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ये मुस्कान की वजह?
कुछ देर से मेघा सुमित को hi नोटिस कर रही thi…Sumit अपने hi सोच में डूबा हुआ tha…Kabhi कभी वो मेघा की तरफ देख कर स्माइल कर रहा था.
सुमित:- तुम्हारे बारे में hi सोच रहा था.
मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.
मेघा:- और क्या सोच रहे थे मेरे बारे में?
सुमित: यही की अगर तुम चाहो तो पेंगुइन को भी बर्फ बेच सकती हो. :lol1:
इस बार सुमित ने हँसते हुए कहा.
मेघा:- क्या मतलब?
सुमित:- एग्जाम में जस्ट पास होने वाले से पार्टी ले रही हो तो पेंगुइन को बर्फ बेचना कौन सी बड़ी बात है? :डी
मेघा इस बात पर सिर्फ मुस्कुराती है.
सुमित फिर अपने सोच में खो गया.
मेघा:- वैसे तुम्हे क्यों लगा अब्ब तुम्हे बदलना चाहिए?
सुमित एक नजर मेघा को देखता hai…Iss बार वो बहुत सीरियस था.
सुमित:- खुद से hi नफरत होने लगा tha…Jab भी आईना में खुद को देखता हूँ ऐसा लगता है दुनिया का सबसे बड़ा ह्य्पोक्रिटे मई hi हूँ.
हमेशा राज को यही बताता की प्यार में आर या पार का गेम khel…Yaa तो किसी तरह मनाने में कामयाब हो जा या फिर हमेशा के लिए प्यार को भूल jaa…Aise अपने वक्त और भविस्य बर्बाद मत kar…Aur जब बात मुझ पर आया तो मई तो एक लेवल और आगे निकल गया…3 साल बर्बाद कर दिया इस प्यार में.
जिंदगी में कभी सीरियस ना होने वाला सुमित आज दिन रात सीरियस रहता hai…Gham को अपने जिंदगी में मक्खी की तरह निकाल फेंकने वाला सुमित आज दर्द की समुन्दर में डूबता जा रहा है.
नशा और एडिक्शन से नफरत करने वाला सुमित आज खुद एडिक्ट hai…Ek दिन बिना सिगरेट के रह नहीं paata…Jab भी दारु सामने होता है खुद को रोक नहीं paata…Agar छोड़ने की सोचता भी हूँ तो विथड्रावल सिम्पटम्स कुछ पल भी चैन से जीने नहीं deta…Na जाने कितनो का नशा छुड़वाया hai…Lekin खुद पर?
क्या हुआ करता था मई और क्या हूँ आज? एक हारा हुआ, लाचार और निकम्मा nashedi…Khud को hi गाली देने का मन करता है.
पापा का सपना है की मई बाद में इतना काबिल डॉक्टर बनूँगा जो लोग का हर एक बीमारी का इलाज karunga…Lekin उन्हें क्या pata…Unka hi बीटा कैंसर, सिरोसिस और कपड़ जैसे बीमारी का शिकार बन जाएगा.
माँ रोज फ़ोन में पूछती है की रात और दिन के खाने में क्या खाता hun…Padhai से वक्त निकाल कर अपना ख्याल रखता हूँ या nahi…Har बार झूठ बोलना पड़ता hai…Kya जवाब दूँ मई? खाना काम नशा में ज्यादा व्यस्त रहता hun…Aur जिस पढाई से वक्त निकालने की बात करती है वो उन्हें क्या पता पिछले एक साल में एक बार भी किताब को नहीं छुआ.
और Rashmi…Jo हमेशा मुझे कॉंफिडेंट और विनर के रूप में जानती hai…Ashliyat जानेगी तो पता चलेगा मई कितना बड़ा लूज़र हूँ.
और मेरा दोस्त Ashish…Jo हर वक्त मेरे साथ खड़ा रहता hai…Mujhe पहले की तरह देखने के लिए क्या कुछ नहीं karta…Usse भी पता नहीं उसका ये लड़ाई मेरे लिए कब तक चलने वाला है.
साथ देने वाले लोग तो बहुत hai…Lekin मई hi हूँ जो सभी को निराश करता जा रहा हूँ.
ऐसा मई बिलकुल नहीं tha…Megha तुम मुझे जानती थीं ा कॉलेज की शुरूआती दिनों में?
मेघा:- हाँ.
सुमित:- हाँ वैसा hi हुआ करता था mai…Nahi नहीं उससे भी accha…Pehle जैसा था वैसा hi tha…Naa hi कोई एक्टिंग और ना hi किसी को धोखा देने की प्लानिंग.
लेकिन अब्ब? अब्ब जो सुमित को मई देख रहा हूँ उससे तो मई खुद भी नफरत करता hun…Bas छुटकारा नहीं पा रहा हूँ.
कब तक खुद को और अपनों को धोखा देता रहूँगा? प्यार बहुत जरुरी hai…Shayad hi कभी अपने प्यार को भुला paau…Lekin अपने जिम्मेदारी? उससे कैसे भूल सकता हूँ.
बहुत मुश्किल hai…Lekin आगे बढ़ना hi है मुझे.
सुमित की आवाज में कभी दर्द, नफरत और लाचारी था लेकिन आखिरी बात में आत्मविश्वाश.
मेघा:- क्या ये आसान होगा तुम्हारे लिए?
सुमित:- इस कोशिश को जिद्द का रूप दूंगा.
मेघा:- अब्ब उसी सुमित को देख रही हूँ जिससे मई जानती हूँ.
सुमित इस बात पर मुस्कुराता hai…Aur फिर सीरियस हो कर.
सुमित:- तुम ये मत समझना की मई तुम्हारा सिम्पथी लेना चाहता hun…Bas कभी कमजोर महसूस करता हूँ तो ऐसे hi कुछ भी बोल देता हूँ.
मेघा:- नहीं nahi…Aise हालात में hi तो दोस्त काम आते hai…Kuch मिले ना मिले मोटिवेशन जरूर मिलता है. :डी
अभी तक सुमित और मेघा दोनों hi नाश्ता ख़त्म कर चुके था या यूँ कहे की सुमित का ये मेघा के लिए पार्टी ख़त्म हो चूका था.
कैंटीन से बाहर निकलते hi.
मेघा:- दोस्त के रूप में हमेशा साथ rahungi…Kabhi जरुरत पड़े तो याद कर लेना.
सुमित:- जरूर.
फिर दोनों अपने अपने हॉस्टल की तरफ जाते है.
सुमित:- (इन हिज मंद) तुम तो हमेशा साथ रहती ho…Bas मई hi हूँ की कभी कभी तुम्हे फेस करने की हिम्मत नहीं कर पाटा.
और सुमित जब अपने रूम में पहुँचता है.
राज:- Bhaiya…Kuch बात करनी है आपसे?
राज कुछ ज्यादा hi सीरियस था इस बार.
सुमित:- Haan…Bol.
राज:- इस बार आपके पापा से झूठ नहीं बोल पाया.
थोड़ा बहुत सुमित समझ गया.
राज:- आपका हालत मुझसे देखा नहीं जा रहा hai…Maine hi उन्हें बता दिया आपका नशे के बारे में.
कुछ देर के लिए तो सुमित को बहुत गुस्सा aaya…Lekin कुछ देर मई खुद hi शांत हो गया.
सुमित:- गलत नहीं किया tune…Mai खुद बताना चाहता tha…Lekin हिम्मत नहीं कर पा रहा tha…Aaj नहीं तो कल उन्हें पता चल hi जाता.
राज:- भैया आप को ऐसे देख नहीं पा रहा tha…Har बीतते दिन के साथ आपका नशा भी बढ़ता जा रहा tha…Naa hi आप पढ़ाई पर ध्यान दे रहे thhe…Uncle को बताना hi सही लगा.
थोड़ा डरते हुए राज ने कहा.
सुमित:- कोई बात नहीं.
कुछ सोचते हुए सुमित ने kaha…Ek दर भी लग रहा था की उसके पापा कैसे रियेक्ट करेंगे और वो कैसे पापा का सामना कर पायेगा.
राज:- कल से आपको घर में शिफ्ट होने का कहा है उन्होंने.
ये सुनते hi सुमित का दर और भी बढ़ gaya...Wo hi जानता था उसके पापा नशा से कितना नफरत करते है.