Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 11 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

रोमांस - एक भूल 2

ये तो यश और दृष्टि वाली स्टोरी की स्क्रिप्ट ह बस उसमे दृस्टि ऊँची पोस्ट पे लग गयी पर बस वह भी गलती लड़की की थी ये लड़किया :एंग्री: यहाँ भी कीर्ति की गलती नहीं.... बल्कि सुमित की है.... 1 नहीं 2-2 गलतियां पहली... कीर्ति के पीछे जबरदस्ती पड़ना दूसरी..... अपने प्यार तक पहुँचने...

xforum.live

ये रहा वो post...Jitna म्हणत इस पोस्ट को सर्च करने में लगा उतने में तो एक अपडेट लिख देता. :स्वेट:
 
कोई एक्सपर्ट आंसर तो नहीं बूत अपना विएवपॉइन्ट से ये कहूंगा की सच्चा प्यार हारता नहीं बल्कि मुश्किल इम्तेहान का सामना करके आगे बढ़ना पड़ता है सच्चा प्यार ko...Kabhi दुनिया वालों से तो कभी खुद se...Apne बिचार se...Kabhi खुद को समझ कर तो कभी अपने प्यार को.

और कभी एक साथ नहीं हो पाए तो सच्चा प्यार खुद तक hi सिमित रह कर ज़िंदा रहता है.
 
अपडेट 58

मेघा:- सम्भालो खुद को.

सुमित को ऐसा टूटता देख मेघा से भी रहा नहीं गया.

सुमित:- अरे nahi...Bilkul ठीक hun...Bas कभी कभी कमजोर पद जाता hun...Lekin संभालना भी सिख गया हूँ.

सुमित ने मुस्कुराते हुए kaha...Lekin इस मुस्कान के पीछे की दर्द छुपा नहीं पाया.

सुमित:- (इन हिज मंद) सँभालने के अलावा और है भी क्या मेरे पास?

मेघा:- कीर्ति तुमसे बिलकुल भी प्यार नहीं karti...Wo अभी सिर्फ अपने hi बारे में सोच रही है? क्या तुम अपने बारे में सोच नहीं सकते?

सुमित:- (विथ स्माइल) अपने बारे में hi तो सोच रहा हूँ.

मेघा:- मेरा मतलब कीर्ति को भुला kar...Wo सिर्फ अपने बारे में सोच रही hai...Koi फ़िक्र नहीं है उससे tumhara...Mai कुछ दिनों से नोटिस कर रही हूँ कितना गलत हो सकती है वो.

सुमित:- सही गलत ये अपना अपना परसेप्शन है.

तुमने कीर्ति में कुछ बातें देखा होगा जिससे वो तुम्हे अब्ब पसंद नहीं है.

लेकिन mai...Uski कुछ अदाएं थी जिस में आज भी मई फ़िदा hun...Aisa लगता है जैसे उसका साथ मिल जाए तो पूरी जिंदगी ख़ुशी और सुख में beetega...Aisa लगता है जैसे मुझे उसकी जरुरत है और उसको मेरी.

कुछ सोचते हुए सुमित ने प्यार भरी आवाज में कहा.

मेघा:- कुछ भी kaho...Mujhe नहीं लगता वो कभी samjhegi...Bahut गलत कर रही है वो.

सुमित:- हो सकता है वो गलत hai...Lekin उसको गलत कहने का हक़ भी नहीं है मेरे पास.

मेघा:- ऐसा क्यों?

हैरानी भरी आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- खुद मुझे hi देख lo...Mujhse गलत कौन हो सकता है? क्या कुछ नहीं किया मैंने तुम्हारे साथ? इस भूल के लिए माफ़ी मांग hi सकता hun...Maafi मिलने की उम्मीद भी नहीं कर सकता.

मेरे इतना बड़ा भूल होने के बावजूद कैसे कीर्ति को गलत kahu...Jabki वो गलत है भी nahi...Pyar करना और ठुकराना दोनों का हक़ होना चाहिए.

मई उससे प्यार करता हूँ ये मेरा हक़ है और इस प्यार को अपनाना या ठुकराना उसका हक़ है.

मेघा:- लेकिन तुम्हे अपने गलती का एहसास तो है न?

सुमित:- हाँ.

मेघा:- उसको इस बात की एहसास भी नहीं hai...Aur तुम उससे गलत मानना भी नहीं छह रहे हो?

सुमित:- उससे मई पसंद नहीं hun...Ismein उसकी क्या गलती? ये मेरा जिम्मेदारी है की उसके दिल में अपने लिए प्यार जागो.

मेघा:- सुना था की प्यार अँधा होता hai...Aaj देख भी liya...Abb अंधकार में देखने की फैसला कर hi लिया है तुमने तो मई कुछ नहीं कह सकती.

इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा tha...Sumit ने भी मुस्कुरा कर इस बात को ताल दिया.

अब्ब ना सुमित कुछ बोलना चाह रहा था और ना hi मेघा को कहने के लिए कुछ मिल रहा tha...Kuch देर सोचने के बाद.

मेघा:- अब्ब आगे क्या करोगे? कीर्ति के करीब जाने की? मेरा कुछ हेल्प चाहिए फिर से.

आखिरी बात मेघा ने व्यंग के साथ कहा.

सुमित:- अब्ब nahi...Thak गया हूँ abb...Abb कुछ करूँगा तो बस intejaar...Intejaar कीर्ति की और कुछ मौका का जो शायद आगे वक्त hi मुझे देगा.

और tum...Yakin नहीं करोगी tum...Sach में शर्मिंदा हूँ तुम्हारा जैसे उसे किया उस वजह se...Pehle भी कहा था उस ट्रिप के बाद पीछा छोड़ दूंगा तुम्हारा हमेशा हमेशा के लिए.

ना hi तुम मुझे देखना पसंद करती हो और ना hi मई तुम्हारे आँख में आँख मिला पाने के काबिल हूँ.

सुमित ने शर्मिंदगी भरी आवाज में कहा और अपनी नजर घुमा लिया.

मेघा:- अगर मई कहु की मैंने तुम्हे माफ़ कर दिया तो?

एकदम से सुमित के चेहरे का भाव बदल gaya...Yakin करना भी उससे मुश्किल हो रहा था.

सुमित:- क्या ये सच है?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- तब बता नहीं सकता कितना खुश हूँ mai...Bahut बड़ा बोझ दिल से उतर gaya...Kirti मुझसे प्यार नहीं करती इससे भी ज्यादा बुरा इस बात का लगता की मैंने किसी का दिल दुखाया hai...Uske साथ छल किया है.

हर बीतते दिन के साथ खुद से hi नजर नहीं मिला पा रहा tha...Khud से hi नफरत हो गया था.

कुछ पल के लिए सुमित चुप हो गया और फिर.

सुमित:- लेकिन इतने जल्दी माफ़ी नहीं मिलना चाहिए tha..Tumne माफ़ तो कर दिया लेकिन तुम्हारा क्या? माफ़ कर देने से तुम्हारा दिल का जख्म भर जायेगा?

सुमित इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

मेघा:- बहुत सोच रहे हो तुम... (लाफिंग) तुम इतना भी स्मार्ट नहीं हो की तुमसे प्यार हो जाए.

बस अच्छा दोस्त मानती thi...Lekin तुम्हारा उस धोखा के बाद नफरत हो गयी थी.

लेकिन सचाई जाने के बाद सोचा माफ़ कर देना hi सही है.

मेघा की इस बात पर सुमित को यकीं नहीं हो रहा था.

सुमित:- सच कह रही हो ना? प्यार जैसी कोई फीलिंग तो नहीं है न जो मेरा भूल का नतीजा था?

वर्ण एक तरफ़ा प्यार का दर्द मई hi समझता hun...Jo क्या से क्या हाल बना कर रख देता है.

मेघा:- तुम्हारा कॉमेडी से सिर्फ हंसी आता hai...Dil जीत नहीं सकता किसी का.

तुम शायद कुछ ज्यादा hi स्मार्ट सोच मान रहे हो खुद को.

सुमित मेघा की इस बात पर खुश था की उसकी भूल का असर मेघा पर उतना नहीं पड़ा जिस के लिए वो हमेशा खुद को कोष्टा था.

कुछ देर की ख़ामोशी के बाद सुमित ने कहा.

सुमित:- सच में महान हो यार tum...Bahut बड़ा दिल है तुम्हारा.

मेघा:- ये बात कितनी लड़की से कह चुके हो?

मेघा ने मजाकिया अंदाज़ में कहा ये सोच कर की सुमित भी इसी मजाकिया मूड में आ jaaye...Sumit को ऐसे सीरियस और दर्द में देख मेघा को भी अवचा नहीं लग रहा था.

सुमित:- तुम पहली हो.

मेघा कुछ कहती उससे पहले hi.

सुमित:- भले hi प्यार भरी बात बहुत लड़कियों से कहा है लेकिन झूठा तारीफ़ किसी का नहीं किया है.

और तुम्हारे लिए ये तारीफ़ तुम्हारा सम्मान में कहा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) कुछ नहीं हो सकता iska...Serious hi रहेगा हमेशा. :नू:

मेघा:- वैसे तुम्हे शायद पता nahi...Lekin ऐसे तुम बहुत खड़ूस लग रहे ho...Wo पुराने वाले सुमित सही thhe...Full ऑफ़ कॉन्फिडेंस और एवर हैप्पी सुमित.

सुमित:- (इन हिज मंद) वो सुमित कही खो सा गया है.

लेकिन मेघा से इस बारे में कुछ नहीं कहा सुमित ne...Ek hi बात बार बार बोलना शायद थक गया था वो.

वो अब्ब बस तालाब की तरफ hi देख रहा tha...Megha के पास भी अब्ब बात करने के लिए कुछ नहीं था.

जब जाने का वक्त आया तब अकेले में सुमित ने मेघा से कहा.

सुमित:- तुमने मेरा बहुत मदद किया hai...Jab कीर्ति तक पहुँचने का हर दरवाजा बंद था तब उम्मीद के रूप में तुम hi नजर aayi...Ye कर्ज मई कभी चूका नहीं पाऊंगा.

अगर जिंदगी में कभी भी कही तुम्हे मेरा जरुरत पड़े तो याद कर lena...Mai हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा एक दोस्त के रूप में.

ख़ुशी होगा मुझे तुम्हारा मदद कर के.

मेघा हां में सर हिलाती है.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ.

मेघा तो चाहती थी की सुमित कुछ दिन और ruke...Lekin उससे रोकने का कोई तरीका भी नहीं था उसके पास.

मेघा:- (सर हिला कर) अच्छे से जाना.

सुमित भी हाँ में सर हिला कर बाइक में बैठ जाता है.

मेघा:- और ज्यादा तेज मत चलाना.

शिकायत भरी आवाज में मेघा ने kaha...Jawaab में सुमित मुस्कुरा कर.

सुमित:- ठीक hai...Yaad रखूँगा.

फिर सुमित वह से चला gaya...Megha पीछे से सुमित को तब तक देखती रही जब तक सुमित उसकी आँखों से ओझल ना हो गया.

और सुमित के जाने के बाद चेहरे में रौनक एक डैम से गायब हो गया.


आफ्टर 1 ईयर


वक्त तो अपने गति से आगे बढ़ hi रहा tha...Lekin इसी वक्त में जी रहे कुछ जिंदगी है जिसका रफ़्तार वक्त के साथ तो बिलकुल भी नहीं था.

"सुमित को कब प्रोपोज़ करेगी?"

ये आवाज सुनते hi मेघा के भाव एकदम से बदल गए.
 
फ्रेंड्स थोड़ा अपडेट लिख चूका hun...Thoda बाकी hai...Ummeed है कल कम्पलीट लिख लूंगा.

और जब भी अपडेट का टाइम कहता हूँ उस में सूरे मत हो jaiye...Mai खुद सूरे नहीं हूँ. :( अपडेट तो रोज लिखने का सोचता हूँ लेकिन लिख नहीं paata...Mood उतना अच्छा नहीं है आज कल.

अगर कभी अपडेट का डेट दूंगा तो चान्सेस ज्यादा है उस डेट mein...Surity नहीं hai...Issi लिए "नेक्स्ट अपडेट कल पोस्ट करूँगा" से "नेक्स्ट अपडेट कल तरय करूँगा" लिखना पद रहा है. :वेरिसद:

सॉरी फॉर ानोथेर डिले.
 
अपडेट 59

लेकिन मेघा ने कुछ जवाब नहीं दिया.

अब्ब चुप क्यों हो गयी? कुछ देर पहले तो बहुत बोल रही थी?

लेकिन मेघा अभी भी चुप थी.

सुमित से प्यार तो करती है ना?

मेघा:- बार बार एक hi जवाब देने का शौख नहीं है मुझे.

अपनी रूममेट नेहा की बात पर इस बार मेघा इर्रिटेट हो गयी.

नेहा:- प्यार तो बहुत करती है tu...Lekin प्रोपोज़ करने की बात सुनते hi ऐसे चुप क्यों हो जाती है.

मुस्कुराते हुए नेहा ने पूछा.

मेघा:- क्यों की अभी वो वक्त आया नहीं है.

नेहा:- तो फिर वो वक्त कब आएगा? मई भी देख रही हूँ...1 साल हो gaye...Abhi तक तो वो वक्त आया नहीं है.

मेघा:- Aayega...Jab सुमित को भी मुझसे प्यार होगा.

मेघा की इस जवाब से नेहा हैरान हो गयी.

नेहा:- क्या? सुमित तुझसे प्यार नहीं करता? सुमित का तुझे देखने का नजरिया बहुत अलग hai...Ye भी तुझे नहीं दिखाई दे रहा है?

मेघा:- हर अलग नजरिया प्यार नहीं होता.

मैंने भी देखा hai...Sumit जब भी मुझे देखता है उसकी आँखों में आत्मग्लानि होता hai...Abb भी वो कीर्ति से वो बहुत प्यार करता hai...Aur जब भी वो मुझे देखता है उसका वो भूल उससे याद आता है.

अब्ब तक वो मुझे आँख में आँख दाल कर नहीं dekhta...Najre चुराने की हर कोशिश करता है.

और तुझे ये प्यार दिख रहा है.

परशान आवाज में मेघा ने कहा.

नेहा:- तू इससे समझाती क्यों नहीं? तूने उससे माफ कर दिया.

मेघा:- बहुत पहले बता चुकी hun...Maine उससे माफ़ कर दिया hai...Lekin इस बात को वो बोझ के रूप में ले रहा है.

नेहा:- पता nahi...Kirti का प्यार का भूत कब उसके सर से हटेगा.

मेघा:- कई बार कोशिश कर चूका है प्यार से दूर भागने ki...Lekin बार बार घूम फिर कर वही आ जाता है.

नेहा:- बेवकूफ है ये Sumit...Jab जानता है की गलत राश्ते में जा रहा hai...Aur स्टडी में भी लोस्स होगा फिर भी?

मेघा:- दूसरों को ज्ञान देना आसान hai...Lekin कभी खुद को भी तो देख.

नेहा:- खुद पर? मई क्या बेवकूफी कर रही हूँ?

हैरानी में नेहा ने पूछा.

मेघा:- रोज कहती है तेरा ये मोबाइल का एडिक्शन तुझे पढ़ने नहीं deta...Har रात कसम खाती है की अगले दिन से मोबाइल नहीं chalayegi...Lekin? घूम फिर कर वही आ जाती hai...Aur कितना पढ़ती है? डेली 1 हर.

तुझे भी पता है मोबाइल का एडिक्शन तेरे लिए भी सही नहीं hai...Aur तेरा स्टडी लोस्स भी hoga...Fir क्यों?

इंसान सोचता तो बहुत कुछ hai...Lekin हर चीज कर नहीं paata...Kuch चीजें आदत बन जाती है.

मेघा की इस बात का कोई जवाब नहीं था नेहा के पास.

नेहा:- लेकिन तू इतना भड़क क्यों रही है? अच्छा अब्ब samjhi...Itna प्यार जो करती है सुमित se...Kuch भी बुराई नहीं सुन सकती.

नेहा ने हँसते हुए kaha...Megha ने भी हंस कर जवाब दिया.

नेहा:- अच्छा ये bata...Sumit से इतना प्यार क्यों करती है तू?

मेघा ने कुछ जवाब नहीं दिया.

नेहा:- उसका स्टाइल या फिर उसका akelapan...Aur सिम्पथी को तू प्यार सोच रही है.

मेघा:- अकेला तो है wo...Lekin उसका अकेलापन का इलाज सिम्पथी नहीं है.

बाकी तेरा sawaal...Kyu उससे मई इतना प्यार करती hun...Iss जवाब का पहला हकदार सुमित hi hai...Pehle ुई bataaungi...Fir किसी और को.

नेहा:- हाँ लेकिन वो तेरी ये बात सुने पहले उससे इस लायक तो bana...Kuch सोचा है?

मेघा:- बहुत pehle...Wo भी उसी टूर में जब सुमित ने कीर्ति को उसकी माँ की दवाई पर डांटा था. (मेघा की उस दिन की मुस्कान)

बस अब्ब एक्सेक्यूटे करना बाकी है.

Hello हीरो.

एक कोने में खड़ा सुमित ने जब ये सुना तो वो एक झूठी मुस्कान के साथ मुदा.

सुमित:- अरे मेघा तुम.

मेघा:- Haan...Lekin तुम यहाँ इस कोने में क्या कर रहे हो?

सुमित:- मन नहीं लग रहा tha...Sabhi रिजल्ट्स के बारे में बात कर रहे hai...Sabhi के अपने अपने अलग एक्सपेक्टेशंस है.

लेकिन mai...Mujhe पहली बार दर लग रहा है एग्जाम रिजल्ट्स से.

मेघा:- भला तुम्हे कब से मार्क्स की परवाह होने लगी?

सुमित:- मार्क्स की परवाह नहीं hai...Lekin पास फ़ैल की तो hai...Dar लग रहा है प्रैक्टिकल में कही फ़ैल न हो जाओ.

जिंदगी में तो फ़ैल hi hun...Abb यहाँ भी फ़ैल.

खुद से hi नफरत भरी आवाज में सुमित ने कहा.

सुमित:- बहुत लाचार महसूस कर रहा hun...Papa को भी क्या मुंह दिखाऊंगा.

इतना कह कर सुमित ने अपना मुंह घुमा लिया.

मेघा:- अच्छा आएगा result...Bharosha करो.

सुमित:- सिर्फ सुनने में अच्छा लगता है ये बात.

मेघा:- मुझे भरोषा है तुम पर.

सुमित:- गलत इंसान पर भरोषा कर रही ho...Aur मई पास होना डेसेर्वे भी नहीं करता.

थ्योरी नॉलेज अच्छा hai...Practical nahi...Waise भी न जाने कितने प्रैक्टिकल क्लासेज बंक किया hai...Fail hi डेसेर्वे करता हूँ.

उसके बाद सुमित का टर्न आता है रिजल्ट लेने के लिए.

और सुमित जब रिजल्ट ले कर आता है तो उसके चेहरे में हैरानी का भाव था.

मेघा उससे उसका रिजल्ट पेपर चीन लेती है.

मेघा:- कोंग्रटुलतिओन्स.

बेहद ख़ुशी में मेघा ने kaha...Jawaab में सुमित भी मुस्कुराया.

सुमित:- Ruko...Aata हूँ कुछ देर में.

मेघा:- लेकिन...

मेघा की बात ख़त्म होने से पहले hi सुमित वह से जल्दबाज़ी में कही चला gaya...Aur उसका कदम तभी रुका जब वो महेश सर (एनाटोमी वाले प्रोफेसर) के केबिन में पहुँच गया.

सुमित:- मई ी के इन सर?

डॉ. महेश:- यस के इन.

सुमित के अंदर आने के बाद.

डॉ. महेश:- हाँ Sumit...Kaho क्या बात है?

सुमित:- सर मई पास कैसे हो gaya...I मैं आपका विवा में भी पास hun...Mushkil से 1 या 2 आंसर दिया था मैंने.

सुमित की इस बात पर महेश सर मुश्कुराते है.

डॉ. महेश:- विवा का तो एक hi मीनिंग hai...Lekin अलग अलग लोग अलग इंटरप्रिटेशन निकालते है.

वैसे मेरे लिए बस ये स्टूडेंट्स का नॉलेज और कांसेप्ट चेक करने का एग्जाम hai...Aur उसी बेसिस पर मार्किंग करता hun...Lekin इस बार सोचा इससे मजे लेने का खेल बना लूँ.

सुमित:- सर थोड़ा और क्लियर बताइये.

डॉ. महेश:- पुरे 2 साल तुमने मेरा मजा liya...Kabhi आंसर को मजाक के रूप में तो कभी सीधा और आसान सवाल को घुमा फिर कर मुझे पूछ कर.

सोचा इस बार विवा में मई तुम्हारा मजा लेता hun...Yahi तो एक दिन है जब पूरा पावर एग्जामिनर के पास होता hai...Aur उस दिन तुम्हारा जो हाल किया उससे हिसाब बराबर.

अभी भी महेश सर के चेहरे में मुश्कान tha...Sumit अभी भी कुछ सोच रहा था.

सुमित:- सर क्या मई पास डेसेर्वे करता था?

डॉ. महेश:- ऑफ course...Jo तुमने 1-2 सवाल का आंसर दिया था सिर्फ वही सवाल तुम्हारे लेवल का tha...Baaki का क्वेश्चन मैंने अपने मजे लेने के लिए पूछ दिया.

सुमित ने अब्ब थोड़ा सुकून का सांस लिया.

डॉ. महेश:- देखो Sumit...Tum बहुत टैलेंटेड ho...Lekin बिलकुल केयरलेस और हार्डवर्क तो बिलकुल भी नहीं है.

पहली बार सुमित ने महेश सर के चेहरे में सीरियसनेस देखा.

डॉ. महेश:- कुछ टॉपिक्स है जिसमें बहुत अच्छा कॉन्सेप्ट है tumhara...Aur कुछ में बिलकुल भी नहीं.

सुमित:- सर वो पढ़ना बहुत hi बोरिंग लगता है.

डॉ. महेश:- ऐसा बिलकुल भी नहीं hota...Medical में तो बिलकुल भी nahi...Khair वो बात तुम धीरे धीरे समझ जाओगे.

क्या तुम बता सकते हो की तुम पढ़ाई में इतना इन्कन्सीस्टेन्ट क्यों हो?

इस सवाल में सुमित के चेहरे के भाव बहुत बार badla...Kabhi वो बताना चाहता था तो कभी नहीं.

डॉ. महेश:- थोड़ा बहुत समझ gaya...Especially तुम्हारा उम्र में ये सब कॉमन hai...Lekin ये भी मत bhulo...Jindagi आगे बढ़ता रहता hai...Buddhimaani इसी में है जितना जल्द इस सच को मान लो.

सुमित ध्यान से उनकी बात सुन रहा था.

डॉ. महेश:- अच्छा ये bataao...Tum बाद में क्या बनोगे?

सुमित:- न्यूरोसर्जन.

बहुत hi कॉंफिडेंट आवाज में सुमित ने कहा.

डॉ. महेश:- (विथ स्माइल) बहुत hi दूर का और बहुत hi टफ सब्जेक्ट का सोचा hai...Jaante हो कितना म्हणत करना पड़ेगा.

सुमित:- हाँ sir...Ye सपना है अब्ब mera...Aur मई अपने सपना पूरा करके hi rahunga...Kitna भी म्हणत क्यों ना करना पड़े.

सुमित ने इस बार भी आत्मा विश्वाश के साथ कहा.

डॉ. महेश:- अच्छा तो मई इससे hi अपना गुरु दक्षिणा मान लेता hun...Agar कभी मुझे ब्रेन का प्रॉब्लम हुआ बुढ़ापे में तो तुम्हारे पास hi आऊंगा.

सुमित:- अरे sir...Aap.

डॉ. महेश:- अगर हुआ to...Waise भी तुम जानते hi ho...Hamara body...Kab कहा क्या हो जाए कुछ पता नहीं चलता.

इतने सालो में पढ़ाने की एक संतुष्टि है की हर साल बहुत विद्यार्थी को अपने सब्जेक्ट में किसी लायक बनाया है.

तुम भी भरोशे पर खरा उतरना.

सुमित:- जी सर.

डॉ. महेश:- आल थे बेस्ट फॉर क्लीनिकल सब्जेक्ट्स.

सुमित:- थैंक यू सर.

फिर सुमित वह से निकल gaya...Raashte में चलते हुए बहुत से ख्याल आ रहे थे.

सुमित:- (इन हिज मंद) बस बहुत hua...Pyaar अपनी jagah...Padhaai अपनी जगह.

ये प्यार तो कभी भुला नहीं paaunga...Kirti की यादें तो आती रहेगी और तड़पाती rahegi...Lekin साथ hi मुझे अपने पढ़ाई पर भी ध्यान देना होगा.

भले hi दिल में कितना भी दर्द हो इसी दर्द से लड़ते हुए पढूंगा और आगे बढूंगा.

इस एग्जाम ने वैसे भी औकात दिखा diya...Confidence भी डाउन था की आगे कुछ होगा भी या nahi...Lekin सर से बात करने के बाद एक बार फिर लग रहा है कुछ कर सकता हूँ.

और करके hi रहूँगा.

यही सब सोचते हुए सुमित मेघा के पास पहुँच गया.

मेघा:- अच्छा तो ये बात है.

मेघा ने हँसते हुए कहा.

सुमित:- इस में हंसी की क्या बात है?

मेघा:- तुम और न्यूरोसर्जन?

सुमित:- हाँ तो.

मेघा:- कुछ ज्यादा hi सपना नहीं देख रहे हो?

मेघा जान बुझ कर सुमित को छिड़ा रही थी.

सुमित:- छोटा सपना है ये तो.

मेघा:- और बड़ा सपना? कीर्ति?

सुमित:- Nahi...Neurosurgeons का भी Scientist...Kuch ऐसे टेक्नोलॉजी डेवेलोप करू की न्यूरोलॉजी में बहुत से इम्प्रूवमेंट हो.

सुमित ने आत्मा विश्वाश के साथ कहा और इस बार मेघा और भी हैरान रह गयी.

मेघा:- कर पाओगे ये सब?

सुमित:- Koshish...Koshish तो karunga...Koshish से hi कुछ भी मुमकिन होता है.

सुमित का कॉंफिडेंट बढ़ता hi जा रहा था.

मेघा:- अचानक से ये सब?

सुमित:- अचानक से nahi...Kirti से दूर हुए 4 साल हो gaye...Hamesha आगे बढ़ना चाहता था लेकिन दिल का dard...Aage बढ़ने hi नहीं देता tha...Bas जिंदगी वही थम गया था.

अब्ब भी प्यार है कीर्ति se...Aaj भी दिल तड़पता है कीर्ति की याद mein...Lekin आगे भी तो बढ़ना padega...Iss टूटे हुए दिल के साथ hi आगे बढूंगा.

अगर आज आगे नहीं बढ़ा जब मौका है तो बाद में खुद को कोशने के अलावा कुछ बाकी नहीं rahega...Kirti से भी ज्याद ग़म मई खुद hi खुद को दे बैठूंगा.

प्यार अपनी जगह और फ्यूचर अपनी jagah...Agar किसी लायक बना तो शायद कीर्ति दोबारा मेरे पास आ जाए.

इस बार सुमित की आवाज में उम्मीद था.

मेघा भी ये सुन काफी खुश thi...Issi सुमित को तो वो देखना चाहती थी पिछले एक साल से.
 
थैंक यू भाई इस कमेंट के liye...Iss स्टोरी में लव फेलियर पर लिखना चाहता tha...Aisa नहीं की ड्रामेटिक अंदाज में सब कुछ ठीक हो jaaye...Love फेलियर का दर्द, उसके बाद का स्ट्रगल को ऐसे दिखाना चाहता था जैसे रियल लाइफ में होता hai...Jab इंसान गलती पर गलती करता जाता hai...Jaan कर अच्छा लगा की स्टोरी आपको रेलाताब्ले लगा रियल लाइफ से.

और सही कहा आपने की सभी दोस्त जो इस स्टोरी से जुड़े है वो दिल से जुड़े है जो उनके कमैंट्स से दिख रहा hai...Bas यही वजह है की मैंने कभी काम रीडर होने की शिकायत नहीं किया.

और स्टोरी में सुमित और मेघा की बात तो सुमित का जो हाल है उससे एकदम से मेघा से प्यार हो भी नहीं sakta...Jaise जैसे स्टोरी आगे बढ़ेगा और भी ट्विस्ट्स एंड तुरंस होगा.

स्टोरी का एंडिंग तो बता नहीं सकता और कन्फर्म भी नहीं कर सकता की सुमित और मेघा एक होंगे या नहीं लेकिन जो भी एंडिंग होगा वो आप सभी को पसंद जरूर आएगा.

स्टोरी का स्टार्टिंग और एंडिंग में बहुत कॉंफिडेंट hun...Middle पोरशन को और भी अच्छा बनाने की कोशिश है जिससे स्टोरी में इंटरेस्ट बना रहे.

कीप सपोर्टिंग भाई.
 
अपडेट 60

ये मुस्कान की वजह?

कुछ देर से मेघा सुमित को hi नोटिस कर रही thi…Sumit अपने hi सोच में डूबा हुआ tha…Kabhi कभी वो मेघा की तरफ देख कर स्माइल कर रहा था.

सुमित:- तुम्हारे बारे में hi सोच रहा था.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- और क्या सोच रहे थे मेरे बारे में?

सुमित: यही की अगर तुम चाहो तो पेंगुइन को भी बर्फ बेच सकती हो. :lol1:

इस बार सुमित ने हँसते हुए कहा.

मेघा:- क्या मतलब?

सुमित:- एग्जाम में जस्ट पास होने वाले से पार्टी ले रही हो तो पेंगुइन को बर्फ बेचना कौन सी बड़ी बात है? :डी

मेघा इस बात पर सिर्फ मुस्कुराती है.

सुमित फिर अपने सोच में खो गया.

मेघा:- वैसे तुम्हे क्यों लगा अब्ब तुम्हे बदलना चाहिए?

सुमित एक नजर मेघा को देखता hai…Iss बार वो बहुत सीरियस था.

सुमित:- खुद से hi नफरत होने लगा tha…Jab भी आईना में खुद को देखता हूँ ऐसा लगता है दुनिया का सबसे बड़ा ह्य्पोक्रिटे मई hi हूँ.

हमेशा राज को यही बताता की प्यार में आर या पार का गेम khel…Yaa तो किसी तरह मनाने में कामयाब हो जा या फिर हमेशा के लिए प्यार को भूल jaa…Aise अपने वक्त और भविस्य बर्बाद मत kar…Aur जब बात मुझ पर आया तो मई तो एक लेवल और आगे निकल गया…3 साल बर्बाद कर दिया इस प्यार में.

जिंदगी में कभी सीरियस ना होने वाला सुमित आज दिन रात सीरियस रहता hai…Gham को अपने जिंदगी में मक्खी की तरह निकाल फेंकने वाला सुमित आज दर्द की समुन्दर में डूबता जा रहा है.

नशा और एडिक्शन से नफरत करने वाला सुमित आज खुद एडिक्ट hai…Ek दिन बिना सिगरेट के रह नहीं paata…Jab भी दारु सामने होता है खुद को रोक नहीं paata…Agar छोड़ने की सोचता भी हूँ तो विथड्रावल सिम्पटम्स कुछ पल भी चैन से जीने नहीं deta…Na जाने कितनो का नशा छुड़वाया hai…Lekin खुद पर?

क्या हुआ करता था मई और क्या हूँ आज? एक हारा हुआ, लाचार और निकम्मा nashedi…Khud को hi गाली देने का मन करता है.

पापा का सपना है की मई बाद में इतना काबिल डॉक्टर बनूँगा जो लोग का हर एक बीमारी का इलाज karunga…Lekin उन्हें क्या pata…Unka hi बीटा कैंसर, सिरोसिस और कपड़ जैसे बीमारी का शिकार बन जाएगा.

माँ रोज फ़ोन में पूछती है की रात और दिन के खाने में क्या खाता hun…Padhai से वक्त निकाल कर अपना ख्याल रखता हूँ या nahi…Har बार झूठ बोलना पड़ता hai…Kya जवाब दूँ मई? खाना काम नशा में ज्यादा व्यस्त रहता hun…Aur जिस पढाई से वक्त निकालने की बात करती है वो उन्हें क्या पता पिछले एक साल में एक बार भी किताब को नहीं छुआ.

और Rashmi…Jo हमेशा मुझे कॉंफिडेंट और विनर के रूप में जानती hai…Ashliyat जानेगी तो पता चलेगा मई कितना बड़ा लूज़र हूँ.

और मेरा दोस्त Ashish…Jo हर वक्त मेरे साथ खड़ा रहता hai…Mujhe पहले की तरह देखने के लिए क्या कुछ नहीं karta…Usse भी पता नहीं उसका ये लड़ाई मेरे लिए कब तक चलने वाला है.

साथ देने वाले लोग तो बहुत hai…Lekin मई hi हूँ जो सभी को निराश करता जा रहा हूँ.

ऐसा मई बिलकुल नहीं tha…Megha तुम मुझे जानती थीं ा कॉलेज की शुरूआती दिनों में?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- हाँ वैसा hi हुआ करता था mai…Nahi नहीं उससे भी accha…Pehle जैसा था वैसा hi tha…Naa hi कोई एक्टिंग और ना hi किसी को धोखा देने की प्लानिंग.

लेकिन अब्ब? अब्ब जो सुमित को मई देख रहा हूँ उससे तो मई खुद भी नफरत करता hun…Bas छुटकारा नहीं पा रहा हूँ.

कब तक खुद को और अपनों को धोखा देता रहूँगा? प्यार बहुत जरुरी hai…Shayad hi कभी अपने प्यार को भुला paau…Lekin अपने जिम्मेदारी? उससे कैसे भूल सकता हूँ.

बहुत मुश्किल hai…Lekin आगे बढ़ना hi है मुझे.

सुमित की आवाज में कभी दर्द, नफरत और लाचारी था लेकिन आखिरी बात में आत्मविश्वाश.

मेघा:- क्या ये आसान होगा तुम्हारे लिए?

सुमित:- इस कोशिश को जिद्द का रूप दूंगा.

मेघा:- अब्ब उसी सुमित को देख रही हूँ जिससे मई जानती हूँ.

सुमित इस बात पर मुस्कुराता hai…Aur फिर सीरियस हो कर.

सुमित:- तुम ये मत समझना की मई तुम्हारा सिम्पथी लेना चाहता hun…Bas कभी कमजोर महसूस करता हूँ तो ऐसे hi कुछ भी बोल देता हूँ.

मेघा:- नहीं nahi…Aise हालात में hi तो दोस्त काम आते hai…Kuch मिले ना मिले मोटिवेशन जरूर मिलता है. :डी

अभी तक सुमित और मेघा दोनों hi नाश्ता ख़त्म कर चुके था या यूँ कहे की सुमित का ये मेघा के लिए पार्टी ख़त्म हो चूका था.

कैंटीन से बाहर निकलते hi.

मेघा:- दोस्त के रूप में हमेशा साथ rahungi…Kabhi जरुरत पड़े तो याद कर लेना.

सुमित:- जरूर. :)

फिर दोनों अपने अपने हॉस्टल की तरफ जाते है.

सुमित:- (इन हिज मंद) तुम तो हमेशा साथ रहती ho…Bas मई hi हूँ की कभी कभी तुम्हे फेस करने की हिम्मत नहीं कर पाटा.

और सुमित जब अपने रूम में पहुँचता है.

राज:- Bhaiya…Kuch बात करनी है आपसे?

राज कुछ ज्यादा hi सीरियस था इस बार.

सुमित:- Haan…Bol.

राज:- इस बार आपके पापा से झूठ नहीं बोल पाया.

थोड़ा बहुत सुमित समझ गया.

राज:- आपका हालत मुझसे देखा नहीं जा रहा hai…Maine hi उन्हें बता दिया आपका नशे के बारे में.

कुछ देर के लिए तो सुमित को बहुत गुस्सा aaya…Lekin कुछ देर मई खुद hi शांत हो गया.

सुमित:- गलत नहीं किया tune…Mai खुद बताना चाहता tha…Lekin हिम्मत नहीं कर पा रहा tha…Aaj नहीं तो कल उन्हें पता चल hi जाता.

राज:- भैया आप को ऐसे देख नहीं पा रहा tha…Har बीतते दिन के साथ आपका नशा भी बढ़ता जा रहा tha…Naa hi आप पढ़ाई पर ध्यान दे रहे thhe…Uncle को बताना hi सही लगा.

थोड़ा डरते हुए राज ने कहा.

सुमित:- कोई बात नहीं.

कुछ सोचते हुए सुमित ने kaha…Ek दर भी लग रहा था की उसके पापा कैसे रियेक्ट करेंगे और वो कैसे पापा का सामना कर पायेगा.

राज:- कल से आपको घर में शिफ्ट होने का कहा है उन्होंने.

ये सुनते hi सुमित का दर और भी बढ़ gaya...Wo hi जानता था उसके पापा नशा से कितना नफरत करते है.
 
अपडेट 61

तेरा रूम सेट करवा दिया है? अभी jaa...Jaa कर आराम kar...Dinner के वक्त निचे आना.

थोड़ा सख्त आवाज में सुमित के पापा ने kaha...Paas hi मई उसकी माँ और बेहेन भी thhe...Dono सुमित से बातें करना चाहते thhe...Lekin सुमित की पापा की इस बात के बाद दोनों चुप रहे.

सुमित भी अपने पापा की तरफ देखता hai...Unka गुस्सा देख नजरे झुका कर अपने रूम में चला जाता है.

डिनर टाइम

आ गए डॉक्टर साहब?

व्यंग भरी आवाज में सुमित के पापा ने कहा.

स. डैड:- बैठिये.

सुमित भी कुछ बोले बिना बैठ गया.

स. डैड:- खाना यही खाएंगे या फिर कुछ स्पेशल अरेंजमेंट karwaau...Daaru और सिगरेट की?

सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.

स. डैड:- कुछ ड्रग्स भी लेता है? अगर हाँ तो वो भी बता दे.

इस बार गुस्से में उन्होंने पूछा.

सुमित:- नशेड़ी बनने का शौख नहीं hai...Kabhi कभी दारु, सिगरेट पी लेता हूँ ग़म भुलाने के लिए.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

स. डैड:- ग़म भुलाने के liye...Aisa क्या ग़म हो गया तुझे इतने से उम्र में?

घर का खर्च मई उठाता hun...Din भर काम में मई जाता hun...Ghar में सभी का मांग और इच्छा पूरा करने के लिए जरुरत से ज्यादा काम मई करता hun...Duniya वालों का सामना भी मई करता हूँ.

और तेरा काम क्या hai...Padhna और सिर्फ padhna...Abb ये भी तुझे ग़म लगने लगा.

सुमित:- वो ग़म नहीं है.

अपने पापा के गुस्सा के सामने इतना hi बोल पाया सुमित.

स. डैड:- तो फिर क्या ग़म है?

सुमित बोलना तो चाहता था लेकिन बोल नहीं पा रहा था.

स. डैड:- लव फेलियर?

सुमित हाँ में सर हिला देता hai...Aur इसी के साथ सभी की नजरे सुमित पर hi रुक जाता hai...Sabhi को सवाल थे सुमित से.

सुमित की पापा भी चुप hi रहे कुछ पल के लिए.

स. डैड:- जिस चीज का दर था वही hua...Aaj कल के बच्चों को देखता hun...Jabardasti के प्यार के चक्कर में पड़ना चाहते है.

जिस उम्र में जिंदगी का शुरुवात भी ढंग से नहीं होता उसी उम्र में ये बच्चे सोचने लगते है जिंदगी बीत रहा है और अभी तक इन्हे इनका प्यार नहीं milaa...Jindagi अधूरा है इनका.

जिस उम्र में पढ़ लिख कर कुछ बनना chahiye...Uss उम्र में इनका अलग hi कम्पटीशन होता hai...Kisko पहले रिलेशनशिप नसीब hoga...Kaun ज्यादा गिर्ल्फ्रेंड्स बनाएगा?

आज कल देख रहा हूँ प्यार नहीं मिला तो कोई अपना जान दे देता hai...Koi नशेड़ी बन जाता hai...To कोई रिजेक्ट होने के गुस्से में लड़की के साथ hi गलत कर देते है.

क्या ज़माना आ गया है ये?

पहले तुझे देख कर लगता था तू इन् सब चीजों से दूर hai...Lekin तू भी उनमे से hi एक निकला.

निराश आवाज में उन्होंने कहा.

सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.

सुमित के पापा भी अब्ब चुप हो गए.

स. माँ:- कौन है वो लड़की?

सुमित:- कीर्ति.

ये सुनते hi फिर से सब हैरान रह gaye...Sabse ज्यादा रश्मि.

रश्मि:- लेकिन कीर्ति ने तो मुझे कभी बताया नहीं.

सुमित:- उससे मुझसे प्यार है hi नहीं तो क्या बताएगी?

स. डैड:- सुरु से ले कर अब्ब तक जो भी हुआ सब बता.

फिर सुमित सब कुछ बता देता है.

स. माँ:- इतना सब कुछ हो गया और तूने हमे कुछ भी बताना सही नहीं समझा.

सुमित:- बता कर आप लोगों को परेशान नहीं करना चाहता tha...Ye ग़म खुद तक hi रखना चाहता था.

सुमित फिर अपने पापा की तरफ देखते hai...Unke होंठो में मुस्कान था लेकिन चेहरे में दर्द.

स. डैड:- ये bacche...Sochte है की ये बहुत समझदार hai...Hume दर्द होने नहीं denge...Inhe लगता है इनका दर्द बहुत बड़ा दर्द hai...Hum लोग सुनेंगे तो सेह नहीं paayenge...Itna बड़ा दर्द है इनका.

इतना कह कर वो चुप हो गए.

स. माँ:- कभी अपने पापा की उम्र की जगह और उनके उम्र के बराबर होगा तो समझेगा.

जो तू अपना अकेला का दर्द नहीं सेह पा रहा hai...Wo अपने साथ साथ 4 लोगों की जिंदगी के लिए लड़ रहे है.

कभी सोचा है परिवार होने के बाद अपने कितने इच्छा ख्वाहिश कुर्बान करना पड़ता hai...Apni ख्वाहिश को कुचल कर वो हमारे डिमांड पूरी करते है और उसी में खुश हो जाते है.

काम से वापस आने के बाद भी रोज यही सोच में आधा रात बीत जाता है की अपने बच्चों की अच्छे पढ़ाई के लिए आगे क्या kare...Abhi पढाई फिर बाद में shaadi...Hajaar तरह के सोच आते रहते hai...Utna hi टेंशन और उतना hi परेशानी.

लेकिन तुम दोनों की पढाई में कोई प्रॉब्लम ना हो इस लिए ये बात बताते भी nahi...Tujhe पता है तेरा मब्ब्स ज्वाइन करने के बाद तेरे पापा ने कितना लोन लिया है?

ये बात सुमित के लिए शॉकिंग था.

सुमित:- Loan...Lekin किस बात की? मई तो फुल स्कालरशिप में पढ़ रहा हूँ.

स. माँ:- कॉलेज स्कालरशिप देते है सिर्फ पढाई के liye...Baaki की खर्च? हॉस्टल की, खाने ki...Personal लाइफ ki...Books, कपीस और स्टडी मैटेरियल्स की?

और जो कोर्स पढ़ रहा है वह के अधिकतर स्टूडेंट्स की लाइफस्टाइल बहुत अच्छा होता hai...Unke सामने ज्यादा पीछे ना रह जाए उसके लिए इतना कर रहे है.

सुमित ये बात सोचता रह gaya...Kuch देर के बाद वो बोलै.

सुमित:- आगे से जरुरत से खर्च करूँगा.

स. डैड:- खर्च करने से किसने मन किया है? मेरा कमाया जो भी है वो तुम दोनों के लिए hi hai...Jitna खर्च करने का मन हो पढाई में उतना kar...Lekin नॉलेज में असर दिखना चाहिए.

बात ये नहीं है की मई तुम दोनों की पढाई या फिर परवरिश से परेशान hun...Ye फ़र्ज़ है मेरा.

और तेरा फ़र्ज़ है बिना किसी परेशानी के अच्छे से पढ़ लिख कर किसी लायक बन jaa...Aur जब तू उसी फ़र्ज़ से भटक रहा है तब बुरा लग रहा है.

सुमित को अब्ब और भी एहसास हो रहा था पिछले दो साल से वो क्या करता जा रहा था.

स. माँ:- और पता है चखे 2 महीना पहले से तेरे पापा हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) का दवाई ले रहे है.

ये बात सुमित को एक झटका सा लगा.

सुमित:- आपने बताया क्यों नहीं?

स. डैड:- अभी उतना सीरियस नहीं hai...Socha इतनी सी बात के लिए तुझे क्यों परेशान करू.

वैसे भी दवाई के साथ साथ खाना पीना का भी ख्याल रख रहा हूँ और साथ hi एक्ससरसीसे भी.

इतना व्यस्त रहने के बाद भी इन् बातों का ख्याल रलह रहा hun...Aur तू?

हमेशा गर्व होता था तुझे देख kar...Ye नहीं पता था की मई अपना बीमारी दूर करने के लिए खाना पीना मई इतना सीरियस हूँ और तू जान बुझ कर बीमार होने के लिए जहर का सेवन कर रहा है.

सुमित आत्मग्लानि में कुछ बोल भी नहीं पा रहा tha...Bolne के लिए भी उसके पास कुछ नहीं था.

स. डैड:- अब्ब तो मुझे hi लगने लगा है की मेरा hi गलती है की तू आज इस हाल में hai...Pehle hi इतना छूट नहीं देना चाहिए tha...Lekin 2 साल पहले का सुमित देख खुद धोखा खा गया tha...Sochta था समझदार है tu...Rabhi से इतना छूट नहीं देना चाहिए था.

हॉस्टल जाने की बात किया तब सोचा दोस्तों के बिच रह कर अच्छे से padhega...Lekin क्या पता था ये काण्ड करता है तू हॉस्टल में.

जब 3 हफ्ते के लिए टूर गया पढाई का बहाना बना कर तो सोचा पढाई से ब्रेक ले कर घूमना चाहता hai...Acchi बात है.

सच में सुमित बहुत निराश हु मई.

सुमित:- पापा हालात hi ऐसा था की मई....

स. डैड:- हालत की वजह से प्यार हो गया चल सही hai...Umar hi ऐसा hai...Nayi चीज और नयी एहसास हमेशा hi आकर्षित होता hai...Upar से होर्मोनेस का asar...Dil टूटने का दर्द भी नार्मल hi है.

लेकिन दिल टूटने के बाद नशा करने लग जाना? अपने hi जिंदगी बर्बाद कर dena...Ye कैसे सही हो सकता है?

इस बार उनकी आवाज में गुस्सा tha...Sumit भी अब्ब कुछ नहीं बोल पाया.

कुछ देर में सब डिनर ख़त्म कर चुके थे.

स. डैड:- थका होगा aaj...Jaa जा कर सू जा.

सुमित उठ कर जाने hi वाला था की.

स. डैड:- टेबल में उस प्लास्टिक में तेरे लिए कुछ रखा है वो भी लेते जा.

सुमित ने जब प्लास्टिक में चेक किया तो अंदर का सामान देख उसका हैरानी का कोई सीमा नहीं था.

एक बोतल बियर और कुछ सिगरेट्स के पैकेट्स थे.

सुमित:- ये...

स. डैड:- हाँ तेरे लिए hi hai...Addict बन चूका hai...Mai भी जानता हूँ एक दम से छूटेगा नहीं ये आदत.

हम से छुप कर और भी पीना चालु कर dega...Isse अच्छा हमारे जानकती में hi थोड़ा पी ले.

और वादा कर धीरे धीरे ये आदत छोड़ देगा.

ये सुन सुमित ने दारु को छोड़ अपने पापा के पेअर में गिर गया.

सुमित:- पापा मुझे पीना hi नहीं hai...Mai भी तंग आ चूका हूँ नशा se...Bas छूट नहीं रहा hai...Kisi तरह ये आदत छुड़वा dijiye...Chahe किता भी मारिये, पीटीए लेकिन इस आदत से छुटकारा dilaiye...Mai भी नहीं जीना चाहता हूँ इस दलदल में.

इस बार सुमित के आवाज में दर्द के साथ आँखों में आंसू भी था.

सुमित की इस पश्चाताप देख वह मौजूद सभी के आँखों में कुछ बून्द आंसू छलक गए.
 
अपडेट 62

अब्ब तू बच्चा भी तो नहीं है की मार पीट कर सही गलत सिखौ.

अब्ब तो खुद समझदार है की सही और गलत समझ सके.

सुमित के पापा ने सुमित को उठा कर कहा.

सुमित:- वादा करता हूँ पापा जल्द hi ये आदत छोड़ दूंगा.

अजीब सा एक्सप्रेशन था सुमित के चेहरे mein...Yaa फिर कह सकते है बहुत से मिला जुला expressions...Sharmindagi ki...Khud से hi गुस्से की और एक जुंग जितने की जज़्बात की.

स. डैड:- यही सुन्ना चाहता tha...Chal सही है खुद तुझे अपने गलती का एहसास हुआ.

वर्ण जब कोई गलत राश्ते की और जाने लगता है उससे वही सही लगने लगता hai...Khud hi सही बाकी सब गलत... और मई तुझे रोकने की कोशिश करता तो मुझे hi अपने दुश्मन की रूप में देखने लगता.

बात समझना तो दूर चुप चुप कर उसी राश्ते की और बढ़ता तू.

खैर तुझे एहसास हुआ यही बड़ी बात है.

सुमित:- आपके बातों का कभी बुरा माना है मैंने?

स. डैड:- अगर मेरा इतना hi फ़िक्र होता तो ये सब नशा करता hi क्यों?

सुमित इस बात पर फिर चुप हो गया.

स. डैड:- ये kya...Kabhi कहता है पहले जैसा बनेगा और फिर ये लटका हुआ chehra...Mera सुमित इतना सीरियस कभी नहीं होता था.

सुमित के पापा हँसते हुए बोले.

सुमित:- सोच लीजिये.

स. डैड:- क्या सोचु?

सुमित:- अगर पहले जैसा बन गया तो बात बात पर परेशान हो जाएंगे आप.

इस बात पर सुमित के पापा को थोड़ा सा पुराना सुमित का झलक dikha...Filhaal यही बहुत था उनके लिए.

स. डैड:- Accha...Aisa लगता है तुझे? भूल मत बाप हूँ tera...Abb पता चलेगा मई क्या चीज हूँ? वो तो तुझे बच्चा समझ कर छोड़ देता था.

सुमित:- टिपिकल एक्सक्यूज़. :लाफिंग:

इस बात पर सुमित के पापा भी सिर्फ मुस्कुराते है.

ात नाईट

बहुत दिनों बाद सुमित को 10 बजे hi नींद लग रहा tha...Warna रात के 2 , 3 बजे तक तो उसका नींद उड़ा hi रहता था.

कल की सुबह से नयी शुरुवात करने का सपना देख वो गहरा नींद में डूब गया.

आज भी गजब की स्टैमिना है आप में?

सुबह जॉगिंग में दौड़ रहे सुमित ने पापा से कहा.

स. डैड:- उम्र भले hi बुढ़ापे की और ले जा रहा hai...Lekin शरीर से तो अभी भी जवान हूँ.

सुमित:- ग़लतफहमी नाम के शिकारी से आप भी बच नहीं पाए.

स. डैड:- Galatfehmi...Chal अभी तुझे हकीकत की दरहन करवाता हूँ.

सुमित:- वो कैसे?

स. डैड:- इस जॉगिंग में मुझसे ज्यादा टिक कर बता.

फिर सुरु होता है दोनों में race...Jo कुछ देर तक तो बराबरी में चल रहा था लेकिन फिर सुमित की ताकत ने जवाब दे दिया.

स. डैड:- अब्ब बोल ग़लतफहमी का शिकार कौन है?

सुमित:- वो तो बहुत दिनों के बाद जॉगिंग के लिए निकला हूँ इस वजह से.

हाँफते हुए सुमित ने जवाब दिया.

स. डैड:- और इससे कहते है अटीपिकल एक्सक्यूज़.

सुमित:- मौका मिलते hi मेरा डायलाग मुझ पर.

स. डैड:- डायलाग बाज़ी में भी तेरा बाप हूँ.

सुमित:- वो तो दिख रहा है.

स. डैड:- लेकिन मुझे कुछ और दिख रहा है.

सुमित:- क्या?

स. डैड:- तेरा ये motaapa...Daaru पी पी कर और सुस्त जीवन से कैसा बॉडी बना लिया है.

सुमित:- अब्ब क्या कर सकते है.

स. डैड:- क्या कर सकते है? म्हणत करना पड़ेगा.

सुमित:- वो बहुत बोरिंग लगता hai...Iss में कोई शॉर्टकट नहीं है क्या?

स. डैड:- म्हणत में कोई कोम्प्रोमाईज़ nahi...Chaahe वो पढाई हो या अपने शरीर में.

सुमित:- आपका ये उपदेश याद rakhunga...Lekin आज के लिए बस इतना hi...Bahut थक गया हूँ.

स. डैड:- अच्छा jaa...Sirf आज के लिए थोड़ा कोम्प्रोमाईज़ hai...Kal से नहीं.

फिर सुमित धीरे धीरे चलते हुआ अपने घर की और बढ़ गया.

Hi ब्यूटी क्वीन :डी

सामने मेघा को देख कर यही बात सुमित के ख्याल में aaya...Aur ये दिल की बात जुबान में लाने से किसी तरह रोक लिया उसने.

"नहीं अब्ब और ये वाला मजाक नहीं." ये बात सोच कर सुमित ने कहा.

सुमित:- Hello.

मेघा हैरानी से सुमित को घूर रही थी.

सुमित:- क्या हुआ?

मेघा:- तुम और कॉलेज?

सुमित:- हाँ to...Admission लिया hai...College आने का हक़ है.

मेघा:- वो तो hai...Lekin तुम्हारे गिनती कॉलेज में अस ा टूरिस्ट स्टूडेंट रूप में होता है.

सुमित:- टूरिस्ट स्टूडेंट? अब्ब डिक्शनरी में कौन से नए शब्द जोड़ दिया किसी ने?

मेघा:- तुम्हारा अटेंडेंस ऐसा है की तुम स्टूडेंट काम टूरिस्ट ज्यादा लगते ho...Aur कॉलेज तुम्हारे लिए कॉलेज काम टूरिस्ट स्पॉट ज्यादा है.

सुमित:- हाँ वो तो hai...Aur किसी महान व्यक्ति ने कहा था अटेंडेंस में क्या रखा है?

मेघा:- और वो महान व्यक्ति तुम hi हो.

सुमित:- समझदार हो गयी ho...Aakhir सांगत का असर है.

मेघा:- आज कुछ अलग दिख रहे ho...Kal तक तुम्हारा जो सदा हुआ चेहरा रहता था उसमें कुछ जान आ गयी है.

सुमित फिर कक रात से आज सुबह तक घर की बातें मेघा को बता देता hai...Megha की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Jis सुमित को बदलने की सपना वो एक साल से देख रही थी वो आज जा कर पूरा हुआ.

मेघा:- वो सुमित क्या सुमित जो नशे में ना रहे?

हँसते हुए मेघा ने पूछा.

जवाब में सुमित सिर्फ मुस्कुराया.

मेघा:- लेकिन तुम्हे आज कॉलेज में देख वो भी 3रद ईयर के 1सत डे में सच में हैरानी हो रहा है.

सुमित:- हैरानी तो होती रहती hai...Agar मई कल कॉलेज छोड़ दूँ तो वो भी एक हैरानी भी होगा.

सुमित की यही बात मेघा को हैरान करने के लिए काफी था.

सुमित:- हो गयी न hairaan...Abb ऐसा कोई प्लान नहीं hai...Surgery का 1सत क्लास hai...Miss नहीं करना चाहता.

मेघा:- सर्जरी से याद aaya...Mera भी 1सत क्लीनिकल रोटेशन सर्जरी का hi है.

सुमित:- कोंग्रटुलतिओन्स.

मेघा:- किस बात की.

सुमित:- बाद में कोई डॉ. सुमित थे मोस्ट फेमस न्यूरोसर्जन की बात करे तो तुम गर्व के साथ कह सकती हो की तुमने भी सर्जरी मेरे साथ hi पढ़ा है. :स्मार्त्य:

मेघा:- कुछ ज्यादा hi नहीं सोच रहे हो?

सुमित:- अब्ब तो सोच बड़ा hi rakhunga...Wo कहते है न "सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग"

मेघा:- तुम और सिंपल लिविंग?

सुमित:- बस कुछ दिन aur...Jab से दारु सिगरेट छोड़ दूंगा तब से दाल रोटी और चावल hi खाऊंगा.

मेघा:- कुछ भी?

सुमित:- कुछ भी नहीं khaunga...Sirf दाल, रोटी और चावल. :डेड:

मेघा:- अच्छा चलो क्लास का टाइम हो गया hai...1st डे hi लेट होना अच्छी बात नहीं है.

सुमित:- अपशगुन होता है क्या?

मेघा इस बात पर सिर्फ सुमित को घूरती है.

दोनों फिर सर्जरी के क्लास में चले जाते है.

आफ्टर कॉलेज

सुमित:- तुम्हारा चेहरा लटका क्यों है?

मेघा:- आसमान से गिरे खजूर पर latke...Yahi फील हो रहा है?

सुमित:- और वो क्यों?

मेघा:- 1सत और 2ंद ईयर में एनाटोमी और पैथोलॉजी ने हालत खराब कर दिया tha...Abb बाकी के काम सर्जरी और मेडिसिन पूरा कर देंगे.

मेघा की उस बात पर सुमित को भी हंसी आया.

सुमित:- असली खेल तो अब्ब सुरु हुआ hai...MBBS का मीनिंग hi है बैचलर ऑफ़ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ़ सर्जरी.

मेघा:- और फिर भी तुम चिल हो?

सुमित:- और नहीं तो kya...Ek हाथ से सर्जरी करूँगा दूसरे से मेडिसिन.

मग्गा को सुमित की इस कॉन्फिडेंस पर हैरानी बहुत हो रहा था लेकिन वो कुछ नहीं बोली.

जब उसने सुमित की तरफ देखा तो सुमित का चेहरा उतरा हुआ tha...Bilkul ना खुश नजर आ रहा था वो.

मेघा:- अब्ब तुम्हे क्या हुआ?
 
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