Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 17 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

फ्रेंड्स नेक्स्ट अपडेट विल बे पोस्टेड ों Friday...Jaanta हु बहुत इर्रेगुलर हो गया है उपदटेस इस vakt...Abhi एक्साम्स चल रहा है इससे पहले फेस्टिवल सेअसोंस और ातुड़ी pressurs...Chaah कर भी लिख नहीं पा रहा tha...Friday के बाद फ्री रहूँगा कुछ वक्त के लिए.

स्टोरी में लगभग 30 उपदटेस बाकी hai..Koshish करूँगा जल्द कम्पलीट करने की और फ्राइडे के बाद वीक में 2 उपदटेस देने ki...Agar नहीं दे पाया तो मजबूर करनेकी जिम्मेदारी आप सभी का :डी

साथ बने रहिये.
 
अपडेट फ्राइडे से hi तरय कर रहा हूँ लेकिन कम्पलीट नहीं हुआ hai....Thoda गैप के कारण जैसा सोचा है वैसा लिख नहीं पा रहा hun...Exams के बाद कुछ दिनों का ब्रेक एक्सपेक्ट कर रहा था कॉलेज से लेकिन एग्जाम के अगले hi दिन से कॉलेज जाना पद रहा hai...Bas अभी फोकस नहीं कर पा रहा हूँ और खुद hi अपडेट से सटिस्फीएड नहीं हूँ.

बस ये अपडेट एक बार पोस्ट हो जाए उसके बाद रेगुलरली पोस्ट होता rahega....Weekly 2 उपदटेस.

जल्द hi ये अपडेट पोस्ट karunga...Bas थोड़ा और पेशेंस रखिये.
 
अपडेट 94

ज्यादा इंतजार तो नहीं कराया?

हँसते हुए सुमित ने पूछा.

मेघा:- अब्ब तो आदत सी हो गयी hai...Khair chhodo...Kaisa रहा मीटिंग?

सुमित:- बताने की जरुरत है?

मेघा:- आउटकम पता hai...Kya हुआ hoga...Agar कुछ इंटरेस्टिंग है तो बता सकते ho...Sunne की बहुत फुर्सत है फ़िलहाल.

सुमित:- इंटरेस्टिंग तो कुछ खास नहीं tha...Jo भी वजह था खुल कर कह diya...Sir भी सटिस्फीएड थे आंसर से.

मेघा:- अच्छा कॉफ़ी आर्डर karo....Bore हो गयी इंतजार करते हुए.

सुमित:- नहीं.

सवालिया नजरो से मेघा सुमित को देखती है.

सुमित:- तुम आर्डर karo...Aaj का दिन तुम्हारे naam...Aur पसंद भी tumhari....Jo चाहे आर्डर करो.

मेघा:- अचानक से.

सुमित:- आज तक खुद आर्डर करते करते बोर हो gaya....Socha तुम्हारा फ्लेवर भी चेक कर लेता हु.

फिर मेघा कॉफ़ी और नास्ता आर्डर कर लेती है.

मेघा:- अब्ब क्या सोच रहे हो?

बहुत देर से मेघा नोटिस कर रही थी की सुमित कुछ कहना चाहता है.

सुमित:- कुछ कहना था.

मेघा:- हाँ तो बिंदास bolo...Itna सोचने की क्या बात है?

सुमित:- पर समझ में नहीं आ रहा hai.....Pata नहीं तुम्हारा क्या जवाब होगा?

सुमित अपनी बात कहना तो चाहता था लेकिन एक झिझक था जो उसे बोलने नहीं दे रहा था.

मेघा:- मेरा क्या जवाब होगा ये मुझ पर छोड़ do....Tum क्या चाहते हो वो बोलो.

सुमित को अभी भी चुप देख कर.

मेघा:- या फिर शायद हो सकता है जो तुम बोलने जा रहे हो ये सुन कर मई ख़ुशी से झूम uthu...Shayad ये hi सुनने के लिए मेरे कान तरस रहे हो.

मेघा ने इस बार सुमित को छेड़ते हुए कहा तो अब्ब सुमित को भी हिम्मत mila...Apna जाना पहचाना अंदाज में वो बोलै.

सुमित:- Chalo...Kahi भाग chale...Iss दुनिया से dur...Sirf तुम और मई.

प्यार भरी आवाज में सुमित ने कहा तो ये बात मेघा के सर के ऊपर से चला gaya...Kaisa प्रोपोज़ था ये?

मेघा:- अरे यू सीरियस?

सुमित:- नहीं तो क्या तुम्हे मजाक लग रहा है.

सुमित की बातो से लग रहा था वो सच में सीरियस है.

मेघा:- तब तो ये पागलपन hai....Aur क्या मतलब है तुम्हारे बातों का?

सुमित:- जो तुमने सुना.

मेघा को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha....Jo बात वो सुमित की मुंह से सुन्ना चाहती थी वो सुमित ने बोल diya....Aur जो भी प्यार सुमित की आँखों में दिख रह था कुछ देर पहले वो अचानक से गायब हो गया.

सुमित:- चलो करते है ये पागलपन.

अब्ब तो मेघा को चक्कर आने लगा tha...Kuch समझ नहीं पा रही thi...Uski ये हालत देख सुमित अपने चेहरे का भाव बदल लेता है और मुस्कुराते हुए कहता है.

सुमित:- सच में ये 2 दिन का पागलपन जरुरी hai...Bahut अच्छा लगेगा तुम्हे.

2 din...Ye क्या ट्विस्ट है? एहि सवाल चल रहा था मेघा की दिमाग में.

सुमित:- एक प्लान बनाया है...2 दिन के लिए कही घूम कर फ्रेश होने ka....Bahut पढ़ लिया और बहुत ड्यूटी कर लिया.

सोचा तुम्हे भी साथ ले chalu...Maja आएगा.

सुमित की इस अंदाज पे मेघा को हंसी आ gaya...Kya सोच रही थी वो और क्या निकला सुमित की बात का matlab...Kahi न कही थोड़ा निराश भी thi...Jo सुन्ना चाहती थी उससे बिलकुल hi अलग था सुमित की बात.

सुमित:- बस यही झिझक था मन mein...Tum तैयार हो या नहीं? अगर तैयार हो भी गयी तो मेरे कारण से तुम्हारा 2 दिन लोस्स हो जाएगा.

मेघा:- तो ये था तुम्हारे बात का मतलब? मई तो कुछ और hi सोच रही थी?

सुमित:- क्या?

मेघा:- कही तुम्हे प्यार तो नहीं हो गया? जो ऐसे भागने की बात कर रहे हो?

सुमित:- प्यार और तुमसे?

छेड़ते हुए सुमित ने kaha....Lekin उसका हस्सी मेघा के घूरते hi बंद हो गया.

सुमित:- अब्ब इतनी हिम्मत kaha...Retirement ले लिया है आशिकी से.

मेघा:- ये खुद को सांत्वना दे रहे हो.

सुमित:- नहीं.

सुमित की इस बात पर उतना आत्मविश्वाश नहीं था.

मेघा:- खैर ये बात chhodo...Bas ये bataao....Tumhare साथ मई hi क्यों?

सुमित:- ये बात तुम भी जानती हो.

मेघा:- लेकिन तुम्हारी मुंह से सुन्ना चाहती हु.

सुमित:- बता दू?

मेघा:- शुभ मुहूर्त का इंतजार कर सकते हो.

मेघा की इस बात में छिड़ था.

सुमित:- चलो बता hi देता हु.

तुम वो हो जिसने टूटा हुआ सुमित को समेटा hai...Jindagi नाम की खेल से hi हार मान चूका सुमित को खेल का सही मतलब समझाया hai...Khushi में तो हर कोई साथ देता hai...Lekin तुम्हारा साथ सिर्फ दुःख में मिला है वो भी niswarth...Tum वो दोस्त हो मेरी जिसके साथ हर पल बिताना अपना खुश नसीब समझता hun...Aur भी बहुत कुछ है दिल में तुमसे कहने के liye...Jo शायद जुबान पर ला नहीं paaunga...Shayad भूल चूका हूँ.

कुछ लालसा है तुम्हारे साथ और वक्त बिताने ki...Kuch पल ख़ुशी में भी साथ बिताने की.

तुम मेरी वो हो जिसे शायद अंग्रेजी में "बेस्ट फ्रेंड" कहते है.

हर एक शब्द सुकून था मेघा के liye...Bahut देर से hi सही लेकिन आज सुमित की ये बातें, उसके दिल में अपना ये जगह मेघा को बहुत अच्छा मेषसुस करा रहा था.

सुमित:- हमेशा अपना ये जज़्बात जाहिर नहीं कर paaunga...Lekin एहि सच है.

मेघा:- वो तो तुम अभी भी जाहिर नहीं कर रहे ho...Lekin सब समझती हूँ. :डी

इस बा से सुमित को एकदम से झटका laga...Iss बात का कोई जवाब नहीं था सुमित के पास.

मेघा:- अच्छा तो कल सुबह मिलते है.

नेक्स्ट मॉर्निंग

आज भी आदत से मजबूर सुमित लेट हो पहुँचता hai...Lekin मेघा को शायद आज इंतजार करने में मजा आ रहा था.

सुमित के साथ 2 दिन तक घूमने की बात से hi वो काफी एक्ससिटेड हो गयी थी.

इस इंतजार का फल भी मीठा hi tha...Aaj सुमित का लुक देख मेघा का मुंह खुला का खुला रह गया.

होता भी क्यों nahi...Hamesha से उससे आकर्षक लगने वाला सुमित का लुक और पर्सनालिटी में चार चाँद लगा tha...Pehli बार उसने सुमित को क्लीन शवेद देखा tha...Jisse वो और भी आकर्षक लग रहा था.

मेघा:- तो इतना टाइम सजने सवारने में लगा था?

सुमित: बिलकुल.

मेघा:- काफी हैंडसम लग रहे हो!!

सुमित:- और तुम हमेशा की तरह ब्यूटीफुल.

मेघा सुमित की इस कॉम्प्लीमेंट पर सिर्फ मुस्कुराती है.

मेघा:- अचानक से इस बदलाव की वजह.

सुमित:- है कुछ.

मेघा:- बता सकते हो अगर इच्छा हो तो.

सुमित:- अगर सही वक्त आया तो जरूर बताऊंगा.

मेघा:- इस में भी suspense...Ummeed है वो वक्त जल्द हो आएगा.

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता.

वो नोटिस कर रहा था की मेघा की नजर बार बार उससे hi देख रहा था.

सुमित:- कुछ कहना चाहती हो?

मेघा:- नहीं

मेघा:- (इन हेर मंद) मई तो कुछ नहीं kahungi....Lekin तुम से बुलवा कर रहूंगी तुम्हारी दिल की baat....Abb हो hi जाए आर या पार.

तभी सुमित उससे वो कह देता है जो उससे सच में हैरान कर देता है.

सुमित:- इस टूर में बाइक तुम चलाओगी.

इतना कह कर सुमित बाइक की चाभी मेघा को देता है.

मेघा:- लेकिन.

सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Jyadatar मैंने hi डिसिशन लिया है हर टूर में.

इस बार डिसिशन तुम्हारा hai...Jaha ले जाना चाहती हो ले chalo...Ye टूर तुम्हारा hai...Mai बस साथ हूँ इस पल को जीने के लिए.

मेघा:- इंटरेस्टिंग. :)

ये कह कर मेघा बाइक स्टार्ट करती है और दोनों चल पड़ते है अपने जिंदगी के ख़ुशी कुछ पल साथ बिताने के लिए.
 
थैंक्स bhai...Man बहलाने के लिए तो कई तरीके hai...Lekin ऐसे वक्त में कोई तरीका काम नहीं aata....Ulta याद कर के और भी दर्द होता है.

शायद वक्त hi ठीक कर सकता है ऐसे mein...Lekin कुछ घाव वक्त भी नहीं भर sakta...Insan में बहुत बदलाव आ जाते hai...dekhte है सुमित में क्या बदलाव आएगा और प्यार को ले कर उसका फीलिंग अब्ब कैसा होगा.
 
अपडेट 95

बाइक थोड़ा आगे बढ़ा hi था की बाइक का बैलेंस बिगड़ने लगा.

सुमित भी बाइक से जम्प करने की कोशिश करने लगा लेकिन कर नहीं रहा था.

मेघा:- उतरो जल्दी.

डरते हुए आवाज में मेघा ने कहा.

सुमित:- नहीं nahi...Mujhe दर लग रहा है.

फिर थोड़ा और आगे जाके बाइक रुक जाता है.

बाइक से उतर कर.

मेघा:- बहुत डरपोक हो यार तुम.

इतना कह कर मेघा पीछे मुड़ती है और सुमित को हँसता देख चौंक जाती है.

मेघा:- पूरी म्हणत बर्बाद कर दिया.

सुमित:- ऐसे कैसे बर्बाद हो gaya...Darne की बहुत अच्छा एक्टिंग किया था. :lol1:

मेघा:- तुम्हे सच में दर नहीं लगा.

सुमित:- एक्टिंग करते वक्त :डी

मेघा:- लेकिन कोशिश तो बहुत अच्छा किया था बाइक के बैलेंस बिगाड़ने के लिए.

सुमित:- गलती तुम्हारी नहीं hai...Cricketke बाद बाइक hi ऐसा चीज है जिसे आज भी प्यार hai...Sirf इंसान का hi नहीं बाइक का भी एनाटोमी और फिजियोलॉजी पता है.

तुरंत पैट चल जाता है बाइक का बैलेंस बिगड़ा है या बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है :डी

सुमित की इस बात पर मेघा कुछ देर घूरती है फिर हसने लगती है.

मेघा:- तो फिर बाइक की पैथोलॉजी में फार्माकोलॉजी भी जानते honge...Ban जाओ बाइक के डॉक्टर. :हिंतहिंट:

सुमित:- बन चूका hun...Aur कई बार तो सर्जरी भी कर चूका hun...Bahut पैसे बचाये है :स्मार्त्य:

मेघा:- तुम से जीत नहीं सकती.

इतना कह कर मेघा हसने लगती है.

सुमित:- 2 दिन एन्जॉय करना hai...Pehle से hi फॉर्म में हूँ.

मेघा:- अच्छा ये बताओ सच में बाइक का बैलेंस बिगड़ जाता तो क्या करते?

सुमित:- जो कर सकता था वो karta...Pehle पीछे से hi बैलेंस बनाने की कोशिश और अगर नहीं कर पाया तो तुम्हारे साथ hi गिर जाता.

अब्ब साथ चल पड़े है तो साथ तो निभाना पड़ेगा न.

सुमित की इस बात पर मेघा सिर्फ उसको hi देखती है.

सुमित:- अब्ब इतना भी सेंटी होने की जरुरत नहीं hai...Bhale hi सर्जरी पढ़ रहा हूँ लेकिन ऑर्थोपेडिक्स आज भी अच्छे से आता hai...Aise लैंड करता जिससे फ्रैक्चर होता hi नहीं और हो भी जाता तो बिना ज्यादा कम्प्लीकेशन के अच्छे से ट्रीट हो जाता.

मेघा:- तुम से बातें करना hi बेकार है :डोह:

फिर दोनों निकल पड़ते है आगे की अनजान मंजिल की aur...Iss बार बैलेंस नहीं बिगड़ता.

और बाइक दूसरे सेहर में जा कर रुकता है.

सुमित:- यहाँ पर रुकने की वजह.

मेघा:- इस तोऊर के मास्टरमाइंड मई हूँ.

सुमित:- वो तो है.

मेघा:- फिर चलो जहा मई ले चलती हूँ बिना किसी सवाल जवाब के.

सुमित:- जो आज्ञा.

फिर दोनों एक सिनेमा हॉल की तरफ जाते है.

मूवी चल pada...Movie के दौरान मेघा की नजर कभी मूवी पर होता तो कभी सुमित par...Sumit का भी कुछ वैसा hi हाल था.

बिच बिच में सुमित की मुस्कान देख मेघा को लगा की सुमित को मूवी पसंद आ रहा है.

मूवी ख़त्म होने के बाद.

मेघा:- कैसा लगा?

सुमित:- अच्छा था.

मेघा:- बस अच्छा?

सुमित:- हाँ अच्छा hi था.

मेघा:- बस अच्छा hi?

सुमित:- अच्छा तुम क्या सुन्ना चाहती हो वो hi बोल देता हूँ.

मेघा:- तुम्हे जैसा लगा वैसा hi बताओ.

सुमित:- नहीं मूवी अच्छा hi था लेकिन एंडिंग ऐसा लगा जैसे कोई फैरयटाले टाइप मूवी है.

मेघा:- और ऐसा तुम्हे क्यों लगा?

सुमित:- ऐसा भी हैप्पी एंडिंग हो सकता hai...Real लाइफ में इम्पॉसिबल.

मेघा:- और तुम्हे क्यों लगा की ये रियल लाइफ में इम्पॉसिबल है?

सुमित:- क्युकी ऐसा मैंने होते कभी नहीं देखा.

मेघा:- लेकिन मैंने तो देखा है.

सुमित:- लेकिन मेरे साथ तो नहीं हुआ. :माध:

थोड़ा सा गुस्सा सुमित के चेहरे पर आ गया.

मेघा:- अब्ब ये मत कहना की अंगूर खट्टे होते है :lol1:

मेघा ने हँसते हुए kaha...Sumit बी कुछ देर बाद सातब देने के लिए मुस्कुराने लगा.

सुमित:- अभी भी विस्वाश नहीं hota...Agar रियल लाइफ में फिर कभी हुआ तो मुझे भी दिखाना.

मेघा:- दिखाना क्यों? खुद hi देख लो.

सुमित:- किसको?

मेघा:- खुद को hi.

सुमित:- क्या मतलब?

मेघा:- जिस लव स्टोरी को तुम फैरयटाले समझ रहे ho...Wo तुम्हारे साथ hi होने वाला है.

सुमित:- मई और फैरयटाले लव स्टोरी :lol1: Impossible...Mai तो अब्ब इन् चीजों से दूर भागता हूँ.

मेघा:- दुनिया गोल hai...Bhaagte हुए वही आ जाओगे.

सुमित भी इस जवाब पर चुप हो gaya...Megha की बात गलत तो नहीं लगा usse..Lekin क्या सच में ऐसा हो सकता hai...Bas यही सवाल उसके दिमाग में चलने लगा.

सुमित:- मई एक्सेप्शन हूँ.

बस इतना hi जवाब दे पाया सुमित.

मेघा:- हर इंसान को लगता है वो स्पेशल और एक्सेप्शनल है. :डी

मेघा की इस बात का भी जवाब नहीं था सुमित के पास.

सुमित:- बस मेरे लाइफ में फैरयटाले लवस्टोरी नहीं होगा.

मेघा:- (इन हेर मंद) लेकिन मेरी लाइफ में तो hoga...Aur बात एक hi है. :डी

मेघा:- (तो सुमित) जरूर hoga...Mein दावे के साथ कह सकती हूँ.

सुमित:- अच्छा मेरे लाइफ पर तुम इतना सूरे कैसे हो सकती हो?

मेघा:- क्यों की तुम से ज्यादा तुम्हे मई जानती hun...Ye बात तो तुम भी कहते हो.

मेघा की बात पर सुमित भी हँसता hai...Aaj मेघा की बातों का तोड़ सुमित के पास नहीं था.

सुमित:- हाँ लेकिन इस बार तुम गलत हो.

मेघा:- लगाओ शर्त.

मेघा की कॉन्फिडेंस पर अब्ब सुमित को हैरानी होने लगा.

सुमित:- Shart...Bataao क्या शर्त लगाओगी.

मेघा:- जिस दिन जीत जाउंगी उस दिन बताउंगी.

सुमित:- तुम्हारा कॉन्फिडेंस अच्छा लगा.

मेघा:- जिस दिन शर्त जीतूंगी उस दिन तुम्हे और अच्छा लगा.

सुमित भी चाहता था मेघा hi ये शर्त jeete...Apni ख़ुशी कौन नहीं chaahega...Lekin कही न कही विश्वास hi कमी था.

इस मामले में सुमित से और कुछ नहीं बोलै जाए रहा tha...Kuch देर ऐसे hi चलने के बाद.

सुमित:- तुम तो मेरव बारे में सब कुछ जानती ho....Mai hi कुछ नहीं जानता तुम्हारे बारे में.

मेघा:- कभी जान्ने की कोशिश भी की ?

ये बात मेघा की दिल से निकली जिसने सुमित को क्लीन बोल्ड कर दिया.

सुमित:- शायद मुलाकात hi ऐसे समय पर हुआ तब से अपने hi बारे में सोच रहा hun...Tumhe भी लग रहा होगा कितना खुदगर्ज़ हूँ मई.

मेघा:- अरे तुम तो सेंटी हो gaye...Mai तो बस ऐसे hi कह ताहि थी.

अगर सच में तुम्हे खुदगर्ज़ या गलत सोचती तो तुमसे बात करना तो दूर अपने आस भी आने नहीं देती.

इस जवाब से सुमित को थोड़ा राहत मिला.

सुमित:- अच्छा एक बात bataao...Jo बहुत दिनों से पूछना चाहता था.

पहली नजर में मई कैसा लगा था तुम्हे?

एनाटोमी का फर्स्ट क्लास जब सुमित ने प्रोफेसर के साथ सभी स्टूडेंट को हैरान कर दिया था और मेघा को ब्यूटी क्वीन कह कर परेशां किया था उसी दिन को याद कर के सुमित ने पूछा.

मेघा:- प्रिंस.

सुमित:- क्या?

मेघा:- प्रिंस मतलब राजकुमार.

सुमित:- सच में.

मेघा:- बिलकुल.

सुमित:- या तो सेंस ऑफ़ ह्यूमर वाला सोचना चाहिए या फ़ालतू के कॉमेडी करने वाला joker...Lekin प्रिंस कैसे.

मेघा:- लेकिन मैंने तो प्रिंस hi सोचा था.

मेघा ने सुमित के हालत के मजे लेते हुए कहा.

सुमित:- Prince...Kis एंगल से?

मेघा:- एंगल सही tha...Bilkul 360° सही.

सुमित:- अब्ब तो रेहम karo...Kuch समझ में नहीं आ रहा है.

मेघा:- चलो बता hi देती हूँ.

सुमित बहुत एक्ससिटेड लग रहा था.

मेघा:- क्या लगता है तुम्हे? वो कॉलेज के पहले दिन hi हमारी मुलाक़ात हुआ था?

अब्ब सुमित सच में चौंक गया.

सुमित:- मतलब तुमने भी मुझे नोटिस किया जब मई कीर्ति के साथ मंदिर आया था. [Update 31]

एक दो बार मेरा नजर तुम पर पड़ा था लेकिन तुम्हारा भी. :ीक:

हैरानी में सुमित ने कहा.

मेघा:- उससे भी पहले.

अब्ब तो सुमित का हाल बेहाल हो gaya...Usse पहले तो सुमित ने मेघा को कभी नहीं dekha...Lekin मेघा ने कैसे?

सुमित के एक्सप्रेशन देख.

मेघा:- क्यों हिला डाला न? (रजिनिकंठ स्टाइल)

सुमित:- कब से?

मेघा बस मुस्कुरा रही थी.

सुमित:- बताओ भी?

सुमित से रहा नहीं जा रहा था.

मेघा:- Bataungi...Lekin सही वक्त आने पर.

सुमित की मजा लेते हुए मेघा ने कहा.

सुमित:- नहीं अभी.

मेघा:- वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता.

हँसते हुए मेघा ने कहा लेकिन सुमित से बिलकुल भी सब्र नहीं हो रहा था.

सुमित:- अब्ब रहा नहीं जा रहा है.

मेघा:- ये क्या तुम्हारा फवौरीते मूवी गेंरे तो सस्पेंस थ्रिलर tha...Lekin लग तो नहीं रहा है.

सुमित का शक्ल देख कर लग रहा था अब्ब. वो कभी भी रू देगा.

सुमित:- कैसे मेरा मजा लेना है अच्छे से जानती हो तुम :(

चलो कोई बात nahi....Intejaar कर lunga...Dekhte है क्या थ्रिलक है इसमें.

मेघा:- बस मूवी को रियलिटी में बदल रही hun...Mera फवौरीते फैरयटाले स्टोरी तो सच होगा hi और देखना तुम्हारा फवौरीते गेंरे को भी रवैल लाइफ में फील करा दूंगी.

सुमित:- क्या सच में इतना थ्रिलिंग है?

मेघा:- तुम्हारे सोच से भी कही aage...Bas इंतजार karo...Intejaar का ये फल बहुत hi मीठा है.

सुमित:- इंतजार रहेगा.

एक्ससिटेमेंट से भरी आवाज में सुमित ने कहा.

कुछ दूर आगे चलने के बाद.

मेघा:- इस टूर का मास्टरमाइंड मई हूँ तो ऐसे थ्रिल तुम्हे टूर भर मिलते रहेंगे.

सुमित के उम्मीद से भी ज्यादा मजेदार टूर nikla...Abb उसका एक्ससिटेमेंट बढ़ता hi जा रहा था मेघा आगे क्या क्या बम फोड़ेगी.

सुमित:- और थोड़ा मुझ बेचारे पर रेहम भी करना. :प्रे:

मेघा:- बिलजुल नहीं. :ेविलौगह:
 
सॉरी फ्रेंड्स फॉर थिस delay...Iss बार का डिले बिजी होने की वजह से नहीं hai...Sach कहु तो क्या लिखना है वही समझ में नहीं आ रहा है आने वाले 3-4 उपदटेस के liye...Uske बाद कांसेप्ट क्लियर hai...Kab कहा क्या लिखना है कैसे लिखना है सब क्लियर hai...Bas आने वाले 3-4 उपदटेस लिखना थोड़ा मुश्किल हो रहा है पिछले 3-4 उपदटेस में डिले का वजह भी यही tha...Ye ट्रांज़िशनल जोन थोड़ा में थोड़ा परेशानी हो रहा hai...Bahut से आइडियाज रिजेक्ट कर चूका हूँ.

खैर तैयार रहिये आने वाले तुरंस एंड ट्विस्टा के लिए...3-4 अपडेट के बाद माइनर टर्न मिलेगा उसके कुछ अपडेट के बाद मेजर turn...Aur स्टोरी में वो पढ़ने के लिए मिलेगा जो अभी तक ढंग से नहीं आया है...रोमांस. हाईलाइट ऑफ़ थे story...Jis चीज को लिखने के लिए ये सब सेटअप किया है.

और रही बात नेक्स्ट अपडेट के लिए तो उसके लिए आईडिया मिल चूका hai...Kal या परसो तक.

स्टे तुनेड.
 
अपडेट 96

अब्ब कहा जा रहे है हम?

आवाज में थोड़ा घबराहट ला कर सुमित ने pucha...Thoda बहुत अंदाजा तो पहले hi हो चूका था.

मेघा:- चलो.

सुमित:- लेकिन क्यों?

मेघा:- टूर का आर्गेनाइजर मई hun...Mere हिसाब से चलो.

इतना कह कर मेघा आगे बढ़ जाती है.

सुमित:- लग गया :(

सुमित भी पीछे चल पड़ता है.

ये एक शॉपिंग मॉल tha...Sumit की होने वाली हालत सोच कर मेघा हांसे जा रही थी.

सुमित:- तुम शॉपिंग karo...Mai अभी आता हूँ.

मेघा:- कोई बहाना नहीं चलेगा बच्चू.

सुमित का हाथ पकड़ कर मेघा खींचती है.

सुमित:- आ रहा hun...Bas 2 मिनट में.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- अभी अभी बाहर फार्मेसी dikha...Benzodiazipines (स्लीपिंग पिल्स) की टेबलेट लेना hai...Fir भूल जाऊँगा.

मेघा:- अच्छा hai...Shoping के बाद थक जाओगे तो स्लीपिंग पिल की जरुरत तो पड़ेगी hi.

इतना कह कर मेघा सुमित का हाथ छोड़ देती है.

जब सुमित वापस आया.

मेघा:- 2 मिनट बोल कर गए thhe...Aur 1 मिनट 50 सेकंड में hi वापस आ gaye...Waah...Punctuality सिख गए आखिरकार.

सुमित:- जिंदगी के 2 महत्वपूर्ण दिन तुम्हे दे रहा hun...Iss में देरी की कोई गुंजाइश hi नहीं.

मेघा:- अच्छा तो ये 2 दिन के साथ ये 2 तबकेट भी do...Tab मानूंगी.

इतना कह कर मेघा सुमित के हाथ से टेबलेट छीन लेती है.

लेकिन इससे सुमित पर फर्क नहीं pada...Pocket की तरफ हाथ बढ़ाया hi था की...

मेघा:- ये तो चीटिंग है.

मेघा फिर से सुमित पर झपट पड़ती उससे पहले hi...Sumit जल्दी से पैकेट फाड़ के टेबलेट जैसा कुछ अपने मुंह में रख कर खली पैकेट मेघा को थमा देता है.

मेघा:- ये तो च्युइंग गम है. :ीक:

सुमित:- अब्ब यहाँ तुम्हारा शॉपिंग एन्जॉय करने के लिए पॉपकॉर्न तो मिलेगा nahi...Bas च्युइंग गम का hi सहारा है.

मेघा:- और ये दवाई?

सुमित:- संभालके rakhna...Tour ख़त्म होने के बाद लूंगा.

मेघा:- लेकिन ख़रीदा क्यों?

सुमित:- सुनील (रूममेट) का बर्थडे hai...Uski रातों के नींद उड़द गया hai...Birthday गिफ्ट देना है. :lol1:

मेघा:- अच्छा है मेरा बर्थडे याद nahi...Warna क्या पता क्या उटपटांग गिफ्ट मिलता.

सुमित:- तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की मई तुम्हे बर्थडे गिफ्ट दूना. :हम्म:

मेघा के घूरते hi.

सुमित:- ओह्ह sorry...Mujhe तुम्हारा बर्थडे भी याद है.

मेघा:- अच्छा गेस करो.

सुमित:- अप्रैल 1...दिन और पर्सनालिटी मैच करता है.

अब्ब मेघा सुमित की तरफ बढ़ती hi है की सुमित फुर्ती से एस्कलेटर पर छड़ जाता है.

सुमित:- 4तह फ्लोर.

मेघा:- मुझे एस्कलेटर से दर लगता है.

सुमित:- सिद्धि से आ जाओ.

फिर सुमित दूसरी तरफ मुद जाता है.

मेघा:- थक गयी.

सुमित:- जिंदगी की इस सफर में इतनी जल्दी थक गयी.

अब्ब मेघा छिड़ गयी.

मेघा:- एक तो इतना दौड़ा रहे हो ऊपर से मेरा hi मजाक बना रहे हो.

सुमित अभी हांसे जा रहा था.

मेघा:- तुम्हारा ये हंसी गायब नहीं कर दिया तो मेरा नाम बदल dena...Abb बताती हूँ थकान क्या होती है जब तुम्हे अपने पीछे पीछे दौड़ा कर तुम्हारी हालत ख़राब कर दूंगी.

सुमित:- जो आज्ञा हुजूर.

मेघा:- मजाक लग रहा है tumhe...Abb तो तुम्हारा हालत खराब काके hi rahungi...Warna सच में नाम बदल देना.

सुमित:- सोच लो.

मेघा:- सोच लिया.

फिर मेघा अपने शॉपिंग पर लग जाती hai...Wo कुछ सेलेक्ट करती और सुमित को dikhaati...Sumit भी अपना बिचार खुल कर मेघा को बताता.

1 घंटा....2 घंटा...3 घंटा.

इतनी देर में न जाने कितनी दुकानों की चक्कर लगा दी मेघा ne...Sumit को थकाने की चक्कर में खुद थक gayi...Lekin सुमित अभी भी जोश में खड़ा tha...Thakaan की लकीर उसके चेहरे में दूर दूर तक नहीं था.

मेघा:- अच्छा मई हार gayi...Itna कह कर मेघा अपना ड्रेस फाइनल कर लेती है.

सुमित:- तुम्हारी जिद्द से ज्यादा तो ये च्युइंग गम टिका.

च्युइंग गम को डस्टबिन में फेंकते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- तो फिर फेंका क्यों?

सुमित:- मुंह दुखने लग गया tha...Accha अब्ब अपना नामकरण के लिए तैयार रहो.

मेघा ने तभी जोश जोश में कह तो दिया था लेकिन अब्ब कुछ बोल नहीं पा रही थी.

मेघा:- हाँ तो क्या सोचा नाम?

थोड़ा डर्टी हुई मेघा ने पूछा.

सुमित:- वक्त आने पर बताऊंगा.

मेघा:- ये क्या बात हुई?

सुमित:- वक्त आने पर बताने की अधिकार सिर्फ तुम्हारे पास है क्या? मुझे पहली बार कब देखा था ये भी नहीं बता रही हो?

मेघा:- वो तो वक्त आने पर hi बताउंगी. :डी

सुमित:- मई भी वक्त आने पर बताऊंगा.

फिर सुमित अपना हाथ मेघा की और आगे बढ़ाता है.

मेघा:- ये क्या है?

सुमित:- तुम्हारा गिफ्ट.

ये देख मेघा बहुत खुश हो जाती hai...Thodi देर के लिए तो मेघा की नजर ड्रेस से हैट hi नहीं रहा tha...Fir प्यार भरी नजरो से सुमित को देखती hai...Aur जैसे hi परिसताग पर नजर जा रहा tha...Sumit उसको निकाल कर फेंक देता है.

मेघा:- बहुत मेहेंगी लग रही है.

सुमित:- तुम्हे इससे क्या मतलब?

मेघा:- Nahi...Lekin...

सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Mujhe पसंद आ gaya...To कीमत की कोई फ़िक्र नहीं है.

फिर मेघा वही ड्रेस चेंज कर के आती है.

सुमित तो बस देखता hi रह गया...2 मिनट बाद मेघा सुमित के पास आती है.

मेघा:- कैसी लग रही हूँ?

सुमित:- बहुत खूबसूरत :)

मेघा:- सिर्फ खूबसूरत :बीए:

सुमित:- खूबसूरत लग रही हो तो खूबसूरत hi कहूंगा na...Abb चिढ़ाने के लिए बदसूरत थोड़ी न कहूंगा.

मेघा:- मेरा मतलब सिर्फ इतना hi तारीफ़.

सुमित:- कभी कभी तारीफ़ के लिए शब्द काम पद जाते hai...Tum सिर्फ भावना को समझो.

मेघा:- वही तो समझ रही हूँ.

इतना कह कर मेघा मुस्कुराती है.

दोनों अब्ब मॉल से निकल जाते hai...Abb शाम का वक्त हो चूका था.

मेघा:- मुझे तो विश्वास hi नहीं हो रहा है 3 घंटे की शॉपिंग मई भी बोर नहीं हुए tum...Pehle तो 1 घंटे मई hi हालत खराब हो जाती थी.

सुमित:- अब्ब सिख लिया hai...Kisi चीज में फोकस कैसे करना hai...Mera ये 2 दिन का फोकस सिर्फ इस टूर और तुम पर hai...Issi लिए मोबाइल भी ये साथ में लाया हूँ.

सुमित ने फिर एक कीपैड मोबाइल दिखाया.

मेघा:- अच्छा कैसे सिख लिया ऐसे फोकस karna...Mujhe तो लगता था तुम अपने मर्जी के मालिक हो.

सुमित:- वो तो अभी भी hun...Lekin जिस चीज में जरुरी है उस चीज के लिए.

और ये फोकस सीखा सर्जरी रेजीडेंसी में आ kar...Ek बार व्हिप्पले प्रोसीजर (काम्प्लेक्स सर्जिकल प्रोसीजर फॉर पैंक्रियास कैंसर) में असिस्ट कर रहा tha...Surgery ख़त्म होने में 5 घंटा लग gaya...Focus बिलकुल भी हटा नहीं सकता tha...Aur उसके बाद तो जितने भी सर्जरी में असिस्ट किया है लगभग सभी 2-3 घंटे के होते है.

और अब्ब तो जब भी मौका मिले दिन में वक्त निकाल कर योग कर लेता hun...Concentration बहुत अच्छा रहता है.

मेघा:- ये तो बहुत अच्छी बात है.

सुमित:- हाँ और जरुरी भी.

मेघा:- में जब तुम्हे इंतजार करवा रही थी तो मजा तो बहुत आ रहा था लेकिन ये भी लग रहा था की तुम बदला जरूर लोगे :डी

सुमित:- वो तो लूंगा.

मेघा:- क्या?

सुमित:- डरो mat...Abhi तक दो hi चीज सोचा है...1) टेस्ट मैच खेलूंगा और तुम्हे दिन भर चीयर करने के लिए रखूँगा. 2) सर्जरी करते वक्त तुम्हे मुझे असिस्ट करने के लिए रखूँगा.

मेघा:- Surgery...Bilkul नहीं करुँगी.

सुमित:- करने के लिए कौन बोल रहा hai...Assist करना है तुम्हे.

मेघा:- नहीं मुझे दर लगता है ब्लीडिंग देख कर.

सुमित:- बहुत डरपोक हो.

मेघा:- मेरे लिए तो मेडिसिन hi ठीक hai...Acche से डायग्नोसिस कर के अच्छा सा ट्रीटमेंट दो.

सुमित:- तो फिर क्रिकेट के बारे में क्या ख्याल है.

मेघा:- उसके लिए तो मई भी एक्ससिटेड हूँ.

सुमित:- चल झूठी.

मेघा:- सच्ची.

सुमित:- 10 क्रिकेटर के नाम बताओ तो मानूंगा.

मेघा:- सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित.

सुमित:- हंसी भी नहीं आया इस जोके par...Naa hi क्रिकेट कभी देखती हो और ना hi किसी प्लेयर का नाम पता hai....Aur कहती हो क्रिकेट के लिए एक्ससिटेड हो.

मेघा:- मैंने सिर्फ तुम्हे क्रिकेट खेलते देखा hai...Aur तुम्हारी बहुत बड़ी फैन hun...Bas ऑटोग्राफ नहीं लिया है. :डी

फिर मेघा सुमित की सभी इन्निंग्स, रन, बौंडरीएस गिनाने लगती hai...Kaise कैसे शॉट मारा था सुमित ने, उसका सेलिब्रेशन और हर एक पल को मेघा ने कैसे एन्जॉय किया ये सब बताने लगती है.

सुमित की हैरानी की कोई सीमा नहीं tha...Itna तो उससे खुद पता नहीं था.

मेघा:- क्यों उड़द गया होश? या फिर और गिनाऊ.

सुमित:- और ginaao...Apna तारीफ़ भले किसे पसंद नहीं.

फिर मेघा सुमित के आउट होने के तरीके को बिस्तर में बताने लगती hai...Kuch मिसफ़िएल्दिंग्स और भी बहुत कुछ.

सुमित:- बस bas...Abb रुलाओगी क्या? :(

मेघा फिर सुमित के क्रिकेट के कुछ ज्यादा hi ख़ास पल को याद करने लगती है जो सुमित को नहीं बताती.

सुमित:- अब्ब रात हो गयी hai...Koi अच्छा सा होटल ढूंढ़ना पड़ेगा.

मेघा:- नहीं होटल नहीं.

सुमित:- अच्छा अगर कोई रिश्तेदार है यहाँ तो bataao...Chale jaayenge...Mere तो नहीं है.

मेघा:- आज इस सेहर में hi नहीं रहेंगे.

सुमित:- फिर?

मेघा:- टूर का आर्गेनाइजर मई hun....Bas तुम खाना पैक कर के लाओ.

सुमित के वापस आने के बाद दोनों चल पड़ते है एक अनजान मंजिल को aur....Sumit के लिए तो और भी अनजान.

बाइक मेघा चलाती है इस बार भी...30 मिनट के बाद दोनों सेहर से कुछ दूर एक सुनसान जगह पर एक बड़ा सा ग्राउंड पर रुकते है.

मेघा:- आ गया मंजिल.

सुमित:- क्या? यहाँ पर?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- रात को सोना भी पड़ता है.

मेघा:- इतना बड़ा बीएड है तो.

मेघा पूरा ग्राउंड की और इशारा कर के कहती है.

मेघा:- हमेशा से एक ख्वाहिश thi...Khule आसमान के निचे सोने ki...Isse अच्छी जगह कहा milegi...Aur तुम साथ हो तो कोई दर भी नहीं.

सुमित:- इतना विश्वाश भी सही hai...Kabhi कभी रक्षक hi भक्षक बन जाते है.

मेघा:- रक्षक तो तुम ho...Koi भक्षक आये तो बचा लेना. :डी

सुमित:- अब्ब भक्षक यहाँ कहा मिलेगा?

मेघा:- जंगली कुत्ते, यहाँ तक तो भेड़िये से भी बचा loge...Agar शेर आया तो कह नहीं सकते.

सुमित:- तुम्हारे लिए तो शेर से भी लड़ jaaunga...Bahutmovies देखा है और जानता हूँ शेर को कैसे हवा में उड़ाना है.

मेघा सुमित की बात पर हसने लगती है.

मेघा:- मूवीज की लव स्टोरी फिक्शन और शेर के साथ एक्शन रियल.

सुमित:- सच कहु तो दोनों ऊंरेअलिस्टिक. :डी

कुछ देर के लिए दोनों के बिच खामोशी छा जाती hai...Filhaal तो रात बाकी है और बात बाकी है.
 
अपडेट 97

कुछ देर दोनों ग्राउंड पर बैठे hi थे की,

सुमित को लगता है मेघा बार बार उससे देख रही है.

सुमित:- इतना हैंडसम भी नहीं हूँ.

मेघा:- कोयल चाहे कैसा भी ho...Usse देखते रहने की भी अलग hi मजा है.

सुमित:- क्या? मई तुम्हे कोयल लग रहा हूँ?

मेघा:- अच्छा sorry...Kauwa को देखने की भी अलग hi मजा है.

सुमित:- धत्त :डोह: मई तो खुश हो रहा था की तुम्हे मेरी मधुर आवाज पसंद है. :(

मेघा:- आवाज तो कौवा जैसी hi hai...Lekin बातें बहुत प्यारी होती है तुम्हारी. :lol1:

सुमित:- प्यार से रिटायरमेंट के चूका हूँ.

मेघा:- शेर बुद्धा होने पर शिकार करना भूल जाता है क्या?

सुमित को इस बात का जवाब देते नहीं बन रहा tha...Lekin कुछ बोलने के लिए..

सुमित:- बुद्धा नहीं हुआ हूँ.

मेघा:- मतलब शिकार करना भी नहीं भूले.

कुछ देर के लिए सुमित चुप रहता है.

सुमित:- कोई अच्छा सा शिकार भी तो मिलना chahiye...Hai hi नहीं कोई मेरे लायक.

इस बार सुमित की आवाज में थोड़ा फ़्रस्ट्रेशन था.

मेघा:- 4, 5 असफल शिकार के बाद भी कह रहे हो शिकार तुम्हारे लायक की नहीं है.

इतना कह कर मेघा हसने लगती है लेकिन सुमित का उदास चेहरा देख एकदम से चुप हो जाती है.

जल्द hi वो सुमित के पास जा कर उसके कंधे में हाथ रख कर कहती है.

मेघा:- सॉरी.

मेघा का हाथ हटा कर.

सुमित:- कोई बात नहीं.

मेघा:- कीर्ति की याद आ रही है?

सुमित मेघा की आँखों में देखता hai...Sumit की आँखों में थोड़ा आंसू भर चूका था.

सुमित:- नहीं.

मेघा:- झूठ बोल रहे हो ना.

सुमित:- मेरी आँखों में देख कर kaho...Kya में झूठ बोल रहा हूँ.

जब मेघा सुमित की आँखों में देखती है तो एक बार फिर से दर जाती hai...Jis सुमित के बारे में सोच रही थी की वो अब्ब संभल चूका है वो आज भी पुरानी बातों को ले कर ाआंसु बहाये जा रहा था.

मेघा:- आँखें तो कह रही है तुम बहुत परेशान हो.

सुमित:- परेशान hi तो hun...Iss प्यार के चक्कर में 8-9 साल बर्बाद कर दिया.

जानता था कीर्ति मुझसे प्यार नहीं karti...Lekin विश्वाश था खुद पर की उससे मना lunga...Jarurat से ज्यादा विश्वाश.

प्यार करने की बहुत सा छड़ गया था सर mein...Umar भी ऐसा था की लगता था दुनिया मेरे कदम पर hai...Agar कीर्ति मेरी किस्मत में नहीं तो उस किस्मत को भी बदल देने की ताकत है मुझ में.

शुरुवात में तो ये प्यार था जूनून था लेकिन धीरे धीरे ये बस एक उम्मीद hi बन कर रह gaya...Kaash कीर्ति मुझे मिल जाए.

कीर्ति से मिलने से पहले किसी चीज में हारा नहीं tha...Bachpan से hi कुछ ऐसे तैयार किया था खुद को की अगर किसी चीज में पीछे रह जाओ जो मुझे पसंद है तो उस में अपनी म्हणत, लहन और जूनून से आगे आ hi jaata...Kirti से मिलने के बाद भी किसी चीज में नहीं हारा प्यार के अलावा.

जब आउट ऑफ़ ट्रैक था पढ़ाई mein...Apna सारा जोर लगा कर फुल स्कालरशिप ले कर hi छोड़ा मब्ब्स और मस में bhi...Padhai तो हमेशा से ताकत raha...Jo पढ़ने वाले अच्छे स्टूडेंट्स होते है वो जितना मार्क्स लाते थे 2 महीने पहले से पढ़ना सुरु कर ke...Wo मई सिर्फ 2 दिन में ज्यादा ले आता था.

पढ़ाई hi नहीं क्रिकेट और टेबल tennis...Bade मैचेस कभी हारा hi nahi...Bas उतना इंटरेस्ट नहीं था की इस में करियर banaau...Ye भी छोडो आर्ट्स को hi ले lo...Drawing और जाय में आज भी जान बस्ती है meri....Koi भी काम हो जो पसंद आ जाए उस में कभी पीछे नहीं rahunga...Ye मेरा विश्वाश है.

बस प्यार में हार gaya....Iss में अपना म्हणत और जूनून hi सब कुछ नहीं होता सामने वाले की हां की जरुरत होता hai...Ye बातें तो पता था लेकिन जरुरत से ज्यादा विश्वाश था की कीर्ति को मना hi लूंगा.

इतना कह कर सुमित मेघा को देखता hai...Saamne रखा पानी की बोतल से 2 घूंट पानी पीने के बाद.

सुमित:- कीर्ति मेरी यादों में अब्ब nahi...Usse तो कुछ महीनो के बाद hi भुला दिया tha...Kaha है, कैसी है वो भी पता करने की कोशिश नहीं kiya...Abb ये उसकी जिंदगी hai...Ummeed है वो जहा भी है खुश है.

बस पस्चाताप इस बात की है की इस प्यार के चक्कर में 8-9 साल बर्बाद कर diya...Tabhi इस चीज से दूर हो जाना चाहिए था जब ये बात समझ आ चूका tha...Aaj बहुत अच्छा कर रहा होता किसी भी फील्ड में जिस में लगा hota...Apne जवानी के 8-9 साल बर्बाद हो गए फ़ालतू mein...Lekin नहीं प्यार करने का अलग hi बहुत सवार था.

आज जिंदगी के उस मदद में हूँ जहा से पीछे देखता हूँ तो सिर्फ अपनी hi गलती और बेवकूफी दीखता है.

वो तो अच्छा हुआ की माँ, पापा, तुम और आशीष साथ थे की संभल गया वर्ण न जाने और कितनी गलतियां कर बैठता.

अब्ब सुमित चुप हो gaya...Kuch देर बाद मेघा बोली.

मेघा:- कोई बात nahi...Der आये दुरुस्त aaye...Abhi भी सुरुवात हो सकती है.

सुमित:- बुरा तो लगता hi hai...Sab कुछ आँखों के सामने था और मेरे बस में tha...Fir भी गलती करता hi गया.

मेघा:- तो फिर क्या ये बातें याद करते रहने से सब कुछ ठीक हो जाएगा?

सुमित:- बिलकुल nahi....Iss बात से आगे निकल चूका hun...Bas कभी कभी ये yaadein.....Yaadon पर किसका जोर चलता है.

मेघा:- बस अब्ब ये यादों से एक सीख lo...Baaki सब तो कवर उप कर hi सकते हो.

सुमित इस बात पर सिर्फ मुस्कुराता है.

मेघा:- याद है तुम्हे तुम्हारा hi एक क्रिकेट match...Pehle 20 बॉल्स में 2 runs...Aur फाइनल रिजल्ट 61 बॉल्स 107 रन्स नॉट out...Waha एक फुल टॉस टर्निंग पॉइंट था और यहाँ पर तुम्हे अपना रेअलिज़तिओन टर्निंग पॉइंट नहीं लगता?

सुमित:- वो क्रिकेट था यहाँ पर लाइफ.

मेघा:- कितना नेगेटिव सोचते हो? इतना पेसिमिस्टिक तो कभी नहीं थे तुम.

सुमित:- अभी भी नहीं hun...Bas कॉन्फिडेंस नहीं raha...Abb तो दर लगता है की किसी से प्यार हो जाए या फिर शादी करूँगा तो क्या उससे वो खुशियां दे पाऊंगा.

मेघा:- बहुत ज्यादा सोच रहे ho...Jaise कीर्ति की यादों से वक्त के साथ निकल gaye...Yaha भी वक्त के साथ सब ठीक हो jaaye...Dekhna मंजिल की तरफ कोई राष्ट मिल hi जाएगा.

सुमित:- होप सो.

कुछ देर की खामोशी के बाद.

सुमित:- Sorry...Ye टूर मूड फ्रेश करने के लिए आये thhe....Lekin मैंने अपनी बातों से मूड ऑफ hi कर दिया.

मेघा:- नहीं जरुरी tha...Apne अंदर तूफ़ान के बावजूद ख़ुशी का दिखावा करके एन्जॉय कर सकते हो?

सुमित:- नहीं इतना भी बड़ा तूफ़ान nahi...Kuch गलतियां है जो कभी कभी याद आ जाते है.

अब्ब दोनों कुछ नहीं bolte...Sumit वही जमीन पर लेत जाता है और थोड़ी दूर में मेघा.

फिर मेघा सुमित के पास आती है.

मेघा:- वैसे तुम सच में हैंडसम लग रहे हो.

सुमित:- पता है. :डी

मेघा:- फेयर एंड लवली या फेयर एंड हैंडसम किसका कमाल है? :हम्म:

सुमित:- दूर hi रहता हूँ ऐसे मेकअप se...Bahut पहले जेल भी लगाना छोड़ diya...Khair अब्ब तो बाल भी छोटे hi है.

मेघा:- झूठे.

सुमित:- सच mein...Natural लुक की बात hi कुछ और है.

मेघा:- ये तुम कह रहे हो?

सुमित:- और नहीं तो क्या? कभी कभी जल्दबाज़ी में सुबह बिना मुंह धोये hi आ जाता tha....Tumhe कभी पता चला?

मेघा:- छी :युक:

सुमित:- :lol1:

कुछ देर मेघा सुमित को देखती है.

सुमित:- आज धोया hai...Infact नहा कर आया हूँ. :डी

कुछ देर बाद मेघा सुमित की क्लीन शवेद दाढ़ी पर हाथ फिराती है और फिर उसके बाल पर.

मेघा:- क्लीन शवेद लुक hi बेस्ट है तुम्हारे लिए.

सुमित:- पता है.

मेघा:- फिर पिछले 8-9 साल से ये जंगल क्यों उगा के रखा था?

सुमित:- कभी काटने की जरुरत hi नहीं पड़ी.

मेघा:- और बाल थोड़ा बड़ा रखा karo...Suit करेगा तुम पर.

सुमित:- ये नहीं कर सकता.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- अगर कर दिया तो सभी लड़कियां मुझ पर फ़िदा हो जाएंगी.

मेघा:- अब्ब कुछ ज्यादा hi बोल रहे हो.

सुमित:- तुम नहीं jaanti...Ek वक्त था जब बड़े बालों के साथ आशिक़ों जैसे स्टाइल में घुमा करता tha....Ladkiyan hi मुझसे दोस्ती करने के लिए आगे पीछे घूमती thi...Lekin 2,4 के अलावा किसी को भी भाव नहीं देता था.

कीर्ति से hi पूछ लेना अगर कभी मिल जाए तो.

मेघा:- पता है.

सुमित:- क्या पता है?

मेघा:- वही तुम्हारा लम्बे बालो वाला लुक.

सुमित:- :ीक: ये भी पता है? आखिर तुम मुझे कब से जानती हो?

मेघा:- शायद पिछले 7 जन्मो से. :डी

इस बात पर भी सुमित कोई जवाब नहीं दे पाया.

मेघा:- मुंह बंद कर lo...Raat की वक्त hai...Koi मच्चर आ गया तो फ्री का प्रोटीन मिल जायेगा.

इतना कह कर मेघा सुमित को अपनी मोबाइल देती है.

मोबाइल देख कर तो सुमित और भी हैरान रह जाता है.

करीब 10 साल वाला photo...Lambe बालो पर हाथ फिराता सुमित सच में हैंडसम लग रहा था.

सुमित:- ये कब और कहा की फोटो है? कुछ याद नहीं आ रहा. :हम्म:

मेघा:- अच्छे से dekho...Shayad याद आ जाएगा.

सुमित फिर गौर से फोटो को देखता hai...Background में भगवान् शिव की मंदिर देख सुमित को याद आ जाता है.

सुमित:- ये तो कीर्ति के साथ मंदिर गया था उस वक्त की फोटो है.

मेघा:- हाँ और उसी वक्त मैंने फोटो खिंच लिया.

सुमित:- क्यों?

मेघा:- जासूसी करने आये थी.

सुमित:- बताओ न.

मेघा:- पहले भी कह चुकी हूँ वक्त आने पर सब कुछ बताउंगी.

सुमित:- लेकिन वो वक्त कब आएगा?

मेघा:- तुम पर देपेंद करता है.

सुमित:- क्या मतलब?

मेघा:- ये भी वक्त आने पर पता चलेगा. :lol1:

सुमित की इस हालत पर मेघा को बहुत हंसी आ रही थी.

कुछ देर दोनों ऐसे hi बातें करते hai...Fir.

मेघा:- (इन हेर मंद) सोचा था इस टूर में सुमित से उसकी दिल की बात बुलवा कर rahungi...Lekin जैसे वो टूटा है और जैसी बातें कर रहा है थोड़ा टाइम और lagega...Koi बात नहीं.

सुमित:- (इन हिज मंद) मेघा को बता तो दिया अपनी दिल की बात लेकिन खुल कर कह नहीं paaya...Shayad hi और खुल कर बता पाउ.

सच में उस घटना ने इतना तोड़ कर रख दिया की अब्ब खुद पर भरोगः नहीं की मई किसी के लायक हूँ. :(...अब्ब तो प्यार की हर एक कदम पर दर लगता है. :(

रात थोड़ा गहरा हो चूका tha...Sumit की नजर जब मेघा पर पड़ा तो उसने देखा मेघा को थोड़ा ठण्ड लग रहा hai...Apna जैकेट उतार कर.

सुमित:- ये लो?

मेघा:- लेकिन तुम?

सुमित:- आदत हो गयी hai...Kirti की वक्त से hi रातों की तन्हाई और ठण्ड से दोस्ती कर लिया है.

न जाने कितनी रात उसकी यादों में ठण्ड की रातें छत में उसकी यादों में गुजार दिया था. :डी
 
अपडेट 98

अब्ब कहा जा रहे है हम?

एक बार फिर सुमित का वही सवाल और मेघा की भी वही जवाब.

मेघा:- टूर की आर्गेनाइजर मई हूँ.

सुमित भी अब्ब बिन कुछ बोले साथ चलने लगा.

कुछ देर और चलने के बाद,

मेघा:- सामने dekho...Manjil का एक झलक.

सुमित:- सामने का नजारा देखने के लिए टेलिस्कोप चाहिए.

करीब 750 मीटर्स दूर शहर के कुछ घर hi दिख रहे थे.

मेघा:- झलक बोलै hai...Wo भी नहीं दिख रहा है तो चस्मा की जरुरत है तुम्हे.

सुमित:- बाइक से hi चले आते...2 कम से चलते आ रहे है.

मेघा:- क्यों इतनी जल्दी थक गए? क्या एथलिट बनोगे तुम? :हिंतहिंट:

सुमित:- हाँ अगर दिन भर चलते रहे तो जरूर थक जाऊँगा.

मेघा:- इसकी जरुरत नहीं पड़ेगी. 2 घंटे में हम वापस जा रहे है.

सुमित:- क्या? :ीक:

हैरानी में सुमित से आगे बोल hi नहीं पाया.

मेघा:- सच कह रही हूँ.

सुमित:- Nahi...Abhi तो मजा आने लगा है.

मेघा:- लेकिन टूर की आर्गेनाइजर मई हूँ. :डी

सुमित अब्ब कुछ बोल नहीं paaya...Lekin उसका चेहरा लटक जरूर गया.

मेघा:- ऐसे खड़ूस मुंह मत banaao...Hum जहा जा रहे है वह के लिए ये भाव सही नहीं है.

सुमित:- एक तो तुम बता नहीं रही ho...Kaha जा रहे है और जा भी रहे है तो कुछ hi देर के liye...Socha था आज रात तक मजे करेंगे.

क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा है?

जो पल वो मेघा के साथ बिता रहा था एकदम से वो ख़त्म जो जाएगा ये सोचते hi वो थोड़ा बिचलित हो उठा.

मेघा:- बहुत अच्छा लग रहा hai...Shayad तुम से भी ज्यादा.

सुमित:- तो फिर क्यों?

मेघा:- चीनी का स्वाद बहुत अच्छा होता hai...Lekin काम खाओगे तब hi...Agar ज्यादा खा लिया तो कड़वा हो जाता है.

सुमित:- बकवास बातें है.

सुमित की आवाज में फ़्रस्ट्रेशन साफ़ दिख रहा tha...Megha भी उसकी मजा लेने के लिए.

मेघा:- सेहर आने hi वाला है....1 किलो चीनी खरीद कर तुम्हे देती hun...Saabit karo...Jyada चीनी खाने से चीनी कड़वा नहीं होता.

सुमित:- कड़वा तो बिलकुल नहीं hoga...Haan मेरी डायबिटीज जैसी कंडीशन जरूर हो जाएगा.

मेघा:- अपने इन्सुलिन पर थोड़ा तो विस्वाश रखो. :lol1:

सुमित:- आज कल जिस पर विश्वाश करता हूँ वही विश्वाश तोड़ देता है.

मेघा:- अरे arre...Itna gussa...Kuch दूर के लिए गुस्सा थूक दो.

लो आ गया मंजिल.

सुमित ने सामने देखा तो भगवान् शिव का मंदिर tha...Ye देख सुमित का नाराजगी थोड़ा काम तो जरूर हुआ लेकिन अभी भी ख्वाहिश था मेघा की कुछ और देर की साथ की.

अंदर जाने के बाद सुमित मंदिर के आस पास घूमने laga...Kabhi वो मूर्ति के पास जाता तो कभी किसी और चीज की दर्शन करने.

मेघा भी पूजा ख़त्म करके प्रसाद ले कर आती है.

सुमित एक मिनट में hi मिठाई ख़त्म कर देता है.

मेघा:- किए लगा?

सुमित:- अधभूत.

अभी भी सुमित मिठाई की स्वाद में hi खोया हुआ था.

मेघा:- वो इस लिए क्यों की मिठाई काम hi tha..Warna जरूर कड़वा होता.

अब्ब ये सुन कर सुमित भी हसने लगता है.

सुमित:- यहाँ तो तुम पूरी तरह गलत हो?

मेघा:- क्यों?

सुमित:- भोलेनाथ की प्रसाद hai...Kadhwa हो hi नहीं sakta...Yaha तक की भांग का स्वाद भी गजब का होता है. :lol1:

मेघा:- बकवास है ye...Ganjedion को बहाना चाहिए भोलेनाथ की नाम पर नशा करने ki...Bhagwaan शिव ने तो जेहेर भी पिया tha...Himmat है तो बोलो पीने को उन्हें.

सुमित:- अरे अरे तुम तो गुस्सा हो गयी.

मेघा:- बात hi ऐसी की तुमने.

सुमित:- थोड़ा मजाक tha...Haan गंजेड़ियों को ये जरूर समझने की जरुरत है.

मेघा:- क्यों तुम नहीं हो?

सुमित:- मई तो एक्स गंजेड़ी hun...Abb ये मोह माया से काफी आगे निकल चूका हु.

फिर दोनों मंदिर के एक कोने में जा कर बैठ जाते है.

मेघा:- क्या सोच रहे हो?

सुमित:- यही की हमारी पहली मुलाक़ात भी भोलेनाथ की मंदिर मई hi हुआ था.

मेघा:- तुम्हारा हुआ tha...Mera नहीं.

सुमित:- भूल hi गया tha...Lekin तुम तो अभी भी बताने को तैयार नहीं हो.

मेघा:- Vakt...Aane दो उस शुभमुहूर्त को.

मेघा:- वैसे तुमने कुछ माँगा.

सुमित:- नहीं.

मेघा:- अभी कुछ मांगने के लिए है hi nahi...Jab जरुरत पड़ेगा तब maangunga...Filhaal भगवान् को किसी जरुरत मंद की मनोकामना पूरा करने do...Mai क्यों बे वजह परेशां करू.

मुस्कुराते हुए सुमित ने जवाब दिया.

सुमित:- वैसे तुमने क्या माँगा?

मेघा:- कुछ जरुरी चीज.

सुमित:- क्या मई जान सकता हूँ?

मेघा:- तुम्हारे बारे में.

सुमित:- ऐसा क्या?

मेघा:- यही की तुम्हे थोड़ा अकाल दे.

सुमित:- अकाल तो मेरे कण (पार्टिकल) कण में है.

मेघा:- ग़लतफहमी है तुम्हारा.

सुमित:- और ऐसा तुम्हे क्यों लगता है?

मेघा:- अगर तुम्हारे पास अकाल होता तो....

सुमित:- तो?

मेघा:- मई नहीं बताउंगी.

सुमित:- बहुत बातें छुपाने लगी हो.

मेघा:- (इन हेर मंद) तो बात आज बहुत आगे पहुँच चूका होता. :)

कुछ देर बात करके दोनों वह से निकल जाते है.

सुमित:- काश कुछ देर और.

मेघा:- चीनी उतना hi खाना चाहिए जितना जरुरी हो.

सुमित:- लेकिन अभी तो बहुत कुछ बाकी है.

मेघा:- इसी लिए तो दूसरी बार आ कर पूरा karenge...Thoda भूख बाकी रहना चाहिए.

और सर्जन को सर्जरी से फुर्सत kaha...Dusri बार मौका मिलाने की यही एक तरीका है.

सुमित अब्ब कुछ नहीं बोलै.

मेघा:- अब्ब तुम पर hai...Agar बाकी जगह घूमना है तो फुर्सत मिलाओ.

सुमित:- मतलब बलि मेरा hi chadhega...Koi बात nahi...Fir राहिल सर को मानना पड़ेगा.

मिला lunga...Jald hi.

सुमित की आवाज में उत्शुकता tha...Jald hi वो फिर मेघा के साथ घूमने वाला था.

1.5 इयर्स लेटर
 
फ्रेंड्स इस बार थोड़ा वेट करना padega...Update फ्राइडे पोस्ट करूँगा shayad...Iss वीक एग्जाम hai...Friday कम्पलीट hoga...Agar वक्त मिला तो ट्यूसडे भी पोस्ट कर सकता hun...Tuesday तक थ्योरी कम्पलीट हो जाएगा और एक दिन का गैप है फिर प्रैक्टिकल फ्राइडे tak...Koshish करूँगा ट्यूसडे पोस्ट करने की अगर ट्यूसडे पोस्ट नहीं कर पाया तो फ्राइडे.
 
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