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मेघा:- ये विवेक कौन है?
कीर्ति:- मेरा दोस्त hai...Best फ्रेंड.
मेघा:- वो Cartoon...Aur तेरा बेस्ट फ्रेंड. :lol1::lol1:
हँसते हुए मेघा ने kaha...Aur इस टूर में आने के बाद ये शायद पहली बार था जब मेघा के चेहरे में हंसी था.
कीर्ति बस मेघा को घूरती है.
मेघा:- उससे कही तो देखा है. :हम्म:
कीर्ति:- कहा?
मेघा:- याद नहीं आ रहा hai...Cartoon नेटवर्क में देखा है या फिर पोगो mein...Soch रही हूँ. :लोटपोट:
कीर्ति:- मार खायेगी अब्ब!!
मेघा:- Ohho...Itna छिड़ रही है? सिर्फ दोस्त है या फिर दोस्ती से भी aage...Mera मतलब कही तू भी उसके रंग में रंग कर कोई कार्टून करैक्टर तो बनने की नहीं सोच रही है?
कीर्ति कुछ जवाब नहीं देती hai...Bas अपना मुंह घुमा लेती है.
मेघा:- क्या हुआ? नाराज हो गयी क्या?
कीर्ति:- Nahi...Sab उससे ऐसे hi चिढ़ाते hai...Bas यही सोच कर बुरा लग रहा है.
थोड़ा अलग है Vivek...Jyada लोगों से बातें नहीं karta...Apne में hi लगा रहता hai...Sirf पढ़ाई पर hi ध्यान है uska...Bas इसी वजह से लोग इससे चिढ़ाते hai...Jo मुझे अच्छा नहीं लगता.
और वो Sumit...Kya कह रहा tha...Vichitra प्राणी हँ :माध: दिल तो कर रहा है उसका गाला hi दबा दूँ.
मेघा:- और उसका इस अकेलापन पर तरस खा कर उससे तूने अपना बेस्ट फ्रेंड बना लिया?
कीर्ति:- Nahi...Uski तरह मुझे भी पढ़ना बहुत अच्छा लगता hai...Bas इसी से दोस्ती की शुरुवात हो gayi...Jo वक्त के साथ और भी गहरी होते चली गयी.
मेघा:- कितना पढ़ती है? अभी टूर में आयी hai...Aur खबरदार जो अब्ब पढ़ाई की बात अब्ब किया तो !!
कीर्ति:- पढ़ाई जरुरी hai...Warna देख रही है उस सुमित की हालात? ऐसे hi निकम्मा बन कर घूमना पड़ेगा.
मेघा:- ये बात किस पर ले कर आ gayi...Jis बारे में बात करना चाहती थी वो hi भूल गयी.
उस कार्टून को इस टूर पर क्यों ले कर आयी? बहुत बोरिंग टाइप है वो.
कीर्ति को अपनी तरफ घूरती देख...
मेघा:- ी मैं वो विचित्र praani...Ohh sorry...Teri बेस्ट फ्रेंड विवेक.
कीर्ति:- जब तूने टूर के बारे में पूछा तब में लाइब्रेरी में thi...Vivek भी वही tha...Usko भी बता diya...Usne hi सुग्गेस्ट किया की हमे चलना chahiye...Itne दिनों का वेकेशन hai...Thoda रिफ्रेश हो जायेंगे.
उस वक्त सुमित के बारे में पता नहीं था तब मैंने भी टूर के लिए हाँ कर दिया.
मेघा:- एक तो वो सुमित और ऊपर से ये Vivek...Tour स्टार्ट होने से पहले hi सत्यानाश हो गया.
कीर्ति:- सुमित से कपड़े कर hi mat...Vivek दिल का साफ़ hai...Dhire धीरे समझ जायेगी.
मेघा:- ऐसा लगता तो नहीं.
कुछ सोचते हुए मेघा ने जवाब दिया.
कीर्ति:- क्या मतलब?
मेघा:- बहुत अजीब है wo...Ek दो बार नोटिस किया hai...Sumit को अलग नजर से घर रहा tha...Bahut hi गुस्से mein...Shayad सुमित का कुछ नुकशान करना चाहता है.
जब तू सुमित को लंच के लिए कार में पूछ रही thi...Uss वक्त भी.
ऐसे लोग बहुत खतरनाक होते hai...Andar से kuch...Baahar से कुछ.
कीर्ति:- कुछ भी बोल रही है tu...Aur उस सुमित को डिफेंड करने के लिए तू विवेक पर इलज़ाम लगा रही है.
मेघा:- सुमित तो है hi कमीना धोखेबाज़ और बहुत कुछ..
लेकिन इसका ये मतलब नहीं की विवेक गलत नहीं हो सकता.
कीर्ति:- कुछ ज्यादा hi सोच रही है.
इतना कह कर कीर्ति वह से चली गयी.
कीर्ति बात सुनने के लिए तैयार नहीं thi...Megha अब्ब और भी सोच में पद गयी.
आफ्टर डिनर
ये तू? ये क्या कर रहा है?
वाशरूम से आने के बाद रूम का नजारा देख हैरानी से विवेक ने पूछा.
सुमित:- पेग बना रहा हूँ? पियेगा?
कप आगे बढ़ाते हुए सुमित ने पूछा.
विवेक:- मई ड्रिंक नहीं करता.
सुमित:- मुझे क्या!!
इतना कह कर सुमित पूरा कप खाली कर देता है.
सुमित:- मजा आ गया.
फिर वो दूसरा पेग बनाने लगा.
विवेक:- मेरे रूम में ये ड्रिंकिंग नहीं चलेगा.
सुमित:- खानदानी रूम है क्या ये तेरा?
विवेक:- मुझे रूम चेंज करना है? तुझ जैसे बेवड़े के साथ मई नहीं रह सकता.
सुमित:- एक काम kar...Room से बाहर निकलने के बाद 20 मीटर आगे jaa...Waha सिद्धि (लैडर) hai...Fir निचे jaa...Counter दिख jaayega...Waha जा कर बात kar...Dusra रूम मिल जाएगा तुझे.
सुमित ने अब्ब सिगरेट जलाते हुए कहा.
विवेक:- अभी जाता हूँ.
सुमित:- तो जा न. :डेड:
फिर विवेक चला gaya...Aur कुछ देर में लौट आया.
विवेक:- होटल भी तेरी तरह hi घटिया hai...Koi नहीं है काउंटर में अभी?
सुमित:- तो फिर छत में जा कर सू jaa...Chaandni रात में ठंडी ठंडी हवाओं के लहार में.
विवेक अपने बीएड पर चला जाता है.
सुमित:- अब्ब तेरे पास दो ऑप्शन hai...Pehla चुप चाप सू jaa...Dusra मुझे आ कर कंपनी दे.
विवेक:- इर्रिटेट मत कर.
इतना कह कर विवेक सोने के लिए बीएड में लेत जाता है और कुछ hi देर में नींद के आग़ोश में चला जाता है.
दूसरी तरफ Sumit...Kuch देर ऐसे hi नशा में झूलने के बाद वो अपना कैमरा निकालता hai...Aur उसमे से कीर्ति का फोटो निकलता hai...Jo उसने छुप कर खींचा था.
सुमित:- (विथ स्माइल) ये कैमरा भी फींका पद gaya...Tumhare खूबसूरती के saamne...Ismein भी इतनी औकात नहीं की तुम्हारी साड़ी खूबसूरती को कैद कर सके.
(कैमरा को साइड रख कर) तुम तो ऐसे hi मेरे दिल में छाप गयी ho...Camera की क्या जरुरत.
(खिड़की से बाहर देखते हुए) कुछ अलग प्लान किया है इस टूर के liye...Ummeed है तुम्हे पसंद आएगा और ये टूर तुम्हारे जिंदगी के खूबसूरत पल में से एक होगा.
ऐसे hi ख़ुशी में सुमित ने ना जाने कितने देर तक खुद से hi बात kiya...Aaj उसके होंठो में हर पल मुश्कान hi tha...Shayad कीर्ति को अपने इतना करीब महसूस कर के.
एक बार नजर घडी पर देखा तो रात के 12:00 ऍम बज रहे थे.
सुमित:- अब्ब सू जाता hun...Kal जल्दी भी तो उठना hai...Aur सुबह सुबह अपनी जान कीर्ति के दरहन भी तो करना है.
नेक्स्ट मॉर्निंग
सुमित:- सोनी दो ना jaan...Din भर तो हमे साथ hi रहना है.
आधा नींद में सुमित बोलै.
अबे utth...Kaun तेरा जान? और क्या बकवाश कर रहा है.
फिर सुमित धीरे से सामने देखता hai...Saamne विवेक tha...Usse देख वो उठ कर बैठ जाता है.
सुमित:- सोचा tha...Kirti आएगी मुझे uthaane...Lekin पता नहीं सुबह सुबह किस विचित्र प्राणी को देख liya...Saara दिन बेकार जाएगा अब्ब. :सिघ:
विवेक तैयार होने लगता है.
विवेक:- तुझे रेडी नहीं होना है?
सुमित:- तू चुप hi reh...Saara मूड ऑफ कर diya...Kitna खूबसूरत सपना देख रहा था कीर्ति के saath...Aur तूने बिच में hi सत्यानाश कर दिया.
विवेक:- तू कीर्ति के पीछे क्यों पड़ा है?
थोड़ा गुस्से के साथ विवेक ने पूछा.
सुमित:- तुझे क्या मतलब? ये हम दो प्रेम की पंछियों के बिच की बात है.
विवेक:- तू और Kirti...Wo भी lover...Subah सुबह नशा कर लिया क्या?
सुमित ने कुछ जवाब नहीं दिया.
विवेक:- अच्छा ये bataa...Kirti ने तुझे कभी पसंद भी किया है?
सुमित:- हाँ पास्ट में.
विवेक कुछ बोलने hi वाला था की...
सुमित:- और फ्यूचर में भी.
कॉन्फिडेंस के साथ सुमित ने जवाब दिया.
विवेक:- लेकिन प्रेजेंट में nahi...Present hi असली वक्त होता hai...Past सिर्फ एक मेमोरी है और फ्यूचर सिर्फ इमेजिनेशन. :lol1:
विवेक ने हँसते हुए कहा जैसे वो सुमित का मजाक उड़ाना रहा ho...Aur ये बात जा कर सुमित के दिल पर लगा.
सुमित:- (इन हिज मंद) सच hi तो hai...Kirti मेरे वर्त्तमान में नहीं hai...Jaha उसकी जरुरत है.
लेकिन इससे पॉसिबल मई banaunga...Aur बना कर hi रहूँगा.
विवेक:- कीर्ति तेरा इंतजार कर रही hai...Jaa जल्दी से.
सुमित:- सच mein...Pehle बताया क्यों नहीं?
विवेक:- ज्यादा खुश मत ho...Tour के बारे में पूछना है उससे तुझसे.
सुमित:- कुछ तो पूछना चाहती hai...Kaafi है.
इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.
कीर्ति:- ये कौनसी जगह hai...Map में चेक किया maine...Ghumne लायक कोई जगह है hi nahi...Pahaadi में बसा एक गांव hai...Niche एक नदी और थोड़ा बहुत jungle...Isse ज्यादा कुछ नहीं है.
कीर्ति बहुत गुस्से में thi...Aur साथ में मेघा भी.
सुमित:- इतना कुछ तो है? तुम्हे क्या कमी लगा?
कीर्ति:- सिर्फ ये नदी और जंगल...3 हफ्ते सिर्फ यही देख कर गुजारेंगे?
कीर्ति की बात से hi उसका गुस्सा झलक रहा था.
सुमित:- तुमने कुछ देर पहले hi तो कहा hai...Yeh एक गांव है.
कीर्ति:- तोह?
सुमित:- गांव hai...Yahi तो काफी है.
कीर्ति:- मतलब तुम हमे गांव घुमाने लाये ho...Bullshit.
सुमित:- Haan...Lekin कुछ अलग तरह से.
कीर्ति:- मई बहुत से गांव घूम चुकी hun...Aur 3 हफ्ते का vacation...Sirf एक गांव में रह कर बिता नहीं सकती.
मेघा:- हाँ और मई तो खुद गांव की hun...Ye कोई नया एक्सपीरियंस नहीं है?
कीर्ति:- तेरी hi गलती hai...Vacation प्लानिंग का काम इससे नहीं देना चाहिए tha...Aur दे भी दिया तो पहले hi पता कर लेना चाहिए था.
कीर्ति का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.
मेघा:- मई इसके मुंह लग्न नहीं चाहती thi...Aur ये उम्मीद से भी ज्यादा बेवकूफ निकला.
अभी अभी वह आ पंहुचा विवेक ने भी मौका पर चौका मारने का सोचा.
विवेक:- मई तो कहता हूँ इसको यही छोड़ कर हम लोग कही और वेकेशन के लिए चलते है.
सभी सुमित को गुस्से से देख रहे थे.
सुमित:- मेरा भी कुछ सुनोगे.
किसी ने कुछ जवाब नहीं दिया.
सुमित:- सोच समझ कर मैंने वेकेशन को इस तरह से प्लान किया hai...Aur ये बहुत जरुरी है हमे पर्सनली भी और प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य भी.
अभी तक के टूर में हम लोग न जाने कहा कहा गए hai...Hill Station...Historical प्लेस, रिलीजियस प्लेस, और ब्यूटीफुल जियोग्राफिक locations...Jo की बहुत लोग ऐसे hi सोचते है.
इसी लिए कुछ नया socha...Hum लोग 3 हफ्ते इस गांव में रहेंगे.
हम सब अपने लाइफ में ऐसे बिजी हो चुके है की हमे अपने पैशन, होब्बीएस के लिए भी टाइम नहीं hai...Ye पूरा दुनिया hi मटेरिअलिस्टिक बन गया hai...Sirf और सिर्फ कर्रिएर और पैसे के बारे में सोचते hai...Iske अलावा और कुछ nahi...Khushi के नाम पर कुछ पार्टीज, एक दूसरे के साथ मजाक, कभी मूवीज और कॉमेडी videos...Sirf इतना hi.
पैसा और करियर बहुत जरुरी hai...Lekin सिर्फ एहि दुनिया नहीं है.
इसी लिए 3 हफ्ते इस गांव में rahenge...Gaanw वालो से घुल मिल कर rahenge...Unse जान पहचान banayenge...Jo बहुत जरुरी है.
कही का कही इस फ़ास्ट फॉरवर्ड दुनिया में हम कुछ ऐसे हो गए है की जिसे हम जानते नहीं उससे हम इंसान hi नहीं mante...Uski अलग duniya...Humara अलग दुनिया.
इसी लिए सोचा हम यहाँ गांव में रह कर कम्युनिकेशन स्किल डेवेलोप करेंगे और साथ hi कम्युनिकेशन participation...Agar आता है तब और मजबूत बनाएंगे इन् स्किल्स ko...Khud को ऐसे बनाएंगे की दुसरो की जरुरत में हम मदद करेंगे और हमारी मुशीबत में वो हमे हेल्प कर सके.
ह्यूमन बीइंग इस ा सोशल animal...Society और कम्युनिटी के अलावा हमारा क्या औकात है ये सिर्फ तभी पता चलता है जब हम अकेले पद जाते है.
इसी लिए कम्युनिटी पार्टिसिपेशन स्किल डेवेलोप करते है वो भी नेचर के साथ.
और अस ा फ्यूचर डॉक्टर्स अगर कभी किसी गांव में काम करना पड़ा तो हमारे लिए आसानी होगा?
क्या कहते हो?
सभी एक दूसरे को देखने लगे.
सुमित अपने रूम में जा कर 4 ब्लड प्रेशर मासुरिंग डिवाइस ले कर आ गया.
सुमित:- इसी से शुरुवात karenge...Free का हेल्थ सर्विस किसे पसंद नहीं.
...Aaj कुछ घर में ब्लड प्रेशर मैसूर करेंगे और अगर किसी का बहुत ज्यादा और काम मैसूर आया तो उन्हें हेल्थ पोस्ट या हॉस्पिटल जाने के लिए मोटीवेट करेंगे.
कोई मेडिसिन रेकमेंड नहीं करेगा? अभी हम सिर्फ मेडिकल स्टूडेंट्स है डॉक्टर नहीं.
के on...Lets एक्स्प्लोर ौरसेल्फ़.
सुमित एक्ससिटेमेंट में बोले जा रहा था.
मेघा:- (कीर्ति को देख कर) नीस आईडिया.
कीर्ति:- तुम तो खुद hi डिसिशन लिए जा रहे ho...Humse जाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हो की हम इंटरेस्टेड है भी या नहीं.
ये क्या बच्चों जैसा ज्ञान दे रहे हो? भला किसे दूसरे लोगों से बात काटना नहीं आता जो हमे इस गांव में ये बेवकूफी करके सीखना की जरुरत पद गया.
कीर्ति की ये जवाब सुमित के उम्मीद से बिलकुल बाहर tha...Kirti की नफरत से तो वो परिचित था लेकिन ये जवाब? सुमित को कितना बुरा लगा है वो उसके चेहरा में मायूसी का भाव साफ़ दिखा रहा था.
विवेक:- और तेरे जैसे डॉक्टर hi होंगे जो गांव में काम karenge...Hume कोई जरुरत nahi...Talented hai...Accha ख़ासा नौकरी मिल जायेगा शहर में hi.
इतना कह कर दोनों अपने अपने रूम चले gaye...Baahar सिर्फ सुमित और मेघा रह गए थे.
मेघा:- आईडिया अच्छा है तुम्हारा.
सुमित हैरानी से मेघा को देखता hai...Dono के रिजेक्ट करने के बाद मेघा से ये अप्प्रेसिअशन किसी हैरानी से काम नहीं था.
मेघा:- नफरत अभी भी है तुमसे और हमेशा rahega...Bas ये आईडिया सही लगा.
सुमित:- थैंक यू.
फिर मेघा एक डिवाइस उठा कर आगे जाने लगी.
सुमित:- रुको.
सुमित:- साथ chalenge...Akele जाने में प्रॉब्लम भी आ सकता है.
मेघा:- क्या मतलब? मुझे अकेले में प्रॉब्लम होगा और तुम्हारे साथ होते hi प्रॉब्लम साल्व्ड? समझते क्या हो खुद को?
सुमित:- तुम मेरे साथ rahogi...To मेरा भी प्रॉब्लम साल्व्ड हो jaayega...Anjaan है इस जगह से और यहाँ के लोग se...Agar किसी घर में हमारी बातों से मिसुन्दरस्टण्डींग हो गया और वो गुस्सा हो गए तो दूसरा संभाल सकता hai...Aur किसी और प्रॉब्लम में भी हेल्प मिल सकता है.
मेघा सुमित की बात को सोचती रही.
सुमित:- तुम्हारी मर्जी.
मेघा:- ठीक है.
फिर दोनों आगे साथ चलने lage...Raasta में डीडे किया की आज 10 घर वो विजिट करेंगे.
मेघा नोटिस कर रही थी की सुमित बेवजह उससे अब्ब इर्रिटेट नहीं कर रहा hai...Sirf काम की बातें hi कर रहा hai...Aur इसके अलावा सुमित का वो ब्लेंक face...Jo दिखा रहा था सुमित को अभी भी कीर्ति की बातों ने निराश कर दिया है.
सुमित भी निराश हो कर आगे बढ़ रहा tha...Kitna कुछ सोचा था उसने इस टूर के बारे mein...Lekin कीर्ति का वो बेरुखी वाला jawaab...Uske सारे ख्वाब एक पल में hi टूट गया.
मेघा:- ब्लैकमेलिंग के लिए आगे क्या सोचा है?
गुस्सा भरी आवाज में मेघा ने पूछा.
सुमित:- कुछ nahi...Abb कोई ब्लैकमेलिंग नहीं.
मेघा:- इतनी जल्दी पीछा छूट gaya...Yakin नहीं हो रहा.
सुमित:- तुम्हारा काम था कीर्ति को इस टूर में laana...Wo तुमने कर diya...Abb कीर्ति को मनाना मेरा जिम्मेदारी.
तुम आजाद हो अब्ब se...Aur तुमने जो भी किया मेरे लिए उसके लिए थैंक्स.
सुमित ने भी बेरुखी से जवाब दिया जिससे मेघा और गुस्सा हो gayi...Abb वो भी चुप हो गयी.
धीरे धीरे दोनों सभी घर विजिट करने lage...Megha नोटिस कर रही थी की गांव वालो से बात करते वक्त सुमित अचानक से अच्छे मूड में आ जाता और घर से निकलने के बाद वही मूड ऑफ वाला चेहरा.
लगभग सभी घर के लोग दोनों से बात कर के बहुत खुश thhe...Kayi घर में अच्छा ख़ासा स्वागत भी हुआ उनका.
दोनों के लिए ये बहुत अच्छा अनुभव था.
फिर 10 घर कम्पलीट कर के दोनों वापस होटल में आ जाते है.
इस बिच सुमित और मेघा के बिच कोई बात नहीं हुआ.
कीर्ति:- तुमने हमारा पूरा टूर बर्बाद कर दिया सुमित.
नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.
कीर्ति:- कल hi हम सब वापस जानरहे hai...Tour कैंसिल.
ये सुन बहुत बड़ा सा झटका लगा सुमित ko...Wo कुछ अलग करने का सोच रहा था जिसे कीर्ति को एक अच्छा एक्सपीरियंस मिले इस वेकेशन में लेकिन हुआ कुछ और.
सुमित:- तुम्हारी मर्जी.
हारा हुआ आवाज में सुमित ने जवाब diya...Aur अपने रूम में चला गया.
मेघा:- ये विवेक कौन है?
कीर्ति:- मेरा दोस्त hai...Best फ्रेंड.
मेघा:- वो Cartoon...Aur तेरा बेस्ट फ्रेंड. :lol1::lol1:
हँसते हुए मेघा ने kaha...Aur इस टूर में आने के बाद ये शायद पहली बार था जब मेघा के चेहरे में हंसी था.
कीर्ति बस मेघा को घूरती है.
मेघा:- उससे कही तो देखा है. :हम्म:
कीर्ति:- कहा?
मेघा:- याद नहीं आ रहा hai...Cartoon नेटवर्क में देखा है या फिर पोगो mein...Soch रही हूँ. :लोटपोट:
कीर्ति:- मार खायेगी अब्ब!!
मेघा:- Ohho...Itna छिड़ रही है? सिर्फ दोस्त है या फिर दोस्ती से भी aage...Mera मतलब कही तू भी उसके रंग में रंग कर कोई कार्टून करैक्टर तो बनने की नहीं सोच रही है?
कीर्ति कुछ जवाब नहीं देती hai...Bas अपना मुंह घुमा लेती है.
मेघा:- क्या हुआ? नाराज हो गयी क्या?
कीर्ति:- Nahi...Sab उससे ऐसे hi चिढ़ाते hai...Bas यही सोच कर बुरा लग रहा है.
थोड़ा अलग है Vivek...Jyada लोगों से बातें नहीं karta...Apne में hi लगा रहता hai...Sirf पढ़ाई पर hi ध्यान है uska...Bas इसी वजह से लोग इससे चिढ़ाते hai...Jo मुझे अच्छा नहीं लगता.
और वो Sumit...Kya कह रहा tha...Vichitra प्राणी हँ :माध: दिल तो कर रहा है उसका गाला hi दबा दूँ.
मेघा:- और उसका इस अकेलापन पर तरस खा कर उससे तूने अपना बेस्ट फ्रेंड बना लिया?
कीर्ति:- Nahi...Uski तरह मुझे भी पढ़ना बहुत अच्छा लगता hai...Bas इसी से दोस्ती की शुरुवात हो gayi...Jo वक्त के साथ और भी गहरी होते चली गयी.
मेघा:- कितना पढ़ती है? अभी टूर में आयी hai...Aur खबरदार जो अब्ब पढ़ाई की बात अब्ब किया तो !!
कीर्ति:- पढ़ाई जरुरी hai...Warna देख रही है उस सुमित की हालात? ऐसे hi निकम्मा बन कर घूमना पड़ेगा.
मेघा:- ये बात किस पर ले कर आ gayi...Jis बारे में बात करना चाहती थी वो hi भूल गयी.
उस कार्टून को इस टूर पर क्यों ले कर आयी? बहुत बोरिंग टाइप है वो.
कीर्ति को अपनी तरफ घूरती देख...
मेघा:- ी मैं वो विचित्र praani...Ohh sorry...Teri बेस्ट फ्रेंड विवेक.
कीर्ति:- जब तूने टूर के बारे में पूछा तब में लाइब्रेरी में thi...Vivek भी वही tha...Usko भी बता diya...Usne hi सुग्गेस्ट किया की हमे चलना chahiye...Itne दिनों का वेकेशन hai...Thoda रिफ्रेश हो जायेंगे.
उस वक्त सुमित के बारे में पता नहीं था तब मैंने भी टूर के लिए हाँ कर दिया.
मेघा:- एक तो वो सुमित और ऊपर से ये Vivek...Tour स्टार्ट होने से पहले hi सत्यानाश हो गया.
कीर्ति:- सुमित से कपड़े कर hi mat...Vivek दिल का साफ़ hai...Dhire धीरे समझ जायेगी.
मेघा:- ऐसा लगता तो नहीं.
कुछ सोचते हुए मेघा ने जवाब दिया.
कीर्ति:- क्या मतलब?
मेघा:- बहुत अजीब है wo...Ek दो बार नोटिस किया hai...Sumit को अलग नजर से घर रहा tha...Bahut hi गुस्से mein...Shayad सुमित का कुछ नुकशान करना चाहता है.
जब तू सुमित को लंच के लिए कार में पूछ रही thi...Uss वक्त भी.
ऐसे लोग बहुत खतरनाक होते hai...Andar से kuch...Baahar से कुछ.
कीर्ति:- कुछ भी बोल रही है tu...Aur उस सुमित को डिफेंड करने के लिए तू विवेक पर इलज़ाम लगा रही है.
मेघा:- सुमित तो है hi कमीना धोखेबाज़ और बहुत कुछ..
लेकिन इसका ये मतलब नहीं की विवेक गलत नहीं हो सकता.
कीर्ति:- कुछ ज्यादा hi सोच रही है.
इतना कह कर कीर्ति वह से चली गयी.
कीर्ति बात सुनने के लिए तैयार नहीं thi...Megha अब्ब और भी सोच में पद गयी.
आफ्टर डिनर
ये तू? ये क्या कर रहा है?
वाशरूम से आने के बाद रूम का नजारा देख हैरानी से विवेक ने पूछा.
सुमित:- पेग बना रहा हूँ? पियेगा?
कप आगे बढ़ाते हुए सुमित ने पूछा.
विवेक:- मई ड्रिंक नहीं करता.
सुमित:- मुझे क्या!!
इतना कह कर सुमित पूरा कप खाली कर देता है.
सुमित:- मजा आ गया.
फिर वो दूसरा पेग बनाने लगा.
विवेक:- मेरे रूम में ये ड्रिंकिंग नहीं चलेगा.
सुमित:- खानदानी रूम है क्या ये तेरा?
विवेक:- मुझे रूम चेंज करना है? तुझ जैसे बेवड़े के साथ मई नहीं रह सकता.
सुमित:- एक काम kar...Room से बाहर निकलने के बाद 20 मीटर आगे jaa...Waha सिद्धि (लैडर) hai...Fir निचे jaa...Counter दिख jaayega...Waha जा कर बात kar...Dusra रूम मिल जाएगा तुझे.
सुमित ने अब्ब सिगरेट जलाते हुए कहा.
विवेक:- अभी जाता हूँ.
सुमित:- तो जा न. :डेड:
फिर विवेक चला gaya...Aur कुछ देर में लौट आया.
विवेक:- होटल भी तेरी तरह hi घटिया hai...Koi नहीं है काउंटर में अभी?
सुमित:- तो फिर छत में जा कर सू jaa...Chaandni रात में ठंडी ठंडी हवाओं के लहार में.
विवेक अपने बीएड पर चला जाता है.
सुमित:- अब्ब तेरे पास दो ऑप्शन hai...Pehla चुप चाप सू jaa...Dusra मुझे आ कर कंपनी दे.
विवेक:- इर्रिटेट मत कर.
इतना कह कर विवेक सोने के लिए बीएड में लेत जाता है और कुछ hi देर में नींद के आग़ोश में चला जाता है.
दूसरी तरफ Sumit...Kuch देर ऐसे hi नशा में झूलने के बाद वो अपना कैमरा निकालता hai...Aur उसमे से कीर्ति का फोटो निकलता hai...Jo उसने छुप कर खींचा था.
सुमित:- (विथ स्माइल) ये कैमरा भी फींका पद gaya...Tumhare खूबसूरती के saamne...Ismein भी इतनी औकात नहीं की तुम्हारी साड़ी खूबसूरती को कैद कर सके.
(कैमरा को साइड रख कर) तुम तो ऐसे hi मेरे दिल में छाप गयी ho...Camera की क्या जरुरत.
(खिड़की से बाहर देखते हुए) कुछ अलग प्लान किया है इस टूर के liye...Ummeed है तुम्हे पसंद आएगा और ये टूर तुम्हारे जिंदगी के खूबसूरत पल में से एक होगा.
ऐसे hi ख़ुशी में सुमित ने ना जाने कितने देर तक खुद से hi बात kiya...Aaj उसके होंठो में हर पल मुश्कान hi tha...Shayad कीर्ति को अपने इतना करीब महसूस कर के.
एक बार नजर घडी पर देखा तो रात के 12:00 ऍम बज रहे थे.
सुमित:- अब्ब सू जाता hun...Kal जल्दी भी तो उठना hai...Aur सुबह सुबह अपनी जान कीर्ति के दरहन भी तो करना है.
नेक्स्ट मॉर्निंग
सुमित:- सोनी दो ना jaan...Din भर तो हमे साथ hi रहना है.
आधा नींद में सुमित बोलै.
अबे utth...Kaun तेरा जान? और क्या बकवाश कर रहा है.
फिर सुमित धीरे से सामने देखता hai...Saamne विवेक tha...Usse देख वो उठ कर बैठ जाता है.
सुमित:- सोचा tha...Kirti आएगी मुझे uthaane...Lekin पता नहीं सुबह सुबह किस विचित्र प्राणी को देख liya...Saara दिन बेकार जाएगा अब्ब. :सिघ:
विवेक तैयार होने लगता है.
विवेक:- तुझे रेडी नहीं होना है?
सुमित:- तू चुप hi reh...Saara मूड ऑफ कर diya...Kitna खूबसूरत सपना देख रहा था कीर्ति के saath...Aur तूने बिच में hi सत्यानाश कर दिया.
विवेक:- तू कीर्ति के पीछे क्यों पड़ा है?
थोड़ा गुस्से के साथ विवेक ने पूछा.
सुमित:- तुझे क्या मतलब? ये हम दो प्रेम की पंछियों के बिच की बात है.
विवेक:- तू और Kirti...Wo भी lover...Subah सुबह नशा कर लिया क्या?
सुमित ने कुछ जवाब नहीं दिया.
विवेक:- अच्छा ये bataa...Kirti ने तुझे कभी पसंद भी किया है?
सुमित:- हाँ पास्ट में.
विवेक कुछ बोलने hi वाला था की...
सुमित:- और फ्यूचर में भी.
कॉन्फिडेंस के साथ सुमित ने जवाब दिया.
विवेक:- लेकिन प्रेजेंट में nahi...Present hi असली वक्त होता hai...Past सिर्फ एक मेमोरी है और फ्यूचर सिर्फ इमेजिनेशन. :lol1:
विवेक ने हँसते हुए कहा जैसे वो सुमित का मजाक उड़ाना रहा ho...Aur ये बात जा कर सुमित के दिल पर लगा.
सुमित:- (इन हिज मंद) सच hi तो hai...Kirti मेरे वर्त्तमान में नहीं hai...Jaha उसकी जरुरत है.
लेकिन इससे पॉसिबल मई banaunga...Aur बना कर hi रहूँगा.
विवेक:- कीर्ति तेरा इंतजार कर रही hai...Jaa जल्दी से.
सुमित:- सच mein...Pehle बताया क्यों नहीं?
विवेक:- ज्यादा खुश मत ho...Tour के बारे में पूछना है उससे तुझसे.
सुमित:- कुछ तो पूछना चाहती hai...Kaafi है.
इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.
कीर्ति:- ये कौनसी जगह hai...Map में चेक किया maine...Ghumne लायक कोई जगह है hi nahi...Pahaadi में बसा एक गांव hai...Niche एक नदी और थोड़ा बहुत jungle...Isse ज्यादा कुछ नहीं है.
कीर्ति बहुत गुस्से में thi...Aur साथ में मेघा भी.
सुमित:- इतना कुछ तो है? तुम्हे क्या कमी लगा?
कीर्ति:- सिर्फ ये नदी और जंगल...3 हफ्ते सिर्फ यही देख कर गुजारेंगे?
कीर्ति की बात से hi उसका गुस्सा झलक रहा था.
सुमित:- तुमने कुछ देर पहले hi तो कहा hai...Yeh एक गांव है.
कीर्ति:- तोह?
सुमित:- गांव hai...Yahi तो काफी है.
कीर्ति:- मतलब तुम हमे गांव घुमाने लाये ho...Bullshit.
सुमित:- Haan...Lekin कुछ अलग तरह से.
कीर्ति:- मई बहुत से गांव घूम चुकी hun...Aur 3 हफ्ते का vacation...Sirf एक गांव में रह कर बिता नहीं सकती.
मेघा:- हाँ और मई तो खुद गांव की hun...Ye कोई नया एक्सपीरियंस नहीं है?
कीर्ति:- तेरी hi गलती hai...Vacation प्लानिंग का काम इससे नहीं देना चाहिए tha...Aur दे भी दिया तो पहले hi पता कर लेना चाहिए था.
कीर्ति का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.
मेघा:- मई इसके मुंह लग्न नहीं चाहती thi...Aur ये उम्मीद से भी ज्यादा बेवकूफ निकला.
अभी अभी वह आ पंहुचा विवेक ने भी मौका पर चौका मारने का सोचा.
विवेक:- मई तो कहता हूँ इसको यही छोड़ कर हम लोग कही और वेकेशन के लिए चलते है.
सभी सुमित को गुस्से से देख रहे थे.
सुमित:- मेरा भी कुछ सुनोगे.
किसी ने कुछ जवाब नहीं दिया.
सुमित:- सोच समझ कर मैंने वेकेशन को इस तरह से प्लान किया hai...Aur ये बहुत जरुरी है हमे पर्सनली भी और प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य भी.
अभी तक के टूर में हम लोग न जाने कहा कहा गए hai...Hill Station...Historical प्लेस, रिलीजियस प्लेस, और ब्यूटीफुल जियोग्राफिक locations...Jo की बहुत लोग ऐसे hi सोचते है.
इसी लिए कुछ नया socha...Hum लोग 3 हफ्ते इस गांव में रहेंगे.
हम सब अपने लाइफ में ऐसे बिजी हो चुके है की हमे अपने पैशन, होब्बीएस के लिए भी टाइम नहीं hai...Ye पूरा दुनिया hi मटेरिअलिस्टिक बन गया hai...Sirf और सिर्फ कर्रिएर और पैसे के बारे में सोचते hai...Iske अलावा और कुछ nahi...Khushi के नाम पर कुछ पार्टीज, एक दूसरे के साथ मजाक, कभी मूवीज और कॉमेडी videos...Sirf इतना hi.
पैसा और करियर बहुत जरुरी hai...Lekin सिर्फ एहि दुनिया नहीं है.
इसी लिए 3 हफ्ते इस गांव में rahenge...Gaanw वालो से घुल मिल कर rahenge...Unse जान पहचान banayenge...Jo बहुत जरुरी है.
कही का कही इस फ़ास्ट फॉरवर्ड दुनिया में हम कुछ ऐसे हो गए है की जिसे हम जानते नहीं उससे हम इंसान hi नहीं mante...Uski अलग duniya...Humara अलग दुनिया.
इसी लिए सोचा हम यहाँ गांव में रह कर कम्युनिकेशन स्किल डेवेलोप करेंगे और साथ hi कम्युनिकेशन participation...Agar आता है तब और मजबूत बनाएंगे इन् स्किल्स ko...Khud को ऐसे बनाएंगे की दुसरो की जरुरत में हम मदद करेंगे और हमारी मुशीबत में वो हमे हेल्प कर सके.
ह्यूमन बीइंग इस ा सोशल animal...Society और कम्युनिटी के अलावा हमारा क्या औकात है ये सिर्फ तभी पता चलता है जब हम अकेले पद जाते है.
इसी लिए कम्युनिटी पार्टिसिपेशन स्किल डेवेलोप करते है वो भी नेचर के साथ.
और अस ा फ्यूचर डॉक्टर्स अगर कभी किसी गांव में काम करना पड़ा तो हमारे लिए आसानी होगा?
क्या कहते हो?
सभी एक दूसरे को देखने लगे.
सुमित अपने रूम में जा कर 4 ब्लड प्रेशर मासुरिंग डिवाइस ले कर आ गया.
सुमित:- इसी से शुरुवात karenge...Free का हेल्थ सर्विस किसे पसंद नहीं.
कोई मेडिसिन रेकमेंड नहीं करेगा? अभी हम सिर्फ मेडिकल स्टूडेंट्स है डॉक्टर नहीं.
के on...Lets एक्स्प्लोर ौरसेल्फ़.
सुमित एक्ससिटेमेंट में बोले जा रहा था.
मेघा:- (कीर्ति को देख कर) नीस आईडिया.
कीर्ति:- तुम तो खुद hi डिसिशन लिए जा रहे ho...Humse जाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हो की हम इंटरेस्टेड है भी या नहीं.
ये क्या बच्चों जैसा ज्ञान दे रहे हो? भला किसे दूसरे लोगों से बात काटना नहीं आता जो हमे इस गांव में ये बेवकूफी करके सीखना की जरुरत पद गया.
कीर्ति की ये जवाब सुमित के उम्मीद से बिलकुल बाहर tha...Kirti की नफरत से तो वो परिचित था लेकिन ये जवाब? सुमित को कितना बुरा लगा है वो उसके चेहरा में मायूसी का भाव साफ़ दिखा रहा था.
विवेक:- और तेरे जैसे डॉक्टर hi होंगे जो गांव में काम karenge...Hume कोई जरुरत nahi...Talented hai...Accha ख़ासा नौकरी मिल जायेगा शहर में hi.
इतना कह कर दोनों अपने अपने रूम चले gaye...Baahar सिर्फ सुमित और मेघा रह गए थे.
मेघा:- आईडिया अच्छा है तुम्हारा.
सुमित हैरानी से मेघा को देखता hai...Dono के रिजेक्ट करने के बाद मेघा से ये अप्प्रेसिअशन किसी हैरानी से काम नहीं था.
मेघा:- नफरत अभी भी है तुमसे और हमेशा rahega...Bas ये आईडिया सही लगा.
सुमित:- थैंक यू.
फिर मेघा एक डिवाइस उठा कर आगे जाने लगी.
सुमित:- रुको.
सुमित:- साथ chalenge...Akele जाने में प्रॉब्लम भी आ सकता है.
मेघा:- क्या मतलब? मुझे अकेले में प्रॉब्लम होगा और तुम्हारे साथ होते hi प्रॉब्लम साल्व्ड? समझते क्या हो खुद को?
सुमित:- तुम मेरे साथ rahogi...To मेरा भी प्रॉब्लम साल्व्ड हो jaayega...Anjaan है इस जगह से और यहाँ के लोग se...Agar किसी घर में हमारी बातों से मिसुन्दरस्टण्डींग हो गया और वो गुस्सा हो गए तो दूसरा संभाल सकता hai...Aur किसी और प्रॉब्लम में भी हेल्प मिल सकता है.
मेघा सुमित की बात को सोचती रही.
सुमित:- तुम्हारी मर्जी.
मेघा:- ठीक है.
फिर दोनों आगे साथ चलने lage...Raasta में डीडे किया की आज 10 घर वो विजिट करेंगे.
मेघा नोटिस कर रही थी की सुमित बेवजह उससे अब्ब इर्रिटेट नहीं कर रहा hai...Sirf काम की बातें hi कर रहा hai...Aur इसके अलावा सुमित का वो ब्लेंक face...Jo दिखा रहा था सुमित को अभी भी कीर्ति की बातों ने निराश कर दिया है.
सुमित भी निराश हो कर आगे बढ़ रहा tha...Kitna कुछ सोचा था उसने इस टूर के बारे mein...Lekin कीर्ति का वो बेरुखी वाला jawaab...Uske सारे ख्वाब एक पल में hi टूट गया.
मेघा:- ब्लैकमेलिंग के लिए आगे क्या सोचा है?
गुस्सा भरी आवाज में मेघा ने पूछा.
सुमित:- कुछ nahi...Abb कोई ब्लैकमेलिंग नहीं.
मेघा:- इतनी जल्दी पीछा छूट gaya...Yakin नहीं हो रहा.
सुमित:- तुम्हारा काम था कीर्ति को इस टूर में laana...Wo तुमने कर diya...Abb कीर्ति को मनाना मेरा जिम्मेदारी.
तुम आजाद हो अब्ब se...Aur तुमने जो भी किया मेरे लिए उसके लिए थैंक्स.
सुमित ने भी बेरुखी से जवाब दिया जिससे मेघा और गुस्सा हो gayi...Abb वो भी चुप हो गयी.
धीरे धीरे दोनों सभी घर विजिट करने lage...Megha नोटिस कर रही थी की गांव वालो से बात करते वक्त सुमित अचानक से अच्छे मूड में आ जाता और घर से निकलने के बाद वही मूड ऑफ वाला चेहरा.
लगभग सभी घर के लोग दोनों से बात कर के बहुत खुश thhe...Kayi घर में अच्छा ख़ासा स्वागत भी हुआ उनका.
दोनों के लिए ये बहुत अच्छा अनुभव था.
फिर 10 घर कम्पलीट कर के दोनों वापस होटल में आ जाते है.
इस बिच सुमित और मेघा के बिच कोई बात नहीं हुआ.
कीर्ति:- तुमने हमारा पूरा टूर बर्बाद कर दिया सुमित.
नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.
कीर्ति:- कल hi हम सब वापस जानरहे hai...Tour कैंसिल.
ये सुन बहुत बड़ा सा झटका लगा सुमित ko...Wo कुछ अलग करने का सोच रहा था जिसे कीर्ति को एक अच्छा एक्सपीरियंस मिले इस वेकेशन में लेकिन हुआ कुछ और.
सुमित:- तुम्हारी मर्जी.
हारा हुआ आवाज में सुमित ने जवाब diya...Aur अपने रूम में चला गया.