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अपडेट 26
भैया थोड़ा तीखा बनाना.
एक्ससिटेड हो कर कीर्ति बोली.
ये सुनते hi सुमित का हालत खराब हो gaya...Hadbadaate हुए सुमित बोलै.
सुमित:- नहीं bhaiya...Jyada तीखा नहीं.
सुमित की बात सुन कर पानी पूरी वाले भैया भी कंफ्यूज हो गए.
"पहले आप दोनों आपस में फैसला कीजिये और फिर बताइये कितना तीखा बनाना है."
कीर्ति:- क्यों आप तीखा नहीं खाते?
सुमित:- खाता तो hun...Lekin कहा लड़कियों से बराबरी कर सकता हूँ तीखा खाने mein...Jeevh जल जायेंगे, आँखों से आंसू बहेंगे और कानो से धुँआ niklenge...Nahi मई तीखा नहीं खाऊंगा.
इतना कह कर सुमित पीछे हैट गया.
कीर्ति:- किसने कह दिया लड़कियां तीखी खाती है?
सुमित:- भूलो मत मेरा भी एक बहिन hai...Aur उसके जिद्द में कभी कभी खाना पड़ता है.
(बड़बड़ाते हुए) और साथ में 2 एक्स भी.
कीर्ति:- नहीं nahi...Aaj तो आप को खाना hi पड़ेगा.
कीर्ति भी जिद्द में ऐड गयी.
सुमित कुछ बोल भी नहीं पा रहा tha...Bebasi में उसने पानी पूरी वाले को देखा.
"मई कुछ मदद नहीं कर sakta...Waise भी लड़कियों से कौन जीत सकता है? चुप चाप मान lo...Issi में सबकी भलाई है."
उनकी इस बात पर कीर्ति हंसती है और कहती है.
कीर्ति:- आप भी अपने गर्लफ्रेंड की सभी बातें मानते होंगे?
पानी पूरी वाला:- पुरे 25 का हो चूका hun...Aur इस उम्र में गर्लफ्रेंड कहा सीधे शादी हो जाता hai...Aur biwi...Wo तो गर्लफ्रेंड से भी खतरनाक होती hai...Har बात मनवा लेती है. :नू:
अच्छा अब्ब आप bataiye...Kitna तीखा बनाना है? मई बना देता हूँ.
फिर कीर्ति उन्हें बताने लगती hai...Aur जब सुमित ने सामने का नजारा ध्यान से देखा तो एक बार फिर से हड़बड़ा कर बोलै.
सुमित:- ये क्या कर रहे हो? एक hi प्लेट में?
कीर्ति:- क्यों? क्या प्रॉब्लम है?
सुमित:- मई झूठा नहीं खाता.
इस बात पर कीर्ति और पानी पूरी वाला दोनों सुमित को घूरते है.
कीर्ति:- क्यों?
सुमित:- क्यों का क्या मतलब? बहुत ैक्वार्ड फील होता है. :यूके: तुम बताओ झूठा खाने का कोई एक फायदा.
कीर्ति:- झूठा खाने se...Hmm...Hmmm...Haan...Pyar बढ़ता है.
सुमित:- (इन हिज मंद) Pyar...Huh...Pyar होने के लिए दिल साफ़ होना पड़ता hai...Naa की दिमाग में गंदगी.
सुमित ने अपने एक्स के बारे में सोचते हुए कहा.
फिर अचानक hi कीर्ति के बात को ध्यान से सोचा.
सुमित:- क्या प्यार? किसका प्यार? किसके लिए?
सुमित कन्फ्यूज्ड हो कर bola...Sumit का जवाब सुनते hi कीर्ति को एहसास हुआ की उसने क्या एक्साम्प्ले दिया है.
कीर्ति:- मेरा matlab...Wo नहीं tha...Wo वाला प्यार nahi...Aap समझ रहे है naa...Kya कहते है usko...Hmm...Hmm...Haan...Ishq, मोहोब्बत वाला प्यार nahi...Just love...Aap समझ रहे है ना.
कीर्ति ना जाने कितनी बार लड़खड़ाई अपने बात कहने के dauran...Ye देख सुमित भी अपना हंसी रोक नहीं पाया.
सुमित:- (हँसते हुए) हाँ समझ गया.
पहली बार सुमित ने कीर्ति को नोटिस kiya...Ek दम खुश मिज़ाज़ और चंचल type...Aur साथ में थोड़ा कन्फ्यूज्ड भी.
पानी पूरी वाला:- ये प्यार वयर की बातें chhodo...Aise hi बात करते रहे तुम दोनों तो रात हो जाएगा तुम दोनों को खिलाते खिलाते?
फिर दोनों पानी पूरी खाते है और अपने घर के लिए वापस चले आते हैं.
सुमित:- आओ.
सुमित ने अपने रूम में जाते hi कहा.
सुमित:- इतना दर क्यों रही हो? ये मेरा अड्डा है कोई शेर का डेरा नहीं जो तुम इतना दर रही हो?
कीर्ति:- Nahi...Aisi बात नहीं है.
फिर जैसे hi कीर्ति सुमित की रूम में जाती hai...Room का हालत देख हैरान रह जाती hai...Room नहीं बिलकुल गोदाम था.
हर चीज इधर udhar...Book टेबल से ले कर निचे जमीन में इधर से उधर तक फैजल tha...Kapde चेयर में फेंके हुए thhe...Table बुक और कॉपी से भरा पड़ा था.
रूम का एक कोना डस्ट बिन का काम कर रहा tha...Biscuits और चॉकलेट का प्लास्टिक से भरा हुआ.
कीर्ति:- ये सब क्या है?
सुमित:- Wo...Baat ये है की फुर्सत hi नहीं मिलता ये सब सही करने में.
कीर्ति फिर चारो तरफ देखती hai...Aur दीवार को देख बिलकुल hi हैरान रह जाती hai...Sabhi दीवार ढाका हुआ tha...Chart पेपर se...Aur उन में स्टडी रिलेटेड कुछ लिखा हुआ था.
कीर्ति:- आप तो पढ़ते hi नहीं? तो फिर ये दीवार?
सुमित:- किसने कह दिया की पढता hi नहीं hun...Haan काम पढता हूँ और जब मन करे tab...Aur दीवार में भी सिर्फ वही चीज hai...Jisse पढ़ने में अच्छा लगता hai...Kuch स्टडी रिलेटेड और कुछ जनरल नॉलेज.
फिर सुमित को वो दिख जाता है जिसके लिए वो यहाँ था.
2 बुक्स उठा कर कीर्ति को देता hai....Haan ये lo...Entrance के लिए बहुत हेल्पफुल होगा ये बुक.
कीर्ति:- कभी कभी सोचने लगती हूँ की आप की तरह hi padhu...Naa मेडिकल और ना kuch...Bas ऐसे hi वक्त के साथ...
सुमित:- मेरा बात और hai...Abhi तक अपना पैशन मिला नहीं hai...Lekin tum...Tum डॉक्टर बनना चाहती हो naa...Aur काफी डेडिकेटेड भी हो.
बहुत अच्छा किस्मत है जो तुम्हारे सामने तुम्हारा पैशन hai...Abb ऐसी फ़ालतू बात सोच कर अपना वक्त और पैशन बर्बाद मत करो.
सुमित ने मुस्कुरा कर kaha...Kirti भी हां में सर हिलाती hai...Dono अब्ब निचे हॉल में जाने hi वाले थे की कीर्ति को कुछ दीखता है.
वो वापस सुमित की रूम में जाती hai...Ek दीवार पर सुमित का फोटो tha...Kuch देर उस फोटो को hi देखती रहती है.
सुमित:- अब्ब क्या हुआ?
कीर्ति:- बहुत अच्छा दीखते थे आप.
अभी भी सुमित की फोटो पर hi ध्यान था कीर्ति ka...Sach में लम्बे बालो में सुमित की बात hi कुछ और था.
सुमित:- थैंक you...Lekin अब्ब.
कीर्ति:- अब्ब वो बात नहीं रही.
सुमित की तरफ देखते हुए कीर्ति बोली.
कीर्ति:- बात लम्बी बालो की नहीं hai...Photo में मुस्कुराता हुआ आपकी फोटो की बात hi कुछ और hai...Kitna मासूम दीखते है आप और लगता है कितना खुश hai...This फोटो इस ा ग्रेट तो सी.
सुमित:- लेकिन अब्ब?
कीर्ति:- ऐसा लग रहा है अब्ब आप खुद को hi खोते जा रहे hai...Muskaan भी बिलकुल फेक hai...Khush दिखने की दिखावा करते hai...Aapka चाल और हाव भाव बताता है की कुछ हासिल कर लेने की कोशिश में लगे हुए है.
ये सुनते hi सुमित को जैसे एक झटका laga...Kirti की एक एक बात सही tha...Kya वो प्लेबॉय बनने की सफर में कही खुद को hi नहीं भूल रहा? क्या बदलाव इतना आ गया है की सामने वाले को भी पता चल रहा है?
सुमित सोचने पर मजबूर हो गया.
कीर्ति:- और मई मजाक नहीं कर रही हूँ.
सुमित ने कीर्ति को देखा कोई जवाब नहीं दिया.
कीर्ति:- अब्ब अगर इजाजत हो तो कुछ हंसी मजाक कर लू?
सुमित:- हाँ.
कीर्ति:- आप फोटो के कपरिसों में थोड़ा काला है आप?
सुमित:- हाँ तो.
कीर्ति:- आपने एक कहावत तो सुना hi होगा, "बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला."
उसी चंचलता के साथ कीर्ति बोली और वह से भाग गयी.
ये सुन सुमित के होंठो में भी मुस्कान आ gaya...Lekin अगले hi पल.
सुमित:- क्या क्या क्या? क्या मतलब? मेरा नजर श्रुति पर है वो बुरी नजर है? नहीं वो भी तो यही चाहती है.
फिर सुमित कीर्ति की बातों को hi सोचता raha...Jab कुछ भी समझ में नहीं आया तो.
सुमित:- (इन हिज मंद) मई सब का बोली बंद करा देता हूँ पर ye...Isne तो मेरा hi बोली बंद कर दिया.
ये सोचते hi सुमित के होंठो में मुस्कान फ़ैल गया एयर वो भी निचे हॉल की तरफ जाने लगा.
भैया थोड़ा तीखा बनाना.
एक्ससिटेड हो कर कीर्ति बोली.
ये सुनते hi सुमित का हालत खराब हो gaya...Hadbadaate हुए सुमित बोलै.
सुमित:- नहीं bhaiya...Jyada तीखा नहीं.
सुमित की बात सुन कर पानी पूरी वाले भैया भी कंफ्यूज हो गए.
"पहले आप दोनों आपस में फैसला कीजिये और फिर बताइये कितना तीखा बनाना है."
कीर्ति:- क्यों आप तीखा नहीं खाते?
सुमित:- खाता तो hun...Lekin कहा लड़कियों से बराबरी कर सकता हूँ तीखा खाने mein...Jeevh जल जायेंगे, आँखों से आंसू बहेंगे और कानो से धुँआ niklenge...Nahi मई तीखा नहीं खाऊंगा.
इतना कह कर सुमित पीछे हैट गया.
कीर्ति:- किसने कह दिया लड़कियां तीखी खाती है?
सुमित:- भूलो मत मेरा भी एक बहिन hai...Aur उसके जिद्द में कभी कभी खाना पड़ता है.
(बड़बड़ाते हुए) और साथ में 2 एक्स भी.
कीर्ति:- नहीं nahi...Aaj तो आप को खाना hi पड़ेगा.
कीर्ति भी जिद्द में ऐड गयी.
सुमित कुछ बोल भी नहीं पा रहा tha...Bebasi में उसने पानी पूरी वाले को देखा.
"मई कुछ मदद नहीं कर sakta...Waise भी लड़कियों से कौन जीत सकता है? चुप चाप मान lo...Issi में सबकी भलाई है."
उनकी इस बात पर कीर्ति हंसती है और कहती है.
कीर्ति:- आप भी अपने गर्लफ्रेंड की सभी बातें मानते होंगे?
पानी पूरी वाला:- पुरे 25 का हो चूका hun...Aur इस उम्र में गर्लफ्रेंड कहा सीधे शादी हो जाता hai...Aur biwi...Wo तो गर्लफ्रेंड से भी खतरनाक होती hai...Har बात मनवा लेती है. :नू:
अच्छा अब्ब आप bataiye...Kitna तीखा बनाना है? मई बना देता हूँ.
फिर कीर्ति उन्हें बताने लगती hai...Aur जब सुमित ने सामने का नजारा ध्यान से देखा तो एक बार फिर से हड़बड़ा कर बोलै.
सुमित:- ये क्या कर रहे हो? एक hi प्लेट में?
कीर्ति:- क्यों? क्या प्रॉब्लम है?
सुमित:- मई झूठा नहीं खाता.
इस बात पर कीर्ति और पानी पूरी वाला दोनों सुमित को घूरते है.
कीर्ति:- क्यों?
सुमित:- क्यों का क्या मतलब? बहुत ैक्वार्ड फील होता है. :यूके: तुम बताओ झूठा खाने का कोई एक फायदा.
कीर्ति:- झूठा खाने se...Hmm...Hmmm...Haan...Pyar बढ़ता है.
सुमित:- (इन हिज मंद) Pyar...Huh...Pyar होने के लिए दिल साफ़ होना पड़ता hai...Naa की दिमाग में गंदगी.
सुमित ने अपने एक्स के बारे में सोचते हुए कहा.
फिर अचानक hi कीर्ति के बात को ध्यान से सोचा.
सुमित:- क्या प्यार? किसका प्यार? किसके लिए?
सुमित कन्फ्यूज्ड हो कर bola...Sumit का जवाब सुनते hi कीर्ति को एहसास हुआ की उसने क्या एक्साम्प्ले दिया है.
कीर्ति:- मेरा matlab...Wo नहीं tha...Wo वाला प्यार nahi...Aap समझ रहे है naa...Kya कहते है usko...Hmm...Hmm...Haan...Ishq, मोहोब्बत वाला प्यार nahi...Just love...Aap समझ रहे है ना.
कीर्ति ना जाने कितनी बार लड़खड़ाई अपने बात कहने के dauran...Ye देख सुमित भी अपना हंसी रोक नहीं पाया.
सुमित:- (हँसते हुए) हाँ समझ गया.
पहली बार सुमित ने कीर्ति को नोटिस kiya...Ek दम खुश मिज़ाज़ और चंचल type...Aur साथ में थोड़ा कन्फ्यूज्ड भी.
पानी पूरी वाला:- ये प्यार वयर की बातें chhodo...Aise hi बात करते रहे तुम दोनों तो रात हो जाएगा तुम दोनों को खिलाते खिलाते?
फिर दोनों पानी पूरी खाते है और अपने घर के लिए वापस चले आते हैं.
सुमित:- आओ.
सुमित ने अपने रूम में जाते hi कहा.
सुमित:- इतना दर क्यों रही हो? ये मेरा अड्डा है कोई शेर का डेरा नहीं जो तुम इतना दर रही हो?
कीर्ति:- Nahi...Aisi बात नहीं है.
फिर जैसे hi कीर्ति सुमित की रूम में जाती hai...Room का हालत देख हैरान रह जाती hai...Room नहीं बिलकुल गोदाम था.
हर चीज इधर udhar...Book टेबल से ले कर निचे जमीन में इधर से उधर तक फैजल tha...Kapde चेयर में फेंके हुए thhe...Table बुक और कॉपी से भरा पड़ा था.
रूम का एक कोना डस्ट बिन का काम कर रहा tha...Biscuits और चॉकलेट का प्लास्टिक से भरा हुआ.
कीर्ति:- ये सब क्या है?
सुमित:- Wo...Baat ये है की फुर्सत hi नहीं मिलता ये सब सही करने में.
कीर्ति फिर चारो तरफ देखती hai...Aur दीवार को देख बिलकुल hi हैरान रह जाती hai...Sabhi दीवार ढाका हुआ tha...Chart पेपर se...Aur उन में स्टडी रिलेटेड कुछ लिखा हुआ था.
कीर्ति:- आप तो पढ़ते hi नहीं? तो फिर ये दीवार?
सुमित:- किसने कह दिया की पढता hi नहीं hun...Haan काम पढता हूँ और जब मन करे tab...Aur दीवार में भी सिर्फ वही चीज hai...Jisse पढ़ने में अच्छा लगता hai...Kuch स्टडी रिलेटेड और कुछ जनरल नॉलेज.
फिर सुमित को वो दिख जाता है जिसके लिए वो यहाँ था.
2 बुक्स उठा कर कीर्ति को देता hai....Haan ये lo...Entrance के लिए बहुत हेल्पफुल होगा ये बुक.
कीर्ति:- कभी कभी सोचने लगती हूँ की आप की तरह hi padhu...Naa मेडिकल और ना kuch...Bas ऐसे hi वक्त के साथ...
सुमित:- मेरा बात और hai...Abhi तक अपना पैशन मिला नहीं hai...Lekin tum...Tum डॉक्टर बनना चाहती हो naa...Aur काफी डेडिकेटेड भी हो.
बहुत अच्छा किस्मत है जो तुम्हारे सामने तुम्हारा पैशन hai...Abb ऐसी फ़ालतू बात सोच कर अपना वक्त और पैशन बर्बाद मत करो.
सुमित ने मुस्कुरा कर kaha...Kirti भी हां में सर हिलाती hai...Dono अब्ब निचे हॉल में जाने hi वाले थे की कीर्ति को कुछ दीखता है.
वो वापस सुमित की रूम में जाती hai...Ek दीवार पर सुमित का फोटो tha...Kuch देर उस फोटो को hi देखती रहती है.
सुमित:- अब्ब क्या हुआ?
कीर्ति:- बहुत अच्छा दीखते थे आप.
अभी भी सुमित की फोटो पर hi ध्यान था कीर्ति ka...Sach में लम्बे बालो में सुमित की बात hi कुछ और था.
सुमित:- थैंक you...Lekin अब्ब.
कीर्ति:- अब्ब वो बात नहीं रही.
सुमित की तरफ देखते हुए कीर्ति बोली.
कीर्ति:- बात लम्बी बालो की नहीं hai...Photo में मुस्कुराता हुआ आपकी फोटो की बात hi कुछ और hai...Kitna मासूम दीखते है आप और लगता है कितना खुश hai...This फोटो इस ा ग्रेट तो सी.
सुमित:- लेकिन अब्ब?
कीर्ति:- ऐसा लग रहा है अब्ब आप खुद को hi खोते जा रहे hai...Muskaan भी बिलकुल फेक hai...Khush दिखने की दिखावा करते hai...Aapka चाल और हाव भाव बताता है की कुछ हासिल कर लेने की कोशिश में लगे हुए है.
ये सुनते hi सुमित को जैसे एक झटका laga...Kirti की एक एक बात सही tha...Kya वो प्लेबॉय बनने की सफर में कही खुद को hi नहीं भूल रहा? क्या बदलाव इतना आ गया है की सामने वाले को भी पता चल रहा है?
सुमित सोचने पर मजबूर हो गया.
कीर्ति:- और मई मजाक नहीं कर रही हूँ.
सुमित ने कीर्ति को देखा कोई जवाब नहीं दिया.
कीर्ति:- अब्ब अगर इजाजत हो तो कुछ हंसी मजाक कर लू?
सुमित:- हाँ.
कीर्ति:- आप फोटो के कपरिसों में थोड़ा काला है आप?
सुमित:- हाँ तो.
कीर्ति:- आपने एक कहावत तो सुना hi होगा, "बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला."
उसी चंचलता के साथ कीर्ति बोली और वह से भाग गयी.
ये सुन सुमित के होंठो में भी मुस्कान आ gaya...Lekin अगले hi पल.
सुमित:- क्या क्या क्या? क्या मतलब? मेरा नजर श्रुति पर है वो बुरी नजर है? नहीं वो भी तो यही चाहती है.
फिर सुमित कीर्ति की बातों को hi सोचता raha...Jab कुछ भी समझ में नहीं आया तो.
सुमित:- (इन हिज मंद) मई सब का बोली बंद करा देता हूँ पर ye...Isne तो मेरा hi बोली बंद कर दिया.
ये सोचते hi सुमित के होंठो में मुस्कान फ़ैल गया एयर वो भी निचे हॉल की तरफ जाने लगा.