Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 9 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 47

विवेक:- समझ में नहीं आ रहा है कैसे बताओ कीर्ति को अपने दिल की बात?

यही वो बात था जिसने सुमित को विवेक की बात सुनने के लिए मजबूर किया.

दूसरी तरफ से:- अबे बता de...Itna क्या सोच रहा है?

विवेक:- अगर मना कर दिया तो...

विवेक की आवाज में दर था.

दूसरी तरफ से:- अच्छा एक बात bata...Tera कीर्ति के साथ कैसा रिलेशन है?

विवेक:- Friendly...Sirf फ्रेंडली.

मायूस आवाज में बोलै विवेक.

दूसरी तरफ से:- अबे चूतिये...1 साल से कीर्ति के साथ hai..Aur सिर्फ फ्रेंडली hi hai...Kya गाली दू समझ में नहीं आ रहा है.

दूसरी तरफ से अपने दोस्त को गुस्सा होता देख विवेक और भी परेशान हो गया.

विवेक:- तुझे सुग्गेस्टिव के लिए पूछ रहा hun...Ulta तू hi मुझे डिमोटिवेट कर रहा है.

दूसरी तरफ से:- तो क्या karu...Itna टाइम काफी होता है फ्रेंडली से भी आगे बढ़ने ki...Lekin तू...

विवेक:- ये सब उस सुमित की वजह से हुआ है.

इस बार विवेक की आवाज में गुस्सा था.

दूसरी तरफ से:- ये सुमित है कौन? और क्या कर दिया इस ने.

विवेक:- कीर्ति पहले उससे प्यार करती thi...Aur उस सुमित ने जब से कीर्ति का दिल तोडा है कीर्ति का प्यार से विश्वाश उठ चूका है.

और वो साला इस टूर में भी कीर्ति का पीछा पड़ा hai...Dil तो कर रहा है की....

सुमित का नाम जुबान में आते hi आवाज में भी गुस्सा भर जाता विवेक का.

फिर दोनों के बिच ऐसे hi बातें होता hai...Kabhi सुमित के बारे में तो कभी फ़ालतू की बातें.

कुछ देर बाद.

दूसरी तरफ से:- एक काम kar...Tu हमेशा hi सीरियस टाइप लगता hai...Aur शायद यही वजह है कीर्ति का तू सिर्फ दोस्त hi रह गया है.

थोड़ा इमोशनल बनने की तरय kar...Shayad तेरा काम बन जाए.

विवेक:- हाँ तरय करता हूँ.

दूसरी तरफ से:- Abey...Kabhi तो कॉंफिडेंट हो jaa...Aise लूज़र की जैसे बात करके कीर्ति को पतयेगा.

विवेक:- Chal...Pata कर hi दिखाऊंगा.

जबरदस्ती का कॉन्फिडेंस अपने आवाज में भर कर विवेक ने कहा.

दूसरी तरफ से:- हाँ ये हुई न baat...Apne साथ मेरा नाक भी मत कटवा dena...Chal...All थे बेस्ट.

ये कह कर दूसरी तरफ से कॉल कट हो जाता है.

विवेक:- (तो हिमसेल्फ) पता nahi...Kirti फिर भी मानेगी या नहीं.

सुमित को सिर्फ विवेक की hi आवाज सुनाई दे रहा tha..Lekin इतना काफी था सारे मामला समझने के लिए.

वो अब्ब अपने रूम में चला gaya...Dil एकदम से खुश हो gaya...Aakhir होता क्यों नहीं? उसकी Kirti...Wo भी तो प्यार के सफर में सुमित से आगे नहीं बढ़ी hai...Jo भी फीलिंग्स tha...Pyar का या नफरत ka...Wo सिर्फ सुमित के liye...Filhaal यही काफी था सुमित के लिए.

सुमित:- एक दर tha...Wo भी ख़त्म हो gaya...Vivek से जो भी इन्सेक्युरित्य था वो बस कीर्ति की वजह से tha...Dar था की कही कीर्ति भी उससे प्यार तो नहीं karti...Lekin अब्ब कोई दर नहीं.

चाहे कितना भी चालबाज़ी कर ले विवेक tu...Kirti तो मेरी hi hai...Hai इतना विश्वाश खुद पर.

ख़ुशी के मारे सुमित रूम की चारो तरफ चक्कर लगा रहा था.

सुमित:- ऐसा लग रहा है पहले वाला सुमित बन रहा हूँ फिर se...Wohi vishwash...Wohi jidd...Abb तो कीर्ति मेरी hi है.

बस नफरत को hi तो प्यार में बदलना hai...Badal dunga...Pyaar का वो एहसास दिलाऊंगा अपनी कीर्ति को की वो खुद दौड़ कर मेरे पा आएगी.

ऐसे hi ख़ुशी के साथ सुमित इधर उधर चक्कर लगा रहा था रूम ke...Uska अपने किस्मत से एक hi तो ख्वाहिश tha...Wo भी पूरा हो गया.

एक सही राष्ट hi तो माँगा था उसने कीर्ति तक पहुँचने ki...Aur वो आज उससे मिल gaya...Apne विश्वाश और हौसला के रूप में.

कुछ देर ऐसे hi खुद से बात करने के बाद सुमित को एक ख्याल आया.

सुमित:- (इन हिज मंद) वैसे मेहः मेरे लिए लकी hai...Jab भी वो मिलती है किस्मत भी एकदम से साथ देने लगता है.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) ये क्या फ़ालतू की बातें सोचने laga...Come ों Sumit...Just फोकस ों Kirti...Nothing ेल्स.

इन इवनिंग

सुबह से शाम तक बोर होने के बाद कीर्ति ने सोचा की शाम में नदी की तरफ घूमने के liye...Sabhi तैयार हो गए.

सुमित तो पहले से hi उत्शहित tha...Usse अब्ब और रहा नहीं गया.

सुमित:- वैसे मौसम कितना सुहाना हो गया है naa...Safed बादल और ठंडी hawaayein...Aur प्यार के ये ehsaas...Aisa महसूस हो रहा है की चारों तरफ हर एक कण (पार्टिकल) में प्यार hi प्यार hai...Aur इसका ये अध्भुत अनुभव.

कीर्ति की तरफ देख अपना ख़ुशी जाहिर करते हुए सुमित ने कहा.

सुमित की इस बात पर कीर्ति को तो कोई फर्क नहीं pada...Lekin मेघा सुमित को देख हैरान हो गयी थी.

कहा कुछ देर पहले टूटा हुआ और परेशान सा लगने वाला सुमित अभी एकदम से खुश दिख रहा है.

मेघा:- (इन हेर मंद) इसको आज तक समझ नहीं पायी हूँ तो अब्ब क्या समझूंगी.

लेकिन सुमित को खुश देख मेघा को भी अच्छा लग रहा था.

सुमित:- प्रकृति का ये नजारा तो dekho...Kitna सुन्दर hai...Chaaron तरफ बड़े बड़े पहाड़ hai...Jiska सर बादलों को भी चीयर कर शान से खड़ा hai...Saamne से ये बहती नदी जिसका बेग (स्पीड) ये दिखाता है की ये अपने मंजिल से मिल जाने के लिए कितना आतुर है.

और इसी प्रक्रिया में इस नदी से उत्पन्न होता मधुर sangit...Jo कान के रास्ते हो कर दिल और दिमाग दोनों को उमंग से भर देता hai...Aur ये तेज और ठंडी hawaayein...Jiska कण कण में सिर्फ प्यार hi प्यार है.

प्रकृति का ये नजारा किसी मूवी के वो हीरो और हीरोइन के डांसिंग लोकेशन से काम नहीं hai...Mai तो तैयार hun...Intejaar है तो बस अपनी हीरोइन की.

सुमित ने कीर्ति को देख प्यार से कहा.

मेघा:- वैसे तुम बात किस्से कर रहे ho...Yaha कोई भी तुमसे बात नहीं कर रहा है और ना hi करने के मूड में लग रहा है.

सुमित:- ये दिल की बात hai...Isse दूसरा दिल hi समझ सकता hai...Waise दो दिल की बातें कोई और समझ भी नहीं सकता.

एक बार फिर सुमित की नजर कीर्ति पर tha...Lekin कीर्ति इग्नोर कर आगे बढ़ जाती है.

सुमित अपने hi जगह खड़ा रह जाता hai...Teeno को आगे बढ़ते देख मुस्कुराने लगता hai...Jab कीर्ति थोड़ी दूर चली गयी तब.

Kirti...I लव यू.

सुमित ने ये एक बार kaha...Lekin ये आवाज कीर्ति को बार बार सुनाई दे रहा था.

काम hi ऐसा किया था सुमित ne...Karib 20 मीटर की दुरी से एक पहाड़ की तरफ मुंह कर के जोर से अपने प्यार का इजहार किया tha...Aur वही आवाज पहाड़ों में प्रतिबिम्ब (रिफ्लेक्शन) के रूप में कीर्ति को सुनाई दे रहा था.

लेकिन इसका भी कुछ फायदा नहीं हुआ सुमित ko...Kirti का चेहरा गुस्से से और लाल हो गया.

कीर्ति.

एक तेज आवाज के साथ कीर्ति पीछे मुड़ी.

पीछे मुड़ती hi देखा सुमित नदी के बिलकुल करीब था.

सुमित:- सोच रहा हूँ शोले के अंदाज़ में तुम्हे प्रोपोज़ करू.

कीर्ति कुछ नहीं kehti...Bas गुस्से से सुमित को देखती है.

सुमित:- अब्ब यहाँ पानी का टावर तो है नहीं तो सोचने पर सामने दिखा पानी का नदी.

सुमित की इस बात पर सभी हैरान हो जाते है कीर्ति के alawa...Abhi भी कीर्ति को कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा था.

सुमित:- अगर तुमने मेरे प्यार को नहीं अपनाया तो मई इस नदी में कूद जाऊँगा.

सुमित की ये आवाज से वो कितना सीरियस है कोई अंदाज नहीं लगा पा रहा था.

मेघा भी डरते हुए नदी को देखती hai...Dopahar से तो नदी की बेग और गहराई में थोड़ा कमी तो आया tha...Lekin अभी भी नदी किसी भी इंसान को बहा ले जा सकता tha...Aur एक बार नदी में गिर जाने के बाद इतना आसान नहीं था जिन्दा बाहर निकलना.

सुमित:- सच कह रहा हूँ Kirti...Apne प्यार की kasam...Tumne मेरा प्यार को नहीं अपनाया तो सच में कूद जाऊँगा.

इस बार सुमित की आवाज और भी सीरियस था.

सभी हैरान थे की सुमित को अचानक क्या हो गया है? कुछ देर पहले तो बहुत खुश tha...Lekin अब्ब?

मेघा:- कुछ तो बोल.

मेघा की आवाज में भी दर साफ़ दिख रहा था.

कीर्ति फिर भी चुप थी.

सुमित:- सिर्फ 10 तक गिनूंगा कीर्ति.

मेघा:- रोक ले उसको.

कीर्ति:- अच्छे से जानती हूँ isko...Bahut बड़ा ड्रामेबाज़ hai...Nahi kudega...Isko सिर्फ अटेंशन चाहिए.

सुमित:- अटेंशन नहीं तुम्हारा प्यार चाहिए.

इसके बाद सुमित अपना गिनती सुरु कर देता है.

मेघा बार बार कीर्ति को मना रही थी.

कीर्ति:- कह दिया naa...Ye नहीं kudega...Sab कुछ जानती हूँ इसके बारे में.

कीर्ति ने भी जिद्द पकड़ लिया की वो सुमित को नहीं रोकेगी.

सुमित:- 3...2...1

और देखते hi देखते सुमित ने नदी पर छलांग लगा दिया.

इस बार कीर्ति की भी आँखें हैरानी में बड़ी हो गयी और दर के मारे उसके हाथ पेअर एकदम से काम करना बंद कर चूका था.

नदी अपने बेग से सुमित को अपने साथ ले जा रहा था.

जहा पहले कीर्ति और सुमित के बिच की दुरी 50 मीटर था छलांग लगाने से पहले और अब्ब वही नदी सुमित को कीर्ति के आँखों के सामने से ले जा रहा था.

कीर्ति अपना हाथ आगे बढ़ा कर सुमित को रोक लेना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पायी.

सुमित मुस्कुराता हुआ कीर्ति की नजर से दूर जाने लगा.

मेघा का हाल भी कुछ ठीक नहीं tha...Usse भी अपने आँखों पर विश्वाश नहीं हो रहा tha...Aur दिल का दर्द अलग.

Vivek...Wo भी सुमित ऐ चाहे कितना नफरत करे लेकिन सुमित का ऐसा कर जाना उससे भी अच्छा नहीं लग रहा था.

करीब 20 मीटर और दूर जाने के बाद सुमित के हाथ और पेअर काम करना चालू कर देता hai...Aur थोड़ा म्हणत करने के बाद सभी को फिर से चौंकातु हुए वो नदी से बाहर सुरक्षित निकल आता है.

होंठो में वही मुस्कान के साथ कीर्ति की तरफ बढ़ने लगता है.

कीर्ति भी दौड़ कर सुमित की तरफ जाती है.

सुमित:- कैसा लगा मेरा स्विमिंग?

चटाक.

एक जोर का थप्पड़ सुमित के गाल पर लगता है.

सुमित:- ारी मई.

चटाक.

दूसरे गाल में भी कीर्ति के पांचो ऊँगली के चाप बन जाते है.

कीर्ति:- ऐसे बेवकूफी कर के तुम्हे लगता है मुझे मना लोगे?

सुमित:- Chill...Suicide नहीं स्विमिंग करना चाहता था.

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा लेकिन कीर्ति अभी भी गुस्से में थी.

सुमित:- Megha...Kya कह रही थी कीर्ति तुमसे? मेरे बारे में सब कुछ जानती है.

कुछ नहीं जानती है ये pagli...Isse तो ये भी नहीं पता की मेरा फवौरीते एडवेंचर hai...Rafting...Aur स्विमिंग तो जैसे मेरे खून में दौड़ता है.

(कीर्ति को देख कर) ना तुम्हे मेरा होब्बीएस का पता है और ना hi मेरे प्यार का ehsaas...Kabhi जान्ने की तो कोशिश करो सच कहता hun...Pyaar हो जाएगा तुम्हे भी.

सुमित ने कीर्ति की आँखों में देखते हुए कहा.

और फिर विवेक की तरफ जाते हुए.

सुमित:- Kirti...Tumhaare लिए मेरा प्यार और भी बढ़ gaya...Bahut सही डिसिशन था tumhara...Kisi के इमोशनल हो जाने का मतलब ये नहीं की वो प्यार hai...Aur कोई इमोशनल है ये सोच कर उस पर तरस खा कर प्यार नहीं करते.

प्यार तो दिल से होता hai...Jab दिल से प्यार का सच्चा एहसास हो तभी किसी के प्यार को अपनाना चाहिए.

वर्ण सुसाइड के धमकी से प्यार को काबुल करवाने वाले तो बहुत milenge...Aur याकि मानो जो सुसाइड का सोचता है हर फ़ालतू के चीज में उससे कमजोर इंसान कोई नहीं.

और ना hi उन् पर कभी विश्वाश करना जो कुछ ज्यादा hi इमोशनल बनने की कोशिश करे.

ये कहने के बाद सुमित विवेक को देखता है.

सुमित:- वैसे Kirti...Mujhe प्यार करना तुमने hi सिखाया hai...Aage भी पागलपन karunga...Bas इस टाइप के nahi...Yaad है मैंने जब तुम्हे मन किया था तब तुमने जिद्द पकड़ लिया था और मुझसे हाँ बुलवा कर hi maana...Abb मई भी तुम्हारे पीछे पड़ jaaunga...Aut हाँ बुलवा कर hi मानूंगा.

कीर्ति:- तो तुम अब्ब टार्चर करोगे?

सुमित:- नहीं प्यार का एहसास दिलवाऊंगा.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं boli...Bas उस सदमा से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी.

दूसरी तरफ सुमित को सही सलामत देख मेघा के सांस में सांस आया.

सुमित:- Hello वप :डी

विवेक:- क्या मतलब है तेरा? इमोशनल क्या कह रहा था.

विवेक ने धीरे से कहा कही कीर्ति और मेघा सुन न ले.

सुमित:- सही सोच रहा है.

विवेक:- मतलब...

सुमित:- हाँ वही.

फिर विवेक हैरानी से सुमित को देखता hi रह जाता है.

सुमित:- तेरा ये इमोशन का ढोंग बेकार बनाने के लिए ये कर सकता हूँ तो सोच कीर्ति को प्यार का एहसास दिलाने के लिए क्या कुछ नहीं कर सकता?
 
नेक्स्ट अपडेट कल रात में friends...Update कल hi देने वाला tha...Lekin अब्ब जा कर फिनॉइज़ हुआ की कल क्या लिखना hai...Story ऐसे मोड़ पर है जहा पॉसिबिलिटी बहुत से है लेकिन सोच समझ कर लिखना पद रहा है जिससे स्टोरी का फ्लो मेन्टेन रहे.

पिछले कुछ उपदटेस में थोड़ा टाइम लग रहा है 3 डेज गैप ka...Koshish करूँगा 2 दिन के गैप में अपडेट पोस्ट करने की.
 
थैंक्स कामदेव भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Jab इंसान खुद को हर तरफ से खुद को हारा हुआ देखता है और हर दरवाजा बंद मिलता hai...To बस एक राष्ट और मौका का तलाश होता hai...Aur ऐसे में खुद को hi मोटीवेट करने के लिए ये कॉन्फिडेंस एब्नार्मल नहीं hai...Kuch ज्यादा hi जोश और आत्मविश्वाश का उदहारण है.

और सुमित ने मेघा के साथ जो भी किया है बहुत hi गलत किया hai...Ismein कोई दो राय नहीं hai...Aur स्टोरी का टाइटल भी देखिये :D...Title इस बार सिर्फ जो दिख रहा है उतना hi नहीं hai...Aage जस्टिफाई करूँगा. :डी

और सुमित के करैक्टर और स्टोरी में बहुत सारे बदलाव देखने को milega...Picchle अपडेट के hi हिसाब से एक्सप्लेन करता hun...Nadi को स्टोरी मान लीजिये और राफ्टिंग को कहानी का safar...Iska गारंटी भी नहीं की यही नदी आपको आपके मंजिल में पहुंचाएगा या फिर ये नदी किसी दुसरी नदी में मिल कर उस नदी का रूप lega...Matlab जो प्लाट सोचा है उससे बिलकुल alag...Aur ये नदी के मंजिल तो एक hai...Lekin रास्ते alag...Alag अलग मोड़ में अलग अलग ट्विस्ट मिलेगा.

साथ बने रहिये भाई.
 
अपडेट 48

आज सुमित के साथ मई चलूंगी.

अगले दिन सुबह कीर्ति की इस बात ने बाकी तीनो को हैरानी में दाल दिया.

सुमित को तो एक पल के लिए विश्वाश hi नहीं hua...Aur जब विश्वाश हुआ तब मानो ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं raha...Kisi तरह खुद के भावना पर नियंत्रण किया.

तभी उसको एक शरारत सुझा.

पास में hi खड़े मुंह लटका हुआ विवेक के हाथ में जोर से पिंच कर दिया.

विवेक:- Ouch...Ye क्या कर रहा है?

बेहद गुस्से में विवेक ने pucha...Pehle कीर्ति का वो निर्णय और अब्ब सुमित का ये हरकत.

सुमित:- सच है या सपना? जाने की कोशिश कर रहा था.

विवेक:- तो मुझे क्यों पिंच किया? खुद पर करता.

विवेक गुस्से से सुमित को घुरा जा रहा था.

सुमित:- पता था तू ऐसे hi bhaunkega...Issi लिए तुझ पर hi तरय kiya...Khair, अब्ब कन्फर्म हो गया की ये सच है.

विवेक:- कीर्ति तुम्हारी वजह से चुप hun...Warna इसका क्या हाल करूँगा वो मई खुद नहीं जानता.

कीर्ति:- गलत बात है ये सुमित.

इस बार कीर्ति की बातों में वो गुस्सा नहीं था.

विवेक:- ोुछःह

सुमित:- डोंट mind...Ek और बार कन्फर्म कर रहा था.

उसके बाद विवेक ने सुमित पर गालियों के वरसात कर diya...Shakahaari (वेग) वाले :D...Kirti के सामने अपना इमेज खराब भी तो नहीं कर सकता था. :नू:

लेकिन सुमित को इस बात से क्या मतलब tha...Wo तो बस कीर्ति में hi खोये जा रहा था.

कीर्ति:- चलना नहीं है क्या.

सुमित:- हाँ चलो.

उत्शाहीत हो कर सुमित ने kaha...Aur कीर्ति की तरफ बढ़ गया.

वही विवेक अपने मन में.

विवेक:- (इन हिज मंद) बस कीर्ति की वजह से कुछ नहीं कर रहा hun...Sharaafat का ये जो मुखौटा है कीर्ति के saamne...Bas इसी ने मेरा हाथ बाँध रखा hai...Warna क्या हाल करता मई खुद नहीं जानता.

और ये कीर्ति को भी क्या हो गया hai...Abb तो वो भी सुमित के साइड ले रही है.

विवेक के गुस्सा का कोई ठिकाना नहीं tha...Lekin मजबूर tha...Vajah wohi...Kirti की मौजूदगी.

मेघा का भी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं था.

मेघा:- (इन हेर मंद) अचानक से ये कीर्ति को क्या हो gaya...Kal रात तक तो सुमित से बहुत गुस्सा thi...Aur कल तक का ये नफरत आज अचानक से कैसे बदल गया?

इस सवाल के जवाब तो फिलहाल मेघा के पास भी नहीं था.

फिर सुमित और कीर्ति अपना बप सेट्स ले कर अपने रास्ते चले जाते hai...Megha को भी न चाहते हुए विवेक के साथ जाना पड़ता है.

रास्ते में ख़ुशी से गन गुनाते हुए सुमित चल रहा tha...Kirti भी पास में hi thi...Lekin वो बिलकुल hi चुप थी.

सुमित:- कुछ तो bolo...Tumhari एक आवाज सुनने के लिए बेकरार हु.

कीर्ति:- क्या बोलू?

सुमित:- कुछ bhi...Tumhari हर एक बोल कोयल की मधुर आवाज से काम नहीं लगता.

कीर्ति:- अभी तक वैसे hi फ्लिर्टिंग जार रहे हो?

थोड़ा शिकायत के साथ कीर्ति ने पूछा.

सुमित:- नहीं अभी भी वैसा hi प्यार करता हूँ.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं बोलती.

कुछ देर दोनों ऐसे hi चुप चाप चलते hai...Sumit ख़ुशी में कभी कीर्ति को देखता तो कभी अपने सपनो की दुनिया में खो jaata...Ek नयी शुरुवात के सपने.

कीर्ति:- बहुत बदल गए हो tum...Lekin एक चीज आज भी वैसा hi है.

सुमित:- (इन हिज मंद) मई बदल गया हूँ? इस प्यार के दीवानापन में खो कर आज भी वही हूँ जहा 3 साल पहले था.

कीर्ति:- तुम्हारा कॉन्फिडेंस और स्ट्रांग personality...Aaj भी किसी के सामने नहीं झुकते हो.

सुमित:- झुकता hun...Jo मेरे लिए बहुत hi ख़ास है.

कीर्ति की आँखों में देख सुमित ने जवाब दिया.

कीर्ति ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया.

सुमित:- और मेरा प्यार? वो भी तो बदला नहीं है?

कीर्ति:- लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता.

अभी भी विश्वाश की कमी देख सुमित थोड़ा निराश हो जाता hai...Lekin जल्द hi संभल कर.

सुमित:- बस कुछ दिन aur...Fir तुम्हारा ये शिकायत भी दूर कर दूंगा.

कीर्ति ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया.

ऐसे hi फिर कुछ देर चुप चाप चलने के बाद कीर्ति hi बोली.

कीर्ति:- अगर तुम सच मान कर माफ़ी मांग लेते पहले hi तो बात शायद कुछ और hota...Lekin तुम हमेअह जस्टिफाई hi करते रह gaye...Tum और तुम्हारा ईगो.

गहरी सोच से निकलते हुए कीर्ति ने pucha...Baaton में अभी भी शिकायत था.

सुमित:- अगर सच में गलती करता तो जरूर उस बात के लिए माफ़ी maangta...Lekin झूठ बोल कर मना नहीं sakta...Humaare राते का शुरुवात hi झूठ से हो ये मई नहीं चाहता.

आगे ना चाहते हुए भी बहुत से गलती हो सकता है हम दोनों से hi...Unn गलतियों का माफ़ी मांगेंगे.

कीर्ति सुमित की इस बात से संतुष्ट नहीं दिख रही थी.

सुमित:- और bataao...Aaj इतने दिनों baad...Achanak कैसे बदलाव आ गया तुम में? कही तरस तो नहीं खा रही हो? :हिंतहिंट2:

कीर्ति:- Nahi...Aisa लग रहा है जैसे तुम शायद उतना गलत भी नहीं ho...Socha बात कर के देखती हूँ.

कीर्ति की इस बात ने सुमित का फिर मूड ों कर diya...Kirti उससे एक मौका दे रही hai...Filhaal यही उसके लिए काफी था.

दूसरी तरफ.

विवेक:- तुमसे कुछ पूछना है?

मेघा:- पूछो.

विवेक:- तुम सुमित से प्यार करती हो ना?

शाख भरी आवाज में विवेक ने pucha...Aur विवेक का पूछने के तरीका और पूछा हुआ सवाल पर मेघा को बहुत गुस्सा आ रहा था.
 
अपडेट 49

बहुत खुश दिख रहे हो तुम?

रास्ते में मेघा ने सुमित से pucha...Sumit आज सच में बहुत खुश दिख रहा था.

सुमित ने एक नजर मेघा को देख कर मुस्कुराया लेकिन कुछ बोलै नहीं.

मेघा भी अब्ब खामोशी के साथ आगे बढ़ने लगी.

सुमित अपने hi धुन में चल रहा था.

मेघा:- क्या आज फिर से रिवरसाइड चले?

सुमित:- क्यों?

मेघा:- बस ऐसे hi...Aaj किसी से बात चीत करने का मूड नहीं है.

सुमित:- बात चीत का उतना मूड तो मेरा भी नहीं hai...Chalo आज रिवरसाइड hi चलते है.

फिर दोनों नदी के किनारे की और चलते hai...Dono में से कोई किसी से बात नहीं कर रहा था.

नदी के किनारे पहुँच कर सुमित नदी के बहुत करीब एक पत्थर पर बैठ जाता है.

मेघा:- संभल kar...Kahi...

फ़िक्र के साथ मेघा ने कहा.

सुमित:- उस दिन के इंसिडेंट के बाद भी तुम ये कह रही हो?

मेघा:- इतना हल्का मत लो नदी ko...Apne विकराल रूप में ना जाने कितना विनाश किया है और ना जाने कितने hi सभ्यता का अंतत किया है.

मेघा इस बार काफी सीरियस थी.

सुमित:- लेकिन आज तो नदी उस दिन से काफी छोटी है.

मेघा:- अगले पल? अगले पल भी इतना hi छोटी rahegi...Iss बात का गारंटी ले सकते हो?

सुमित इस बार कुछ नहीं बोलै.

मेघा:- पहाड़ी नदी hai...Bahaav में कब बदलाव आ जाए कुछ पता नहीं चलता.

कुछ ऐसा hi है जिंदगी bhi...Kab किस मोड़ में पहुंचेंगे और किस्मत में क्या लिखा है कोई नहीं जानता.

मेघा की बात में उसके दिमाग में चल रही गहरी सोच साफ़ दिखा रहा था.

सुमित ने इस बार भी कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- अभी खुद को hi dekho...Kal तक सदा हुआ चेहरा के साथ घूम रहे थे और aaj...Aaj बहुत खुश दिख रहे हो.

कल फिर इस चेहरे में ये ख़ुशी रहेगा या nahi...Iski भी कोई गारंटी नहीं.

सुमित:- फ़िक्र मत karo...Abb तो खुश होने का वजह मिल गया है.

सुमित की बातों में उसका ख़ुशी साफ़ दिख रहा था.

मेघा:- Acchaa...Aisa क्यों लगता है?

सुमित:- Kirti...Uska नफरत ख़त्म हो गया hai...Jald hi वो मान जायेगी.

पिछले 3,4 दिनों से आये कीर्ति में बदलाव से सुमित बहुत खुश tha...Abb कीर्ति सुमित से अच्छे से बात कर रही thi...Kabhi मुश्कुरा कर तो कभी खुद hi सुमित को बुलाती टाइम स्पेंड करने के लिए.

मेघा:- किसी पर भी इतना अंध विश्वाश कर लेते हो?

इस बार मेघा की आवाज में व्यंग था.

सुमित:- किसी पर भी नहीं karta...Lekin Kirti...Pyaar है वो meri...Aur प्यार में विश्वाश की जरुरत होता है ना की बैकग्राउंड को देखते है.

मेघा:- लगे रहो अपने इस विश्वाश के साथ.

इस बार मेघा ने गुस्से में कहा.

और गुस्सा का वजह था सुमित के आँखों में बंधा patti...Tab से मेघा उससे हिंट दे रही थी लेकिन सुमित समझने को तैयार hi नहीं था.

अभी भी मेघा कीर्ति के बारे में hi सोच रही thi...Samajhne की कोशिश कर रही थी लेकिन समझ पाने में असफल हो रही थी.

कीर्ति का ये बदलाव मेघा के सोच और उम्मीद से भी बाहर tha...Kuch पूछने पर घुमा फिरा कर ताल देती थी.

उससे भी देखने पर यही लग रहा था की कीर्ति सुमित ऐ प्यार करने लगी hai...Lekin दिल ये बात मानने को तैयार नहीं था.

और साथ hi Vivek...Abhi भी उससे विवेक के साथ वो बातें याद आ रहा था.

विवेक:- तुम सुमित से प्यार करती हो ना?

इस सवाल और सवाल पूछने की तरीका पर मेघा को बहुत गुस्सा आया.

मेघा:- तुम्हे क्या मतलब?

विवेक:- मतलब hai...Pehle ये बताओ तुम सुमित से प्यार करती हो या नहीं?

मेघा:- कहा na...Iss बात से तुम्हे कोई मतलब नहीं होना चाहिए.

विवेक:- अगर करती हो तो bataao...Kuch प्लान करूँगा तुम्हे और सुमित को मिलाने की?

अब्ब मेघा को कुछ गड़बड़ लग रहा था.

मेघा:- साफ़ साफ़ कहो.

विवेक:- मई कीर्ति से प्यार करता hun...Aur उस सुमित को कीर्ति के पास देख कर खून जल रहा है.

तुम चाहो तो सुमित तुम्हारा और कीर्ति मेरी.

शाख तो मेघा को पहले hi tha...Jo अब्ब यकीं में बदल गया.

मेघा:- कीर्ति को बताया तुमने ये बात?

विवेक:- हमेशा से फ्रेंड जोन hi रहा hun...Abb तो बताने में भी दर लग रहा है.

ये सुन कर मेघा की गुस्सा कण्ट्रोल से बाहर चला गया.

मेघा:- आज कल हर कोई प्यार को पाने के लिए प्लानिंग या फिर साजिश hi करता फिर रहा hai...Jaise ये फैशन बना गया है.

कुछ देर तक तो विवेक मेघा का गुस्सा देख कुछ नहीं bola...Kuch देर बाद.

विवेक:- क्या सोचा तुमने फिर?

मेघा:- यही की अभी तक मुंह से समझा रही थी तुम्हे इस बात से कोई मतलब नहीं होना chahiye...Agli बार थप्पड़ से सम्झाउनही.

मेघा की ये गुस्सा देख विवेक ने आगे बोलने की हिम्मत नहीं किया.

मेघा ने कीर्ति को भी ये बात बताने की कोशिश ki...Lekin विवेक का दोस्ती का ऐसा पर्दा चढ़ गया था कीर्ति की आँखों में की वो विवेक के बारे में कुछ सुन्ना नहीं चाहती थी.

कुछ यही बातें थी जो मेघा को सोचने पर मजबूर कर रहा tha...Kirti का बदला रूप, विवेक की साजिश और सुमित की आँखों में बंधी patti...Na जाने आगे इस वेकेशन में क्या होने वाला है.

ात नाईट...11:50 पं

"कहा हो?"

कीर्ति ने ये मैसेज पढ़ते hi हैरानी में रिप्लाई दिया.

कीर्ति:- अभी तक जगे हुए हो?

सुमित:- तुम्हारी यादों में न जाने कितने hi रात जाग कर बिताया hai...Ye तो कुछ भी नहीं.

कीर्ति:- सो यू थिंक थिस इस रोमांटिक?

सुमित:- नॉट ात all...Romantic hi होना है तो छत में आ जाओ.

कीर्ति:- इतनी रात को?

सुमित:- Haan...Abb ये मत कहना की भूतों से दर लगता है.

कीर्ति:- बिलकुल नहीं.

सुमित:- थें प्रोवे आईटी.

कीर्ति मुस्कुराती हुई छत में चली जाती है.

और जैसे hi छत में अपना कदम रखती है हैरानी से उसकी आँखें फ़ैल जाती है.

सुमित:- हैप्पी बर्थडे तो यू.

सामने एक प्लेट में ब्रेड का एक बड़ा पीेछे रखा tha...Aas पास जल रहे 4 candles...Aur एक चाक़ू.

कीर्ति को ऐसे सुरप्रीसेड और खुश देख सुमित के ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.

कीर्ति:- ये सब क्या है?

सुमित:- बर्थडे स्पेशल फॉर स्पेशल गर्ल.

कीर्ति:- तुम्हें याद hai...Lekin मैंने कभी बताया भी नहीं.

सुमित:- आशिक़ hun...Itna तो पता hi होगा.

अब्ब कीर्ति सुमित के पास पहुँच जाती है.

कीर्ति:- फ़ोन पर भी तो विश कर सकते थे.

सुमित:- वो मेरा स्टाइल nahi...Formality के रूप में फ़ोन या मैसेज करो.

मुझे तो तुम्हे सरप्राइज देना tha...Aur तुम्हारा ये ख़ुशी देखना था.

कीर्ति:- सो स्वीट ऑफ़ यू.

इतना कह कर कीर्ति सुमित की गालों पर पिंच कर देती है.

सुमित:- केक नहीं mila...Aur इंटरनेट वाला मोबाइल भी नहीं लाया जो यूट्यूब से वीडियो देख कर बना लेता.

इस बार इसी ब्रेड से काम चला लो.

कीर्ति:- ये भी बहुत अच्छा hai...Aur इससे भी अच्छा है तुम्हारा सरप्राइज.

फिर कीर्ति ब्रेड को काट कर सुमित को खिलाती hai..Sumit भी ब्रेड का एक टुकड़ा कीर्ति को खिलाता है.

सुमित एक नजर कीर्ति को प्यार से देखता hai...Lekin इस बार कीर्ति का एक्सप्रेशन बदला हुआ था.

सुमित:- तुम ठीक तो हो?

कीर्ति अब्ब और भी इमोशनल हो जाती है.

कीर्ति:- सच में प्यार करते हो ना मुझसे?

सुमित:- अब्ब कैसे यकीं दिलाओ.

बाल खुजाते हुए सुमित ने कहा.

कीर्ति:- यकीं दिलाने की जरुरत नहीं hai...Bas इस बार भरोषा मत तोडना.

सुमित:- वादा है.

सुमित का ख़ुशी का अब्ब कोई ठिकाना नहीं tha...Kirti ने उसके प्यार को फिर से अपना लिया tha...Na जाने कितने दिन और कितने रात गुजारे थे कीर्ति की यादो में सुमित ने अपने टूटे दिल के saath...Jis को आज फिर से जोड़ा भी कीर्ति ने hi.

एक नजर फिर सुमित ने देखा कीर्ति को प्यार और सम्मान के साथ.
 
शायद आप दोनों ने ये लाइन मिस कर diya...Kirti की बदलाव एक दिन की नहीं है...3,4 दिन की hai...Jab कीर्ति ने पिछली बार सुमित से अच्छे से बात किया था उस दिन के बाद 3,4 दिन की घटना है ये.

और सुमित का नदी में छलांग लगाने के बाद के 3,4 दिन के बाद hi कीर्ति ने सुमित से बात किया tha...Jo पिछले अपडेट में मेंशन किया hai...Kul मिला कर 7,8 दिन है.

और कीर्ति को अब्ब सच में सुमित से प्यार है या कीर्ति का कोई गेम है ये यो आगे hi पता चलेगा.
 
फ्रेंड्स लिखने बैठा हूँ लेकिन लिखा नहीं जा रहा hai...Shayad लिखने के लिए सही शब्द नहीं मिल रहे है aaj...Ye अपडेट बहुत इम्पोर्टेन्ट है स्टोरी के लिए इस वजह से जल्दबाज़ी में लिखना भी नहीं चाहता.

अपडेट का टाइम मेंशन करने के बाद पीछे हटना मुझे खुद अच्छा नहीं लग रहा है :(

उम्मीद है कल दोपहर से शाम तक अपडेट लिख कर पोस्ट कर दूंगा.

रियली सॉरी.
 
अपडेट 50

इतना चुप क्यों हो?

कुछ लम्बी खामोशी के बाद कीर्ति बोली.

सुमित और कीर्ति को नदी किनारे में आये 2 घंटे हो गए thhe...Lekin बात ना की बराबर हुआ tha...Nadi के किनारे एक पत्थर में दोनों बैठे थे एक दूसरे की बाहों में.

सुमित:- बस ऐसे hi.

कीर्ति:- इतना hi तो नहीं था न तुम्हारा प्यार? अभी से मन तो नहीं भर गया.

इस बात पर सुमित ने कीर्ति की तरफ dekha...Aur फिर मुस्कुरा कर.

सुमित:- कभी शेर को घांस खाते देखा है?

कीर्ति:- लेकिन तुम में अब्ब वो शेर वाली बात नहीं.

सुमित:- शेर अभी खुश hai...Bahut खुश hai...Dil की इच्छा जो पूरी हुई hai...Bas यही वजह है की वो शिकार नहीं कर रहा है.

बस कुछ पल aur...Warna तुम भी जानती हो इस शिकारी का शिकार करने का अंदाज़.

बोलना चालु कर दिया तो तुम्हारे दो कान भी काम पद जाएंगे सुनने के लिए.

मुश्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jawaab में कीर्ति भी मुस्कुरायी.

कुछ देर दोनों के बिच फिर खामोशी छा गया.

सुमित:- आज तुम्हारे इतने paas...Tumhare इतने करीब बैठा हूँ तो एहसास हो रहा hai...Jindagi में किस चीज की कमी है.

आज वही प्यार को महसूस कर रहा hun...Aisa लगता है तुम्हाता फिर से मिल जाने से मेरा जिंदगी पूरा हो गया है.

दिल में तो है बहुत कुछ बताने के liye...Lekin कहा से शुरू करू और कहा पर ख़त्म? बस इसी लिए खामोशी में इस प्यार का एहसास का मजा ले रहा हूँ.

कीर्ति:- मई भी.

कीर्ति की इस प्यार भरी बात पर सुमित एक बार फिर फ़िदा हो गया.

सुमित:- तुमने बताया nahi...Fir से कैसे मान गयी?

कीर्ति:- तो क्या फिर से रूत जाओ?

थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कीर्ति बोली.

सुमित:- नहीं nahi...Abb तो तुम्हारा झूठा नाराजगी भी बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा.

सुमित ने कीर्ति की होंठ पर अपना ऊँगली रखते हुए कहा जो ये साफ़ दिखा रहा था की इसका कल्पना भी करना कितना दर्दनाक है उसके लिए.

कीर्ति:- बहुत पहले hi इम्प्रेस हो गयी थी.

ये सुमित के लिए काफी हैरानी की बात था.

सुमित:- लेकिन कब और कैसे? मुझे तो कभी पता hi नहीं चला.

कीर्ति:- अगर इम्प्रेस ना होती तो इस वेकेशन पर क्यों रूकती?

सुमित:- तो फिर इतना गुस्सा क्यों थी मुझसे?

इस बार सुमित की आवाज में शिकायत था.

कीर्ति:- देखना चाहती थी तुम मेरे लिए क्या क्या कर सकते हो...2 साल की नाराजगी tha...Itna हक़ तो बनता है ना.

कीर्ति की इस मासूमियत भरी बात पर.

सुमित:- हमेशा सोचता tha...Tum मेरे टक्कर की ho...Lekin आज लग रहा है कोई मुकाबला hi नहीं है तुमसे.

कीर्ति:- कुछ बातों की समझ देर से hi होती है.

इस बात पर सुमित भी हांसे बिना नहीं रह पाया.

और इस हंसी के बाद फिर से एक खामोशी चा gaya...Sumit को बात करने से ज्यादा प्यार को महसूस करने में मजा आ रहा था.

कुछ देर तक कीर्ति भी सुमित के कन्धा पर सर टिकाये बैठी रहे.

सुमित कभी कीर्ति की तरफ प्यार से देखता तो कभी सामने नदी की तरफ.

कीर्ति:- Pyaar...Kuch अलग hi बात है इस शब्द है इस शब्द mein...Kya सही और क्या galat...Aasani से इसका अंदाजा लगा सकते है बस दिल की बात सुनो.

जब मैंने भी दिल की बात सुनी तब एहसास हुआ तुम गलत नहीं ho...Fir क्या? तभी से माफ़ कर diya...Bas दिखाया nahi...Warna मेरे नखरे कौन झेलता.

सुमित बस कीर्ति की बात सुन रहा था और यही चाहता था की बस सुनते hi रहे.

कीर्ति:- और tum...Paagal हो बेवकूफ हो.

इतना कह कर कीर्ति सुमित को मारने लगती है.

सुमित:- अब्ब क्या हुआ?

हैरानी से सुमित ने पूछा.

कीर्ति:- उस दिन नदी में छलांग क्यों लगाया? अगर कुछ हो जाता तो.

इस बार कीर्ति की आवाज में शिकायत था.

सुमित:- कुछ नहीं hota...Swimming में एक्सपर्ट हूँ वो भी बचपन से. :स्मार्त्य:

कीर्ति:- फिर भी अगर कुछ हो जाता तो सोचा है मेरा क्या होता? कितना मुहकिल था मेरे लिए उस पल तुम्हे नदी में बेहटा देख.

कीर्ति की इस बात पर सुमित कोई जवाब नहीं दे पाया.

कीर्ति:- बस तभी से थोड़ा नरम होना pada...Warna तुम तो हो hi paagal...Na जाने इस पागलपन में क्या कर बैठोगे?

सुमित:- पागल तो हूँ लेकिन तुम्हारे प्यार में.

कीर्ति:- आगे से ऐसा किया ना तो हमेशा के लिए दूर चली जाउंगी.

सुमित:- अरे नहीं नहीं...

दर में सुमित आगे बोल भी नहीं पाया.

कीर्ति:- वादा karo...Aage से ऐसे परेशान नहीं करूँगा.

सुमित:- वादा hai...Aage सिर्फ प्यार करूँगा परेशान नहीं. :डी

कीर्ति फिर सुमित की कन्धा पर अपना सर टिका देती है.

कुछ पल यूँही खामोशी में बीतने के बाद.

सुमित:- सामने नदी देख रही हो.

कीर्ति:- हाँ.

सुमित:- अब्ब दिल की एक hi ख्वाहिश hai...Iss नदी की बहाव की उतार चढाव की तरह हम दोनों भी हमारे जिंदगी की उतार चढाव में एक दूसरे का साथ रहेंगे.

कीर्ति:- वादा है.

फिर दोनों यूँही एक दूसरे की बाहों में पूरा शाम गुजार देते है.

और जब अँधेरा छाने लगता है तब.

कीर्ति:- अब्ब हमें चलना चाहिए.

सुमित भी उठ जाता है.

कुछ पल hi हुआ था दोनों को चलते हुए तभी.

सुमित:- आज तो तुम कुछ ज्यादा hi खूबसूरत लग रही ho...Andhera में भी तुम्हारी खूबसूरती नहीं छिप रहा है.

कीर्ति:- क्यों? और दिन बदसूरत लगती थी?

सुमित:- Nahi...Aaj कुछ jyada...Aaj दिल की नजर से बोल रहा हूँ.

कीर्ति:- दिल की नजर? तुम्हारा एनाटोमी कुछ ज्यादा hi कमजोर hai...Thoda आशिकी काम और पढाई लिखे पर ज्यादा ध्यान दो.

इतना कह कर कीर्ति आगे बढ़ गयी.

सुमित:- एनाटोमी ऑफ़ heart....Issmein उतना एक्सपर्ट कभी नहीं रहा.

सुमित ने इतना तो कहा और आगे भी कुछ बोलै जो उसके मुंह से बाहर न निकल सका.

सुमित:- इस सब्जेक्ट में तो मेघा एक्सपर्ट है.

मेघा की याद आते hi वो भी दिल की बारे mein...Ek बार फिर सुमित कमजोर पद गया.

सुमित:- शायद ये जख्म हमेशा मुझे मेरे उस भूल का याद दिलाता rahega...Aakhir काम भी तो ऐसा hi किया है.

सुमित किसी तरह इस याद को भुलाना चाहता है कुछ पल के liye...Taaki कीर्ति के साथ कुछ पल बीती वो भी प्यार से.

बहुत कुछ सोच रखा था usne...Abb इस वेकेशन के कल का आखिरी दिन को कैसे एक यादगार लम्हा banaye...Fir कीर्ति से उसका पिछले 2 साल के बारे में जानना tha...Aur आगे की जिंदगी के बारे में प्लानिंग.

कुछ यही सोच के साथ सुमित कीर्ति के साथ आगे बढ़ रहा था.

ात नाईट 9 पं

अभी इस वक्त? तूने क्यों बुलाया हम सब को?

ये सवाल था मेघा का कीर्ति से.

सुमित भी अभी अभी पहुंचा tha...Kirti कुछ एक्ससिटेड लग रही thi...Megha कुछ कन्फ्यूज्ड thi...Aur Vivek...Uska अभी भी गाल फुला हुआ था.

कीर्ति:- कुछ बताना था.

मेघा:- क्या?

कीर्ति:- याद है tujhe...Jab इस वेकेशन में आये थे मैंने तुझसे कहा था की अब्ब मुझे कभी प्यार नहीं hoga...Lekin मई गलत थी.

मेघा कुछ नहीं बोलती.

कीर्ति:- ये एक यादगार पल है मेरे जिंदगी ka...Pyaar का एहसास दुबारा हो hi gaya...Issi लिए सोचा क्यों न इस पल को अपने दोस्तों के साथ सेलिब्रेट करू.

कीर्ति ने बोलना जारी रखा.

कीर्ति:- आज मई प्रोपोज़ करने वाली हूँ तुम सब के सामने जिसे मई अब्ब अपने जान से भी ज्यादा प्यार करने लगी हूँ.

इतना कह कर कीर्ति अपने पीछे से गुलाब का फूल निकालती है और धीरे धीरे सुमित की तरफ बढ़ती है.

सुमित का धड़कन काबू से बाहर हो रहा tha...Chaandni रात में कीर्ति की ये khubsurati...Aur अपने हाथो में गुलाब को लेकर चलने की वो aadaayein...Sumit से रहा नहीं जा रहा tha...Aur ऊपर से कीर्ति की ये muskaan...Uff

सुमित दिल थामे कीर्ति को देख रहा था और इंतजार कर रहा था उस पल का जिसका वो पिछले 2 साल से इंतजार कर रहा था.

कीर्ति भी धीरे से आगे बढ़ रही थी और सुमित के पास पहुँच कर मुस्कुराती है aur...Aur...

और वो सुमित के पास से निकलते हुए विवेक की तरफ बढ़ने लगी.

ये देख विबेक भी एकदम से हैरान हो gaya...Sumit को तो यकीं hi नहीं हुआ.

सुमित आँख बंद कर के फिर से देखता है लेकिन ये सच tha...Lekin यकीं शायद अभी भी नहीं हो रहा था.

कुछ hi पल में दिल में दर्द भर उठा.

सुमित:- (इन हिज मंद) Nahi...Nahi...Aisa नहीं हो सकता.

दर्द का असर चेहरे में भी साफ़ दिखने लगा.

जोर से खुद को पिंच करके देखता hai....Kaash ये सपना ho...Ek बुरा सपना.

लेकिन हकीकत कुछ और hi था.

कीर्ति:- ी लव यू विवेक.

कीर्ति की इस बात से सुमित के कान ने भी अपना काम करना बंद कर दिया.

एक नजर खुद के हाथ में dekha...Ye सपना तो नहीं निकला लेकिन हाथ के उस जगह पर एक जख्म हो गया tha...Jiska दर्द अभी उठ रहे दिल के जख्म के मुकाबले ना के बराबर था.

डरते हुए उसने कीर्ति की तरफ अपना नजर ghumaya...Vibek भी हैरानी में कोई जवाब नहीं दे पा रहा था.

कीर्ति मुद कर सुमित को देखती है.

कीर्ति:- बेवकूफ hi rahoge...Jo प्यार और दिखावा में फर्क करना नहीं जानते.

सुमित कुछ बोलने की हालात में नहीं था.

कीर्ति अब्ब मेघा की तरफ देखती है.

कीर्ति:- प्लान सक्सेसफुल.

कीर्ति की इस बात पर मेघा भी हैरान रह जाती hai...Wo कभी कीर्ति को घूरती तो कभी सुमित को.

सुमित और मेघा का जब नजर मिला तो सुमित की होंठो में एक मुस्कान आ gaya...Haara हुआ मुश्कान.

कीर्ति:- बहुत इर्रिटेटिंग हो tum...Bahut बार मन किया था इर्रिटेट मत karo...Mat karo...Lekin सुनते कहा हो तुम.

बस इससे बचने के लिए परमानेंट इलाज ढूंढ liya...Future डॉक्टर जो हूँ.

सुमित अभी भी कुछ नहीं बोल पा रहा tha...Abb दर्द में दो बून्द आंसू आखों से टपक गए.

कीर्ति:- बस इसी लिए सोचा तुम्हारे करीब होने का नाटक करती hun...Expectation इतना हाई कर दूंगी की तुम आसमान में उड़ने lagoge...Aur reality...Ekdum से जमीं मई पटक दूंगी.

और वही किया.

उम्मीद है बहुत बड़ा झटका लगा है tumhe...Lagna भी chahiye...Aur अब्ब तुम मेरे पास आने से भी daroge...Irritate करना बहुत दूर की बात है.

कीर्ति की बातों में नफरत tha...Sirf नफरत.

ये सब सुन कर सुमित का सर फटने लगा था.

कीर्ति:- "ी लव यू" मेरे मुंह से ये सुन्ना तुम्हारे लिए एक ऐसा सपना है जो कभी पूरा नहीं हो sakta...Abb थोड़ा रियलिटी में aao...Aur रियलिटी.

"ी हेट यू."

इस बार कुछ ज्यादा hi तेज आवाज में कहा कीर्ति ne...Sumut अब्ब और झेल नहीं पाया.

वो वह से भागते हुए अपने तुम में पहुंचा और सीधे अपने बीएड पर गिर गया.

मेघा को भी सुमित का बहुत फ़िक्र होने लगा सुमित को इस हाल में देख kar...Kirti पर तो बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इससे ज्यादा सुमित का fikar...Wo भी सुमित के पीछे चली गयी.

और Kirti...Wo अभी भी कड़ी थी वही par...Ek विजयी मुश्कान के साथ.
 
अपडेट 51

मेघा सुमित से कुछ बात कर पाती उससे पहले hi सुमित ने दूर लॉक कर दिया.

बहुत हिम्मत जुटाने के बाद मेघा ने रूम में नॉक kiya...Pehle तो सुमित ने कोई रिस्पांस नहीं diya...Lekin जब धीरे धीरे नॉक की आवाज बढ़ने लगा तब.

सुमित:- कौन है?

सुमित की इस फ़्रस्ट्रेशन में निकली बात में गुस्सा और दर्द दोनों साफ़ दिख रहा था.

मेघा कुछ बोलती उससे पहले.

सुमित:- ये होटल वाले bhi...Paisa या फिर कोई और शुए है तो कल सोल्वे karunga...Kuch पल के लिए अकेले छोड़ दो.

छिड़ते हुए सुमित ने bola...Megha ने भी सोचा शायद ये वक्त सही नहीं है सुमित से बात करने ka...Kuch पल अकेला छोड़ देना hi बेहतर रहेगा.

फिर वो वापस छत में जाती है.

मेघा:- बहुत गलत किया कीर्ति तूने?

गुस्से में मेघा बोली.

कीर्ति:- गलत? बता क्या गलत किया मैंने?

मेघा:- ये प्यार का दिखावा... और एकदम से उस बेचारे का दिल तोड़ देना.

कीर्ति:- बेचारा और वो?

कीर्ति ने हँसते हुए kaha...Megha बस गुस्से से hi घूरती जा रही थी कीर्ति को.

कीर्ति:- जानती नहीं है कितना बड़ा कमीना है वो.

मेघा अभी भी चुप thi...Shayad गुस्सा में शब्द hi नहीं मिल रहा था.

कीर्ति:- ये बकवास बातें chhod...Aur बिना किसी के पक्ष लिए बता तुझे मेरा सुमित को जो सबक सीखना गलत लगता है ये सुमित की गलती से भी बड़ा गलती है?

मेघा:- सुमित की गलती? मुझे भी तो bataa...Aakhir उसने ऐसी क्या गलती कर दिया?

कीर्ति:- सच में अंधी हो गयी hai...Chal मई hi बता देती हूँ.

जब उससे नफरत करने लगी थी तब से hi मेरा पीछा करने लगा tha...Kisi रारह से हर वो राष्ट बंद किया जिससे वो मुझ तक पहुँच paata...Kuch वक्त छैन से जी रही थी की फिर से वो सर दर्द बन कर मेरे जिंदगी में वापस aaya...Iss वेकेशन के बहाने.

कुछ दिन की बात सोच कर फिर से इग्नोर कर रही थी की उसका मेन्टल टार्चर कुछ ज्यादा hi बढ़ने laga...Baat बात पर irritation...Hadd हो gaya...Ek तो खुद पागल hai...Aur उसका ये इर्रिटेशन सहते सहते मई भी पागल हो रही थी.

और फिर मज़बूरी में मुझे ऐसा फैसला लेना pada...Jiska मुझे कोई अफसोश नहीं nahi...Ummeed है आगे परेशान नहीं करेगा wo...Agar किया तो इससे भी बड़ा सिएबाक सिखाऊंगी.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

कीर्ति:- और भूल gayi...Usne तुझे भी तो धोखा दिया tha...Abb तुझे उस धोखेबाज़ में भी अच्छाई दिख रही है?

सच में अंधी हो गयी है या कुछ देखना hi नहीं चाहती?

मेघा:- लेकिन तेरे लिए उसका प्यार सच्चा tha...Pata नहीं तू क्यों समझ नहीं पा रही है.

कीर्ति:- फिर वही baat...Abb मुझे इस प्यार के चक्कर में नहीं पड़ना.

ये बात ना hi वो समझ रहा है और ना hi तू.

मेघा:- तो फिर ये विवेक के साथ?

हैरानी और गुस्से के साथ मेघा ने पूछा.

कीर्ति:- विवेक तो मेरा दोस्त hai...Best फ्रेंड.

कीर्ति की इस बात ने विवेक को भी आसमान से निचे जमीन में पटक diya...Jab से कीर्ति ने उससे प्रोपोज़ किया था तब से भले hi वो शांत था लेकिन दिल में अनेक हलचल हो रहा tha...Kirti से कुछ बातें करता उससे पहले hi मेघा आ gayi...Aur अब्ब कीर्ति की ये बात.

कीर्ति:- बचपन से hi कुछ सपना hai...Jindagi में कुछ करने ki...Apne दम पर.

जो दूसरे के लिए मुश्किल होता है वो हासिल करने की jidd...Jab 10तह में थी तब पढ़ाई में उतनी अच्छी नहीं थी.

एक टीचर ने kaha...Mera पढ़ाई में कुछ नहीं हो sakta...Medical और इंजीनियरिंग तो बिलकुल भी nahi...Tab से ठान लिया मब्ब्स hi पढूंगी वो भी फुल स्कालरशिप में और अच्छे कॉलेज mein...Bas इस जिद्द को पूरा करना tha...Kisi भी कीमत में.

उसी दौरान जब 11सत में aayi...Tab मुलाक़ात हुआ सुमित se...Umar hi ऐसा था और ऊपर से सुमित का personality...Attraction हो गया था usse...Jisse मई प्यार समझती थी.

लगता था मेरा hi टाइप का hai...Hamesha कॉंफिडेंट नजर आता था और एकदम unique...Bilkul यूनिक चॉइस था उस वक़्त ka...Lagta था उसके साथ रह कर मेरा भी कॉन्फिडेंस हाई रहेगा और साथ hi डेटर्मिनेन्ट bhi...Aur वो मेरा जिद्द पूरा करने में मेरा साथ भी देगा.

जब उससे प्रोपोज़ किया तो उसने मन कर diya...Fir शुरुवात हुई एक नयी जिद्द ki...Usse paana...Kisi भी तरह.

और जब उसने मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट किया तब उसका करैक्टर पता chala...Pehli बार अपनी जिद्द पसंद नहीं aaya...Pata नहीं वो अट्रैक्शन भी कैसा tha...Kuch दिन तक बहुत बुरा लगा अपना दिल टूटने पर.

फिर किसी तरह खुद को संभाल कर आगे बढ़ gayi...Rk धोखेबाज़ के लिए अपना जिंदगी अपना सपना कैसे भूल जाऊ?

और अब्ब मूव ों कर चुकी hun...Abb जिद्द ये है की मब्ब्स बहुत अच्छे से padhungi...Har वो chapter हर वो detail...Issi के जरिये मुझे मेडिकल फील्ड में सक्सेसफुल बनना hai...Super successful...Dr. कीर्ति ये सिर्फ नाम नहीं एक ब्रांड होना चाहिए.

कीर्ति की आवाज में एक अजीब सा जिद्द था.

मेघा को देख वो फिर कहती है.

कीर्ति:- और अब्ब मुझे प्यार जैसी डिस्ट्रक्शन से दूर रहना hai...Especially सुमित जैसे लूसेर्स से.

जितना जल्द वो समझ जाएगा उतना hi बेहतर है उसके लिए.

मेघा बस कीर्ति को देखती रह gayi...Kirti का ये रूप उसने कभी नहीं देखा tha...Jaanti थी वो की कीर्ति जिद्दी है लेकिन इतना जिद्दी आज पता चला.

दूसरी तरफ Vivek...Wo खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा tha...Kirti की इस बात से तो उससे लगा की शायद hi वो कीर्ति को अब्ब कभी पता पायेगा.

कीर्ति:- अब्ब बता कहा गलत हूँ मई? क्या कोई सपना देखना और उससे पूरा करना गुनाह है?

और बे वजह कोई रुकावट बने तो उस रुकावट को दूर करना गलत है?

इस बार कीर्ति की आवाज में गुस्सा था.

मेघा:- अच्छी बात hai...Sapna भी बहुत अच्छा hai...Tujhe देख कर लग रहा है की तू जो भी चाहती है वो हासिल जरूर करेगी.

लेकिन वरकॉन्फिडेन्स और Ghamand...Hamesha इन् दो चीज से संभल कर rehna...Kab किसको मुंह के बल गिरा दे कुछ पता नहीं चलता.

कीर्ति:- ये कॉन्फिडेंस hai...Aur इसी कॉन्फिडेंस से खुद को इतना ऊपर ले जाउंगी की ऐसी छोटी मोती बातों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

मेघा:- और किस्मत bhi...Kisi का कोई जिद्द नहीं चलता किस्मत के saamne...Saccha प्यार और हमेशा साथ निभाने वाला किस्मत से hi मिलता है.

कीर्ति:- कोई जरुरत नहीं है किसी ki...Mai खुद hi काफी हूँ अपना सपना पूरा करने के liye...Mera सपना hi मेरा ख़ुशी है और मुझे किसी की जरुरत नहीं है.

मेघा:- अगर तूने अपना मन बना hi लिया है तो मेरा कुछ कहने का कोई मतलब नहीं बनता.

बस इतना hi kahungi...Sumit तुझसे सच्चे दिल से प्यार करता hai...Lekin सब्र का भी एक सीमा होता hai...Kahi टूट न jaaye...Agar कभी तुझे सुमित की प्यार समझ में आये तो वक्त रहते hi उसके पास चले jaana...Kahi उसका सब्र का बाँध टूट न जाए.

इतना कह कर मेघा चली gayi...Kirti को समझाना उसके बस की बात नहीं है ये वो अच्छे से समझ गयी thi...Abb उससे फ़िक्र थी तो सिर्फ सुमित का.

वो सुमित के दूर के सामने जा कर बैठ gayi...Knock करना तो चाहती थी लेकिन सुमित डिस्टर्ब न हो जाए ये सोच कर अपना हाथ पीछे खिंच लेती थी.

करीब 10 मिनट के बाद जब सुमित ने रूम खोला तब मेघा को अचानक से सिगरेट का गंध महसूस hua...Sumit जब रूम से बाहर निकला तब सुमित के साथ साथ धुआं भी बाहर आया.

इसी से मेघा ने अंदाजा लगा लिया अंदर रूम की क्या हालात है.

सुमित भी मेघा को अपने रूम की बाहर देख हैरान था.

सुमित:- तुम यहाँ.

मेघा:- पानी लेने जा रही थी निचे रूम में.

जल्दबाज़ी में मेघा को यही बहाना मिला.

सुमित:- रुको.

फिर सुमित रूम में जा कर पानी का बोतल ले कर आता है.

मेघा बोतल को देख रही थी.

सुमित:- पानी hi hai...Daaru नहीं.

फींका मुस्कान के साथ सुमित ने कहा.

मेघा पानी का बोतल लेती hai...Sumit से बातें करना चाहती थी लेकिन टॉपिक hi नहीं मिल रहा tha...Thak कर वापस जाने hi वाली थी की

सुमित:- मेघा...

सुमित की इस आवाज पर मेघा पिचर सुमित की तरफ मुड़ी.

सुमित:- ी ऍम सॉरी.

आत्मग्लानि से भरी आवाज में सुमित ने कहा.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- बहुत परेशान कर दिया तुम्हे और कीर्ति ko...Jo तुम दोनों को ये कदम उठाना पड़ा.

अभी भी सुमित की आवाज में आत्मग्लानि था.

मेघा को भी याद आया कीर्ति की वो बात जिसमें उसने कहा था सुमित को की ये उन् दोनों का प्लान है.

सुमित:- अब्ब तो कीर्ति से नजर भी मिला पाने की ताकत नहीं hai...Agar हो सके तो कह देना कीर्ति se...Mai सच में शर्मिंदा हूँ अपने गलती के liye...Ho सके तो मुझे माफ़ कर देना.

हारा हुआ आवाज में सुमित ने कहा.

मेघा सर हिला कर जाने hi वाली थी की.

सुमित:- और तुम bhi...Ho सके तो माफ़ कर dena...Bas कल का din...Fir कभी तुम दोनों की जिंदगी में दखल अंदाज़ी नहीं karunga...Vaada है.

मेघा बस सुमित को hi देख रही थी.

सुमित:- एक रिक्वेस्ट और है.

मेघा:- हाँ बोलो.

सुमित:- मैंने इतना गलत किया है तुम दोनों के साथ की तुम दोनों का शायद वो बदला भी काम hai...Mai शायद और डेसेर्वे करता हूँ.

बस यही रिक्वेस्ट है की अगर आगे भी बदला की कोई प्लान है तो कुछ वक्त के लिए कैंसिल कर do....Abhi बहुत टूट चूका hun...Shayad संभल नहीं पाऊंगा.

आगे जो मर्जी कर लेना.

सुमित का ये दर्द और लाचारी मेघा साफ़ महसूस कर पा रही thi...Sumit का ये हाल देख उससे भी बहुत बुरा लग रहा था.

वो कुछ कहती इससे पहले hi सुमित अपने रूम में जा कर दूर लॉक कर दिया.

मेघा भी सुमित की बारे में सोच कर वह से चली गयी ऍबे रूम की तरफ.

कितना टूट गया है सुमित? बस यही सोच मेघा के दिमाग़ में चल रहा tha...Saccha प्यार को हारता देख उससे भी बहुत बुरा लग रहा था आज.
 
नेक्स्ट अपडेट कल तरय karunga...Aaj सोचा था लिखने ka...Lekin सोचने से क्या होता है? वो तो पिछले 2 दिन से सोच रहा हूँ अपडेट लिख कर पोस्ट करने की.

अभी तो कुछ प्रॉब्लम नहीं hai...Exam का भी कुछ पता nahi...Bas प्रॉब्लम है तो मूड ki...Jab भी लिखने का सोचता हूँ लिख hi नहीं पाटा शायद स्टोरी भी उस मोड़ में आ चूका है.

कल तरय करता hun...Lekin सूरे nahi...Pichle कुछ उपदटेस में मेंशनएड डेट से भी लेट अपडेट आया है.

सॉरी फॉर थिस फ़्रस्ट्रेटिंग डिले बोथ फॉर में एंड यू गाइस.
 
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