अपडेट 41
Utro...Naashta का टाइम हो गया.
कार एक होटल के सामने रुका tha...Sumit के अलावा सभी उतर चुके thhe...Lekin सुमित जो अपने hi दुनिया में खोया हुआ था उसको इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.
सुना नहीं तुमने?
एक बार फिर गुस्से से कीर्ति ने पूछा.
आवाज थोड़ा तेज था तो सुमित का ध्यान भी टूट गया.
सुमित:- हाँ बोलो.
मुश्कुराते हुए सुमित ने पूछा.
कीर्ति:- नाश्ता करना है या नहीं?
छिड़ते हुए कीर्ति ने एक बार फिर पूछा.
सुमित:- तुम्हारे साथ hun...Issi एहसास से पेट भर गया.
कीर्ति:- बकवास बंद karo...Aage गाडी नहीं rukegi...Fir बाद में मत कहना की भूख लगा है.
सुमित:- गाडी में तुम भी तो ho...Jab जब भूख लगेगा तब तब तुम्हे देख lunga...Bhookh मिट जाएगा.
सुमित की आवाज में प्यार hi प्यार tha...Ye सुन कीर्ति और भी छिड़ गयी.
कीर्ति:- तुमसे बातें करना hi बेकार है.
कीर्ति वह से चली gayi...Megha और विवेक के साथ.
सुमित कार के विंडो से प्यार से कीर्ति को जाते हुए देखने लगा.
सुमित:- न जाने कितनी रातें तुम्हारी यादों में भूखा बिताया hai...Aaj क्यों ना तुम्हारे साथ होने की ख़ुशी में भूखा राहु. :डी
कुछ ऐसे hi ख्यालों के साथ सुमित अपने प्यार की दुनिया में फिर से खो गया.
अचानक hi एक ख्याल के साथ सुमित का ध्यान टुटा.
वो जल्द अपने जगह से उठ कर कार के बैक सीट पर बैठ gaya...Aur इंतजार करने लगा कीर्ति की वापस आने ka...Aur एक रोमांटिक ट्रिप का.
होटल से वापस आने के बाद जैसे hi कीर्ति ने कार का गेट खोला सुमित को देख फिर से आग बबूला हो गयी. :माध:
गुस्से में कुछ बोल भी नहीं पा रही thi...Megha को कुछ इशारा कर वो फ्रंट सीट में बैठ गयी.
मेघा फिर सुमित के पास बैठ gayi...Baithte वक्त वो भी सुमित को एक नजर गुस्से से देखती है.
सुमित:- अरे yaar...Tumhare साथ तो क्लास में कई बार बैठ चूका हूँ? अब्ब तो कीर्ति को मौका दो?
लेकिन मेघा कुछ जवाब नहीं देती.
सुमित:- कोई बात nahi...Kirti तो मेरे पास जिंदगी भर rahegi...Mere हमसफ़र बन kar...Kuch पल hi सही तुम भी बैठ jaao...Shayad कोई यादगार लम्हा बन जाए.
सुमित ने हँसते हुए kaha...Lekin ये बात काफी था दोनों का गुस्सा और भड़काने ka...Lekin दोनों hi चुप rahi...Shayad इस वेकेशन का मूड अभी से खराब नहीं करना चाहती थी.
कार कुछ दूर आगे गया hi था की.
सुमित:- ऐ विचित्र Praani...Ye विचित्र प्राणी थोड़ा लम्बा शब्द हो gaya...VP शार्ट form...Haan ये ठीक रहेगा.
हाँ तो मर. VP...Ye क्या बैल गाडी चला रहा है? साइकिल वाला फीलिंग आ रहा है :सिघ:
विवेक:- एक तो सुबह से ड्राइव कर रहा hun...Upar से इतनी दूर का डेस्टिनेशन रखा hai...Wo तो शुक्र मन की अभी भी चला पा रहा हूँ इतने थकान के बावजूद.
सुमित:- थोड़ा ग्लूकोस वगेरा पीया kar...Taakat milega...Wo भी इंस्टेंट वाला.
विवेक:- ये जो तू इतना भौंक रहा hai...Khud hi क्यों ड्राइव नहीं करता?
सुमित:- मई तो कर लूंगा drive...Lekin फार्मूला रेस की स्पीड रेसर और बाहर बैठे दर्शक को hi मजा आता है.
मेघा:- Nahi...Koi जरुरत नहीं है इसका.
सुमित के बात ख़त्म होते hi मेघा बोल उठी.
सुमित भी मेघा के साथ उस रात का बाइक वाला सफर याद करके मुस्कुराया.
सुमित:- अरे yaar...Kitna बोरिंग ट्रिप चल रहा hai...Thoda म्यूजिक हो जाए.
चलो Kirti...Tumse शुरुवात करते है.
लेकिन कीर्ति ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.
सुमित:- अच्छा ठीक hai...Mai hi शुरुवात करता हूँ.
मैं तनु समझावण की
न तेरे बिना लगदा जी
मैं तनु समझावण की
न तेरे बिना लगदा जी
तू की जाने प्यार मेरा
मैं करून इंतज़ार तेरा
तू दिल, तुण्हीऊँ जान मेरी
सुमित ने पुरे फील के साथ सुर मिला कर गाना सुरु hi किया था की कीर्ति की हरकत ने मानो उसका दिल एक बार फिर से तोड़ दिया.
जहा सुमित कीर्ति को अपने दिल की बात गांव के जरिये से बताना चाहता था वही कीर्ति उसकी गाना को अवॉयड करने के लिए ईरफ़ोन मोबाइल में कनेक्ट कर के अपने कानो में लगा लेती है.
सुमित:- (इन हिज मंद) क्या इतना hi इज़्ज़त रह गया है मेरा?
सुमित ने अपना गाना बंद कर दिया और खिड़की से बाहर देखने लगा.
सुमित:- (इन हिज मंद) नहीं आज वो नाराज hai...Aaj मई मनाऊंगा तो hi कल वो भी मुझे मनाएगी जब मई नाराज hounga...Pyar में रूठना मनाना तो चलता रहता है.
ये सोचते hi सुमित के होंठो पर फिर से मुस्कान छा गया.
सुमित:- (इन हिज मंद) जानता हूँ तुम्हारी naraajgi...Abhi तो तुम्हे और इर्रिटेट करना hai...Tumhare अंदर का गुस्सा और नाराजगी को जड़ से मिटाना hai...Waapas से तुम्हे अपना बनाना है.
ये सोचते हुए सुमित का आत्मा विश्वाश फिर से बढ़ gaya...Aur फिर वो फिर से कीर्ति को प्यार भरी नजरो से निहारने लगा.
यह सब मेघा के सामने hi हो रहा tha...Chaah कर भी वो सुमित को अवॉयड नहीं कर पा रही थी.
फिर ऐसे hi ये ट्रिप भी ख़त्म हो gaya...Shaam में वो सभी अपने डेस्टिनेशन पहुँच गए.
यह एक पहाड़ी इलाका tha...Kuch बड़े बड़े पहाड़, कुछ बड़े और हरे पेड़ से बहती ठंडी hawaayein...Aur आसमान में नीला baadal...Dhalte शाम में वो इतना hi जान पाए इस इलाका के बारे में.
सभी को इंतजार था तो कल ka...Wo भी बेसब्री से.
फिर सभी होटल के अंदर गए और सुमित काउंटर से 2 चाभी ले कर आता hai...Ek कीर्ति को दे कर.
सुमित:- सोचा था हम 3 hi होंगे टूर mein...Issi लिए 2 रूम बुक करवाया tha...Ek में मई और कीर्ति और दूसरे में मेघा.
सुमित ने मुस्कुराते हुए kaha...Kirti तो चुप thi...Lekin उसकी आँखें बहुत कुछ कह रही थी.
सुमित:- ओह्ह sorry...Ek में मई अकेला और दूसरे में तुम दोनों.
फिर सभी अपने अपने रूम की तरफ जाने lage...Vivek को सुमित के साथ रूम शेयर करना अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन वो फिर भी चुप चाप चलता रहा.
रूम में पहुँच कर अपना लगेज रखने के बाद सुमित रूम से निकल कर बहार चला गया.
आशीष:- व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज? फ़ोन वो भी तूने किया आज?
सुमित:- Haan...Aaj बहुत hi ज्यादा खुश hun...To सोचा तुझे फ़ोन कर lun...Waise भी तू सिर्फ ख़ुशी के वक्त के hi तो दोस्त है.
आशीष:- कुछ ज्यादा नहीं बोल रहा है?
सुमित:- अभी बोलै hi कहा hun...Bolne तो दे.
आशीष:- हाँ haan...Tera ख़ुशी तेरी बातों से hi जलक रहा है? लगता है मेघा पैट गयी है.
सुमित का रिएक्शन पहले hi सोच आशीष हसने लगता है.
सुमित:- फिर चुतियापा? :माध:
आशीष:- अच्छा अच्छा bataa...Kirti के साथ कितना आगे बढ़ा बात?
सुमित:- आज उसको इतने वक्त के बाद देखा यार वो भी इतने देर के liye...Bahut प्यार आ रहा है यार उस par...Aatma विश्वाश भी बढ़ गया है की इस बार उससे अपना बना कर hi रहूँगा.
एक्ससिटेमेंट में सुमित ने कहा.
आशीष:- सिर्फ dekha...Aur इतना खुश हो रहा है.
सुमित:- अबे पेसिमिस्टिक जनताओं के सरदार :माध: यह तो शुरुआत hai...Bahut अच्छा suruwaat...Dekhte जा इस शुरुवात को मई कितना आगे तक ले कर जाता हूँ.
आशीष:- भरोषा है यार तुझ par...Bhulna mat...Free की पार्टी पेंडिंग है.
सुमित:- अब्ब किया तूने समझदारी वाली बात.
आशीष:- वैसे Sumit...Ek कन्फूसिओं hai...Tere घर वालों को भी पता होगा इस 4 वीक के वेकेशन के बारे mein...Fir तू कैसे इस वेकेशन पर जा पाया?
सुमित:- स्टडी.
आशीष:- मालाब?
स्टडी:- ये पेरेंट्स के लिए एक्सपेक्टेशन है तो बच्चों के लिए हथियार.
आशीष:- अबे साफ़ साफ़ बता.
सुमित:- पापा को फोर में कहा की बायोकेमिस्ट्री की लाइव क्लास लेने जा रहा hun...Pehle तो उन्हें शक हुआ की मई इतना पढ़ाकू कैसे बन गया hun...Lekin फिर वो मान gaye...Bahut खुश thhe...Maa को भी समझा दिया.
और साथ hi 20,000 रस भी दाल दिया उन्होंने मेरे अकाउंट mein...Aur बाकी के कुछ पैसे सीनियर्स और दोस्तों se...Vacation का खर्चा पानी निकल जाएगा.
आशीष:- गलत नहीं कर रहा है तू?
सुमित:- (सीरियस हो कर) गलत तो कर रहा हूँ लेकिन मज़बूरी hai...Ek आखिरी कोशिश hi तो hai...Uske बाद खुद के साथ साथ कीर्ति और घर वालों के लिए भी जिम्मेदार बन जाऊँगा.
आशीष:- कोई बात nahi...Tu टूर को एन्जॉय kar...Aur हाँ भूलना मत फ्री की पार्टी खाये बहुत दिन हो गए मुझे?
आशीष ने सुमित को सीरियस होता देख बात को संभाल लिया.
सुमित:- टूर से आते hi मिल जाएगा तुझे पार्टी.
दूसरी तरफ
कीर्ति:- मुझे भी अब्ब लगता है तूने सही kiya...Kuch ज्यादा hi उड़द रहा है? ऐसे पंख काटूंगी उस सुमित का इस टूर में की वो फिर से कभी उड़द नहीं पायेगा.
मेघा कुछ नहीं boli...Wo अभी भी अपने सोच में गुम्म थी.
कीर्ति:- क्या सोच रही है?
मेघा:- यही की कितना गलत है Sumit...Nafrat हो गया है उससे अब्ब तो.
कीर्ति:- 2 सालो से जानती hun...Kitna बड़ा धोखेबाज़ है वो ये मुझसे अच्छा कोई नहीं jaanta...Tu दूर hi रह उससे.
उससे ऐसे सबक सिखाऊंगी की वो तुझे भी कभी परेशान नहीं करेगा.
नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.