Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 10 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 52

एक और ना खुश subah...Shayad आज कुछ ज्यादा hi...Ek उम्मीद था शायद अब्ब वो भी ख़त्म हो गया था.

कुछ देर यूँही खामोश रहने के बाद सुमित आईना (मिरर) के सामने चला गया.

अपने शकल को देखते हुए.

सुमित:- Looser...Jis शब्द को मई खुद से दूर रखा करता tha...Aaj बहुत पास आ गए hai...Shayad इतना पास की अब्ब तो दोनों का मतलब हो एक हो गया है.

फिर हारा हुआ मुस्कान के साथ.

सुमित:- वक्त हुआ करता था जब मई ऐसे डिस्ट्रक्शन से खुद को दूर रखता tha...Apne में hi मस्त रहता tha...Lekin abb...Abb न जाने क्या हाल बना लिया है खुद का?

आईना में एक बार फिर अपना hi चेहरा देख कर.

सुमित:- अब्ब तो ना hi कुछ कर पा रहा हूँ और ना hi दूर जा पा रहा hun...Pata नहीं इसकी वजह मेरा वरकॉन्फिडेन्स था या मेरा जिद्द.

फिर सुमित बीएड पर आ कर बैठ जाता है.

कुछ देर ऐसे hi निराश बैठने के बाद.

सुमित:- लेकिन प्यार भी तो बहित करता hun...Saccha वाला प्यार.

इतना कहने के बाद सुमित की आँखों में आंसू के कुछ बूँद छलकने लगे.

सुमित:- कीर्ति ने कल मेरे साथ जो भी किया उसके बाद भी नफरत नहीं कर पा रहा hun...Ulta और प्यार आ रहा hai...Abhi भी दिल मानने को तैयार नहीं की कीर्ति को मुझसे प्यार nahi...Aur न जाने कितना इंतजार करना पड़ेगा कीर्ति को पाने के लिए. :(

सुमित इस वक्त खुद को बहुत hi टूटा हुआ महसूस कर रहा tha...Apno की बहुत याद आ रहा tha...Aur ऐसे hi उसकी याद अपने पापा के साथ हुई बातों की और चला गया.

कॉलेज (बी फार्मेसी) के दौरान डिनर के वक्त.

स. डैड:- और बता? क्या चल रहा है.

सुमित:- सब ठीक thaak...Aap बताइये?

स. डैड:- क्या लगता है तुझे?

सुमित:- बातों में frustration...Pakka जॉब प्रॉब्लम hoga...Agar उस प्रिंसिपल से कोई प्रॉब्लम है तो batiye...Ladkon को तैयार करता hun...Vakt में पेरासिटामोल खिला दूंगा.

सुमित की इस जवाब पर उसके पापा उससे घूरते है.

सुमित:- आप ढंग से पढ़ाते तो है ना? अगर गलती आप का है तो फिर मई भी कुछ नहीं कर सकता.

स. डैड:- अपने स्टूडेंट्स को तो अच्छे से hi पढ़ाता hun...Aur वो अपने लाइफ में आगे भी बढ़ रहे है.

अफसोश है तो अपने hi नालायक बीटा को पढ़ा नहीं paaya...Mehnat करने के लिए बचपन से पढ़ाता आया hun...Lekin तू तो कामचोर वाली डिग्री में hi पीएचडी करेगा.

सुमित इस बात में सिर्फ मुस्कुराता है.

रश्मि:- सही कहा पापा आपने.

स. डैड:- तू भी काम nahi...Iss सुमित को देख कर तेरा भी वही हाल हो रहा है पढाई में जैसा इसका हो रहा है.

सुमित:- (तो रश्मि) करवा ली बेइज्जती?

सुमित की इस बात पर रश्मि सुमित को घूरती hai...Papa सामने होने की वजह से कुछ नहीं बोल रहे थी.

वही सुमित की माँ ये सब देख कर हंस रही थी.

स. डैड:- तुझसे कुछ और पूछना था? लेकिन तूने hi बातों में उलझा दिया.

सुमित:- हाँ puchiye...Bas आपके बोरिंग मैथ्स वाले सवाल nahi...Wo आपको hi मुबारक और आपके स्टूडेंट्स को.

स. डैड:- आज कल बहुत बिजी हो गया hai...Ghar में भी ज्यादा नहीं rehta...Aur खाते वक्त भी सिर्फ हाथ में mobile...Aur बात भी कोई शुरुवात करे तो hi करता है?

सुमित:- थोड़ा पढ़ाई में व्यस्त हूँ.

स. डैड:- पढाई और तू?

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं दे पाटा.

स. डैड:- सच बता? कही ये गफ बर्फ वाला चक्कर तो नहीं?

उनके इस सवाल पर सभी हैरान रह जाते hai...Sabse ज्यादा तो Sumit...Wo अभी मोबाइल में भी अभी नयी बानी गफ से hi चाट कर रहा था.

स. माँ:- ये क्या कह रहे है आप? मेरा सुमित ऐसा नहीं है.

स. डैड:- Galatfehmi...Kabhi इस ग़लतफहमी में ना padna...Ye आज कल के generation...Kuch ज्यादा hi तेज hai...Aur इस लड़के ki...Iss की तो बात hi मत करो.

अगर ऐसे hi खुला छोड़ डौगी तो कल शादी कर के आ jaayega...Wo भी व्हाट्सप्प फेसबुक में.

सुमित:- आज तक का सबसे बुरा जोके था.

स. डैड:- और तुझ पर भरोषा कर के ऐसे hi खुला छोड़ दिया तो बाद में हम खुद जोके बन जाएंगे.

इस बार सुमित कोई जवाब नहीं देता.

स. डैड:- लेकिन फ़िक्र की कोई बात नहीं.

कुछ सोचते हुए वो बोले.

सुमित:- क्यों?

स. डैड:- तू भले hi लाख कोशिश कर le...Koi लड़की तुझसे पटेगी nahi...Shakal बिलकुल hi badsurat...Padhai लिखे में zero...Smartness नाम की गुण तुझ में दूर दूर तक नहीं.

कुल मिला कर बेकार वाले केटेगरी का hai...Pyaar तो दूर की बात है कोई देखेगी भी नहीं.

सुमित:- (विथ स्माइल) तारीफ़ के लिए शुक्रिया.

और आज का din...Isa बात को याद करते हुए.

सुमित:- सच में अब्ब तो बेकार hi हूँ mai...Pyaar तो दूर की बात है अब्ब तो कीर्ति मेरी तरफ देखती भी नहीं.

कुछ ऐसे hi कल की बातें और पुरानी यादें सुमित को परेशान कर रहा tha...Vakt और हालात भी ऐसा था की हर तरफ से नेगेटिव बातें hi दिमाग में आ रहा था.

सुमित:- अब्ब और nahi...Abb कीर्ति को कभी परेशान नहीं karunga...Pehle hi उससे इम्प्रेस करने की चक्कर में उसके दिल में अपने लिए नफरत और बढ़ा चूका हूँ.

अब्ब करूँगा तो सिर्फ intejaar...Shayad आगे किसी मोड़ में कीर्ति को भी मुझसे प्यार हो जाए.

इस उम्मीद में भी अब्ब वो विश्वाश नहीं था.

तभी उसके रूम में नॉक hua...Door खोलने पर सामने मेघा थी.

मेघा:- रेडी हो jaao...Aaj गांव में जाना है.

सुमित:- आज मई नहीं aaunga...Mood नहीं है.

मेघा:- तो उनको यही जवाब दूँ? की तुम्हारा मूड नहीं है?

सुमित:- जवाब किसको देना है?

मेघा:- गांव वाले सभी को बुला रहे है.

सुमित इस बात पर सोच में पद गया.

सुमित:- किसने क्या काण्ड कर दिया अब्ब?

मेघा:- फेयरवेल programhai...Issi लिए बुला रहे है.

ये बात सुमित के लिए और भी हैरानी का था.

सुमित:- आता हूँ थोड़ी देर mein...Ready हो कर.

इतना कह कर सुमित अपने रूम में चला गया.

आफ्टर 10 मिनट्स.

चारों hi निचे गांव की तरफ जा रहे थे.

सुमित भी कुछ देर में कीर्ति की तरफ देख लेता.

सुमित:- (इन हिज मंद) प्लीज एक बार तो मेरी तरफ dekho...Aur बस इतना कह do...Ye एक मजाक hai...Sirf मजाक.

सुमित उम्मीद भरी नजरों से कीर्ति की और देख रहा tha....Sumit का इस दुआ ने कोई काम नहीं kiya...Ek बार भी कीर्ति ने सुमित की तरफ नहीं देखा.

दिल की अरमान अधूरा hi रह गया एक बार फिर से.

फिर किसी तरह खुद को संभालते हुए सुमित आगे बढ़ गया.

गांव में पहुँचने के बाद सभी ने देखा की करीब 20 से 30 लोग आये थे waha...Unn में से एक बुजुर्ग बोले.

बुजुर्ग:- क्यों सुमित बीटा? बिना कुछ बताये hi वापस जाने वाले थे.

सुमित:- नहीं दादा ji...Aisi बात नहीं है.

बुजुर्ग:- Fir...Kaisi बात है?

सुमित:- Socha...Disturb क्यों करू.

जल्दबाज़ी में यही बहाना मिला सुमित को.

बुजुर्ग:- Haan...Hum तो आज जैसे एक hi दिन में इस गांव को वो क्या कहते hai...Haan Amrika...Hum एक hi दिन में इतना म्हणत कर रहे है की एक दिन में hi इस गांव को अमरीका बन denge...Aur तुम्हारा आने से हम डिस्टर्ब हो जाएंगे.

सुमित:- नहीं nahi...Mera वो मतलब नहीं था.

बुजुर्ग:- एक hi तो उम्र होता hai...Budhaapa ka...Jab बेरोजगार होने का उतना दुःख नहीं hota...Vakt hi वक्त hai...Accha hi लगेगा बात करने में.

सुमित:- चलिए आप की इसी बात par...Aaj का पूरा दिन आप सब के naam...Ye छूती वाली बेरोजगारी मुझे भी पसंद है.

अब्ब सुमित को भी उनसे बात करना अच्छा लग रहा था.

बुजुर्ग:- और मेघा beti...Tum इतना चुप क्यों हो? उस दिन तो बहुत समझा रही thi...Ye बीमारी है ये मत खाइये वो khaiye...Aur आज?

जा रही ho...Lekin थोड़ा ज्ञान हमारे पास भी छोड़ते जाओ.

मेघा:- लेकिन आप मानते कहा hai...Dama (अस्थमा) की बीमारी hai...Lekin फिर भी दिन भर सिगरेट पीते रहते है.

बुजुर्ग:- (मुस्कुराते हुए) बीमारी चीज hi ऐसी hai...Jo नहीं करना चाहिए वो hi करने का मन करता है.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) प्यार रोग भी ऐसा hi है.

फिर सभी गांव वालों के साथ बात काटने लगते hai...Gaanw वाले भी उनसे बात कर के खुश थे.

सुमित कुछ पल के लिए अपना ग़म भूल gaya...Itna ज्यादा इज़्ज़त मिल रहा tha...Shayad इस वजह se...Warna हर कोई ठुकरा hi रहा था उससे.

ये माहौल कीर्ति और विवेक को बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा tha...Shayad सभी सुमित और मेघा के ऊपर ज्यादा ध्यान दे रहे थे इस वजह से.

कीर्ति की गुस्सा की एक और वजह थी Megha...Pehle जब भी दोनों के बिच मन मुतास होता था तो मेघा hi उससे बात करती thi...Lekin कल रात के बाद बात करना तो दूर मेघा ने उसकी तरफ देखा भी nahi...Iss से कीर्ति का गुस्सा सुमित के लिए और भी बढ़ गया.

खैर वो दोनों ने बस इसी गुस्से में आज के पूरा दिन वह पूरा दिन निकाल diya...Aur इस गुस्से के आग में घी डालने का काम कर रहा था सुमित और मेघा की ख़ुशी.

सुमित एयर मेघा दोनों hi बहुत खुश दिख रहे thhe...Dono एक बार फिर गांव वालों से घुल मिल गए थे जैसे वो दोनों भी यही के है.

और जब शाम हो गया तब.

सुमित:- बहुत बहुत शुक्रिया आप सभी ka...Itna प्यार इतना सम्मान देने के liye...Ye पल ये खुदही हमेशा याद रहेगा.

सच में ये एक्सपीरियंस सुमित के लिए बहुत अच्छा tha...Usne तो बस अपना और अपने दोस्तों का कम्युनिकेशन स्किल अच्छा बनाने के लिए ये किया tha...Lekin इसका परिणाम जो भी निकला वो उसके उम्मीद से भी कही अच्छा था.

कई गांव वाले कुछ दिन और रुकने की बात करने लगे तो कोई फिर आने की.

बुजुर्ग:- बीटा जानते हो हमने ये विदाई कार्यक्रम क्यों किया?

सुमित ने ना में सर हिलाया.

बुजुर्ग:- तुम सभी में एक बात बहुत अच्छा laga...Tum लोग बात करने में हिचकिचाते nahi...Gaanw में सभी के घर gaye...Haal चाल pucha...Thoda बहुत स्वस्थ्य परिक्षण kiya...Aur हम सब के बिच घुलने की कोशिश किया.

ये आज के वक्त में कही कहि सा गया hai...Har इंसान इतना व्यस्त हो गया है की दुसरो से कोई मतलब hi nahi...Agar किसी को नहीं पहचानते और वो तुम्हारे आस पास भी है लेकिन कोई काम नहीं है उससे तो वो हमेशा के लिए अजनबी रह जाएगा.

सही कहु या गलत इस बात को वो मई नहीं jaanta...Lekin तुम सभी की दुसरो से बातें करने की कोशिश घुलने मिलने की कोशिश बहुत अच्छा लगा.

और जब भी बात करते हो ऐसा लगता है दिल से बात कर रहे हो ना की सिर्फ दिखावा की बातें.

बात भी ऐसे की सामने वाला खुश हो जाए.

सुमित:- दादा जी अगर सच कहु तो पहले ऐसे बात नहीं कर पाटा tha...Ye पहला कोशिश है.

बुजुर्ग:- कोशिश तो किया na...Yahi काफी है.

सुमित भी बस हां में सर हिलाता है.

बुजुर्ग:- कोई परेशानी है तुम्हे? कभी कभी मैंने ऐसा महसूस किया है.

सुमित:- नहीं तो.

बुजुर्ग:- अगर कभी आये तो जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी उस परेशानी को ख़त्म karo...Agar ना कर पाए तो वक्त के लिए छोड़ do...Kuch परेशानी वक्त के साथ ठीक होता है तो किसी का समाधान वक्त के साथ मिलता hai...Jaldbaazi में गलत फैसला मत कर लेना.

शायद उनको भी सुमित का परेशानी समझ में आ गया tha...Akele में जब उन्होंने सुमित को देखा tha...Uski नजर ने बहुत कुछ कह दिया था.

सुमित ने भी इस बात को अच्छे से suna...Ye बात भी उसके हालात से hi मिल रहा था.

बुजुर्ग:- और Sumit...Ye भी याद rakhna...Jaise हो वैसे hi rehna...Har किसी का ताकत उसका व्यक्तित्वा (पर्सनालिटी) hi होता hai...Jo उसको किसी भी हालात में लड़ना सिखाता है.

और एक जरुरी baatein...Ye बातें करने की कला कभी मत bhulna...Akele तो तुम एक ho...Lekin अगर अपनी बातों से दूसरे को अपने साथ मिला दिया तो एक से अनेक हो jaaoge...Aur किसी भी परेशानी को आसानी से संभाल सकते हो.

सुमित:- याद रखूँगा दादा ji...Aapki ये baatein...Bilkul सही कहा आपने.

अब्ब आज्ञा दीजिये.

बुजुर्ग:- ऐसे kaise...Pehle तुम सब अपना फेसबुक अकाउंट देते जाओ.

उनकी इस बात पर सभी हैरानी से उनको देखते है.

बुजुर्ग:- अपने जमाने में पुरे 7 तक पढ़ा tha...Thoda बहुत अंग्रेजी समझ में आता hai...Upar से इंटरनेट की jamaana...Sabhi रिश्तेदार से जुड़ने के लिए फेसबुक चला लेता हूँ.

मुश्कुराते हुए वो bole...Fir सभी अपना ईद उन्हें देते hai...Aur ऐसे hi कुछ देर और बात करने के बाद सभी वह से चलते है.

कीर्ति और विवेक को कुछ ख़ास मजा नहीं आया इस वेकेशन mai...Abb दोनों को इंतजार था कल ka...Ghar वापसी का.

सुमित और मेघा को भी पुरे वेकेशन में मजा नहीं aaya...Sumit का दिल टूट गया और Megha...Wo सुमित के हाल देख कर दुखी थी.

सुमित को आज का दिन और गांव वालो से बात चीत बहुत अच्छा laga...Wo बुजुर्ग की बात सुमित के जख्म के लिए थोड़ा बहुत मलहम का काम कर रहा tha...Lekin जख्म भी इतना गहरा था की जो शायद hi कभी भरेगा.

बुजुर्ग की बात की सुकून के बाद कल फिर कीर्ति से बिछड़ने की दर्द सुमित के दिल को सताने लगा.

एक बार फिर से उम्मीद भरी नजरों से सुमित ने कीर्ति को देखना सुरु कर दिया दिल को झूठी तसल्ली देते हुए.
 
मेंटालिटी में फ़ास्ट उपदटेस की वजह ये है की स्टोरी पहले hi सोस्सिप में कम्पलीट कर चूका हूँ :)...उसी स्टोरी से मैंने स्टोरी राइटिंग का शुरुवात किया था 2 या 3 साल pehle...Waha पर सिर्फ कॉपी एंड पेस्ट करना होता है अपडेट इसी लिए वह उपदटेस फ़ास्ट होते है.

कोशिश करूँगा यहाँ पर भी और ज्यादा रेगुलर उपदटेस पोस्ट करने की.
 
अपडेट 53

वेकेशन की आखिरी रात.

सभी छत में मौजूद thhe...Kirti और विवेक थोड़ा पास thhe...Megha और सुमित थोड़ा अलग.

हवा में कुछ आवाज गूंजता तो कीर्ति और विवेक ka...Kabhi कभी कीर्ति मेघा से भी बात करती लेकिन मेघा की जवाब सिर्फ हाँ और ना में आता.

ये देख कीर्ति को भी गुस्सा आ रहा tha...Abb उस्सने भी मेघा से बात करना बंद कर दिया.

दूसरी तरफ Sumit...Kabhi छत से निचे की तरफ देखता तो कभी एक दो नजर प्यार से कीर्ति को.

कीर्ति से कल अलग हो जाने से hi दिल घबरा रहा tha...Ussi घबराहट में विचलित हो कर कीर्ति को देख लेता लेकिन कीर्ति की घूरती नजर देख वो भी अपना नजर बदलने पर मजबूर हो जाता.

कीर्ति:- विवेक पता hai...Yaha पर मेडिसिन थोड़ा सस्ता है.

विवेक:- कौन सी मेडिसिन?

कीर्ति:- Propranolol...Maa के लिए खरीद liya...Unhe हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) की प्रॉब्लम hai...Sasta में मिल रहा था तो कुछ ज्यादा hi खरीद लिया.

कीर्ति की बात में वो गर्व था जैसे बहुत बड़ा काम किया है.

विवेक:- क्या आंटी को हाइपरटेंशन है? सुन कर बहुत बुरा लगा.

विवेक का इम्प्रेस करने का एक और नाकाम कोशिश.

कीर्ति कुछ कहती उससे पहले hi सुमित वह आ gaya...Aur बिना कुछ बोले कीर्ति की हाथ से वो दवाई छीन कर फेंक दिया.

कीर्ति:- ये क्या बदतमीज़ी है?

गुस्से में कीर्ति बोली.

सुमित:- बदतमीज़ी तो तुम कर रही ho...Apne माँ के हेल्थ के साथ.

सीधा सा जवाब दिया सुमित ने.

कीर्ति:- प्रोप्रानोलोल (मेडिसिन) इस ा β (बीटा) blocker...Aur ब्लड प्रेशर घटाने के लिए उसे होता hai...Agar नहीं जानते तो पढ़ लिया karo...Awaara कही के.

सुमित:- और तुम भी पढ़ लिया करो की β ब्लॉकर इस नॉट ुसेड इन Diabetes...Aur दवाई भी वो ख़रीदा है नॉन सेलेक्टिव β ब्लॉकर जो बॉडी के हर β रिसेप्टर को ब्लॉक कर के साइड इफेक्ट्स दिखाते hai...Little नॉलेज इस डेंजरस.

और ये मत कहना की आंटी को डायबिटीज नहीं है.

इस बार गुस्से में सुमित bola...Shayad पहली बार था ये जब सुमित ने कीर्ति के साथ गुस्से में बात किया था.

कीर्ति:- हाँ hai...Lekin डायबिटीज में क्यों उसे नहीं होता है?

सुमित:- वो पढ़ना तुम्हारा काम है.

कीर्ति:- सीधा कहो तुम नहीं jaante...Tum जैसे आवारा से एक्सपेक्ट भी क्या कर सकती hun...Kahi से ृत्त लिया होगा β ब्लॉकर इस नॉट ुसेड इन डायबिटीज.

सुमित:- अगर नहीं जानता तो तुम कल यही दवाई अपनी माँ को दवाई कह कर खिला रही होती जो उनके कंडीशन में जहर से काम नहीं है.

इस बार कीर्ति गुस्से में वह से थोड़ा दूर चली जाती है.

सुमित भी सोच रहा था की कही कुछ ज्यादा hi गुस्सा तो नहीं हो गया था वो.

विवेक कीर्ति के पास जा कर.

विवेक:- इसको ये सब कैसे मालुम?

कीर्ति:- याद aaya...Ye फार्मेसी स्टूडेंट था pehle...Agar इतना भी नहीं पता तो धरती का बोझ है.

बोझ तो अभी भी hai...Uncle आंटी के liye...Galti भी उनका hi है जो इतना छूट दिया है.

गुस्से में कीर्ति कुछ ज्यादा hi बोल gayi...Apna बेइज्जती को कीर्ति का नाताजगी समझ कर भूलने वाला सुमित को अपने माँ और पापा को ऐसे बिच में घसीटना पसंद नहीं आया.

गुस्से में भी मुश्कुराते हुए जवाब दिया.

सुमित:- मई बोझ hu...Lekin तुम वरदान बनना अपने माँ बाप के liye...Jaisa हर पेरेंट्स सोचते है अपने बच्चों के बारे में.

उन्होंने तुम्हे डॉक्टर बनाया है तुम उनके लिए काल मत बन जाना.

इस बार कीर्ति और भी भड़क गयी.

कीर्ति:- तुम अपने काम से मतलब रखो?

सुमित:- अपने काम से hi मतलब रख रहा हूँ.

कीर्ति:- तो फिर मेरे मटर में इंटरफेरे कर रहे हो?

सुमित:- ये मटर मेरा भी है.

कीर्ति:- मुझे अपना प्रॉपर्टी समझ रखा है क्या?

इस बार कुछ ज्यादा hi गुस्से में कीर्ति बोली.

सुमित:- Nahi...Tumhare परमिशन के बिना बिलकुल भी नहीं.

कीर्ति:- तो फिर ???

गुस्से में कीर्ति का सीट फटने hi वाला था.

सुमित:- ये मटर मेरा भी hai...Ek डॉक्टर और पेशेंट ka...As ा डॉक्टर मेरा भी मटर है.

कुछ डॉक्टर होते hai...Ya फिर होने वाले डॉक्टर होते hai...Jo अपने आप को बहुत बड़ा डॉक्टर समझने लगते hai...Unka कंडीशन ऐसा होता hai...Jaise कुआ की mendhak...Kua hi उससे सारा दुनिया दीखता hai...Jisse बहार निकलने के बाद hi असली दुनिया और असलियत का एहसास होता है.

काश ऐसे डॉक्टर को थोड़ा समझ में आता की कुछ काम करने से पहले उस बारे अच्छा ज्ञान हो.

वर्ण तो मब्ब्स का 1सत ईयर का एनाटोमी वाला स्टूडेंट न्यूरो सर्जन है और 2ंद ईयर के पैथोलॉजी वाला स्टूडेंट डिजीज स्पेशलिस्ट.

अब्ब आता हूँ उस सवाल के जवाब par...Ye मटर मेरा इस लिए भी है क्यों की अगर कल कोई कह देगा की डॉक्टर की लापरवाही से पेशेंट का ये हाल हो गया है.

शर्म की बात है...1% नेग्लिजेंट डॉक्टर की वजह से सभी डॉक्टर के लिए शर्म की बात है.

ये बात कुछ ज्यादा hi चुभ गया कीर्ति को.

कीर्ति:- थोड़ा पढ़ाई karo...Agar अच्छे से पढोगे तब डिजीज और ट्रीटमेंट ऐसे hi पता चल jaayega...Confidence नाम की चीज भी होता hai...Jo खुद में होना chaahiye...Diabetes के बारे में पता नहीं है क्यों की अभी पढ़ा नहीं hai...Warna हार्ट तक बिलकुल सही थी.

सुमित:- बिलकुल गलत थी.

कीर्ति इस बार गुस्से से घूरती है.

सुमित:- तुम्हें तो ये भी नहीं पता है की ब्लड प्रेशर हार्ट डिजीज के अलावा बाकी ऑर्गन की डिजीज से भी होता hai...Sahi गलत की बात तो रहने hi do...Aise में बाकी ऑर्गन का ट्रीटमेंट करना पड़ता है जिससे ब्लड प्रेशर मेन्टेन हो सके.

कीर्ति:- तुम्हे तो जैसे सब पता है.

सुमित:- थोड़ा bahut...Lekin इतना भी नहीं पता की अभी ट्रीटमेंट मोडेलिटी और दवाई का डीडे कर saku...Bina पेशेंट को देखे और चेक उप के तो बिलकुल भी नहीं.

अब्ब कीर्ति कुछ नहीं bolti...Eo वह से जा hi रही थी की विवेक भी उसके पीछे जाने लगा.

विवेक:- Chill...Ignore करो ऐसे लोगो को.

कीर्ति:- अगर 2ंद ईयर भी पढ़ लिया होता तो दिखाती इसको औकात.

सुमित को घूरते हुए कीर्ति वह से निकल गयी.

कीर्ति के जाने के बाद सुमित वही छत के एक कोने में चला गया.

मेघा जो इतनी देर से दोनों को देख रही थी सुमित के पास आ कर.

मेघा:- इस बार तो कीर्ति और भी नाराज हो गयी.

सुमित:- लेकिन इस बार मई सही था और मेरा गुस्सा भी.

ये बात सुमित ने अपने दिल से कहा tha...Kirti के मामले में सुमित हमेशा hi खुद को गलत मानता आया था.

गुस्सा आता है यार ये सब देख kar...Little नॉलेज इस डेंजरस कहु या फिर Overconfidence...Kirti को भी लगा होगा β ब्लॉकर देने से ब्लड प्रेशर नार्मल हो jaayega...Lekin ट्रीटमेंट स्टार्ट करने से पहले दवाई के बारे में जाना पड़ता है अच्छे से और बाकी के हेल्थ कंडीशन भी.

बहुत पढ़ने के बाद उस नॉलेज को अच्छे से अप्लाई करना पड़ता है डिसिशन मेकिंग mein...Aise hi कोई डॉक्टर नहीं बन जाता.

ये छोटी सी गलती और इग्नोरेंस कभी कितना भारी पद सकता है अंदाजा लगा नहीं सकते.

उम्मीद है कीर्ति को रीलीज़ हो जाएगा.

मेघा:- या फिर कही ये तुम्हारा नया प्लान तो नहीं कीर्ति को इम्प्रेस करने की.

सुमित:- अब्ब प्लान करना बंद कर diya...Waise भी किसी के हेल्थ इशू का अपने फायदा के लिए इस्तेमाल नहीं karunga..Sympathy वाला प्यार नहीं चाहिए.

फींका मुस्कान के साथ सुमित ने कहा.

सुमित को अभी दर्द में ये भी ख्याल नहीं था की जिस मेघा के सामने वो खुद को बुरा साबित कर रहा था अभी उसके सामने अपने दिल की बात कर रहा है.

मेघा:- यकीं नहीं हो रहा hai...Tum कीर्ति पर भी गुस्सा हो सकते हो.

सुमित:- वो गलत है तो गुस्सा आएगा hi.

जब सही है तब प्यार भी तो बहित करता हूँ.

मेघा:- हाँ yahi...Sahi और गलत समझना chahiye...Aankh बंद कर लेने से हर तरफ अँधेरा है ये समझना भी गलत hi है.

सुमित को समझ मई नहीं आया की मेघा की बात का इशारा क्या है.

अचानक से मेघा की चेहरा में मुस्कान आती hai...Jo वक्त के साथ और भी बढ़ रहा था.

सुमित:- क्या हुआ?

मेघा:- कुछ nahi...Vakt आने पर बताउंगी.

इतना कह कर मेघा भी वह से चली जाती hai...Shayad कुछ बहुत बड़ी बात पता चल गया था.

सुमित :- (तो हिमसेल्फ) ये भी पागल है.

सुमित कुछ देर छत में hi raha...Dil में अनेक ख्याल आ रहे थे कीर्ति कही और ज्यादा गुस्सा तो नहीं हो गयी? क्या उससे इतना गुस्सा होना चाहिए था?

लेकिन उससे एक छैन भी मिल रहा था की आज उसने सही किया hai...Koi गलती नहीं किया.

लेकिन दिल में एक दुआ भी कर रहा था की कीर्ति और ज्यादा नाराज न हो जाए.

नेक्स्ट डे
 
अपडेट 54

तुम्हारे लिए अलग से रिक्वेस्ट करना पड़ेगा?

गुस्से से भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

वैसे तो सुमित को कीर्ति की आवाज बहुत पसंद tha...Lekin ये aawaj...Iss आवाज ने तो सुमित को अंदर तक हिला दिया.

अब्ब कुछ पल के safar...Aur उसके बाद judaai...Shayad हमेशा हमेशा के liye...Yahi बात सोचते हुए सुमित का चेहरा फींका पद चूका था.

कीर्ति:- सुन्न नहीं रहे हो है यही रहने का इरादा है.

छिड़ते हुए कीर्ति boli...Sumit भी इस बार कार में बैठ gaya...Aage विवेक ड्राइविंग सीट में और उसके साथ कीर्ति बैठी thi...Sumit को पीछे मेघा के साथ बैठा पड़ा.

कार में बैठते hi उसने खुद को मजबूत बनाये रखने की कोशिश kiya...Iss सफर का हर एक पल को वो जीना चाहता tha...Kirti की याद के रूप में.

सुमित का नजर हर वक्त कीर्ति पर hi tha...Kirti भी ये बात नोटिस कर रही thi...Gussa तो उससे बहुत आ रहा tha...Lekin वो सुमित को बस कुछ hi पल का मेहमान सोच कर इग्नोर कर रही थी.

लेकिन Vivek...Wo कहा चुप रहने वाला tha...Apna हर बेइज़्ज़ती का बरला लेने का मौका शायद मिल गया था.

विवेक:- Kirti...Tumhe नहीं लगता किसी की भौंकने की आवाज आज कल उतना नहीं आ रहा hai...Accha hi है ये शान्ति का माहौल.

कीर्ति:- जरूर क्रेनियल नर्व 10 (कण10) डैमेज हुआ hoga...Jo लॉयन्स पर लकवा लग गया है.

विवेक:- कुछ समझ में आये ऐसा bolo...Jaruri नहीं की किसी का फार्माकोलॉजी अच्छा है तो एनाटोमी भी अच्छा हो.

जाते वक्त एक ज्ञान देता हूँ.

(सुमित को देखते हुए) कण 10 को वेगस नर्व भी कहते hai...Yaad कर lena...Kabhi काम आएगा.

सुमित को फिर भी कोई फर्क नहीं pada...Kirti से बिछड़ने की ग़म hi इतना था की विवेक की बात को ध्यान से सुना भी नहीं उसने.

फिर ऐसे hi कीर्ति और विवेक सुमित का और मजाक उड़ाने लगते hai...Sumit कीर्ति की बात पर बस मुस्कुरा deta...Isse ज्यादा वो कुछ रियेक्ट नहीं कर रहा था.

लेकिन मेघा को ये सब बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था.

मेघा:- (तो सुमित) अभी भी तुम चुप हो?

सुमित:- अच्छा hi लग रहा hai...Nafrat से hi sahi...Kirti मेरे बारे में कुछ सोच तो रही hai...Abhi के लिए यही काफी है.

मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Kirti ये सुन कर एकदम से हैरान हो जाती hai...Jaha वो सुमित को परेशान करना चाहती थी वही सुमित इस बात का मजा ले रहा था.

विवेक:- ये तो कहेगा hi...Kuch कहने के लिए बचा hi नहीं.

नेर्वेस के बारे में जिसे पता नहीं उससे एक्सपेक्ट भी क्या कर सकते है.

मेघा:- सुमित की लैरिंक्स का तो पता नहीं लेकिन तुम दोनों की सेरिब्रल कोर्टेक्स में मुझे प्रॉब्लम दिख रहा hai...Critical थिंकिंग नाम की चीज है hi नहीं तुम दोनों के पास.

कीर्ति:- क्या मतलब?

मेघा:- अगर होता तो अपना hi फ़ालतू ओपिनियन बना कर उस पर hi बकवास नहीं karte...Bahut आसानी से ुँडेरेस्तिमाते कर दिया तुम दोनों ने सुमित ko...Jaante क्या हो उसके पढाई के बारे में.

थ्योरी और प्रैक्टिकल के बिच क्या फर्क है जानते हो? एक्सपेक्टेशन और रियलिटी का फर्क.

और इसी सुमित ने जिस नर्व के बारे में तुम दोनों बात कर रहे थे वेगस nerve...Uss को कदावर (ह्यूमन बॉडी फॉर स्टडी) में दिखाया था जो हमारे क्लास के कोई स्टूडेंट्स नहीं दिखा पाया था.

विवेक:- तुम्हारे कॉलेज में होंगे सब स्टूडेंट्स बेकार होंगे. :lol1:

मेघा:- अच्छा तो तुम दिखा पाओगे ह्यूमन बॉडी में वो सारे पार्ट्स जो मई कहूँगी.

इस बार विवेक चुप हो गया.

मेघा:- यही फर्क होता है थ्योरी के 2-4 लाइन रटने (मेमोरीज़े) में और प्रैक्टिकल नॉलेज में.

इस बार विवेक का चेहरा में गुस्सा का भाव आ gaya...Lekin मेघा की बात का कोई जवाब नहीं था उसके paas...Gusse का घूंट पी कर वो गाडी चलाने पर मजबूत हो गया.

कीर्ति:- तू सुमित का साइड क्यों ले रही है?

मेघा:- मुझे इस वक्त सुमित सही लगा इस लिए.

मेघा की ये बात सुमित के लिए भी हैरानी का tha...Lekin सुमित को कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा.

कीर्ति:- तो तू इसका साथ ले कर हमारे दोस्ती को दाव पर रख रही है?

मेघा:- अगर टूट भी जाए तो कोई फ़िक्र nahi...Dosti दोनों तरफ से होती है और एक दूसरे को समझना ोाड़ता hai...Agar तू इस वजह से मेरे साथ दोस्ती तोडना चाहती है की मई सुमित का दोस्त हु तो तोड़ सकती hai...Mujhe कोई परवाह नहीं.

गुस्सा तो इस वक्त मेघा को बहुत आ रहा tha...Lekin वो गुस्से को खुद ओर हावी नहीं होने दे रही थी.

अब्ब कीर्ति भी चुप हो गयी.

मेघा सुमित की तरफ देखती है जो अभी मुस्कुरा रहा tha...Fir सुमित का ध्यान कीर्ति की और जाता hai...Jo कीर्ति पर hi टिक जाती है.

आज कीर्ति सुमित ऐ इतना गुस्सा थी की सुमित को नाश्ता के लिए पूछा भी नहीं.

मेघा:- चलो नाश्ता का वक्त हो गया है.

सुमित:- Nahi...Tum jaao...Mujhe खाने का मन नहीं है.

मेघा कुछ देर और तरय करती है लेकिन आखिर में उससे hi हार माना pada...Sumit खाने के लिए कार से निचे नहीं उतरा.

खा कर सब वापस कार में आये और कार ने एक बार फिर अपना सफर सुरु कर दिया.

सुमित की नजर मेघा की तरफ पड़ा जब मेघा ने बिस्किट्स के कुछ पैकेट्स सुमित की और बढ़ाया.

सुमित:- ारी नहीं.

मेघा:- रखो.

सुमित:- Nahi...Khaane का मन सच में नहीं है.

मेघा:- कहा न रखो.

इस बार मेघा की बातों में आर्डर tha...Iss बार सुमित को hi हार मानना पड़ा.

और फिर सुमित का नजर कीर्ति की और gaya...Jo वही पर टिक गया.

हर बढ़ते वक्त के साथ सुमित की दिल की धड़कन भी बढ़ रहा tha...Dil में दर्द उठ रहा था ये सोच कर की अब्ब वो वक्त आने hi वाला है जब कीर्ति उसकी नजरों से दूर हो jaayegi...Hamesha हमेशा के लिए.

जब उसके बस में कुछ नहीं रहा.

सुमित:- अब्ब तो सिर्फ एक नामुमकिन सा ख्वाहिश बाकी hai...Kaash ये वक्त यही पर रुक जाए.

इसी ख्वाहिश से ये पता चल रहा था की सुमित खुद को कितना लाचार महसूस कर रहा था.

लेकिन vakt...Wo किसके लिए रुकता है? वो तो उसी गति (वेलोसिटी) के साथ आगे बढ़ रहा tha...Kekin सुमित को आज कुछ ज्यादा hi तेज महसूस हो रहा था.

वो बस बढ़ते वक्त के साथ कीर्ति को खुद से दूर होता महसूस कर पा रहा tha...Ye बातें उसकी चेहरा और आँखों में भी साफ़ झलक रहा tha...Aankhon पर तो फिर भी काबू tha...Lekin chehra...Wo तो जैसे एक आईना (मिरर) था उसके दिल की दर्द की.

और आखिर में वो वक्त भी आ गया.

कीर्ति:- उतरो abb...Tumhara स्टॉप आ गया.

लेकिन सुमित का कार से उतरने का दिल नहीं कर रहा था.

कीर्ति:- जल्दी karo...Hamein और भी आगे जाना है.

सुमित धीरे धीरे अपना कदम आगे बढ़ाने लगा और कुछ hi देर में वो अपने लगेज के साथ कार के बाहर था.

कीर्ति को और भी हैरानी तब हुआ जब मेघा भी कार से उतर गयी अपने लगेज के साथ.

दिल में दर्द तो बहुत tha...Lekin शायद आखिरी मुलाक़ात की वजह से सुमित कुछ हिम्मत जुटा कर.

सुमित:- (तो कीर्ति) अपना ख्याल रखना.

कीर्ति:- हाँ ठीक है.

सुमित:- कभी जरुरत पड़े तो याद कर लेना.

कीर्ति:- नहीं पड़ेगी.

फिर कार आगे बढ़ जाता है और सुमित देखता hi रह जाता hai...Aur वो तब तक देखता है जब तक कार उसकी नजर से ओझल ना हो गया.

फिर आखिर में एक हारा हुआ मुस्कान के साथ जब उसने अपना नजर घुमाया तब सामने मेघा को देख हैरान हो gaya...Usne तो मेघा को कार से उतारते देखा hi नहीं था.

मेघा:- घर जाओगे या फिर?

सुमित:- सोच रहा hun...Hostel में hi रहने की.

मेघा:- घर क्यों नहीं?

थोड़ा गुस्से में मेघा बोली.

सुमित:- बस ऐसे hi.

सुमित:- (इन हिज मंद) घर वालों को फेस करने की हिम्मत नहीं है अभी इस हालत में.

मेघा:- तब तो बहुत बेकार इंसान हो tum...Tumhare माँ और पापा इंतजार कर रहे होंगे की तुम कब घर aaoge...Lekin एक साल बीत गया मब्ब्स ka...Tumhara कोई अट्टा पत्ता नहीं.

एक काम karo...Doctor बन कर hi जाना अब्ब घर.

इस बार मेघा की बातों में गुस्सा था.

सुमित:- (इन हिज मंद) शायद सही कह रही है ye...Bahut वक्त हो गया घर गए hue...Maa, पापा और Rashmi...Intejaar कर रहे होंगे ये तो सोचा hi नहीं.

अगर आज मेरा ये हालत है तो जिम्मेदार भी मई hi hu...Apni गलती का सजा उन्हें नहीं दे sakta...Waise भी 1 हफ्ता की hi तो बात है.

सुमित:- घर जाने का hi सोच रहा हूँ.

मेघा का गुस्सा सुमित की इस बात पर शांत होती है.

सुमित:- और तुम?

मेघा:- मई भी घर jaaungi...Bahut दिन हो गए है.

सुमित:- चलो मई बस स्टैंड तक छोड़ देता हूँ.

मेघा:- Nahi...Iski कोई जरुरत नहीं.

सुमित:- सूरे?

मेघा:- Sure...Tum भी अच्छे से जाओ.

शायद सुमित भी यही चाहता tha...Abhi उसका जो हालात था उस वजह से वो ज्यादा बात करना या फिर कही और जाना नहीं चाहता था.

सुमित:- Ok...Have ा सेफ जर्नी.

मेघा:- शामे तो यू.

फिर उसके बाद सुमित अपने घर की तरफ बढ़ जाता है.

आ गए डॉक्टर साहब?

कुछ ज्यादा hi ख़ुशी था सुमित की पापा की आवाज में आज.
 
शुभ काम में देरी किस बात की. :डेड: अभी लिख देता हूँ अपडेट.

अपडेट 55

कुछ देर सुमित का अपने पेरेंट्स से बात करने के बाद सुमित के डैड ने पूछा.

स. डैड:- शादी की क्या प्लान है.

सुमित:- अभी कोई मूड नहीं है.

स. डैड:- अभी की बात कौन कर रहा है? तेरे मब्ब्स के बाद की बात hai...Koi लड़की है तो बता नहीं तो मई खुद hi सेलेक्ट करूँगा.

सुमित का दिल में आया कीर्ति का नाम ले लेकिन अब्ब उतना हिम्मत शायद नहीं था.

सुमित:- आपका जो मर्जी.

फिर उसके बाद सुमित के पापा सुमित के लिए लड़की ढूंढ़ने लगते hai...Aur वो तलाश एक साल बाद ख़त्म हुआ.

इंगेजमेंट सेरेमनी सुमित के लिए सरप्राइज रखा गया tha...Aur उससे भी बड़ा सरप्राइज वो लड़की.

ये सच में hi सरप्राइज था सुमित के liye...Wo लड़की कोई और नहीं मेघा थी.

कोइंसिडेन्स कहे या फिर kismat...Dono को hi भरोगः नहीं tha...Pehle थोड़ा ावक्वार्ड फील हुआ लेकिन धीरे धीरे एक दूसरे को समझने लगे.

अपडेट 56

इस अपडेट में शादी की डिमांड था तो शादी भी हो गया. :डेड:

दोनों का प्यार वक्त के साथ इतना गहरा हुआ की सुमित कीर्ति को भूलने लगा और मेघा के साथ जिंदगी में आगे बढ़ गया. :वूहू:

थे एन्ड (अब्ब कोई अपडेट नहीं मांगेगा :बात:)

राइटर नोट बाद में. :यौन:
 
चिल hi हूँ bhai...Accha लग रहा है ये कमैंट्स देख कर :) राइटर का काम होता है अपना किसी सोच को स्टोरी का रूप देना और रीडर्स का फीडबैक देखना की उन्हें वो पसंद आ रहा है या nahi...Aur रीडर्स उस सोच के बारे में फीडबैक देते है और साथ hi स्टोरी का नररातिओं का भी की वो पढ़ने में इंटरेस्टिंग है या boring...Kabhi तारीफ़ तो कभी कमियां.

और अभी जो डिस्कशन चल रहा है वजह यही है की वो स्टोरी में थोड़ा रेलाताब्ले फील कर रहे है और पसंद आ रहा है तभी इस पर बात कर रहे है की शायद ऐसा होता तो स्टोरी और अच्छा hota...Sach में ये देख बहुत hi अच्छा लग रहा है जो पिछले कुछ स्टोरीज में मिस कर रहा था. :)
 
अपडेट 55

सुमित कुछ बोलने hi वाला था की.

स. डैड:- क्या लगा? ऐसा कुछ बोलूंगा.

सुमित उनके पेअर छूने के बाद.

सुमित:- अभी तक आप के एक्टिंग में कोई सुधार आया नहीं hai...Kehna तो आप वही चाह रहे थे.

सुमित के पापा कुछ देर मुस्कुराने के बाद कहते है.

स. डैड:- कहना तो वही चाहता hun...Lekin समझने वाला भी तो चाहिए.

सुमित:- आपकी बात नहीं समझूंगा तो किस की बात samjhunga...Aap चाहते थे मई मब्ब्स padhu...To पढ़ रहा हूँ.

और पढ़ाई में इतना खो गया की वेकेशन में भी पढ़ hi रहा था.

स. डैड:- माना की मेरा एक्टिंग अच्छा नहीं hai...Lekin दुसरो की एक्टिंग जज करने की कला है मुझमे. :हिंतहिंट2:

सुमित के लिए ये बात सच में हैरानी का था.

स. डैड:- अब्ब तो पता चल गया होगा तेरा एक्टिंग मुझसे भी बकवास है.

सुमित:- क्या पापा...

स. डैड:- घूमने के लिए गया था न दोस्तों के साथ.

सुमित इस बार सोच में पद गया क्या bole..Jhuth बोल भी नहीं पा रहा था और सच बोल भी नहीं सकता था.

स. डैड:- चिल बीटा Chill...Koi शिकायत नहीं hai...Ghumne का टाइम भी यही hai...Mind फ्रेश भी हो गया hoga...Abb इसी फ्रेश मंद के साथ आगे बहुत पढ़ना भी तो है.

पढ़ेगा ना? :हिंतहिंट:

सुमित ने बस हां में सर हिलाया.

स. डैड:- चल सही है.

फिर सुमित घर के अंदर आता है.

स. माँ :- (तो स. डैड) क्या आप भी? अभी आया hi है की आप सुरु हो गए.

(तो सुमित) और tu...Kabhi मुझसे भी बात कर लिया कर.

सुमित:- करता तो hun...Roj hi तो बात होता है फ़ोन में.

स. माँ:- ये भी सही hai...Phone में बात कर लिया तो हो gaya...Abhi आया hi क्यों है? वीडियो कॉल से hi अपना मुंह दिखा deta...Ye फ़ोन भी ना.

सुमित:- (विथ स्माइल) मेरा गुस्सा फ़ोन पर तो मत निकालिये.

स. माँ:- ये भी सही hai...Jab बीटा hi नालायक हो तो क्या कर सकते है.

रश्मि:- पहली बार आपने सच kaha...Bhaiya है की नालायक.

सुमित:- आप मुझे तो कहती hai...Lekin देखिये isko...Aapke सामने hi मोबाइल चला रही hai...Jaise आपको चिढ़ा रही है.

सुमित का बस इतना hi कहना था की उसकी माँ रश्मि की हाथ से मोबाइल छीन लेती है.

स. माँ:- Jaa...Jaa कर पढाई कर.

सुमित:- आया मजा? और ले पंगे.

रश्मि:- बदले के लिए तैयार रहिये.

सुमित:- वो तो बचपन से तैयार hi हूँ.

रश्मि:- वो तो आपको बच्चा समझ कर माफ़ कर देती थी.

सुमित:- Waah...Kitni महान है तू.

रश्मि:- बात मत कीजिये mujhse...Mai नाराज हु आपसे.

सुमित:- नाराज है? ये नाराज होना भी आज कल का फैशन है क्या? जिसको भी देखु नाराज हो जाता है कभी भी किसी भी वजह से.

वैसे तेरी नाराजगी की वजह क्या है?

रश्मि:- हमेशा जब भी बाहर से आते thhe...Mere लिए चॉकलेट्स लाते थे? लेकिन इस बार?

सुमित:- इस बार भूल गया. :lol1:

रश्मि:- इसी लिए नाराज हूँ.

सुमित:- चॉकलेट्स मत खाया kar...Kide पड़ेंगे दांत में.

रश्मि:- कौन से कीड़े?

सुमित:- बैक्टीरिया नाम होते है उनके.

रश्मि:- कौन से बैक्टीरिया?

सुमित:- क्या करेगी जान कर? वैसे भी बैक्टीरिया और उनका जन्म कुंडली याद करना हमारा सर दर्द है.

रश्मि:- गूगल में सर्च karungi...Kis बैक्टीरिया के लिए क्या एंटीबायोटिक लेना है.

सुमित:- गूगल में.

रश्मि:- घर में आप जैसे नालायक डॉक्टर है तो गूगल की hi जरुरत है.

वैसे नालायक मई नहीं कह रही हूँ माँ कह रही थी.

सुमित:- तो फिर इस नालायक की यहाँ क्या काम?

नाराजगी का दिखावा करते हुए सुमित अपने रूम की और चला गया.

आ गया तू? बस तेरा hi कमी tha...Tu और तेरा टाइमिंग.

थोड़ा छिड़ते हुए सुमित बोलै.

आशीष:- अरे yaar...Mai तो सरप्राइज देने आया था.

सुमित:- तेरा सरप्राइज किसी सर दर्द से काम नहीं होता.

फिर सुमित अपना मुंह धो कर आता tha...Ye छिड़ था आशीष का उसके रूम में अचानक से आ जाने se...Jisne सुमित को गहरी नींद से जगा दिया था.

फिर सुमित बीएड में आ कर बैठ जाता hai...Kuch देर आशीष भी चुप hi रहता hai...Jab सुमित नार्मल हो गया तब.

आशीष:- ये क्या हाल बना रखा है तूने?

सुमित कुछ नहीं बोलता.

आशीष:- इतना कमजोर तो कभी नहीं देखा तुझे.

सुमित:- जानता hi है हालत क्या hai...Bas एक वजह की जरुरत है.

सुमित ने बस इतना कहा hi था की उससे कुछ याद आता है.

मोबाइल चेक करने पर वो सोच सही tha...Megha का मसाज tha...Sone से पहले hi आया था उससे वो mesaage...Lekin नींद में रिप्लाई नहीं कर पाया था.

मसाज में लिखा था. "पहुँच गए."

रिप्लाई में,

सुमित:- हाँ कुछ देर pehle...Aur तुम.

थोड़ी hi देर में मेघा का रिप्लाई आता है.

मेघा:- कुछ hi देर में.

इस बार सुमित रिप्लाई नहीं करता है.

आशीष:- कौन है?

सुमित:- मेघा.

आशीष:- ये वही है ना जिसके थ्रू तू कीर्ति तक पहुंचना चाहता था.

सुमित:- हाँ.

आशीष:- तूने ये भी बताया था की तूने उससे सब सच बता दिया है.

सुमित:- Haan...Bata चूका हूँ.

आशीष:- फिर अभी भी तुझसे क्यों बात कर रही है? उससे तो तुझसे नफरत होना चाहिए था.

सुमित:- पता nahi...Mai भी यही सोच रहा हूँ.

सुमित की बात में हैरानी साफ़ दिख रहा tha...Usse अभी भी समझ में नहीं आ रहा था की मेघा अभी भी उससे बात क्यों कर रही है?
 
फ्रेंड्स अभी तक अपडेट के बारे में सोच hi रहा hun...Update का एंडिंग तो मिल चूका है लेकिन स्टार्टिंग नहीं :(...स्टोरी भी ऐसे मोड़ में पहुँच चूका है जहा से खींचने की चान्सेस बहुत है जो बिलकुल भी नहीं chaahta...Koshish करूँगा स्वीट एंड शार्ट में डेस्क्रिबे करने ki...Thoda टाइम और चाहिए इस अपडेट के liye...Delay के लिए सॉरी. :प्रे:
 
अपडेट 56

अब्ब क्या सोच रहा है?

कुछ देर से सुमित को चुप देख आशीष ने पूछा.

सुमित:- कुछ भी nahi...Abb तो सोचने के लिए भी कुछ बचा नहीं है.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

आशीष:- तुझे पता hai...Ye फेक स्माइल के साथ बहुत बदसूरत लगता है.

सुमित:- हैंडसम तो मई कभी था भी नहीं तेरे हिसाब से.

ये कहते वक्त सुमित के होंठो पर अपने आप मुश्कान आ gaya...Ye देख आशीष भी खुश हो गया.

आशीष:- बस ऐसे hi...Aise hi मुस्कुराया kar...Fir से पहले वाले सुमित बन जा.

ये सुनने के बाद सुमित का चेहरा पहले जैसे लटक gaya...Shayad एक बार फिर हकीकत से मुलाक़ात हो गया.

सुमित:- दिन में तो बन jaaunga...Tu hai...Aur कुछ दोस्त hai...Jinke साथ दिन गुजर jaayega...Lekin रात और वो तन्हाई के pal...Wo नहीं काटते है yaar...Har वक्त वो याद आती hai...Usko यादें, उसकी प्यार उसकी naarajgi...Yahi सब.

बहुत मुश्किल से खुद को संभाल पा रहा hun...Pata नहीं कब तक सेह पाऊंगा.

इस बार सुमित की आवाज में दर्द साफ़ झलक रहा था.

आशीष:- बस कुछ दिन aur...Fir सब ठीक हो जाएगा.

सुमित:- कुछ दिन बाद क्या? क्या कीर्ति वापस आ जायेगी?

थोड़ा गुस्सा था इस बार सुमित की बात में.

आशीष:- Nahi...Lekin इस अँधेरी रात का नया सुबह aayega...Ye साड़ी दर्द एक नयी ख़ुशी का रूप लेगा.

आशीष की आवाज में एक विश्वाश था या फिर एक dua...Sumit को सँभालने के लिए.

सुमित:- हाथ दे तू अपना.

आशीष कन्फूसिओं में अपना हाथ आगे बढ़ता है.

आशीष:- अबे क्या कर रहा है?

दर्द की एहसास होते hi आशीष ने कहा.

सुमित:- तेरा हाथ तोड़ रहा hun...Waise दिल कर रहा है काटने के liye...Lekin चाक़ू नहीं है अभी.

सुमित आशीष की हाथ को और तेजी से मोड़ने लगता है.

आशीष:- पागल हो गया है क्या?

आशीष थोड़ा दर्द के साथ चिल्लाता है.

सुमित एक नजर आशीष को गुस्से से देखता है और फिर उसका हाथ छोड़ देता है.

सुमित:- क्यों क्या हुआ? हाथ टूट भी जायेगा तो क्या होगा? कुछ पल दर्द hoga...Fir कुछ वक्त के बाद वो दर्द ख़त्म हो jaayega...Yaa फिर हाथ काटने से क्या होगा? जख्म तो भर जाएगा na...Iss दर्द को भी एक अँधेरी रात समझ ले.

सुमित ने गुस्से में kaha...Aage भी उसने कहना जारी रखा.

सुमित:- ज्ञान देना ाशन hai...Bas कुछ पल की दर्द hai...Fir तो सब ठीक हो jaayega...Kehna कितना ाशन hai...Lekin खुद सहना?

जो इस दर्द के साथ जीता है ना बस वो hi इस दर्द को महसूस कर सकता hai...Kaun जीना चाहता है उस अँधेरा में जहा दूर दूर तक सूरज की कोई रौशनी ना दिखाई दे? कौन जीना चाहता है एक ऐसी जिंदगी जिसे खुद अपनी जिंदगी सजा लगता है? कौन? मेरा भी कोई शौख नहीं है ऐसी जिंदगी जीने की.

कई बार कोशिश किया है इस दाल दाल से बाहर निकलने की? लेकिन तन्हाई की वो vakt...Jab खुद से hi खुद का दिल हार जाता है और उसके बाद दिल में जो इश्क़ का दर्द उठता है वो अच्छा अच्छों की हालत ख़राब कर देता है.

बहुत लोग कहते है ऐसे में दिमाग का इस्तेमाल करना chahiye...Sahi भी hai...Lekin जब वो इस हालात में होंगे तब पता चलेगा ऐसे वक्त में दिमाग कैसा काम करता hai...Dusro की नजर में ये पागलपन होता है और खुद के लिए एक jung...Maanasik jung...Apne इमोशंस को ले कर.

कोशिश तो बहुत किया है लेकिन खुद के hi दिल और दिमाग से हार जाता हूँ.

और ऊपर से खुद से sawal...Itni जल्दी कैसे हार मान सकता हूँ? इतना कमजोर हूँ मई?

खुद की अस्तित्वा के लिए जुंग और मानसिक jung...Bas यही दो जुंग के बिच पीस रहा हूँ.

सुमित ने अपना सारा फ़्रस्ट्रेशन एक सांस में बाहर निकाल दिया.

सुमित:- इसी लिए मजाक मत उड़ाना की ये सब नार्मल hai...Bahut जल्द ठीक हो jaayega...Ye कहने से पहले ये बुइ सोचना की अगर तू भी मेरे हालात में होता तो ऐसा hi कहता?

आशीष:- थोड़ा बहुत हाल तो मेरा भी वैसा hi hai...Apne दोस्त को इस हाल में देखना और उसको वापस पहले जैसा हँसता खेलता रूप में देखने के लिए tadapna...Ye भी आसान नहीं hai...Bhale hi तेरा ग़म के सामने ये कुछ ना ho...Lekin ये भी मई सेह नहीं पा रहा हूँ यार.

और बस तुझे सिम्पथी देने के लिए ये सब नहीं कह रहा hu...Sach में चाहता हूँ फिर से उसी सुमित को देख सकू जो हमेशा कॉन्फिडेंस से भरा पड़ा रहता hai...Wo कॉन्फिडेंस अभी से देखना चाहता हूँ जिससे तू इस अँधेरी रात से लड़ सके.

सुमित:- कॉन्फिडेंस अभी भी बहुत hai...Confidence अभी भी है एग्जाम के एक रात पढ़ कर एग्जाम पास होने ki...Confidence अभी भी है अपने घर वालों की उम्मीद पर खड़ा उतरने ki...Confidence अभी भी है अपने दोस्तों की हर एक मुशीबत से लड़ने ki...Confidence अभी भी है हाथ में बात पकड़ने के बाद अच्छे अच्छे बोव्लेर्स की छक्के छुड़ाने ki...Confidence अभी भी है अपने दोस्तों की हर मुशीबत से लड़ने की.

लेकिन कॉन्फिडेंस नहीं है तो अपने लिए लड़ने ki...Apne चाहत पूरा करने ki...Kirti को मनाने की.

बस यही एक कॉन्फिडेंस की कमी मुझे हर दिन कमजोर बनाता जा रहा है.

आशीष:- लेकिन मई कॉंफिडेंट हूँ की ये कॉन्फिडेंस भी तुझे milega...Bas कुछ वक्त और.

सुमित:- और मई कॉन्फिडेंस के साथ कह सकता हूँ की ये तेरा जोके था.

आशीष:- ये कॉन्फिडेंस तेरा गलत फेहमी है.

सुमित:- अब्ब बस भी kar...Ye कॉन्फिडेंस शब्द सुन कर hi इर्रिटेशन हो रहा है.

आशीष:- तब कॉन्फिडेंस शब्द को कीर्ति से बदल dunga...Aur सब कुछ ठीक हो जाएगा.

सुमित:- तब तो मुझे कॉन्फिडेंस शब्द से प्यार हो जाएगा.

इस बार सुमित ने हँसते हुए कहा.

आशीष:- आगे का क्या सोचा है?

कुछ देर बाद आशीष ने पूछा.

सुमित:- कुछ nahi...Abb कुछ नहीं sochunga...Thak गया सोचते sochte...Abb करूँगा तो सिर्फ intejaar...Apni कीर्ति का.

आशीष:- फिर वही बात?

सुमित:- ये प्यार है ladke...Bhulaye भुला नहीं जाता.

सुमित ने मुस्कुराते हुए kaha...Bhale hi इस मुस्कान का मतलब कुछ और था.


2 डेज लेटर


ये मेघा कौन है?

थोड़ा शक भरी आवाज में रश्मि ने पूछा.

सुमित:- दोस्त है लेकिन तू क्यों पूछ रही है?

रश्मि:- 3 मिस्ड कैला hai...Aap फ़ोन डिनर के बाद वही टेबल पर भूल आये थे.

सुमित:- (इन हिज मंद) मेघा की मिस्ड call...Kya बात हो सकता है?

सुमित ने फिर मोबाइल रश्मि की हाथ से liya...Usne मोबाइल पकड़ा hi था की तभी मेघा की एक और कॉल आता है.

सुमित:- Hello.

मेघा:- हलुओ सुमित्ततत्तत.

मेघा की आवाज में वो dar...Jisse सुन्न सुमित भी दर gaya...Kahi कुछ बहुत बुरा तो नहीं हो गया मेघा के saath...Iss दर का एहसास से hi सुमित का नशा एक पल में hi गायब हो गया.
 
अपडेट 57

सुमित:- हाँ Megha...Kya बात है.

सुमित की आवाज में भी दर tha...Wo ऊँगली से रश्मि को वह से जाने की इशारा करता hai...Rashmi भी कोई सीरियस मटर समझ कर चली जाती है.

मेघा:- वो दादी को...

मेघा इससे आगे बोल नहीं पा रही थी.

सुमित:- हाँ क्या हुआ दादी को?

मेघा:- अस्थमा का अटैक....

मेघा अपनी बात पूरी भी नहीं कर पा रही थी.

अब्ब सुमित को भी पूरी बात समझ में आ गया.

सुमित:- दवाई का नाम बताओ.

मेघा दवाई का नाम बता देती hai...Aur सुमित फ़ोन रख कर अपने पापा के पास जाता है.

सुमित:- पापा बाइक की चाभी चाहिए.

स. डैड:- इतनी रात को?

घडी की और देख कर.

स. डैड:- रात के 10 बज रहे है.

सुमित:- इमरजेंसी है.

सुमित अभी किसी भी तरह से सवाल जवाब से बचना चाहता था.

स. डैड:- कैसी इमरजेंसी?

सुमित:- एक दोस्त hai...Help चाहिए था उसको अभी.

कुछ सोचते हुए सुमित ने कहा.

स. डैड:- कोई लड़की है?

सुमित के पापा चाभी सुमित के हाथ में दे कर कहते है.

स. डैड:- कोई लड़की है?

सुमित इस बार हैरानी से उन्हें देखता है.

स. डैड:- बहुत सोच कर तूने जवाब दिया की कोई दोस्त hai...Har बार तूने सीधा नाम बताया hai...Iss बार सोचना पद रहा है तुझे.

सुमित कुछ नहीं बोल पाया.

स. डैड:- अभी jaa...Koi प्रॉब्लम हुआ तो फ़ोन कर देना.

सुमित सर हिला कर वह से जाने लगा.

पीछे से.

स. डैड:- और अच्छे से चलाना bike...Tu बहुत hi राश ड्राइविंग करता है.

सुमित:- ध्यान रखूँगा.

सुमित के जाने के बाद.

स. माँ:- इतनी रात को?

सुमित की माँ की आवाज में थोड़ा दर और थोड़ा हैरानी था.

स. डैड:- कुछ ज्यादा hi जरुरी काम hoga...Jis तरह से वो बात कर रहा था.

स. माँ:- लेकिन मुझे घबराहट हो रही है.

स. डैड:- घबराहट की बात तो hai...Par अब्ब बड़ा हो गया hai...Thoda बहुत जिम्मेदारी भी सिख रहा hai...Apne दोस्त का मुशीबत में साथ देना जिम्मेदारी hi है.

फ़िक्र मत karo...Agar कुछ गड़बड़ हुआ तो मई hun...Sambhaal लूंगा.

फार्मेसी के बाद अस्थमा की दवाई लेने के बाद एक बार फिर सुमित हवा का सैर कर रहा tha...Ye बात उसकी बाइक की रफ़्तार साफ़ बता रहा tha...Khulla रोड और 70 कम्फ की रफ़्तार.

सुमित की दिमाग़ में अभी सिर्फ और सिर्फ मेघा की hi बातें घूम रहा tha...Uski dar...Yahi साड़ी बातें उससे बहुत बेचैन बना रहा tha...Kisi भी हाल में मेघा के पास पहुंचना चाहता था वो जल्द से जल्द.

जब भी हाथ एक्सेलरेटर पर जोर देने लगता उससे अपने पापा की बात सुनाई देने लगता.

उसी रफ़्तार में सुमित 1:30 हर के बाद्द मेघा के घर पहुँच गया.

बाइक से उतारते hi दिल में अलग hi घबराहट tha...Man hi मन वो मेघा की दादी की सलामती की दुआ मांग रहा था.

घर में नॉक करते hi गेट मेघा ने खोला.

सुमित:- अब्ब दादी कैसी है?

मेघा कुछ जवाब देती उससे पहले hi घर के सभी लोग बाहर आते hai...Unn में से एक दादी भी थी.

सुमित:- अब्ब कैसी है आप दादी?

थोड़ा हैरानी के साथ सुमित ने pucha...Jis तरह से मेघा बता रही थी उससे तो दादी की तबियत बहुत ख़राब tha...Lekin अब्ब?

दादी:- अब्ब ठीक हूँ बीटा.

म. डैड:- अभी कुछ देर पहले hi इन्हे अस्पताल से लाया hun...Abb ठीक है.

लेकिन तुम?

सुमित:- मेघा ने बताया था दादी की तबियत बहुत खराब hai...Issi लिए दवाई ले कर आया हूँ.

सुमित ने दवाई की कुछ टेबलेट्स मेघा की पापा की तरफ बढ़ा दिया.

मेघा:- दवाई ख़त्म हो गया tha...Aur दादी की तबियत भी बिगड़ रहा tha...Hospital थोड़ा दूर है और अभी गांव में बहुत काम लोग के पास गाडी hai...Kisi तरह श्याम काका की बाइक का इंतजाम हो गया.

दिमाग़ कुछ काम नहीं कर रहा था और तुम्हे फ़ोन कर diya...Socha वर्स्ट केस में तुम्हारा दवाई hi काम आ जाए.

मेघा ने एक सांस में hi ये बात कह दिया.

सुमित:- सही kiya...Wo तो शुक्र है की वक्त में सब कुछ मैनेज हो गया.

मेघा को खुस देख सुमित ने भी राहत की सांस लिया.

कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद.

सुमित:- अच्छा तो अब्ब मई चलता हूँ.

म. डैड:- लेकिन इतनी रात को?

सुमित:- (विथ स्माइल) आया भी तो रात में hi hun...Koi प्रॉब्लम नहीं होगा.

माँ और पापा भी इंतजार कर रहे है.

सुमित अपनी बात कह रहा था वही मेघा की नजर सुमित की शर्ट के एल्बो वाले हिस्सा पर pada...Kuch लाल दिखाई दे रहा था.

जब मेघा सुमित के पास जा कर उस हिस्से को छूती है तो सुमित के मुंह से दर्द में थोड़ा सा चूख निकल आता है.

सभी को समझने में देर नहीं लगा.

सुमित:- वो एक टर्निंग में बाइक स्लिप हो गया tha...Bas छोटी सी जख्म है.

मेघा:- छोटी सी?

गुस्से में मेघा ने pucha...Fir उसके बाद किसी ने भी सुमित को वापस जाने नहीं दिया.

आखिर mein...Sumit ने पापा को फ़ोन कर दिया की वो रात में नहीं आ पायेगा.

सुमित के जख्म का इलाज करने के बाद उससे एक अलग रूम दे कर सभी सोने चले जाते है.

मेघा को अभी बहुत गुस्सा आ रहा tha...Sumit का केयरलेस ड्राइविंग पर या फिर खुद पर जो उसको इतनी रात में बुलाया?

इसी गुस्से में मेघा भी सू गयी.

नेक्स्ट डे

सुमित सुबह घर से थोड़ी दूर तालाब के पास बैठा था.

तुम तो कहते थे बाइक में एक्सपर्ट हो? और कल व जख्म क्या था?

पीछे से गुस्से में मेघा ने पूछा.

सुमित:- वो कभी कभी.

मेघा:- क्या कभी कभी?

सुमित इस बार मेघा के गुस्से का सामने कुछ बोल नहीं पाया.

दोनों के बिच खामोशी छा जाता hai...Sumit के पास बोलने के लिए कुछ नहीं tha...Megha के लिए अपने उस भूल के बाद तो बिलकुल भी नहीं.

मेघा भी सुमित की कुछ बोलने की इंतजार करती hi रह गयी.

मेघा:- उस दिन दारु की नशे में कीर्ति समझ कर तुमने मुझे सब कुछ बता दिया था.

अब्ब मेघा से भी रहा नहीं गया.

कुछ पल तो सुमित के चेहरे पर हैरानी के भाव थे लेकिन एकदम से फिर नार्मल.

सुमित:- अगर वो बात कीर्ति सुन लेती तो भी शायद कुछ फर्क नहीं पड़ता.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

अचानक से सुमित को कुछ रीलीज़ हुआ.

सुमित:- और तुमने उससे सच मान लिया?

हँसते हुए सुमित ने कहा इस baar...Achanak से उससे याद आया की उससे मेघा के दिल में अपने लिए नफरत भरना hai..Jo वो अपने ग़म में भूल सा गया था.

मेघा:- ये बात शायद तुम नहीं जानते की तुम बहुत बुरे एक्टर हो.

अचानक से सुमित के चेहरे के भाव बदल gaye...Abb और एक्टिंग उसके बस की बात नहीं था.

मेघा:- अब्ब कैसा है ये जख्म?

कुछ देर की खामोशी को तोड़ते हुए मेघा ने pucha...Fir खुद जख्म को देखते हुए कहती है.

मेघा:- बहुत जल्द भर जाएगा ये जख्म.

सुमित:- (इन हिज मंद) दिल का जख्म hi है जो कभी नहीं भरता.

जब सुमित से रहा भी नहीं गया,

सुमित:- तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो?

मेघा:- ये कैसा सवाल है?

मेघा को बिलकुल भी नहीं आया इस सवाल का मतलब.

सुमित:- ी मैं सच्चा या jhutha...Accha बुरा की बात नहीं कर रहा hun...Khud hi बुरा लगने लगा हूँ.

मेघा:- सच्चा.

विश्वाश भरी आवाज में मेघा ने जवाब दिया.

सुमित:- तुम्हे जो मुझसे नफरत करना चाहिए था लेकिन तुम्हे भरोषा है और कीर्ति जिसे प्यार करना चाहिए था उससे hi मुझ पर भरोषा नहीं.

इस बार लाख कोशिश करने के बावजूद सुमित के आँखों से आंसू के 2 बून्द निचे गिर गए.

कभी खुद को इतना कमजोर महसूस नहीं किया था सुमित ने.
 
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