहीं से जबतक वो आपसे मांगने नहीं आए। अब हम दोनों को इजाज़त दीजिए, अभी एक छोटी सी मुलाकात उन लोगो से भी करनी है।

अपस्यु, प्रिंसिपल का मैटर सॉल्व करके वहां से निकलकर पड़ोस के कमरे में पहुंच गया, जहां उन चार लड़कियों के अलावा 2 लड़के और भी थे, जिसमे से एक, स्टूडेंट यूनियन का लीडर विकास था। अपस्यु विकास से हाथ मिलाते…. "छोटी सी गलतफहमी हो गई थी इसलिए ये सब हो गया। बात यहीं खत्म करे।"..

विकास:- माफ करना दोस्त, साला हम लड़के हमेशा लड़कियों कि इन्हीं अक्लमंदी का शिकार हो जाते हैं। यह भी नहीं देखते की कौन सही है और कौन गलत, हमेशा हमे लड़की ही सही लगती है।

अपस्यु:- हां सो तो है। खैर मैं कविता और मालविका को लीगल में नहीं लेकर जा रहा हूं, लेकिन इन लोगों से बोल दो की ये फ्लैट कल तक खाली करके कहीं और फ्लैट लेले।

उन्हीं चार लड़की में से एक लड़की खुशी उठकर बोलने लगी… "दिल्ली में इतनी जल्दी फ्लैट कैसे चेंज होगी। ऊपर से हमने 2 महीने का एडवांस भी से रखा है।"

विकास:- भाई ये कह तो सही रही है।

अपस्यु, खुशी का नंबर लेते हुए…. "थोड़ी देर से मै तुम्हे फोन करता हूं, फ्लैट अरेंज हो जाएगा, बस तुम लोग अपनी पैकिंग पूरी रखना। तुम्हारे 2 मंथ का एडवांस की टेंशन ना लो वो मै देख लूंगा।"

अपस्यु अपनी बात कहकर वहां से निकल गया। उसके जाते ही विकास ने मालविका और कविता को थप्पड़ जड़ते हुए…. "तुम लोग किसी को ठीक से फसा भी नहीं सकती ना। कामिनी कहीं की, एक छोटा सा काम नहीं हो सका। जानती हो जो लड़का अभी-अभी गया, वो कौन है?"..

सभी लड़कियां एक साथ… "कौन है?"

विकास:- दिल्ली की बहुत बड़ी हस्ती है, लेकिन दिखाता नहीं कभी। और उसके साथ जो उसकी गर्लफ्रेंड खड़ी थी, वो यहां के सुप्रीम कोर्ट के टॉप वकील ने से एक कि बेटी है। साली ढंग से एक काम होता नहीं है और स्टूडेंट पॉलिटिक्स करना है।

उनकी चौथी साथी निशा… "पहले बताना था इस लड़के में बारे में, इसे मै किसी भी तरह से पटा लेती।"..

कविता:- कोशिश भी मत करना, ये तेरे से इस जन्म में नहीं पटेगा।

निशा:- ऐसी बात है क्या, फिर तो हर्लिन को बुलाना पड़ेगा।

विकास:- तुम लोगो को ये लड़का पटाना है या अगले साल होने वाले यूनिवर्सिटी चुनाव पर ध्यान देना है।

खुशी:- सब रणनीति तुम्हारी थी विकास, तुम अपनी गलती के लिए हमे थप्पड़ भी मार चुके। अब हम लड़कियों की अपनी भी कुछ बातें होती है, तुम उसमे अपनी टांग ना अराओ तो बेहतर होगा। जाओ अपने इलेक्शन कैंपेन पर ध्यान दो।

विकास:- यार मै गुस्से में था इसलिए हाथ उठ गया। अपने हाथ से पॉपुलैरिटी और मीडिया कवरेज सब चला गया।

निशा:- अब तू भी चला जा। सुना नहीं वो क्या बोलकर गया है, पैकिंग कर लेने। एक बात याद रखना, आज के बाद मै कोई भी अनैतिक काम में तुम्हारा साथ नहीं देने वाली। कोई सोशल काम हो, कोई प्रोटेस्ट हो तो मै अपनी पढ़ाई के बाद कर दूंगी। मालविका पागल हो चुकी थी जो घटिया सोहरत के पीछे जाने के लिए तैयार हो गई, अच्छा हुआ जो उस लड़के ने बचा लिया।

ऐमी और अपस्यु जैसे ही उस कैंपस से बाहर निकले… "अपस्यु मै पज़ल हुई जा रही हूं। ये हर किसी के काम में तुम इन्वॉल्व होकर, क्या साबित करना चाह रहे हो?"

अपस्यु, ऐमी के गाल को चूमते…. "हां समझ रहा हूं कि तुम क्या सोच रही हो, तुम्हे ऐसा बिल्कुल सोचने की जरूरत नहीं कि मै तुमसे कुछ छिपा रहा हूं। वो तो वक़्त नहीं मिला इसलिए नहीं बता पाया। रही बात प्रिंसिपल की, तो मै कल उनके ऑफिस कुंजल के कहने पर गया था। लेकिन वहां जब पहुंचा तो मामला की कुछ और दिखा। मुझे लगा मदद करनी चाहिए इसलिए मैंने कर दिया।

ऐमी:- हां ठीक है बाबा समझ गई, तुम्हारे प्रधानाध्यापक को तुम्हारी मदद की जरूरत थी। अब वो बात भी लगे हाथ बता ही दो, जो वक़्त ना मिलने के कारन तुम बता नहीं पाए।

अपस्यु:- चाणक्य नीति की शुरवात हो चुकी है, अब बस बाहर बैठकर तमाशा देखते रहो।

ऐमी:- चाणक्य की कौन सी निती अपस्यु, वो तो समझा दो बेबी।

अपस्यु जैसे-जैसे अपनी बात आगे बढ़ता गया, ऐमी का चेहरा खिलता चला गया। और जैसे ही अपस्यु ने अपनी बात समाप्त की, ऐमी, जगह देखकर कार किनारे खड़ी करती हुई, लगभग अपस्यु के ऊपर चढ़कर उसके होंठ चूमती…. "मेरे पास कोई शब्द नहीं लव"… उम्ममआह्हहहहहहहहहहह…… "क्या दिमाग लगाया है"….. उम्ममआह्हहहहहहहहहहह…. "मै हैप्पी हैप्पी हैप्पी"… उम्ममआह्हहहहहहहहहहह

ऐमी अपनी हर लाइन के ऊपर अपस्यु को लगातार चूमती जा रही थी और अपनी आखरी लाइन बोलकर तो उसके होंठ ही चबाने लगी…. "बस भी करो अब स्वीटी, कार चलाओ।"… अपस्यु, ऐमी को अपने ऊपर से हटाते हुए कहने लगा।

ऐमी:- अपस्यु एक बात माननी होगी, शुरवात में तुमने सबको प्लान करने दिया ताकि हर किसी को लगे वो बेस्ट है, लेकिन मुझे अब ऐसा क्यों लगा रहा है कि हर कोई इंडायेक्टली तुम्हारे ही प्लान को तुम्हे सुना रहा था।

अपस्यु:- हम जब साथ है और लक्ष्य एक, तो सोच भी लगभग एक जैसे ही होगी। हां लेकिन किसी को भी डायरेक्टली या इन डायरेक्टली मैंने प्रभावित नहीं किया था, वो उनकी अपनी सोच थी जिसपर हम सहमत हुए थे।

ऐमी:- छोड़ो ये सब लेकिन इतनी बड़ी खुशखबरी के बाद तो एक छोटा सी रिलैक्स पार्टी बनती है ना।

अपस्यु:- हां सो तो है, शाम का प्रोग्राम रख लो। अरे हां एक बात और, मैंने उन लड़कियों को वहां का फ्लैट खाली करने के लिए बोल दिया है। पैसेज के पीछे वाला 312 नंबर वाला वो आखरी का फ्लैट उन्हें रेंट पर देदे क्या?

ऐमी:- कौन सी लड़की और कहां का फ्लैट..

अपस्यु:- उल्लू, अरे वही 4 लड़कियां जिन्होंने हमारे प्रिंसिपल को फंसाया था। तुम्हारे सामने ही तो कहा था उन्हें फ्लैट खाली करने।

ऐमी:- हां दे दो, लेकिन जरा संभलकर। देखना कहीं तुम्हारे जरिए वो मीडिया की सुर्खियों में ना आ जाए।

अपस्यु:- ऐसा भी होगा क्या?

ऐमी:- अगर उन्हें अपना वर्तमान और भविष्य की चिंता ना होगी और सनी की साढ़े साती उनके दिमाग में चढ़ी होगी, तभी ऐसा कर सकती है। वरना नहीं। अभी फिलहाल हम तो चले।

दिन के लगभग 3 बज रहे थे। अपस्यु अपने फ्लैट में आराम से मस्त नींद ले रहा था, तभी उसके घर की घंटी बाजी… दरवाजे पर साची और ध्रुव खड़े थे। दोनो को देखकर अपस्यु ने उन्हें अंदर बिठाया।… "चाय या कॉफी चलेगी।"…

साची:- मै तो चाय लूंगी।

ध्रुव:- और मै भी…

"साची किचेन भुल गई हो क्या। जाओ और 3 कप चाय बना लाओ।"… अपस्यु अपनी बात कहते हुए, ध्रुव के ओर हाथ बढ़ा दिया और दोनो ताली देते हुए हसने लगे। साची जला भूना सा अपना रिएक्शन देती चाय बनाने चली गई।

चाय पर तकरीबन आधे घंटे की चर्चा के बाद दोनो अपने फ्लैट 304 में जाने के लिए जैसे ही बाहर हुए, 15, 20 लड़के लड़कियां अपस्यु के फ्लैट तरफ ही आ रहे थे… साची और ध्रुव वापस अंदर आती… "ये इतने सारे लोग, इनमे से तो कुछ कल वाले लड़के है अपस्यु, यहां मार करने तो नहीं आ रहे।"..

अपस्यु:- अरे ना रे, लंबी कहानी है, तुम दोनो जबतक फ्लैट में शिफ्ट करो, रात के खाने पर बताता हूं।

साची:- रात का खाने से क्या मतलब है तुम्हारा..

अपस्यु:- जब ध्रुव के लिए खाना लाओगी तो मेरे और काया के लिए भी खाना लेती चली आना।

"एक्सक्यूज मी सर"… खुशी पीछे से बोली… "आप लोग 2 मिनट के लिए बैठ जाओ, हम जारा बात कर रहे है। अपस्यु ये काया कौन है और खाने का क्या चक्कर है।"..

अपस्यु:- कल तेरे सामने ही तो वो थी कोर्ट में, फिर भी तुम्हे पता नहीं काया कौन है।

साची:- अरे डफर, हां देखा है कौन है, लेकिन तुम कैसे जानते हो वो बताओ।

अपस्यु:- वो ऐमी के ओर से है। मुझे ऑर्डर मिला और मैंने कर दिया। अब जान गई ना तो आज रात हम सब साथ खाएंगे। लावणी को भी ले आना।

साची:- पागल समझ रखा है क्या? तुम सब रात को घर ही चले आना, और यही फाइनल है। और अब बताओगे ये लोग यहां क्या कर रहे है? हमारे प्रिंसिपल वाला घटना इन्हीं लोगों का रचा हुआ था ना?

अपस्यु:- वो छोटी सी कहानी है, कहा तो रात को बताऊंगा खाने पर। यहां फ्लैट खाली था, मैंने रेंट पर लगा दिया। अब जा ना, ध्रुव को शिफ्ट नहीं करना क्या?

साची:- अकडू कहीं का, जा ही रही हूं। चलो ध्रुव..

उनके जाते ही अपस्यु… "312 नंबर का फ्लैट तुम लोगों का है, बीच में पैसेज से पीछे चले जाना, वहां से दूसरा नंबर का फ्लैट है। जिनको रहना है वो अपनी आईडी दो, और एग्रीमेंट को पढ़कर साइन कर दो।"..

खुशी 4 आईडी उसे देकर एग्रीमेंट पढ़ने लगी। अपस्यु ने एक फोटो खींचा और चारो आईडी की तस्वीर लेकर किसी को भेज दिया। उसे ऐसा करता देख एक लड़का पूछने लगा… "ये तस्वीर किसे भेज रहे।"..

अपस्यु:- थानेदार को भेजा है, वेरिफिकेशन प्रूफ और अन्य प्रूफ के लिए। बाकी यहां कोई हंगामा या ऐसा काम मत करना जिससे मुझे मजबूर होना परे। अब तुम लोग जा सकते हो।

सभी लोग वहां से निकल गए। अपस्यु दरवाजा बंद करके वहां के चीजों को देखने लगा। अपने ट्रेनिंग रूम में जाकर काफी देर तक अभ्यास करने के बाद पसीने से तर होकर वो बाहर निकला, स्नान करने के बाद वो फिजिक्स की एक पुस्तक निकालकर पढ़ने लगा। काफी गहन अध्यन कर रहा था, तभी अचानक वो तेजी के साथ उठा और ऐमी को कॉल लगा दिया…
 
Update:- 149

ऐमी:- कुछ पढ़ रहे थे क्या?..

अपस्यु:- कॉल की थी क्या?

ऐमी:- राठौड़ मेंशन में थी वहीं से कॉल लगाया था।

अपस्यु:- हद है, तुम्हे नहीं पता कि जब मेरा फोन बंद है तो कैसे संपर्क करना चाहिए।

ऐमी:- मुझे क्या, घर में सबको पता था, लेकिन तुम पढ़ रहे थे इसलिए किसी ने तुम्हे डिस्ट्रब करना जरूरी नहीं समझा। अब बात क्या है वो बताओगे?

अपस्यु:- अभी आओ मिलकर बात करते है।

ऐमी:- पढ़ने बैठते हो तो जब उठा करो तो घड़ी देख लिया करो, रात के 12 बज रहे है।

अपस्यु:- सॉरी इस बात को मै क्यों भुल जाता हूं। अच्छा सुनो हमे पारा डाइविंग सीखनी है, सब पता कर लेना।

ऐमी:- पारा डाइविंग… क्या बात है बेबी, लगता है जल्द ही एक्शन शुरू होगा।

अपस्यु:- नहीं अभी फिलहाल कोई एक्शन नहीं होगा, बस यूं ही ख्याल आया कि बहुत दिनों से हमने कुछ नया ट्राय नहीं किया तो ये नया करते है।

ऐमी:- मुझे भी एक ख्याल आया है, मैंने हॉलीवुड कि एक मूव वांटेड देखी, उसमें एक ट्रेन वाला स्टंट है, मुझे वो सीखना है।

अपस्यु, ऐमी को 2 मिनट होल्ड पर रखते हुए, उस सीन को देखने के बाद… "पागल कहीं की ट्रेन का स्टंट किस बेवकूफ की उपज है, वहां 12000 वोल्ट की वायर लगी रहती है। सीधा राम नाम सत्य हो जाएगा।"

ऐमी:- ठीक है फिर पारा डाइविंग ही करते है, मै सब पता लगा लूंगी। अच्छा सुनो ना बेबी, जल्दी से मेरे पास आओ ना, तुम्हे बाहों मे समेटने का दिल कर रहा है।

अपस्यु:- पागल हो क्या, बापू होंगे बाकी सब लोग है, और आज से मैंने अभ्यास भी शुरू कर दिया है।

ऐमी:- हम्मम ! ठीक है जाओ सो जाओ, और हां सोने से पहले खाना खा लेना, भूखे मत सो जाना।

अपस्यु:- हां ठीक है, कल मिलता हूं मै तुमसे, फिर आज वाली उधार पार्टी कल करेंगे।

ऐमी:- सुभ रात्रि। ..

"आह्हहहह.. अब कुछ अच्छा लग रहा है। कोई नहीं आपसे हम कल प्यार जता लेंगे जनाब, आज आप आराम कीजिए।"….. ऐमी अपना फोन रखती, खुद से ही कहने लगी। फिर अपने दिल पर हाथ रखती…. "ए तू ज्यादा दुखी ना हो समझी, दिमाग की तरह मजबूत और समझदार बाना कर। मेरे वो अभी नहीं आ सकते समझी। ख्याल ना रहा होगा रे बाबा, भुल गए होंगे। अच्छा ठीक है कल अलग से और अच्छे से समझा दूंगी कि.. देखो बेबी, दिमाग की खुराकी तो तुम्हारी बात से चल जाती है, लेकिन मेरी इस बेईमान दिल को बिना तुम्हारे दुलार, प्यार के चैन नहीं मिलता, इसलिए कम से कम 1 घंटा इसे प्यार जताया करो, फिर फोन रखा करो।"…

ऐमी खुद से बातें करती हुई अपने तकिए को अपने सीने से टिकाए, अपस्यु के साथ कुछ हसीन लम्हों को याद करके मुस्कुरा रही थी।

"यादों के झरोखे में ऐसे ना डूब जाओ, की मै सामने खड़ा रहूं, और तुम मुझे ख्यालों में ढूंढती रहो।"….. ख्यालों से जब बाहर आयी, सामने अपस्यु खड़ा था। ऐमी खुशी से लपक कर दौड़ी और झपक कर अपस्यु के गोद में और उसके होंठ से अपने होंठ लगाकर चूमने लगी।.. "बस भी करो बाबा, क्या चूमकर ही पेट भरना है, या चलकर कुछ खा भी ले।"

ऐमी, नीचे उतरते… "तुम्हे कैसे पता मैंने भी अब तक नहीं खाया है।"..

अपस्यु:- तुम तो मेरी रिसर्च सब्जेक्ट हो, तुम्हारे बारे में नहीं पता होगा, तो किसके बारे में पता रहेगा।

ऐमी मुस्कुराती हुई फिर से अपस्यु के ओर बढ़ी ही थी कि अपस्यु अपना हाथ आगे बढाकर, उसके सीने पर रखकर रोकते हुए… "चलकर खाना खाए, या फिर तुम चूमना शुरू करोगी।

ऐमी अपनी आखें दिखती… "तुम मुझे रोक रहे चूमने से, हां।"…

"हां रोक रहा हूं, अब नौटंकी बाद में कर लेना पहले चलकर खाना खाते है।"…. "ठीक है तुम नीचे जाओ मै मीना को बुला लेती हूं।"…. "अरे रहने दो क्यों इतनी रात को उसे परेशान कर रही हो। वैसे भी तुम दोनो के बीच बात तो हो नहीं रही।"…. "ओय, कितनी बार कहना होगा, ये मेरा और उसका आपस का मामला है, तुम्हे बीच में ना पड़ने। या शायद मै ये बात ठीक से समझा नहीं पाई।"… "हां समझ गया, जो करना है वो करो।"..

अपस्यु नीचे जाकर डियनिग टेबल पर आराम से बैठ गया, थोड़ी देर बाद ऐमी भी नीचे आ गई। थाली लग गई, खाना सज गया, शायद मीना ने भी नहीं खाया था इसलिए वो भी साथ बैठ गई खाने। अपस्यु एक निवाला अपने मुंह में लेते… "आज खाना तुमने बनाया है ऐमी"..

ऐमी:- मुझे थोड़े ना पता था तुम भी यहीं आने वाले हो, इसलिए थोड़ा तीखा बाना दी।

अपस्यु:- पहले पता होता तो मै खाना पैक करवा कर ले आता।

मीना:- दीदी झूठ बोल रही है, इनसे पूछो आपके बारे में नहीं पता था, तो ये 3 लोगों का खाना कहां से लग गया अभी। दीदी तो आपके लिए गुनगुनाती हुई खाना पका रही थी और कह भी रही थी, पार्टी से लौटकर हम साथ डिनर करेंगे। मैंने पहले ही कहा था दीदी से ज्यादा तीखा मत करो, उन्हें खाना अच्छा नहीं लगेगा।

"उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।".. सुनकर ही अपस्यु का खाना अटक गया, और वो खांसने लगा। ऐमी उसके ओर पानी बढ़ाती… "इसी बात पर हम दोनों में कोल्ड वार चल रहा है बेबी।"..

अपस्यु:- मीना ये इन्हे उन्हें क्या कर रही हो?

मीना:- अब दीदी मुझसे बार-बार कहती है आपको जीजू कहने और मै अंदर से हसिटेट हो जाती हूं।

ऐमी:- पागल तो क्या अब भी मुझे दीदी और इसे भईया ही कहती रहेगी।

मीना:- हुंह ! अब शुरू से मै भईया कहती आ रही हूं, तो एकदम से थोड़ा अजीब लग रहा है ना दीदी। आप समझती क्यों नहीं।

ऐमी:- देख अब तू फिर से बहस शुरू मत कर वरना मेरा दिमाग खराब हो जायेगा।

मीना:- चैन से खाना तो खा लेने दो या कहो तो उठकर चली जाऊं।

ऐमी:- सॉरी तू खाना खा, गुस्सा मत हो।

मीना:- अब प्लीज ऐसे मुंह तो नहीं बनाओ दीदी, मै कोशिश कार रही हूं ना।

ऐमी:- छोड़ हटा जाने दे बात खत्म कर।

मीना:- जीजू आप खाना खाओ हम दोनों का चलता रहेगा।

ऐमी:- हिहिहिहीही.. अब सुकून मिला मुझे.. बता तुझे क्या चाहिए।

मीना:- मुझे स्कूटी चाहिए।

ऐमी:- लो एक टॉपिक गया नहीं दूसरा शुरू। स्कूटी के लिए तुझे शर्त पता है।

मीना:- हुंह ! कमिटमेंट नाम की कोई चीज ही नहीं है। फिर ऐसे मत पूछा करो कि क्या चाहिए।

अपस्यु:- ऐमी, स्कूटी देने में क्या परेशानी है?

ऐमी:- स्कूटी क्या कार दिलवा दूंगी, पहले इसको कहो अपना 12th क्लियर करने। एक बार फेल होकर मेरी नाक कटवा चुकी है, डैड के सामने। कितना जलील किया था उन्होंने मुझे, लेकिन इस कम अक्ल को कुछ फर्क परे तब ना। बस इससे फिल्म और वेब सीरीज के बारे में पूछ लो पुरा ज्ञान है। 150 तो यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब की हुई है।

मीना:- अपस्यु भईया आप बताओ..

ऐमी:- मतलब फ्लो में भुल ही जा क्या कहना है..

मीना:- कहीं तो धीरे-धीरे आदत चली जाएगी। सुनो जीजू मुझे पढ़ने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। काम चलाओ लायक पढ़ चुकी हूं अब ये किताबों का टर्चेर झेला नहीं जाता।

ऐमी:- फिर मै देखती हूं तेरी स्कूटी कैसे आती है।

मीना:- दीदी चिंता ना करो, आपकी जब शादी तय होगी तो मेरा मालामाल हफ्ता शुरू हो जाएगा। और जीजू के जूता चोरी में तो कोई हिस्सेदार भी नहीं है।

ऐमी:- ठीक है तू कर ले अपनी मन की, इस बार फेल हुई ना तो गांव भेज दूंगी। वैसे भी तेरी मां का फोन आते रहता है। मुझसे कहते रहती है 2 दिन के लिए मीना को भेज दो, लड़के वाले आ रहे है। वो तो मै हूं कि उन्हें ये कहकर रोक देती हूं कि मीना कि जबतक पढ़ाई पूरी नहीं होती, तबतक उसकी शादी नहीं होगी, और आप लोग उसकी शादी की चिंता छोड़ दीजिए। देख मीना मै साफ शब्दों में कहें देती हूं, नहीं पढ़ेगी कोई बात नहीं, मत पढ़। लेकिन इतना तो पढ़ लिया कर की पास हो जाए, नहीं तो फिर मुझे मजबूरन तुम्हे गांव भेजना होगा।

मीना:- ठीक है मै कोशिश करती हूं। मुझे होम ट्यूशन लगवा दो, वहां बहुत सारे स्टूडेंट के भिड़ में मुझे सर की बात समझ में नहीं आती।

ऐमी:- ये हुई ना बात। ठीक है तेरा ये काम अपस्यु कल तक कर देंगे। और कोई डिमांड है, या बस इतना ही।

मीना:- एक स्कूटी दिला दो ना, मै पक्का पास हो जाऊंगी.. पक्का से भी वाला पक्का दीदी।

ऐमी:- ठीक है कल वो भी दिला दूंगी, लेकिन वादा किया है तोड़ना मत।

मीना, ऐमी की बात सुनकर वहीं खुशी से झूमने लगी। कुछ देर में सबका खाना समाप्त हो गया, मीना दोनो को गुड नाईट बोलकर वहां से निकल गई। कुछ देर अपस्यु से प्यार भरी बातें करने के बाद ऐमी ने अपस्यु को भी वापस जाने के लिए बोल बोल दिया।

अपस्यु मुसकुराते हुए वहां से निकल गया। सुबह के 8 बजे होंगे जब ऐमी का कॉल अपस्यु के पास आया। वो पारा ड्राइविंग के विषय में कुछ बातें करने लगी। अंत में यही फैसला हुआ कि पारा डाइविंग और अन्य चीजों को सीखने के लिए एक बार फिर मियामी के ओर रुख किया जाएगा।

अपस्यु को यह प्रस्ताव सही लगा। नीलू के साथ उसके सभी लोगों को पूर्व सूचना दे दी गई की उन्हें तैयार रहने के लिए, कुछ दिन में वो लोगो एक हॉलिडे लेंगे। बाकी की बातें बाद में होगी।

ऐमी से बात करने के बाद अपस्यु रस्सी कूदने में लीन हो गया। तभी वहां फ्लैट का दरवाजा खुला और दोनो बहने (लावणी और साची) अंदर आयी। दोनो उसे अभ्यास करते देख वहीं सोफे पर बैठ गई। अपस्यु कुछ देर और रस्सी कूदने के बाद उनके पास बैठते… "माफ करना कल वो मै"..

साची:- हां ऐमी ने बताया गुरुजी पढ़ाई में लीन होंगे इसलिए वो दुनिया से कट गए है। जब तुम्हारा यह प्लान था तो बता देते ना। कितना कॉल लगाई तुम्हे?

अपस्यु:- हां तो लावणी के पास जाना चाहिए था ना, उसके पास फ्लैट की चाभी थी।

साची:- मुझे क्या पता अब ये ही मालकिन है, वो भी ऐमी से ही पता चला। खैर कोई बात नहीं, मै भी यहां से शिफ्ट कर रही हूं?

अपस्यु:- क्या हुआ दोनो भाई के झगड़े बंद नहीं हुए क्या?

लावणी:- पता नहीं दोनो ऐसे लड़कर क्या हासिल कर लेंगे। ना तो लड़ने कि वजह बताते है और ना ही लड़ाई बंद करते है। इस वक़्त तो घर रहने लायक नहीं रह गया है।

अपस्यु:- ठीक है चलो सुलह करवाया जाए।

लावणी:- जाने दो भईया, मत पड़ो इनके बीच में। मां और बड़ी मां ने बहुत कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

अपस्यु:- बच्चा, दोनो भाई की मति भ्रमित है अभी, जबतक उन्हें गुरु ज्ञान नहीं मिलेगा, तबतक वो दोनो सुधर नहीं सकते।

साची:- ऐसी बात है तो फिर चलिए ना गुरुदेव, वरना ये दोनो भाई तो पुरा घर तोड़ देंगे।

अपस्यु उन दोनों के साथ मिश्रा भवन में पहुंचा। बहुत दिनों बाद वो आ रहा था। अनुपमा उसे देखकर फीकी मुस्कान दी और उसका हाल चाल लेने लगी। किन्तु अपस्यु सीधे मुद्दे पर आते हुए कहने लगा… "आंटी बातें बाद में होगी, मनीष अंकल को बोलो मै आया हूं, बाहर आने।"..

अनुपमा:- इन दोनों ने तुम्हे सब कुछ बता दिया।

अपस्यु:- हां तो मै आपका बेटा नहीं क्या जो घर में शांति लाए..

अनुपमा:- बातों में तो तुमसे मै जितने से रही, लेकिन एक बात मै अभी बता देती हूं, दोनो भाई के बीच में पीस गए तो मुझे बुरा लगेगा।

अपस्यु:- मै गेहूं नहीं हूं आंटी, पहले से पीस कर आटा बना हुआ हूं, मुझे पीस कर भी कोई फायदा नहीं होगा।

अनुपमा:- हा हा हा.. ठीक है भेजती हूं।

अनुपमा कमरे में गई और मनीष मिश्रा कमरे के बाहर। अपस्यु ने सिर्फ उसे अपने पीछे आने कहा और मनीष मिश्रा शांति से ऊपर के कमरे के ओर चल दिया। अपस्यु ने राजीव मिश्रा के कमरे का दरवाजा खटखटाया, वो अपस्यु को देखकर तो खुश हुआ लेकिन मनीष को देखते ही…. "मै इसके साथ बात नहीं करूंगा।"
 


Update:- 150


अपस्यु, राजीव मिश्रा को देखते…. "पाप की कमाई हराम में गवाई फिर बैर किस बात का"…. फिर मनीष मिश्रा को देखते….. "जब चोरी ही कर गए फिर सीनाजोरी किस बात की। अब दोनो भाई आराम से बैठ जाइए कमरे में, जारा मै अपनी बात रख लूं फिर निकलेंगे यहां से, एक मजबूत परिवार के रूप में।"..

अपस्यु की बात की गहराई को समझते हुए दोनो भाई ख़ामोश होकर आमने सामने बैठ गए। बहुत सारी बातें निकलकर सामने आयी। आरोप-प्रत्यारोप दोनो एक दूसरे पर लगाते है। एक दूसरे से बैर होने का कारन भी समझ में आ गया। मनीष बड़ा भाई था और लावणी के एंगेजमेंट में राजीव का उसका साथ ना देकर, नंदनी का साथ देना, उसे अखर गया था। मनीष मिश्रा को अच्छा नहीं लग रहा था कि उसके बेटे को मारने वाले को राजीव अपना दामाद बनाए।

और राजीव यह बात सुनकर एक बार और भड़क गया। छोटा सा मामला था अपस्यु ने समझदारी दिखाते हुए दोनो भाई के बीच जो बातों को लेकर थोड़ी सी दुरीया आ गई थी, उसे इतनी सी बात से मिटा दिया कि…. अब मनीष मिश्रा को रघुवंशी परिवार से बैर है या नहीं। यदि अब भी बैर है तो वो लावणी और आरव का रिश्ता ही खत्म कर देगा।

कितने भी कमिने क्यों ना हो दोनो भाई, लेकिन सभी बच्चो के लिए प्यार एक जैसा था। मनीष चिल्लाते हुए ना कहने लगा। उसका मानना था लावणी का खिला चेहरा इतना प्यार है कि उसके सारे गम दूर हो जाते है, आरव के उसके जिंदगी से जाने से मेरी बच्ची की खुशी भी चली जाएगी, हमारे झगड़े में उसे दर्द मत दो।

प्रति उत्तर तैयार था जो दोनो भाई को पता था। यदि झगड़ा बंद नहीं हुआ तो वो लावणी को ही झगड़े की वजह बता देगा। फिर क्या था दोनो भाई के आखों से आशु फुट परे और एक दूसरे के गले लग गए।…

अपस्यु:- आप दोनो का काम तो हो गया लेकिन मुझे भी आपसे एक काम है।

राजीव और मनीष एक साथ…. "कैसा काम।"..

अपस्यु:- मेरा अगला निशाना सात्त्विक आश्रम और दोनो भाई बहन (महिदिपी और अनुप्रिया) है मुझे उसे गिराने में मदद चाहिए।

मनीष:- हमने साथ काम शुरू किया था, लेकिन कई सालों से वो और हम अलग काम करते है।

अपस्यु:- कोई नहीं आप की छोटी सी जानकारी भी, मुझे आगे की योजना बनाने में सफल बनाएगी…

राजीव:- अपस्यु विश्वास से काम होता है। तुम्हारा हर कहा हम मान लेंगे, लेकिन अभी भी मेरे दिमाग में एक दुविधा है। कहीं तुम हमे साथ मिलाकर पुरा सिंडिकेट साफ करके खुद बॉस बनने के इरादे से तो नहीं। क्योंकि तुम्हारे कॉन्टैक्ट्स और काम के लोगों को तुम ऐसे साथ चल रहे हो, कि यदि तुम अपने काम में सफल रहे तो सबसे ऊपर तुम ही होगे।

अपस्यु:- ठीक है दोनो मिश्रा बंधु को सच सुनना है तो आज मै सच से अवगत करवाता हूं। और सच सुनने के बाद साची के पाऊं धोने कर पी लेना, क्योंकि माफी सिर्फ तुम दोनो को मिली है। मै तुम दोनों के ग्रुप के संस्थापक चन्द्रभान रघुवंशी का बेटा हूं।

राजीव और मनीष दोनो एक साथ झटके खाते… "क्या.. मतलब तुम सुनंदा रघुवंशी के बेटे हो?"..

राजीव:- लेकिन यह कैसे हो सकता है, तुम तो गुरुकुल में पढ़े हो और वो लोग यूरोप में थे। सबने आखों देखा जो हमे बताया गया था उसके हिसाब से तो चन्द्रभान अपने बीवी और बच्चे के साथ भारत आया था और अपने परिवार को निशी के आश्रम की आग में झोंक दिया। हां लेकिन उस घटना के बाद चन्द्रभान भी कहीं गायब हो गया।

मनीष:- हां और चन्द्रभान जैसे इंसान का गायब होने का मतलब हम समझ चुके थे…. अंतिम वक़्त में अपने परिवार से प्यार जाग गया होगा और वो अपने दूसरी बीवी और बच्चे के साथ कहीं गुमनाम जिंदगी जी रहा है, इसलिए कभी उसके परिवार की हमने खबर नहीं ली, और ना ही ये कभी ख्याल गया। और देखो हमारा सोचना बिल्कुल सही निकला।

अपस्यु:- फिर जिन्होंने आखों से देखा था कि मेरी मां और मेरे भाई को जला दिया गया उसका क्या?

राजीव:- किसी ने आखों से कितना भी सच क्यों ना देखा हो, लेकिन चन्द्रभान के गायब होने का मतलब ही था वो अपने परिवार के साथ गुमनाम हो गया है।

अपस्यु:- चलो मै वो राज से भी पर्दा उठा देता हूं। चन्द्रभान ने सबसे यह बात छिपाई थी कि उसका बेटा यूरोप में है, जबकि उसकी मनसा बहुत पहले से थी कि वो अपनी दूसरी पत्नी और बच्चों को खत्म कार दे। इसलिए मुझे बचपन से ही आश्रम में रखा, ताकि जब भी आश्रम को मिटाए, उसके साथ हमे भी मिटा दे। अब सोच सकते हो तुम दोनो मै किस बात का बदला के रहा हूं।

बचपन से मै जिनके साथ पलकर बरा हुआ, मेरे उन 160 साथी, गुरु निशी और मेरी मां की मौत का बदला। मुझे कोई रुचि नहीं पैसे और पॉवर में, लेकिन जिन लोगों ने इन सब के लिए खेल रचा है उन्हें सजा तो मै दिलवाकर रहूंगा। इसकी पहली शुरवात चन्द्रभान से ही हुई थी, जिसे मैंने खुद अपने हाथ से फांसी लगाई थी। 160 चिता के साथ कई और लोग मारे गए थे जिसके जिम्मेदार कहीं ना कहीं तुम दोनो भाई भी थे, एक ओर तो साफ कर दिया, दूसरी ओर का अभी पुरा बाकी हैं। मेरी मदद करो और अपने पाप धो लो।

मनीष:- हां ये सही है कहीं ना कहीं हम दोनों भाई उस घटना से जुड़े थे लेकिन हमे भनक तक नहीं थी कि उन लोगों ने ऐसा कुछ योजना बनाई है। वैसे भी हमारा काम तो केवल उनके लिए कॉन्टैक्ट ढूंढ़ना था। लेकिन फिर भी थे तो उस वक़्त उनके साथ ही। खैर हम क्या तुम्हारी मदद कर सकते है, तुम्हारे पास लोकेश की पूरी टीम है, तुम चाहो तो उसे पूरा बर्बाद कर सकते हो।

अपस्यु:- नहीं उसकी पूरी टीम खत्म हो गई है और जो बचे है वो मामूली मुलाजिम है, मै दूसरों कि जान के बदले अपना काम नहीं निकालता। आपने तो उस पार्टी में उसकी पूरी टीम को खत्म होते देखे ही थे मनीष अंकल।

मनीष:- आज तक बहुत बुरा किया है हम दोनों भाई ने, कुछ अच्छा करने का मौका मिल रहा है, हम तुम्हारा साथ जरूर देंगे। योजना क्या है वो बताओ।

अपस्यु:- पहले मुझे महिदीप की फैमिली डिटेल दीजिए…

मनीष:- महिदिप का केवल एक बेटा है रुद्रा महीदीपि, बाकी नाजायज तो बहुत होंगे, जिसका डिटेल वो नहीं रखता। इनके पूरे धंधे 2 पार्ट में चलते हैं। पहला हिस्सा सात्त्विक आश्रम ट्रस्ट से चलने वाली इंडस्ट्री, जो अनुप्रिया के बच्चे यानी की तुम्हारे सौतेली भाई बहन कलिका, परमहंस और युक्तेश्वर देखते है। धंधे का दूसरा और पुराने पीपल के तरह मजबूत खड़ा हिस्सा अनुप्रिया और महिडिपी देखते है, आश्रम का पूरा काम।

अपस्यु:- फिर ये रुद्रा क्या करता है?

मनीष:- रुद्रा दोनो धंधों को एडवांस करता है, यूं समझ लो कि ये पूरे धंधे का प्रमोशनल टीम है। फिर चाहे वो आश्रम के लिए फेक प्रचार के नए आइडिया लाना हो, या किसी मंत्री या सरकारी मुलाजिम को अपने साथ मिलाकर कंपनी के लिए गवर्नमेंट के बड़े-बड़े टेंडर लेना हो, रुद्रा और उसकी टीम ही मैनेज करती है। इसके पास खुद की अपनी एक छोटी सी आर्मी और अत्याधुनिक हथियार तो आश्रम के नीचे बने अंडरग्राउंड बेस में रखे है।

पूरे आश्रम में ना जाने कितने, ना दिखने वाले आधुनिक हथियार लगे होंगे। दुश्मन जबतक एक्शन का सोचेंगे, तबतक तो उन्हें खामोशी से साफ कर दिया जाएगा, और किसी को कनोकान भनक तक नहीं होगी। रुद्रा अपने कजिन, बुआ और पिता के लिए ढाल की तरह काम करता है। ये लोग कहीं भी रहे रुद्रा की पूरी टीम इनपर हर वक़्त सर्विलेंस रखती थी। केवल लोकेश की ही टीम थी जो इनसे सीधे पंगे लेकर भी जिंदा बची हुई थी और तुमने उस टीम को भी खत्म कर दिया।

अपस्यु:- प्रोफाइल तो बहुत धासू है। खैर कोई नहीं, इसे भी अंजाम तक पहुंचा दूंगा।

राजीव:- अपस्यु नहीं, ये विशाल पीपल का वृक्ष है जो ऊपर से पुरा हरा भरा और जरें ना जाने कहां तक गहरी है। तुम अपनी योग्यता से खुद की जान बचा लोगे, किन्तु यदि तुम इनकी नज़रों में आए, तो तुम्हारा पुरा परिवार खतरे में आ जाएगा।

अपस्यु:- जब परिवार ही मेरा पास नहीं रहेगा तो मै 50 हजार करोड़ खर्च करके केवल मिसाइल खरीदूंगा और इनके ऊपर तबतक गिरता रहूंगा जबतक ये साफ नहीं हो जाते। एक सिम्पल थेओरी काम करती है, मेरे परिवार के लिए मै जीता हूं, मेरे जीने की वजह गई तो उनको भी साफ करके फिर चैन से मर जाऊंगा।

मनीष:- और तुम जो उन्हें मारने कि योजना बना रहे हो।

अपस्यु:- मैंने तो लोकेश, प्रकाश और विक्रम को नहीं मारा फिर उन्हें क्यों मारने लगा। हां सही सुना आप लोगों ने, उस रात केवल और केवल लोकेश की टीम मरी थी, बाकी के लोग जेल में है। और ये तीनों भी जेल में होते, लेकिन मुझे सात्विक आश्रम की डिटेल लेनी थी और उन तीनों को भी माहीदीपी के साथ जेल भेजना था, इसलिए छिपाकर रखा है। मै तो सजा दिलवाने के इरादे से हूं, लेकिन यदि ये लोग खून खराबे पर आते है तो भुल जाऊंगा की वो लोग मेरे परिवार का हिस्सा है।

राजीव:- फिर तुम्हारा योजना क्या है।

अपस्यु:- कुल 4 लाख करोड़ की डील है। मेरे पास अभी 50 हजार करोड़ है। कुछ दिन बाद मै यूएस निकालनेवाला हूं, इस 50 हजार करोड़ को 2 लाख करोड़ में बदलने। मुझे पूरे पैसे मेरे अकाउंट में चाहिए बदले में मै उन्हें कैश में पैसे दूंगा, कब और कहां पैसों की डिलीवरी होगी वो मै बता दूंगा। इस डील के लिए मैं 25% कमीसन दूंगा यानी की 50 हजार करोड़। इतने रकम के लिए वो पागलों की तरह डील में कूदेंगे। उनके 2 लाख प्लस मेरे 2 लाख .. हो गए ना 4 लाख करोड़। आप बस आराम से खेल का मज़ा लीजिए।

मनीष:- तुम तो सब खुद प्लान कर ही चुके हो फिर हमारी क्या जरूरत?

अपस्यु:- जरूरत है ना… अभी हमने अपनी कंपनी शुरू की है, और लोकेश के टॉप कनेक्शन को तो मैंने तोड़ दिया सबको जेल भेजकर। नए कॉन्टैक्ट और टेंडर तो आप ही दिलवाओ ना। कुछ फेयर कंपिटेशन मै कंपनी से भी से दूं। एक भाई के पास होम मिनिस्ट्री ऑफिस है और दूसरे भाई 4 दिन बाद अर्बन डेवलपमेंट के चीफ सेक्रेटरी होने वाले हो, इतना तो फायदा दे ही सकते हो। और घबराओ नहीं इस अच्छे काम के लिए आप दोनो को वन टाइम सेटलमेंट भी दूंगा, इतना की फिर कभी काम करने की जरूरत महसूस नहीं होगी। बोलो मंजूर है।

राजीव मिश्रा:- मै पैसे में इंटरेस्ट नहीं रखता अब। मुझे कुछ अच्छा करना था और वो मौका देने के लिए धन्यवाद।

मनीष:- बुरे काम में बहुत पैसे बनाए है, मेरे पास 1600 करोड़ है वो मै पुरा तुम्हे देता हूं, काले और घिनौने पैसे। मुझे तुम साफ सुथरा पैसे देना, जो भी तुम्हारी इक्छा हो।

अपस्यु:- पुरा साफ पैसा ही मिलेगा वो भी सरकारी नियम के हिसाब से। पूरे ब्लैक मनी भारतीय सरकार को सौंपने पर 40000 करोड़ मिलेंगे, पता ना टीडीएस कितना कटेगा, लेकिन उसके बाद जितना भी बचेगा, उसमे से आधे हिस्सा का आधा-आधा आप दोनो भाई का। और इसपर कोई बहस नहीं होगी।

मनीष:- मुझे मंजूर है।

राजीव:- मै भी साथ हूं। चलो मिलकर इनकी बैंड बजाते है। इन्हे अब हम अपनी ब्रेन क्षमता दिखाएंगे।

अपस्यु:- इसी खुशी में आज रात टल्ली पार्टी मेरे फ्लैट में, और रात को सोने की पूरी व्यवस्था वहीं।

तीनों जब बाहर आए तो दोनो भाई गले में हाथ डाले बाहर निकले। उन दोनों को एक बार फिर साथ देखकर पूरे घरवाले खुश थे। साची और लावणी के सर से तो जैसे बोझ ही उतर गया हो। अपस्यु ऊपर से नीचे उतरते हुए कहने लगा… "दोनो भाई खुश नजर आ रहे है, अब हम कॉलेज चले क्या?"..

लावणी दौड़कर अपस्यु से लिपटकर रोती हुई कहने लगी… "आप साथ है तो कुछ भी कर पाना मुमकिन है।"..

अपस्यु उसके आशु पोछते… "तुम ऐसे हर छोटे बात पर आशु बहाती रही, तो इस जालिम दुनिया को फेस कैसे करोगी।"..

लावणी:- उस जालिम दुनिया को देखने के लिए दरवाजे के बाहर अपस्यु और आरव खड़े है ना और पीछे हम सब अपनी छोटी सी इमोशनल दुनिया में मस्त।

लावणी की बात सुनकर हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। तीनों आज साथ ही कॉलेज पहुंचे। थोड़ा लेट हो गए थे, पहले क्लास के लिए इसलिए टाइम पास करने सीधा कैंटीन पहुंच गए।…. "हर वक़्त तू कैंटीन में परी रहती है, क्लास नहीं करना होता क्या तुम्हे।".. अपस्यु ने कुंजल के सर पर एक हाथ मारते हुए पूछा। ..

कुंजल:- क्या है, ऐसे पीछे से मारा मत करो। वैसे भी मै गुस्सा हूं आपसे।

अपस्यु, इससे पहले कि कुछ और बोलता, वहां कई छात्राओं ने उसे घेर ली और अपनी दिल की भावना जताते हुए, उसे प्रेम पत्र देने लगी। अपस्यु चारो ओर का नजारा देखते हुए…. "तुम लोग ग्रुप बनाकर मुझे प्रेम पत्र देने आयी हो। लेकिन ये तो व्हाट्स ऐप और फेसबुक का जमाना है कन्याओं।"

साची:- इन कन्याओं को तुम ना तो एफबी पर मिले और ना ही व्हाट्स ऐप पर, इसलिए ये पत्री देकर आगे का पता पूछने आयी है।

अपस्यु:- तुम सब अब तक खाली थी क्या, कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनायी?

भीड़ में आगे पीछे से एक ही आवाज़ आती रही… "हमने ब्रेक उप कर लिया है।"..

अपस्यु:- देवियों, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, लेकिन मै पहले से एंगेज्ड हूं और बहुत सारे लोगों ने मेरे लव परपोजल वाला शो देखा भी होगा।

सभी लड़कियां वेटिंग एप्लिकेशन डालती हुई कहने लगी… "अगर इरादा बदले तो मुझे चुन लेना।"…

अपस्यु इतनी भरी भरकम भीर देखकर कुंजल को देखने लगा। वो भी हंसती हुई अपने पास परे कई लेटर अपस्यु को दिखाते… "इन लोगों को पता चल गया है की हम दोनों मायलो ग्रुप के मालिक के बच्चे है।"..

साची:- चल लावणी अब इन दोनों सेलेब्रिटी भाई-बहन को यहीं छोड़ दो।

अपस्यु:- वेरी फनी, बैठ जाओ चुपचाप। हां तू कुछ गुस्से के बारे में कह रही थी।

कुंजल:- हा गुस्सा, स्पोर्ट्स टीचर से जाकर मिलो, इससे पहले कि वो टीम अनाउंस कर दे। और सुनो भईया कम से कम 4-5 प्रतियोगिता में तो जरूर भाग लेना।

अपस्यु:- क्यों तुम साथ नहीं चल रही।

कुंजल:- नाह ! क्रिश को लिए जाओ, मै और विन्नी जरा शॉपिंग के लिए जा रहे है।

अपस्यु:- अभी शॉपिंग कौन करता है दिन में।

साची:- पहले मूवी फिर लंच और उसके बाद शॉपिंग, समझे बुद्धू..

अपस्यु:- हां तेरे चेहरे पर भी लिखा है की तुम भी अब क्लास नहीं ही जाओगी।

साची:- जा स्पोर्ट्स में हिस्सा ले, हम चले घूमने। चल लावणी..

लड़कियां अपने काम से निकल गई और अपस्यु अपने स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने। 2 बजे के लगभग जब अपस्यु ने ऐमी से संपर्क किया तो पता चला वो भी पूरे गैंग के साथ मस्ती मार रही है। आरव और मां कंपनी में और स्वास्तिका, अपने नए कॉलेज के साथ-साथ दीपेश के दिल्ली में सैटल होने यानी की अपना खुद का हॉस्पिटल के बनाने के काम को देख रही थी।

घर वापस आकर अपस्यु ने एक नींद लेने के बाद अभ्यास में जुट गया। अलग अलग तरह के मूव्स को प्रैक्टिस करते हुए अपस्यु अपनी पूरी योजना पर गौर करने लगा। हर चीज अपनी जगह बिल्कुल सही थी और वक़्त के साथ बस उन्हें आराम से आगे बढ़ने देना था। … फिर अचानक ही उसे काया का ख्याल आया।
 
Update:- 151

घर वापस आकर अपस्यु ने एक नींद लेने के बाद अभ्यास में जुट गया। अलग अलग तरह के मूव्स को प्रैक्टिस करते हुए अपस्यु अपनी पूरी योजना पर गौर करने लगा। हर चीज अपनी जगह बिल्कुल सही थी और वक़्त के साथ बस उन्हें आराम से आगे बढ़ने देना था। … फिर अचानक ही उसे काया का ख्याल आया।

अपस्यु अपना अभ्यास रोककर, कॉल लगाया। उधर से काया… "हां अपस्यु बोलो ना।"..

अपस्यु:- फ्री हो क्या?

काया:- हां फ्री ही हूं, तुम्हे बताया तो था, 12 से 3 की क्लास है उसके बाद फ्री।

अपस्यु:- ठीक है कहीं जाना मत, लिसा से मिलवाने का वक़्त आ गया है। तुम अपने हिसाब से देख लेना।

काया:- हम्मम ! ठीक है। एक काम करो उसे फ्लैट ही बुला लो। जब वो आ जाए तो मुझे बस मैसेज कर देना।

काया का कॉल डिस्कनेक्ट होते ही अपस्यु ने लिसा से संपर्क किया। वो भी फ्री ही थी, और मन तो उसका भी नहीं लग रहा था, इसलिए वो भी मिलने चली आयी। घर की घंटी बाजी, और अपस्यु दरवाजा खोलते…. "उफ्फ ! ये हुस्न ये अदा, कहीं हम हो ना जाए फिदा।"..

लिसा:- फ्लर्टिंग हां । तुम्हारा फ्लैट तो काफी शानदार है अपस्यु।

अपस्यु:- जी शुक्रिया मिस, वैसे इतना बन संवर कर कहां बिजली गिराने निकली हो।

लिसा, सिगरेट निकालती…. "तुम्हे आपत्ति ना हो तो"..

अपस्यु:- इट्स ओके..

लिसा, सिगरेट के कश फूंकती…. "सब कुछ होते हुए भी इंसान कितना तन्हा हो जाता है ना। सब कुछ अपने हिसाब से होता तो कितना अच्छा होता ना।"..

अपस्यु:- तुम यूके से वापस क्यों आयी लिसा?

लिसा:- कुछ बातें याद करने से सेहत खराब हो जाती है अपस्यु। अब ऐसा मत सोचना कि वहां कुछ बहुत बुरा हुए था, या गोरों ने मेरा चिर हरण कर दिया था। बस अपने लोगों के बीच वहां नहीं थी और यहां अपनो को ढूंढने आयी तो पता चला कि सब व्यस्त है।

अपस्यु:- इतना गंभीर नहीं होते। जब लगे जिंदगी में केवल तन्हाई है, तब समझ लेना की ये सही वक़्त है अपना पूरा फोकस उस काम पर देने के लिए जिसकी ख्वाहिश कभी तुमने की थी।

लिसा:- और जिसने कभी कुछ करने की कोई ख्वाइश ही ना की हो..

अपस्यु:- तो कौन सा जिंदगी खत्म हो गई है। सोशल साइट पर जाओ और झगड़े करो, भड़ास निकालते रहो।

लिसा:- हिहिहीहिही… आइडिया बुरा नहीं है, आज ही करके देखती हूं।

तभी फ्लैट की बेल बाजी और अपस्यु दरवाजा खोलते…. "काया, आओ अंदर"..

काया भी उन दोनों के पास बैठती…. "अपस्यु मैंने आज केट वॉक सीखा है, मैं तुम्हे करके दिखती हूं, तुम बताना कैसा है।"

अपस्यु:- लेकिन मै कैसे बता सकता हूं।

काया:- अरे यूट्यूब लगाकर देख लो ना।

लिसा:- आप कीजिए, मै देखकर बताती हूं।

काया:- ये सुंदर बाला कौन है अपस्यु?

अपस्यु:- ये सोमेश अंकल की बेटी और मेरी प्यारी दोस्त लिसा है।

लिसा मुस्कुराकर अपस्यु को उसे प्यारी दोस्त कहने के लिए थैंक्स कहीं, फिर काया से…. "हाय मै हूं लिसा।"..

काया:- मै हूं काया, अपस्यु की रिलेटिव।

लिसा:- सो आप मॉडल है।

काया:- नहीं बस मॉडलिंग का सपना था और उसे है पुरा करने के लिए दिल्ली आयी हूं।

अपस्यु:- तुम दोनो एक काम क्यों नहीं करती, काया इसे अपने फ्लैट में ही ले जाओ, वहां केट वॉक भी दिखा देना, मै जबतक कुछ काम कर लेता हूं।

लिसा:- यें क्या बात हुई, मुझे यहां बुलाकर तुम भी बिज़ी हो रहे हो।

अपस्यु:- बुलाया ही था कि तुम्हे साथ ले चलता, काम के साथ बातें भी हो जाती। लेकिन शायद काया को तुम्हारी ज्यादा जरूरत है।

काया:- थैंक्स अपस्यु। लिसा अगर तुम्हे कोई ऐतराज ना हो तो क्या तुम मेरी हेल्प कर दोगी।

लिसा:- ठीक है चलो चलते हैं। अब अपस्यु ने कहा दिया तो तुम्हारी मदद करना तो बनता है ना।

काया:- बहुत ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है, ठीक पास वाला मेरा फ्लैट है।

लिसा अपस्यु को बाय कहती हुई काया के साथ चली गई और अपस्यु वापस से अपने मूव्स और अभ्यास पर कन्सन्ट्रेट करते हुए खुद से ही कहने लगा… "अब सब अपने लय में है पूरी तरह से।"…

शाम के 7 बजे अपस्यु के फिजिक्स का क्लास शुरू हो गया। ऐमी और अपस्यु दोनो ने पहले तो फिजिक्स के टेस्ट दिए ताकि आलोक को उनका केवल पता हो। 5 स्टेप के टेस्ट से जो बसिक्स से शुरू होकर ऊपर के लेवल तक जाते। अपस्यु ने 3 लेवल तक क्लियर किया जबकि ऐमी ने 4 लेवल क्लियर कर लिया था।

दोनो के फिजिक्स में रुचि को देखते हुए आलोक काफी खुश हुआ और दोनो को कल के लिए टॉपिक देकर वहां से भेज दिया। ज़िन्दगी अब बिल्कुल रूटीन की तरह हो चली थी, जिसमें जायका डालने के लिए कभी-कभी उस स्टूडेंट लीडर विकास की एंट्री हो जाती, तो कभी वो 4 लड़कियां आ जाती। इसके अलावा लिसा और रुनझुन भी थी जो कभी-कभी सुप्राइज दे जाती। बाकी फैमिली ड्रामे तो थे ही, जो अपस्यु के खाली समय को पूरा भर देते।

2 महीने हो चुके थे उस बड़ी घटना के जिसमे एक बड़ा सा नाम पुरा डूब गया था। शाम का वक्त था और सात्विक आश्रम में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन हो रहा था। भक्तो की भीड़ में बहुत से लोग अनुप्रिया और महिदिपी के अनुयायि थे। बड़े-बड़े आैहदे और बड़े-बड़े नाम वाले लोग उन्हीं भिड़ में बैठे हुए थे।

सामने से अनुप्रिया अपने चेलों के साथ प्रवचन दे रही थी और एक किनारे से महिदीपी कुछ भक्तों कि आर्थिक मदद कर रहा था। ठीक बड़े से प्रवचन मैदान के पीछे एक आलीशान महल बाना हुआ था और उस महल के दिखावे वाले जगह जहां सब अच्छे काम हुए करते थे, ठीक उसी ग्राउंड फ्लोर के नीचे बड़ी सी महफिल सज रही थी।

उस बड़ी सी महफिल में केवल कुछ लोग आमंत्रित थे जिन्हें बुलाया गया था। मंत्र मुग्ध करने वाला माहौल था और चारो ओर केवल खूबसूरत से चेहरे नजर आ रहे थे। उसी महफिल के बड़े से हॉल के पीछे कई गुप्त कमरे थे जिसके एक कमरे में कलिका और होम मिनिस्टर का बेटा सौरव था।

कलिका, रेड वाइन का छोटा सा ड्रिंक सौरव के ओर बढ़ाती… "मुझे भी किसी ना किसी से शादी करनी ही है, तुम भी कब तक कुंवारे रहोगे, हम दोनों एक हो गए तो यूं समझ लो 2 पॉवर एक हो जाएगी, हम मिलकर धमाल मचा सकते है।"

सौरव:- लेकिन तुम मुझसे उम्र में बड़ी हो..

कलिका उसकी बात पर मुस्कुराकर उसके करीब आकर उसके हाथ से जाम लेकर… "मैंने चेक कर लिया है, आओ साथ खड़े होकर देख लो क्या मै बड़ी दिखती हूं।"

सौरव कलिका के साथ खड़े होकर, सामने लगे फुल साइज मिरर में दोनो को देख रहा था। छोटा सा आकर्षक चेहरा, जिसको देखकर उम्र का पता नहीं लगाया जा सके। नजर नीचे फिसलती, पल्लू के नीचे चोली के अंदर के कसे हुए उरोज काफी मादक लग रहे थे।

कमर पर बंधी साड़ी के ऊपर, कमर के दोनो किनारे देखने का वो नजारा, उफ्फ नजर ठहर जाए। सौरव बड़े गौर से कलिका के फिगर को एनालिसिस कर रहा था… "क्या हुआ पुरा फिगर चेक कर लिए, दोनो जब साथ खड़े होंगे तो परफेक्ट जोड़ी लगेंगे ना।"

सौरव, कुटिल नजरो से देखते, साथ जब खड़े होंगे तो बड़े छोटे जैसे बिल्कुल नहीं दिखेंगे, लेकिन तुम्हारी फिगर साड़ी के ऊपर से नजर नहीं आ रही।

कलिका:- ये तो तुम्हारे लिए हमेशा कि समस्या बनी रहेगी, क्योंकि मै ज्यादातर साड़ी ही पहनती हूं। थोड़ी मेहनत करके पूरे फिगर क्यों नहीं चेक कर लेते..

कलिका के बात सुनकर सौरव का जोश पुरा उफान पर था। नीचे पैंट कि हलचल तूफान पर थी। वो कलिका के पीछे आया, पल्लू को नीचे गिराकर चोली में बंद उसके उरोज को आइने में देखते हुए नजारे ले रहा था।… "साइज क्या है।"… "36"..

सौरव गरदन के नीचे खुशबू लेते, अपने हाथ आगे ले जाकर उसके स्तन को दबाने लगा। आज तक किसी के स्तन को दबाने में वो मज़ा नहीं आया, जो चोली के नीचे कलिका के कसे उरोज को दबाने में मिल रहा था।

तेजी के साथ उसने चोली के डोर को खोलना शुरू किया, धीरे धीरे चोली ढीली होती चली गई और पूरे डोर खुलते ही सौरव उसके स्तन देखने के लिए पागल हो गया। कलिका हंसती हुई बड़ी अदा से वो चोली अपने खुले बहन से निकाल दी।

कमर तक बंधे साड़ी के ऊपर 36 के साइज के उसके गोरे स्तन कमाल के लगा रहे थे। ऐसा लग रहा था आइने के सामने रती खड़ी है, और सौरव उसके बड़े बड़े खुले स्तन देखकर पागल हुआ जा रहा था। वो कलिका के बांह के नीचे से अपने दोनो हाथ बढ़ाकर, उसके दोनो स्तन को पर जितना अपनी मुट्ठी की पकड़ बना सकता था, पकड़ बनाकर उसके निप्पल को अंगूठे से दबाकर मिजने लगा।

आइने के सामने क्या कामुक नजारा था, कलिका के दोनो स्तन के ऊपर फैले पंजे और अंगूठे से मीजते निप्पल, कलिका अपने होंठ को दातों तले दबाए, मादक अंगड़ाई ले रही थी और अपने दोनो हाथ पीछे करके, जैसे ही उसने अपने दोनो हाथ सौरव के ऊपर रखी, सौरव बेचैनी में स्तन से हाथ हटाकर, उठे हुए पूर्ण उभार को देखकर वो पागल हो गया।

वो आइने में देखते हुए नीचे बैठा और उसके कमर को चूमते हुए हाथ आगे ले जाकर साड़ी को कमर से खोलकर, उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया। सौरव से बर्दास्त कर पाना मुश्किल हो गया उसने तुरंत ही कलिका की पैंटी निकालकर अपना मुंह दरारों के बीच घुसा लिया और जीभ से उसके योनि को गीला करने लगा।

कलिका आगे के ओर झुककर टेबल को पकड़ ली और अपने दोनो पाऊं को खोल कर फैला दी। कलिका के पीछे की मादक बनावट और दरार के बीच उसके योनि को देख सौरव पागल हो गया। दरार पर वो पुरा जीभ लगाकर कलिका के गुदा मार्ग से लेकर उसके योनि को चाटने लगा।

जल्द ही कलिका अपनी कमर हिलाकर उसे आगे बढ़ने का इशारा करने लगी। कलिका भी इस वक़्त पूरी जोश में थी और जल्द से जल्द उसका लिंग अपने योनि में मेहसूस करना चाहती थी। सौरव अपने पैंट को जल्दी से नीचे करके अपने आधे खड़े लिंग को योनि से घिसने लगा और जैसे ही लिंग खड़ा हुआ, पुरा धक्का मारकर अपना लिंग कलिका के योनि में उतार दिया।

कलिका का पूरा बदन हिलने लगा। आइने में उसके हिलते बड़े स्तन, काफी मनमोहक लग रहे थे, सौरव उसके स्तन को अपने दोनो हाथो में भरकर तेज-तेज धक्के लगाने लगा। दोनो पूरे मस्ती में चूर सेक्स की दुनिया में डूब गए। अचानक ही सौरव के धक्कों कि गति बढ़ गई और दोनो ही अपने कमर जोर-जोर से हिलाने लगे।

जैसे ही सौरव छुटने को आया कलिका पलट गई और उसके लिंग को जोड़-जोड़ से हिलाने लगी। बस 2 ही बार हिलाई होगी और उसका पूरा वीर्य कलिका के बड़े बड़े स्तन पर था, जिसे देखकर सौरव और भी पागल हो गया।

5 मिनट बाद, सौरव दोनो स्तन को मुंह में लिए चूस रहा था… "ये सब तुम्हारा ही है, अब चोली बांधो, हमे अपने शादी के अनाउंसमेंट के बाद अपना भविष्य भी तय करना है।"..

सौरव:- हम एक महीने के लिए हनीमून पर जाएंगे और दिन रात मैं तुम्हारे बदन से खेलता रहूंगा।

कलिका:- हाहाहाहा.. फिर उनका क्या होगा..

सौरव:- किनका..

कलिका बैठती हुई… तुम चोली को अच्छे से बांधो, फिर मै तुम्हे दिखती हूं।

चोली के बांधते ही कलिका अपने पल्लू को ठीक की और बेल बजाई। एक कमसिन लड़की अंदर आयी, उसने एक झलक वहां के माहौल को देखा और कलिका को तैयार करने लगी। उसके जाते ही… "शादी के बाद सुहागरात में हर पति को एक वर्जिन लड़की चाहिए होती है ना, इसलिए वो तुम्हारे लिए। और फिक्र मत करो शारीरिक सुख तुम्हे यहां उम्र भर मिलता रहेगा। बस ये जगह फलता फूलता रहना चाहिए।

सौरव पागल होकर कलिका के होंठ चूमते… "तुमने तो मेरी लाइफ बाना दी।"..

कलिका:- मै जा रही हूं, कुछ देर बाद तुम मुझे ज्वाइन करने बाहर आ जाना।

रात के लगभग 9 बजे, अनुप्रिया का पूरा परिवार टेबल पर बैठा हुआ था। साथ में 4 गेस्ट भी पहुंचे हुए थे। 2 पक्ष और विपक्ष के अध्यक्ष, होम मिनिस्टर और उसका बेटा।

सब लोग बैठे ही थे कि कलिका एक बड़ा सा अनाउंसमेंट करती हुई कहने लगी… "मैंने और मंत्री जी के बेटे सौरव ने शादी करने का फैसला किया है। क्यों सौरव।"…

सौरव:- हां पापा मुझे कलिका बहुत पसंद है, अब आप भी जल्दी से हां कह दो।

होम मिनिस्टर:- मुझे तो दूसरी मीटिंग के लिए बुलाया गया था, यहां मेरे बेटे की शादी तय हो गई। अनुप्रिया जी आपका क्या कहना है।

अनुप्रिया:- कलिका एक समझदार लड़की है मंत्री जी, आपके बेटे के कैरियर ग्राफ को नई ऊंचाई देगी।

होम मिनिस्टर:- हां सो तो है। मुझे मंजूर है।

रुद्रा:- अगर ये सब बातें हो गई हो तो हम अपने एक अहम मुद्दे पर बात कर ले। पिछले हफ्ते भर में जो भी कुछ हुआ है आश्रम में।

माहिदिपी:- हम गुरु निशी के शिष्य है। ना जाने कितने आचार्य इस आश्रम में आए और हमारे ज्ञान को चैलेंज किया। हमने ढोंग करके फर्जी नहीं किया, बल्कि हमारे पास क्षमता थी और हमने अपनी बुद्धि का परिचय दिया, इसलिए तो ये सात्त्विक आश्रम कभी भी टीवी या पेपर की न्यूज नहीं रही।

"लेकिन एक लड़की ने जिस हिसाब से गुरु और शिष्य के ऊपर सवाल जवाब किए, मै एक पल के लिए हैरान हो गया कि गुरु निशी का कोई शिष्य तो हमारे बीच नहीं बैठा। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता था, ना तो गुरु निशी है इस दुनिया में और ना ही हमारे अलावा उनका कोई शिष्य।"

पहली बार हमारे ज्ञान को चैलेंज करके हमे टारगेट किया गया। लोगों के बीच बातचित का विषय बना और अंत में मुझे कहना पर गया कि उसने हमारी बात को सुनकर मान लिया, जबकि हमारी बातें सुनने के लिए नहीं बल्कि सुनकर उसपर सोचने और तर्क करने के लिए होती है।
 
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