अपडेट 96
अब्ब कहा जा रहे है हम?
आवाज में थोड़ा घबराहट ला कर सुमित ने pucha...Thoda बहुत अंदाजा तो पहले hi हो चूका था.
मेघा:- चलो.
सुमित:- लेकिन क्यों?
मेघा:- टूर का आर्गेनाइजर मई hun...Mere हिसाब से चलो.
इतना कह कर मेघा आगे बढ़ जाती है.
सुमित:- लग गया
सुमित भी पीछे चल पड़ता है.
ये एक शॉपिंग मॉल tha...Sumit की होने वाली हालत सोच कर मेघा हांसे जा रही थी.
सुमित:- तुम शॉपिंग karo...Mai अभी आता हूँ.
मेघा:- कोई बहाना नहीं चलेगा बच्चू.
सुमित का हाथ पकड़ कर मेघा खींचती है.
सुमित:- आ रहा hun...Bas 2 मिनट में.
मेघा:- क्यों?
सुमित:- अभी अभी बाहर फार्मेसी dikha...Benzodiazipines (स्लीपिंग पिल्स) की टेबलेट लेना hai...Fir भूल जाऊँगा.
मेघा:- अच्छा hai...Shoping के बाद थक जाओगे तो स्लीपिंग पिल की जरुरत तो पड़ेगी hi.
इतना कह कर मेघा सुमित का हाथ छोड़ देती है.
जब सुमित वापस आया.
मेघा:- 2 मिनट बोल कर गए thhe...Aur 1 मिनट 50 सेकंड में hi वापस आ gaye...Waah...Punctuality सिख गए आखिरकार.
सुमित:- जिंदगी के 2 महत्वपूर्ण दिन तुम्हे दे रहा hun...Iss में देरी की कोई गुंजाइश hi नहीं.
मेघा:- अच्छा तो ये 2 दिन के साथ ये 2 तबकेट भी do...Tab मानूंगी.
इतना कह कर मेघा सुमित के हाथ से टेबलेट छीन लेती है.
लेकिन इससे सुमित पर फर्क नहीं pada...Pocket की तरफ हाथ बढ़ाया hi था की...
मेघा:- ये तो चीटिंग है.
मेघा फिर से सुमित पर झपट पड़ती उससे पहले hi...Sumit जल्दी से पैकेट फाड़ के टेबलेट जैसा कुछ अपने मुंह में रख कर खली पैकेट मेघा को थमा देता है.
मेघा:- ये तो च्युइंग गम है. :ीक:
सुमित:- अब्ब यहाँ तुम्हारा शॉपिंग एन्जॉय करने के लिए पॉपकॉर्न तो मिलेगा nahi...Bas च्युइंग गम का hi सहारा है.
मेघा:- और ये दवाई?
सुमित:- संभालके rakhna...Tour ख़त्म होने के बाद लूंगा.
मेघा:- लेकिन ख़रीदा क्यों?
सुमित:- सुनील (रूममेट) का बर्थडे hai...Uski रातों के नींद उड़द गया hai...Birthday गिफ्ट देना है. :lol1:
मेघा:- अच्छा है मेरा बर्थडे याद nahi...Warna क्या पता क्या उटपटांग गिफ्ट मिलता.
सुमित:- तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की मई तुम्हे बर्थडे गिफ्ट दूना. :हम्म:
मेघा के घूरते hi.
सुमित:- ओह्ह sorry...Mujhe तुम्हारा बर्थडे भी याद है.
मेघा:- अच्छा गेस करो.
सुमित:- अप्रैल 1...दिन और पर्सनालिटी मैच करता है.
अब्ब मेघा सुमित की तरफ बढ़ती hi है की सुमित फुर्ती से एस्कलेटर पर छड़ जाता है.
सुमित:- 4तह फ्लोर.
मेघा:- मुझे एस्कलेटर से दर लगता है.
सुमित:- सिद्धि से आ जाओ.
फिर सुमित दूसरी तरफ मुद जाता है.
मेघा:- थक गयी.
सुमित:- जिंदगी की इस सफर में इतनी जल्दी थक गयी.
अब्ब मेघा छिड़ गयी.
मेघा:- एक तो इतना दौड़ा रहे हो ऊपर से मेरा hi मजाक बना रहे हो.
सुमित अभी हांसे जा रहा था.
मेघा:- तुम्हारा ये हंसी गायब नहीं कर दिया तो मेरा नाम बदल dena...Abb बताती हूँ थकान क्या होती है जब तुम्हे अपने पीछे पीछे दौड़ा कर तुम्हारी हालत ख़राब कर दूंगी.
सुमित:- जो आज्ञा हुजूर.
मेघा:- मजाक लग रहा है tumhe...Abb तो तुम्हारा हालत खराब काके hi rahungi...Warna सच में नाम बदल देना.
सुमित:- सोच लो.
मेघा:- सोच लिया.
फिर मेघा अपने शॉपिंग पर लग जाती hai...Wo कुछ सेलेक्ट करती और सुमित को dikhaati...Sumit भी अपना बिचार खुल कर मेघा को बताता.
1 घंटा....2 घंटा...3 घंटा.
इतनी देर में न जाने कितनी दुकानों की चक्कर लगा दी मेघा ne...Sumit को थकाने की चक्कर में खुद थक gayi...Lekin सुमित अभी भी जोश में खड़ा tha...Thakaan की लकीर उसके चेहरे में दूर दूर तक नहीं था.
मेघा:- अच्छा मई हार gayi...Itna कह कर मेघा अपना ड्रेस फाइनल कर लेती है.
सुमित:- तुम्हारी जिद्द से ज्यादा तो ये च्युइंग गम टिका.
च्युइंग गम को डस्टबिन में फेंकते हुए सुमित ने कहा.
मेघा:- तो फिर फेंका क्यों?
सुमित:- मुंह दुखने लग गया tha...Accha अब्ब अपना नामकरण के लिए तैयार रहो.
मेघा ने तभी जोश जोश में कह तो दिया था लेकिन अब्ब कुछ बोल नहीं पा रही थी.
मेघा:- हाँ तो क्या सोचा नाम?
थोड़ा डर्टी हुई मेघा ने पूछा.
सुमित:- वक्त आने पर बताऊंगा.
मेघा:- ये क्या बात हुई?
सुमित:- वक्त आने पर बताने की अधिकार सिर्फ तुम्हारे पास है क्या? मुझे पहली बार कब देखा था ये भी नहीं बता रही हो?
मेघा:- वो तो वक्त आने पर hi बताउंगी. :डी
सुमित:- मई भी वक्त आने पर बताऊंगा.
फिर सुमित अपना हाथ मेघा की और आगे बढ़ाता है.
मेघा:- ये क्या है?
सुमित:- तुम्हारा गिफ्ट.
ये देख मेघा बहुत खुश हो जाती hai...Thodi देर के लिए तो मेघा की नजर ड्रेस से हैट hi नहीं रहा tha...Fir प्यार भरी नजरो से सुमित को देखती hai...Aur जैसे hi परिसताग पर नजर जा रहा tha...Sumit उसको निकाल कर फेंक देता है.
मेघा:- बहुत मेहेंगी लग रही है.
सुमित:- तुम्हे इससे क्या मतलब?
मेघा:- Nahi...Lekin...
सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Mujhe पसंद आ gaya...To कीमत की कोई फ़िक्र नहीं है.
फिर मेघा वही ड्रेस चेंज कर के आती है.
सुमित तो बस देखता hi रह गया...2 मिनट बाद मेघा सुमित के पास आती है.
मेघा:- कैसी लग रही हूँ?
सुमित:- बहुत खूबसूरत
मेघा:- सिर्फ खूबसूरत :बीए:
सुमित:- खूबसूरत लग रही हो तो खूबसूरत hi कहूंगा na...Abb चिढ़ाने के लिए बदसूरत थोड़ी न कहूंगा.
मेघा:- मेरा मतलब सिर्फ इतना hi तारीफ़.
सुमित:- कभी कभी तारीफ़ के लिए शब्द काम पद जाते hai...Tum सिर्फ भावना को समझो.
मेघा:- वही तो समझ रही हूँ.
इतना कह कर मेघा मुस्कुराती है.
दोनों अब्ब मॉल से निकल जाते hai...Abb शाम का वक्त हो चूका था.
मेघा:- मुझे तो विश्वास hi नहीं हो रहा है 3 घंटे की शॉपिंग मई भी बोर नहीं हुए tum...Pehle तो 1 घंटे मई hi हालत खराब हो जाती थी.
सुमित:- अब्ब सिख लिया hai...Kisi चीज में फोकस कैसे करना hai...Mera ये 2 दिन का फोकस सिर्फ इस टूर और तुम पर hai...Issi लिए मोबाइल भी ये साथ में लाया हूँ.
सुमित ने फिर एक कीपैड मोबाइल दिखाया.
मेघा:- अच्छा कैसे सिख लिया ऐसे फोकस karna...Mujhe तो लगता था तुम अपने मर्जी के मालिक हो.
सुमित:- वो तो अभी भी hun...Lekin जिस चीज में जरुरी है उस चीज के लिए.
और ये फोकस सीखा सर्जरी रेजीडेंसी में आ kar...Ek बार व्हिप्पले प्रोसीजर (काम्प्लेक्स सर्जिकल प्रोसीजर फॉर पैंक्रियास कैंसर) में असिस्ट कर रहा tha...Surgery ख़त्म होने में 5 घंटा लग gaya...Focus बिलकुल भी हटा नहीं सकता tha...Aur उसके बाद तो जितने भी सर्जरी में असिस्ट किया है लगभग सभी 2-3 घंटे के होते है.
और अब्ब तो जब भी मौका मिले दिन में वक्त निकाल कर योग कर लेता hun...Concentration बहुत अच्छा रहता है.
मेघा:- ये तो बहुत अच्छी बात है.
सुमित:- हाँ और जरुरी भी.
मेघा:- में जब तुम्हे इंतजार करवा रही थी तो मजा तो बहुत आ रहा था लेकिन ये भी लग रहा था की तुम बदला जरूर लोगे :डी
सुमित:- वो तो लूंगा.
मेघा:- क्या?
सुमित:- डरो mat...Abhi तक दो hi चीज सोचा है...1) टेस्ट मैच खेलूंगा और तुम्हे दिन भर चीयर करने के लिए रखूँगा. 2) सर्जरी करते वक्त तुम्हे मुझे असिस्ट करने के लिए रखूँगा.
मेघा:- Surgery...Bilkul नहीं करुँगी.
सुमित:- करने के लिए कौन बोल रहा hai...Assist करना है तुम्हे.
मेघा:- नहीं मुझे दर लगता है ब्लीडिंग देख कर.
सुमित:- बहुत डरपोक हो.
मेघा:- मेरे लिए तो मेडिसिन hi ठीक hai...Acche से डायग्नोसिस कर के अच्छा सा ट्रीटमेंट दो.
सुमित:- तो फिर क्रिकेट के बारे में क्या ख्याल है.
मेघा:- उसके लिए तो मई भी एक्ससिटेड हूँ.
सुमित:- चल झूठी.
मेघा:- सच्ची.
सुमित:- 10 क्रिकेटर के नाम बताओ तो मानूंगा.
मेघा:- सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित.
सुमित:- हंसी भी नहीं आया इस जोके par...Naa hi क्रिकेट कभी देखती हो और ना hi किसी प्लेयर का नाम पता hai....Aur कहती हो क्रिकेट के लिए एक्ससिटेड हो.
मेघा:- मैंने सिर्फ तुम्हे क्रिकेट खेलते देखा hai...Aur तुम्हारी बहुत बड़ी फैन hun...Bas ऑटोग्राफ नहीं लिया है. :डी
फिर मेघा सुमित की सभी इन्निंग्स, रन, बौंडरीएस गिनाने लगती hai...Kaise कैसे शॉट मारा था सुमित ने, उसका सेलिब्रेशन और हर एक पल को मेघा ने कैसे एन्जॉय किया ये सब बताने लगती है.
सुमित की हैरानी की कोई सीमा नहीं tha...Itna तो उससे खुद पता नहीं था.
मेघा:- क्यों उड़द गया होश? या फिर और गिनाऊ.
सुमित:- और ginaao...Apna तारीफ़ भले किसे पसंद नहीं.
फिर मेघा सुमित के आउट होने के तरीके को बिस्तर में बताने लगती hai...Kuch मिसफ़िएल्दिंग्स और भी बहुत कुछ.
सुमित:- बस bas...Abb रुलाओगी क्या?
मेघा फिर सुमित के क्रिकेट के कुछ ज्यादा hi ख़ास पल को याद करने लगती है जो सुमित को नहीं बताती.
सुमित:- अब्ब रात हो गयी hai...Koi अच्छा सा होटल ढूंढ़ना पड़ेगा.
मेघा:- नहीं होटल नहीं.
सुमित:- अच्छा अगर कोई रिश्तेदार है यहाँ तो bataao...Chale jaayenge...Mere तो नहीं है.
मेघा:- आज इस सेहर में hi नहीं रहेंगे.
सुमित:- फिर?
मेघा:- टूर का आर्गेनाइजर मई hun....Bas तुम खाना पैक कर के लाओ.
सुमित के वापस आने के बाद दोनों चल पड़ते है एक अनजान मंजिल को aur....Sumit के लिए तो और भी अनजान.
बाइक मेघा चलाती है इस बार भी...30 मिनट के बाद दोनों सेहर से कुछ दूर एक सुनसान जगह पर एक बड़ा सा ग्राउंड पर रुकते है.
मेघा:- आ गया मंजिल.
सुमित:- क्या? यहाँ पर?
मेघा:- हाँ.
सुमित:- रात को सोना भी पड़ता है.
मेघा:- इतना बड़ा बीएड है तो.
मेघा पूरा ग्राउंड की और इशारा कर के कहती है.
मेघा:- हमेशा से एक ख्वाहिश thi...Khule आसमान के निचे सोने ki...Isse अच्छी जगह कहा milegi...Aur तुम साथ हो तो कोई दर भी नहीं.
सुमित:- इतना विश्वाश भी सही hai...Kabhi कभी रक्षक hi भक्षक बन जाते है.
मेघा:- रक्षक तो तुम ho...Koi भक्षक आये तो बचा लेना. :डी
सुमित:- अब्ब भक्षक यहाँ कहा मिलेगा?
मेघा:- जंगली कुत्ते, यहाँ तक तो भेड़िये से भी बचा loge...Agar शेर आया तो कह नहीं सकते.
सुमित:- तुम्हारे लिए तो शेर से भी लड़ jaaunga...Bahutmovies देखा है और जानता हूँ शेर को कैसे हवा में उड़ाना है.
मेघा सुमित की बात पर हसने लगती है.
मेघा:- मूवीज की लव स्टोरी फिक्शन और शेर के साथ एक्शन रियल.
सुमित:- सच कहु तो दोनों ऊंरेअलिस्टिक. :डी
कुछ देर के लिए दोनों के बिच खामोशी छा जाती hai...Filhaal तो रात बाकी है और बात बाकी है.