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- Dec 5, 2013
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अपडेट 33
नेक्स्ट डे
क्या कर रहा है?
सुमित ने फ़ोन उठाया hi था की आशीष ने सवाल फायर कर दिया.
सुमित:- मच्चर मार रहा hun...Khayega?
सुमित की आवाज में इर्रिटेशन साफ़ झलक रहा था.
आशीष:- छिड़ा हुआ लग रहा है.
सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.
आशीष:- अबे बता न?
सुमित फिर भी कुछ नहीं बोलै.
आशीष:- मेरे भाई को किसी ने डांटा?
आशीष ने बच्चे की आवाज में सवाल किया.
सुमित:- अभी...
इर्रिटेशन में सुमित इससे आगे नहीं बोलै.
आशीष:- मेरे भाई को चॉकलेट chahiye...Chal आजा खरीद देता hun...Lekin ऐसे रू मत.
सुमित:- बोर मत kar...Please.
आशीष:- जानता तो तू भी है की जब तक तू सच सच नहीं batayega...Tab तक तेरा पीछा नहीं छोडूंगा.
सुमित:- दोपहर के 12 बज रहे hai...Pata नहीं कीर्ति कहा चली गयी है.
आशीष:- तो ये है राज़ तेरे गुस्से ka...Tere छिड़ चिढ़ापन का.
आशीष ने हँसते हुए कहा.
सुमित:- अबे हंस मत.
आशीष:- तो फ़ोन कर le...Badi बात थोड़ी न है.
सुमित:- चुटिया दीखता हूँ तुझे मई? जो ये आईडिया दे रहा है.
सब कुछ तरय कर चूका hun...Phone नहीं उठा रही hai...Message का रिप्लाई नहीं दे रही hai...Pareshaan हो गया हूँ.
पता नहीं कहा चली गयी सुबह subah...Jo अभी तक वापस नहीं लौटी.
आशीष:- सब ठीक तो है naa...I मैं...
सुमित:- मेरे अलावा सब ठीक hai...Ghar में सब नार्मल है इसका मतलब कही गयी होगी वो इन्फॉर्म कर
के.
आशीष:- तो किसी से पूछ ले घर में?
सुमित:- पूछा था माँ se...Ulta उन्होंने hi मुझसे पूछ लिया की क्या काम है?
किसी तरह पढ़ाई की बहाना मार कर निकल आया.
आशीष:- टाइम तो पूछ leta...Kab तक वापस आएगी.
सुमित:- अब्ब इतना हिम्मत nahi...Unhone पूछ लिया की इतना क्यों इंटरेस्ट ले रहा है कीर्ति में तो क्या जवाब दूंगा.
आशीष:- तरस आ रहा है तुझ पर.
सुमित:- वक्त hi ऐसा है की तू भी मुझ पर तरस खा रहा है.
सुमित:- तू इस मटर में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रहा है?
आशीष:- बहुत दिनों से मुफ्त की पार्टी में नहीं गया इस्सलिये.
सुमित:- मतलब?
आशीष:- कुछ ख़ास nahi...Tujhse भी ज्यादा मई बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ की कब तेरा और कीर्ति का सेटिंग hoga...Aur कब ये प्यार को उसका मंजिल milega...Kab तुम दोनों की शादी की बात चलेगा और कब मुझे मुफ्त की पार्टी के लिए इनविटेशन मिलेगा?
सुमित:- दिन में भी सपना देखने लग गया है तू.
आशीष:- खैर छोड़, तुझे नहीं लगता तुझे कीर्ति से सच में प्यार हो गया है?
सुमित:- नहीं तो.
आशीष:- तो फिर ये intejaar...Intejaar की तड़प?
सुमित:- बैठे बैठे बोर हो रहा हूँ और बात करने के लिए भी कोई नहीं hai...Sirf इसी वजह से.
आशीष:- मई तो तैयार हूँ बात करने के liye...Din भर फ्री hi हूँ.
सुमित:- तुझसे कौन बात करेगा.
इतना कह कर सुमित फ़ोन कट कर देता है.
आशीष:- Kamine...Nahi सुधरेगा.
इतना कह कर वो मुस्कुराने लगता है.
दूसरी तरफ Sumit...Wo भी अपनी जगह पर सही tha...Kirti से बातें करना उससे अच्छा लगता tha...Lekin कितना अच्छा लगता है इस सवाल से वो खुद अनजान था.
फिर सुमित लग गया अपने काम mein...Macchar मारने का.
किसी तरह वक्त बीत ता gaya...Sumit की हालत और खराब होते जा रहा tha...Shaam होते होते सुमित से और रहा नहीं gaya...Chhat में जा कर इधर उधर भटकते हुए अपना फ़्रस्ट्रेशन दूर कर रहा था.
जब निचे दूर बेल्ल बजा तो एक उम्मीद सा jaaga...Khud उसी ने जा कर गेट खोला.
और गेट खोलते hi सामने का नजारा देख उसको ऐसा लगा जैसे किसी प्यासे मुसाफिर को मरुभूमि (डेजर्ट) में पानी मिल गया हो.
होंठो पर अपने आप hi मुस्कान लौट aaya...Uski नजर कीर्ति पर hi टिक गया.
कीर्ति भी सुमित को देख मुस्कुराती है और फिर चली जाती है.
सुमित भी वापस छत की तरफ चला जाता hai...Lekin इस बार दिल में ख़ुशी और उमंग के साथ.
छत में पहुँचते hi उसने कीर्ति को मैसेज किया.
सुमित:- कुछ बातें करनी hai...Aao छत में.
10 मिनट के इंतजार के बाद कीर्ति आ गयी.
कीर्ति:- Kahiye...Kya बात करनी है आपको मुझसे? वो भी छत में अकेले.
सुमित:- ऐसी hi ... कुछ ख़ास नहीं.
कीर्ति भी सुमित के पास पहुँच गयी.
सुमित:- कहा गयी थी तुम आज?
कीर्ति:- दोस्तों के साथ घूमने.
सुमित:- कौन दोस्त?
कीर्ति:- आप मेरी दोस्तों को थोड़ी ना जानते hai...Wohi मेघा और Neha...Jisse मंदिर में देखा था.
कीर्ति:- कही आप मेरा वेट तो नहीं कर रहे थे?
सुमित:- नहीं nahi...Mai क्यों करूँगा wait...Bas आज सुबह से नहीं दिखी तो पूछ लिया.
कीर्ति:- Sorry...Aapke मश्ग का रिप्लाई भी नहीं kiya...Thoda बिजी थी दोस्तों के साथ.
सुमित:- कोई बात नहीं.
सुमित ने किसी तरह कण्ट्रोल कर के कहा.
कीर्ति:- एक बात बताना था आपको.
सुमित:- प्लीज अब्ब कोई प्रोपोज़ मत कर देना.
कीर्ति:- वो तो मई पहले hi कर चुकी हूँ और अब्ब इंतजार कर रही हूँ आपके जवाब "हां" में सुनने का.
सुमित:- हाँ बताओ क्या बात बताना है.
बात को डाइवर्ट करते हुए कहा सुमित ने.
कीर्ति:- वही आप का सवाल? उस दिन मंदिर क्यों ले गयी थी?
सुमित:- हाँ बताओ.
थोड़ा एक्ससिटेमेंट के साथ सुमित ने कहा.
कीर्ति:- हम दोनों नए रिश्ते की सुरुवात करने जा रहे thhe...Pyar की rishte...Issi लिए सबसे जरुरी था भगवान् से आशीर्वाद lena...Hum दोनों का साथ हमेशा हमेशा के लिए बने रहे.
कीर्ति का कॉन्फिडेंस देख सुमित भी हैरानी रह गया.
सुमित:- क्या? नए रिश्ते? वो भी प्यार ke...Mai तैयार नहीं हूँ.
कीर्ति:- वो तो आप हो hi जाएंगे.
कीर्ति का कॉन्फिडेंस देख सुमित कुछ बोल नहीं पाया.
कीर्ति को भी लगा की वो सही जा रही है.
कीर्ति:- अभी तक आपने मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट नहीं किया? कही आप किसी और को तो नहीं चाहते है.
सुमित:- Nahi...Ye प्यार वयर मेरे लायक बात नहीं hai...Isse दूर hi रहता हूँ.
कीर्ति:- अच्छा hai...Baaki लड़कियों से आपको कोई मतलब नहीं.
सुमित:- मतलब तो उतना तुमसे भी नहीं है.
कीर्ति:- दिल तो कर रहा है अपने पांचो ऊँगली का छाप आपके गाल पर चिपका dun...Lekin कोई फायदा nahi...Daadhi इतना बढ़ा रखा है आपने की दिखेगा भी नहीं.
कीर्ति ने गुस्से में कहा.
सुमित मुस्कुराने लगा.
कीर्ति:- ऊँगली का छाप भले hi आपके गाल में नहीं छपे लेकिन मेरा नाम आपके दिल में छाप नहीं दिया तो नाम बदल दीजिये.
इतना कह कर कीर्ति मुंह फुला कर वह से चली गयी.
आफ्टर डिनर.
आज भी सुमित पानी भरने निचे किचन में आया.
कीर्ति:- नहीं Aunty...Aap को खाना hi पड़ेगा.
स. माँ:- Nahi...Mai ठीक हूँ.
कीर्ति:- खाइये.
कीर्ति ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए दवा सुमित की माँ को दिया.
स. माँ:- बस थोड़ा सा बुखार hai...Aaram करुँगी तो ठीक हो जाएगा.
कीर्ति:- मैंने kaha...Khaaiye.
इस बार कीर्ति की आवाज में रिक्वेस्ट काम आर्डर ज्यादा था.
सुमित की माँ भी दवा खा लेती है.
सुमित कीर्ति का ये रूप देख मुस्कुरा रहा था.
फिर वो आगे जा कर दवाई चेक करता है.
सुमित:- Paracetamol...Matlab NSAID...Galat दवाई नहीं है.
कीर्ति:- ये नसाइड क्या है?
सुमित:- पहले अच्छे से पढ़ो likho...MBBS में एडमिशन lo...Detail में समझ जाओगी फिर.
सुमित:- और Kirti...Bataana मुझे अगर माँ ने किसी चीज के लिए मना किया तो.
सुमित:- और Maa...Future डॉक्टर है ye...Sochna मत की आप का कोई भी मनमानी चलेगी कीर्ति के साथ वो भी हेल्थ की इशू में.
इतना कह कर सुमित वह से जाने लगा तभी उससे कुछ याद आया.
सुमित:- Kirti...Paracetamol का उसे लिमिटेड hi ठीक hai...It इस थे मोस्ट हेपटोटोक्सिक ड्रग.
स. माँ:- कुछ समझ में आये ऐसा बोल.
सुमित:- कह रहा tha...Ye दवाई ज्यादा खाने पर लिवर डैमेज हो सकता hai...Issi वजह से काम इस्तेमाल करने के लिए कह रहा था.
कीर्ति:- सही कहा आंटी aapne...Ye क्या बोलते है कुछ भी समझ में नहीं aata...Dil में बात कुछ होता है और बोलते कुछ और है.
सुमित:- तुमसे नहीं जीत सकता.
इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Aaj उससे कीर्ति का एक और नया रूप देखने को mila...Kirti का केयर आज उससे साफ़ दिखाई दे रहा था अपने माँ के लिए.
होंठ में मुस्कान के साथ कीर्ति के बारे में सोचते हुए वो अपने रूम में चला गया.
नेक्स्ट डे
क्या कर रहा है?
सुमित ने फ़ोन उठाया hi था की आशीष ने सवाल फायर कर दिया.
सुमित:- मच्चर मार रहा hun...Khayega?
सुमित की आवाज में इर्रिटेशन साफ़ झलक रहा था.
आशीष:- छिड़ा हुआ लग रहा है.
सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.
आशीष:- अबे बता न?
सुमित फिर भी कुछ नहीं बोलै.
आशीष:- मेरे भाई को किसी ने डांटा?
आशीष ने बच्चे की आवाज में सवाल किया.
सुमित:- अभी...
इर्रिटेशन में सुमित इससे आगे नहीं बोलै.
आशीष:- मेरे भाई को चॉकलेट chahiye...Chal आजा खरीद देता hun...Lekin ऐसे रू मत.
सुमित:- बोर मत kar...Please.
आशीष:- जानता तो तू भी है की जब तक तू सच सच नहीं batayega...Tab तक तेरा पीछा नहीं छोडूंगा.
सुमित:- दोपहर के 12 बज रहे hai...Pata नहीं कीर्ति कहा चली गयी है.
आशीष:- तो ये है राज़ तेरे गुस्से ka...Tere छिड़ चिढ़ापन का.
आशीष ने हँसते हुए कहा.
सुमित:- अबे हंस मत.
आशीष:- तो फ़ोन कर le...Badi बात थोड़ी न है.
सुमित:- चुटिया दीखता हूँ तुझे मई? जो ये आईडिया दे रहा है.
सब कुछ तरय कर चूका hun...Phone नहीं उठा रही hai...Message का रिप्लाई नहीं दे रही hai...Pareshaan हो गया हूँ.
पता नहीं कहा चली गयी सुबह subah...Jo अभी तक वापस नहीं लौटी.
आशीष:- सब ठीक तो है naa...I मैं...
सुमित:- मेरे अलावा सब ठीक hai...Ghar में सब नार्मल है इसका मतलब कही गयी होगी वो इन्फॉर्म कर
के.
आशीष:- तो किसी से पूछ ले घर में?
सुमित:- पूछा था माँ se...Ulta उन्होंने hi मुझसे पूछ लिया की क्या काम है?
किसी तरह पढ़ाई की बहाना मार कर निकल आया.
आशीष:- टाइम तो पूछ leta...Kab तक वापस आएगी.
सुमित:- अब्ब इतना हिम्मत nahi...Unhone पूछ लिया की इतना क्यों इंटरेस्ट ले रहा है कीर्ति में तो क्या जवाब दूंगा.
आशीष:- तरस आ रहा है तुझ पर.
सुमित:- वक्त hi ऐसा है की तू भी मुझ पर तरस खा रहा है.
सुमित:- तू इस मटर में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रहा है?
आशीष:- बहुत दिनों से मुफ्त की पार्टी में नहीं गया इस्सलिये.
सुमित:- मतलब?
आशीष:- कुछ ख़ास nahi...Tujhse भी ज्यादा मई बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ की कब तेरा और कीर्ति का सेटिंग hoga...Aur कब ये प्यार को उसका मंजिल milega...Kab तुम दोनों की शादी की बात चलेगा और कब मुझे मुफ्त की पार्टी के लिए इनविटेशन मिलेगा?
सुमित:- दिन में भी सपना देखने लग गया है तू.
आशीष:- खैर छोड़, तुझे नहीं लगता तुझे कीर्ति से सच में प्यार हो गया है?
सुमित:- नहीं तो.
आशीष:- तो फिर ये intejaar...Intejaar की तड़प?
सुमित:- बैठे बैठे बोर हो रहा हूँ और बात करने के लिए भी कोई नहीं hai...Sirf इसी वजह से.
आशीष:- मई तो तैयार हूँ बात करने के liye...Din भर फ्री hi हूँ.
सुमित:- तुझसे कौन बात करेगा.
इतना कह कर सुमित फ़ोन कट कर देता है.
आशीष:- Kamine...Nahi सुधरेगा.
इतना कह कर वो मुस्कुराने लगता है.
दूसरी तरफ Sumit...Wo भी अपनी जगह पर सही tha...Kirti से बातें करना उससे अच्छा लगता tha...Lekin कितना अच्छा लगता है इस सवाल से वो खुद अनजान था.
फिर सुमित लग गया अपने काम mein...Macchar मारने का.
किसी तरह वक्त बीत ता gaya...Sumit की हालत और खराब होते जा रहा tha...Shaam होते होते सुमित से और रहा नहीं gaya...Chhat में जा कर इधर उधर भटकते हुए अपना फ़्रस्ट्रेशन दूर कर रहा था.
जब निचे दूर बेल्ल बजा तो एक उम्मीद सा jaaga...Khud उसी ने जा कर गेट खोला.
और गेट खोलते hi सामने का नजारा देख उसको ऐसा लगा जैसे किसी प्यासे मुसाफिर को मरुभूमि (डेजर्ट) में पानी मिल गया हो.
होंठो पर अपने आप hi मुस्कान लौट aaya...Uski नजर कीर्ति पर hi टिक गया.
कीर्ति भी सुमित को देख मुस्कुराती है और फिर चली जाती है.
सुमित भी वापस छत की तरफ चला जाता hai...Lekin इस बार दिल में ख़ुशी और उमंग के साथ.
छत में पहुँचते hi उसने कीर्ति को मैसेज किया.
सुमित:- कुछ बातें करनी hai...Aao छत में.
10 मिनट के इंतजार के बाद कीर्ति आ गयी.
कीर्ति:- Kahiye...Kya बात करनी है आपको मुझसे? वो भी छत में अकेले.
सुमित:- ऐसी hi ... कुछ ख़ास नहीं.
कीर्ति भी सुमित के पास पहुँच गयी.
सुमित:- कहा गयी थी तुम आज?
कीर्ति:- दोस्तों के साथ घूमने.
सुमित:- कौन दोस्त?
कीर्ति:- आप मेरी दोस्तों को थोड़ी ना जानते hai...Wohi मेघा और Neha...Jisse मंदिर में देखा था.
कीर्ति:- कही आप मेरा वेट तो नहीं कर रहे थे?
सुमित:- नहीं nahi...Mai क्यों करूँगा wait...Bas आज सुबह से नहीं दिखी तो पूछ लिया.
कीर्ति:- Sorry...Aapke मश्ग का रिप्लाई भी नहीं kiya...Thoda बिजी थी दोस्तों के साथ.
सुमित:- कोई बात नहीं.
सुमित ने किसी तरह कण्ट्रोल कर के कहा.
कीर्ति:- एक बात बताना था आपको.
सुमित:- प्लीज अब्ब कोई प्रोपोज़ मत कर देना.
कीर्ति:- वो तो मई पहले hi कर चुकी हूँ और अब्ब इंतजार कर रही हूँ आपके जवाब "हां" में सुनने का.
सुमित:- हाँ बताओ क्या बात बताना है.
बात को डाइवर्ट करते हुए कहा सुमित ने.
कीर्ति:- वही आप का सवाल? उस दिन मंदिर क्यों ले गयी थी?
सुमित:- हाँ बताओ.
थोड़ा एक्ससिटेमेंट के साथ सुमित ने कहा.
कीर्ति:- हम दोनों नए रिश्ते की सुरुवात करने जा रहे thhe...Pyar की rishte...Issi लिए सबसे जरुरी था भगवान् से आशीर्वाद lena...Hum दोनों का साथ हमेशा हमेशा के लिए बने रहे.
कीर्ति का कॉन्फिडेंस देख सुमित भी हैरानी रह गया.
सुमित:- क्या? नए रिश्ते? वो भी प्यार ke...Mai तैयार नहीं हूँ.
कीर्ति:- वो तो आप हो hi जाएंगे.
कीर्ति का कॉन्फिडेंस देख सुमित कुछ बोल नहीं पाया.
कीर्ति को भी लगा की वो सही जा रही है.
कीर्ति:- अभी तक आपने मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट नहीं किया? कही आप किसी और को तो नहीं चाहते है.
सुमित:- Nahi...Ye प्यार वयर मेरे लायक बात नहीं hai...Isse दूर hi रहता हूँ.
कीर्ति:- अच्छा hai...Baaki लड़कियों से आपको कोई मतलब नहीं.
सुमित:- मतलब तो उतना तुमसे भी नहीं है.
कीर्ति:- दिल तो कर रहा है अपने पांचो ऊँगली का छाप आपके गाल पर चिपका dun...Lekin कोई फायदा nahi...Daadhi इतना बढ़ा रखा है आपने की दिखेगा भी नहीं.
कीर्ति ने गुस्से में कहा.
सुमित मुस्कुराने लगा.
कीर्ति:- ऊँगली का छाप भले hi आपके गाल में नहीं छपे लेकिन मेरा नाम आपके दिल में छाप नहीं दिया तो नाम बदल दीजिये.
इतना कह कर कीर्ति मुंह फुला कर वह से चली गयी.
आफ्टर डिनर.
आज भी सुमित पानी भरने निचे किचन में आया.
कीर्ति:- नहीं Aunty...Aap को खाना hi पड़ेगा.
स. माँ:- Nahi...Mai ठीक हूँ.
कीर्ति:- खाइये.
कीर्ति ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए दवा सुमित की माँ को दिया.
स. माँ:- बस थोड़ा सा बुखार hai...Aaram करुँगी तो ठीक हो जाएगा.
कीर्ति:- मैंने kaha...Khaaiye.
इस बार कीर्ति की आवाज में रिक्वेस्ट काम आर्डर ज्यादा था.
सुमित की माँ भी दवा खा लेती है.
सुमित कीर्ति का ये रूप देख मुस्कुरा रहा था.
फिर वो आगे जा कर दवाई चेक करता है.
सुमित:- Paracetamol...Matlab NSAID...Galat दवाई नहीं है.
कीर्ति:- ये नसाइड क्या है?
सुमित:- पहले अच्छे से पढ़ो likho...MBBS में एडमिशन lo...Detail में समझ जाओगी फिर.
सुमित:- और Kirti...Bataana मुझे अगर माँ ने किसी चीज के लिए मना किया तो.
सुमित:- और Maa...Future डॉक्टर है ye...Sochna मत की आप का कोई भी मनमानी चलेगी कीर्ति के साथ वो भी हेल्थ की इशू में.
इतना कह कर सुमित वह से जाने लगा तभी उससे कुछ याद आया.
सुमित:- Kirti...Paracetamol का उसे लिमिटेड hi ठीक hai...It इस थे मोस्ट हेपटोटोक्सिक ड्रग.
स. माँ:- कुछ समझ में आये ऐसा बोल.
सुमित:- कह रहा tha...Ye दवाई ज्यादा खाने पर लिवर डैमेज हो सकता hai...Issi वजह से काम इस्तेमाल करने के लिए कह रहा था.
कीर्ति:- सही कहा आंटी aapne...Ye क्या बोलते है कुछ भी समझ में नहीं aata...Dil में बात कुछ होता है और बोलते कुछ और है.
सुमित:- तुमसे नहीं जीत सकता.
इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Aaj उससे कीर्ति का एक और नया रूप देखने को mila...Kirti का केयर आज उससे साफ़ दिखाई दे रहा था अपने माँ के लिए.
होंठ में मुस्कान के साथ कीर्ति के बारे में सोचते हुए वो अपने रूम में चला गया.