Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 5 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 26

भैया थोड़ा तीखा बनाना.

एक्ससिटेड हो कर कीर्ति बोली.

ये सुनते hi सुमित का हालत खराब हो gaya...Hadbadaate हुए सुमित बोलै.

सुमित:- नहीं bhaiya...Jyada तीखा नहीं.

सुमित की बात सुन कर पानी पूरी वाले भैया भी कंफ्यूज हो गए.

"पहले आप दोनों आपस में फैसला कीजिये और फिर बताइये कितना तीखा बनाना है."

कीर्ति:- क्यों आप तीखा नहीं खाते?

सुमित:- खाता तो hun...Lekin कहा लड़कियों से बराबरी कर सकता हूँ तीखा खाने mein...Jeevh जल जायेंगे, आँखों से आंसू बहेंगे और कानो से धुँआ niklenge...Nahi मई तीखा नहीं खाऊंगा.

इतना कह कर सुमित पीछे हैट गया.

कीर्ति:- किसने कह दिया लड़कियां तीखी खाती है?

सुमित:- भूलो मत मेरा भी एक बहिन hai...Aur उसके जिद्द में कभी कभी खाना पड़ता है.

(बड़बड़ाते हुए) और साथ में 2 एक्स भी.

कीर्ति:- नहीं nahi...Aaj तो आप को खाना hi पड़ेगा.

कीर्ति भी जिद्द में ऐड गयी.

सुमित कुछ बोल भी नहीं पा रहा tha...Bebasi में उसने पानी पूरी वाले को देखा.

"मई कुछ मदद नहीं कर sakta...Waise भी लड़कियों से कौन जीत सकता है? चुप चाप मान lo...Issi में सबकी भलाई है."

उनकी इस बात पर कीर्ति हंसती है और कहती है.

कीर्ति:- आप भी अपने गर्लफ्रेंड की सभी बातें मानते होंगे?

पानी पूरी वाला:- पुरे 25 का हो चूका hun...Aur इस उम्र में गर्लफ्रेंड कहा सीधे शादी हो जाता hai...Aur biwi...Wo तो गर्लफ्रेंड से भी खतरनाक होती hai...Har बात मनवा लेती है. :नू:

अच्छा अब्ब आप bataiye...Kitna तीखा बनाना है? मई बना देता हूँ.

फिर कीर्ति उन्हें बताने लगती hai...Aur जब सुमित ने सामने का नजारा ध्यान से देखा तो एक बार फिर से हड़बड़ा कर बोलै.

सुमित:- ये क्या कर रहे हो? एक hi प्लेट में?

कीर्ति:- क्यों? क्या प्रॉब्लम है?

सुमित:- मई झूठा नहीं खाता.

इस बात पर कीर्ति और पानी पूरी वाला दोनों सुमित को घूरते है.

कीर्ति:- क्यों?

सुमित:- क्यों का क्या मतलब? बहुत ैक्वार्ड फील होता है. :यूके: तुम बताओ झूठा खाने का कोई एक फायदा.

कीर्ति:- झूठा खाने se...Hmm...Hmmm...Haan...Pyar बढ़ता है.

सुमित:- (इन हिज मंद) Pyar...Huh...Pyar होने के लिए दिल साफ़ होना पड़ता hai...Naa की दिमाग में गंदगी.

सुमित ने अपने एक्स के बारे में सोचते हुए कहा.

फिर अचानक hi कीर्ति के बात को ध्यान से सोचा.

सुमित:- क्या प्यार? किसका प्यार? किसके लिए?

सुमित कन्फ्यूज्ड हो कर bola...Sumit का जवाब सुनते hi कीर्ति को एहसास हुआ की उसने क्या एक्साम्प्ले दिया है.

कीर्ति:- मेरा matlab...Wo नहीं tha...Wo वाला प्यार nahi...Aap समझ रहे है naa...Kya कहते है usko...Hmm...Hmm...Haan...Ishq, मोहोब्बत वाला प्यार nahi...Just love...Aap समझ रहे है ना.

कीर्ति ना जाने कितनी बार लड़खड़ाई अपने बात कहने के dauran...Ye देख सुमित भी अपना हंसी रोक नहीं पाया.

सुमित:- (हँसते हुए) हाँ समझ गया.

पहली बार सुमित ने कीर्ति को नोटिस kiya...Ek दम खुश मिज़ाज़ और चंचल type...Aur साथ में थोड़ा कन्फ्यूज्ड भी.

पानी पूरी वाला:- ये प्यार वयर की बातें chhodo...Aise hi बात करते रहे तुम दोनों तो रात हो जाएगा तुम दोनों को खिलाते खिलाते?

फिर दोनों पानी पूरी खाते है और अपने घर के लिए वापस चले आते हैं.

सुमित:- आओ.

सुमित ने अपने रूम में जाते hi कहा.

सुमित:- इतना दर क्यों रही हो? ये मेरा अड्डा है कोई शेर का डेरा नहीं जो तुम इतना दर रही हो?

कीर्ति:- Nahi...Aisi बात नहीं है.

फिर जैसे hi कीर्ति सुमित की रूम में जाती hai...Room का हालत देख हैरान रह जाती hai...Room नहीं बिलकुल गोदाम था.

हर चीज इधर udhar...Book टेबल से ले कर निचे जमीन में इधर से उधर तक फैजल tha...Kapde चेयर में फेंके हुए thhe...Table बुक और कॉपी से भरा पड़ा था.

रूम का एक कोना डस्ट बिन का काम कर रहा tha...Biscuits और चॉकलेट का प्लास्टिक से भरा हुआ.

कीर्ति:- ये सब क्या है?

सुमित:- Wo...Baat ये है की फुर्सत hi नहीं मिलता ये सब सही करने में.

कीर्ति फिर चारो तरफ देखती hai...Aur दीवार को देख बिलकुल hi हैरान रह जाती hai...Sabhi दीवार ढाका हुआ tha...Chart पेपर se...Aur उन में स्टडी रिलेटेड कुछ लिखा हुआ था.

कीर्ति:- आप तो पढ़ते hi नहीं? तो फिर ये दीवार?

सुमित:- किसने कह दिया की पढता hi नहीं hun...Haan काम पढता हूँ और जब मन करे tab...Aur दीवार में भी सिर्फ वही चीज hai...Jisse पढ़ने में अच्छा लगता hai...Kuch स्टडी रिलेटेड और कुछ जनरल नॉलेज.

फिर सुमित को वो दिख जाता है जिसके लिए वो यहाँ था.

2 बुक्स उठा कर कीर्ति को देता hai....Haan ये lo...Entrance के लिए बहुत हेल्पफुल होगा ये बुक.

कीर्ति:- कभी कभी सोचने लगती हूँ की आप की तरह hi padhu...Naa मेडिकल और ना kuch...Bas ऐसे hi वक्त के साथ...

सुमित:- मेरा बात और hai...Abhi तक अपना पैशन मिला नहीं hai...Lekin tum...Tum डॉक्टर बनना चाहती हो naa...Aur काफी डेडिकेटेड भी हो.

बहुत अच्छा किस्मत है जो तुम्हारे सामने तुम्हारा पैशन hai...Abb ऐसी फ़ालतू बात सोच कर अपना वक्त और पैशन बर्बाद मत करो.

सुमित ने मुस्कुरा कर kaha...Kirti भी हां में सर हिलाती hai...Dono अब्ब निचे हॉल में जाने hi वाले थे की कीर्ति को कुछ दीखता है.

वो वापस सुमित की रूम में जाती hai...Ek दीवार पर सुमित का फोटो tha...Kuch देर उस फोटो को hi देखती रहती है.

सुमित:- अब्ब क्या हुआ?

कीर्ति:- बहुत अच्छा दीखते थे आप.

अभी भी सुमित की फोटो पर hi ध्यान था कीर्ति ka...Sach में लम्बे बालो में सुमित की बात hi कुछ और था.

सुमित:- थैंक you...Lekin अब्ब.

कीर्ति:- अब्ब वो बात नहीं रही.

सुमित की तरफ देखते हुए कीर्ति बोली.

कीर्ति:- बात लम्बी बालो की नहीं hai...Photo में मुस्कुराता हुआ आपकी फोटो की बात hi कुछ और hai...Kitna मासूम दीखते है आप और लगता है कितना खुश hai...This फोटो इस ा ग्रेट तो सी.

सुमित:- लेकिन अब्ब?

कीर्ति:- ऐसा लग रहा है अब्ब आप खुद को hi खोते जा रहे hai...Muskaan भी बिलकुल फेक hai...Khush दिखने की दिखावा करते hai...Aapka चाल और हाव भाव बताता है की कुछ हासिल कर लेने की कोशिश में लगे हुए है.

ये सुनते hi सुमित को जैसे एक झटका laga...Kirti की एक एक बात सही tha...Kya वो प्लेबॉय बनने की सफर में कही खुद को hi नहीं भूल रहा? क्या बदलाव इतना आ गया है की सामने वाले को भी पता चल रहा है?

सुमित सोचने पर मजबूर हो गया.

कीर्ति:- और मई मजाक नहीं कर रही हूँ.

सुमित ने कीर्ति को देखा कोई जवाब नहीं दिया.

कीर्ति:- अब्ब अगर इजाजत हो तो कुछ हंसी मजाक कर लू?

सुमित:- हाँ.

कीर्ति:- आप फोटो के कपरिसों में थोड़ा काला है आप?

सुमित:- हाँ तो.

कीर्ति:- आपने एक कहावत तो सुना hi होगा, "बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला."

उसी चंचलता के साथ कीर्ति बोली और वह से भाग गयी.

ये सुन सुमित के होंठो में भी मुस्कान आ gaya...Lekin अगले hi पल.

सुमित:- क्या क्या क्या? क्या मतलब? मेरा नजर श्रुति पर है वो बुरी नजर है? नहीं वो भी तो यही चाहती है.

फिर सुमित कीर्ति की बातों को hi सोचता raha...Jab कुछ भी समझ में नहीं आया तो.

सुमित:- (इन हिज मंद) मई सब का बोली बंद करा देता हूँ पर ye...Isne तो मेरा hi बोली बंद कर दिया.

ये सोचते hi सुमित के होंठो में मुस्कान फ़ैल गया एयर वो भी निचे हॉल की तरफ जाने लगा.
 
अपडेट 27

आफ्टर 1 वीक

2 दिन में बायोलॉजी कम्पलीट हो जाएगा.

एक्ससिटेमेंट में कीर्ति बोली.

सुमित:- अगर बकवास की बातों में ध्यान ना दे कर पढ़ोगी तो 1 दिन भी नहीं लगेगा.

कीर्ति:- आप hi कहते थे naa...Padhte वक्त एकदम रिलैक्स्ड होना chahiye...Wo hi तो कर रही hun...Thoda पढ़ाई थोड़ा मस्ती.

हस्र हुए कीर्ति बोली और साथ में सुमित की बोलती बंद.

सुमित:- वो मई मेरे जैसे स्टूडेंट के लिए कह रहा tha...Relaxed हो कर padhna...Tum जैसी पढ़ाकू की बस की बात नहीं hai...Dusro को कॉपी कर के टाइम वास्ते करने की जगह पढ़ाई पर ध्यान दो.

सुमित ने बात संभालते हुए कहा.

कीर्ति:- अब्ब इंस्पायर्ड होने में क्या गलत है? जो अच्छा लगा उसी बात से इंस्पायर्ड हुई hu...Aap भी तो इंस्पायर्ड हुए होंगे?

सुमित:- Nahi...Mai क्यों किसी को कॉपी करने लगा?

कीर्ति:- फिर कॉपी की baat...Itna तो आप को भी पता होगा की इंस्पिरेशन और कॉपी अलग बात hai...Aur कोई भी इंसान कितना भी अलग क्यों ना हो थोड़ा बहुत किसी से इंस्पायर्ड होता तो hai...Bhale hi उसी के टाइप की लोग से.

ये बात सुनते hi सुमित कीर्ति के सामने हाथ जोड़ कर कहता है.

सुमित:- आप जीती और मई हारा.

सुमित की इस अंदाज पर कीर्ति हसने लगती है.

सुमित:- कभी कभी तो तुमसे जीत पाना बहुत मुश्किल है.

कीर्ति:- कभी कभी हारना भी जरुरी है तभी जीत का महत्वा पता चलता है.

सुमित:- सही hai...Sabko मई ज्ञान देता हु और तुम mujhe...Ye भी सही है.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

इस बिच सुमित को ये पता भी नहीं चला की कब उसने चाट करना बंद कर दिया और कीर्ति से बातों में लग गया.

सुमित:- Accha...Abb ज्ञान देने की बारी mera...Aur मई वो ज्ञान दूंगा जो बहुत जरुरी है एग्जाम के liye...Abb पढ़ाई सुरु करते है.

कीर्ति:- और मई वो ज्ञान दे रही हूँ वो भी आपके एग्जाम के लिए जरुरी है.

सुमित:- मेरा एग्जाम?

कीर्ति:- Jindagi...Jindagi भी तो एक इम्तेहान hai...Aur इस कठिन इम्तेहान को पूरा करने की ज्ञान आपको प्रदान कर रही हूँ.

सुमित:- महान है आप.

इतना कह कर सुमित अपना हाथ फिर से जोड़ लेता है.

सुमित:- (इन हिज मंद) सच में मेरे hi टक्कर की है.

कीर्ति:- अच्छा accha...Abb पढ़ते है.

1 हफ्ता में काफी कुछ बदल गया था दोनों के bich...Ek दूसरे को देखने की najariya...Sumit और भी इंटरेस्टिंग लगने लगा था कीर्ति ko...Uska बातें, पढ़ाने का तरीका और knowledge...Kirti को सुमित की ये काबिलियत पसंद आ रहा tha...Baatein करने के लिए बस कोई बहाना चाहिए tha...Aur वो भी पढ़ाई करते वक्त मिल hi जाता tha...Koi मौका नहीं छोड़ती वो सुमित से बात करने का.

दूसरी तरफ Sumit...Abhi तो वो करती से जुड़ा हुआ महसूस नहीं कर रहा tha...Par उससे भी कीर्ति से बात करना अच्छा लगने लगा था.

और साथ hi मिशन श्रुति बदल कर अब्ब मिशन श्रुति एंड प्रीती हो गया tha...Ek साथ hi दोनों से चैटिंग करके अपने मिशन की और आगे बढ़ रहा था.

दोनों कुछ पढ़ पाते उससे पहले hi.

ये सब क्या हो रहा है?

एक तीखी सी आवाज दोनों के कान में पड़ा.

बिना देखे hi सुमित ने बिंदास जवाब दिया.

सुमित:- ज्ञान एक्सचेंज.

ज्ञान वो भी आप में? मजाक कर रहे है आप?

सुमित:- मजाक मई इंसानो से करता hun...Tujh जैसी बंदरिया के साथ नहीं.

सुमित ने भी हँसते हुए जवाब दिया.

भैया ये कुछ ज्यादा हो रहा है?

इस बार रश्मि गुस्से में बोली.

सुमित:- अच्छा ठीक hai...Aage से नहीं बुलाऊंगा.

रश्मि:- ध्यान रखना.

सुमित:- आगे से तुझे बंदरिया स्क्वायर बुलाऊंगा.

सुमित नीना कुछ देखे सुने वह से भागने laga...Kyu की रश्मि का रिएक्शन उससे पहले hi पता था.

फिर सुरु हुआ पकड़म पकड़े का खेल भाई बेहेन के bich...Buri तरह से रश्मि को थका देने के बाद सुमित ने आखिर सरेंडर कर hi diya...Kirti भी बैठ कर शो को एन्जॉय कर रही थी.

थोड़ा मार खाने के बाद.

कीर्ति:- ये तू क्या कह रही थी? नॉलेज नहीं है इनके paas...Agar अब्ब भी मेडिकल का एंट्रेंस दे तो भी फुल स्कालरशिप मिल जाएगा.

रश्मि:- भैया और मेडिकल entrance...Entrance के नाम से hi इनको बुखार आ जाता है.

इतना कह कर रश्मि हसने लगती है.

सुमित भी उस घटना को सोच मुस्कुराने लगता है.

कीर्ति:- मतलब.

रश्मि:- भैया ने कही भी मेडिकल का फॉर्म फइलल नहीं किया tha...Do जगह पापा ने जबरदस्ती फइलल karwaya...Ek मेडिकल और एक engineering...Dono hi एंट्रेंस के फिन भैया को बुखार आ gaya...Aur बाकी दिन normal...Abb तू hi कह ये इत्तेफ़ाक़ है या एंट्रेंस का दर.

फिर कीर्ति सुमित की तरफ देखती hai...Sumit बस मुस्कुरा रहा tha...Kuch जवाब नहीं दिया.

कीर्ति:- बताइये ना?

सुमित:- कुछ nahi...Thoda अलग तरय किया था.

रश्मि:- अलग? क्या मतलब?

सुमित:- अगर एंट्रेंस ऐसे hi मिस कर देता तो पापा बहुत daantte...Usse बात का दर नहीं tha...Lekin ये सब कुछ नार्मल सा हो गया था और बोरिंग भी.

इसी लिए थोड़ा अलग तरय किया.

कीर्ति:- क्या अलग?

कीर्ति और रश्मि बहुत ध्यान से सुन रही थी.

सुमित:- वैसे तो माइक्रोबायोलॉजी में भी थोड़ा बहुत इंटरेस्ट था उस time...Entrance की रात वही पढता रहा.

और दो बैक्टीरिया को सेलेक्ट किया खुद पर एक्सपेरिमेंट करने के लिए ये देखने के लिए की बुक कितना सही है.

उन् बैक्टीरिया को सेलेक्ट किया जिसे सिर्फ थोड़ा इन्फेक्शन हो जाए और बुखार तक hi ho...And गेस व्हाट? आईटी worked...Ek तीर से दो nishana...Ek एंट्रेंस कैंसिल और दूसरा एक्सपेरिमेंट सक्सेसफुल.

सुमित की बात सुन कर रश्मि और कीर्ति दोनों एक दूसरे को देखने lagi...Dimaag में यही सवाल था, "ये क्या पागल पैन है?"

सुमित:- हैरानी की कोई बात nahi...Kamjor बैक्टीरिया को सेलेक्ट किया tha...Uss वक्त ये भी सोच रहा था की क्यों ना मैकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस तरय karu...Darta तो उससे भी नहीं tha...Lekin थोड़ा लम्बा टाइम तक फाइट करना padta...Fursat और मूड दोनों hi नहीं था.

ये जवाब सुन कर तो दोनों पागल होते होते बची.

कीर्ति:- आपको ये पागलपन करने में दर नहीं लगा?

सुमित:- डरता तो मई सुमित वायरस से भी नहीं हूँ.

इतना कह कर सुमित वह से जाने hi वाला था की.

रश्मि:- भैया एक काम था.

सुमित:- बोल.

रश्मि:- वो आज शाम शेखर अंकल की घर में पार्टी hai...Papa ने आप को जाने को कहा है.

ये सुनते hi सुमित एकदम से सीरियस हो गया.

सुमित:- आरव भी है?

रश्मि:- हाँ.

सुमित:- तब मई नहीं jaaunga...Papa को hi बोल.

रश्मि:- पापा ने किसी भी हाल में आप को जाने के लिए कहा है.

सुमित:- तू hi चली जा.

रश्मि:- नै मई भी नहीं जाउंगी.

सुमित के चेहरे में अब्ब फ़्रस्ट्रेशन दिखने लगा.

कीर्ति:- ये शेखर अंकल और आरव कौन है?

रश्मि:- शेखर अंकल हमारे अंकल hai...Matlab पापा के bhai...Thodi दूर में रहते hai...Aarav भैया उनका बीटा.

और भैया का जानी दुश्मन.

सुमित:- दुश्मन होने की भी औकात नहीं है uska...Uske साथ इर्रिटेट हो जाता हूँ.

अभी भी सुमित फ़्रस्ट्रेटेड था.

सुमित:- Kirti...Baaki का रात में padhenge...Abhi मूड ऑफ है.

इतना कह कर सुमित वह से चला गया.

रश्मि:- अच्छा रात में?

कीर्ति फिर रश्मि को मारने लगती है.

कीर्ति:- कुछ भी!!!
 
फ्रेंड्स अपडेट 27 को रे पोस्ट किया hai...Xf का डेटाबेस में प्रॉब्लम आने की वजह से मेरा ये अपडेट और आप सभी का कमेंट डिलीट हो गया tha...Issi वजह से रे पोस्ट कर रहा hun...Update का बैकअप होने की वजह से कोई प्रॉब्लम नहीं हुआ.

नेक्स्ट अपडेट आज लिख नहीं पाया इस वजह से फिर से आप सभी से माफ़ी मांगता hun...Aur ये माफ़ी एग्जाम होने तक शायद मांगते रहना पड़ेगा :डी जो अभी सूरे नहीं की कब लोखड़ौन ख़त्म होगा और कब एग्जाम सुरु hoga...Haan तब तक के लिए ये एग्जाम और प्रिपरेशन जरूर हेडाचे बना रहेगा. :नू:

कल कहा था की आज तरय करूँगा और आज कहूंगा की मोस्ट प्रॉबब्ली नेक्स्ट अपडेट कल aayega...Aur कल के अपडेट से स्टोरी में बहुत बदलाव aayenge...Ummeed है वो अपडेट आप सभी का गुस्सा और नाराजगी शांत करे. :डी
 
अपडेट 28

आपका आरव से क्या प्रॉब्लम है?

रास्ता में कीर्ति ने पूछा.

कुछ देर तक तो सुमित चुप hi रहा और फिर बोलै.

सुमित:- उसके बारे में बात करना पसंद नहीं है लेकिन तुम पूछ hi रही हो तो इतना जान लो.

"उम्र में 1 साल छोटा है वो लेकिन हमेशा 1 कदम मुझसे आगे रहना चाहता है मुझसे."

कीर्ति:- समझ गयी.

इससे आगे ना hi कीर्ति बोली और ना hi सुमित.

फिर शेखर अंकल का घर आ gaya...Aaj आरव का बर्थडे पार्टी tha...Ghar के अंदर जाने के बाद काफी अच्छा सजावट देखने को मिला.

सुमित जा कर अंकल आंटी से थोड़ी देर बात चीत करता है और कीर्ति को भी इंट्रोडस करवाता है.

और जब खाने का वक्त आता है तब सुमित और कीर्ति घर के एक कोने में चले जाते है जो भीड़ भाड़ से थोड़ी दूर पर था.

ऐसे hi खाते वक्त.

कीर्ति:- Paani...Mai पानी लाना भूल गयी.

सुमित अपना पानी देता है और जब उससे भी प्यास नहीं बुझती है तब.

सुमित:- रुको 2 min...Mai ले कर आता हूँ.

फिर सुमित चला जाता है पानी लेने और जब पानी ले कर वापस आता है तब जो देखता है उससे वो अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाटा.

कीर्ति अभी भी चेयर पर बैठी हुई thi...Uske hi पास में दो लड़के thhe...Jo एक दूसरे को देख हंस रहे thhe...Kirti को देखा तोह वो कुछ दरी हुई नजर आ रही थी.

सुमित भी जल्दी से वह पहुँच गया और सोचने समझने का मौका दिए बिना एक को जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर मारता hai...Dusra कुछ समझ पाटा सुमित उसके नाक में एक पंच मारता है और अगले हिनपाल उसके नाक से खून बहने लगता है.

कीर्ति:- Ye...Ye आप.

हैरानी में कीर्ति से बोलै भी नहीं जा रहा था.

जब वो दोनों थोड़ा सम्भले तो एक ने कहा.

हम तो बस बात कर रहे थे.

सुमित:- मई भी तो बात कर रहा hun...Lekin फर्क ये है की मेरे मुंह के जगह मेरा हाथ बोल रहा hai...Aur बात करू क्या?

दोनों hi वह से निकल जाते है.

सुमित:- तुम ठीक तो हो ना?

फिक्रमंद आवाज में सुमित ने pucha...Kirti ने भी पहली बार सुमित की आवाज में अपने लिए अपना पैन महसूस किया.

कीर्ति:- Haan...Lekin आप उन्हें समझा भी सकते थे ना.

सुमित:- क्या लगता है तुम्हे वो समझेंगे? जो इतना गिर चुके है उन्हें मेरा दो चार डायलाग से कुछ समझ में आएगा.

लातो के भूत है वो लातो को hi अपना काम करने दो.

सुमित गुस्से में उधर उधर देख रहा tha...Haath पेअर भी स्थिर नहीं tha...Dekhne पर ऐसा लग रहा था जैसे गुस्सा पर कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा है लेकिन कर नहीं ला रहा है.

कीर्ति:- गुस्से में आप बहुत क्यूट दीखते है?

मुस्कुराती हुई कीर्ति बोली.

कीर्ति की इस बात और अंदाज पर सुमित मुस्कुरा hi pada...Lekin गुस्सा अभी भी काम नहीं हुआ था.

सुमित:- क्या करू? काम hi ऐसा किया चूतियों ने की.

इतना कह कर सुमित चुप हो गया और कीर्ति की तरफ देखा.

सुमित:- Sorry...Gusse में पता नहीं क्या क्या बोले जा रहा हूँ.

कीर्ति सुमित का हालत देख मुस्कुरा रही थी.

कीर्ति:- इतस ok...Koi बात नहीं.

सुमित भी अब्ब बैठ जाता hai...Abhi भी वो थोड़ा उनकंफर्टबले फील कर रहा था.

कीर्ति:- आपके मुंह से गाली आज तक कभी सुना नहीं.

सुमित इस बात पर सिर्फ मुस्कुराता है.

कीर्ति:- अब्ब क्या हुआ?

सुमित:- तुम जानती hi कितना हो मुझे...2 हफ्तों se...Wo भी दिन के मुश्किल से 5 घंटे.

कीर्ति:- अब्ब ये मत कहना की बाकी के 19 घंटा आप सिर्फ गाली गलोच hi करते रहते है.

हैरानी में कीर्ति ने थोड़ी तेज आवाज में कहा.

सुमित:- अरे धीरे बोल मेरी Maa...Marwayegi क्या.

सुमित ने आस पास देखते हुए kaha...Aur जब देखा की कोई उनके पास नहीं था तो एक लम्बा सांस ले कर कहा.

सुमित:- मरवाओगी एक दिन तुम मुझे.

कीर्ति:- तो फिर? गाली देने में पीएचडी किया है?

सुमित:- Nahi...Haan बहुत से गाली आते hai...Jo अक्षर किसी को देता नहीं hun...Kabhi कभी दोस्तों से मजाक करते वक्त तो कभी उन् चूतियों को देख कर.

कीर्ति:- दोस्तों के बिच कैसा गाली गलोच?

सुमित:- रहने do...Tum नहीं समझोगी हम लड़को ko...Jaise की हम लड़कियों को कभी समझ नहीं पाए.

कीर्ति:- जैसे की.

कुछ देर चुप रहने के बाद सुमित ने कहा.

सुमित:- ऑनेस्ट बताओ?

कीर्ति:- हाँ.

सुमित:- तुम्हे hi आज तक नहीं समझ पाया हूँ तो दुसरो को क्या समझूंगा?

जब से तुम आयी हो तब से दिन में hi 10 बार तुम्हारे बारे में सोच बदल चूका hai...Abb तक टोटल में 100 से भी ज्यादा बार.

कभी तुम महा बेवकूफ लगती थी तो कभी बेवकूफ, कभी पागल तो कभी महा पागल.

ये सुनते hi कीर्ति गुस्से से सुमित को देखती है और,

कीर्ति:- मतलब आप सिर्फ मेरे बारे में hi सोचते रहते है?

इस सवाल ने सुमित के होश उड़ा दिए.

सुमित:- अरे नहीं नहीं.

उससे समझ में hi नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे.

सुमित:- जस्ट सामने से देख कर जो ख्याल आते है उसी के बारे में बात कर रहा हूँ.

बात तो सुमित का सही tha...Lekin कीर्ति के सवाल और उसके अंदाज ने सुमित का पसीना छुड़ा दिया.

कीर्ति सुमित की हालत पर हंस रही थी.

रुमाल से पसीना पांच कर.

सुमित:- तुम भी naa...Kabhi कभी हालत खराब कर देती हो.

कीर्ति:- ऐसा hi जोगा janaab...Aur कोशिश कीजिये लड़कियों को जान्ने की.

सुमित:- अब्ब इतना हिम्मत कहा.

सुमित ने इतना hi कहा था की एक आवाज उससे सुनाई दिया.

"ओह्ह, तो तू hi है वो."

आवाज तो सुमित पहचानता tha...Jab उस तरफ देखा तो आरव आ रहा था अपने वो दो दोस्तों के साथ जो अभी अभी सुमित से पीट कर गए थे.

सुमित:- (बड़बड़ाते हुए) आ गया चूतियों का sardaar...Acche से पेलुँगा आज इसको.

सुमित की ये बात कीर्ति भी सुन लेती hai...Wo भी कुछ सोचने लगती है.

जब आरव पास आ जाता है तब.

कीर्ति:- Hello मर. टाइगर.

कीर्ति की ये बात पर सभी चौंक gaye...Sabse ज्यादा तो आरव.

आरव:- कौन टाइगर?

कीर्ति:- आप.

आरव:- आप को ग़लतफहमी हुआ hoga...Mai आरव हूँ कोई टाइगर नहीं.

कीर्ति:- जी टाइगर मेरा पालतू कुत्ता का नाम hai...Aap का चाल ढाल ठीक उसी से मिलता है तो आप को टाइगर कह कर बुलाया.

कीर्ति की इस बात पर सुमित को बहुत हंसी आता hai...Aur सुमित का हंसी देख उतना hi गुस्सा आरव को.

आरव:- जुबान संभल कर बात करो.

कीर्ति:- आप के ये दो लफंगे दोस्त मेरे साथ छेड़खानी कर सकते है तो बदले में इतना बेइज्जती तो बनता है न मर. टाइगर?

आरव:- Chhedkhaani...Kya प्रूफ है तुम्हारे पास? जो इन् दोनों को पीटा?

आरव ने कीर्ति और सुमित दोनों को देखा.

सुमित:- Proof...Ek चूतिये का गाल देख जिसमें अभी भी मेरे उँगलियों का निशाँ है और दूसरे का naak...Agar फिर भी प्रूफ ना मिला तो फिर से बना कर देता हूँ.

आरव:- देख Sumit...Tu ज्यादा hi उड़द रहा है.

सुमित:- चिल chhote...Abhi बड़ा तो हो जा मेरे tarah...Tere भी पंख aayenge...Fir तू भी उड़ना खुली आसमान में.

आरव:- छोटे मत keh...Koi रिश्ता नहीं है मेरा तुझसे.

सुमित:- चिल टाइगर Chill...Ohh सॉरी Aarav...Rishta तो मई भी तुझसे कोई नहीं रखना नहीं chaahta...Lekin क्या करू? साड़ी गलती इस इनविटेशन की है.

जो मुझे तेरे बड़ा भैया बन कर आना pada...Aa भी गया हूँ तो तुझे तेरा जन्म दिन का आशीर्वाद भी dunga...Apne हाथो से चक्र भी खिलाऊंगा.

गुस्से में आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था.

कीर्ति:- आपने तो अपना इंट्रो दिया hi नहीं?

आरव:- ी ऍम Aarav...1st ईयर मेडिकल student...Wohi मब्ब्स जो कई लोगों का सपना है जो उनके औकात से बाहर है.

आरव ने अपना इंट्रो सुमित को देख कर diya...Usse लग रहा था की सुमित का बहुत बेइज़्ज़ती कर दिया है उसने.

सुमित सिर्फ मुस्कुराता रहा.

कीर्ति:- MBBS...Wo तो मेरा भी सपना hai...Haan मब्ब्स से याद आया एंट्रेंस का एक क्वेश्चन था.

"व्हिच बैक्टीरिया लक्स सेल वाल?"

ये सवाल सुनते hi आरव हैरानी से कीर्ति को देखता है.

आरव:- अभी वो पढ़ाई हुआ नहीं है.

कीर्ति:- एंट्रेंस का सवाल tha...Abb ये मत कहिये की आपने एंट्रेंस पास नहीं किया था?

आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था.

सुमित:- इतना बेइज्जती तो मैंने भी तेरा नहीं किया आज tak...Jawaab दे chhote...Warna अपने साथ मेरा भी नाक कटवाएगा की कितना मुर्ख भाई है मेरा.

आरव अब्ब एक पल भी वह नहीं ruka...Gusse में वह से निकल गया.

सुमित:- ये क्या कर दिया तुमने?

कीर्ति:- मैंने क्या किया?

सुमित:- बेचारे की दिन की छैन और रातों की नींद गायब कर diya...Abb दिन रात पढ़ाई hi करता रहेगा अपने आप को पढ़ाई में अच्छा दिखने के लिए.

कीर्ति:- ये बात तो वो jaane...Lekin इतना कमजोर है पढ़ाई में तो मब्ब्स पढ़ भी कैसे रहा है.

सुमित:- इतना कमजोर भी नहीं hai...Haan मुझे निचा दिखाने के लिए अपना लाइफ के साथ मजाक कर रहा है.

फिजिक्स में अच्छा tha...Lekin जब पता चला की मई फार्मेसी पढ़ रहा हूँ तो मुझे दिखाने के लिए मेडिकल में घुस gaya...Entrance में पास मार्क आ गया और बाकी मेहेरबानी चाचा की पैसा की वजह से.

कीर्ति:- ये तो बेवकूफी है.

सुमित:- ये वो समझे.

कीर्ति:- आप ने कभी समझाया नहीं?

सुमित:- भैंस के आगे बिन बजाने वाला दीखता हूँ?

कीर्ति इस बात पर सिर्फ हंसती है.

फिर जब जाने की वक्त होता है तब एक बार फिर सेखर अंकल सुमित को बुलाते hai...Unke कुछ दोस्त thhe...Sumit भी उनके सभी दोस्तों से अच्छे से बात करता है.

तभी उन में से एक ने पूछा.

बीटा तुम्हारे पापा क्यों नहीं आये?

जवाब सेखर अंकल ने दिया.

सेखर अंकल:- बुढ़ापे ने बहुत जल्द छू लिया भैया को.

ये सुन कर उनके कुछ दोस्त हसने lage...Saath में एक और भी हंसी का वाज tha...Aarav ka...Jo कुछ दूर पर खड़ा था.

सुमित:- नहीं चाचा ji...Papa बुद्धा तो नहीं हुए है abhi...Lekin उनका beta...Shayad जल्द hi समझदार और किसी लायक हो गया है.

ये सुनते hi सेखर अंकल और आरव एक दम से चुप हो गए.

सुमित:- अच्छा चाचा ji...Chalta hun...Aagya दीजिये.

फिर सेखर अंकल भी सर हिला कर हां कह देते hai....Sumit और कीर्ति फिर निकल जाते है.

जब दोनों बाहर निकलते है तब.

सुमित:- रात के 9:00 बज gaye...Socha नहीं था इतना लेट होगा.

कीर्ति:- लेकिन मजा भी तो aaya...Uss आरव को सबक सिखाने में.

सुमित:- लेकिन मई बोर हो gaya...Abb तो उसका बेइज़्ज़ती करना भी बोटिंग लगता है.

तभी कीर्ति को सामने एक पानी पूरी का ठेला दीखता है.

कीर्ति:- चलिए naa...Khaate है.

ठेला की और इशारा कर कीर्ति ने कहा.

सुमित:- Nahi...Abhi nahi...Pak गया हूँ इस माहौल से...3-4 घंटे में दिमाग का दही हो गया hai...Abhi घर चलो.

कीर्ति:- नहीं मुझे खाना है.

कीर्ति भी जिद्द में ऐड गयी.

सुमित:- अभी nahi...Fir कभी बाद में.

कीर्ति:- नहीं मुझे अभी खाना है.

कीर्ति ने जिद्द पकड़ hi लिया.

सुमित के कई बार समझने के बाद भी जब कीर्ति नहीं मानी तब.

सुमित:- अच्छा तुम jaao...Mai चला ghar...Aa जाना बाद में.

कीर्ति:- हाँ ठीक है.

सुमित भी फ़्रस्ट्रेशन में निकल gaya...Kirti को ये उम्मीद बिलकुल भी नहीं था.

कीर्ति ने भी जिद्द पकड़ लिया था तो उसने भी सुमित को रोका नहीं.

पानी पूरी खाने के बाद जब कीर्ति वापस घर की और जा रही थी तो मन में एक दर सा लगने लगा tha...Lekin फिर भी धीरे धीरे वो आगे बढ़ रही थी.

थोड़ी दूर चलने पर देखा की सुमित फिर से वापस आ रहा है.

जब दोनों पास आये तब.

सुमित:- समझ नहीं आता तुम्हे हर बार जिद्द सही नहीं होता.

गुस्से में सुमित ने kaha...Lrkin उस गुस्से में भी कीर्ति को अपना पैन दिखा.

कीर्ति:- आप तो चले गेट थे naa...Gussa और ईगो में.

सुमित:- लेकिन रीलीज़ hua...Mera गुस्सा और ईगो तुम्हारे सेफ्टी से ज्यादा माईने नहीं rakhta...Raat का वक्त hai...Waise भी चोर और बदमाश लोग घूमते रहते है.

सुमित की आवाज में परवाह tha...Ye सुन कीर्ति को बहुत अच्छा लगा.

सुमित तो पहले भी अच्छा लगता था कीर्ति ko...Lekin आज सुमित ने जो भी कहा उससे कीर्ति और भी इम्प्रेस हो gayi...Apna गुस्सा और ईगो से भी ऊपर रखा उसने कीर्ति ko...Jo बहुत लोग खुद को बड़ा दिखाने में अक्षर भूल जाते है.

दोनों अब्ब बिलकुल hi चुप एक साथ चल रहे thhe...Raaste में भी कीर्ति का नजर राश्ते में काम और सुमित पर ज्यादा tha...Sumit इन् बातों से बे खबर अपने में hi व्यस्त आगे चल रहा था.
 
अभी तो सिर्फ इतना hi कह सकता हूँ की कोशिश करूँगा थोड़ा जल्द अपडेट देने ki...Sure भी नहीं hun...Koshish करूँगा 3 दिन के गैप में अपडेट पोस्ट करू.

मेंटालिटी ये तो भूल hi गया tha...Picchle एग्जाम के वक्त कुछ टाइम के लिए पॉज मई रखा tha...Lekin फिर बाद में याद नहीं raha...Kabhi याद आता लेकिन अगले hi पल भूल जाता tha...Koshish करूँगा कल से रेगुलर उपदटेस पोस्ट करने की मेंटालिटी में.
 
अपडेट 29

आफ्टर ा वीक


यहाँ इस पार्क में? बात क्या है?

हैरानी में सुमित ने पूछा.

कीर्ति:- आपसे बात करना था.

आज कीर्ति की आवाज में कुछ बदलाव सा था.

सुमित:- वो तो घर पर भी कर सकते thhe...Aur मई 24 घंटे hi फ्री हूँ.

कीर्ति को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की अपने बात को आगे कैसे बढ़ाये.

सुमित:- और हमारे बिच ज्यादातर पढाई की hi बातें होता hai...Jitna हो सकता था उतना तो मैंने पढ़ा diya...Revision या फिर कोई कन्फूसिओं हो तो बताओ.

कीर्ति:- वो बात नहीं hai...Kuch पर्सनल बात.

सुमित भी सोच में पद जाता hai...Aaj तक दोनों में पर्सनल जैसी कुछ भी बात नहीं hua...Fir आज?

सुमित:- हाँ कहो.

कीर्ति:- वो वो...

कीर्ति बोल नहीं पा रही thi...Aur सुमित समझ नहीं पा रहा tha...Shayad इस बारे में वो कुछ समझना hi नहीं चाहता था अब्ब.

सुमित:- बताओ भी.

कीर्ति:- वो मुझे इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री और एलेक्ट्रोमग्नेटिस्म समझना है.

कीर्ति की ये बात सुन सुमित हैरानी से उससे घूरती है?

सुमित:- ये है तुम्हारी पर्सनल बात?

कीर्ति:- (यो हरसेल्फ़) सहित Kirti...Ye क्या कर दिया तूने.

फिर वो रोने जैसा शक्ल बना लेती है.

ये देख सुमित हसने लगता है.

सुमित:- मतलब ये था तुम्हारी पर्सनल baat...Khair, शाम में वापस आ कर पढ़ा दूंगा.

अच्छा bye...Match का वक्त हो चूका है.

इतना कह कर सुमित जाने laga...Aur कीर्ति वही कड़ी रह gayi...Khud को कोष्टी.

कितना अच्छा मौका था, सब बर्बाद कर दिया maine...Kyu बता नहीं पा रही हूँ मई अपना दिल का haal...Itna डरपोक तो नहीं हूँ.

ये सब सोच कर कीर्ति को रोना आ रहा था.

क्या वो मानेंगे? अगर मन कर दिया तो?

कुछ ऐसे hi सवाल कीर्ति का हिम्मत तोड़ रहा था.

अचानक कीर्ति को क्या हुआ की पीछे से चिल्ला कर बोलै.

ी लव यू सुमित. :लव:

ये बोलते हुए कीर्ति भी सुमित के पीछे भागी.

सुमित ने जैसे hi ये suna...Apne जगह पर hi रुक गया.

कीर्ति पीछे से जा कर सुमित को गला लगा लेती है.

कीर्ति:- ी लव you...Love यू ा लोट.

इस बार कीर्ति की आवाज में प्यार tha...Pyar hi प्यार.

कीर्ति:- यही है पर्सनल baat...Jo आप समझे hi नहीं.

लेकिन सुमित ने कुछ जवाब नहीं diya...Yaha तक की कोई हलचल भी नहीं.

कीर्ति:- आपने कोई जवाब नहीं दिया?

फिर धीरे से सुमित ने कीर्ति को खुद से अलग दिया और कीर्ति की तरफ मुदा.

शर्माते हुए कीर्ति पीछे से एक गुलाब का फूल सुमित की तरफ बढ़ाती hai...Lekin...

सुमित की चेहरा देख कीर्ति की साड़ी ख़ुशी एक hi पल में गायब हो जाता है.

सुमित बिलकुल hi एक्सप्रेशनलेस था.

कीर्ति:- क्या मई इसी को आप का जवाब मान लू?

दर्द भरी आवाज में कीर्ति ने पूछा.

सुमित ने बस चेहरे को हाँ में हिलाया.

कीर्ति के हाथ से फूल निचे गिर जाता है.

कीर्ति:- कोई गर्लफ्रेंड है आपकी?

कुछ देर की खामोशी को तोड़ कर कीर्ति ने pucha...Sumit कुछ जवाब देता उससे पहले hi.

कीर्ति:- होगी क्यों nahi...Itna डैशिंग, इतना स्मार्ट है aap...Koi भी आप पर फ़िदा हो सकती hai...Jaise mai...Shayad ये सवाल मुझे आपसे पहले hi पूछना चाहिए था.

सुमित:- Nahi...Nahi है कोई gf...Aur ना hi कभी होगी.

कीर्ति:- क्यों?

सुमित:- क्यों का क्या मतलब? कंपल्सरी है क्या प्यार hi karna...Jisko देखो सब फ़ालतू के रिलेशनशिप के पीछे पड़े है.

और tum...Tum डॉक्टर बनना चाहती हो naa...Jaake पढ़ाई karo...Kyu फ़ालतू के प्यार की चक्कर में पड़ी हो?

इस बार सुमित ने गुस्से में कहा.

कीर्ति:- अपने बारे में सोचना, डिसिशन लेना गलत है?

सुमित:- सही hai...Lekin हर चीज का वक्त होता है.

कीर्ति:- 18 साल की हो चुकी hun...Ye काफी नहीं है अपने प्यार और जिंदगी के बारे में सोचने के लिए? अगर जिंदगी का साथी आपको बनाना चाहती हूँ तो क्या ये गलत है?

सुमित:- 18...ये सिर्फ लीगल आगे है शादी के liye...Fir भी अर्ली आगे hi कहूंगा mai...Career के बारे में सोचो abhi...Baad में सही वक्त आने पर तुम्हे तुम्हारा सच्चा प्यार और जीवनसाथी भी मिल जाएगा.

कीर्ति:- शादी की बात नहीं कर रही थी mai...Pata है मुझे कब शादी करनी है और कब nahi...Mai बस प्यार के बारे में बात कर रही thi...Aap अच्छे लगे और मैंने अपने दिल की बात कह दिया.

सुमित:- अच्छा और क्या क्या कहता है तुम्हारा दिल मेरे बारे में?

कीर्ति:- यही की आप hi मेरे लिए सब कुछ है.

जब आप मुझसे बात करते है, मेरी तारीफ़ करते है तो बहुत अच्छा लगता hai...Dil करता है आपकी बातें सुनती rahu...Aap के साथ rahu...Aapse अपने दिल की हर एक बात शेयर करू.

याद है आपको वो पार्टी का din...Jab आपने आरव के उन् 2 दोस्तों को पिता tha...Bahut अच्छा लगा ये देख कर और ये जान कर की आपके साथ मई सेफ hun...Aur आपका वो पानी पूरी वाली बात पर रूत कर भी वापस aana...Aisa लगा जैसे आपके लिए आपका गुस्सा से भी मई जरुरी हूँ.

कुछ ऐसी hi बातें जो दिखता है आप कितने अच्छे है, कितना ऑनेस्ट है, आप अपने चाहने वालो का कितना केयर करते है.

इन्ही सभ बातों को देख कब आपसे प्यार हो गया कुछ पता hi नहीं चला.

अभी भी कीर्ति की आवाज में प्यार था और एक उम्मीद.

सुमित को भी अपना तारीफ़ अच्छा लग रहा था लेकिन.

सुमित:- लेकिन तुम्हारे दिल ने ये नहीं कहा ki...Agar मुझे गुस्सा आता है तो किसी का कुछ सुनता नहीं hun...Sirf अपनी मर्जी का करता hun...Aur ego...Ego तो इतना है की ईगो सटिस्फी जब तक नहीं होता छैन से नहीं बैठता.

मान लो हमारे बिच कभी लड़ाई भी हुआ तो हर बार माफ़ी माँगना तुम्हे hi padega...Aur जब ईगो सटिस्फी होगा तब hi माफ़ करूँगा.

हर इंसान की तरह सिर्फ अच्छा नहीं हूँ मई.

कीर्ति:- लेकिन जैसे भी है बहुत अच्छे है आप.

सुमित:- समझ में नहीं आता tumhe...Nahi है मुझे तुमसे pyar...Aur ना hi कभी hoga...Abb जाओ.

कीर्ति:- लेकिन.

सुमित:- बात नहीं समझ रही हो? मैंने जाने के लिए कहा तुम्हे.

सुमित ने और भी गुस्से भरी आवाज में कहा.

कीर्ति फिर वह से रोटी हुई चली गयी अपने टूटे हुए दिल के saath...Dil के अरमान सुमित की एक hi कड़वी बात ने तोड़ दिया.

कीर्ति के जाने के बाद सुमित ने खुद से कहा.

सुमित:- सॉरी Kirti...Itna बेरुखी से बात करना नहीं चाहता tha...Par ये जरुरी था.

मई इस हालत में नहीं हूँ की दोबारा प्यार के बारे में सोचु, और तुम ज्यादा hi जल्दबाज़ी कर रही ho...Ek अट्रैक्शन को प्यार समझ कर.

दो गलती मई पहले hi कर चूका हूँ और ये नहीं चाहता की तुम भी वही गलती करो.

सुमित खुद से hi बातें कर रहा था तभी उसके मोबाइल में किसी का कॉल आता है.

कॉल आशीष का था.

सुमित:- पहली बार इसका फ़ोन का टाइमिंग सही है.

इतना कह कर सुमित कॉल पिक कर लेता है.
 
अपडेट 30

कितनी बार मन किया है तुझे मेरे सामने सिगरेट मत पिया कर.

गुस्से में सुमित ने कहा.

आशीष सिगरेट बुझाने hi वाला था की सुमित ने फिर से कहा.

सुमित:- ला आज तरय कर के देख hi लेता हूँ.

हैरानी के साथ आशीष ने सिगरेट सुमित को दिया.

सुमित:- अबे तेरा जूठा पीने वाला दीखता hun...Dusra दे.

सुमित की हर बात से उसका गुस्सा झलक रहा tha...Ashish भी बस उससे सिर्फ नोटिस hi कर रहा था.

आशीष पॉकेट से दूसरा सिगरेट निकाल कर देता है.

सुमित कुछ देर सिगरेट को ऐसे hi पकडे हुआ tha...Saath में दिमाग में बहुत साड़ी बातें चल रहा था.

फिर ना जाने उससे क्या हुआ की उसने सिगरेट को तोड़ कर फेंक दिया.

आशीष:- अबे मेहेंगा वाला था वो. :माध:

फिर सुमित को सीरियस देख वो भी चुप हो जाता है.

आशीष:- कुछ बोलेगा भी या ऐसे hi सदा हुआ चेहरा दिखायेगा.

जब आशीष से रहा नहीं गया तो उसी ने बात की सुरुवात किया.

सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

आशीष:- तुझे इतना कन्फ्यूज्ड कभी नहीं देखा है maine...Kabhi सिगरेट मांगता है कभी फेंक देता hai...Sahi से डिसिशन नहीं ले पा रहा है.

सुमित:- और फ़्रस्ट्रेटेड भी.

इतना कह कर सुमित ने निचे एक पत्थर को किक किया.

सुमित:- कीर्ति ने मुझे प्रोपोज़ किया.

आशीष:- जब से प्लेबॉय बनने का डिसिशन लिया है तूने तू तो एकदम मालामाल हो gaya...Pehle श्रुतिओर Preeti...Aur अब्ब Kirti...Sahi जा रहा है.

आशीष ने हँसते हुए kaha...Lekin उसका ये हंसी सुमित का घूरता हुआ नजर देख रुक गया.

सुमित:- कीर्ति पर मेरा कोई गलत नजर नहीं है.

आशीष:- तो उससे प्यार करता है?

सुमित:- Nahi...Pyar भी नहीं.

आशीष:- तो फिर?

आशीष ने सर खुजाते हुए कहा.

फिर सुमित आशीष को उसका और कीर्ति का पूरी कहानी सुनाता है.

सब कुछ बताने के बाद दोनों एक दूसरे को देखते hai...Dono के चेहरे में कन्फूसिओं साफ़ झलक रहा tha...Sumit का अपना कन्फूसिओं था और आशीष सुमित का कन्फूसिओं क्या हो सकता है ये सोच कर कन्फ्यूज्ड था.

सुमित:- बहुत काम बार hi ऐसा हुआ है की मैंने जो फैसला लिया है उसके बारे में दुबारा से सोचना पड़ा हो.

अभी भी सोच रहा हूँ कीर्ति को ना कह कर सही किया या गलत.

आशीष:- शायद तू भी कीर्ति से प्यार करने लगा है.

सुमित:- पता नहीं.

आशीष:- पता नहीं का क्या मतलब? या तो प्यार हो जाता है या फिर nahi...Bich का जवाब का क्या मतलब?

सुमित:- वो मुझे भी अच्छी लगती hai...Usse बातें करना, टाइम स्पेंड karna...Jab भी वो पास में नहीं होती है तो उससे फिर से मिलने की इच्छा, उसके बारे में सोचते रहना बहुत अच्छा लगता है.

जब वो मेरे पास होती है तब अपना सारा परेशानी भूल जाता hun...Bahut काम लोगो में से है वो जिसके साथ मई दिल की हर बातें बता सकता हूँ.

उसकी बातें, अदाएं, चुलबुला पैन और हंसी मजाक सब कुछ अच्छा लगता है.

न जाने इतने जल्दी कैसे इतना करीब आ गए हम दोनों.

सुमित अपनी बातें कहते वक्त कही खो सा गया था.

आशीष:- अरे bewkuff...Ye hi तो प्यार है.

सुमित:- लेकिन ऐसा मुझे दो बार पहले भी महसूस हो चूका hai...Aur दोनों hi बार इससे प्यार समझ बैठा था.

आशीष:- तो क्या वो प्यार नहीं था? तू hi कहता था की तूने सच्चा प्यार किया था जिसमे तुझे धोखा मिला.

सुमित:- कहता tha...Lekin अब्ब नहीं.

ये कैसा प्यार जो ब्रेकअप के एक हफ्ता बाद याद hi ना rahe...Haan मैंने जब प्यार किया था तो मेरा दिल सच्चा tha...Lekin ब्रेकअप का dard...Ek हफ्ते से ज्यादा नहीं tika...Pehli गयी, दूसरी aayi...Dusri गयी और फिर कीर्ति.

इसी वजह से सोच में पद गया हूँ की ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन.

सुमित का कन्फूसिओं और भी बढ़ता जा रहा था.

सुमित:- आज मई सही फैसला नहीं कर पा रहा hun...Tu hi कुछ bata...Kya करू?

आशीष:- अभी तक सीरियस नहीं tha...Abb मुझे जो भी लगता है वो बता देता hun...Baaki तेरा मर्जी.

जैसा की तू मुझे जानता है की मई लवर काम प्लेबॉय ज्यादा hun...Vajah जानता है?

अंगूर खट्टा होता hai...Jise सच्चा प्यार मिला hi नहीं हो, देखा भी नहीं ho...Usse क्यों किसी से प्यार hoga...Jaha देखो धोखा और swaarth...Socha मई भी स्वार्थी बन jaau...Jaisa चल रहा है वैसा hi चलने दू.

अब्ब आता हु तुझ par....Jab पहले भी तुझे दो बार प्यार हुआ tha...Maine दोनों hi बार तुझे कहा था ये प्यार नहीं hai...Aasani से पता चल जाता है ये प्यार है या फिर अट्रैक्शन और स्वार्थ से भरा relationship...Lekin तू प्यार का andha...Naa कुछ देख पा रहा था और ना hi समझ.

रही बात कीर्ति का तो उससे मई जानता भी nahi...Teri बातो से ये नहीं कह सकता हूँ की वो तुझे सच में प्यार करती है या फिर attraction...Haan लेकिन वो तुझे धोखा नहीं degi...Itna विश्वाश है मुझे.

सुमित:- अगर सच्चा प्यार हो भी जाए तो ऐसे हालत में नहीं हूँ की दुबारा पीछे मुद कर dekhu...Pehle भी ठोकर खा चूका hun...Aage भी खाने का दर hai...Aur अगर प्यार दोनों तरफ से भी सच्चा हो फिर भी मंजिल ना मिले तो?

आशीष:- तू कबसे इतना डरने लग गया?

सुमित:- दर से ज्यादा थक गया hun...Ladte ladte...Pehle प्यार को pehchaano...Fir nibhaao...Aur आगे बढ़ते रहो.

आशीष:- तो क्या सोचा है तूने अब्ब?

सुमित:- अभी तो कुछ नहीं.

आशीष:- वक्त दे खुद ko...Pyar में वक्त की जरुरत होता hai...Pyar को समझने के liye...Vakt de...Vakt hi तुझे सही जवाब देगा.

सुमित बस सर को हां में हिलाता है.

कुछ देर वह बैठे रहने के बाद दोनों अपने घर चले जाते है.

रात में खाना खाने के बाद पढ़ाई के बहाना से कीर्ति सुमित को रोक लेती है.

सुमित:- हाँ bataao...Kya पढ़ना है?

कीर्ति:- ी लव यू.

कीर्ति ने मुस्कुराते हुए kaha...Aur सुमित हैरानी से कीर्ति को देलजता रह गया.

कीर्ति:- आपने तो मुझे पढ़ा diya...Abb मेरी baari...Abb मई पढूंग़ीब और आप padhenge...Pyar...Kaise करते है और कैसे निभाते है?

कीर्ति बिंदास बोल रही थी जैसे उससे दोपहर की घटना का कोई फर्क hi नहीं पड़ा.

सुमित:- मैंने दोपहर को मन कर दिया था ना?

कीर्ति:- आपने मन किया tha...Lekin मैंने हार नहीं माना है.

आप hi कहते थे न की कोई भी एग्जाम हो हाई कॉन्फिडेंस के साथ देना पड़ता है.

ये भी तो एग्जाम hai...Mere लाइफ ki...Isme कैसे टूट सकती हूँ एक असफलता (फेलियर) par...Abhi भी कॉन्फिडेंस के साथ कहती हूँ की आप मेरे hai...Sirf मेरे.

आप की भी कोई ख्वाहिश hogi...Aapki गफ ऐसी हो वैसी ho...Tooti हुई और रोने वाली तो बिलकुल भी नहीं hogi...Issi लिए खुद को संभाल लिया और लग गयी मिशन में आप को पटाने के लिए.

सुमित जानता था की कीर्ति दिल और दिमाग से स्ट्रांग hai...Lekin इतना ये उसने सोचा नहीं tha...Aaj एक अलग hi कीर्ति उससे देखने को मिला.

कीर्ति:- अभी आप jaaiye...Aaram kijiye.Abhi आप कन्फ्यूज्ड लग रहे hai...Kal शांत और खाली दिमाग के साथ आइये प्यार का पहला chapter पढ़ने.

सुमित कीर्ति को देखता hi रह gaya...Tabhi कीर्ति की आवाज फिर से आता है.

कीर्ति:- जाइये.

इस बार सुमित कीर्ति को मना नहीं कर paaya...Jaate वक्त वो यही सोच रहा था.

सुमित:- (इन हिज मंद) अजीब है ये लड़की.
 
अपडेट 31

तो क्या सोचा आपने?

रास्ते में चलते हुए कीर्ति ने पूछा.

सुमित:- सोचा तो बहुत कुछ hai...Shaam में क्रिकेट खेलना hai...Waapas आ कर पापा की दांत सुन्ना hai...Phir रात में खाना खाने के बाद मूवी देखते हुए सू जाना है.

कीर्ति:- मई मेरे बारे में पूछ रही हूँ.

गुस्सा का दिखावा करते हुए कीर्ति बोली.

सुमित:- मुझे क्या पता तुमने क्या सोचा है? मई स्ट्रैट फॉरवर्ड जरूर हूँ लेकिन मंद रीडर उतना अच्छा नहीं हूँ.

सुमित ने हँसते हुए kaha...Wo जानता था कीर्ति का रिएक्शन क्या होने वाला है.

कीर्ति:- स्ट्रैट फॉरवर्ड नहीं बुद्धू है aap...Kuch समझते hi नहीं?

कीर्ति इस बार सच में मुंह फुलाते हुए बोली.

सुमित:- तो तुम hi समझा दो.

कीर्ति:- मई पूछ रही थी की आपने मेरे बारे में क्या socha...Matlab मेरे प्यार के बारे में?

सुमित:- ये क्या प्यार प्यार लगा रखा hai...Pyar बच्चो की चीज थोड़ी ना है.

कीर्ति:- मई बच्ची नहीं hun...Aur आपका चेहरे का दाढ़ी मंच देख आप भी बच्चे नहीं लग रहे है.

सुमित ने कुछ पल कीर्ति को देखा और फिर चुप चाप आगे चलने लगा.

कीर्ति:- ऐसे इग्नोर करने से आप बच नहीं जाएंगे.

सुमित:- अच्छा बताता hun...Buraa तो नहीं मानोगी.

कीर्ति:- बुरा क्यों maanungi...Aap बताइये.

थोड़ा शर्माते हुए और बेसब्री के साथ कीर्ति boli...Sumit की मुंह से अपना तारीफ़ सुनने की शायद कुछ ज्यादा hi जल्दी था.

सुमित:- Tum...Bahut अच्छी ho...Acchi बातें करती ho...Sabke साथ हंसी ख़ुशी रहती ho...Padhaai लिखाई में भी काफी तेज ho...Dikhne में भी खूबसूरत हो.

थोड़े पढाई लिखाई करो और डॉक्टर वॉटर bano...Iss प्यार में क्या रखा है?

ये जवाब सुनते hi कीर्ति गुस्से का दिखावा करते हुए सुमित को मारने लगती है और सुमित बचने के लिए इधर उधर भागता रहता है.

सुमित:- तुमने ये बताया नहीं की हम कहा जा रहे है?

कीर्ति:- आपने भी तो मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.

इस जवाब पर सुमित ने एक नजर फिर कीर्ति को देखा और सोचने लगा.

सुमित:- (इन हिज मंद) काफी तेज है ये लड़की.

कीर्ति:- लेकिन आपकी तरह ज्यादा तड़पाने की आदत नहीं है mujhe...Ye रहा हमारा मंजिल.

कीर्ति ने ऊँगली दिखाते हुए कहा.

थोड़ी दूर पर एक मंदिर था.

सुमित:- ये तुम...

हैरानी में सुमित कुछ बोल भी नहीं पा रहा था.

कीर्ति:- ये मत कहना की आप नास्तिक है?

सुमित:- आस्तिक hi hun...Lekin हैरानी हो रहा है की तुम मुझे मंदिर क्यों लायी हो.

प्यार का एहसास दिलाने वाली थी naa...To सोचा कही पार्क ले चलती, किसी पब जो मई जाता nahi...Yaa फिर कोई रोमांटिक प्लेस.

कीर्ति:- दुसरो को कॉपी करने वाली सोचा है क्या? आप की तरह hi ूनप्रेडिक्टेबले hun...Dekhte जाइये कैसे आप को अपने प्यार का एहसास दिलाती हूँ.

कीर्ति ने एक आँख दबा कर kaha...Aur आगे बढ़ गयी.

सुमित:- वजह तो बताओ.

कीर्ति:- बाद में.

सुमित:- चलो ठीक hai...Intejaar कर लेते है.

वैसे भी बहुत दिनों बाद भोले नाथ की दर्शन होने वाला है.

दोनों मंदिर के अंदर चले जाते है.

सुमित आँखें बंद कर.

सुमित:- अभी तक लाइफ में किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुआ है और ना hi कोई ख़ास mushibat...Ye तो नहीं मांगूंगा की कभी मुशीबत आये hi naa...Agar आये भी तो इतना ताकत जरूर दीजिये की मुशीबत का सामना कर पाउ.

सुमित ने अपने मन में कहा और आँख खोल लिया. कीर्ति को देखा तो वो अभी भी हाथ जोड़े बंद आँखों में कुछ बड़बड़ा रही थी.

फिर सुमित वह से निकल कर गेट की तरफ गया.

बस वही खड़ा हो कर कीर्ति का इंतजार करने लगा.

कीर्ति को देखने में वो कब इतना खो गया की उसको ये एहसास भी तब हुआ जब किसी का ठोकर पीछे से laga...Ye एहसास होते hi सुमित सोच में पद गया की कही उसका कीर्ति के लिए अट्रैक्शन बढ़ तो नहीं gaya...Lekin अगले hi पल उसने ये सोच को झटक दिया.

सुमित चाहे कितना भी इंकार कर दे लेकिन वो खुद अपने एहसास से अनजान tha...Aaj घर से निकला भी तो ये सोच कर की वो अपने दोस्त के साथ बाहर घूमने जा रहा है जिसके साथ उससे बातें करना अच्छा लगता है, टाइम स्पेंड करना अच्छा लगता है.

लेकिन साथ में अपने दिल में आ रहे ख्याल को भी दबा रहा था की ये बस एक अट्रैक्शन है.

सुमित फिर कीर्ति को देखने laga...Koi जल्दबाज़ी भी नहीं था की कब कीर्ति का प्राथना ख़त्म ho...Wo तो बस उससे देखे जा रहा था.

जब कीर्ति का प्राथना ख़त्म हुआ और वो वापस आने लगी तभी अचानक से उसकी दो दोस्त उसके पास आ गयी.

कुछ देर तीनो एक दूसरे से बात करती rahi...Sumit को अब्जी भी कोई जल्दबाज़ी नहीं tha...Usse कीर्ति का हँसता हुआ ये चेहरा देखने में अच्छा लग रहा था.

फिर तीनो वापस आने lagi...Logon के भीड़ में दोनों ने सुमित को नोटिस hi नहीं kiya...Aur गेट के पास कीर्ति से विदा ले कर दोनों चली गयी.

सुमित:- कौन थी वो दोनों?

कीर्ति:- मेरी dost...Megha और Neha...Ek hi कॉलेज में पढ़ते है हम.

सुमित:- मुझे इंट्रोडस क्यों नहीं करवाया?

कीर्ति:- क्यों करवाओ? अभी आप मेरे हुए भी नहीं और आप चाहते है मई उन्हें आप से इंट्रोडस karwaau...Kahi उन् दोनों ने आप को पता लिया तो? मेघा तो ठीक hai...Mujhe नेहा पर कोई भरोषा नहीं है.

सुमित:- कुछ ज्यादा hi सोच रही हो.

कीर्ति:- तो आप ने खुद hi क्यों इंट्रोडस नहीं किया?

सुमित:- कुछ सेल्फ रेस्पेक्ट कुछ पर्सनालिटी है मेरा bhi...Kisi अनजान लोगो के सामने जा कर कहु.

Hello, ी ऍम Sumit...What अबाउट यू? कैन वे बे फ्रेंड्स?

कितना चीप लगेगा.

सुमित का एक्सप्रेशन डेल्ह कीर्ति भी हसने लगी.

कीर्ति:- आप उन् दोनों में इतना इंटरेस्ट क्यों ले रहे है?

सुमित:- नहीं तो.

हैरानी के साथ सुमित ने कहा.

कीर्ति:- हाँ ऐसे hi...Mere अलावा और किसी पर आप का इंटरेस्ट नहीं होना चाहिए?

कीर्ति ने हुकुम दिया.

सुमित:- मेरा तो तुम में भी इंटरेस्ट नहीं है.

कीर्ति:- बहुत मारूंगी.

कीर्ति ने आँख दिखाते हुए कहा तो सुमित ने भी डरने की एक्टिंग किया.

फिर दोनों साथ में वापस चलने लगे.

सुमित:- तुमने मंदिर में क्या प्रार्थना किया?

कीर्ति:- यही की आप के दिमाग में थोड़ा अकाल आये और दिल में प्यार भर आये.

जवाब में सुमित मुस्कुराया और फिर.

सुमित:- ये विश करने में इतना ज्यादा वक्त तो नहीं लगता.

कीर्ति:- और भी बहुत कुछ माँगा.

सुमित:- सुनने के लिए बहुत वक्त है मेरे paas...Aaram से सुनाओ.

कीर्ति:- जी बिलकुल nahi...Jis तरह से आप दिल में बहुत कुछ दबा कर बैठे है वैसे hi मई भी दिल की बातें दिल में दबाना सिख रही हूँ.

आपकी hi स्टूडेंट hun...Pehli मुलाक़ात भी एक टीचर और स्टूडेंट के रूप में हुआ था.

इतना कह कर कीर्ति आगे निकल गयी.

सुमित:- (इन हिज मंद) मेरे hi टक्कर की hai...Kabhi कभी मेरे पास hi शब्द काम पद जाते है जवाब के लिए.

सुमित भी फिर तेजी से कीर्ति के पास पहुँच गया.

कीर्ति:- एक बदलाव आप में मैंने ला hi दिया.

सुमित:- (हैरानी से) क्या?

कीर्ति:- जब से आप मेरे साथ है मोबाइल को एक बार भी हाथ नहीं lagaya...Warna हर बार कुछ न कुछ चलते रहते थे थोड़ी थोड़ी देर में.

अच्छा है की अब्ब आप मोबाइल से ज्यादा मुझे सुनते hai...Meri बातों को.

ये सुनते hi सुमित का हैरानी और बढ़ gaya...Kirti ने सच hi कहा tha...Ek बार भी सुमित ने आज मोबाइल को हाथ नहीं lagaya...Aur ना hi उससे इस पर कोई ध्यान रहा.

ना hi श्रुति और प्रीती याद रही और ना hi उनकी चाट.

क्या सच में उसके अंदर का प्लेबॉय पर लवर भरी पद रहा है?

यही सोच के साथ वो आगे बढ़ रहा था.

दोनों रास्ते में ऐसे hi आगे चल रहे थे की किसी का नजर दोनों पर पड़ता hai...Jo दोनों को गुस्से के साथ घर रहा था.
 
अपडेट 32

अगर कोई लड़की तुझे सच्चे दिल से प्यार करे तो तू भी टूट कर उससे प्यार kar...Aur अगर वो तुझे धोखा दे तो तू उसकी ....खैर छोड़.

ये सोच सुमित का नहीं बल्कि आशीष का था जो अभी उसने लिख कर सुमित को फब में मैसेज किया था.

ये देख सुमित थोड़ा मुस्कुराता है और फिर मोबाइल साइड में रखता है.

तभी एक और मैसेज का नोटिफिकेशन आता है.

अगर दिल और दिमाग के बिच लड़ाई हो तो उस वक्त दिल का sunna...Agar फैसला गलत भी हो जाए तो कोई शिकवा नहीं होगा की तूने ये क्यों किया? एक संतुष्टि मिलेगा की तूने अपने दिल की बात सुना.

ये मैसेज पढ़ कर.

सुमित:- (इन हिज मंद) ये नहीं सुधरेगा.

फिर वो भी मैसेज टाइप करता है.

सुमित:- अबे chu...Ye लवगुरु बनने की बुखार कब से लग गया तुझे.

आशीष:- जब से मेरे दोस्त को लवगुरु की जरुरत पड़ा.

सुमित:- तेरा मैसेज पढ़ कर तो लग रहा है की तू मुझे सिंगल से मिंगले करवा कर hi मानेगा.

आशीष:- जितना तुझे मई जानता hun...Tu भी मिंगले होना चाहता hai...Bas मान नहीं रहा है.

सुमित:- भाई बस kar...Abb साइकोलोजिस्ट मत बन.

आशीष:- लवगुरु hi ठीक हूँ.

सुमित:- अच्छा ठीक hai...Sochta हूँ तेरी बातों को.

आशीष:- ऐसे nahi...Pehle एक गिलास ठंडा पानी पी कर दिमाग को भी ठंडा kar...Aur फिर ठन्डे दिमाग से सोच.

सुमित:- भाग कमीने.

इतना लिख कर सुमित नेट ऑफ कर देता है और अपने सोच में खो जाता है.

ात डिनर टाइम.

सुमित आज और दिन के मुकाबले थोड़ा धीरे से खा रहा था.

स. डैड:- पहले तो पढाई लिखे में स्लो tha...Abb खाने में bhi...Accha है.

अपना खाना ख़त्म करने के बाद सुमित को घूरते हुए वो बोले.

स. माँ:- क्या आप भी? हमेशा मेरे सुमित के पीछे पड़े रहते है.

स. डैड:- हाँ तुम्हारा hi लाड प्यार ने बिगाड़ रखा hai...Jo इतना जिद्दी और घमंडी हो गया है.

सुमित अपने पापा की बात सुन कर सिर्फ मुस्कुरा रहा था.

स. डैड:- देखो अभी भी हंस रहा hai...Kabhi तो जिम्मेदार बनने की कोशिश कर.

सुमित अभी भी मुस्कुरा रहा था.

स. डैड:- ऐटिटूड तो देखो साहब ki...Ek शब्द नहीं निकल रहे है मुंह से.

सुमित:- जवाब दू तो प्रॉब्लम और ना दू तो और भी ज्यादा प्रॉब्लम.

सुमित का मुस्कुराना जारी था.

स. डैड:- तू खुद hi एक प्रॉब्लम है.

इतना कह कर सुमित के पापा वह से चले गए.

स. माँ:- उनकी बात का बुरा मत maan...Wo तो ऐसे hi...

सुमित:- Maa...Kabhi पापा से मई नाराज हो सकता हूँ क्या?

रश्मि:- भैया और आप तभी से क्यों मुश्कुरा रहे है?

सुमित:- पापा के बारे में सोच kar...Jarur आज किसी से कहासुनी हो गया hoga...Aur सारा गुस्सा मुझ पर निकल गया.

रश्मि:- मुझे लगा आप कीर्ति को देख मुश्कुरा रहे है.

ये सुनते hi सुमित और कीर्ति दोनों रश्मि को घूरते है.

स. माँ:- तू कुछ भी बक्ति रहती है.

रश्मि:- भैया आप दोनों के बिच कुछ चल रहा है क्या?

सुमित जो अभी पानी पी रहा tha...Ye सुनते hi जोर से उसने चीखा.

सुमित:- मेरा चॉइस इतना लौ कब से हो गया?

ये सुनते hi कीर्ति सुमित को गुस्से से घूरने लगती है.

रश्मि:- क्या मतलब?

सुमित:- तू मुझे वैसे भी हाफ मंद लगती hai...To तेरी दोस्त के बारे में ऐसे hi अंदाजा लगा सकता हूँ.

कीर्ति:- कुछ ज्यादा hi जजमेंटल नहीं हो रहे है आप?

सुमित:- कही से जलने की बू आ रहा है.

कीर्ति बस गुस्से से सुमित को घूरती hai...Sumit के माँ और बहिन की वह होने की वजह से कुछ बोल भी नहीं सकती थी.

सुमित:- वैसे रश्मि तेरे इस छोटे से दिमाग में ऐसे बकवास आईडिया आया कहा से?

किसी लड़की के प्यार में इतना ताकत नहीं है की मुझे पता सके.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) बाद में बताती hun...Kitna ताकत है मेरे प्यार में.

कीर्ति अभी भी सुमित को घर रही थी.

रश्मि:- कोई भी आप दोनों को देखेगा तो यही कहेगा.

सुमित:- है रे जालिम दुनिया!! क्या ज़माना आ गया hai...Ek लड़का और लड़की की दोस्ती और साथ घूमने और बात करने पर क्या इल्जाम लग रहे है...

सुमित इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

रश्मि:- भैया कुछ ज्यादा hi ओवरएक्टिंग कर रहे है आप.

फिर सुमित मुंह लटकाने का दिखावा करता hai...Iss पर सभी हँसते है.

सुमित:- Accha...Carry on...Mai जा रहा हूँ.

इतना कह कर सुमित जाने लगा तभी पीछे से उसकी माँ का आवाज आया.

स. माँ:- कभी कभी पढ़ाई भी कर लिया कर.

पीछे मुद कर सुमित अपना फोनो हाथ जोड़ कर कहता है.

सुमित:- पापा चले gaye...Abb आप सुरु मत हो जाइये.

फिर सुमित वह से चला जाता है.

रूम में कुछ देर बिखरा हुआ सामान के साथ एक्सपेरिमेंट करने के बाद सुमित को प्यास लगता hai...Bottle खाली था.

जब वो पानी के लिए निचे किचन में गया तो वह पर अभी भी उसकी माँ और कीर्ति थे.

दोनों काम करते हुए अपने बातों में hi लगी हुई thhi...Sumit की तरफ उनका ध्यान नहीं था.

स. माँ:- कह रही हूँ na...Mai कर lungi...Tu क्यों परेशान हो रही है?

कीर्ति:- करने दीजिये ना aunty...Accha लग रहा है.

स. माँ:- अभी पढाई लिखे का वक्त hai...Kaha तू ये सब चीजों में पड़ी hai...Jaa जा कर पढाई कर.

कीर्ति:- पढ़ाई लिखे तो होती rahegi...Ye सब सीखना भी तो जरुरी है.

फिर सुमित की माँ कीर्ति को प्यार से सिखाने लगती hai...Aur कीर्ति भी अच्छे से सिख रही थी.

दोनों की बातें सुन कर सुमित सोच रहा था.

सुमित:- (इन हिज मंद) कितनी जल्द किसी के साथ भी घुल मिल जाती है Kirti...Aisa लग रहा है जान पहचान कुछ दिनों की नहीं बल्कि कई सालों की hai...Sahi है.

कीर्ति:- Aunty...Pehli बार आयी हूँ yaha...Lekin ऐसा लग रहा है जैसे मई भी इस घर का हिस्सा hun...Bahut अच्छा लग रहा है आप सभी के साथ.

स. माँ:- हमे भी बहुत अच्छा लग रहा hai...Tere होने से घाट में चहल पहल बना रहता hai...Vaad में भी आती रहना.

कीर्ति:- जरूर aunty...Abb तो वजह भी मिल गया है आने की.

कीर्ति ने ये बात खुद से hi कहा लेकिन पीछे खड़ा सुमित भी इस बात का मतलब अच्छे से समझ रहा था.

सुमित:- (इन हिज मंद) कुछ भी कर सकती है ये लड़की.

सुमित:- कुछ ज्यादा hi मस्का लगाया जा रहा है.

कीर्ति:- जी nahi...Dil से कही हुई बिलकुल सच्ची बात hai...Lekin जिस इंसान के पास दिल ना हो वो क्या समझे.

सुमित:- दिल तो hai...Lekin उस दिल का काम खून को शरीर की हर एक अंग तक पहुंचाने का hai...Naa की फ़ालतू की बातों पर इमोशनल होना.

फिर सुमित पानी भर कर वह से चला गया.

कीर्ति:- कितना बद्तमीज़ है न ये?

स. माँ:- (विथ स्माइल) नहीं बद्तमीज़ तो नहीं लेकिन जो दिल में आये वो बोल देता hai...Kuch वक्त के बाद खुद समझ जाओगी.

सुमित की माँ ने ये कह तो दिया लेकिन वो खुद भी इस बात से अनजान थी की कीर्ति सुमित को कुवह ज्यादा hi समझ चुकी है.

सुमित अपने रूम में पहुँच कर लग गया अपने मिशन par...Mission प्लेबॉय.

कुछ देर श्रुति और प्रीती से चाट करने के बाद उससे बोरिंग सा लगने laga...Mobile को साइड में रख कर वो सोने की कोशिश करने लगा.

लेकिन नींद इतनी जल्दी आता कैसे? धीरे धीरे उसके दिमाग में कीर्ति और उसकी बातें आने lagi...Kirti की बातें सोच वो मुस्कुरा रहा tha...Abb कीर्ति में उससे कुछ अलग नजर आने लगा था.

बाकी लड़कियों से alag...Bahut hi special...Pyaar में पड़े हुए लड़के के दिल में जो फीलिंग अपने प्यार के लिए आता है वही फीलिंग सुमित को भी आने लगा था.

अपना मोबाइल उठा कर वो मसाज करने लगता है.

Hello.

फिर उससे कैंसिल कर के लिखता है.

क्या कर रही हो?

ये भी उससे पसंद नहीं aaya...Isse भी कैंसिल कर के.

कैन वे टॉक?

सेंड करने से पहले इससे भी कैंसिल कर के वो कुछ लिखता है और सेंड कर देता है.

ये मसाज था!!

ी होप तुम्हारे सभी कॉन्सेप्ट्स क्लियर hai...Agar कोई कन्फूसिओं है तो कल पूछ लेना.

मसाज सेंड होते hi सुमित ने खुद के सर पर मारा.

सुमित:- (इन हिज मंद) ये मुझे हो क्या रहा hai...Aur ये बेवकुफो जैसे मैसेज कर दिया.

तभी कीर्ति का मैसेज आता hai...Ussi की तरह खतरनाक.

कीर्ति:- हाँ कॉन्सेप्ट्स तो क्लियर hai...Mai आप से बहुत प्यार करती हूँ और आप bhi...Confusion बस ये है की आप कब मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट करेंगे. :डी
 
थैंक्स बिंदास भाई फॉर योर सपोर्ट एंड comment...Ye कन्फूसिओं मेरा भी है की कब मई रेगुलर उपदटेस दूंगा :D...Kab लोखड़ौन ख़त्म होगा और कब एग्जाम होगा यही सोच कर दिमाग ख़राब होता जा रहा hai...Exam के लिए पढ़ रहा हूँ और भूलता भी जा रहा hun...Kuch यही वजह है मूड ख़राब होने का.

और रही स्टोरी की बात तो फ्लैशबैक को जल्द से जल्द ख़त्म करना चाहता hun...Ek फ्लो में जल्द से फ्लैशबैक करने के लिए सोचना भी बहुत पद रहा है.

कुछ यही वजह है टाइम इतना होने के बावजूद भी स्टोरी के लिए टाइम नहीं hai...Khair कोशिश करूँगा 2,3 डेज के गैप में अपडेट पोस्ट करने ki...Saath बने रहिये.
 
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