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विवेक:- समझ में नहीं आ रहा है कैसे बताओ कीर्ति को अपने दिल की बात?
यही वो बात था जिसने सुमित को विवेक की बात सुनने के लिए मजबूर किया.
दूसरी तरफ से:- अबे बता de...Itna क्या सोच रहा है?
विवेक:- अगर मना कर दिया तो...
विवेक की आवाज में दर था.
दूसरी तरफ से:- अच्छा एक बात bata...Tera कीर्ति के साथ कैसा रिलेशन है?
विवेक:- Friendly...Sirf फ्रेंडली.
मायूस आवाज में बोलै विवेक.
दूसरी तरफ से:- अबे चूतिये...1 साल से कीर्ति के साथ hai..Aur सिर्फ फ्रेंडली hi hai...Kya गाली दू समझ में नहीं आ रहा है.
दूसरी तरफ से अपने दोस्त को गुस्सा होता देख विवेक और भी परेशान हो गया.
विवेक:- तुझे सुग्गेस्टिव के लिए पूछ रहा hun...Ulta तू hi मुझे डिमोटिवेट कर रहा है.
दूसरी तरफ से:- तो क्या karu...Itna टाइम काफी होता है फ्रेंडली से भी आगे बढ़ने ki...Lekin तू...
विवेक:- ये सब उस सुमित की वजह से हुआ है.
इस बार विवेक की आवाज में गुस्सा था.
दूसरी तरफ से:- ये सुमित है कौन? और क्या कर दिया इस ने.
विवेक:- कीर्ति पहले उससे प्यार करती thi...Aur उस सुमित ने जब से कीर्ति का दिल तोडा है कीर्ति का प्यार से विश्वाश उठ चूका है.
और वो साला इस टूर में भी कीर्ति का पीछा पड़ा hai...Dil तो कर रहा है की....
सुमित का नाम जुबान में आते hi आवाज में भी गुस्सा भर जाता विवेक का.
फिर दोनों के बिच ऐसे hi बातें होता hai...Kabhi सुमित के बारे में तो कभी फ़ालतू की बातें.
कुछ देर बाद.
दूसरी तरफ से:- एक काम kar...Tu हमेशा hi सीरियस टाइप लगता hai...Aur शायद यही वजह है कीर्ति का तू सिर्फ दोस्त hi रह गया है.
थोड़ा इमोशनल बनने की तरय kar...Shayad तेरा काम बन जाए.
विवेक:- हाँ तरय करता हूँ.
दूसरी तरफ से:- Abey...Kabhi तो कॉंफिडेंट हो jaa...Aise लूज़र की जैसे बात करके कीर्ति को पतयेगा.
विवेक:- Chal...Pata कर hi दिखाऊंगा.
जबरदस्ती का कॉन्फिडेंस अपने आवाज में भर कर विवेक ने कहा.
दूसरी तरफ से:- हाँ ये हुई न baat...Apne साथ मेरा नाक भी मत कटवा dena...Chal...All थे बेस्ट.
ये कह कर दूसरी तरफ से कॉल कट हो जाता है.
विवेक:- (तो हिमसेल्फ) पता nahi...Kirti फिर भी मानेगी या नहीं.
सुमित को सिर्फ विवेक की hi आवाज सुनाई दे रहा tha..Lekin इतना काफी था सारे मामला समझने के लिए.
वो अब्ब अपने रूम में चला gaya...Dil एकदम से खुश हो gaya...Aakhir होता क्यों नहीं? उसकी Kirti...Wo भी तो प्यार के सफर में सुमित से आगे नहीं बढ़ी hai...Jo भी फीलिंग्स tha...Pyar का या नफरत ka...Wo सिर्फ सुमित के liye...Filhaal यही काफी था सुमित के लिए.
सुमित:- एक दर tha...Wo भी ख़त्म हो gaya...Vivek से जो भी इन्सेक्युरित्य था वो बस कीर्ति की वजह से tha...Dar था की कही कीर्ति भी उससे प्यार तो नहीं karti...Lekin अब्ब कोई दर नहीं.
चाहे कितना भी चालबाज़ी कर ले विवेक tu...Kirti तो मेरी hi hai...Hai इतना विश्वाश खुद पर.
ख़ुशी के मारे सुमित रूम की चारो तरफ चक्कर लगा रहा था.
सुमित:- ऐसा लग रहा है पहले वाला सुमित बन रहा हूँ फिर se...Wohi vishwash...Wohi jidd...Abb तो कीर्ति मेरी hi है.
बस नफरत को hi तो प्यार में बदलना hai...Badal dunga...Pyaar का वो एहसास दिलाऊंगा अपनी कीर्ति को की वो खुद दौड़ कर मेरे पा आएगी.
ऐसे hi ख़ुशी के साथ सुमित इधर उधर चक्कर लगा रहा था रूम ke...Uska अपने किस्मत से एक hi तो ख्वाहिश tha...Wo भी पूरा हो गया.
एक सही राष्ट hi तो माँगा था उसने कीर्ति तक पहुँचने ki...Aur वो आज उससे मिल gaya...Apne विश्वाश और हौसला के रूप में.
कुछ देर ऐसे hi खुद से बात करने के बाद सुमित को एक ख्याल आया.
सुमित:- (इन हिज मंद) वैसे मेहः मेरे लिए लकी hai...Jab भी वो मिलती है किस्मत भी एकदम से साथ देने लगता है.
सुमित:- (तो हिमसेल्फ) ये क्या फ़ालतू की बातें सोचने laga...Come ों Sumit...Just फोकस ों Kirti...Nothing ेल्स.
इन इवनिंग
सुबह से शाम तक बोर होने के बाद कीर्ति ने सोचा की शाम में नदी की तरफ घूमने के liye...Sabhi तैयार हो गए.
सुमित तो पहले से hi उत्शहित tha...Usse अब्ब और रहा नहीं गया.
सुमित:- वैसे मौसम कितना सुहाना हो गया है naa...Safed बादल और ठंडी hawaayein...Aur प्यार के ये ehsaas...Aisa महसूस हो रहा है की चारों तरफ हर एक कण (पार्टिकल) में प्यार hi प्यार hai...Aur इसका ये अध्भुत अनुभव.
कीर्ति की तरफ देख अपना ख़ुशी जाहिर करते हुए सुमित ने कहा.
सुमित की इस बात पर कीर्ति को तो कोई फर्क नहीं pada...Lekin मेघा सुमित को देख हैरान हो गयी थी.
कहा कुछ देर पहले टूटा हुआ और परेशान सा लगने वाला सुमित अभी एकदम से खुश दिख रहा है.
मेघा:- (इन हेर मंद) इसको आज तक समझ नहीं पायी हूँ तो अब्ब क्या समझूंगी.
लेकिन सुमित को खुश देख मेघा को भी अच्छा लग रहा था.
सुमित:- प्रकृति का ये नजारा तो dekho...Kitna सुन्दर hai...Chaaron तरफ बड़े बड़े पहाड़ hai...Jiska सर बादलों को भी चीयर कर शान से खड़ा hai...Saamne से ये बहती नदी जिसका बेग (स्पीड) ये दिखाता है की ये अपने मंजिल से मिल जाने के लिए कितना आतुर है.
और इसी प्रक्रिया में इस नदी से उत्पन्न होता मधुर sangit...Jo कान के रास्ते हो कर दिल और दिमाग दोनों को उमंग से भर देता hai...Aur ये तेज और ठंडी hawaayein...Jiska कण कण में सिर्फ प्यार hi प्यार है.
प्रकृति का ये नजारा किसी मूवी के वो हीरो और हीरोइन के डांसिंग लोकेशन से काम नहीं hai...Mai तो तैयार hun...Intejaar है तो बस अपनी हीरोइन की.
सुमित ने कीर्ति को देख प्यार से कहा.
मेघा:- वैसे तुम बात किस्से कर रहे ho...Yaha कोई भी तुमसे बात नहीं कर रहा है और ना hi करने के मूड में लग रहा है.
सुमित:- ये दिल की बात hai...Isse दूसरा दिल hi समझ सकता hai...Waise दो दिल की बातें कोई और समझ भी नहीं सकता.
एक बार फिर सुमित की नजर कीर्ति पर tha...Lekin कीर्ति इग्नोर कर आगे बढ़ जाती है.
सुमित अपने hi जगह खड़ा रह जाता hai...Teeno को आगे बढ़ते देख मुस्कुराने लगता hai...Jab कीर्ति थोड़ी दूर चली गयी तब.
Kirti...I लव यू.
सुमित ने ये एक बार kaha...Lekin ये आवाज कीर्ति को बार बार सुनाई दे रहा था.
काम hi ऐसा किया था सुमित ne...Karib 20 मीटर की दुरी से एक पहाड़ की तरफ मुंह कर के जोर से अपने प्यार का इजहार किया tha...Aur वही आवाज पहाड़ों में प्रतिबिम्ब (रिफ्लेक्शन) के रूप में कीर्ति को सुनाई दे रहा था.
लेकिन इसका भी कुछ फायदा नहीं हुआ सुमित ko...Kirti का चेहरा गुस्से से और लाल हो गया.
कीर्ति.
एक तेज आवाज के साथ कीर्ति पीछे मुड़ी.
पीछे मुड़ती hi देखा सुमित नदी के बिलकुल करीब था.
सुमित:- सोच रहा हूँ शोले के अंदाज़ में तुम्हे प्रोपोज़ करू.
कीर्ति कुछ नहीं kehti...Bas गुस्से से सुमित को देखती है.
सुमित:- अब्ब यहाँ पानी का टावर तो है नहीं तो सोचने पर सामने दिखा पानी का नदी.
सुमित की इस बात पर सभी हैरान हो जाते है कीर्ति के alawa...Abhi भी कीर्ति को कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा था.
सुमित:- अगर तुमने मेरे प्यार को नहीं अपनाया तो मई इस नदी में कूद जाऊँगा.
सुमित की ये आवाज से वो कितना सीरियस है कोई अंदाज नहीं लगा पा रहा था.
मेघा भी डरते हुए नदी को देखती hai...Dopahar से तो नदी की बेग और गहराई में थोड़ा कमी तो आया tha...Lekin अभी भी नदी किसी भी इंसान को बहा ले जा सकता tha...Aur एक बार नदी में गिर जाने के बाद इतना आसान नहीं था जिन्दा बाहर निकलना.
सुमित:- सच कह रहा हूँ Kirti...Apne प्यार की kasam...Tumne मेरा प्यार को नहीं अपनाया तो सच में कूद जाऊँगा.
इस बार सुमित की आवाज और भी सीरियस था.
सभी हैरान थे की सुमित को अचानक क्या हो गया है? कुछ देर पहले तो बहुत खुश tha...Lekin अब्ब?
मेघा:- कुछ तो बोल.
मेघा की आवाज में भी दर साफ़ दिख रहा था.
कीर्ति फिर भी चुप थी.
सुमित:- सिर्फ 10 तक गिनूंगा कीर्ति.
मेघा:- रोक ले उसको.
कीर्ति:- अच्छे से जानती हूँ isko...Bahut बड़ा ड्रामेबाज़ hai...Nahi kudega...Isko सिर्फ अटेंशन चाहिए.
सुमित:- अटेंशन नहीं तुम्हारा प्यार चाहिए.
इसके बाद सुमित अपना गिनती सुरु कर देता है.
मेघा बार बार कीर्ति को मना रही थी.
कीर्ति:- कह दिया naa...Ye नहीं kudega...Sab कुछ जानती हूँ इसके बारे में.
कीर्ति ने भी जिद्द पकड़ लिया की वो सुमित को नहीं रोकेगी.
सुमित:- 3...2...1
और देखते hi देखते सुमित ने नदी पर छलांग लगा दिया.
इस बार कीर्ति की भी आँखें हैरानी में बड़ी हो गयी और दर के मारे उसके हाथ पेअर एकदम से काम करना बंद कर चूका था.
नदी अपने बेग से सुमित को अपने साथ ले जा रहा था.
जहा पहले कीर्ति और सुमित के बिच की दुरी 50 मीटर था छलांग लगाने से पहले और अब्ब वही नदी सुमित को कीर्ति के आँखों के सामने से ले जा रहा था.
कीर्ति अपना हाथ आगे बढ़ा कर सुमित को रोक लेना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पायी.
सुमित मुस्कुराता हुआ कीर्ति की नजर से दूर जाने लगा.
मेघा का हाल भी कुछ ठीक नहीं tha...Usse भी अपने आँखों पर विश्वाश नहीं हो रहा tha...Aur दिल का दर्द अलग.
Vivek...Wo भी सुमित ऐ चाहे कितना नफरत करे लेकिन सुमित का ऐसा कर जाना उससे भी अच्छा नहीं लग रहा था.
करीब 20 मीटर और दूर जाने के बाद सुमित के हाथ और पेअर काम करना चालू कर देता hai...Aur थोड़ा म्हणत करने के बाद सभी को फिर से चौंकातु हुए वो नदी से बाहर सुरक्षित निकल आता है.
होंठो में वही मुस्कान के साथ कीर्ति की तरफ बढ़ने लगता है.
कीर्ति भी दौड़ कर सुमित की तरफ जाती है.
सुमित:- कैसा लगा मेरा स्विमिंग?
चटाक.
एक जोर का थप्पड़ सुमित के गाल पर लगता है.
सुमित:- ारी मई.
चटाक.
दूसरे गाल में भी कीर्ति के पांचो ऊँगली के चाप बन जाते है.
कीर्ति:- ऐसे बेवकूफी कर के तुम्हे लगता है मुझे मना लोगे?
सुमित:- Chill...Suicide नहीं स्विमिंग करना चाहता था.
सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा लेकिन कीर्ति अभी भी गुस्से में थी.
सुमित:- Megha...Kya कह रही थी कीर्ति तुमसे? मेरे बारे में सब कुछ जानती है.
कुछ नहीं जानती है ये pagli...Isse तो ये भी नहीं पता की मेरा फवौरीते एडवेंचर hai...Rafting...Aur स्विमिंग तो जैसे मेरे खून में दौड़ता है.
(कीर्ति को देख कर) ना तुम्हे मेरा होब्बीएस का पता है और ना hi मेरे प्यार का ehsaas...Kabhi जान्ने की तो कोशिश करो सच कहता hun...Pyaar हो जाएगा तुम्हे भी.
सुमित ने कीर्ति की आँखों में देखते हुए कहा.
और फिर विवेक की तरफ जाते हुए.
सुमित:- Kirti...Tumhaare लिए मेरा प्यार और भी बढ़ gaya...Bahut सही डिसिशन था tumhara...Kisi के इमोशनल हो जाने का मतलब ये नहीं की वो प्यार hai...Aur कोई इमोशनल है ये सोच कर उस पर तरस खा कर प्यार नहीं करते.
प्यार तो दिल से होता hai...Jab दिल से प्यार का सच्चा एहसास हो तभी किसी के प्यार को अपनाना चाहिए.
वर्ण सुसाइड के धमकी से प्यार को काबुल करवाने वाले तो बहुत milenge...Aur याकि मानो जो सुसाइड का सोचता है हर फ़ालतू के चीज में उससे कमजोर इंसान कोई नहीं.
और ना hi उन् पर कभी विश्वाश करना जो कुछ ज्यादा hi इमोशनल बनने की कोशिश करे.
ये कहने के बाद सुमित विवेक को देखता है.
सुमित:- वैसे Kirti...Mujhe प्यार करना तुमने hi सिखाया hai...Aage भी पागलपन karunga...Bas इस टाइप के nahi...Yaad है मैंने जब तुम्हे मन किया था तब तुमने जिद्द पकड़ लिया था और मुझसे हाँ बुलवा कर hi maana...Abb मई भी तुम्हारे पीछे पड़ jaaunga...Aut हाँ बुलवा कर hi मानूंगा.
कीर्ति:- तो तुम अब्ब टार्चर करोगे?
सुमित:- नहीं प्यार का एहसास दिलवाऊंगा.
इस बार कीर्ति कुछ नहीं boli...Bas उस सदमा से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी.
दूसरी तरफ सुमित को सही सलामत देख मेघा के सांस में सांस आया.
सुमित:- Hello वप :डी
विवेक:- क्या मतलब है तेरा? इमोशनल क्या कह रहा था.
विवेक ने धीरे से कहा कही कीर्ति और मेघा सुन न ले.
सुमित:- सही सोच रहा है.
विवेक:- मतलब...
सुमित:- हाँ वही.
फिर विवेक हैरानी से सुमित को देखता hi रह जाता है.
सुमित:- तेरा ये इमोशन का ढोंग बेकार बनाने के लिए ये कर सकता हूँ तो सोच कीर्ति को प्यार का एहसास दिलाने के लिए क्या कुछ नहीं कर सकता?
विवेक:- समझ में नहीं आ रहा है कैसे बताओ कीर्ति को अपने दिल की बात?
यही वो बात था जिसने सुमित को विवेक की बात सुनने के लिए मजबूर किया.
दूसरी तरफ से:- अबे बता de...Itna क्या सोच रहा है?
विवेक:- अगर मना कर दिया तो...
विवेक की आवाज में दर था.
दूसरी तरफ से:- अच्छा एक बात bata...Tera कीर्ति के साथ कैसा रिलेशन है?
विवेक:- Friendly...Sirf फ्रेंडली.
मायूस आवाज में बोलै विवेक.
दूसरी तरफ से:- अबे चूतिये...1 साल से कीर्ति के साथ hai..Aur सिर्फ फ्रेंडली hi hai...Kya गाली दू समझ में नहीं आ रहा है.
दूसरी तरफ से अपने दोस्त को गुस्सा होता देख विवेक और भी परेशान हो गया.
विवेक:- तुझे सुग्गेस्टिव के लिए पूछ रहा hun...Ulta तू hi मुझे डिमोटिवेट कर रहा है.
दूसरी तरफ से:- तो क्या karu...Itna टाइम काफी होता है फ्रेंडली से भी आगे बढ़ने ki...Lekin तू...
विवेक:- ये सब उस सुमित की वजह से हुआ है.
इस बार विवेक की आवाज में गुस्सा था.
दूसरी तरफ से:- ये सुमित है कौन? और क्या कर दिया इस ने.
विवेक:- कीर्ति पहले उससे प्यार करती thi...Aur उस सुमित ने जब से कीर्ति का दिल तोडा है कीर्ति का प्यार से विश्वाश उठ चूका है.
और वो साला इस टूर में भी कीर्ति का पीछा पड़ा hai...Dil तो कर रहा है की....
सुमित का नाम जुबान में आते hi आवाज में भी गुस्सा भर जाता विवेक का.
फिर दोनों के बिच ऐसे hi बातें होता hai...Kabhi सुमित के बारे में तो कभी फ़ालतू की बातें.
कुछ देर बाद.
दूसरी तरफ से:- एक काम kar...Tu हमेशा hi सीरियस टाइप लगता hai...Aur शायद यही वजह है कीर्ति का तू सिर्फ दोस्त hi रह गया है.
थोड़ा इमोशनल बनने की तरय kar...Shayad तेरा काम बन जाए.
विवेक:- हाँ तरय करता हूँ.
दूसरी तरफ से:- Abey...Kabhi तो कॉंफिडेंट हो jaa...Aise लूज़र की जैसे बात करके कीर्ति को पतयेगा.
विवेक:- Chal...Pata कर hi दिखाऊंगा.
जबरदस्ती का कॉन्फिडेंस अपने आवाज में भर कर विवेक ने कहा.
दूसरी तरफ से:- हाँ ये हुई न baat...Apne साथ मेरा नाक भी मत कटवा dena...Chal...All थे बेस्ट.
ये कह कर दूसरी तरफ से कॉल कट हो जाता है.
विवेक:- (तो हिमसेल्फ) पता nahi...Kirti फिर भी मानेगी या नहीं.
सुमित को सिर्फ विवेक की hi आवाज सुनाई दे रहा tha..Lekin इतना काफी था सारे मामला समझने के लिए.
वो अब्ब अपने रूम में चला gaya...Dil एकदम से खुश हो gaya...Aakhir होता क्यों नहीं? उसकी Kirti...Wo भी तो प्यार के सफर में सुमित से आगे नहीं बढ़ी hai...Jo भी फीलिंग्स tha...Pyar का या नफरत ka...Wo सिर्फ सुमित के liye...Filhaal यही काफी था सुमित के लिए.
सुमित:- एक दर tha...Wo भी ख़त्म हो gaya...Vivek से जो भी इन्सेक्युरित्य था वो बस कीर्ति की वजह से tha...Dar था की कही कीर्ति भी उससे प्यार तो नहीं karti...Lekin अब्ब कोई दर नहीं.
चाहे कितना भी चालबाज़ी कर ले विवेक tu...Kirti तो मेरी hi hai...Hai इतना विश्वाश खुद पर.
ख़ुशी के मारे सुमित रूम की चारो तरफ चक्कर लगा रहा था.
सुमित:- ऐसा लग रहा है पहले वाला सुमित बन रहा हूँ फिर se...Wohi vishwash...Wohi jidd...Abb तो कीर्ति मेरी hi है.
बस नफरत को hi तो प्यार में बदलना hai...Badal dunga...Pyaar का वो एहसास दिलाऊंगा अपनी कीर्ति को की वो खुद दौड़ कर मेरे पा आएगी.
ऐसे hi ख़ुशी के साथ सुमित इधर उधर चक्कर लगा रहा था रूम ke...Uska अपने किस्मत से एक hi तो ख्वाहिश tha...Wo भी पूरा हो गया.
एक सही राष्ट hi तो माँगा था उसने कीर्ति तक पहुँचने ki...Aur वो आज उससे मिल gaya...Apne विश्वाश और हौसला के रूप में.
कुछ देर ऐसे hi खुद से बात करने के बाद सुमित को एक ख्याल आया.
सुमित:- (इन हिज मंद) वैसे मेहः मेरे लिए लकी hai...Jab भी वो मिलती है किस्मत भी एकदम से साथ देने लगता है.
सुमित:- (तो हिमसेल्फ) ये क्या फ़ालतू की बातें सोचने laga...Come ों Sumit...Just फोकस ों Kirti...Nothing ेल्स.
इन इवनिंग
सुबह से शाम तक बोर होने के बाद कीर्ति ने सोचा की शाम में नदी की तरफ घूमने के liye...Sabhi तैयार हो गए.
सुमित तो पहले से hi उत्शहित tha...Usse अब्ब और रहा नहीं गया.
सुमित:- वैसे मौसम कितना सुहाना हो गया है naa...Safed बादल और ठंडी hawaayein...Aur प्यार के ये ehsaas...Aisa महसूस हो रहा है की चारों तरफ हर एक कण (पार्टिकल) में प्यार hi प्यार hai...Aur इसका ये अध्भुत अनुभव.
कीर्ति की तरफ देख अपना ख़ुशी जाहिर करते हुए सुमित ने कहा.
सुमित की इस बात पर कीर्ति को तो कोई फर्क नहीं pada...Lekin मेघा सुमित को देख हैरान हो गयी थी.
कहा कुछ देर पहले टूटा हुआ और परेशान सा लगने वाला सुमित अभी एकदम से खुश दिख रहा है.
मेघा:- (इन हेर मंद) इसको आज तक समझ नहीं पायी हूँ तो अब्ब क्या समझूंगी.
लेकिन सुमित को खुश देख मेघा को भी अच्छा लग रहा था.
सुमित:- प्रकृति का ये नजारा तो dekho...Kitna सुन्दर hai...Chaaron तरफ बड़े बड़े पहाड़ hai...Jiska सर बादलों को भी चीयर कर शान से खड़ा hai...Saamne से ये बहती नदी जिसका बेग (स्पीड) ये दिखाता है की ये अपने मंजिल से मिल जाने के लिए कितना आतुर है.
और इसी प्रक्रिया में इस नदी से उत्पन्न होता मधुर sangit...Jo कान के रास्ते हो कर दिल और दिमाग दोनों को उमंग से भर देता hai...Aur ये तेज और ठंडी hawaayein...Jiska कण कण में सिर्फ प्यार hi प्यार है.
प्रकृति का ये नजारा किसी मूवी के वो हीरो और हीरोइन के डांसिंग लोकेशन से काम नहीं hai...Mai तो तैयार hun...Intejaar है तो बस अपनी हीरोइन की.
सुमित ने कीर्ति को देख प्यार से कहा.
मेघा:- वैसे तुम बात किस्से कर रहे ho...Yaha कोई भी तुमसे बात नहीं कर रहा है और ना hi करने के मूड में लग रहा है.
सुमित:- ये दिल की बात hai...Isse दूसरा दिल hi समझ सकता hai...Waise दो दिल की बातें कोई और समझ भी नहीं सकता.
एक बार फिर सुमित की नजर कीर्ति पर tha...Lekin कीर्ति इग्नोर कर आगे बढ़ जाती है.
सुमित अपने hi जगह खड़ा रह जाता hai...Teeno को आगे बढ़ते देख मुस्कुराने लगता hai...Jab कीर्ति थोड़ी दूर चली गयी तब.
Kirti...I लव यू.
सुमित ने ये एक बार kaha...Lekin ये आवाज कीर्ति को बार बार सुनाई दे रहा था.
काम hi ऐसा किया था सुमित ne...Karib 20 मीटर की दुरी से एक पहाड़ की तरफ मुंह कर के जोर से अपने प्यार का इजहार किया tha...Aur वही आवाज पहाड़ों में प्रतिबिम्ब (रिफ्लेक्शन) के रूप में कीर्ति को सुनाई दे रहा था.
लेकिन इसका भी कुछ फायदा नहीं हुआ सुमित ko...Kirti का चेहरा गुस्से से और लाल हो गया.
कीर्ति.
एक तेज आवाज के साथ कीर्ति पीछे मुड़ी.
पीछे मुड़ती hi देखा सुमित नदी के बिलकुल करीब था.
सुमित:- सोच रहा हूँ शोले के अंदाज़ में तुम्हे प्रोपोज़ करू.
कीर्ति कुछ नहीं kehti...Bas गुस्से से सुमित को देखती है.
सुमित:- अब्ब यहाँ पानी का टावर तो है नहीं तो सोचने पर सामने दिखा पानी का नदी.
सुमित की इस बात पर सभी हैरान हो जाते है कीर्ति के alawa...Abhi भी कीर्ति को कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा था.
सुमित:- अगर तुमने मेरे प्यार को नहीं अपनाया तो मई इस नदी में कूद जाऊँगा.
सुमित की ये आवाज से वो कितना सीरियस है कोई अंदाज नहीं लगा पा रहा था.
मेघा भी डरते हुए नदी को देखती hai...Dopahar से तो नदी की बेग और गहराई में थोड़ा कमी तो आया tha...Lekin अभी भी नदी किसी भी इंसान को बहा ले जा सकता tha...Aur एक बार नदी में गिर जाने के बाद इतना आसान नहीं था जिन्दा बाहर निकलना.
सुमित:- सच कह रहा हूँ Kirti...Apne प्यार की kasam...Tumne मेरा प्यार को नहीं अपनाया तो सच में कूद जाऊँगा.
इस बार सुमित की आवाज और भी सीरियस था.
सभी हैरान थे की सुमित को अचानक क्या हो गया है? कुछ देर पहले तो बहुत खुश tha...Lekin अब्ब?
मेघा:- कुछ तो बोल.
मेघा की आवाज में भी दर साफ़ दिख रहा था.
कीर्ति फिर भी चुप थी.
सुमित:- सिर्फ 10 तक गिनूंगा कीर्ति.
मेघा:- रोक ले उसको.
कीर्ति:- अच्छे से जानती हूँ isko...Bahut बड़ा ड्रामेबाज़ hai...Nahi kudega...Isko सिर्फ अटेंशन चाहिए.
सुमित:- अटेंशन नहीं तुम्हारा प्यार चाहिए.
इसके बाद सुमित अपना गिनती सुरु कर देता है.
मेघा बार बार कीर्ति को मना रही थी.
कीर्ति:- कह दिया naa...Ye नहीं kudega...Sab कुछ जानती हूँ इसके बारे में.
कीर्ति ने भी जिद्द पकड़ लिया की वो सुमित को नहीं रोकेगी.
सुमित:- 3...2...1
और देखते hi देखते सुमित ने नदी पर छलांग लगा दिया.
इस बार कीर्ति की भी आँखें हैरानी में बड़ी हो गयी और दर के मारे उसके हाथ पेअर एकदम से काम करना बंद कर चूका था.
नदी अपने बेग से सुमित को अपने साथ ले जा रहा था.
जहा पहले कीर्ति और सुमित के बिच की दुरी 50 मीटर था छलांग लगाने से पहले और अब्ब वही नदी सुमित को कीर्ति के आँखों के सामने से ले जा रहा था.
कीर्ति अपना हाथ आगे बढ़ा कर सुमित को रोक लेना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पायी.
सुमित मुस्कुराता हुआ कीर्ति की नजर से दूर जाने लगा.
मेघा का हाल भी कुछ ठीक नहीं tha...Usse भी अपने आँखों पर विश्वाश नहीं हो रहा tha...Aur दिल का दर्द अलग.
Vivek...Wo भी सुमित ऐ चाहे कितना नफरत करे लेकिन सुमित का ऐसा कर जाना उससे भी अच्छा नहीं लग रहा था.
करीब 20 मीटर और दूर जाने के बाद सुमित के हाथ और पेअर काम करना चालू कर देता hai...Aur थोड़ा म्हणत करने के बाद सभी को फिर से चौंकातु हुए वो नदी से बाहर सुरक्षित निकल आता है.
होंठो में वही मुस्कान के साथ कीर्ति की तरफ बढ़ने लगता है.
कीर्ति भी दौड़ कर सुमित की तरफ जाती है.
सुमित:- कैसा लगा मेरा स्विमिंग?
चटाक.
एक जोर का थप्पड़ सुमित के गाल पर लगता है.
सुमित:- ारी मई.
चटाक.
दूसरे गाल में भी कीर्ति के पांचो ऊँगली के चाप बन जाते है.
कीर्ति:- ऐसे बेवकूफी कर के तुम्हे लगता है मुझे मना लोगे?
सुमित:- Chill...Suicide नहीं स्विमिंग करना चाहता था.
सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा लेकिन कीर्ति अभी भी गुस्से में थी.
सुमित:- Megha...Kya कह रही थी कीर्ति तुमसे? मेरे बारे में सब कुछ जानती है.
कुछ नहीं जानती है ये pagli...Isse तो ये भी नहीं पता की मेरा फवौरीते एडवेंचर hai...Rafting...Aur स्विमिंग तो जैसे मेरे खून में दौड़ता है.
(कीर्ति को देख कर) ना तुम्हे मेरा होब्बीएस का पता है और ना hi मेरे प्यार का ehsaas...Kabhi जान्ने की तो कोशिश करो सच कहता hun...Pyaar हो जाएगा तुम्हे भी.
सुमित ने कीर्ति की आँखों में देखते हुए कहा.
और फिर विवेक की तरफ जाते हुए.
सुमित:- Kirti...Tumhaare लिए मेरा प्यार और भी बढ़ gaya...Bahut सही डिसिशन था tumhara...Kisi के इमोशनल हो जाने का मतलब ये नहीं की वो प्यार hai...Aur कोई इमोशनल है ये सोच कर उस पर तरस खा कर प्यार नहीं करते.
प्यार तो दिल से होता hai...Jab दिल से प्यार का सच्चा एहसास हो तभी किसी के प्यार को अपनाना चाहिए.
वर्ण सुसाइड के धमकी से प्यार को काबुल करवाने वाले तो बहुत milenge...Aur याकि मानो जो सुसाइड का सोचता है हर फ़ालतू के चीज में उससे कमजोर इंसान कोई नहीं.
और ना hi उन् पर कभी विश्वाश करना जो कुछ ज्यादा hi इमोशनल बनने की कोशिश करे.
ये कहने के बाद सुमित विवेक को देखता है.
सुमित:- वैसे Kirti...Mujhe प्यार करना तुमने hi सिखाया hai...Aage भी पागलपन karunga...Bas इस टाइप के nahi...Yaad है मैंने जब तुम्हे मन किया था तब तुमने जिद्द पकड़ लिया था और मुझसे हाँ बुलवा कर hi maana...Abb मई भी तुम्हारे पीछे पड़ jaaunga...Aut हाँ बुलवा कर hi मानूंगा.
कीर्ति:- तो तुम अब्ब टार्चर करोगे?
सुमित:- नहीं प्यार का एहसास दिलवाऊंगा.
इस बार कीर्ति कुछ नहीं boli...Bas उस सदमा से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी.
दूसरी तरफ सुमित को सही सलामत देख मेघा के सांस में सांस आया.
सुमित:- Hello वप :डी
विवेक:- क्या मतलब है तेरा? इमोशनल क्या कह रहा था.
विवेक ने धीरे से कहा कही कीर्ति और मेघा सुन न ले.
सुमित:- सही सोच रहा है.
विवेक:- मतलब...
सुमित:- हाँ वही.
फिर विवेक हैरानी से सुमित को देखता hi रह जाता है.
सुमित:- तेरा ये इमोशन का ढोंग बेकार बनाने के लिए ये कर सकता हूँ तो सोच कीर्ति को प्यार का एहसास दिलाने के लिए क्या कुछ नहीं कर सकता?