Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 6 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 33


नेक्स्ट डे


क्या कर रहा है?

सुमित ने फ़ोन उठाया hi था की आशीष ने सवाल फायर कर दिया.

सुमित:- मच्चर मार रहा hun...Khayega?

सुमित की आवाज में इर्रिटेशन साफ़ झलक रहा था.

आशीष:- छिड़ा हुआ लग रहा है.

सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

आशीष:- अबे बता न?

सुमित फिर भी कुछ नहीं बोलै.

आशीष:- मेरे भाई को किसी ने डांटा?

आशीष ने बच्चे की आवाज में सवाल किया.

सुमित:- अभी...

इर्रिटेशन में सुमित इससे आगे नहीं बोलै.

आशीष:- मेरे भाई को चॉकलेट chahiye...Chal आजा खरीद देता hun...Lekin ऐसे रू मत.

सुमित:- बोर मत kar...Please.

आशीष:- जानता तो तू भी है की जब तक तू सच सच नहीं batayega...Tab तक तेरा पीछा नहीं छोडूंगा.

सुमित:- दोपहर के 12 बज रहे hai...Pata नहीं कीर्ति कहा चली गयी है.

आशीष:- तो ये है राज़ तेरे गुस्से ka...Tere छिड़ चिढ़ापन का.

आशीष ने हँसते हुए कहा.

सुमित:- अबे हंस मत.

आशीष:- तो फ़ोन कर le...Badi बात थोड़ी न है.

सुमित:- चुटिया दीखता हूँ तुझे मई? जो ये आईडिया दे रहा है.

सब कुछ तरय कर चूका hun...Phone नहीं उठा रही hai...Message का रिप्लाई नहीं दे रही hai...Pareshaan हो गया हूँ.

पता नहीं कहा चली गयी सुबह subah...Jo अभी तक वापस नहीं लौटी.

आशीष:- सब ठीक तो है naa...I मैं...

सुमित:- मेरे अलावा सब ठीक hai...Ghar में सब नार्मल है इसका मतलब कही गयी होगी वो इन्फॉर्म कर

के.

आशीष:- तो किसी से पूछ ले घर में?

सुमित:- पूछा था माँ se...Ulta उन्होंने hi मुझसे पूछ लिया की क्या काम है?

किसी तरह पढ़ाई की बहाना मार कर निकल आया.

आशीष:- टाइम तो पूछ leta...Kab तक वापस आएगी.

सुमित:- अब्ब इतना हिम्मत nahi...Unhone पूछ लिया की इतना क्यों इंटरेस्ट ले रहा है कीर्ति में तो क्या जवाब दूंगा.

आशीष:- तरस आ रहा है तुझ पर.

सुमित:- वक्त hi ऐसा है की तू भी मुझ पर तरस खा रहा है.

सुमित:- तू इस मटर में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रहा है?

आशीष:- बहुत दिनों से मुफ्त की पार्टी में नहीं गया इस्सलिये.

सुमित:- मतलब?

आशीष:- कुछ ख़ास nahi...Tujhse भी ज्यादा मई बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ की कब तेरा और कीर्ति का सेटिंग hoga...Aur कब ये प्यार को उसका मंजिल milega...Kab तुम दोनों की शादी की बात चलेगा और कब मुझे मुफ्त की पार्टी के लिए इनविटेशन मिलेगा?

सुमित:- दिन में भी सपना देखने लग गया है तू.

आशीष:- खैर छोड़, तुझे नहीं लगता तुझे कीर्ति से सच में प्यार हो गया है?

सुमित:- नहीं तो.

आशीष:- तो फिर ये intejaar...Intejaar की तड़प?

सुमित:- बैठे बैठे बोर हो रहा हूँ और बात करने के लिए भी कोई नहीं hai...Sirf इसी वजह से.

आशीष:- मई तो तैयार हूँ बात करने के liye...Din भर फ्री hi हूँ.

सुमित:- तुझसे कौन बात करेगा.

इतना कह कर सुमित फ़ोन कट कर देता है.

आशीष:- Kamine...Nahi सुधरेगा.

इतना कह कर वो मुस्कुराने लगता है.

दूसरी तरफ Sumit...Wo भी अपनी जगह पर सही tha...Kirti से बातें करना उससे अच्छा लगता tha...Lekin कितना अच्छा लगता है इस सवाल से वो खुद अनजान था.

फिर सुमित लग गया अपने काम mein...Macchar मारने का.

किसी तरह वक्त बीत ता gaya...Sumit की हालत और खराब होते जा रहा tha...Shaam होते होते सुमित से और रहा नहीं gaya...Chhat में जा कर इधर उधर भटकते हुए अपना फ़्रस्ट्रेशन दूर कर रहा था.

जब निचे दूर बेल्ल बजा तो एक उम्मीद सा jaaga...Khud उसी ने जा कर गेट खोला.

और गेट खोलते hi सामने का नजारा देख उसको ऐसा लगा जैसे किसी प्यासे मुसाफिर को मरुभूमि (डेजर्ट) में पानी मिल गया हो.

होंठो पर अपने आप hi मुस्कान लौट aaya...Uski नजर कीर्ति पर hi टिक गया.

कीर्ति भी सुमित को देख मुस्कुराती है और फिर चली जाती है.

सुमित भी वापस छत की तरफ चला जाता hai...Lekin इस बार दिल में ख़ुशी और उमंग के साथ.

छत में पहुँचते hi उसने कीर्ति को मैसेज किया.

सुमित:- कुछ बातें करनी hai...Aao छत में.

10 मिनट के इंतजार के बाद कीर्ति आ गयी.

कीर्ति:- Kahiye...Kya बात करनी है आपको मुझसे? वो भी छत में अकेले.

सुमित:- ऐसी hi ... कुछ ख़ास नहीं.

कीर्ति भी सुमित के पास पहुँच गयी.

सुमित:- कहा गयी थी तुम आज?

कीर्ति:- दोस्तों के साथ घूमने.

सुमित:- कौन दोस्त?

कीर्ति:- आप मेरी दोस्तों को थोड़ी ना जानते hai...Wohi मेघा और Neha...Jisse मंदिर में देखा था.

कीर्ति:- कही आप मेरा वेट तो नहीं कर रहे थे?

सुमित:- नहीं nahi...Mai क्यों करूँगा wait...Bas आज सुबह से नहीं दिखी तो पूछ लिया.

कीर्ति:- Sorry...Aapke मश्ग का रिप्लाई भी नहीं kiya...Thoda बिजी थी दोस्तों के साथ.

सुमित:- कोई बात नहीं.

सुमित ने किसी तरह कण्ट्रोल कर के कहा.

कीर्ति:- एक बात बताना था आपको.

सुमित:- प्लीज अब्ब कोई प्रोपोज़ मत कर देना.

कीर्ति:- वो तो मई पहले hi कर चुकी हूँ और अब्ब इंतजार कर रही हूँ आपके जवाब "हां" में सुनने का.

सुमित:- हाँ बताओ क्या बात बताना है.

बात को डाइवर्ट करते हुए कहा सुमित ने.

कीर्ति:- वही आप का सवाल? उस दिन मंदिर क्यों ले गयी थी?

सुमित:- हाँ बताओ.

थोड़ा एक्ससिटेमेंट के साथ सुमित ने कहा.

कीर्ति:- हम दोनों नए रिश्ते की सुरुवात करने जा रहे thhe...Pyar की rishte...Issi लिए सबसे जरुरी था भगवान् से आशीर्वाद lena...Hum दोनों का साथ हमेशा हमेशा के लिए बने रहे.

कीर्ति का कॉन्फिडेंस देख सुमित भी हैरानी रह गया.

सुमित:- क्या? नए रिश्ते? वो भी प्यार ke...Mai तैयार नहीं हूँ.

कीर्ति:- वो तो आप हो hi जाएंगे.

कीर्ति का कॉन्फिडेंस देख सुमित कुछ बोल नहीं पाया.

कीर्ति को भी लगा की वो सही जा रही है.

कीर्ति:- अभी तक आपने मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट नहीं किया? कही आप किसी और को तो नहीं चाहते है.

सुमित:- Nahi...Ye प्यार वयर मेरे लायक बात नहीं hai...Isse दूर hi रहता हूँ.

कीर्ति:- अच्छा hai...Baaki लड़कियों से आपको कोई मतलब नहीं.

सुमित:- मतलब तो उतना तुमसे भी नहीं है.

कीर्ति:- दिल तो कर रहा है अपने पांचो ऊँगली का छाप आपके गाल पर चिपका dun...Lekin कोई फायदा nahi...Daadhi इतना बढ़ा रखा है आपने की दिखेगा भी नहीं.

कीर्ति ने गुस्से में कहा.

सुमित मुस्कुराने लगा.

कीर्ति:- ऊँगली का छाप भले hi आपके गाल में नहीं छपे लेकिन मेरा नाम आपके दिल में छाप नहीं दिया तो नाम बदल दीजिये.

इतना कह कर कीर्ति मुंह फुला कर वह से चली गयी.


आफ्टर डिनर.


आज भी सुमित पानी भरने निचे किचन में आया.

कीर्ति:- नहीं Aunty...Aap को खाना hi पड़ेगा.

स. माँ:- Nahi...Mai ठीक हूँ.

कीर्ति:- खाइये.

कीर्ति ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए दवा सुमित की माँ को दिया.

स. माँ:- बस थोड़ा सा बुखार hai...Aaram करुँगी तो ठीक हो जाएगा.

कीर्ति:- मैंने kaha...Khaaiye.

इस बार कीर्ति की आवाज में रिक्वेस्ट काम आर्डर ज्यादा था.

सुमित की माँ भी दवा खा लेती है.

सुमित कीर्ति का ये रूप देख मुस्कुरा रहा था.

फिर वो आगे जा कर दवाई चेक करता है.

सुमित:- Paracetamol...Matlab NSAID...Galat दवाई नहीं है.

कीर्ति:- ये नसाइड क्या है?

सुमित:- पहले अच्छे से पढ़ो likho...MBBS में एडमिशन lo...Detail में समझ जाओगी फिर.

सुमित:- और Kirti...Bataana मुझे अगर माँ ने किसी चीज के लिए मना किया तो.

सुमित:- और Maa...Future डॉक्टर है ye...Sochna मत की आप का कोई भी मनमानी चलेगी कीर्ति के साथ वो भी हेल्थ की इशू में.

इतना कह कर सुमित वह से जाने लगा तभी उससे कुछ याद आया.

सुमित:- Kirti...Paracetamol का उसे लिमिटेड hi ठीक hai...It इस थे मोस्ट हेपटोटोक्सिक ड्रग.

स. माँ:- कुछ समझ में आये ऐसा बोल.

सुमित:- कह रहा tha...Ye दवाई ज्यादा खाने पर लिवर डैमेज हो सकता hai...Issi वजह से काम इस्तेमाल करने के लिए कह रहा था.

कीर्ति:- सही कहा आंटी aapne...Ye क्या बोलते है कुछ भी समझ में नहीं aata...Dil में बात कुछ होता है और बोलते कुछ और है.

सुमित:- तुमसे नहीं जीत सकता.

इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Aaj उससे कीर्ति का एक और नया रूप देखने को mila...Kirti का केयर आज उससे साफ़ दिखाई दे रहा था अपने माँ के लिए.

होंठ में मुस्कान के साथ कीर्ति के बारे में सोचते हुए वो अपने रूम में चला गया.
 
अपडेट 33

आफ्टर फ्यू डेज


अब्ब तो हथियार दाल de...Aur कितना झूठ बोलेगा खुद से.

हँसते हुए आशीष ने कहा.

सुमित:- कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Aur कुछ नहीं कर पा रहा हूँ.

जब भी कीर्ति से दूर जाना चाहता हूँ जा नहीं पाटा hun...Aur उसके करीब जाना चाहता हूँ तो वो भी नहीं कर पा रहा हूँ.

सुमित ने कन्फूसिओं में कहा.

आशीष:- अब्ब किसने रोका तुझे? कीर्ति के करीब जाने से.

सुमित:- मई खुद hi रुकावट बना हूँ.

आशीष:- क्या मतलब?

सुमित:- आखिर आगे बधु तो भी कैसे? खुद hi शर्मिंदा महसूस करता हूँ.

पहले भी 2 रिलेशनशिप में रह चूका hun...Abb अगर आगे बढ़ा तो तीसरा होगा.

फिर से वही बड़े बड़े वाडे, साथ जीने मरने की कसम, हर पल हर वक्त साथ निभाने की कसम, दो जिस्म एक जान जैसी बातें अब्ब मुझसे नहीं होगा.

पिछले दोनों रिलेशनशिप में यही कहा tha...Kya अब्ब इस बार भी यही कहु? लेकिन कैसे? बोलै नहीं जाएगा यार.

और सभी लड़कियों से यही बोलता रहा तो मुझे अपने करैक्टर से hi नफरत हो जाएगा.

मुझसे नहीं होगा.

सुमित की हालत को समझ कर आशीष मुस्कुराया और फिर.

आशीष:- किस बेवकूफ ने कह दिया की बड़े बड़े वादा करना hi प्यार है? तू बस प्यार को निभा और हर पल को जीने की पूरी कोशिश kar...Pyaar क्या है समझ जाएगा.

अगर प्यार को समझना है तो गहराई में उतरना तो पड़ेगा hi.

सुमित:- तेरा मतलब है की मई इस प्यार में आगे बधु.

आशीष:- हाँ.

सुमित अभी भी कन्फ्यूज्ड था.

आशीष:- दोस्त हूँ tera...Tere भलाई के लिए hi कह रहा हूँ.

सुमित आशीष को घूरने लगता है.

आशीष:- अब्ब क्या हुआ? क्या देख रहा है?

सुमित:- देख रहा hun...Jisse आज तक कभी प्यार नहीं हुआ वही प्यार का ज्ञान दे रहा है?

आशीष:- बहुत बार कह चूका hun...Meri टाइप मुझे मिली नहीं hai...Aur शायद hi कभी milegi...Saccha प्यार वैसे भी नसीब वालों को मिलता hai...Aur तुझे मिल रहा है तो तू ठुकरा रहा है.

सुमित:- अरे बस bas...Aur nahi...Kaan फैट जाएगा वही रेपेटेड डायलाग.

आशीष:- जोल्स अपार्ट.

सच में कीर्ति तेरे लिए सही hai...Tere पिछले दोनों रेलशनाहीप को अगर किसी ने विरोध किया था तो वो मई hi tha...Baar बाद मन करता raha...Abe सच्चे प्यार में मत pad...Mat pad...Lekin सुनता कौन है mera...Aur वही हुआ जो मई जानता था.

कोई भी इंसान हो कुछ वक्त बिताने के बाद पता चल जाता है की वो क्या hai...Waisa hi है जैसा दिख रहा है या फिर ढोंग कर रहा hai...Kirti में ऐसी कोई ढोंग नहीं दिखा.

कल hi तो मिला था usse...Jaisa तूने बताया वैसी hi hai...Mujhe नहीं लगता इस प्यार में तुझे धोखा मिलेगा.

खुश रहेगा यार tu...Aage बढ़.

सुमित:- वाह साइकोलोजिस्ट वाह :applause::applause:

आशीष:- तेरे प्यार के चक्कर में मुझे कभी लवगुरु तो कभी साइकोलोजिस्ट बनना पद रहा है.

तभी सुमित के मोबाइल में मैसेज आता है.

सुमित:- अच्छा तेरा साइकोलॉजी फिर कभी sununga...Abhi कीर्ति का मसाज आया hai...Milne के लिए बुला रही है.

फिर सुमित वह से निकल गया.

कीर्ति:- इस बार भी आप हार गए?

सुमित:- अरे मैंने कम्पटीशन किया hi कब hai...Jo मई जीतूंगा.

कीर्ति:- फिर भी आप हार गए.

सुमित:- तुमसे कभी जीत सकता हूँ क्या?

कीर्ति:- मेरी जीत की ख़ुशी में चलिए एक एक प्लेट और हो जाए.

बात पानी पूरी का हो रहा tha...Jis कम्पटीशन में सुमित कीर्ति के आस पास भी नहीं था.

सुमित:- अरे nahi...Abhi से आँख, मुंह, नाक सब जगह से पानी निकल रहा hai...Abb मुझ से नहीं खाया जाएगा इतना तीखा पानी पूरी.

सुमित मन करता रहा लेकिन कीर्ति के सामने उसका कुछ नहीं चला.

कीर्ति तो बस खाये जा रही thi...Tabhi सुमित को अपने से थोड़े दूर पर एक ट्रक दिखा जो उसी की तरफ आ रहा tha...Jo कुछ ज्यादा hi तेज चल रहा था और हॉर्न भी साइलेंट tha...Samajhte देर नहीं लगा उससे की ट्रक में कुछ प्रॉब्लम है.

जल्दी से उसने एक हाथ से कीर्ति ू और एक हाथ से पानी पूरी वाले को पूरी दम लगा कर पीछे खिंचा... इस कोशिश में सुमित भी 3-4 मीटर दूर जा कर गिरा.

कीर्ति और पानी पूरी वाला दोनों पीछे मूड कर सुमित को देखते है की तभी वो ट्रक ठेला को उड़ाते हुए आगे बढ़ जाता है.

और तब उन्हें समझ में आता है और धीरे धीरे कर आस पास की लोगों की आवाजें भी आने लगता है.

सुमित अभी भी वही गिरा पड़ा tha...Rk राहत की सांस लिया की इतना बड़ा खतरा ताल gaya...Lekin कुछ hi पल आगे की घटना सोच कर उसके रूह कांप उठा.

दूसरी तरफ Kirti...Uss ट्रक को देखने के बाद तो वो एकदम से स्टेचू बन गयी thi...Naa hi कोई हलचल और ना hi कोई aawaj...Bas सामने की तरफ hi देख रही थी.

धीरे धीरे सब नार्मल होने laga...Lekin सुमित और कीर्ति अभी भी कुछ नहीं बोल रहे थे.

सुमित फिर आगे बढ़ कर पानी पूरी वाले को रेट से थोड़ा ज्यादा पेमेंट करता है और कीर्ति का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ जाता hai...Kirti चल तो रही थी लेकिन अभी भी उसी हाल में थी.

कीर्ति को बाइक में किसी तरह बिठा कर सुमित बाइक स्टार्ट कर देता hai...Wo अभी काफी स्लो चला रहा tha...Kuch वक्त पहले हुआ हादशा से वो भी अंदर से हिल गया था.

घर पहुँचने hi वाले थे की.

कीर्ति:- बाइक रोकिये.

सुमित भी बाइक रोक कर उतर जाता है.

कीर्ति एकदम से सुमित के गले लग जाती है.

कीर्ति:- जब भी आपके पास रहती हूँ खुद को सुरक्षित महसूस करती hun...Aaj भी आपने अपनी जान पर खेल कर मुझे बचाया.

आप मेरे ताकत hai...Jab आपने मुझे पढ़ाया तब पढ़ांव के साथ आपने एक विश्वास भी दिलाया की पूरी म्हणत से कोई काम करे तो उसका फल भी मिलता hai...Tabhi से मेरा खोया हुआ aatma-vishwash लौट आया.

जब भी आप मेरे साथ होते hai...Mai खुद को स्पेशल फील करती hun...Yahi ख्वाहिश रहती है की आप मेरे आँखों के सामने rahe...Hamesha हमेशा के लिए.

आप पर यकीं करती हूँ की अगर कभी मुझे कोई परेशानी भी हुआ तो आप हमेशा मेरे साथ रहेंगे.

शायद यही वजह है की मई आप से प्यार करती हूँ.

इतना कह कर कीर्ति ने सुमित को अपनी बाहों में और भी कास लिया.

सुमित को ये बातें सुन बहुत अच्छा laga...Koi तो है जो उससे इतना प्यार करता hai...Warna उससे तो धोखा hi मिला था.

फिर सुमित ने भी कीर्ति को अपने बाहों में भर liya...Bahut hi अलग अनुभव था सुमित के liye...Dil का सारा बोझ और दर्द कीर्ति की बाहों में भूल गया था वो.

आँखों में एक बूँद आंसू भी टपक aaya...Jisse मुस्कुराते हुए उसने पांच liya...Tabhi उससे कुछ पल पहले की घटना याद aaya...Yaad आते hi कीर्ति को उसने अपने बाहों में और भी कास लिया की वो कीर्ति को अपने से दूर कभी होने नहीं देगा.

कुछ पल एक दूसरे की बाहों में अपना प्यार का एहसास करने के बाद दोनों अलग हुए.

घर पहुँचते hi कीर्ति अपने रूम में चली गयी.

सुमित भी अपने रूम में पहुँच कर सोचने लगा.

सुमित:- (इन हिज मंद) Jindagi...Ek बार फिर उसी राष्ट में ले आया जहा मई वापस कभी लौटना नहीं चाहता tha...Ho hi गया एक बार फिर से pyaar...Iss बार सच्चा वाला प्यार.

Kirti...Kitna प्यार करती है मुझे? इतना विश्वाश करती है मुझ पर? माँ और पापा भी उससे पसंद करते hai...Rashmi की भी बहुत अच्छी दोस्त hai...Aur सबसे jaruri...Mai इतना प्यार करने के बावजूद भी आज तक जाता नहीं paaya...Himmat hi नहीं हुआ.

लेकिन अब्ब nahi...Jald hi अपने दिल की बात बताऊंगा.

फिर सुमित उसके और अकीर्ति के बिच के प्यार के पल को याद करने लगा.

इसी तरह उससे याद आया की उसका मिशन प्लेबॉय सफल होने की बावजूद भी असफल रह गया.

जान 6 की वो raat...Jab श्रुति को होटल ले जाने के बाद भी आखिरी वक्त पर कीर्ति की याद आ gaya...Aur उसी पल से श्रुति से सभी तरह के रिलेशन तोड़ liya...Jan 8 की raar...Preeti को होटल के बाहर से hi मन कर दिया.

ये सोचते hi सुमित की होंठो में मुस्कान आ gaya...Kitna बदल गया वो कीर्ति की प्यार में.

फिर इसी तरह दिन बीतने laga...Sumit कीर्ति को प्रोपोज़ करना चाहता तो था लेकिन स्पेशल तरीके से जो कीर्ति के लिए किसी सरप्राइज से काम ना हो.

और जब कीर्ति का पेरेंट्स के साथ घर वापस जाने के लिए 2 दिन बाकी था तब सुमित को आईडिया भी मिल गया.

अब्ब वो रेडी था कीर्ति को सरप्राइज देने के लिए और अपने प्यार का इजहार करने के लिए.
 
अपडेट 35

आज का दिन स्पेशल tha...Aur स्पेशल दिन में कोई कमी ना हो उसके लिए सुमित पूरी तैयारी कर रहा tha...Aadha घंटा से मिरर के सामने बैठ कभी वो हैरस्टीले चेंज करता तो कभी सनग्लासेस.

थक हार कर.

सुमित:- जैसा hun...Waisa hi ठीक hun...Aur कीर्ति भी मुझे पसंद करती hai...Naa की मेरे लुक्स को.

फिर मिरर की तरफ देख.

सुमित:- हैंडसम तो हूँ hi फिर भी कोई मतलब nahi...Kirti मुझसे पसंद करती ha...Naa की मेरे लुक्स को.

वैसे भी इस लुक में गजब hi लग रहा हूँ.

इसी तरह सुमित ने खुद को कॉन्फिडेंस दिया.

सुमित:- एक हफ्ता हो गया सरप्राइज के बारे में सोचते hue...Finally अब्ब जा कर मिला.

इतना कह कर सुमित ने बीएड में रखे सरप्राइज को अपने पंत के पॉकेट में रख लिया.

सुमित:- बहुत नाराज हो ना tum...Ki मुझे तुम्हारे दिल की कोई परवाह nahi...Pichle कुछ दिनों से तुम्हारी नाराजगी और भी बढ़ गया hai...Meri तरफ देखती भी नहीं.

आज तुम्हारा और मेरा दोनों का इंतजार khatm...Aisa सरप्राइज दूंगा की तुम्हारा खोया हुआ मुस्कान वापस लौट आएगा.

ये सोचते हुए सुमित काफी एक्ससिटेड हो गया था.

सुमित जो अभी तैयार हो कर बाहर निकलने hi वाला था की पीछे से आ रही आवाज सुन कर रुक जाता है.

कहा जा रहे हो भैया ऐसे सज धज के?

सुमित पीछे अपनी बहिन रश्मि की तरफ ghuma...Aur मुस्कुराते हुए bola...Guess कर!!!

रश्मि:- शायद किसी पार्टी में जा रहे है आप.

सुमित अपना सर पर हाथ मार kar..."Sirf पार्टी में जाते वक्त सूट नहीं पहनता हूँ?"

रश्मि:- तो क्या आप अब्ब आवारा गर्दी करते वक्त भी सूट पेहेन्ने लगे.

सुमित:- अरे नहीं.

रश्मि:- तो फिर?

सुमित:- तेरी भाभी को प्रोपोज़ करने जा रहा हूँ.

सुमित दांत दिखा कर बोलै.

रश्मि:- पापा को बताती hun...Rukiye अभी.

सुमित:- डरता हूँ क्या?

सुमित ने पुरे शान से जवाब दिया.

रश्मि:- Papa...Papa.

रश्मि की आवाज और तेज होता देख...

सुमित:- रुक जा मेरी Maa...Marwayegi क्या?

सुमित का हालत एकदम से भीगी बिल्ली जैसा हो gaya...Rashmi भी अब्ब उससे देख हांसे जा रही थी.

रश्मि:- आल थे बेस्ट भैया!!! :तुम्बुप:

सुमित:- थैंक यू :)

फिर सुमित चला गया अपने मंजिल की taraf...Yani की अपने प्यार का इजहार करने.

Hi कीर्ति.

एक पार्क में पहुँचते hi सुमित ने मुस्कुरा कर कहा.

कीर्ति:- क्यों बुलाया यहाँ मुझे?

कीर्ति की जवाब में कोई भाव नहीं था.

सुमित:- कुछ बताना tha...Bahut ख़ास.

कीर्ति:- बोलिये जल्दी.

सुमित अब्ब बिना कोई देर किये पॉकेट से एक रोज निकल कर कीर्ति की तरफ बढ़ा देता है.

सुमित:- खुद से और झूठ बोल नहीं saka...Naa चाहते हुए भी तुमसे आखिर प्यार कर hi baitha...Tumhare प्यार का असर ऐसा है की सुबह शाम तुम hi दिखती ho...Har वक्त तुम्हे hi दिल में रखने का मन करता hai...Tumhari एक झलक पाने के लिए दिल तरस जाता hai...Tumhe देख लेने के बाद hi सुकून मिलता है इस दिल को.

दिल में तो तुम पहले से hi ho...Mera अब्ब एक hi ख्वाहिश है की तुम्हे अपने पलकों पर बिठा कर rakhu...Hamesha हमेशा के लिए.

क्या मुझे जिंदगी भर के लिए तुम्हारा साथ मिलेगा?

सुमित की आवाज में प्यार hi प्यार था अपने कीर्ति के liye...Saath hi एक घबराहट भी.

कीर्ति वो रोज लेती है और सुमित के उम्मीद के उल्टा उस रोज को अपने संदल से कुचल देती है.

सुमित:- :ीक: ये तुम...

कीर्ति:- श्रुति को जानते है आप?

सुमित:- हाँ.

सुमित के चेहरे में एकदम से दर दिखने laga...Dar इस बात का था की कही कीर्ति कुछ गलत ना समझ ले.

कीर्ति:- और प्रीती.

सुमित:- Haan...Lekin तुम.

कीर्ति:- और कीर्ति.

सुमित:- Haan...Tum.

कीर्ति:- अब्ब श्रुति और प्रीती के बाद मेरा टर्न है ना?

कीर्ति गुस्से में दर्द के साथ बोली.

सुमित:- Nahi...Tum गलत समझ रही हो.

सुमित को समझ में hi नहीं आ रहा था की कीर्ति को कैसे समझाए? वो खुद hi कन्फ्यूज्ड था की कीर्ति को ये सब कैसे पता चला.

कीर्ति:- आप जान 6 की रात श्रुति के साथ कहा थे?

सुमित कुछ बोल नहीं paaya...Abb उससे समझ में आने लगा की किसी ने उसके खिलाफ साजिश रचा hai...Lekin किसने?

कीर्ति:- जान 8 की रात प्रीती के साथ?

सुमित कुछ बोलता उससे पहले.

कीर्ति:- फिर भी मई गलत hi समझ रही हूँ ना? इतना बेवकूफ समझ रहे है आप मुझे?

सुमित कुछ बोल नहीं पा रहा tha...Usse समझ में hi नहीं आ रहा था की कैसे कीर्ति को समझाए.

कित्ती:- बहुत प्यार करती थी aapse!!!Lekin aap...Aapne तो मेरा दिल hi तोड़ दिया. :(

जब मैंने आपको प्रोपोज़ किया और आपने मन कर दिया फिर भी मई आपके पीछे पड़ी rahi...Ye सोच कर की कभी तो आपका दिल मेरे लिए dhadkega...Aapko भी मुझसे प्यार हो जाएगा.

आज धड़का तो भी एक हवस के रूप में!!!

आपके बारे में सब गलत बोलते thhe...Lekin मई नहीं मानती thi...Hamesha आप में अच्छाई hi दीखता tha...Pyar करती थी naa...Pyar अँधा होता hai...Shayad इसी वजह से अंधी हो गयी थी.

आप सच में बदल gaye...Itna बदल गए की आप अब्ब मुझे भी हवस की नजर से देखने लगे.

माफ़ kijiye...Mai आपकी टाइप की नहीं.

कीर्ति रट हुए boli...Dil का दर्द अब्ब आँखों से बाहर आ रहा था उसकी.

सुमित:- मई तुम्हे समझा सकता hun...Please मेरी बात ध्यान से सुन्ना.

कीर्ति:- नहीं सुन्ना मुझे आपकी कोई baat...Aap एक धोखेबाज़ है.

इतना कह कर कीर्ति वो रोज सुमित की मुंह पर मार कर चली जाती है.

सुमित:- प्लीज मेरी बात सुनो.

सुमित भी कीर्ति के पीछे चल pada...Ek बार कीर्ति की कंधे पर हाथ रख कर उससे बुलाने की कोशिश किया तो.

कीर्ति:- छूना मत मुझे.

कीर्ति की आवाज इतना तेज था की वो सुमित भी दर gaya...Abb कीर्ति के गुस्सा और नफरत के सामने वो टिक नहीं पाया.

बस कीर्ति को अपनी जिंदगी से दूर जाता देख रोने laga...Aaj बहुत मजबूर था Sumit...Aankh इतना भर आया की सामने कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था.

सिर्फ कानो में कुछ सुनाई दे रहा तह "आप धोखेबाज़ hai...Ek हवसी hai."...Bas यही बात उसको बार बार सुनाई दे रहा था.

जब दिल का दर्द संभल नहीं पाया तो वो उसी जगह पर गिर गया लाचार और मजबूर हो कर.

सारे अरमान सारे सपने एक hi पल में टूट gaye...Aaj फिर प्यार में वो हार gaya...Na जाने जिंदगी के और कितने इम्तेहान देना बाकी था उससे.

एक नजर अपने पॉकेट की तरफ dekha...Pocket को देखते hi दर्द भरे मुस्कान उसके चेहरे में फ़ैल gaye...Pocket में मौजूद सरप्राइज के साथ साथ उसका प्यार भी अधूरा रह गया.

यार एक तुम hi तो ho...Jo मुझ पर भरोषा करती thi...Pyar करती thi...Pyar करना तुमसे hi सीखा hai...Aur आज जब तुम से प्यार हो गया तो तुम मुझे छोड़ कर जा रही ho...Nahi मैंने तुम्हे कोई धोखा नहीं दिया hai...Aur हवस नहीं सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे.

तुम्हारे बिना जी नहीं paaunga...Wapas आ जाओ yaar...Hamesha तुम्हे अपने दिल में बिठा कर रखूँगा.

एक मौका तो दो मुझे अपनी बात कहने kaa...Mera प्यार का एहसास कराने ka...Please...Only ओने चांस.

Writer's नोट:- ये अपडेट अपडेट 1 का अपडेटेड वर्शन hai...Aur इसी वजह से शॉकिंग अपडेट कह रहा tha...Aur यही वजह था कल 2 अपडेट पोस्ट करने की सोच रहा tha...Iss अपडेट में ज्यादा टाइम नहीं लगा.

नेक्स्ट अपडेट शॉकिंग तो नहीं रिलीफ वाला अपडेट hoga...Plot के हिसाब से रिलीफ nahi...Shayad समझ गए honge...Agar नहीं तो नेक्स्ट अपडेट में समझ जाएंगे. :डी
 
थैंक्स बिंदास भाई फॉर योर सपोर्ट एंड comment...Kabhi कभी रीडर्स का शामे कमेंट आता है नीस अपडेट वाला तो सोचा एक बार मई भी शामे अपडेट पोस्ट कर देता हूँ. :डी. जोक्स अपार्ट, ये अपडेट स्टोरी का फ्लो में part है तो फिर से पोस्ट करना pada...Khair इस अपडेट की नाराजगी नेक्स्ट रिलीफ वाला अपडेट जरूर पूरा करेगा :approve:...Keep सपोर्टिंग.
 
अपडेट 36

सुमित बेसब्री से छत में घूम रहा tha...Aur बार बार दरवाजा की तरफ देख रहा tha...Intrjaar था तो उसकी जो उसके दिल की बहुत करीब आ चुकी थी.

और जब कीर्ति ने छत में अपना कदम रखा तब जा कर सुमित को थोड़ा छैन मिला.

वो कीर्ति को देखता hi रह gaya...Abb उसके आँखों में कीर्ति के लिए ढेर सारा प्यार था साथ hi दिल के एक कोने में दर.

कीर्ति भी सुमित को देखते हुए उसके तरफ बढ़ रही thi...Aankho में नफरत के साथ साथ दिल टूटने का दर्द भी था.

सुमित:- मुझे यकीं tha...Tum जरूर आओगी.

प्यार भरी आवाज में सुमित ने कहा.

कीर्ति:- ये बताने के लिए की हमारे बिच सब कुछ ख़त्म हो चूका है.

उतना hi नफरत में कीर्ति ने जवाब दिया.

सुमित:- हमारे बिच सुरु हुआ hi क्या है.

हमेशा की तरह मजाकिया अंदाज में सुमित ने kaha...Lekin कीर्ति ने जिस तरह गुस्से में देखा इससे वो समझ गया की इस बार मामला मजाक से सुलझने वाला नहीं है.

कीर्ति फिर मुद कर जाने लगी.

सुमित:- सुनो तो.

कीर्ति दुबारा सुमित की तरफ देखती hai...Pehle तो आँखों में नफरत था फिर धीरे धीरे आंसुओं ने नफरत की जगह ले ली.

ये देख सुमित का भी दिल छलनी होने laga...Ek हाथ आगे बढ़ाया आंसुओं को पोंछने के liye...Lekin कीर्ति ने झटक दिया.

कीर्ति:- छूने की कोशिश भी मत कीजिये.

सुमित अब्ब सिर्फ मज़बूरी में कीर्ति को रट देख रहा था.

कीर्ति:- कितना विश्वाश करती थी आप पर? विश्वाश नहीं andh-vishwash...Itna अंधी हो गयी थी की कुछ hi दिन में आप को अपना दिल दे baithi...Lekin आप? आप तो धोखेबाज़ निकले.

सुमित:- Nahi...Tum गलत समझ रही हो...

सुमित को बिच में hi रोक कर कीर्ति ने कहा.

कीर्ति:- दो दिन पहले श्रुति और प्रीती से मिली थी.

ये सुनते hi सुमित चौंक gaya...Dono को एक saath...Koi इत्तेफ़ाक़ नहीं tha...Wo तो अभी तक यही सोच रहा था की शायद कीर्ति ने मोबाइल चाट देख लिया होगा और ग़लतफहमी हो गया होगा.

कीर्ति:- बताया उन्होंने आप का करैक्टर.

सुमित कुछ बोल नहीं पा रहा था.

कीर्ति:- आपने जो उनके साथ किया वही मेरे साथ करने वाले थे.

खुद को एकदम अलग दिखा कर पहले लड़कियों को अत्त्रक्ट karo...Fir अपने प्यारे बातों और सेंस ऑफ़ ह्यूमर से उनको अपने जाल में fasaao...Fir उनके मुंह से hi प्यार का इजहार करवाते है.

मेरे साथ भी ऐसा hi hua...Aur प्यार में आपके पीछे पद gayi...Aap तो कभी मानते नहीं थे की आप मुझसे प्यार करते hai...Maante भी क्यों? आपके नजर में मेरे लिए प्यार की जगह हवस भी था.

फिर आपने कल मुझे प्रोपोज़ किया इतना तड़पाने के baad...Aur मई हां कह देती तो कुछ दिनों के बाद मुझे भी होटल में ले जाते.

और जब आपका काम हो जाता तो breakup...Aur इलज़ाम भी मुझ पर hi लगता की मई hi आपके पीछे पड़ी थी.

कीर्ति की हर एक बात में नफरत tha...Ye सुन कर सुमित का मुंह खुल गया.

सुमित:- Nahi...Tum गलत समझ...

कीर्ति:- मोबाइल दीजिये आपका.

सुमित:- लेकिन.

कीर्ति:- दीजिये?

गुस्से में कीर्ति चीखी.

सुमित डरते हुए मोबाइल आगे बढ़ा देता है.

फिर कीर्ति सुमित को खुद hi उसका श्रुति और प्रीती के साथ का चाट पढ़ा देता है.

अब्ब सुमित के माथे से पसीना बहने लगा था.

सुमित:- तुम्हे कैसे समझाऊ? समझ में नहीं आ रहा...

सुमित से और बोलै भी नहीं जा रहा था.

कीर्ति:- आपको समझाने की जरुरत भी नहीं hai...Samajh चुकी हूँ मई.

समझ तो उसी दिन जाना था जब मुझे ट्रक से बचाने के बाद इतना जोर से बाहो में भर लिया tha...Saaf हवस महसूस कर रही थी मई.

और आप का रूम का वो पोस्टर...मिशन प्लेबॉय का.

सुमित को ये सुन बहुत बुरा लगा की कीर्ति ने उसके प्यार का पहले एहसास को hi हवस का नाम दे दिया.

कीर्ति:- आज के बाद मुझसे बात करने की कोशिश भी मत कीजिये.

नफरत भरी आवाज में ये बात कह कर कीर्ति वह से जाने लगी.

सुमित:- सुनो तो.

हारा हुआ आवाज में सुमित ने मनाने की कोशिश ki...Lekin कीर्ति चली gayi...Bina एक बार भी पीछे मुड़े.

सुमित को पता hi नहीं चला कब उसका दिल का दर्द पसीना के रूप में आँखों से बह रहा tha...Sacche प्यार का एहसास हुआ भी तब जब उसका प्यार उससे दूर जा रही थी.

Hello?

दूसरी तरफ से श्रुति का आवाज आया.

सुमित:- सही खेल गयी tum...Ummeed से भी ज्यादा.

श्रुति:- मैंने कहा था tumhe...Tum सिर्फ मेरे हो? कोई कीर्ति बिच में नहीं आ सकती.

सुमित गुस्से में कुछ नहीं बोलै.

श्रुति:- परेशान लग रहे हो.

सुमित:- मैंने तुम्हे बता दिया था की हमारे बिच में प्यार जैसा कुछ नहीं hoga...Sirf गिव एंड टेक का रिलेशनशिप होगा.

श्रुति:- सुरु आप ने किया tha...Khatm मैंने? अगर इस दौरान मुझे सच में प्यार हो गया तो इसमें मेरी क्या गलती?

सुमित:- दिल में हाथ रख कर bol...Tujhe और सच्चा प्यार?

श्रुति:- अच्छा मुझे प्यार नहीं hai...Lekin मई चाहती हूँ की हमारा वो गिव एंड टेक का रिलेशनशिप और भी लम्बा chale...Koi प्रीती और कीर्ति का फखल मई पसंद नहीं कर सकती.

बहुत पहले से तुम दोनों पर नजर रख रही थी (मंदिर से लौटने के बाद घूरती aankhein)...Bas मौका का इंतजार कर रही थी जो आज मिल गया.

श्रुति की बातों से ख़ुशी साफ़ झलक रहा था.

सुमित:- और वो गिव एंड टेक वाला रिलेशनशिप सुरु होने से पहले hi मैंने ख़त्म कर दिया था.

श्रुति:- और यही बात मेरे ईगो पर लगा.

सुमित:- अब्ब मेरा ईगो का सामना करेगी तू?

श्रुति:- मतलब

श्रुति हल्का डरते हुए बोली.

सुमित:- जो तू सोच रही hai...Usse भी बुरा.

श्रुति:- रपे, मर्डर...

श्रुति इससे आगे कुछ बोलती.

सुमित:- इतना hi है तेरा soch...Physical torture...Ye बच्चों का काम hai...Mental टार्चर.

तूने मुझे कीर्ति से अलग करने की साजिश की hai...Aaj नहीं तो कल वो मान jaayegi...Lekin मई तुझे तुझसे hi अलग कर dungi...Itna कमजोर हो जायेगी तू मानसिक रूप से.

इतना कह कर सुमित ने फ़ोन रख दिया.

फ्लैशबैक एंड्स

सुमित ने राज की तरफ dekha...Jiske मन में कई सारे सवाल उठ रहे the...Wo कुछ बोलता उससे पहले hi सुमित ने कहा.

सुमित:- कीर्ति 2 दिन और रही हमारे घर mein...Socha था उन् 2 दिनों को मई अपने जिंदगी के सबसे यादगार दिन banaunga...Itna रोमांटिक होगा वो din...Yaadgaar तो bana...Lekin मेरा ना कामयाबी और लसाहृ के रूप में.

हर कोशिश किया कीर्ति को मनाने ko...Maanna तो दूर मेरी तरफ देखा तक nahi...Itni नाराज हो गयी थी वो.

2 दिन बाद वो अपने पेरेंट्स के साथ अपने घर चली gayi...Aur मई छत से उससे जाते हुए देखता रह गया दुखी मन से.

कोशिश जारी raha...Do तीन बार उसके घर भी gaya...Uncle आंटी से कोई बहाना बना deta...Lekin वो भी किसी काम का nahi...Kirti मुझसे मिलने भी नहीं आयी.

सोशल मीडिया और फ़ोन दोनों में ब्लॉक हो चूका था.

बस एक hi मौका tha...Mai थोड़ी दूर उसके घर की बाहर आशिक़ों की तरह उसका इंतजार karta...Kab वो घर से निकलेगी और मई उससे बात कर पाऊंगा.

इससे नाराज वो घर से निकलना भी बहुत काम कर चुकी thi...Mai hi थक हार कर उससे दूर हो gaya...Kahi न कही लग रहा था मई उसका फ्रीडम चीन उससे मेन्टल टार्चर कर रहा हूँ.

उसकी नजर से दूर तो हो gaya...Lekin उससे दूर कभी जा नहीं saka...Uske बारे में जानकारी हासिल करता रहता.

पुरे साल पढ़ाई बहुत बुरा gaya...Result भी ऐसा की पापा सच में नाराज हो gaye...Unhe सच बता भी नहीं सकता tha...Bas चुप चाप दांत सुन लेता था.

लगभग हार मान hi चूका था की ये बात दिमाग में aaya...Wo मेडिकल की तैयारी कर रही hai...Fir क्या था मैंने भी ठान लिया की मई भी मब्ब्स hi ज्वाइन करूँगा.

पापा बहुत नाराज हुए ऐसे अचानक से बी. फार्मेसी छोड़ने से 2 साल पढ़ने के baad...Lekin मई भी जिद्द में अदा raha...Aur मेरे जिद्द के सामने पापा भी मान गए.

फिर खुद को रूम में लॉक कर के दिन रात पढ़ने laga...Padhaai में ऐसे लग गया की कब दिन होता था और कब रात ये भी पता नहीं चलता.

वैसे तो मई इतना प्रेशर ले कर नहीं पढता hun...Lekin हालत hi ऐसा tha...Topic बहुत थे और टाइम बहुत काम.

रीलीज़ हुआ किसी को कांसेप्ट देना बहुत ाशन hai...Aur डेप्थ में पढ़ना उतना hi मुश्किल.

खुद को लॉक करने की एक और वजह tha...Gham में कब नशा करने लगा पता hi नहीं chala...Gharwalon से बचने के लिए रूम से बहुत काम बाहर निकलता था.

वो भी हैरान थे मेरे इस बदलाव se...Lekin कभी ज्यादा रियेक्ट भी नहीं किया.

कुछ मोनथस की म्हणत थोड़ा सा रंग ले कर आया.

एंट्रेंस में पास हो गया वो भी बहुत अच्छे मार्क्स se...Full स्कालरशिप भी मिला इस कॉलेज mein...Lekin एक एफओश.

कीर्ति के कॉलेज में हो नहीं पाया...1 मार्क्स से छूट gaya...Aisa लगा एक बार फिर हार गया हूँ.

इतना पैसा भी नहीं है की पैसे से उसी कॉलेज में एडमिशन करा पाटा.

डूबता को तिनके का sahaara...Thik ऐसे hi एक उम्मीद mila...Kirti की कोचिंग सेण्टर में पढ़ने वाले एक लड़के को दोएत banaya...Usse पता चला की कीर्ति की दोस्त मेघा इसी कॉलेज में पढ़ती है.

बहुत सोचा और फिर फैसला किया की यही एडमिशन कराऊंगा.

इतना कह कर सुमित चुप हो गया.

राज:- और आपको फिर से उम्मीद mila...Megha के जरिये कीर्ति तक पहुंचना का.

मुस्कुराते हुए,

सुमित:- सही सोचा.

राज:- लेकिन ये तो गलत है ना?

सुमित:- बहुत गलत hai...Abb मई खुद शर्मिन्दा हूँ.

सोचा था वैसे भी आज के जमाने में प्यार का कोई महत्वा नहीं hai...Megha से प्यार का नाटक करूँगा और इतना क्लोज हो जाऊँगा की कभी मौका मिले कीर्ति से बात करने ka...Mujhe सिर्फ एक अच्छा सा मौका चाहिए जहा मई कीर्ति से बात कर के सब सही कर दूंगा.

सोचा नहीं था मेघा इतना सीरियस हो जायेगी प्यार mein...Lekin वो हो गयी?

बहुत अच्छी लड़की है wo...Mujhse सच्चा प्यार करने लगी thi...Aur धोखा दिया नहीं गया mujhse...Ek बार फिर अपने पेअर में कुल्हाड़ी मार कर सच बता दिया.

हालात ऐसे हो गए है की जो भी कर रहा हूँ गलत hi हो रहा है.

राज:- अब्ब आप क्या करेंगे?

सुमित:- प्लान में कोई चेंज नहीं है.

राज:- मतलब?

सुमित:- मेघा के जरिये hi कीर्ति तक पहुँचूँगा.

राज:- लेकिन?

सुमित:- अब्ब मेघा की प्यार नहीं उसकी नफरत मुझे कीर्ति तक पहुचायेगा.

सुमित ने गहरी सोच के साथ kaha...Raj को कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

नोट:- रिलीफ वाला अपडेट इसा लिए कह रहा था क्यों की फ्लैशबैक ख़त्म हो चूका hai...Abb इससे रिलीफ मिल जाएगा आप सब को.

अब्ब स्टोरी अपने मैं प्लाट में chalega...Yaani की tragedy...Waise तो हर अँधेरा रात का एक उजाला सुबह होता hai...Lekin सुमित की इस रात का सुबह उजाला होगा या नहीं इसका गारंटी नहीं दे sakta...Abb स्टोरी में पैन और इमोशंस वाले अपडेट ज्यादा आएंगे.

उम्मीद है आप को आगे भी कहानी पसंद आये.
 
फ्रेंड्स एक टफ डिसिशन लेने जा रहा हूँ आप सभी के लिए भी और अपने लिए bhi...Uske लिए आप सभी से पहले hi माफ़ी मांग लेता हूँ.

अचानक से ऐसा लग रहा है की थोड़ा ब्रेक ले लेना चाहिए स्टोरी se...Shayad एक या दो मोनथस के liye...Ye मेरे लिए भी टफ है क्युकी पहली बार किसी ब्रेक के बारे में सोच रहा hun...Xossip के क्लोज होने के बाद और स्फोरम स्टार्ट होने के पहले के अलावा कभी एक हफ्ता से ज्यादा वक्त नहीं लिया था.

इस वक्त स्टोरी लिखना ऐसा फील हो रहा है जैसे खुद को hi मेन्टल टार्चर karna...Na स्टोरी अच्छा लिख पा रहा हूँ और ना hi बाकी की एक्टिविटीज पर ध्यान दे पा रहा hun...Bas पूरा दिन बैठ कर थोड़ी थोड़ी देर में रिफ्रेश करके चेक करता हूँ की कोई कमेंट आया या nahi...Aur डिसअप्पोइन्त्मेन्त hi मिलता hai...Iss वजह से बाकी के चीज में भी मूड ऑफ होने लगा है.

स्टोरी राइटिंग पैशन से बदल कर कब कपुलसीओं बन गया ये भी पता नहीं चला? हर 2-3 दिन के बाद सिर्फ अपडेट के बारे में hi सोचता रहता hun...Kya लिखना है? कैसे लिखना है? आप सब को पसंद आएगा या नहीं? बस इसी सोच में दिन बीत जाता hai...Update डिले होने के साथ साथ अच्छा लिख भी नहीं पा रहा हूँ.

वैसे भी अब्ब कमैंट्स का एक्सपेक्टेशन भी नहीं raha...Khud hi जब ऐसा लगे की स्टोरी कुछ ख़ास नहीं है तो कमैंट्स का क्या एक्सपेक्टेशन? ये बात इस वजह से भी एविडेंट है जैसे पिछले कुछ उपदटेस में रिस्पांस आया है और बहुत सारे रीडर्स स्टोरी छोड़ कर जा चुके hai...Yahi कुछ बातें है जो मुझे स्टोरी के बारे में सोचने पर मजबूर कर रहा है.

आगे भी ऐसे hi टेंशन में स्टोरी लिख कर स्टोरी को और भी क्वालिटी लेस्स बनाऊ इससे बेहतर है थोड़ा ब्रेक ले कर स्टोरी को फ्रेश स्टार्ट karu...Yeh मेरा लास्ट स्टोरी है तो अब्ब और कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहता इस स्टोरी के साथ.

अगर कभी कुछ ज्यादा hi लिखने का मन करे तो ये 2 मोनथस में भी कभी कभी 1, 2 उपदटेस पोस्ट कर dunga...Lekin रेगुलर अपडेट 2 मोनथस के बाद hi आ पायेगा.

और यह स्टोरी वापस आने के बाद हर हाल में कम्पलीट करूँगा अगर हालत (पर्सनल लाइफ) ठीक रहा to...Aaj तक सभी स्टोरीज कम्पलीट किया है तो यह भी करूँगा.

थैंक्स आल.
 
थैंक्स कीर्ति जी फॉर योर concern...Personal लाइफ में कुछ ख़ास प्रॉब्लम नहीं hai...Study और एग्जाम की टेंशन के alawa...Haan मगर पिछले कुछ दिनों से मूड ऑफ होने की वजह से स्टडी पर कंसन्ट्रेट नहीं कर पा रहा tha...Isse मूड और भी ख़राब होने लगा.

ये भी वजह था की ब्रेक के बारे में सोच रहा tha...Exam तक मूड ऑफ करना नहीं चाहता था.

और दूसरी वजह है स्टोरी में comment...Jab से स्टोरी लिखना सुरु किया है बहुत उतार चढ़ाव आया है कमैंट्स के मामले mein...Kabhi काम तो कभी jyada...Lekin ये लोवेस्ट फेज है जितना इमेजिन भी नहीं कर sakta...Kisi भी बात में ज्यादा वर्थिंकिंग नहीं करता हूँ लेकिन कल यहाँ करना पड़ा.

इशू ये नहीं है की कमैंट्स काम आ रहे hai...Main इशू ये है की बहुत से रीडर्स एकदम से थ्रेड छोड़ कर चले गए hai...Unse शिकायत ने नहीं है की पढ़ना क्यों बंद कर diya...Unka marji...Accha लगेगा तो पढ़ेंगे और अगर नहीं लगा तो पढ़ने का कोई मतलब hi नहीं.

लेकिन जाते वक्त अगर वजह बताते तो बहुत अच्छा लगता जैसे की स्टोरी अब्ब पसंद नहीं आ रहा hai...Yaa फिर वो अभी बिजी है और पढ़ नहीं sakte...Ussi तरह से एडजस्ट कर लेता या इम्प्रूवमेंट.

कुछ उपदटेस पहले तक स्टोरी पीक में था और अचानक hi एकदम जमीन में आ गिरा hai...Sochne पर मजबूर हो गया था इस वजह से की क्या स्टोरी में अब्ब वो दम नहीं रहा? कभी बहुत ज्यादा तारीफ़ और कभी तारीफ़ hi nahi...Ye पचाने में थोड़ा मुश्किल तो होता hi है.

अस ा राइटर, ये कभी नहीं कहूंगा की मुझे सीरत पॉजिटिव रेविएवस hi चाहिए सब सिर्फ मेरा तारीफ़ hi kare...Positive रेविएवस के साथ साथ कंस्ट्रक्टिवे रेविएवस भी पसंद है जिसमे अच्छाई के साथ साथ गलती भी देखने को mile...Constructive रिव्यु का example...Aapka hi रिव्यु कसम में जब आपने कमेंट किया था अतुल के पापा में आये बदलाव को ले kar...Yaa फिर कामदेव भाई की ज्यादातर कमैंट्स. :डी

मुझे सच में खुद लगने लगा था की स्टोरी अब्ब अच्छा नहीं जा रहा hai...Iss वजह से 2 मोनथस का ब्रेक लेने का सोचा tha...Story को नयी तरीके से सोच कर कंटिन्यू करने का सोच रहा था.

सोचा था 2 मोनथस तक प्लाट डेवलपमेंट कर लूंगा कुर उसके बाद रेगुलर अपडेट दूंगा...2 मोनथस तक 3 या 4 अपडेट पोस्ट करूँगा.

लेकिन कल फिर से सोचने पर और आप का और बिंदास भाई का कमेंट से लगा की 2 मोनथस कुछ ज्यादा हो जाएगा.

अब्ब प्लान चेंज कर रहा hun...Break नहीं लूंगा लेकिन 2 उपदटेस के बिच का टाइम थोड़ा बढ़ jaayega...Update अब्ब कॉंफिडेंट होने पर hi पोस्ट karunga...Picchle कुछ उपदटेस जल्दबाज़ी में लिखा था और इसी वजह से कभी कुछ कमी लगता तो कभी उनसटिस्फीएड रहता खुद hi.

नेक्स्ट अपडेट आज रात पोस्ट करूँगा और आज के अपडेट में कॉंफिडेंट हूँ.

और आपका बिजी होना समझ सकता hun...Ek फिक्स्ड टाइम पर रिस्पांस आता है और कमेंट 1, 2 दिन बाद.

बिजी होने के बावजूद स्टोरी में साथ बने रहने के लिए शुक्रिया. :थैंक्स:
 
थैंक्स बिंदास भाई फॉर योर concern...Kuch एक्सप्लनेशन कीर्ति जी को रिप्लाई करते हुए किया hai...Aur कुछ आप से भी कहना चाहता hun...Aap दोनों के कमेंट और फिर से स्टोरी के बारे में सोचने पर एहसास हुआ की ब्रेक लेना सही नहीं होगा वो भी स्टोरी के इस पॉइंट पर.

हाँ लेकिन उपदटेस के बिच में टाइम ज्यादा लग सकते hai...Pehle की गलती नहीं दोहराऊंगा की जल्दबाज़ी में अपडेट लिखने ki...Jo भी अपडेट लिखूंगा खुद कॉंफिडेंट होने पर पोस्ट karunga...Shayad 3 या 4 दिन के गैप honge...Jyada डिले हो गया तो वीक tak...Yaa फिर फ़ास्ट में 1 या 2 din...Normally 3 या 4 दिन का गैप रहेगा.

डिले होने के बावजूद अपना बेस्ट लिखने की कोशिश karunga...Saath बने रहिये भाई.
 
अपडेट 37

सुमित एक बड़ा सा पेपर, पेन और पेंसिल ले कर रूम से निकल hi रहा था की.

राज:- कहा जा रहे है आप?

सुमित:- छत mein...Room लॉक किये बिना hi सू jaa...Waapas आने में लेट हो जाएगा.

फिर सुमित वह से निकल गया और छत में पहुँच कर लाइट ों करता है.

तभी उसका नजर 350 मीटर दूर गर्ल्स हॉस्टल के छत में पड़ता hai...Jaha छत के एक कोने में मेघा अकेली thi...Light ों होते hi मेघा को भी सुमित दिख जाता है.

सुमित को देखते hi मेघा की चेहरे में नफरत के भाव आने लगता hai...Wo अपना मुंह घुमा लेती है.

सुमित ये देख मुस्कुराता है.

और फिर छत में पहले से hi रखा चेयर पर बैठ जाता hai...Table पर पेपर, पेन और पेंसिल रख कर वो अपना काम पर लग जाता है.

मेघा को हैरानी हो रहा था की सुमित ने अभी तक उससे इर्रिटेट नहीं किया.

जब वो सुमित की तरफ देखती है तो वो अपने काम में लगा हुआ tha...Paper में कुछ लिख रहा था.

इस सब में मेघा को कोई इंटरेस्ट नहीं tha...Sumit को देख कर उसका मूड और भी ऑफ हो गया tha...Fir वो लाइट ऑफ कर के निचे अपने रूम में चली जाती है.

आज नींद भी आँखों से गायब tha...Bahut से अंगड़ाई लेने के बाद और छत को घूरने के बाद जा कर नींद आती है.

रात के 2 बजे थे की अचानक से मेघा की नींद टूट जाती hai...Fir से सोने की कोशिश भी असफल hi raha...Aise में उससे अचानक से ख्याल आता है.

"सुमित अभी भी छत में होगा या फिर चला गया होगा?"

फिर खुद hi जवाब देती है.

"चला गया hoga...Waise भी मुझे क्या मतलब उससे."

फिर कुछ देर ऐसे hi खुद से सवाल जवाब करने के बाद उससे रहा नहीं जाता.

एक बार फिर वो छत की तरफ निकल पड़ती hai...Iss बार वो लाइट ों किये बिना hi छत में जाती है.

छत में जाते hi वो चौंक जाती hai...Sumit अभी भी मौजूद था.

चेयर में पीठ के बल लेता सुमित अपने उँगलियों से सिगरेट फंक रहा था...1 सिगरेट ख़त्म दूसरा suru...Dusra ख़त्म तीसरा suru...Aise करते करते वो 5 सिगरेट फूंकता है.

चेहरा काफी सीरियस tha...Pehli बार मेघा को लगा की ये लड़का सीरियस भी हो सकता है.

सिगरेट फूंकने के बाद सुमित वापस पेन उठाये पेपर वर्क में लग जाता है.

ये सब मेघा एकटक सुमित को देख रही थी.

मेघा:- (इन हेर मंद) इतना मासूम चेहरा और इतना बड़ा kaand...Logon का अब्ब कोई भरोषा nahi...Kabb किसका मुखौटा उतर जाए.

इतना कह कर मेघा वापस निचे अपने रूम में चली जाती है.

नेक्स्ट डे

मेघा आज लास्ट रौ में बैठी thi...Shayad वो अकेली रहना चाहती थी.

वो बस इंतजार कर रही थी की कब लेक्चर स्टार्ट hoga...Hairaani उससे तब होती है जब सुमित गेट से क्लास के अंदर आया.

जब सुमित मेघा की तरफ बढ़ा और उसके पास पहुँच गया तो मेघा सुमित की आँखों में देखती hai...Bahut लाल tha...Jo ये बता रहा था की सुमित रात भर सोया नहीं है.

फिर मेघा की उम्मीद के ठीक उल्टा सुमित उसके पास ना बैठ कर पास में hi बैठी दिव्या के पास चला जाता है.

सुमित:- मई ी सीट हेरे?

दिव्या:- ऑफ कोर्स.

सुमित:- अगर बुरा नहीं मानोगी तो मई तुम्हारा नाम पूछ सकता हूँ?

सुमित की इस सवाल पर दिव्या सुमित को घूरती है.

सुमित:- मई यहाँ स्टूडेंट काम गेस्ट ज्यादा हूँ :D...Iss वजह से पता नहीं.

दिव्या:- ी ऍम दिव्या.

फिर दिव्या और सुमित के बिच बातें सुरु हो जाता hai...Paas में hi बैठी मेघा इर्रिटेट हो रही थी दोनों के बात चीत se...Abb तो मेघा को सुमित की आवाज से भी नफरत हो गया था.

अचानक hi दिव्या पूछती है.

दिव्या:- क्या तुम दोनों का ब्रेक उप हो गया है?

सुमित:- (विथ स्माइल) क्या लगता है तुम्हे?

दिव्या:- कुछ दिनों से तुम दोनों को एक दूसरे से अलग देख कर और जो भी हल्ला फ़ैल रहा है उससे सुन कर तो सच में लग रहा है की ब्रेकअप हुआ है.

सुमित:- इस बार हल्ला सच है.

उधर मेघा सोच रही थी.

मेघा:- (इन हेर मंद) रिलेशनशिप सुरु hi कब हुआ था जो ब्रेकअप होगा?

दिव्या:- लेकिन क्यों?

सुमित:- बोर हो गया था.

लापरवाही के साथ सुमित ने जवाब दिया.

दोनों कुछ और बात करते उससे पहले प्रोफेसर क्लास में आ जाते है.

फिर सभी पढ़ाई पर ध्यान देते है सुमित के अलावा.

मेघा को भी अजीब लग रहा था सुमित का badlaaw...Kal तक कुछ ज्यादा hi इर्रिटेट करने वाला सुमित अब्ब उससे एकदम से इग्नोर करने लगा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) अच्छा hi hai...Isse पीछा तो छूटा.

एनाटोमी का क्लास tha...Udhar प्रोफेसर पढ़ा रहे thhe...Idhar स्टूडेंट्स पढ़ रहे thhe...Aur Sumit...Wo सोने की तयारी कर रहा था.

ये देख कर सुमित.

प्रोफेसर:- हे you...Boy ात लास्ट row...Kya नाम hai...Haan सुमित?

ये सुनते hi सुमित उठ कर खड़ा होता है.

सुमित:- जी सर.

प्रोफेसर:- तुम हमेशा लास्ट में hi क्यों बैठते हो? और अभी क्या कर रहे थे.

सुमित:- किसी महापुरुष ने कहा tha...Last रौ में बैठने से नींद अच्छा आता hai...Aur ऊपर से आपका लोरी जैसा सुरीला aawaj...Sone में सुहागा का काम कर रहा है. :यौन:

ये सुनते hi सभी हसने लगते है.

प्रोफेसर:- और ये महापुरुष है कौन?

सुमित:- छोड़िये ना Sir...Hai कोई सुमित नाम का.

प्रोफेसर:- तुम लेक्चर में ध्यान नहीं दे रहे ho...Matlab सब कुछ आता होगा.

सुमित:- शायद.

प्रोफेसर:- शायद का क्या matlab...Aaj तुझे अभी का लेक्चर रिलेटेड पूछता हूँ.

फिर प्रोफेसर क़ुएस्तिओन्स पूछते है और सुमित सही आंसर भी देता है.

प्रोफेसर:- अच्छा लास्ट question...What इस थे एपिथेलियल लाइनिंग ऑफ़ ब्रोन्चुस?

सुमित:- स्क्वैमस एपिथेलियम.

ये सुनते hi प्रोफेसर गुस्से में कहते है.

प्रोफेसर:- हमारे जमाने में तो हमने सिलिटेड कलुमनार एपिथेलियम पढ़ा था.

सुमित:- आपके जमाने में वो ट्रेंड उतना ज्यादा नहीं hoga...Lekin अब्ब ज़माना बदल रहा है.

प्रोफेसर:- ज़माना भले hi बदला ho...Lekin मेरे क्वेश्चन का आंसर बदला नहीं है.

सुमित:- लेकिन सर ये आंसर मुझ पर अप्लाई नहीं hota...Maine अपना बॉडी रिलेटेड आंसर दिया है.

प्रोफेसर:- ऐसा क्या है तुम्हारे बॉडी में.

प्रोफेसर के साथ सभी स्टूडेंट्स कन्फ्यूज्ड थे की सुमित कहना क्या चाहता है.

सुमित:- समझा कीजिये sir...Chronic smoking...Aur मेटाप्लॅसिए.

ये सुनते hi प्रोफेसर भी कुछ पल के लिए चुप हो जाते है.

प्रोफेसर:- ज्यादा स्मोकिंग मत karo...Warna ये मेटाप्लॅसिए नेओप्लासिए (कैंसर) में कही बदल न जाए.

(लम्बे टाइम तक स्मोकिंग करने से रेस्पिरेटरी तुबे में स्ट्रेस की वजह से सेल तोए बदल जाता है.)

सुमित:- ध्यान रखूँगा.

फिर प्रोफेसर पढ़ाने लगते है.

सुमित:- मई ी सीट सर?

प्रोफेसर:- हाँ बैठ जा abhi...Viva में छैन से बैठने नहीं दूंगा.

फिर सुमित बैठ जाता है.

तभी साइड में बैठी दिव्या कहती है.

दिव्या:- लगता नहीं तुम सर को परेशां करना बंद karoge...Collehe के फर्स्ट लेक्चर से ले कर हर लेक्चर में सर को परेशां करते hi रहते हो.

सुमित:- फवौरीते लेक्चरर hai...Majaa आता है सर का मजा lena...Aaj नींद नहीं लगता तो जरूर ध्यान देता.

दिव्या:- ी लिखे योर सेंस ऑफ़ ह्यूमर.

सुमित:- माय प्लेअसुरे.

उधर मेघा सब देख रही thi...Usse लग रहा था की सुमित की बातों में आ कर दिव्या कही दूसरी मेघा ना बन jaaye...Lunch टाइम में मेघा दिव्या से बात करने का सोचती है.

जब लेक्चर ख़त्म होता hai...Megha क्लास से बाहर जाती है.

मौका मिलते hi,

सुमित:- चाक़ू तरबूज पर गिरे या फिर तरबूज चाक़ू par...Katna तरबूज को hi है.

दिव्या:- मतलब?

सुमित:- तुम मुझ पर फिसलो या मई तुम par...Nukshaan तुम्हारा hi है.

दिव्या:- क्या मतलब?

सुमित:- मेघा की तरह इतना भी मत इम्प्रेस्सेड हो जाना मुझ ओर की कही बाद में तुम्हे भी पछताना ना पड़े.

दिव्या:- Chhee...Aise हो tum...Mai तो तुमसे दोस्ती करना चाहती thi...Bahut अच्छा समझती थी तुम्हे.

सुमित:- अच्छा और mai...Dur दूर तक कोई रिलेशन नहीं है.

इतना कह कर सुमित मुस्कुराने लगता hai...Divya अब्ब कोई जवाब नहीं देती.

मेघा जब वापस आती है तब,

दिव्या:- सही किया तुमने जो इससे ब्रेकअप कर लिया.

मेघा:- तुम भी दूर hi raho...Psycho है ये आदमी.

ये सुन सुमित मुस्कुरा कर इग्नोर कर देता है.

जब लंच टाइम होता है तब दिव्या पहले hi वह से चली जाती है.

सुमित:- क्या कह रही थी mujhe...Psycho...Psycho मतलब paagal...Haan पागल तो hun...Lekin कीर्ति के प्यार में.

मेघा कोई जवाब नहीं देती.

बाकी सभी लंच के लिए चले जाते है सुमित, मेघा और राज के alawa...Kuch रौ आगे बैठा राज दोनों की कुछ बातें सुन रहा था और समझ रहा था.

राज:- मेघा अगर कोई इंसान जान बुझ कर किसी के दिल में अपने लिए नफरत भर रहा हो तो समझ जाना कोई मकशद है इसके piche...Acche से sochna...Kuch मज़बूरी भी हो सकता है.

मेघा:- मकशद तो hai...Wo भी खतरनाक वाला.

मेघा की हर एक शब्द में नफरत था सुमित के लिए.

सुमित:- राज तू कहता था न तू एनाटोमी समझ नहीं पा रहा hai...Aaj रात बहुत अच्छे से samjhaunga...Aise समझाऊंगा की कभी भूल नहीं पायेगा....अभी तू जा.

सुमित ने तो बात इशारा में कहा tha...Lekin राज भी समझ गया और वह से चला गया.

सुमित भी बैग उठा कर जाने hi वाला था की.

मेघा:- कीर्ति बहुत अच्छी लड़की hai...Please उससे...

सुमित:- अच्छी है इसी लिए तो प्यार करता हूँ. :लव:

इतना कह कर सुमित आगे चल gaya...Saath hi वो ये भी सोच रहा था की आगे क्या करना है.
 
थैंक्स कीर्ति ji...Itna भी कपुलसीओं नहीं है की रिव्यु देना hi पड़ेगा. :D...Wo एक दम से रिव्यु ना आने पर सोचने के लिए मजबूर हो गया था की स्टोरी अच्छा चल तो रहा है? खैर, अब्ब कभी बी चांस रिव्यु ना भी आया तो भीबलखते rahunga...Xossip में किसी महान राइटर ने कहा था स्टोरी अपने साइलेंट रीडर्स के लिए लिखो.

टाइम मिले तो रिव्यु कर dijiye...Accha lagega...Lekin कंपल्सरी नहीं है. :डी
 
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